कांग्रेस का क्या है रिएक्शन
हिजाब विवाद को लेकर क्या कहा था

कांग्रेस का क्या है रिएक्शन

इस संदर्भ में 20-21 दिसंबर को राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में एक अहम तकनीकी बैठक का आयोजन किया गया। यह बैठक WHO और आयुष मंत्रालय के बीच 24 मई 2025 को हुए ऐतिहासिक समझौता ज्ञापन एमओयू के अंतर्गत आयोजित की गई थी। बैठक का मुख्य उद्देश्य पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों को वैश्विक स्वास्थ्य मानकों से जोड़ने के लिए एक समान कोडिंग प्रणाली का विकास करना था जिससे उपचार की प्रभावशीलता को समझने शोध और नीति निर्माण में मदद मिल सके।
प्रधानमंत्री मोदी का विजन और वैश्विक पहचान
वैश्विक स्तर पर पारंपरिक चिकित्सा को एकीकृत करना
भारत की प्रमुख भूमिका
WHO के वैश्विक प्रयास
पारंपरिक चिकित्सा के लिए समर्पित मॉड्यूल
प्रधानमंत्री मोदी का विजन और वैश्विक पहचान
बैठक में वैश्विक प्रतिनिधित्व
वैश्विक स्तर पर पारंपरिक चिकित्सा को एकीकृत करना
पारंपरिक चिकित्सा के लिए समर्पित मॉड्यूल


सूरत फैमिली कोर्ट की जज एसवी मंसूरी ने आदेश दिया कि 8 फरवरी 2026 को मुंबई में होने वाले दीक्षा समारोह पर फिलहाल रोक रहेगी। याचिकाकर्ता पिता के वकील समाप्ति मेहता ने बताया कि अदालत ने अंतरिम रोक लगाने की मांग मान ली है। अदालत ने मां से लिखित में जवाब मांगा है जिसमें उन्हें स्पष्ट करना होगा कि वह बच्ची को दीक्षा समारोह में शामिल नहीं होने देंगी। अगली सुनवाई 2 जनवरी को होगी।
सुनवाई के दौरान यह जानकारी सामने आई कि मां ने यह विवाद लगभग एक साल पहले उत्पन्न होने के बाद पति का घर छोड़ दिया था। महिला अपने माता-पिता के साथ रहने लगी साथ ही उसने अपनी बेटी और बेटे को भी साथ रखा। पिता ने 10 दिसंबर को कोर्ट में याचिका दायर की जिसमें उन्होंने कहा कि उनकी पत्नी उनकी मर्जी के खिलाफ बच्ची को साध्वी बनाने का निर्णय ले रही है।
पिता ने अदालत को बताया कि उन्होंने 2012 में शादी की थी और उनके दो बच्चे हैं। 2024 से पति-पत्नी अलग रह रहे हैं। पिता ने याचिका में कहा कि बच्ची के साध्वी बनने के मुद्दे पर दोनों ने पहले सहमति बनाई थी कि जब बच्ची बालिग हो जाएगी तभी वह साध्वी बनने का निर्णय लेगी। इसके बावजूद पत्नी चाहती थी कि बच्ची फरवरी 2026 में मुंबई में बड़े समारोह में साध्वी बने।
पिता ने अपने बयान में यह भी कहा कि उनकी पत्नी केवल तभी घर वापस आएगी जब वह बच्ची की दीक्षा के लिए रजामंद होगी। पिता ने अदालत से यह भी कहा कि वह गार्जियंस एंड वार्ड्स एक्ट 1890 के तहत बच्ची के हितों की रक्षा के लिए उसका कानूनी अभिभावक बनाना चाहते हैं।
अदालत ने पिता की याचिका पर मां को नोटिस जारी किया और 22 दिसंबर तक जवाब मांगा। जज मंसूरी ने स्पष्ट किया कि बच्ची की उम्र देखते हुए और उसके भविष्य के हित को ध्यान में रखते हुए दीक्षा पर रोक आवश्यक है। अदालत का यह निर्णय बच्चों के अधिकारों और उनकी इच्छाओं का सम्मान करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
जैन समुदाय में दीक्षा एक धार्मिक प्रक्रिया है लेकिन इस मामले ने दिखाया कि कम उम्र के बच्चों को ऐसे बड़े निर्णय लेने के लिए मजबूर करना कानूनी और सामाजिक दृष्टि से विवादास्पद हो सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी धार्मिक अनुष्ठान में बच्चों की भागीदारी तभी होनी चाहिए जब वे पूरी तरह से अपनी मर्जी से निर्णय ले सकें।
अदालत का यह निर्णय न केवल इस परिवार के लिए बल्कि समाज के लिए भी एक संदेश है कि बच्चों के अधिकारों और उनकी सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए। फिलहाल बच्ची को साध्वी बनने की प्रक्रिया से रोक दिया गया है और मां से हलफनामा लेने के बाद ही आगे की कार्रवाई होगी। अगली सुनवाई 2 जनवरी 2026 को होगी जिसमें अदालत पूरी स्थिति की समीक्षा करेगी।

पीडीए के जवाब में यूपी डीपीए की लड़ाई!

भारत टैक्सी क्या है?
भारत टैक्सी किसकी पहल है?
भारत टैक्सी कैसे काम करती है?

सौरभ भारद्वाज के स्वास्थ्य मंत्री कार्यकाल पर सवाल
गंभीरता से काम लें आप नेता
बीजेपी अध्यक्ष ने कहा कि यह खेदपूर्ण है कि जब अरविंद केजरीवाल और सौरभ भारद्वाज सत्ता में थेतब उन्होंने प्रदूषण के कारकों को गंभीरता से नहीं संभाला अब विपक्ष में आने के बाद वही नेता हास्यास्पद बयान देकर अपनी जिम्मेदारी से बचने की कोशिश कर रहे हैं वीरेन्द्र सचदेवा ने कहा कि सत्ता में रहते काम न करके और अब प्रदूषण पर मजाकिया बयान देकर दोनों नेता जनता के बीच अपनी छवि खो रहे हैं । उन्होंने सलाह दी कि बेहतर होगा दोनों नेता गंभीरता से काम लें और प्रदूषण पर हास्य व्यंग्य की नौटंकी करने के बजाय दिल्लीवासियों और सरकार को प्रदूषण की रोकथाम के लिए ठोस कदम उठाने दें ।