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  • वक्फ संपत्तियों को अपलोड करने का आज अंतिम दिन… अब तक आधा भी नहीं हुआ काम

    वक्फ संपत्तियों को अपलोड करने का आज अंतिम दिन… अब तक आधा भी नहीं हुआ काम


    नई दिल्ली।
    देशभर में फैली लगभग 8.8 लाख वक्फ संपत्तियों (8.8 lakh Waqf Properties) के डिजिटल रिकॉर्ड (Digital record) तैयार करने के उद्देश्य से केंद्र सरकार (Central government) द्वारा 6 जून को लॉन्च किए गए ‘UMMEED’ पोर्टल पर पंजीकरण की प्रक्रिया धीमी पड़ गई है। डेडलाइन से एक दिन पहले भी सबसे अधिक वक्फ संपत्तियों वाले राज्यों- उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, कर्नाटक और तमिलनाडु में सिर्फ 10 से 35 फीसदी संपत्तियां ही पोर्टल पर दर्ज हो पाई हैं।

    इसके मुकाबले पंजाब ने सबसे बेहतर प्रदर्शन किया है, जहां लगभग 80% वक्फ संपत्तियों से जुड़े रिकॉर्ड अपलोड किए जा चुके हैं। हालांकि, पंजाब में वक्फ संपत्तियों की बजाय वक्फ एस्टेट्स पंजीकृत किए जा रहे हैं। यानी एक एस्टेट में कई संपत्तियां शामिल हो सकती हैं इसलिए प्रक्रिया अपेक्षाकृत आसान रही।


    राज्यवार स्थिति और चुनौतियां

    उत्तर प्रदेश- सर्वाधिक वक्फ संपत्तियां, अपलोड केवल 35%
    देश में सबसे अधिक वक्फ संपत्तियां उत्तर प्रदेश में हैं- कुल 1.4 लाख।
    सुन्नी वक्फ बोर्ड: 1.26 लाख में से 36% (45,574) संपत्तियां अपलोड
    शिया वक्फ बोर्ड: 15,386 में से 18.9% (2,909) संपत्तियां अपलोड

    एक रिपोर्ट के मुताबिक, अधिकारियों का कहना है कि कई संपत्तियां सदियों पुरानी हैं, जिनके मूल दस्तावेज अनुपलब्ध हैं। एक अधिकारी ने कहा कि 20वीं सदी की शुरुआत में दर्ज किए गए वक्फ के कागज आखिर कहां से मिलेंगे? राजस्व रिकॉर्ड में यह वक्फ के रूप में दर्ज हैं, लेकिन पोर्टल दाखिल खारिज या रजिस्ट्रेशन के दस्तावेज मांग रहा है। बोर्ड के चेयरमैन जुफर फारूकी ने भी स्वीकार किया कि डेडलाइन से पहले पंजीकरण पूरा करना संभव नहीं है। बता दें कि बिहार UP के अलावा एकमात्र ऐसा राज्य है जहां सुन्नी और शिया बोर्ड अलग-अलग हैं, बाकी सभी राज्यों में एक ही वक्फ बोर्ड है।


    पश्चिम बंगाल- 12% पंजीकरण, तकनीकी और भाषाई दिक्कतें

    पश्चिम बंगाल की कुल 80480 वक्फ संपत्तियों में से सिर्फ 10000 यानी 12 फीसदी ही पंजीकृत हैं।
    मुख्य कारण:
    ग्रामीण क्षेत्रों में मुतवल्ली तकनीकी जानकारी से वंचित हैं।
    पोर्टल केवल अंग्रेजी में है, जबकि अधिकांश मुतवल्ली अंग्रेजी नहीं जानते।
    भूमि माप इकाइयों में अंतर है। एक बीघा बंगाल में अलग, बिहार-UP में अलग।
    TMC सरकार ने कई महीनों तक वक्फ संशोधन अधिनियम लागू करने से इनकार किया था, बाद में प्रशासन ने अपलोडिंग शुरू कराई।


    कर्नाटक- 10% पंजीकरण, सर्वर बार-बार क्रैश

    65242 वक्फ संपत्तियों में से सिर्फ 6000 अपलोड हुई हैं।
    अधिकारियों के अनुसार: पोर्टल अक्सर क्रैश हो जाता है। एक संपत्ति को अपलोड करने में 10-15 मिनट लगते हैं। उन्होंने कहा कि सरकार को कुछ करना चाहिए।
    पंजाब- 80% पंजीकरण, अलग मॉडल की वजह से रफ्तार
    कुल 25,000 वक्फ एस्टेट्स में से 20,000 पंजीकृत।
    कारण:
    यहां मुतवल्ली नहीं- सभी संपत्तियां बोर्ड सीधे प्रबंधन करता है।
    संपत्ति नहीं, सिर्फ एस्टेट्स अपलोड की जा रहीं, जो आसान है।


    तमिलनाडु – 10% पंजीकरण, दस्तावेज अस्पष्ट

    66092 संपत्तियों में से लगभग 6,000 अपलोड की गई हैं। TN वक्फ बोर्ड चेयरमैन नवास कानी ने कहा: अधिकांश मुतवल्ली को तकनीकी सहयोग नहीं मिला। कई संपत्तियों के दस्तावेज अस्पष्ट या अधूरे हैं। सरकार द्वारा भूमि सर्वे पूरा किए बिना सटीक रिकॉर्ड तैयार करना कठिन है।


    केंद्र सरकार की स्थिति और राजनीतिक प्रतिक्रियाएं

    वक्फ़ संशोधन अधिनियम के तहत पंजीकरण की अवधि कानून में निश्चित है, इसलिए केंद्र ने समय सीमा बढ़ाने से इनकार किया है। अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा- मैं एक्ट बदले बिना तारीख नहीं बदल सकता। विशेष परिस्थितियों में वक्फ ट्रिब्यूनल ही समय बढ़ा सकते हैं।


    सांसदों और संगठनों की मांग

    सपा सांसद मोहिबुल्लाह नदवी ने कहा कि UP की 70% संपत्तियां पंजीकृत नहीं… सर्वर डाउन है… ऐसा लगता है जैसे धार्मिक अधिकार समाप्त हो गए हों। वहीं कांग्रेस MP इमरान मसूद ने कहा कि तकनीकी समस्याओं के कारण मुसलमान चिंतित हैं।


    सुप्रीम कोर्ट का रुख

    SC ने समय सीमा बढ़ाने से इनकार किया है। इसने कहा कि वक्फ ट्रिब्यूनल में जाएं, वही राहत दे सकते हैं। अब डेडलाइन पूरी न कर पाने की स्थिति में बोर्ड और मुतवल्ली राज्य के वक्फ ट्रिब्यूनल में जाकर कारण बता सकते हैं। यह बोर्ड विस्तार दे सकते हैं। लेकिन बोर्डों की चिंता है। उनका मानना है कि हजारों आवेदन आने पर ट्रिब्यूनल कैसे संभालेंगे?

  • आरबीआई आज करेगा Monetary Policy का ऐलान, जानिए EMI कम होगी या नहीं!

    आरबीआई आज करेगा Monetary Policy का ऐलान, जानिए EMI कम होगी या नहीं!


    मुम्बई।
    भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) (Reserve Bank of India -RBI) शुक्रवार को द्विमासिक मौद्रिक समीक्षा (Bi-Monthly Monetary Policy Review) में लिए गए निर्णयों की घोषणा करेगा। विशेषज्ञों ने रेपो रेट में 0.25 प्रतिशत कटौती किए जाने की उम्मीद जताई है। हालांकि, कुछ विशेषज्ञ मानते हैं कि तीसरी बार रेपो रेट को स्थिर रखा जा सकता है।

    गवर्नर संजय मल्होत्रा (Governor Sanjay Malhotra)​शुक्रवार सुबह मौद्रिक नीति समिति (MPC) की तीन-दिवसीय बैठक में लिए गए फैसलों की घोषणा करेंगे। अगली द्विमासिक मौद्रिक नीति पर एमपीसी की बैठक बुधवार को शुरू हुई थी। यह बैठक घटती मुद्रास्फीति, सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की तेज वृद्धि, डॉलर के मुकाबले रुपये के 90 के पार जाने और मौजूदा भू-राजनीतिक तनावों की पृष्ठभूमि में हो रही है।

    खुदरा मुद्रास्फीति में गिरावट के बीच आरबीआई ने फरवरी से रेपो रेट में तीन किस्तों में कुल एक प्रतिशत की कटौती की है। हालांकि, पिछली दो बार से रेपो रेट को 5.5 प्रतिशत पर स्थिर रखा गया है।

    कई विशेषज्ञों का कहना है कि वृद्धि दर मजबूत बनी हुई है, लेकिन खुदरा मुद्रास्फीति में उल्लेखनीय गिरावट ने प्रमुख अल्पकालिक ऋण दर में कटौती की अतिरिक्त गुंजाइश पैदा कर दी है। आरबीआई गवर्नर ने भी पिछले महीने कहा था कि नीतिगत ब्याज दरों में और कटौती की गुंजाइश है।


    कोई बदलाव नहीं होने की संभावना

    हालांकि, कुछ विशेषज्ञों का मानना ​​है कि आरबीआई ब्याज दर में यथास्थिति कायम रख सकता है क्योंकि आर्थिक वृद्धि में तेजी आई है जो राजकोषीय समेकन, लक्षित सार्वजनिक निवेश और माल एवं सेवा कर (जीएसटी) की दर में कटौती जैसे विभिन्न सुधारों से बनी हुई है। उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित मुख्य मुद्रास्फीति सरकार द्वारा निर्धारित दो प्रतिशत के निचले स्तर से नीचे बनी हुई है। इसके अलावा भारतीय अर्थव्यवस्था ने दूसरी तिमाही में अपेक्षा से बेहतर 8.2 प्रतिशत की जीडीपी वृद्धि दर्ज की है।


    आरबीआई पर जिम्मेदारी

    सरकार ने आरबीआई को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है कि खुदरा मुद्रास्फीति दो प्रतिशत घट-बढ़ के साथ चार प्रतिशत पर बनी रहे। आरबीआई के पहली छमाही के अपेक्षा से बेहतर आंकड़ों को देखते हुए अपने जीडीपी वृद्धि अनुमान को संशोधित करके बढ़ाने की भी उम्मीद है। भारतीय रिजर्व बैंक ने चालू वित्त वर्ष 2025-26 के लिए जीडीपी अनुमान को अक्टूबर में 6.5 प्रतिशत से बढ़ाकर 6.8 प्रतिशत कर दिया था।

  • देशभर में अगले साल तक पूरी तरह बंद हो जाएंगे टोल बूथ, नए व्यवस्था होगी शुरू

    देशभर में अगले साल तक पूरी तरह बंद हो जाएंगे टोल बूथ, नए व्यवस्था होगी शुरू


    नई दिल्ली।
    देशभर में टोल टैक्स सिस्टम (Country Toll Tax System ) को लेकर बड़ा अपडेट सामने आया है। केंद्रीय सड़क एवं परिवहन मंत्री नितिन गडकरी (Nitin Gadkari) ने गुरुवार को कहा कि एक वर्ष में वर्तमान टोल टैक्स कलेक्शन सिस्टम (बैरियर) (Toll Tax Collection System (Barrier)) को पूरी तरह बंद कर दिया जाएगा। टोल टैक्स को इलेक्ट्रॉनिक प्रणाली से चुकाया जाएगा।

    लोकसभा में प्रश्नकाल के दौरान गडकरी ने बताया कि करीब दस स्थानों पर इस नई व्यवस्था को लागू किया जा चुका है। अगले एक वर्ष के अंदर इसे पूरे देश के नेशनल हाईवे नेटवर्क पर लागू कर दिया जाएगा। इससे टोल बूथ पर रुकने की जरूरत नहीं होगी। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि देश में करीब 10 लाख करोड़ की 4500 राजमार्ग परियोजनाएं चल रही है। बड़ी मात्रा में हाईवे निर्माण के साथ डिजिटल टोल सिस्टम लागू होने से देश में सड़क यातायात और परिवहन की रफ्तार और तेज हो जाएगी।

    टोल सिस्टम पूरी तरह से डिजिटल होगा : सरकार
    भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम ने राष्ट्रीय इलेक्ट्रॉनिक टोल संग्रह (एनईटीसी) तकनीक विकसित की है। इसका मकसद टोल सिस्टम को पूरी तरह डिजिटल बनाना है। इसमें आरईआईडी यानी की रेडियो फ्रीक्वेंसी आइडेंटिफिकेशन डिवाइस वाहन की विंडस्क्रीन पर लगाया जाता है। यह हाईवे टोल प्लाजा पर वाहन गुजरने के दौरान बिना रुके चालक से जुड़े बैंक खाते से टोल राशि अपने आप काट देता है। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने गुरुवार को लोकसभा में दिल्ली में वायु प्रदूषण को लेकर कहा सरकार वैकल्पिक ईंधन को प्राथमिकता दे रही है। गडकरी ने हाईड्रोजन को भविष्य का ईंधन भी करार दिया।

    सरकार ने गुरुवार को बताया कि सड़क दुर्घटना के पीड़ितों के कैशलेस उपचार की योजना के तहत किए गए कुल 6,833 अनुरोधों में से अब तक सिर्फ 5,480 पीड़ित ही पात्र पाए गए हैं। गडकरी ने कहा, सड़क दुर्घटना के पीड़ितों के कैशलेस उपचार की योजना, 2025 के तहत हर दुर्घटना के मामले में पीड़ित का 1.5 लाख रुपये तक का कैशलेस उपचार किया जाएगा।

  • पुतिन ने उठाए अमेरिका नीतियों पर सवाल… बोले- वह खुद हमसे फ्यूल खरीदता है, तो भारत क्यों नहीं…

    पुतिन ने उठाए अमेरिका नीतियों पर सवाल… बोले- वह खुद हमसे फ्यूल खरीदता है, तो भारत क्यों नहीं…


    नई दिल्ली।
    भारत दौरे (India Visit) पर आए रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन (Russian President Vladimir Putin) ने अमेरिका (America) की नीतियों पर सवाल उठा दिए। उन्होंने कहा है कि अगर रूसी ईंधन (Russian fuel) अमेरिका (America) खरीद सकता है, तो भारत क्यों नहीं। उनका यह बयान ऐसे समय पर आया है, जब अमेरिका की तरफ से भारत को रूसी तेल की खरीद को लेकर निशाना बनाया जा रहा है। इसके चलते भारत पर भारी टैरिफ भी लगाया गया है।

    पुतिन ने कहा, ‘अमेरिका अपने न्यूक्लियर पावर प्लांट्स के लिए हमसे न्यूक्लियर फ्यूल खरीदना जारी रखता है। वह भी तो ईंधन है। एनर्जी है। यह न्यूक्लियर पावर प्लांट्स के लिए यूरेनियम है, जो अमेरिका में काम कर रहे हैं।’ उन्होंने कहा, ‘अगर अमेरिका के पास हमसे फ्यूल खरीदने का अधिकार है, तो भारत को इस अधिकार से वंचित क्यों रखा जाना चाहिए। यह बहुत ही बारीकी से अध्ययन करने वाला मुद्दा है। हम राष्ट्रपति ट्रंप के साथ इस मुद्दे पर चर्चा करने और बहस करने के लिए तैयार हैं।’

    रूसी राष्ट्रपति ने रूस पर पश्चिमी प्रतिबंधों के मद्देनजर भारत द्वारा रूसी कच्चे तेल की खरीद कम करने के बारे में पूछे गए प्रश्न के जवाब में कहा, ‘इस वर्ष के पहले नौ महीनों के दौरान कुल व्यापार कारोबार में कुछ गिरावट आई है। यह बस एक मामूली समायोजन है। कुल मिलाकर, हमारा व्यापार कारोबार लगभग पहले के स्तर पर ही बना हुआ है।’


    भारत की प्रगति से डरे देश
    पुतिन ने कहा कि कुछ वैश्विक ताकतें दुनिया के बाजारों में भारत की बढ़ती ताकत से परेशान हैं। उन्होंने कहा कि रूसी तेल की खरीद को लेकर पश्चिम की चिंताएं, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का टैरिफ फैसला भारत के बढ़ते आर्थित प्रभाव के बारे में चिंता दिखाता है। उन्होंने कहा कि दो देशों के बीच ऊर्जा साझेदारी की बुनियाद लंबी है। उन्होंने कहा, ‘भारत के साथ हमारे ऊर्जा सहयोग पर मौजूदा हालात, राजनीति या यूक्रेन में हो रही घटनाओं का कोई असर नहीं पड़ा है।’ रूसी राष्ट्रपति ने अमेरिका के आक्रामक रुख पर पूछे गए एक सवाल के जवाब में कहा, ‘कुछ बाहरी दबावों के बावजूद, न तो मैंने और न ही प्रधानमंत्री मोदी ने कभी भी, किसी के खिलाफ काम करने के लिए हमारी साझेदारी का इस्तेमाल नहीं किया।’


    ट्रंप पर क्या बोले
    उन्होंने कहा, ‘अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का अपना एजेंडा है, अपने लक्ष्य हैं, जबकि हमारा ध्यान अपने ऊपर है – किसी के खिलाफ नहीं, बल्कि हमारा लक्ष्य अपने-अपने हितों, भारत और रूस के हितों की रक्षा करना है।’ रूसी राष्ट्रपति की भारत यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब भारत-अमेरिका संबंध पिछले दो दशकों में शायद सबसे खराब दौर से गुजर रहे हैं और अमेरिका ने भारतीय सामान पर भारी 50 प्रतिशत शुल्क लगाया है, जिसमें रूस से कच्चे तेल की खरीद पर 25 प्रतिशत कर भी शामिल है।

  • दिल्ली उच्च न्यायालय में वरिष्ठ वकील के टेप लगाकर आने पर न्यायाधीश नाराज़, अगली सुनवाई जनवरी 2026 तक टली

    दिल्ली उच्च न्यायालय में वरिष्ठ वकील के टेप लगाकर आने पर न्यायाधीश नाराज़, अगली सुनवाई जनवरी 2026 तक टली


    दिल्ली। उच्च न्यायालय में एक अनोखी घटना सामने आई, जब एक वरिष्ठ वकील सुनवाई के दौरान अपने मुँह पर लाल रंग की टेप लगाकर अदालत कक्ष में पहुँचे। इस असामान्य घटना को देखकर न्यायाधीशों ने कड़ी नाराज़गी जताई और मामले की अगली सुनवाई को जनवरी 2026 तक के लिए टाल दिया। वकील का कहना था कि वह अपने साथ हुई पिछली सुनवाई की घटना के विरोध में ऐसा कर रहे थे, जहाँ उन्हें बीच में ही बोलने से रोक दिया गया था।

    यह घटना 1 दिसंबर की है। अदालत उस समय अवमानना से जुड़े एक मामले और उससे संबंधित एक याचिका की सुनवाई कर रही थी, जिसे नंद किशोर नामक व्यक्ति ने दायर किया था। लगभग 25 वर्ष से अधिक समय तक कानूनी सेवा में रहे अधिवक्ता आर. के. सैनी टेप लगाकर अदालत में उपस्थित हुए। उन्हें इस रूप में देखकर न्यायाधीशों को पहले तो यह लगा कि शायद उन्हें किसी प्रकार की चोट लगी है, जिसके कारण उन्होंने यह कदम उठाया है।

    सुनवाई कर रही पीठ में न्यायमूर्ति नितिन वासुदेव सांब्रे और न्यायमूर्ति अनीश दयाल शामिल थे। दोनों न्यायाधीशों ने सैनी से टेप लगाने का कारण पूछा। इस पर सैनी ने कहा कि यह उनका प्रतीकात्मक विरोध है। उन्होंने बताया कि पिछली सुनवाई के दौरान उन्हें अपनी दलीलें पूरी करने का अवसर नहीं दिया गया था और उन्हें बीच में ही रोक दिया गया था। इसी कारण वह अपने विरोध को दर्ज कराने के लिए इस तरह उपस्थित हुए हैं।

    वकील का यह जवाब सुनकर अदालत ने कड़ी प्रतिक्रिया दी। न्यायालय ने अपने आदेश में स्पष्ट लिखा कि सैनी का यह आचरण अत्यंत अनुचित है और एक अनुभवी वकील से ऐसी उम्मीद नहीं की जा सकती। अदालत ने यह भी कहा कि पिछली सुनवाई में उन्हें इसलिए रोका गया था क्योंकि उनकी दलीलें बहुत लंबी और दोहराव वाली थीं, और न्यायालय को दूसरे पक्ष की बात भी सुननी थी। पीठ ने यह भी स्पष्ट किया कि अदालत का उद्देश्य किसी भी पक्ष को चुप कराना नहीं था, बल्कि सुनवाई को संतुलित और न्यायसंगत बनाए रखना था।

    न्यायालय ने अपने आदेश में यह भी कहा कि इस तरह का व्यवहार अदालत की गरिमा को ठेस पहुँचाता है। न्यायालय ने टिप्पणी की कि एक वरिष्ठ वकील, जिनके पास 25 वर्ष से अधिक का अनुभव है, उनसे अधिक संयम और जिम्मेदारी की अपेक्षा की जाती है। न्यायालय ने यह भी चेतावनी दी कि यदि वह चाहती तो सैनी के खिलाफ कड़े आदेश जारी कर सकती थी, परंतु उसने ऐसा न करने का निर्णय लिया है। अदालत ने इस घटना को अदालत की कार्यवाही के रिकॉर्ड में दर्ज करने का निर्देश दिया, ताकि भविष्य में इस प्रकार के व्यवहार पर अंकुश लगाया जा सके।

    घटना के बाद अदालत ने मुख्य मामले को आगे बढ़ाने के बजाय अगली सुनवाई की तारीख 21 जनवरी 2026 निर्धारित कर दी। न्यायालय का मानना था कि इस प्रकार के हस्तक्षेप से सुनवाई के वातावरण पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है और मुख्य मुद्दों से ध्यान भटक जाता है।

    इस पूरे प्रकरण ने न्यायालय कक्ष में बैठे अन्य लोगों को भी आश्चर्य में डाल दिया। वकील द्वारा अपनाई गई इस शैली को कुछ लोगों ने अनुचित बताया, जबकि कुछ ने इसे अभिव्यक्ति का तरीका कहा। हालांकि, न्यायालय ने अपने स्पष्ट रुख से यह संदेश दिया कि अदालत अनुशासनहीनता को किसी भी रूप में स्वीकार नहीं करेगी।

    यह घटना न्यायालय की गरिमा, वकीलों के आचरण और न्यायिक प्रक्रिया में मर्यादा के महत्व को एक बार फिर उजागर करती है। अदालत ने स्पष्ट कर दिया है कि किसी भी प्रकार का असंवेदनशील या अनुचित प्रदर्शन अदालत की पवित्रता को प्रभावित करता है और इसे किसी भी कीमत पर सहन नहीं किया जा सकता।

  • मप्र विधानसभा में द्वितीय अनुपूरक बजट पेश, 13476.94 करोड़ रुपये का प्रावधान

    मप्र विधानसभा में द्वितीय अनुपूरक बजट पेश, 13476.94 करोड़ रुपये का प्रावधान


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश विधानसभा के शीतकालीन सत्र के दूसरे दिन मंगलवार को राज्य सरकार द्वारा सदन में वित्त वर्ष 2025–26 के लिए द्वितीय अनुपूरक अनुमान पेश किया है। इस पर गुरुवार, चार दिसंबर को 3:30 घंटे चर्चा होगी। वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा द्वारा पेश किए गए दूसरे अनुपूरक बजट में कुल 13476 करोड़ 94 लाख रुपये का प्रावधान रखा गया है। इसमें राजस्व मद में 8,448.57 करोड़ और पूंजीगत मद में 5,028.37 करोड़ शामिल हैं। सरकार ने इस अनुपूरक बजट में ग्रामीण विकास, महिला सशक्तिकरण, बुनियादी ढांचा, जल संसाधन और औद्योगिक निवेश जैसे अहम क्षेत्रों पर विशेष जोर दिया है।

    दूसरे अनुपूरक बजट में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत ग्रामीण विकास विभाग को 4,000 करोड़ रुपये का प्रावधान दिया गया है। पंचायत विभाग को पंद्रहवें वित्त आयोग की अनुशंसाओं के अनुसार 1,633 करोड़ रुपये के अनुदान का प्रावधान किया गया है। महिला एवं बाल विकास विभाग की मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना 2023 के लिए राजस्व मद में 1,794 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं।

    खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग के अंतर्गत उत्पादन संस्थाओं को ऋण सहायता हेतु 2,000 करोड़ रुपये की पूंजीगत राशि का प्रावधान किया गया। इसी तरह, औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन विभाग को भूमि अधिग्रहण, सर्वे, डिमार्केशन और सेवा शुल्क हेतु 650 करोड़ रुपये दिए गए हैं।

    नर्मदा घाटी एवं जल संसाधन परियोजनाओं में बड़ा निवेश
    नर्मदा घाटी विकास विभाग के लिए सरदार सरोवर डूब प्रभावित क्षेत्रों में भूमि अधिग्रहण और अन्य कार्यों के लिए 600 करोड़ रुपये, बरगी नहर विस्तार योजना के लिए 200 करोड़ रुपये, इंदिरा सागर परियोजना (एमसीएडी) के लिए 94 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। जल संसाधन विभाग को भी बांध व संबंधित कार्यों के लिए 300 करोड़ रुपये तथा बहुती फिल्टर संयंत्र-2 फेज-2 के लिए 63 रुपये करोड़ आवंटित हुए हैं। किसान कल्याण और कृषि विकास विभाग के अंतर्गत भावांतर/लेट रेट योजना पर 500 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।

    शहरी विकास एवं अमृत मिशन में अमृत 2.0 मिशन के तहत अटल मिशन फॉर रीजुवेनेशन एंड अर्बन ट्रांसफॉर्मेशन के लिए 150 करोड़, मिलियन प्लस शहरों के लिए 115 करोड़, एक लाख से कम आबादी वाले शहरों के लिए 100 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। लोक निर्माण विभाग को भूमि अधिग्रहण मुआवजे के लिए 300 करोड़ रुपये दिए गए हैं। इसके अलावा शिक्षा विभाग में पीएम जनमन (समग्र शिक्षा) हेतु 122 करोड़, जबकि धरती आबा जनजातीय ग्राम उन्नयन अभियान के लिए 108 करोड़ रुपये का प्रावधान शामिल है।

  • मप्र विधानसभाः हंगामेदार रहा शीतकालीन सत्र का दूसरा दिन, वीआईटी हिंसा पर विपक्ष का हंगामा

    मप्र विधानसभाः हंगामेदार रहा शीतकालीन सत्र का दूसरा दिन, वीआईटी हिंसा पर विपक्ष का हंगामा


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश विधानसभा के शीतकालीन सत्र का दूसरा दिन मंगलवार को हंगामेदार रहा। सत्र के दौरान अतिवृष्टि और वीआईटी विश्वविद्यालय में विद्यार्थियों द्वारा अनियमितताओं को लेकर की गई तोड़-फोड़ के मामले में विपक्षी विधायकों ने जमकर हंगामा किया। इससे पहले कांग्रेस विधायक खेतों में फसलों की स्थिति को दर्शाती तख्तियां लेकर विधानसभा पहुंचे। शून्यकाल की सूचनाएं पढ़ी जाने के बाद विधानसभा की कार्यवाही गुरुवार तक स्थगित कर दी गई।

    दरअसल, लंच के बाद विधानसभा की कार्यवाही शुरू होते ही सीहोर जिले के वीआईटी विश्वविद्यालय में हुई मारपीट और आगजनी की घटना को लेकर विधायक दिनेश जैन ‘बोस’ ने ध्यानाकर्षण प्रस्ताव पेश किया। उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने बताया कि विश्वविद्यालय को कारण बताओ नोटिस देकर जवाब मांगा गया है, इसके बाद आगे की कार्रवाई होगी। विधायक जैन ने मजिस्ट्रेट जांच कराने और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की, साथ ही छात्रों पर दर्ज प्रकरण वापस लेने की भी बात कही। मंत्री परमार ने कहा कि 4 हजार छात्रों का सड़क पर आना गंभीर मामला है, सरकार इसे गंभीरता से ले रही है और आगे सख्त कदम उठाए जाएंगे।

    कांग्रेस विधायक महेश परमार ने हनुमान चालीसा का पाठ करने पर सजा देने के मामले में सख्त कार्रवाई की मांग की। उन्होंने कहा कि मामले की निष्पक्ष जांच के लिए विश्वविद्यालय में प्रशासक नियुक्त कर उच्च स्तरीय जांच कराई जाए। साथ ही उन्होंने विधानसभा अध्यक्ष से विधायकों की एक कमेटी गठित करने का भी आग्रह किया। इस पर उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने कहा कि विश्वविद्यालय को जो कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है, उसका उद्देश्य ही यह है कि सरकार आवश्यक होने पर विश्वविद्यालय को अपने नियंत्रण में लेकर कठोर कार्रवाई करे। मंत्री परमार ने स्पष्ट किया कि अब तक किसी विश्वविद्यालय के खिलाफ इतनी सख्त कार्रवाई नहीं हुई होगी, जैसी इस मामले में की जाएगी।

    उप नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस विधायक हेमंत कटारे ने आरोप लगाया कि वीआईटी विश्वविद्यालय में हनुमान जी का नाम लेने पर छात्रों से 5 हजार रुपये का जुर्माना वसूला जा रहा है। उन्होंने कहा कि ऐसी कार्रवाई उन्होंने पहले कभी नहीं देखी। कटारे ने सवाल उठाया कि जब सीएमएचओ को विश्वविद्यालय परिसर में प्रवेश नहीं करने दिया गया, तो शासकीय कार्य में बाधा का मामला अब तक दर्ज क्यों नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि अगर कलेक्टर और सीएमएचओ चाहें तो धार्मिक भावनाएं भड़काने और शासकीय कार्य में बाधा समेत अन्य धाराओं में विश्वविद्यालय प्रबंधन पर केस दर्ज कराया जा सकता है। उन्होंने वीआईटी कॉलेज में हिंसा को छोटा जेन-जेड आंदोलन बताया।

    इससे पहले मंगलवार को शीतकालीन सत्र के दूसरे दिन सदन में मध्य प्रदेश नगर पालिका संशोधन अध्यादेश- 2025 सर्वसम्मति से पारित हो गया। नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि यह संशोधन राजीव गांधी के सपनों को पूरा करने की दिशा में एक कदम है। उन्होंने कहा कि पहले राइट टू रिकॉल ढाई साल में लागू होता था, जिसे अब 3 साल कर दिया गया है ताकि लोकतंत्र और मजबूत हो। वहीं, नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा कि इस बिल से जनता को कोई सीधा फायदा नहीं होगा। यह केवल टिकट बेचने का माध्यम बनेगा और 3 साल बाद फिर खुलेआम हॉर्स ट्रेडिंग होगी।

    मध्य प्रदेश दुकान एवं स्थापना संशोधन विधेयक 2025 पारित

    इसके साथ ही विधानसभा में मंगलवार को मध्य प्रदेश दुकान एवं स्थापना संशोधन विधेयक 2025 भी पारित हो गया। श्रम मंत्री प्रहलाद पटेल ने कहा कि 20 से कम दुकानों या स्थानों में लेबर इंस्पेक्टर केवल कमिश्नर की अनुमति से ही जाएगा। महिलाओं को समान वेतन और 24 घंटे खुली दुकानों में सुरक्षा देने की जिम्मेदारी सरकार की होगी। उन्होंने बताया कि दुकान रजिस्ट्रेशन शुल्क 250 रुपये से अधिकतम 2500 रुपये तय किया गया है, जिसका अर्थ यह नहीं कि सभी दुकानों पर 2500 रुपये लगेगा। यह राशि भविष्य में संभावित बढ़ोतरी के लिए निर्धारित की गई है।

    दूसरा अनुपूरक बजट सदन में पेश

    वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा ने दूसरा अनुपूरक बजट सदन में पेश किया। इस पर 4 दिसंबर को 3:30 घंटे चर्चा होगी। दूसरा अनुपूरक बजट 13476 करोड़ 94 लाख रुपये का है।

  • मप्र कैबिनेट का फैसलाः नगरीय विकास योजनाओं के लिए 500 करोड़ का अतिरिक्त बजट मंजूर

    मप्र कैबिनेट का फैसलाः नगरीय विकास योजनाओं के लिए 500 करोड़ का अतिरिक्त बजट मंजूर


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मंगलवार को विधानसभा के समिति कक्ष में मंत्रि-परिषद की बैठक हुई। बैठक में नगरीय क्षेत्र के विकास से जुड़ी महत्वपूर्ण योजनाओं पर निर्णय लिए गए। सरकार ने मुख्यमंत्री नगरीय क्षेत्र अधोसंरचना निर्माण योजना को वर्ष 2026-27 तक जारी रखने का फैसला किया है। इसके लिए अतिरिक्त 500 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी गई है। इस बैठक में युवाओं से जुड़े मुद्दों पर भी अहम फैसले लिए गए, जिससे सरकार के विकास एजेंडे का स्पष्ट संकेत मिलता है।

    बैठक में लिए गए निर्णय के अनुसार, मुख्यमंत्री नगरीय क्षेत्र अधोसंरचना निर्माण योजना के अंतर्गत अब तक 1,070 करोड़ रुपये की 1,062 परियोजनाएं स्वीकृत की जा चुकी हैं। इनमें 325 परियोजनाएं पूरी हो चुकी हैं, 407 कार्य प्रगतिरत हैं और 330 परियोजनाएं डीपीआर स्वीकृति या निविदा प्रक्रिया में हैं। इस योजना के तहत पेयजल, सफाई व्यवस्था, स्ट्रीट लाइट, सड़क और नाली निर्माण, श्मशान घाट, सामुदायिक भवन, रैन बसेरा और खेल मैदान जैसे विकास कार्य किए जाते हैं।

    बैठक में मध्य प्रदेश ग्रामीण संपर्कता बाह्य वित पोषित योजना के अधूरे कार्यों को पूरा करने के लिए भी मंजूरी दी गई। पहले से स्वीकृत 12 करोड़ 32 लाख रुपये के अलावा अब 9 करोड़ 45 लाख रुपये अतिरिक्त खर्च करने की अनुमति प्रदान की गई है। इसके अलावा राज्य सेवा परीक्षा 2022 में परिवहन उप निरीक्षक पद के लिए चयनित 29 में से 25 उम्मीदवारों को नई शर्तों के साथ नियुक्ति देने का निर्णय लिया गया है। इन उम्मीदवारों को दो वर्ष की परिवीक्षा अवधि में एक वर्षीय कंप्यूटर डिप्लोमा और ड्राइविंग लाइसेंस के दस्तावेज उपलब्ध कराने होंगे। यदि कोई उम्मीदवार परिवीक्षा अवधि में यह दस्तावेज प्रस्तुत करने में असफल रहता है, तो उसकी सेवाएं तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दी जाएंगी।

  • इंदौर को मिली बड़ी सौगात, अत्याधुनिक सुविधाओं से युक्त मप्र के पहले गीता भवन हुआ लोकार्पण

    इंदौर को मिली बड़ी सौगात, अत्याधुनिक सुविधाओं से युक्त मप्र के पहले गीता भवन हुआ लोकार्पण


    इंदौर।
    मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव और गीता जयंती के पावन अवसर पर सोमवार शाम को इंदौर को एक बड़ी सौगात देते हुए प्रदेश में शासकीय क्षेत्र के पहले अत्याधुनिक सुविधाओं से युक्त नये गीता भवन का लोकार्पण किया। इस अवसर पर उन्होंने बड़ी घोषणा करते हुए कहा कि इस तरह के गीता भवन प्रदेश के सभी नगर निगम, नगर पालिकाओं और नगर पंचायत स्तर पर भी बनाये जाएंगे।

    उन्होंने कहा कि इंदौर का लोकार्पित यह नया गीता भवन परंपरा एवं आधुनिकता का अनूठा संगम है। राज्य शासन द्वारा धार्मिक एवं सांस्कृतिक अध्ययन एवं इससे जुड़े विभिन्न आयामों को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से गीता भवन परियोजना के अंतर्गत ऐतिहासिक गोपाल मंदिर परिसर को आधुनिक गीता भवन के रूप में विकसित कर प्रदेश को समर्पित किया गया है। इस योजना के तहत स्मार्ट सिटी द्वारा इस नये गीता भवन में विकसित विविध आधुनिक सुविधाएँ नागरिकों के लिए उपलब्ध कराई गई हैं।

    कार्यक्रम में जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट, महापौर पुष्यमित्र भार्गव, विधायक गोलु शुक्ला, सुमित मिश्रा, श्रवण सिंह चावड़ा, अनुसूचित जाति वित्त विकास निगम के अध्यक्ष सावन सोनकर, गौरव रणदिवे, संभागायुक्त डॉ. सुदाम खाड़े, पुलिस कमिश्नर संतोष कुमार सिंह, कलेक्टर शिवम वर्मा, नगर निगम आयुक्त दिलीप कुमार यादव, भारत न्यास के सचिव श्रीराम तिवारी, स्मार्ट सिटी के सीईओ अर्थ जैन विशेष रूप से मौजूद थे।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए कहा कि मालवा की गौरवशाली विरासत, कृष्ण भक्ति और गीता का संदेश मध्य प्रदेश की दिशा तय करते हैं। मालवा क्षेत्र कृष्ण लीलाओं से अछूता नहीं है। कृष्ण भगवान ने मालवा के उज्जैन में शिक्षा ग्रहण की। मालवा की अहिल्या बाई होलकर ने देश में अनेक धर्म स्थलों का जीर्णोद्धार कराया और सांस्कृतिक धरोहरों की रक्षा की।

    गीता का प्रत्येक अध्याय ज्ञान, विज्ञान, दर्शन, योग और कर्तव्य की भावना से परिपूर्ण
    उन्होंने कहा कि गीता संघर्ष में आत्मबल और जीवन में मार्गदर्शन देती है। गीता का प्रत्येक अध्याय ज्ञान, विज्ञान, दर्शन, योग और कर्तव्य की भावना से परिपूर्ण है। भगवान श्रीकृष्ण ने अपने विराट स्वरूप के माध्यम से मानव को भय से मुक्त कर कर्तव्य के प्रति जागरूक किया है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में गीता जयंती के अवसर पर अनेक रिकार्ड कायम किये गये।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने गीता जयंती के अवसर पर आयोजित प्रतियोगिता के विजेताओं की घोषणा भी की। उन्होंने कहा कि विजेताओं का नगद के साथ ही ई-रिक्शा, ई-बाईक, लैपटॉप आदि प्रदान किये जा रहे हैं।

    उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण के जीवन से संघठन, साहस, धर्म की रक्षा और अन्याय के प्रतिकार का संदेश मिलता है। गीता जीवन के हर चरण में मार्गदर्शक है। गीता से भक्ति मार्ग, ज्ञान मार्ग और कर्म मार्ग से मोक्ष प्राप्ति का रास्ता भी दिखायी देता है। गीता संकट में बल देती है, संघर्ष में आत्मबल, उलझन में सारथी और अंधकार में अटल साथी बनती है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा ‍कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने स्मार्ट सिटी परियोजना प्रारंभ की है। इस परियोजना से विरासत का संरक्षण करते हुए हम विकास की ओर तेजी से आगे बढ़ रहे हैं।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने राज्य शासन के संस्कृति विभाग के अंतर्गत वीर भारत न्यास द्वारा प्रकाशित तथा रामेश्‍वर लखनलाल पाटीदार द्वारा ‍लिखित श्रीकृष्ण चरित मानस और राघवदास पंडितदास द्वारा लिखित अमृतस्य अवंतिका का विमोचन भी किया। उन्होंने श्रीकृष्ण चरित मानस के लेखक रामेश्वर लखनलाल पाटीदार को पाँच लाख रुपये ‍दिये जाने की घोषणा भी की। मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम के बाद श्री संजीव मालवीय द्वारा निर्देशित कृष्ण लीलाओं पर आधारित नृत्य नाटिका को भी देखा।

    महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने कहा कि इंदौर के लिये आज गौरव का दिन है। उन्होंने कहा कि गीता ने ‍सिखाया है कि अगर हम सभी अपने-अपने धर्म एवं कर्तव्यों का पालन करेंगे तो अधिकारों का संरक्षण स्वत: होगा। पिछले दो वर्षों में मध्य प्रदेश में नया सांस्कृतिक प्रवाह देखने को मिल रहा है। राज्य सरकार मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने नेतृत्व में विरासत से ‍विकास की ओर तेजी से बढ़ रही है।

    मुख्यमंत्री ने गोपाल मंदिर में किया पूजन-अर्चन

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कार्यक्रम के पूर्व ऐतिहासिक गोपाल मंदिर में पूजन-अर्चन किया। उन्होंने प्रदेश की खुशहाली और समृद्धि के लिए कामना की। उन्होंने गोपाल मंदिर में हुए विकास कार्यों विशेषकर अत्याधुनिक सुविधाओं से युक्त लाइब्रेरी और प्रदर्शनी विथिका का अवलोकन भी किया।

    अत्याधुनिक सुविधाओं से युक्त गीता भवन
    इंदौर स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के अंतर्गत राजवाड़ा स्थित गोपाल मंदिर में नया गीता भवन बनाया गया है। इस गीता भवन की विशेषता यह है कि यहां सांस्कृतिक कार्यक्रमों, प्रवचनों और शैक्षणिक आयोजनों हेतु अत्याधुनिक सुविधाओं से युक्त 550 सीट का एक खूबसूरत सभागृह भी बनाया गया है।

    सकारात्मक एवं आध्यात्मिक वातावरण से युक्त 50-सीटर रीडिंग हॉल तथा आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित डिजिटल लाइब्रेरी की स्थापना की गई है। लाइब्रेरी में अध्यात्म, दर्शन, योग, ध्यान, भारतीय संस्कृति, माइंडफुलनेस तथा जीवन-प्रबंधन से संबंधित लगभग 1200 पुस्तकों का समृद्ध संग्रह उपलब्ध है। इसके अतिरिक्त, डिजिटल आर्काइव के माध्यम से अनेक ई-बुक्स, ऑडियो-वीडियो व्याख्यान, ऑनलाइन कोर्स तथा अन्य डिजिटल संसाधनों तक सरलतापूर्वक पहुँच सुनिश्चित की गई है। लाइब्रेरी की आंतरिक सज्जा को प्राकृतिक रंगों, आध्यात्मिक कलाकृतियों, इनडोर पौधों तथा सौम्य प्रकाश व्यवस्था के माध्यम से इस प्रकार डिज़ाइन किया गया है कि उपयोगकर्ताओं को शांत, प्रेरणादायी तथा एकाग्रता-उन्मुख वातावरण प्राप्त हो सके।

    मंदिर परिसर के पुनर्विकसित भागों में प्रदर्शनी कक्ष विकसित किए गए हैं, जिससे यह स्थल धार्मिक विरासत के संरक्षण के साथ-साथ कला एवं संस्कृति को एक साथ बढ़ावा देते हुए जनता के लिए एक समावेशी सांस्कृतिक अवसंरचना भी प्रदान करेगा।

  • MP: 10 जिलों में एसआईआर का काम पूर्ण, 35 जिलों ने पार किया 96% से अधिक का लक्ष्य

    MP: 10 जिलों में एसआईआर का काम पूर्ण, 35 जिलों ने पार किया 96% से अधिक का लक्ष्य


    भोपाल।
    भारत निर्वाचन आयोग के निर्देश पर मध्य प्रदेश में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के अंतर्गत गणना पत्रकों के डिजिटलाइजेशन का कार्य तेज गति से जारी है। अभी तक मध्य प्रदेश में लगभग 5 करोड़ 42 लाख गणना पत्रकों का डिजीटाइजेशन पूरा हो चुका है। जो कुल कार्य का 94.5 फीसदी है। राज्य के 10 जिलों अशोक नगर,नीमच, बैतूल , गुना, मंडला , डिंडोरी , शाजापुर, सीहोर, सीधी और उमरिया में शत् प्रतिशत डिजीटाइजेशन का काम हो चुका है।

    यह जानकारी सोमवार देर शाम मप्र के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी (सीईओ) संजीव कुमार झा ने दी। सीईओ झा ने सभी शासकीय सेवकों और नागरिकों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि भारत निर्वाचन आयोग द्वारा निर्धारित समयावधि से पूर्व यह उपलब्धि सभी के प्रयास और कर्तव्य निष्ठा से ही संभव हुई है।

    झा ने बताया कि प्रदेश के 35अन्य जिलों ने 96 प्रतिशत से अधिक कार्य पूरा कर उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है। इसके अलावा प्रदेश के 5जिलों में 93% से अधिक कार्य पूर्ण हो चुका है। मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी झा ने डिजिटाइजेशन में लगे सभी शासकीय सेवकों, बीएलओ तथा सहयोगी नागरिकों के समन्वित प्रयास की सराहना की जिसके चलते निर्धारित समय से पहले ही कार्य पूर्णता की ओर है। उन्होंने कहा कि सभी जिलों में शत-प्रतिशत कार्य शीघ्र पूरा कर लिया जाएगा।