Category: Religious Astrology

  • शनिवार को दान करते समय इन गलतियों से बचें, वरना होगा नुकसान

    शनिवार को दान करते समय इन गलतियों से बचें, वरना होगा नुकसान


    नई दिल्ली । हिंदू धर्म में शनिवार का दिन विशेष महत्व रखता है। यह दिन न्याय के देवता और कर्मफलदाता शनिदेव के नाम समर्पित है। माना जाता है कि इस दिन किए गए दान से शनि दोष समाप्त होता है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है। इस दिन दान-पुण्य करने से शनि की विशेष कृपा प्राप्त होती है।

    शनिवार का दान और शनिदेव की कृपा

    शनिवार का दिन विशेष रूप से शनिदेव के साथ जुड़ा होता है और ज्योतिष शास्त्र के अनुसार इस दिन दान करना बहुत फलदायी माना जाता है। यह दिन विशेष रूप से गरीबों और जरूरतमंदों की मदद करने, पुराने और व्यर्थ सामान को निकालने, और अपने कर्तव्यों को सही तरीके से निभाने का होता है। लेकिन ध्यान रहे कि इस दिन दान करते समय कुछ खास सावधानियाँ रखनी चाहिए। यदि किसी भी वस्तु का दान बिना ध्यान के किया जाए, तो यह शनिदेव को नाराज कर सकता है और जीवन में समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं।

    शनिवार को दान करते समय कौन सी चीजों से बचें

    ज्योतिष शास्त्र के अनुसार शनिवार को कुछ वस्तुओं का दान करना निषेध माना जाता है। इन वस्तुओं को दान करने से शनिदेव की नाराजगी हो सकती है और इसके नकारात्मक परिणाम हो सकते हैं।

    नमक का दान

    शनिवार के दिन नमक का दान करना अशुभ माना जाता है। नमक का दान करने से घर में दरिद्रता और वित्तीय संकट आ सकता है। यह शनि के दुष्प्रभाव को बढ़ाता है, जिससे पारिवारिक समस्याएं और आर्थिक संकट उत्पन्न हो सकते हैं।

    धारदार वस्तुएं चाकू, कैंची, सुई

    धारदार वस्तुएं जैसे चाकू, कैंची, या सुई का दान करना भी शनि दोष को बढ़ा सकता है। ऐसा माना जाता है कि इन वस्तुओं का दान करने से पारिवारिक रिश्तों में तनाव और विघटन हो सकता है। साथ ही यह धन की हानि का कारण बन सकता है।

    काले रंग की चीजें

    शनिवार को काले रंग की वस्तुओं का दान करना भी उचित नहीं माना जाता। हालांकि यह ध्यान रखना जरूरी है कि काले रंग का दान यदि जरूरतमंद व्यक्ति को किया जाए तो लाभकारी हो सकता है, लेकिन बिना ध्यान के इसका दान नुकसानदायक हो सकता है।

    झूठे आभूषण या टूटे सामान का दान

    पुराने या टूटे हुए सामान का दान भी सही नहीं माना जाता। इसके बजाय नए और उपयोगी सामान का दान करना चाहिए। पुरानी या टूट चुकी चीजों का दान शनि दोष को और भी बढ़ा सकता है, जिससे जीवन में समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं।

    क्या करें, और क्या न करें

    शनिवार के दिन दान करते समय यह भी ध्यान रखना चाहिए कि जो चीजें आप दान कर रहे हैं, वे पूरी तरह से साफ और उपयोगी हों। इससे दान का पुण्य और अधिक बढ़ता है। इसके साथ ही यह भी जरूरी है कि दान करते समय मन में शुद्धता और शुभकामनाओं का भाव हो। दान करने के साथ ही अपनी नकारात्मकता और बुरे कर्मों को भी छोड़ने का प्रयास करें। साथ ही, यह भी याद रखें कि शनिवार को उपवास रखने और पूजा अर्चना करना भी शनि देव की कृपा प्राप्त करने का एक प्रभावी उपाय है। शनिदेव की आराधना करने से शनि दोष की मुक्ति मिलती है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है।

    शनिवार का दिन शनि देव की कृपा पाने और जीवन में खुशहाली लाने के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। इस दिन किए गए दान से न सिर्फ शनि दोष समाप्त होता है, बल्कि इसके प्रभाव से जीवन में आने वाली समस्याओं का समाधान भी मिलता है। हालांकि, यह जरूरी है कि दान करते समय कुछ विशेष नियमों का पालन किया जाए। नमक और धारदार वस्तुओं का दान न करने से आप शनिदेव की कृपा पा सकते हैं और अपने जीवन को बेहतर बना सकते हैं।

  • बैठे-बैठे पैर हिलाते रहते हैं? सुधार लें ये 5 आदतें, वरना कुंडली के दो ग्रह होंगे कमजोर

    बैठे-बैठे पैर हिलाते रहते हैं? सुधार लें ये 5 आदतें, वरना कुंडली के दो ग्रह होंगे कमजोर


    नई दिल्ली । हमारी दिनचर्या में कई ऐसी आदतें होती हैं जिन्हें हम सामान्य समझते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि ये आदतें आपके जीवन और कुंडली के ग्रहों पर गहरा असर डाल सकती हैं? खासकर पैरों से जुड़ी आदतें ज्योतिष और वास्तु शास्त्र के अनुसार राहु, शनि और चंद्रमा जैसे ग्रहों को प्रभावित कर सकती हैं। इन ग्रहों का असर आपकी आर्थिक स्थिति, मानसिक शांति, और व्यक्तिगत जीवन पर पड़ता है। आइए जानते हैं कुछ ऐसी आदतों के बारे में, जिन्हें सुधार कर आप इन ग्रहों को मजबूत कर सकते हैं और जीवन में सुख-समृद्धि ला सकते हैं:

    पैर घसीटकर चलना

    कई लोग चलते वक्त पैर घसीटकर चलते हैं, यह आदत ज्योतिष के अनुसार राहु और शनि ग्रहों को कमजोर करती है। इससे व्यक्ति के जीवन में अचानक परेशानियां आ सकती हैं, मानसिक अस्थिरता बढ़ सकती है, और कामकाज में रुकावटें आ सकती हैं। राहु के प्रभाव से व्यक्ति को अचानक धन हानि या व्यवसायिक नुकसान हो सकता है। शनि ग्रह का प्रभाव करियर में अड़चनें उत्पन्न कर सकता है। उपाय चरणों को पूरी तरह से उठाकर चलें, ताकि आपके कदम मजबूती से आगे बढ़ें और राहु-शनि की नकारात्मकता दूर हो।

    पैर पर पैर चढ़ाकर बैठना

    यह आदत भी चंद्रमा और राहु को प्रभावित करती है। जब आप पैर पर पैर चढ़ाकर बैठते हैं, तो यह आपके मानसिक संतुलन को बिगाड़ सकता है। साथ ही, इस आदत से सामाजिक रिश्ते भी प्रभावित हो सकते हैं। माना जाता है कि इस तरह से बैठने से किसी की अनदेखी या असम्मान हो सकता है, जिससे जीवन में तनाव बढ़ सकता है। उपाय साफ और सीधी स्थिति में बैठें, जिससे मानसिक शांति बनी रहे और चंद्रमा मजबूत हो।

    बैठे-बैठे पैर हिलाना

    यह आदत भी बहुत सामान्य होती है, लेकिन ज्योतिष के अनुसार यह राहु और शनि को कमजोर करती है। यह आदत मानसिक अस्थिरता और मानसिक तनाव का कारण बन सकती है। लोग अक्सर बैठे-बैठे पैर हिलाते हैं, लेकिन यह आदत ध्यान केंद्रित करने में बाधा डालती है और शनि के प्रभाव को नकारात्मक बनाती है। उपाय जब भी आप बैठे हों, अपने पैर को स्थिर रखें और ध्यान केंद्रित करने की कोशिश करें।

    बिना जूतों के घर में प्रवेश करना

    घर में प्रवेश करते समय बिना जूतों के अंदर आना भी अशुभ माना जाता है। यह आदत राहु और शनि को प्रभावित कर सकती है। जूतों को सही तरीके से बाहर ही छोड़ना चाहिए, क्योंकि यह घर में आने वाली नकारात्मक ऊर्जा को अंदर लाने का कारण बन सकता है। उपाय घर में प्रवेश करते समय जूते बाहर ही रखें और घर में प्रवेश करने से पहले हल्का ध्यान या नमस्कार जरूर करें।

    पैर को बढ़ा कर बैठना

    अगर आप कभी पैर फैलाकर बैठते हैं या पैरों को चढ़ाकर बैठते हैं, तो यह भी आपके कुंडली के ग्रहों पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है। यह आदत शनि और चंद्रमा पर प्रतिकूल असर डालती है और जीवन में विरोधी परिस्थितियों को जन्म देती है।

    उपाय जब भी बैठें, अपने पैर को सही तरीके से रखें और अच्छे से सीधे बैठें

    हमारी दिनचर्या में बहुत सी आदतें छोटी-छोटी लग सकती हैं, लेकिन ये ग्रहों पर गहरा प्रभाव डालती हैं। इसलिए, इन आदतों को सुधारकर आप न केवल अपनी शारीरिक स्थिति को बेहतर बना सकते हैं, बल्कि कुंडली के ग्रहों को भी मजबूत कर सकते हैं। अगर आप इन आदतों से बचते हैं, तो आपको मानसिक शांति, आर्थिक समृद्धि और व्यक्तिगत जीवन में भी सुधार देखने को मिल सकता है।

  • Makar Sankranti 2026 : मकर संक्रांति पर कैसे पकेगी खिचड़ी, षट्तिला एकादशी ने चावल दान पर भी फंसाया पेंच, अब मकर संक्रांति पर क्या करें?

    Makar Sankranti 2026 : मकर संक्रांति पर कैसे पकेगी खिचड़ी, षट्तिला एकादशी ने चावल दान पर भी फंसाया पेंच, अब मकर संक्रांति पर क्या करें?


    नई दिल्ली। मकर संक्रांति इस बार 14 जनवरी को मनाया जाएगा। हालांकि, इस बार की मकर संक्रांति बेहद ही खास होने वाली है। क्योंकि,मकर संक्रांति पर इस बार एकादशी तिथि का संयोग बन गया है। ऐसे में मकर संक्रांति पर सूर्यदेव के साथ भगवान विष्णु की कृपा का लाभ भी मिलने वाला है। लेकिन इससे मकर संक्रांति पर एक दुविधा की स्थिति भी बन गई है जिसको लेकर लोगों में उलझन की स्थिति बनी हुई है। दरअसल मकर संक्रांति पर खिचड़ी खाने और दान करने का विशेष महत्व बताया गया है। लेकिन, एकादशी तिथि होने के कारण अब सवाल यह उठता है कि, क्या इस बार मकर संक्रांति पर भगवान को खिचड़ी का भोग लगाना,खिचड़ी खाना और दान करना शुभ रहेगा या नहीं। आपके इन्हीं सवालों के जवाब यहां हम आपको बताने जा रहे हैं कि अबकी बार मकर संक्रांति पर एकादशी तिथि के संयोग में खिचड़ी खाने, दान करने और भगवान को भोग लगाने के संबंध में आप क्या कर सकते हैं।

    क्या मकर संक्रांति 2026 पर कर सकते हैं चावल और खिचड़ी का दान ?
    सूर्य धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करते हैं तो मकर संक्रांति का पर्व मनाया जाता है। सूर्य इस दिन अपने पुत्र शनि की राशि मकर में प्रवेश करते हें। इस दिन से सूर्य उत्तरायण होते हैं और देवताओं का दिन भी शुरू होता है। श्रीमद्भागवत गीता में भी मकर संक्रांति के दिन का बड़ा महत्व बताया गया है, इस दिन से देवलोक में दिन आरंभ होता और सूर्यदेव अपने दिए हुए वरदान के अनुसार मकर राशि में आकर धन समृद्धि और सुख लाते हैं। इसलिए भी इस दिन का विशेष महत्व है। और परंपराओं से चल मान्यता चली आ रही है कि मकर संक्रांति के दिन खिचड़ी का भोग लगता है और खिचड़ी एवं चावल का दान भी किया जाता है। लेकिन अबकी बार मकर संक्रांति के साथ षटतिला एकादशी का संयोग होने से दुविधा की स्थिति बन गई है।

    शास्त्रों के अनुसार, एकादशी तिथि पर अन्न का सेवन और अन्न दान करना वर्जित माना गया है। खास तौर पर चावल खाने और दान करने की मनाही है। ऐसे में मकर संक्रांति पर इस बार आप तिल, गुड़ और मूंगफली आदि का दान कर सकते हैं। इस दिन आप चावल और खिचड़ी का बाकी सामान दान के निमित्त अलग से निकालकर घर के मंदिर में रख दें।
    मकर संक्रांति 14 जनवरी बुधवार के दिन और उससे अगले दिन 15 जनवरी को गुरुवार है। शास्त्रों में गुरुवार के दिन खिचड़ी का सेवन वर्जित बताया गया है। ऐसे में आप उस दिन भी खिचड़ी नहीं बना सकते हैं तो ऐसे में शनिवार का दिन यानी 17 जनवरी को आप खिचड़ी बना सकते हैं और इसी दिन आप चावल का दान भी कर सकते हैं। बता दें कि 17 जनवरी शनिवार के दिन सप्तमी उपरांत अष्टमी तिथि रहेगी जो शनि से संबंधित है और सूर्य जब तक मकर राशि में गोचर करते रहेंगे तब तक माघ मास में दान पुण्य का संयोग बना रहेगा। ऐसे में इस दिन जो भी आप चावल आदि का दान करेंगे उसका आपको उत्तम फल मिलेगा। आप 17 जनवरी को खिचड़ी का सेवन भी करेंगे तो यह शुभ रहेगा और आपके ग्रह दोष कटेंगे।

    मकर संक्रांति 2026 पर क्या दान करें ?
    मकर संक्रांति पर इस बार आप चाहें तो गुड़, तिल, तिल से बनी चीजें जैसे लड्डू आदि का दान करें। इस दिन तिल का दान करने से पापों का नाश होता है। साथ ही तिल का दान करने से सूर्य देव प्रसन्न होते हैं। इस दिन दान पुण्य करने से सुख समृद्धि की प्राप्ति होती है।

  • प्रेमानंद महाराज का असली नाम और उनके जीवन की प्रेरणादायक यात्रा

    प्रेमानंद महाराज का असली नाम और उनके जीवन की प्रेरणादायक यात्रा


    नई दिल्ली । प्रेमानंद महाराज का नाम आज के समय में किसी आध्यात्मिक चमत्कार से कम नहीं माना जाता है। उनका जीवन आत्मसमर्पण, भक्ति और अडिग विश्वास का प्रतीक बन चुका है। जहां एक ओर चिकित्सकीय दृष्टिकोण से उनकी दोनों किडनियां पूरी तरह से खराब हो चुकी हैं और वे डायलिसिस पर हैं वहीं दूसरी ओर प्रेमानंद महाराज हर रात 2 बजे उठकर वृंदावन की परिक्रमा करते हैं और अपने भक्तों को ऊर्जा से भरपूर प्रवचन देते हैं। यह असाधारण साहस और भक्ति का अद्भुत उदाहरण प्रस्तुत करता है।

    अनिरुद्ध से प्रेमानंद महाराज तक का सफर

    प्रेमानंद महाराज का जन्म उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले के एक छोटे से गाँव सरसौल में हुआ था। उनका असली नाम अनिरुद्ध कुमार पांडे था। उनका पालन-पोषण एक धर्मनिष्ठ ब्राह्मण परिवार में हुआ, जहां भक्ति के संस्कार उन्हें विरासत में मिले थे। उनके दादा एक सन्यासी थे और माता-पिता भी धार्मिक प्रवृत्तियों के अनुयायी थे। बचपन से ही अनिरुद्ध का झुकाव आध्यात्मिकता की ओर था। वह बाकी बच्चों की तरह खेल-कूद में व्यस्त नहीं रहते थे बल्कि अक्सर ध्यान और मंत्र जाप में लीन रहते थे।13 वर्ष की उम्र में, जब अन्य बच्चे अपने भविष्य के सपनों में खोए रहते हैं, अनिरुद्ध ने घर छोड़कर संन्यास की राह पकड़ ली। इस समय से उनकी आध्यात्मिक यात्रा की शुरुआत हुई और उन्होंने नैमिषारण्य में गहरी तपस्या की। यहां उन्हें आनंद स्वरूप ब्रह्मचारी के नाम से पहचाना गया।

    शिव भक्ति से कृष्ण प्रेम तक का सफर

    आध्यात्मिकता के प्रति अपनी गहरी निष्ठा के कारण अनिरुद्ध ने भगवान शिव की उपासना की और मोक्ष प्राप्ति के लिए जीवन समर्पित कर दिया। लेकिन एक दिन उन्हें किसी संत के माध्यम से वृंदावन की महिमा और भगवान कृष्ण की रासलीला के बारे में ज्ञात हुआ। इसके बाद उन्होंने महादेव की आज्ञा लेकर वृंदावन की यात्रा की और वहां पहुंचते ही उनका दिल पूरी तरह से बदल गया। वृंदावन की रज में कदम रखते ही उन्होंने राधा वल्लभ संप्रदाय को अपनाया और चैतन्य महाप्रभु की भक्ति पद्धति से प्रभावित हुए। यहीं पर उनकी मुलाकात उनके गुरु गौरांगी शरण महाराज से हुई। गुरु के साथ बिताए गए समय में उन्होंने 10 वर्षों तक सेवा की, और राधा रानी के चरणों में अनन्य भक्ति के कारण उन्हें नया नाम मिला: प्रेमानंद गोविंद शरण, जिसे आज पूरी दुनिया प्रेमानंद महाराज के नाम से जानती है।

    किडनियां फेल, फिर भी भक्ति का पावर हाउस

    प्रेमानंद महाराज का जीवन किसी चमत्कार से कम नहीं है। चिकित्सकों के अनुसार उनकी दोनों किडनियां पूरी तरह से फेल हो चुकी हैं और वे लंबे समय से डायलिसिस पर हैं। ऐसी स्थिति में किसी सामान्य व्यक्ति के लिए बिस्तर से उठना भी मुश्किल होता, लेकिन प्रेमानंद महाराज की भक्ति और आत्मविश्वास की कोई सीमा नहीं। हर रात 2 बजे उठकर वे वृंदावन की परिक्रमा करते हैं और घंटों तक अपने भक्तों को ऊर्जावान प्रवचन देते हैं। उनकी भक्ति की शक्ति का अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि उन्होंने अपनी किडनियों का नाम राधा और कृष्ण रखा है। वे अक्सर कहते हैं कि यह शरीर केवल राधा रानी की सेवा का एक साधन है, और जब तक उनकी इच्छा है, यह शरीर कार्य करता रहेगा। प्रेमानंद महाराज की भक्ति का ये अद्वितीय रूप उनके भक्तों के लिए एक निरंतर प्रेरणा स्रोत है। उनका जीवन यह सिद्ध करता है कि आत्मविश्वास, भक्ति और विश्वास के बल पर कोई भी कठिनाई अजेय नहीं होती।

  • अघोरी बाबा बनने की कठिन साधना: 12 साल की तपस्या और 5 कठिन नियम

    अघोरी बाबा बनने की कठिन साधना: 12 साल की तपस्या और 5 कठिन नियम


    नई दिल्ली । अघोरी बाबा हिंदू धर्म के सबसे रहस्यमयी और कठिन आध्यात्मिक पंथों में से एक माने जाते हैं। भगवान शिव के भैरव रूप के उपासक अघोरी अपनी कठोर साधना भूत-प्रेत से संबंधित क्रियाओं और सनातन मार्ग से अलग हटकर जीवनशैली के लिए प्रसिद्ध हैं। अघोर शब्द का शाब्दिक अर्थ होता है जो घोर न हो यानी एक ऐसा व्यक्ति जो संसार की जटिलताओं से ऊपर उठकर अत्यधिक सरल और सहज जीवन जीता हो। हालांकि इस सहजता तक पहुंचने का मार्ग अत्यंत कठिन है और इसके लिए एक कठोर साधना की आवश्यकता होती है।

    अघोरी बनने के लिए 12 वर्षों की कठिन तपस्या

    अघोरी बनने के लिए सबसे पहली शर्त है 12 वर्षों की तपस्या। यह तपस्या किसी साधारण साधना से कहीं अधिक कठोर होती है। अघोरी बनने के इच्छुक व्यक्ति को पहले अपने गुरु के पास जाकर उनका दीक्षा ग्रहण करना होता है। इस दौरान गुरु के मार्गदर्शन में शारीरिक मानसिक और आध्यात्मिक स्तर पर कठिन साधनाएं की जाती हैं। अघोरी बनने के इस रास्ते में व्यक्ति को अपने शरीर और आत्मा को नियंत्रित करने की अत्यधिक कठिन प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है। गुरु की उपस्थिति में 12 साल की साधना के दौरान, अघोरी ने अपनी चेतना को शुद्ध करने के लिए व्रत, उपवास और अन्य कठिन तपों का पालन करना होता है। यह तपस्या आत्मा को शुद्ध करने और शिव भक्ति में गहरे उतरने के लिए की जाती है।

    सांसारिक मृत्यु और नया जन्म

    अघोरी बनने से पूर्व व्यक्ति को एक मानसिक और शारीरिक मृत्यु का अनुभव करना होता है। इसका अर्थ है कि वह अपने परिवार और समाज के लिए पूरी तरह से मृत हो चुका है और उसे एक नए जन्म की आवश्यकता होती है। यह मृत्यु एक प्रकार का ‘पिंडदान’ होती है जिसमें व्यक्ति अपने पुराने अहंकार और सांसारिक आकर्षण को छोड़कर केवल शिव भक्ति की ओर अग्रसर होता है। अघोरी बनने के बाद उनका जीवन पूरी तरह से गुरु और शिव की सेवा में समर्पित हो जाता है। उनके द्वारा किए गए कार्यों और साधनाओं में कोई भी परंपरागत या सामाजिक बंधन नहीं होते। वे अपने मार्ग में जाने वाले हर कार्य को भैरव रूप में स्वीकार करते हैं।

    अघोरी जीवन के 5 कठिन नियम

    शरीर की तपस्या: अघोरी के लिए शरीर केवल एक माध्यम होता है, और इसे पूरी तरह से शुद्ध किया जाता है। शरीर को संयमित और तपस्वी जीवन जीने के लिए तैयार किया जाता है। सांसारिक मोह-माया से दूर रहना: अघोरी के लिए यह आवश्यक है कि वह सांसारिक सुख-साधनों से दूर रहे। उन्हें अपनी इच्छाओं और भौतिक सुखों से कोई आकर्षण नहीं होता। मृत्यु और जीवन के बीच की सीमा को समझना: अघोरी प्राचीन परंपराओं के अनुसार मृत्यु को एक प्राकृतिक प्रक्रिया मानते हैं और वे उसे शिव के रूप में स्वीकार करते हैं। इसके कारण वे शवों के पास बैठकर साधना करते हैं और शमशान भूमि को भी अपने साधना स्थल के रूप में चुनते हैं।

    नकारात्मक ऊर्जा से संवाद अघोरी अक्सर भूत-प्रेत और नकारात्मक शक्तियों से संवाद करते हैं। इसका उद्देश्य आत्मा को शुद्ध करना और सच्चे शिव दर्शन को प्राप्त करना होता है। निर्विकल्प समर्पण: अघोरी बाबा के लिए समर्पण सबसे बड़ा साधना है। उन्हें अपने जीवन में कोई दुराव या स्वार्थ नहीं होता वे पूर्ण रूप से शिव की भक्ति में लीन रहते हैं। घोरी बनने की साधना को आम तौर पर एक अत्यंत कठिन और जोखिमपूर्ण प्रक्रिया माना जाता है, लेकिन इसके जरिए व्यक्ति अपनी आत्मा की शुद्धि और शिव के निकटता प्राप्त करने का प्रयास करता है। यह एक ऐसा मार्ग है जिसमें शरीर, मन, और आत्मा की पूरी तपस्या और बलिदान शामिल होता है।

  • मकर संक्रांति कब है 2026: जानें कब मनाई जाएगी और किन चीजों का करें दान

    मकर संक्रांति कब है 2026: जानें कब मनाई जाएगी और किन चीजों का करें दान


    नई दिल्ली । मकर संक्रांति हिंदू धर्म में एक बेहद महत्वपूर्ण और खास त्योहार है, जो हर साल सूर्य के मकर राशि में प्रवेश करने के साथ मनाया जाता है। यह त्योहार विशेष रूप से पौष माह में आता है और इस दिन सूर्य देव उत्तरायण होते हैं जिसे देवताओं का दिन माना जाता है। इस दिन सूर्य की उपासना दान और विशेष रूप से गंगा या किसी पवित्र नदी में स्नान का महत्व होता है।

    मकर संक्रांति कब है 2026

    पंचांग के अनुसार, सूर्य देव 14 जनवरी 2026, बुधवार को दोपहर 3 बजकर 13 मिनट पर मकर राशि में प्रवेश करेंगे। इसलिए मकर संक्रांति का पर्व 14 जनवरी 2026 को मनाया जाएगा। इस दिन का विशेष पुण्य काल दोपहर 3:13 बजे से शुरू होकर लगभग 2 घंटे 32 मिनट तक रहेगा। इस दौरान किए गए स्नान, दान, सूर्य को अर्घ्य अर्पित करने और जप-तप का विशेष महत्व है।

    मकर संक्रांति पर किन चीजों का करें दान

    मकर संक्रांति का दिन विशेष रूप से दान के लिए महत्वपूर्ण होता है। इस दिन दान करने से न केवल पुण्य मिलता है बल्कि जीवन में सुख-समृद्धि भी आती है। मान्यता है कि मकर संक्रांति के दिन निम्नलिखित चीजों का दान करने से पापों का नाश होता है और व्यक्ति को खुशहाली मिलती है तिल: तिल का दान बहुत शुभ माना जाता है और यह शरीर को निरोगी बनाता है।

    गुड़: गुड़ का दान करने से घर में सुख-शांति और समृद्धि बनी रहती है। खिचड़ी: खिचड़ी का दान करना और उसका सेवन करना विशेष रूप से इस दिन शुभ माना जाता है। चावल और उड़द: चावल और उड़द का दान करना भी मकर संक्रांति के दिन फलदायी होता है।हल्दी और नमक: हल्दी और नमक का दान भी पवित्रता और शुभता का प्रतीक माना जाता है। धान: धान का दान करने से अनर्थ और दरिद्रता का नाश होता है। इसके अलावा इस दिन दीन-हीन और गरीबों को वस्त्र, वस्तुएं, अन्न और अन्य जरूरी सामान दान करने का भी महत्व है।

    मकर संक्रांति का महत्व

    मकर संक्रांति का पर्व सूर्य देव के उत्तरायण होने के कारण विशेष रूप से महत्व रखता है। यह दिन अत्यंत शुभ माना जाता है, क्योंकि इस दिन से सूर्य की किरणें पृथ्वी पर अधिक शक्ति और ऊर्जा लेकर आती हैं। यही कारण है कि इस दिन को शुभ कार्यों की शुरुआत और दान-पुण्य के लिए सबसे अच्छा दिन माना जाता है।

    स्नान-दान का महत्व

    मकर संक्रांति के दिन सूर्योदय से पहले गंगा या किसी पवित्र नदी में स्नान करना अत्यंत फलदायी माना जाता है। साथ ही सूर्य को अर्घ्य अर्पित करना और विशेष रूप से मंत्रों का जाप करना पुण्यदायी होता है। मकर संक्रांति का पर्व एक नई ऊर्जा, उत्साह और सकारात्मकता लेकर आता है, जो जीवन को उज्जवल और समृद्ध बनाता है।

  • मौनी अमावस्या 2026 18 जनवरी को चमकेगी इन 3 राशियों की किस्मत महादेव होंगे मेहरबान

    मौनी अमावस्या 2026 18 जनवरी को चमकेगी इन 3 राशियों की किस्मत महादेव होंगे मेहरबान


    नई दिल्ली । सनातन धर्म में माघ मास की अमावस्या जिसे मौनी अमावस्या के नाम से जाना जाता है का आध्यात्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से अत्यधिक महत्व है। यह दिन विशेष रूप से तप ध्यान और आत्म-चिंतन के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। इस वर्ष मौनी अमावस्या 18 जनवरी रविवार को मनाई जाएगी। ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार इस दिन ग्रहों की स्थिति कुछ राशियों के लिए अत्यंत लाभकारी रहेगी। खासकर कर्क मकर और कुंभ राशियों के जातकों के लिए यह दिन एक वरदान साबित हो सकता है क्योंकि इस दिन भगवान शिव की विशेष कृपा उन पर बरसने वाली है।

    कर्क राशि

    कर्क राशि के जातकों के लिए मौनी अमावस्या का दिन बेहद शुभ और लाभकारी रहेगा। भगवान शिव की कृपा से आपके रुके हुए मांगलिक कार्य संपन्न होंगे और जो कार्य पहले कठिन लग रहे थे वे अब सुगमता से पूरे होंगे। इस दिन के दौरान खासकर बिजनेस और वित्तीय मामलों में सकारात्मक बदलाव आएगा।

    लाभ

    व्यापार में लाभ के प्रबल योग हैं। निवेश के लिए यह समय उत्तम रहेगा और आपको अच्छा रिटर्न मिल सकता है।जीवन के अन्य क्षेत्रों में भी सफलता और समृद्धि की संभावनाएं बन रही हैं।

    उपाय

    मानसिक शांति और मनोकामना पूर्ति के लिए गंगाजल में काले तिल मिलाकर भगवान शिव का अभिषेक करें। यह उपाय आपके जीवन में शांति और समृद्धि लाएगा।

    मकर राशि

    मकर राशि के स्वामी शनिदेव हैं और इनके आराध्य भगवान शिव हैं। मौनी अमावस्या पर यह दिन मकर राशि के जातकों के लिए विशेष रूप से शुभ होगा। इस दिन आपको बड़ी उपलब्धियों की प्राप्ति हो सकती है जिनकी आप लंबे समय से प्रतीक्षा कर रहे थे। इसके अलावा पार्टनर का सहयोग और समर्थन भी प्राप्त होगा जिससे आपके व्यक्तिगत और व्यावसायिक कार्यों में गति आएगी।

    लाभ

    लंबे समय से अटके हुए काम अब गति पकड़ेंगे। मानसिक तनाव में कमी आएगी जिससे जीवन में शांति और संतुलन स्थापित होगा। पार्टनर और सहयोगियों से पूरी मदद मिलेगी।

    उपाय

    इस दिन काले तिल का दान करना आपके लिए विशेष रूप से लाभकारी रहेगा। इससे भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त होगा और कार्यों में सफलता मिलेगी।

    कुंभ राशि

    कुंभ राशि के जातकों के लिए भी यह मौनी अमावस्या बहुत फायदेमंद साबित हो सकती है। ग्रहों की स्थिति कुंभ राशि के लिए शुभ संकेत दे रही है। इस दिन महादेव की विशेष कृपा से आपके जीवन में आने वाली चुनौतियों से मुक्ति मिल सकती है और जो भी कष्ट चल रहे थे वे दूर हो सकते हैं। आप मानसिक शांति और संतुलन महसूस करेंगे जो आपके व्यक्तिगत जीवन में सुधार लाएगा।

    लाभ

    किसी भी पुराने या लंबित कार्य में सफलता मिलने की संभावना है। इस दिन आपको मानसिक शांति प्राप्त होगी और घर-परिवार में सुख-शांति का माहौल बनेगा कोई नई शुरुआत करने के लिए यह समय अत्यंत अनुकूल रहेगा।

    उपाय

    इस दिन शिवलिंग पर जल अर्पित करने और धूप-दीप से पूजा करने से विशेष लाभ मिलेगा। इससे आपके कार्यों में आ रही अड़चनें दूर होंगी और आपकी जिंदगी में सुख-समृद्धि आएगी। 18 जनवरी 2026 को होने वाली मौनी अमावस्या आपके जीवन में नए बदलाव ला सकती है खासकर कर्क मकर और कुंभ राशियों के जातकों के लिए। इस दिन भगवान शिव की कृपा से आपकी मेहनत का फल मिलेगा रुके हुए कार्य पूरे होंगे और जीवन में सकारात्मक बदलाव आएगा। इन तिथियों पर शिव पूजा और दान का महत्व अधिक बढ़ जाता है और ये उपाय आपके जीवन में शांति समृद्धि और सफलता लाने में सहायक होंगे।

  • मोक्ष के द्वार खोलेंगी ये 5 डुबकियां नोट करें साल 2026 में गंगा स्नान के महायोग

    मोक्ष के द्वार खोलेंगी ये 5 डुबकियां नोट करें साल 2026 में गंगा स्नान के महायोग


    नई दिल्ली । हिंदू धर्म में पवित्र नदियों में स्नान करना न केवल शरीर के शुद्धिकरण का तरीका है बल्कि यह आत्मा के उद्धार का मार्ग भी माना जाता है। शास्त्रों में उल्लेख है कि विशेष तिथियों पर इन नदियों के जल में अमृत’ तत्व का संचार होता है और उस समय स्नान करने से व्यक्ति को जन्म-मरण के चक्र से मुक्ति मिलती है। साल 2026 में भी कुछ ऐसे खास अवसर आ रहे हैं जब गंगा यमुना और अन्य पवित्र नदियों में स्नान करने से अधिक पुण्य प्राप्त होता है। आइए जानते हैं उन पांच प्रमुख तिथियों के बारे में जब गंगा स्नान से आपके जीवन के सभी कष्ट दूर हो सकते हैं और मोक्ष के द्वार खुल सकते हैं।

    मकर संक्रांति 14 जनवरी 2026

    साल का पहला बड़ा स्नान सूर्य के उत्तरायण होने पर होता है। इस दिन विशेष रूप से प्रयागराज और हरिद्वार में गंगा स्नान का महत्व है। मान्यता है कि मकर संक्रांति पर तिल का दान और गंगा स्नान करने से अक्षय पुण्य मिलता है और व्यक्ति के पाप नष्ट होते हैं। इस दिन विशेष रूप से गंगा में स्नान करके दान-पुण्य करने से जीवन में सुख-शांति का वास होता है।

    मौनी अमावस्या 18 जनवरी 2026

    माघ महीने की यह अमावस्या वर्ष की सबसे बड़ी अमावस्या मानी जाती है। इस दिन खासकर मौन रहकर जप और गंगा स्नान करने से मुनि पद की प्राप्ति होती है। इस तिथि को पितृ दोष से मुक्ति और आत्म-चिंतन के लिए सर्वश्रेष्ठ माना जाता है। यह दिन आपके जीवन की समस्याओं को हल करने और आत्मा के शुद्धिकरण के लिए बेहद शुभ है।

    माघी पूर्णिमा 1 फरवरी 2026

    माघी पूर्णिमा पर गंगा में स्नान करना विशेष फलदायी माना जाता है। इस दिन स्नान करने से भगवान विष्णु की असीम कृपा प्राप्त होती है और माघ स्नान के संकल्प से भक्त अपने व्रत का समापन करते हैं। यह समय स्वर्ग लोक की प्राप्ति के लिए अनुकूल होता है। माघी पूर्णिमा के दिन किए गए दान और पुण्य का फल लंबी अवधि तक मिलता है।
    गंगा दशहरा 25 मई 2026 गंगा दशहरा वह पर्व है जब मां गंगा के पृथ्वी पर अवतरण की कथा सुनाई जाती है। इस दिन विशेष रूप से गंगा स्नान करने से व्यक्ति के दस प्रकार के पाप कायिक वाचिक और मानसिक का नाश होता है।

    गंगा दशहरा के दिन गंगा स्नान करने से न केवल शारीरिक शुद्धता मिलती है बल्कि यह पवित्रता भी प्रदान करता है जिससे जीवन में एक नवीनीकरण और आंतरिक शांति का अहसास होता है।कार्तिक पूर्णिमा 24 नवंबर 2026 कार्तिक पूर्णिमा को ‘देव दीपावली’ और ‘त्रिपुरी पूर्णिमा’ भी कहा जाता है। इस दिन पवित्र गंगा में स्नान और दीपदान करने से जीवन के सभी कष्ट दूर हो जाते हैं। माना जाता है कि इस दिन भगवान विष्णु की कृपा से घर में लक्ष्मी का स्थाई वास होता है। साथ ही इस दिन का स्नान व्यक्ति के पापों को नष्ट करता है और पुण्य की प्राप्ति होती है।

    दान का महत्व

    इन विशेष तिथियों पर गंगा स्नान के बाद अपनी सामर्थ्य के अनुसार अनाज वस्त्र तिल या अन्य सामग्री का दान जरूर करें। शास्त्रों के अनुसार बिना दान के स्नान का पुण्य फल स्थिर नहीं माना जाता है। दान से स्नान के पुण्य में वृद्धि होती है और यह आपके जीवन में समृद्धि और शांति का कारण बनता है।इन प्रमुख तिथियों पर गंगा स्नान के साथ-साथ दान-पुण्य करने से न केवल आत्मा का शुद्धिकरण होता है बल्कि जीवन की सारी बाधाएं दूर होती हैं। इन अवसरों का सही लाभ उठाकर आप अपने जीवन को पुण्य और मोक्ष के मार्ग पर अग्रसर कर सकते हैं।

  • घर में गंगाजल रखते समय न करें ये गलतियां जानें सही तरीका

    घर में गंगाजल रखते समय न करें ये गलतियां जानें सही तरीका


    नई दिल्ली । गंगाजल को हिंदू धर्म में अत्यधिक पवित्र और शुद्ध माना जाता है। इसे देवी गंगा का स्वरूप माना जाता है, और यह घर में शुद्धता और आशीर्वाद लाने के लिए रखा जाता है। मगर गंगाजल को सही विधि से रखना बेहद जरूरी है, क्योंकि अगर इसे गलत तरीके से रखा जाए तो इसके आध्यात्मिक प्रभाव में कमी आ सकती है। आइए जानते हैं कि घर में गंगाजल रखने का सही तरीका क्या है और कौन सी गलतियां नहीं करनी चाहिए।

    सही पात्र का चयन करें

    गंगाजल को हमेशा तांबे, पीतल, चांदी या कांच के बर्तन में ही रखें। ये सामग्री पवित्रता को बनाए रखने में मदद करती हैं। प्लास्टिक और लोहे के बर्तनों में गंगाजल रखना अशुद्ध माना जाता है। साथ ही, बर्तन को हमेशा साफ और गंगाजल के लिए ही इस्तेमाल करें, ताकि उसमें कोई और अशुद्धता न घुले।

    गंगाजल रखने की सही जगह

    गंगाजल को घर के मंदिर या पूजा स्थल में ही रखना चाहिए। इसे कभी भी जमीन पर नहीं रखें। गंगाजल रखने के लिए सबसे उपयुक्त स्थान पूजा का स्थान है, जहां नियमित रूप से श्रद्धा भाव से पूजा होती हो। बाथरूम, रसोई या शयनकक्ष में गंगाजल रखना गलत माना जाता है, क्योंकि इन स्थानों को पवित्र नहीं माना जाता।

    ढककर रखें

    गंगाजल के पात्र को हमेशा ढककर रखें ताकि उसमें धूल या कोई भी अशुद्धता न जाए। ढक्कन साफ होना चाहिए और उसे नियमित रूप से धोकर रखना चाहिए। गंगाजल का शुद्धता बनाए रखना बहुत महत्वपूर्ण है, इसलिए इसे बिना ढके रखने से बचें।

    गंगाजल का उपयोग केवल पवित्र कार्यों के लिए करें

    गंगाजल का इस्तेमाल केवल पूजा, हवन, व्रत, संस्कार और शुद्धिकरण के लिए ही करना चाहिए। इसे किसी आम कार्य के लिए इस्तेमाल करना अनुचित होता है। साथ ही अशुद्ध अवस्था में या बिना स्नान किए गंगाजल को छूने से बचें। यह गंगाजल की पवित्रता को प्रभावित कर सकता है।

    बचा हुआ गंगाजल कैसे निपटान करें

    गंगाजल का नाली में बहाना कभी भी नहीं करना चाहिए, क्योंकि यह गंगाजल की पवित्रता के खिलाफ है। यदि गंगाजल बच जाए तो इसे पौधों की जड़ों में डाल सकते हैं, जो कि शुभ माना जाता है। इससे वातावरण में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और पौधों की वृद्धि में भी मदद मिलती है। गंगाजल को घर में रखना एक पवित्र कार्य है और इसे सही तरीके से रखने से इसके आध्यात्मिक प्रभाव और शुद्धता में वृद्धि होती है। गंगाजल को सही पात्र में सही स्थान पर और सही तरीके से रखने से न केवल घर में शांति और सौभाग्य का वास होता है बल्कि इससे जीवन में सकारात्मक ऊर्जा भी बनी रहती है। इन सरल नियमों का पालन करके आप गंगाजल की महिमा और शक्ति का सही तरीके से अनुभव कर सकते हैं।

  • शुभ और अशुभ काल 07 जनवरी 2026 पंचांग – माघ माह की पंचमी तिथि

    शुभ और अशुभ काल 07 जनवरी 2026 पंचांग – माघ माह की पंचमी तिथि


    नई दिल्ली । आज, 07 जनवरी 2026 माघ माह के कृष्ण पक्ष की पंचमी तिथि है। यह बुधवार का दिन है जो विशेष रूप से भगवान गणेश जी को समर्पित होता है। इस दिन की पूजा से बुद्धि सफलता और समृद्धि प्राप्त होती है, साथ ही बुध दोष भी समाप्त होता है। इस दिन गणपति जी की पूजा के दौरान दूर्वा ,मोदक और शमी के पत्तों का अर्पण करना अत्यंत शुभ माना जाता है। इसके साथ ही ॐ गं गणपतये नमः मंत्र का जाप भी विशेष लाभकारी होता है।

    शुभ काल, अमृत काल

    यह समय सबसे उत्तम माना जाता है, खासकर पूजा, अनुष्ठान और महत्वपूर्ण कार्यों के लिए। आज के अमृत काल का समय है 0933 AM से 1108 AM तक और 0552 AM से 0730 AM तक।

    ब्रह्म मुहूर्त

    ब्रह्म मुहूर्त, जो कि सुबह का पवित्र समय होता है, वह 05:37 AM से 06:25 AM तक रहेगा। इस समय का प्रयोग साधना और पूजा के लिए सर्वोत्तम है।

    अशुभ काल ,राहू काल

    राहू काल, जो शुभ कार्यों के लिए मना होता है, आज दोपहर 12:33 PM से 1:52 PM तक रहेगा। इस समय के दौरान कोई भी शुभ कार्य करना वर्जित होता है।
    यम गण्ड
    यम गण्ड का समय सुबह 8:33 AM से 9:53 AM तक रहेगा। इस समय भी महत्वपूर्ण कार्यों से बचना चाहिए।
    कुलिक काल
    कुलिक काल का समय 11:13 AM से 12:33 PM तक रहेगा, जो किसी भी प्रकार के कार्य के लिए अशुभ माना जाता है।
    दुर्मुहूर्त
    दुर्मुहूर्त का समय 12:11 PM से 12:54 PM तक रहेगा, जो कार्यों के लिए निषेध काल है।
    वर्ज्यम्
    वर्ज्यम् काल 08:05 PM से 09:43 PM तक रहेगा, यह समय भी शुभ कार्यों से बचने का है।

    सूर्य और चंद्रमा का समय

    सूर्योदय
    आज सूर्योदय 7:13 AM पर होगा।

    सूर्यास्त
    सूर्यास्त 5:52 PM पर होगा।
    चन्द्रोदय
    आज चन्द्रोदय 10:04 PM पर होगा।
    चन्द्रास्त
    08 जनवरी को चन्द्रास्त 10:42 AM पर होगा।
    आज के दिन भगवान गणेश की पूजा करने से विशेष रूप से बुध ग्रह से संबंधित दोषों का निवारण होता है। गणेश जी के आशीर्वाद से जीवन में सफलता और समृद्धि का वास होता है। साथ ही, इस दिन के शुभ और अशुभ काल का ध्यान रखते हुए महत्वपूर्ण कार्यों की योजना बनानी चाहिए।