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  • मप्रः इंदौर में दो साल की मासूम से दुष्कर्म करने वाले को 4 धाराओं में उम्रकैद

    मप्रः इंदौर में दो साल की मासूम से दुष्कर्म करने वाले को 4 धाराओं में उम्रकैद


    – देश में पहली बार दुष्कर्मी को चार बार उम्रकैद, कोर्ट ने कहा- महिलाएं बाहर ही नहीं, घर में भी असुरक्षित

    इंदौर। मध्य प्रदेश के इंदौर शहर में दो साल की बच्ची को घर से उठाकर दुष्कर्म और उसकी हत्या की कोशिश करने वाले आरोपित को न्यायालय ने चार अलग-अलग धाराओं में चार बार उम्रकैद की सजा सुनाई है। अपर सत्र न्यायाधीश (विशेष न्यायालय पाक्सो) शिप्रा पटेल की कोर्ट ने शुक्रवार को फैसला सुनाया। आरोपित दिनेश डाबर (38 वर्ष), निवासी धार को पाक्सो एक्ट की तीन धाराओं के साथ ही हत्या के प्रयास की धारा में अलग-अलग आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही जबरदस्ती संबंध बनाने की धारा में भी पांच साल की सजा सुनाई गई। दोषी पर कोर्ट ने 42,000 रुपये का अर्थदंड भी लगाया है।

    फैसले में कोर्ट ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा है कि दोषी ने बालिका को घर से ले जाकर उसके साथ बलात्कार की घटना कारित की। उसे गंभीर चोंटे पहुंचाई। यह उसकी आपराधिक कुंठित मानसिकता को दर्शाता है। वर्तमान परिवेश में महिलाएं न केवल घर के बाहर बल्कि घर के अंदर भी असुरक्षित हैं। ऐसी स्थिति में अभियुक्त को न्यूनतम दंडादेश दिया जाना न्यायोचित और विधिपूर्ण नहीं है ।

    विशेष लोक अभियोजक सुशीला राठौर एवं प्रीति अग्रवाल ने बताया कि घटना 13 अक्टूबर 2022 की है। बालिका के पिता ने थाना चंदननगर में सूचना दी कि वह एक निर्माणाधीन भवन में परिवार सहित रहता है वहां चौकीदारी करते हैं। रात में लगभग 2 बजे से उनकी दो साल की वर्षीय जो अपनी मां के पास सो रही थी, वह गायब हो गई है। उसने और उसकी पत्नी ने पुत्री की आसपास तलाश किया लेकिन उसका कोई पता नहीं चला। मामले में पुलिस ने पिता की रिपोर्ट पर अज्ञात के खिलाफ अपहरण का केस दर्ज कर तलाश शुरू की। 13 अक्टूबर को सुबह रेती मंडी रोड स्थित खम्बाती कंपाउंड के सामने डायल-100 के सिपाही अभिनव सेन को झाड़ियों के पास घायल अवस्था में वह बच्ची मिली। जिसकी पहचान उसके माता-पिता ने की। विवेचना में घटनास्थल के आसपास स्थित सीसीटीवी फुटेज की रिकार्डिंग जब्त की। सीसीटीवी फुटेज में घटना में प्रयुक्त ट्रक ड्राइवर बच्ची के घर जाते हुए और वापस आते हुए दिखाई दिया।

    इन फुटेज की पहचान बच्ची के पिता से कराई तो उन्होंने बताया कि यह इस ट्रक का ड्राइवर दिनेश डाबर है। पुलिस ने इसे हिरासत में लेकर उसका मेडिकल परीक्षण कराया गया। इसके साथ ही डीएनए जांच करवाई गई तो उसके द्वारा यह अपराध किया जाना साबित हुआ और उसने स्वीकार भी किया। इस पर पुलिस ने उसके खिलाफ अपहरण, पाक्सो, जान से मारने का प्रयास सहित गंभीर धाराओं में केस दर्ज कर उसे गिरफ्तार किया। बाद में पुलिस ने बालिका के शरीर में मिले डीएनए की जांच की तो आरोपित से डीएनए मैच हुआ। पुलिस ने मेडिकल व वैज्ञानिक साक्ष्यों, विशेषकर डीएनए रिपोर्ट कोर्ट में पेश की थी।

    शुक्रवार को अपर सत्र न्या्याधीश (विशेष न्यायालय पॉक्सो अधिनियम) क्षिप्रा पटेल ने आरोपी को विभिन्न चार धाराओं में आजीवन कारावास से दंडित किया। जिन धाराओं में उसे चार बार आजीवन कारावास की सजा सुनाई है वे धारा 5एम/6 पॉक्सो एक्ट, 5-J (iii) /6 पॉक्सो एक्ट, 5(ईR/ 6 पॉक्सो एक्टा और धारा 307 है। इसके साथ ही भादंवि की धारा 366 में 5 वर्ष का सश्रम कारावास और 42 हजार रुपए के अर्थदंड से दंडित किया गया। अभियोजन की ओर से पैरवी विशेष लोक अभियोजक सुशीला राठौर और प्रीति अग्रवाल ने की।

    खास बात यह कि इस केस को कोर्ट ने गंभीर एवं सनसनीखेज प्रकरणों की श्रेणी में लिया। इसमें अभियोजन की ओर से कुल 31 गवाह करवाए गए। इसके अलावा परिस्थितजंय साक्ष्य भी काफी मजबूत रहे जिससे आरोपी को चौहरा आजीवन कारावास हुआ। कोर्ट ने बालिका को हुई मानसिक और शारीरिक क्षति की पूर्ति के लिए उसे 3 लाख रुपये पीड़ित प्रतिकर योजना के तहत देने की अनुशंसा भी की है। कोर्ट ने इस मामले में दोषी को कम सजा देने को सही नहीं माना। कोर्ट ने आदेश में टिप्पणी की है कि उसने 2 वर्षीय मासूम को घर से उठाकर उसके साथ जघन्य कृत्य किया तथा उसे गंभीर चोटें पहुंचाईं, जो उसकी कुंठित आपराधिक मानसिकता को दर्शाता है। वर्तमान परिस्थिति में महिलाएं घर से बाहर ही नहीं, बल्कि घर के अंदर भी असुरक्षित हैं। ऐसी स्थिति में न्यूनतम दंड देना न्यायोचित नहीं है।

  • न्यायपालिका को बदनाम करने की हिम्मत कैसे हुई? रिजिजू ने DMK सांसद को लताड़ा

    न्यायपालिका को बदनाम करने की हिम्मत कैसे हुई? रिजिजू ने DMK सांसद को लताड़ा

     
    नई दिल्ली ।लोकसभा में शुक्रवार को उस समय तनाव बढ़ गया जब तमिलनाडु से DMK सांसद टी.आर. बालू ने एक मुद्दे पर बोलते हुए एक हाईकोर्ट जज को RSS जज कह दिया। केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने तत्काल आपत्ति जताते हुए कहा कि यह संसद की गरिमा के खिलाफ है। उन्होंने बालू से बिना शर्त माफी की मांग की और कहा- आप न्यायपालिका पर दाग कैसे लगा सकते हैं? किसी जज के लिए असंसदीय भाषा का उपयोग बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

    इंडिगो फाल्ट के मुद्दे पर विपक्ष का हंगामा
    राज्यसभा में विपक्ष ने इंडिगो एयरलाइन के स्टाफ संकट से देशभर की उड़ानें प्रभावित होने पर सरकार से जवाब मांगा। रिजिजू ने बताया कि नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू हालात की समीक्षा कर रहे हैं और यह देखा जा रहा है कि केंद्र किस तरह एयरलाइन की मदद कर सकता है। सदन के बाहर प्रियंका गांधी ने आरोप लगाया कि यह स्थिति सरकार के मोनोपोली मॉडल की देन है। राहुल गांधी ने भी X पर इसे सरकार की नीतियों का नतीजा बताया। वक्फ संपत्तियों के रजिस्ट्रेशन पर सरकार का साफ रुख
    अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू ने UMEED पोर्टल पर वक्फ संपत्तियों के रजिस्ट्रेशन की समयसीमा बढ़ाने से इनकार कर दिया।

    उन्होंने बताया-
    1.51 लाख वक्फ संपत्तियों का रजिस्ट्रेशन पूरा हो चुका है। सुप्रीम कोर्ट ने भी समय बढ़ाने से मना किया है। तीन महीने तक देरी करने वालों पर कोई जुर्माना नहीं लगेगा। कर्नाटक सबसे आगे रहा, जहां लगभग 50,000 संपत्तियां दर्ज हुईं। सत्र में पेश होने वाले अहम बिल संसद के शीतकालीन सत्र में 10 बड़े बिल पेश होने जा रहे हैं। इनमें कुछ महत्वपूर्ण बदलाव शामिल हैं-

    1. एटॉमिक एनर्जी बिल
    न्यूक्लियर सेक्टर में पहली बार निजी कंपनियों को एंट्री का रास्ता खुलेगा। परमाणु ऊर्जा से जुड़े नियमों के लिए नया ढांचा बनेगा।

    2. हायर एजुकेशन कमीशन ऑफ इंडिया बिल
    UGC, AICTE, NCTE को हटाकर एक ही आयोग बनाने का प्रस्ताव।
    उद्देश्य- विश्वविद्यालयों व कॉलेजों को अधिक स्वतंत्रता व बेहतर पारदर्शिता।

    3. नेशनल हाईवे संशोधन बिल
    भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया तेज व पारदर्शी बनाकर हाईवे परियोजनाओं की देरी कम करना।

    4. कॉर्पोरेट लॉ अमेंडमेंट बिल, 2025
    कंपनी अधिनियम 2013 और LLP अधिनियम 2008 में सुधार करके ईज ऑफ डूइंग बिजनेस बढ़ाना।

    5. सिक्योरिटीज मार्केट्स कोड बिल
    SEBI एक्ट, डिपॉजिटरीज एक्ट और सिक्योरिटीज कॉन्ट्रैक्ट्स एक्ट को मिलाकर एक ही कानून बनाना।

    6. संविधान 131वां संशोधन बिल
    चंडीगढ़ UT को संविधान के आर्टिकल 240 के दायरे में लाना, जिससे केंद्र विशेष रेगुलेशन बना सके।

    7. आर्बिट्रेशन एंड कंसिलीएशन अमेंडमेंट बिल
    मध्यस्थता मामलों के समाधान को तेज करना और फैसलों को चुनौती देने की प्रक्रिया सरल बनाना।

    पहले चार दिनों की बड़ी घटनाएँ

    1 दिसंबर: वित्त मंत्री ने 3 बिल पेश किए, मणिपुर GST संशोधन बिल पास।

    2 दिसंबर: विपक्ष SIR पर चर्चा के लिए तैयार हुआ; 9 दिसंबर को 10 घंटे की बहस।

    3 दिसंबर: PM मोदी ने बंगाल BJP सांसदों से राज्य की मौजूदा स्थिति पर चर्चा की।

    4 दिसंबर: राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि सरकार विदेशी मेहमानों से विपक्ष को मिलने नहीं देती।

    जस्टिस वर्मा पर कार्रवाई की संभावना
    स्पीकर द्वारा गठित तीन-सदस्यीय कमेटी अपनी रिपोर्ट इस सत्र में पेश करेगी। यदि आरोप साबित होते हैं तो संसद में महाभियोग प्रस्ताव लाया जाएगा। प्रस्ताव को पास होने के लिए दो-तिहाई बहुमत की जरूरत होगी और फिर यह राष्ट्रपति को भेजा जाएगा। हालांकि माना जा रहा है कि आरोप सही पाए जाने की स्थिति में जस्टिस वर्मा खुद इस्तीफा दे सकते हैं।
     

  • भगोड़े विजय माल्या को बॉम्बे हाईकोर्ट से झटका, कहा- पहले भारत आकर कोर्ट में हाजिर हो

    भगोड़े विजय माल्या को बॉम्बे हाईकोर्ट से झटका, कहा- पहले भारत आकर कोर्ट में हाजिर हो


    नई दिल्‍ली ।
    भारत से करोड़ों रुपए का गबन करके भागने वाले शराब कारोबारी विजय माल्या को बॉम्बे हाई कोर्ट ने झटका दिया है। कोर्ट ने माल्या की तरफ से फ्यूजिटिव इकोनॉमिक ऑफेंडर्स एक्ट को दी गई चुनौती वाली याचिका पर सुनवाई से इनकार करते हुए कोर्ट ने कहा कि इस पर तभी कार्यवाही होगी, जब माल्या खुद भारत आकर कोर्ट में पेश होगा।

    मुख्य न्यायाधीश चंद्रशेखर और जस्टिस गौतम अंकढ़ की खंडपीठ ने मामले को आगे बढ़ाते हुए 23 दिसंबर को फिर से सुनवाई की बात कही। पीठ ने माल्या के वकील से कहा,”पहले अपने मुवक्किल को कोर्ट में पेश कराइए, फिर इस मामले पर सुनवाई की जाएगी। यह बताइए की वह कब तक भारत आएगा।”

    गौरतलब है कि नामी शराब कारोबारी और भारत के अरबपतियों में से एक विजय माल्या साल 2016 में देश छोड़कर भाग गया था। 2015 में ही सीबीआई ने माल्या के खिलाफ सिक्योरिटीज एवं फ्राड सेल के मामले में एफआईआर दर्ज की थी। इसमें माल्या के ऊपर आपराधिक साजिश, आपराधिक विश्वासघात और दुराचार का आरोप लगाया गया था। यह पूरा मामला 900 करोड़ रुपए के कर्ज से जुड़ा हुआ था, जिसे आईडीबीआई बैंक ने विजय माल्या की कंपनी किंगफिशर एयरलाइंस को दिया था। बाद में, एसबीआई के नेतृत्व में बैंकों के एक समूह ने माल्या के खिलाफ एक और धोखाधड़ी की शिकायत दर्ज करवाई।

    इसके बाद शुरू हुई जांच में सामने आया कि माल्या ने किंगफिशर एयरलाइंस का चेयरमैन रहते हुए, लोन लेने के लिए कई फ्रॉड किए हैं। इसमें मनी लॉन्ड्रिंग जैसे आरोप भी शामिल हैं।

    2018 में एफईओ एक्ट के लागू होने के बाद माल्या के खिलाफ इसी कानून के तहत कार्यवाही होनी शुरू हो गई। इसके विरोध में माल्या ने हाईकोर्ट में याचिका लगाई थी। इसकी सुनवाई जारी है। ईडी ने माल्या की इस याचिका के खिलाफ जवाब दाखिल करते हुए कहा था कि माल्या के भारत लौटे बिना उसे किसी भी तरह की सुरक्षा देना सही नहीं है। ईडी ने कहा कि विजय माल्या 2016 में जांच से बचने के लिए देश छोड़कर भाग गए थे। इसके बाद उनका पासपोर्ट रद्द कर दिया गया, और उनके खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी हुआ। नवंबर 2016 में उन्हें “घोषित अपराधी” घोषित किया गया। 2017 और 2018 में विशेष अदालत ने उनके खिलाफ नए वारंट जारी किए, और उन्हें अदालत में उपस्थित होने का आदेश दिया, लेकिन माल्या भारत नहीं लौटे।

    2016 में इन केसों से बचने के लिए ब्रिटेन गए माल्या तब से वहीं भगोड़े के रूप में रह रहे हैं। हालांकि, जब भी उन्हें भारत वापस आने के लिए कहा गया, तब सुरक्षा चिंताओं का हवाला देते हुए उन्होंने इससे इनकार कर दिया। एक बार उन्होंने भारत आने की इच्छा भी जताई थी, लेकिन उन्होंने गिरफ्तारी से सुरक्षा देने की मांग रखी थी, जिसे ईडी ने खारिज कर दिया था।

  • BJP सांसद अरुण गोविल का बयान: मस्जिदों और मदरसों में CCTV लगाने की मांग

    BJP सांसद अरुण गोविल का बयान: मस्जिदों और मदरसों में CCTV लगाने की मांग


    नई दिल्ली। भाजपा सांसद अरुण गोविल ने लोकसभा के शून्यकाल में मस्जिदों और मदरसों में CCTV कैमरे लगाने की मांग उठाई। उन्होंने कहा कि ये बड़े सार्वजनिक और सामुदायिक स्थल हैं, जहां सुरक्षा सुनिश्चित करना बेहद जरूरी है। सांसद ने स्पष्ट किया कि यह प्रस्ताव किसी धर्म विशेष के खिलाफ नहीं है, बल्कि देश के नागरिकों की सुरक्षा के लिए है।

    देशभर में सुरक्षा व्यवस्था:
    गोविल ने बताया कि आज देशभर के मंदिर, चर्च, गुरुद्वारे, कॉलेज, अस्पताल, बाजार और अन्य सार्वजनिक स्थलों पर CCTV कैमरे लगाए जा चुके हैं। ये कैमरे पारदर्शिता, सुरक्षा और अपराध नियंत्रण में प्रभावी साबित हुए हैं। लेकिन मस्जिदों और मदरसों में अब तक यह व्यवस्था लागू नहीं है, जबकि ये भी बड़े सार्वजनिक स्थल हैं।

    मक्का का उदाहरण:
    सांसद ने सऊदी अरब के मक्का और वहां के मदरसों का उदाहरण देते हुए कहा कि सुरक्षा कारणों से वहां CCTV कैमरे लगाए गए हैं। उन्होंने कहा, “अगर वहां सुरक्षा को प्राथमिकता दी जा सकती है, तो भारत में समान सुरक्षा मानकों को लागू करने में क्यों हिचक होना चाहिए?”

    समान राष्ट्रीय सुरक्षा नीति की अपील:
    अरुण गोविल ने केंद्र सरकार से अपील की कि देशभर में समान राष्ट्रीय सुरक्षा नीति बनाई जाए, जिसके तहत मस्जिदों और मदरसों में भी कैमरे अनिवार्य हों, जैसे मंदिरों, स्कूलों और अन्य सार्वजनिक स्थलों पर लगाए गए हैं। उनका मानना है कि इससे राष्ट्रीय सुरक्षा तंत्र और मजबूत होगा।

    सुरक्षा पर चर्चा और प्रतिक्रिया:
    गोविल के इस बयान के बाद सुरक्षा मानकों पर चर्चा तेज हो गई है। कई लोग इसे समान सुरक्षा नीति की दिशा में जरूरी कदम मान रहे हैं, जबकि कुछ इसे विवादित भी बता रहे हैं। सांसद का कहना है कि सुरक्षा सबके लिए है और इससे किसी को आपत्ति नहीं होनी चाहिए। यह कदम स्पष्ट करता है कि संसद में सुरक्षा और पारदर्शिता पर गंभीर बहस हो रही है। सांसद यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि सभी सार्वजनिक और सामुदायिक स्थल, चाहे किसी भी धर्म से संबंधित हों, सुरक्षा की दृष्टि से समान रूप से मजबूत और सुरक्षित हों।

  • राहुल गांधी ने विदेशियों से मिलने की विपक्ष की परंपरा पर उठाया सवाल, कंगना रनौत ने जताई आपत्ति

    राहुल गांधी ने विदेशियों से मिलने की विपक्ष की परंपरा पर उठाया सवाल, कंगना रनौत ने जताई आपत्ति


    नई दिल्ली। कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने केंद्र सरकार पर आरोप लगाया है कि वह विदेशी मेहमानों को विपक्ष के नेता से नहीं मिलने देती, जबकि पहले यह परंपरा रही है कि किसी भी विदेशी गणमान्य व्यक्ति को विपक्ष के नेता से मिलने की अनुमति दी जाती थी। राहुल गांधी ने अटल बिहारी वाजपेयी और मनमोहन सिंह के कार्यकाल का उदाहरण देते हुए कहा कि उस समय विपक्ष के नेताओं को भी विदेशी मेहमानों से मिलने की इजाजत थी।

    राहुल गांधी ने संसद भवन परिसर में संवाददाताओं से बातचीत में कहा कि विपक्ष के नेता का दृष्टिकोण अलग होता है और विदेशी गणमान्य अतिथि से मिलने का अधिकार उन्हें होना चाहिए। उन्होंने बताया कि मोदी सरकार और विदेश मंत्रालय इस परंपरा का पालन नहीं करते हैं। राहुल गांधी ने यह भी कहा कि जब वे विदेश यात्रा पर जाते हैं तो उन्हें भी बताया जाता है कि विदेशी नेताओं से नहीं मिलना है, जो नीति के अनुसार होता है।

    रूस के राष्ट्रपति ब्लादिमिर पुतिन की भारत यात्रा के संदर्भ में पूछे गए सवाल पर राहुल गांधी ने कहा कि आम तौर पर यह परंपरा रही है कि विदेश से आने वाले मेहमान विपक्ष के नेता से भी मिलते हैं। उन्होंने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी और डॉ. मनमोहन सिंह के समय यही नियम रहा, लेकिन अब इस परंपरा का पालन नहीं किया जाता। उनका यह भी कहना था कि एलओपी (नेता विपक्ष) एक अलग दृष्टिकोण पेश करते हैं और वह भी भारत का प्रतिनिधित्व करते हैं। केवल सरकार ही देश का प्रतिनिधित्व नहीं करती।

    राहुल गांधी के इन आरोपों के बाद बॉलीवुड और राजनीति जगत की हस्ती कंगना रनौत ने प्रतिक्रिया दी। कंगना ने कहा कि राहुल गांधी की भावनाएं देश के प्रति संदिग्ध हैं। उन्होंने कहा कि अगर राहुल गांधी अटल बिहारी वाजपेयी के समान बनने की कोशिश कर रहे हैं, तो उन्हें भाजपा में शामिल होना चाहिए। कंगना ने ट्वीट या बयान में कहा कि भगवान ने उन्हें जन्म दिया है, जीवन दिया है, वे भी अटल जी बन सकते हैं, इसके लिए उन्हें भाजपा ज्वाइन कर लेना चाहिए।

    कंगना ने कहा, “सरकार के अपने फैसले होते हैं। अटल जी नेशनल असेट थे, पूरे देश को उन पर गर्व था। लेकिन राहुल गांधी की देश के प्रति भावनाएं संदिग्ध हैं। चाहे दंगे फैलाने की योजना हो या देश को टुकड़े करने की साजिश, उनकी नीयत पर संदेह है। अगर वह खुद को अटल जी से तुलना कर रहे हैं तो मैं यही सुझाव दूंगी कि आप भाजपा में शामिल हो जाइए।”

    राहुल गांधी की टिप्पणी पर कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि विपक्ष का अधिकार है कि वह सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए और जनता के सामने अपनी राय रखे। थरूर ने यह भी कहा कि लोकतंत्र में विपक्ष को अपनी भूमिका निभाने का पूरा अधिकार है और विदेशी नेताओं से मिलने का उनका हक संविधान और परंपरा दोनों के तहत सुरक्षित है।

    विशेषज्ञों का कहना है कि राहुल गांधी का यह आरोप देश की राजनीतिक परंपरा और लोकतांत्रिक संस्थाओं की स्वतंत्रता को लेकर महत्वपूर्ण सवाल उठाता है। विपक्ष का यह अधिकार है कि वह विदेशी प्रतिनिधियों से मिले और अपने दृष्टिकोण को साझा करे। राजनीतिक विश्लेषकों का यह भी मानना है कि विदेश नीति केवल सरकार तक सीमित नहीं हो सकती, विपक्ष का दृष्टिकोण भी अंतरराष्ट्रीय संबंधों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

    राहुल गांधी के बयान और कंगना रनौत की प्रतिक्रिया के बाद इस मुद्दे पर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। विपक्ष का मानना है कि लोकतंत्र में अलग-अलग दृष्टिकोण रखने वाले नेताओं को भी सम्मान दिया जाना चाहिए और परंपराओं का पालन होना चाहिए। वहीं, भाजपा समर्थक इसे केवल राजनीति के हिस्से के रूप में देख रहे हैं।

    इस घटना ने एक बार फिर देश में राजनीतिक संवाद और विपक्ष की भूमिका को लेकर चर्चा शुरू कर दी है। राहुल गांधी का आरोप और कंगना रनौत की प्रतिक्रिया यह दर्शाती है कि राजनीतिक बयानबाजी और आलोचना आज भी भारतीय राजनीति में उतनी ही तीव्र है जितनी पहले रही है।

  • जैश-ए-मोहम्मद की महिला विंग में तेजी से बढ़ रही भर्ती, मसूद अजहर ने दिए कई खुलासे

    जैश-ए-मोहम्मद की महिला विंग में तेजी से बढ़ रही भर्ती, मसूद अजहर ने दिए कई खुलासे


    नई दिल्ली। बीते मई में भारत के ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारी नुकसान झेलने वाले आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के सरगना मसूद अजहर ने हाल ही में संगठन की महिला विंग के बारे में कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। मसूद अजहर ने दावा किया है कि संगठन की महिला विंग में अब तक लगभग पांच हजार महिलाएं शामिल हो चुकी हैं। इसके साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि इन महिलाओं को कथित तौर पर आत्मघाती हमलों के लिए प्रशिक्षण दिया जा रहा है।

    पिछले साल अक्टूबर में मसूद अजहर ने जैश की महिला ब्रिगेड की घोषणा की थी, जिसे जमात-उल-मोमिनात नाम दिया गया। इस महिला ब्रिगेड की जिम्मेदारी मसूद अजहर की बहन सईदा संभाल रही हैं। मसूद अजहर ने हाल ही में एक सोशल मीडिया पोस्ट में दावा किया कि जमात-उल-मोमिनात का प्रभाव तेजी से बढ़ रहा है और संगठन की रणनीति में इसका अहम स्थान है।

    मसूद अजहर ने बताया कि महिला विंग की गतिविधियों को और व्यवस्थित करने के लिए पाक अधिकृत कश्मीर के विभिन्न जिलों में इसका विस्तार किया जा रहा है। उनका कहना है कि हर जिले में एक महिला प्रमुख, जिसे मुंतजिमा कहा जाएगा, नियुक्त की जाएगी। यह प्रमुख स्थानीय स्तर पर महिला विंग की गतिविधियों की निगरानी करेगी और भर्ती एवं प्रशिक्षण कार्यक्रमों को संचालित करेगी।

    महिला विंग की भर्ती प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए संगठन ने ऑनलाइन प्रशिक्षण पाठ्यक्रम भी शुरू किया है। इसे ‘तुफात अल-मुमिनात’ नाम दिया गया है। इस ऑनलाइन कोर्स के तहत महिलाओं को जिहादी विचारधारा और फिदायीन हमलों के लिए मानसिक और शारीरिक प्रशिक्षण दिया जाता है। हर महिला के लिए इस कोर्स की फीस 500 रुपये रखी गई है।

    विशेषज्ञों के अनुसार, पाकिस्तान में चरमपंथी समूह महिलाओं का अकेले बाहर जाना मंजूर नहीं करते, इसलिए जैश-ए-मोहम्मद अब ऑनलाइन प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल कर महिलाओं की भर्ती और प्रशिक्षण कर रहा है। संगठन का उद्देश्य आईएसआईएस, हमास और लिट्टे जैसी अंतरराष्ट्रीय आतंकी संस्थाओं की तर्ज पर महिला आतंकी ब्रिगेड तैयार करना और उन्हें आत्मघाती हमलों में इस्तेमाल करना है।

    मसूद अजहर के खुलासों से यह स्पष्ट होता है कि जैश-ए-मोहम्मद अपने संगठन को पुनः संगठित करने और महिला आतंकियों के माध्यम से नई रणनीतियों को लागू करने की तैयारी में है। इसके तहत महिलाओं को सक्रिय रूप से आतंकी गतिविधियों में शामिल करने का प्रयास किया जा रहा है।

    विशेषज्ञों का कहना है कि महिला विंग की इस तरह की विस्तार योजना खतरे को और बढ़ा सकती है। महिलाओं के प्रशिक्षण और भर्ती के ऑनलाइन कार्यक्रम से संगठन न केवल अपनी पहुंच को बढ़ा रहा है, बल्कि उन्हें फिदायीन हमलों के लिए तैयार भी कर रहा है। यह कदम आतंकवाद के खिलाफ सुरक्षा एजेंसियों के लिए नए खतरे पैदा कर सकता है।

    जैश-ए-मोहम्मद की इस नई रणनीति ने न केवल भारत बल्कि पूरे क्षेत्र में चिंता बढ़ा दी है। सुरक्षा एजेंसियों को इस बात पर विशेष ध्यान देना होगा कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के माध्यम से महिलाएं कैसे आतंकवाद में शामिल हो रही हैं और उनका प्रशिक्षण किस हद तक जा रहा है।

    अंततः, मसूद अजहर द्वारा किए गए खुलासे इस बात की ओर इशारा करते हैं कि जैश-ए-मोहम्मद अपनी महिला विंग के माध्यम से संगठन की ताकत बढ़ाने और नई रणनीतियों को लागू करने में जुटा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम क्षेत्र में सुरक्षा की दृष्टि से गंभीर चुनौती पेश कर सकता है और इसके लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग और सतर्कता की आवश्यकता है।

  • पुतिन की भारत यात्रा राष्ट्रपति भवन पहुंचे पीएम मोदी पुतिन का होगा औपचारिक स्वागत

    पुतिन की भारत यात्रा राष्ट्रपति भवन पहुंचे पीएम मोदी पुतिन का होगा औपचारिक स्वागत


    नई दिल्ली । रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने 4 दिसंबर 2025 को दो दिवसीय भारत यात्रा शुरू की। यह यात्रा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निमंत्रण पर हो रही है और चार साल बाद उनकी भारत यात्रा है। इस दौरान भारत और रूस के बीच रणनीतिक और रक्षा सहयोग को बढ़ाने व्यापारिक रिश्तों को प्रगाढ़ करने और अन्य महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की जाएगी।

    भारत-रूस साझेदारी की 25वीं वर्षगांठ

    पुतिन की यात्रा भारत और रूस के बीच विशेष रणनीतिक साझेदारी के 25 वर्ष पूरे होने के मौके पर हो रही है। यह साझेदारी अक्टूबर 2000 में शुरू हुई थी और दिसंबर 2010 में इसे स्पेशल एंड प्रिविलेज्ड स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप का दर्जा दिया गया। इस दौरान दोनों देशों के बीच सहयोग का दायरा लगातार बढ़ा है, खासकर रक्षा ऊर्जा और व्यापारिक संबंधों में।

    यात्रा का मुख्य उद्देश्य

    पुतिन की इस यात्रा में प्रमुख रूप से रक्षा सहयोग, व्यापारिक रिश्तों और बाहरी दबावों से दोनों देशों को बचाने पर ध्यान दिया जाएगा। भारत और रूस के बीच रक्षा क्षेत्र में पुराने संबंध रहे हैं, और दोनों देशों के बीच यह सहयोग और मजबूत हो सकता है। साथ ही, भारत में छोटे मॉड्यूलर रिएक्टरों के क्षेत्र में भी दोनों देशों के बीच साझेदारी पर विचार हो सकता है।

    शिखर सम्मेलन और RT इंडिया चैनल का शुभारंभ

    5 दिसंबर को पुतिन का औपचारिक स्वागत होगा जिसके बाद 23वां भारत-रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन आयोजित होगा। इस सम्मेलन में प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति पुतिन प्रमुख मुद्दों पर चर्चा करेंगे जिनमें रक्षा ऊर्जा व्यापार और सामरिक साझेदारी से संबंधित मुद्दे शामिल होंगे। सम्मेलन के बाद पुतिन रूस के प्रसारक रूसी टेलीविजन के नए भारतीय चैनल का शुभारंभ करेंगे। यह चैनल भारत में रूसी मीडिया की पहुंच को बढ़ाने में मदद करेगा और भारत-रूस के संबंधों को और मजबूत बनाएगा।

    राजकीय भोज और भविष्य की दिशा

    यात्रा के अंतिम दिन राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु पुतिन के सम्मान में एक राजकीय भोज आयोजित करेंगी। यह भोज भारत-रूस संबंधों की गहरी साझेदारी और मित्रता का प्रतीक होगा। जाएगा। भारत और रूस के रिश्ते खासकर रक्षा क्षेत्र में महत्वपूर्ण रहे हैं और यह यात्रा इन रिश्तों को एक नए दौर में प्रवेश दिला सकती है।

    भारत-रूस का सामरिक महत्व

    भारत और रूस के बीच सामरिक रिश्ते बहुत मजबूत रहे हैं, विशेषकर रक्षा क्षेत्र में। रूस ने हमेशा भारत को उन्नत रक्षा प्रणाली प्रदान की है, जिसमें विमान, मिसाइलें और अन्य तकनीकी सहयोग शामिल है। दोनों देशों के बीच ऊर्जा विज्ञान तकनीकी और शिक्षा के क्षेत्र में भी सहयोग बढ़ा है।  यह यात्रा भारत और रूस के रिश्तों में एक नई दिशा का संकेत देती है, जिसमें दोनों देशों के साझा हितों के साथ-साथ वैश्विक राजनीति में सामरिक समन्वय भी बढ़ेगा। पुतिन की यात्रा विशेष रूप से रक्षा और व्यापार के क्षेत्रों में भारत-रूस साझेदारी के भविष्य के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।

  • गुरुग्राम में भाजपा पार्षद की बेटी ने शादी से एक दिन पहले दर्ज कराई शिकायत, पुलिस ने सुरक्षित निकाला

    गुरुग्राम में भाजपा पार्षद की बेटी ने शादी से एक दिन पहले दर्ज कराई शिकायत, पुलिस ने सुरक्षित निकाला


    नई दिल्ली । गुरुग्राम में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसमें भाजपा पार्षद नरेश कटारिया की बेटी ने अपनी शादी से ठीक एक दिन पहले अपने माता-पिता के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। लड़की का आरोप है कि उसके माता-पिता उसकी मर्जी के खिलाफ शादी कराने पर अड़े हुए थे और उसे घर में बंधक बनाकर रखने की कोशिश कर रहे थे।

    सूत्रों के अनुसार, लड़की ने पुलिस को बताया कि उसके माता-पिता ने उसके मोबाइल फोन छीन लिए थे और उसे कमरे में बंद कर दिया था। इसके बावजूद उसने लैपटॉप का इस्तेमाल कर प्रदेश के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी, पुलिस आयुक्त गुरुग्राम, जिला उपायुक्त, महिला आयोग और सेक्टर-9ए पुलिस स्टेशन को ईमेल के माध्यम से अपनी शिकायत भेजी।

    लड़की ने पुलिस को यह भी बताया कि उसने एमबीए और एमएड तक की पढ़ाई की है और पिछले 15 वर्षों से एक दोस्त के साथ प्रेम संबंध में है। उसकी शादी चार दिसंबर को तय की गई थी, लेकिन वह उस व्यक्ति से विवाह करना चाहती थी, जिससे वह लंबे समय से संबंध में है। लड़की का कहना है कि उसके माता-पिता उसकी मर्जी को नजरअंदाज कर उसे मजबूर कर रहे थे।

    सेक्टर-9ए पुलिस ने तुरंत मामले में कार्रवाई की और लड़की को देर रात उसके घर से सुरक्षित निकालकर सेफ हाउस में शिफ्ट कर दिया। पुलिस ने इस बात पर जोर दिया कि लड़की की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।

    भाजपा नेता नरेश कटारिया ने फिलहाल इस मामले पर कोई टिप्पणी करने से मना कर दिया है। वहीं पुलिस मामले की जांच कर रही है और आगे की कार्रवाई की योजना बना रही है।

    विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मामले परिवारिक विवाद से बढ़कर बच्चों के अधिकार और उनकी सुरक्षा का मामला बन जाते हैं। कानून के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति अपनी मर्जी के खिलाफ शादी करने पर मजबूर किया जा रहा है, तो वह इसे पुलिस में रिपोर्ट कर सकता है और उसकी सुरक्षा के लिए उचित कदम उठाए जाते हैं।

    इस घटना ने समाज में एक बार फिर सवाल खड़ा कर दिया है कि पारिवारिक दबाव में लोग अपनी मर्जी के खिलाफ निर्णय लेने को मजबूर क्यों होते हैं। सामाजिक और कानूनी जानकार कहते हैं कि ऐसी परिस्थितियों में बच्चों की इच्छाओं और स्वतंत्रता का सम्मान करना जरूरी है।

    पुलिस अधिकारियों ने मीडिया को बताया कि लड़की फिलहाल सुरक्षित है और उसे किसी भी तरह का खतरा नहीं है। वे परिवार के अन्य सदस्यों से पूछताछ कर रहे हैं और मामले की पूरी जांच कर रहे हैं। वहीं महिला आयोग ने भी इस मामले पर नजर बनाए रखी है और जरूरत पड़ने पर कार्रवाई की बात कही है।

    इस घटना ने न केवल गुरुग्राम बल्कि पूरे देश में शादी और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के मामलों पर ध्यान आकर्षित किया है। कई मानवाधिकार और महिला संगठन भी इस मामले को लेकर गंभीर हैं और उन्होंने लड़की की सुरक्षा सुनिश्चित करने और उसके अधिकारों की रक्षा करने की अपील की है।

    अंततः यह मामला यह बताता है कि आज के समय में भी कई युवा अपनी पसंद और मर्जी के खिलाफ शादी के दबाव का सामना कर रहे हैं। इसके अलावा, यह घटना यह भी दिखाती है कि जब युवा अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाते हैं, तो कानून और पुलिस उन्हें सुरक्षा प्रदान कर सकती है।

  • बॉम्बे हाईकोर्ट का महत्वपूर्ण फैसला लाउडस्पीकर का उपयोग किसी धर्म में अनिवार्य नहीं

    बॉम्बे हाईकोर्ट का महत्वपूर्ण फैसला लाउडस्पीकर का उपयोग किसी धर्म में अनिवार्य नहीं


    नई दिल्ली । बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर बेंच ने एक महत्वपूर्ण निर्णय में कहा है कि किसी भी धर्म में लाउडस्पीकर का उपयोग अनिवार्य नहीं है। कोर्ट का यह फैसला महाराष्ट्र के गोंडिया जिले की गौसिया मस्जिद द्वारा दायर याचिका के संदर्भ में आया। मस्जिद ने लाउडस्पीकर के उपयोग को पुनः बहाल करने की मांग की थी, लेकिन अदालत ने इसे खारिज करते हुए सुप्रीम कोर्ट के फैसले को बरकरार रखा। कोर्ट का मानना था कि धार्मिक पूजा के लिए लाउडस्पीकर का इस्तेमाल जरूरी नहीं है, और इसके बिना भी धार्मिक कार्य संपन्न किए जा सकते हैं।

    सुप्रीम कोर्ट के पहले के फैसले का संदर्भ

    बॉम्बे हाईकोर्ट ने अपने फैसले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए निर्देशों का हवाला दिया। सुप्रीम कोर्ट ने पहले भी यह स्पष्ट किया था कि किसी भी धर्म में लाउडस्पीकर म्यूजिक इंस्ट्रूमेंट या ढोल का इस्तेमाल करके शांति भंग करने का निर्देश नहीं दिया गया है। इसके बजाय, सभी धार्मिक गतिविधियां शांतिपूर्ण और बिना किसी व्यवधान के की जानी चाहिए। कोर्ट ने यह भी कहा कि यह समझना जरूरी है कि धर्म की प्रामाणिकता लाउडस्पीकर जैसे उपकरणों पर निर्भर नहीं करती।

    याचिकाकर्ता से सबूत की मांग

    बॉम्बे हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता गौसिया मस्जिद से यह प्रमाणित करने के लिए सबूत मांगे थे कि नमाज पढ़ने के लिए लाउडस्पीकर का इस्तेमाल अनिवार्य है। अदालत ने स्पष्ट रूप से कहा कि यदि यह साबित नहीं हो सकता तो लाउडस्पीकर का उपयोग अनुमति देने का कोई आधार नहीं हो सकता। याचिकाकर्ता इस मामले में कोई ठोस दस्तावेज पेश करने में असफल रहा जिससे अदालत ने इसके पक्ष में निर्णय नहीं दिया। अदालत ने यह भी उल्लेख किया कि इस तरह के मामलों में धार्मिक पूजा और ध्वनि प्रदूषण के बीच संतुलन बनाए रखना जरूरी है।

    ध्वनि प्रदूषण और स्वास्थ्य पर असर

    कोर्ट ने ध्वनि प्रदूषण के मुद्दे पर भी गंभीर चिंता व्यक्त की। उसने कहा कि लाउडस्पीकर से निकलने वाली ध्वनि पर्यावरण संरक्षण अधिनियम 1986 का उल्लंघन कर सकती है और यह स्वास्थ्य पर गंभीर असर डाल सकती है। कोर्ट ने यह भी कहा कि भारत में हर नागरिक को अपनी इच्छा से सुनने का अधिकार है और किसी को बिना उनकी अनुमति के जोर से आवाज सुनने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता। इसलिए यह जरूरी है कि हर व्यक्ति की शांति और स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए, लाउडस्पीकर का उपयोग नियंत्रित किया जाए।

    समाज में शांति और सम्मान की आवश्यकता

    बॉम्बे हाईकोर्ट का यह फैसला समाज में शांति और सम्मान बनाए रखने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है। जहां एक ओर धार्मिक स्वतंत्रता को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए, वहीं दूसरी ओर किसी के अधिकारों का उल्लंघन किए बिना यह सुनिश्चित करना भी जरूरी है कि किसी की पूजा-पाठ में व्यवधान न आए। यह फैसला इस बात को भी उजागर करता है कि धार्मिक अनुष्ठानों में लाउडस्पीकर का उपयोग अनिवार्य नहीं है और किसी भी धर्म का पालन शांति और सम्मान के साथ किया जाना चाहिए। अंतत यह फैसला उन स्थानों पर लाउडस्पीकर के उपयोग को लेकर एक नया दृष्टिकोण प्रस्तुत करता है जो न केवल धार्मिक स्वतंत्रता बल्कि समाज में शांति और समरसता के लिए भी एक अहम संदेश है।

  • इंडिगो का ऑपरेशनल क्रैश, 550 से ज़्यादा उड़ानें रद्द, DGCA की फटकार के बाद एयरलाइन ने यात्रियों से मांगी सार्वजनिक माफ़ी

    इंडिगो का ऑपरेशनल क्रैश, 550 से ज़्यादा उड़ानें रद्द, DGCA की फटकार के बाद एयरलाइन ने यात्रियों से मांगी सार्वजनिक माफ़ी


    नई दिल्ली। देश की सबसे बड़ी विमानन कंपनी इंडिगो (IndiGo) इस समय अपने सबसे बड़े परिचालन संकट से जूझ रही है। गुरुवार को एयरलाइन ने देशभर में 550 से अधिक उड़ानें रद्द कर दीं, जिससे हजारों यात्रियों को एयरपोर्ट पर लंबी कतारों और भयानक अनिश्चितता का सामना करना पड़ा। इस गंभीर स्थिति पर नागर विमानन महानिदेशालय (DGCA) ने कड़ी फटकार लगाई है, जिसके बाद इंडिगो ने यात्रियों और हितधारकों से आधिकारिक तौर पर माफी मांगी है।

    नवंबर में 1200 से अधिक रद्द, स्टाफ की कमी मुख्य वजह
    इंडिगो, जो सामान्य दिनों में लगभग 2,300 उड़ानें संचालित करती है, नवंबर महीने से ही गहरे संकट में है।नवंबर में एयरलाइन को कुल 1,232 उड़ानें रद्द करनी पड़ी थींडीजीसीए की जांच के बाद, इंडिगो ने कबूल किया कि 1,232 रद्द उड़ानों में से 755 उड़ानें अकेले स्टाफ की कमी के कारण रद्द हुईं। इसके अलावा, एटीसी फेलियर (92), एयरपोर्ट प्रतिबंध (258), और अन्य कारणों से भी परिचालन बाधित हुआ।

    DGCA की सख्ती और ‘सेवा गुणवत्ता’ पर सवाल
    प्रदर्शन में आई इस भारी गिरावट के बाद डीजीसीए ने न केवल जांच के आदेश दिए, बल्कि एयरलाइन प्रबंधन को सेवा गुणवत्ता में सुधार के लिए कड़े कदम उठाने की चेतावनी दी। डीजीसीए ने अधिक क्रू भर्ती करने, बेहतर योजना और निगरानी की सलाह दी है।

    सीईओ का ईमेल लीक: ‘हम वादा पूरा नहीं कर सके’
    बड़े पैमाने पर रद्दीकरण के कारण यात्रियों की नाराजगी सोशल मीडिया पर खुलकर सामने आई। इस बीच, इंडिगो के सीईओ पीटर एल्बर्ट ने कर्मचारियों को ईमेल भेजकर स्थिति पर चिंता व्यक्त की। उनका ईमेल वायरल हो गया, जिसमें उन्होंने स्वीकार किया।
    हम रोजाना 3.8 लाख यात्रियों की सेवा करते हैं और चाहते हैं कि हर ग्राहक को अच्छा अनुभव मिले। पिछले दिनों हम यह वादा पूरा नहीं कर सके और हमने सार्वजनिक रूप से इसके लिए माफी मांगी है।सीईओ ने परिचालन संकट के लिए मामूली तकनीकी खामियों, शेड्यूल बदलाव, खराब मौसम, एविएशन सिस्टम में भीड़भाड़ और नई FDTL नॉर्म्स (Flight Duty Time Limitations Norms) के प्रभाव को मुख्य कारण बताया।

    संकट से उबरने की ‘युद्धस्तर पर’ कवायद
    इंडिगो ने अब बयान जारी कर यात्रियों को आश्वस्त किया है कि वे MoCA, DGCA और एयरपोर्ट ऑपरेटरों के साथ समन्वय करके युद्धस्तर पर काम कर रहे हैं ताकि परिचालन सामान्य हो सके। एयरलाइन ने कहा है कि वह डीजीसीए के निर्देशों का पालन करेगी और स्टाफ तथा प्रबंधन की कमी से जुड़ी समस्याओं को शीघ्र सुलझाएगी।इंडिगो ने यात्रियों से अपनी उड़ान की स्थिति लगातार जांचने और एयरपोर्ट पर समय से पहले पहुंचने की अपील की है।