Category: Religious Astrology

  • शुजालपुर में बच्ची की पढ़ाई के प्रति लगन ने दिलाया स्कूल बैगपुलिस ने 24 घंटे में ढूंढ निकाला

    शुजालपुर में बच्ची की पढ़ाई के प्रति लगन ने दिलाया स्कूल बैगपुलिस ने 24 घंटे में ढूंढ निकाला


    इंदौर। मध्यप्रदेश के शुजालपुर में एक तीसरी कक्षा की छात्रा की मासूम जिद और पढ़ाई के प्रति गहरी लगन ने पुलिस को भी भावुक कर दिया। मामला शुजालपुर मंडी थाना क्षेत्र का हैजहां सरस्वती शिशु मंदिर में पढ़ाई करने वाली चेरी नायक का स्कूल बैग ऑटो में छूट गया। बैग में उसकी किताबें और वर्कबुक थींजिन्हें लेकर बच्ची बेहद चिंतित थी।

    गुरुवार को चेरी अपनी मां पूजादादी कृष्णा और बुआ रंजना के साथ स्कूल गई थी। घर लौटते समय उसका स्कूल बैग ऑटो में ही छूट गयाऔर जब वह घर पहुंची तो बैग नहीं मिला। यह देखकर चेरी फूट-फूटकर रोने लगीक्योंकि उसे इस बात की चिंता थी कि उसकी सारी किताबें और वर्कबुक उसी बैग में थीं।

    बच्ची की जिद ने पुलिस को प्रेरित किया

    परिवार ने चेरी को नया बैग और किताबें दिलाने का भरोसा दियालेकिन चेरी नहीं मानी। उसने कहा कि उसे वही बैग चाहिए और इसके लिए पुलिस से मदद लेनी होगी। उसकी यह मासूम जिद और पढ़ाई के प्रति प्यार ने उसके पिता संदीप नायक और दादा अशोक नायक को भी प्रेरित कियाऔर वे उसे शुजालपुर मंडी थाने ले गए।

    चेरी ने थाने में जाकर एसडीओपी निमिष देशमुख को अपनी परेशानी बताई। उसकी आंखों में आंसू देखकर एसडीओपी ने तुरंत कार्रवाई का आदेश दिया और बैग ढूंढने की प्रक्रिया शुरू कर दी।

    सीसीटीवी और ऑटो चालक से मिली मदद

    पुलिस ने शहर भर के सीसीटीवी कैमरे खंगालने की प्रक्रिया शुरू की। सीसीटीवी फुटेज में चेरी एक ऑटो में बैठी दिखीलेकिन समस्या यह थी कि ऑटो की नंबर प्लेट नहीं थी। हालांकिपुलिस ने हार नहीं मानी और ऑटो पर लिखे नाम और उसके डिजाइन के आधार पर तलाश जारी रखी।

    कुछ पूछताछ और जांच के बाद पुलिस ने ऑटो चालक परवेज की पहचान की और उससे संपर्क किया। परवेज ने बताया कि उसे ऑटो में एक स्कूल बैग मिला थाजिसे वह सुरक्षित घर ले गया था। पुलिस ने परवेज से संपर्क किया और अगले दिन शुक्रवार सुबह वह बैग लेकर थाने पहुंचा।

    बच्ची की खुशी और पुलिस की मदद

    जब बैग पुलिस थाने में पहुंचातो चेरी को बुलाया गया। चेरी ने बैग देखकर खुशी से पुलिस को थैंक यू कहा। उसकी मुस्कान देखकर पुलिस टीम को भी संतोष मिला। बैग के मिलने से बच्ची के चेहरे पर चमक आ गईऔर उसकी पढ़ाई में रुकावट नहीं आई।

    पुलिस ने दी सीख

    एसडीओपी निमिष देशमुख ने बताया कि बच्ची की पढ़ाई के प्रति लगन देखकर पूरी पुलिस टीम ने इस काम में बेहद मेहनत की। उन्होंने आगे कहा कि यह घटना समाज के लिए एक संदेश है कि हमें अपनी जिम्मेदारियों को गंभीरता से लेना चाहिएचाहे वह किसी छोटी बच्ची की पढ़ाई के प्रति हो या किसी अन्य समाजिक काम में। साथ हीपुलिस ने ऑटो चालक परवेज को समझाइश दी कि यदि भविष्य में किसी को कोई सामान मिले तो वह उसे पुलिस के पास सौंपे।

  • पुत्रदा एकादशी 2025 साल की आखिरी एकादशी पर जरूर करें ये काम जीवन में बनी रहेगी सुख-समृद्धि

    पुत्रदा एकादशी 2025 साल की आखिरी एकादशी पर जरूर करें ये काम जीवन में बनी रहेगी सुख-समृद्धि


    नई दिल्ली । पुत्रदा एकादशी 2025 प्रत्येक महीने की शुक्ल और कृष्ण पक्ष को एकादशी का व्रत रखा जाता है। हिंदू धर्म में एकादशी व्रत का विशेष महत्व बताया गया है। धार्मिक मान्यता है कि एकादशी का व्रत करने से भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती। इस व्रत करने से व्यक्ति के घर में सदैव मां लक्ष्मी का वास रहता है और उनके घर में सदैव धन समृद्धि और खुशहाली बनी रहती है। साल 2025 की आखिरी एकादशी का व्रत 30 दिसंबर को रखा जाएगा। तो आइए जानते हैं कि साल की आखिरी एकादशी के दिन क्या-क्या करना चाहिए। साथ ही जानेंगे कि इस दिन पूजा के लिए शुभ मुहूर्त क्या रहेगा।
    पुत्रदा एकादशी 2025
    पुत्रदा एकादशी का व्रत साल में दो बार रखा जाता है एक सावन मास में दूसरा पौष माह में। पौष पुत्रदा एकादशी का व्रत 30 दिसंबर 2025 को रखा जाएगा। पुत्रदा एकादशी का व्रत करने से संतान को लंबी तरक्की और अच्छे स्वास्थ्य का आशीर्वाद मिलता है। वहीं जिन दंपतियों की कोई संतान नहीं है उन्हें पुत्रदा एकादशी का व्रत जरूर करना चाहिए। इस व्रत के प्रभाव से उनके घर जल्द ही किलकारी की गूंज सुनाई देगी।

    पुत्रदा एकादशी 2025 शुभ मुहूर्त

    पौत्र माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि का आरंभ 30 दिसंबर को सुबह 7 बजकर 50 मिनट पर होगा। एकादशी तिथि का समापन 31 दिसंबर को सुबह 5 बजे होगा। पुत्रदा एकादशी का पारण का 31 दिसंबर को किया जाएगा। पारण के लिए शुभ मुहूर्त दोपहर 1 बजकर 26 मिनट से दोपहर 3 बजकर 31 मिनट तक रहेगा।

    साल की अंतिम एकादशी के दिन करें ये काम

    एकादशी के दिन पीपल पेड़ के नीचे तेल का दीया जलाएं और ऊँ नमो नारायणाय नमः मंत्र का जाप करें। ऐसा करने से जीवन में समृद्धि और खुशहाली आती है।  एकादशी के दिन भगवान विष्णु को केले का भोग लगाएं और घी वाली रोटी पर गुड़ रखकर गाय को खिला दें। एकादशी के दिन ऐसा करने से धन-धान्य में वृद्धि होती है। एकादशी के दिन भगवान विष्णु का पंचामृत से अभिषेक करें। इस उपाय को करने से तरक्की और व्यापार में मुनाफा मिलता है। साथ ही हर तरह की बाधाएं भी दूर हो जाती हैंएकादशी के दिन शाम के समय तुलसी के पास दीपक जलाएं। ऐसा करने से आपके धन-संपत्ति में बरकत होती है।

  • लाभ दृष्टि योग 2026: 15 जनवरी को विशेष योग, इन राशियों को मिलेगा लाभ

    लाभ दृष्टि योग 2026: 15 जनवरी को विशेष योग, इन राशियों को मिलेगा लाभ


    नई दिल्ली: ज्योतिष विशेषज्ञों के अनुसार, साल 2026 का पहला महीना विशेष रूप से महत्वपूर्ण रहेगा। 15 जनवरी 2026 को शुक्र और शनि की दृष्टि से लाभ दृष्टि योग बनेगा। इस योग का असर सभी राशियों पर पड़ सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह योग आर्थिक, करियर और व्यक्तिगत जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने वाला है।

    ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, जब गुरु, शुक्र, बुध या चंद्रमा जैसे शुभ ग्रह किसी भाव पर अनुकूल दृष्टि डालते हैं, तो इसे लाभ दृष्टि योग कहा जाता है।

    राशियों पर असर:

    वृषभ: इस योग के प्रभाव से वृषभ राशि वालों को कमाई के नए रास्ते मिल सकते हैं। नौकरी में तारीफ, वेतन वृद्धि या नया ऑफर मिलने की संभावना है। व्यापार में अटके हुए पैसे भी वापस आ सकते हैं।

    मिथुन: मिथुन राशि के लिए यह योग आर्थिक मजबूती और निवेश से लाभ का संकेत देता है। परिवार का सहयोग बढ़ेगा और सुख-सुविधाओं में वृद्धि होगी। नौकरीपेशा लोगों को सैलरी बढ़ोतरी, बोनस या नई जिम्मेदारी मिल सकती है।

    तुला: तुला राशि वालों को काम और नेटवर्किंग से फायदा मिलने की संभावना है। दोस्तों और संपर्कों की मदद से बड़ा अवसर मिल सकता है। मीडिया, सेल्स और व्यापार से जुड़े लोगों के लिए समय अनुकूल रहेगा।

    मकर: मकर राशि के लिए यह योग करियर ग्रोथ का संकेत देता है। मेहनत का फल मिलेगा। प्रमोशन या जिम्मेदारी बढ़ सकती है। आय स्थिर रहेगी और खर्चों पर नियंत्रण रहेगा।

    कुंभ: कुंभ राशि वालों के लिए यह योग भाग्य को मजबूत करेगा। धन लाभ, नई योजनाओं की शुरुआत और धार्मिक व शैक्षणिक कार्यों में सफलता मिलने के संकेत हैं। पुराने निवेश, शेयर या किसी योजना से फायदा मिल सकता है। दोस्तों और बड़े भाई-बहनों का सहयोग काम को आसान बनाएगा।

    विशेषज्ञों का कहना है कि लाभ दृष्टि योग का असर सही समय पर किए गए निर्णय, मेहनत और नेटवर्किंग पर निर्भर करेगा, और यह योग आर्थिक और करियर संबंधी मामलों में महत्वपूर्ण अवसर प्रदान कर सकता है।

  • पुत्रदा एकादशी 2025 साल की आखिरी एकादशी पर विष्णु जी को कैसे करें प्रसन्न जानें 5 सरल उपाय

    पुत्रदा एकादशी 2025 साल की आखिरी एकादशी पर विष्णु जी को कैसे करें प्रसन्न जानें 5 सरल उपाय


    नई दिल्ली । पुत्रदा एकादशी 2025 हिंदू धर्म में सभी तिथियों का विशेष महत्व माना गया है। हालांकि इनमें प्रत्येक महीने की ग्यारहवीं तिथि अधिक महत्वपूर्ण होती हैं। मान्यता है कि इस दिन एकादशी व्रत किया जाता है जो सृष्टि के पालनहार विष्णु जी को समर्पित है। इस दिन उनकी पूजा-अर्चना दान-दक्षिणा या भजन-कीर्तन जैसे शुभ कार्य करने से प्रभु शीघ्र प्रसन्न होते हैं। इसके प्रभाव से घर से लेकर साधक के निजी जीवन में सकारात्मक बदलाव आते हैं यही नहीं धन की माता लक्ष्मी जी भी अपनी असीम कृपा बरसाती हैं।
    वर्तमान में पौष महीना जारी है और इस माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि पर पुत्रदा एकादशी मनाई जाती है। इस वर्ष 30 दिसंबर 2025 को पुत्रदा एकादशी व्रत रखा जाएगा। यह साल 2025 की आखिरी एकादशी होगी। ऐसे में इस दिन कुछ सरल उपाय करने से प्रभु प्रसन्न हो सकते हैं। साथ ही कार्यों में आ रही रुकावटें विवाह मार्ग बाधाएं और करियर में अच्छे रिजल्ट मिल सकते हैं। ऐसे में आइए इन उपायों को जानते हैं।

    पुत्रदा एकादशी 2025

    इस वर्ष पौष महीने के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि 30 दिसंबर 2025 को सुबह 7 बजकर 50 मिनट पर शुरू होगी। इस तिथि का समापन अगले दिन 31 दिसंबर की सुबह 5 बजे होगा। इसलिए 30 दिसंबर 2025 को पुत्रदा एकादशी मनाई जाएगी। धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक पुत्रदा एकादशी के दिन भगवान विष्णु का पंचामृत से अभिषेक करें। यह सरल उपाय करियर में तरक्की प्रमोशन के योग और व्यापार विस्तार की बाधाओं को दूर करता है। साथ ही मानसिक शांति भी बनी रहती हैं।

    पुत्रदा एकादशी के दिन आप पान के पत्ते पर ‘ॐ विष्णवे नमः’ लिखकर विष्णु जी के चरणों में चढ़ाएं। यह शुभ होता है। मान्यता है कि इस सरल उपाय से प्रभु प्रसन्न होकर अपनी कृपा बरसाते हैं। पूजा के बाद इस पत्ते को आप अपनी तिजोरी में रख लें। इससे आर्थिक उन्नति भी होती हैं।एकादशी के दिन विष्णु जी को केले का भोग लगाएं। इसके बाद गाय को घी चुपड़ी हुई रोटी पर गुड़ रखकर खिला दें। मान्यता है कि यह सरल उपाय संतान के जीवन में सुख-समृद्धि से लेकर उनकी खुशियों में वृद्धि करता है।

    पुत्रदा एकादशी पर आप तीन तुलसी के पत्ते पर 11 बार श्री का जाप करके भगवान विष्णु को अर्पित करें। इस इसके बाद शाम को तुलसी के पास दीपक जलाकर उनकी पूजा भी करें। यह सरल उपाय बरकत के योग का निर्माण करता है एकादशी पर आप पीपल के पेड़ के नीचे तेल का एक दीपक जलाएं। इसके बाद पूजा करते हुए आप ऊँ नमो नारायणाय नमः मंत्र का जाप करें। मान्यता है कि इससे भगवान विष्णु की कृपा मिलती हैं। साथ ही व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक बदलाव आते हैं।

    पूजा का शुभ मुहूर्त

    ब्रह्म मुहूर्त- सुबह में 5:24 से 06:19
    प्रातः सन्ध्या- सुबह में 5:51 से 07:13
    अभिजित मुहूर्त- दोपहर में 12:3 से 12:44
    विजय मुहूर्त- दोपहर में 2:07 से 02:49
    निशिता मुहूर्त- रात 11:57 से सुबह 12:51

  • विघ्नेश्वर चतुर्थी 2025: गणेश जी के मंत्र पूजा विधि और शुभ मुहूर्त

    विघ्नेश्वर चतुर्थी 2025: गणेश जी के मंत्र पूजा विधि और शुभ मुहूर्त


    नई दिल्ली । आज 24 दिसंबर को विघ्नेश्वर चतुर्थी का पर्व मनाया जा रहा है जो विशेष रूप से भगवान गणेश की पूजा से जुड़ा हुआ है। यह पर्व पौष माह की विनायक चतुर्थी के रूप में मनाया जाता है और इसे विघ्नेश्वर चतुर्थी के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन श्रद्धा और विधि-विधान से गणेश जी की पूजा करने से जीवन के सारे विघ्न दूर होते हैं और समृद्धि सफलता और सिद्धि की प्राप्ति होती है।

    विघ्नेश्वर चतुर्थी का शुभ मुहूर्त चतुर्थी मध्याह्न पूजा मुहूर्त

    सुबह 11:19 बजे से दोपहर 1:11 बजे तक वर्जित चंद्रोदय काल सुबह 10:16 बजे से रात 9:26 बजे तक इस दौरान चंद्र दर्शन न करें

    गणेश जी की पूजा विधि

    ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें। घर के मंदिर या पूजा स्थल की साफ-सफाई करें। पूजा की चौकी पर लाल वस्त्र बिछाकर भगवान गणेश की मूर्ति या चित्र स्थापित करें। कलश स्थापना करके पंचामृत से भगवान गणेश का अभिषेक करें। इसके बाद वस्त्र जनेऊ चंदन दूर्वा फूल धूप और दीप अर्पित करें। भगवान गणेश को मोदक गुड़ या लड्डू का भोग लगाएं। गणेश जी के मंत्रों का जाप करें और अंत में आरती करें।

    गणेश जी के मंत्र:
    ॐ गण गणपतये नमः कम से कम 108 बार जाप करें श्री गणेशाय नम: ऊं गं गणपतये नमः वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ । निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा ॥

    गणेश गायत्री मंत्र:

    ॐ वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभः। निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा ॥
    गणेश जी की आरती
    जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा माता जाकी पार्वती पिता महादेवा।
    एक दंत दयावंत चार भुजा धारी माथे सिंदूर सोहे मूसे की सवारी। यह आरती भगवान गणेश के गुणों और उनकी कृपा के बारे में है जो भक्तों के जीवन में सुख समृद्धि और शांति लाती है।

    विघ्नेश्वर चतुर्थी का महत्व

    इस दिन का व्रत रखने और गणेश जी की पूजा करने से जीवन की सभी बाधाएं दूर होती हैं। विशेष रूप से नौकरी व्यापार शिक्षा और वैवाहिक जीवन में आने वाली समस्याओं से राहत मिलती है और कार्यों में सफलता प्राप्त होती है। आज के दिन गणेश जी की पूजा विधि और मंत्रों के जाप से न केवल आशीर्वाद प्राप्त होता है बल्कि जीवन में सुख-शांति और समृद्धि भी आती है।

  • मंगल दोष उपाय मंगल दोष से मुक्ति पाने के आसान उपाय जीवन में आएगी सुख-समृद्धि

    मंगल दोष उपाय मंगल दोष से मुक्ति पाने के आसान उपाय जीवन में आएगी सुख-समृद्धि


    नई दिल्ली । ज्योतिष शास्त्र के अनुसार मंगल दोष जीवन में कई प्रकार की समस्याएं पैदा कर सकता है जैसे कि वैवाहिक जीवन में तनाव शारीरिक परेशानियां मानसिक तनाव या करियर में विघ्न। अगर किसी व्यक्ति की कुंडली में मंगल दोष है तो समय रहते उसका निवारण करना बेहद जरूरी है। मंगल दोष के प्रभाव से मुक्ति पाने के लिए कुछ आसान उपाय हैं जिनका पालन करके आप अपने जीवन को बेहतर बना सकते हैं। इन उपायों को विशेष रूप से मंगलवार के दिन करना प्रभावी होता है क्योंकि मंगलवार को मंगल देव और हनुमान जी की पूजा का दिन माना जाता है।

    मंगल दोष और मंगल देव का महत्व

    मंगल देव को ज्योतिष में ऊर्जा साहस और आत्मविश्वास का कारक माना जाता है। वे मेष और वृश्चिक राशि के स्वामी होते हैं और मकर राशि में उच्च के माने जाते हैं। मंगल दोष का प्रभाव व्यक्ति के जीवन में कई तरह की चुनौतियाँ उत्पन्न कर सकता है लेकिन हनुमान जी की पूजा से इस दोष का निवारण संभव है। हनुमान जी की आराधना से व्यक्ति को साहस आत्मबल और करियर में सफलता का आशीर्वाद मिलता है।

    मंगल दोष के निवारण के उपायहनुमान जी की पूजा और व्रत

    मंगल दोष से मुक्ति पाने के लिए मंगलवार को हनुमान जी की पूजा करना बेहद शुभ माना जाता है। इस दिन व्रत रखने से हनुमान जी की विशेष कृपा प्राप्त होती है। हनुमान चालीसा का पाठ करें और शुद्ध मन से व्रत रखें। इससे मंगल दोष के प्रभाव को कम किया जा सकता है।

    चांदी के बर्तन में तांबे की छड़ी रखें

    अगर आपकी कुंडली में मंगल दोष है तो चांदी के बर्तन में तांबे की छड़ी रखें और उसे एक लाल कपड़े में बांधकर घर के पूजा स्थान पर रखें। यह उपाय मंगल दोष को नष्ट करने में सहायक होता है।

    तांबे का दान

    मंगल दोष से निवारण के लिए तांबे का दान करना बहुत फायदेमंद होता है। मंगलवार के दिन किसी मंदिर में तांबे के बर्तन तांबे की छड़ी या तांबे की वस्तुएं दान करें। इससे मंगल ग्रह की स्थिति मजबूत होती है और दोष समाप्त हो सकता है।

    राहु और मंगल के दोष को कम करने के लिए विशेष उपाय

    यदि आपके जीवन में मंगल दोष के कारण तनाव और परेशानी है तो मंगलवार को उबटन करें और हल्दी और तिल के साथ स्नान करें। यह उपाय मंगल दोष को दूर करने में मदद करता है और मन को शांति प्रदान करता है।

    लाल रंग का पहनावा

    मंगल ग्रह का रंग लाल होता है इसलिए मंगलवार के दिन लाल रंग के वस्त्र पहनने से मंगल दोष में कमी आ सकती है। इसके साथ ही आप अपने घर में लाल रंग के फूल भी रख सकते हैं।

    पानी में तांबे का सिक्का डालें
    मंगल दोष से मुक्ति पाने के लिए पानी में तांबे का सिक्का डालकर उस पानी को घर के हर सदस्य को पिलाएं। यह उपाय मंगल दोष से राहत पाने में मदद करता है।

    सच्चाई और ईमानदारी का पालन करें

    ज्योतिष के अनुसार यदि आप अपने जीवन में सच्चाई और ईमानदारी का पालन करते हैं तो मंगल दोष का प्रभाव खुद-ब-खुद कम होने लगता है। मंगल देव को सच्चाई और कर्म के साथ जुड़ा हुआ माना जाता ह इसलिए आपके कार्यों में ईमानदारी से मंगल देव प्रसन्न होते हैंमंगल दोष के उपायों को अपनाकर आप अपने जीवन में आने वाली समस्याओं से मुक्ति पा सकते हैं और जीवन में सुख-समृद्धि ला सकते हैं। मंगल दोष के निवारण के लिए बुधवार के दिन हनुमान जी की विशेष पूजा और तांबे के दान से आप अपने जीवन को बेहतर बना सकते हैं।

  • जनवरी 2026 व्रत त्यौहार मकर संक्रांति से बसंत पंचमी तक जानें जनवरी में मनाए जाने वाले प्रमुख व्रत और त्योहार

    जनवरी 2026 व्रत त्यौहार मकर संक्रांति से बसंत पंचमी तक जानें जनवरी में मनाए जाने वाले प्रमुख व्रत और त्योहार


    नई दिल्ली ।जनवरी 2026 हिंदू पंचांग के अनुसार एक विशेष महीना है क्योंकि इस महीने माघ माह की शुरुआत होती है जो धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है। यह महीना विभिन्न व्रतों और त्योहारों से भरा होता है जिनका सामाजिक और धार्मिक जीवन में गहरा महत्व है। खासकर मकर संक्रांति से लेकर बसंत पंचमी तक इन दिनों का पालन लाखों श्रद्धालु अपनी श्रद्धा और भक्ति के साथ करते हैं।

    मकर संक्रांति 14 जनवरी

    मकर संक्रांति हिंदू कैलेंडर के अनुसार सबसे महत्वपूर्ण त्योहारों में से एक है। यह त्योहार सूर्य के मकर राशि में प्रवेश करने के दिन मनाया जाता है। इस दिन लोग तिल और गुड़ के साथ खिचड़ी बनाते हैं और दान पुण्य करते हैं। मकर संक्रांति का विशेष महत्व इस दिन सूर्य की उपासना और उत्तरायण के शुभारंभ के रूप में होता है।

    लोहड़ी 13 जनवरी

    लोहड़ी पंजाब और अन्य उत्तरी राज्यों में धूमधाम से मनाया जाने वाला पर्व है। इसे सर्दी के मौसम के अंत और फसल के कटने की खुशी में मनाया जाता है। इस दिन लोग आग जलाकर उस पर तिल गुड़ और मूंगफली डालते हैं और इसके साथ ही गाते-बजाते हैं।

    सकट चौथ 19 जनवरी

    सकट चौथ को विशेष रूप से महिलाएं व्रत रखकर संतान सुख और पारिवारिक सुख की कामना करती हैं। इस दिन महिलाएं व्रत करती हैं और घर-घर खास पकवान बनते हैं। व्रत का पालन श्रद्धा और भक्ति के साथ किया जाता है।

    मौनी अमावस्या 20 जनवरी

    मौनी अमावस्या को विशेष रूप से उपवास और मौन रहने का दिन माना जाता है। इस दिन गंगा स्नान और तर्पण करने की परंपरा है। भक्तगण इस दिन उपवास रखते हुए अपनी बुराईयों और पापों से मुक्ति के लिए प्रार्थना करते हैं।

    बसंत पंचमी 25 जनवरी

    बसंत पंचमी वसंत ऋतु के आगमन का प्रतीक है और यह विशेष रूप से सरस्वती पूजा के रूप में मनाई जाती है। इस दिन विद्या की देवी सरस्वती की पूजा की जाती है और नए ज्ञान की प्राप्ति के लिए लोग विशेष आयोजन करते हैं। पीले रंग की विशेषता के साथ यह दिन उल्लास और उत्सव का प्रतीक बन जाता है। जनवरी का महीना कई महत्वपूर्ण धार्मिक और सामाजिक अवसरों के साथ आता है। इस दौरान श्रद्धालु इन व्रतों और त्योहारों का पालन करके जीवन में सुख समृद्धि और पुण्य की कामना करते हैं।

  • साल की आखिरी एकादशी पर भूलकर भी न करें इन 5 चीजों का दान, नहीं तो 2026 में भी रहेंगे परेशान

    साल की आखिरी एकादशी पर भूलकर भी न करें इन 5 चीजों का दान, नहीं तो 2026 में भी रहेंगे परेशान

    नई दिल्ली/सनातन धर्म के लोगों के लिए पौष पुत्रदा एकादशी का खास महत्व है, जिसका व्रत हर साल पौष माह में आने वाली शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को रखा जाता है. पंचांग के मुताबिक, इस बार 30 दिसंबर 2025 को पौष पुत्रदा एकादशी का व्रत रखा जाएगा. मान्यता है कि जो लोग सच्चे मन से पौष पुत्रदा एकादशी का व्रत रखते हैं, उन्हें पापों से मुक्ति मिलती है और पुण्य मिलता है. इसके अलावा जगत के पालनहार भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है.पूजा-पाठ के अलावा पौष पुत्रदा एकादशी पर दान करना भी शुभ होता है. हालांकि, कुछ चीजें ऐसी भी हैं, जिनका दान एकादशी पर करना अशुभ होता है. आज हम आपको शास्त्रों में बताई गई उन 5 चीजों के बारे में बताने जा रहे हैं, जिनका दान पौष पुत्रदा एकादशी पर करने से व्यक्ति साल 2026 में भी परेशान रह सकता है.
    लोहा
    लोहे से बनी किसी भी वस्तु का दान पौष पुत्रदा एकादशी पर करना अशुभ होता है. इससे न सिर्फ आपको पाप लगेगा, बल्कि पूजा का फल भी नहीं मिलेगा.
    नमक
    पौष पुत्रदा एकादशी पर नमक का दान करने से घर में अशांति फैलती है. साथ ही व्रत खंडित हो जाता है और पाप लगता है.ये भी पढ़ें- Mahayuti 2025 Rashifal: 2026 के शुरू से पहले ये 3 राशियां होंगी मालामाल; बनेगी मंगल, सूर्य, शुक्र और बुध की महायुति

    नुकीली चीजें

    यदि कोई व्यक्ति पौष पुत्रदा एकादशी पर किसी भी तरह की नुकीली चीज का दान करता है तो उससे भगवान विष्णु नाराज हो सकते हैं. इसके अलावा घर में लड़ाई-झगड़े होंगे और सेहत पर भी नकारात्मक असर देखने को मिल सकता है.

    तेल

    पौष पुत्रदा एकादशी पर तेल का दान करने से ग्रह दोष लगता है. साथ ही घर में नकारात्मक ऊर्जा का वास होता है. इसके अलावा धन हानि भी हो सकती है.

    अनाज

    गेहूं, चावल, मक्का, राई, जौ, जई, बाजरा और बीज आदि अनाज का दान पौष पुत्रदा एकादशी पर करना अशुभ होता है. इससे न सिर्फ व्रती को पाप लगता है बल्कि घरवालों को भी विभिन्न परेशानियों का सामना करना पड़ता है.डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है. News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है.
  • नए साल 2026 में गुरु प्रदोष व्रतइन उपायों से महादेव होंगे प्रसन्न मिलेगी सुख-समृद्धि

    नए साल 2026 में गुरु प्रदोष व्रतइन उपायों से महादेव होंगे प्रसन्न मिलेगी सुख-समृद्धि


    नई दिल्ली । साल 2026 का आगमन धार्मिक दृष्टि से विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। वैदिक पंचांग के अनुसार 1 जनवरी को गुरुवार के दिन प्रदोष व्रत रखा जाएगा। इस दिन का महत्व और भी अधिक बढ़ जाता है क्योंकि यह व्रत गुरु प्रदोष व्रत के रूप में मनाया जाएगा। गुरु प्रदोष व्रत भगवान शिव और माता पार्वती को समर्पित होता है और इस दिन श्रद्धा और आस्था के साथ पूजा-पाठ करने से जीवन में सुख समृद्धि और खुशहाली आती है।

    गुरु प्रदोष व्रत और महादेव की कृपा

    गुरुवार को पड़ने वाला प्रदोष व्रत विशेष रूप से महत्वपूर्ण होता है क्योंकि गुरु ग्रह का प्रभाव इस दिन अधिक रहता है। गुरु ग्रह ज्ञान शिक्षा समृद्धि और अच्छे भाग्य का कारक माना जाता है। इस दिन किए गए पूजा और उपायों से व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक बदलाव आ सकते हैं। खासकर नौकरी व्यापार धन-संपत्ति से जुड़ी परेशानियां दूर हो सकती हैं और महादेव की कृपा से आर्थिक स्थिति में सुधार हो सकता है।

    ज्योतिषीय उपायों से मिल सकती है राहत

    गुरु प्रदोष व्रत के दिन कुछ खास ज्योतिषीय उपाय करने से जीवन में स्थिरता और समृद्धि का आशीर्वाद मिल सकता है। यहां कुछ विशेष उपाय दिए जा रहे हैं जो इस दिन किए जाने से महादेव की कृपा प्राप्त हो सकती है भगवान शिव की पूजाइस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की विशेष पूजा करें। शिवलिंग पर जल दूध शहद बेलपत्र और आंतरिक शुद्धता से अर्पित करें। इस दिन महादेव का स्मरण करने से जीवन में आ रही परेशानियों का समाधान हो सकता है।

    धन का संकलनइस दिन विशेष रूप से अपनी आर्थिक स्थिति को मजबूत करने के लिए श्री लक्ष्मी यंत्र की पूजा करें। देवी लक्ष्मी की कृपा से धन-संपत्ति में वृद्धि हो सकती है। गुरुवार का व्रतइस दिन उपवासी रहकर केवल फलाहार करें और मानसिक शांति के लिए गुरु के मंत्र का जाप करें। इससे मानसिक शांति और संतुलन मिलेगा। शिव चालीसा का पाठइस दिन शिव चालीसा का पाठ करें और साथ ही ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जाप करें। यह उपाय मानसिक और शारीरिक संतुलन बनाए रखने में मदद कर सकता है भक्तिपूर्वक दर्शनइस दिन भगवान शिव के मंदिर में जाकर दर्शन करें और वहां दीप जलाकर पूजा अर्चना करें। इस दिन किए गए धार्मिक कर्मों का बहुत फल मिलता है।

    व्यापारिक उन्नति के लिएअगर आप व्यापार में वृद्धि चाहते हैं तो इस दिन विशेष रूप से भगवान शिव से व्यापार में समृद्धि की प्रार्थना करें और पुराने उधारी या ऋण से छुटकारा पाने के लिए प्रयास करें। नए साल की शुरुआत गुरु प्रदोष व्रत से हो रही है जो विशेष रूप से धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है। इस दिन किए गए उपायों और पूजा से जीवन में सुख समृद्धि और सफलता प्राप्त हो सकती है। महादेव की कृपा से नौकरी व्यापार और धन-संपत्ति में वृद्धि हो सकती है और साल भर शांति और खुशहाली बनी रह सकती है।

  • कोट्टनकुलंगरा श्रीदेवी मंदिर में पुरुष श्रद्धालुओं का अनोखा सोलह श्रृंगार देवी से मनचाही मुराद की परंपरा

    कोट्टनकुलंगरा श्रीदेवी मंदिर में पुरुष श्रद्धालुओं का अनोखा सोलह श्रृंगार देवी से मनचाही मुराद की परंपरा



    नई दिल्ली । केरल के कोल्लम जिले में स्थित कोट्टनकुलंगरा श्रीदेवी मंदिर अपनी एक अनोखी परंपरा के लिए जाना जाता है जिसमें पुरुष श्रद्धालुओं को पूजा से पहले महिलाओं की तरह सोलह श्रृंगार करना अनिवार्य माना जाता है। इस परंपरा का पालन करने वाले श्रद्धालु देवी की आराधना से पहले साड़ी पहनते हैं चूड़ियां पहनते हैं बिंदी लगाते हैं और अन्य श्रृंगार सामग्री से खुद को सजाते हैं। इस अनूठी परंपरा के चलते यह मंदिर देश-विदेश में चर्चा का विषय बना हुआ है।

    परंपरा का महत्व

    कोट्टनकुलंगरा मंदिर की इस परंपरा को श्रद्धा और आस्था का प्रतीक माना जाता है। यह परंपरा सदियों पुरानी है और यहां आने वाले श्रद्धालु इसे पूरे समर्पण के साथ निभाते हैं। पुरुष श्रद्धालु जब पूजा के लिए तैयार होते हैं तो वे स्वयं को पूरी तरह से सजाते हैं जैसे महिलाएं पारंपरिक रूप से सोलह श्रृंगार करती हैं। इस पूजा में श्रद्धालु देवी भाग्यवती से अच्छी नौकरी स्वास्थ्य विवाह और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करते हैं। यह परंपरा पूरी तरह से समाज में समर्पण और ईश्वर के प्रति श्रद्धा को बढ़ावा देने के लिए मानी जाती है। इस परंपरा के कारण मंदिर में हर साल श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या में भीड़ रहती है जो इस अनुभव को एक अलग ही रूप में अपनाते हैं।

    मंदिर के आकर्षण

    कोट्टनकुलंगरा श्रीदेवी मंदिर के अद्वितीय रीति-रिवाज और परंपराओं ने इसे एक सांस्कृतिक धरोहर के रूप में स्थापित किया है। यहां पर लोग न केवल पूजा-अर्चना करने आते हैं बल्कि इस अनोखी परंपरा का पालन करने के लिए भी दूर-दूर से आते हैं। मंदिर का वातावरण बेहद शांतिपूर्ण और श्रद्धापूर्ण होता है जहां पर हर किसी को अपने व्यक्तिगत आस्थाओं का पालन करने का पूरा अवसर मिलता है।

    सोलह श्रृंगार

    सोलह श्रृंगार का पालन करने से जुड़े कई महत्व हैं जो महिलाओं के सौंदर्य और आंतरिक शक्ति के प्रतीक माने जाते हैं। इस परंपरा के तहत पुरुष श्रद्धालु स्वयं को साड़ी पहनकर सजाते हैं जो उन्हें पारंपरिक रूप से महिलाओं के साथ जोड़ता है और ईश्वर के साथ एक अद्वितीय संबंध स्थापित करता है। यह एक अद्भुत दृष्टिकोण है जो पुरुषों और महिलाओं के बीच समानता को बढ़ावा देने की कोशिश करता है साथ ही आस्था के द्वारा सभी को एकजुट करने का कार्य करता है।

    कोट्टनकुलंगरा श्रीदेवी मंदिर की यह परंपरा न केवल श्रद्धा का प्रतीक है बल्कि यह यह भी दर्शाती है कि धार्मिक आस्थाएं और सांस्कृतिक परंपराएं समय के साथ बदल सकती हैं। पुरुषों द्वारा सोलह श्रृंगार करने की यह परंपरा एक नई सोच और धार्मिक समर्पण की दिशा में एक कदम है। इस मंदिर की विशेषता और परंपरा को देखकर यह कहा जा सकता है कि यहाँ आस्था और आचरण का अद्वितीय संगम है जो सभी के लिए प्रेरणा का स्रोत है।