Category: Religious Astrology

  • आज का पंचांग 24 जनवरी 2026: धार्मिक कार्यों और पूजा के लिए विशेष शुभ दिन, जानें शुभ मुहूर्त और राहुकाल

    आज का पंचांग 24 जनवरी 2026: धार्मिक कार्यों और पूजा के लिए विशेष शुभ दिन, जानें शुभ मुहूर्त और राहुकाल


    नई दिल्ली।आज माघ मास की शुक्ल पक्ष षष्ठी तिथि है। पंचांग के अनुसार चंद्रमा मीन राशि में संचार कर रहा है जिससे भक्ति ध्यान और मानसिक शांति के योग बन रहे हैं। शिव योग दोपहर 2:02 बजे तक प्रभाव में रहेगा इसके बाद सिद्ध योग का आरंभ होगा। यह योग धार्मिक और आध्यात्मिक कार्यों के लिए बेहद अनुकूल माना जाता है।

    षष्ठी तिथि रात्रि 12:40 बजे तक रहेगी इसके पश्चात सप्तमी तिथि प्रारंभ हो जाएगी। नक्षत्र की बात करें तो उत्तराभाद्रपद नक्षत्र दोपहर 2:16 बजे तक रहेगा इसके बाद रेवती नक्षत्र प्रभाव में आएगा। गंडमूल नक्षत्र का प्रारंभ दोपहर 2:16 बजे के बाद माना गया है इसलिए इस समय जन्म नामकरण या नए कार्यों में सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है।करण का विवरण इस प्रकार है। कौलव करण दोपहर 1:14 बजे तक रहेगा इसके बाद गर करण का प्रभाव होगा। सूर्य उत्तरायण स्थिति में है और ऋतु शिशिर चल रही है। सूर्योदय सुबह 7:12 बजे और सूर्यास्त शाम 5:53 बजे होगा।

    आज के शुभ मुहूर्त इस प्रकार हैं। ब्रह्म मुहूर्त सुबह 5:11 से 6:04 बजे तक विजय मुहूर्त दोपहर 2:09 से 2:52 बजे तक और गोधूलि बेला शाम 5:42 से 6:09 बजे तक है। निशीथ काल रात 11:54 से 12:47 बजे तक रहेगा। इन समयों में पूजा ध्यान जप और मानसिक शुद्धि से जुड़े कार्य विशेष फलदायी माने जाते हैं।आज के अशुभ समय में राहुकाल सुबह 9:00 से 10:30 बजे गुलिक काल सुबह 6:00 से 7:30 बजे और यमगंड दोपहर 1:30 से 3:30 बजे तक रहेगा। दुर्मुहूर्त सुबह 6:57 से 7:40 बजे तक और पूरे दिन पंचक का प्रभाव रहेगा। इस अवधि में नए कार्य या शुभ निर्णय लेने से बचना चाहिए।

    आज का विशेष उपाय यह है कि जल में दूध और काले तिल मिलाकर शिवलिंग का अभिषेक करना चाहिए। इसके साथ ॐ नमः शिवाय मंत्र का 108 बार जप करने से मानसिक तनाव कम होता है और जीवन में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं।सप्ताह का यह शनिवार धार्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। श्रद्धा और नियमपूर्वक किए गए उपाय जीवन में स्थिरता शांति और सफलता के मार्ग प्रशस्त करते हैं।

  • शनिवार के उपाय: शनिदेव की कृपा पाने और जीवन से कष्ट दूर करने के आसान उपाय

    शनिवार के उपाय: शनिदेव की कृपा पाने और जीवन से कष्ट दूर करने के आसान उपाय


    नई दिल्ली।शनिवार का दिन विशेष रूप से शनिदेव को समर्पित माना जाता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार शनि ग्रह कर्म, न्याय और अनुशासन का प्रतीक है। जब शनि अशुभ फल देता है तो व्यक्ति को आर्थिक संकट, मानसिक तनाव, करियर में रुकावट और पारिवारिक समस्याओं का सामना करना पड़ता है। ऐसे में शनिवार को किए जाने वाले पारंपरिक उपाय शनि दोष शांत करने और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा लाने में मददगार माने जाते हैं।

    शनिदेव की पूजा का महत्व अत्यधिक है। प्रातः स्नान के बाद काले या नीले वस्त्र पहनकर शनि मंदिर जाना शुभ माना जाता है। जो लोग मंदिर नहीं जा सकते वे घर पर भी श्रद्धा भाव से पूजा कर सकते हैं। पूजा में सरसों के तेल का दीपक जलाना विशेष फलदायी माना गया है। दीपक में दो लौंग डालने से नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव कम होता है।

    पूजा के दौरान मंत्र का जप करना लाभकारी है। मंत्र ॐ शं शनैश्चराय नमः का उच्चारण शनि दोष शांत करने में सहायक होता है। शनि चालीसा या शनि स्तोत्र का पाठ करने से मानसिक स्थिरता और आत्मबल बढ़ता है।पीपल के पेड़ की पूजा का शनिवार को विशेष महत्व है। मान्यता है कि पीपल में शनिदेव का वास होता है। सुबह या संध्या के समय पीपल के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाएं। जल में काले तिल मिलाकर अर्पित करें और पीपल की सात परिक्रमा करें। यह उपाय साढ़ेसाती और ढैय्या के प्रभाव को कम करने में सहायक माना जाता है।

    हनुमान जी की उपासना भी शनिदेव के अशुभ प्रभाव कम करने में मदद करती है। शनिवार को हनुमान चालीसा का पाठ करने और लाल फूल तथा लड्डू अर्पित करने से भय, रोग और मानसिक तनाव दूर होता है।दान का विशेष महत्व है। शनिवार को काले तिल, उड़द दाल, लोहा, काले वस्त्र या जूते चप्पल जरूरतमंदों को दान करें। अंधों, अपंगों और असहाय लोगों को भोजन कराने से भी शनि की कठोरता कम होती है।

    अन्य उपायों में कौवे को भोजन कराना, घर में घी का दीपक जलाना और शिवलिंग का काले तिल और बेलपत्र से अभिषेक करना शामिल हैं। ये उपाय सकारात्मक ऊर्जा और सुख समृद्धि बढ़ाने में सहायक हैं।श्रद्धा और नियमपूर्वक किए गए ये उपाय जीवन में आर्थिक संकट, करियर की बाधाएं, मानसिक अशांति और पारिवारिक तनाव कम करते हैं। शनिदेव की कृपा से जीवन में स्थिरता अनुशासन और समृद्धि का मार्ग प्रशस्त होता

  • धार्मिक उपाय: Jaya Ekadashi पर करें यह पूजा, मिलेगा मोक्ष और पापों से मुक्ति

    धार्मिक उपाय: Jaya Ekadashi पर करें यह पूजा, मिलेगा मोक्ष और पापों से मुक्ति


    नई दिल्ली। Jaya Ekadashi Puja Benefits: हिंदू धर्म में एकादशी व्रत का विशेष महत्व है, लेकिन माघ मास के शुक्ल पक्ष की जया एकादशी को सबसे फलदायी माना गया है. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, जो व्यक्ति इस दिन पूरी श्रद्धा से भगवान विष्णु की पूजा करता है, उसे न केवल मानसिक शांति मिलती है, बल्कि वह पिशाच योनी जैसी कष्टदायक स्थितियों से भी मुक्त हो जाता है. इस साल यानी 2026 में जया एकादशी बेहद खास होने वाली है, क्योंकि इस दिन एक-दो नहीं बल्कि चार अद्भुत संयोग बन रहे हैं.

    जया एकादशी पर बन रहे हैं ये खास संयोग
    ज्योतिष गणना के अनुसार, इस बार जया एकादशी पर इंद्र योग, रवि योग, भद्रावास योग और शिववास योग का दुर्लभ मेल हो रहा है. इन योगों में की गई पूजा और दान-पुण्य का फल कई गुना बढ़कर मिलता है. विशेषकर रवि योग को दोषों का नाश करने वाला और शिववास योग को सुख-समृद्धि प्रदाता माना जाता है.

    कब रखा जाएगा जया एकादशी का व्रत?
    पंचांग के अनुसार,

    एकादशी तिथि शुरू: 28 जनवरी 2026, शाम 4 बजकर 34 मिनट से.
    एकादशी तिथि समापन: 29 जनवरी 2026, रात 1 बजकर 56 मिनट तक.
    व्रत की तारीख: उदया तिथि (सूर्योदय के समय की तिथि) के अनुसार, जया एकादशी का व्रत 29 जनवरी 2026, बुधवार को रखा जाएगा.

    जया एकादशी की पूजा विधि
    अगर आप अपने जीवन के दुखों और अनजाने में हुए पापों से मुक्ति चाहते हैं, तो इस विधि से पूजा करें. सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और पीले रंग के वस्त्र धारण करें. हाथ में जल लेकर भगवान विष्णु के सामने व्रत का संकल्प लें.

    वेदी स्थापना: एक चौकी पर पीला कपड़ा बिछाकर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की प्रतिमा स्थापित करें.

    पूजन सामग्री: भगवान को पीले फूल, पीले फल, अक्षत, धूप और दीप अर्पित करें.

    पंचामृत स्नान: श्री हरि को पंचामृत से स्नान कराएं. ध्यान रहे कि भोग में तुलसी दल (पत्ता) जरूर शामिल करें, क्योंकि तुलसी के बिना विष्णु जी भोग स्वीकार नहीं करते.

    मंत्र जाप: ॐ नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का जाप करें और जया एकादशी की व्रत कथा पढ़ें या सुनें.

    जया एकादशी का महत्व
    पद्म पुराण के अनुसार, जया एकादशी का व्रत करने से व्यक्ति को नीच योनि में जन्म नहीं लेना पड़ता. कथाओं में उल्लेख है कि इस व्रत के असर से ही माल्यवान नामक गंधर्व को पिशाच योनि से मुक्ति मिली थी. यह व्रत व्यक्ति के भीतर सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है और पुराने संचित पापों का नाश कर मोक्ष का मार्ग प्रशस्त करता है.

  • भाग्यशाली हथेलियां: आपके हाथ के ये 5 निशान बदल सकते हैं किस्मत, जानें क्या आप भी बनेंगे धनवान?

    भाग्यशाली हथेलियां: आपके हाथ के ये 5 निशान बदल सकते हैं किस्मत, जानें क्या आप भी बनेंगे धनवान?

    नई दिल्ली । हस्तरेखा शास्त्रके अनुसार, हमारी हथेलियां केवल चमड़ी पर खिंची हुई रेखाएं नहीं हैं बल्कि ये हमारे कर्मों और आने वाले भविष्य का दर्पण होती हैं। सामुद्रिक शास्त्र में कुछ ऐसे विशिष्ट निशानों और पर्वतों का उल्लेख किया गया है, जो किसी व्यक्ति को रंक से राजा बनाने की क्षमता रखते हैं। यदि आप भी जानना चाहते हैं कि आपकी आर्थिक स्थिति और मान-सम्मान का ग्राफ कैसा रहेगा तो अपनी हथेली में इन 5 प्रमुख निशानों को गौर से देखें।

    सूर्य पर्वत पर ‘विजय’ की रेखा

    हथेली में अनामिका उंगली के ठीक नीचे वाले उभार को सूर्य पर्वत कहा जाता है। यदि इस स्थान पर कोई स्पष्ट और बिना कटी-फटी रेखा दिखाई दे तो इसे सूर्य रेखा कहते हैं। यह रेखा व्यक्ति की सफलता का पैमाना है। प्रभाव जिस जातक के हाथ में यह रेखा गहरी होती है, उसे समाज में उच्च पद प्रतिष्ठा और सरकारी लाभ प्राप्त होता है। ऐसे लोगों का वैवाहिक जीवन भी काफी सामंजस्यपूर्ण और सुखी रहता है।

    मस्तिष्क रेखा पर त्रिकोण

    मस्तिष्क रेखा का अंत यदि दो भागों में विभाजित होकर एक त्रिकोण जैसी आकृति बना दे तो इसे अत्यंत शुभ माना जाता है। आर्थिक पक्ष हस्तरेखा विशेषज्ञों के अनुसार, यह निशान व्यक्ति की कुशाग्र बुद्धि और धन संचय करने की अद्भुत क्षमता को दर्शाता है। ऐसे लोगों को जीवन में कभी आर्थिक तंगी का सामना नहीं करना पड़ता।

    हथेली में अर्धचंद्र का बनना

    जब आप अपनी दोनों हथेलियों को आपस में जोड़ते हैं और हृदय रेखाएं मिलकर एक सुंदर आधा चाँद बनाती हैं तो यह आपके व्यक्तित्व और भाग्य के बारे में बहुत कुछ कहता है। संकेत यह निशान विलासितापूर्ण जीवन का प्रतीक है। ऐसे लोग स्वभाव से बहुत आकर्षक होते हैं और जीवन में हर तरह की भौतिक सुख-सुविधाएं हासिल करते हैं।

    हृदय रेखा पर ‘त्रिशूल

    यदि हृदय रेखा के अंत में गुरु पर्वत तर्जनी उंगली के नीचे के पास त्रिशूल का निशान बनता है, तो यह जातक पर दैवीय कृपा का संकेत है। सफलता ऐसे लोग समाज में पूजनीय होते हैं और परोपकारी स्वभाव के कारण बहुत ख्याति प्राप्त करते हैं। इनके पास धन के साथ-साथ मानसिक शांति भी प्रचुर मात्रा में होती है।

    शुक्र पर्वत का उभार

    अंगूठे के नीचे वाले हिस्से को शुक्र पर्वत कहा जाता है। यदि यह हिस्सा मांसल साफ और गुलाबी आभा लिए हुए है तो जातक भाग्यशाली होता है। ऐश्वर्य शुक्र पर्वत का विकसित होना प्रेम, सौंदर्य और अपार संपत्ति का कारक है। ऐसे व्यक्ति का जीवन सुख-साधनों से भरा रहता है।
  • महाभारत का महासूत्र: आखिर 18 अंक में ही क्यों सिमटा है युद्ध से लेकर ज्ञान तक का रहस्य?

    महाभारत का महासूत्र: आखिर 18 अंक में ही क्यों सिमटा है युद्ध से लेकर ज्ञान तक का रहस्य?


    नई दिल्ली । महाभारत केवल दुनिया का सबसे विशाल महाकाव्य नहीं है बल्कि यह जीवन दर्शन रहस्यमयी प्रतीकों और कूटनीति की एक ऐसी गहरी संरचना है जिसे समझना आज भी विद्वानों के लिए कौतूहल का विषय है। इस महागाथा की गहराई में उतरते ही एक विशिष्ट संख्या बार-बार हमारे सामने उभरकर आती है और वह है 18 । कुरुक्षेत्र के रक्तरंजित मैदान से लेकर कुरुवंश के विनाश और गीता के दिव्य ज्ञान तक महाभारत की पूरी कथा इसी 18 अंक के इर्द गिर्द सिमटी हुई है। आखिर क्या यह महज एक संयोग है या इसके पीछे ब्रह्मांड का कोई गूढ़ गणित छिपा है आइए इस रहस्यों से भरी कड़ियों को विस्तार से समझते हैं।

    महाभारत की संरचना में 18 का वर्चस्व

    महर्षि वेदव्यास द्वारा रचित इस अद्भुत ग्रंथ की हर परत में 18 का अंक समाहित है जो इसे अन्य महाकाव्यों से अलग और अधिक वैज्ञानिक बनाता है 18 पर्वों का संकलन: महाभारत की पूरी कथा को 18 मुख्य पर्वों अध्यायों के समूह में विभाजित किया गया है। आदि पर्व से शुरू होकर यह स्वर्गारोहण पर्व पर समाप्त होती है, जो जीवन की यात्रा के विभिन्न चरणों को दर्शाती है।

    18 दिनों का महासंग्राम: इतिहास का सबसे विनाशकारी युद्ध, कुरुक्षेत्र का संग्राम ठीक 18 दिनों तक चला था। माना जाता है कि इन 18 दिनों में ही संसार की पुरानी व्यवस्था ध्वस्त हुई और धर्म के नए युग का सूत्रपात हुआ।गीता के 18 अध्याय: कुरुक्षेत्र की रणभेरी बजने से ठीक पहले, अर्जुन के विषाद को दूर करने के लिए भगवान श्रीकृष्ण ने जो ‘श्रीमद्भगवद्गीता’ सुनाई, उसमें भी ठीक 18 अध्याय हैं। यह मनुष्य के 18 तरह के मानसिक द्वंद्वों और उनके समाधान का प्रतीक है।

    18 अक्षौहिणी सेना: युद्ध के मैदान में कुल 18 अक्षौहिणी सेनाएं उतरी थीं। इनमें से 11 कौरवों के पक्ष में थीं और 7 पांडवों की ओर से लड़ीं। आश्चर्यजनक रूप से इनका योग भी 18 ही है। 18 जीवित योद्धा: भीषण नरसंहार के बाद जब युद्ध समाप्त हुआ, तो पांडवों के पांचों भाई, श्रीकृष्ण और सात्यकि सहित कुल 18 प्रमुख योद्धा ही जीवित बचे थे।

    क्या है इसका आध्यात्मिक और गणितीय आधार

    अंक ज्योतिष और सनातन परंपरा की दृष्टि से देखें तो ’18’ का योग 9 -1+8=9 होता है। अंक 9 को भारतीय संस्कृति में पूर्णता और ‘सनातन’ का प्रतीक माना गया है क्योंकि 9 का पहाड़ा कभी अपनी मूल प्रकृति नहीं बदलता। यह इस बात का संकेत है कि महाभारत का युद्ध केवल जमीन के एक टुकड़े के लिए नहीं, बल्कि मानव चेतना की पूर्णता और धर्म की स्थापना के महा-उद्देश्य के लिए लड़ा गया था। श्रीमद्भागवत पुराण के अनुसार 18 पुराण भी हैं जो बताते हैं कि व्यास जी ने ज्ञान के हर क्षेत्र को इसी संख्या में बांधने का प्रयास किया। महाभारत का यह महासूत्र हमें सिखाता है कि जीवन के हर संघर्ष और हर ज्ञान की एक निश्चित सीमा और पूर्णता होती है।

  • वास्तु टिप्स: बाथरूम की खाली बाल्टी बन सकती है कंगाली का कारण, सुख-समृद्धि के लिए अभी बदलें ये आदत

    वास्तु टिप्स: बाथरूम की खाली बाल्टी बन सकती है कंगाली का कारण, सुख-समृद्धि के लिए अभी बदलें ये आदत


    नई दिल्ली । वास्तु शास्त्र में घर के हर कोने की अपनी एक ऊर्जा होती है। अक्सर हम लिविंग रूम या बेडरूम को सजाने और वास्तु के अनुरूप बनाने में घंटों बिता देते हैं, लेकिन बाथरूम जैसी जगह को नजरअंदाज कर देते हैं। वास्तु विशेषज्ञों के अनुसार बाथरूम घर का वह हिस्सा है जहाँ से सबसे ज्यादा नकारात्मक ऊर्जा उत्पन्न हो सकती है। यहाँ रखी एक खाली बाल्टी न केवल आपके मानसिक तनाव को बढ़ा सकती है बल्कि आपके हंसते खेलते घर को आर्थिक तंगी की ओर भी धकेल सकती है।

    खाली बाल्टी क्यों है खतरनाक

    वास्तु विज्ञान में पानी को संपन्नता और प्रवाह का प्रतीक माना गया है। जिस प्रकार बहता हुआ स्वच्छ जल सकारात्मकता लाता है उसी प्रकार बाथरूम में रखी खाली बाल्टी जीवन में अभाव और खालीपन को दर्शाती है। आर्थिक तंगी विशेषज्ञों का मानना है कि खाली बाल्टी घर में सकारात्मक ऊर्जा के प्रवेश को रोकती है। यह धन के आगमन में बाधा उत्पन्न करती है और अनावश्यक खर्चों को बढ़ाती है। मानसिक अशांति और चंद्रमा ज्योतिष शास्त्र के अनुसार जल का सीधा संबंध चंद्रमा से है जो हमारे मन का कारक है। जब हम रात के समय बाथरूम में खाली बर्तन या बाल्टी छोड़ते हैं तो यह मानसिक दोष उत्पन्न करता है जिससे परिवार के सदस्यों में तनाव चिड़चिड़ापन और नींद की कमी जैसी समस्याएं हो सकती हैं।

    इन बातों का रखें विशेष ध्यान

    हमेशा भरकर रखें पानी वास्तु के अनुसार, बाथरूम में बाल्टी को हमेशा साफ पानी से भरकर रखना चाहिए। यदि आप पूरी बाल्टी नहीं भर सकते तो कम से कम आधा जरूर भरें। यह घर में खुशहाली और लक्ष्मी के आगमन का मार्ग प्रशस्त करता है। नीले रंग का महत्व वास्तु में नीले रंग की बाल्टी को सबसे शुभ माना गया है। नीला रंग जल का प्रतीक है और यह घर के वास्तु दोषों को कम करने में मदद करता है।साफ-सफाई है जरूरी बाल्टी केवल भरी हुई ही नहीं बल्कि साफ भी होनी चाहिए। टूटी हुई या गंदी बाल्टी दरिद्रता को न्यौता देती है।

    दरवाजा रखें बंद उपयोग के बाद बाथरूम का दरवाजा हमेशा बंद रखना चाहिए ताकि वहां की नकारात्मक ऊर्जा घर के बाकी हिस्सों में न फैले। विशेष टिप यदि आप रात को बाल्टी भरकर रखते हैं, तो ध्यान रखें कि वह पानी सुबह के समय इस्तेमाल कर लिया जाए या बदल दिया जाए। बासी और गंदा पानी भी वास्तु दोष का कारण बनता है।

  • शुक्रवार के प्रभावी उपाय: मां लक्ष्मी की कृपा से खुलेगा सुख और समृद्धि का द्वार

    शुक्रवार के प्रभावी उपाय: मां लक्ष्मी की कृपा से खुलेगा सुख और समृद्धि का द्वार


    नई दिल्ली :सनातन परंपरा और ज्योतिष शास्त्र में शुक्रवार का दिन विशेष महत्व रखता है। यह दिन शुक्र ग्रह और धन वैभव सुख समृद्धि की अधिष्ठात्री देवी मां लक्ष्मी को समर्पित माना गया है। शुक्र ग्रह को भोग विलास सौंदर्य प्रेम और आर्थिक समृद्धि का कारक माना जाता है। मान्यता है कि शुक्रवार को विधिपूर्वक और श्रद्धा से किए गए उपाय जीवन में आर्थिक स्थिरता सुख शांति और सकारात्मक ऊर्जा को बढ़ाते हैं। जो लोग धन रुकावट वैवाहिक तनाव या भौतिक सुखों की कमी से जूझ रहे हैं उनके लिए शुक्रवार के उपाय विशेष फलदायी माने जाते हैं।

    मां लक्ष्मी की कृपा और धन वृद्धि के उपाय
    शुक्रवार के दिन प्रातः या संध्या काल में मां लक्ष्मी और भगवान विष्णु की पूजा करना अत्यंत शुभ माना जाता है। पूजा में कमल का फूल सफेद पुष्प सुगंधित इत्र और खीर या सफेद मिठाई अर्पित करें। पूजन के समय मन को शांत रखें और कृतज्ञता भाव बनाए रखें। माना जाता है कि सच्चे भाव से की गई आराधना मां लक्ष्मी को शीघ्र प्रसन्न करती है।

    मंत्र जाप और स्तोत्र पाठ
    धन ऐश्वर्य और सुख समृद्धि की प्राप्ति के लिए
    ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः
    मंत्र का 108 बार जाप करना लाभकारी माना गया है। इसके साथ कनकधारा स्तोत्र का पाठ आर्थिक अवरोधों को दूर करने और रुके धन को प्रवाहित करने में सहायक होता है। नियमित रूप से यह पाठ करने से धीरे धीरे आर्थिक स्थिति में सुधार देखा जाता है।

    दीपक और द्वार उपाय
    शुक्रवार की संध्या में घर के मुख्य द्वार पर घी का दीपक जलाना अत्यंत शुभ माना जाता है। दीपक में केसर या इलायची डालने से इसका प्रभाव और बढ़ जाता है। यह उपाय घर में सकारात्मक ऊर्जा समृद्धि और सौभाग्य के प्रवेश का प्रतीक माना जाता है।

    दान और पुण्य कर्म
    शुक्रवार को सफेद वस्तुओं का दान विशेष फलदायी होता है। दूध दही चावल चीनी सफेद वस्त्र या मिठाई जरूरतमंदों को दें। सामर्थ्य अनुसार भोजन या धन का दान भी पुण्यकारी माना गया है। श确定्रों के अनुसार दान से शुक्र ग्रह की कृपा प्राप्त होती है।

    कन्या पूजन का महत्व
    शुक्रवार को 7 या 11 कन्याओं को भोजन कराना और उन्हें सफेद वस्त्र व मिठाई देना अत्यंत शुभ माना जाता है। कन्याओं को मां लक्ष्मी का स्वरूप माना गया है और उनका आशीर्वाद घर में सुख समृद्धि लाता है।

    सुख समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा के उपाय
    मां लक्ष्मी स्वच्छता और व्यवस्था को प्रिय मानती हैं। शुक्रवार को घर की विशेष सफाई करें कबाड़ हटाएं और सुगंधित धूप या अगरबत्ती जलाएं। इस दिन सफेद क्रीम या हल्के रंग के वस्त्र पहनना शुक्र ग्रह को मजबूत करता है और मानसिक शांति प्रदान करता है।

    अन्य शुभ उपाय
    जीव सेवा जैसे चींटियों को आटा चीनी गाय को चारा और पक्षियों के लिए दाना पानी की व्यवस्था करना पुण्यकारी माना गया है। यदि शुक्रवार को प्रदोष या शिव उपासना का संयोग बने तो शिवलिंग पर पंचामृत या शहद से अभिषेक करना भी शुभ फल देता है।श्रद्धा नियमितता और सात्त्विक भाव से किए गए ये उपाय धीरे धीरे जीवन में धन स्थिरता पारिवारिक सुख और मानसिक संतुलन को बढ़ाते हैं। मान्यता है कि मां लक्ष्मी केवल धन ही नहीं बल्कि सद्बुद्धि संतोष और शांति भी प्रदान करती हैं।

  • आज का पंचांग: बसंत पंचमी पर सरस्वती वंदना का शुभ संयोग..

    आज का पंचांग: बसंत पंचमी पर सरस्वती वंदना का शुभ संयोग..


    नई दिल्ली :आज शुक्रवार 23 जनवरी 2026 को माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि के साथ बसंत पंचमी का पावन पर्व श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जा रहा है। यह दिन ज्ञान विद्या संगीत और कला की अधिष्ठात्री देवी मां सरस्वती को समर्पित है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार बसंत पंचमी से ऋतुओं के परिवर्तन की शुरुआत होती है और जीवन में नई ऊर्जा सृजनशीलता और सकारात्मकता का प्रवेश होता है। सूर्य उत्तरायण में स्थित है और शिशिर ऋतु का प्रभाव बना हुआ है जिससे आज के दिन का धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व और भी बढ़ जाता है।

    तिथि वार और संवत
    आज माघ शुक्ल पंचमी तिथि रात्रि 1 बजकर 47 मिनट तक रहेगी इसके बाद षष्ठी तिथि का आरंभ होगा।
    वार शुक्रवार है।
    विक्रम संवत 2082
    शक संवत 1947
    राष्ट्रीय मिति माघ 03
    हिजरी तारीख शब्बन 03 1447
    सौर मास माघ मास प्रविष्टे 10

    नक्षत्र योग और करण
    दिन की शुरुआत पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र में होगी जो दोपहर 2 बजकर 33 मिनट तक प्रभावी रहेगा। इसके बाद उत्तराभाद्रपद नक्षत्र आरंभ होगा।
    योग की बात करें तो परिधि योग अपराह्न 3 बजकर 59 मिनट तक रहेगा इसके पश्चात शिव योग का शुभ संयोग बनेगा।
    करण बव करण दोपहर 2 बजकर 8 मिनट तक रहेगा इसके बाद कौलव करण प्रभावी होगा।

    चंद्रमा की स्थिति
    चंद्रमा सुबह 8 बजकर 34 मिनट तक कुंभ राशि में रहेगा इसके बाद गुरु की राशि मीन में प्रवेश करेगा। इससे भावनात्मक संतुलन आध्यात्मिक झुकाव और रचनात्मक सोच में वृद्धि देखी जा सकती है। बसंत पंचमी पर चंद्रमा का मीन राशि में गोचर सरस्वती आराधना के लिए विशेष शुभ माना गया है।

    सूर्य समय
    सूर्योदय सुबह 7 बजकर 13 मिनट
    सूर्यास्त शाम 5 बजकर 52 मिनट

    आज के पर्व
    बसंत पंचमी
    श्री पंचमी
    सरस्वती पूजा
    लक्ष्मी पूजन
    आज विद्यारंभ पुस्तक पूजन और पीले वस्त्र धारण करने की परंपरा विशेष रूप से मानी जाती है।

    शुभ मुहूर्त
    ब्रह्म मुहूर्त सुबह 5:11 से 6:04
    विजय मुहूर्त दोपहर 2:08 से 2:52
    गोधूलि बेला शाम 5:42 से 6:08
    निशीथ काल रात्रि 11:54 से 12:47

    अशुभ समय
    राहुकाल सुबह 10:30 से 12:00
    गुलिक काल सुबह 7:30 से 9:00
    यमगंड दोपहर 3:30 से 4:30
    दुर्मुहूर्त सुबह 9:06 से 9:50
    पंचक पूरे दिन प्रभावी रहेगा।

    अमृत काल
    सुबह 9:53 से 11:13 तक

    धार्मिक दृष्टि से आज का दिन पूजा साधना और शुभ संकल्प के लिए अत्यंत फलदायी माना गया है। बसंत पंचमी पर मां सरस्वती की आराधना से बुद्धि विवेक स्मरण शक्ति और विद्या में वृद्धि होने का विश्वास किया जाता है।

    आज शुक्रवार 23 जनवरी 2026 को माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि के साथ बसंत पंचमी का पावन पर्व श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जा रहा है। यह दिन ज्ञान विद्या संगीत और कला की अधिष्ठात्री देवी मां सरस्वती को समर्पित है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार बसंत पंचमी से ऋतुओं के परिवर्तन की शुरुआत होती है और जीवन में नई ऊर्जा सृजनशीलता और सकारात्मकता का प्रवेश होता है। सूर्य उत्तरायण में स्थित है और शिशिर ऋतु का प्रभाव बना हुआ है जिससे आज के दिन का धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व और भी बढ़ जाता है।

    तिथि वार और संवत
    आज माघ शुक्ल पंचमी तिथि रात्रि 1 बजकर 47 मिनट तक रहेगी इसके बाद षष्ठी तिथि का आरंभ होगा।
    वार शुक्रवार है।
    विक्रम संवत 2082
    शक संवत 1947
    राष्ट्रीय मिति माघ 03
    हिजरी तारीख शब्बन 03 1447
    सौर मास माघ मास प्रविष्टे 10

    नक्षत्र योग और करण
    दिन की शुरुआत पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र में होगी जो दोपहर 2 बजकर 33 मिनट तक प्रभावी रहेगा। इसके बाद उत्तराभाद्रपद नक्षत्र आरंभ होगा।
    योग की बात करें तो परिधि योग अपराह्न 3 बजकर 59 मिनट तक रहेगा इसके पश्चात शिव योग का शुभ संयोग बनेगा।
    करण बव करण दोपहर 2 बजकर 8 मिनट तक रहेगा इसके बाद कौलव करण प्रभावी होगा।

    चंद्रमा की स्थिति
    चंद्रमा सुबह 8 बजकर 34 मिनट तक कुंभ राशि में रहेगा इसके बाद गुरु की राशि मीन में प्रवेश करेगा। इससे भावनात्मक संतुलन आध्यात्मिक झुकाव और रचनात्मक सोच में वृद्धि देखी जा सकती है। बसंत पंचमी पर चंद्रमा का मीन राशि में गोचर सरस्वती आराधना के लिए विशेष शुभ माना गया है।

    सूर्य समय
    सूर्योदय सुबह 7 बजकर 13 मिनट
    सूर्यास्त शाम 5 बजकर 52 मिनट

    आज के पर्व
    बसंत पंचमी
    श्री पंचमी
    सरस्वती पूजा
    लक्ष्मी पूजन
    आज विद्यारंभ पुस्तक पूजन और पीले वस्त्र धारण करने की परंपरा विशेष रूप से मानी जाती है।

    शुभ मुहूर्त
    ब्रह्म मुहूर्त सुबह 5:11 से 6:04
    विजय मुहूर्त दोपहर 2:08 से 2:52
    गोधूलि बेला शाम 5:42 से 6:08
    निशीथ काल रात्रि 11:54 से 12:47

    अशुभ समय
    राहुकाल सुबह 10:30 से 12:00
    गुलिक काल सुबह 7:30 से 9:00
    यमगंड दोपहर 3:30 से 4:30
    दुर्मुहूर्त सुबह 9:06 से 9:50
    पंचक पूरे दिन प्रभावी रहेगा।

    अमृत काल
    सुबह 9:53 से 11:13 तक

    धार्मिक दृष्टि से आज का दिन पूजा साधना और शुभ संकल्प के लिए अत्यंत फलदायी माना गया है। बसंत पंचमी पर मां सरस्वती की आराधना से बुद्धि विवेक स्मरण शक्ति और विद्या में वृद्धि होने का विश्वास किया जाता है।

  • बसंत पंचमी पर विद्या की अधिष्ठात्री मां सरस्वती की आराधना

    बसंत पंचमी पर विद्या की अधिष्ठात्री मां सरस्वती की आराधना


    नई दिल्ली :आज देशभर में बसंत पंचमी का पर्व श्रद्धा आस्था और उल्लास के साथ मनाया जा रहा है। माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाया जाने वाला यह पर्व विद्या ज्ञान वाणी और विवेक की देवी मां सरस्वती की उपासना के लिए विशेष माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इसी तिथि को मां सरस्वती का पृथ्वी पर प्राकट्य हुआ था। इसलिए इस दिन की गई पूजा आराधना और दान को अत्यंत फलदायी बताया गया है।

    इस वर्ष बसंत पंचमी पर ज्योतिषीय दृष्टि से भी शुभ संयोग बना हुआ है। पंचमी तिथि पूरे दिन प्रभावी है और चंद्रमा का संचार गुरु की राशि मीन में हो रहा है। ऐसे में ज्ञान और बुद्धि के कारक ग्रहों का यह योग सरस्वती साधना के लिए विशेष फल प्रदान करने वाला माना जा रहा है। मान्यता है कि इस योग में मां सरस्वती की आराधना करने से स्मरण शक्ति तेज होती है और शिक्षा कला लेखन व संगीत जैसे क्षेत्रों में प्रगति के मार्ग खुलते हैं।देशभर के विद्यालयों शिक्षण संस्थानों मंदिरों और घरों में सरस्वती पूजन का आयोजन किया गया है। विद्यार्थी अपने अध्ययन उपकरण पुस्तकों और वाद्य यंत्रों को मां सरस्वती के चरणों में समर्पित कर विद्या में सफलता की कामना कर रहे हैं। कलाकार और रचनात्मक क्षेत्रों से जुड़े लोग भी इस दिन विशेष रूप से मां सरस्वती की उपासना करते हैं।

    प्रयागराज में माघ मेले का प्रमुख स्नान पर्व
    तीर्थराज प्रयागराज में बसंत पंचमी माघ मेले का प्रमुख स्नान पर्व माना जाता है। गंगा यमुना और अदृश्य सरस्वती के पावन संगम पर सुबह से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। साधु संतों के सान्निध्य में वेद पाठ और धार्मिक अनुष्ठानों के बीच श्रद्धालुओं ने संगम में स्नान कर ज्ञान और सद्बुद्धि की कामना की। प्रशासन की ओर से सुरक्षा और व्यवस्थाओं के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं।

    पूजन की परंपरा और धार्मिक महत्व
    धार्मिक ग्रंथों के अनुसार बसंत पंचमी के दिन प्रातः स्नान कर स्वच्छ और पीले वस्त्र धारण कर पूजा करना शुभ माना जाता है। पीला रंग बसंत ऋतु उल्लास और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक है। पूजा में पीले पुष्प अक्षत धूप दीप और पीले मिष्ठान अर्पित किए जाते हैं। कई स्थानों पर भगवान विष्णु और श्रीकृष्ण राधा के पूजन की भी परंपरा है।

    शिक्षा संस्कृति और चेतना का पर्व
    बसंत पंचमी को बच्चों के विद्यारंभ संस्कार से भी जोड़ा जाता है। इस दिन छोटे बच्चों को पहली बार अक्षर ज्ञान कराया जाता है। धार्मिक विशेषज्ञों के अनुसार शुद्ध मन सात्त्विक आचरण और संयम के साथ की गई आराधना से मां सरस्वती की विशेष कृपा प्राप्त होती है। यही कारण है कि बसंत पंचमी को केवल धार्मिक पर्व नहीं बल्कि शिक्षा संस्कृति और चेतना के जागरण का दिन माना जाता है।

  • बसंत पंचमी पर मीन राशि में प्रवेश करेगा चंद्रमा, तीन राशियों पर बरसेगी मां सरस्वती की कृपा

    बसंत पंचमी पर मीन राशि में प्रवेश करेगा चंद्रमा, तीन राशियों पर बरसेगी मां सरस्वती की कृपा


    नई दिल्ली :ज्योतिष शास्त्र में चंद्रमा को मन भावनाओं और बुद्धि का कारक ग्रह माना गया है। इसकी चाल भले ही तेज हो लेकिन इसका प्रभाव व्यक्ति के जीवन पर गहरा और त्वरित होता है। इस वर्ष बसंत पंचमी के पावन अवसर पर चंद्रमा एक महत्वपूर्ण राशि परिवर्तन करने जा रहा है। 23 जनवरी 2026 की सुबह 8 बजकर 34 मिनट पर चंद्रमा शनि की राशि कुंभ से निकलकर गुरु की राशि मीन में प्रवेश करेगा।

    ज्योतिषीय दृष्टि से यह गोचर बेहद शुभ माना जा रहा है क्योंकि मीन राशि ज्ञान आध्यात्म और रचनात्मकता की प्रतीक मानी जाती है। बसंत पंचमी स्वयं विद्या और ज्ञान की देवी मां सरस्वती को समर्पित पर्व है और ऐसे में चंद्रमा का मीन राशि में प्रवेश विशेष फलदायी माना जा रहा है। इस गोचर का प्रभाव खासतौर पर शिक्षा कला लेखन संगीत शोध और करियर से जुड़े लोगों पर सकारात्मक रूप से दिखाई देगा।ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार इस चंद्र गोचर से तीन राशियों पर मां सरस्वती की विशेष कृपा बनी रहेगी। इन राशियों के जातकों को मानसिक स्पष्टता नई सोच और आगे बढ़ने के अवसर प्राप्त हो सकते हैं।

    वृषभ राशि
    वृषभ राशि के जातकों के लिए चंद्रमा का यह गोचर लाभ भाव में होगा। इससे आय में वृद्धि और करियर में सकारात्मक बदलाव के योग बन रहे हैं। नौकरीपेशा लोगों को वरिष्ठ अधिकारियों से प्रशंसा मिल सकती है और कुछ लोगों को पदोन्नति या नई जिम्मेदारी भी मिल सकती है। व्यापार से जुड़े जातकों के लिए यह समय नए सौदे और लाभ के अवसर लेकर आ सकता है। विद्यार्थियों की एकाग्रता बढ़ेगी और रचनात्मक क्षेत्रों से जुड़े लोगों को नई पहचान मिल सकती है।

    वृश्चिक राशि
    वृश्चिक राशि के जातकों के लिए चंद्रमा पंचम भाव में गोचर करेगा जो शिक्षा बुद्धि और प्रेम का भाव माना जाता है। इस दौरान मानसिक स्पष्टता बढ़ेगी और लंबे समय से अटके कार्य पूरे हो सकते हैं। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों को सकारात्मक संकेत मिल सकते हैं। करियर में भी स्थितियां अनुकूल रहेंगी और यात्रा से लाभ के योग बनेंगे।

    धनु राशि
    धनु राशि के जातकों के लिए चंद्रमा चतुर्थ भाव में प्रवेश करेगा जो सुख परिवार और मानसिक शांति का कारक है। पारिवारिक जीवन में सौहार्द बना रहेगा और माता पिता का सहयोग मिलेगा। करियर में भी सकारात्मक बदलाव संभव हैं। शिक्षा कला और रचनात्मक क्षेत्रों से जुड़े लोगों को मान सम्मान मिलने के योग हैं। मां सरस्वती की कृपा से सीखने की क्षमता और एकाग्रता में वृद्धि होगी।कुल मिलाकर बसंत पंचमी पर होने वाला यह चंद्र गोचर ज्ञान बुद्धि और प्रगति का मार्ग प्रशस्त करने वाला सिद्ध हो सकता है।