Category: Religious Astrology

  • Puja Niyam: खड़े होकर पूजा करना सही है या गलत? जानें शास्त्रीय नियम

    Puja Niyam: खड़े होकर पूजा करना सही है या गलत? जानें शास्त्रीय नियम

    नई दिल्ली। हिंदू धर्म में पूजा-पाठ को केवल एक धार्मिक क्रिया नहीं बल्कि जीवन को संतुलित और सकारात्मक ऊर्जा से भरने वाला साधन माना गया है। दैनिक जीवन में किए जाने वाले पूजन के कई नियम और विधियां शास्त्रों में विस्तार से बताए गए हैं, जिनका पालन करने से देवी-देवताओं की विशेष कृपा प्राप्त होती है।

    इसी संदर्भ में एक महत्वपूर्ण सवाल अक्सर लोगों के मन में उठता है कि क्या खड़े होकर पूजा करना सही है या गलत। आजकल कई घरों में जगह की कमी के कारण पूजा घर को दीवार पर ऊंचाई पर स्थापित कर दिया जाता है, जिसके चलते लोग खड़े होकर ही पूजा करने के लिए मजबूर हो जाते हैं। ऐसे में यह शंका और भी बढ़ जाती है कि क्या यह विधि शास्त्रसम्मत है या नहीं।

    धार्मिक मान्यताओं और शास्त्रीय नियमों के अनुसार, पूजा करते समय आसन और स्थान का विशेष महत्व होता है। शास्त्रों में बताया गया है कि पूजा करते समय बैठकर पूजा करना अधिक शुभ और फलदायी माना जाता है। इसका कारण यह है कि जब व्यक्ति आसन पर बैठकर पूजा करता है, तो उसका शरीर स्थिर रहता है और मन एकाग्र होकर ध्यान में केंद्रित हो पाता है। इससे पूजा का प्रभाव अधिक गहरा माना जाता है।

    इसके विपरीत, खड़े होकर पूजा करने की स्थिति में मन और शरीर में वह स्थिरता नहीं बन पाती, जो ध्यान और साधना के लिए आवश्यक मानी जाती है। शास्त्रीय मान्यताओं के अनुसार, पूजा के दौरान भक्त का आसन भगवान के आसन से ऊंचा नहीं होना चाहिए। यदि ऐसा होता है तो इसे पूजा के नियमों के विरुद्ध माना गया है।

    पूजा के दौरान दिशा का भी विशेष महत्व बताया गया है। माना जाता है कि पूजा करते समय मुख पूर्व दिशा की ओर होना चाहिए, क्योंकि यह दिशा सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक मानी जाती है। इसके अलावा पूजा सामग्री जैसे धूप, दीप, अगरबत्ती और घंटी को दाईं ओर रखना चाहिए, जबकि फूल, फल, जल और शंख को बाईं ओर रखना शुभ माना गया है।

    धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, जब इन सभी नियमों का पालन किया जाता है, तो पूजा अधिक प्रभावी और फलदायी मानी जाती है। ऐसा करने से मन में शांति, स्थिरता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है, जिससे जीवन में आने वाली नकारात्मकता दूर होती है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि पूजा केवल एक बाहरी प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह एक आंतरिक साधना भी है, जिसमें अनुशासन और श्रद्धा दोनों का होना आवश्यक है। इसलिए चाहे मंदिर हो या घर, यदि संभव हो तो बैठकर ही पूजा करना अधिक उचित माना जाता है।

    कुल मिलाकर, शास्त्रीय दृष्टि से देखा जाए तो बैठकर पूजा करना श्रेष्ठ माना गया है, जबकि खड़े होकर पूजा करना परिस्थितियों पर निर्भर हो सकता है, लेकिन इसे आदर्श विधि नहीं माना गया है।

  • 27 मई से बनेगा व्यातिपात योग, सूर्य-चंद्रमा की खास स्थिति से इन 3 राशियों को रहना होगा सतर्क

    27 मई से बनेगा व्यातिपात योग, सूर्य-चंद्रमा की खास स्थिति से इन 3 राशियों को रहना होगा सतर्क

    नई दिल्ली। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार मई के अंतिम सप्ताह में एक महत्वपूर्ण ग्रह योग बनने जा रहा है, जिसे व्यातिपात योग कहा जाता है। यह योग 27 मई को सूर्य और चंद्रमा की विशेष स्थिति के कारण निर्मित होगा। ज्योतिषीय मान्यताओं के मुताबिक, जब सूर्य और चंद्रमा 180 डिग्री की विपरीत स्थिति में आते हैं, तब यह योग बनता है, जिसे ऊर्जावान लेकिन तनावपूर्ण माना जाता है।

    ज्योतिषाचार्यों के अनुसार यह योग 27 मई सुबह 3 बजे से शुरू होकर 30 मई तक प्रभावी रहेगा। इस दौरान मानसिक तनाव, कार्यों में रुकावट और निर्णय लेने में भ्रम जैसी स्थितियां बन सकती हैं। इसलिए इस अवधि में नए या शुभ कार्य शुरू करने से बचने की सलाह दी जाती है।

    क्या है व्यातिपात योग?
    ज्योतिष शास्त्र में व्यातिपात योग को विशेष और संवेदनशील योग माना गया है। सूर्य और चंद्रमा की आमने-सामने की स्थिति के कारण ब्रह्मांडीय ऊर्जा का प्रभाव बढ़ जाता है, जिससे लोगों के व्यवहार, निर्णय और दैनिक कार्य प्रभावित हो सकते हैं। इस समय कई बार योजनाओं में बाधाएं और मानसिक अस्थिरता देखने को मिलती है।

    इन 3 राशियों को रहना होगा ज्यादा सावधान

    वृषभ राशि
    वृषभ राशि के जातकों के लिए यह समय आर्थिक मामलों में सतर्कता बरतने का संकेत दे रहा है।
    – बड़े निवेश या पैसों के लेन-देन में जल्दबाजी से बचें।
    – खर्चों पर नियंत्रण रखना जरूरी होगा।
    – धैर्य और समझदारी से लिया गया फैसला नुकसान से बचा सकता है।

    सिंह राशि
    सिंह राशि वालों को कार्यक्षेत्र में संयम बनाए रखने की सलाह दी गई है।
    – ऑफिस में सहकर्मियों या वरिष्ठ अधिकारियों के साथ मतभेद की स्थिति बन सकती है।
    – किसी भी महत्वपूर्ण आर्थिक निर्णय को सोच-समझकर लें।
    – जल्दबाजी में प्रतिक्रिया देने से बचना लाभकारी रहेगा।

    कन्या राशि
    कन्या राशि के लोगों के लिए यह समय वाणी और व्यवहार पर नियंत्रण रखने का है।
    – छोटी बात भी विवाद का कारण बन सकती है।
    – किसी भी परिस्थिति में तुरंत प्रतिक्रिया देने से बचें।
    – शांत और संतुलित व्यवहार से कई परेशानियों से बचा जा सकता है।

    शुभ कार्यों में बरतें सावधानी
    ज्योतिष विशेषज्ञों का मानना है कि व्यातिपात योग के दौरान नए कार्य, बड़े निवेश, शुभ आयोजन या महत्वपूर्ण फैसले टालना बेहतर माना जाता है। इस समय मानसिक संतुलन और धैर्य बनाए रखना सबसे जरूरी होगा।

  • Vastu Tips: शनिवार को नमक दान करना शुभ है या अशुभ? जानें नियम

    Vastu Tips: शनिवार को नमक दान करना शुभ है या अशुभ? जानें नियम


    नई दिल्ली । वास्तु और ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार शनिवार के दिन नमक का दान करने से बचना चाहिए। कहा जाता है कि इस दिन नमक दान करने से शनिदेव नाराज हो सकते हैं, जिससे व्यक्ति को आर्थिक, मानसिक और पारिवारिक समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।
    शनिवार को नमक दान करने से क्या हो सकते हैं नुकसान?
    आर्थिक तंगी और बरकत में कम
    मान्यता है कि शनिवार को नमक दान करने से घर की सुख-समृद्धि प्रभावित हो सकती है। इससे धन हानि और आर्थिक परेशानियां बढ़ने की आशंका रहती है।

    नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव
    वास्तु शास्त्र के अनुसार नमक ऊर्जा से जुड़ी वस्तु माना जाता है। शनिवार को इसका दान या खरीदारी करने से घर में नकारात्मक ऊर्जा बढ़ सकती है और कर्ज संबंधी परेशानियां सामने आ सकती हैं।

    परिवार में तनाव
    ऐसी भी मान्यता है कि शनिवार को नमक देने से परिवार के सदस्यों के बीच मतभेद और दूरी बढ़ सकती है। घर का माहौल तनावपूर्ण हो सकता है।

    शनिवार को किन चीजों का दान करना शुभ माना गया है?
    शनिवार के दिन शनिदेव की कृपा पाने और शनि दोष कम करने के लिए इन चीजों का दान शुभ माना जाता है-
    सरसों का तेल
    काले तिल
    उड़द की दाल
    काले कपड़े या कंबल
    लोहे की वस्तुएं
    मान्यता है कि इन वस्तुओं का दान करने से शनि दोष शांत होता है और जीवन में सकारात्मकता आती है।

    क्या करें
    अगर शनिवार को किसी जरूरतमंद की मदद करनी हो, तो नमक की जगह अन्न, वस्त्र या तेल का दान करना बेहतर माना जाता है। साथ ही शनिदेव की पूजा, हनुमान चालीसा का पाठ और पीपल के पेड़ के नीचे दीपक जलाना भी शुभ माना जाता है।

  • शनिवार व्रत से जुड़े जरूरी नियम और धार्मिक मान्यताएं

    शनिवार व्रत से जुड़े जरूरी नियम और धार्मिक मान्यताएं


    नई दिल्ली । हिंदू धर्म में शनिवार का दिन शनिदेव को समर्पित माना गया है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार जिन लोगों पर शनि की साढ़ेसाती, ढैय्या या शनि दोष चल रहा हो, उनके लिए शनिवार का व्रत बेहद लाभकारी माना जाता है। मान्यता है कि श्रद्धा और नियमपूर्वक रखा गया शनिवार व्रत जीवन की बाधाओं, आर्थिक परेशानियों और मानसिक तनाव को कम करने में मदद करता है।

    हालांकि, कई लोग यह सवाल करते हैं कि क्या शनिदेव के लिए व्रत रखना सही है? ज्योतिषाचार्यों के अनुसार यदि पूरी श्रद्धा, संयम और नियमों के साथ व्रत रखा जाए तो यह शुभ फलदायी माना जाता है।

    शनिवार व्रत के प्रमुख नियम–


    सुबह जल्दी उठकर स्नान करें
    शनिवार के दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और साफ काले, नीले या गहरे रंग के वस्त्र पहनें। इसके बाद शनिदेव का ध्यान करें।

    पीपल के पेड़ की पूजा
    शनिवार को पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाना शुभ माना जाता है। मान्यता है कि इससे शनि दोष कम होता है।

    इन चीजों का करें दान
    शनिवार को काले तिल, उड़द दाल, सरसों का तेल, काला कपड़ा, लोहे की वस्तुएं और कंबल का दान करना शुभ माना जाता है।

    हनुमानजी की पूजा भी करें
    ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार हनुमानजी की पूजा करने से भी शनि के अशुभ प्रभाव कम होते हैं। शनिवार को हनुमान चालीसा और सुंदरकांड का पाठ लाभकारी माना जाता है।

  • शनि दोष से बचना है तो जान लें जूते-चप्पल खरीदने के सही और गलत दिन

    शनि दोष से बचना है तो जान लें जूते-चप्पल खरीदने के सही और गलत दिन


    नई दिल्ली । वास्तु शास्त्र और ज्योतिष मान्यताओं में रोजमर्रा की चीजों की खरीदारी को भी शुभ-अशुभ से जोड़ा गया है। खासतौर पर जूते-चप्पल खरीदने को लेकर कई नियम बताए गए हैं। मान्यता है कि गलत दिन पर जूते-चप्पल खरीदने से जीवन में नकारात्मकता, आर्थिक परेशानी और शनिदेव की नाराजगी का सामना करना पड़ सकता है। अमावस्या, मंगलवार, शनिवार और ग्रहण वाले दिन जूते-चप्पल खरीदने से बचना चाहिए। माना जाता है कि इन दिनों खरीदे गए फुटवियर दुर्भाग्य और मानसिक तनाव को बढ़ा सकते हैं।

    शनिवार को जूते-चप्पल खरीदना क्यों माना जाता है अशुभ?
    ज्योतिष शास्त्र में पैरों का संबंध शनिदेव से माना गया है। इसलिए शनिवार के दिन जूते-चप्पल खरीदना शुभ नहीं माना जाता। मान्यता है कि इससे शनि दोष बढ़ सकता है और व्यक्ति को आर्थिक तंगी, तनाव और पारिवारिक परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।

    नए जूते-चप्पल खरीदने का सबसे शुभ दिन कौन सा है?
    वास्तु शास्त्र के अनुसार शुक्रवार का दिन नए जूते-चप्पल खरीदने और पहनने के लिए सबसे शुभ माना गया है। कहा जाता है कि शुक्रवार को खरीदे गए फुटवियर सुख-सुविधा और सकारात्मक ऊर्जा लेकर आते हैं।

    पुराने जूते-चप्पल कब हटाने चाहिए
    मान्यता के अनुसार फटे-पुराने या इस्तेमाल में नहीं आने वाले जूते-चप्पल शनिवार के दिन किसी शनि मंदिर के बाहर छोड़ना शुभ माना जाता है। इससे शनि की अशुभ दृष्टि कम होती है और नकारात्मकता दूर होती है।

    जूते-चप्पल रखने से जुड़े वास्तु नियम

    बेड के नीचे जूते-चप्पल नहीं रखने चाहिए
    पूजा घर के पास फुटवियर रखना अशुभ माना जाता है
    घर के मुख्य दरवाजे पर बिखरे जूते नकारात्मक ऊर्जा बढ़ाते हैं
    गंदे और टूटे फुटवियर घर में रखने से मानसिक तनाव बढ़ सकता है
    वास्तु मान्यताओं के अनुसार साफ-सुथरे और व्यवस्थित जूते-चप्पल घर में सकारात्मक ऊर्जा बनाए रखने में मदद करते हैं।
  • मिथुन राशि वालों के लिए सफलता और लाभ का दिन, कारोबार में बढ़ेंगे आय के स्रोत

    मिथुन राशि वालों के लिए सफलता और लाभ का दिन, कारोबार में बढ़ेंगे आय के स्रोत


    नई दिल्ली। मिथुन राशि के जातकों के लिए 23 मई 2026 का दिन ऊर्जा, आत्मविश्वास और सकारात्मक अवसरों से भरा रहेगा। कारोबार में नए आय स्रोत बनने के संकेत हैं, वहीं कार्यक्षेत्र में आपकी प्रभावशाली शैली लोगों को प्रभावित करेगी। सामाजिक दायरा बढ़ेगा और मित्रों व सहकर्मियों से बेहतर तालमेल बना रहेगा।

    आपको व्यापार में तेजी देखने को मिल सकती है। पुराने रुके हुए काम गति पकड़ेंगे और नए संपर्क भविष्य में लाभ दिला सकते हैं। नौकरीपेशा लोगों के लिए भी दिन अनुकूल रहेगा। अधिकारी आपके काम से प्रभावित होंगे और टीमवर्क मजबूत होगा।

    पारिवारिक जीवन में सुखद वातावरण बना रहेगा। भाईचारा और रिश्तों में मधुरता बढ़ेगी। मन की बात खुलकर कह पाएंगे और परिवार के साथ अच्छा समय बिताने का मौका मिलेगा। यात्रा के योग भी बन रहे हैं, जो लाभदायक साबित हो सकती है।

    आर्थिक स्थिति मजबूत रहेगी। निवेश और नए कार्यों में लाभ मिलने की संभावना है। छात्रों और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं को मेहनत का सकारात्मक परिणाम मिल सकता है।

    स्वास्थ्य के लिहाज से दिन अच्छा रहेगा। मानसिक उत्साह और ऊर्जा बनी रहेगी। योग और ध्यान से और अधिक सकारात्मकता महसूस करेंगे।

    शुभ रंग: आसमानी
    शुभ अंक: 2, 5, 8

    उपाय:
    शनिदेव और हनुमानजी का स्मरण करें, तिल का दान करें और सभी के प्रति समभाव बनाए रखें।

  • 23 मई 2026 का राशिफल: किस राशि का दिन रहेगा शानदार, जानें भविष्यफल

    23 मई 2026 का राशिफल: किस राशि का दिन रहेगा शानदार, जानें भविष्यफल


    नई दिल्ली। 23 मई 2026 का दिन कई राशियों के लिए नई संभावनाएं लेकर आ रहा है। खासतौर पर कुंभ राशि वालों के रुके हुए काम पूरे हो सकते हैं, जबकि तुला राशि के जातकों को व्यापार में बड़ा लाभ मिलने के योग हैं। मिथुन और सिंह राशि वालों का आत्मविश्वास बढ़ेगा, वहीं मकर और कन्या राशि को सतर्क रहने की सलाह दी गई है। आइए जानते हैं सभी 12 राशियों का विस्तृत राशिफल।

    मेष
    मेष राशि वालों के लिए दिन उत्साह और आत्मविश्वास से भरा रहेगा। कार्यक्षेत्र में आपकी सक्रियता बढ़ेगी और विरोधी भी दबाव में रहेंगे। करियर में नए अवसर मिल सकते हैं। आर्थिक स्थिति संतुलित बनी रहेगी। योग और ध्यान से स्वास्थ्य अच्छा रहेगा।

    वृष
    वृष राशि वालों को पारिवारिक मामलों में धैर्य रखने की जरूरत है। जल्दबाजी से नुकसान हो सकता है। आर्थिक स्थिति मजबूत रहेगी और वाहन या संपत्ति खरीदने के योग बन रहे हैं। स्वास्थ्य को लेकर सतर्क रहें।

    मिथुन
    मिथुन राशि वालों के लिए दिन बेहद सकारात्मक रहेगा। व्यापार में तेजी आएगी और सामाजिक दायरा बढ़ेगा। भाईचारा और रिश्तों में मजबूती आएगी। यात्रा लाभकारी साबित हो सकती है। मन प्रसन्न रहेगा।

    कर्क
    कर्क राशि वालों को आर्थिक मामलों में सफलता मिल सकती है। परिवार में सुख-सुविधाएं बढ़ेंगी। व्यापार में आकर्षक अवसर मिलेंगे। प्रियजनों से मुलाकात संभव है और मानसिक उत्साह बना रहेगा।

    सिंह
    सिंह राशि वालों का प्रभाव और सम्मान बढ़ेगा। नई योजनाओं को गति मिलेगी। मित्रों और सहयोगियों का साथ मिलेगा। यात्रा के योग बन रहे हैं। परिवार में प्रेम और भावनात्मक संतुलन बना रहेगा।

    कन्या
    कन्या राशि वालों को खर्चों पर नियंत्रण रखने की जरूरत है। निवेश और लेनदेन में सावधानी बरतें। कार्यस्थल पर नियमों की अनदेखी नुकसान पहुंचा सकती है। स्वास्थ्य को लेकर लापरवाही न करें।

    तुला
    तुला राशि वालों के लिए व्यापार में बड़ा लाभ मिलने के संकेत हैं। पुराने रुके हुए कार्य पूरे हो सकते हैं। आत्मविश्वास बढ़ेगा और प्रभावशाली लोगों का सहयोग मिलेगा। रिश्तों में मधुरता बनी रहेगी।

    वृश्चिक
    वृश्चिक राशि वालों के लिए करियर में उन्नति के अवसर बन रहे हैं। प्रशासन और अधिकारियों का सहयोग मिलेगा। आर्थिक लाभ के योग हैं। स्वास्थ्य बेहतर रहेगा और परिवार में सुख-शांति बनी रहेगी।

    धनु
    धनु राशि वालों के लिए भाग्य का साथ मिलने वाला है। धार्मिक गतिविधियों और यात्राओं में रुचि बढ़ेगी। नए अनुबंध और लाभ के अवसर सामने आएंगे। मित्रों का सहयोग मिलेगा।

    मकर
    मकर राशि वालों को स्वास्थ्य और खर्चों को लेकर सतर्क रहने की जरूरत है। भावनात्मक दबाव बढ़ सकता है। लेनदेन में स्पष्टता रखें और किसी भी निर्णय में जल्दबाजी न करें।

    कुंभ
    कुंभ राशि वालों के लिए दिन बेहद शुभ संकेत लेकर आया है। लंबे समय से रुका हुआ बड़ा काम पूरा हो सकता है। व्यापार में लाभ बढ़ेगा और टीमवर्क से सफलता मिलेगी। परिवार में सामंजस्य रहेगा और आर्थिक स्थिति मजबूत होगी।

    मीन
    मीन राशि वालों को कामकाज में अनुशासन बनाए रखने की जरूरत है। निवेश सोच-समझकर करें। रिश्तों में धैर्य रखें और अफवाहों से दूर रहें। स्वास्थ्य को लेकर सजग रहना जरूरी होगा।

  • गजकेसरी और बुधादित्य योग का शुभ संयोग, आज से इन 5 राशियों के तरक्की और धन लाभ के योग

    गजकेसरी और बुधादित्य योग का शुभ संयोग, आज से इन 5 राशियों के तरक्की और धन लाभ के योग

    नई दिल्ली। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार आज ग्रहों की विशेष स्थिति से गजकेसरी योग और बुधादित्य योग का दुर्लभ संयोग बन रहा है। यह योग बेहद शुभ माना जाता है और इसका प्रभाव कई राशियों के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सकता है। गजकेसरी योग गुरु बृहस्पति और चंद्रमा की युति से बनता है, जो सुख-समृद्धि और मान-सम्मान प्रदान करता है। वहीं सूर्य और बुध की युति से बनने वाला बुधादित्य योग बुद्धि, करियर और व्यापार में सफलता दिलाने वाला माना गया है।

    इन दोनों शुभ योगों के प्रभाव से 5 राशियों के लिए आज से अच्छे दिनों की शुरुआत के संकेत मिल रहे हैं। लंबे समय से अटके कार्य पूरे हो सकते हैं और आर्थिक लाभ के भी मजबूत योग बन रहे हैं।

    मेष राशि
    मेष राशि वालों के लिए यह समय बेहद अनुकूल रहने वाला है। कार्यक्षेत्र में आपकी मेहनत की सराहना होगी और वरिष्ठ अधिकारियों का सहयोग मिलेगा। व्यापार में नई डील या बड़ा लाभ मिलने के संकेत हैं। सरकारी कार्यों या कानूनी मामलों में सकारात्मक प्रगति देखने को मिल सकती है।

    मिथुन राशि
    मिथुन राशि के जातकों को बुध की शुभ स्थिति का विशेष लाभ मिल सकता है। धन लाभ के प्रबल योग बन रहे हैं। पुराने निवेश से अच्छा रिटर्न मिलने की संभावना है। नौकरीपेशा लोगों को प्रमोशन या नई जिम्मेदारी मिल सकती है। निर्णय क्षमता मजबूत रहेगी।

    सिंह राशि
    सिंह राशि वालों का आत्मविश्वास और प्रभाव बढ़ने वाला है। नौकरी बदलने की कोशिश कर रहे लोगों को सफलता मिल सकती है। कार्यस्थल पर आपकी नेतृत्व क्षमता की प्रशंसा होगी। वाहन या प्रॉपर्टी खरीदने की योजना साकार हो सकती है।

    तुला राशि
    तुला राशि के लिए यह योग आर्थिक और पारिवारिक सुख लेकर आ सकता है। आय के नए स्रोत बन सकते हैं, जिससे आर्थिक स्थिति मजबूत होगी। पुराने कर्ज से राहत मिलने की संभावना है। परिवार में चल रहे मतभेद दूर हो सकते हैं। पैतृक संपत्ति से जुड़े मामलों में सफलता मिलने के योग हैं।

    धनु राशि
    गुरु ग्रह की कृपा से धनु राशि पर इस योग का प्रभाव सबसे अधिक शुभ माना जा रहा है। रुके हुए कार्यों में तेजी आएगी। विदेश यात्रा या उच्च शिक्षा से जुड़े प्रयास सफल हो सकते हैं। कारोबार में नए अवसर मिल सकते हैं। बड़े प्रोजेक्ट या ऑर्डर मिलने से प्रतिष्ठा बढ़ेगी।

  • पुरुषोत्तम मास में सावधानी: घर में न रखें ये वस्तुएं, सुख-शांति पर पड़ सकता है असर

    पुरुषोत्तम मास में सावधानी: घर में न रखें ये वस्तुएं, सुख-शांति पर पड़ सकता है असर


    नई दिल्ली। हिंदू पंचांग में Purushottam Maas को अत्यंत पवित्र और विशेष महीना माना जाता है। यह अवधि भगवान विष्णु को समर्पित होती है, जिसमें श्रद्धालु पूजा-पाठ, दान-पुण्य और धार्मिक अनुष्ठानों के माध्यम से आध्यात्मिक लाभ प्राप्त करते हैं। मान्यता है कि इस महीने किए गए शुभ कार्य कई गुना फल देते हैं, लेकिन इसी के साथ वास्तु शास्त्र में कुछ विशेष सावधानियां भी बताई गई हैं।

    वास्तु विशेषज्ञों के अनुसार, पुरुषोत्तम मास के दौरान घर में रखी कुछ वस्तुएं नकारात्मक ऊर्जा को बढ़ा सकती हैं और परिवार की सुख-शांति पर असर डाल सकती हैं। इसलिए इस अवधि में विशेष रूप से घर की सफाई और अनावश्यक वस्तुओं को हटाने पर जोर दिया जाता है।

    सबसे पहले जिन चीजों से बचने की सलाह दी गई है, वे हैं टूटी हुई देवी-देवताओं की मूर्तियां। घर में किसी भी प्रकार की खंडित मूर्ति रखना वास्तु दोष का कारण माना जाता है। ऐसी मूर्तियां नकारात्मक ऊर्जा का संचार करती हैं और पारिवारिक शांति को प्रभावित कर सकती हैं। इसलिए इन्हें नदी या पवित्र जल में विसर्जित करने की सलाह दी जाती है।

    इसके अलावा सूखे या मुरझाए हुए पौधे भी इस पवित्र माह में अशुभ माने गए हैं। घर में रखे सूखे पौधे न केवल वातावरण की ताजगी को कम करते हैं, बल्कि नकारात्मक ऊर्जा को भी बढ़ाते हैं। इसके स्थान पर हरे-भरे पौधे, विशेषकर तुलसी का पौधा, अत्यंत शुभ माना गया है क्योंकि यह घर में सकारात्मक ऊर्जा और समृद्धि लाता है।

    वास्तु शास्त्र में टूटे-फूटे कांच के बर्तनों को भी अशुभ बताया गया है। ऐसे बर्तन घर में रखने से आर्थिक परेशानियों और बाधाओं का संकेत मिलता है। इसलिए पुरुषोत्तम मास में इन्हें तुरंत घर से बाहर कर देना चाहिए ताकि घर में समृद्धि और स्थिरता बनी रहे।

    इसी तरह बंद पड़ी या खराब घड़ियां भी नकारात्मकता का प्रतीक मानी जाती हैं। समय रुकना प्रगति में बाधा का संकेत माना जाता है, और वास्तु के अनुसार यह परिवार के विकास और तरक्की को प्रभावित कर सकता है। इसलिए ऐसी घड़ियों को या तो ठीक करवा लेना चाहिए या फिर घर से हटा देना चाहिए।

    पुरुषोत्तम मास में धार्मिक आस्था के साथ-साथ घर के वातावरण को भी शुद्ध और सकारात्मक बनाए रखना अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। माना जाता है कि इस अवधि में किया गया हर छोटा सुधार भी जीवन में बड़े बदलाव ला सकता है।

    कुल मिलाकर यह पवित्र महीना भक्तों के लिए भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त करने का अवसर है, और साथ ही यह समय घर को नकारात्मक ऊर्जा से मुक्त करने और सकारात्मकता बढ़ाने का भी संदेश देता है।

  • Sawan 2026: इस बार कब-कब पड़ेंगे सावन सोमवार, नोट कर लें पूरी लिस्ट

    Sawan 2026: इस बार कब-कब पड़ेंगे सावन सोमवार, नोट कर लें पूरी लिस्ट


    नई दिल्ली। भगवान शिव की भक्ति का सबसे पावन और महत्वपूर्ण महीना Shravan Month हर साल श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया जाता है। इस दौरान शिवभक्त उपवास रखते हैं, रुद्राभिषेक करते हैं और मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना के जरिए भोलेनाथ की कृपा पाने का प्रयास करते हैं। साल 2026 में भी सावन का यह पवित्र महीना भक्तों के लिए विशेष महत्व लेकर आ रहा है।

    पंचांग गणना के अनुसार सावन 2026 की शुरुआत 30 जुलाई 2026 से होगी, जब सावन कृष्ण प्रतिपदा तिथि का आरंभ होगा। वहीं यह पावन महीना 28 अगस्त 2026 को श्रावण पूर्णिमा के साथ समाप्त हो जाएगा। लगभग एक महीने तक चलने वाले इस धार्मिक काल में वातावरण पूरी तरह शिवमय हो जाता है और हर तरफ “ॐ नमः शिवाय” के जयकारे गूंजने लगते हैं।

    इस बार सावन के दौरान कुल 4 सावन सोमवार पड़ रहे हैं, जिन्हें शिवभक्त अत्यंत शुभ मानते हैं। मान्यता है कि सावन सोमवार के दिन भगवान शिव की पूजा करने से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और जीवन में सुख-समृद्धि आती है। खासकर कुंवारी कन्याएं अच्छे जीवनसाथी की प्राप्ति के लिए और श्रद्धालु अपने कष्टों के निवारण के लिए व्रत रखते हैं।

    सावन 2026 के सावन सोमवार इस प्रकार रहेंगे-
    पहला सावन सोमवार: 3 अगस्त 2026
    दूसरा सावन सोमवार: 10 अगस्त 2026
    तीसरा सावन सोमवार: 17 अगस्त 2026
    चौथा सावन सोमवार: 24 अगस्त 2026

    इन सभी सोमवारों पर देशभर के शिव मंदिरों में विशेष भीड़ देखने को मिलेगी। भक्त सुबह से ही शिवलिंग पर जल, दूध और गंगाजल अर्पित कर पूजा-अर्चना करेंगे। कई स्थानों पर रुद्राभिषेक और भजन-कीर्तन का आयोजन भी किया जाएगा, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठता है।

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सावन में भगवान शिव की पूजा का विशेष महत्व होता है क्योंकि इस समय भगवान शिव पृथ्वी पर अपने भक्तों के अधिक करीब माने जाते हैं। इसी कारण इस महीने को शिव कृपा प्राप्ति का सबसे उत्तम समय माना गया है।

    पूजा विधि की बात करें तो श्रद्धालु शिवलिंग पर जल और दूध अर्पित करने के बाद बेलपत्र, धतूरा, भांग, फूल और चंदन चढ़ाते हैं। इसके बाद “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का 108 बार जाप किया जाता है। अंत में शिव चालीसा और आरती के साथ पूजा संपन्न की जाती है।

    कुल मिलाकर सावन 2026 शिवभक्तों के लिए आस्था, भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा का एक विशेष संगम लेकर आ रहा है, जिसका इंतजार हर श्रद्धालु पूरे वर्ष करता है।