Category: Religious Astrology

  • शुक्रवार को करें महालक्ष्मी चालीसा का पाठ, घर-परिवार में आएंगी खुशियाँ और समृद्धि

    शुक्रवार को करें महालक्ष्मी चालीसा का पाठ, घर-परिवार में आएंगी खुशियाँ और समृद्धि


    नई दिल्ली । हिंदू धर्म में शुक्रवार को विशेष महत्व प्राप्त है। ज्योतिष और धार्मिक शास्त्रों के अनुसार, यह दिन धन और वैभव की देवी मां लक्ष्मी और शक्ति स्वरूपा मां दुर्गा को समर्पित माना गया है। इस दिन विशेष पूजन और मंत्रोच्चारण से परिवार में सुख, समृद्धि और खुशहाली आती है। आज, 16 जनवरी को माघ माह के शुक्रवार पर शिवरात्रि और प्रदोष व्रत का अनूठा संयोग बन रहा है, जिससे पूजा का महत्व और भी बढ़ जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन महालक्ष्मी चालीसा का पाठ करना अत्यंत मंगलकारी माना जाता है। यह चालीसा मां लक्ष्मी के गुणों और उनके भक्तों पर उनकी कृपा के प्रभाव को बताती है। जो साधक श्रद्धा और भक्ति भाव से इस चालीसा का पाठ करते हैं, उनके घर से दरिद्रता दूर होती है और वैभव, संपन्नता और मानसिक शांति आती है।

    विशेष रूप से माघ माह के शुक्रवार को इस चालीसा का पाठ करने से देवी लक्ष्मी की कृपा अधिक मात्रा में प्राप्त होती है। धार्मिक विशेषज्ञों का मानना है कि इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की संयुक्त पूजा करने से जीवन में समस्त प्रकार की बाधाएं और समस्याएं दूर होती हैं। साथ ही वैभव लक्ष्मी व्रत का पालन करने से धन और सुख की वृद्धि होती है। पूजन का विधान सरल है। सुबह स्नान और स्वच्छ वस्त्र धारण के बाद पूजा स्थल पर दीपक, अगरबत्ती, अक्षत और फल अर्पित करना चाहिए। इसके बाद भक्त मन, वचन और क्रिया से महालक्ष्मी चालीसा का पाठ करें। पाठ के दौरान पूरी श्रद्धा और भक्ति भाव बनाए रखना आवश्यक है। इस दिन विशेष रूप से 108 बार या कम से कम एक बार पाठ करने से देवी लक्ष्मी की कृपा अधिक प्राप्त होती है।

    ज्योतिष और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, ऐसा करने से न केवल वित्तीय समस्याएं कम होती हैं, बल्कि पारिवारिक संबंधों में भी प्रेम और सामंजस्य बढ़ता है। घर में सुख-शांति और मानसिक संतुलन आता है। साथ ही, जीवन में आध्यात्मिक उन्नति और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।संक्षेप में, शुक्रवार का दिन धार्मिक दृष्टि से अत्यंत शुभ है। माघ माह के शुक्रवार पर महालक्ष्मी चालीसा का पाठ करना, शिव-पार्वती की पूजा और वैभव लक्ष्मी व्रत का पालन करना साधकों के लिए अत्यंत लाभकारी माना गया है। यह न केवल जीवन में खुशहाली लाता है, बल्कि व्यक्ति के आत्मिक और भौतिक दोनों पक्षों में संतुलन बनाए रखता है।

  • Mauni Amavasya 2026: मौनी अमावस्या पर भूलकर भी न करें ये दान, पितरों के साथ सूर्य देव भी हो सकते हैं नाराज

    Mauni Amavasya 2026: मौनी अमावस्या पर भूलकर भी न करें ये दान, पितरों के साथ सूर्य देव भी हो सकते हैं नाराज

    नई दिल्ली हिंदू धर्म में अमावस्या तिथि का विशेष महत्व माना जाता है, लेकिन साल की पहली अमावस्या यानी मौनी अमावस्या का महत्व और भी बढ़ जाता है। पंचांग के अनुसार हर वर्ष माघ मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या को मौनी अमावस्या मनाई जाती है। वर्ष 2026 में यह तिथि 18 जनवरी, रविवार को पड़ रही है। मान्यता है कि इस दिन मौन व्रत, पवित्र नदी में स्नान, दान-पुण्य और पितरों की शांति के लिए किए गए कर्म विशेष फलदायी होते हैं।

    रविवार और सूर्य देव का संयोग
    इस बार मौनी अमावस्या रविवार को पड़ने के कारण इसका महत्व और बढ़ गया है। रविवार का दिन सूर्य देव को समर्पित होता है। ऐसे में इस दिन किए गए गलत दान या अशुभ कर्म न सिर्फ पितरों को नाराज कर सकते हैं, बल्कि कुंडली में सूर्य की स्थिति को भी कमजोर कर सकते हैं। इसलिए शास्त्रों में इस दिन दान को लेकर विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।

    मौनी अमावस्या पर किन चीजों का दान न करें
    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मौनी अमावस्या के दिन कुछ वस्तुओं का दान वर्जित होता है। इनमें तामसिक वस्तुएं, टूटी-फूटी चीजें, बासी या झूठा भोजन, कांच का सामान, काले रंग की वस्तुएं, चमड़े से बनी चीजें शामिल हैं।
    इसके अलावा नमक, सरसों का तेल, तिल, खट्टे फल और दही का दान भी इस दिन नहीं करना चाहिए। ऐसा माना जाता है कि इन वस्तुओं का दान करने से पितृ दोष बढ़ता है, जीवन में बाधाएं आती हैं और दुर्भाग्य का सामना करना पड़ सकता है।

    मौनी अमावस्या पर क्या करें दान
    यदि आप इस दिन दान करना चाहते हैं तो शुभ वस्तुओं का ही चयन करें। शास्त्रों के अनुसार अन्न, गुड़, वस्त्र, आंवला, कंबल, धन, जूते, झाड़ू, चांदी और तांबे से बनी वस्तुओं का दान अत्यंत शुभ माना जाता है।

    इसके साथ ही गौ सेवा करना, गायों को चारा खिलाना और पशु-पक्षियों को भोजन कराना भी विशेष पुण्यदायी माना गया है। ऐसा करने से पितरों की आत्मा को शांति मिलती है और घर में सुख-समृद्धि आती है।

    स्नान-दान का शुभ मुहूर्त
    मौनी अमावस्या पर ब्रह्म मुहूर्त में स्नान और दान करने का विशेष महत्व है। द्रिक पंचांग के अनुसार 18 जनवरी 2026 को ब्रह्म मुहूर्त सुबह 5 बजकर 08 मिनट से 5 बजकर 59 मिनट तक रहेगा। इस समय पवित्र स्नान, पूजा-पाठ और दान करने से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है।

    धार्मिक नियमों का पालन है जरूरी
    मौनी अमावस्या पर श्रद्धा और नियमों के साथ किए गए दान-पुण्य से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा आती है। वहीं, शास्त्र-विरुद्ध दान करने से लाभ की जगह नुकसान भी हो सकता है। इसलिए इस दिन दान से पहले सही जानकारी जरूर रखें और धार्मिक मर्यादाओं का पालन करें।

  • मकर संक्रांति के बाद सूर्य ग्रहण की चेतावनी: इन तीन राशियों के लिए बढ़ सकती हैं परेशानियां..

    मकर संक्रांति के बाद सूर्य ग्रहण की चेतावनी: इन तीन राशियों के लिए बढ़ सकती हैं परेशानियां..


    नई दिल्ली।  17 फरवरी 2026 को कुंभ राशि में लगने वाला सूर्य ग्रहण, स्वास्थ्य और धन को लेकर बरतनी होगी विशेष सतर्कता
    साल 2026 की शुरुआत खगोलीय और ज्योतिषीय दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। मकर संक्रांति के लगभग एक महीने बाद, 17 फरवरी 2026 को वर्ष का पहला सूर्य ग्रहण लगने जा रहा है। यह ग्रहण कुंभ राशि में धनिष्ठा नक्षत्र के दौरान होगा, जिसे ज्योतिष में अत्यंत प्रभावशाली माना जाता है। सूर्य और चंद्रमा की यह युति न केवल प्राकृतिक ऊर्जा में बदलाव लाएगी, बल्कि मानव जीवन पर भी इसका व्यापक असर देखने को मिल सकता है।

    ज्योतिषाचार्यों के अनुसार यह सूर्य ग्रहण सुबह से लेकर दोपहर तक प्रभावी रहेगा। ग्रहण काल के दौरान मानसिक अस्थिरता निर्णय लेने में भ्रम और भावनात्मक उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकते हैं। हालांकि ग्रहण का प्रभाव सभी राशियों पर किसी न किसी रूप में पड़ेगा लेकिन तीन राशियों के जातकों के लिए यह समय विशेष सावधानी और संयम की मांग करता है।सिंह राशि के जातकों के लिए यह सूर्य ग्रहण कुछ चुनौतियां लेकर आ सकता है। कार्यक्षेत्र में सहयोगियों या वरिष्ठों के साथ मतभेद की स्थिति बन सकती है। छोटी-सी बात बड़ा विवाद बन सकती है, इसलिए वाणी और व्यवहार पर नियंत्रण रखना जरूरी होगा। जल्दबाजी में लिया गया कोई भी फैसला नुकसानदेह साबित हो सकता है। पारिवारिक जीवन में भी तनाव के संकेत मिल रहे हैं। स्वास्थ्य की दृष्टि से थकान सिरदर्द, अनिद्रा या मानसिक दबाव महसूस हो सकता है। इस दौरान आराम और आत्मसंयम सबसे बड़ा उपाय माना जा रहा है।

    वृश्चिक राशि वालों के लिए यह ग्रहण खासतौर पर आर्थिक मामलों में सतर्कता का संकेत दे रहा है। अचानक खर्चों में वृद्धि हो सकती है, जिससे बजट बिगड़ने का खतरा रहेगा। निवेश, उधार या किसी भी तरह के आर्थिक समझौते से इस समय दूरी बनाए रखना बेहतर होगा। मानसिक बेचैनी और तनाव महसूस हो सकता है। साथ ही यात्रा के दौरान या वाहन चलाते समय विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी जा रही है क्योंकि छोटी लापरवाही भी परेशानी का कारण बन सकती है।

    कुंभ राशि, जिसमें यह सूर्य ग्रहण लग रहा है, उसके जातकों पर इसका प्रभाव अपेक्षाकृत अधिक देखने को मिल सकता है। व्यक्तिगत और पारिवारिक रिश्तों में गलतफहमी पैदा हो सकती है। मित्रों या जीवनसाथी के साथ मतभेद बढ़ने की आशंका है। भावनाओं में बहकर लिए गए फैसले बाद में पछतावे का कारण बन सकते हैं। इस समय संवाद बनाए रखना और धैर्य से काम लेना बेहद जरूरी होगा। आत्ममंथन और संयम से कई समस्याओं को टाला जा सकता है।ज्योतिषाचार्यों का मानना है कि ग्रहण काल में किसी भी शुभ कार्य, नई शुरुआत, खरीद-फरोख्त या बड़े निर्णय से बचना चाहिए। ध्यान, जप, प्रार्थना और सकारात्मक सोच इस दौरान मानसिक संतुलन बनाए रखने में मदद कर सकते हैं। ग्रहण समाप्त होने के बाद धीरे-धीरे परिस्थितियां सामान्य होने लगेंगी और नकारात्मक प्रभाव कम होता जाएगा।

  • आज आपके सितारे क्या कहते हैं, यह जानने के लिए पढ़ें आज का भविष्यफल।

    आज आपके सितारे क्या कहते हैं, यह जानने के लिए पढ़ें आज का भविष्यफल।

    मेष राशि :- मध्याह्न पूर्व समय आपके पक्ष का बना रहेगा। कारोबारी काम में प्रगति बनती रहेगी। लेन-देन में आ रही बाधा दूर करने का प्रयास होंगे। धार्मिक कार्य में समय और धन व्यय होगा। अपना काम दूसरों के सहयोग से पूरा होगा। ले देकर की जा रही काम की कोशिश ठीक नहीं। पुराने मित्र से मिलन होगा। शुभांक-3-6-9

    वृष राशि :- समय नकारात्मक परिणाम देने वाला बन रहा है। अपने हितैषी समझे जाने वाले ही पीठ पीछे नुकसान पहुंचाने की कोशिश करेंगे। परिवारजन का सहयोग व समन्वय काम को बनाना आसान करेगा। कारोबारी काम में नवीन तालमेल और समन्वय बन जाएगा। स्वविवेक से कार्य करें। समय का लाभ लें। शुभांक-4-7-9

    मिथुन राशि :– हित के काम में आ रही बाधा मध्याह्न पश्चात् दूर हो जाएगी। अपने काम आसानी से बनते चले जाएंगे। साथ ही आगे के लिए रास्ता भी बन जाएगा। धार्मिक स्थलों की यात्रा का योग। जीवन साथी अथवा यार-दोस्तों के साथ साझे में किए जा रहे काम में लाभ मिल जाएगा। मनोरथ सिद्घि का योग है। शुभांक-4-6-8

    कर्क राशि :- कहीं रुका हुआ पैसा वसूलने में मदद मिल जाएगी। व्यर्थ प्रपंच में समय नहीं गंवाकर अपने काम पर ध्यान दीजिए। कार्यक्षेत्र में आगे बढऩे में रुकावट का एहसास होगा। विरोधियों के सक्रिय होने की संभावना है। शुभकार्यों में अड़चनें व परिवार के बुुजुर्ग-जनों से मतभेद रहेगा। शुभांक-1-5-7

    सिंह राशि :- मेल-मिलाप से काम बनाने की कोशिश सफल होगी। कामकाज में आ रहा अवरोध दूर होकर प्रगति का रास्ता मिल जाएगा। अपने काम में सुविधा मिल जाने से प्रगति होगी। समाज में मान-सम्मान बढ़ेगा। नवीन जिम्मेदारी बढऩे के आसार रहेंगे। यात्रा शुभ रहेगी। अपने काम को प्राथमिकता से करें। शुभांक-1-3-5

    कन्या राशि :– अच्छे कार्य के लिए रास्ते बना लेंगे। कारोबारी काम में बाधा उभरने से मानसिक अशांति बनी रहेगी। यात्रा का दूरगामी परिणाम मिल जाएगा। सुविधा और समन्वय बना रहने से कामकाज में प्रगति बन जाएगी। आर्थिक हित के काम को साधने में मदद मिल जाएगी। मांगलिक कार्यक्रमों का आयोजन होगा। शुभांक-4-6-8

    तुला राशि :- अपने काम पर नजर रखिए। स्वास्थ्य लाभ में समय और धन व्यय होगा। लेन-देन में अस्पष्टता ठीक नहीं। मध्याह्न पूर्व समय आपके पक्ष का बना रहेगा। कारोबारी काम में प्रगति बनती रहेगी। लेन-देन में आ रही बाधा दूर करने का प्रयास होंगे। परिश्रम प्रयास से काम बनाने की कोशिश लाभ देगी। शुभांक-2-4-6

    वृश्चिक राशि :- पर-प्रपंच में ना पड़कर अपनेे काम पर ध्यान दीजिए। कल का परिश्रम आज लाभ देगा। आलस्य का त्याग करें। कारोबारी काम में नवीन तालमेल और समन्वय बन जाएगा। यार-दोस्तों के साथ साझे में किए जा रहे काम में लाभ मिल जाएगा। पूर्व नियोजित कार्यक्रम सरलता से संपन्न हो जाएंगे। शुभांक-4-6-8

    धनु राशि :– कार्यक्षेत्र में संतोषजनक सफलता मिलेगी। अपनों का सहयोग प्राप्त होगा। शिक्षा में आशानुकूल कार्य होने में संदेह है। व्यापार व व्यवसाय में स्थिति उत्तम रहेगी। नौकरी में पदोन्नति की संभावना है। मान-सम्मान में वृद्घि होगी। मित्रों से सावधान रहें तो ज्यादा उत्तम है। यात्रा से लाभ। शुभांक-3-5-6

    मकर राशि :- आत्मविश्वास बढ़ेगा। पारिवारिक विवाद टालें। व्यापार व नौकरी में स्थिति अच्छी रहेगी। कामकाज में आ रहा अवरोध दूर होकर प्रगति का रास्ता मिल जाएगा। निष्ठा से किया गया कार्य पराक्रम व आत्मविश्वास बढ़ाने वाला होगा। संतान-स्त्री पक्ष से लाभ होगा। शुभांक-3-4-6

    कुंभ राशि :– खान-पान में सावधानी रखें। व्यापार में प्रगति होगी। अपने अधीनस्त लोगों से कम सहयोग मिलेगा। स्वास्थ्य उत्तम रहेगा। भ्रातृपक्ष में विरोध होने की संभावना है। शिक्षा में आशानुकूल कार्य होने में संदेह है। स्वास्थ्य मध्यम रहेगा। आय के योग बनेंगे। यात्रा का योग है। शुभांक-3-5-6

    मीन राशि :– जीवनसाथी का परामर्श लाभदायक रहेगा। शारीरिक सुख के लिए व्यसनों का त्याग करें। आलस्य का त्याग करें। पुरुषार्थ का सहारा लें। कार्यसिद्घि होने में देर नहीं लगेगी। आर्थिक लाभ उत्तम रहेगा। शैक्षणिक कार्यों में रुचि बढ़ेगी। परिवार में किसी मांगलिक कार्य पर वार्ता होगी। स्वास्थ्य उत्तम रहेगा। शुभांक-3-5-6

  • 15 जनवरी 2026 पंचांग: माघ कृष्ण द्वादशी – जानें शुभ-अशुभ काल और दिन की शुरुआत कैसे करें लाभकारी

    15 जनवरी 2026 पंचांग: माघ कृष्ण द्वादशी – जानें शुभ-अशुभ काल और दिन की शुरुआत कैसे करें लाभकारी


    नई दिल्ली। गुरुवार, 15 जनवरी 2026 का दिन माघ माह के कृष्ण पक्ष की द्वादशी तिथि में पड़ रहा है। आज ज्येष्ठा नक्षत्र और वृद्धि योग का संयोग बन रहा है, जिससे धार्मिक कार्य, पूजा-पाठ और नए कार्यों की शुरुआत के लिए समय विशेष रूप से अनुकूल माना जा रहा है। चंद्रमा वृश्चिक राशि में संचरण कर रहे हैं जो जीवन में स्थिरता निर्णय लेने की क्षमता और मानसिक शांति लाने में सहायक है।

    दिन की शुरुआत अगर सही मुहूर्त में की जाए तो उसका प्रभाव पूरे दिन महसूस किया जा सकता है। सुबह का ब्रह्म मुहूर्त 05:11 AM से 05:59 AM तक रहेगा। यह समय ध्यान, प्राणायाम, योग और धार्मिक अनुष्ठानों के लिए श्रेष्ठ माना जाता है। दिन का मध्यकाल अभिजीत मुहूर्त 11:51 AM से 12:34 PM तक रहेगा। व्यापारी, छात्र और गृहस्थ लोग इस समय किसी भी नए काम की शुरुआत करने से लाभ प्राप्त कर सकते हैं। वहीं, शाम का अमृत काल 07:58 PM से 09:45 PM तक रहेगा, जो दान, पूजा, शांति और स्वास्थ्य संबंधित कार्यों के लिए अत्यंत शुभ है।

    हालांकि, इस दिन कुछ अशुभ काल भी हैं, जिनसे बचना चाहिए। यम गंड 6:47 AM से 8:08 AM, कुलिक काल 9:30 AM से 10:51 AM, राहु काल 1:34 PM से 2:55 PM तक रहेगा। इसके अलावा दिन में दो दुर्मुहूर्त 10:24 AM – 11:07 AM और 02:44 PM – 03:27 PM तक रहेंगे, जबकि वर्ज्यम् काल 09:17 AM से 11:04 AM तक रहेगा। इन कालों में किसी भी महत्वपूर्ण कार्य, यात्रा या निवेश से बचने की सलाह दी जाती है।सूर्य और चंद्रमा के समय की जानकारी भी दिन की योजना बनाने में मददगार साबित होती है। आज सूर्य का उदय 6:47 AM और अस्त 5:38 PM पर होगा। चंद्रमा का उदय 3:47 AM और चंद्रास्त 2:36 PM पर रहेगा। यह जानकारी धार्मिक अनुष्ठान, व्रत, यात्रा और दैनिक कार्यों के समय निर्धारण में सहायक है।

    ज्येष्ठा नक्षत्र और वृद्धि योग का संयोग धन, शिक्षा, स्वास्थ्य और आध्यात्मिक विकास में विशेष लाभ देता है। इस समय किए गए धार्मिक अनुष्ठान और पूजा कार्य विशेष रूप से फलदायी माने जाते हैं। साथ ही घर में नए कार्यों की शुरुआत, दान या निवेश करने के लिए भी यह समय अनुकूल है।आज का दिन पंचांग के अनुसार धार्मिक और सामाजिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है। शुभ मुहूर्त में किए गए कार्य लाभकारी रहेंगे, वहीं अशुभ काल में किए गए कार्यों में बाधा या हानि संभव है। इसलिए, पंचांग के अनुसार दिन की योजना बनाना और सही समय का चुनाव करना अत्यंत जरूरी है।

  • पितरों को प्रसन्न करने का खास मौका है मौनी अमावस्या, कृपा प्राप्ति के लिए करें ये काम

    पितरों को प्रसन्न करने का खास मौका है मौनी अमावस्या, कृपा प्राप्ति के लिए करें ये काम

    नई दिल्ली माघ माह की अमावस्या को मौनी अमावस्या (Mauni Amavasya 2026) के नाम से जाना जाता है। यह तिथि हिंदू धर्म में विशेष महत्व रखती है, क्योंकि इसी दिन पर माघ मेले में तीसरा प्रमुख स्नान भी किया जाता है। इस दिन किए गए गंगा स्नान करने से साधक को पुण्य फलों की प्राप्ति हो सकती है। साथ ही यह तिथि पितरों की कृपा प्राप्ति के लिए भी विशेष महत्व रखती है।

    नहीं सताएगा पितृ दोष
    हिंदू धर्म की मान्यताओं के अनुसार, मौनी अमावस्या के दिन गंगा स्नान से साधक के जाने-अनजाने में किए गए पाप नष्ट हो जाते हैं। ऐसे में मौनी अमावस्या के दिन सुबह जल्दी उठकर गंगा स्नान के लिए जरूर जाएं। अगर आपके लिए ऐसा करना संभव नहीं है, तो आप घर पर ही पानी में गंगाजल मिलाकर भी स्नान कर सकते हैं।

    इससे भी विशेष लाभ मिल सकता है। इसके बाद पितरों के निमित्त तर्पण व दान पुण्य करें। आप इस दिन पर सफेद रंग के वस्त्रों या फिर गर्म कपड़ों का दान कर सकते हैं। जिससे आपको पितृ दोष से भी राहत मिल सकती है।

    जरूर करें ये काम
    मौनी अमावस्या के दिन स्नान के बाद एक पात्र में जल लेकर उसमें कुश, अक्षत और काले तिल मिलाएं। इसके बाद दक्षिण दिशा में पितरों के निमित्त जल अर्पित करें और इस दौरान ‘ॐ पितृभ्यो नमः’ मंत्र का जप करें। इस मंत्र का जप कम-से-कम 11 बार करना चाहिए। साथ ही इस दिन पर ब्राह्मणों को भोजन करवाएं और यदि संभव हो तो हरिद्वार, गया जैसे तीर्थ स्थलों पर जाकर दान करें। इन सभी कार्यों को करने से पितरों को शांति मिलती है।

    मिलेगी पितरों की कृपा
    हिंदू धर्म में यह माना जाता है कि पीपल के वृक्ष में पितरों का निवास होता है। ऐसे में माघ अमावस्या को शाम के समय पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दीपक जरूर जलाएं। इसके साथ ही दूध व गंगाजल अर्पित करें। इसके बाद 7 बार पीपल की परिक्रमा करें। ऐसा करने से पितृ दोष शांत होता है और घर-परिवार में सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है

  • आज आपके सितारे क्या कहते हैं, यह जानने के लिए पढ़ें आज का भविष्यफल

    आज आपके सितारे क्या कहते हैं, यह जानने के लिए पढ़ें आज का भविष्यफल


    मेष राशि :-
    आय-व्यय की स्थिति समान रहेगी। व्यापार में स्थिति नरम रहेगी। शत्रुभय, चिंता, संतान को कष्ट, अपव्यय के कारण बनेंगे। भ्रातृपक्ष में विरोध होने की संभावना है। स्वास्थ्य का पाया भी कमजोर बना रहेगा। कामकाज सीमित तौर पर ही बन पाएंगे। अभी आश्वासनों से संतोष करना पड़ेगा। शुभांक-2-6-8

    वृष राशि :- सुविधा और समन्वय बना रहने से कामकाज में प्रगति बनेगी। मेल-मिलाप से काम बनाने की कोशिश लाभ देगी। अपने काम में सुविधा मिल जाने से प्रगति होगी। समाज में मान-सम्मान बढ़ेगा। यात्रा का दूरगामी परिणाम मिल जाएगा। कामकाज में आ रही बाधा को दूर कर लेंगे। शुभांक-4-6-8

    मिथुन राशि :– नवीन जिम्मेदारी बढ़ने के आसार रहेंगे। अपने काम में सुविधा मिल जाने से प्रगति होगी। यात्रा प्रवास का सार्थक परिणाम मिलेगा। मेल-मिलाप से काम बनाने की कोशिश लाभ देगी। समाज में मान-सम्मान बढ़ेगा। परिवारजनों का सहयोग बना रहेगा। मेहमानों का आगमन होगा। शुभांक-5-7-8

    कर्क राशि :– ले देकर की जा रही काम की कोशिश ठीक नहीं। राजकीय कार्यों से लाभ। पैतृक सम्पत्ति से लाभ। नैतिक दायरे में रहें। पुरानी गलती का पश्चाताप होगा। दाम्पत्य जीवन सुखद रहेगा। धीरे-धीरे लाभ का मार्ग प्रशस्त होगा उचित समय का इन्तजार करें। मेहमानों का आगमन होगा। छात्रों को लाभ। शुभांक-4-6-7

    सिंह राशि :– आय के अच्छे योग बनेंगे। संतान की उन्नति के योग हैं। स्त्री-संतान पक्ष का सहयोग मिलेगा। पुराने मित्र से मिलन होगा। स्वविवेक से कार्य करें। शत्रुपक्ष से सावधान रहें। भाई-बहनों का प्रेम बढ़ेगा। आत्मविश्वास बढ़ेगा। इच्छित कार्य सफल होंगे। इच्छित स्थान की यात्रा का योग हैं। शुभांक-2-5-6

    कन्या राशि :- ”आगे-आगे गौरख जागे” वाली कहावत चरितार्थ होगी। मेहमानों का आगमन होगा। परिवारजन का सहयोग व समन्वय काम को बनाना आसान करेगा। अपना काम दूसरों के सहयोग से पूरा होगा। कारोबारी काम में नवीन तालमेल व समन्वय बनाएं। मीठे बोलने वालों से संभल कर रहें। शुभांक-4-5-7

    तुला राशि :- जीवन साथी अथवा यार-दोस्तों के साथ साझे में किए जा रहे काम में लाभ मिल जाएगा। पूर्व नियोजित कार्यक्रम सरलता से संपन्न हो जाएंगे। जोखिम से दूर रहना ही बुद्घिमानी होगी। ले देकर की जा रही काम की कोशिश ठीक नहीं। महत्वपूर्ण कार्य को समय पर बना लें तो अच्छा ही होगा। शुभांक-3-5-7

    वृश्चिक राशि :- लाभ में आशातीत वृद्धि तय है मगर नकारात्मक रुख न अपनाएं। आशा और उत्साह के कारण सक्रियता बढ़ेगी। स्वास्थ्य मध्यम रहेगा। समाज में मान-सम्मान बढ़ेगा। आय-व्यय समान रहेगा। व्यापार व व्यवसाय में ध्यान देने से सफलता मिलेगी। विशिष्ट जनों से मेल-मुलाकात होगी। शुभांक-2-4-6

    धनु राशि :- अर्थपक्ष मजबूत रहेगा। जीवनसाथी का परामर्श लाभदायक रहेगा। व्यापार व नौकरी में स्थिति अच्छी रहेगी। शुभ कार्यों का लाभदायक परिणाम होगा। कामकाज की अधिकता रहेगी। व्यवसायिक अभ्युदय भी होगा और प्रसन्नताएं भी बढ़ेगी। स्वास्थ्य उत्तम रहेगा। धर्म-कर्म के प्रति रुचि जागृत होगी। शुभांक-4-6-7

    मकर राशि :- कामकाज की व्यस्तता से सुख-आराम प्रभावित होगा। प्रियजनों से समागम का अवसर मिलेगा। अवरुद्ध कार्य संपन्न हो जाएंगे। मानसिक एवं शारीरिक शिथिलता पैदा होगी। श्रेष्ठजनों की सहानुभूतियां होगी। यात्रा प्रवास का सार्थक परिणाम मिलेगा। आनन्ददायक वातावरण बनेगा। शुभांक-1-3-5

    कुंभ राशि :- होश में रहकर कार्य करें। कामकाज सीमित तौर पर ही बन पाएंगे। कारोबारी यात्रा को फिलहाल टालें। आय-व्यय की स्थिति समान रहेगी। अपने हितैषी समझे जाने वाले ही पीठ पीछे नुकसान पहुंचाने की कोशिश करेंगे। स्वास्थ्य का पाया भी कमजोर बना रहेगा। कुछ आर्थिक संकोच पैदा हो सकते हैं। शुभांक-3-4-6

    मीन राशि :– राजकीय कार्यों से लाभ। पैतृक सम्पत्ति से लाभ। कारोबारी यात्रा को फिलहाल टालें। शैक्षणिक कार्य आसानी से पूरे होते रहेंगे। व्यापार व व्यवसाय में ध्यान देने से सफलता मिलेगी। श्रम साध्य कार्यों में सफल होंगे। कुछ महत्वपूर्ण कार्य बनाने के लिए भाग-दौड़ रहेगी। मनोरथ सिद्धि का योग है। शुभांक-2-4-6

  • बुधवार के उपाय: गणपति और बुध की कृपा से संवरेंगी बुद्धि, व्यापार और आर्थिक स्थिति

    बुधवार के उपाय: गणपति और बुध की कृपा से संवरेंगी बुद्धि, व्यापार और आर्थिक स्थिति


    नई दिल्ली।हिंदू धर्म में सप्ताह के हर दिन का विशेष आध्यात्मिक और ज्योतिषीय महत्व होता है। इन्हीं में से बुधवार का दिन भगवान गणेश और ग्रह बुध को समर्पित माना गया है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार बुध ग्रह बुद्धिवाणीव्यापारशिक्षातर्कशक्ति और संचार का कारक होता है। जब किसी व्यक्ति की कुंडली में बुध कमजोर होता हैतो जीवन में कई तरह की परेशानियां आने लगती हैं। निर्णय लेने में भ्रमव्यापार में नुकसानपढ़ाई में एकाग्रता की कमीबार-बार धोखा मिलना और वाणी से जुड़े दोष आम समस्याएं बन जाती हैं। ऐसे में बुधवार के दिन किए गए कुछ विशेष उपाय जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सकते हैं।

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार बुधवार को भगवान गणेश की पूजा करने से जीवन के सभी विघ्न दूर होते हैं और कार्यों में सफलता प्राप्त होती है। गणपति को प्रथम पूज्य माना गया हैइसलिए किसी भी शुभ कार्य से पहले उनकी आराधना की जाती है। वहीं बुध ग्रह को मजबूत करने से करियरव्यापार लेखन मीडिया अका उंटिंग शिक्षा और कम्युनिकेशन से जुड़े क्षेत्रों में उन्नति के योग बनते हैं। बुधवार के दिन हरे रंग का विशेष महत्व होता हैक्योंकि यह रंग बुध ग्रह का प्रतीक माना जाता है। इस दिन हरे वस्त्र पहनना शुभ माना जाता है। साथ ही भगवान गणेश को हरी दूर्वा अर्पित करने से बुध ग्रह की अनुकूलता बढ़ती है। मूंग की दालहरी सब्जियांहरा चारा या हरे फल का दान करने से आर्थिक और मानसिक समस्याओं में राहत मिलती है।

    बुधवार को गणपति मंत्र का जाप भी अत्यंत फलदायी माना गया है। सुबह स्नान के बाद ॐ गं गणपतये नमः मंत्र का कम से कम 108 बार जाप करने से मानसिक तनाव कम होता है और कार्यों में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं। यह उपाय विशेष रूप से विद्यार्थियों और नौकरीपेशा लोगों के लिए लाभकारी माना जाता है।इसके अलावा तुलसी पूजन का भी विशेष महत्व है। बुधवार को तुलसी के पौधे में जल अर्पित कर दीपक जलाना और परिक्रमा करना बुध दोष को शांत करने में सहायक होता है। मान्यता है कि इससे घर में सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है और पारिवारिक तनाव कम होते हैं।

    बुधवार को गाय को हरा चारा या पालक खिलाना भी आर्थिक दृष्टि से शुभ माना गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस उपाय से धन संबंधी अड़चनें दूर होती हैं और आय के नए स्रोत बनते हैं।विद्यार्थियों के लिए यह दिन विशेष माना जाता है। वे गणेश जी को कॉपीकलम या पेंसिल अर्पित कर सकते हैंजिससे पढ़ाई में एकाग्रता और सफलता मिलती है। वहीं व्यापारी हरे वस्त्र में थोड़े से मूंग बांधकर तिजोरी में रखेंमान्यता है कि इससे व्यापार में लाभ और धन आगमन के योग बनते हैं।

    हालांकि बुधवार को कुछ बातों से परहेज करना भी जरूरी है। इस दिन किसी का अपमान न करेंकटु वाणी से बचें और बिना सोचे-समझे कोई बड़ा आर्थिक फैसला न लें। कर्ज लेने या देने से भी बचना चाहिए। साथ ही हरे पेड़-पौधों को काटना अशुभ माना गया है।नियमित रूप से बुधवार के उपाय करने से व्यक्ति की बुद्धि तीव्र होती हैवाणी में मधुरता आती हैव्यापार और नौकरी में स्थिरता मिलती हैशिक्षा में सफलता प्राप्त होती है और रिश्तों में भी सुधार देखने को मिलता है।

  • Mauni Amavasya 2026: मौनी अमावस्या कब है? जानें पूजा विधि और स्नान-दान से जुड़े जरूरी नियम

    Mauni Amavasya 2026: मौनी अमावस्या कब है? जानें पूजा विधि और स्नान-दान से जुड़े जरूरी नियम

    नई दिल्ली। Mauni Amavasya 2026 Date: सनातन परंपरा में माघ मास की अमावस्या को मौनी अमावस्या पर्व के रूप में जाना जाता है. हिंदू मान्यता के अनुसार इस पावन तिथि पर मौन रहकर साधना-आराधना करने पर साधक को विशेष पुण्यफल की प्राप्ति होती है. देवी-देवताओं संग पितरों का आशीर्वाद बरसाने वाली मौनी अमावस्या कब पड़ेगी और क्या हैं इसकी पूजा के नियम और उपाय, जानने के लिए जरूर पढ़ें ये लेख.
    Mauni Amavasya 2026 Kab Hai: माघ मास में पड़ने वाले तमाम पर्वों में मौनी अमावस्या का बहुत ज्यादा महत्व माना गया है. प्रयागराज संगम में लगने वाले माघ मेले में यह तीसरा और सबसे बड़ा पर्व स्नान माना जाता है क्योंकि हिंदू धर्म से जुड़े लोगों की मान्यता है कि इस पर्व पर गंगा का जल अमृत के समान पुण्यदायी हो जाता है. यही कारण है कि मौनी अमावस्या पर देश भर से लोग ​प्रयागराज के त्रिवेणी संगम तट पर आस्था की डुबकी लगाने के लिए पहुंचते हैं. मौनी अमावस्या का पर्व मौन रहकर स्नान-ध्यान, दान और पितृपूजा करने के लिए उत्तम माना गया है. आइए जानते हैं कि इस साल यह पावन पर्व कब पड़ेगा और इससे जुड़े नियम, उपाय आदि क्या हैं?
    हिंदू मान्यता के अनुसार इस साल मौनी अमावस्या का पर्व 18 जनवरी 2026, रविवार को मनाया जाएगा. पंचांग के अनुसार माघ मास की अमावस्या तिथि 18 जनवरी 2026 को पूर्वाह्न 00:03 बजे प्रारंभ होकर अगले दिन 19 जनवरी 2026 को पूर्वाह्न 01:21 बजे बजे तक रहेगी. ऐसे में इस साल मौनी अमावस्या का पर्व 18 जनवरी 2026 को मनाया जाना ही उचित रहेगा.

    मौनी अमावस्या का धार्मिक महत्व
    हिंदू मान्यता के अनुसार मौनी अमावस्या पर्व पर मौन रहकर की जाने वाली साधना शीघ्र ही सफल होती है. यह पर्व पितरों से लेकर देवताओं की कृपा बरसाने वाला माना गया है. हिंदू मान्यता है कि कुंभ मेले के दौरान इस पर्व पर प्रयागराज संगम पर गंगा का पावन जल अमृत के समान हो जाता है. जिसमें डुबकी लगाते ही व्यक्ति का तन और मन दोनों पाप से मुक्त होकर पवित्र हो जाता है. यही कारण है कि इस कुंभ मेले में इस पर्व पर सबसे ज्यादा श्रद्धालु आस्था की डुबकी लगाने के लिए पहुंचते हैं. मौनी अमावस्या पर स्नान-ध्यान करने के साथ पितरों का श्राद्ध और पिंडदान करने का भी बहुत ज्यादा महत्व माना गया है. मान्यता है कि मौनी अमावस्या पर पितृ पूजा करने से कुंडली का पितृदोष दूर होता है.

    अमावस्या पर करें पीपल पूजा का महाउपाय
    हिंदू धर्म में पीपल के पेड़ को बहुत ज्यादा पवित्र और पूजनीय माना गया है. इसमें न सिर्फ ब्रह्मा, विष्णु और महेश बल्कि शनि और पितरों का भी वास माना गया है. ऐसे में मौनी अमावस्या पर पुण्य की प्राप्ति और तमाम तरह के दोषों से मुक्ति पाने के लिए स्नान-ध्यान करने के बाद पीपल पर दूध मिला जल अर्पित करने के बाद दीपदान करें. पूजा के अंत में पीपल देवता की कम से कम 11 बार परिक्रमा करें.

  • 14 जनवरी 2026 का पंचांग: माघ कृष्ण एकादशी पर गणेश पूजन का विशेष योग, जानें शुभ-अशुभ मुहूर्त

    14 जनवरी 2026 का पंचांग: माघ कृष्ण एकादशी पर गणेश पूजन का विशेष योग, जानें शुभ-अशुभ मुहूर्त

    नई दिल्ली । 14 जनवरी 2026. बुधवार का दिन धार्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से विशेष महत्व रखता है। आज माघ माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि है. जो व्रत. पूजा और साधना के लिए अत्यंत शुभ मानी जाती है। एकादशी तिथि भगवान विष्णु को समर्पित होती है. वहीं बुधवार का दिन भगवान गणेश की आराधना के लिए विशेष फलदायी माना गया है। ऐसे में आज का दिन आध्यात्मिक साधना. व्रत और शुभ कार्यों के लिए खास संयोग बना रहा है।

    बुधवार को गणपति जी की पूजा करने से बुद्धि. विवेक. व्यापार में सफलता और जीवन की बाधाएं दूर होती हैं। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार. इस दिन गणेश जी की आराधना करने से बुध ग्रह से संबंधित दोष भी शांत होते हैं। श्रद्धालु आज के दिन भगवान गणेश को दूर्वा घास. मोदक और शमी के पत्ते अर्पित करते हैं। साथ ही “ॐ गं गणपतये नमः” मंत्र का जाप करना अत्यंत शुभ माना गया है। मान्यता है कि इस मंत्र के नियमित जाप से कार्यों में आ रही रुकावटें दूर होती हैं और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

    पंचांग के अनुसार. आज के दिन कुछ विशेष शुभ मुहूर्त भी हैं. जिनमें पूजा-पाठ. जप-तप और महत्वपूर्ण कार्य किए जा सकते हैं। आज अमृत काल दोपहर 03:22 बजे से शाम 05:10 बजे तक रहेगा. जो किसी भी शुभ कार्य के लिए उत्तम माना जाता है। वहीं ब्रह्म मुहूर्त सुबह 05:38 बजे से 06:25 बजे तक रहेगा। यह समय ध्यान. साधना और ईश्वर आराधना के लिए सर्वश्रेष्ठ माना जाता है।

    हालांकि. दिन में कुछ अशुभ काल भी हैं. जिनमें शुभ कार्यों से बचने की सलाह दी जाती है। आज राहुकाल दोपहर 12:35 बजे से 01:56 बजे तक रहेगा। इसके अलावा यम गण्ड सुबह 08:34 बजे से 09:55 बजे तक. कुलिक काल 11:15 बजे से 12:35 बजे तक और दुर्मुहूर्त 12:14 बजे से 12:57 बजे तक रहेगा। इन समयों में नए कार्य की शुरुआत. यात्रा या महत्वपूर्ण निर्णय लेने से बचना शुभ माना जाता है।

    सूर्य और चंद्रमा की स्थिति की बात करें तो आज सूर्य का उदय सुबह 07:14 बजे और सूर्यास्त शाम 05:57 बजे होगा। वहीं चंद्रमा का उदय तड़के 03:22 बजे और चंद्रास्त दोपहर 02:08 बजे होगा। चंद्रमा की यह स्थिति व्रत और मानसिक शांति के लिए अनुकूल मानी जा रही है। कुल मिलाकर. माघ कृष्ण एकादशी और बुधवार का यह संयोग भक्तों के लिए अत्यंत शुभ है। विधि-विधान से गणेश जी की पूजा. एकादशी व्रत और शुभ मुहूर्त में किए गए कार्य जीवन में सुख. समृद्धि और सफलता का मार्ग प्रशस्त कर सकते हैं।