Category: Religious Astrology

  • गुड़ी पड़वा पर आस्था का उत्सव: सिद्धिविनायक मंदिर में 2 करोड़ के गहनों की नीलामी, बाप्पा का प्रसाद पाने उमड़े भक्त

    गुड़ी पड़वा पर आस्था का उत्सव: सिद्धिविनायक मंदिर में 2 करोड़ के गहनों की नीलामी, बाप्पा का प्रसाद पाने उमड़े भक्त


    नई दिल्ली । हिंदू नववर्ष और गुड़ी पड़वा के पावन अवसर पर श्री सिद्धिविनायक गणपति मंदिर में श्रद्धा भक्ति और उल्लास का अद्भुत संगम देखने को मिला। इस खास दिन मंदिर ट्रस्ट द्वारा बाप्पा को अर्पित किए गए सोने-चांदी के आभूषणों की भव्य नीलामी आयोजित की गई जिसमें देशभर से आए श्रद्धालुओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। हर कोई इस पावन अवसर पर भगवान गणेश के चरणों से जुड़े किसी भी आभूषण को अपने घर ले जाकर उसे आशीर्वाद के रूप में प्राप्त करना चाहता था।

    इस वर्ष की नीलामी खास इसलिए भी रही क्योंकि इसमें कुल 234 बहुमूल्य गहनों को शामिल किया गया था जिनकी अनुमानित कीमत लगभग 2 करोड़ रुपये आंकी गई। नीलामी में सोने के सिक्कों से लेकर आकर्षक जंजीरें नक्काशीदार लॉकेट कंगन चांदी की पादुका और भगवान गणेश के प्रिय वाहन मूषक की प्रतिमाएं भी शामिल थीं। जैसे ही नीलामी प्रक्रिया शुरू हुई मंदिर परिसर में उत्साह और भक्ति का माहौल और अधिक गहरा हो गया। भक्तों के बीच इन पवित्र वस्तुओं को प्राप्त करने की होड़ साफ दिखाई दी।

    भक्तों के लिए ये गहने केवल धातु के आभूषण नहीं बल्कि साक्षात बाप्पा का आशीर्वाद माने जाते हैं। मान्यता है कि गुड़ी पड़वा पर खरीदी गई कोई भी वस्तु विशेष शुभ फल देती है और यदि वह वस्तु सिद्धिविनायक मंदिर से जुड़ी हो तो उसका महत्व कई गुना बढ़ जाता है। एक श्रद्धालु ने बताया कि ऐसे पावन गहनों को घर में रखने से सुख-समृद्धि शांति और सकारात्मक ऊर्जा का वास होता है। यही वजह है कि लोग लाखों रुपये तक की बोली लगाने में भी पीछे नहीं हटते।

    इस आयोजन का एक महत्वपूर्ण सामाजिक पहलू भी है। मंदिर ट्रस्ट के अनुसार नीलामी से प्राप्त होने वाली करोड़ों रुपये की राशि का उपयोग केवल मंदिर के रखरखाव तक सीमित नहीं रहता बल्कि इसे समाजसेवा के विभिन्न कार्यों में भी लगाया जाता है। शिक्षा स्वास्थ्य सेवाओं और जरूरतमंदों की सहायता के लिए यह धन एक मजबूत आधार बनता है। इस प्रकार भक्तों की आस्था से जुड़ी यह नीलामी समाज के कमजोर वर्गों के लिए आशा और सहयोग का माध्यम बन जाती है।

    गुड़ी पड़वा जैसे शुभ पर्व पर आयोजित यह नीलामी न केवल धार्मिक परंपराओं को जीवित रखती है बल्कि यह संदेश भी देती है कि भक्ति और सेवा का मेल समाज को सशक्त बनाने में अहम भूमिका निभा सकता है। सिद्धिविनायक मंदिर का यह अनूठा प्रयास आस्था को एक नई दिशा देता है जहां श्रद्धा केवल व्यक्तिगत लाभ तक सीमित न रहकर सामूहिक कल्याण का मार्ग प्रशस्त करती है।

  • चैत्र नवरात्रि 2026: पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा से पाएँ सुख, शांति और समृद्धि का आशीर्वाद

    चैत्र नवरात्रि 2026: पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा से पाएँ सुख, शांति और समृद्धि का आशीर्वाद


    नई दिल्ली । चैत्र नवरात्रि का पावन पर्व आज 19 मार्च 2026 से आरंभ हो चुका है जो 27 मार्च 2026 को राम नवमी के दिन संपन्न होगा। हिंदू धर्म में नवरात्रि का विशेष महत्व है क्योंकि इन नौ दिनों में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है। नवरात्रि का पहला दिन मां शैलपुत्री को समर्पित होता है जिन्हें पर्वतराज हिमालय की पुत्री और सौभाग्य की देवी माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन विधि-विधान से पूजा करने से जीवन में स्थिरता सकारात्मक ऊर्जा और मानसिक शांति प्राप्त होती है।

    ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार इस वर्ष घटस्थापना यानी कलश स्थापना के लिए दो शुभ मुहूर्त उपलब्ध हैं। पहला मुहूर्त सुबह 06:52 से 07:43 तक रहेगा जिसकी अवधि लगभग 50 मिनट है। यदि इस समय पूजा संभव न हो तो अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12:05 से 12:53 तक विशेष फलदायी माना गया है। शुभ मुहूर्त में की गई पूजा घर में सुख-समृद्धि और बरकत लेकर आती है।

    पूजा की शुरुआत प्रातःकाल स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करने से होती है। इसके बाद घर के पूजा स्थान पर लकड़ी की चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर मां दुर्गा या मां शैलपुत्री की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित की जाती है। विधिपूर्वक कलश स्थापना की जाती है जो नवरात्रि का सबसे महत्वपूर्ण अनुष्ठान माना जाता है। इसके बाद मां शैलपुत्री का ध्यान करते हुए उन्हें सफेद फूल अर्पित किए जाते हैं क्योंकि सफेद रंग उन्हें अत्यंत प्रिय है।

    भोग के रूप में मां को गाय के दूध से बनी मिठाई या अन्य सफेद खाद्य पदार्थ अर्पित किए जाते हैं। पूजा के दौरान घी का अखंड दीपक जलाना शुभ माना जाता है जिससे घर की नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है और सकारात्मक वातावरण का निर्माण होता है। श्रद्धा और भक्ति के साथ मंत्रोच्चारण और प्रार्थना करने से मां की विशेष कृपा प्राप्त होती है।

    पूजा के समापन पर आरती का विशेष महत्व होता है। सुबह की आरती सूर्योदय के समय और शाम की आरती सूर्यास्त के बाद करना शुभ माना जाता है। परिवार के सभी सदस्यों का एक साथ आरती में शामिल होना घर में प्रेम एकता और सामंजस्य को बढ़ाता है। मां शैलपुत्री की आरती के माध्यम से भक्त अपनी मनोकामनाएं व्यक्त करते हैं और जीवन में सुख-संपत्ति की कामना करते हैं।

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मां शैलपुत्री की पूजा से व्यक्ति के जीवन में स्थिरता आती है और मन के विकार दूर होते हैं। जो भक्त सच्चे मन से उनकी आराधना करते हैं उन्हें हर प्रकार के कष्टों से मुक्ति मिलती है और जीवन में सुख शांति तथा समृद्धि का आगमन होता है। इस प्रकार नवरात्रि का पहला दिन आध्यात्मिक ऊर्जा और नई शुरुआत का प्रतीक माना जाता है।

  • चैत्र नवरात्रि में समय की कमी? दुर्गा सप्तशती के बराबर फल देगा यह छोटा मंत्र

    चैत्र नवरात्रि में समय की कमी? दुर्गा सप्तशती के बराबर फल देगा यह छोटा मंत्र


    नई दिल्ली । चैत्र नवरात्रि के पावन अवसर पर मां दुर्गा की उपासना का विशेष महत्व माना जाता है। इन नौ दिनों में दुर्गा सप्तशती और दुर्गा चालीसा का पाठ अत्यंत फलदायी बताया गया है। हालांकि आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में हर किसी के लिए इनका पूरा पाठ करना संभव नहीं हो पाता। ऐसे में शास्त्रों में कुछ सरल उपाय भी बताए गए हैं जिनसे समान फल की प्राप्ति संभव मानी गई है।

    दुर्गा सप्तशती में मां दुर्गा की महिमा शक्ति और उनकी महिषासुर पर विजय का वर्णन 13 अध्यायों में किया गया है। मान्यता है कि इसका पाठ करने से जीवन के कष्ट भय और बाधाएं दूर होती हैं तथा साधक को मां की विशेष कृपा प्राप्त होती है। यही कारण है कि नवरात्रि में नवचंडी और शतचंडी यज्ञ जैसे अनुष्ठान भी किए जाते हैं।

    कम समय में भी करें प्रभावशाली पाठ

    अगर आपके पास पूरा पाठ करने का समय नहीं है तो आप दुर्गा सप्तशती के केवल रात्रि सूक्त प्रथम अध्याय और देवी सूक्त पंचम अध्याय का पाठ कर सकते हैं। इसे भी अत्यंत प्रभावशाली माना गया है और इससे माता की कृपा प्राप्त होती है।

    मंत्र जप से मिलेगा समान फल

    यदि इतना समय भी नहीं है तो शास्त्रों के अनुसार यह बीज मंत्र सबसे सरल और शक्तिशाली उपाय माना गया है

    ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे

    इस मंत्र का 108 या 1008 बार जप करने से दुर्गा सप्तशती के पाठ के समान फल मिलने की मान्यता है।

    इसके अलावा

    या देवी सर्वभूतेषु शक्ति रूपेण संस्थिता
    का नियमित जप भी जीवन से भय बाधाओं और नकारात्मक ऊर्जा को दूर करता है। और यदि आप सबसे आसान उपाय चाहते हैं तो जय माता दी या दुर्गा-दुर्गा का सच्चे मन से स्मरण करना भी उतना ही फलदायी माना गया है। इस प्रकार समय की कमी होने पर भी श्रद्धा और भक्ति के साथ किए गए छोटे-छोटे मंत्र जप से मां दुर्गा की कृपा प्राप्त की जा सकती है।

  • आज तीन पर्वों का संगम: गुड़ी पड़वा, नवरात्रि और उगादी से शुभारंभ होगा हिंदू नववर्ष

    आज तीन पर्वों का संगम: गुड़ी पड़वा, नवरात्रि और उगादी से शुभारंभ होगा हिंदू नववर्ष


    नई दिल्ली । आज हिंदू धर्म के लिए बेहद खास दिन है क्योंकि तीन महत्वपूर्ण पर्व गुड़ी पड़वा नवरात्रि और उगादी एक साथ मनाए जा रहे हैं। उत्तर भारत में यह दिन चैत्र शुक्ल प्रतिपदा के रूप में नववर्ष की शुरुआत का प्रतीक है जबकि दक्षिण भारत में आंध्र प्रदेश तेलंगाना और कर्नाटक में इसे उगादी के रूप में मनाया जाता है। महाराष्ट्र में यह दिन गुड़ी पड़वा के रूप में नववर्ष की शुरुआत का पर्व है।

    उगादी का महत्व

    उगादी का अर्थ है युग की शुरुआत और इसे प्रकृति के श्रृंगार और नए जीवन का प्रतीक माना जाता है। मान्यता है कि इसी दिन भगवान ब्रह्मा ने सृष्टि की रचना प्रारंभ की थी और समय की गणना भी इसी दिन से शुरू हुई थी। यह पर्व नए अवसर समृद्धि और खुशहाली का प्रतीक है।

    शुभ मुहूर्त

    चैत्र शुक्ल प्रतिपदा तिथि आज यानी 19 मार्च को सुबह 6:52 से शुरू होकर कल 20 मार्च को शाम 5:52 तक रहेगी। नवरात्रि के पहले दिन घट स्थापना का विशेष महत्व है। घटस्थापना का शुभ मुहूर्त सुबह 6:52 से 8:08 बजे तक है जबकि अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12:22 से 1:11 बजे तक रहेगा।

    गुड़ी बांधने का समय

    महाराष्ट्र में गुड़ी पड़वा के अवसर पर गुड़ी बांधने और ध्वज फहराने का शुभ मुहूर्त सुबह 5:15 से 7:57 बजे तक है। इस दिन लोग अपने घरों को सजाते हैं रंगोली बनाते हैं और विशेष पकवान तैयार करते हैं। गुड़ी पड़वा नई शुरुआत समृद्धि और खुशहाली का प्रतीक माना जाता है। आज का दिन तीनों पर्वों के संगम और नववर्ष की शुरुआत का प्रतीक है जो पूरे देश में उल्लास और उत्साह के साथ मनाया जाएगा।

  • मौसम बदलते ही क्यों रखा जाता है नवरात्रि व्रत जानिए इसके पीछे का आयुर्वेदिक कारण

    मौसम बदलते ही क्यों रखा जाता है नवरात्रि व्रत जानिए इसके पीछे का आयुर्वेदिक कारण


    नई दिल्ली। Navratri में व्रत रखना केवल धार्मिक आस्था का विषय नहीं है बल्कि इसके पीछे गहरा आयुर्वेदिक विज्ञान भी छिपा हुआ है। अक्सर लोग इसे पूजा पाठ और श्रद्धा से जोड़कर देखते हैं लेकिन अगर इसे Ayurveda के नजरिए से समझें तो यह शरीर और मन दोनों के लिए एक प्राकृतिक रीसेट प्रक्रिया की तरह काम करता है।

    दरअसल नवरात्रि ऐसे समय पर आती है जब मौसम में बदलाव हो रहा होता है। यह परिवर्तन सीधे हमारे शरीर को प्रभावित करता है। आयुर्वेद के अनुसार इस दौरान शरीर में वात और पित्त दोष असंतुलित हो सकते हैं जिससे पाचन तंत्र कमजोर होने लगता है और बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे समय में व्रत रखने और हल्का सात्विक भोजन लेने से शरीर को संतुलन में लाने में मदद मिलती है।

    व्रत के दौरान लोग फल कुट्टू सिंघाड़ा दही और साबूदाना जैसे हल्के और आसानी से पचने वाले आहार लेते हैं। इससे पाचन तंत्र को आराम मिलता है और रोजाना के भारी तले भुने और मसालेदार भोजन से जो दबाव बनता है वह कम हो जाता है। इस प्रक्रिया से शरीर को खुद को सुधारने और ऊर्जा को पुनः संतुलित करने का समय मिलता है।

    आयुर्वेद में पाचन शक्ति यानी अग्नि को स्वास्थ्य का आधार माना गया है। जब अग्नि मजबूत होती है तो शरीर स्वस्थ रहता है। व्रत रखने से यह अग्नि पुनः सक्रिय होती है और शरीर में जमा विषैले तत्व बाहर निकलने लगते हैं। यही वजह है कि व्रत के दौरान लोग खुद को हल्का ऊर्जावान और अधिक सक्रिय महसूस करते हैं।

    नवरात्रि का व्रत केवल शरीर ही नहीं बल्कि मन पर भी सकारात्मक प्रभाव डालता है। इस दौरान ध्यान पूजा और संयम का पालन किया जाता है जिससे मानसिक शांति प्राप्त होती है। आज की तेज रफ्तार जिंदगी में यह एक तरह का मानसिक शुद्धिकरण है जो व्यक्ति को भीतर से संतुलित और शांत बनाता है।

    इसके अलावा नवरात्रि में खाए जाने वाले सात्विक खाद्य पदार्थ न केवल पचने में आसान होते हैं बल्कि शरीर को आवश्यक पोषण भी प्रदान करते हैं। ये भोजन शरीर को हल्का रखते हैं और रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में मदद करते हैं जिससे मौसमी बीमारियों से बचाव संभव होता है। इस तरह नवरात्रि का व्रत आस्था और स्वास्थ्य दोनों का सुंदर संतुलन प्रस्तुत करता है।

  • नवरात्र विशेष: यह वन तुलसी चढ़ाने से प्रसन्न होती हैं मां दुर्गा, औषधीय गुणों का खजाना

    नवरात्र विशेष: यह वन तुलसी चढ़ाने से प्रसन्न होती हैं मां दुर्गा, औषधीय गुणों का खजाना


    नई दिल्ली। चैत्र नवरात्रि के पावन अवसर पर मां भगवती की आराधना में जहां विभिन्न फूल और पत्तियां अर्पित की जाती हैं वहीं एक खास पौधा ऐसा भी है जो देवी को अत्यंत प्रिय माना जाता है। आमतौर पर पूजा में तुलसी चढ़ाना वर्जित माना जाता है लेकिन एक विशेष प्रकार की तुलसी जिसे दौना दवना मरुआ या वन तुलसी कहा जाता है मां दुर्गा को बेहद प्रिय है।

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार नवरात्रि के दौरान इस वन तुलसी की पत्तियां और फूल अर्पित करने से मां प्रसन्न होती हैं और घर में सुख समृद्धि व सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। यह पौधा आकार में छोटा लगभग 1 से 2 फुट ऊंचा होता है लेकिन इसकी सुगंध अत्यंत तेज और मनमोहक होती है। इसके पत्ते गुलदाउदी की तरह कटावदार होते हैं और इसकी खुशबू इतनी प्रभावशाली मानी जाती है कि महंगे परफ्यूम भी इसके सामने फीके पड़ जाते हैं।

    धार्मिक परंपराओं में दौना को भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी का भी प्रिय माना गया है लेकिन विशेष रूप से नवरात्रि में मां दुर्गा को इसे अर्पित करने की परंपरा है। वास्तुशास्त्र के अनुसार घर में इस पौधे को लगाने से वातावरण शुद्ध रहता है और लक्ष्मी कृपा बनी रहती है। यह न केवल पूजा को पूर्णता प्रदान करता है बल्कि घर को सुगंधित और सकारात्मक ऊर्जा से भर देता है।

    अगर आयुर्वेद की दृष्टि से देखें तो वन तुलसी औषधीय गुणों से भरपूर है। आयुर्वेद में इसे कफ वात और कृमि रोगों के उपचार में लाभकारी बताया गया है। यह सर्दी खांसी जुकाम बुखार जोड़ों के दर्द सूजन और पेट की समस्याओं में भी कारगर है। इसके पत्ते बीज जड़ और डंठल सभी औषधीय रूप से उपयोगी होते हैं।

    वैज्ञानिक दृष्टिकोण से भी तुलसी के गुणों को स्वीकार किया गया है। अमेरिका की राष्ट्रीय चिकित्सा पुस्तकालय में प्रकाशित शोधों के अनुसार तुलसी का सेवन डायबिटीज हृदय रोग तनाव और मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में मदद करता है। खास बात यह है कि इसके सेवन से गंभीर दुष्प्रभाव नहीं पाए गए हैं।

    वन तुलसी में भरपूर मात्रा में एंटीऑक्सीडेंट और एंटी माइक्रोबियल गुण होते हैं जो शरीर को फ्री रेडिकल्स से बचाते हैं और संक्रमण से लड़ने की क्षमता बढ़ाते हैं। यह श्वसन तंत्र को मजबूत बनाती है और अस्थमा ब्रोंकाइटिस व खांसी जैसी समस्याओं में राहत देती है। साथ ही इसकी सुगंध प्राकृतिक रूप से मच्छरों को दूर रखने और हवा को शुद्ध करने में भी सहायक होती है।

    इस तरह वन तुलसी न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है बल्कि स्वास्थ्य के लिए भी एक अमूल्य औषधि है। नवरात्रि के इस पावन अवसर पर इसे अर्पित करना जहां मां भगवती को प्रसन्न करता है वहीं इसका उपयोग शरीर और मन दोनों को स्वस्थ और संतुलित रखने में मदद करता है

  • Love Horoscope 19 March: आपके रिश्ते में आज क्या होगा, मीन और अन्य राशियों के लिए विशेष भविष्यवाणी

    Love Horoscope 19 March: आपके रिश्ते में आज क्या होगा, मीन और अन्य राशियों के लिए विशेष भविष्यवाणी

    नई दिल्ली। 19 मार्च का दिन प्रेम जीवन में महत्वपूर्ण संकेत दे रहा है आज अमावस्या तिथि है जो सुबह 06:53 बजे तक रहेगी और उत्तराभाद्रपद नक्षत्र तथा शुभ योग शुक्ल के साथ किस्तुघ्न और बव करण का संयोग भी बन रहा है इन ज्योतिषीय परिस्थितियों के चलते यह दिन कई राशियों के प्रेम जीवन में उतार-चढ़ाव और नई संभावनाओं को लेकर आएगा

    मेष राशि के लिए यह दिन दोस्तों के साथ समय बिताने और सामाजिक गतिविधियों में शामिल होने का है जिससे जीवन में ऊर्जा और आत्मविश्वास बढ़ेगा हालांकि जीवनसाथी कभी-कभी आपको संदिग्ध या दूर लग सकते हैं ऐसे में धैर्य और समझदारी बनाए रखना जरूरी है

    वृष राशि वालों को प्रेम संबंधों में संतुलन बनाए रखना होगा अपनी समझदारी और ताकत से दिन के अवसरों का लाभ उठाएं उत्सव और उत्साह से भरे इस दिन को अपने साथी के साथ साझा करना लाभकारी रहेगा

    मिथुन राशि के लोग आज अपने सच्चे भावनाओं को आसानी से व्यक्त कर पाएंगे यह समय अपने प्रेमी के साथ समय बिताने और संबंध को मजबूत करने का है

    कर्क राशि वालों के लिए यह दिन व्यापार और प्रेम मामलों में सफलता और कौशल लाएगा आप परिवार और धर्म की ओर झुकाव महसूस करेंगे और रोमांचक अनुभवों का आनंद ले सकेंगे

    सिंह राशि वालों को किसी गुरु या मार्गदर्शक से मदद मिलने का अवसर मिलेगा अपने प्रेमी को खुश रखने पर ध्यान दें जिससे आप भी संतुष्ट और प्रसन्न रहेंगे

    कन्या राशि के लिए आज परिवार और करीबी लोगों पर ध्यान अधिक रहेगा दिन खुशियों और मौज-मस्ती से भरा रहेगा प्रेम में पैसा प्राथमिकता न पाएं और भावनाओं को महत्व दें

    तुला राशि वालों को अपनी बुद्धिमत्ता और गुणों का उपयोग कर अपने प्रेम जीवन में रोमांच बनाए रखना होगा अलग-अलग तरीकों से अपने प्रेम को व्यक्त करें और संबंध में नवीनता बनाए रखें

    वृश्चिक राशि वालों को यात्रा करते समय सुरक्षा का ध्यान रखना होगा बच्चों और बीमार लोगों की देखभाल में समय व्यतीत होगा आपकी रचनात्मक सोच और समस्याओं को सुलझाने की क्षमता आसपास सकारात्मक प्रभाव डालेगी

    धनु राशि वाले प्रेम जीवन में किसी खास सरप्राइज को याद रखें इससे आपका दिन आनंदमय होगा अपने अनुभवों और योजनाओं का उपयोग कर सफलता प्राप्त कर सकते हैं आज प्रेम जीवन में महत्वपूर्ण निर्णय लेने की आवश्यकता हो सकती है

    मकर राशि के लोग यदि अपने साथी के बारे में निश्चित नहीं हैं तो निर्णय लेने से पहले विचार करें बड़ों की सलाह महत्वपूर्ण होगी सही समय पर सही निर्णय लेना लाभकारी रहेगा

    कुंभ राशि वालों के लिए आज किसी खास मित्र के साथ भविष्य की योजनाओं पर चर्चा करना रोमांचक रहेगा आपसी सहमति और विश्वास बनाए रखें ताकि कठिन परिस्थितियों में भी रिश्ता मजबूत बना रहे

    मीन राशि के लिए आज का दिन थोड़ा चुनौतीपूर्ण हो सकता है आपके प्रेम जीवन में कुछ समस्याएं और बाधाएं चिंता का कारण बन सकती हैं साथी के साथ पूरी ईमानदारी से पेश आएँ किसी भी बात को छिपाने से बचें इससे आपसी विश्वास और मजबूत होगा प्रेम जीवन में पारदर्शिता और भावनाओं की स्पष्टता महत्वपूर्ण रहेगी

    इस प्रकार 19 मार्च का दिन विभिन्न राशियों के प्रेम जीवन में अपने अनुभव और समझदारी के अनुसार उतार-चढ़ाव लाएगा और मीन राशि के लोगों को अपने संबंधों में विशेष सतर्कता और विश्वास बनाए रखने की आवश्यकता है

  • चैत्र नवरात्रि: मां हिंगुला के चमत्कार से जलती है जगन्नाथ मंदिर की रसोई, निकलती है हिंगुला यात्रा

    चैत्र नवरात्रि: मां हिंगुला के चमत्कार से जलती है जगन्नाथ मंदिर की रसोई, निकलती है हिंगुला यात्रा


    नई दिल्ली। चैत्र नवरात्रि के पावन अवसर पर जहां भक्त मां दुर्गा की आराधना में लीन हैं वहीं पूजा में चढ़ाए जाने वाले फलों का भी विशेष महत्व होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार अनार जिसे संस्कृत में दादिमा कहा जाता है माता भगवती को अत्यंत प्रिय फल माना गया है। लाल-लाल दानों से भरा यह फल न केवल आस्था का प्रतीक है बल्कि स्वास्थ्य के लिए भी किसी वरदान से कम नहीं है।

    धर्म शास्त्रों में अनार को विशेष स्थान दिया गया है। मान्यता है कि सभी फलों में यह देवी को सबसे अधिक प्रिय है और इसे अर्पित करने से सुख-समृद्धि संतान सुख आरोग्य और कर्ज मुक्ति का आशीर्वाद प्राप्त होता है। नवरात्रि में अनार चढ़ाने की परंपरा प्राचीन समय से चली आ रही है जिसे अत्यंत फलदायी माना जाता है।

    अनार की गहरी लाल रंगत शक्ति ऊर्जा और सकारात्मकता का प्रतीक मानी जाती है। यह रंग मां दुर्गा के शक्तिशाली और रौद्र स्वरूप से भी जुड़ा हुआ है। यही कारण है कि भक्त नवरात्रि के दौरान विशेष रूप से अनार अर्पित करते हैं ताकि उनके जीवन में सुख-शांति और समृद्धि बनी रहे। धार्मिक मान्यता यह भी है कि इसे चढ़ाने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और आर्थिक स्थिति मजबूत होती है।

    अनार को अखंड फल भी माना जाता है ठीक वैसे ही जैसे नारियल नई दिल्ली। चैत्र नवरात्रि के पावन अवसर पर देशभर में देवी मंदिरों में विशेष तैयारियां की जा रही हैं। इस दौरान मां भगवती के नौ स्वरूपों की पूजा होती है, लेकिन ओडिशा में मां के एक अद्भुत और रहस्यमयी रूप की आराधना की जाती है अग्नि स्वरूप। यह परंपरा जुड़ी है मां हिंगुला मंदिर से, जिसे सिद्धपीठों में विशेष स्थान प्राप्त है।

    ओडिशा के मयूरभंज जिले में स्थित यह मंदिर अपनी भव्यता और आस्था के लिए प्रसिद्ध है। मंदिर के गर्भगृह में मां हिंगुला की सोने से सजी प्रतिमा विराजमान है, जिनके चारों हाथों में अस्त्र-शस्त्र हैं। नवरात्रि के नौ दिनों तक मां का विशेष श्रृंगार किया जाता है और भक्त दूर-दूर से दर्शन के लिए यहां पहुंचते हैं। खास बात यह है कि यहां मां को अग्नि की देवी के रूप में पूजा जाता है। श्रद्धालु दर्शन के बाद मंदिर परिसर में बने अग्निकुंड में भोग अर्पित करते हैं, जो इस परंपरा को और भी विशेष बनाता है।

    मां हिंगुला का संबंध विश्व प्रसिद्ध जगन्नाथ मंदिर से भी जुड़ा हुआ है। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, पुरी के राजा को भगवान जगन्नाथ ने स्वप्न में आदेश दिया था कि वे मां हिंगुला की पूजा करें, जिससे मंदिर की विशाल रसोई सुचारू रूप से संचालित हो सके। माना जाता है कि मां हिंगुला ही पवित्र अग्नि के रूप में प्रकट होकर जगन्नाथ मंदिर की रसोई में ऊर्जा प्रदान करती हैं। यही कारण है कि यह रसोई आज भी अनूठे ढंग से संचालित होती है और इसे दुनिया की सबसे बड़ी मंदिर रसोइयों में गिना जाता है।

    चैत्र माह में यहां विशेष रूप से हिंगुला यात्रा निकाली जाती है, जो आस्था और परंपरा का अद्भुत संगम है। यह यात्रा केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि ओडिशा की समृद्ध लोक संस्कृति का भी प्रतीक है। इस दौरान मंदिर परिसर में भव्य मेला लगता है, जिसमें हजारों की संख्या में श्रद्धालु शामिल होते हैं।

    भक्तों का मानना है कि मां हिंगुला के अग्नि स्वरूप के दर्शन करने से जीवन के सभी कष्ट दूर हो जाते हैं और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है। यही वजह है कि कई परिवार अपने नवजात बच्चों को पहली बार मां के दर्शन कराने यहां लाते हैं। कुछ श्रद्धालु यहां मुंडन संस्कार भी कराते हैं, जिसे अत्यंत शुभ माना जाता है।

    चैत्र नवरात्रि के दौरान मां हिंगुला का यह पावन धाम आस्था, चमत्कार और संस्कृति का जीवंत केंद्र बन जाता है। यहां देवी की अग्नि स्वरूप में पूजा और उससे जुड़ी मान्यताएं न केवल भक्तों की श्रद्धा को मजबूत करती हैं, बल्कि भारतीय परंपराओं की विविधता और गहराई को भी दर्शाती हैं। श्रीफल का धार्मिक महत्व है। कई भक्त इसे विशेष रूप से कर्ज से मुक्ति और परिवार की खुशहाली के लिए माता को अर्पित करते हैं। पूजा-पाठ के साथ-साथ यह फल परिवार के स्वास्थ्य के लिए भी अत्यंत लाभकारी माना जाता है।

    अगर आयुर्वेद की दृष्टि से देखें तो अनार औषधीय गुणों से भरपूर होता है। प्राचीन ग्रंथों विशेषकर 12वीं शताब्दी के संस्कृत ग्रंथ मानसोल्लास में इसे पवित्र और स्वास्थ्यवर्धक बताया गया है। यह फल रक्त शुद्ध करने एनीमिया यानी खून की कमी दूर करने पाचन तंत्र को मजबूत बनाने और हृदय रोगों से बचाव में सहायक माना जाता है।

    अनार में भरपूर मात्रा में विटामिन C एंटीऑक्सीडेंट फाइबर और पोटैशियम पाए जाते हैं जो इम्युनिटी बढ़ाने में मदद करते हैं। गर्मी के मौसम में यह शरीर को ठंडक प्रदान करता है और त्वचा को स्वस्थ बनाए रखता है। अनार का जूस पीने से शरीर में नई ऊर्जा आती है और थकान दूर होती है।

    इस तरह अनार केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक नहीं बल्कि स्वास्थ्य का भी महत्वपूर्ण स्रोत है। नवरात्रि के इस पावन पर्व पर इसे अर्पित करना जहां आध्यात्मिक लाभ देता है वहीं इसका सेवन शरीर को स्वस्थ और ऊर्जावान बनाए रखने में भी मदद करता है।

  • नवरात्र विशेष: मां भगवती को प्रिय अनार, आस्था के साथ सेहत का भी खजाना

    नवरात्र विशेष: मां भगवती को प्रिय अनार, आस्था के साथ सेहत का भी खजाना


    नई दिल्ली। चैत्र नवरात्रि के पावन अवसर पर जहां भक्त मां दुर्गा की आराधना में लीन हैं वहीं पूजा में चढ़ाए जाने वाले फलों का भी विशेष महत्व होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार अनार जिसे संस्कृत में दादिमा कहा जाता है माता भगवती को अत्यंत प्रिय फल माना गया है। लाल-लाल दानों से भरा यह फल न केवल आस्था का प्रतीक है बल्कि स्वास्थ्य के लिए भी किसी वरदान से कम नहीं है।

    धर्म शास्त्रों में अनार को विशेष स्थान दिया गया है। मान्यता है कि सभी फलों में यह देवी को सबसे अधिक प्रिय है और इसे अर्पित करने से सुख-समृद्धि संतान सुख आरोग्य और कर्ज मुक्ति का आशीर्वाद प्राप्त होता है। नवरात्रि में अनार चढ़ाने की परंपरा प्राचीन समय से चली आ रही है जिसे अत्यंत फलदायी माना जाता है।

    अनार की गहरी लाल रंगत शक्ति ऊर्जा और सकारात्मकता का प्रतीक मानी जाती है। यह रंग मां दुर्गा के शक्तिशाली और रौद्र स्वरूप से भी जुड़ा हुआ है। यही कारण है कि भक्त नवरात्रि के दौरान विशेष रूप से अनार अर्पित करते हैं ताकि उनके जीवन में सुख-शांति और समृद्धि बनी रहे। धार्मिक मान्यता यह भी है कि इसे चढ़ाने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और आर्थिक स्थिति मजबूत होती है।

    अनार को अखंड फल भी माना जाता है ठीक वैसे ही जैसे नारियल या श्रीफल का धार्मिक महत्व है। कई भक्त इसे विशेष रूप से कर्ज से मुक्ति और परिवार की खुशहाली के लिए माता को अर्पित करते हैं। पूजा-पाठ के साथ-साथ यह फल परिवार के स्वास्थ्य के लिए भी अत्यंत लाभकारी माना जाता है।

    अगर आयुर्वेद की दृष्टि से देखें तो अनार औषधीय गुणों से भरपूर होता है। प्राचीन ग्रंथों विशेषकर 12वीं शताब्दी के संस्कृत ग्रंथ मानसोल्लास में इसे पवित्र और स्वास्थ्यवर्धक बताया गया है। यह फल रक्त शुद्ध करने एनीमिया यानी खून की कमी दूर करने पाचन तंत्र को मजबूत बनाने और हृदय रोगों से बचाव में सहायक माना जाता है।

    अनार में भरपूर मात्रा में विटामिन C एंटीऑक्सीडेंट फाइबर और पोटैशियम पाए जाते हैं जो इम्युनिटी बढ़ाने में मदद करते हैं। गर्मी के मौसम में यह शरीर को ठंडक प्रदान करता है और त्वचा को स्वस्थ बनाए रखता है। अनार का जूस पीने से शरीर में नई ऊर्जा आती है और थकान दूर होती है।

    इस तरह अनार केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक नहीं बल्कि स्वास्थ्य का भी महत्वपूर्ण स्रोत है। नवरात्रि के इस पावन पर्व पर इसे अर्पित करना जहां आध्यात्मिक लाभ देता है वहीं इसका सेवन शरीर को स्वस्थ और ऊर्जावान बनाए रखने में भी मदद करता है।

  • नवरात्र में मां दुर्गा को अर्पित करें यह लाल फल, मिलेगा सुख समृद्धि और सेहत का आशीर्वाद

    नवरात्र में मां दुर्गा को अर्पित करें यह लाल फल, मिलेगा सुख समृद्धि और सेहत का आशीर्वाद


    नई दिल्ली। चैत्र नवरात्र का पावन पर्व शुरू होते ही पूरे देश में भक्ति और आस्था का माहौल बन जाता है इस दौरान भक्त मां दुर्गा की आराधना में विभिन्न प्रकार के फल फूल और प्रसाद अर्पित करते हैं लेकिन धार्मिक मान्यताओं के अनुसार एक ऐसा विशेष फल है जो भगवती को अत्यंत प्रिय माना जाता है और वह है अनार जिसे दादिमा भी कहा जाता है

    मान्यता है कि मां दुर्गा को लाल रंग अत्यधिक प्रिय है और अनार के लाल दाने शक्ति ऊर्जा और सकारात्मकता का प्रतीक होते हैं यही कारण है कि नवरात्र के दौरान अनार चढ़ाने की परंपरा बेहद शुभ मानी जाती है शास्त्रों में भी इसका उल्लेख मिलता है कि सभी फलों में अनार देवी को विशेष प्रिय है और इसे अर्पित करने से सुख समृद्धि संतान सुख और कर्ज मुक्ति का आशीर्वाद प्राप्त होता है

    धार्मिक दृष्टि से अनार को अखंड और पवित्र फल माना गया है जैसे नारियल को श्रीफल कहा जाता है उसी तरह अनार भी पूजा में विशेष स्थान रखता है इसकी लालिमा मां दुर्गा के शक्ति स्वरूप से जुड़ी मानी जाती है और इसे अर्पित करने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और परिवार में सौभाग्य बढ़ता है

    नवरात्र के दौरान कई श्रद्धालु विशेष रूप से आर्थिक समृद्धि और जीवन की परेशानियों से मुक्ति के लिए अनार चढ़ाते हैं ऐसा माना जाता है कि यह फल न केवल देवी को प्रसन्न करता है बल्कि भक्तों के जीवन में संतुलन और शांति भी लाता है

    धार्मिक महत्व के साथ-साथ अनार स्वास्थ्य के लिए भी किसी वरदान से कम नहीं है आयुर्वेद में इसे बेहद गुणकारी फल बताया गया है यह रक्त को शुद्ध करता है और शरीर में खून की कमी यानी एनीमिया को दूर करने में मदद करता है इसके नियमित सेवन से पाचन तंत्र मजबूत होता है और हृदय को भी लाभ मिलता है

    अनार में विटामिन सी एंटीऑक्सीडेंट फाइबर और पोटैशियम जैसे पोषक तत्व भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं जो शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाते हैं गर्मियों में यह शरीर को ठंडक देता है और त्वचा को स्वस्थ बनाए रखने में भी सहायक होता है अनार का जूस पीने से थकान दूर होती है और शरीर में नई ऊर्जा का संचार होता है

    इस तरह अनार एक ऐसा फल है जो न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है बल्कि स्वास्थ्य के लिए भी अत्यंत लाभकारी है नवरात्र के इस पावन अवसर पर मां दुर्गा को अनार अर्पित करना जीवन में सुख समृद्धि और अच्छे स्वास्थ्य की कामना का सुंदर माध्यम बन सकता है