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  • RTO ई-चालान बनकर आया साइबर ठगों का जाल: युवक के खाते से उड़ाए 2.12 लाख, मोबाइल हुआ हैंग

    RTO ई-चालान बनकर आया साइबर ठगों का जाल: युवक के खाते से उड़ाए 2.12 लाख, मोबाइल हुआ हैंग


    नई दिल्ली। ग्वालियर के थाटीपुर क्षेत्र में 27 फरवरी को हुई साइबर ठगी ने लोगों की सुरक्षा पर सवाल खड़ा कर दिया। निजी कंपनी में कर्मचारी शशांक गुप्ता को वॉट्सऐप पर एक अनजान नंबर से ‘RTO ई-चालान कॉपी’ नाम की APK फाइल भेजी गई। शशांक ने फाइल खोलते ही मोबाइल हैंग हो गया, और कुछ ही समय बाद उनके बैंक खाते से कुल 2.12 लाख रुपए गायब हो गए।

    घटना का क्रम
    शशांक ने फाइल खोलते ही मोबाइल लगभग 7-8 मिनट तक हैंग हो गया।

    एक घंटे बाद मोबाइल पर संदेश आया कि कैश निकासी हुई-89 हजार, 60 हजार और 63 हजार रुपए ट्रांसफर।

    शशांक तुरंत बैंक पहुंचे, जहां उन्हें पता चला कि उनके खाते से रकम साइबर ठगी के माध्यम से निकाली गई।

    पहले थाने में शिकायत का समाधान नहीं हुआ, लेकिन साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज कराई। इसके बाद थाटीपुर थाना ने ई-जीरो FIR दर्ज की।

    पुलिस की जांच और चेतावनी
    थाटीपुर थाना पुलिस और साइबर विशेषज्ञों ने बताया कि ठगों ने APK फाइल में मैलवेयर इंस्टॉल किया। इसके जरिए बैंक खातों से रकम चुराई गई।
    पुलिस ने आम जनता से चेतावनी दी कि:

    वॉट्सऐप या SMS में आने वाली APK फाइल न खोलें।

    RTO चालान की जानकारी केवल सरकारी वेबसाइट या अधिकृत ऐप से ही जांचें।

    सीख और सुरक्षा
    यह घटना एक बार फिर याद दिलाती है कि साइबर ठगी के लिए झूठे ई-चालान और फाइलें कितनी खतरनाक हो सकती हैं। सावधानी और अधिकारिक चैनल का इस्तेमाल ही सुरक्षा की कुंजी है।

  • मिडिल ईस्ट वॉर का खौफनाक असर: ओमान में दो जहाजों पर हमला, 3 भारतीय क्रू मेंबर्स की जान गई; तेल की कीमतों में लगी आग

    मिडिल ईस्ट वॉर का खौफनाक असर: ओमान में दो जहाजों पर हमला, 3 भारतीय क्रू मेंबर्स की जान गई; तेल की कीमतों में लगी आग


    नई दिल्ली :पश्चिम एशिया में जारी भीषण संघर्ष अब समुद्री व्यापारिक मार्गों के लिए काल बनता जा रहा है। इजरायल-अमेरिका के हमलों और ईरान के सुप्रीम लीडर अली खामेनेई की मृत्यु के बाद प्रतिशोध की आग में जल रहे ईरान ने ओमान की समुद्री सीमा में व्यापारिक जहाजों को निशाना बनाया है। इस दुखद घटना में कम से कम तीन भारतीय नागरिकों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि 20 से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल बताए जा रहे हैं। ओमान स्थित भारतीय दूतावास ने इस त्रासदी की पुष्टि करते हुए बताया कि ‘एमकेडी व्योम’ MKD VYOM नामक जहाज पर सवार तीन भारतीयों ने अपनी जान गंवा दी है। दूतावास अब ओमान प्रशासन के साथ मिलकर फंसे हुए अन्य भारतीयों को सुरक्षित निकालने के अभियान में जुटा है।

    जानकारी के मुताबिक, ‘एमकेडी व्योम’ पर मार्शल आइलैंड्स का झंडा लगा था और यह मस्कट तट से लगभग 52 नॉटिकल माइल्स की दूरी पर था, जब इस पर हमला हुआ। टक्कर के बाद जहाज के मुख्य इंजन कक्ष में जोरदार विस्फोट हुआ, जिससे भीषण आग लग गई। ओमान न्यूज एजेंसी के अनुसार, समुद्री सुरक्षा केंद्र के समन्वय से चलाए गए बचाव अभियान में पनामा के टैंकर ‘एमवी सैंड’ की मदद से चालक दल के 21 सदस्यों को सुरक्षित बचा लिया गया है। इन बचाए गए सदस्यों में 16 भारतीय, चार बांग्लादेशी और एक यूक्रेनी नागरिक शामिल हैं। वर्तमान में ओमान की ‘रॉयल नेवी’ का पोत क्षतिग्रस्त टैंकर की निगरानी कर रहा है ताकि उस क्षेत्र से गुजरने वाले अन्य जहाजों को किसी भी संभावित खतरे से बचाया जा सके।

    यह हमला पिछले दो दिनों में हुई दूसरी बड़ी घटना है। इससे पहले होर्मुज जलडमरूमध्य में ‘एमवी स्काईलाइट’ नामक तेल टैंकर को भी निशाना बनाया गया था, जिसमें भारत और ईरान के चार चालक सदस्य घायल हुए थे। भारतीय मिशन वर्तमान में उन दो सदस्यों की तलाश के लिए स्थानीय अधिकारियों के संपर्क में है जो इस हमले के बाद से लापता हैं, जिनमें से एक भारतीय बताया जा रहा है। समंदर में बढ़ते इस खतरे का सीधा असर अब वैश्विक अर्थव्यवस्था पर दिखने लगा है। होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे महत्वपूर्ण मार्ग के प्रभावित होने से कच्चे तेल की कीमतों में 7.6% से 8.6% तक का उछाल आया है, वहीं कतर द्वारा उत्पादन रोके जाने से यूरोप में प्राकृतिक गैस की कीमतें 40% तक बढ़ गई हैं।

  • वैश्विक चुनौती बने दुर्लभ रोग…. 10 हजार से अधिक रोगों की पहचान, दुनिया भर में 30 करोड़ पीड़ित

    वैश्विक चुनौती बने दुर्लभ रोग…. 10 हजार से अधिक रोगों की पहचान, दुनिया भर में 30 करोड़ पीड़ित


    नई दिल्ली।
    दुनिया भर (All Over World) में लगभग 30 करोड़ लोग किसी न किसी दुर्लभ रोग (Rare Diseases) से पीड़ित हैं। अब तक 6,000 से 10,000 दुर्लभ रोगों की पहचान हो चुकी है, जिनमें से करीब 72 प्रतिशत रोग आनुवांशिक कारणों से होते हैं। यह दुर्लभ रोग अब एक बड़ी वैश्विक स्वास्थ्य चुनौती (Global Health Challenge) बन चुके हैं। विश्व स्वास्थ्य सभा (डब्ल्यूएचए) ने मई 2025 में एक ऐतिहासिक प्रस्ताव पारित करते हुए दुर्लभ रोगों को वैश्विक स्वास्थ्य प्राथमिकता घोषित किया। इस प्रस्ताव का उद्देश्य समय पर और सटीक जांच सुनिश्चित करना, उपचार सुविधाओं की उपलब्धता बढ़ाना, अनुसंधान को प्रोत्साहित करना और विशेष स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करना है।

    नीति स्तर पर यह स्वीकार किया गया है कि दुर्लभ रोग केवल चिकित्सा नहीं, बल्कि सामाजिक और आर्थिक चुनौती भी हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) द्वारा जारी अंतरराष्ट्रीय रोग वर्गीकरण प्रणाली आईसीडी-11 में लगभग 5,500 दुर्लभ रोगों को शामिल किया गया है।


    मरीजों तक उचित इलाज कब पहुंचेगा?

    इस मानकीकृत वर्गीकरण से डॉक्टरों और शोधकर्ताओं को रोग की पहचान, दस्तावेजीकरण और उपचार योजना बनाने में सुविधा मिलती है। आईसीडी-11 में शामिल किए जाने से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर डाटा संग्रह, शोध सहयोग और स्वास्थ्य नीतियों के निर्माण में भी सुधार हुआ है। सही और समय पर वर्गीकरण से निदान की प्रक्रिया तेज हो सकती है, जिससे मरीजों को उचित इलाज तक जल्दी पहुंच मिलती है।


    पहचान और निदान में देरी से बढ़ रहा मर्ज

    दुर्लभ रोगों के मामलों में सबसे बड़ी चुनौती समय पर बीमारी की पहचान हैं। विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी, जांच सुविधाओं का अभाव और आनुवंशिक परीक्षण की सीमित उपलब्धता समस्या को और जटिल बना देती है। इन रोगों का उपचार अक्सर महंगा होता है। इससे प्रभावित परिवारों पर आर्थिक और मानसिक दबाव बढ़ जाता है। 30 करोड़ से अधिक लोगों के सामने शारीरिक, मानसिक और आर्थिक चुनौतियां खड़ी होती हैं, जो स्वास्थ्य प्रणाली के लिए एक गंभीर संकेत हैं।


    भारत में बढ़ी दुर्लभ रोगों के प्रति जागरूकता

    भारत में दुर्लभ रोग उन बीमारियों को माना जाता है जो आबादी के बहुत छोटे हिस्से को प्रभावित करती हैं। इन रोगों के लिए विशेष जांच, उन्नत प्रयोगशाला सुविधाओं और विशेषज्ञ चिकित्सकों की आवश्यकता होती है। कई मामलों में मरीजों को सही निदान मिलने में लंबा समय लग जाता है। हालांकि, सरकार और स्वास्थ्य संस्थान अब दुर्लभ रोगों के प्रति जागरूकता बढ़ाने और नीतिगत सुधारों पर काम कर रहे हैं, ताकि जांच और उपचार की सुविधा बेहतर बनाई जा सके।

  • आज साल का पहला चंद्रग्रहण… जानें टाइमिंग और सूतक काल का समय

    आज साल का पहला चंद्रग्रहण… जानें टाइमिंग और सूतक काल का समय


    नई दिल्ली।
    आज साल का पहला चंद्र ग्रहण (Chandra Grahan 2026) लगने जा रहा है. खास बात यह है कि यह ग्रहण भारत (India) के कई हिस्सों में दिखाई देगा, इसलिए इसका सूतक काल (Sutak Period) भी मान्य होगा. ज्योतिष के अनुसार, यह चंद्र ग्रहण सिंह राशि (Leo Zodiac sign) और पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र में लगेगा. चंद्रमा को मन का कारक ग्रह माना जाता है, इसलिए ग्रहण का सीधा असर व्यक्ति की मानसिक स्थिति पर पड़ सकता है. ऐसे में इस ग्रहण से जुड़ी जरूरी जानकारी जैसे समय, सूतक काल के बारे में जानना बेहद जरूरी हो जाता है. तो आइए पंडित प्रवीण मिश्र द्वारा जानते हैं कि साल का पहला चंद्र ग्रहण कितने बजे से शुरू होगा, कहां कहां दिखाई देगा और सूतक काल कब से शुरू होगा।


    चंद्र ग्रहण का समय (Chandra Grahan 2026 Timing)

    साल का पहला चंद्र ग्रहण 3 मार्च यानी आज दोपहर 3 बजकर 20 मिनट पर शुरू होगा और शाम 6 बजकर 46 मिनट पर समाप्त होगा. इस तरह ग्रहण की कुल अवधि लगभग 3 घंटे 27 मिनट रहेगी।


    भारत में इतने बजे से दिखाई देगा चंद्र ग्रहण (Chandra Grahan 2026 kitne baje lgega in India)

    गणनाओं के मुताबिक, 3 मार्च 2026 यानी आज फाल्गुन शुक्ल पक्ष पूर्णिमा पर चंद्रमा का उदय शाम 5 बजकर 59 मिनट पर होगा, जबकि ग्रहण की शुरुआत दोपहर 3 बजकर 20 मिनट पर होगी. ग्रहण का (मध्यकाल) मध्यान्ह समय शाम 5 बजकर 4 मिनट पर होगा और ग्रहण का मोक्ष काल शाम 6 बजकर 47 मिनट रहेगा. पूरे भारत में आज शाम 05 बजकर 59 के बाद ही सभी स्थानों में चंद्रग्रहण देखा जा सकेगा. केवल ग्रहण का मोक्ष काल ही दिखाई देगा, जबकि ग्रहण का प्रारंभ और मध्य काल भारत में कहीं भी दिखाई नहीं देगा, क्योंकि चंद्रोदय से पहले ही ग्रहण का आरंभ हो जाएगा.


    चंद्र ग्रहण के सूतक काल की टाइमिंग (Chandra Grahan 2026 Sutak kaal Timing)

    यह चंद्र ग्रहण भारत में भी दृश्यमान होगा इसलिए इसका सूतक काल भी मान्य होगा. ऐसे में आज इस पूर्ण चंद्र ग्रहण का सूतक काल 9 घंटे पहले सुबह 6 बजकर 20 मिनट से शुरू हो चुका है.

    कहां कहां दिखाई देगा ये चंद्र ग्रहण? (Chandra Grahan 2026 When and Where to Watch)
    यह चंद्र ग्रहण भारत के पूर्वी हिस्सों में ज्यादा स्पष्ट रूप से दिखाई देगा, जबकि अन्य क्षेत्रों में आंशिक रूप से नजर आ सकता है. भारत के अलावा यह ग्रहण ऑस्ट्रेलिया, दक्षिण-पूर्व एशिया, प्रशांत महासागर और अमेरिका के कुछ हिस्सों में भी दिखाई देगा.


    चंद्र ग्रहण 2026 का किन राशियों पर पड़ेगा प्रभाव (Chandra Grahan 2026 Effect)

    साल 2026 के पहले चंद्र ग्रहण से सिंह राशि, कर्क राशि और कुंभ राशि के जातकों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी जा रही है. जिनकी कुंडली में चंद्रमा कमजोर है, उन्हें मानसिक तनाव या चिंता का सामना करना पड़ सकता है.


    चंद्र ग्रहण 2026 देश-दुनिया पर प्रभाव

    यह चंद्र ग्रहण सिंह राशि में लग रहा है. इस ग्रहण से सिंह और कुंभ राशि प्रभावित होंगी. इस ग्रहण से दुनिया में सत्ता में उथल-पुथल होने की संभावना है. इस ग्रहण के बाद से युद्ध की स्थितियां ज्यादा नकारात्मक हो सकती हैं. इस ग्रहण की वजह से बड़े राजनेतों की सत्ता पर असर पड़ सकता है।


    सिंह राशि वालों के लिए सलाह

    चूंकि यह ग्रहण सिंह राशि में लग रहा है, इसलिए इस राशि के लोगों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है. आने वाले कुछ दिनों तक जल्दबाजी में कोई बड़ा फैसला न लें, विवादों से दूर रहें और सोच-समझकर ही कदम उठाएं.


    सूतक के दौरान क्या न करें (Chandra Grahan 2026 Sutak kaal Precautions)

    ग्रहण के दौरान धर्मशास्त्रों में सूतक की व्यवस्था बताई गई है. सूर्य ग्रहण में चार पहर पहले यानी 12 घंटें पहले तथा चंद्र ग्रहण में 3 पहर यानी 9 घंटे पहले सूतक लग जाता है. सूतक के दौरान अन्न का त्याग कर देना चाहिए. किसी प्रकार के नकारात्मक कार्य को करना निषेध रहता है. इस दौरान आध्यात्मिक चिंतन और सात्विक आहार विहार रखना चाहिए।

    कच्चे पके हुए अन्न को ग्रहण के दौरान नहीं रखना चाहिए और तेल में तले पदार्थ और दूध-दही इत्यादि में तुलसी का पत्ता डाल देना चाहिए. इस चंद्रग्रहण का सूतक भारतीय समयानुसार 3 मार्च को सुबह 6 बजकर 20 से शुरू हो जाएगा. ग्रहण के दौरान पूरी तरह से अन्न-जल का त्याग कर देना चाहिए. अपने इष्टदेव का ध्यान और ओम नम: शिवाय का जप करना चाहिए।


    चंद्र ग्रहण के दौरान क्या करें (Chandra Grahan 2026 Dos)

    1. चंद्र ग्रहण के दौरान सिर्फ भगवान के मंत्रों का जप करना चाहिए, जो कि दस गुना फलदायी माना जाता है.
    2. चंद्र ग्रहण के बाद शुद्ध जल से स्नान करके, गरीबों का दान देना चाहिए.
    3. चंद्र ग्रहण के बाद पूरे घर को शुद्ध करना चाहिए. ऐसा करने से घर की सभी नकारात्मक शक्तियां दूर हो जाती है.
    4. ग्रहण के समय गायों को घास, पक्षियों को अन्न, जरूरत मंदों को वस्त्र दान देने से अनेक गुना पुण्य प्राप्त होता है।


    चंद्र ग्रहण का क्या हो सकता है प्रभाव

    ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार, चंद्र ग्रहण का असर सबसे ज्यादा मन और भावनाओं पर पड़ता है. इस दौरान तनाव, भ्रम और नकारात्मक सोच बढ़ सकती है. इसलिए इस समय शांत रहना और बड़े फैसलों से बचना बेहतर माना जाता है।


    क्या होता है चंद्र ग्रहण? (What is Lunar Eclipse?)

    चंद्र ग्रहण (Lunar Eclipse) एक खगोलीय घटना है. जब पृथ्वी सूर्य और चंद्रमा के बीच आ जाती है और अपनी छाया चंद्रमा पर डालती है तो ऐसी स्थिति चंद्र ग्रहण कहलाता है.


    क्या होता है पूर्ण चंद्र ग्रहण?

    जब चंद्रमा पूरी तरह पृथ्वी की छाया में आ जाता है, तो इसे पूर्ण चंद्र ग्रहण कहते हैं. इस स्थिति में चंद्रमा का रंग तांबे या लाल रंग का दिखाई देता है, जिसे “ब्लड मून” भी कहा जाता है।

  • डिजिटल दुनिया में मोदी का जलवा! यूट्यूब चैनल ने पार किए 30 मिलियन सब्सक्राइबर्स

    डिजिटल दुनिया में मोदी का जलवा! यूट्यूब चैनल ने पार किए 30 मिलियन सब्सक्राइबर्स


    नई दिल्ली। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने डिजिटल प्लेटफॉर्म पर एक और ऐतिहासिक उपलब्धि दर्ज की है। उनके आधिकारिक यूट्यूब चैनल ने 30 मिलियन यानी 3 करोड़ सब्सक्राइबर्स का आंकड़ा पार कर लिया है। इस उपलब्धि के साथ ही वे यूट्यूब पर दुनिया के सबसे अधिक सब्सक्राइब किए जाने वाले राजनेता बन गए हैं। यह उपलब्धि न केवल उनकी लोकप्रियता को दर्शाती है, बल्कि डिजिटल माध्यमों पर उनकी सशक्त उपस्थिति का भी प्रमाण है।

    वैश्विक नेताओं में सबसे आगे
    सब्सक्राइबर संख्या के मामले में प्रधानमंत्री मोदी अपने वैश्विक समकक्षों से काफी आगे निकल गए हैं। इस सूची में दूसरे स्थान पर ब्राजील के पूर्व राष्ट्रपति Jair Bolsonaro हैं, जिनके यूट्यूब चैनल पर लगभग 66 लाख (6.6 मिलियन) सब्सक्राइबर्स हैं। यह संख्या पीएम मोदी के मुकाबले करीब एक-चौथाई है।

    यूट्यूब पर मोदी की लोकप्रियता अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति Donald Trump से भी कहीं अधिक बताई जा रही है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, प्रधानमंत्री मोदी के सब्सक्राइबर ट्रंप से कई गुना ज्यादा हैं। इससे स्पष्ट है कि भारतीय प्रधानमंत्री की डिजिटल पहुंच अब वैश्विक स्तर पर एक अलग पहचान बना चुकी है।

    देश के भीतर भी बड़ी बढ़त
    भारत में भी पीएम मोदी का डिजिटल प्रभाव स्पष्ट रूप से नजर आता है। सब्सक्राइबर संख्या के मामले में उनका चैनल कांग्रेस नेता Rahul Gandhi के यूट्यूब चैनल से लगभग तीन गुना आगे है।

    इतना ही नहीं, उनके सब्सक्राइबरों की संख्या Aam Aadmi Party और Indian National Congress के आधिकारिक चैनलों की तुलना में चार गुना से भी अधिक बताई जा रही है। यह अंतर बताता है कि डिजिटल कम्युनिकेशन के क्षेत्र में पीएम मोदी ने एक मजबूत और व्यापक दर्शक वर्ग तैयार किया है।

    सोशल मीडिया पर भी शतक
    यूट्यूब के साथ-साथ इंस्टाग्राम पर भी प्रधानमंत्री मोदी ने ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। उनके इंस्टाग्राम अकाउंट पर 100 मिलियन (10 करोड़) से अधिक फॉलोअर्स हो चुके हैं। इसके साथ ही वे इस आंकड़े को पार करने वाले दुनिया के पहले प्रमुख नेता बन गए हैं।

    2014 में इंस्टाग्राम से जुड़ने के बाद पीएम मोदी ने लगातार सक्रिय रहकर अपने अकाउंट को दुनिया के सबसे ज्यादा फॉलो किए जाने वाले राजनीतिक प्रोफाइल्स में शामिल कर दिया। वर्तमान में विश्व के बड़े नेताओं में उनके सबसे अधिक फॉलोअर्स बताए जाते हैं। खास बात यह है कि इंस्टाग्राम पर भी उनके फॉलोअर्स की संख्या डोनाल्ड ट्रंप से दोगुने से अधिक बताई जाती है।

    डिजिटल रणनीति का असर
    विशेषज्ञ मानते हैं कि प्रधानमंत्री मोदी ने शुरुआत से ही सोशल मीडिया को सीधे संवाद के माध्यम के रूप में अपनाया। उनके भाषण, कार्यक्रम, ‘मन की बात’, विदेश यात्राओं और सरकारी अभियानों से जुड़े वीडियो नियमित रूप से साझा किए जाते हैं, जिससे आम नागरिकों तक सीधा संदेश पहुंचता है।

    यूट्यूब और इंस्टाग्राम जैसे प्लेटफॉर्म पर उनकी सक्रियता ने उन्हें युवा वर्ग के बीच भी खासा लोकप्रिय बनाया है। डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उनकी पहुंच पारंपरिक मीडिया से आगे निकलती दिखाई दे रही है, जहां वे सीधे करोड़ों लोगों से संवाद स्थापित कर रहे हैं।

    वैश्विक प्रभाव की झलक
    30 मिलियन से अधिक सब्सक्राइबर्स के साथ पीएम मोदी का यूट्यूब चैनल अब विश्व स्तर पर नेताओं के बीच सबसे अधिक सब्सक्राइब किया जाने वाला चैनल बन चुका है। यह उपलब्धि ऐसे समय में आई है जब वैश्विक राजनीति में डिजिटल कम्युनिकेशन की भूमिका लगातार बढ़ रही है।

  • धरती की समृद्धि का उत्सव! पीएम मोदी ने विश्व वन्यजीव दिवस पर रखा पर्यावरण संरक्षण पर जोर

    धरती की समृद्धि का उत्सव! पीएम मोदी ने विश्व वन्यजीव दिवस पर रखा पर्यावरण संरक्षण पर जोर


    नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर साझा किए संदेश में कहा कि विश्व वन्यजीव दिवस हमारे ग्रह को समृद्ध करने वाली अद्भुत जैव विविधता का उत्सव मनाने का अवसर है। उन्होंने वन्यजीव संरक्षण के प्रति समर्पित व्यक्तियों के योगदान की सराहना की और कहा कि हमें वन्यजीवों और उनके प्राकृतिक आवासों की सुरक्षा सुनिश्चित करनी चाहिए ताकि हमारा वन्य जीवन फलता-फूलता रहे।

    लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला: संरक्षण हमारा संवैधानिक दायित्व
    लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा कि प्रकृति और मानव जीवन एक-दूसरे के पूरक हैं। जैव विविधता का संरक्षण केवल पर्यावरणीय आवश्यकता नहीं, बल्कि हमारे अस्तित्व की सुरक्षा का आधार है। उन्होंने भारत में वन और वन्यजीव संरक्षण की प्रगति का उल्लेख करते हुए कहा कि देश में रामसर आर्द्रभूमियों की संख्या लगभग 100 तक पहुंच गई है। बिरला ने वन्यजीवों की रक्षा को कानूनी और नैतिक दायित्व बताते हुए आने वाली पीढ़ियों के लिए समृद्ध पर्यावरण सुनिश्चित करने का संकल्प साझा किया।

    जम्मू-कश्मीर उपराज्यपाल मनोज सिन्हा: सतत विकास और तालमेल
    जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने कहा कि विश्व वन्यजीव दिवस पर हमें वन्य जीवन बचाने, इकोसिस्टम की रक्षा करने और इंसानी तरक्की तथा प्रकृति के बीच संतुलन बनाए रखने के लिए मिलकर काम करना चाहिए।

    केंद्रीय मंत्रियों के संदेश
    केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने कहा कि विश्व वन्यजीव दिवस मनाते हुए हमें अपनी जैव विविधता को खतरों से बचाने और पारिस्थितिकी तंत्र को संरक्षित करने के लिए प्रतिबद्ध रहना चाहिए।

    केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि जंगलों से लेकर समुद्रों तक, हर प्रजाति प्रकृति का संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण है। वन्यजीवों की रक्षा करना केवल जिम्मेदारी नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के प्रति हमारा फर्ज है।

    विश्व वन्यजीव दिवस केवल जश्न का दिन नहीं, बल्कि जैव विविधता और वन्यजीव संरक्षण के प्रति जागरूकता फैलाने का अवसर है। भारत में नेतृत्वकर्ता और नागरिक मिलकर वन्य जीवन, पारिस्थितिकी तंत्र और प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा करने का संकल्प ले रहे हैं। यह दिन हर व्यक्ति को याद दिलाता है कि पृथ्वी की समृद्धि और संतुलन बनाए रखना हमारा साझा दायित्व है।

  • अजित पवार के बेटे ने वीडियो शेयर कर VSR वेंचर्स की उड़ानों पर रोक की मांग की

    अजित पवार के बेटे ने वीडियो शेयर कर VSR वेंचर्स की उड़ानों पर रोक की मांग की


    नई दिल्ली । महाराष्ट्र के पूर्व उपमुख्यमंत्री और एनसीपी नेता Ajit Pawar के बेटे जय पवार ने 28 जनवरी 2026 को हुए विमान हादसे के बाद सोशल मीडिया पर एक वीडियो साझा कर VSR वेंचर्स प्राइवेट लिमिटेड की उड़ानों को तुरंत रोकने की मांग की है। इस हादसे में उनके पिता का निधन हुआ था, जिसे लेकर जय पवार ने गंभीर सुरक्षा और लापरवाही के आरोप लगाए हैं।

    वीडियो में कंपनी के मालिक रोहित सिंह मुख्य पायलट सीट पर उड़ान के दौरान सोते हुए दिखाई दे रहे हैं। जय पवार ने लिखा कि “मैंने अपने पिता को खो दिया है… यह पीड़ा जिंदगी भर मेरे साथ रहेगी। ऐसे लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जा सकती।” उन्होंने DGCA (डायरेक्टरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन) से अपील की है कि VSR की सभी उड़ानों को ग्राउंड किया जाए और रोहित सिंह के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए।

    DGCA की जांच के मुताबिक, 28 जनवरी को बारामती में VSR वेंचर्स के Learjet 45 (VT-SSK) विमान के क्रैश के बाद स्पेशल सेफ्टी ऑडिट कराया गया। ऑडिट में एयरवर्दीनेस, एयर सेफ्टी और फ्लाइट ऑपरेशन के नियमों के कई उल्लंघन सामने आए। इसके बाद DGCA ने चार एयरक्राफ्ट  को तुरंत ग्राउंड कर दिया।

    जय पवार ने इंस्टाग्राम पोस्ट में कहा कि महाराष्ट्र में हुए इस हादसे की पूरी और पारदर्शी जांच होनी चाहिए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचा जा सके। उन्होंने VSR वेंचर्स की उड़ानों पर तत्काल रोक लगाने और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जोरदार मांग की।

    यह मामला न केवल पवार परिवार के लिए बल्कि देश की नागरिक हवाई सुरक्षा के लिए भी गंभीर चिंता का विषय बन गया है। DGCA ने नियमों का उल्लंघन सामने आने के बाद सख्त कदम उठाए हैं और जांच जारी है।

  • रंग नहीं, राख की होली! कर्नाटक के इस मंदिर में अनोखी परंपरा, शिव-कामदेव से जुड़ा इतिहास

    रंग नहीं, राख की होली! कर्नाटक के इस मंदिर में अनोखी परंपरा, शिव-कामदेव से जुड़ा इतिहास


    नई दिल्ली। देशभर में 4 मार्च को होली का उल्लास छाएगा। जहां उत्तर भारत में यह पर्व प्रह्लाद और होलिका की कथा से जुड़ा है, वहीं दक्षिण भारत में इसका संबंध भगवान शिव और कामदेव की कहानी से माना जाता है। यहां होली को अहंकार के नाश और आत्मशुद्धि के प्रतीक के रूप में देखा जाता है।

    गर्भगृह में साथ विराजते हैं शिव और कामदेव


    कर्नाटक का Rama Lingeshwara Kamanna Temple अपनी अनोखी परंपरा के कारण प्रसिद्ध है। कहा जाता है कि यह दक्षिण भारत का पहला मंदिर है, जहां गर्भगृह में भगवान शिव के साथ कामदेव की प्रतिमा स्थापित है। शिवलिंग के समीप ध्यान मुद्रा में विराजमान कामदेव की मूर्ति इस मंदिर को विशेष बनाती है। मान्यता है कि होली के दिन यहां दोनों के एक साथ दर्शन करने से पापों का नाश होता है और जीवन से अहंकार दूर होता है।

    कामदेव और शिव की कथा

    पौराणिक मान्यता के अनुसार, देवी सती के देह त्याग के बाद भगवान शिव गहन तपस्या में लीन हो गए थे। सृष्टि के संतुलन को बनाए रखने के लिए देवताओं ने कामदेव से मदद मांगी। कामदेव ने शिव की तपस्या भंग करने के लिए कामबाण चलाया। तप भंग होने पर भगवान शिव ने क्रोधित होकर अपना तीसरा नेत्र खोला, जिसकी ज्वाला से कामदेव भस्म हो गए। यह घटना अहंकार के अंत का प्रतीक मानी जाती है।

    राख से खेली जाती है होली


    इसी कथा की स्मृति में इस मंदिर में होली के दिन रंगों की जगह राख का प्रयोग किया जाता है। श्रद्धालु माथे पर राख लगाते हैं, जिसे कामदेव के दहन और अहंकार के नाश का प्रतीक माना जाता है। यह परंपरा हमें याद दिलाती है कि शक्ति या सौंदर्य का घमंड क्षणभर में मिट सकता है।

    पांच दिन चलता है उत्सव


    रामलिंगेश्वर कामन्ना मंदिर में होली का उत्सव पांच दिनों तक मनाया जाता है। इस दौरान विशेष पूजा-अर्चना और अनुष्ठान होते हैं। भक्त चांदी की वस्तुएं, खासकर चांदी का पालना अर्पित करते हैं। मान्यता है कि संतान की इच्छा रखने वाले दंपत्ति अगर श्रद्धा से चांदी का झूला चढ़ाते हैं तो उनकी मनोकामना पूर्ण होती है।
  • इजराइली राजदूत का दावा पीएम मोदी को हमले की जानकारी नहीं थी, 28 फरवरी को दी गई मंजूरी

    इजराइली राजदूत का दावा पीएम मोदी को हमले की जानकारी नहीं थी, 28 फरवरी को दी गई मंजूरी


    नई दिल्ली । प्रधानमंत्रीनरेंद्र मोदी के हालिया इजराइल दौरे के बाद ईरान पर हुए हमलों को लेकर कई सवाल खड़े हो गए हैं। पीएम मोदी 25 और 26 फरवरी को इजराइल के दौरे पर थे और ठीक दो दिन बाद 28 फरवरी को इजराइल ने अमेरिका के साथ मिलकर ईरान पर स्ट्राइक की। ऐसे में यह चर्चा तेज हो गई कि क्या भारत को पहले से इस ऑपरेशन की जानकारी थी।

    भारत में इजराइल के राजदूतरूवेन अजार ने इन सवालों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि पीएम मोदी को इस हमले की पूर्व जानकारी नहीं थी। उनके मुताबिक ऑपरेशन की मंजूरी 28 फरवरी की सुबह दी गई तब तक प्रधानमंत्री मोदी अपना दौरा पूरा कर भारत लौट चुके थे।

    न्यूक्लियर खतरे को खत्म करना लक्ष्य
    राजदूत अजार ने कहा कि इजराइल का मुख्य उद्देश्य ईरान के सैन्य परमाणु कार्यक्रम को खत्म करना है। उनका आरोप है कि ईरान दशकों से मिलिट्री न्यूक्लियर प्रोग्राम विकसित करने की कोशिश कर रहा है और बैलिस्टिक मिसाइल क्षमताओं को बढ़ा रहा है।

    उन्होंने यह भी कहा कि ईरान क्षेत्र में अपने प्रॉक्सी समूहों को फंडिंग हथियार और तकनीक मुहैया कराता है। इजराइल के अनुसार ईरान ने 2027 तक इजराइल को खत्म करने की धमकी दी थी। जून में भी इजराइल ने ईरान पर हमले किए थे और अब सहयोग से इनकार के बाद फिर ऑपरेशन शुरू किया गया।

    भारत से हुई बातचीत

    राजदूत ने बताया कि इजराइल के विदेश मंत्री ने भारत के विदेश मंत्री सुब्रह्मण्यम जयशंकर से फोन पर बात की थी। भारत ने अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए संवाद और स्थिरता का समर्थन किया।

    भारत लगातार कूटनीतिक समाधान की वकालत करता रहा है। प्रधानमंत्री मोदी पहले ही कह चुके हैं कि मौजूदा संकट का हल केवल बातचीत और डिप्लोमेसी से ही संभव है।

    नेतन्याहू की भूमिका
    इस पूरे घटनाक्रम के बीच इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की भूमिका भी चर्चा में है। इजराइल ने इन हमलों को प्रिएंपटिव स्ट्राइक बताया है। बाद में अमेरिकी राष्ट्रपति ने भी इन हमलों में अमेरिका की भागीदारी की पुष्टि की।

    इजराइल में माहौल
    राजदूत अजार के मुताबिक इजराइल में सुरक्षा को लेकर गंभीर माहौल है। उनका कहना है कि देश लगातार मिसाइल और ड्रोन हमलों का सामना कर रहा है। ईरान के सुप्रीम लीडर अली खामेनेई को लेकर भी इजराइल में तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं।

    इस घटनाक्रम ने क्षेत्रीय तनाव को और बढ़ा दिया है। भारत ने साफ किया है कि वह शांति और स्थिरता का पक्षधर है तथा भारतीय नागरिकों की सुरक्षा उसकी सर्वोच्च प्राथमिकता है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि पश्चिम एशिया में हालात किस दिशा में आगे बढ़ते हैं।

  • इजराइल अमेरिका और ईरान तनाव पर पीएम Narendra Modi का बड़ा बयान, बोले हालात बेहद चिंताजनक

    इजराइल अमेरिका और ईरान तनाव पर पीएम Narendra Modi का बड़ा बयान, बोले हालात बेहद चिंताजनक


    नई दिल्ली । मिडिल ईस्ट में इजराइल अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को गंभीर चिंता है। कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के साथ द्विपक्षीय वार्ता के बाद मीडिया को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि पश्चिम एशिया के हालात बेहद चिंताजनक हैं और मौजूदा संकट का समाधान केवल बातचीत और कूटनीति से ही संभव है।

    प्रधानमंत्री ने स्पष्ट कहा कि भारत शांति और स्थिरता का पक्षधर है और विश्व में बढ़ते तनाव को लेकर गंभीर रूप से चिंतित है। उन्होंने कहा जब दो लोकतंत्र एक साथ खड़े होते हैं तो शांति की आवाज और भी मजबूत हो जाती है। वर्तमान संकट का हल संवाद और कूटनीतिक प्रयासों से ही निकलेगा इसके अलावा कोई दूसरा रास्ता नहीं है।

    पीएम मोदी ने दोहराया कि भारत सभी देशों के साथ मिलकर शांति बहाली के प्रयासों में सहयोग करेगा। उन्होंने कहा कि भारत का प्राथमिक उद्देश्य क्षेत्र में स्थिरता कायम रखना और वहां रह रहे भारतीय नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।

    नेतन्याहू से फोन पर बातचीत

    इससे पहले सोमवार देर रात प्रधानमंत्री मोदी ने इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से फोन पर बात की। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए उन्होंने बताया कि दोनों नेताओं के बीच मौजूदा क्षेत्रीय हालात पर चर्चा हुई और उन्होंने दुश्मनी को जल्द समाप्त करने की आवश्यकता पर जोर दिया।

    भारतीयों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता

    केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी ने भी कहा कि केंद्र सरकार खाड़ी देशों में फंसे भारतीय नागरिकों को सुरक्षित वापस लाने के लिए पूरी तरह तैयार है। उन्होंने बताया कि विदेश मंत्रालय और भारतीय मिशन लगातार संपर्क में हैं और हालात पर नजर बनाए हुए हैं।

    जोशी ने चिंतित परिवारों को आश्वस्त करते हुए कहा कि सरकार पहले भी संकटग्रस्त देशों से भारतीयों को सुरक्षित निकाल चुकी है जैसे यूक्रेन संकट के दौरान किया गया था। उन्होंने कहा जहां भी भारतीय नागरिक हैं उनकी सुरक्षा हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। घबराने की जरूरत नहीं है सरकार हर संभव कदम उठा रही है।

    मिडिल ईस्ट में जारी इस तनावपूर्ण स्थिति के बीच भारत का रुख स्पष्ट है संवाद कूटनीति और शांति का मार्ग। अब वैश्विक समुदाय की नजर इस बात पर टिकी है कि क्षेत्र में हालात कब सामान्य होते हैं और तनाव किस दिशा में आगे बढ़ता है।