Category: Religious Astrology

  • महाभारत का महासूत्र: आखिर 18 अंक में ही क्यों सिमटा है युद्ध से लेकर ज्ञान तक का रहस्य?

    महाभारत का महासूत्र: आखिर 18 अंक में ही क्यों सिमटा है युद्ध से लेकर ज्ञान तक का रहस्य?


    नई दिल्ली । महाभारत केवल दुनिया का सबसे विशाल महाकाव्य नहीं है बल्कि यह जीवन दर्शन रहस्यमयी प्रतीकों और कूटनीति की एक ऐसी गहरी संरचना है जिसे समझना आज भी विद्वानों के लिए कौतूहल का विषय है। इस महागाथा की गहराई में उतरते ही एक विशिष्ट संख्या बार-बार हमारे सामने उभरकर आती है और वह है 18 । कुरुक्षेत्र के रक्तरंजित मैदान से लेकर कुरुवंश के विनाश और गीता के दिव्य ज्ञान तक महाभारत की पूरी कथा इसी 18 अंक के इर्द गिर्द सिमटी हुई है। आखिर क्या यह महज एक संयोग है या इसके पीछे ब्रह्मांड का कोई गूढ़ गणित छिपा है आइए इस रहस्यों से भरी कड़ियों को विस्तार से समझते हैं।

    महाभारत की संरचना में 18 का वर्चस्व

    महर्षि वेदव्यास द्वारा रचित इस अद्भुत ग्रंथ की हर परत में 18 का अंक समाहित है जो इसे अन्य महाकाव्यों से अलग और अधिक वैज्ञानिक बनाता है 18 पर्वों का संकलन: महाभारत की पूरी कथा को 18 मुख्य पर्वों अध्यायों के समूह में विभाजित किया गया है। आदि पर्व से शुरू होकर यह स्वर्गारोहण पर्व पर समाप्त होती है, जो जीवन की यात्रा के विभिन्न चरणों को दर्शाती है।

    18 दिनों का महासंग्राम: इतिहास का सबसे विनाशकारी युद्ध, कुरुक्षेत्र का संग्राम ठीक 18 दिनों तक चला था। माना जाता है कि इन 18 दिनों में ही संसार की पुरानी व्यवस्था ध्वस्त हुई और धर्म के नए युग का सूत्रपात हुआ।गीता के 18 अध्याय: कुरुक्षेत्र की रणभेरी बजने से ठीक पहले, अर्जुन के विषाद को दूर करने के लिए भगवान श्रीकृष्ण ने जो ‘श्रीमद्भगवद्गीता’ सुनाई, उसमें भी ठीक 18 अध्याय हैं। यह मनुष्य के 18 तरह के मानसिक द्वंद्वों और उनके समाधान का प्रतीक है।

    18 अक्षौहिणी सेना: युद्ध के मैदान में कुल 18 अक्षौहिणी सेनाएं उतरी थीं। इनमें से 11 कौरवों के पक्ष में थीं और 7 पांडवों की ओर से लड़ीं। आश्चर्यजनक रूप से इनका योग भी 18 ही है। 18 जीवित योद्धा: भीषण नरसंहार के बाद जब युद्ध समाप्त हुआ, तो पांडवों के पांचों भाई, श्रीकृष्ण और सात्यकि सहित कुल 18 प्रमुख योद्धा ही जीवित बचे थे।

    क्या है इसका आध्यात्मिक और गणितीय आधार

    अंक ज्योतिष और सनातन परंपरा की दृष्टि से देखें तो ’18’ का योग 9 -1+8=9 होता है। अंक 9 को भारतीय संस्कृति में पूर्णता और ‘सनातन’ का प्रतीक माना गया है क्योंकि 9 का पहाड़ा कभी अपनी मूल प्रकृति नहीं बदलता। यह इस बात का संकेत है कि महाभारत का युद्ध केवल जमीन के एक टुकड़े के लिए नहीं, बल्कि मानव चेतना की पूर्णता और धर्म की स्थापना के महा-उद्देश्य के लिए लड़ा गया था। श्रीमद्भागवत पुराण के अनुसार 18 पुराण भी हैं जो बताते हैं कि व्यास जी ने ज्ञान के हर क्षेत्र को इसी संख्या में बांधने का प्रयास किया। महाभारत का यह महासूत्र हमें सिखाता है कि जीवन के हर संघर्ष और हर ज्ञान की एक निश्चित सीमा और पूर्णता होती है।

  • वास्तु टिप्स: बाथरूम की खाली बाल्टी बन सकती है कंगाली का कारण, सुख-समृद्धि के लिए अभी बदलें ये आदत

    वास्तु टिप्स: बाथरूम की खाली बाल्टी बन सकती है कंगाली का कारण, सुख-समृद्धि के लिए अभी बदलें ये आदत


    नई दिल्ली । वास्तु शास्त्र में घर के हर कोने की अपनी एक ऊर्जा होती है। अक्सर हम लिविंग रूम या बेडरूम को सजाने और वास्तु के अनुरूप बनाने में घंटों बिता देते हैं, लेकिन बाथरूम जैसी जगह को नजरअंदाज कर देते हैं। वास्तु विशेषज्ञों के अनुसार बाथरूम घर का वह हिस्सा है जहाँ से सबसे ज्यादा नकारात्मक ऊर्जा उत्पन्न हो सकती है। यहाँ रखी एक खाली बाल्टी न केवल आपके मानसिक तनाव को बढ़ा सकती है बल्कि आपके हंसते खेलते घर को आर्थिक तंगी की ओर भी धकेल सकती है।

    खाली बाल्टी क्यों है खतरनाक

    वास्तु विज्ञान में पानी को संपन्नता और प्रवाह का प्रतीक माना गया है। जिस प्रकार बहता हुआ स्वच्छ जल सकारात्मकता लाता है उसी प्रकार बाथरूम में रखी खाली बाल्टी जीवन में अभाव और खालीपन को दर्शाती है। आर्थिक तंगी विशेषज्ञों का मानना है कि खाली बाल्टी घर में सकारात्मक ऊर्जा के प्रवेश को रोकती है। यह धन के आगमन में बाधा उत्पन्न करती है और अनावश्यक खर्चों को बढ़ाती है। मानसिक अशांति और चंद्रमा ज्योतिष शास्त्र के अनुसार जल का सीधा संबंध चंद्रमा से है जो हमारे मन का कारक है। जब हम रात के समय बाथरूम में खाली बर्तन या बाल्टी छोड़ते हैं तो यह मानसिक दोष उत्पन्न करता है जिससे परिवार के सदस्यों में तनाव चिड़चिड़ापन और नींद की कमी जैसी समस्याएं हो सकती हैं।

    इन बातों का रखें विशेष ध्यान

    हमेशा भरकर रखें पानी वास्तु के अनुसार, बाथरूम में बाल्टी को हमेशा साफ पानी से भरकर रखना चाहिए। यदि आप पूरी बाल्टी नहीं भर सकते तो कम से कम आधा जरूर भरें। यह घर में खुशहाली और लक्ष्मी के आगमन का मार्ग प्रशस्त करता है। नीले रंग का महत्व वास्तु में नीले रंग की बाल्टी को सबसे शुभ माना गया है। नीला रंग जल का प्रतीक है और यह घर के वास्तु दोषों को कम करने में मदद करता है।साफ-सफाई है जरूरी बाल्टी केवल भरी हुई ही नहीं बल्कि साफ भी होनी चाहिए। टूटी हुई या गंदी बाल्टी दरिद्रता को न्यौता देती है।

    दरवाजा रखें बंद उपयोग के बाद बाथरूम का दरवाजा हमेशा बंद रखना चाहिए ताकि वहां की नकारात्मक ऊर्जा घर के बाकी हिस्सों में न फैले। विशेष टिप यदि आप रात को बाल्टी भरकर रखते हैं, तो ध्यान रखें कि वह पानी सुबह के समय इस्तेमाल कर लिया जाए या बदल दिया जाए। बासी और गंदा पानी भी वास्तु दोष का कारण बनता है।

  • शुक्रवार के प्रभावी उपाय: मां लक्ष्मी की कृपा से खुलेगा सुख और समृद्धि का द्वार

    शुक्रवार के प्रभावी उपाय: मां लक्ष्मी की कृपा से खुलेगा सुख और समृद्धि का द्वार


    नई दिल्ली :सनातन परंपरा और ज्योतिष शास्त्र में शुक्रवार का दिन विशेष महत्व रखता है। यह दिन शुक्र ग्रह और धन वैभव सुख समृद्धि की अधिष्ठात्री देवी मां लक्ष्मी को समर्पित माना गया है। शुक्र ग्रह को भोग विलास सौंदर्य प्रेम और आर्थिक समृद्धि का कारक माना जाता है। मान्यता है कि शुक्रवार को विधिपूर्वक और श्रद्धा से किए गए उपाय जीवन में आर्थिक स्थिरता सुख शांति और सकारात्मक ऊर्जा को बढ़ाते हैं। जो लोग धन रुकावट वैवाहिक तनाव या भौतिक सुखों की कमी से जूझ रहे हैं उनके लिए शुक्रवार के उपाय विशेष फलदायी माने जाते हैं।

    मां लक्ष्मी की कृपा और धन वृद्धि के उपाय
    शुक्रवार के दिन प्रातः या संध्या काल में मां लक्ष्मी और भगवान विष्णु की पूजा करना अत्यंत शुभ माना जाता है। पूजा में कमल का फूल सफेद पुष्प सुगंधित इत्र और खीर या सफेद मिठाई अर्पित करें। पूजन के समय मन को शांत रखें और कृतज्ञता भाव बनाए रखें। माना जाता है कि सच्चे भाव से की गई आराधना मां लक्ष्मी को शीघ्र प्रसन्न करती है।

    मंत्र जाप और स्तोत्र पाठ
    धन ऐश्वर्य और सुख समृद्धि की प्राप्ति के लिए
    ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः
    मंत्र का 108 बार जाप करना लाभकारी माना गया है। इसके साथ कनकधारा स्तोत्र का पाठ आर्थिक अवरोधों को दूर करने और रुके धन को प्रवाहित करने में सहायक होता है। नियमित रूप से यह पाठ करने से धीरे धीरे आर्थिक स्थिति में सुधार देखा जाता है।

    दीपक और द्वार उपाय
    शुक्रवार की संध्या में घर के मुख्य द्वार पर घी का दीपक जलाना अत्यंत शुभ माना जाता है। दीपक में केसर या इलायची डालने से इसका प्रभाव और बढ़ जाता है। यह उपाय घर में सकारात्मक ऊर्जा समृद्धि और सौभाग्य के प्रवेश का प्रतीक माना जाता है।

    दान और पुण्य कर्म
    शुक्रवार को सफेद वस्तुओं का दान विशेष फलदायी होता है। दूध दही चावल चीनी सफेद वस्त्र या मिठाई जरूरतमंदों को दें। सामर्थ्य अनुसार भोजन या धन का दान भी पुण्यकारी माना गया है। श确定्रों के अनुसार दान से शुक्र ग्रह की कृपा प्राप्त होती है।

    कन्या पूजन का महत्व
    शुक्रवार को 7 या 11 कन्याओं को भोजन कराना और उन्हें सफेद वस्त्र व मिठाई देना अत्यंत शुभ माना जाता है। कन्याओं को मां लक्ष्मी का स्वरूप माना गया है और उनका आशीर्वाद घर में सुख समृद्धि लाता है।

    सुख समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा के उपाय
    मां लक्ष्मी स्वच्छता और व्यवस्था को प्रिय मानती हैं। शुक्रवार को घर की विशेष सफाई करें कबाड़ हटाएं और सुगंधित धूप या अगरबत्ती जलाएं। इस दिन सफेद क्रीम या हल्के रंग के वस्त्र पहनना शुक्र ग्रह को मजबूत करता है और मानसिक शांति प्रदान करता है।

    अन्य शुभ उपाय
    जीव सेवा जैसे चींटियों को आटा चीनी गाय को चारा और पक्षियों के लिए दाना पानी की व्यवस्था करना पुण्यकारी माना गया है। यदि शुक्रवार को प्रदोष या शिव उपासना का संयोग बने तो शिवलिंग पर पंचामृत या शहद से अभिषेक करना भी शुभ फल देता है।श्रद्धा नियमितता और सात्त्विक भाव से किए गए ये उपाय धीरे धीरे जीवन में धन स्थिरता पारिवारिक सुख और मानसिक संतुलन को बढ़ाते हैं। मान्यता है कि मां लक्ष्मी केवल धन ही नहीं बल्कि सद्बुद्धि संतोष और शांति भी प्रदान करती हैं।

  • आज का पंचांग: बसंत पंचमी पर सरस्वती वंदना का शुभ संयोग..

    आज का पंचांग: बसंत पंचमी पर सरस्वती वंदना का शुभ संयोग..


    नई दिल्ली :आज शुक्रवार 23 जनवरी 2026 को माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि के साथ बसंत पंचमी का पावन पर्व श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जा रहा है। यह दिन ज्ञान विद्या संगीत और कला की अधिष्ठात्री देवी मां सरस्वती को समर्पित है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार बसंत पंचमी से ऋतुओं के परिवर्तन की शुरुआत होती है और जीवन में नई ऊर्जा सृजनशीलता और सकारात्मकता का प्रवेश होता है। सूर्य उत्तरायण में स्थित है और शिशिर ऋतु का प्रभाव बना हुआ है जिससे आज के दिन का धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व और भी बढ़ जाता है।

    तिथि वार और संवत
    आज माघ शुक्ल पंचमी तिथि रात्रि 1 बजकर 47 मिनट तक रहेगी इसके बाद षष्ठी तिथि का आरंभ होगा।
    वार शुक्रवार है।
    विक्रम संवत 2082
    शक संवत 1947
    राष्ट्रीय मिति माघ 03
    हिजरी तारीख शब्बन 03 1447
    सौर मास माघ मास प्रविष्टे 10

    नक्षत्र योग और करण
    दिन की शुरुआत पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र में होगी जो दोपहर 2 बजकर 33 मिनट तक प्रभावी रहेगा। इसके बाद उत्तराभाद्रपद नक्षत्र आरंभ होगा।
    योग की बात करें तो परिधि योग अपराह्न 3 बजकर 59 मिनट तक रहेगा इसके पश्चात शिव योग का शुभ संयोग बनेगा।
    करण बव करण दोपहर 2 बजकर 8 मिनट तक रहेगा इसके बाद कौलव करण प्रभावी होगा।

    चंद्रमा की स्थिति
    चंद्रमा सुबह 8 बजकर 34 मिनट तक कुंभ राशि में रहेगा इसके बाद गुरु की राशि मीन में प्रवेश करेगा। इससे भावनात्मक संतुलन आध्यात्मिक झुकाव और रचनात्मक सोच में वृद्धि देखी जा सकती है। बसंत पंचमी पर चंद्रमा का मीन राशि में गोचर सरस्वती आराधना के लिए विशेष शुभ माना गया है।

    सूर्य समय
    सूर्योदय सुबह 7 बजकर 13 मिनट
    सूर्यास्त शाम 5 बजकर 52 मिनट

    आज के पर्व
    बसंत पंचमी
    श्री पंचमी
    सरस्वती पूजा
    लक्ष्मी पूजन
    आज विद्यारंभ पुस्तक पूजन और पीले वस्त्र धारण करने की परंपरा विशेष रूप से मानी जाती है।

    शुभ मुहूर्त
    ब्रह्म मुहूर्त सुबह 5:11 से 6:04
    विजय मुहूर्त दोपहर 2:08 से 2:52
    गोधूलि बेला शाम 5:42 से 6:08
    निशीथ काल रात्रि 11:54 से 12:47

    अशुभ समय
    राहुकाल सुबह 10:30 से 12:00
    गुलिक काल सुबह 7:30 से 9:00
    यमगंड दोपहर 3:30 से 4:30
    दुर्मुहूर्त सुबह 9:06 से 9:50
    पंचक पूरे दिन प्रभावी रहेगा।

    अमृत काल
    सुबह 9:53 से 11:13 तक

    धार्मिक दृष्टि से आज का दिन पूजा साधना और शुभ संकल्प के लिए अत्यंत फलदायी माना गया है। बसंत पंचमी पर मां सरस्वती की आराधना से बुद्धि विवेक स्मरण शक्ति और विद्या में वृद्धि होने का विश्वास किया जाता है।

    आज शुक्रवार 23 जनवरी 2026 को माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि के साथ बसंत पंचमी का पावन पर्व श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जा रहा है। यह दिन ज्ञान विद्या संगीत और कला की अधिष्ठात्री देवी मां सरस्वती को समर्पित है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार बसंत पंचमी से ऋतुओं के परिवर्तन की शुरुआत होती है और जीवन में नई ऊर्जा सृजनशीलता और सकारात्मकता का प्रवेश होता है। सूर्य उत्तरायण में स्थित है और शिशिर ऋतु का प्रभाव बना हुआ है जिससे आज के दिन का धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व और भी बढ़ जाता है।

    तिथि वार और संवत
    आज माघ शुक्ल पंचमी तिथि रात्रि 1 बजकर 47 मिनट तक रहेगी इसके बाद षष्ठी तिथि का आरंभ होगा।
    वार शुक्रवार है।
    विक्रम संवत 2082
    शक संवत 1947
    राष्ट्रीय मिति माघ 03
    हिजरी तारीख शब्बन 03 1447
    सौर मास माघ मास प्रविष्टे 10

    नक्षत्र योग और करण
    दिन की शुरुआत पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र में होगी जो दोपहर 2 बजकर 33 मिनट तक प्रभावी रहेगा। इसके बाद उत्तराभाद्रपद नक्षत्र आरंभ होगा।
    योग की बात करें तो परिधि योग अपराह्न 3 बजकर 59 मिनट तक रहेगा इसके पश्चात शिव योग का शुभ संयोग बनेगा।
    करण बव करण दोपहर 2 बजकर 8 मिनट तक रहेगा इसके बाद कौलव करण प्रभावी होगा।

    चंद्रमा की स्थिति
    चंद्रमा सुबह 8 बजकर 34 मिनट तक कुंभ राशि में रहेगा इसके बाद गुरु की राशि मीन में प्रवेश करेगा। इससे भावनात्मक संतुलन आध्यात्मिक झुकाव और रचनात्मक सोच में वृद्धि देखी जा सकती है। बसंत पंचमी पर चंद्रमा का मीन राशि में गोचर सरस्वती आराधना के लिए विशेष शुभ माना गया है।

    सूर्य समय
    सूर्योदय सुबह 7 बजकर 13 मिनट
    सूर्यास्त शाम 5 बजकर 52 मिनट

    आज के पर्व
    बसंत पंचमी
    श्री पंचमी
    सरस्वती पूजा
    लक्ष्मी पूजन
    आज विद्यारंभ पुस्तक पूजन और पीले वस्त्र धारण करने की परंपरा विशेष रूप से मानी जाती है।

    शुभ मुहूर्त
    ब्रह्म मुहूर्त सुबह 5:11 से 6:04
    विजय मुहूर्त दोपहर 2:08 से 2:52
    गोधूलि बेला शाम 5:42 से 6:08
    निशीथ काल रात्रि 11:54 से 12:47

    अशुभ समय
    राहुकाल सुबह 10:30 से 12:00
    गुलिक काल सुबह 7:30 से 9:00
    यमगंड दोपहर 3:30 से 4:30
    दुर्मुहूर्त सुबह 9:06 से 9:50
    पंचक पूरे दिन प्रभावी रहेगा।

    अमृत काल
    सुबह 9:53 से 11:13 तक

    धार्मिक दृष्टि से आज का दिन पूजा साधना और शुभ संकल्प के लिए अत्यंत फलदायी माना गया है। बसंत पंचमी पर मां सरस्वती की आराधना से बुद्धि विवेक स्मरण शक्ति और विद्या में वृद्धि होने का विश्वास किया जाता है।

  • बसंत पंचमी पर विद्या की अधिष्ठात्री मां सरस्वती की आराधना

    बसंत पंचमी पर विद्या की अधिष्ठात्री मां सरस्वती की आराधना


    नई दिल्ली :आज देशभर में बसंत पंचमी का पर्व श्रद्धा आस्था और उल्लास के साथ मनाया जा रहा है। माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाया जाने वाला यह पर्व विद्या ज्ञान वाणी और विवेक की देवी मां सरस्वती की उपासना के लिए विशेष माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इसी तिथि को मां सरस्वती का पृथ्वी पर प्राकट्य हुआ था। इसलिए इस दिन की गई पूजा आराधना और दान को अत्यंत फलदायी बताया गया है।

    इस वर्ष बसंत पंचमी पर ज्योतिषीय दृष्टि से भी शुभ संयोग बना हुआ है। पंचमी तिथि पूरे दिन प्रभावी है और चंद्रमा का संचार गुरु की राशि मीन में हो रहा है। ऐसे में ज्ञान और बुद्धि के कारक ग्रहों का यह योग सरस्वती साधना के लिए विशेष फल प्रदान करने वाला माना जा रहा है। मान्यता है कि इस योग में मां सरस्वती की आराधना करने से स्मरण शक्ति तेज होती है और शिक्षा कला लेखन व संगीत जैसे क्षेत्रों में प्रगति के मार्ग खुलते हैं।देशभर के विद्यालयों शिक्षण संस्थानों मंदिरों और घरों में सरस्वती पूजन का आयोजन किया गया है। विद्यार्थी अपने अध्ययन उपकरण पुस्तकों और वाद्य यंत्रों को मां सरस्वती के चरणों में समर्पित कर विद्या में सफलता की कामना कर रहे हैं। कलाकार और रचनात्मक क्षेत्रों से जुड़े लोग भी इस दिन विशेष रूप से मां सरस्वती की उपासना करते हैं।

    प्रयागराज में माघ मेले का प्रमुख स्नान पर्व
    तीर्थराज प्रयागराज में बसंत पंचमी माघ मेले का प्रमुख स्नान पर्व माना जाता है। गंगा यमुना और अदृश्य सरस्वती के पावन संगम पर सुबह से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। साधु संतों के सान्निध्य में वेद पाठ और धार्मिक अनुष्ठानों के बीच श्रद्धालुओं ने संगम में स्नान कर ज्ञान और सद्बुद्धि की कामना की। प्रशासन की ओर से सुरक्षा और व्यवस्थाओं के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं।

    पूजन की परंपरा और धार्मिक महत्व
    धार्मिक ग्रंथों के अनुसार बसंत पंचमी के दिन प्रातः स्नान कर स्वच्छ और पीले वस्त्र धारण कर पूजा करना शुभ माना जाता है। पीला रंग बसंत ऋतु उल्लास और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक है। पूजा में पीले पुष्प अक्षत धूप दीप और पीले मिष्ठान अर्पित किए जाते हैं। कई स्थानों पर भगवान विष्णु और श्रीकृष्ण राधा के पूजन की भी परंपरा है।

    शिक्षा संस्कृति और चेतना का पर्व
    बसंत पंचमी को बच्चों के विद्यारंभ संस्कार से भी जोड़ा जाता है। इस दिन छोटे बच्चों को पहली बार अक्षर ज्ञान कराया जाता है। धार्मिक विशेषज्ञों के अनुसार शुद्ध मन सात्त्विक आचरण और संयम के साथ की गई आराधना से मां सरस्वती की विशेष कृपा प्राप्त होती है। यही कारण है कि बसंत पंचमी को केवल धार्मिक पर्व नहीं बल्कि शिक्षा संस्कृति और चेतना के जागरण का दिन माना जाता है।

  • बसंत पंचमी पर मीन राशि में प्रवेश करेगा चंद्रमा, तीन राशियों पर बरसेगी मां सरस्वती की कृपा

    बसंत पंचमी पर मीन राशि में प्रवेश करेगा चंद्रमा, तीन राशियों पर बरसेगी मां सरस्वती की कृपा


    नई दिल्ली :ज्योतिष शास्त्र में चंद्रमा को मन भावनाओं और बुद्धि का कारक ग्रह माना गया है। इसकी चाल भले ही तेज हो लेकिन इसका प्रभाव व्यक्ति के जीवन पर गहरा और त्वरित होता है। इस वर्ष बसंत पंचमी के पावन अवसर पर चंद्रमा एक महत्वपूर्ण राशि परिवर्तन करने जा रहा है। 23 जनवरी 2026 की सुबह 8 बजकर 34 मिनट पर चंद्रमा शनि की राशि कुंभ से निकलकर गुरु की राशि मीन में प्रवेश करेगा।

    ज्योतिषीय दृष्टि से यह गोचर बेहद शुभ माना जा रहा है क्योंकि मीन राशि ज्ञान आध्यात्म और रचनात्मकता की प्रतीक मानी जाती है। बसंत पंचमी स्वयं विद्या और ज्ञान की देवी मां सरस्वती को समर्पित पर्व है और ऐसे में चंद्रमा का मीन राशि में प्रवेश विशेष फलदायी माना जा रहा है। इस गोचर का प्रभाव खासतौर पर शिक्षा कला लेखन संगीत शोध और करियर से जुड़े लोगों पर सकारात्मक रूप से दिखाई देगा।ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार इस चंद्र गोचर से तीन राशियों पर मां सरस्वती की विशेष कृपा बनी रहेगी। इन राशियों के जातकों को मानसिक स्पष्टता नई सोच और आगे बढ़ने के अवसर प्राप्त हो सकते हैं।

    वृषभ राशि
    वृषभ राशि के जातकों के लिए चंद्रमा का यह गोचर लाभ भाव में होगा। इससे आय में वृद्धि और करियर में सकारात्मक बदलाव के योग बन रहे हैं। नौकरीपेशा लोगों को वरिष्ठ अधिकारियों से प्रशंसा मिल सकती है और कुछ लोगों को पदोन्नति या नई जिम्मेदारी भी मिल सकती है। व्यापार से जुड़े जातकों के लिए यह समय नए सौदे और लाभ के अवसर लेकर आ सकता है। विद्यार्थियों की एकाग्रता बढ़ेगी और रचनात्मक क्षेत्रों से जुड़े लोगों को नई पहचान मिल सकती है।

    वृश्चिक राशि
    वृश्चिक राशि के जातकों के लिए चंद्रमा पंचम भाव में गोचर करेगा जो शिक्षा बुद्धि और प्रेम का भाव माना जाता है। इस दौरान मानसिक स्पष्टता बढ़ेगी और लंबे समय से अटके कार्य पूरे हो सकते हैं। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों को सकारात्मक संकेत मिल सकते हैं। करियर में भी स्थितियां अनुकूल रहेंगी और यात्रा से लाभ के योग बनेंगे।

    धनु राशि
    धनु राशि के जातकों के लिए चंद्रमा चतुर्थ भाव में प्रवेश करेगा जो सुख परिवार और मानसिक शांति का कारक है। पारिवारिक जीवन में सौहार्द बना रहेगा और माता पिता का सहयोग मिलेगा। करियर में भी सकारात्मक बदलाव संभव हैं। शिक्षा कला और रचनात्मक क्षेत्रों से जुड़े लोगों को मान सम्मान मिलने के योग हैं। मां सरस्वती की कृपा से सीखने की क्षमता और एकाग्रता में वृद्धि होगी।कुल मिलाकर बसंत पंचमी पर होने वाला यह चंद्र गोचर ज्ञान बुद्धि और प्रगति का मार्ग प्रशस्त करने वाला सिद्ध हो सकता है।

  • अमीर घरों में क्यों लगाई जाती है 7 सफेद दौड़ते घोड़ों की तस्वीर? जानिए वास्तु शास्त्र में छिपा सफलता का सूत्र

    अमीर घरों में क्यों लगाई जाती है 7 सफेद दौड़ते घोड़ों की तस्वीर? जानिए वास्तु शास्त्र में छिपा सफलता का सूत्र


    नई दिल्ली। देश के कई समृद्ध परिवारों और बड़े व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में आपने अक्सर 7 सफेद दौड़ते घोड़ों की तस्वीर दीवारों पर सजी हुई देखी होगी। पहली नजर में यह केवल एक सुंदर पेंटिंग लगती हैलेकिन वास्तु शास्त्र में इसका गहरा और प्रभावशाली महत्व बताया गया है। वास्तु विशेषज्ञों के अनुसारयह तस्वीर केवल सजावट नहीं बल्कि सकारात्मक ऊर्जासफलता और आर्थिक उन्नति का एक प्रभावी माध्यम मानी जाती है।वास्तु शास्त्र में घोड़े को शक्तिसाहसगति और विजय का प्रतीक माना गया है। जब घोड़े दौड़ते हुए दिखाई देते हैंतो वे जीवन में रुकावटों को पार करने और निरंतर आगे बढ़ने की प्रेरणा देते हैं। उज्जैन के वास्तु आचार्य आनंद भारद्वाज के अनुसारसात सफेद घोड़ों की तस्वीर घर या कार्यालय में जमी हुई नकारात्मक ऊर्जा को तोड़ती है और प्रगति की राह को प्रशस्त करती है।

    आचार्य बताते हैं कि अंक 7’का वास्तु और आध्यात्मिक दृष्टि से विशेष महत्व है। सात दिनसात रंगसात लोक और मानव शरीर के सात चक्र- यह अंक जीवन की पूर्णता और संतुलन का प्रतीक माना जाता है। वहीं सफेद रंग शुद्धताशांति और सकारात्मकता से जुड़ा होता है। ऐसे में सात सफेद घोड़ों का संयोजन संतुलित और शक्तिशाली ऊर्जा उत्पन्न करता हैजो मानसिक स्थिरता के साथ आर्थिक उन्नति में सहायक माना जाता है।हालांकिइस तस्वीर को लगाने के लिए कुछ खास नियमों का पालन करना बेहद जरूरी है। वास्तु विशेषज्ञों के अनुसारघोड़े हमेशा दौड़ते हुए होने चाहिए। खड़ेबैठे या थके हुए घोड़ों की तस्वीर शुभ फल नहीं देती। इसके अलावातस्वीर को घर या ऑफिस की उत्तर या पूर्व दिशा में लगाना सबसे उत्तम माना गया है। घोड़ों का मुख हमेशा घर या कार्यस्थल के अंदर की ओर होना चाहिएताकि सकारात्मक ऊर्जा बाहर न जाए बल्कि भीतर प्रवेश करे।

    व्यापारिक प्रतिष्ठानों में इस तस्वीर को लगाने से कार्यों की गति बढ़ने और निर्णय क्षमता मजबूत होने की मान्यता है। कई उद्योगपति और व्यापारी मानते हैं कि इस उपाय को अपनाने के बाद उनके काम में आ रही बाधाएं कम हुईं और नए अवसर सामने आए। हालांकिविशेषज्ञ यह भी चेतावनी देते हैं कि यदि दिशा या नियमों की अनदेखी की जाएतो इसका विपरीत प्रभाव भी पड़ सकता हैक्योंकि यह तस्वीर ऊर्जा को तीव्र रूप से आकर्षित करती है।

    वास्तु जानकारों का कहना है कि ऐसे उपाय तभी प्रभावी होते हैंजब उन्हें आस्था और सही विधि के साथ अपनाया जाए। इसे अंधविश्वास की बजाय एक सांस्कृतिक और मानसिक प्रेरणा के रूप में देखना चाहिएजो व्यक्ति को सकारात्मक सोच और निरंतर प्रयास की ओर प्रेरित करती है।कुल मिलाकर7 सफेद दौड़ते घोड़ों की तस्वीर को वास्तु शास्त्र में प्रगतिसाहससौभाग्य और समृद्धि का प्रतीक माना गया है। यही वजह है कि देशभर में कई सफल और संपन्न लोग इसे अपने घर और कार्यस्थल में स्थान देना शुभ मानते हैं।

  • जानिए आज शुक्रवार का राशिफल

    मेष राशि :- अपने काम को प्राथमिकता से करें। धार्मिक आस्थाएं फलीभूत होंगी। लाभ होगा और पुराने मित्रों से समागम भी होगा। संतान पक्ष की समस्या समाप्त होगी। स्वभाव में सौम्यता आपकी मदद करेगी। जीवन साथी से संबंधों में मिठास बढ़ेगी। परामर्श व परिस्थिति सभी का सहयोग मिलेगा। शुभांक-3-5-7

    वृष राशि :- समय नकारात्मक परिणाम देने वाला बन रहा है। पर प्रपंच में ना पड़कर अपने काम पर ध्यान दीजिए। नौकरी में सावधानीपूर्वक कार्य करें। विरोधियों के सक्रिय होने की संभावना है। कारोबारी यात्रा को फिलहाल टालें। कारोबारी काम में बाधा बनी रहेगी। स्वास्थ्य मध्यम रहेगा। शुभांक-2-4-6

    मिथुन राशि :- जो चल रहा है उसे सावधानीपूर्वक संभालें। मायूस न हो समय चक्र हैं। कारोबारी काम में बाधा उभरने से मानसिक अशांति बनी रहेगी। शत्रुभय, चिंता, संतान को कष्ट, अपव्यय के कारण बनेंगे। कार्यक्षेत्र में आगे बढ़ने में रुकावट का एहसास होगा। पारिवारिक परेशानी बढ़ेगी। धन के लेन-देन में सतर्क रहें। शुभांक-2-5-8

    कर्क राशि :- परिवार में मांगलिक कार्यों का आयोजन होगा। वैवाहिक जीवन में प्रेम-प्रीति बढ़ेगी। जीवन साथी से संबंधों में मिठास बढ़ेगी। राजकीय सम्मान प्राप्त होने के योग हैं। शांतिपूर्वक कार्य करें, जान है तो जहान है, अत: वाहन आदि चलाने में सावधानी बरतें। अपना कार्य स्वयं करें, किसी के भरोसे न रहें। शुभांक-1-5-8

    सिंह राशि :- नये लोगों से मेल-मिलाप भविष्य में लाभदायक सिद्ध होगा। घर तथा व्यावसाय को एक-दूसरे से दूर ही रखें। व्यापारिक संबंधों में प्रगति के योग हैं। स्थान परिवर्तन की संभावना हैं। कार्य स्थल पर नियमपूर्वक व्यवहार लाभकारी होगा। कोई प्रिय वस्तु अथवा नवीन वस्त्राभूषण प्राप्त होंगे। शुभांक-2-5-7

    कन्या राशि :- धन के लेन-देन में सतर्क रहें। बातचीत में संयम बरतें। मन में चंचलता बढ़ेगी। भावुकता वश निर्णय न लें। कर्ज देने से बचें। मानसिक व्यथा व संतान के कारण परेशानी होगी। कला क्षेत्र के जातकों को मेहनत के बाद सफलता मिलेगी। कारोबारी यात्रा को फिलहाल टालें। शुभांक-2-6-8

    तुला राशि :- सरकारी पक्ष से पूर्ण सहयोग प्राप्त होगा। विद्यार्थियों के लिए समय अनुकूल रहेगा। स्वास्थ्य पर ध्यान दें। पुराना विवाद समाप्त होगा। आर्थिक मजबूती हेतु मन केन्द्रित होगा। मिल रहे अवसरों का लाभ उठाएं। आर्थिक योजनाएं फलित होंगी। बकाया धन की प्राप्ति के योग हैं। शुभांक-1-5-8

    वृश्चिक राशि :- उत्साह में वृद्धि होगी। आलस्य का त्याग करें। नये आय के स्त्रोत बनेंगे। पद-प्रतिष्ठा बढ़ने के लिए कुछ सामाजिक कार्य संपन्न होंगे। पसंदीदा भोज्य पदार्थों की प्राप्ति होगी। लम्बे प्रवास व चुनौती पूर्ण कार्यों का सामना हो सकता हैं। व्यवसायिक क्षेत्र में आपकी मेहनत व लगन की परीक्षा होगी। शुभांक-3-6-9

    धनु राशि :- लेन-देन में स्पष्टता बनाये रखें। घर के सदस्य मदद करेंगे और साथ ही आर्थिक बदहाली से भी मुक्ति मिलने लगेगी। कोई प्रिय वस्तु अथवा नवीन वस्त्राभूषण प्राप्त होंगे। व्यापार व व्यवसाय में स्थिति उत्तम रहेगी। नौकरी में पदोन्नति की संभावना है। राजकीय कार्यों से लाभ। पैतृक सम्पत्ति से लाभ। शुभांक-3-5-7

    मकर राशि :- आज की सुविधा कल नहीं मिल पायेगी, लाभ उठाएं। मित्रों से सावधान रहें तो ज्यादा उत्तम है। संतोष रखने से सफलता मिलेगी। नौकरी में स्थिति सामान्य ही रहेगी। शैक्षणिक क्षेत्र में उदासीनता रहेगी। शुभ कार्यों में व्यय होगा व हर्ष पूर्ण माहौल बनेगा। स्वास्थ्य पर ध्यान दें। धार्मिक यात्रा शुभ है। शुभांक-3-5-8

    कुंभ राशि :- अपना कार्य दूसरों के सहयोग से बना लेंगे। मित्रों की उपेक्षा करना ठीक नहीं रहेगा। नौकरी के क्षेत्र में कुछ उलझनें रहेंगी। यश-प्रतिष्ठा में वृद्धि व शिक्षा में परेशानी आ सकती है। स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखें। व्यापार में वृद्घि होगी। आज का परिश्रम आगे लाभ देगा। इच्छित कार्य सफल होंगें। शुभांक-3-6-9

    मीन राशि :- व्यर्थ की भाग-दौड़ से यदि बचा ही जाए तो अच्छा है। श्रेष्ठजनों की सहानुभूति मिलेगी। कारोबारी यात्रा सफल होगी। बुद्धि, बल व पराक्रम सफल होगा। व्यापार में वृद्धि व लाभ मिलेगा। कार्यक्षेत्र में संतोषजनक सफलता मिलेगी। आर्थिक हित के काम को साधने में मदद मिल जाएगी। शुभांक-2-4-8
  • आज का पंचांग: विनायक चतुर्थी पर गणेश पूजा का महायोग, जानें शुभ मुहूर्त, नक्षत्र और राहुकाल

    आज का पंचांग: विनायक चतुर्थी पर गणेश पूजा का महायोग, जानें शुभ मुहूर्त, नक्षत्र और राहुकाल


    नई दिल्ली। आज 22 जनवरी 2026, गुरुवार को माघ मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि है। यह तिथि विनायक चतुर्थी और तिल चतुर्थी के रूप में मनाई जा रही है। पंचांग के अनुसार आज का दिन भगवान गणेश की आराधना के लिए अत्यंत शुभ माना गया है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा और सही मुहूर्त में गणपति पूजन करने से जीवन के विघ्न दूर होते हैं, रुके हुए कार्य पूरे होते हैं और नई शुरुआत में सफलता मिलती है।
    आज की चतुर्थी तिथि रात्रि 2 बजकर 29 मिनट तक रहेगी, इसके बाद पंचमी तिथि का आरंभ होगा। विक्रम संवत 2082 और शक संवत 1947 चल रहा है। सूर्य उत्तरायण में हैं और शिशिर ऋतु का प्रभाव बना हुआ है। चंद्रमा पूरे दिन कुंभ राशि में संचार करेगा, जिससे बौद्धिक कार्य, योजना निर्माण और रचनात्मक गतिविधियों के लिए दिन अनुकूल माना जा रहा है।नक्षत्र की बात करें तो आज शतभिषा नक्षत्र दोपहर 2 बजकर 27 मिनट तक रहेगा, इसके बाद पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र प्रारंभ होगा। योग के रूप में सुबह 5 बजकर 48 मिनट तक वरीयान योग रहेगा, जो शुभ और सिद्धिदायक माना गया है। इसके बाद परिधि योग प्रभावी होगा। करण में वणिज करण दोपहर 2 बजकर 43 मिनट तक रहेगा, फिर बव करण लगेगा।

    आज के शुभ मुहूर्त
    आज ब्रह्म मुहूर्त सुबह 5:11 से 6:04 बजे तक रहेगा। विजय मुहूर्त दोपहर 2:08 से 2:51 बजे तक है। इसके अलावा शाम की गोधूलि बेला 5:41 से 6:07 बजे तक रहेगी, जिसे पूजा-पाठ और संकल्प के लिए विशेष शुभ माना गया है। गणेश पूजा के लिए यह समय अत्यंत फलदायी है।

    अशुभ समय और सावधानी
    आज राहुकाल दोपहर 1:30 से 3:00 बजे तक रहेगा। सुबह 9:00 से 10:30 बजे तक गुलिक काल और 6:00 से 7:30 बजे तक यमगंड का समय रहेगा। आज पूरे दिन पंचक का प्रभाव भी बताया गया है इसलिए नए और जोखिम भरे कार्यों में सावधानी रखने की सलाह दी जाती है।

    सूर्योदय और सूर्यास्त
    आज सूर्योदय सुबह 7:13 बजे और सूर्यास्त शाम 5:51 बजे होगा।

    धार्मिक महत्व और उपाय
    विनायक चतुर्थी के दिन गणेश जी को मोदक, तिल और गुड़ अर्पित करना विशेष शुभ माना जाता है। जरूरतमंदों को तिल, मिठाई या भोजन का दान करने से पुण्य फल की प्राप्ति होती है। ज्योतिषीय दृष्टि से आज का दिन बाधा निवारण, मानसिक शांति और नई शुरुआत के लिए उत्तम है।आज का पंचांग पूजा-पाठ, व्रत और धार्मिक कार्यों की योजना बनाने वालों के लिए मार्गदर्शक सिद्ध हो सकता है। सही तिथि, नक्षत्र और मुहूर्त में किया गया कर्म अधिक फलदायी माना गया है।

  • तिलकुट चौथ व्रत 2026: संतान की रक्षा और दीर्घायु का पावन संकल्प, माता-पिता अवश्य जानें कथा और महत्व

    तिलकुट चौथ व्रत 2026: संतान की रक्षा और दीर्घायु का पावन संकल्प, माता-पिता अवश्य जानें कथा और महत्व


    नई दिल्ली। हिंदू धर्म में माघ मास की शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि का विशेष महत्व है। इसी दिन तिलकुट चौथ व्रत रखा जाता है, जिसे सकट चौथ का ही एक रूप माना जाता है। यह व्रत विशेष रूप से माता-पिता द्वारा संतान की लंबी आयु, उसके सुखद भविष्य और परिवार की सुरक्षा के लिए किया जाता है। वर्ष 2026 में भी श्रद्धा और आस्था के साथ यह व्रत रखा जाएगा। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन भगवान गणेश की विधिवत पूजा और कथा श्रवण से जीवन की बड़ी बाधाएं दूर होती हैं।

    तिलकुट चौथ का नाम ही इसके स्वरूप को दर्शाता है। इस दिन तिल और गुड़ से बने पकवानों का विशेष महत्व होता है। माताएं दिनभर व्रत रखकर शाम के शुभ समय में गणेश जी को तिलकुट लड्डू और दूर्वा अर्पित करती हैं। पूजा के बाद व्रत कथा सुनना और सुनाना अनिवार्य माना गया है क्योंकि कथा के बिना व्रत अधूरा माना जाता है।

    तिलकुट चौथ व्रत की पौराणिक कथा

    कथा के अनुसार, एक नगर में साहूकार और उसकी पत्नी रहते थे, जो धर्म-कर्म में विश्वास नहीं रखते थे। संतान न होने से वे दुखी रहते थे। एक दिन साहूकारनी ने पड़ोस में सकट चौथ की कथा सुनी जिसमें बताया गया कि इस व्रत से अन्न, धन, सुहाग और संतान की प्राप्ति होती है। साहूकारनी ने मन में संकल्प लिया कि यदि उसे पुत्र प्राप्त हुआ तो वह तिलकुट चौथ का व्रत करेगी।

    भगवान गणेश की कृपा से उसके घर पुत्र जन्मा, लेकिन समय बीतने के साथ वह अपना वचन भूल गई। जब पुत्र का विवाह तय हुआ, तब चौथ माता नाराज हो गईं और पुत्र को पीपल के पेड़ पर बैठा दिया। विवाह से पहले जब होने वाली बहू जंगल गई, तो उसे पेड़ से आवाज आई-ओ मेरी अर्धब्यहि। सच्चाई जानकर साहूकारनी को अपनी भूल का एहसास हुआ। उसने तुरंत ढाई मन तिलकुट चढ़ाकर विधिवत पूजा की। गणेश जी प्रसन्न हुए और पुत्र सुरक्षित विवाह मंडप में पहुंच गया।

    व्रत विधि और नियम

    इस दिन प्रातः स्नान के बाद व्रत का संकल्प लिया जाता है। शाम को चंद्रमा और गणेश जी की पूजा की जाती है। तिल-गुड़ का भोग अर्पित कर कथा सुनी जाती है। व्रत का पारण संतान को तिलकुट खिलाकर किया जाता है। मान्यता है कि इससे संतान को नकारात्मक शक्तियों से रक्षा मिलती है।

    तिलकुट चौथ व्रत का महत्व
    यह व्रत माता-पिता और संतान के बीच भावनात्मक व आध्यात्मिक संबंध को मजबूत करता है। माना जाता है कि इससे संतान पर आने वाले संकट टलते हैं, विवाह में आ रही बाधाएं दूर होती हैं और घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है। यही कारण है कि तिलकुट चौथ व्रत को मातृत्व और संतान-सुरक्षा का विशेष पर्व माना गया है।