Category: Sports

  • जीत के साथ विदाई का सपना टूटा बेन स्टोक्स का आखिरी मैच हारा इंग्लैंड न्यूजीलैंड ने सीरीज पर किया कब्जा

    जीत के साथ विदाई का सपना टूटा बेन स्टोक्स का आखिरी मैच हारा इंग्लैंड न्यूजीलैंड ने सीरीज पर किया कब्जा


    नई दिल्ली। इंग्लैंड के महान ऑलराउंडर बेन स्टोक्स का अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट करियर यादगार जीत के बजाय निराशाजनक हार के साथ समाप्त हुआ। नॉटिंघम के ट्रेंट ब्रिज मैदान पर खेले गए तीसरे और निर्णायक टेस्ट मैच में न्यूजीलैंड ने इंग्लैंड को 160 रन से हराकर तीन मैचों की टेस्ट सीरीज 2-1 से अपने नाम कर ली। इस जीत के साथ न्यूजीलैंड ने एक बार फिर इंग्लैंड की धरती पर शानदार प्रदर्शन करते हुए टेस्ट सीरीज जीतने का कारनामा दोहराया।

    मैच में इंग्लैंड के सामने 373 रन का कठिन लक्ष्य था। पांचवें दिन टीम ने 103 रन पर चार विकेट से आगे खेलना शुरू किया लेकिन न्यूजीलैंड के गेंदबाजों ने लगातार दबाव बनाए रखा। इंग्लिश बल्लेबाज बड़ी साझेदारी नहीं कर सके और पूरी टीम 212 रन पर सिमट गई। लंच के कुछ देर बाद ही मुकाबला समाप्त हो गया और न्यूजीलैंड ने 160 रन की बड़ी जीत दर्ज कर ली।

    यह मुकाबला बेन स्टोक्स के अंतरराष्ट्रीय करियर का आखिरी मैच था। चौथे दिन उन्होंने संन्यास की घोषणा की थी और इंग्लैंड के प्रशंसकों को उम्मीद थी कि टीम अपने कप्तान को जीत के साथ विदाई देगी। हालांकि ऐसा नहीं हो सका। दूसरी पारी में स्टोक्स ने ओपनिंग करते हुए 30 रन बनाए लेकिन वह टीम को जीत तक नहीं पहुंचा सके।

    35 वर्षीय बेन स्टोक्स ने लगभग 15 वर्षों तक इंग्लैंड का प्रतिनिधित्व किया और पिछले चार वर्षों से टेस्ट टीम की कप्तानी संभाली। अपने करियर के दौरान उन्होंने कई ऐतिहासिक पारियां खेलीं और कठिन मौकों पर टीम को जीत दिलाई लेकिन उनका आखिरी मुकाबला हार के साथ समाप्त हुआ।

    यह हार इंग्लैंड के लिए कई मायनों में चिंता बढ़ाने वाली है। साल 2012 के बाद पहली बार टीम अपने घरेलू मैदान पर तीन या उससे अधिक मैचों की टेस्ट सीरीज हार गई। इतना ही नहीं इंग्लैंड ने अपने पिछले नौ टेस्ट मैचों में सातवीं हार झेली है। लगातार खराब प्रदर्शन के बाद टीम प्रबंधन और कोचिंग स्टाफ पर भी सवाल उठने लगे हैं।

    दूसरी ओर टॉम लैथम की कप्तानी में न्यूजीलैंड ने शानदार खेल का प्रदर्शन किया। बल्लेबाजों ने पहली पारी में मजबूत स्कोर खड़ा किया जबकि गेंदबाजों ने दूसरी पारी में इंग्लैंड के बल्लेबाजी क्रम को पूरी तरह बिखेर दिया। इस जीत के साथ न्यूजीलैंड ने सीरीज अपने नाम करते हुए बेन स्टोक्स की विदाई को फीका कर दिया।

  • लॉर्ड्स में हरमनप्रीत का धमाका आखिरी ओवर में बरसे छक्के भारत ने ऑस्ट्रेलिया को दिया 171 रन का लक्ष्य

    लॉर्ड्स में हरमनप्रीत का धमाका आखिरी ओवर में बरसे छक्के भारत ने ऑस्ट्रेलिया को दिया 171 रन का लक्ष्य


    नई दिल्ली । महिला टी20 विश्व कप 2026 में भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच खेले गए ग्रुप ए के बेहद अहम मुकाबले में भारतीय टीम ने कप्तान हरमनप्रीत कौर की तूफानी बल्लेबाजी के दम पर मजबूत स्कोर खड़ा किया। लॉर्ड्स क्रिकेट ग्राउंड पर टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने उतरी भारतीय टीम ने निर्धारित 20 ओवर में चार विकेट के नुकसान पर 170 रन बनाए और ऑस्ट्रेलिया के सामने जीत के लिए 171 रन का चुनौतीपूर्ण लक्ष्य रखा। सेमीफाइनल की उम्मीदों को जिंदा रखने के लिए भारत के लिए यह मुकाबला किसी करो या मरो की स्थिति जैसा था और बल्लेबाजों ने दबाव के बीच शानदार प्रदर्शन किया।

    भारत को सलामी बल्लेबाज स्मृति मंधाना और शेफाली वर्मा ने मजबूत शुरुआत दिलाई। दोनों ने पहले विकेट के लिए 66 रन की साझेदारी कर टीम को अच्छी स्थिति में पहुंचाया। हालांकि टी20 क्रिकेट के लिहाज से यह साझेदारी अपेक्षाकृत धीमी रही लेकिन दोनों बल्लेबाजों ने विकेट संभालते हुए बड़े स्कोर की नींव रखी। शेफाली वर्मा ने 26 गेंदों पर 34 रन बनाए। उनकी पारी में तीन चौके और दो शानदार छक्के शामिल रहे। वह टीम के 66 रन के स्कोर पर पहला विकेट बनकर पवेलियन लौटीं।

    शेफाली के आउट होने के बाद स्मृति मंधाना भी ज्यादा देर तक क्रीज पर नहीं टिक सकीं। उन्होंने 37 गेंदों पर 38 रन की संयमित पारी खेली और भारत का दूसरा विकेट 83 रन के स्कोर पर गिरा। इसके बाद कप्तान हरमनप्रीत कौर और जेमिमा रोड्रिगेज ने पारी को मजबूती दी और रन गति को भी बनाए रखा।

    जेमिमा रोड्रिगेज ने 28 गेंदों पर 34 रन बनाए। इस दौरान उन्होंने एक चौका और एक छक्का लगाया। बल्लेबाजी के दौरान असहज महसूस होने के कारण वह रिटायर्ड हर्ट होकर मैदान से बाहर चली गईं। इसके बाद पूरी जिम्मेदारी कप्तान हरमनप्रीत कौर ने अपने कंधों पर उठा ली।

    हरमनप्रीत ने एक बार फिर बड़े मैच की खिलाड़ी होने का परिचय दिया। उन्होंने बेहद आक्रामक अंदाज में बल्लेबाजी करते हुए केवल 27 गेंदों पर 56 रन की शानदार पारी खेली। उनकी इस विस्फोटक पारी में छह चौके और तीन गगनचुंबी छक्के शामिल रहे। खास तौर पर अंतिम ओवर में लगातार तीन छक्के लगाकर उन्होंने भारतीय स्कोर को मजबूत स्थिति तक पहुंचा दिया। आखिरी ओवर की पांचवीं गेंद पर वह आउट हुईं लेकिन तब तक भारत चुनौतीपूर्ण स्कोर खड़ा कर चुका था।

    पारी के अंत में दीप्ति शर्मा ने एक गेंद पर चार रन बनाए जबकि ऋचा घोष एक रन बनाकर नाबाद रहीं। ऑस्ट्रेलिया की ओर से कप्तान सोफी मोलिनक्स सबसे सफल गेंदबाज रहीं जिन्होंने दो विकेट हासिल किए।

    यह मुकाबला दोनों टीमों का ग्रुप चरण का अंतिम मैच था। ऑस्ट्रेलिया लगातार चार जीत के साथ पहले ही मजबूत स्थिति में था जबकि भारत तीन जीत और एक हार के साथ सेमीफाइनल की दौड़ में बना हुआ था। ऐसे में भारतीय बल्लेबाजों ने दबाव के बीच शानदार प्रदर्शन करते हुए ऑस्ट्रेलिया को 171 रन का कठिन लक्ष्य देकर मुकाबले को रोमांचक बना दिया।

  • लॉर्ड्स में टूटा भारत का सपना ऑस्ट्रेलिया की दमदार जीत के साथ विमेंस टी20 वर्ल्ड कप से बाहर हुई टीम इंडिया

    लॉर्ड्स में टूटा भारत का सपना ऑस्ट्रेलिया की दमदार जीत के साथ विमेंस टी20 वर्ल्ड कप से बाहर हुई टीम इंडिया


    नई दिल्ली । महिला टी20 विश्व कप 2026 में भारतीय टीम का सेमीफाइनल में पहुंचने का सपना आखिरकार टूट गया। लंदन के ऐतिहासिक लॉर्ड्स मैदान पर खेले गए ग्रुप चरण के निर्णायक मुकाबले में ऑस्ट्रेलिया ने भारत को 6 विकेट से हराकर अंतिम चार की दौड़ से बाहर कर दिया। इस हार के साथ भारतीय टीम का अभियान समाप्त हो गया जबकि ग्रुप ए से ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण अफ्रीका ने सेमीफाइनल में जगह बना ली। वहीं ग्रुप बी से इंग्लैंड और वेस्टइंडीज ने अगले दौर के लिए क्वालीफाई किया।

    टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने उतरी भारतीय टीम ने निर्धारित 20 ओवर में चार विकेट के नुकसान पर 170 रन बनाए। भारत को स्मृति मंधाना और शेफाली वर्मा ने शानदार शुरुआत दिलाई। दोनों बल्लेबाजों ने पहले विकेट के लिए 66 रन जोड़कर टीम को मजबूत आधार दिया। शेफाली वर्मा ने आक्रामक अंदाज में बल्लेबाजी करते हुए 26 गेंदों पर 34 रन बनाए जिसमें दो छक्के और तीन चौके शामिल रहे। उनके आउट होने के बाद स्मृति मंधाना ने पारी को आगे बढ़ाया और 37 गेंदों पर 38 रन की उपयोगी पारी खेली।

    भारत ने 83 रन तक दोनों सलामी बल्लेबाजों के विकेट गंवा दिए थे लेकिन इसके बाद कप्तान हरमनप्रीत कौर ने जिम्मेदारी संभाल ली। उन्होंने जेमिमा रोड्रिगेज के साथ तीसरे विकेट के लिए 64 रन की अहम साझेदारी कर टीम को मजबूत स्थिति में पहुंचाया। जेमिमा ने 34 रन बनाकर रिटायर्ड आउट होने से पहले महत्वपूर्ण योगदान दिया जबकि हरमनप्रीत कौर ने विस्फोटक बल्लेबाजी करते हुए केवल 27 गेंदों पर 56 रन बनाए। उनकी पारी में छह चौके और तीन शानदार छक्के शामिल रहे। उन्होंने केवल 25 गेंदों में अपना अर्धशतक पूरा किया और ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ महिला टी20 क्रिकेट में सबसे तेज अर्धशतक लगाने वाली तीसरी बल्लेबाज बनने का रिकॉर्ड भी अपने नाम किया। ऑस्ट्रेलिया की ओर से कप्तान सोफी मोलिनेक्स ने दो विकेट हासिल किए।

    171 रन के लक्ष्य का पीछा करने उतरी ऑस्ट्रेलियाई टीम की शुरुआत अच्छी नहीं रही और उसने केवल चार रन के स्कोर पर पहला विकेट गंवा दिया। हालांकि इसके बाद फीबी लिचफील्ड और बेथ मूनी ने पारी को संभालते हुए दूसरे विकेट के लिए 50 रन की साझेदारी की। लिचफील्ड ने 24 रन बनाए जबकि बेथ मूनी ने 22 रन का योगदान दिया।

    भारतीय गेंदबाजों ने शुरुआती सफलता जरूर हासिल की लेकिन इसके बाद एलिस पेरी और एश्ले गार्डनर की शानदार बल्लेबाजी के सामने टीम बेबस नजर आई। दोनों खिलाड़ियों ने चौथे विकेट के लिए 100 रन की मैच जिताऊ साझेदारी कर मुकाबला पूरी तरह ऑस्ट्रेलिया के पक्ष में कर दिया। एलिस पेरी ने 38 गेंदों पर 56 रन की बेहतरीन पारी खेली जबकि एश्ले गार्डनर ने 29 गेंदों पर नाबाद 53 रन बनाकर टीम को 19वें ओवर में जीत दिला दी।

    भारत की ओर से श्री चरणी ने दो विकेट हासिल किए जबकि दीप्ति शर्मा और रेणुका ठाकुर को एक एक सफलता मिली। हालांकि गेंदबाज ऑस्ट्रेलिया के मजबूत बल्लेबाजी क्रम पर दबाव बनाने में सफल नहीं हो सके। भारतीय टीम ने बल्लेबाजी में अच्छा प्रदर्शन किया लेकिन निर्णायक मुकाबले में गेंदबाजी अपेक्षाओं पर खरी नहीं उतर सकी और इसी के साथ टीम का विश्व कप अभियान समाप्त हो गया।

  • टीम इंडिया का बड़ा उलटफेर आयरलैंड ने 2-0 से किया क्लीन स्वीप इतिहास में पहली बार भारत हारा टी20 सीरीज

    टीम इंडिया का बड़ा उलटफेर आयरलैंड ने 2-0 से किया क्लीन स्वीप इतिहास में पहली बार भारत हारा टी20 सीरीज


    नई दिल्ली । भारतीय क्रिकेट टीम को बेलफास्ट में ऐसा झटका लगा जिसकी उम्मीद शायद ही किसी ने की होगी। सिविल सर्विस क्रिकेट क्लब में खेले गए दूसरे टी20 मुकाबले में आयरलैंड ने रोमांचक मुकाबले में भारत को महज 1 रन से हराकर दो मैचों की सीरीज 2-0 से अपने नाम कर ली। यह पहला मौका है जब भारत को टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में आयरलैंड के खिलाफ सीरीज में हार का सामना करना पड़ा। इससे पहले पहला मुकाबला भी आयरलैंड ने 34 रन से जीतकर भारत पर दबाव बना दिया था और दूसरे मैच में भी शानदार प्रदर्शन करते हुए इतिहास रच दिया।

    टॉस हारकर पहले बल्लेबाजी करने उतरी आयरलैंड की शुरुआत अच्छी नहीं रही। टीम ने 17 रन के स्कोर पर पहला विकेट गंवा दिया। इसके बाद रॉस अडायर और कप्तान लोर्कन टकर भी जल्दी पवेलियन लौट गए जिससे मेजबान टीम दबाव में नजर आई। हालांकि हैरी टेक्टर और बेंजामिन कैलिट्ज ने चौथे विकेट के लिए 65 रन जोड़कर पारी को संभाल लिया। टेक्टर ने संयमित बल्लेबाजी करते हुए 47 गेंदों में 53 रन बनाए जबकि कैलिट्ज ने सिर्फ 23 गेंदों पर 37 रन की तेजतर्रार पारी खेली। जॉर्ज डॉकरेल ने भी उपयोगी 19 रन जोड़े और आयरलैंड ने निर्धारित 20 ओवर में 8 विकेट पर 154 रन का प्रतिस्पर्धी स्कोर खड़ा किया।

    भारतीय गेंदबाजों में प्रिंस यादव सबसे सफल रहे जिन्होंने 3 विकेट हासिल किए। अर्शदीप सिंह और शिवम दुबे ने दो-दो विकेट लिए जबकि हर्षित राणा को एक सफलता मिली। गेंदबाजों ने वापसी जरूर कराई लेकिन बल्लेबाजों पर जिम्मेदारी आ गई।

    155 रन के लक्ष्य का पीछा करने उतरी भारतीय टीम की शुरुआत बेहद खराब रही। पहले ही ओवर में संजू सैमसन और अभिषेक शर्मा बिना खाता खोले आउट हो गए। इसके बाद कप्तान श्रेयस अय्यर भी केवल 10 रन बनाकर चलते बने जबकि ईशान किशन भी 12 रन से आगे नहीं बढ़ सके। शुरुआती चार विकेट जल्दी गिरने से भारत पूरी तरह दबाव में आ गया।

    इसके बाद अक्षर पटेल और तिलक वर्मा ने पारी संभालने की कोशिश की। दोनों ने पांचवें विकेट के लिए अहम साझेदारी निभाई लेकिन अक्षर 14 रन बनाकर आउट हो गए। तिलक वर्मा ने एक छोर संभाले रखा और 46 गेंदों में 55 रन की संघर्षपूर्ण अर्धशतकीय पारी खेली। शिवम दुबे ने 20 रन और हर्षित राणा ने 21 रन बनाकर मैच को रोमांचक बनाया लेकिन आखिरी क्षणों में भारतीय टीम जीत से सिर्फ एक रन दूर रह गई। निर्धारित 20 ओवर में भारत 9 विकेट पर 153 रन ही बना सका।

    आयरलैंड की ओर से जय मूंदड़ा और मैथ्यू हॉलार्ड ने तीन-तीन विकेट लेकर भारतीय बल्लेबाजी की कमर तोड़ दी। मैथ्यू हम्फ्रीज और हैरी टेक्टर ने भी एक-एक विकेट हासिल कर टीम की जीत में अहम भूमिका निभाई।

    इस ऐतिहासिक जीत के साथ आयरलैंड ने न केवल पहली बार भारत के खिलाफ टी20 अंतरराष्ट्रीय सीरीज जीती बल्कि 2-0 से क्लीन स्वीप कर अपनी सबसे बड़ी उपलब्धियों में एक और अध्याय जोड़ दिया। दूसरी ओर भारतीय टीम के लिए यह हार कई सवाल छोड़ गई है खासकर शीर्ष क्रम की नाकामी और बल्लेबाजी में निरंतरता की कमी को लेकर। अब टीम इंडिया की नजर इंग्लैंड दौरे पर होगी जहां उसे पांच टी20 और तीन वनडे मैचों की चुनौती का सामना करना है।

  • इतिहास के शिखर पर दीप्ति शर्मा झूलन गोस्वामी का रिकॉर्ड तोड़ बनीं महिला क्रिकेट की नंबर-1 विकेट टेकर

    इतिहास के शिखर पर दीप्ति शर्मा झूलन गोस्वामी का रिकॉर्ड तोड़ बनीं महिला क्रिकेट की नंबर-1 विकेट टेकर


    नई दिल्ली । भारत की स्टार ऑलराउंडर दीप्ति शर्मा ने महिला क्रिकेट के इतिहास में अपना नाम स्वर्ण अक्षरों में दर्ज करा दिया है। आईसीसी महिला टी20 विश्व कप 2026 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ खेले गए अहम मुकाबले के दौरान दीप्ति ने वह उपलब्धि हासिल की जिसका इंतजार भारतीय क्रिकेट प्रशंसकों को लंबे समय से था। उन्होंने दिग्गज तेज गेंदबाज झूलन गोस्वामी का वर्षों पुराना रिकॉर्ड तोड़ते हुए महिला इंटरनेशनल क्रिकेट में सबसे अधिक विकेट लेने वाली गेंदबाज बनने का गौरव अपने नाम कर लिया।

    लॉर्ड्स क्रिकेट ग्राउंड पर खेले गए इस मुकाबले से पहले दीप्ति शर्मा को रिकॉर्ड अपने नाम करने के लिए सिर्फ एक विकेट की जरूरत थी। उन्होंने ऑस्ट्रेलिया की अनुभवी बल्लेबाज बेथ मूनी को आउट करते ही इतिहास रच दिया। बेथ मूनी ने ऑफ स्पिनर दीप्ति की गेंद पर बड़ा शॉट खेलने की कोशिश की लेकिन गेंद सही तरह बल्ले पर नहीं आई और लॉन्ग ऑन पर राधा यादव ने आसान कैच लपक लिया। इस विकेट के साथ ही दीप्ति के इंटरनेशनल करियर में विकेटों की संख्या 356 पहुंच गई और उन्होंने झूलन गोस्वामी के 355 विकेटों के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया।

    दीप्ति शर्मा का यह रिकॉर्ड इसलिए भी खास है क्योंकि उन्होंने यह उपलब्धि महज 278 इंटरनेशनल मुकाबलों में हासिल की है। आगरा में जन्मी इस ऑलराउंडर ने तीनों प्रारूपों में लगातार शानदार प्रदर्शन करते हुए भारतीय टीम की जीत में अहम योगदान दिया है। उन्होंने टेस्ट क्रिकेट में 6 मैचों में 22 विकेट वनडे में 124 मुकाबलों में 166 विकेट और टी20 इंटरनेशनल में 148 मैचों में 168 विकेट हासिल किए हैं। उनकी निरंतरता और ऑलराउंड प्रदर्शन ने उन्हें महिला क्रिकेट की सबसे भरोसेमंद खिलाड़ियों में शामिल कर दिया है।

    दीप्ति का शानदार फॉर्म पूरे टूर्नामेंट में देखने को मिला। इससे पहले पाकिस्तान के खिलाफ मुकाबले में उन्होंने पांच विकेट लेकर विरोधी टीम की बल्लेबाजी की कमर तोड़ दी थी। ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ भी उन्होंने चार ओवर में 31 रन देकर एक अहम विकेट हासिल किया और इसी के साथ भारतीय क्रिकेट के लिए एक नया इतिहास लिख दिया।

    दीप्ति शर्मा ने जिस रिकॉर्ड को अपने नाम किया वह लंबे समय तक झूलन गोस्वामी के नाम दर्ज था। झूलन ने अपने शानदार करियर में 284 इंटरनेशनल मैच खेलते हुए 355 विकेट हासिल किए थे। उन्होंने टेस्ट में 44 वनडे में 255 और टी20 इंटरनेशनल में 56 विकेट लेकर भारतीय महिला क्रिकेट को नई पहचान दिलाई थी। अब दीप्ति ने उनकी विरासत को आगे बढ़ाते हुए नया कीर्तिमान स्थापित कर दिया है।

    महिला इंटरनेशनल क्रिकेट में सबसे ज्यादा विकेट लेने वाली गेंदबाजों की सूची में अब दीप्ति शर्मा शीर्ष पर पहुंच गई हैं। उनके बाद झूलन गोस्वामी दूसरे स्थान पर हैं जबकि ऑस्ट्रेलिया की एलिस पेरी 336 विकेटों के साथ तीसरे स्थान पर मौजूद हैं। इंग्लैंड की कैथरीन साइवर ब्रंट 335 विकेट सोफी एक्लेस्टोन 333 विकेट और दक्षिण अफ्रीका की शबनीम इस्माइल 323 विकेट के साथ इस सूची में शामिल हैं।

    हालांकि भारतीय टीम इस मुकाबले में जीत दर्ज नहीं कर सकी। पहले बल्लेबाजी करते हुए भारत ने चार विकेट पर 170 रन बनाए लेकिन ऑस्ट्रेलिया ने 19 ओवर में चार विकेट रहते लक्ष्य हासिल कर लिया। टीम की हार के बावजूद दीप्ति शर्मा की ऐतिहासिक उपलब्धि भारतीय क्रिकेट के लिए गर्व का क्षण बन गई और उनका यह रिकॉर्ड आने वाले वर्षों तक प्रेरणा का स्रोत रहेगा।

  • एफआईएच प्रो लीग का शानदार अंत भारत ने शूटआउट में इंग्लैंड को हराया वर्ल्ड कप से पहले बढ़ाया आत्मविश्वास

    एफआईएच प्रो लीग का शानदार अंत भारत ने शूटआउट में इंग्लैंड को हराया वर्ल्ड कप से पहले बढ़ाया आत्मविश्वास


    नई दिल्ली । एफआईएच प्रो लीग के अपने अंतिम मुकाबले में भारतीय पुरुष हॉकी टीम ने शानदार जुझारूपन और मजबूत डिफेंस का प्रदर्शन करते हुए मेजबान इंग्लैंड को पेनल्टी शूटआउट में 3-2 से हरा दिया। लंदन के ली वैली हॉकी एंड टेनिस सेंटर में खेले गए इस मुकाबले के निर्धारित 60 मिनट तक दोनों टीमें एक भी गोल नहीं कर सकीं और स्कोर 0-0 रहा। इसके बाद मैच का फैसला शूटआउट से हुआ जिसमें भारतीय खिलाड़ियों ने बेहतरीन संयम दिखाते हुए जीत अपने नाम कर ली। यह जीत इसलिए भी खास रही क्योंकि हॉकी विश्व कप से पहले भारत का यह आखिरी अंतरराष्ट्रीय मुकाबला था और टीम ने शानदार प्रदर्शन के साथ अपना आत्मविश्वास बढ़ाया।

    पूरे मुकाबले में इंग्लैंड ने शुरुआत से ही आक्रामक खेल दिखाया और पहले क्वार्टर में कई बार भारतीय गोल पर दबाव बनाया। शुरुआती पेनल्टी कॉर्नर पर इंग्लैंड के पास बढ़त लेने का अच्छा मौका था लेकिन भारतीय गोलकीपर मोहित शशिकुमार ने शानदार बचाव करते हुए टीम को शुरुआती झटका नहीं लगने दिया। उन्होंने पूरे मुकाबले में कई महत्वपूर्ण सेव किए और विपक्षी खिलाड़ियों को गोल करने का कोई मौका नहीं दिया। भारत की ओर से भी अभिषेक को पहले क्वार्टर में बेहतरीन अवसर मिला लेकिन वह उसे गोल में नहीं बदल सके।

    दूसरे क्वार्टर में भी मुकाबला पूरी तरह संतुलित रहा। इंग्लैंड ने लगातार भारतीय डी में प्रवेश करने की कोशिश की लेकिन भारतीय डिफेंस चट्टान की तरह खड़ा रहा। दूसरी ओर भारत ने भी जवाबी हमले किए। जरमनप्रीत सिंह ने शानदार मूव बनाते हुए गोल का प्रयास किया लेकिन इंग्लैंड के गोलकीपर ने बेहतरीन बचाव कर स्कोर बराबर बनाए रखा। पहले हाफ के अंत तक दोनों टीमें गोल करने में नाकाम रहीं।

    तीसरे क्वार्टर में भारतीय टीम ने आक्रमण की रफ्तार बढ़ा दी। कप्तान हार्दिक सिंह ने मिडफील्ड से शानदार दौड़ लगाकर कई मौके बनाए और टीम को पेनल्टी कॉर्नर भी दिलाया लेकिन अमनदीप लाकड़ा इस अवसर का फायदा नहीं उठा सके। इसी क्वार्टर में इंग्लैंड को पेनल्टी स्ट्रोक मिला लेकिन भारत ने वीडियो रेफरल लिया। रिप्ले में साफ हुआ कि भारतीय खिलाड़ी का टैकल पूरी तरह सही था जिसके बाद अंपायर ने अपना फैसला बदल दिया। यह पल मैच का सबसे बड़ा टर्निंग प्वाइंट साबित हुआ क्योंकि भारत ने संभावित गोल से खुद को बचा लिया।

    चौथे क्वार्टर में दोनों टीमों ने जीत के लिए पूरा दम लगा दिया। भारतीय गोलकीपर सूरज करकेरा ने भी कई शानदार बचाव किए और इंग्लैंड को बढ़त लेने का मौका नहीं दिया। भारत को भी लगातार पेनल्टी कॉर्नर मिले लेकिन मेजबान टीम का डिफेंस मजबूत रहा। आखिरकार निर्धारित समय तक कोई भी टीम गोल नहीं कर सकी और मुकाबला शूटआउट तक पहुंच गया।

    शूटआउट में भारत की ओर से अभिषेक शिलानंद लाकड़ा और कप्तान हार्दिक सिंह ने शानदार गोल किए जबकि भारतीय गोलकीपरों ने विपक्षी खिलाड़ियों को रोकते हुए टीम को 3-2 से जीत दिलाई। पूरे मुकाबले में शानदार रक्षात्मक प्रदर्शन करने वाले संजय को प्लेयर ऑफ द मैच चुना गया। उनकी सूझबूझ भरी डिफेंडिंग और दबाव के क्षणों में शांत प्रदर्शन ने भारत की जीत में अहम भूमिका निभाई।

    विश्व कप से पहले मिली यह जीत भारतीय टीम के लिए मनोबल बढ़ाने वाली साबित होगी। मजबूत डिफेंस शानदार गोलकीपिंग और दबाव में संयम बनाए रखने की क्षमता ने यह संकेत दिया है कि टीम बड़े टूर्नामेंट के लिए पूरी तरह तैयार है।

  • इंजरी टाइम में कप्तान का गोल बना इतिहास कनाडा ने साउथ अफ्रीका को हराकर राउंड ऑफ 16 का टिकट कटाया

    इंजरी टाइम में कप्तान का गोल बना इतिहास कनाडा ने साउथ अफ्रीका को हराकर राउंड ऑफ 16 का टिकट कटाया


    नई दिल्ली । फीफा वर्ल्ड कप 2026 में सह मेजबान कनाडा ने अपने फुटबॉल इतिहास का सबसे यादगार अध्याय लिखते हुए पहली बार विश्व कप के अंतिम 16 में जगह बना ली है। लॉस एंजिलिस स्टेडियम में खेले गए राउंड ऑफ 32 के मुकाबले में कनाडा ने साउथ अफ्रीका को 1 0 से हराकर न केवल ऐतिहासिक जीत दर्ज की बल्कि अपने घरेलू प्रशंसकों को भी जश्न मनाने का बड़ा मौका दिया। इस हार के साथ साउथ अफ्रीका का टूर्नामेंट में सफर समाप्त हो गया।

    मुकाबले की शुरुआत में साउथ अफ्रीका ने आक्रामक खेल दिखाया और लगातार कनाडा के डिफेंस पर दबाव बनाया। शुरुआती मिनटों में अफ्रीकी टीम ने कई अच्छे मूव तैयार किए लेकिन अंतिम क्षणों में फिनिशिंग की कमी के कारण गोल नहीं कर सकी। कनाडा की रक्षापंक्ति ने धैर्य के साथ खेलते हुए सभी हमलों को नाकाम कर दिया।

    पहले हाफ के अंतिम चरण में कनाडा ने भी जवाबी हमला बोला और गोल करने के दो शानदार मौके बनाए। मोइज बॉम्बिटो का दमदार हेडर लगभग गोल में तब्दील होने ही वाला था लेकिन साउथ अफ्रीका के डिफेंडर ऑब्रे मॉडिबा ने गोललाइन से शानदार क्लियरेंस कर अपनी टीम को बचा लिया। इसके बाद ताजोन बुकानन ने जोरदार शॉट लगाया लेकिन गोलकीपर रोनवेन विलियम्स ने बेहतरीन बचाव करते हुए स्कोर बराबर बनाए रखा। पहले हाफ की समाप्ति तक दोनों टीमें गोल करने में असफल रहीं।

    दूसरे हाफ में कनाडा ने अपने खेल की रफ्तार बढ़ा दी और लगातार साउथ अफ्रीका के गोल पर हमले किए। हालांकि मजबूत डिफेंस और शानदार गोलकीपिंग की बदौलत साउथ अफ्रीका लंबे समय तक मुकाबले में बना रहा। मैच के 75वें मिनट में कनाडा ने बड़ा दांव खेलते हुए अपने स्टार खिलाड़ी अल्फोंसो डेविस को मैदान पर उतारा। डेविस के आने के बाद कनाडा के आक्रमण में नई जान आ गई। उनकी तेज रफ्तार और शानदार ड्रिब्लिंग ने विरोधी टीम की रक्षापंक्ति को लगातार दबाव में रखा।

    जब मुकाबला अतिरिक्त समय की ओर बढ़ता दिखाई दे रहा था तब इंजरी टाइम के दूसरे मिनट में कनाडा को वह पल मिला जिसका पूरे देश को इंतजार था। कप्तान स्टीफन यूस्टाक्वियो ने बॉक्स के बाहर से शानदार शॉट लगाया जो सीधे गोलपोस्ट में जाकर समा गया। इस शानदार गोल ने स्टेडियम में मौजूद हजारों दर्शकों को खुशी से झूमने पर मजबूर कर दिया और कनाडा ने 1 0 की यादगार जीत अपने नाम कर ली।

    यह जीत कनाडा के फुटबॉल इतिहास में मील का पत्थर साबित हुई। इससे पहले टीम 1986 और 2022 के फीफा विश्व कप में हिस्सा ले चुकी थी लेकिन दोनों बार ग्रुप चरण से आगे नहीं बढ़ सकी थी। इस बार टीम ने इतिहास बदलते हुए पहली बार अंतिम 16 में प्रवेश किया और विश्व फुटबॉल में अपनी नई पहचान दर्ज कराई।

    अब कनाडा की नजर अगले मुकाबले में जीत हासिल कर क्वार्टर फाइनल में पहुंचने पर होगी जबकि साउथ अफ्रीका को टूर्नामेंट से बाहर होने की निराशा के साथ घर लौटना पड़ेगा। इस ऐतिहासिक जीत ने साबित कर दिया कि कनाडा अब विश्व फुटबॉल में उभरती हुई ताकत बन चुका है।

  • रोच और सील्स की घातक गेंदबाजी से वेस्टइंडीज का धमाका श्रीलंका को पारी और 217 रन से हराकर सीरीज में बनाई बढ़त

    रोच और सील्स की घातक गेंदबाजी से वेस्टइंडीज का धमाका श्रीलंका को पारी और 217 रन से हराकर सीरीज में बनाई बढ़त


    नई दिल्ली । एंटीगुआ के विवियन रिचर्ड्स क्रिकेट स्टेडियम में खेले गए पहले टेस्ट मैच में वेस्टइंडीज ने शानदार प्रदर्शन करते हुए श्रीलंका को एक पारी और 217 रन के विशाल अंतर से हराकर दो मैचों की टेस्ट सीरीज में 1 0 की बढ़त बना ली। बल्लेबाजी और गेंदबाजी दोनों विभागों में कैरेबियाई टीम पूरी तरह हावी रही। खास तौर पर केमार रोच और जेयडन सील्स की धारदार गेंदबाजी ने श्रीलंका की दूसरी पारी को पूरी तरह तहस नहस कर दिया।

    पहली पारी में 318 रन से पिछड़ने के बाद दूसरी बार बल्लेबाजी करने उतरी श्रीलंका की शुरुआत बेहद खराब रही। टीम ने शुरुआती विकेट जल्दी गंवा दिए और किसी भी बल्लेबाज को बड़ी साझेदारी बनाने का मौका नहीं मिला। पथुम निसांका केवल 3 रन बनाकर आउट हो गए जबकि निशान मदुष्का भी सिर्फ 2 रन बनाकर पवेलियन लौट गए। कसुन राजिथा और कामिंदु मेंडिस भी सस्ते में आउट हो गए जिससे टीम गहरे संकट में पहुंच गई।

    पहली पारी में शानदार शतक लगाने वाले धनंजय डी सिल्वा दूसरी पारी में खाता भी नहीं खोल सके। उनके जल्दी आउट होने से श्रीलंका की उम्मीदें लगभग खत्म हो गईं। मध्यक्रम भी पूरी तरह विफल रहा और विकेट लगातार गिरते रहे।

    ऐसे मुश्किल समय में दिनेश चांदीमल ने अकेले संघर्ष करने की कोशिश की। उन्होंने 60 गेंदों में 43 रन की जुझारू पारी खेली और कुछ आकर्षक चौके भी लगाए लेकिन दूसरे छोर से उन्हें किसी बल्लेबाज का साथ नहीं मिला। कुशल मेंडिस केवल 8 रन बनाकर आउट हुए जबकि मिलन प्रियनाथ रत्नायके और असिथा फर्नांडो बिना खाता खोले पवेलियन लौट गए। सोनल दिनुशा 12 रन बनाकर नाबाद रहे लेकिन पूरी टीम केवल 101 रन पर सिमट गई।

    वेस्टइंडीज की ओर से अनुभवी तेज गेंदबाज केमार रोच ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 4 विकेट झटके। जेयडन सील्स ने भी अपनी तेज और सटीक गेंदबाजी से 3 विकेट हासिल किए। शेमार जोसेफ ने 2 जबकि अल्जारी जोसेफ ने 1 विकेट लेकर श्रीलंका की बल्लेबाजी की कमर तोड़ दी।

    इससे पहले श्रीलंका ने पहली पारी में 308 रन बनाए थे। कप्तान धनंजय डी सिल्वा ने 120 रन की शानदार शतकीय पारी खेली थी जबकि दिनेश चांदीमल ने 54 रन का अहम योगदान दिया था। हालांकि बाकी बल्लेबाज बड़ी पारियां खेलने में नाकाम रहे।

    जवाब में वेस्टइंडीज ने पहली पारी में बल्लेबाजी का शानदार प्रदर्शन किया और 9 विकेट पर 626 रन बनाकर अपनी पारी घोषित कर दी। आमिर जांगू ने 233 रन की यादगार पारी खेली जबकि कप्तान रोस्टन चेज 194 रन बनाकर टीम को विशाल स्कोर तक पहुंचाने में सफल रहे। इन दोनों बल्लेबाजों की दमदार पारियों की बदौलत वेस्टइंडीज ने पहली पारी में 318 रन की बड़ी बढ़त हासिल की जो अंततः मैच का निर्णायक अंतर साबित हुई।

    इस जीत के साथ वेस्टइंडीज ने न सिर्फ सीरीज में बढ़त बना ली बल्कि अपने गेंदबाजों और बल्लेबाजों के बेहतरीन संतुलन का भी शानदार प्रदर्शन किया। अब कैरेबियाई टीम की नजर दूसरे टेस्ट में जीत दर्ज कर सीरीज अपने नाम करने पर होगी जबकि श्रीलंका वापसी के इरादे से अगले मुकाबले में उतरेगा।

  • विश्व कप से शर्मनाक विदाई के बाद साउथ कोरिया में बड़ा फैसला हेड कोच होंग म्युंगबो ने दिया इस्तीफा

    विश्व कप से शर्मनाक विदाई के बाद साउथ कोरिया में बड़ा फैसला हेड कोच होंग म्युंगबो ने दिया इस्तीफा


    नई दिल्ली । फीफा विश्व कप 2026 में ग्रुप स्टेज से बाहर होने के बाद साउथ कोरिया की फुटबॉल टीम में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। टीम के अनुभवी हेड कोच होंग म्युंगबो ने अपने पद से इस्तीफा देकर विश्व कप में मिली निराशाजनक हार की पूरी जिम्मेदारी अपने ऊपर ले ली। उन्होंने साफ कहा कि राष्ट्रीय टीम के मुख्य कोच के रूप में अंतिम परिणाम ही सबसे महत्वपूर्ण होता है और जब वह देश की उम्मीदों पर खरे नहीं उतर सके तो पद पर बने रहने का कोई औचित्य नहीं है।

    साउथ कोरिया ने टूर्नामेंट की शुरुआत शानदार अंदाज में की थी। पहले मुकाबले में टीम ने चेकिया को 2 1 से हराकर अपने अभियान की बेहतरीन शुरुआत की थी। इस जीत के बाद माना जा रहा था कि टीम आसानी से नॉकआउट चरण में पहुंच जाएगी। लेकिन अगले दो मुकाबलों में पूरी तस्वीर बदल गई। मेक्सिको और साउथ अफ्रीका के खिलाफ लगातार 1 0 से मिली हार ने टीम की मुश्किलें बढ़ा दीं। अंक तालिका में तीसरे स्थान पर रहने के बावजूद साउथ कोरिया सर्वश्रेष्ठ तीसरे स्थान वाली आठ टीमों में भी जगह नहीं बना सका और ग्रुप चरण से ही टूर्नामेंट से बाहर हो गया।

    विश्व कप से बाहर होने के बाद आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में 57 वर्षीय होंग म्युंगबो भावुक नजर आए। उन्होंने कहा कि देश के लाखों फुटबॉल प्रशंसकों ने टीम पर भरोसा जताया था लेकिन वह उनकी उम्मीदों पर खरे नहीं उतर सके। उन्होंने कहा कि उन्होंने पूरी ईमानदारी और समर्पण के साथ जिम्मेदारी निभाने की कोशिश की लेकिन टीम को अपेक्षित सफलता नहीं दिला पाए। इसी कारण उन्होंने अपने पद से इस्तीफा देने का फैसला लिया है।

    होंग म्युंगबो ने अपने सहयोगी कोचों और सपोर्ट स्टाफ का भी आभार जताया। उन्होंने कहा कि पूरी टीम ने कठिन परिस्थितियों में भी पूरी मेहनत और समर्पण के साथ काम किया लेकिन कई बार प्रयासों के बावजूद परिणाम आपके पक्ष में नहीं आते। उन्होंने यह भी कहा कि राष्ट्रीय टीम का नेतृत्व करना उनके लिए हमेशा गर्व की बात रही है।

    होंग म्युंगबो ने वर्ष 2024 में दूसरी बार साउथ कोरिया की राष्ट्रीय टीम की कमान संभाली थी। उनके दूसरे कार्यकाल में टीम ने कुल 26 मुकाबले खेले जिनमें 15 मैच जीते जबकि 6 में हार का सामना करना पड़ा और 5 मुकाबले ड्रॉ रहे। इससे पहले भी वह 2013 और 2014 के दौरान राष्ट्रीय टीम के मुख्य कोच रह चुके हैं।

    कोच बनने से पहले होंग म्युंगबो साउथ कोरिया के सबसे सफल फुटबॉल खिलाड़ियों में गिने जाते थे। उन्होंने अपने अंतरराष्ट्रीय करियर में देश के लिए 136 मुकाबले खेले और लंबे समय तक टीम के प्रमुख डिफेंडर रहे। वर्ष 2009 में उन्होंने अपने कोचिंग करियर की शुरुआत की और बाद में राष्ट्रीय टीम के साथ कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं।

    अपने विदाई संदेश में होंग म्युंगबो ने कहा कि भले ही वह मुख्य कोच का पद छोड़ रहे हों लेकिन साउथ कोरिया के फुटबॉल के प्रति उनका समर्पण और प्यार कभी कम नहीं होगा। उन्होंने विश्वास जताया कि मौजूदा टीम भविष्य में मजबूत वापसी करेगी और आने वाले बड़े टूर्नामेंटों में बेहतर प्रदर्शन करेगी। उन्होंने कहा कि अब वह एक समर्थक के रूप में हमेशा अपनी राष्ट्रीय टीम का हौसला बढ़ाते रहेंगे और उम्मीद करेंगे कि कोरियाई फुटबॉल फिर नई ऊंचाइयों को छुए।

  • रचिन और मिचेल का कमाल फिर गेंदबाजों का वार इंग्लैंड पर हार का खतरा मंडराया

    रचिन और मिचेल का कमाल फिर गेंदबाजों का वार इंग्लैंड पर हार का खतरा मंडराया


    नई दिल्ली । इंग्लैंड और न्यूजीलैंड के बीच ट्रेंट ब्रिज में खेले जा रहे तीसरे टेस्ट मैच का चौथा दिन पूरी तरह मेहमान टीम के नाम रहा। न्यूजीलैंड ने पहले बल्लेबाजी में मजबूत बढ़त हासिल की और फिर गेंदबाजों के दम पर इंग्लैंड के शीर्ष क्रम को झटके देकर मुकाबले पर अपनी पकड़ मजबूत कर ली। चौथे दिन का खेल समाप्त होने तक इंग्लैंड ने दूसरी पारी में चार विकेट खोकर 103 रन बनाए हैं। अब अंतिम दिन मेजबान टीम को जीत के लिए 270 रन की जरूरत है जबकि उसके केवल छह विकेट शेष हैं।

    373 रन के कठिन लक्ष्य का पीछा करने उतरी इंग्लैंड को कप्तान बेन स्टोक्स और बेन डकेट ने तेज शुरुआत दिलाई। दोनों बल्लेबाजों ने पहले विकेट के लिए 50 रन जोड़कर टीम को सकारात्मक शुरुआत दी। स्टोक्स ने शुरुआत से ही आक्रामक बल्लेबाजी की और केवल 20 गेंदों में 30 रन बना डाले लेकिन बड़ी पारी खेलने से पहले ही उनका विकेट गिर गया। उनके आउट होते ही इंग्लैंड की पारी लड़खड़ा गई।

    स्टोक्स के बाद बल्लेबाजी करने आए जैकब बेथेल बिना खाता खोले ही पवेलियन लौट गए। न्यूजीलैंड के गेंदबाज जैकरी फाउल्क्स ने उन्हें एलबीडब्ल्यू आउट कर इंग्लैंड पर दबाव और बढ़ा दिया। इसके बाद हैरी ब्रूक ने कुछ आकर्षक शॉट लगाए और केवल नौ गेंदों में 21 रन बनाए लेकिन उनकी पारी भी ज्यादा देर नहीं चल सकी। दूसरी ओर बेन डकेट ने संयम के साथ बल्लेबाजी करते हुए 42 गेंदों में 36 रन बनाए लेकिन वह भी टीम को मजबूत स्थिति में नहीं पहुंचा सके।

    दिन का खेल समाप्त होने तक अनुभवी बल्लेबाज जो रूट नौ रन और एमिलियो गे छह रन बनाकर क्रीज पर मौजूद थे। अब इंग्लैंड की सारी उम्मीदें इन दोनों बल्लेबाजों पर टिकी होंगी। अगर अंतिम दिन टीम को जीत हासिल करनी है तो इन दोनों को लंबी साझेदारी निभानी होगी।

    इससे पहले न्यूजीलैंड ने अपनी दूसरी पारी नौ विकेट पर 288 रन बनाकर घोषित की। टीम की ओर से रचिन रविंद्र और डेरिल मिचेल ने शानदार बल्लेबाजी का प्रदर्शन किया। दोनों ने चौथे विकेट के लिए 129 रन की महत्वपूर्ण साझेदारी कर इंग्लैंड के सामने चुनौतीपूर्ण लक्ष्य खड़ा किया। रचिन रविंद्र शतक से चूक गए और 149 गेंदों में 94 रन बनाकर आउट हुए जबकि डेरिल मिचेल ने नाबाद 100 रन की शानदार पारी खेली। उनकी इस पारी ने न्यूजीलैंड की बढ़त को निर्णायक बना दिया।

    इंग्लैंड की ओर से जोफ्रा आर्चर ने सबसे प्रभावी गेंदबाजी करते हुए 53 रन देकर चार विकेट झटके। गस एटकिंसन और कप्तान बेन स्टोक्स ने दो दो विकेट अपने नाम किए लेकिन न्यूजीलैंड तब तक मजबूत बढ़त हासिल कर चुका था।

    पहली पारी में न्यूजीलैंड ने इंग्लैंड के 354 रन के जवाब में 438 रन बनाकर 84 रन की बढ़त बनाई थी। दूसरी पारी में 288 रन जोड़ने के बाद उसने इंग्लैंड के सामने 373 रन का मुश्किल लक्ष्य रखा। अब अंतिम दिन मुकाबला पूरी तरह रोमांचक मोड़ पर पहुंच चुका है। इंग्लैंड को जीत के लिए 270 रन बनाने हैं जबकि न्यूजीलैंड को सीरीज में अहम बढ़त लेने के लिए केवल छह विकेट की जरूरत है।