Category: National

  • यूपी चुनाव से पहले मुख्तार अंसारी परिवार में बगावती सुर! विधायक भाई पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप

    यूपी चुनाव से पहले मुख्तार अंसारी परिवार में बगावती सुर! विधायक भाई पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप


    नई दिल्ली । उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले माफिया मुख्तार अंसारी के परिवार में राजनीतिक कलह की बात खुलकर सामने आने लगी है. समाजवादी पार्टी के विधायक सुहैब उर्फ मन्नू अंसारी के बड़े भाई सलमान अंसारी के सोशल मीडिया पोस्ट के बाद सियासी तूफान आ गया है. उन्होंने पोस्ट के जरिए भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए हैं.

    सोशल मीडिया पोस्ट से मची हलचल

    सलमान अंसारी, जो सिबगतुल्लाह अंसारी के बड़े बेटे और विधायक सुहैब अंसारी के भाई हैं, ने अपने सोशल मीडिया हैंडल पर एक पोस्ट शेयर कर मोहम्मदाबाद विधानसभा क्षेत्र में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए हैं. उन्होंने एक ऑडियो क्लिप भी शेयर की है, जिससे पारिवारिक कलह की बात की है.राजनीति के जानकार इस घटनाक्रम को आगामी 2027 विधानसभा चुनाव से पहले बदलते राजनीतिक समीकरणों के तौर पर देख रहे हैं. परिवार के भीतर उठी यह बगावत विपक्ष और सत्ता पक्ष दोनों के लिए राजनीतिक मायने रखती है. क्षेत्रीय राजनीति में इसका असर पड़ना तय माना जा रहा है.

    भाई पर लगाए करोड़ों के भ्रष्टाचार के आरोप

    सलमान अंसारी ने आरोप लगाया कि पिछले चार सालों में मोहम्मदाबाद विधानसभा क्षेत्र में करोड़ों रुपये का भ्रष्टाचार हुआ है. उन्होंने कहा कि 30 हजार रुपये की स्ट्रीट लाइट के लिए डेढ़ लाख रुपये तक का खर्च दिखाया गया. विधायक निधि के लगभग 20 करोड़ रुपये में भी अनियमितताओं का आरोप लगाया गया है.

    उन्होंने कहा कि साल 2022 में जनता से विकास के नाम पर वोट मांगा गया था, लेकिन अब वह जनता को जवाब देने की स्थिति में नहीं हैं. उनके इस बयान से साफ है कि मामला सिर्फ राजनीतिक नहीं बल्कि व्यक्तिगत असंतोष से भी जुड़ा हुआ है. सोशल मीडिया पर यह पोस्ट तेजी से वायरल हो रही है.

    कौन हैं सिबगतुल्लाह अंसारी?

    सिबगतुल्लाह अंसारी, जो मुख्तार अंसारी के बड़े भाई हैं, दो बार विधायक रह चुके हैं. उनके छोटे भाई अफजाल अंसारी भी सक्रिय राजनीति में हैं. मुख्तार अंसारी की 60 वर्ष की उम्र में बांदा जेल में 2024 में मौत हो चुकी है. वर्तमान में सुहैब अंसारी मोहम्मदाबाद सीट से विधायक हैं.

    वहीं, एमआईएम के पूर्वांचल प्रवक्ता अफसर महमूद ने नसीमुद्दीन सिद्दीकी के समाजवादी पार्टी में शामिल होने पर तंज कसा है. उन्होंने कहा कि जो सपा आजम खान के साथ नहीं रही, वह नसीमुद्दीन के साथ क्या होगी. साथ ही आरोप लगाया कि आबकारी मंत्री रहते समय नसीमुद्दीन ने बड़े घोटाले किए थे.

    उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले माफिया मुख्तार अंसारी के परिवार में राजनीतिक कलह की बात खुलकर सामने आने लगी है. समाजवादी पार्टी के विधायक सुहैब उर्फ मन्नू अंसारी के बड़े भाई सलमान अंसारी के सोशल मीडिया पोस्ट के बाद सियासी तूफान आ गया है. उन्होंने पोस्ट के जरिए भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए हैं.

    सोशल मीडिया पोस्ट से मची हलचल

    सलमान अंसारी, जो सिबगतुल्लाह अंसारी के बड़े बेटे और विधायक सुहैब अंसारी के भाई हैं, ने अपने सोशल मीडिया हैंडल पर एक पोस्ट शेयर कर मोहम्मदाबाद विधानसभा क्षेत्र में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए हैं. उन्होंने एक ऑडियो क्लिप भी शेयर की है, जिससे पारिवारिक कलह की बात की है.राजनीति के जानकार इस घटनाक्रम को आगामी 2027 विधानसभा चुनाव से पहले बदलते राजनीतिक समीकरणों के तौर पर देख रहे हैं. परिवार के भीतर उठी यह बगावत विपक्ष और सत्ता पक्ष दोनों के लिए राजनीतिक मायने रखती है. क्षेत्रीय राजनीति में इसका असर पड़ना तय माना जा रहा है.

    भाई पर लगाए करोड़ों के भ्रष्टाचार के आरोप
    सलमान अंसारी ने आरोप लगाया कि पिछले चार सालों में मोहम्मदाबाद विधानसभा क्षेत्र में करोड़ों रुपये का भ्रष्टाचार हुआ है. उन्होंने कहा कि 30 हजार रुपये की स्ट्रीट लाइट के लिए डेढ़ लाख रुपये तक का खर्च दिखाया गया. विधायक निधि के लगभग 20 करोड़ रुपये में भी अनियमितताओं का आरोप लगाया गया है.

    उन्होंने कहा कि साल 2022 में जनता से विकास के नाम पर वोट मांगा गया था, लेकिन अब वह जनता को जवाब देने की स्थिति में नहीं हैं. उनके इस बयान से साफ है कि मामला सिर्फ राजनीतिक नहीं बल्कि व्यक्तिगत असंतोष से भी जुड़ा हुआ है. सोशल मीडिया पर यह पोस्ट तेजी से वायरल हो रही है.

    कौन हैं सिबगतुल्लाह अंसारी?

    सिबगतुल्लाह अंसारी, जो मुख्तार अंसारी के बड़े भाई हैं, दो बार विधायक रह चुके हैं. उनके छोटे भाई अफजाल अंसारी भी सक्रिय राजनीति में हैं. मुख्तार अंसारी की 60 वर्ष की उम्र में बांदा जेल में 2024 में मौत हो चुकी है. वर्तमान में सुहैब अंसारी मोहम्मदाबाद सीट से विधायक हैं.

    वहीं, एमआईएम के पूर्वांचल प्रवक्ता अफसर महमूद ने नसीमुद्दीन सिद्दीकी के समाजवादी पार्टी में शामिल होने पर तंज कसा है. उन्होंने कहा कि जो सपा आजम खान के साथ नहीं रही, वह नसीमुद्दीन के साथ क्या होगी. साथ ही आरोप लगाया कि आबकारी मंत्री रहते समय नसीमुद्दीन ने बड़े घोटाले किए थे.

  • रमजान में दिल्ली की शराब दुकानें हों बंद', AIMIM नेता शोएब जमाई की मांग, सावन माह से की तुलना

    रमजान में दिल्ली की शराब दुकानें हों बंद', AIMIM नेता शोएब जमाई की मांग, सावन माह से की तुलना


    नई दिल्ली । में ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिममीन यानी AIMIM के प्रदेश अध्यक्ष शोएब जमाई ने रमजान के महीने में सभी शराब की दुकानों को बंद करने की मांग की है. यह अपील 19 फरवरी को की गई, जब से रमजान शुरू होने की घोषणा हुई है. उन्होंने सावन महीने का जिक्र करते हुए दिल्ली सरकार से सार्वजनिक स्थानों पर शराब की बिक्री और खपत पर रोक लगाने की भी बात कही है.

    शोएब जमाई ने ये मांग सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट के जरिए की है जिसमें उन्होंने सरकार से कार्रवाई की मांग की. उन्होंने कहा कि रमजान मुसलमानों का पवित्र महीना है, इसलिए इस दौरान शराब की दुकानें बंद की जानी चाहिए.

    उन्होंने अपने पोस्ट में सावन महीने का उदाहरण देते हुए लिखा कि जब सावन में नॉन वेज दुकानों को बंद कर सम्मान दिखाया जाता है, तो रमजान में भी उसी तरह सम्मान मिलना चाहिए. उन्होंने सार्वजनिक स्थानों पर शराब की बिक्री और सेवन पर प्रतिबंध लगाने की भी मांग रखी.

  • शाम 5 बजे से दिल्ली के ये रास्ते रहेंगे बंद! निकलने से पहले चेक करें ट्रैफिक एडवाइजरी

    शाम 5 बजे से दिल्ली के ये रास्ते रहेंगे बंद! निकलने से पहले चेक करें ट्रैफिक एडवाइजरी


    नई दिल्ली । AI इम्पैक्ट समिट 2026 का आज चौथा दिन है. इस बड़े आयोजन के चलते दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने शाम 5 बजे से रात 9 बजे तक विशेष ट्रैफिक एडवाइजरी जारी की है. भारत मंडपम और एयरपोर्ट के आसपास वीवीआईपी मूवमेंट्स के कारण राजधानी की कई अहम सड़कों पर आवाजाही सीमित रहेगी. दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने सड़कों पर निकलने से पहले लोगों से ट्रैफिक एडवाइजरी का पालन करने की सलाह दी गई है ताकि किसी तरह की परेशानी से बचा जा सके.

    इन मार्गों पर पड़ेगा असर

    सरदार पटेल मार्ग मदर टेरेसा क्रेसेंट तीन मूर्ति मार्ग अकबर रोड जनपथ विंडसर प्लेस तीस जनवरी मार्ग पृथ्वीराज रोड राजेश पायलट मार्ग सुभ्रमण्यम भारती मार्ग मथुरा रोड भैरों मार्ग शांति पथ अफ्रीका एवेन्यू सत्य मार्ग डॉ. जाकिर हुसैन मार्ग गुरुग्राम रोड और परेड रोड जैसे रास्तों पर प्रतिबंध रह सकता है.

    एआई समिट में इमैनुएल मैक्रों

    पहले जॉगिंग फिर स्टेशन पर तफरी अब जय हो इंडिया में अलग ही दिखा मैक्रों का स्वैगसुविधा के लिए ट्रैफिक पुलिस ने कई वैकल्पिक रास्ते इस्तेमाल करने की सलाह दी है. इनमें सैन मार्टिन मार्ग पंचशील मार्ग डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम रोड कमाल अतातुर्क मार्ग औरोबिंदो मार्ग लोदी रोड बरापुल्ला रोड रिंग रोड तिलक मार्ग फिरोज शाह रोड रफी मार्ग संसद मार्ग के. कामराज मार्ग साउथ एवेन्यू रोड वंदे मातरम मार्ग एनएच-48 राव तुला राम मार्ग ओल्ड दिल्ली-गुरुग्राम रोड और यूईआर-II NH-48 सर्विस रोड शामिल हैं.

    पब्लिक एडवाइजरी जारी:

    प्रभावित रास्तों पर जाने से बचें. अपनी यात्रा पहले से प्लान करें और थोड़ा अतिरिक्त समय रखें. ट्रैफिक पुलिस के निर्देशों का पालन करें. लेन अनुशासन और ट्रैफिक व्यवस्था को बनाए रखने में सहयोग करें.

  • मानसिक अवसाद का खौफनाक अंत: बेंगलुरु में ISRO के पूर्व अधिकारी ने पत्नी की गला घोंटकर की हत्या, खुद भी मरने की थी योजना

    मानसिक अवसाद का खौफनाक अंत: बेंगलुरु में ISRO के पूर्व अधिकारी ने पत्नी की गला घोंटकर की हत्या, खुद भी मरने की थी योजना


    नई दिल्ली । बेंगलुरु कर्नाटक : कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु में एक रोंगटे खड़े कर देने वाली वारदात सामने आई है, जहाँ देश की प्रतिष्ठित संस्था भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन ISRO के एक पूर्व अधिकारी ने अपनी ही पत्नी की निर्मम हत्या कर दी। अवाल्हाली थाना क्षेत्र में हुई इस घटना ने मानसिक स्वास्थ्य की गंभीरता और उसके विनाशकारी परिणामों पर एक नई बहस छेड़ दी है। ६५ वर्षीय नागेश्वर राव ने कथित तौर पर अपनी जीवनसंगिनी की तौलिए से गला घोंटकर जान ले ली। पुलिस के अनुसार, इस खौफनाक कदम के पीछे वर्षों से चला आ रहा गहरा अवसाद डिप्रेशन मुख्य कारण बनकर उभरा है।

    शव के पास बैठकर मौत का इंतजार करता रहा हत्यारा

    पुलिस की प्रारंभिक जांच में पता चला है कि यह वारदात सुबह लगभग ११ बजे घटित हुई। नागेश्वर राव ने अचानक अपनी पत्नी पर हमला बोला और घर में मौजूद एक तौलिए से उनका गला तब तक दबाए रखा, जब तक कि उनके शरीर की हलचल पूरी तरह शांत नहीं हो गई। विचलित करने वाली बात यह है कि हत्या को अंजाम देने के बाद आरोपी भागने के बजाय घंटों अपनी पत्नी के बेजान शरीर के पास ही बैठा रहा। वह खुद भी आत्महत्या करने की फिराक में था, लेकिन मानसिक द्वंद्व और साहस की कमी के कारण वह ऐसा नहीं कर सका। अंततः कई घंटों बाद उसने अपने एक मित्र को फोन कर पूरी कहानी बयां की, जिसने तुरंत पुलिस को इस त्रासदी की जानकारी दी।
    अवसाद की गिरफ्त में टूटा खुशहाल परिवार
    नागेश्वर राव इसरो जैसे संस्थान से सेवानिवृत्त होने के बाद एक प्रतिष्ठित जीवन जी रहे थे, लेकिन भीतर ही भीतर वह गंभीर मानसिक बीमारी से जूझ रहे थे। पुलिस हिरासत में नागेश्वर ने स्वीकार किया कि वह मानसिक रूप से इतना परेशान था कि उसे अपना और अपनी पत्नी का जीवन बोझ लगने लगा था। वह खुद को खत्म करना चाहता था, लेकिन उसने पहले अपनी पत्नी को मारना उचित समझा। पुलिस अब इस बात की तहकीकात कर रही है कि क्या इस हत्याकांड के पीछे कोई तात्कालिक घरेलू विवाद था या यह पूरी तरह से अनियंत्रित डिप्रेशन का ही नतीजा है।

    विदेश में बैठी बेटी पर टूटा दुखों का पहाड़

    इस दंपत्ति की इकलौती बेटी अमेरिका में रहती है। जिस समय उसे माता-पिता के सुरक्षित और शांत बुढ़ापे की उम्मीद थी, उस समय उसे अपनी माँ की हत्या और पिता की गिरफ्तारी की खबर मिली। खुशहाल और सफल माना जाने वाला यह परिवार एक झटके में उजड़ गया। पुलिस ने आरोपी नागेश्वर राव को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है और मामले की विस्तृत चार्जशीट तैयार की जा रही है। यह घटना हमें याद दिलाती है कि मानसिक बीमारियाँ किसी भी उम्र और ओहदे के व्यक्ति को अपना शिकार बना सकती हैं, जिसके परिणाम कभी-कभी असहनीय होते हैं।
    वारदात का संक्षिप्त विवरण:विवरणप्रमुख जानकारीघटनास्थलअवाल्हाली क्षेत्र, बेंगलुरु कर्नाटक मृतक का नामनागेश्वर राव की पत्नी उम्र लगभग 60+ वर्ष आरोपी का नामनागेश्वर राव 65 वर्ष, पूर्व इसरो अधिकारी हत्या का तरीकातौलिए से गला घोंटकर Strangulation मुख्य कारणलंबे समय से चल रहा मानसिक अवसाद Depression पुलिस कार्रवाईआरोपी न्यायिक हिरासत में, हत्या का मामला दर्ज

  • दिनेशपुर में रिश्तों की बलि: जमीन के लालच और आपसी कलह में बहू ने मायके वालों के साथ मिलकर ली सास की जान

    दिनेशपुर में रिश्तों की बलि: जमीन के लालच और आपसी कलह में बहू ने मायके वालों के साथ मिलकर ली सास की जान


    नई दिल्ली । दिनेशपुर उत्तराखंड के ऊधमसिंह नगर जिले में स्थित दिनेशपुर से एक रोंगटे खड़े कर देने वाली वारदात सामने आई है। यहाँ एक ७० वर्षीय बुजुर्ग महिला, संध्या शाह की उनकी अपनी ही बहू और उसके मायके वालों ने मिलकर निर्मम हत्या कर दी। संपत्ति के लालच और घरेलू क्लेश के चलते हुई इस खूनी वारदात ने पूरे इलाके को स्तब्ध कर दिया है। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए बहू समेत छह लोगों के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज कर जांच तेज कर दी है।

    बच्ची की बीमारी बनी बहाना, जमीन पर था निशाना

    वारदात की जड़ें पिछले कई सालों से चल रहे पारिवारिक विवाद में दबी हुई थीं। घटना की रात मंगलवार को जब प्रसन्नजीत शाह की छोटी बेटी को बुखार आया, तो उसने अपनी पत्नी सुरभि पर बच्ची की देखभाल में लापरवाही बरतने का आरोप लगाया। यह छोटी सी बहस जल्द ही उग्र हो गई। दरअसल, असली विवाद प्रसन्नजीत द्वारा खरीदे गए एक प्लॉट और पैतृक संपत्ति के पैसों को लेकर था। पत्नी सुरभि चाहती थी कि संपत्ति उसके नाम पर हो, और इसी बात को लेकर घर में पिछले तीन-चार वर्षों से युद्ध जैसी स्थिति बनी हुई थी।
    कमरे में कैद कर दी दर्दनाक मौत
    बहस के दौरान सुरभि ने अपने मायके वालों को फोन कर मौके पर बुला लिया। आरोप है कि सुरभि की माँ सुजाता, बहन दिशा और भाई अमन अपने अन्य साथियों के साथ वहाँ पहुँचे और तांडव शुरू कर दिया। हमलावरों ने प्रसन्नजीत के साथ मारपीट की और ७० वर्षीय बुजुर्ग संध्या शाह को एक कमरे में बंद कर दिया। बंद कमरे के भीतर बुजुर्ग महिला को बेरहमी से पीटा गया। जब तक पड़ोसियों ने शोर सुनकर हस्तक्षेप किया और पुलिस को सूचना दी, तब तक संध्या शाह मरणासन्न स्थिति में पहुँच चुकी थीं। उन्हें तुरंत अस्पताल ले जाया गया, जहाँ चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

    सख्त कार्रवाई की मांग और पुलिसिया जांच
    घटना के बाद जिले के वरिष्ठ अधिकारी, एसएसपी अजय गणपति और एसपी सिटी उत्तम सिंह नेगी ने फॉरेंसिक टीम के साथ मौके का मुआयना किया। मृतका की बेटी रानी ने पुलिस के सामने बिलखते हुए आरोपियों के लिए कड़ी सजा की मांग की है। पुलिस ने प्रसन्नजीत की तहरीर पर बहू सुरभि, सास सुजाता, साली दिशा और साले अमन समेत कुल छह लोगों पर हत्या धारा ३०२ का मामला दर्ज किया है। फिलहाल कुछ आरोपियों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है और पूरे वार्ड में तनाव को देखते हुए पुलिस बल तैनात कर दिया गया है।
    वारदात का संक्षिप्त विवरण:विवरणप्रमुख जानकारीस्थानवार्ड चार, दिनेशपुर, ऊधमसिंह नगर उत्तराखंड मृतकसंध्या शाह उम्र 70 वर्ष मुख्य आरोपीबहू सुरभि शाह और उसके मायके वाले कुल 6 नामजद विवाद की वजहसंपत्ति का लालच और बच्ची की बीमारी पर कहासुनीपुलिस कार्रवाईहत्या का केस दर्ज, फॉरेंसिक साक्ष्य संकलित, आरोपी हिरासत में

  • राज्यसभा की 37 सीटें दांव पर… BJP-कांग्रेस को फायदा तो घाटे में कौन?

    राज्यसभा की 37 सीटें दांव पर… BJP-कांग्रेस को फायदा तो घाटे में कौन?


    नई दिल्ली । देश के 10 राज्यों की 37 राज्यसभा सीटों के लिए चुनाव का ऐलान हो गया है. निर्वाचन आयोग के मुताबिक 26 फरवरी से 5 मार्च तक नामांकन दाखिल किए जाएंगे. 16 मार्च को सुबह 9 बजे से शाम पांच बजे तक मतदान होगा और उसी दिन देर शाम तक नतीजे घोषित कर दिए जाएंगे. बीजेपी और कांग्रेस दोनों सियासी की ताकत राज्यसभा में बढ़ जाएगी तो फिर किसके सियासी घाटा होगा?

    महाराष्ट्र से लेकर बिहार, पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु सहित 10 राज्यों की 37 सीटों पर राज्यसभा चुनाव हो रहे हैं. यह सीटें अप्रैल में खाली हो रही है, जिसके चलते निर्वाचन आयोग ने 16 मार्च को चुनाव कराने का ऐलान किया है. राज्यसभा चुनाव में बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए की सीटें बढ़ने तो विपक्ष इंडिया ब्लॉक की सीटें घटनी है, लेकिन कांग्रेस की सीटों में इजाफा हो सकता है?

    एनसीपी (एसपी) के प्रमुख शरद पवार, अभिषेक मनु सिंघवी और प्रियंका चतुर्वेदी का कार्यकाल खत्म हो रहा है. इसके अलावा राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश सिंह के लेकर उपेंद्र कुशवाहा का भी टर्म पूरा हो रहा है. ऐसे में देखना है कि इन दिग्गज नेताओं में से किसकी वापसी होती है, इसके अलावा किस दल को किसे फायदा और किसे नुकसान होगा?

    देश के किस राज्य में कितनी सीटों पर चुनाव

    राज्यसभा की इन 37 सीटों में सबसे ज्यादा महाराष्ट्र से सात सीटें खाली हो रही हैं, जिन पर चुनाव है. महाराष्ट्र की सात राज्यसभा सीटों में से बीजेपी के पास दो और शरद पवार की एनसीपी के पास 2 राज्यसभा सीटें है. इसके अलावा कांग्रेस, शिवसेना (यूबीटी) और आरपीआई के पास एक-एक सीटें है.

    तमिलनाडु की जिन छह राज्यसभा सीटों पर चुनाव हो रहे हैं, उसमें से 4 राज्यसभा सीट डीएमके के पास है. इसके अलावा एक सीट AIADMK और एक सीट टीएमसी के पास है. पश्चिम बंगाल और बिहार पांच-पांच सीटों पर चुनाव हो रहे हैं. बंगाल की 5 राज्यसभा सीटों में से टीएमसी के पास 4 और एक सीट सीपीआई(एम) के कब्जे है. बिहार की पांच राज्यसभ सीटों में से जेडीयू और आरजेडी के पास 2-2 सीटें और एक सीट आरएलएम के पास है.

    ओडिशा से चार और असम से तीन सीटों पर चुनाव हो रहे हैं. ओडिशा की चार राज्यसभा सीटों में से बीजेपी के पास दो और बीजेडी के पास दो राज्यसभा सीट है. असम की तीन राज्यसभा सीटों में से बीजेपी के पास 2 और असम गढ़ परिषद के पास एक सीट है. हरियाणा, छत्तीसगढ़ और तेलंगाना से दो-दो सीटों, जबकि हिमाचल प्रदेश से एक सीट पर मतदान होगा.

    हरियाणा की दो राज्यसभा सीटों में से दोनों ही बीजेपी के पास है तो तेलंगाना की दोनों सीटों में एक कांग्रेस और बीआरएस के पास है. छत्तीसगढ़ की दोनों सीटें कांग्रेस के कब्जे में है. हिमाचल की जिस एक सीट पर राज्यसभा चुनाव हो रहे हैं, वह सीट बीजेपी के कब्जे में है.

    राज्यसभा चुनाव किसे नफा और किसे नुकसान

    देश के 10 राज्यों की 37 राज्यसभा सीटों के आंकड़े फिलहाल देखें तो बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए के पास करीब 15 सीटें है, जिसमें बीजेपी के पास 9 सीटें, जेडीयू के पास 2 सीटें, AIADM के पास एक सीट, आरएलएम के पास एक और एक सीट आरपीआई के पास है.

    वहीं, विपक्षी गठबंधन इंडिया ब्लॉक की बात करें तो 18 राज्यसभा सीटें उसके कब्जे में है, जिसमें से 4 सीटें कांग्रेस के पास, 4 सीटें टीएमसी के पास, 4 सीटें डीएमके के पास और आरजेडी के पास 2 सीटें है.साथ ही एक सीट शिवसेना (यूबीटी) और एक सीट सीपीआईएम के पास है. इसके अलावा चार सीटें अन्य दलों के पास है, जिसमें दो सीटें बीजेडी, एक सीट बीआरएस और एक सीट तमिलनाडु के क्षेत्रीय दल के कब्जे में है.

    विधानसभा की स्थिति कई राज्यों में बदल गई है. इस लिहाज से एनडीए को 2 से 3 सीट का फायदा मिल सकता है तो इंडिया ब्लॉक की सीटें 3 से 4 घट सकती है. इसके अलावा क्षेत्रीय दलों को सबसे बड़ा झटका लगने जा रहा है. बीजेपी की सीटें बढ़ने और कांग्रेस को भी मामूली सीट की बढ़त मिलने की उम्मीद है.

    कांग्रेस की सीटें 4 से बढ़कर पांच हो सकती है तो बीजेपी की सीटें 9 से बढ़कर 12 हो सकती है. लेकिन आरजेडी से लेकर शरद पवार की एनसीपी और उद्धव ठाकरे की शिवसेना (यूबीटी) के हाथ से सीटें निकल सकती हैं. इसके अलावा आरएलएम को भी नुकसान उठाना पड़ सकता है. किस राज्य में क्या होगा राज्यसभा का चुनावी सीन

    महाराष्ट्र में किसे होगा नुकसान

    महाराष्ट्र में 7 राज्यसभा सीटों पर चुनाव है, जिसमें से एनडीए के 6 सीटें मिल सकती है तो विपक्षी गठबंधन महायुति के सिर्फ एक सीट मिलने की संभावना है. राज्य में कुल 286 विधानसभा सीटें है, जिसमें से 2 सीटें खाली हैं. इस लिहाज से एक राज्यसभ सीट के लिए 37 विधायकों के समर्थन की जरूरत है. मौजूदा समय में बीजेपी के पास 131, शिंदे की शिवसेना के पास 57 और अजित पवार की एनसीपी के पास 40 विधायक हैं.

    एनडीए के 235 विधायक बन रहे हैं, जिसके दम पर 6 सीटें आसानी से जीत सकती है. बीजेपी चार सीटें तो शिंदे और अजित पवार की पार्टी को एक-एक सीट जीत सकती है. शरद पवार की एनसीपी के 10, उद्धव ठाकरे की 16 और कांग्रेस के 20 विधायक हैं. इस तरह से तीनों दलों के कुल 46 विधायक. सीपीआई (एम) और एसके (एम) का एक-एक विधायक है. अन्य छोटे दलों और निर्दलीयों का समर्थन मिलने पर यह संख्या कुछ बढ़ सकती है. ऐसे में एक सीट विपक्ष मिलकर सकती है. शरद पवार, उद्धव ठाकरे और कांग्रेस में से किसी एक दल को की यह सीट मिल सकती है, जिसके चलते शरद पवार की सीटें और उद्धव ठाकरे के लिए सियासी नुकसान होगा.

    बिहार में आरजेडी को लगेगा झटका

    बिहार की पांच राज्यसभा सीट पर चुनाव होने हैं, जिसमें एनडीए आसानी से 4 सीटें जीत सकती है और एक सीट विपक्ष को मिल सकती है. बिहार में राज्यसभा चुनाव में 1 सीट के लिए इस बार कम से कम 41 विधायकों के समर्थन की जरूरत पड़ेगी. बीजेपी और जेडीयू आसानी से 2-2 सीटें जीत सकती है, लेकिन विपक्ष संयुक्त रूप से मिलकर ही एक सीट जीतने की स्थित में है. ऐसे में आरजेडी को कम से कम एक सीट का नुकसान उठाना पड़ेगा और उसे एक सीट जीतने के लिए ओवैसी की पार्टी का भी समर्थन हासिल करना होगा.

    तमिलनाडु और बंगाल में यथावत

    तमिलनाडु में की मौजूदा विधानसभा की स्थिति के लिहाज से डीएमके आसानी से चार सीटें जीत लेगा और एक सीट AIADMK भी बचा ले जाएगा, लेकिन एक सीट पर मुकाबला हो सकता है. ऐसे ही पश्चिम बंगाल की पांच सीटों में से टीएमसी अपनी चारों सीटें बचा लेगा, लेकिन यहां पर एक सीट सीपीएम को खोनी पड़ सकती है, जो बीजेपी के खाते में जा सकती है. ओडिशा में चार सीटों में से बीजेपी 3 सीटें आसानी से जीत लेगी और एक सीट से बीजेडी को संतोष करना पड़ सकता है.

    असम से हरियाणा तक कांग्रेस को फायदा

    असम की तीन राज्यसभ सीटों में से बीजेपी आसानी से दो सीटें जीत लेगी और एक सीट कांग्रेस-AIUDF के साथ मिलकर जीत सकती है. इस तरह से असम में एक सीट का नुकसान एजीपी को हो सकता है. तेलंगाना की दोनों राज्यसभा सीटें कांग्रेस के खाते में जा सकती है और यहां पर बीआरएस को अपनी एक सीट गंवानी पड़ सकती है.

    छत्तीसगढ़ की दो सीटों में से एक सीट बीजेपी और एक सीट कांग्रेस के खाते में जा सकती है. इस तरह कांग्रेस को एक सीट का नुकसान उठाना पड़ सकता. ऐसे ही हरियाणा की दो सीटें बीजेपी के पास हैं, लेकिन मौजूदा विधानसभा सीट के लिहाज से एक सीट बीजेपी और एक सीट कांग्रेस आसानी से जीत लेगी. ऐसे में बीजेपी को एक सीट का नुकसान होगा. हिमाचल की एक सीट पर हो रहे चुनाव में बीजेपी को अपनी यह सीट गंवानी पड़ सकती है और यह सीट कांग्रेस जीत सकती है.

  • नारायण मूर्ति का संदेश, बोले- AI तेज है, लेकिन इंसानी दिमाग से बेहतर कुछ नहीं

    नारायण मूर्ति का संदेश, बोले- AI तेज है, लेकिन इंसानी दिमाग से बेहतर कुछ नहीं


    नई दिल्ली। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस AI आज तेजी से काम कर सकता है, लेकिन इंसानी दिमाग की क्षमता के सामने यह हमेशा पीछे रहेगा। ये बातें डीयू में आयोजित लीडर्स टॉक में इंफोसिस के संस्थापक एन.आर. नारायण मूर्ति ने कही। उन्होंने युवाओं को सलाह दी कि AI को सहयोगी टूल के रूप में अपनाएं, सीखें और उसके साथ नए प्रयोग करें।

    AI को सहयोगी बनाएं, इंसानी दिमाग को बॉस रखें

    नारायण मूर्ति ने प्रसिद्ध वैज्ञानिक और गणितज्ञ स्टीफेन वुलफ्राम का हवाला देते हुए बताया कि AI उच्च स्तरीय कार्य कर सकता है, जैसे रिमोट सर्जरी करना, उत्पादों को सही नाप-तौल के साथ तैयार करना, कोड जेनरेट करना और सॉफ्टवेयर बनाना। लेकिन AI को लगातार प्रशिक्षित करना पड़ेगा। इसलिए मानव मस्तिष्क हमेशा बॉस की भूमिका में रहेगा और इसे और बेहतर बनाने के लिए नए प्रयोग करता रहेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि AI के आने से इंसानी रचनात्मकता बाधित नहीं होगी। बल्कि, यह इंसान के काम को आसान बनाने और नए विचारों को जन्म देने में मदद करेगा।

    बड़ा उद्यमी नहीं, सम्मान है लक्ष्य
    नारायण मूर्ति ने कहा कि व्यापार में सबसे महत्वपूर्ण चीज़ मुनाफा नहीं, बल्कि सम्मान और भरोसा है। उनका मानना है कि असली पहचान आपसी सम्मान और विश्वास से बनती है। उन्होंने जीवनभर सबसे बड़ा उद्यमी बनने के बजाय सम्मान कमाने को प्राथमिकता दी।

    युवाओं के लिए अहम संदेश

    युवा पीढ़ी लगातार नई स्किल्स सीखती रहे।

    खुद को बदलती तकनीक के अनुसार ढालें।

    सीखने की क्षमता यानी लर्नेबिलिटी सबसे महत्वपूर्ण गुण है।

    ड्रोन से ऑटोनॉमस डिलीवरी, AI का बढ़ता रोल

    ड्रोन आधारित डिलीवरी सेवा देने वाली कंपनी स्काई एयर मोबिलिटी ने एआई समिट में एंड-टू-एंड ऑटोनॉमस कॉमर्स डिलीवरी सिस्टम का प्रदर्शन किया। यह पूरी तरह स्वचालित प्रणाली है, जो बिना किसी मानवीय मदद के ड्रोन के माध्यम से ग्राहकों तक सामान पहुंचाती है।

    कंपनी ने अराइव एआई और ओटोनॉमी के साथ मिलकर यह पहल शुरू की है। पिछले दो वर्षों में 36 लाख से अधिक सामान की डिलीवरी की जा चुकी है। कंपनी का कहना है कि AI और ऑटोनॉमस टेक्नोलॉजी के बढ़ते उपयोग से भविष्य में डिलीवरी सेक्टर में बड़े बदलाव देखने को मिलेंगे।

  • कहां बना है भारत का पहला परमाणु संयंत्र, यह अब भी कितनी बिजली करता है पैदा?

    कहां बना है भारत का पहला परमाणु संयंत्र, यह अब भी कितनी बिजली करता है पैदा?

    नई दिल्ली । भारत में परमाणु एनर्जी के क्षेत्र में एक लंबा इतिहास रहा है. देश ने विज्ञान और तकनीक के माध्यम से अपने एनर्जी संसाधनों को सुरक्षित और स्वच्छ बनाने के लिए हमेशा प्रयास किया है. ऐसे ही प्रयासों में सबसे जरूरी भारत का पहला परमाणु एनर्जी संयं थात्र, जिसे 1969 में स्थापित किया गया. यह संयंत्र भारत के लिए सिर्फ बिजली उत्पादन का साधन नहीं था, बल्कि यह उस समय आधुनिक तकनीक के क्षेत्र में देश की उपलब्धियों का प्रतीक भी माना गया.

    कहां बना है भारत का पहला परमाणु संयंत्र

    भारत का पहला परमाणु एनर्जी संयंत्र तारापुर परमाणु एनर्जी स्टेशन महाराष्ट्र के पालघर जिले में स्थित है. यह मुंबई के पास स्थित है और इसे 28 अक्टूबर 1969 को शुरू किया गया था. इस संयंत्र की स्थापना के पीछे उद्देश्य था कि देश को स्वच्छ और लॉन्ग टर्म एनर्जी उपलब्ध कराई जा सके. तारापुर में दो उबलते जल रिएक्टर लगे हुए थे, जिनकी कुल क्षमता लगभग 200 मेगावाट थी. जब यह संयंत्र चालू हुआ, तब यह एशिया का दूसरा सबसे बड़ा परमाणु एनर्जी स्टेशन था. इस संयंत्र के जरिए भारत ने परमाणु एनर्जी के क्षेत्र में अपनी तकनीकी क्षमता साबित की और दुनिया के लिए अपनी वैज्ञानिक उपलब्धियों को भी दिखाया.

    यह अब भी कितनी बिजली करता है पैदा?

    तारापुर परमाणु एनर्जी संयंत्र की यूनिट 1 अब 160 मेगावाट बिजली उत्पादन कर रही है. इसके अलावा, यूनिट 2 का नवीनीकरण भी अंतिम चरण में है और उसे जुड़ने के बाद कुल उत्पादन और बढ़कर लगभग 200 मेगावाट से ज्यादा हो जाएगा. तारापुर संयंत्र ने वर्षों तक देश को स्वच्छ बिजली उपलब्ध कराई. हाल ही में इस संयंत्र की यूनिट 1 का रिनोवेशन किया गया और अब यह फिर से 160 मेगावाट बिजली उत्पादन कर रही है. यह उपलब्धि इसलिए खास है क्योंकि यह पूरी तरह भारतीय तकनीक से पुरानी यूनिट को नया जीवन देने का पहला प्रयास है.

    यूनिट 1 के नवीनीकरण में छह साल का समय लगा. इसमें रिएक्टर की पाइपिंग, टरबाइन जनरेटर और डिजिटल मॉनिटरिंग सिस्टम को अपग्रेड किया गया. इसके अलावा, 3डी लेजर स्कैनिंग, जंग-रोधी सामग्री, नई सुरक्षा प्रणालियां और कंट्रोल रूम का आधुनिकीकरण भी किया गया. संयंत्र का संचालन न्यूक्लियर पावर कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड करता है. अधिकारियों का कहना है कि यूनिट 2 का नवीनीकरण भी अंतिम चरण में है और आने वाले महीनों में इसे भी राष्ट्रीय ग्रिड से जोड़ दिया जाएगा.

    भारत की एनर्जी सुरक्षा और स्वच्छ एनर्जी में योगदान

    तारापुर संयंत्र की नई तकनीक और नवीनीकरण ने न केवल बिजली उत्पादन बढ़ाया है, बल्कि देश को स्वच्छ एनर्जी के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने में भी मदद की है. इससे कोयला आधारित बिजली पर निर्भरता कम होगी और कार्बन एमिशन में भी कमी आएगी. विशेषज्ञों के अनुसार, इस सफलता से भविष्य में पुराने रिएक्टरों का नवीनीकरण आसान होगा.

  • Babri Masjid Murshidabad: 7 नहीं 12 दिन बांग्लादेश में रहा हूं, हुमायूं कबीर ने सुवेंदु अधिकारी पर किया पलटवार

    Babri Masjid Murshidabad: 7 नहीं 12 दिन बांग्लादेश में रहा हूं, हुमायूं कबीर ने सुवेंदु अधिकारी पर किया पलटवार


    नई दिल्ली । जनता उन्नयन पार्टी के अध्यक्ष हुमायूं कबीर ने पश्चिम बंगाल में विपक्ष के लीडर और BJP नेता सुवेंदु अधिकारी पर पलटवार किया है। हुमायूं कबीर ने कहा कि नेता प्रतिपक्ष को जानकारी नहीं है कि मैं 7 दिन नहीं बल्कि 12 दिन बांग्लादेश में रहा था। उन्हें सही जानकारी नहीं है, मैं सही करके देता हूं। अगर जरूरत पड़े तो जांच एजेंसियों को भेजकर जांच कराएं। मैं इसके लिए तैयार हूं। जान लें कि ये विवाद बाबरी मस्जिद और उसके लिए जमा हो रहे पैसों पर विवाद को लेकर हुआ है।

    हुमायूं ने परिवर्तन यात्रा पर कसा तंज

    सस्पेंडेड टीएमसी विधायक और जनता उन्नयन पार्टी के चीफ हुमायूं कबीर ने कहा कि बीजेपी पार्टी जो परिवर्तन यात्रा निकाल रहा है वह बाबरी यात्रा का कॉपी है। जान लें कि नेता प्रतिपक्ष सुवेंदु अधिकारी ने दावा किया था कि बाबर के नाम पर मस्जिद की नींव रखने और नई पार्टी बनाने से पहले हुमायूं कबीर ने बांग्लादेश में 7 दिन बिताए। इस बात की जांच होनी चाहिए।

    सुवेंदु अधिकारी ने की जांच की मांग

    सुवेंदु अधिकारी ने मांग की कि हुमायूं कबीर कहां-कहां गए, उन्हें मस्जिद बनवाने के लिए जो करोड़ों रुपये मिले हैं, उसमें से बांग्लादेश से कितने पैसे आए और किसने पैसे दिए, इसकी पड़ताल जरूरी है। उन्होंने मांग की कि स्टेट बैंक को लिस्ट बतानी चाहिए। ममता बनर्जी BSF को फेंसिंग के लिए जमीन नहीं दे रही है, इसके पीछे क्या मकसद है यह सबको पता है।

    6 दिसंबर, 2025 को रखी गई बाबरी की नींव

    जान लें कि पिछले साल 6 दिसंबर को हुमायूं कबीर ने मुर्शिदाबाद के बेलडांगा में बाबरी मस्जिद की नींव रखी थी। उस मस्जिद का निर्माण का काम जल्द शुरू होने वाला है। हुमायूं कबीर अपनी देख-रेख में मस्जिद का निर्माण करा रहे हैं।

    बेलडांगा में नेशनल हाईवे-12 के पास बन रही मस्जिद
    इस बाबरी मस्जिद की नींव बेलडांगा में नेशनल हाईवे-12 के समीप एक प्राइम लोकेशन पर रखी गई थी। मुस्लिम समुदाय के लोग उस जगह पर बाबरी मस्जिद बनने से खुश हैं। उनके मुताबिक, बाबरी मस्जिद पहले तो गिरा दी गई थी, लेकिन उन्हें अब खुशी है कि बाबरी का निर्माण शुरू हो गया है।

  • भारत में 16 साल से कम उम्र के बच्चों पर सोशल मीडिया बैन? सरकार ले सकती है बड़ा फैसला

    भारत में 16 साल से कम उम्र के बच्चों पर सोशल मीडिया बैन? सरकार ले सकती है बड़ा फैसला


    नई दिल्ली । भारत सरकार ने 16 साल से कम उम्र के बच्चों के सोशल मीडिया इस्तेमाल पर सख्ती करने की तैयारी शुरू कर दी है। ऑस्ट्रेलिया और फ्रांस जैसे देशों में पहले ही इस उम्र में सोशल मीडिया का इस्तेमाल रोक दिया गया है, और अब भारत भी इसी मॉडल को अपनाने पर विचार कर रहा है। सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अधिकारियों के अनुसार, इस दिशा में इंटरमीडियरी गाइडलाइंस एंड डिजिटल मीडिया एथिक्स कोड, 2021 में संशोधन किया जा सकता है।

    ऑस्ट्रेलिया मॉडल: कैसे काम करता है

    सरकार पूर्ण प्रतिबंध की जगह ऑस्ट्रेलिया मॉडल की ओर झुक रही है, जिसमें 16 साल से कम उम्र के बच्चों को सोशल मीडिया इस्तेमाल करने से रोका गया है। केंद्रीय आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने पुष्टि की कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के साथ बातचीत चल रही है और उम्र-आधारित नियम बनाने पर विचार किया जा रहा है।

    क्यों उठ रहा यह कदम?
    इकोनॉमिक सर्वे 2025-26 ने चेतावनी दी है कि युवाओं में स्क्रीन एडिक्शन, कंपल्सिव यूज, साइबरबुलिंग और मानसिक स्वास्थ्य समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। सरकार का उद्देश्य है कि बच्चों को एडिक्शन, अश्लील कंटेंट और डीपफेक जैसी ऑनलाइन समस्याओं से बचाया जा सके।

    मौजूदा कानून और DPDP एक्ट
    भारत में अभी कोई कानून नहीं है जो सोशल मीडिया के लिए उम्र-आधारित प्रतिबंध लगाए। लेकिन DPDP एक्ट के तहत 18 साल से कम उम्र के बच्चों का डेटा प्रोसेस करने के लिए पेरेंटल कंसेंट जरूरी है। इससे प्लेटफॉर्म्स को बच्चों के डेटा कलेक्शन और टारगेटेड एड्स पर नियंत्रण रखना पड़ता है।

    दुनिया में स्थिति

    ऑस्ट्रेलिया: 16 साल से कम उम्र के बच्चों पर सोशल मीडिया बैन। फ्रांस: 15 साल से कम उम्र पर सोशल मीडिया का उपयोग रोकने वाला बिल पास। यूके, स्पेन, डेनमार्क, ग्रीस: ऐसी पाबंदियों पर विचार भारत के कुछ राज्यों जैसे गोवा, आंध्र प्रदेश और कर्नाटक ने भी ऑस्ट्रेलिया मॉडल अपनाने पर चर्चा शुरू की है।

    चुनौतियां और विरोधाभास

    इंटरनेट फ्रीडम फाउंडेशन (IFF) के फाउंडर डायरेक्टर अपर गुप्ता का कहना है कि भारत में यह बैन केवल कागज पर ही रह सकता है। बच्चे अक्सर फेक उम्र डालकर सोशल मीडिया का इस्तेमाल कर लेते हैं।

    अगला कदम

    सरकार अभी सोशल मीडिया कंपनियों से बातचीत कर रही है। कोई फाइनल फैसला या टाइमलाइन अभी तय नहीं हुई है, लेकिन लागू होने पर यह नियम भारत के करोड़ों युवा यूजर्स को प्रभावित करेगा, खासकर जब भारत दुनिया में सोशल मीडिया का सबसे बड़ा मार्केट है।