Category: Religious Astrology

  • मकर संक्रांति 2026: सूर्य के मकर गोचर से बदलेगा भाग्य का चक्र, 12 महीने बाद नए अवसरों की शुरुआत

    मकर संक्रांति 2026: सूर्य के मकर गोचर से बदलेगा भाग्य का चक्र, 12 महीने बाद नए अवसरों की शुरुआत


    नई दिल्ली ।मकर संक्रांति के पावन अवसर पर 14 जनवरी 2026 को सूर्य देव शनि की राशि मकर में प्रवेश करने जा रहे हैं। यह खगोलीय घटना करीब 12 महीने बाद घटित हो रही है जिसे धार्मिक सामाजिक और ज्योतिषीय-तीनों ही दृष्टियों से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सूर्य के उत्तरायण होने के साथ ही जहां मकर संक्रांति का पर्व पूरे देश में श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जाएगा वहीं खरमास की समाप्ति के बाद विवाह गृह प्रवेश और अन्य मांगलिक कार्यों की भी पुनः शुरुआत होगी। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार सूर्य का यह गोचर कई राशियों के जीवन में करियर धन और मान-सम्मान के नए द्वार खोल सकता है।

    ज्योतिष शास्त्र में सूर्य और शनि को स्वभाव से विपरीत ग्रह माना गया है लेकिन पिता-पुत्र के संबंध के कारण सूर्य का शनि की राशि मकर में प्रवेश विशेष फलदायी माना जाता है। मान्यता है कि इस दौरान किए गए परिश्रम अनुशासन और निरंतर प्रयासों का फल अवश्य मिलता है। यह गोचर उन लोगों के लिए खास साबित हो सकता है जो लंबे समय से अपने लक्ष्य को पाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं।

    मेष राशि के जातकों के लिए सूर्य का यह गोचर दशम भाव में होगा जो कर्म और करियर का सबसे महत्वपूर्ण स्थान माना जाता है। इस अवधि में नौकरीपेशा लोगों को नई जिम्मेदारियां मिल सकती हैं और पदोन्नति के योग भी बन सकते हैं। जो लोग नौकरी बदलने की योजना बना रहे हैं उनके लिए यह समय अनुकूल साबित हो सकता है। नेतृत्व क्षमता में वृद्धि होगी और वरिष्ठ अधिकारियों से प्रशंसा मिल सकती है।वृषभ राशि वालों के लिए सूर्य नवम भाव में गोचर करेंगे जिसे भाग्य और धर्म का भाव कहा जाता है। इस दौरान भाग्य का पूरा साथ मिलने के संकेत हैं। उच्च शिक्षा विदेश यात्रा और धार्मिक गतिविधियों में रुचि बढ़ सकती है। अचल संपत्ति या दीर्घकालिक निवेश से लाभ के योग बन रहे हैं। कार्यक्षेत्र में वरिष्ठों का सहयोग और सम्मान प्राप्त हो सकता है।

    वृश्चिक राशि के जातकों के लिए सूर्य का गोचर तीसरे भाव में होगा जो पराक्रम और साहस का प्रतीक है। इस दौरान आत्मविश्वास बढ़ेगा और नए काम शुरू करने की प्रेरणा मिलेगी। आर्थिक स्थिति में सुधार के संकेत हैं हालांकि व्यापार या निवेश में जल्दबाजी से बचने की सलाह दी जा रही है। पारिवारिक जीवन में भाई-बहनों के साथ तालमेल बनाए रखना जरूरी होगा।मकर राशि के लिए यह गोचर सबसे अधिक प्रभावशाली माना जा रहा है क्योंकि सूर्य लग्न भाव में प्रवेश करेंगे। इससे व्यक्तित्व में निखार आएगा सामाजिक प्रतिष्ठा बढ़ेगी और करियर में उन्नति के मजबूत योग बनेंगे। संपत्ति और सरकारी मामलों में सफलता मिल सकती है लेकिन स्वास्थ्य को लेकर लापरवाही भारी पड़ सकती है इसलिए संतुलन जरूरी है।

    कुंभ राशि के जातकों के लिए सूर्य द्वादश भाव में गोचर करेंगे। इस दौरान विदेश यात्रा विदेशी कंपनियों से जुड़े काम और आय के नए स्रोत बन सकते हैं। हालांकि खर्चों में वृद्धि संभव है और पारिवारिक जीवन में संतुलन बनाए रखना चुनौतीपूर्ण रह सकता है।ज्योतिष विशेषज्ञों का मानना है कि सूर्य का मकर गोचर मेहनत अनुशासन और धैर्य का महत्व सिखाता है। यह समय उन्हीं लोगों को विशेष फल देगा जो लक्ष्य के प्रति समर्पित रहकर लगातार प्रयास करते हैं। कुल मिलाकर मकर संक्रांति 2026 कई राशियों के लिए बदलाव और उन्नति का संकेत लेकर आ रही है।

  • Makar Sankranti पर सूर्य देव की कृपा पाने के लिए करें ये काम, होगी सुख-समृद्धि की बरसात

    Makar Sankranti पर सूर्य देव की कृपा पाने के लिए करें ये काम, होगी सुख-समृद्धि की बरसात

    नई दिल्ली। हिंदू धर्म की मान्यताओं के अनुसार, मकर संक्रांति पर स्नान-दान से पुण्य फल मिलते हैं। इस दिन सूर्य देव की उपासना करने से साधक को सुख-समृद्धि की प्राप्ति हो सकती है। ऐसे में आप इस दिन पर कुछ विशेष कार्यों द्वारा सूर्य देव की कृपा के पात्र बन सकते हैं।

    ऐसा माना गया है कि मकर संक्रांति (Makar Sankranti 2026) के दिन किए गए स्नान-दान और पूजा-पाठ करने से साधक को कई गुना फल मिलता है। इस साल मकर संक्रांति बुधवार, 14 जनवरी को है। मकर संक्रांति पर खरमास का समापन भी होता है, जिससे विवाह आदि जैसे शुभ कार्य दोबारा शुरू हो जाते हैं।

    जरूर करें ये काम
    मकर संक्रांति के दिन (Makar Sankranti 2025 Upay) सुबह जल्दी उठकर किसी पवित्र नदी खासकर गंगा में स्नान जरूर करें। अगर आपके लिए ऐसा करना संभव न हो, तो आप घर पर ही पानी में गंगाजल मिलाकर भी स्नान कर सकते हैं। इससे साधक के लिए सुख-समृद्धि के योग बनते हैं।

    शनि दोष से मिलेगी राहत
    शनि दोष से राहत पाने के लिए मकर संक्रांति (Makar Sankranti 2025) के दिन गंगाजल में काले तिल मिलाकर शिव जी का अभिषेक करें। ऐसा करने से आपको अपनी स्थिति में लाभ देखने को मिल सकता है। इसके साथ ही आप मकर संक्रांति पर गंगा स्नान के बाद बहती जलधारा में काले तिल प्रवाहित कर सकते हैं, जिससे शनि दोष में राहत मिलती है।
    इस तरह करें सूर्य देव को प्रसन्न
    मकर संक्रांति के दिन स्नान-ध्यान के बाद सूर्य देव को जल अर्पित करना चाहिए। इससे जातक के मान-सम्मान में वृद्धि होती है। इस दिन सूर्य देव को जल अर्पित करने के लिए सबसे पहले जल में लाल फूल, अक्षत (चावल) और रोली मिलाएं और इसके बाद सूर्य को अर्घ्य दें। इस दौरान ॐ सूर्याय नम: मंत्र का जप करते रहें।

    अंत में सूर्य देव को नमस्कार करते हुए सुख-समृद्धि की कामना करें। साथ ही इस दिन पर सूर्य देव की कृपा के लिए अपनी क्षमता के अनुसार, अन्न, तिल, गुड़, कपड़े, कंबल और धन आदि का दान (Makar Sankranti Daan) करें व गरीब और जरूरतमंद लोगों को भोजन कराएं।

  • क्यों हनुमान जी थे लक्ष्मण से भी प्रिय प्रभु श्री राम के लिए? पढ़ें यह भावुक प्रसंग

    क्यों हनुमान जी थे लक्ष्मण से भी प्रिय प्रभु श्री राम के लिए? पढ़ें यह भावुक प्रसंग


    नई दिल्ली । सनातन धर्म में मंगलवार का दिन विशेष रूप से शक्ति भक्ति और समर्पण का प्रतीक माना जाता है। यह दिन प्रभु श्री राम के परम भक्त हनुमान जी को समर्पित है। गोस्वामी तुलसीदास की काव्य कृति श्रीरामचरितमानस के किष्किंधा कांड में एक ऐसा भावुक प्रसंग मिलता हैजो श्री राम और हनुमान जी के अटूट प्रेम को दर्शाता है। इस प्रसंग में श्री राम ने हनुमान जी को अपने छोटे भाई लक्ष्मण से भी दोगुना प्रिय बताया है। आइए जानेंआखिर क्यों हनुमान जी थे श्री राम के लिए लक्ष्मण से भी अधिक प्रिय।

    ऋष्यमूक पर्वत पर हनुमान जी से पहली मुलाकात

    जब श्री राम और लक्ष्मण माता सीता की खोज में वन-वन भटक रहे थेतो वे किष्किंधा के ऋष्यमूक पर्वत के पास पहुंचे। वहां वानरराज सुग्रीवजो पहले ही बाली से भयभीत थेउन्हें देखकर डर गए। उन्हें संदेह हुआ कि कहीं ये दोनों प्रभु श्री राम के विरोधी तो नहीं हैं। इस कारण सुग्रीव ने हनुमान जी को ब्राह्मण का रूप धारण कर भेजाताकि वह यह पता कर सकें कि ये दोनों व्यक्ति कौन हैं।हनुमान जी ने ब्राह्मण का रूप अपनाया और श्री राम से उनका परिचय पूछा। जब श्री राम ने कहा कि वे दशरथ के पुत्र हैं और माता सीता की खोज में निकले हैंतब हनुमान जी ने तुरंत अपना असली रूप प्रकट किया और श्री राम के चरणों में गिर पड़े। इस घटना ने श्री राम और हनुमान जी के बीच के अटूट प्रेम की शुरुआत की।

    मम प्रिय लक्ष्मण ते दूना – जब श्री राम भावुक हुए

    हनुमान जीजो अपने प्रभु से मिलकर अत्यधिक भावुक हो गए थेउन्होंने अपनी भूल के लिए श्री राम से क्षमा मांगी। हनुमान जी ने कहाहे भगवान! मैं मूर्ख हूंलेकिन आपने मुझे क्यों नहीं पहचाना? इस पर श्री राम ने हनुमान जी को गले से लगा लिया और कहा:सुनु कपि जियँ मानसि जनि ऊना। तैं मम प्रिय लछिमन ते दूना॥ समदरसी मोहि कह सब कोऊ। सेवक प्रिय अनन्य गति सोऊ॥अर्थ: श्री राम ने कहाहे हनुमान! अपने मन में कोई ग्लानि मत लाओ। तुम मुझे लक्ष्मण से भी दो गुने प्रिय हो। भले ही दुनिया मुझे समदर्शी कहेलेकिन मुझे वह सेवक सबसे प्रिय है जो पूरी तरह से मेरे शरण में रहता है और अनन्य भाव से समर्पित होता है।

    हनुमान जी क्यों थे श्री राम के लिए इतने प्रिय

    लक्ष्मण जीश्री राम के छोटे भाई थे और वे हमेशा उनके साथ रहते थेलेकिन हनुमान जी ने स्वयं को एक सेवक के रूप में पूरी तरह से समर्पित कर दिया था। शास्त्रों के अनुसारजो भक्त अपना अहंकार त्यागकर पूरी तरह से ईश्वर के शरण में रहता हैवह उनके लिए परिवार से भी बढ़कर होता है। यही कारण है कि हनुमान जी को श्री राम ने भरत सम भाई और लक्ष्मण से दूना प्रिय कहा।

    मंगलवार और हनुमान जी का विशेष संबंध

    यह मान्यता है कि हनुमान जी और श्री राम की पहली मुलाकात मंगलवार के दिन हुई थीइसलिए यह दिन हनुमान जी के साथ-साथ श्री राम की पूजा के लिए भी विशेष माना जाता है। बड़ा मंगल और बुढ़वा मंगल जैसे पर्व भी इसी दिन के साथ जुड़ी हुई हैंजो दर्शाते हैं कि प्रभु और भक्त का यह मिलन उसी समय हुआ था। इस प्रसंग से यह साफ होता है कि हनुमान जी का श्री राम के प्रति समर्पण और प्रेम अत्यधिक गहरा थाऔर इसीलिए श्री राम ने उन्हें अपने हृदय से लगाया और उन्हें लक्ष्मण से भी प्रिय माना।

  • घर की खिड़कियों में वास्तु की अनदेखी पड़ सकती है भारी, जानिए संतुलन बनाए रखने के आसान उपाय

    घर की खिड़कियों में वास्तु की अनदेखी पड़ सकती है भारी, जानिए संतुलन बनाए रखने के आसान उपाय


    नई दिल्ली। घर बनाते समय या रिनोवेशन के दौरान अक्सर लोग खिड़कियों को सिर्फ रोशनी, हवा और डिजाइन से जोड़कर देखते हैं, लेकिन वास्तुशास्त्र में इनका महत्व कहीं अधिक गहरा बताया गया है। वास्तु विशेषज्ञों के अनुसार खिड़कियां घर के भीतर ऊर्जा के प्रवेश का मुख्य माध्यम होती हैं और उनकी दिशा, बनावट व संख्या का सीधा असर घर के वातावरण के साथ-साथ वहां रहने वाले लोगों के स्वास्थ्य, मानसिक स्थिति और पारिवारिक संतुलन पर पड़ता है। यदि इस दौरान थोड़ी भी लापरवाही हो जाए तो उसका प्रभाव लंबे समय तक महसूस किया जा सकता है।

    वास्तु सिद्धांतों के अनुसार किसी भी घर में प्राकृतिक रोशनी और ताजी हवा का संतुलन बेहद जरूरी है। उत्तर और पूर्व दिशा से आने वाली रोशनी को विशेष रूप से शुभ माना गया है। इन दिशाओं में बनी खिड़कियां सकारात्मक ऊर्जा को आकर्षित करती हैं और घर में स्थिरता, शांति व सक्रियता बनाए रखने में मदद करती हैं। सुबह की धूप यदि पूर्व दिशा की खिड़की से घर में प्रवेश करे, तो यह मानसिक स्पष्टता और सकारात्मक सोच को बढ़ावा देती है।इसके विपरीत, कुछ दिशाओं में खिड़कियों की अधिकता वास्तु असंतुलन का कारण बन सकती है। विशेषज्ञों के अनुसार दक्षिण दिशा की खिड़कियों को लेकर विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। यदि इस दिशा में खिड़की हो, तो उसे हमेशा साफ-सुथरा और नियंत्रित रखना जरूरी माना जाता है। टूटी, गंदी या लंबे समय तक खुली रहने वाली खिड़कियां नकारात्मक ऊर्जा को बढ़ा सकती हैं, जिससे घर के सदस्यों के बीच तनाव और असहजता बढ़ सकती है।

    खिड़कियों के खुलने की दिशा भी वास्तु में महत्वपूर्ण मानी गई है। भीतर की ओर खुलने वाली खिड़कियां घर के अंदर सकारात्मक ऊर्जा को आमंत्रित करने का संकेत देती हैं, जबकि बाहर की ओर खुलने वाली खिड़कियां ऊर्जा के प्रवाह में बाधा पैदा कर सकती हैं। इसी तरह, खिड़कियों से आने वाली तेज हवा, शोर या असंतुलित प्रकाश भी घर के वातावरण को प्रभावित करता है। इसलिए खिड़कियों पर हल्के परदे या ब्लाइंड्स का उपयोग संतुलन बनाए रखने में सहायक माना जाता है।

    मुख्य प्रवेश द्वार के आसपास खिड़कियों की स्थिति को लेकर भी वास्तु में खास ध्यान देने की सलाह दी जाती है। दरवाजे के दोनों ओर यदि समान आकार और समान ऊंचाई की खिड़कियां हों, तो इससे ऊर्जा का प्रवाह संतुलित बना रहता है। इसके अलावा, खिड़कियों की संख्या भी वास्तु संतुलन से जुड़ी होती है। मान्यताओं के अनुसार सम संख्या में खिड़कियां घर में स्थिरता और सामंजस्य को दर्शाती हैं।वास्तु विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि आधुनिक जीवनशैली और फ्लैट संस्कृति में हर नियम का शत-प्रतिशत पालन संभव नहीं होता। ऐसे में सबसे जरूरी है संतुलन और साफ-सफाई। खिड़कियों की नियमित सफाई, पर्याप्त रोशनी और सही दिशा में खुलने वाली संरचना घर के माहौल को सकारात्मक बनाए रखने में अहम भूमिका निभाती है। छोटे-छोटे सुधार भी लंबे समय में बड़े बदलाव ला सकते हैं।

  • संकष्टी चतुर्थी विघ्न विनाशन को प्रसन्न करने का अद्भुत दिन इस तरह करें पूजा

    संकष्टी चतुर्थी विघ्न विनाशन को प्रसन्न करने का अद्भुत दिन इस तरह करें पूजा


    नई दिल्ली । सनातन धर्म में माघ मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को सकट चौथ या संकष्टी चतुर्थी के रूप में मनाया जाता है। यह पर्व विशेष रूप से भगवान गणेश की पूजा और उपवास से जुड़ा हुआ है जिसे विघ्न विनाशक और सुख-समृद्धि के दाता के रूप में पूजा जाता है। इस दिन विधि-विधान से भगवान गणेश का पूजन करने से जीवन की सभी बाधाएं दूर होती हैं और घर में सुख-समृद्धि का वास होता है।

    सकट चौथ का महत्व

    सकट चौथ को खासतौर पर माताएं अपने पुत्रों की लंबी उम्र और कल्याण के लिए रखती हैं। यह दिन गणेश जी की कृपा प्राप्त करने और जीवन में खुशहाली लाने का प्रमुख अवसर होता है। धर्मशास्त्रों के अनुसार इस दिन उपवास करने से न केवल घर-परिवार में सुख-शांति बनी रहती है बल्कि हर प्रकार के संकटों से मुक्ति भी मिलती है।

    तिथि और समय
    दृक पंचांग के अनुसार इस साल संकष्टी चतुर्थी 6 जनवरी 2026 को मनाई जाएगी। चतुर्थी तिथि 6 जनवरी को सुबह 8 बजकर 1 मिनट से शुरू होगी और 7 जनवरी को सुबह 6 बजकर 52 मिनट तक रहेगी। इस दिन चंद्रोदय रात 8 बजकर 54 मिनट पर होगा जो व्रत के पूर्ण होने का संकेत है।

    व्रत का तरीका

    सकट चौथ का व्रत सूर्योदय से चंद्रोदय तक रखा जाता है। कई भक्त इस दिन निर्जला उपवास रखते हैं जबकि कुछ हल्का सात्विक भोजन करते हैं। व्रत के लिए सबसे पहले प्रात काल स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनने चाहिए और व्रत का संकल्प लेना चाहिए। दिनभर भगवान गणेश का स्मरण करते हुए उनका पूजन करें।

    पूजन विधि

    शाम के समय चंद्रमा के दर्शन से पहले भगवान गणेश की पूजा विधिपूर्वक करें। सबसे पहले गणेश जी का पंचामृत से स्नान कराएं फिर घी और सिंदूर का लेप लगाएं। इसके बाद जनेऊ रोली इत्र दूर्वा फूल चंदन अबीर लौंग चढ़ाकर भगवान गणेश को धूप-दीप दिखाएं।गणेश जी को तिल-गुड़ के लड्डू मोदक और तिलकुट का भोग अर्पित करें। यह भगवान गणेश को अत्यधिक प्रिय है। पूजा के बाद गणेश जी के सामने गं गण गणपतये नमः मंत्र का जाप करें और गणेश स्तोत्र या अथर्वशीर्ष का पाठ करें।

    चंद्रोदय पर अर्घ्य देना

    चंद्रमा के दर्शन के बाद चंद्रोदय के समय चंद्रमा को दूध मिश्रित जल से अर्घ्य दें। इस समय दिए गए अर्घ्य से व्रत पूरा होता है और भक्तों को संकटों से मुक्ति प्राप्त होती है। इसके बाद व्रत का पारण करें और प्रसाद ग्रहण करें।

    पूजन से लाभ
    सकट चौथ का व्रत विशेष रूप से संतान सुख और परिवार की समृद्धि के लिए रखा जाता है। साथ ही इस दिन किए गए पूजा से भगवान गणेश की कृपा से घर में शांति और सुख-समृद्धि आती है। भक्तों का मानना है कि इस दिन किए गए व्रत से हर प्रकार के संकट दूर होते हैं और जीवन में सफलता और खुशी का वास होता है।

    व्रत कथा

    सकट चौथ पर पूजा के साथ-साथ व्रत कथा पढ़ना या सुनना भी बेहद महत्वपूर्ण है। कथा में भगवान गणेश के अनेक भक्तों की श्रद्धा और उनकी आस्था के किस्से बताए जाते हैं जो संकटों से उबरकर भगवान गणेश की कृपा से जीवन में सुख-शांति लाए सकट चौथ जिसे संकष्टी चतुर्थी भी कहा जाता है भगवान गणेश की पूजा करने और उपवास रखने का एक विशेष दिन है। इस दिन व्रत और पूजा करने से न केवल जीवन के संकटों से मुक्ति मिलती है बल्कि परिवार में खुशहाली और सुख-समृद्धि भी आती है। यह पर्व विशेष रूप से माताओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है जो अपने पुत्रों की लंबी उम्र और सुख-शांति की कामना करती हैं।

  • मकर संक्रांति 2026 पुण्यकाल 16 घंटे का. 15 जनवरी को मनाएं मकर संक्रांति

    मकर संक्रांति 2026 पुण्यकाल 16 घंटे का. 15 जनवरी को मनाएं मकर संक्रांति


    नई दिल्ली । मकर संक्रांति 2026 के दिन सूर्य का मकर राशि में प्रवेश 14 जनवरी की रात 9:19 बजे होगा, लेकिन शास्त्रों के अनुसार पुण्यकाल 16 घंटे तक रहेगा, जो 15 जनवरी तक जारी रहेगा। इस दिन विशेष रूप से स्नान, सूर्य पूजा और दान का महत्व है। हिंदू धर्म में मकर संक्रांति को विशेष दिन माना जाता है क्योंकि इस दिन सूर्य उत्तरायण की दिशा में प्रवेश करते हैं, जिससे पृथ्वी पर दिन-ब-दिन तापमान बढ़ता है और ऋतु परिवर्तन की शुरुआत होती है। इसे देवताओं का दिन भी कहा जाता है, क्योंकि सूर्यदेव का उत्तरायण में प्रवेश शुभ होता है।कर्मकांडी अमरेंद्र कुमार शास्त्री और ज्योतिषाचार्य पंडित नरोत्तम द्विवेदी के अनुसार, मकर संक्रांति का त्योहार 15 जनवरी को मनाया जाएगा।
    इस दिन, स्नान, सूर्यदेव की उपासना और तिल का दान करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है।मकर संक्रांति से जुड़ी एक पुरानी कथा भी है, जिसके अनुसार भगवान सूर्य, अपने पुत्र भगवान शनि से मिलने मकर राशि में प्रवेश करते हैं। इसी दिन से सूर्य उत्तर पथगामी होते हैं और पृथ्वी की ओर उनका रुख बदलता है।मकर संक्रांति के दिन विशेष रूप से स्नान का महत्व है, खासकर गंगा या अन्य पवित्र नदियों में। इस दिन को पुण्यकाल माना गया है, और इस दौरान दान करने से व्यक्ति के जीवन में शुभता आती है।
    धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, इस दिन सूर्यदेव, भगवान गणेश, माता लक्ष्मी और भगवान शिव की पूजा करने से जीवन के सारे कष्ट दूर हो जाते हैं।मकर संक्रांति के दिन विशेष रूप से नया अन्न, तिल, कम्बल, घी और धार्मिक पुस्तकों का दान करना अत्यंत शुभ माना जाता है। इस दिन भोजन में खासतौर पर तिल और खिचड़ी बनाई जाती है, जो प्राचीन परंपराओं के अनुसार भगवान को अर्पित की जाती है, फिर इसे प्रसाद के रूप में ग्रहण किया जाता है।

    धार्मिक आचार्यों का मानना है कि इस दिन तिल का दान करने से शनि से संबंधित सभी कष्ट समाप्त होते हैं। इसके अलावा, गरीबों को बर्तन, तिल और अन्य सामान दान करने से पुण्य की प्राप्ति होती हैमौसम को लेकर भी मकर संक्रांति विशेष महत्व रखता है। हालांकि, इस समय कड़ाके की ठंड पड़ रही है, लेकिन अगर मौसम अनुकूल रहा तो गंगा स्नान के लिए श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या गंगा घाटों पर पहुंच सकती है। विशेष रूप से उत्तर भारत के कई इलाकों से लोग इस दिन गंगा स्नान के लिए पहुंचते हैं।

    इसके अलावा, मकर संक्रांति के बाद खरमास का समय समाप्त हो जाएगा, जिसके चलते मांगलिक कार्यों की शुरुआत होगी। 18 जनवरी को मौनी अमावस्या और 4 फरवरी को पहला वैवाहिक लग्न मुहूर्त भी शुरू होगा। 2026 में मकर संक्रांति का दिन धार्मिक आस्थाओं और परंपराओं से भरपूर रहेगा। यह दिन सूर्य की उपासना, तिल दान, और अन्य शुभ कार्यों के लिए उपयुक्त रहेगा। विशेष रूप से इस दिन की महत्वता को समझते हुए श्रद्धालु इसे श्रद्धा और विश्वास के साथ मनाएंगे।

  • 5 जनवरी का पंचांग भद्राकाल रहेगाआडल योग नहीं लगेगाजानें शुभ-अशुभ मुहूर्त

    5 जनवरी का पंचांग भद्राकाल रहेगाआडल योग नहीं लगेगाजानें शुभ-अशुभ मुहूर्त


    नई दिल्ली । 5 जनवरी2026 का पंचांग अनुसारइस दिन कृष्ण पक्ष की द्वितीया तिथि रहेगी और यह दिन सोमवार को पड़ेगा। सोमवार को भद्राकाल का साया रहेगाजो रात 8 बजकर 53 मिनट से लेकर अगले दिन 7 बजकर 15 मिनट तक रहेगा। इस समय किसी भी शुभ कार्य को करने से बचना चाहिएक्योंकि भद्राकाल में किया गया शुभ काम भी अशुभ परिणाम दे सकता है। द्वितीया तिथि सुबह 9 बजकर 56 मिनट तक रहेगीइसके बाद तृतीया तिथि का आगमन होगा। आइए जानते हैं आज के शुभ और अशुभ मुहूर्त के बारे में।
    शुभ मुहूर्त

    अभिजित मुहूर्त दोपहर 1206 से 1247 तक, गोधूलि मुहूर्त शाम 536 से 603 तक, अमृत काल मुहूर्त शाम 729 से 858 तक, विजय मुहूर्त दोपहर 210 से 252 तक, ब्रह्म मुहूर्त सुबह 526 से 620 तक।
    अशुभ मुहूर्त

    राहुकाल सुबह 833 से 951 तक, गुलिक काल दोपहर 145 से 302 तक, यमगण्ड काल सुबह 1109 से 1227 तक, दुर्मुहूर्त दोपहर 1247 से 129 तक।
    विशेष जानकारी
    5 जनवरी को आडल योग नहीं लगेगाजो कि एक शुभ योग माना जाता है। सूर्योदय और सूर्यास्त, सूर्योदय सुबह 715, सूर्यास्त शाम 538,।
    चन्द्रोदय

    चन्द्रोदय शाम 749 चन्द्रोदय की अवधि 6 जनवरी की सुबह 856 तक। 
    दिशाशूल

    रविवार के दिन दिशा शूल पूर्व दिशा में रहेगा। इसका मतलब है कि सोमवार को यदि आप यात्रा पर जाने का सोच रहे हैं तो पूर्व दिशा की यात्रा से बचें। यह दिशा वर्जित मानी जाती है। यदि यात्रा जरूरी होतो दही-जीरा खाकर और दर्पण देखकर यात्रा पर निकलने से नकारात्मक प्रभाव कम हो सकते हैं।इस दिन पंचांग में दी गई जानकारी को ध्यान में रखकर अपने कार्यों की योजना बनाना शुभ रहेगा।

  • साल 2026 की शुरुआत सही दिशा में: पहले दिन करें ये 6 काम, मन और जीवन होंगे संतुलित

    साल 2026 की शुरुआत सही दिशा में: पहले दिन करें ये 6 काम, मन और जीवन होंगे संतुलित


    नई दिल्ली।नववर्ष 2026 की शुरुआत के साथ ही देशभर में लोग नए संकल्पों, उम्मीदों और योजनाओं के साथ अपने दिन की शुरुआत कर रहे हैं। परंपरा और सामाजिक मान्यताओं के अनुसार, साल के पहले दिन की गतिविधियां और मानसिक स्थिति पूरे वर्ष की ऊर्जा और जीवनशैली पर असर डाल सकती हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि नए साल के पहले दिन छोटे-छोटे, लेकिन समझदारी भरे कदम अपनाना पूरे साल सकारात्मक माहौल बनाए रखने में मदद करता है।

    1. घर और वातावरण को शांत रखें
    साल के पहले दिन घर का वातावरण शांत और तनावमुक्त होना आवश्यक माना जाता है। अनावश्यक बहस, तेज आवाज़ और विवादजनक बातचीत से बचना चाहिए। विशेषज्ञ बताते हैं कि पहले दिन की मानसिक स्थिति पूरे वर्ष की ऊर्जा को प्रभावित करती है। हल्का संगीत, भजन या ध्यान जैसी आदतें घर में संतुलन और मानसिक शांति बनाए रखने में मदद करती हैं।

    2. सकारात्मक भाषा और व्यवहार अपनाएं

    नए साल के पहले दिन गुस्सा, शिकायत या कटु शब्दों का प्रयोग टालना चाहिए। भाषा का संयम रिश्तों को मजबूत रखने के साथ-साथ मानसिक स्थिरता के लिए भी जरूरी है। सकारात्मक और सौम्य भाषा से दिन की शुरुआत करना प्रतीकात्मक रूप से पूरे वर्ष के लिए सकारात्मकता का संदेश देता है।

    3. सुबह का समय शांतिपूर्ण बिताएं

    साल के पहले दिन सुबह उठकर कुछ समय अकेले या शांति में बिताना लाभकारी माना जाता है। सूर्य को जल अर्पित करना, खुले वातावरण में कुछ मिनट खड़े रहना या हल्का व्यायाम करना दिन की दिशा और ऊर्जा तय करने में मदद करता है। यह अनुशासन और जागरूकता से जुड़ी आदत मानी जाती है।

    4. पूजा और प्रार्थना के माध्यम से मानसिक संतुलन

    धार्मिक या पारिवारिक परंपराओं के अनुसार, पहले दिन की पूजा केवल व्यक्तिगत आस्था तक सीमित नहीं होनी चाहिए। इसमें परिवार और पूर्वजों के प्रति भावनात्मक संबंधों को भी स्मरण करना चाहिए। इससे मानसिक स्थिरता, भावनात्मक संतुलन और घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

    5. घर और पूजा स्थल की साफ-सफाई
    घर और पूजा स्थल को साफ-सुथरा रखना नए साल की शुरुआत में सकारात्मक ऊर्जा को आकर्षित करने का प्रतीक माना जाता है। स्वच्छता, साफ पानी और व्यवस्थित वातावरण मन को एकाग्र करने और दिनचर्या को सही दिशा देने में मदद करते हैं। पाठ या मंत्र का उच्चारण करना संभव न हो तो शांत भाव से सुनना भी पर्याप्त माना जाता है।

    6. पौधों और हरे-भरे स्थान की देखभाल

    घर में सूखे पौधे या खाली गमले रखना ठहराव और रुकी हुई स्थिति का प्रतीक माना जाता है। नए साल की शुरुआत में इन्हें हरे-भरे पौधों से बदलना ताजगी, विकास और सकारात्मक बदलाव का संकेत देता है।कुल मिलाकर, नववर्ष 2026 का पहला दिन बड़े नियमों या जटिल उपायों के बजाय छोटे, जागरूक और सकारात्मक कदमों से खास बनाया जा सकता है। यह दिन न केवल उत्सव का अवसर है, बल्कि पूरे वर्ष के लिए मानसिक, भावनात्मक और सामाजिक संतुलन स्थापित करने का मौका भी है। विशेषज्ञों का मानना है कि साल के पहले दिन अपनाई गई आदतें लंबे समय तक सकारात्मक असर छोड़ सकती हैं।

  • संगम स्नान से लेकर कल्पवास तक,जाने माघ मेले से जुड़ी हर जरूरी बात, प्रमुख तिथियां और धार्मिक मान्यताएं

    संगम स्नान से लेकर कल्पवास तक,जाने माघ मेले से जुड़ी हर जरूरी बात, प्रमुख तिथियां और धार्मिक मान्यताएं


    नई दिल्ली।माघ मेला के बारे में अक्सर लोगों के मन में ढ़ेरो सवाल होते हैं- जैसे कि माघ मेले में स्नान करने के फायदे, स्नान की महत्वपूर्ण तारीखें, और कल्पवास क्या है और यह कितने समय तक चलता है. तो आइए इन्हीं सारे सावालों का जवाब जानते हैं.
    माघ मेला 2026 प्रयागराज
    मेला शुरू – 3 जनवरी, 2026शनिवार
    मेला समाप्त – 15 फरवरी, 2026रविवार
    माघ मेला कितने दिनों तक रहता है – 44 दिन
    माघ मेला कहा लगता है – त्रिवेणी संगम, प्रयागराज
    माघ मेला और कुंभ मेला में क्या अंतर है?
    माघ मेला हर साल प्रयागराज में आयोजित होता है,
    जबकि कुंभ मेला हर 12 साल में एक बार और अर्ध कुंभ मेला
    हर 6 साल में एक बार आयोजित होता है.

    संगम स्नान का सबसे अच्छा समय क्या है?

    संगम स्नान के लिए सबसे अच्छा समय ब्रह्म मुहूर्त माना जाता है. 2026 में महा माघ मेले के आस-पास घूमने की कुछ जगहें कौन सी हैं? संगम में स्नान करने के बाद, आप अक्षय वट, पातालपुरी मंदिर, हनुमान मंदिर और द्वादश माधव मंदिरों में जा सकते हैं.कल्पवास कितने दिनों तक चलता है?  आमतौर पर कल्पवास 30 दिनों तक चलता है, पौष पूर्णिमा से माघी पूर्णिमा तक. क्या माघ मेला में कल्पवास सबके लिए अनिवार्य होता है? नहीं, कल्पवास सभी के लिए अनिवार्य नहीं होता है.

    माघ मेला 2026 स्नान की महत्वपूर्ण तारीखें
    पौष पूर्णिमा स्नान – 3 जनवरी, 2026
    मकर संक्रांति स्नान – 14 जनवरी, 2026
    मौनी अमावस्या स्नान – 18 जनवरी, 2026
    बसंत पंचमी स्नान – 23 जनवरी, 2026
    माघी पूर्णिमा स्नान – 1 फरवरी, 2026
    महाशिवरात्रि स्नान – 15 फरवरी, 2026

    माघ मेले में स्नान करने से क्या फायदा होता है?
    ऐसा माना जाता है कि माघ मेले में स्नान करने से हजारों यज्ञों के बराबर पुण्य मिलता है.यह पवित्र स्नान पापों से मुक्ति दिलाता है और आत्मा को शुद्ध करता है.संगम में स्नान करने से तनाव से राहत मिलती है.माघ मेले में स्नान करना स्वास्थ्य के लिए भी फायदेमंद माना जाता है. माघ स्नान और दान से ग्रहों के कष्टों से भी मुक्ति मिलती है.
    कल्पवास क्या होता है? What is Kalpavas?
    कल्पवास एक महत्वपूर्ण आध्यात्मिक अनुष्ठान और अभ्यास है. इस दौरान, भक्त एक महीने तक संगम के किनारे रहते हैं और नियमित रूप से पवित्र स्नान करते हैं. ये स्नान सिर्फ एक बार नहीं, बल्कि दिन में तीन बार किए जाते हैं. इस दौरान केवल शुद्ध और सात्विक भोजन किया जाता है, और वह भी दिन में सिर्फ एक बार. कल्पवास के दौरान स्नान, ध्यान, पूजा और जप अनिवार्य हैं. कल्पवास के दौरान, भक्त केवल जमीन पर सोते हैं, जिसका मतलब है कि वे सांसारिक सुख-सुविधाओं से दूरी बनाते हैं. ऐसा माना जाता है कि जो व्यक्ति कल्पवास करता है, उसके सभी पाप धुल जाते हैं.

     

  • 31 दिसंबर को पुत्रदा एकादशी का विशेष व्रत; अर्धरात्रि के बाद द्वादशी का आगमन, वृषभ राशि में चंद्रमा देंगे शुभ फल

    31 दिसंबर को पुत्रदा एकादशी का विशेष व्रत; अर्धरात्रि के बाद द्वादशी का आगमन, वृषभ राशि में चंद्रमा देंगे शुभ फल


    नई दिल्ली/काशी: वर्ष 2025 का समापन एक अत्यंत शुभ और आध्यात्मिक संयोग के साथ हो रहा है। आज, बुधवार 31 दिसंबर 2025 को पौष मास के शुक्ल पक्ष की पुत्रदा एकादशी का व्रत रखा जा रहा है। हिंदू धर्म में इस एकादशी का विशेष महत्व है, क्योंकि इसे संतान प्राप्ति, संतान की उन्नति और पारिवारिक सुख-समृद्धि के लिए अमोघ माना जाता है। वैष्णव परंपरा के अनुयायी आज पूरी निष्ठा के साथ भगवान विष्णु की आराधना कर रहे हैं।

    तिथि और नक्षत्रों की अनूठी गणना

    पंचांग के अनुसार, इस वर्ष की अंतिम एकादशी कई मायनों में खास है। आज एकादशी तिथि का क्षय हो रहा है, जिसके परिणामस्वरूप अर्धरात्रि के बाद द्वादशी तिथि का आरंभ हो जाएगा। ज्योतिषविदों के अनुसार, तिथि का यह परिवर्तन आध्यात्मिक ऊर्जा में वृद्धि करने वाला होता है।तिथि विवरण: एकादशी तिथि आज दिन भर व्याप्त रहेगी। रात 1 बजकर 48 मिनट पर द्वादशी तिथि का आगमन होगा, जो अगले दिन तक प्रभावी रहेगी।नक्षत्र और योग: आज रात 1 बजकर 30 मिनट तक कृतिका नक्षत्र रहेगा, जिसके बाद चंद्रमा के प्रिय रोहिणी नक्षत्र का आरंभ होगा। वहीं, योग की बात करें तो रात 9 बजकर 13 मिनट तक साध्य योग रहेगा, जो शुभ कार्यों की सिद्धि के लिए श्रेष्ठ माना जाता है। इसके उपरांत शुभ योग प्रारंभ होगा।

    चंद्रमा का गोचर: वृषभ राशि में उच्च के होंगे चंद्र

    आज ज्योतिषीय दृष्टि से एक बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा। सुबह 9 बजकर 23 मिनट तक चंद्रमा मेष राशि में रहेंगे, लेकिन इसके तुरंत बाद वे अपनी उच्च राशि वृषभ में प्रवेश कर जाएंगे। चंद्रमा का अपनी उच्च राशि में होना मन की एकाग्रता, मानसिक शांति और भौतिक सुख-सुविधाओं में वृद्धि का कारक बनता है। व्रत रखने वाले श्रद्धालुओं के लिए यह स्थिति संकल्प शक्ति को मजबूत करने वाली होगी।

    आज के शुभ और अशुभ मुहूर्त Time Table

    किसी भी धार्मिक अनुष्ठान या नए कार्य की शुरुआत के लिए सही समय का चयन करना अनिवार्य है।
    शुभ मुहूर्त Auspicious Timings:ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 5:24 से 6:19 तक ईश्वर चिंतन के लिए सर्वश्रेष्ठ
    विजय मुहूर्त: दोपहर 2:08 से 2:49 तक किसी भी कार्य में सफलता हेतु निशिथ काल: रात 11:57 से 12:52 तक तांत्रिक पूजा और विशेष जप हेतु  गोधूलि बेला: शाम 5:32 से 6:00 तक आरती और दीपदान हेतु  अशुभ मुहूर्त Inauspicious Timings: धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, राहुकाल जैसे समय में महत्वपूर्ण निर्णय लेने या नए कार्य शुरू करने से बचना चाहिए:राहुकाल: दोपहर 12:00 से 1:30 तक  गुलिक काल: सुबह 10:30 से 12:00 तक  यमगंड: सुबह 7:30 से 9:00 तक

    पुत्रदा एकादशी का महत्व और उपाय

    पौष पुत्रदा एकादशी का व्रत विशेष रूप से उन दंपत्तियों के लिए फलदायी माना गया है जो संतान सुख की कामना रखते हैं। भगवान विष्णु के ‘नारायण’ स्वरूप की पूजा आज के दिन की जाती है।विशेष उपाय: आज बुधवार का दिन है इसलिए भगवान विष्णु के साथ-साथ भगवान गणेश की पूजा का भी विधान है। आज ‘श्री गणेश अथर्वशीर्ष’ का पाठ करना अत्यंत लाभकारी रहेगा। यह उपाय न केवल विघ्नों को दूर करता है बल्कि साल के अंतिम दिन भविष्य के लिए मानसिक स्पष्टता और कार्यों में सफलता सुनिश्चित करता है।सावधानी: पंचांग की गणना स्थान के अनुसार कुछ मिनटों के अंतर पर आधारित हो सकती है।अतः किसी भी बड़े अनुष्ठान से पूर्व अपने स्थानीय पंडित या पंचांग का परामर्श अवश्य लें।