Category: Religious Astrology

  • बसंत पंचमी के दिन पीला क्यों पहनें: सरस्वती पूजा में रंग का महत्व और शुभ संकेत

    बसंत पंचमी के दिन पीला क्यों पहनें: सरस्वती पूजा में रंग का महत्व और शुभ संकेत

    नई दिल्ली। बसंत पंचमी का त्योहार हर साल ज्ञान, विद्या और कला की देवी मां सरस्वती को समर्पित होकर मनाया जाता है। इस साल यह पर्व 23 जनवरी, 2026 को माघ शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को पड़ रहा है। इस खास दिन पर लोग विधिवत पूजा अर्चना करते हैं और देवी सरस्वती से आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। परंतु क्या आपने कभी सोचा है कि इस दिन पीले रंग के कपड़े पहनने की परंपरा क्यों है और इसका महत्व क्या है? जानिए इस पवित्र दिन के पीछे के धार्मिक और सांस्कृतिक कारण।

    बसंत पंचमी का महत्व

    बसंत पंचमी वसंत ऋतु की शुरुआत का प्रतीक है और इसे देवी सरस्वती की पूजा अर्चना के लिए मनाया जाता है। देवी सरस्वती ज्ञान, विद्या, संगीत और कला की देवी मानी जाती हैं। हिंदू धर्मग्रंथों के अनुसार, उन्हें चार हाथों वाली देवी के रूप में दर्शाया गया है, जिनमें वेद, वीणा, सफेद कमल और माला होती है। देवी सरस्वती सृष्टि के मूल स्रोत और ब्रह्मांड की रचनात्मक शक्ति का प्रतिनिधित्व करती हैं। इस दिन उनके सामने पीले भोग और फूल चढ़ाना शुभ माना जाता है।

    सरस्वती पूजा में पीले रंग का महत्व

    पीला रंग बसंत ऋतु और प्रकृति में बदलाव का प्रतीक है। यह ऊर्जा, प्रकाश और नई शुरुआत का रंग माना जाता है। इसलिए लोग इस दिन पीले रंग के कपड़े पहनते हैं, पीले फूल चढ़ाते हैं और देवी को पीली साड़ी पहनाकर उनका पूजन करते हैं। पीले रंग का ज्ञान और शिक्षा से भी गहरा संबंध है, इसे गुरु बृहस्पति और अन्य ज्ञानदेवताओं के रंग के रूप में देखा जाता है। इस दिन पीला रंग पहनने से न केवल आध्यात्मिक लाभ होता है, बल्कि यह खुशी और सकारात्मक ऊर्जा का भी प्रतीक है।

    खुशी और आशीर्वाद का प्रतीक

    पीला रंग केवल धार्मिक महत्व तक सीमित नहीं है। यह उत्साह, आनंद और आशावाद का भी प्रतीक है। सरसों के खेतों की तरह खिले फूल, हल्दी से बनी मिठाइयाँ और भक्तों द्वारा पहने जाने वाले पीले कपड़े इस दिन की रौनक बढ़ाते हैं। इस दिन पीले रंग के माध्यम से मन में सकारात्मक ऊर्जा और ज्ञान की प्राप्ति होती है।

    कैसे मनाएं बसंत पंचमी

    इस बसंत पंचमी पर अपने घर और मंदिरों को पीले फूलों से सजाएं, देवी को पीला भोग अर्पित करें और पीले रंग के कपड़े पहनें। इस अवसर पर माता सरस्वती से ज्ञान, संपन्नता और खुशहाली की प्रार्थना करें। नई किताबें पढ़ना, संगीत और कला में रुचि दिखाना भी इस दिन का महत्व बढ़ाता है। इस प्रकार, बसंत पंचमी सिर्फ पूजा का दिन नहीं, बल्कि ज्ञान और सकारात्मक ऊर्जा का पर्व है।

  • कुंभ राशि में सूर्य–मंगल की महायोग युति, इन राशियों को मिलेगा मान-सम्मान और करियर में बड़ी सफलता

    कुंभ राशि में सूर्य–मंगल की महायोग युति, इन राशियों को मिलेगा मान-सम्मान और करियर में बड़ी सफलता


    नई दिल्ली । ज्योतिष शास्त्र में सूर्य और मंगल को साहस, ऊर्जा और आत्मबल के सबसे प्रभावशाली ग्रह माना जाता है। सूर्य जहां आत्मविश्वास, नेतृत्व क्षमता और मान-सम्मान का प्रतीक है, वहीं मंगल ऊर्जा, पराक्रम और निर्णय शक्ति का कारक ग्रह है। जब ये दोनों शक्तिशाली ग्रह एक साथ आते हैं, तो इसे सूर्य–मंगल की युति कहा जाता है। वर्ष 2026 में यह विशेष युति 23 फरवरी से 15 मार्च के बीच कुंभ राशि में बनने जा रही है, जो कई राशियों के जीवन में बड़ा बदलाव लेकर आएगी। यह युति खासतौर पर करियर, व्यवसाय और सामाजिक प्रतिष्ठा के लिहाज से बेहद शुभ मानी जा रही है। इस दौरान कुछ राशियों को नई नौकरी के अवसर मिल सकते हैं, कारोबार में विस्तार के योग बनेंगे और आत्मविश्वास में जबरदस्त बढ़ोतरी देखने को मिलेगी। साथ ही, कुछ जातकों के लिए नए रिश्ते और महत्वपूर्ण संपर्क बनने के भी संकेत हैं। आइए जानते हैं किन राशियों पर सूर्य–मंगल की युति का सबसे अधिक सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।

    मेष राशि
    मेष राशि के जातकों के लिए सूर्य–मंगल की युति दशम भाव को प्रभावित करेगी, जो करियर और कर्म क्षेत्र का भाव माना जाता है। इस दौरान नौकरीपेशा लोगों को पदोन्नति, नई जिम्मेदारियां या बेहतर जॉब ऑफर मिल सकता है। व्यवसाय से जुड़े जातकों को नए क्लाइंट, बड़े प्रोजेक्ट और मुनाफे के अवसर प्राप्त होंगे। सरकारी क्षेत्र में काम करने वालों को मान-सम्मान और पहचान मिल सकती है। लंबे समय से की जा रही मेहनत का फल मिलने से आत्मविश्वास में भी उल्लेखनीय वृद्धि होगी।

    कुंभ राशि

    कुंभ राशि में ही सूर्य और मंगल की युति बन रही है, इसलिए इस राशि के जातकों के लिए यह समय बेहद खास रहेगा। नेतृत्व क्षमता, आत्मबल और निर्णय शक्ति में जबरदस्त इजाफा होगा। नई नौकरी शुरू करने, करियर बदलने या खुद का व्यवसाय शुरू करने के लिए यह समय अनुकूल है। सामाजिक और कार्यस्थल पर आपकी छवि मजबूत होगी। वैवाहिक जीवन में भी स्थिरता और मजबूत रिश्ते बनने के योग हैं। लंबे समय से अटके हुए काम और प्रोजेक्ट इस दौरान गति पकड़ सकते हैं।

    धनु राशि

    धनु राशि वालों के लिए यह युति तीसरे भाव को प्रभावित करेगी, जो साहस, पराक्रम और संचार का भाव होता है। इस दौरान जोखिम लेने की क्षमता बढ़ेगी और आप आत्मविश्वास के साथ नए कदम उठा पाएंगे। मीडिया, कम्युनिकेशन, मार्केटिंग, सेल्स, लेखन और डिजिटल क्षेत्र से जुड़े लोगों को विशेष लाभ मिल सकता है। नए अनुबंध, छोटी यात्राएं और नेटवर्किंग के जरिए आर्थिक लाभ के संकेत हैं। भाई-बहनों से सहयोग भी प्राप्त हो सकता है। कुल मिलाकर सूर्य–मंगल की यह युति कई राशियों के लिए आत्मबल, सफलता और सम्मान का मार्ग खोलने वाली है। सही दिशा में प्रयास करने से इस शुभ योग का पूरा लाभ उठाया जा सकता है।

  • देश का अनोखा मंदिर, जहां शिव नहीं बल्कि नंदी के नाम से होती है पूजा, रहस्य से भरा है यह धाम

    देश का अनोखा मंदिर, जहां शिव नहीं बल्कि नंदी के नाम से होती है पूजा, रहस्य से भरा है यह धाम


    नई दिल्ली । भारत में भगवान शिव के असंख्य मंदिर हैं, लेकिन कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु में स्थित एक ऐसा अनोखा मंदिर भी है, जो शिव के नाम से नहीं बल्कि उनके प्रिय भक्त, वाहन और गण नंदी के नाम से जाना जाता है। शिव और नंदी को एक-दूसरे के बिना अधूरा माना जाता है, लेकिन श्री दक्षिणामुख नंदी तीर्थ कल्याणी क्षेत्र देश का ऐसा दुर्लभ स्थल है, जहां नंदी स्वयं शिवलिंग का लगातार अभिषेक करते दिखाई देते हैं। यही कारण है कि यह मंदिर श्रद्धा के साथ-साथ अपने रहस्य के कारण भी भक्तों और पर्यटकों के बीच आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।

    यह पवित्र मंदिर बेंगलुरु के मल्लेश्वरम लेआउट क्षेत्र में स्थित है और इसे नंदीश्वर तीर्थ, बसवा तीर्थ या स्थानीय भाषा में मल्लेश्वरम नंदी गुड़ी भी कहा जाता है। करीब 400 साल पुराने इस मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहां नंदी की विशाल मूर्ति के मुख से लगातार जलधारा बहती रहती है, जो सीधे शिवलिंग का अभिषेक करती है। आश्चर्य की बात यह है कि आज तक कोई यह पता नहीं लगा सका है कि यह जलधारा आखिर कहां से आती है। वैज्ञानिक और धार्मिक दोनों ही दृष्टि से यह मंदिर एक रहस्य बना हुआ है।

    इतिहास की बात करें तो इस मंदिर का दोबारा प्रकट होना भी किसी चमत्कार से कम नहीं माना जाता। वर्ष 1997 में जब इस क्षेत्र में जमीन की खुदाई का काम चल रहा था, तब यह प्राचीन मंदिर फिर से सामने आया। अन्य दक्षिण भारतीय मंदिरों की तरह यहां कोई भव्य गोपुरम नहीं है और आकार में भी यह मंदिर अपेक्षाकृत छोटा है, लेकिन इसकी आध्यात्मिक महत्ता और रहस्यमयी स्वरूप इसे विशिष्ट बनाता है। नंदी के मुख से निरंतर होते शिवाभिषेक को देखकर भक्तों की आस्था और भी गहरी हो जाती है।

    इस मंदिर की स्थापना को लेकर एक लोकप्रिय दंतकथा भी प्रचलित है। कहा जाता है कि प्राचीन काल में इस क्षेत्र में मूंगफली की खेती हुआ करती थी। किसानों को बार-बार एक बड़ी समस्या का सामना करना पड़ता था। हर पूर्णिमा की रात एक सांड खेतों में घुस आता और पूरी फसल को नष्ट कर देता। परेशान होकर एक रात सभी किसानों ने उस सांड को पकड़ने का फैसला किया। वे उसका पीछा करते हुए एक पहाड़ी तक पहुंचे, लेकिन वहां पहुंचते ही सांड अचानक गायब हो गया। उसकी जगह उन्हें नंदी की एक मूर्ति दिखाई दी, जिसे कन्नड़ भाषा में बसवा कहा जाता है।

    किसानों ने इसे भगवान शिव के गण नंदी का संकेत मानते हुए उनके क्रोध को शांत करने के लिए उसी स्थान पर मंदिर का निर्माण करवा दिया। मान्यता है कि मंदिर बनने के बाद सांड ने खेतों को नुकसान पहुंचाना बंद कर दिया। तभी से यहां हर साल उत्सव मनाया जाता है और किसान अपनी फसल का पहला हिस्सा नंदी को अर्पित करते हैं। बताया जाता है कि मंदिर में स्थापित नंदी की मूर्ति दुनिया की सबसे बड़ी नंदी मूर्तियों में से एक है। आज यह मंदिर न सिर्फ धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि अपनी अनोखी परंपरा और रहस्यमयी जलधारा के कारण देश के सबसे विशिष्ट और चमत्कारी मंदिरों में गिना जाता है।

  • Shadashtak Yog 2026: फरवरी से खुलेगा किस्मत का रास्ता, ‘डबल षडाष्टक योग’ से 4 राशियों को करियर और धन में बड़ा लाभ

    Shadashtak Yog 2026: फरवरी से खुलेगा किस्मत का रास्ता, ‘डबल षडाष्टक योग’ से 4 राशियों को करियर और धन में बड़ा लाभ


    नई दिल्ली । ज्योतिषीय दृष्टि से जनवरी 2026 का अंतिम दिन बेहद खास माना जा रहा है। 31 जनवरी 2026 को बुध और शुक्र ग्रह एक साथ धनिष्ठा नक्षत्र में गोचर करेंगे। इसी दिन ये दोनों शुभ ग्रह देवगुरु बृहस्पति के साथ 150 डिग्री की कोणीय स्थिति बनाते हुए षडाष्टक योग का निर्माण करेंगे। खास बात यह है कि एक ही दिन बुध-गुरु और शुक्र-गुरु के बीच यह संयोग बनने से डबल षडाष्टक योग बन रहा है, जिसे ज्योतिष में दुर्लभ और प्रभावशाली माना जाता है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, 31 जनवरी को सुबह 2:26 बजे से बुध और गुरु के बीच पहला षडाष्टक योग सक्रिय होगा जबकि दोपहर 3:07 बजे से शुक्र और गुरु के बीच दूसरा षडाष्टक योग प्रभाव में आएगा। आम तौर पर षडाष्टक योग को संघर्ष और चुनौतियों से जोड़कर देखा जाता है, लेकिन जब इसमें बुध और शुक्र जैसे शुभ ग्रह शामिल हों और वह भी धनिष्ठा जैसे सक्रिय नक्षत्र में तो इसके परिणाम कई राशियों के लिए सकारात्मक रूप ले लेते हैं। माना जा रहा है कि फरवरी 2026 की शुरुआत से ही इसके असर दिखाई देने लगेंगे।

    मेष राशि के जातकों के लिए यह डबल षडाष्टक योग मेहनत का पूरा फल दिलाने वाला साबित हो सकता है। लंबे समय से अटके कार्यों में गति आएगी और करियर में नए अवसर मिल सकते हैं। नौकरीपेशा लोगों को नई जिम्मेदारियां या पदोन्नति के संकेत मिल सकते हैं, वहीं व्यापारियों के लिए निवेश से जुड़े फैसले लाभदायक रहेंगे। सामाजिक मान-सम्मान बढ़ेगा और पारिवारिक वातावरण सहयोगपूर्ण बना रहेगा।सिंह राशि के लिए यह योग आत्मविश्वास और नेतृत्व क्षमता को मजबूत करने वाला माना जा रहा है। कार्यक्षेत्र में आपकी क्षमताओं को पहचान मिलेगी और उच्च अधिकारियों का सहयोग प्राप्त हो सकता है। प्रमोशन या पद परिवर्तन के योग बन रहे हैं। आर्थिक स्थिति में सुधार के संकेत हैं, विशेष रूप से संपत्ति या दीर्घकालीन निवेश से लाभ मिल सकता है। इस दौरान की गई यात्राएं भविष्य में फायदेमंद संपर्क भी दिला सकती हैं।

    धनु राशि वालों के लिए फरवरी 2026 का महीना प्रगति और विस्तार का संकेत दे रहा है। शिक्षा, करियर और व्यापार से जुड़े मामलों में सकारात्मक परिणाम मिल सकते हैं। रुके हुए कार्य पूरे होंगे और आर्थिक संतुलन बेहतर होता दिखाई देगा। मानसिक रूप से राहत मिलेगी और आत्मविश्वास में वृद्धि होगी, जिससे बड़े फैसले लेने की क्षमता मजबूत होगी।मकर राशि के जातकों के लिए यह डबल षडाष्टक योग करियर और धन दोनों क्षेत्रों में नए अवसर लेकर आएगा। लंबे समय से चल रहे प्रोजेक्ट्स में सफलता मिलने की संभावना है। नए व्यावसायिक संपर्क और यात्राएं भविष्य में लाभ का आधार बन सकती हैं। पारिवारिक जिम्मेदारियों में सहयोग मिलेगा और निजी जीवन में स्थिरता बनी रहेगी।यह सभी फल ज्योतिषीय गणनाओं और मान्यताओं पर आधारित हैं। किसी भी बड़े आर्थिक, करियर या व्यक्तिगत निर्णय से पहले विशेषज्ञ की सलाह लेना हमेशा उचित माना जाता है।

  • बुधवार को भूलकर भी न करें ये गलतियां, वरना कमजोर हो सकता है बुध ग्रह; जानें बचाव के उपाय

    बुधवार को भूलकर भी न करें ये गलतियां, वरना कमजोर हो सकता है बुध ग्रह; जानें बचाव के उपाय


    नई दिल्ली । ज्योतिष शास्त्र के अनुसार सप्ताह का प्रत्येक दिन किसी न किसी ग्रह से जुड़ा होता है और उसी के अनुसार उस दिन के नियम और सावधानियां भी निर्धारित की गई हैं। बुधवार का दिन बुध ग्रह और भगवान गणेश को समर्पित माना जाता है। बुध ग्रह को बुद्धि, वाणी, शिक्षा, व्यापार, नौकरी और आर्थिक निर्णयों का कारक कहा गया है। ऐसे में यदि बुधवार के दिन कुछ विशेष नियमों का पालन न किया जाए, तो इसका सीधा प्रभाव व्यक्ति के करियर, धन और मानसिक संतुलन पर पड़ सकता है।

    मान्यताओं के अनुसार बुधवार को धन का लेन-देन करना अशुभ माना जाता है। इस दिन उधार देना या लेना, नए निवेश करना या किसी साझेदारी में प्रवेश करना आर्थिक नुकसान का कारण बन सकता है। कहा जाता है कि बुधवार को किया गया गलत आर्थिक निर्णय धन फंसने या हानि का कारण बनता है। इसलिए इस दिन बड़े आर्थिक सौदों से बचना ही बेहतर माना गया है। इसके अलावा बुधवार को घर की महिलाओं का अपमान करना भी बुध दोष को बढ़ाता है। बेटी, बहन, बुआ या मौसी जैसे रिश्तों के साथ कठोर व्यवहार या अनादर पारिवारिक अशांति के साथ-साथ आर्थिक और मानसिक परेशानियों को जन्म दे सकता है। बुध ग्रह वाणी और व्यवहार से जुड़ा होता है, इसलिए इस दिन रिश्तों में मधुरता बनाए रखना अत्यंत आवश्यक माना गया है।

    वाणी पर नियंत्रण रखना बुधवार का सबसे महत्वपूर्ण नियम बताया गया है। झूठ बोलना, कटु शब्दों का प्रयोग करना, बेवजह बहस या विवाद में उलझना बुध को कमजोर करता है। शांत, संयमित और सकारात्मक भाषा का प्रयोग करने से बुध ग्रह मजबूत होता है और व्यक्ति की संवाद क्षमता में सुधार आता है। शास्त्रीय मान्यताओं के अनुसार बुधवार को बाल और नाखून काटने से भी बचना चाहिए। कहा जाता है कि ऐसा करने से मानसिक अस्थिरता और निर्णय क्षमता कमजोर हो सकती है। इसी तरह इस दिन काले रंग के कपड़े पहनना भी अशुभ माना गया है। इसके स्थान पर हरे रंग के वस्त्र पहनना शुभ माना जाता है, क्योंकि हरा रंग बुध ग्रह का प्रतिनिधि रंग है।

    बुधवार को उत्तर दिशा की यात्रा को दिशाशूल माना गया है। यदि यात्रा अत्यंत आवश्यक हो, तो धनिया खाकर या साथ लेकर निकलने की परंपरा बताई गई है। वहीं इस दिन दवाइयां, बर्तन, साबुन, तेल, दूध से बनी चीजें और कुछ हरी सब्जियों की खरीदारी से भी बचने की सलाह दी जाती है। भूमि से जुड़े कार्य या नए व्यापार की शुरुआत भी बुधवार को टालना बेहतर माना गया है। यदि बुध ग्रह को मजबूत करना तो बुधवार के दिन भगवान गणेश की पूजा करें और ॐ गं गणपतये नमः मंत्र का जप करें। मूंग दाल धनिया जैसी हरी वस्तुओं का दान या उपयोग भी शुभ फल देता है। मान्यता है कि इन छोटे-छोटे नियमों का पालन करने से जीवन में सकारात्मक बदलाव आते हैं और शिक्षा, व्यापार व करियर में स्थिरता और प्रगति मिलती है।

  • Basant Panchami 2026: बसंत पंचमी पर ना करें ये गलतियां, सरस्वती मां को जरूर लगाएं ये भोग

    Basant Panchami 2026: बसंत पंचमी पर ना करें ये गलतियां, सरस्वती मां को जरूर लगाएं ये भोग

    नई दिल्ली।  हिंदू धर्म में बसंत पंचमी का त्योहार मां सरस्वती को समर्पित है। इस खास दिन पर मां को पूजा जता है। बता दें कि माघ महीने के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को ही इसे मनाते हैं। इस साल बसंत पचंमी 23 जनवरी के दिन मनाई जा रही है। शुक्रवार की वजह से इस बार बसंत पंचमी और भी खास होने वाली है। इस खास दिन पर अगर विधिवत रूप से मां सरस्वती की पूजा की गई तो वो ज्ञान और कला का वरदान देती हैं। इस दिन कुछ चीजों को करने की मनाही होती है। साथ ही बसंत पंचमी पर मां सरस्वती का भोग भी काफी मायने रखता है। ऐसे में इन चीजों के बारे में नीचे विस्तार से समझिए।

    बसंत पंचमी पर ना करें ये गलतियां
    बसंत पंचमी के दिन कुछ चीजों पर विशेष रूप से ध्यान देना चाहिए। इस दिन से ही बसंत ऋतु की शुरुआत होती है। ऐसे में इस खास दिन पर कोई भी पेड़-पौधा कांटना-छाटना नहीं चाहिए। इस दिन फसल काटने को बेहद ही अशुभ माना जाता है। इस दिन लहसुन-प्याज हर तरह के तामसिक खाने से दूर रहना चाहिए। बसंत पंचमी पर सात्विक भोजन करना ही सही माना जाता है। कोशिश करें कि इस दिन मुंह से कुछ भी खराब ना कहें। इस दिन किसी से मत झगड़िए। इस दिन ध्यान रखें कि नहाने से पहले कुछ भी नहीं खाना है।

    मां सरस्वती को जरूर लगाएं ये भोग
    बसंच पंचमी के दिन मां सरस्वती का भोग ध्यान से लगाना चाहिए। इस खास दिन पर आप सरस्वती मां को पीले रंग के पकवान भोग में लगाना शुभ माना जाता है। भोग में घर का बना हुआ शुद्ध मालपुआ अर्पित कर सकते हैं। साथ में केसर खीर और बेसन लड्डू चढ़ाना भी काफी शुभ माना जाता है। मान्यता है कि अगर सच्चे मन से मां को भोग लगाया जाए तो वो अपनी कृपा जरूर बरसाती हैं। पूजा के बाद भोग का वितरण जरूर करें।

  • आज आपके जीवन में क्या-क्या परिवर्तन हो सकता है, जानने के लिए पढ़ें आज का भविष्यफल।

    आज आपके जीवन में क्या-क्या परिवर्तन हो सकता है, जानने के लिए पढ़ें आज का भविष्यफल।


    आज आपके जीवन में क्या-क्या परिवर्तन हो सकता है, आज आपके सितारे क्या कहते हैं, यह जानने के लिए पढ़ें आज का भविष्यफल।


    मेष राशि :- पूर्व नियोजित कार्यक्रम सरलता से संपन्न हो जाएंगे। शुभ कार्यों की प्रवृत्ति बनेगी और शुभ समाचार भी मिलेंगे। किसी से कहा सुनी न हो यही ध्यान रहें। अपना कार्य दूसरों के सहयोग से बना लेंगे। लाभकारी गतिविधियों में सक्रियता रहेगी। कुछ एकाग्रता की प्रवृत्ति बनेगी। पुराने मित्र मिलेगें। शुभांक-4-6-7

    वृष राशि :- अपने संघर्ष में स्वयं को अकेला महसूस करेंगे। विशेष परिश्रम से अभिष्ट कार्य सिद्घ होंगे। व्यर्थ प्रपंच में समय नहीं गंवाकर अपने काम पर ध्यान दीजिए। बनते हुए कार्यों में बाधा आएगी। विरोधियों के सक्रिय होने की संभावना है। शुभ कार्यों में अड़चनें और परिवार के बुजुर्ग-जनों से मतभेद रहेगा। शुभांक-3-5-7

    मिथुन राशि :- आर्थिक उन्नति के मार्ग प्रशस्त होंगे। रोजगार में तरक्की मिलेगी। जमीन जायदाद का लाभ भी हो सकता है। आवास, मकान तथा वाहन की सुविधाएं मिलेंगी। कर्ज तथा रोगों से मुक्ति भी संभव है। शत्रुओं की पराजय होगी। कुछ आर्थिक चिंताएं भी कम होगी। नियोजित धन से लाभ होने लगेगा। शुभांक-2-4-6

    कर्क राशि :- उच्चमनोबल रखकर कार्य करें, सफल होंगे। समाज में मान-सम्मान बढ़ेगा। आय-व्यय की स्थिति समान रहेगी। शैक्षणिक कार्य आसानी से पूरे होते रहेंगे। व्यापार व व्यवसाय में ध्यान देने से सफलता मिलेगी। मेल-मिलाप से काम बनाने की कोशिश लाभ देगी। पैतृक सम्पत्ति से लाभ। शुभांक-1-3-5

    सिंह राशि :- यात्रा का दूरगामी परिणाम मिल जाएगा। कामकाज में आ रही बाधा को दूर कर लेंगे। सुविधा और समन्वय बना रहने से कामकाज में प्रगति बनेगी। लाभदायक कार्यों की चेष्टाएं प्रबल होंगी। बुद्घितत्व की सक्रियता से अल्प लाभ का हर्ष होगा। कुछ महत्त्वपूर्ण कार्य बनाने के लिए भाग-दौड़ रहेगी। शुभांक-4-6-8

    कन्या राशि :- घर-परिवार में प्रसन्नता व सहयोग का वातावरण बनेगा। रुका हुआ लाभ आज प्राप्त हो सकता है। मानसिक एवं शारीरिक शिथिलता पैदा होगी। व्ययाधिक्य का अवसर आ सकता है। कामकाज की अधिकता रहेगी। लाभ भी होगा और पुराने मित्रों का समागम भी। मेहमानों का आगमन होगा। शुभांक-5-7-8

    तुला राशि :– संतान की प्रगति से संतोष होगा। व्यर्थ की भाग-दौड़ में समय व्यतीत होगा। श्रम अधिक करना पड़ सकता हैं। वरिष्ठजनों से मतभेद उभर सकते हैं। समय नकारात्मक परिणाम देने वाला बन रहा है। कलह विवाद का डर बना रहेगा। पारिवारिक तनाव, अलगाव का सामना करना पड़ सकता है। शुभांक-5-7-9

    वृश्चिक राशि :– अपना कार्य दूसरों के सहयोग से बना लेंगे। प्रतिष्ठा बढ़ाने वाले सामाजिक कार्य संपन्न होंगे। आमोद-प्रमोद का दिन होगा और व्यावसायिक प्रगति भी होगी। ज्ञान-विज्ञान की वृद्घि होगी और सज्जनों का साथ भी रहेगा। कुछ कार्य भी सिद्घ होंगे। किसी अपने की सलाह उपयोगी सिद्घ होगी। शुभांक-3-5-7

    धनु राशि :- कार्यक्षेत्र में विवाद बढ़ेंगे। परिवार में किसी का स्वास्थ्य खराब हो सकता है। मानसिक तनाव में बढ़ोतरी होगी। किसी का अभद्र व्यवहार खिन्नता व तनाव बढ़ायेगा। कार्यक्षेत्र में आगे बढ़ने में रुकावट का एहसास होगा। मनोरथ सिद्घि का योग है। विरोधियों के सक्रिय होने की संभावना है। शुभांक-1-4-8

    मकर राशि :– आगे बढ़ने के अवसर लाभकारी सिद्घ हो रहे हैं। कोई प्रिय वस्तु अथवा नवीन वस्त्राभूषण प्राप्त होंगे। मान-सम्मान बढ़ेगा। धार्मिक आस्थाएं फलीभूत होंगी। सुख-आनंद कारक समय है। लाभदायक कार्यों की चेष्टाएं प्रबल होंगी। आय के अच्छे योग बनेंगे। संतान की उन्नति के योग हैं। शुभांक-3-5-7

    कुंभ राशि :– बुद्घितत्व की सक्रियता से अल्प लाभ का हर्ष होगा। कुछ महत्वपूर्ण कार्य बनाने के लिए भाग-दौड़ रहेगी। सुखद समय की अनुभूतियां प्रबल होंगी। मनोविनोद बढ़ेगे। व्ययाधिक्य का अवसर आ सकता है। शुभ कार्यों का लाभदायक परिणाम होगा। कामकाज की अधिकता रहेगी। संतान की उन्नति के योग हैं। शुभांक-1-4-6

    मीन राशि :- व्यर्थ की भाग-दौड़ से यदि बचा ही जाए तो अच्छा है। जरा-सी लापरवाही आपको परेशानी में डाल सकती है। मानसिक व्यथा व संतान के कारण परेशानी होगी। आवेश में आना आपके हित में नही होगा इसलिए व्यवहार व वाणी पर नियंत्रण रखें। पुरानी गलती का पश्चाताप होगा। शुभांक-2-4-6
  • Vijayasan Mata Mandir: दर्शन मात्र से दूर होते हैं कष्ट, गुप्त नवरात्र में उमड़ता है आस्था का सैलाब

    Vijayasan Mata Mandir: दर्शन मात्र से दूर होते हैं कष्ट, गुप्त नवरात्र में उमड़ता है आस्था का सैलाब


    नई दिल्ली । मध्य प्रदेश के सीहोर जिले में स्थित विजयासन माता मंदिरगुप्त नवरात्र के दौरान आस्था और भक्ति का अद्भुत केंद्र बन जाता है। माघ माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से नवमी तक मनाए जाने वाले गुप्त नवरात्र में यहां श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस पावन काल में मां दुर्गा के स्वरूप विजयासन माता के दर्शन करने मात्र से ही भक्तों के जीवन से कष्ट, बाधाएं और संकट दूर हो जाते हैं। गुप्त नवरात्र का विशेष महत्व साधना और तंत्र-उपासना से जुड़ा माना जाता है। इस दौरान दस महाविद्याओं की पूजा का विधान है, जिसमें साधक विशेष व्रत, अनुष्ठान और मंत्र साधना के माध्यम से सिद्धि प्राप्त करने का प्रयास करते हैं। विजयासन माता मंदिर में इन नौ दिनों तक विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। भक्तों का विश्वास है कि इस अवधि में मां की आराधना करने से शत्रु भय समाप्त होता है, मानसिक शांति मिलती है और जीवन में हर क्षेत्र में सफलता प्राप्त होती है।

    गुप्त नवरात्र के अवसर पर मंदिर परिसर पूरी तरह भक्तिमय वातावरण में डूबा रहता है। सुबह से देर रात तक मां के जयकारों से पहाड़ी गूंजती रहती है। नवरात्र के दौरान यहां धार्मिक अनुष्ठानों के साथ-साथ मेले का भी आयोजन होता है, जिसमें आसपास के जिलों ही नहीं, बल्कि दूर-दराज से श्रद्धालु माता के दर्शन के लिए पहुंचते हैं। कई भक्त मनोकामना पूरी होने पर विशेष पूजा, चुनरी अर्पण और प्रसाद वितरण भी करते हैं। विजयासन माता की महिमा को लेकर स्थानीय लोगों में गहरी आस्था है। मान्यता है कि मां अपने भक्तों पर विशेष कृपा बरसाती हैं और हर कार्य में विजय प्रदान करती हैं। यही कारण है कि परीक्षा, मुकदमे, नौकरी, व्यापार या जीवन की किसी भी कठिन परिस्थिति में फंसे श्रद्धालु यहां आकर माता से प्रार्थना करते हैं। कहा जाता है कि सच्चे मन से की गई आराधना कभी निष्फल नहीं जाती।

    विजयासन माता मंदिर का स्थान भी इसकी विशेषता को और बढ़ाता है। यह मंदिर सीहोर जिले के सलकनपुर गांव में एक ऊंची पहाड़ी की चोटी पर स्थित है। माता के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं को सैकड़ों सीढ़ियां चढ़नी पड़ती हैं। नवरात्र के दौरान इन सीढ़ियों पर भक्तों की लंबी कतारें देखने को मिलती हैं, लेकिन मां के दर्शन की आस्था हर थकान को भुला देती है। यदि पहुंचने की बात करें तो श्रद्धालु सड़क और रेल मार्ग से आसानी से सीहोर पहुंच सकते हैं। सीहोर रेलवे स्टेशन से सलकनपुर गांव सड़क मार्ग से जुड़ा हुआ है। निकटतम हवाई अड्डा भोपाल है, जहां से सड़क मार्ग द्वारा मंदिर तक पहुंचा जा सकता है। इंदौर मार्ग से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए भी यह स्थान सुगम है। कुल मिलाकर, विजयासन माता मंदिर न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि यह विश्वास का प्रतीक भी है, जहां भक्त मां की शरण में जाकर अपने जीवन के सभी कष्टों से मुक्ति की कामना करते हैं।

  • Ratha Saptami 2026: 25 जनवरी को मनाई जाएगी रथ सप्तमी, सूर्य पूजा और स्नान का विशेष महत्व

    Ratha Saptami 2026: 25 जनवरी को मनाई जाएगी रथ सप्तमी, सूर्य पूजा और स्नान का विशेष महत्व


    नई दिल्ली। हिंदू धर्म में सूर्य देव को जीवनऊर्जा और आरोग्य का आधार माना गया है और इन्हीं सूर्य नारायण को समर्पित प्रमुख पर्वों में रथ सप्तमी का विशेष स्थान है। हिंदू पंचांग के अनुसार रथ सप्तमी 2026 इस वर्ष 25 जनवरीरविवार को मनाई जाएगी। यह पर्व माघ मास के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को आता है और इसे सूर्य देव के अवतरण दिवस के रूप में जाना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इसी दिन सूर्य की पहली किरण पृथ्वी पर पड़ी थीइसलिए इसे सूर्य जयंती भी कहा जाता है।

    पंचांग के अनुसार सप्तमी तिथि की शुरुआत 24 जनवरी 2026 को रात 12 बजकर 40 मिनट से होगी और इसका समापन 25 जनवरी को रात 11 बजकर 11 मिनट पर होगा। उदया तिथि को मान्यता दिए जाने के कारण रथ सप्तमी का व्रतस्नान और पूजा 25 जनवरी को ही की जाएगी। इस वर्ष यह पर्व रविवार को पड़ रहा हैजो स्वयं सूर्य देव को समर्पित दिन माना जाता है। इसी वजह से इस बार रथ सप्तमी का महत्व और भी बढ़ गया है।

    धार्मिक ग्रंथोंमत्स्य पुराणपद्म पुराण और भविष्य पुराणमें रथ सप्तमी के पुण्य फल का विस्तार से उल्लेख मिलता है। मान्यता है कि इस दिन विधिपूर्वक स्नानदान और सूर्य देव की आराधना करने से सात जन्मों के पाप नष्ट हो जाते हैं। साथ ही व्यक्ति को आरोग्यदीर्घायुतेज और सकारात्मक ऊर्जा की प्राप्ति होती है। कई स्थानों पर इस दिन को आरोग्य सप्तमी के रूप में भी मनाया जाता है।ज्योतिषाचार्यों के अनुसार रथ सप्तमी के दिन ब्रह्म मुहूर्त में स्नान करना अत्यंत शुभ माना जाता है। इस वर्ष स्नान का श्रेष्ठ समय सुबह 5 बजकर 32 मिनट से 7 बजकर 12 मिनट तक रहेगा। वहीं सूर्य देव को अर्घ्य देनेपूजा और दान के लिए सुबह 11 बजकर 13 मिनट से दोपहर 12 बजकर 33 मिनट तक का समय विशेष फलदायी बताया गया है।

    परंपरा के अनुसार श्रद्धालु सूर्योदय के बाद पवित्र जल से स्नान कर तांबे के लोटे में जललाल फूल और अक्षत मिलाकर सूर्य देव को अर्घ्य देते हैं। कई क्षेत्रों में आक और बेर के पत्तों को सिर पर रखकर स्नान करने की परंपरा हैजिसे रोग नाशक माना जाता है। इसके बाद सूर्य मंत्रों का जापव्रत का संकल्प और दान किया जाता है। मंदिरों और तीर्थ स्थलों पर विशेष सूर्य पूजाहवन और सामूहिक अर्घ्यदान के आयोजन होते हैं।धार्मिक विशेषज्ञों का कहना है कि सूर्य उपासना केवल आध्यात्मिक नहीं बल्कि स्वास्थ्य से भी जुड़ी हुई है। रथ सप्तमी पर सूर्य पूजा को मानसिक शुद्धिआत्मबल और सकारात्मक दृष्टिकोण से जोड़ा जाता है। यही कारण है कि आज भी यह पर्व श्रद्धाआस्था और वैज्ञानिक सोच का सुंदर संगम माना जाता है।

  • मंगलवार की हनुमान पूजा का विशेष महत्व: आसान उपायों से प्रसन्न होते हैं बजरंगबली

    मंगलवार की हनुमान पूजा का विशेष महत्व: आसान उपायों से प्रसन्न होते हैं बजरंगबली


    नई दिल्ली। हिंदू धर्म में सप्ताह का प्रत्येक दिन किसी न किसी देवी-देवता को समर्पित माना गया है लेकिन मंगलवार का दिन विशेष रूप से भगवान हनुमान की आराधना के लिए जाना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन विधि-विधान और श्रद्धा के साथ की गई पूजा से जीवन की अनेक परेशानियों से राहत मिलती है। यही कारण है कि देशभर में लाखों श्रद्धालु मंगलवार को बजरंगबली की विशेष पूजा करते हैं और इसे संकटों से मुक्ति का मार्ग मानते हैं।

    धार्मिक विद्वानों के अनुसार भगवान हनुमान शक्ति साहस निष्ठा और अटूट भक्ति के प्रतीक हैं। मान्यता है कि जो व्यक्ति मंगलवार के दिन श्रीराम नाम का स्मरण करता है और हनुमान जी की सच्चे मन से आराधना करता है उसकी रक्षा स्वयं पवनपुत्र करते हैं। ऐसी आस्था है कि इससे भय शत्रु बाधा और मानसिक तनाव धीरे-धीरे कम होने लगता है।मंगलवार को हनुमान जी को नारंगी या लाल रंग का सिंदूर अर्पित करना विशेष शुभ माना जाता है। कई श्रद्धालु चमेली के तेल में सिंदूर मिलाकर हनुमान जी को चढ़ाते हैं और दीपक जलाते हैं। इसके साथ ही चमेली के फूल अर्पित करने की परंपरा भी प्रचलित है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इन उपायों से घर में सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है और वातावरण शांत रहता है।

    कुछ क्षेत्रों में मंगलवार को हनुमान जी को मीठा पान अर्पित करने की भी परंपरा है। इसमें चूना या तंबाकू नहीं डाला जाता। मान्यता है कि ऐसा करने से भय नकारात्मक विचार और शत्रु दोष कम होते हैं। इसके अलावा मंगलवार को लाल रंग की वस्तुओं का दान-जैसे लाल कपड़ा लाल फूल तांबे के बर्तन या बादाम-को मंगल ग्रह की शांति और मजबूती से जोड़ा जाता है।धार्मिक ग्रंथों में उल्लेख है कि हनुमान जी श्रीराम के परम भक्त हैं। इसलिए मंगलवार को राम नाम का जप हनुमान चालीसा का पाठ और मंदिर जाकर दर्शन-परिक्रमा करने का विशेष महत्व बताया गया है। कई श्रद्धालु इस दिन मंदिर परिसर में बंदरों को फल या चना खिलाते हैं जिसे सेवा और करुणा का प्रतीक माना जाता है।

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मंगलवार को कुछ बातों से परहेज भी जरूरी माना गया है। इस दिन मांस-मदिरा का सेवन न करने क्रोध से बचने असत्य बोलने और किसी का अपमान न करने की सलाह दी जाती है। कहा जाता है कि संयमित आचरण से पूजा का प्रभाव और फल दोनों बढ़ जाते हैं।
    हालांकि धर्म और ज्योतिष विशेषज्ञ यह भी स्पष्ट करते हैं कि ये सभी उपाय आस्था और परंपरा पर आधारित हैं। इन्हें जीवन की समस्याओं का एकमात्र समाधान नहीं माना जाना चाहिए। इसके बावजूद मंगलवार की हनुमान पूजा को लोग मानसिक शांति आत्मविश्वास और सकारात्मक सोच से जोड़कर देखते हैं जो आज के तनावपूर्ण जीवन में एक बड़ा सहारा बनती है।