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  • IndiGo Flight Cancellation: 6 दिसंबर को उड़ानें बहाल लेकिन पूर्ण सामान्यता में वक्त लगेगा

    IndiGo Flight Cancellation: 6 दिसंबर को उड़ानें बहाल लेकिन पूर्ण सामान्यता में वक्त लगेगा


    नई दिल्ली । 6 दिसंबर को देशभर में हवाई यात्रियों के लिए राहत की खबर आई जब IndiGo ने अपनी उड़ान सेवाएं कुछ हद तक बहाल कर दीं। हालांकि, विमानन कंपनी के ऑपरेशन अभी पूरी तरह से सामान्य नहीं हुए हैं। तकनीकी संकट के कारण कई घंटों तक उथल-पुथल रही और कई उड़ानें रद्द हो गईं। इंडिगो के अनुसार उनके ऑपरेशन को पूरी तरह से सामान्य होने में कुछ और दिन लग सकते हैं और अनुमान है कि 10 से 15 दिसंबर तक शेड्यूल स्थिर हो सकेगा।

    यात्रियों को अभी भी मुश्किलों का सामना

    उड़ानें शुरू होने के बाद भी यात्रियों की समस्याएं खत्म नहीं हुईं। कई यात्री अभी भी रिफंड की प्रतीक्षा कर रहे हैं, जबकि रीबुकिंग में दिक्कतें आ रही हैं। ऐप और वेबसाइट धीमे चलने के कारण लोग अपनी टिकट अपडेट नहीं कर पा रहे हैं और उड़ानों के समय में भी लगातार बदलाव हो रहे हैं। इस वजह से यात्रियों में भ्रम की स्थिति बनी हुई है और एयरपोर्ट्स और स्टेशनों पर भारी भीड़ देखी जा रही है।

    दूसरी एयरलाइनों का सहयोग

    IndiGo की परेशानियों को देखते हुए अन्य एयरलाइनों ने यात्रियों को राहत देने के लिए कदम उठाए। स्पाइसजेट ने कुछ नए रूट्स पर अतिरिक्त उड़ानें शुरू कीं जबकि एयर इंडिया ने भी भीड़ भाड़ वाले मार्गों पर अपनी फ्लाइट्स की संख्या बढ़ा दी। इसके चलते कई फंसे हुए यात्रियों को वैकल्पिक उड़ान मिल सकी जिससे उनकी परेशानी कुछ हद तक कम हुई।

    रेलवे की राहत और सरकार का नियंत्रण

    हवाई सेवाओं में गड़बड़ी का सीधा असर रेलवे पर पड़ा क्योंकि लोग ट्रेन से यात्रा करने की ओर रुख कर रहे थे। इस स्थिति को संभालने के लिए भारतीय रेलवे ने कई रूट्स पर अतिरिक्त कोच और विशेष ट्रेनें चलाईं जिससे लंबी दूरी के यात्रियों को राहत मिली। यह कदम काफी प्रभावी साबित हुआ और बड़ी संख्या में यात्री अपनी यात्रा को सुगमता से पूरा कर पाए।

    सरकार ने भी हालात की गंभीरता को समझते हुए 24 घंटे काम करने वाला कंट्रोल रूम सक्रिय कर दिया है। नागर विमानन मंत्रालय और DGCA नागरिक उड्डयन महानिदेशालय लगातार एयरलाइनों से अपडेट ले रहे हैं और यात्रियों के हित में सख्त निगरानी रखी जा रही है। मंत्रालय का मुख्य उद्देश्य किरायों में बढ़ोतरी को रोकना और उड़ानों की नियमितता को जल्दी से बहाल करना है ताकि यात्रियों को कोई नुकसान न हो।

    इंडिगो की फ्लाइट्स पर असर

    इंडिगो की उड़ानों पर गड़बड़ी के कारण तिरुवनंतपुरम चेन्नई और चंडीगढ़ जैसे प्रमुख एयरपोर्ट्स पर भी प्रभाव पड़ा। तिरुवनंतपुरम एयरपोर्ट पर 22 घरेलू और 4 अंतरराष्ट्रीय उड़ानें तय थीं, जिनमें से छह घरेलू उड़ानें रद्द कर दी गईं। चेन्नई एयरपोर्ट पर 48 इंडिगो उड़ानें रद्द हुईं जिसमें 28 प्रस्थान और 20 आगमन शामिल थे। चंडीगढ़ एयरपोर्ट पर भी 10 उड़ानें रद्द हो गईं जिससे स्थानीय यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।

    आगे क्या होगा

    यात्रियों के लिए अगले कुछ दिन अहम होंगे, क्योंकि उड़ानों के समय में बदलाव संभव है और कई उड़ानें सीमित संख्या में चलाई जाएँगी। रिफंड और रीबुकिंग की प्रक्रिया में भी कुछ और समय लग सकता है, क्योंकि सिस्टम धीरे-धीरे सामान्य हो रहा है। हालांकि एयरलाइन और सरकारी अधिकारियों का कहना है कि आने वाले दिनों में स्थिति में सुधार होगा और यात्रियों को राहत मिलेगी।

    6 दिसंबर को इंडिगो के ऑपरेशन में आंशिक सुधार हुआ लेकिन अभी पूरी स्थिति सामान्य होने में समय लगेगा। सरकार और अन्य एयरलाइनों द्वारा उठाए गए कदमों से यात्रियों को कुछ राहत मिली है लेकिन पूरी प्रक्रिया के सामान्य होने में कुछ दिन और लग सकते हैं। ऐसे में यात्रियों को समय रहते उड़ान का शेड्यूल चेक करते रहना चाहिए और किसी भी बदलाव के लिए तैयार रहना चाहिए।

  • पुस्तक में सिगरेट दिखाने को नहीं माना तंबाकू उत्पाद का प्रचार

    पुस्तक में सिगरेट दिखाने को नहीं माना तंबाकू उत्पाद का प्रचार


    नई दिल्ली। सुप्रीम न्यायालय ने शुक्रवार को अरुंधति रॉय की पुस्तक ‘मदर मैरी कम्स टू मी’ के संबंध में दायर याचिका खारिज कर दी। याचिका में पुस्तक की बिक्री, वितरण और प्रदर्शन पर रोक लगाने का अनुरोध किया गया था। याचिकाकर्ता का तर्क था कि पुस्तक के आवरण पर रॉय को सिगरेट पीते हुए दिखाया गया है, जो कानून का उल्लंघन है।

    केरल के उच्च न्यायालय द्वारा जनहित याचिका खारिज होने के बाद याचिकाकर्ता राजसिम्हन ने उच्चतम न्यायालय में अपील की थी। इस मामले की सुनवाई प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने की। पीठ ने याचिका खारिज करते हुए कहा कि पुस्तक में किसी प्रकार का सिगरेट या तंबाकू उत्पाद का प्रचार नहीं किया गया है और न ही लेखक ने ऐसा करने की कोशिश की है।

    प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि रॉय एक प्रसिद्ध लेखिका हैं और उन्होंने पुस्तक में कोई ऐसा संदेश नहीं दिया है जो तंबाकू उत्पादों के प्रचार के रूप में देखा जा सके। उन्होंने कहा कि पुस्तक में चेतावनी भी दी गई है और इसे केवल पाठकों के लिए प्रकाशित किया गया है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि शहर में किसी प्रकार की किताब की होर्डिंग नहीं लगाई गई है और यह मामला केवल पुस्तक के पाठक वर्ग तक सीमित है।

    पीठ ने यह भी कहा कि लेखक और प्रकाशक ने तंबाकू उत्पाद अधिनियम, 2003 की धारा पांच का उल्लंघन नहीं किया है। इस धारा के तहत सिगरेट और अन्य तंबाकू उत्पादों के विज्ञापन, प्रचार और प्रायोजन पर प्रतिबंध है। प्रधान न्यायाधीश ने कहा, “हमें उच्च न्यायालय के आदेश में हस्तक्षेप करने का कोई कारण नहीं दिखता।”

    याचिकाकर्ता के वकील ने तर्क दिया कि पुस्तक में सिगरेट के रूप में दिखाए गए चित्र के साथ पर्याप्त चेतावनी नहीं है और डिस्क्लेमर भी बहुत छोटा है। उन्होंने कहा कि स्पष्ट नहीं है कि यह सामान्य बीड़ी है या किसी अन्य प्रकार का तंबाकू उत्पाद।

    प्रधान न्यायाधीश ने याचिकाकर्ता के तर्कों को खारिज करते हुए कहा कि पुस्तक, लेखक या प्रकाशक का किसी भी प्रकार के तंबाकू उत्पादों के प्रचार से कोई संबंध नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि पाठक लेखक के विचारों से असहमत हो सकते हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि इस आधार पर मुकदमा दायर किया जाए।

    अदालत ने यह स्पष्ट किया कि पुस्तक केवल लेखक के अनुभव और संस्मरण पर आधारित है और इसमें किसी प्रकार का विज्ञापन या प्रचार शामिल नहीं है। पुस्तक में दिखाई गई तस्वीरें लेखक के निजी अनुभव को दर्शाती हैं, न कि किसी उत्पाद के प्रचार के लिए बनाई गई हैं।

    इस मामले में उच्च न्यायालय और सुप्रीम कोर्ट दोनों ने यह मान्यता दी कि लेखक और प्रकाशक ने किसी भी कानून का उल्लंघन नहीं किया है। अदालत ने यह भी रेखांकित किया कि पुस्तक पाठकों तक अपनी कहानियों और विचारों के माध्यम से पहुँचना चाहती है, न कि किसी तंबाकू उत्पाद के प्रचार के लिए।

    अदालत का यह निर्णय लेखक की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और कला की स्वतंत्रता के दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि किसी को लेखक के विचार पसंद नहीं आते, तो उसके खिलाफ कानून द्वारा सीधे कार्रवाई नहीं की जा सकती।

    इस प्रकार, सुप्रीम न्यायालय ने अरुंधति रॉय की पुस्तक पर किसी भी प्रकार के प्रतिबंध को नकारते हुए याचिका खारिज कर दी। अदालत ने यह संदेश भी दिया कि पुस्तक, लेखक और प्रकाशक की जिम्मेदारी केवल पाठकों तक साहित्यिक सामग्री पहुँचाने तक सीमित है, और इसमें किसी तंबाकू उत्पाद के प्रचार का कोई तत्व नहीं है।

  • दिल्ली कोर्ट में अर्जी दायर, 1978 के वोटर केस पर सोनिया गांधी पर कार्रवाई की मांग

    दिल्ली कोर्ट में अर्जी दायर, 1978 के वोटर केस पर सोनिया गांधी पर कार्रवाई की मांग


    नई दिल्‍ली । कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद सोनिया गांधी के खिलाफ वोट चोरी का मुकदमा दर्ज कराने के लिए एक शख्स ने दिल्ली के राउज़ एवेन्यू कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। अपनी अर्जी में उस शख्स ने मजिस्ट्रेट कोर्टके उस आदेश को चुनौती दी है जिसमें सोनिया गांधी के खिलाफ FIR दर्ज करने का निर्देश देने से साफ तौर पर मना कर दिया गया था। अर्जी में आरोप लगाया गया है कि भारतीय नागरिकता लेने से तीन साल पहले ही सोनिया गांधी का नाम मतदाता सूची में जोड़ दिया गया था।

    यह केस शुक्रवार को राउज़ एवेन्यू कोर्ट के स्पेशल जज (PC Act) विशाल गोगने के सामने आया। जज ने इसे 9 दिसंबर को विचार के लिए लिस्ट करने का आदेश दिया है। यह क्रिमिनल रिवीजन अर्जी विकास त्रिपाठी नाम के एक व्यक्ति ने फाइल की है। त्रिपाठी ने अपनी अर्जी में एडिशनल चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट (ACMM) वैभव चौरसिया के 11 सितंबर के आदेश को चुनौती दी है।

    1983 में भारत की नागरिक बनी थीं सोनिया
    त्रिपाठी ने आरोप लगाया है कि सोनिया गांधी का नाम 1980 में नई दिल्ली चुनाव क्षेत्र की मतदाता सूची में शामिल किया गया था, जबकि वह अप्रैल 1983 में भारत की नागरिक बनी थीं। अर्जी में त्रिपाठी ने अन्य विवरण देते हुए आरोप लगाया है कि सोनिया गांधी का नाम सबसे पहले 1980 में मतदाता सूची में शामिल किया गया था, फिर 1982 में उसे हटा लिया गया था। इसके बाद 1983 में फिर से उनका नाम मतदाता सूची में शामिल किया गया, जब वह आधिकारिक तौर पर भारत की नागरिक बन गईं।

    कुछ जाली कागजात जमा किए होंगे?
    त्रिपाठी के वकीलों ने आरोप लगाया है कि 1980 में मतदाता सूची में उनका नाम शामिल होने का मतलब है कि तब उन्होंने कुछ जाली कागजात जमा किए थे। वकीलों के मुताबिक यह एक ऐसा केस है जो दिखाता है कि एक संज्ञेय अपराध किया गया है। इससे पहले सितंबर में जज चौरसिया ने यह कहते हुए याचिका खारिज कर दी थी कि कोर्ट ऐसी जांच नहीं कर सकता क्योंकि इससे संवैधानिक अधिकारियों को सौंपे गए क्षेत्रों में गलत तरीके से उल्लंघन होगा और यह भारत के संविधान के आर्टिकल 329 का उल्लंघन होगा।

  • सरकार का 2030 लक्ष्य: सड़क दुर्घटनाओं में मौतें और चोटें 50% तक घटाना

    सरकार का 2030 लक्ष्य: सड़क दुर्घटनाओं में मौतें और चोटें 50% तक घटाना

    नई दिल्ली। भारत में सड़क दुर्घटनाओं में जान गंवाने वालों की संख्या 2024 में 2.3 प्रतिशत बढ़कर 1.77 लाख से अधिक हो गई है। यह आंकड़ा दर्शाता है कि देश में प्रतिदिन औसतन 485 लोग सड़क हादसों में अपनी जान गंवा रहे हैं। यह जानकारी केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने शुक्रवार को लोकसभा में लिखित उत्तर में दी।

    गडकरी ने कहा कि फरवरी 2020 में सड़क सुरक्षा पर आयोजित तीसरे वैश्विक मंत्री स्तरीय सम्मेलन में ‘स्टॉकहोम घोषणापत्र’ अपनाया गया था। इसके तहत 2030 तक सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों और चोटों को 50 प्रतिशत तक कम करने का वैश्विक लक्ष्य तय किया गया है।

    मंत्री ने बताया कि राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार, 2024 में देश में सभी प्रकार की सड़कों पर दुर्घटनाओं में मरने वालों की कुल संख्या 1,77,177 थी। इसमें ईडीएआर पोर्टल से प्राप्त पश्चिम बंगाल का डेटा भी शामिल है। उन्होंने यह भी कहा कि 2023 में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की पुलिस द्वारा कुल 4,80,583 सड़क हादसों की रिपोर्ट दर्ज की गई थी, जिसमें 1,72,890 लोगों की मौत हुई और 4,62,825 लोग घायल हुए।

    सड़क दुर्घटनाओं में भारत की स्थिति वैश्विक स्तर पर चिंताजनक बनी हुई है। ‘वर्ल्ड रोड स्टेटिस्टिक्स 2024’ के अनुसार, चीन में प्रति लाख आबादी सड़क दुर्घटनाओं में मौत की दर 4.3 है, अमेरिका में यह 12.76 है, जबकि भारत में यह आंकड़ा 11.89 है। यानी भारत का दर अमेरिका के बराबर करीब है और चीन से कई गुना अधिक।

    सड़क सुरक्षा सुधार के लिए सरकार ने 4-‘ई’ रणनीति अपनाई है। इसका आधार चार स्तंभ हैं: एजुकेशन (शिक्षा), इंजीनियरिंग (सड़क और वाहन दोनों की गुणवत्ता), एनफोर्समेंट (कानून का प्रवर्तन) और इमरजेंसी केयर (आपातकालीन उपचार)। इस बहुआयामी रणनीति के तहत सड़क सुरक्षा के लिए कई पहलें की गई हैं।

    शिक्षा के क्षेत्र में सरकार ने awareness कार्यक्रम और सड़क सुरक्षा पर जागरूकता अभियान चलाए हैं, ताकि लोग यातायात नियमों का पालन करें और सुरक्षित ड्राइविंग अपनाएं। इंजीनियरिंग के तहत सड़कों और वाहनों की सुरक्षा बढ़ाने के लिए नए मानक तय किए गए हैं। एनफोर्समेंट के क्षेत्र में ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन पर कड़ी कार्रवाई की जा रही है, और इमरजेंसी केयर के तहत दुर्घटना के तुरंत बाद प्राथमिक उपचार और अस्पताल तक पहुँचाने की व्यवस्था को मजबूत किया गया है।

    मंत्री ने बताया कि राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की पुलिस विभागों के सहयोग से सड़क सुरक्षा को लेकर निगरानी और आंकड़ों का विश्लेषण किया जा रहा है। इससे यह पहचानने में मदद मिलती है कि किन सड़कों और क्षेत्रों में सबसे अधिक हादसे हो रहे हैं और उन्हें सुधारने के लिए क्या कदम उठाए जा सकते हैं।

    सड़क सुरक्षा को लेकर सरकार की यह पहल समय की मांग है, क्योंकि बढ़ती आबादी और वाहन संख्या के कारण सड़क हादसों में लगातार वृद्धि हो रही है। 2030 तक सड़क दुर्घटनाओं में मौतों और चोटों को आधा करने का लक्ष्य एक महत्वाकांक्षी कदम है। इसके सफल होने के लिए जनता, सरकार और सड़क उपयोगकर्ताओं को मिलकर काम करना होगा।

    गडकरी ने कहा कि सड़क सुरक्षा केवल कानून या प्रशासन का विषय नहीं है, बल्कि यह समाज की जिम्मेदारी भी है। सुरक्षित सड़कें, सुरक्षित वाहन और सुरक्षित ड्राइविंग की संस्कृति ही सड़क दुर्घटनाओं की दर को घटा सकती है। सरकार ने इसके लिए व्यापक कार्यक्रम और योजनाएं शुरू की हैं, जिनमें स्मार्ट रोड प्रोजेक्ट, हाईवे पर CCTV निगरानी, ट्रैफिक नियमों के कड़े प्रवर्तन और आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं का विस्तार शामिल है।

    सरकारी आंकड़े और वैश्विक तुलना यह दर्शाते हैं कि भारत को सड़क सुरक्षा के क्षेत्र में और भी कदम उठाने की आवश्यकता है। जनता की भागीदारी और सरकारी प्रयासों के समन्वय से ही सड़क हादसों में मौत और चोटों को कम किया जा सकता है।

  • 40,000 पैकेट बिरयानी की तैयारी, मस्जिद कार्यक्रम को लेकर इलाक़े में उत्साह

    40,000 पैकेट बिरयानी की तैयारी, मस्जिद कार्यक्रम को लेकर इलाक़े में उत्साह


    बहरामपुर । TMC के निलंबित विधायक हुमायूं कबीर (Humayun Kabir) ने पश्चिम बंगाल (West Bengal) के मुर्शिदाबाद जिले में ‘बाबरी जैसी मस्जिद’ (Babri Mosque) बनाने का ऐलान कर बड़ा बखेड़ा खड़ा कर दिया है। शुक्रवार को कलकत्ता हाईकोर्ट (Calcutta High Court) ने भी मस्जिद के निर्माण में हस्तक्षेप करने के इनकार कर दिया है। इसके बाद अब शिलान्यास समारोह को भव्य बनाने की तैयारियां शुरू हो गई हैं। समारोह स्थल को एक विशाल कार्यस्थल में बदल दिया गया है जहां शनिवार को बाबरी जैसी मस्जिद का शिलान्यास होगा। जानकारी के मुताबिक समारोह में सऊदी अरब के मौलवियों के आने की संभावना है। वहीं यहां हजारों लोगों के लिए भोजन तैयार किया जा रहा है। अधिकारियों ने समारोह से पहले सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है।

    इससे पहले TMC ने हुमायूं कबीर को पार्टी से निकाल दिया है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बिना नाम लिए इस तरह के आयोजनों के खिलाफ चेतावनी भी जारी की है। हालांकि कबीर राजनीतिक घटनाक्रम और प्रशासनिक दबाव से बेपरवाह दिखे। कबीर ने पत्रकारों से कहा है कि शनिवार को मोरादघी के पास 25 बीघा जमीन पर लगभग तीन लाख लोग इकट्ठा होंगे। उन्होंने यह भी बताया कि कई राज्यों के धार्मिक नेताओं ने अपनी उपस्थिति की पुष्टि की है। कबीर ने बटुआ, “सऊदी अरब से दो काजी सुबह कोलकाता हवाई अड्डे से एक विशेष काफिले में पहुंचेंगे।”

    60-70 लाख रुपए खानपान में खर्च
    राज्य के एकमात्र उत्तर-दक्षिण मुख्य राजमार्ग एनएच-12 के किनारे स्थित विशाल आयोजन स्थल पर जोर-शोर से तैयारियां चल रही हैं। भीड़ के लिए शाही बिरयानी बनाने के लिए मुर्शिदाबाद की सात खानपान एजेंसियों को अनुबंध दिया गया है। विधायक के एक करीबी सहयोगी ने बताया कि मेहमानों के लिए लगभग 40,000 पैकेट और स्थानीय लोगों के लिए 20,000 पैकेट बनाए जा रहे हैं, जिससे सिर्फ भोजन का खर्च 30 लाख रुपए से अधिक हो जाएगा। उन्होंने कहा, “आयोजन स्थल का बजट लगभग 60-70 लाख रुपए होगा।”

    मंच पर 400 मेहमानों के बैठने की व्यवस्था
    धान के खेतों के ऊपर बना मुख्य मंच इस विशाल आयोजन का सबसे स्पष्ट प्रतीक बन गया है। करीबी सहयोगी ने बताया कि 150 फुट लंबा और 80 फुट चौड़ा यह मंच लगभग 400 मेहमानों के बैठने की क्षमता के साथ 10 लाख रुपए की अनुमानित लागत से बनाया जा रहा है। आयोजकों ने बताया कि लगभग 3,000 स्वयंसेवक भीड़ को नियंत्रित करने, मार्गों को नियंत्रित करने और NH-12 पर अवरोधों को रोकने के लिए तैनात किए गए हैं। इनमें से 2,000 ने शुक्रवार सुबह से ही काम शुरू कर दिया था।

    कुरान की आयतों के साथ शुरू होगा समारोह
    कबीर ने कहा कि समारोह पूर्वाह्न 10 बजे कुरान की आयतों के साथ शुरू होगा, जिसके बाद दोपहर में आधारशिला समारोह होगा। उन्होंने कहा, “औपचारिकताएं दो घंटे पहले शुरू हो जाएंगी। पुलिस के निर्देशानुसार शाम चार बजे तक मैदान खाली कर दिया जाएगा।”

    3000 पुलिसकर्मी तैनात
    इस बीच शुक्रवार को कलकत्ता हाईकोर्ट के निर्देश के बाद जिला पुलिस ने सार्वजनिक व्यवस्था और NH-12 पर निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए हुमायूं कबीर की टीम के साथ कई दौर की चर्चा की। जिला पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि बेलडांगा और रानीनगर थाना क्षेत्र में लगभग 3,000 पुलिसकर्मियों को तैनात किया जाएगा।

  • IndiGo का सिस्टम फेल होने से देश में हवाई यात्रा संकट… एयरपोर्ट पर स्टेशनों जैसा नजारा

    IndiGo का सिस्टम फेल होने से देश में हवाई यात्रा संकट… एयरपोर्ट पर स्टेशनों जैसा नजारा


    नई दिल्ली।
    हमारा प्यारा भारत (India) इस समय पर हवाई यात्रा संकट (Air Travel Crisis) का सामना कर रहा है। तेज रफ्तार ट्रेनों के जरिए और भी कम समय में यात्रा करने का सपना देखने वाला आम आदमी (Common man) इस समय इंडिगो (IndiGo Airline) के ठप्प होने से परेशान है। देश की सबसे बड़ी एयरलाइन इंडियो (IndiGo Airline) ने पिछले कुछ समय में 1 हजार से ज्यादा उड़ानों को रद्द कर दिया है, जिसकी वजह से देश भर के एयरपोर्ट्स रेलवे स्टेशन की तरह नजर आने लगे हैं। चारों तरफ अफरा-तफरी मची हुई है और लोग अपने गंतव्य तक जाने के लिए परेशान नजर आ रहे हैं।

    अंतर्देशीय उड़ानों का सबसे बड़ा नेटवर्क चलाने वाली इंडिगो एयरलाइन के इस संकट के पीछे कोई एक कारण नहीं है। इसके पीछे एक के बाद एक आए कई बदलाव शामिल हैं। तो आइए जानते हैं कि आखिर ऐसा क्या हुआ कि हजारों की संख्या में लोग एयरपोर्ट पर ही फंसते नजर आए।


    कैसे बढ़ा संकट?

    इंडिगो एयरलाइन शुरुआत से ही फ्लाइट्स के लेट होने की समस्या का सामना कर रही थी। शुरुआत ने एयरलाइन ने इसके पीछे छोटी तकनीकी खराबियां, सर्दियों के लिए फ्लाइट की नई टाइमिंग, एयरपोर्ट पर भीड़ और मौसम को जिम्मेदार बताया था। हालांकि, इसको एयरलाइन को असली झटका तब लगा जब सरकार की तरफ से फ्लाइट ड्यूटी टाइम लिमिटेशन नामक नए नियम लागू कर दिए गए, जिनका मकसद पायलटों को थकान से बचाना था।


    सरकार ने जारी किए नए नियम

    पहले से ही स्टाफ की कमी के साथ ज्यादा उड़ानों का संचालन कर रही इंडिगो के लिए यह नियम एक बड़ी परेशानी बनकर आए। हालांकि, सरकार ने यह कदम पायलट और एयरलाइन की भलाई के लिए ही उठाया था। लेकिन पहले से ही फंसी हुई इंडिगो के लिए यह नियम झेल पाना आसान नहीं था। इन नियमों की वजह से बड़ी संख्या में पायलट अनिवार्य आराम पर चले गए, जिससे स्टाफ की भारी कमी हो गई। इसकी वजह से कई फ्लाइट्स कैंसिल करनी पड़ी।


    एयरबस 320 की चेतावनी

    फ्लाइट्स की छोटी तकनीकी खराबियों, सरकार के नए नियमों से परेशानी का सामना कर रही इंडिगो एयरलाइन के लिए असली खतरा तब सामने आया जब एयरबस 320 की चेतावनी के बाद देर रात उड़ाने प्रभावित होना शुरू हुईं। रात के 12 बजे के बाद नए नियम लागू हो गए, इसकी वजह से बहुत सारी फ्लाइट्स कैंसिल करने का सिलसिला शुरू हो गया।


    इंडिगो का बड़ा आकार

    भारत में सबसे ज्यादा उड़ानों का परिचालन करने वाली इंडिगो के लिए उसका बड़ा आकार ही संकट का कारण बन गया है। हालांकि, एयरपोर्ट पर यात्रियों की भीड़ और लगातार रद्द होती उड़ानों के बीच सरकार ने नए नियमों में कुछ राहत दी है। डीजीसीए ने शुक्रवार को नया आदेश जारी करके एक महत्वपूर्ण नियम वापस ले लिया। इसके मुताबिक अब पायलट्स की सप्ताहिक आराम को छुट्टी में नहीं बदला जा सकता है। सरकार द्वारा हटाए गए इस नियम से एयरलाइन को पायलट रोटेट करने में आसानी होगी, जिससे कुछ दबाव कम होने की उम्मीद है।

    इंडिगो भले ही इस नियम के हटने के बाद स्थिरता की उम्मीद कर रही हो, लेकिन पायलट संघ इससे नाराज नजर आता है। पायलट संघों का आरोप है कि इंडिगो के मैनेजमेंट ने समय रहते इन नियमों और परेशानियों के लिए तैयारी नहीं की। संघ के मुताबिक इंडिगो के मैनेजमेंट को इस बात की जानकारी थी कि सरकार ऐसे नियम लागू करने वाली है। इसके लिए नई भर्ती की जानी चाहिए थी, लेकिन एयरलाइ्ंस ने ऐसा नहीं किया। उन्होंने पहले से ही कम स्टाफ को और कम कर दिया, जिससे समस्या बिगड़ गई।

    कई विशेषज्ञों का कहना है कि इंडिगो ने इस संकट को बढ़ावा देकर सरकार पर दबाव बनाने की कोशिश की है। इससे सरकार द्वारा लागू किए गए नियमों में ढिलाई ली जा सके। हालांकि, पायलट संघ ने इसे पायलट और हवाई यात्रियों की सुरक्षा के संकट से जोड़ा है।

    कारण चाहे कुछ भी हो, लेकिन परेशानी आम आदमी को ही हो रही है। देश भर के एयरपोर्ट्स पर इस समय भारी भीड़ मची हुई है। हर दिन एयरलाइन की तरफ से सैकड़ों फ्लाइट्स को कैंसिल किया जा रहा है, जिसकी वजह से एयरपोर्ट पर स्टेशन जैसे हालात बने हुए हैं। सरकार का मानना है कि 10 फरवरी 2026 तक पूरी तरह से स्थिरता लाई जा सकती है।

  • बंगाल में आज 'बाबरी मस्जिद' का शिलान्यास…HC का निर्देश- तनाव रोके सरकार, CISF तैनात

    बंगाल में आज 'बाबरी मस्जिद' का शिलान्यास…HC का निर्देश- तनाव रोके सरकार, CISF तैनात


    कोलकाता।
    कोलकाता हाईकोर्ट (Kolkata High Court) ने शुक्रवार को पश्चिम बंगाल सरकार (West Bengal Government) को निर्देश दिया कि मुर्शिदाबाद जिले (Murshidabad district) के बेलडांगा में संभावित सांप्रदायिक तनाव को रोकने के लिए जो भी आवश्यक हो, वह कदम तुरंत उठाए जाएं। यह निर्देश निलंबित टीएमसी विधायक हुमायूं कबीर (TMC MLA Humayun Kabir) द्वारा 6 दिसंबर को प्रस्तावित बाबरी मस्जिद शिलान्यास कार्यक्रम के मद्देनजर दिया गया है। यह वही तारीख है जब 1992 में अयोध्या में बाबरी का ढांचा ढहाया गया था।

    कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश सुजॉय पॉल और न्यायमूर्ति पार्थ सारथी सेन की खंडपीठ ने इस संबंध में दायर एक जनहित याचिका का निपटारा करते हुए कहा कि राज्य सरकार को अपने रुख के अनुसार कार्य करना होगा… मुर्शिदाबाद में कानून-व्यवस्था कड़ाई से कायम रखी जानी चाहिए और नागरिकों के जीवन व संपत्ति की रक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए।


    8 महीने पहले भड़के थे दंगे

    हुमायूं कबीर का यह मस्जिद शिलान्यास कार्यक्रम ऐसे समय में प्रस्तावित है जब मुर्शिदाबाद आठ महीने पहले वक्फ (संशोधन) अधिनियम, 2025 के विरोध में भड़की सांप्रदायिक हिंसा से उबरा है। इस पृष्ठभूमि में प्रशासन ने सुरक्षा को लेकर पूरी सतर्कता बरतने का दावा किया है।

    राज्य के महाधिवक्ता किशोर दत्ता ने अदालत को बताया कि किसी भी तरह की गड़बड़ी रोकने के लिए पर्याप्त पुलिसबल तैनात कर दिया गया है। उधर, उप सॉलिसिटर-जनरल राजदीप मजूमदार ने कहा कि सीआईएसएफ की 19 कंपनियां पहले से इलाके में मौजूद हैं।

    अधिकारियों के मुताबिक, 3500 की संयुक्त सुरक्षा टुकड़ी, जिसमें आरएएफ की यूनिटें शामिल हैं, वे शुक्रवार शाम से रेजीनगर और आसपास के इलाकों में मोर्चा संभाल चुकी है। बीएसएफ की दो कंपनियां एनएच-12 की सुरक्षा के लिए तैयार रखी गई हैं। इसी बीच, निलंबन के एक दिन बाद विधायक कबीर को रेजीनगर थाने तलब किया गया, जहां उनसे कई घंटे पूछताछ हुई।


    कबीर का दावा- कुरान पढ़ी जाएगी, कोई राजनीति नहीं होगी

    पूरे विवाद के बीच हुमायूं कबीर दिनभर कार्यक्रम की तैयारियों की निगरानी करते रहे। उन्होंने अपनी टीम से 30000 बिरयानी पैकेट मेहमानों के लिए तैयार रखने के निर्देश दिए। साथ ही वे जमीअत उलेमा-ए-हिंद के कुछ अलग हुए गुटों और ऑल बंगाल इमाम मुअज्जिन एसोसिएशन के प्रतिनिधियों से भी मिले।

    उन्होंने पत्रकारों से कहा- मुख्य कार्यक्रम दोपहर 12 बजे शुरू होगा। दो घंटे तक कुरान पढ़ी जाएगी। कोई भाषण नहीं होगा, कोई राजनीतिक प्रतिनिधित्व नहीं होगा, न पार्टी के झंडे, न कोई राजनीतिक बयानबाजी। मैं 2,000 स्वयंसेवकों के साथ उपस्थित रहूंगा। सब जानते हैं… यह कोई नई बात नहीं है।


    टीएमसी का आरोप- विपक्ष की साजिश

    टीएमसी प्रवक्ता कुनाल घोष ने इस पूरे घटनाक्रम को साजिश करार दिया। उनका आरोप है कि राज्य चुनावी वर्ष में प्रवेश कर रहा है और प्रतिद्वंदी दल टीएमसी को बदनाम करने की कोशिश कर रहे हैं। हाई कोर्ट के निर्देशों के बाद राज्य सरकार और केंद्रीय एजेंसियाँ दोनों ही सतर्क मोड पर आ गई हैं। चौतरफ़ा सुरक्षा व्यवस्था के बीच शनिवार को होने वाले इस कार्यक्रम पर पूरे प्रदेश की नज़र रहेगी।

    राज्यपाल ने लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की
    राज्यपाल सी वी आनंद बोस ने बंगाल के लोगों से शांति बनाए रखने और भड़काऊ बयानों व अफवाहों से प्रभावित न होने का आग्रह किया। उन्होंने यह आग्रह तृणमूल कांग्रेस के निलंबित विधायक हुमायूं कबीर द्वारा मुर्शिदाबाद जिले में बाबरी मस्जिद की तर्ज पर बनाई गई मस्जिद की आधारशिला रखने से पहले किया है।

    लोक भवन द्वारा सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर किए गए एक पोस्ट के अनुसार, बोस ने राज्य सरकार से आग्रह किया है कि वह यह सुनिश्चित करने के लिए सभी आवश्यक कार्रवाई करे कि कहीं भी कोई अशांति न हो और कानून व्यवस्था बनी रहे। उन्होंने लोकभवन में तत्काल प्रभाव से 24×7 कार्यरत रहने वाला एक ‘एक्सेस प्वाइंट सेल’ बनाने का भी निर्देश दिया है। इसके अध्यक्ष सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी एस के पटनायक होंगे।

    पोस्ट में कहा गया है, “लोग फोन या ईमेल के माध्यम से लोक भवन ‘एक्सेस प्वाइंट सेल’ से संपर्क करने और किसी भी अप्रिय घटना, धमकी या किसी के द्वारा दिए जा रहे भड़काऊ बयान की सूचना देने के लिए स्वतंत्र हैं।” पोस्ट में कहा गया है कि राज्यपाल समूची स्थिति पर निगरानी रखेंगे। राज्यपाल को विश्वास है कि राज्य सरकार यह सुनिश्चित करने के लिए सभी आवश्यक कार्रवाई करेगी कि कानून और व्यवस्था को कोई खतरा न हो।

  • मप्र के कूनो राष्ट्रीय उद्यान में मादा चीता वीरा के शावक की मौत

    मप्र के कूनो राष्ट्रीय उद्यान में मादा चीता वीरा के शावक की मौत


    – एक दिन पहले ही मुख्यमंत्री ने वीरा और उसके दो शावकों को बाड़े से खुले जंगल में किया था रिलीज

    श्योपुर। मध्य प्रदेश के श्योपुर जिले में स्थित कूनो राष्ट्रीय उद्यान में दक्षिण अफ्रीकी मादा चीता वीरा के 10 महीने के शावक की मौत हो गई। उसे मादा चीता वीरा और दूसरे शावक के साथ एक दिन पहले ही मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बाड़े से कूनो के पारोंद क्षेत्र में खुले जंगल में रिलीज किया था। शुक्रवार शाम पारोंद के जंगल में शावक का शव मिला है।

    चीता प्रोजेक्ट के फील्ड डायरेक्टर उत्तम कुमार शर्मा ने बताया कि शावक की मौत का वास्तविक कारण पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा। प्रारंभिक जांच में किसी तरह की चोट या संघर्ष के निशान नहीं मिले हैं। उन्होंने बताया कि वीरा और उसका दूसरा शावक पूरी तरह सुरक्षित हैं। उनकी लगातार निगरानी की जा रही है। कूनो में चीतों की गतिविधियों और स्वास्थ्य पर चौबीसों घंटे नजर रखी जा रही है।

    गौरतलब है कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने गुरुवार को श्योपुर जिले के कूनो राष्ट्रीय उद्यान में अंतरराष्ट्रीय चीता दिवस पर तीन चीतों को स्वछंद विचरण के लिये बाड़े से अभयारण्य में छोड़ा था। इनमें मादा चीता वीरा और उसके दो शावक शामिल हैं। बताया गया है कि गुरुवार देर रात ही ये शावक अपनी मां से अलग हो गया था। शुक्रवार को इसकी खोज की गई। शाम को पारोंद के जंगल में उसका शव मिला है।

    फील्ड डायरेक्टर उत्तम शर्मा ने बताया कि इस शावक की मौत के बाद कूनो नेशनल पार्क में चीतों की कुल संख्या अब 28 रह गई है। इनमें 8 वयस्क चीते (5 मादा और 3 नर) और भारत में जन्मे 20 शावक शामिल हैं। पार्क के अन्य सभी चीते स्वस्थ बताए गए हैं। चीता प्रोजेक्ट के अधिकारी इस घटना की बारीकी से जांच कर रहे हैं। इसमें शावकों के प्राकृतिक व्यवहार, क्षेत्र में मौजूद खतरों और निगरानी प्रणाली की समीक्षा भी शामिल है।

  • मप्र के छतरपुर में ट्रक और कार की जोरदार भिड़ंत, एक ही परिवार के 5 लोगों की मौत, दो घायल

    मप्र के छतरपुर में ट्रक और कार की जोरदार भिड़ंत, एक ही परिवार के 5 लोगों की मौत, दो घायल


    छतरपुर।
    मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले में सागर-कानपुर हाईवे नंबर 34 पर शुक्रवार की रात एक भीषण सड़क हादसे में एक ही परिवार के पांच लोगों की मौत हो गई। यहां बड़ामलहरा तहसील के मुंगवारी और चौपरिया सरकार गांव के पास एक तेज रफ्तार ट्रक और कार के बीच जोरदार भिड़ंत हो गई। इस हादसे में दो घायल हुए हैं, जिन्हें गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराया है। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और मामले की जांच शुरू कर दी है।

    गुलगंज थाना पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, सतना के नागौद निवासी प्रजापति परिवार के सात लोग शुक्रवार को सेंट्रो कार नंबर एमपी 19 सीए 0857 से सागर के शाहगढ़ के लिए जा रहे थे। रात करीब आठ बजे बड़ामलहरा तहसील के मुंगवारी और चौपरिया सरकार गांव के बीच तेज रफ्तार कार और ट्रक की टक्कर हो गई। कार की रफ्तार इतनी थी कि हादसे के बाद कार का अगला हिस्सा पूरी तरह नष्ट हो गया। हादसे में पांच लोगों की मौके पर ही मौत हो गई। सूचना मिलते ही सागर आईजी हिमानी खन्ना सहित गुलगंज पुलिस मौके पर पहुंची। कार के गेट तोड़कर शवों को बाहर निकाला जा सका। हादसे में दो लोग घायल हुए हैं, जिनकी हालत गंभीर है। दोनों घायलों को इलाज के लिए जिला अस्पताल रिफर किया गया है, जहां वह आईसीयू में भर्ती हैं।

    गुलगंज थाना प्रभारी गुरुदत्त शेषा ने बताया कि एक तेज रफ्तार कार सामने से आ रहे ट्रक से टकरा गई थी, जिसमें पांच लोगों की मौत हो गई है। कार में सात लोग सवार थे। दो घायलों को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है। उन्होंने बताया कि मृतकों की पहचान महेंद्र प्रजापति (30), लक्ष्मण प्रजापति (40), दीपक प्रजापति (24), सुरेंद्र प्रजापति (26) और लालू प्रजापति (17) के रूप में हैं। दो लोग भूपेंद्र और जितेंद्र प्रजापति की हालत गंभीर है। हादसे के बाद ट्रक चालक वाहन को लेकर भाग निकला था। जिसे पुलिस ने पीछा कर बिजावर रोड पर पकड़ लिया। फिलहाल उससे पूछताछ की जा रही है।

    पुलिस के मुताबिक, सतना निवासी प्रजापति परिवार के लोग दो कारों में छतरपुर से शाहगढ़ जा रहे थे। सभी बहन को ससुराल से मायके लाने के लिए निकले थे। एक कार आगे निकल गई थी, जबकि पीछे चल रही सेंट्रो कार हादसे का शिकार हो गई।

  • मप्र में इंडिगो की 65 से ज्यादा फ्लाइट रद्द, यात्री बोले- कोई मदद नहीं मिल रही

    मप्र में इंडिगो की 65 से ज्यादा फ्लाइट रद्द, यात्री बोले- कोई मदद नहीं मिल रही


    इंदौर।
    देश की सबसे बड़ी एयरलाइन कंपनी इंडिगो पिछले चार दिन से क्रू मेंबर्स की कमी से जूझ रही है। इसके कारण देशभर के कई एयरपोर्ट पर 500 से ज्यादा फ्लाइट्स रद्द हो गईं। इनमें मध्य प्रदेश से संचालित होने वाली 65 से भी ज्यादा फ्लाइट्स शामिल हैं। शुक्रवार को इंदौर से जाने वाली 26 उड़ानों को निरस्त कर दिया गया, जबकि इंदौर आने वाली इंडिगो की 18 से ज्यादा फ्लाइट भी रद्द है। वहीं, भोपाल से कुल 18 और जबलपुर से इंडिगो की 6 में से 5 फ्लाइट को निरस्त कर दिया गया है। इससे यात्रियों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। यात्रियों का कहना है कि विमानतल पर उन्हें कोई मदद नहीं मिल रही है।

    दरअसल, एविएशन सेक्टर के नए सुरक्षा नियमों की वजह से देश की सबसे बड़ी एयरलाइन कंपनी इंडिगो लगातार क्रू की कमी से जूझ रही है। इंडिगो की फ्लाइट्स का परिचालन शुक्रवार को भी लड़खड़ाता नजर आ रहा है। मुंबई और दिल्ली से ग्वालियर आने वाली फ्लाइट भी कैंसिल हैं। ऐसे में पैसेंजर ट्रेन का सहारा ले रहे हैं। शुक्रवार को इंदौर से जाने वाली 26 उड़ानों को निरस्त कर दिया गया। वहीं, इंदौर आने वाली इंडिगो की 18 से ज्यादा फ्लाइट भी कैंसिल है। इंदौर एयरपोर्ट पर पैसेंजर नागराज ने कहा कि मेरी शाम 6.45 बजे बेंगलुरु की फ्लाइट थी, वह कैंसिल हो गई है। एयरलाइंस के कर्मचारी से पूछा तो वह बोला कि इसके बाद वाली 7.45 की फ्लाइट में आपकी सीट बुक कर दूंगा लेकिन उसका जाना भी निश्चित नहीं है। नागराज ने कहा कि एयरलाइंस की तरफ से कहा गया है कि पैसे रिफंड किए जा रहे हैं। आगे की व्यवस्था खुद ही कर लें।

    भोपाल एयरपोर्ट पर पैसेंजर सस्मिता ने कहा कि मेरी भोपाल से बेंगलुरु की फ्लाइट थी। एयरलाइंस की तरफ से कोई भी जानकारी नहीं दी गई है। इनकी हेल्पलाइन में भी कोई मैसेज नहीं है। हम परेशान हो रहे हैं।

    हालांकि, इंडिगो ने कहा है कि जल्द ही नियमित संचालन बहाल किया जाएगा। एयरलाइन ने यात्रियों से अपील की है कि वे एयरपोर्ट आने से पहले अपनी उड़ान की ताजा जानकारी ले लें। यात्रियों की मदद के लिए भोपाल एयरपोर्ट प्रबंधन ने वाहन पार्किंग शुल्क पूरी तरह माफ कर दिया है। एयरपोर्ट प्रशासन ने कहा है कि इस चुनौतीपूर्ण समय में सभी यात्रियों की सहायता को प्राथमिकता दी जा रही है।

    इंडिगो की ग्वालियर से दिल्ली और मुंबई आने-जाने वाली फ्लाइट्स भी कैंसिल की गई हैं। ऐसे में यात्री ट्रेन के जरिए अपनी मंजिल की तरफ रवाना हो रहे हैं। भोपाल एयरपोर्ट पर आईं सोनल को 7 दिसंबर को बेंगलुरु जाना है। वे बोलीं- इंक्वारी में इंडिगो अथॉरिटीज ने बताया कि 7 तारीख को बेंगलुरु की फ्लाइट उड़ने के चांसेज बहुत कम हैं। जिस तरह से रोजाना उड़ानें कैंसिल हो रही हैं, उनकी फ्लाइट भी कैंसिल हो सकती है।

    ट्रैवल एजेंट फेडरेशन ऑफ इंडिया के प्रदेश अध्यक्ष अमोल कटारिया ने बताया कि जिन उड़ानों का संचालन हो रहा है, वह पूरी तरह से पैक हैं। आखिरी की खाली सीटें सामान्य की अपेक्षा 4 से 5 गुना तक कीमत पर बेची जा रही हैं। शाम इंदौर से दिल्ली जाने वाली दूसरी उड़ानों में एक टिकट का किराया 36 हजार रुपये तक पहुंचा था। ऐसे में यात्रियों के लिए सफर कर पाना मुश्किल हो गया है।

    मध्य प्रदेश कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी और पूर्व मंत्री पीसी शर्मा को शुक्रवार दोपहर 1:45 पर इंडिगो की फ्लाइट से भोपाल से दिल्ली जाना था। दिल्ली से वे इंडिगो की ही फ्लाइट से देहरादून जाने वाले थे। यहां उन्हें छतरपुर के पूर्व कांग्रेस विधायक आलोक चतुर्वेदी की बेटी के विवाह समारोह में शामिल होना था लेकिन इंडिगो की फ्लाइट कैंसिलेशन के चक्कर में दोनों नेता यात्रा नहीं कर पाए।

    इंडिगो के फ्लाइट ऑपरेशन कैंसिल होने के चलते पूर्व मंत्री पीसी शर्मा भी दिल्ली में आयोजित शादी में नहीं पहुंच पा रहे हैं। उन्होंने कहा कि छतरपुर के पूर्व कांग्रेस विधायक आलोक चतुर्वेदी की बेटी के विवाह समारोह में शामिल होना था लेकिन इंडिगो की फ्लाइट कैंसिलेशन के चक्कर में यात्रा नहीं कर पाए। उन्होंने केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया से विमान परिचालन सामान्य कराने की मांग की है।


    भोपाल में इंडिगो की 18 उड़ानें रद्द, 3600 से ज्यादा यात्री प्रभावित

    इंडिगो एयरलाइंस के नेटवर्क में जारी तकनीकी और परिचालन दिक्कतों का असर भोपाल में भी दिख रहा है। यहां से आने और जाने वाली इंडिगो की कुल 9 उड़ानें रद्द करनी पड़ीं। इससे 18 फ्लाइट मूवमेंट प्रभावित हुए हैं। रद्द उड़ानों में दिल्ली की 3, मुंबई की 2, बेंगलुरु की 2, पुणे और गोवा की 1-1 उड़ान शामिल हैं। इन उड़ानों के रद्द होने से भोपाल एयरपोर्ट पर लगभग 3600 यात्री परेशान हुए। भोपाल एयरपोर्ट से रोजाना 18 उड़ानें (36 मूवमेंट) संचालित होती हैं। इनमें से इंडिगो की 14 और एयर इंडिया की 4 उड़ानें शामिल हैं। प्रतिदिन औसतन करीब 5500 यात्री यहां से यात्रा करते हैं।

    वहीं, देश के अलग-अलग शहरों से जबलपुर के डुमना एयरपोर्ट आने वाली इंडिगो की 6 में से 5 फ्लाइट आज कैंसिल हो गई हैं। इंदौर से जबलपुर होते हुए हैदराबाद जाने वाली फ्लाइट सुबह साढ़े 8 बजे आती है और 9 बजे जाती है, वह कैंसिल हो गई। मुंबई से जबलपुर होते हुए 9 बजकर 40 मिनट पर आने वाली और 10 बजे दिल्ली जाने वाली फ्लाइट कैंसिल है। बेंगलुरु से दोपहर 12 बजकर 45 मिनट पर आने वाली और वापस 1 बजकर 15 मिनट पर बेंगलुरु जाने वाली फ्लाइट कैंसिल हो गई है। दिल्ली से दोपहर डेढ़ बजे आकर वापस 2 बजे दिल्ली जाने वाली फ्लाइट कैंसिल हो गई। दिल्ली से शाम 5 बजे जबलपुर आकर साढ़े 5 बजे मुंबई जाने वाली फ्लाइट कैंसिल हो गई। इसके अलावा हैदराबाद से शाम 7 बजकर 20 मिनट पर जबलपुर आकर 7 बजकर 50 पर इंदौर जाने वाली फ्लाइट के भी लेट होने की आशंका है।