Category: Religious Astrology

  • फाल्गुन 2026: फाल्गुन मास कब से कब तक, जानें शुभ-अशुभ नियम और पूजा का महत्व

    फाल्गुन 2026: फाल्गुन मास कब से कब तक, जानें शुभ-अशुभ नियम और पूजा का महत्व


    नई दिल्ली । सनातन परंपरा में फाल्गुन मास को अत्यंत पावन माना गया है। यह महीना भगवान श्रीकृष्ण को विशेष प्रिय है और ब्रज क्षेत्र में इस दौरान होली का उत्सव बड़े उल्लास के साथ मनाया जाता है। फाल्गुन मास के साथ ही महाशिवरात्रि का पर्व भी आता है, जब श्रद्धालु विधि-विधान से भगवान शिव की उपासना करते हैं। यही नहीं, इस माह को चंद्र देव से भी जोड़कर देखा गया है, इसलिए उनकी आराधना से मानसिक शांति और सुख की प्राप्ति होती है। वैदिक पंचांग के अनुसार फाल्गुन मास 02 फरवरी 2026 से प्रारंभ होकर 03 मार्च 2026 तक रहेगा। इसके अगले दिन 04 मार्च से चैत्र मास का आरंभ होगा। इस महीने में किए जाने वाले धार्मिक और सामाजिक अनुष्ठान विशेष फलदायी माने जाते हैं।

    फाल्गुन मास में भगवान श्रीकृष्ण और भगवान शिव की पूजा-अर्चना अत्यंत शुभ मानी जाती है। प्रतिदिन शिवलिंग का जल, दूध और बेलपत्र से अभिषेक करने से कष्टों में कमी आती है और जीवन में सुख-शांति बढ़ती है। साथ ही अन्न, धन और वस्त्रों का दान करने से आर्थिक समृद्धि और सामाजिक प्रतिष्ठा बढ़ती है। पितरों की कृपा पाने के लिए तर्पण और दान करना भी लाभकारी माना गया है, जिससे परिवार में सुख-शांति और सौहार्द्र का वातावरण बनता है। हालांकि, फाल्गुन मास में कुछ वर्जित कर्म भी बताए गए हैं। होलाष्टक के दौरान विवाह, मुंडन, गृह प्रवेश जैसे शुभ कार्य टालने चाहिए। इसके अलावा मांस-मदिरा और नशीले पदार्थों का सेवन न करना, बुजुर्गों और महिलाओं का अपमान न करना और कटु भाषा से दूर रहना अनिवार्य है। धार्मिक मान्यता के अनुसार रविवार और एकादशी के दिन तुलसी के पत्ते न तोड़ें और पौधों में जल अर्पित करने से बचें।

    इस माह की विशेषता यह है कि यह न केवल भगवान श्रीकृष्ण और शिव की आराधना के लिए श्रेष्ठ माना जाता है, बल्कि पितृ तर्पण, दान और सामाजिक सदाचार के लिए भी महत्वपूर्ण है। फाल्गुन मास का पालन नियमपूर्वक करने से जीवन में शांति, सुख-समृद्धि और आध्यात्मिक प्रगति प्राप्त होती है। कुल मिलाकर फाल्गुन 2026 का यह पावन माह धार्मिक क्रियाओं, पूजा-अर्चना और सामाजिक दायित्वों का समन्वय है। इस मास में किए गए शुभ कार्यों से व्यक्ति और परिवार दोनों का कल्याण होता है, जबकि वर्जित कर्मों से बचकर जीवन में नकारात्मक प्रभावों से मुक्ति मिलती है।

  • गुप्त नवरात्र 2026: घटस्थापना पर विशेष मंत्र जप से दूर होंगे दुख, घर में आएगी सुख-समृद्धि

    गुप्त नवरात्र 2026: घटस्थापना पर विशेष मंत्र जप से दूर होंगे दुख, घर में आएगी सुख-समृद्धि


    नई दिल्ली । गुप्त नवरात्र 2026 का पावन पर्व इस वर्ष 19 जनवरी से आरंभ होकर 27 जनवरी तक श्रद्धा और साधना के साथ मनाया जाएगा। माघ माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से नवमी तिथि तक चलने वाले गुप्त नवरात्र को शक्ति उपासना का अत्यंत महत्वपूर्ण काल माना गया है। इस दौरान दस महाविद्याओं और मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की गुप्त साधना की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस कालखंड में की गई उपासना साधक को शीघ्र फल प्रदान करती है और जीवन से नकारात्मक शक्तियों का नाश करती है। गुप्त नवरात्र की शुरुआत घटस्थापना से होती है, जिसे अत्यंत शुभ माना गया है। मान्यता है कि घटस्थापना के समय यदि विशेष मंत्रों का जप किया जाए तो घर में सुख, शांति और समृद्धि का वास होता है। घटस्थापना के दौरान मां दुर्गा का आवाहन कर उनके बीज मंत्रों का जप करने से मानसिक, आर्थिक और पारिवारिक कष्ट दूर होते हैं। शास्त्रों में उल्लेख है कि इस समय श्रद्धा और नियमपूर्वक की गई साधना व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाती है।

    गुप्त नवरात्र को अन्य नवरात्रों से अलग इसलिए माना जाता है क्योंकि इसमें साधना को गोपनीय रखा जाता है। विशेष रूप से तांत्रिक साधक, सिद्धि प्राप्त करने वाले उपासक और शक्ति आराधक इस समय मंत्र, तंत्र और यंत्र साधना करते हैं। माना जाता है कि इन नौ दिनों में दस महाविद्याएंकाली, तारा, षोडशी, भुवनेश्वरी, त्रिपुर भैरवी, छिन्नमस्ता, धूमावती, बगलामुखी, मातंगी और कमला अपने साधकों पर विशेष कृपा करती हैं। धार्मिक विश्वास है कि गुप्त नवरात्र में मां दुर्गा की आराधना करने से न केवल मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं, बल्कि जीवन में आ रही बाधाएं भी दूर होती हैं। जो भक्त श्रद्धा से व्रत रखते हैं और नियमपूर्वक पूजा करते हैं, उन्हें आत्मिक शांति के साथ-साथ भौतिक सुखों की भी प्राप्ति होती है। विशेषकर जिन लोगों के जीवन में लंबे समय से कष्ट, रोग या आर्थिक समस्याएं बनी हुई हैं, उनके लिए यह साधना काल अत्यंत फलदायी माना गया है।

    माघ माह में सूर्य उत्तरायण रहता है, जिसे शुभ कार्यों के लिए श्रेष्ठ समय माना गया है। इसी कारण माघी गुप्त नवरात्र का महत्व और भी बढ़ जाता है। इस दौरान देवी मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना, हवन और मंत्र जप किए जाते हैं। कई श्रद्धालु इन नौ दिनों तक संयम, सात्विक आहार और नियमित पूजा के माध्यम से मां शक्ति की आराधना करते हैं। कुल मिलाकर गुप्त नवरात्र 2026 साधना, तप और श्रद्धा का ऐसा पावन अवसर है, जिसमें घटस्थापना से लेकर नवमी तक मां दुर्गा और दस महाविद्याओं की उपासना कर भक्त अपने जीवन में सुख, शांति और समृद्धि की कामना कर सकते हैं।

  • सर्वार्थसिद्धि योग में माघी गुप्त नवरात्र आरंभ, नौ दिनों में बनेंगे छह शुभ योग

    सर्वार्थसिद्धि योग में माघी गुप्त नवरात्र आरंभ, नौ दिनों में बनेंगे छह शुभ योग


    उज्जैन । साधना, तंत्र और मंत्र आराधना के लिए विशेष माने जाने वाले माघी गुप्त नवरात्र का शुभारंभ इस वर्ष सर्वार्थसिद्धि योग में हुआ है। सोमवार से प्रारंभ हुए इन गुप्त नवरात्रों में पूरे नौ दिनों तक देवी उपासना का विशेष संयोग बन रहा है। ज्योतिषीय दृष्टि से इस बार ग्रह-नक्षत्रों की स्थिति अत्यंत शुभ मानी जा रही है, जिसके कारण साधकों को मनवांछित फल मिलने की प्रबल संभावना है।

    माघ मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से नवमी तक चलने वाले इन गुप्त नवरात्रों का उल्लेख श्रीमद् देवी भागवत महापुराण में भी मिलता है। शास्त्रों के अनुसार वर्षभर में चार नवरात्र होते हैं, जिनमें चैत्र और अश्विन मास के नवरात्र प्राकट्य नवरात्र कहलाते हैं, जबकि माघ और आषाढ़ मास के नवरात्र गुप्त नवरात्र माने गए हैं। गुप्त नवरात्र विशेष रूप से तांत्रिक साधना, मंत्र-सिद्धि और यंत्र आराधना के लिए महत्वपूर्ण होते हैं, जिन्हें साधक सामान्य जन से गुप्त रूप से करते हैं।

    इस बार पंचांग की गणना के अनुसार 19 जनवरी, सोमवार को प्रतिपदा तिथि पर उत्तराषाढ़ा नक्षत्र, वज्र योग और मकर राशि में चंद्रमा की साक्षी में माघी गुप्त नवरात्र का शुभारंभ हुआ। नवरात्र के दौरान कुल छह शुभ योगों का संयोग बन रहा है, जो साधना को और अधिक प्रभावशाली बना रहा है। साथ ही सूर्य का उत्तरायण काल भी इसी समय चल रहा है, जिसे शास्त्रों में शुभ और मांगलिक कार्यों के लिए श्रेष्ठ माना गया है।

    शहर के प्रमुख देवी मंदिरों में नवरात्र को लेकर विशेष तैयारियां की गई हैं। शक्तिपीठ हरसिद्धि माता मंदिर सहित उज्जैन के अन्य देवी मंदिरों में प्रतिदिन माता का नित्य नए स्वरूप में श्रृंगार किया जाएगा। हरसिद्धि मंदिर में संध्या आरती के समय दीपमालिका प्रज्वलन का विशेष आयोजन होगा, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना है। मंदिर परिसर में पूरे नौ दिनों तक भक्तिमय वातावरण बना रहेगा।

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार गुप्त नवरात्र के दौरान की गई साधना अत्यंत शीघ्र फल देने वाली होती है। साधक इस अवधि में शक्ति उपासना के साथ-साथ अपने आत्मिक और आध्यात्मिक विकास के लिए भी विशेष अनुष्ठान करते हैं। माना जाता है कि इन दिनों मां दुर्गा अपने साधकों की गुप्त तपस्या से प्रसन्न होकर उन्हें सिद्धि, सफलता और बाधाओं से मुक्ति का वरदान देती हैं। इस प्रकार सर्वार्थसिद्धि योग और अनेक शुभ ग्रह संयोगों के बीच प्रारंभ हुए माघी गुप्त नवरात्र श्रद्धालुओं और साधकों के लिए आध्यात्मिक उन्नति का श्रेष्ठ अवसर लेकर आए हैं।

  • कुंभ राशिफल: खत्म होने वाला है संघर्ष का दौर; शनि के राशि परिवर्तन से मिलेगी साढ़ेसाती से मुक्ति, चमक उठेगा भाग्य

    कुंभ राशिफल: खत्म होने वाला है संघर्ष का दौर; शनि के राशि परिवर्तन से मिलेगी साढ़ेसाती से मुक्ति, चमक उठेगा भाग्य


    नई दिल्ली । उज्जैन/वाराणसी: ज्योतिष शास्त्र में शनि देव को कर्मफल दाता और ‘न्याय का देवता’ माना जाता है। वे व्यक्ति को उसके कर्मों के अनुसार फल प्रदान करते हैं। कुंभ राशि के जातकों के लिए पिछले कुछ वर्ष काफी चुनौतीपूर्ण रहे हैं, लेकिन अब उनके अच्छे दिन आने के संकेत मिल रहे हैं। शनि देव, जो कुंभ राशि के स्वामी भी हैं, जल्द ही अपना गोचर पूरा कर कुंभ राशि वालों को साढ़ेसाती के कष्टों से पूरी तरह मुक्त करने वाले हैं।

    कुंभ राशि और शनि का गहरा संबंध

    कुंभ राशि के अधिपति स्वयं शनि देव हैं और इस राशि के आराध्य देव भगवान शिव (महादेव) माने जाते हैं। इस राशि के जातकों का शुभ रंग आसमानी और भाग्यशाली अंक 10 व 11 होता है। वर्तमान में शनि देव मीन राशि में गोचर कर रहे हैं। चूंकि शनि एक राशि में लगभग ढाई वर्ष तक रहते हैं, इसलिए उनके संचरण का प्रभाव बहुत गहरा और लंबे समय तक रहने वाला होता है।

    साढ़ेसाती का अंतिम चरण: अब मिलेगी राहत

    कुंभ राशि के जातक फिलहाल शनि की साढ़ेसाती के अंतिम चरण तीसरे चरण से गुजर रहे हैं। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, साढ़ेसाती का अंतिम चरण जाते-जाते व्यक्ति को उसके संघर्षों का फल देकर जाता है। वर्तमान स्थिति: कुंभ राशि वालों को पिछले कुछ समय से करियर में अनिश्चितता, पारिवारिक कलह और स्वास्थ्य संबंधी उतार-चढ़ाव का सामना करना पड़ रहा था। बदलाव का संकेत: शनि के अगले राशि परिवर्तन के साथ ही कुंभ राशि साढ़ेसाती के प्रभाव से पूरी तरह मुक्त हो जाएगी। इसके बाद जातकों के जीवन में मानसिक शांति, वित्तीय स्थिरता और रुके हुए कार्यों में गति आएगी।

    भाग्य परिवर्तन और नए अवसर

    शनि के साढ़ेसाती से मुक्त होते ही कुंभ राशि के जातकों के लिए ‘स्वर्ण युग’ की शुरुआत हो सकती है। करियर में उन्नति: नौकरीपेशा लोगों को प्रमोशन और व्यापारियों को नए निवेश से भारी लाभ मिलने की संभावना है। आर्थिक लाभ: लंबे समय से अटका हुआ धन वापस मिल सकता है और पैतृक संपत्ति से जुड़े विवाद सुलझ सकते हैं। स्वास्थ्य में सुधार: साढ़ेसाती के कारण चल रही पुरानी बीमारियों और मानसिक तनाव से राहत मिलेगी।

    महादेव और शनि की कृपा पाने के उपाय

    कुंभ राशि के जातकों को साढ़ेसाती के इस अंतिम दौर को सुखद बनाने के लिए कुछ विशेष उपाय करने चाहिए शिव उपासना: चूंकि कुंभ के आराध्य महादेव हैं, इसलिए प्रतिदिन शिवलिंग पर जल चढ़ाना और ‘ॐ नमः शिवाय’ का जाप करना अत्यंत लाभकारी है। शनिवार का दान: शनिवार के दिन पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाएं और काले तिल व काली उड़द का दान करें। अनुशासन और सेवा: शनि देव अनुशासन प्रिय हैं, इसलिए असहाय लोगों की मदद करें और अपने आचरण को शुद्ध रखें। कुंभ राशि वालों के लिए यह समय धैर्य रखने का है। जैसे ही शनि का गोचर पूर्ण होगा, आपके जीवन की बाधाएं स्वतः दूर होने लगेंगी और भाग्य का भरपूर साथ मिलेगा।

  • पांच फरवरी से आरंभ होंगे मांगलिक कार्यक्रम, बजेंगी शहनाईयां

    पांच फरवरी से आरंभ होंगे मांगलिक कार्यक्रम, बजेंगी शहनाईयां

    ग्वालियर । गत 14 जनवरी को सूर्य के मकर राशि में प्रवेश करने के साथ खरमास की समाप्ति हो गई है। अब आगामी 5 फरवरी से मांगलिक कार्य आरंभ हो जाएंगे और एक बार फिर से शहनाईयां गूंज उठेंगी।

    ज्योतिषाचार्य डॉ. सतीश सोनी ने बताया कि मकर संक्रांति के बाद शुभ और मांगलिक कार्य शुरू हो जाते है, लेकिन शुक्र के अस्त होने के कारण शादियों के मुहूर्त फरवरी के शुरुआती हफ्तों से शुरू होंगे, मुख्य रूप से 5 फरवरी से मांगलिक कार्यों का दौर शुरू होगा।

    उन्होंने बताया कि 23 जनवरी को बसंत पंचमी रहेगा अबूझ मुहूर्त: वसंत पंचमी का दिन शुभ होता है। इस दिन ज्ञान की देवी सरस्वती की पूजा करते हैं। वसंत पंचमी पर पूरे दिन अबूझ मुहूर्त रहता है, जिसकी वजह से इस दिन लोग विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन, उपनयन, प्रॉपर्टी खरीद आदि करते हैं। इस दिन इन कार्यों को करने के लिए पंचांग देखने की जरूरत नहीं होती है। जो लोग अन्य मुहूर्त पर अपना शुभ कार्य नहीं कर पाते हैं, वे वसंत पंचमी पर अबूझ मुहूर्त में कर लेते हैं। लेकिन इस बार आप वसंत पंचमी पर कोई शुभ कार्य करने की सोच रहे हैं तो बसंत पंचमी के दिन कर सकते है।

  • आज आपके सितारे क्या कहते हैं, यह जानने के लिए पढ़ें रविवार का राशिफल

    आज आपके सितारे क्या कहते हैं, यह जानने के लिए पढ़ें रविवार का राशिफल



    मेष राशि :- किसी से कहासुनी न हो यह ध्यान रहे। लाभकारी गतिविधियों में सक्रियता रहेगी। कुछ एकाग्रता की प्रवृत्ति बनेगी। कामकाज की व्यस्तता से सुख-आराम प्रभावित होगा। धर्म-कर्म के प्रति रुचि जागृत होगी। श्रेष्ठजनों की सहानुभूतियां होगी। भाई-बहनों का प्रेम बढ़ेगा। शुभांक-5-8-9


    वृष राशि :- अपने हितैषी समझे जाने वाले ही पीठ पीछे नुकसान पहुंचाने की कोशिश करेंगे। कारोबारी यात्रा को फिलहाल टालें। परिवारजनो के सहयोग व समन्वय से काम बनाना आसान रहेेगा। अपने काम आसानी से बनते चले जाएंगे। समय नकारात्मक परिणाम देने वाला बन रहा है। शुभांक-5-6-7

    मिथुन राशि :- परिश्रम प्रयास से काम बनाने की कोशिश लाभ देगी। प्रपंच में ना पड़कर काम पर ध्यान दीजिए। कल का परिश्रम आज लाभ देगा। आय-व्यय की स्थिति समान रहेगी आर्थिक लाभ हेतु किये गए कार्यों का तत्काल प्रतिफल मिलेगा। एकाकी वृत्ति त्यागें। आय-व्यय की स्थिति समान रहेगी। शुभांक-1-2-5

    कर्क राशि :- स्वास्थ्य उत्तम रहेगा। व्यापार व व्यवसाय में ध्यान देने से सफलता मिलेगी। अपने काम में सुविधा मिल जाने से प्रगति होगी। यात्रा का दूरगामी परिणाम मिल जाएगा। कामकाज में आ रही बाधा को दूर कर लेंगे। सुविधा और समन्वय बना रहने से कामकाज में प्रगति बनेगी। शुभांक-1-8-9

    सिंह राशि :- लाभदायक कार्यों की चेष्टाएं प्रबल होंगी। बुद्घितत्व की सक्रियता से अल्प लाभ का हर्ष होगा। कुछ महत्वपूर्ण कार्य बनाने के लिए भाग-दौड़ रहेगी। लाभकारी गतिविधियों में सक्रियता रहेगी। रुका हुआ लाभ आज प्राप्त हो सकता है। मनोरथ सिद्घि का योग है। सुख-सुविधा में वृद्घि होगी। शुभांक-5-6-8

    कन्या राशि :- स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखें। व्यापार में वृद्घि होगी। नौकरी में सहयोगियों का सहयोग प्राप्त होगा। पारिवारिक परेशानी बढ़ेगी। कुछ प्रतिकूल गोचर का क्षोभ दिन-भर रहेगा। सुबह की महत्वपूूर्ण सिद्घि के बाद दिन-भर उत्साह रहेगा। संतोष रखने से सफलता मिलेगी। शुभांक-6-8-9

    तुला राशि :- प्रसन्नता के साथ सभी जरूरी कार्य बनते नजर आएंगे। मनोरथ सिद्घि का योग है। सम्मान मिलेगा। प्रतिष्ठा बढ़ाने वाले कुछ सामाजिक कार्य संपन्न होंगे। कई प्रकार के हर्ष उल्लास के बीच मांगलिक कार्य सम्पन्न होंगे। आमोद-प्रमोद का दिन होगा और व्यावसायिक प्रगति भी होगी। शुभांक-4-5-6

    वृश्चिक राशि :- स्वास्थ्य मध्यम रहेगा। व्यापार में स्थिति नरम रहेगी। शत्रुभय, ङ्क्षचता, संतान को कष्ट, अपव्यय के कारण बनेंगे। संतोष रखने से सफलता मिलेगी। आगे बढऩे के अवसर लाभकारी सिद्घ होंगे। नौकरी में स्थिति सामान्य ही रहेगी। लेन-देन में आ रही बाधा को दूर करने के प्रयास सफल होंगे। शुभांक-5-6-9

    धनु राशि :- शैक्षणिक क्षेत्र में उदासीनता रहेगी। जीवनसाथी का परामर्श लाभदायक रहेगा। व्यापार व नौकरी में स्थिति अच्छी रहेगी। कल का परिश्रम आज लाभ देगा। कामकाज में आ रही बाधा दूर होगी। बाहरी और अंदरूनी सहयोग मिलता चला जाएगा। शुभ कार्यों का लाभदायक परिणाम होगा। शुभांक-6-7-8

    मकर राशि :- लेन-देन में आ रही बाधा को दूर करने के प्रयास सफल होंगे। धार्मिक कार्य में समय और धन व्यय होगा। कारोबारी काम में बाधा बनी रहेगी। स्वास्थ्य मध्यम रहेगा। व्यापार में स्थिति नरम रहेगी। शुभ कार्यों की प्रवृत्ति बनेगी और शुभ समाचार भी मिलेंगे। संतोष रखने से सफलता मिलेगी। शुभांक-5-6-8

    कुंभ राशि :- माता पक्ष से विशेष लाभ होगा। अपनी गतिविधियों पर पुनर्विचार करें। वैचारिक द्वन्द्व और असंतोष बना रहेगा। किसी सूचना से पूर्ण निर्णय सम्भव। सुख आरोग्य प्रभावित होगा। शुभ कार्यों की प्रवृत्ति बनेगी और शुभ समाचार भी मिलेंगे। आय-व्यय की स्थिति समान रहेगी। शुभांक-1-6-7

    मीन राशि :- प्रियजनों से समागम का अवसर मिलेगा। अवरुद्घ कार्य संपन्न हो जाएंगे। कामकाज की व्यस्तता से सुख-आराम प्रभावित होगा। धर्म-कर्म के प्रति रुचि जागृत होगी। श्रेष्ठजनों की सहानुभूतियां होगी। स्वविवेक से कार्य करे। सभा-गोष्ठियों में मान-सम्मान बढ़ेगा। माता पक्ष से विशेष लाभ होगा। शुभांक-3-5-7
  • सोमवार का राशिफल

    सोमवार का राशिफल


    मेष राशि :-सुबह-सुबह की महत्वपूूर्ण सिद्घि के बाद दिन-भर उत्साह रहेगा। किसी लाभदायक कार्य के लिए व्ययकारक स्थितियां पैदा होगी। अल्प-परिश्रम से ही लाभ होगा। कामकाज में आ रहा अवरोध दूर होकर प्रगति का रास्ता मिल जाएगा। घरेलू बहुमूल्य वस्तुओं के क्रय का योग है। शुभांक-3-5-7


    वृष राशि :-परामर्श व परिस्थिति सभी का सहयोग मिलेगा। अधिकारी वर्ग से आपकी निकटता बढ़ेगी। व्यावसायिक उपक्रम में उलटफेर की शुरूआत हो सकती है। स्थाई सम्पति के निर्माण, मरम्मत व पुर्नस्थापना पर व्ययभार बढ़ेगा। किसी की टीका-टिप्पणी से आपको परेशानी हो सकती हैं। शुभांक-2-4-5

    मिथुन राशि :-विश्वस्त लोगों के कहे अनुसार चलें। राजकीय कार्यों में सतर्कता बरतें। मान-सम्मान को ठेस लग सकती है। जोश से कम व होश में रहकर कार्य करें। नये आगंतुकों से लाभ होगा। कार्यक्षेत्र में संतोषजनक सफलता मिलेगी। परिवार के साथ मनोरांजनिक स्थल की यात्रा होगी। शुभांक-2-4-6

    कर्क राशि :-पुरानी पारिवारिक समस्याओं का समाधान होगा। परिश्रम प्रयास से काम बनाने की कोशिश लाभ देगी। व्यापार व व्यवसाय में ध्यान देने से सफलता मिलेगी। बुरी संगति से बचें। नौकरी में सावधानीपूर्वक कार्य करें। अपनों का सहयोग प्राप्त होगा। परिवार पक्ष से थोड़ी ङ्क्षचता रहेगी। शुभांक-1-3-5

    सिंह राशि :-दाम्पत्य जीवन में तनाव का वातावरण बन सकता हैं। शारीरिक सुख के लिए व्यसनों का त्याग करें। आत्मङ्क्षचतन करें। पुराने मित्र से मिलन होगा। पठन-पाठन में स्थिति कमजोर रहेगी। खान-पान में सावधानी रखें। अपने अधीनस्थ लोगों से कम सहयोग मिलेगा। भ्रातृपक्ष में विरोध होने की संभावना है। शुभांक-4-6-8

    कन्या राशि :-अच्छे कार्य के लिए रास्ते बना लेंगे। रुका हुआ पैसा वसूलने में मदद मिल जाएगी। व्यर्थ प्रपंच में समय नहीं गंवाकर अपने काम पर ध्यान दीजिए। अपने हित के काम सुबह-सबेरे निपटा लें। नियोजित कार्यक्रम सरलता से संपन्न हो जाएंगे। परिवार में कोई मांगलिक कार्य पर वार्ता होगी। शुभांक-2-3-5

    तुला राशि :-कुछ आर्थिक संकोच पैदा हो सकते हैं। समय को देखकर कार्य करना ज्यादा हितकर रहेगा। परिश्रम अधिक करना पड़ेगा तभी आप लाभ की आशा कर सकते हैं। कार्य क्षेत्र में पदोन्नति के योग बनेंगे। दुर्लभ स्वप्न साकार होंगे। पुरुषार्थ का सहारा लें। व्यवसायिक अभ्युदय भी होगा और प्रसन्नताएं भी बढ़ेगी। शुभांक-2-5-6

    वृश्चिक राशि :-कर्म बल पर आपको सफलता मिलेगी। व्यवसायिक क्षेत्र में वर्तमान क्षमता को बढ़ाएंगे। उपक्रम का विस्तार करने का प्रयास सफल होगा। आप अच्छी सफलताएं प्राप्त करेंगे। बुद्घि कौशल से चुनौतीपूर्ण कार्यों में सफलता मिलेगी। आर्थिक दृष्टि से समय उपलब्धिकारक रहेगा। भाई-बहनों का प्रेम बढ़ेगा। शुभांक-1-4-6

    धनु राशि :-संतान की ओर से हर्ष के प्रसंग बनेंगे। मानसिक एवं शारीरिक शिथिलता पैदा होगी। कामकाज सीमित तौर पर ही बन पाएंगे। स्वास्थ्य कमजोर बना रहेगा। महत्वपूर्ण कार्य को समय पर बना लें तो अच्छा ही होगा। श्रम अधिक करना पड़ सकता है। वरिष्ठजनों से मतभेद उभर सकते हैं। शुभांक-3-5-6

    मकर  राशि :- शनै:-शनै: स्थिति पक्ष की बनने लगेगी। मेल-मिलाप से काम बनाने की कोशिश लाभ देगी। यात्रा परिणाम शुभ रहेगा। आशा और उत्साह के कारण सक्रियता बढ़ेगी। सुखद समय की अनुभूतियां प्रबल होगी। लाभदायक कार्यों की चेष्टाएं प्रबल होंगी। अभिभावकों के प्रति उत्तरदायित्व निभाने होंगे। शुभांक-2-4-6

    कुंभ राशि :-विकास के लिए बनाई योजना सफल होगी। अच्छा हो कि आप अपने उद्देश्य को लेकर सचेत रहें। प्रियजनों से समागम का अवसर मिलेगा। कार्यक्षेत्र में महत्वपूर्ण कार्य सौंपे जा सकते है जो कि अतिविश्वसनीय व्यक्तियों को ही दिये जाते हैं। कार्य साधक दिन है व्यर्थ न गंवाऐ। मनोरथ सिद्घि का योग है। शुभांक-3-5-7

    मीन राशि :-व्यापार में स्थिति उत्तम रहेगी। उत्तरदायित्व की अधिकता निजी जीवन में अपने ही ढग़ की परेशानियां पैदा करेगी। कारोबार की उन्नति के लिये एक से अधिक सीढ़ी चढ़कर लोंगो को आश्चर्य में डाल देगें। चल-अचल सम्पति में वृद्घि होगी। बौद्घिक क्षेत्र में प्रतियोगिता जीतने का मौका मिलेगा। शुभांक-2-5-6
  • रविवार विशेष: सूर्य देव की कृपा से चमकेगा भाग्य; पद, प्रतिष्ठा और अच्छी सेहत के लिए आजमाएं ये अचूक उपाय

    रविवार विशेष: सूर्य देव की कृपा से चमकेगा भाग्य; पद, प्रतिष्ठा और अच्छी सेहत के लिए आजमाएं ये अचूक उपाय


    नई दिल्ली/उज्जैन । सनातन धर्म और ज्योतिष शास्त्र में सूर्य को ‘जगत की आत्मा’ और नवग्रहों का राजा माना गया है। सूर्य केवल एक खगोलीय पिंड नहीं, बल्कि आत्मविश्वास, पिता, मान-सम्मान और सरकारी सफलता के कारक हैं। रविवार का दिन भगवान सूर्य की उपासना के लिए सर्वश्रेष्ठ माना जाता है। मान्यता है कि यदि कुंडली में सूर्य बलवान हो, तो व्यक्ति रंक से राजा बन सकता है, वहीं सूर्य के कमजोर होने पर व्यक्ति को बार-बार अपमान और स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ता है।

    रविवार का आध्यात्मिक और ज्योतिषीय महत्व

    सूर्य ऊर्जा का वह केंद्र है, जिससे पूरी सृष्टि संचालित होती है। ज्योतिषियों के अनुसार, सूर्य कमजोर होने पर व्यक्ति में निर्णय लेने की क्षमता कम हो जाती है और उसे हड्डियों या नेत्र संबंधी रोग घेर लेते हैं। रविवार को किए गए उपाय न केवल ग्रह दोषों को शांत करते हैं, बल्कि व्यक्ति के भीतर ‘ब्रह्म तेज’ का संचार भी करते हैं।

    भाग्य बदलने वाले प्रभावशाली उपाय

    अर्घ्य का विधान: सफलता की पहली सीढ़ी रविवार की सुबह सूर्योदय के समय तांबे के लोटे में जल भरकर, उसमें थोड़े अक्षत, लाल फूल और चुटकी भर कुमकुम डालकर सूर्य देव को अर्घ्य दें। अर्घ्य देते समय ॐ घृणि सूर्याय नमः मंत्र का जाप करें। यह उपाय मानसिक तनाव को कम कर निर्णय लेने की शक्ति बढ़ाता है। स्तोत्र पाठ और मंत्र साधना मान-सम्मान में वृद्धि के लिए रविवार को ‘आदित्य हृदय स्तोत्र’ का पाठ करना रामबाण माना जाता है। यदि समय का अभाव हो, तो सूर्य गायत्री मंत्र का 108 बार जाप करें। इससे करियर में आ रही बाधाएं दूर होती हैं।

    दान का महत्व: लाल वस्तुओं का करें चयन दान से ग्रहों की प्रतिकूलता समाप्त होती है। रविवार को गेहूं, तांबा, गुड़ और लाल वस्त्र का दान किसी जरूरतमंद को देना अत्यंत शुभ होता है। यह विशेष रूप से प्रशासनिक सेवाओं और सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए फलदायी है।संबंधों से मजबूती: पिता का आशीर्वाद सूर्य पिता के कारक हैं। रविवार को अपने पिता, गुरु या वरिष्ठों के चरण स्पर्श कर उनका आशीर्वाद लें। उनकी सेवा करने से सूर्य देव स्वतः प्रसन्न होते हैं और समाज में आपकी प्रतिष्ठा बढ़ती है।

    रविवार को बरतें ये सावधानियां

    शास्त्रों के अनुसार, रविवार को कुछ कार्यों की मनाही है ताकि सूर्य का प्रभाव बना रहेखान-पान इस दिन नमक का त्याग करना या कम सेवन करना लाभकारी है। मांसाहार और मदिरा से पूरी तरह परहेज करें। व्यवहार क्रोध, अहंकार और अपशब्दों के प्रयोग से बचें। किसी का अपमान करने से सूर्य दोष बढ़ता है।आलस्य सूर्योदय के बाद देर तक सोना सौभाग्य को दुर्भाग्य में बदल सकता है।

    उपायों से होने वाले लाभ

    इन नियमों का पालन करने से व्यक्ति की नेतृत्व क्षमतानिखरती है। स्वास्थ्य की दृष्टि से हृदय और हड्डियों के रोगों में लाभ मिलता है। साथ ही, पारिवारिक कलह दूर होती है और समाज में एक नई पहचान स्थापित होती है।
  • बसंत पंचमी 2026: माँ सरस्वती को प्रसन्न करने के लिए घर लाएं ये 5 शुभ चीजें, करियर और बुद्धि में होगी उन्नति

    बसंत पंचमी 2026: माँ सरस्वती को प्रसन्न करने के लिए घर लाएं ये 5 शुभ चीजें, करियर और बुद्धि में होगी उन्नति


    नई दिल्ली । बसंत पंचमी का दिन ‘अबूझ मुहूर्त’ माना जाता है, यानी इस दिन किसी भी शुभ कार्य को करने के लिए पंचांग देखने की आवश्यकता नहीं होती। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यदि इस दिन कुछ विशेष वस्तुएं घर लाकर माँ सरस्वती को अर्पित की जाएं, तो साधक को ज्ञान, एकाग्रता और सुख-समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

    बसंत पंचमी 2026: तिथि और शुभ मुहूर्त वर्ष 2026 में बसंत पंचमी का पर्व 22 जनवरी को मनाया जाएगा। पंचमी तिथि प्रारंभ: 22 जनवरी 2026 को सुबह से। पूजा का शुभ समय: सुबह 07:13 बजे से दोपहर 12:33 बजे तक लगभग 5 घंटे 20 मिनट। शेष योग इस दिन रवि योग और अमृत सिद्धि योग का निर्माण हो रहा है, जो खरीदारी और नई शुरुआत के लिए अत्यंत श्रेष्ठ है।

    इन वस्तुओं को घर लाना माना जाता है अत्यंत शुभ

    माँ सरस्वती की मूर्ति या तस्वीर यदि आप घर में नई ऊर्जा का संचार करना चाहते हैं, तो इस दिन माँ सरस्वती की प्रतिमा घर लाएं। ध्यान रहे कि माँ सरस्वती शांत मुद्रा में हों और हंस या कमल पर विराजमान हों। इसे घर के ईशान कोण उत्तर-पूर्व में स्थापित करना करियर के लिए शुभ होता है।वीणा संगीत यंत्र वीणा माँ सरस्वती का सबसे प्रिय वाद्य यंत्र है। संगीत और कला से जुड़े लोगों के लिए बसंत पंचमी पर वीणा या कोई भी छोटा वाद्य यंत्र घर लाना सौभाग्य बढ़ाता है। इससे घर का वास्तु दोष दूर होता है और मानसिक शांति मिलती है।

    मोरपंख मोरपंख को विद्या और बुद्धि का प्रतीक माना जाता है। इसे बसंत पंचमी के दिन लाकर बच्चों के स्टडी रूम या उनकी किताबों में रखना चाहिए। माना जाता है कि इससे छात्रों की एकाग्रता बढ़ती है और पढ़ाई में मन लगता है।नई किताबें और पेन कलम पेन को माँ सरस्वती का रूप माना जाता है। इस दिन नया पेन या नई किताबें खरीदकर उनकी पूजा करना और उन पर तिलक लगाना बहुत लाभकारी होता है। यह कार्य विशेष रूप से नई शिक्षा शुरू करने वाले बच्चों अक्षरारंभ के लिए श्रेष्ठ है। पीले वस्त्र या फूल पीला रंग माँ सरस्वती को अत्यंत प्रिय है क्योंकि यह शुद्धता और नई चेतना का प्रतीक है। इस दिन पीले वस्त्र खरीदना या गेंदे के पीले फूलों से घर को सजाना सुख-समृद्धि लेकर आता है।

    माँ सरस्वती की पूजा के लिए विशेष टिप

    पूजा के समय माँ सरस्वती को पीले रंग की मिठाई बेसन के लड्डू या केसरिया भात का भोग लगाएं और ‘ॐ ऐं सरस्वत्यै नमः’ मंत्र का जाप करें।
  • साल की पहली मौनी अमावस्या: ग्वारीघाट-तिलवारा-लम्हेटा पर उमड़ी भीड़, नर्मदा में शुरू हुआ सुबह 4 बजे से स्नान

    साल की पहली मौनी अमावस्या: ग्वारीघाट-तिलवारा-लम्हेटा पर उमड़ी भीड़, नर्मदा में शुरू हुआ सुबह 4 बजे से स्नान


    नई दिल्ली। साल की पहली मौनी अमावस्या पर जबलपुर के ग्वारीघाट, तिलवारा घाट और लम्हेटा घाट पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। रविवार सुबह से ही घाटों पर भक्तों का आगमन शुरू हो गया था और दिन के बढ़ने के साथ संख्या लगातार बढ़ती गई। जबलपुर के साथ-साथ आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों से भी हजारों लोग आस्था के साथ मां नर्मदा में डुबकी लगाने पहुंचे।

    श्रद्धालुओं ने मौनी अमावस्या के महत्व को देखते हुए पूरे विधि-विधान से पूजा-अर्चना की।

    कई भक्तों ने घाट पर दीपदान किया और जरूरतमंदों को दान-पुण्य भी किया, जिससे पूरे घाट क्षेत्र में भक्तिमय वातावरण बना रहा। पंडित कृष्णा दुबे ने बताया कि सुबह 4 बजे से ही नर्मदा स्नान शुरू हो गए थे और मान्यता है कि इस दिन नर्मदा में स्नान करने से पापों का नाश होता है और कई पीढ़ियां तर जाती हैं।

    भारी भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा और व्यवस्था के विशेष इंतजाम किए। पुलिस बल तैनात किया गया और यातायात व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने के लिए विशेष प्रबंध किए गए। इस आस्था के चलते हर वर्ष मौनी अमावस्या पर ग्वारीघाट सहित अन्य नर्मदा घाटों पर भक्तों की भीड़ देखने को मिलती है, जो इस दिन की धार्मिक महत्ता को दर्शाती है।