Category: Religious Astrology

  • पांच फरवरी से आरंभ होंगे मांगलिक कार्यक्रम, बजेंगी शहनाईयां

    पांच फरवरी से आरंभ होंगे मांगलिक कार्यक्रम, बजेंगी शहनाईयां

    ग्वालियर । गत 14 जनवरी को सूर्य के मकर राशि में प्रवेश करने के साथ खरमास की समाप्ति हो गई है। अब आगामी 5 फरवरी से मांगलिक कार्य आरंभ हो जाएंगे और एक बार फिर से शहनाईयां गूंज उठेंगी।

    ज्योतिषाचार्य डॉ. सतीश सोनी ने बताया कि मकर संक्रांति के बाद शुभ और मांगलिक कार्य शुरू हो जाते है, लेकिन शुक्र के अस्त होने के कारण शादियों के मुहूर्त फरवरी के शुरुआती हफ्तों से शुरू होंगे, मुख्य रूप से 5 फरवरी से मांगलिक कार्यों का दौर शुरू होगा।

    उन्होंने बताया कि 23 जनवरी को बसंत पंचमी रहेगा अबूझ मुहूर्त: वसंत पंचमी का दिन शुभ होता है। इस दिन ज्ञान की देवी सरस्वती की पूजा करते हैं। वसंत पंचमी पर पूरे दिन अबूझ मुहूर्त रहता है, जिसकी वजह से इस दिन लोग विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन, उपनयन, प्रॉपर्टी खरीद आदि करते हैं। इस दिन इन कार्यों को करने के लिए पंचांग देखने की जरूरत नहीं होती है। जो लोग अन्य मुहूर्त पर अपना शुभ कार्य नहीं कर पाते हैं, वे वसंत पंचमी पर अबूझ मुहूर्त में कर लेते हैं। लेकिन इस बार आप वसंत पंचमी पर कोई शुभ कार्य करने की सोच रहे हैं तो बसंत पंचमी के दिन कर सकते है।

  • आज आपके सितारे क्या कहते हैं, यह जानने के लिए पढ़ें रविवार का राशिफल

    आज आपके सितारे क्या कहते हैं, यह जानने के लिए पढ़ें रविवार का राशिफल



    मेष राशि :- किसी से कहासुनी न हो यह ध्यान रहे। लाभकारी गतिविधियों में सक्रियता रहेगी। कुछ एकाग्रता की प्रवृत्ति बनेगी। कामकाज की व्यस्तता से सुख-आराम प्रभावित होगा। धर्म-कर्म के प्रति रुचि जागृत होगी। श्रेष्ठजनों की सहानुभूतियां होगी। भाई-बहनों का प्रेम बढ़ेगा। शुभांक-5-8-9


    वृष राशि :- अपने हितैषी समझे जाने वाले ही पीठ पीछे नुकसान पहुंचाने की कोशिश करेंगे। कारोबारी यात्रा को फिलहाल टालें। परिवारजनो के सहयोग व समन्वय से काम बनाना आसान रहेेगा। अपने काम आसानी से बनते चले जाएंगे। समय नकारात्मक परिणाम देने वाला बन रहा है। शुभांक-5-6-7

    मिथुन राशि :- परिश्रम प्रयास से काम बनाने की कोशिश लाभ देगी। प्रपंच में ना पड़कर काम पर ध्यान दीजिए। कल का परिश्रम आज लाभ देगा। आय-व्यय की स्थिति समान रहेगी आर्थिक लाभ हेतु किये गए कार्यों का तत्काल प्रतिफल मिलेगा। एकाकी वृत्ति त्यागें। आय-व्यय की स्थिति समान रहेगी। शुभांक-1-2-5

    कर्क राशि :- स्वास्थ्य उत्तम रहेगा। व्यापार व व्यवसाय में ध्यान देने से सफलता मिलेगी। अपने काम में सुविधा मिल जाने से प्रगति होगी। यात्रा का दूरगामी परिणाम मिल जाएगा। कामकाज में आ रही बाधा को दूर कर लेंगे। सुविधा और समन्वय बना रहने से कामकाज में प्रगति बनेगी। शुभांक-1-8-9

    सिंह राशि :- लाभदायक कार्यों की चेष्टाएं प्रबल होंगी। बुद्घितत्व की सक्रियता से अल्प लाभ का हर्ष होगा। कुछ महत्वपूर्ण कार्य बनाने के लिए भाग-दौड़ रहेगी। लाभकारी गतिविधियों में सक्रियता रहेगी। रुका हुआ लाभ आज प्राप्त हो सकता है। मनोरथ सिद्घि का योग है। सुख-सुविधा में वृद्घि होगी। शुभांक-5-6-8

    कन्या राशि :- स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखें। व्यापार में वृद्घि होगी। नौकरी में सहयोगियों का सहयोग प्राप्त होगा। पारिवारिक परेशानी बढ़ेगी। कुछ प्रतिकूल गोचर का क्षोभ दिन-भर रहेगा। सुबह की महत्वपूूर्ण सिद्घि के बाद दिन-भर उत्साह रहेगा। संतोष रखने से सफलता मिलेगी। शुभांक-6-8-9

    तुला राशि :- प्रसन्नता के साथ सभी जरूरी कार्य बनते नजर आएंगे। मनोरथ सिद्घि का योग है। सम्मान मिलेगा। प्रतिष्ठा बढ़ाने वाले कुछ सामाजिक कार्य संपन्न होंगे। कई प्रकार के हर्ष उल्लास के बीच मांगलिक कार्य सम्पन्न होंगे। आमोद-प्रमोद का दिन होगा और व्यावसायिक प्रगति भी होगी। शुभांक-4-5-6

    वृश्चिक राशि :- स्वास्थ्य मध्यम रहेगा। व्यापार में स्थिति नरम रहेगी। शत्रुभय, ङ्क्षचता, संतान को कष्ट, अपव्यय के कारण बनेंगे। संतोष रखने से सफलता मिलेगी। आगे बढऩे के अवसर लाभकारी सिद्घ होंगे। नौकरी में स्थिति सामान्य ही रहेगी। लेन-देन में आ रही बाधा को दूर करने के प्रयास सफल होंगे। शुभांक-5-6-9

    धनु राशि :- शैक्षणिक क्षेत्र में उदासीनता रहेगी। जीवनसाथी का परामर्श लाभदायक रहेगा। व्यापार व नौकरी में स्थिति अच्छी रहेगी। कल का परिश्रम आज लाभ देगा। कामकाज में आ रही बाधा दूर होगी। बाहरी और अंदरूनी सहयोग मिलता चला जाएगा। शुभ कार्यों का लाभदायक परिणाम होगा। शुभांक-6-7-8

    मकर राशि :- लेन-देन में आ रही बाधा को दूर करने के प्रयास सफल होंगे। धार्मिक कार्य में समय और धन व्यय होगा। कारोबारी काम में बाधा बनी रहेगी। स्वास्थ्य मध्यम रहेगा। व्यापार में स्थिति नरम रहेगी। शुभ कार्यों की प्रवृत्ति बनेगी और शुभ समाचार भी मिलेंगे। संतोष रखने से सफलता मिलेगी। शुभांक-5-6-8

    कुंभ राशि :- माता पक्ष से विशेष लाभ होगा। अपनी गतिविधियों पर पुनर्विचार करें। वैचारिक द्वन्द्व और असंतोष बना रहेगा। किसी सूचना से पूर्ण निर्णय सम्भव। सुख आरोग्य प्रभावित होगा। शुभ कार्यों की प्रवृत्ति बनेगी और शुभ समाचार भी मिलेंगे। आय-व्यय की स्थिति समान रहेगी। शुभांक-1-6-7

    मीन राशि :- प्रियजनों से समागम का अवसर मिलेगा। अवरुद्घ कार्य संपन्न हो जाएंगे। कामकाज की व्यस्तता से सुख-आराम प्रभावित होगा। धर्म-कर्म के प्रति रुचि जागृत होगी। श्रेष्ठजनों की सहानुभूतियां होगी। स्वविवेक से कार्य करे। सभा-गोष्ठियों में मान-सम्मान बढ़ेगा। माता पक्ष से विशेष लाभ होगा। शुभांक-3-5-7
  • सोमवार का राशिफल

    सोमवार का राशिफल


    मेष राशि :-सुबह-सुबह की महत्वपूूर्ण सिद्घि के बाद दिन-भर उत्साह रहेगा। किसी लाभदायक कार्य के लिए व्ययकारक स्थितियां पैदा होगी। अल्प-परिश्रम से ही लाभ होगा। कामकाज में आ रहा अवरोध दूर होकर प्रगति का रास्ता मिल जाएगा। घरेलू बहुमूल्य वस्तुओं के क्रय का योग है। शुभांक-3-5-7


    वृष राशि :-परामर्श व परिस्थिति सभी का सहयोग मिलेगा। अधिकारी वर्ग से आपकी निकटता बढ़ेगी। व्यावसायिक उपक्रम में उलटफेर की शुरूआत हो सकती है। स्थाई सम्पति के निर्माण, मरम्मत व पुर्नस्थापना पर व्ययभार बढ़ेगा। किसी की टीका-टिप्पणी से आपको परेशानी हो सकती हैं। शुभांक-2-4-5

    मिथुन राशि :-विश्वस्त लोगों के कहे अनुसार चलें। राजकीय कार्यों में सतर्कता बरतें। मान-सम्मान को ठेस लग सकती है। जोश से कम व होश में रहकर कार्य करें। नये आगंतुकों से लाभ होगा। कार्यक्षेत्र में संतोषजनक सफलता मिलेगी। परिवार के साथ मनोरांजनिक स्थल की यात्रा होगी। शुभांक-2-4-6

    कर्क राशि :-पुरानी पारिवारिक समस्याओं का समाधान होगा। परिश्रम प्रयास से काम बनाने की कोशिश लाभ देगी। व्यापार व व्यवसाय में ध्यान देने से सफलता मिलेगी। बुरी संगति से बचें। नौकरी में सावधानीपूर्वक कार्य करें। अपनों का सहयोग प्राप्त होगा। परिवार पक्ष से थोड़ी ङ्क्षचता रहेगी। शुभांक-1-3-5

    सिंह राशि :-दाम्पत्य जीवन में तनाव का वातावरण बन सकता हैं। शारीरिक सुख के लिए व्यसनों का त्याग करें। आत्मङ्क्षचतन करें। पुराने मित्र से मिलन होगा। पठन-पाठन में स्थिति कमजोर रहेगी। खान-पान में सावधानी रखें। अपने अधीनस्थ लोगों से कम सहयोग मिलेगा। भ्रातृपक्ष में विरोध होने की संभावना है। शुभांक-4-6-8

    कन्या राशि :-अच्छे कार्य के लिए रास्ते बना लेंगे। रुका हुआ पैसा वसूलने में मदद मिल जाएगी। व्यर्थ प्रपंच में समय नहीं गंवाकर अपने काम पर ध्यान दीजिए। अपने हित के काम सुबह-सबेरे निपटा लें। नियोजित कार्यक्रम सरलता से संपन्न हो जाएंगे। परिवार में कोई मांगलिक कार्य पर वार्ता होगी। शुभांक-2-3-5

    तुला राशि :-कुछ आर्थिक संकोच पैदा हो सकते हैं। समय को देखकर कार्य करना ज्यादा हितकर रहेगा। परिश्रम अधिक करना पड़ेगा तभी आप लाभ की आशा कर सकते हैं। कार्य क्षेत्र में पदोन्नति के योग बनेंगे। दुर्लभ स्वप्न साकार होंगे। पुरुषार्थ का सहारा लें। व्यवसायिक अभ्युदय भी होगा और प्रसन्नताएं भी बढ़ेगी। शुभांक-2-5-6

    वृश्चिक राशि :-कर्म बल पर आपको सफलता मिलेगी। व्यवसायिक क्षेत्र में वर्तमान क्षमता को बढ़ाएंगे। उपक्रम का विस्तार करने का प्रयास सफल होगा। आप अच्छी सफलताएं प्राप्त करेंगे। बुद्घि कौशल से चुनौतीपूर्ण कार्यों में सफलता मिलेगी। आर्थिक दृष्टि से समय उपलब्धिकारक रहेगा। भाई-बहनों का प्रेम बढ़ेगा। शुभांक-1-4-6

    धनु राशि :-संतान की ओर से हर्ष के प्रसंग बनेंगे। मानसिक एवं शारीरिक शिथिलता पैदा होगी। कामकाज सीमित तौर पर ही बन पाएंगे। स्वास्थ्य कमजोर बना रहेगा। महत्वपूर्ण कार्य को समय पर बना लें तो अच्छा ही होगा। श्रम अधिक करना पड़ सकता है। वरिष्ठजनों से मतभेद उभर सकते हैं। शुभांक-3-5-6

    मकर  राशि :- शनै:-शनै: स्थिति पक्ष की बनने लगेगी। मेल-मिलाप से काम बनाने की कोशिश लाभ देगी। यात्रा परिणाम शुभ रहेगा। आशा और उत्साह के कारण सक्रियता बढ़ेगी। सुखद समय की अनुभूतियां प्रबल होगी। लाभदायक कार्यों की चेष्टाएं प्रबल होंगी। अभिभावकों के प्रति उत्तरदायित्व निभाने होंगे। शुभांक-2-4-6

    कुंभ राशि :-विकास के लिए बनाई योजना सफल होगी। अच्छा हो कि आप अपने उद्देश्य को लेकर सचेत रहें। प्रियजनों से समागम का अवसर मिलेगा। कार्यक्षेत्र में महत्वपूर्ण कार्य सौंपे जा सकते है जो कि अतिविश्वसनीय व्यक्तियों को ही दिये जाते हैं। कार्य साधक दिन है व्यर्थ न गंवाऐ। मनोरथ सिद्घि का योग है। शुभांक-3-5-7

    मीन राशि :-व्यापार में स्थिति उत्तम रहेगी। उत्तरदायित्व की अधिकता निजी जीवन में अपने ही ढग़ की परेशानियां पैदा करेगी। कारोबार की उन्नति के लिये एक से अधिक सीढ़ी चढ़कर लोंगो को आश्चर्य में डाल देगें। चल-अचल सम्पति में वृद्घि होगी। बौद्घिक क्षेत्र में प्रतियोगिता जीतने का मौका मिलेगा। शुभांक-2-5-6
  • रविवार विशेष: सूर्य देव की कृपा से चमकेगा भाग्य; पद, प्रतिष्ठा और अच्छी सेहत के लिए आजमाएं ये अचूक उपाय

    रविवार विशेष: सूर्य देव की कृपा से चमकेगा भाग्य; पद, प्रतिष्ठा और अच्छी सेहत के लिए आजमाएं ये अचूक उपाय


    नई दिल्ली/उज्जैन । सनातन धर्म और ज्योतिष शास्त्र में सूर्य को ‘जगत की आत्मा’ और नवग्रहों का राजा माना गया है। सूर्य केवल एक खगोलीय पिंड नहीं, बल्कि आत्मविश्वास, पिता, मान-सम्मान और सरकारी सफलता के कारक हैं। रविवार का दिन भगवान सूर्य की उपासना के लिए सर्वश्रेष्ठ माना जाता है। मान्यता है कि यदि कुंडली में सूर्य बलवान हो, तो व्यक्ति रंक से राजा बन सकता है, वहीं सूर्य के कमजोर होने पर व्यक्ति को बार-बार अपमान और स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ता है।

    रविवार का आध्यात्मिक और ज्योतिषीय महत्व

    सूर्य ऊर्जा का वह केंद्र है, जिससे पूरी सृष्टि संचालित होती है। ज्योतिषियों के अनुसार, सूर्य कमजोर होने पर व्यक्ति में निर्णय लेने की क्षमता कम हो जाती है और उसे हड्डियों या नेत्र संबंधी रोग घेर लेते हैं। रविवार को किए गए उपाय न केवल ग्रह दोषों को शांत करते हैं, बल्कि व्यक्ति के भीतर ‘ब्रह्म तेज’ का संचार भी करते हैं।

    भाग्य बदलने वाले प्रभावशाली उपाय

    अर्घ्य का विधान: सफलता की पहली सीढ़ी रविवार की सुबह सूर्योदय के समय तांबे के लोटे में जल भरकर, उसमें थोड़े अक्षत, लाल फूल और चुटकी भर कुमकुम डालकर सूर्य देव को अर्घ्य दें। अर्घ्य देते समय ॐ घृणि सूर्याय नमः मंत्र का जाप करें। यह उपाय मानसिक तनाव को कम कर निर्णय लेने की शक्ति बढ़ाता है। स्तोत्र पाठ और मंत्र साधना मान-सम्मान में वृद्धि के लिए रविवार को ‘आदित्य हृदय स्तोत्र’ का पाठ करना रामबाण माना जाता है। यदि समय का अभाव हो, तो सूर्य गायत्री मंत्र का 108 बार जाप करें। इससे करियर में आ रही बाधाएं दूर होती हैं।

    दान का महत्व: लाल वस्तुओं का करें चयन दान से ग्रहों की प्रतिकूलता समाप्त होती है। रविवार को गेहूं, तांबा, गुड़ और लाल वस्त्र का दान किसी जरूरतमंद को देना अत्यंत शुभ होता है। यह विशेष रूप से प्रशासनिक सेवाओं और सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए फलदायी है।संबंधों से मजबूती: पिता का आशीर्वाद सूर्य पिता के कारक हैं। रविवार को अपने पिता, गुरु या वरिष्ठों के चरण स्पर्श कर उनका आशीर्वाद लें। उनकी सेवा करने से सूर्य देव स्वतः प्रसन्न होते हैं और समाज में आपकी प्रतिष्ठा बढ़ती है।

    रविवार को बरतें ये सावधानियां

    शास्त्रों के अनुसार, रविवार को कुछ कार्यों की मनाही है ताकि सूर्य का प्रभाव बना रहेखान-पान इस दिन नमक का त्याग करना या कम सेवन करना लाभकारी है। मांसाहार और मदिरा से पूरी तरह परहेज करें। व्यवहार क्रोध, अहंकार और अपशब्दों के प्रयोग से बचें। किसी का अपमान करने से सूर्य दोष बढ़ता है।आलस्य सूर्योदय के बाद देर तक सोना सौभाग्य को दुर्भाग्य में बदल सकता है।

    उपायों से होने वाले लाभ

    इन नियमों का पालन करने से व्यक्ति की नेतृत्व क्षमतानिखरती है। स्वास्थ्य की दृष्टि से हृदय और हड्डियों के रोगों में लाभ मिलता है। साथ ही, पारिवारिक कलह दूर होती है और समाज में एक नई पहचान स्थापित होती है।
  • बसंत पंचमी 2026: माँ सरस्वती को प्रसन्न करने के लिए घर लाएं ये 5 शुभ चीजें, करियर और बुद्धि में होगी उन्नति

    बसंत पंचमी 2026: माँ सरस्वती को प्रसन्न करने के लिए घर लाएं ये 5 शुभ चीजें, करियर और बुद्धि में होगी उन्नति


    नई दिल्ली । बसंत पंचमी का दिन ‘अबूझ मुहूर्त’ माना जाता है, यानी इस दिन किसी भी शुभ कार्य को करने के लिए पंचांग देखने की आवश्यकता नहीं होती। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यदि इस दिन कुछ विशेष वस्तुएं घर लाकर माँ सरस्वती को अर्पित की जाएं, तो साधक को ज्ञान, एकाग्रता और सुख-समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

    बसंत पंचमी 2026: तिथि और शुभ मुहूर्त वर्ष 2026 में बसंत पंचमी का पर्व 22 जनवरी को मनाया जाएगा। पंचमी तिथि प्रारंभ: 22 जनवरी 2026 को सुबह से। पूजा का शुभ समय: सुबह 07:13 बजे से दोपहर 12:33 बजे तक लगभग 5 घंटे 20 मिनट। शेष योग इस दिन रवि योग और अमृत सिद्धि योग का निर्माण हो रहा है, जो खरीदारी और नई शुरुआत के लिए अत्यंत श्रेष्ठ है।

    इन वस्तुओं को घर लाना माना जाता है अत्यंत शुभ

    माँ सरस्वती की मूर्ति या तस्वीर यदि आप घर में नई ऊर्जा का संचार करना चाहते हैं, तो इस दिन माँ सरस्वती की प्रतिमा घर लाएं। ध्यान रहे कि माँ सरस्वती शांत मुद्रा में हों और हंस या कमल पर विराजमान हों। इसे घर के ईशान कोण उत्तर-पूर्व में स्थापित करना करियर के लिए शुभ होता है।वीणा संगीत यंत्र वीणा माँ सरस्वती का सबसे प्रिय वाद्य यंत्र है। संगीत और कला से जुड़े लोगों के लिए बसंत पंचमी पर वीणा या कोई भी छोटा वाद्य यंत्र घर लाना सौभाग्य बढ़ाता है। इससे घर का वास्तु दोष दूर होता है और मानसिक शांति मिलती है।

    मोरपंख मोरपंख को विद्या और बुद्धि का प्रतीक माना जाता है। इसे बसंत पंचमी के दिन लाकर बच्चों के स्टडी रूम या उनकी किताबों में रखना चाहिए। माना जाता है कि इससे छात्रों की एकाग्रता बढ़ती है और पढ़ाई में मन लगता है।नई किताबें और पेन कलम पेन को माँ सरस्वती का रूप माना जाता है। इस दिन नया पेन या नई किताबें खरीदकर उनकी पूजा करना और उन पर तिलक लगाना बहुत लाभकारी होता है। यह कार्य विशेष रूप से नई शिक्षा शुरू करने वाले बच्चों अक्षरारंभ के लिए श्रेष्ठ है। पीले वस्त्र या फूल पीला रंग माँ सरस्वती को अत्यंत प्रिय है क्योंकि यह शुद्धता और नई चेतना का प्रतीक है। इस दिन पीले वस्त्र खरीदना या गेंदे के पीले फूलों से घर को सजाना सुख-समृद्धि लेकर आता है।

    माँ सरस्वती की पूजा के लिए विशेष टिप

    पूजा के समय माँ सरस्वती को पीले रंग की मिठाई बेसन के लड्डू या केसरिया भात का भोग लगाएं और ‘ॐ ऐं सरस्वत्यै नमः’ मंत्र का जाप करें।
  • साल की पहली मौनी अमावस्या: ग्वारीघाट-तिलवारा-लम्हेटा पर उमड़ी भीड़, नर्मदा में शुरू हुआ सुबह 4 बजे से स्नान

    साल की पहली मौनी अमावस्या: ग्वारीघाट-तिलवारा-लम्हेटा पर उमड़ी भीड़, नर्मदा में शुरू हुआ सुबह 4 बजे से स्नान


    नई दिल्ली। साल की पहली मौनी अमावस्या पर जबलपुर के ग्वारीघाट, तिलवारा घाट और लम्हेटा घाट पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। रविवार सुबह से ही घाटों पर भक्तों का आगमन शुरू हो गया था और दिन के बढ़ने के साथ संख्या लगातार बढ़ती गई। जबलपुर के साथ-साथ आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों से भी हजारों लोग आस्था के साथ मां नर्मदा में डुबकी लगाने पहुंचे।

    श्रद्धालुओं ने मौनी अमावस्या के महत्व को देखते हुए पूरे विधि-विधान से पूजा-अर्चना की।

    कई भक्तों ने घाट पर दीपदान किया और जरूरतमंदों को दान-पुण्य भी किया, जिससे पूरे घाट क्षेत्र में भक्तिमय वातावरण बना रहा। पंडित कृष्णा दुबे ने बताया कि सुबह 4 बजे से ही नर्मदा स्नान शुरू हो गए थे और मान्यता है कि इस दिन नर्मदा में स्नान करने से पापों का नाश होता है और कई पीढ़ियां तर जाती हैं।

    भारी भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा और व्यवस्था के विशेष इंतजाम किए। पुलिस बल तैनात किया गया और यातायात व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने के लिए विशेष प्रबंध किए गए। इस आस्था के चलते हर वर्ष मौनी अमावस्या पर ग्वारीघाट सहित अन्य नर्मदा घाटों पर भक्तों की भीड़ देखने को मिलती है, जो इस दिन की धार्मिक महत्ता को दर्शाती है।

  • होली पर चंद्र ग्रहण का साया: 3 मार्च को खग्रास चंद्र ग्रहण, सूतक के कारण 2 मार्च की मध्य रात्रि से पहले होगा होलिका दहन

    होली पर चंद्र ग्रहण का साया: 3 मार्च को खग्रास चंद्र ग्रहण, सूतक के कारण 2 मार्च की मध्य रात्रि से पहले होगा होलिका दहन


     नई दिल्ली । वर्ष 2026 का पहला चंद्र ग्रहण रंगों के पर्व धुलेंडी के दिन यानी 3 मार्च को लगने जा रहा है। यह एक खग्रास चंद्र ग्रहण होगा, जो उज्जैन सहित पूरे देश में ग्रस्तोदय रूप चंद्रमा के उदय होते समय ग्रहण लगा होना में दिखाई देगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जो ग्रहण दृश्य होता है, उसका सूतक और प्रभाव दोनों मान्य होते हैं। इस विशेष स्थिति के कारण इस बार होली और धुलेंडी के त्यौहार पर ग्रहों का बड़ा प्रभाव देखने को मिलेगा।

    2 मार्च को समय से पहले होगा होलिका दहन ज्योतिषीय गणनाओं और महाकालेश्वर विद्वत परिषद के अनुसार, 3 मार्च की सुबह से ही ग्रहण का सूतक वेधकाल प्रभावी हो जाएगा। सूतक काल में मांगलिक कार्य और अग्नि प्रज्वलन वर्जित माना जाता है। इसी कारण होलिका दहन 2 मार्च को मध्य रात्रि 12 बजे से पहले करना अनिवार्य होगा। ज्योतिषाचार्यों का मत है कि सूतक लगने के बाद होलिका दहन करना शास्त्र सम्मत नहीं होगा, इसलिए श्रद्धालु समय का विशेष ध्यान रखें। सिंह राशि और उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र में ग्रहण श्री महाकाल विद्वत परिषद उज्जैन के प्रमुख आचार्य पं. आशीष अग्निहोत्री ने बताया कि यह ग्रहण सिंह राशि और उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र में घटित होगा। सूतक काल का प्रारंभ 3 मार्च 2026, सुबह 6 बजकर 20 मिनट से। प्रभाव सूतक काल शुरू होते ही मंदिरों के पट बंद हो जाएंगे और मूर्ति स्पर्श निषेध रहेगा। इस दौरान भोजन, शयन और मनोरंजन जैसे कार्यों को वर्जित माना गया है।

    धुलेंडी पर सूतक का साया 3 मार्च को धुलेंडी रंग खेलने वाला दिन है। चूंकि सुबह से ही सूतक लग जाएगा, इसलिए धार्मिक दृष्टि से पूजा-पाठ और शुद्धता का विशेष महत्व रहेगा। ग्रहण की समाप्ति के बाद ही स्नान, दान और शुद्धि की जाएगी। इसके उपरांत ही लोग विधिवत पूजा और अन्य उत्सव मना सकेंगे।2026 खगोलीय घटनाओं का वर्ष आचार्य पं. आशीष अग्निहोत्री के अनुसार, वर्ष 2026 खगोलीय और ज्योतिषीय दृष्टिकोण से विलक्षण रहेगा। इस पूरे वर्ष में कुल चार ग्रहण लगेंगे, जिनमें दो सूर्य ग्रहण और दो चंद्र ग्रहण शामिल होंगे। 3 मार्च को होने वाला खग्रास चंद्र ग्रहण इस श्रृंखला की पहली प्रमुख घटना है, जिसका व्यापक प्रभाव सभी राशियों पर भी देखने को मिलेगा।

  • माणिक्य भस्म: चेहरे पर निखार और हृदय स्वास्थ्य के लिए औषधि, जानें सेवन की सावधानियां

    माणिक्य भस्म: चेहरे पर निखार और हृदय स्वास्थ्य के लिए औषधि, जानें सेवन की सावधानियां

    नई दिल्ली।  प्राचीन आयुर्वेद में जड़ी-बूटियों के साथ-साथ रत्नों का भी इस्तेमाल होता आया है। हिमालय की पहाड़ियों पर मिलने वाली दुर्लभ जड़ी-बूटियों की तरह ही, रत्नों में भी संजीवनी शक्ति होती है। खासतौर पर माणिक्य भस्म का आयुर्वेद में लंबा इतिहास है, जो स्वास्थ्य सुधारने के साथ चेहरे के निखार और मानसिक क्षमता बढ़ाने में मदद करता है।

    हृदय, पाचन और श्वसन के लिए फायदेमंद

    माणिक्य भस्म का प्रयोग हृदय संबंधी विकार, अल्पशुक्राणुता, पाचन दोष, सांस संबंधी रोग और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए किया जाता है। आयुर्वेद में इसे वात और कफ दोष को संतुलित करने वाला माना गया है। जब शरीर में इन दोषों की अधिकता होती है, तो सर्दी, जुकाम, बुखार, पेट में अल्सर और गर्मी जैसी समस्याएं उत्पन्न होती हैं। माणिक्य भस्म का सेवन इन सभी समस्याओं को कम करने में मदद करता है।

    त्वचा और चेहरे की सुंदरता में लाभकारी

    माणिक्य भस्म चेहरे की चमक वापस लाने में भी सहायक है। इसका सेवन और लेपन चेहरे के ओज को बढ़ाता है, त्वचा की खुजली, जलन, एलर्जी जैसी समस्याओं से राहत दिलाता है। समय से पहले झुर्रियों या बुजुर्ग दिखने की समस्या में यह संजीवनी साबित हो सकता है।

    माणिक्य भस्म का निर्माण और सेवन

    भस्म बनाने में शुद्ध माणिक्य, पारा, ऑर्पिमेंट और आर्सेनिक सल्फाइड का इस्तेमाल होता है। सामग्री को कई बार शोधन करके सुरक्षित बनाया जाता है। इसे चिकित्सक की सलाह और वजन के अनुसार ही लेना चाहिए। पीलिया, काला बुखार, बार-बार पेशाब आना या अन्य मूत्र संबंधी बीमारियों में माणिक्य भस्म औषधि की तरह काम करता है और कई दिनों में लाभ दिखाता है।

    संजीवनी गुणों की भरमार

    माणिक्य भस्म का नियमित और चिकित्सकीय सेवन रक्त शुद्ध करता है, पेट संबंधी विकार ठीक करता है, ऊर्जा और मानसिक क्षमता बढ़ाता है। आयुर्वेद में इसे संजीवनी के रूप में माना गया है, जो शरीर और मन दोनों को संतुलित रखता है।

  • बसंत पंचमी से होली का उत्सव: ऋतु और धर्म का अद्भुत संगम.

    बसंत पंचमी से होली का उत्सव: ऋतु और धर्म का अद्भुत संगम.


    नई दिल्ली। मकर संक्रांति के बाद जैसे-जैसे बसंत पंचमी का पर्व करीब आता है देशभर में उत्सव की तैयारियां शुरू हो जाती हैं। बसंत पंचमी हिंदू धर्म का एक महत्वपूर्ण त्योहार है जिस दिन विद्या कला और संगीत की देवी मां सरस्वती की पूजा की जाती है। लेकिन इसके साथ ही एक और रंगीन पर्व होली की तैयारी भी शुरू हो जाती है। सवाल यह है कि जब होली फाल्गुन मास में मनाई जाती है तो बसंत पंचमी पर इसकी तैयारी क्यों शुरू हो जाती है? इसका उत्तर ऋतु और धार्मिक विश्वासों में छिपा है।

    बसंत पंचमी का आगमन बसंत ऋतु के साथ होता है। बसंत ऋतु को ऋतुओं का राजा कहा जाता है। इस समय प्रकृति अपने सबसे सुंदर रूप में दिखाई देती है। पेड़ों पर फूल खिलते हैं सरसों के खेत पीले रंग से लहलहा उठते हैं और वातावरण में नई ऊर्जा का संचार होता है। यही कारण है कि बसंत पंचमी को प्रकृति का उत्सव और नई खुशियों का प्रतीक माना जाता है। इस दिन न केवल देवी सरस्वती की पूजा होती है बल्कि यह समय प्रकृति की सौंदर्य और रंगों का जश्न मनाने का भी है।

    धार्मिक दृष्टि से भी बसंत पंचमी और होली का संबंध गहरा है। हिंदू कैलेंडर के अनुसार बसंत ऋतु का आगमन ही होली के उत्सव का संकेत देता है। उत्तर भारत के विशेषकर ब्रज क्षेत्र में बसंत पंचमी से ही फाग गीत गाए जाने लगते हैं और होली की तैयारियां शुरू हो जाती हैं। यह उत्सव लगभग 40 दिनों तक चलता है जिसमें हर दिन मंदिरों और घरों में रंगों और गुलाल के साथ भगवान की पूजा की जाती है। बसंत पंचमी से होली तक का यह समय प्रकृति के 12 रंगों और नई ऊर्जा का उत्सव माना जाता है।

    पौराणिक कथाओं के अनुसार बसंत पंचमी और होली के बीच का यह समय प्रेम उल्लास और आनंद का प्रतीक है। ऐसा माना जाता है कि सृष्टि में रंग भरने और प्रेम बनाए रखने के लिए कामदेव और रति ने भगवान शिव की तपस्या को भंग किया था। इसी घटना के बाद से बसंत पंचमी से लेकर होली तक का समय प्रेम और उत्साह के लिए पवित्र माना गया। इस अवधि में प्रकृति प्रेम और उल्लास सभी मिलकर मनुष्य और समाज में एक नई ऊर्जा का संचार करते हैं।

    इस प्रकार बसंत पंचमी न केवल ज्ञान और विद्या का पर्व है बल्कि यह होली के रंगीन उत्सव की शुरुआत का संकेत भी देता है। ऋतु और धर्म का यह अद्भुत संगम समाज में उत्साह प्रेम और रंगों का संदेश फैलाता है।

  • वास्तु टिप्स : घर के मंदिर में भूलकर भी न रखें ये 4 प्रकार की मूर्तियां, वरना रुक सकती है तरक्की और बढ़ सकता है गृह-क्लेश

    वास्तु टिप्स : घर के मंदिर में भूलकर भी न रखें ये 4 प्रकार की मूर्तियां, वरना रुक सकती है तरक्की और बढ़ सकता है गृह-क्लेश


    नई दिल्ली । घर के मंदिर के लिए वास्तु टिप्स । हिंदू धर्म में घर का मंदिर सबसे पवित्र, शांत और सकारात्मक ऊर्जा से भरपूर स्थान माना जाता है। मान्यता है कि यहीं से पूरे घर में शुभ ऊर्जा का संचार होता है और परिवार पर देवी-देवताओं की कृपा बनी रहती है। लेकिन वास्तु शास्त्र के अनुसार, यदि अनजाने में पूजा स्थल पर कुछ गलत प्रकार की मूर्तियां या तस्वीरें रख दी जाएं, तो यही मंदिर वास्तु दोष का कारण भी बन सकता है। ऐसे दोष न केवल आर्थिक परेशानियां बढ़ाते हैं, बल्कि पारिवारिक कलह, मानसिक तनाव और निर्णय क्षमता में कमी का कारण भी बन सकते हैं।

    ज्योतिष और वास्तु विशेषज्ञों के अनुसार, घर के मंदिर में कुछ विशेष प्रकार की मूर्तियां रखना अशुभ माना गया है। सबसे पहले बात करते हैं खंडित या टूटी हुई मूर्तियों की। यदि किसी मूर्ति का हाथ, पैर, मुख या अन्य कोई हिस्सा टूटा हुआ है, या उस पर से रंग उतर चुका है, तो ऐसी मूर्ति की पूजा नहीं करनी चाहिए। शास्त्रों में कहा गया है कि खंडित प्रतिमाओं से सकारात्मक फल नहीं मिलता, बल्कि घर में नकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है। ऐसी मूर्तियों को सम्मानपूर्वक किसी पवित्र नदी में प्रवाहित कर देना चाहिए या पीपल के वृक्ष के नीचे रख देना उचित माना गया है। दूसरी महत्वपूर्ण बात भगवान के रौद्र या उग्र स्वरूप से जुड़ी है। घर के मंदिर में हमेशा देवी-देवताओं के शांत, सौम्य और आशीर्वाद देने वाले स्वरूप की ही मूर्तियां या तस्वीरें रखनी चाहिए। भगवान शिव का तांडव स्वरूप, कालभैरव या अत्यधिक क्रोधित मुद्रा वाली प्रतिमाएं घर में मानसिक अशांति, भय और तनाव का कारण बन सकती हैं। वास्तु के अनुसार, सौम्य स्वरूप की प्रतिमाएं घर में शांति, प्रेम और सामंजस्य बनाए रखती हैं।

    तीसरा वास्तु दोष तब उत्पन्न होता है जब एक ही देवता की एक से अधिक मूर्तियां या तस्वीरें एक ही स्थान पर रख दी जाती हैं। वास्तु शास्त्र कहता है कि एक ही भगवान की दो या उससे अधिक प्रतिमाएं रखने से ऊर्जा का टकराव होता है। इसका प्रभाव घर के मुखिया और परिवार के सदस्यों की मानसिक स्थिति पर पड़ सकता है, जिससे निर्णय लेने की क्षमता कमजोर हो सकती है और अनावश्यक तनाव बढ़ सकता है। चौथी महत्वपूर्ण गलती मूर्तियों को आमने-सामने रखना है। कई बार जगह की कमी या सजावट के कारण लोग देवी-देवताओं की मूर्तियों को एक-दूसरे के सामने रख देते हैं। वास्तु जानकारों के अनुसार, ऐसा करने से घर के सदस्यों के बीच मतभेद, विवाद और कलह की स्थिति बन सकती है। मूर्तियों की स्थापना इस प्रकार होनी चाहिए कि सभी एक ही दिशा में शांत भाव से विराजमान हों।

    इसके साथ ही मंदिर की नियमित साफ-सफाई और देखभाल भी उतनी ही जरूरी है। मूर्तियों पर धूल जमना, पुराने सूखे फूल, मुरझाई माला या जले हुए दीपक का अवशेष रखना वास्तु दोष को बढ़ाता है। यदि घर में लड्डू गोपाल विराजमान हैं, तो उनकी नियमित सेवा, भोग और श्रृंगार करना विशेष रूप से आवश्यक माना गया है। कुल मिलाकर, घर का मंदिर केवल सजावट का स्थान नहीं, बल्कि श्रद्धा और ऊर्जा का केंद्र होता है। किसी भी शुभ तिथि या शनिवार के दिन अपने मंदिर का निरीक्षण कर वास्तु के अनुसार आवश्यक सुधार करें, ताकि आपके जीवन में सुख, शांति, समृद्धि और सफलता के मार्ग सदैव खुले रहें।