Category: Religious Astrology

  • राजयोग या कष्टयोग? जन्मकुंडली के ये ग्रह खोलते हैं सफलता और संघर्ष का पूरा राज

    राजयोग या कष्टयोग? जन्मकुंडली के ये ग्रह खोलते हैं सफलता और संघर्ष का पूरा राज



    नई दिल्ली। जन्मकुंडली में बनने वाले योग व्यक्ति के जीवन की दिशा और दशा तय करने में अहम भूमिका निभाते हैं। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार यदि कुंडली में शुभ योग अधिक हों तो व्यक्ति को धन, मान-सम्मान, सफलता और ऊंचा पद आसानी से मिलता है, वहीं अशुभ योगों की अधिकता जीवन में संघर्ष, रुकावट और दुर्भाग्य बढ़ा सकती है।

    अक्सर लोग राजयोग का मतलब सिर्फ सत्ता या सरकारी लाभ से जोड़ते हैं, लेकिन ज्योतिष में राजयोग का अर्थ कहीं ज्यादा व्यापक है। कुंडली में बनने वाला राजयोग व्यक्ति को व्यापार, कला, शिक्षा, राजनीति, नौकरी या किसी भी क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि दिला सकता है। इसका प्रभाव इस बात पर निर्भर करता है कि योग बनाने वाले ग्रह कितने मजबूत हैं और उनकी प्रवृत्ति कैसी है।

    ज्योतिषाचार्यों के अनुसार जन्मपत्री का गहन अध्ययन यह बताता है कि कौन-सा ग्रह शुभ फल दे रहा है और कौन-सा ग्रह बाधाएं पैदा कर रहा है। कई बार योगकारक ग्रहों की युति ऐसे शक्तिशाली राजयोग बनाती है, जो व्यक्ति को सामान्य स्थिति से उठाकर ऊंचे मुकाम तक पहुंचा देते हैं। यही वजह है कि जन्मकुंडली में योगों को विशेष महत्व दिया जाता है।

    ज्योतिष में कई प्रकार के शुभ योग बताए गए हैं। इनमें राजयोग, नीचभंग राजयोग, विपरीत राजयोग और पंचमहापुरुष योग प्रमुख माने जाते हैं। नीचभंग राजयोग व्यक्ति को कठिन परिस्थितियों के बाद सफलता दिलाता है, जबकि विपरीत राजयोग संघर्षों को अवसर में बदलने की क्षमता देता है। पंचमहापुरुष योग को अत्यंत प्रभावशाली माना जाता है, जो व्यक्ति को असाधारण प्रतिभा और प्रतिष्ठा दिला सकता है।

    वहीं अशुभ योगों में कालसर्प योग, केमद्रुम योग जैसे योगों का विशेष उल्लेख मिलता है। इन योगों के प्रभाव से व्यक्ति को मानसिक तनाव, आर्थिक परेशानी, अस्थिरता और बार-बार बाधाओं का सामना करना पड़ सकता है। हालांकि सही ग्रह दशा, शुभ दृष्टि और उचित उपायों से इनके प्रभाव को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

    चंद्रमा से बनने वाले सुनफा और अनफा योग भी बेहद महत्वपूर्ण माने गए हैं। यदि चंद्रमा से दूसरे भाव में सूर्य को छोड़कर कोई ग्रह स्थित हो तो सुनफा योग बनता है। मान्यता है कि इस योग वाला व्यक्ति बुद्धिमान, सम्मानित, स्वनिर्मित धन वाला और प्रभावशाली होता है। वहीं चंद्रमा से बारहवें भाव में सूर्य को छोड़कर कोई ग्रह हो तो अनफा योग बनता है, जो व्यक्ति को सुखी, आकर्षक व्यक्तित्व वाला, प्रसिद्ध और समृद्ध बना सकता है।

    ज्योतिष शास्त्र में सूर्य से बनने वाले वेसि, वासि, उभयचारी और बुधादित्य योग भी काफी प्रभावशाली माने जाते हैं। ये योग व्यक्ति की नेतृत्व क्षमता, बुद्धिमत्ता, प्रसिद्धि और सामाजिक प्रभाव को बढ़ाने का काम करते हैं।

    विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी कुंडली का सही फल केवल एक योग देखकर तय नहीं किया जा सकता। ग्रहों की स्थिति, दशा, दृष्टि और भावों का सामूहिक अध्ययन ही यह स्पष्ट करता है कि व्यक्ति के जीवन में राजयोग अधिक प्रभावी हैं या कष्टयोग।

  • भगवान शिव की आराधना का विशेष दिन: मासिक शिवरात्रि पर व्रत और पूजा का महत्व

    भगवान शिव की आराधना का विशेष दिन: मासिक शिवरात्रि पर व्रत और पूजा का महत्व


    नई दिल्ली । मई महीने की मासिक शिवरात्रि को लेकर श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखने को मिल रहा है। हिंदू पंचांग के अनुसार हर महीने कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मासिक शिवरात्रि मनाई जाती है, जो भगवान शिव और माता पार्वती की आराधना का अत्यंत शुभ दिन माना जाता है।

    पंचांग के अनुसार मई 2026 की मासिक शिवरात्रि 14 मई 2026 को मनाई जाएगी। चतुर्दशी तिथि की शुरुआत 13 मई की रात से होगी और इसका समापन अगले दिन तक रहेगा। इस दिन भक्त व्रत रखकर भगवान शिव की विशेष पूजा-अर्चना करेंगे और मंदिरों में जलाभिषेक, रुद्राभिषेक तथा भजन-कीर्तन का आयोजन किया जाएगा।

    धार्मिक मान्यता के अनुसार मासिक शिवरात्रि पर भगवान शिव की उपासना करने से जीवन की बाधाएं दूर होती हैं और मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। विशेष रूप से जो श्रद्धालु इस दिन उपवास रखते हैं और पूरी श्रद्धा से शिवजी की पूजा करते हैं, उन्हें सुख-समृद्धि और मानसिक शांति की प्राप्ति होती है।

    इस दिन पूजा का विशेष महत्व निशिता काल में माना गया है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार मध्य रात्रि का समय भगवान शिव की आराधना के लिए सबसे शुभ होता है। इसी समय शिवलिंग पर जल, दूध, बेलपत्र, धतूरा और भांग अर्पित करने की परंपरा है।

    व्रत रखने वाले श्रद्धालु सुबह स्नान कर संकल्प लेते हैं और पूरे दिन उपवास रखते हैं। इसके बाद ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का जाप और शिव चालीसा का पाठ किया जाता है। मान्यता है कि सच्चे मन से की गई पूजा जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और सौभाग्य लाती है।

    मंदिरों में इस दिन विशेष सजावट की जाती है और भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है। कई स्थानों पर रात्रि जागरण और भजन संध्या का भी आयोजन किया जाता है।

  • शनि जयंती के शुभ संयोग से खुलेंगे भाग्य के द्वार, इन 5 राशि वालों को मिलेगा अपार धन-लाभ

    शनि जयंती के शुभ संयोग से खुलेंगे भाग्य के द्वार, इन 5 राशि वालों को मिलेगा अपार धन-लाभ


    नई दिल्ली  साल 2026 की शनि जयंती कई मायनों में बेहद खास रहने वाली है। 16 मई को पड़ने वाली इस शनि जयंती पर ग्रहों की ऐसी दुर्लभ स्थिति बन रही है, जिसे ज्योतिष में अत्यंत शुभ माना जाता है। खास बात यह है कि इस बार शनि जयंती शनिवार के दिन ही आ रही है, जिससे इसका महत्व और बढ़ गया है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार इस दौरान बुधादित्य राजयोग और केदार योग का निर्माण हो रहा है, जिसका असर कई राशियों पर सकारात्मक रूप से दिखाई देगा। इनमें खास तौर पर 5 राशियों के लोगों की किस्मत अचानक चमक सकती है।
    दरअसल, 15 मई 2026 को सूर्य और बुध का वृषभ राशि में गोचर होगा। इन दोनों ग्रहों की युति से बुधादित्य राजयोग बनेगा, जो बुद्धि, करियर, सम्मान और धन लाभ का कारक माना जाता है। वहीं 7 घरों में ग्रहों की उपस्थिति से बनने वाला केदार योग आर्थिक मजबूती और सुख-समृद्धि का संकेत देता है। ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार इन शुभ योगों का सबसे ज्यादा फायदा वृषभ, सिंह, तुला, वृश्चिक और कुंभ राशि के लोगों को मिल सकता है।
    वृषभ राशि वालों को मिलेगा करियर में बड़ा उछाल
    वृषभ राशि में ही बुधादित्य योग बन रहा है, इसलिए इस राशि के लोगों को सबसे ज्यादा लाभ मिलने की संभावना है। नौकरीपेशा लोगों को नई जिम्मेदारी और पदोन्नति मिल सकती है। कारोबारियों को पुराने क्लाइंट्स से बड़ा फायदा होने के संकेत हैं। आर्थिक स्थिति मजबूत होगी और स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों में भी राहत मिल सकती है।
    सिंह राशि वालों की बढ़ेगी प्रतिष्ठा
    सिंह राशि के लोगों के लिए यह समय सामाजिक सम्मान और प्रोफेशनल सफलता लेकर आ सकता है। ऑफिस में आपकी नेतृत्व क्षमता की सराहना होगी। नए बिजनेस अवसर मिल सकते हैं और समाज में मान-सम्मान बढ़ेगा।
    तुला राशि वालों को होगा धन लाभ
    तुला राशि के लोगों के लिए केदार योग बेहद शुभ माना जा रहा है। संपत्ति खरीदने के योग बन सकते हैं। निवेश से लाभ होगा और लंबे समय से रुके काम पूरे हो सकते हैं। परिवार में सुख-शांति बनी रहेगी और मानसिक तनाव कम होगा।
    वृश्चिक राशि वालों को मिल सकती है नई नौकरी
    वृश्चिक राशि के जातकों के लिए शनि जयंती नई संभावनाओं के द्वार खोल सकती है। नौकरी बदलने का अवसर मिल सकता है। विदेश यात्रा या पढ़ाई के योग भी बन रहे हैं। आत्मविश्वास बढ़ेगा और करियर में नई दिशा मिल सकती है।
    कुंभ राशि वालों के लिए खुलेगा सफलता का रास्ता
    कुंभ राशि के स्वामी स्वयं शनि देव हैं, इसलिए शनि जयंती का प्रभाव इस राशि पर विशेष रूप से देखने को मिलेगा। भाग्य का पूरा साथ मिलेगा। करियर में उम्मीद से बड़ी सफलता मिल सकती है। रुका हुआ धन वापस मिल सकता है और सेहत में भी सुधार आने के संकेत हैं।
    ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार शनि जयंती के दिन शनिदेव की पूजा, दान और संयमित जीवनशैली अपनाने से शुभ फलों में वृद्धि होती है। हालांकि किसी भी भविष्यवाणी को पूरी तरह निश्चित मानने के बजाय इसे आस्था और विश्वास के रूप में देखना चाहिए।
  • लाल किताब के अनुसार शनि का रहस्यमयी प्रभाव: कुंडली के 12 भाव और जीवन बदलने वाले अचूक उपाय

    लाल किताब के अनुसार शनि का रहस्यमयी प्रभाव: कुंडली के 12 भाव और जीवन बदलने वाले अचूक उपाय



    नई दिल्ली। लाल किताब ज्योतिष में शनि ग्रह को अत्यंत प्रभावशाली और कर्मफलदाता माना गया है। कहा जाता है कि शनि व्यक्ति को उसके कर्मों के अनुसार फल देते हैं और इनका प्रभाव जीवन के हर क्षेत्र करियर, स्वास्थ्य, धन और संबंधों पर गहराई से पड़ता है। शनि यदि कुंडली में शुभ स्थिति में हों तो व्यक्ति को रंक से राजा तक बना सकते हैं, वहीं अशुभ स्थिति में जीवन में संघर्ष, देरी और बाधाओं का कारण बनते हैं। लाल किताब के अनुसार शनि का प्रभाव कुंडली के बारहों भावों में अलग-अलग रूप में दिखाई देता है और हर स्थिति के अनुसार उसके उपाय भी बताए गए हैं।

    पहले भाव में शनि होने पर व्यक्ति मेहनती, जिम्मेदार और संपन्न हो सकता है, लेकिन स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं भी परेशान कर सकती हैं। दूसरे भाव में शनि आर्थिक स्थिति और वाणी को प्रभावित करता है, जिससे कई बार धन संचय में रुकावट आती है। तीसरे भाव में शनि भाई-बहनों और साहस से जुड़े मामलों को प्रभावित करता है, वहीं चौथे भाव में यह घर-परिवार और सुख-सुविधाओं पर असर डालता है। पांचवें भाव में शनि संतान और शिक्षा के क्षेत्र में बाधाएं ला सकता है, जबकि छठे भाव में यह शत्रुओं पर विजय और कानूनी मामलों में सफलता भी दे सकता है, लेकिन स्वास्थ्य का ध्यान रखना जरूरी होता है।

    सातवें भाव में शनि दांपत्य जीवन और साझेदारी को प्रभावित करता है, आठवें भाव में यह जीवन में अचानक परिवर्तन और स्वास्थ्य चुनौतियां ला सकता है। नौवें भाव में शनि भाग्य और धर्म से जुड़े मामलों को प्रभावित करता है, दसवें भाव में यह करियर और मान-सम्मान पर असर डालता है। ग्यारहवें भाव में शनि आय और लाभ में वृद्धि कर सकता है, जबकि बारहवें भाव में यह खर्च, विदेश यात्रा और आध्यात्मिकता से जुड़ा प्रभाव देता है।

    लाल किताब में शनि को मजबूत करने के लिए कई सरल उपाय बताए गए हैं। इनमें शनिवार के दिन गरीबों को दान देना, काले तिल, उड़द या तेल का दान करना, कुत्तों की सेवा करना, पीपल के पेड़ की पूजा करना और अनुशासित जीवन अपनाना प्रमुख माना गया है। मान्यता है कि इन उपायों से शनि के अशुभ प्रभाव कम होते हैं और जीवन में स्थिरता, सफलता और मानसिक शांति प्राप्त होती है।

    कुल मिलाकर शनि ग्रह व्यक्ति के जीवन को अनुशासन और कर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। लाल किताब के उपाय न केवल ज्योतिषीय दृष्टि से बल्कि मानसिक संतुलन और सकारात्मक जीवनशैली के रूप में भी महत्वपूर्ण माने जाते हैं।

  • निर्जला एकादशी 2026: सबसे पवित्र व्रत का शुभ समय, पूजा विधि और भीमसेनी एकादशी का महत्व

    निर्जला एकादशी 2026: सबसे पवित्र व्रत का शुभ समय, पूजा विधि और भीमसेनी एकादशी का महत्व



    नई दिल्ली। निर्जला एकादशी को हिंदू धर्म की सभी एकादशियों में सबसे कठिन और अत्यंत पुण्यदायी व्रत माना जाता है। इस दिन बिना जल और अन्न ग्रहण किए भगवान विष्णु की पूजा की जाती है। मान्यता है कि इस एक व्रत को करने से पूरे वर्ष की 24 एकादशियों के बराबर पुण्य प्राप्त होता है, जिससे पापों का नाश और जीवन में सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है।

    निर्जला एकादशी 2026 कब है?
    हिंदू पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि की शुरुआत 24 जून 2026 को शाम 6:13 बजे होगी और इसका समापन 25 जून 2026 को शाम 8:10 बजे होगा।
    उदयातिथि के आधार पर इस वर्ष निर्जला एकादशी का व्रत 25 जून 2026 (गुरुवार) को रखा जाएगा।

    पूजा और व्रत का महत्व
    निर्जला एकादशी के दिन भक्त पूरे दिन बिना जल ग्रहण किए भगवान विष्णु की पूजा करते हैं। इस व्रत में तुलसी पत्र, पीले फूल, दीपक और विष्णु सहस्रनाम का पाठ विशेष फलदायी माना जाता है। यह व्रत आत्मसंयम, श्रद्धा और भक्ति का प्रतीक है, जो जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और मोक्ष की प्राप्ति का मार्ग खोलता है।

    निर्जला एकादशी 2026 पारण समय
    एकादशी व्रत का पारण अगले दिन द्वादशी तिथि में किया जाता है।
    इस वर्ष व्रत का पारण 26 जून 2026 (शुक्रवार) को किया जाएगा।
    पारण का शुभ समय सुबह 5:41 बजे से 8:25 बजे तक रहेगा।

    इसे भीमसेनी एकादशी क्यों कहते हैं?
    पौराणिक मान्यता के अनुसार, पांडवों में भीमसेन अत्यधिक भूख के कारण अन्य एकादशियों का व्रत नहीं रख पाते थे। तब महर्षि वेद व्यास ने उन्हें वर्ष की सभी एकादशियों के बराबर पुण्य पाने के लिए निर्जला एकादशी का व्रत करने की सलाह दी। तभी से इसे भीमसेनी एकादशी कहा जाता है।

    निर्जला एकादशी न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह आत्मसंयम और भक्ति की सबसे बड़ी परीक्षा भी मानी जाती है। जो भक्त सच्चे मन से यह व्रत करते हैं, उन्हें भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है और जीवन में सुख-शांति का आगमन होता है।

  • Surya Dev Puja: रविवार को इस तरह करें सूर्य देव की पूजा, मिलेगा सुख-समृद्धि का आशीर्वाद

    Surya Dev Puja: रविवार को इस तरह करें सूर्य देव की पूजा, मिलेगा सुख-समृद्धि का आशीर्वाद


    नई दिल्ली। Surya Dev Puja: हिंदू धर्म में सूर्य को न केवल देवता माना जाता है बल्कि वे नौ ग्रहों के अधिपति भी माने जाते हैं। व्यक्ति पर सूर्य देव कृपा हो तो, व्यक्ति को सुख और समृद्धि की प्राप्ति होती है। कुंडली में सूर्य मजबूत होने पर जीवन में सुख, संपत्ति और यश की प्राप्ति होती है।

    सूर्य देव पूजा विधि
    सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करें। इसके बाद उगते हुए सूर्य का दर्शन करते हुए उन्हें जल अर्पित करें। जल अर्पित करते समय ॐ घृणि सूर्याय नम: मंत्र का जाप करें। सूर्य को दिए जाने वाले जल में लाल रोली, लाल फूल मिलाकर जल दें। ऐसा करने से भगवान सूर्यदेव का आशीर्वाद मिलता है, और आपके सभी कार्य संपन्न होने लगते हैं।

    सूर्य पूजन के लिए तांबे की थाली और तांबे के लोटे का उपयोग करना शुभ माना जाता है। पूजा में लाल चंदन और लाल फूल जरूर शामिल करें। इसके बाद लोटे में जल लेकर उसमें एक चुटकी लाल चंदन पाउडर और लाल फूल डालें। एक थाली में दीपक और लोटा रख लें। सूर्य देव को प्रणाम करें। ओम सूर्याय नमः मंत्र का जाप करते हुए लोटे से सूर्य देव को जल चढ़ाएं।

    इस तरह अर्पित करें जल
    अर्घ देते समय नजरे लोटे की जलधारा की ओर रखें। जल इस प्रकार अर्पित करें कि जल की धार में सूर्य का प्रतिबिंब एक बिंदु के रूप में दिखाई दे। इसके बाद हाथ जोड़कर सूर्य देव को प्रणाम करें।

    ये मिलते हैं लाभ
    सूर्योदय के समय सूर्य देव का दर्शन करने से व्यक्ति के शरीर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। इसलिए इसे अपनी दिनचर्या का हिस्सा बना लेना चाहिए। ऐसा करने से कारोबार में सफलता प्राप्त होती है। सूर्य को जल चढ़ाने के साथ मंत्र का जाप करने से बल, बुद्धि और विद्या प्राप्त होगी।

  • आज का राशिफल (10 मई 2026): कुछ राशियों पर बरसेगा भाग्य, तो कुछ को रहना होगा थोड़ा सावधान

    आज का राशिफल (10 मई 2026): कुछ राशियों पर बरसेगा भाग्य, तो कुछ को रहना होगा थोड़ा सावधान


    नई दिल्ली।  10 मई 2026, रविवार का दिन ज्योतिषीय दृष्टि से कई राशियों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। ग्रह-नक्षत्रों की स्थिति का प्रभाव आज लोगों के जीवन में स्पष्ट रूप से दिखाई देगा। जहां कुछ जातकों को करियर और आर्थिक क्षेत्र में लाभ मिलेगा, वहीं कुछ को अपने स्वास्थ्य और व्यवहार पर ध्यान देने की आवश्यकता होगी।
    मेष राशि के जातकों के लिए दिन पारिवारिक रूप से शुभ रहेगा। मेहनत का पूरा फल मिलेगा और वैवाहिक जीवन में खुशियां बढ़ेंगी। व्यापार और नौकरी में भी सकारात्मक परिणाम देखने को मिलेंगे।
    वृषभ राशि के लिए घर का माहौल सुखद रहेगा और अचानक धन लाभ के योग बन रहे हैं। किस्मत का साथ मिलेगा और रिश्तों में मधुरता बढ़ेगी।
    मिथुन राशि वालों को आज भागदौड़ करनी पड़ सकती है, लेकिन काम समय पर पूरे होंगे। स्वास्थ्य में सुधार के संकेत हैं, हालांकि बेवजह की बातों से बचना जरूरी होगा।
    कर्क राशि के जातक कार्यस्थल पर व्यस्त रहेंगे और आर्थिक स्थिति मजबूत बनी रहेगी। दोस्तों के साथ समय बिताने का मौका मिलेगा, जिससे मानसिक सुकून मिलेगा।
    सिंह राशि के लिए दिन बेहद शुभ है। किसी खास काम में सफलता मिलेगी और माता-पिता के साथ संबंध बेहतर होंगे। व्यापार और सामाजिक कार्यों में भी लाभ के योग हैं।
    कन्या राशि के लिए दिन सकारात्मक रहेगा। कार्यक्षेत्र में तालमेल अच्छा रहेगा और पुराने मित्रों से मुलाकात हो सकती है। कोई शुभ समाचार मिलने की संभावना है।
    तुला राशि के जातकों को स्वास्थ्य पर ध्यान देने की जरूरत होगी। हालांकि संपत्ति से जुड़े मामलों में लाभ मिल सकता है। सोच-समझकर निर्णय लेना जरूरी होगा।
    वृश्चिक राशि के लिए दिन खुशियों से भरा रहेगा। रुका हुआ धन मिलने के योग हैं और धार्मिक यात्रा का भी अवसर बन सकता है।
    धनु राशि वालों के लिए दिन प्रगति और सफलता लेकर आएगा। परिवार में खुशखबरी मिल सकती है और शिक्षा क्षेत्र में सफलता के संकेत हैं।
    मकर राशि के जातकों के लिए दिन लाभकारी रहेगा। नौकरी और व्यापार में सहयोग मिलेगा और जीवनसाथी के साथ संबंध मजबूत होंगे।
    कुंभ राशि के लिए दिन मिश्रित फल देने वाला रहेगा। कार्यभार अधिक रहेगा जिससे तनाव बढ़ सकता है, लेकिन परिवार के साथ समय बिताने से राहत मिलेगी।
    मीन राशि के लिए दिन थोड़ा चुनौतीपूर्ण रह सकता है। धन संबंधी समस्याएं हल होंगी लेकिन जल्दबाजी से बचना होगा। धैर्य रखना आज सबसे जरूरी है।

    कुल मिलाकर यह रविवार कई राशियों के लिए नई उम्मीदें और अवसर लेकर आ रहा है, वहीं कुछ को संयम और सावधानी के साथ आगे बढ़ने की सलाह दी जाती है।

  • इस साल 25 जुलाई से होगी चतुर्मास की शुरुआत…. चार महीने में पड़ेंगे कई बड़े व्रत-त्यौहार…..

    इस साल 25 जुलाई से होगी चतुर्मास की शुरुआत…. चार महीने में पड़ेंगे कई बड़े व्रत-त्यौहार…..


    नई दिल्ली।
    चातुर्मास (Chaturmas 2026) देवशयनी एकादशी (Devshayani Ekadashi) से प्रारंभ होता है और देवउठनी एकादशी पर समाप्‍त होता है. इन 4 महीनों में रक्षाबंधन, जन्‍माष्‍टमी, गणेशोत्‍सव, शारदीय नवरात्रि, दशहरा, दिवाली जैसे बड़े त्‍योहार पड़ेंगे. साथ ही सावन महीना भी आएगा। इस साल चातुर्मास 25 जुलाई 2026 को देवशयनी एकादशी से प्रारंभ होगा और 20 नवंबर 2026 देवउठनी एकादशी (Devuthani Ekadashi) पर समाप्‍त होगा. देखिए चातुर्मास के 4 महीनों के सभी व्रत-त्‍योहार की लिस्‍ट।

    चातुर्मास 2026 व्रत-त्‍योहार लिस्‍ट
    – चातुर्मास का आरंभ 25 जुलाई 2026 – देवशयनी एकादशी
    – गुरु पूर्णिमा – 29 जुलाई 2026
    – सावन मास आरंभ – 30 जुलाई 2026
    – कामिका एकादशी – 9 अगस्‍त 2026
    – सावन शिवरात्रि – 12 अगस्‍त 2026
    – हरियाली तीज – 15 अगस्‍त 2026
    – नागपंचमी – 17 अगस्‍त 2026
    – पुत्रदा एकादशी – 23 अगस्‍त 2026
    – रक्षाबंधन, श्रावण पूर्णिमा – 28 अगस्त 2026 (सावन महीना समाप्‍त)
    – कजरी तीज – 31 अगस्‍त 2025
    – जन्‍माष्‍टमी – 4 सितंबर 2026
    – अजा एकादशी – 7 सितंबर 2026
    – गणेश चतुर्थी (गणेश स्‍थापना) – 14 सितंबर 2026
    – गणेश विसर्जन, अनंत चतुर्दशी – 25 सितंबर 2026
    – शारदीय नवरात्रि – 11 अक्‍टूबर 2026 से प्रारंभ
    – नवरात्रि नवमी – 19 अक्‍टूबर 2026
    – दशहरा – 20 अक्‍टूबर 2026
    – पापकुंशा एकादशी – 22 अक्‍टूबर 2026
    – करवा चौथ – 29 अक्‍टूबर 2026
    – रमा एकादशी – 5 नवंबर 2026
    – धन तेरस – 6 नवंबर 2026
    – नरक चतुर्दशी – 8 नवंबर 2026 (दिवाली की तारीख कुछ पंचांग में 8 नवंबर भी दी गई है)
    – दिवाली – 9 नवंबर 2026
    – गोवर्धन पूजा – 10 नवंबर 2026
    – भाई दूज – 11 नवंबर 2026
    – छठ पूजा – 15 नवंबर 2026
    – देवउठनी एकादशी – 20 नवंबर 2026

  • वट सावित्री व्रत 2026: राशि अनुसार मंत्र जाप से बढ़ेगा सौभाग्य और सुख-शांति

    वट सावित्री व्रत 2026: राशि अनुसार मंत्र जाप से बढ़ेगा सौभाग्य और सुख-शांति




    नई दिल्ली । वट सावित्री व्रत 2026 इस वर्ष 16 मई को ज्येष्ठ अमावस्या के दिन मनाया जाएगा, जिसमें सुहागिन महिलाएं वट वृक्ष (बरगद) की पूजा कर अपने पति की लंबी उम्र, सुख और समृद्ध वैवाहिक जीवन की कामना करती हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दिन श्रद्धा और विधि-विधान से व्रत रखने और वट वृक्ष की परिक्रमा करने से सौभाग्य और पारिवारिक सुख में वृद्धि होती है।

    शास्त्रों के अनुसार वट सावित्री पूजा के दौरान यदि महिलाएं अपनी राशि के अनुसार मंत्रों का जाप करें तो इसका प्रभाव और अधिक शुभ माना जाता है। ऐसा करने से मानसिक शांति, सकारात्मक ऊर्जा और वैवाहिक जीवन में स्थिरता मिलती है। इस दिन शिव, विष्णु और देवी से जुड़े मंत्रों का जप विशेष फलदायी माना गया है।

    मेष, वृषभ, मिथुन, कर्क, सिंह, कन्या, तुला, धनु, मकर, कुंभ और मीन राशि के लिए अलग-अलग मंत्र बताए गए हैं, जिनका जाप श्रद्धा भाव से करने पर जीवन में सुख-शांति और सौभाग्य बढ़ता है। यह परंपरा भारतीय संस्कृति में पति की दीर्घायु और वैवाहिक सुख का प्रतीक मानी जाती है और वर्षों से महिलाएं इसे श्रद्धापूर्वक निभाती आ रही हैं।

  • Vastu Shastra: शनि के अशुभ प्रभाव से बचना है तो घर की पश्चिम दिशा में भूलकर भी न रखें ये चीजें

    Vastu Shastra: शनि के अशुभ प्रभाव से बचना है तो घर की पश्चिम दिशा में भूलकर भी न रखें ये चीजें


    नई दिल्ली। वास्तु शास्त्र और ज्योतिष दोनों में घर की दिशाओं का विशेष महत्व बताया गया है। माना जाता है कि हर दिशा किसी न किसी ग्रह और ऊर्जा से जुड़ी होती है। घर की पश्चिम दिशा का संबंध न्याय और कर्मफल के देवता शनिदेव से माना जाता है। इसलिए इस दिशा को साफ, व्यवस्थित और संतुलित रखना बेहद जरूरी बताया गया है। वास्तु मान्यताओं के अनुसार, यदि पश्चिम दिशा में गंदगी, टूटे सामान या अव्यवस्था हो, तो इसका नकारात्मक प्रभाव घर के सदस्यों के जीवन पर पड़ सकता है।
    विशेषज्ञों के अनुसार पश्चिम दिशा का सही उपयोग व्यक्ति के जीवन में स्थिरता, सफलता और मानसिक संतुलन लेकर आता है। वहीं यदि यह दिशा दोषपूर्ण हो जाए तो आर्थिक परेशानियां, तनाव, मेहनत के बावजूद सफलता न मिलना और परिवार में कलह जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं।
    वास्तु शास्त्र के मुताबिक पश्चिम दिशा में टूटे-फूटे फर्नीचर, कबाड़ या अनुपयोगी सामान नहीं रखना चाहिए। ऐसा करने से घर में नकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है और बरकत धीरे-धीरे कम होने लगती है। माना जाता है कि यह स्थिति शनिदेव के अशुभ प्रभाव को बढ़ा सकती है। इसलिए समय-समय पर घर से बेकार और टूटी वस्तुओं को हटाते रहना शुभ माना गया है।
    घर की पश्चिम दिशा में गंदगी या बदबू भी नहीं होनी चाहिए। खासतौर पर कूड़ेदान को हमेशा साफ-सुथरा रखना जरूरी माना गया है। वास्तु मान्यता है कि गंदगी नकारात्मक ऊर्जा को आकर्षित करती है, जिससे घर में तनाव और स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं बढ़ सकती हैं। साफ-सफाई बनाए रखने से सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बना रहता है।
    पश्चिम दिशा में पुराने, फटे या गंदे पर्दे लगाना भी अशुभ माना गया है। वास्तु विशेषज्ञों के अनुसार साफ और सुंदर पर्दे घर में सकारात्मक वातावरण बनाए रखते हैं और मानसिक शांति बढ़ाते हैं। वहीं फटे पर्दे दुर्भाग्य और नकारात्मकता को बढ़ाने वाले माने जाते हैं।
    रिश्तों और पारिवारिक स्थिरता के लिए भी पश्चिम दिशा का खास महत्व बताया गया है। यदि दक्षिण-पश्चिम दिशा में बेडरूम बनाना संभव न हो, तो पश्चिम दिशा में शयनकक्ष बनाना शुभ माना जाता है। इससे पति-पत्नी के संबंध मजबूत होते हैं और करियर में स्थिरता आती है।
    वास्तु शास्त्र में यह भी कहा गया है कि घर का मंदिर पश्चिम दिशा में नहीं बनाना चाहिए। मान्यता है कि इससे घर के मुखिया की सेहत और आर्थिक स्थिति प्रभावित हो सकती है। मंदिर के लिए उत्तर, पूर्व या ईशान कोण यानी उत्तर-पूर्व दिशा सबसे शुभ मानी जाती है। इससे घर में सकारात्मक ऊर्जा, मानसिक शांति और सुख-समृद्धि बनी रहती है।
    वास्तु के छोटे-छोटे नियम जीवन में बड़ा बदलाव ला सकते हैं। घर की पश्चिम दिशा को साफ, संतुलित और व्यवस्थित रखने से शनिदेव की कृपा बनी रहती है और जीवन में स्थिरता, तरक्की और खुशहाली आती है।