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  • फ्रांस से भिड़ंत से पहले स्वीडन को तगड़ा झटका: डिफेंस की दीवार इसाक हिएन टूर्नामेंट से बाहर

    फ्रांस से भिड़ंत से पहले स्वीडन को तगड़ा झटका: डिफेंस की दीवार इसाक हिएन टूर्नामेंट से बाहर


    नई दिल्ली । फीफा वर्ल्ड कप 2026 के नॉकआउट मुकाबलों से पहले स्वीडन को बड़ा झटका लगा है। टीम के स्टार डिफेंडर इसाक हिएन हैमस्ट्रिंग चोट के कारण पूरे टूर्नामेंट से बाहर हो गए हैं। फ्रांस के खिलाफ होने वाले राउंड ऑफ 32 के अहम मुकाबले से पहले यह खबर स्वीडिश टीम के लिए बड़ी चिंता लेकर आई है, क्योंकि हिएन टीम की रक्षापंक्ति के सबसे भरोसेमंद खिलाड़ियों में शामिल थे।

    27 वर्षीय इसाक हिएन को गुरुवार को जापान के खिलाफ खेले गए ग्रुप मुकाबले के दौरान चोट लगी थी। यह मैच 1-1 की बराबरी पर समाप्त हुआ था और इसी नतीजे के साथ स्वीडन ने तीसरे स्थान की सर्वश्रेष्ठ आठ टीमों में जगह बनाते हुए नॉकआउट चरण के लिए क्वालिफाई किया था। हालांकि मैच के दौरान लगी चोट अब इतनी गंभीर साबित हुई कि उन्हें पूरे टूर्नामेंट से बाहर होना पड़ा।

    स्वीडिश फुटबॉल एसोसिएशन ने आधिकारिक तौर पर पुष्टि की है कि हिएन अब विश्व कप में आगे हिस्सा नहीं ले पाएंगे। मेडिकल जांच में उनके बाएं पैर की हैमस्ट्रिंग में गंभीर चोट पाई गई है। टीम के डॉक्टर जोनास वर्नर ने बताया कि खिलाड़ी को तुरंत रिहैबिलिटेशन के लिए अपने क्लब लौटना होगा और पूरी तरह फिट होने में कुछ समय लगेगा। उन्होंने कहा कि इस चोट के कारण हिएन फिलहाल फुटबॉल से दूर रहेंगे।

    स्वीडन के मुख्य कोच ग्राहम पॉटर ने भी इसाक हिएन के बाहर होने पर निराशा जताई। उन्होंने कहा कि विश्व कप जैसे बड़े मंच पर किसी खिलाड़ी का चोट के कारण सफर खत्म होना बेहद दुखद होता है। टीम हिएन के साथ पूरी मजबूती से खड़ी है और उन्हें विश्वास है कि वह पूरी तरह फिट होकर पहले से अधिक मजबूत वापसी करेंगे। कोच ने यह भी संकेत दिया कि फ्रांस के खिलाफ मुकाबले के लिए टीम को अपनी रक्षापंक्ति में बदलाव करना पड़ेगा।

    जापान के खिलाफ मैच में हिएन को चोट उस समय लगी थी जब उन्होंने पेनल्टी बॉक्स के अंदर युकिनारी सुगावारा के क्रॉस को रोकने के लिए लंबा स्ट्रेच किया। इसी प्रयास में उनकी हैमस्ट्रिंग खिंच गई और उन्हें मैदान छोड़ना पड़ा। उनकी जगह युवा मिडफील्डर लुकास बर्गवैल को उतारा गया, जबकि कप्तान विक्टर लिंडेलोफ ने सेंटर बैक की जिम्मेदारी संभाली।

    अब स्वीडन के सामने सबसे बड़ी चुनौती फ्रांस जैसी मजबूत टीम के खिलाफ अपनी रक्षापंक्ति को संतुलित रखना होगी। हिएन की गैरमौजूदगी निश्चित रूप से टीम की रणनीति और डिफेंस पर असर डालेगी। ऐसे में बाकी खिलाड़ियों पर अतिरिक्त जिम्मेदारी होगी कि वे इस कमी को पूरा करते हुए टीम को नॉकआउट मुकाबले में जीत दिलाने का प्रयास करें।

  • आयरलैंड से हार के बाद भी टीम इंडिया पर भरोसा, जडेजा के कोच बोले- मजबूत वापसी करेगी टीम

    आयरलैंड से हार के बाद भी टीम इंडिया पर भरोसा, जडेजा के कोच बोले- मजबूत वापसी करेगी टीम


    नई दिल्ली । आयरलैंड के खिलाफ पहले टी20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबले में मिली हार के बाद भारतीय टीम को लेकर कई सवाल उठने लगे हैं लेकिन अनुभवी ऑलराउंडर रवींद्र जडेजा के कोच महेंद्र चौहान ने टीम का बचाव करते हुए इसे टी20 क्रिकेट का स्वाभाविक हिस्सा बताया है। उनका कहना है कि इस फॉर्मेट में किसी भी दिन कोई भी टीम बेहतर प्रदर्शन कर सकती है और ऐसे नतीजे क्रिकेट का हिस्सा हैं।

    महेंद्र चौहान ने कहा कि भारत जैसी मजबूत टीम को एक हार के आधार पर कमजोर नहीं माना जा सकता। उन्होंने कहा कि टी20 क्रिकेट बेहद तेज और अनिश्चितताओं से भरा प्रारूप है जहां छोटी-सी गलती या विपक्षी टीम का शानदार प्रदर्शन मैच का परिणाम बदल सकता है। उनके अनुसार कभी-कभी अपेक्षाकृत नई या कमजोर मानी जाने वाली टीमें भी बड़े उलटफेर कर देती हैं।

    उन्होंने कहा कि पहले टी20 में मिली हार से यह निष्कर्ष निकालना गलत होगा कि भारतीय टीम अच्छी नहीं है। टीम इंडिया के पास विश्व स्तरीय बल्लेबाज गेंदबाज और फील्डर मौजूद हैं जो किसी भी परिस्थिति में मुकाबले का रुख बदलने की क्षमता रखते हैं। उन्होंने भरोसा जताया कि भारतीय टीम अगले मुकाबलों में बेहतर प्रदर्शन करते हुए जोरदार वापसी करेगी।

    जब महेंद्र चौहान से पूछा गया कि वह भारतीय खिलाड़ियों को कोई विशेष सलाह देना चाहेंगे तो उन्होंने विनम्रता से कहा कि राष्ट्रीय टीम तक पहुंचने वाले खिलाड़ी अपने दम पर हर चुनौती पार करके वहां पहुंचे हैं। ऐसे खिलाड़ियों को सलाह देने की जरूरत नहीं होती क्योंकि वे खेल की बारीकियों और दबाव से अच्छी तरह परिचित हैं।

    पहले टी20 मुकाबले में आयरलैंड ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 20 ओवर में 9 विकेट के नुकसान पर 182 रन बनाए। टीम के लिए लॉर्कन टकर ने 36 गेंदों में शानदार 50 रन की पारी खेली जबकि गैरेथ डेलानी ने 39 रन का महत्वपूर्ण योगदान दिया। दोनों बल्लेबाजों की पारियों की बदौलत आयरलैंड ने भारत के सामने चुनौतीपूर्ण लक्ष्य रखा।

    183 रन के लक्ष्य का पीछा करने उतरी भारतीय टीम शुरुआत से ही दबाव में नजर आई। नियमित अंतराल पर विकेट गिरने से टीम कभी भी मैच में मजबूत स्थिति नहीं बना सकी। सात बल्लेबाज दहाई का आंकड़ा भी पार नहीं कर सके जिससे रनचेज पूरी तरह बिखर गया।

    भारत की ओर से अभिषेक शर्मा ने सबसे अधिक 49 रन बनाए और संघर्ष जरूर किया लेकिन दूसरे छोर से उन्हें अपेक्षित सहयोग नहीं मिला। पूरी भारतीय टीम 148 रन पर सिमट गई और उसे 34 रन से हार का सामना करना पड़ा।

    यह जीत आयरलैंड के लिए ऐतिहासिक रही क्योंकि अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में उसने पहली बार भारत को हराने का कारनामा किया। हालांकि भारतीय टीम और उसके समर्थकों को उम्मीद होगी कि अगले मुकाबलों में टीम अपनी गलतियों से सबक लेकर बेहतर प्रदर्शन करेगी।

  • फीफा वर्ल्ड कप 2026: स्पेन ने उरुग्वे को हराकर नॉकआउट में बनाई जगह, उरुग्वे बाहर

    फीफा वर्ल्ड कप 2026: स्पेन ने उरुग्वे को हराकर नॉकआउट में बनाई जगह, उरुग्वे बाहर


    नई दिल्ली । फीफा वर्ल्ड कप 2026 में स्पेन ने शानदार प्रदर्शन करते हुए उरुग्वे को 1-0 से हराकर नॉकआउट चरण में अपनी जगह पक्की कर ली। ग्रुप एच के इस अहम मुकाबले में स्पेन ने पूरे मैच के दौरान संतुलित खेल दिखाया और एकमात्र गोल के दम पर जीत दर्ज की। इस हार के साथ ही दो बार की विश्व चैंपियन उरुग्वे का टूर्नामेंट में सफर समाप्त हो गया।

    गुआडालाहारा में खेले गए मुकाबले में दोनों टीमों ने शुरुआत से ही आक्रामक खेल दिखाया। उरुग्वे ने शुरुआती मिनटों में स्पेन पर दबाव बनाने की कोशिश की जबकि स्पेन ने भी लगातार आक्रमण किए और सेट पीस के जरिए गोल करने के अवसर बनाए। स्पेन के डिफेंडर पाउ क्यूबार्सी को पहले हाफ में गोल करने के कुछ अच्छे मौके मिले लेकिन वे उन्हें भुना नहीं सके।

    उरुग्वे की ओर से फेडेरिको वाल्वरडे और डार्विन नुनेज ने भी स्पेनिश रक्षा पंक्ति को चुनौती दी लेकिन दोनों खिलाड़ी अपने अवसरों को गोल में नहीं बदल पाए। दोनों टीमों के गोलकीपरों ने पहले हाफ में कई शानदार बचाव किए जिससे मुकाबला लंबे समय तक बराबरी पर बना रहा।

    मैच का निर्णायक पल 42वें मिनट में आया जब स्पेन के मिडफील्डर एलेक्स बेना ने बॉक्स के बाहर से शानदार शॉट लगाकर गेंद को गोलपोस्ट में पहुंचा दिया। उनका यह गोल उरुग्वे के अनुभवी गोलकीपर फर्नांडो मुस्लेरा को चकमा देता हुआ जाल में समा गया। खास बात यह रही कि उस समय मैदान पर दोनों टीमों के खिलाड़ी उपचार ले रहे थे लेकिन खेल जारी था और बेना ने मिले मौके का पूरा फायदा उठाया।

    दूसरे हाफ में उरुग्वे ने वापसी की भरपूर कोशिश की और गेंद पर अधिक नियंत्रण भी रखा लेकिन स्पेन का मजबूत डिफेंस उसके सामने दीवार बनकर खड़ा रहा। सब्स्टीट्यूट फेडेरिको विनास को बराबरी का बेहतरीन मौका मिला लेकिन उनका शॉट गोलपोस्ट के ऊपर से निकल गया।

    स्पेन की ओर से डैनी ओल्मो और फेरान टोरेस ने भी बढ़त दोगुनी करने के लिए कई प्रयास किए लेकिन उरुग्वे के गोलकीपर और डिफेंडरों ने उन्हें सफल नहीं होने दिया। मुकाबले के अंतिम मिनटों में उरुग्वे ने लगातार हमले किए लेकिन स्पेन के गोलकीपर उनाई सिमोन ने शानदार बचाव करते हुए अपनी टीम की बढ़त सुरक्षित रखी।

    स्टॉपेज टाइम में उरुग्वे की मुश्किलें और बढ़ गईं जब अगस्टिन कैनोबियो को रेड कार्ड दिखाया गया। इसके बाद टीम के लिए वापसी की सभी उम्मीदें लगभग खत्म हो गईं और अंतिम सीटी के साथ स्पेन ने 1-0 की महत्वपूर्ण जीत दर्ज कर ली।

    इस जीत के साथ स्पेन ने दो जीत और एक ड्रॉ के दम पर सात अंक हासिल करते हुए ग्रुप एच में शीर्ष स्थान पर कब्जा किया। वहीं विश्व कप में पदार्पण करने वाली केप वर्डे तीन ड्रॉ के साथ दूसरे स्थान पर रहकर नॉकआउट चरण में पहुंच गई। उरुग्वे केवल दो अंक ही जुटा सका और ग्रुप चरण से ही बाहर हो गया।

  • वेस्टइंडीज ने संकट से की शानदार वापसी, जांगू-चेज की शतकीय साझेदारी बनी सहारा

    वेस्टइंडीज ने संकट से की शानदार वापसी, जांगू-चेज की शतकीय साझेदारी बनी सहारा


    नई दिल्ली । एंटीगुआ के सर विवियन रिचर्ड्स क्रिकेट स्टेडियम में खेले जा रहे वेस्टइंडीज और श्रीलंका के बीच पहले टेस्ट मुकाबले में दूसरे दिन का खेल मेजबान टीम के नाम रहा। शुरुआती झटकों के बाद आमिर जांगू और कप्तान रोस्टन चेज ने शानदार बल्लेबाजी करते हुए वेस्टइंडीज की पारी को संभाला। दूसरे दिन का खेल समाप्त होने तक वेस्टइंडीज ने पहली पारी में 5 विकेट पर 271 रन बना लिए हैं और अब वह श्रीलंका के पहली पारी के स्कोर से केवल 37 रन पीछे है।

    दिन की शुरुआत वेस्टइंडीज के सलामी बल्लेबाजों ने सकारात्मक अंदाज में की। जॉन कैंपबेल और ब्रैंडन किंग ने पहले विकेट के लिए 58 रन जोड़कर टीम को मजबूत शुरुआत दिलाई। हालांकि अच्छी शुरुआत के बावजूद ब्रैंडन किंग 31 रन बनाकर आउट हो गए। इसके बाद कैंपबेल भी 39 रन बनाकर पवेलियन लौट गए और वेस्टइंडीज की पारी लड़खड़ाने लगी।

    मध्यक्रम में केवम हॉज 16 रन बनाकर आउट हुए जबकि जोशुआ दा सिल्वा भी 20 रन से आगे नहीं बढ़ सके। इसके बाद जस्टिन ग्रीव्स केवल 3 रन बनाकर चलते बने। 168 रन के स्कोर तक पांच विकेट गिरने के बाद ऐसा लग रहा था कि श्रीलंका मैच पर पूरी तरह पकड़ बना लेगा।

    यहीं से आमिर जांगू और कप्तान रोस्टन चेज ने शानदार जिम्मेदारी निभाई। दोनों बल्लेबाजों ने संयम और धैर्य के साथ बल्लेबाजी करते हुए श्रीलंकाई गेंदबाजों को सफलता से दूर रखा। जांगू ने 174 गेंदों का सामना करते हुए नाबाद 78 रन बनाए। उनकी पारी में सात चौके शामिल रहे। दूसरी ओर कप्तान रोस्टन चेज ने भी धैर्यपूर्ण बल्लेबाजी करते हुए 105 गेंदों में नाबाद 42 रन बनाए।

    दोनों बल्लेबाजों के बीच छठे विकेट के लिए अब तक 103 रन की अटूट साझेदारी हो चुकी है जिसने वेस्टइंडीज को मजबूत स्थिति में पहुंचा दिया। तीसरे दिन कैरेबियाई टीम की कोशिश बढ़त हासिल कर मैच पर नियंत्रण बनाने की होगी।

    श्रीलंका की ओर से गेंदबाजी में असिथा फर्नांडो और मिलन रत्नायके ने दो-दो विकेट हासिल किए। शुरुआती सफलता के बावजूद दोनों गेंदबाज बाद में जांगू और चेज की साझेदारी को नहीं तोड़ सके।

    इससे पहले श्रीलंका ने अपनी पहली पारी में 308 रन बनाए थे। टीम के लिए धनंजय डी सिल्वा ने शानदार शतक जड़ते हुए 168 गेंदों में 120 रन बनाए। दिनेश चांदीमल ने 54 रन का योगदान दिया जबकि सोनल दिनुशा ने 43 और मदुशंका ने 23 रन की उपयोगी पारी खेली थी।

    अब मुकाबला बेहद रोमांचक मोड़ पर पहुंच चुका है। वेस्टइंडीज के पास पहली पारी में बढ़त लेने का सुनहरा मौका है जबकि श्रीलंका तीसरे दिन शुरुआती विकेट लेकर मैच में फिर से वापसी करना चाहेगा।

  • अटापट्टू की कप्तानी पारी से श्रीलंका की शानदार जीत, सेमीफाइनल की उम्मीदें बरकरार

    अटापट्टू की कप्तानी पारी से श्रीलंका की शानदार जीत, सेमीफाइनल की उम्मीदें बरकरार

    नई दिल्ली । महिला टी20 विश्व कप 2026 में श्रीलंका ने शानदार प्रदर्शन करते हुए स्कॉटलैंड को रोमांचक मुकाबले में 3 विकेट से हराकर सेमीफाइनल में पहुंचने की अपनी उम्मीदों को कायम रखा। मैनचेस्टर के ओल्ड ट्रैफर्ड मैदान पर खेले गए इस मुकाबले में श्रीलंका ने 152 रन के लक्ष्य को 19.5 ओवर में 7 विकेट खोकर हासिल कर लिया। कप्तान चमारी अटापट्टू ने तेजतर्रार पारी खेलकर टीम की जीत की नींव रखी जबकि नीलाक्षी डी सिल्वा ने अंत तक टिककर जीत सुनिश्चित की।

    152 रन के लक्ष्य का पीछा करने उतरी श्रीलंका की शुरुआत अच्छी नहीं रही। इमेशा दुलानी केवल 4 रन बनाकर आउट हो गईं। इसके बाद हसीनी परेरा ने तेज शुरुआत करते हुए 17 गेंदों में 23 रन बनाए लेकिन अपनी पारी को बड़ी नहीं बना सकीं। हर्षिता समरविक्रमा ने 23 गेंदों में 27 रन बनाकर पारी को संभाला और मध्यक्रम को मजबूती दी।

    कप्तान चमारी अटापट्टू ने एक बार फिर अपनी आक्रामक बल्लेबाजी से मैच का रुख बदल दिया। उन्होंने केवल 16 गेंदों में 33 रन की विस्फोटक पारी खेली जिसमें 6 चौके और एक शानदार छक्का शामिल रहा। उनकी तेज बल्लेबाजी से श्रीलंका ने रन गति बनाए रखी और लक्ष्य की ओर तेजी से बढ़त बनाई।

    मध्यक्रम में कविशा दिलहारी ने 18 रन का योगदान दिया जबकि नीलाक्षी डी सिल्वा ने दबाव के समय संयम दिखाते हुए 21 रन की उपयोगी नाबाद पारी खेली। उनके साथ सुगंधिका कुमारी 7 रन बनाकर नाबाद लौटीं और दोनों बल्लेबाजों ने अंतिम ओवर में टीम को जीत दिला दी।

    स्कॉटलैंड की ओर से कप्तान कैथरीन ब्राइस राहेल स्लेटर और कैथरीन फ्रेजर ने दो-दो विकेट हासिल किए लेकिन वे टीम को जीत नहीं दिला सकीं।

    इससे पहले बल्लेबाजी करते हुए स्कॉटलैंड ने निर्धारित 20 ओवर में 6 विकेट पर 151 रन बनाए। टीम के लिए सारा ब्राइस ने सबसे ज्यादा 47 रन की नाबाद पारी खेली। उन्होंने 33 गेंदों का सामना करते हुए 6 चौके लगाए। डार्सी कार्टर ने 34 रन बनाए जबकि ऐल्सा लिस्टर ने 17 गेंदों में 26 रन और कप्तान कैथरीन ब्राइस ने 23 रन का योगदान दिया।

    श्रीलंका की ओर से गेंदबाजी में मिताली अयोध्या सबसे सफल रहीं। उन्होंने 34 रन देकर 2 विकेट झटके जबकि कविशा दिलहारी को एक विकेट मिला। गेंदबाजों ने अंतिम ओवरों में स्कॉटलैंड की रन गति पर अंकुश लगाकर टीम को बड़ा स्कोर बनाने से रोक दिया।

    इस जीत के साथ श्रीलंका के पांच मैचों में छह अंक हो गए हैं और टीम ग्रुप बी की अंक तालिका में तीसरे स्थान पर पहुंच गई है। अब श्रीलंका की नजर अगले मुकाबलों में जीत दर्ज कर सेमीफाइनल में जगह बनाने पर होगी।

  • सऊदी अरब को रोककर चमका केप वर्डे, वर्ल्ड कप डेब्यू में नॉकआउट का ऐतिहासिक सफर

    सऊदी अरब को रोककर चमका केप वर्डे, वर्ल्ड कप डेब्यू में नॉकआउट का ऐतिहासिक सफर


    नई दिल्ली । फीफा वर्ल्ड कप 2026 में केप वर्डे ने अपने पहले ही विश्व कप अभियान में इतिहास रच दिया है। ग्रुप एच के आखिरी मुकाबले में सऊदी अरब के खिलाफ गोलरहित ड्रॉ खेलकर टीम ने राउंड ऑफ 32 में जगह बना ली। इस उपलब्धि के साथ केप वर्डे अपने वर्ल्ड कप डेब्यू में बिना कोई मैच गंवाए नॉकआउट चरण में पहुंचने वाली तीसरी अफ्रीकी टीम बन गई है। टीम के शानदार प्रदर्शन ने दुनिया भर के फुटबॉल प्रशंसकों का ध्यान अपनी ओर खींचा है।

    ग्रुप चरण में केप वर्डे ने तीन अंक हासिल कर दूसरा स्थान अपने नाम किया। इस प्रदर्शन के दम पर उसने दो बार की विश्व चैंपियन उरुग्वे और 2034 विश्व कप के मेजबान सऊदी अरब को पीछे छोड़ दिया। अब राउंड ऑफ 32 में उसका मुकाबला गत चैंपियन अर्जेंटीना से होगा। यह मैच 3 जुलाई को मियामी में खेला जाएगा और इसे केप वर्डे के फुटबॉल इतिहास का सबसे बड़ा मुकाबला माना जा रहा है।

    सऊदी अरब के खिलाफ खेले गए मुकाबले में केप वर्डे ने शुरुआत से ही आक्रामक रणनीति अपनाई। टीम ने लगातार हमले किए और कई बार गोल करने के करीब पहुंची। विली सेमेडो ने विपक्षी गोलपोस्ट पर कई खतरनाक प्रयास किए लेकिन सऊदी गोलकीपर मोहम्मद अल ओवैस ने शानदार बचाव करते हुए अपनी टीम को बढ़त लेने से रोक दिया। पहले हाफ में केप वर्डे का एक लंबी दूरी का दमदार शॉट भी गोलपोस्ट के बेहद करीब से बाहर निकल गया।

    दूसरी ओर सऊदी अरब को मैच के दौरान बड़ा झटका तब लगा जब डिफेंडर हसन अल तंबकती बिना किसी टक्कर के मैदान पर गिर पड़े। चोट गंभीर होने के कारण उन्हें स्ट्रेचर के जरिए मैदान से बाहर ले जाना पड़ा। उनके बाहर होने के बाद सऊदी रक्षा पंक्ति कमजोर नजर आई लेकिन टीम ने संयम बनाए रखा और केप वर्डे को गोल करने का मौका नहीं दिया।

    मैच के अंतिम मिनटों में दोनों टीमों ने जीत के लिए प्रयास किए लेकिन कोई भी गोल नहीं कर सकी। सऊदी गोलकीपर अल ओवैस ने कई महत्वपूर्ण सेव कर अपनी टीम को हार से बचाया जबकि केप वर्डे का मजबूत डिफेंस भी पूरे मुकाबले में अडिग रहा। आखिरकार मैच 0-0 की बराबरी पर समाप्त हुआ।

    अंतिम सीटी बजते ही केप वर्डे के खिलाड़ियों और समर्थकों में जश्न का माहौल बन गया। एक अंक ने टीम को ऐतिहासिक सफलता दिला दी और पहली बार विश्व कप के नॉकआउट चरण में पहुंचने का सपना साकार हो गया। अब पूरी दुनिया की नजरें अर्जेंटीना के खिलाफ होने वाले मुकाबले पर होंगी जहां केप वर्डे अपने सुनहरे सफर को आगे बढ़ाने की कोशिश करेगा।

  • फीफा वर्ल्ड कप में सेनेगल का दमदार प्रदर्शन इराक को 5-0 से हराकर नॉकआउट की उम्मीदें जिंदा

    फीफा वर्ल्ड कप में सेनेगल का दमदार प्रदर्शन इराक को 5-0 से हराकर नॉकआउट की उम्मीदें जिंदा


    नई दिल्ली । फीफा वर्ल्ड कप 2026 के ग्रुप आई मुकाबले में सेनेगल ने शानदार प्रदर्शन करते हुए इराक को 5-0 से करारी शिकस्त दी और नॉकआउट चरण में पहुंचने की अपनी उम्मीदों को बरकरार रखा। टोरंटो में खेले गए इस मुकाबले में सेनेगल ने शुरुआत से ही आक्रामक खेल दिखाया और पूरे मैच में इराक को वापसी का कोई मौका नहीं दिया। इस हार के साथ इराक का विश्व कप अभियान बिना एक भी अंक हासिल किए समाप्त हो गया जबकि सेनेगल तीन अंकों के साथ ग्रुप में तीसरे स्थान पर पहुंच गया और अब उसकी नजर सर्वश्रेष्ठ तीसरे स्थान वाली टीमों में जगह बनाने पर है।

    मैच की शुरुआत से ही सेनेगल ने गेंद पर नियंत्रण बनाए रखा और लगातार इराकी रक्षा पंक्ति पर दबाव बनाया। शुरुआती बढ़त टीम को हबीब दियारा ने दिलाई जिनका शॉट डिफ्लेक्शन के बाद गोल में चला गया और सेनेगल 1-0 से आगे हो गया। गोल के बाद भी सेनेगल का दबदबा जारी रहा जबकि इराक के लिए मुश्किलें लगातार बढ़ती चली गईं।

    मुकाबले का अहम मोड़ 13वें मिनट में आया जब सादियो माने पर हुए फाउल की वीडियो असिस्टेंट रेफरी से समीक्षा की गई। जांच के बाद इराक के डिफेंडर रेबिन सुलाका को रेड कार्ड दिखाकर मैदान से बाहर भेज दिया गया। एक खिलाड़ी कम होने के कारण इराक की टीम पर अतिरिक्त दबाव आ गया। इसके बावजूद इराक ने पहले हाफ में संयम बनाए रखा और सेनेगल को दूसरा गोल करने से रोकने में सफल रहा। पहले 45 मिनट तक मुकाबला 1-0 पर ही बना रहा।

    दूसरे हाफ में सेनेगल ने अपनी रफ्तार और तेज कर दी। इस्माइला सार ने शानदार गोल कर टीम की बढ़त 2-0 कर दी। यह उनके विश्व कप करियर का चौथा गोल रहा और इसके साथ ही वह सेनेगल के लिए विश्व कप इतिहास में सबसे ज्यादा गोल करने वाले खिलाड़ी बन गए। इसके बाद मैदान पर उतरे स्थानापन्न खिलाड़ी पेपे गुएये ने कुछ ही मिनटों में मैच का रुख पूरी तरह बदल दिया। उन्होंने दो जबरदस्त लंबी दूरी के शॉट लगाए जिन्हें इराक का गोलकीपर रोक नहीं सका। उनके पहले शॉट की रफ्तार 84 किलोमीटर प्रति घंटा और दूसरे शॉट की गति 103 किलोमीटर प्रति घंटा दर्ज की गई। इन दोनों गोलों ने सेनेगल की बढ़त 4-0 कर दी।

    मैच के 82वें मिनट में इलिमन नडियाये ने शानदार फिनिशिंग करते हुए टीम का पांचवां गोल दागा और सेनेगल की बड़ी जीत पर मुहर लगा दी। इस जीत ने न केवल टीम का मनोबल बढ़ाया बल्कि नॉकआउट चरण में पहुंचने की उम्मीदों को भी जीवित रखा। अब सेनेगल की नजर अन्य ग्रुपों के परिणामों पर रहेगी ताकि वह सर्वश्रेष्ठ तीसरे स्थान वाली टीमों में जगह बनाकर राउंड ऑफ 32 में प्रवेश कर सके।

  • मिस्र का ऐतिहासिक सफर जारी ईरान का आखिरी मिनट का गोल रद्द दोनों टीमों के लिए अहम रहा मुकाबला

    मिस्र का ऐतिहासिक सफर जारी ईरान का आखिरी मिनट का गोल रद्द दोनों टीमों के लिए अहम रहा मुकाबला

     
    नई दिल्ली  । फीफा वर्ल्ड कप 2026 के ग्रुप जी में मिस्र और ईरान के बीच खेला गया मुकाबला 1-1 की बराबरी पर समाप्त हुआ लेकिन यह ड्रॉ दोनों टीमों के लिए अलग-अलग मायने लेकर आया। इस नतीजे के साथ मिस्र ने विश्व कप इतिहास में पहली बार राउंड ऑफ 32 में जगह बनाकर नया इतिहास रच दिया जबकि ईरान की नॉकआउट दौर में पहुंचने की उम्मीदें भी अभी कायम हैं। ग्रुप चरण समाप्त होने के बाद मिस्र दूसरे स्थान पर रहा जबकि ईरान तीसरे स्थान पर पहुंचा। टूर्नामेंट के प्रारूप के अनुसार तीसरे स्थान पर रहने वाली सर्वश्रेष्ठ आठ टीमें भी अगले दौर में पहुंचेंगी और फिलहाल ईरान इस सूची में छठे स्थान पर बना हुआ है।

    मुकाबले की शुरुआत मिस्र के शानदार प्रदर्शन से हुई। टीम ने पहले ही मिनटों से आक्रामक खेल दिखाया और पांचवें मिनट में महमूद साबेर ने बेहतरीन गोल कर मिस्र को 1-0 की बढ़त दिला दी। शुरुआती झटके के बावजूद ईरान ने जल्द ही वापसी करते हुए 14वें मिनट में रमिन रेजाइएन के गोल की बदौलत स्कोर 1-1 से बराबर कर दिया। इसके बाद दोनों टीमों ने लगातार आक्रमण किए लेकिन पहले हाफ में कोई भी टीम बढ़त हासिल नहीं कर सकी और मुकाबला बराबरी पर पहुंच गया।

    दूसरे हाफ में मिस्र ने अपनी रणनीति बदलते हुए रक्षात्मक खेल अपनाया। टीम का फोकस ड्रॉ बचाकर अगले दौर में जगह पक्की करने पर रहा। दूसरी ओर ईरान ने गेंद पर अधिक नियंत्रण बनाए रखा और लगातार मिस्र के गोल पर दबाव बनाया। कई अच्छे मौके मिलने के बावजूद ईरानी खिलाड़ी गोल करने में सफल नहीं हो सके। मिस्र की मजबूत रक्षापंक्ति और गोलकीपर ने भी शानदार प्रदर्शन करते हुए ईरान को बढ़त लेने से रोके रखा।

    मुकाबले के अंतिम क्षण बेहद रोमांचक रहे। पहले मेहदी तारेमी का शानदार हेडर क्रॉसबार से टकरा गया जिससे ईरान बढ़त लेने से चूक गया। इसके बाद स्टॉपेज टाइम के तीसरे मिनट में शोजा खलीलजादेह ने गेंद को गोलपोस्ट में पहुंचाकर ईरानी खेमे में खुशी की लहर दौड़ा दी। खिलाड़ी और टीम स्टाफ जीत का जश्न मनाने मैदान में पहुंच गए लेकिन यह खुशी ज्यादा देर तक नहीं टिक सकी। वीडियो असिस्टेंट रेफरी ने गोल की समीक्षा की और खलीलजादेह को ऑफसाइड करार देते हुए गोल रद्द कर दिया। इसके साथ ही मुकाबला 1-1 की बराबरी पर समाप्त हुआ।

    इस ड्रॉ ने मिस्र के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि सुनिश्चित कर दी क्योंकि टीम पहली बार विश्व कप के नॉकआउट चरण में पहुंचने में सफल रही। वहीं ईरान को अब अन्य ग्रुपों के परिणामों का इंतजार रहेगा ताकि वह सर्वश्रेष्ठ तीसरे स्थान वाली टीमों में शामिल होकर राउंड ऑफ 32 का टिकट हासिल कर सके।

  • क्या BCCI ने कर दी जल्दबाजी? चैंपियन कप्तानों की विदाई के बाद टीम इंडिया के प्रदर्शन पर उठे सवाल

    क्या BCCI ने कर दी जल्दबाजी? चैंपियन कप्तानों की विदाई के बाद टीम इंडिया के प्रदर्शन पर उठे सवाल


    नई दिल्ली । भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड यानी BCCI एक बार फिर अपने कप्तानी से जुड़े फैसलों को लेकर चर्चा के केंद्र में है। पिछले कुछ वर्षों में भारतीय टीम ने आईसीसी टूर्नामेंटों में शानदार सफलता हासिल की, लेकिन इन सफलताओं के बावजूद कप्तानी में किए गए बदलावों ने क्रिकेट विशेषज्ञों और प्रशंसकों के बीच कई सवाल खड़े कर दिए हैं। सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब कोई कप्तान टीम को विश्व स्तर पर सफलता दिला रहा हो तो क्या उसे अचानक नेतृत्व से हटाना उचित फैसला माना जा सकता है।

    भारतीय क्रिकेट के हालिया घटनाक्रम इसी बहस को और तेज कर रहे हैं। रोहित शर्मा की कप्तानी में भारतीय टीम ने आईसीसी चैंपियंस ट्रॉफी का खिताब अपने नाम किया। उनकी रणनीति, अनुभव और शांत नेतृत्व की हर तरफ सराहना हुई। लेकिन खिताब जीतने के कुछ समय बाद ही कप्तानी में बदलाव करते हुए टीम की कमान शुभमन गिल को सौंप दी गई। इसके बाद भारतीय टीम को ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड जैसी मजबूत टीमों के खिलाफ वनडे सीरीज में हार का सामना करना पड़ा। इन नतीजों के बाद कई पूर्व खिलाड़ियों और क्रिकेट प्रेमियों ने सवाल उठाया कि क्या सफल कप्तान को इतनी जल्दी बदलना जरूरी था।

    इसी तरह टी20 क्रिकेट में सूर्यकुमार यादव ने भारत को विश्व विजेता बनाने में अहम भूमिका निभाई। उनकी आक्रामक सोच, बेहतरीन कप्तानी और मैच के अनुसार रणनीति बनाने की क्षमता ने टीम इंडिया को आईसीसी टी20 विश्व कप का खिताब दिलाया। इसके बावजूद कप्तानी में बदलाव करते हुए उन्हें नेतृत्व से हटा दिया गया और टीम की कमान श्रेयस अय्यर को सौंप दी गई। इतना ही नहीं टीम चयन में भी सूर्यकुमार यादव की भूमिका सीमित होती दिखाई दी।

    नए कप्तान और नए कोचिंग सेटअप के साथ भारतीय टीम को अपने पहले ही बड़े मुकाबले में आयरलैंड के खिलाफ हार का सामना करना पड़ा। बेलफास्ट में मिली इस हार ने कप्तानी परिवर्तन को लेकर चल रही बहस को और तेज कर दिया। क्रिकेट विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी टीम में बदलाव जरूरी होते हैं, लेकिन बदलाव का समय और तरीका भी उतना ही महत्वपूर्ण होता है। यदि सफल कप्तानों को बिना स्पष्ट कारण नेतृत्व से हटाया जाता है तो उसका असर टीम के मनोबल और ड्रेसिंग रूम के माहौल पर भी पड़ सकता है।

    हालांकि दूसरी ओर यह भी तर्क दिया जा रहा है कि किसी भी क्रिकेट टीम में भविष्य को ध्यान में रखते हुए नए खिलाड़ियों और नए नेताओं को तैयार करना आवश्यक होता है। लंबी अवधि की योजनाओं के तहत बोर्ड कई बार कठिन फैसले लेता है ताकि आने वाले वर्षों में टीम मजबूत बनी रहे। ऐसे निर्णयों का मूल्यांकन केवल कुछ मैचों के आधार पर करना भी उचित नहीं माना जा सकता।

    फिलहाल इतना तय है कि लगातार कप्तानी में बदलाव और शुरुआती हार के बाद BCCI के फैसले चर्चा के केंद्र में हैं। आने वाले महीनों में नए नेतृत्व का प्रदर्शन ही तय करेगा कि यह बदलाव भारतीय क्रिकेट के लिए दूरगामी सफलता का आधार बनता है या फिर चैंपियन कप्तानों को समय से पहले हटाने का फैसला एक बड़ी रणनीतिक भूल साबित होता है।

  • पहले ही मैच में कप्तानी की कड़ी परीक्षा, श्रेयस अय्यर के साथ जुड़ा ऐसा रिकॉर्ड जिसे कोई कप्तान नहीं चाहेगा

    पहले ही मैच में कप्तानी की कड़ी परीक्षा, श्रेयस अय्यर के साथ जुड़ा ऐसा रिकॉर्ड जिसे कोई कप्तान नहीं चाहेगा


    नई दिल्ली । भारतीय क्रिकेट टीम  का आयरलैंड दौरा उम्मीदों के विपरीत शुरुआत के साथ आगे बढ़ा। बेलफास्ट में खेले गए पहले टी20 मुकाबले में मेजबान आयरलैंड ने शानदार प्रदर्शन करते हुए भारत को 34 रन से शिकस्त दे दी। यह मुकाबला सिर्फ हार की वजह से ही चर्चा में नहीं रहा बल्कि भारतीय टीम के नए कप्तान श्रेयस अय्यर के नाम एक ऐसा रिकॉर्ड भी दर्ज हो गया जिसे कोई भी कप्तान अपने करियर की शुरुआत में नहीं देखना चाहता।

    श्रेयस अय्यर पहली बार टी20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबले में भारत की कप्तानी कर रहे थे लेकिन उनका डेब्यू जीत के बजाय हार के साथ समाप्त हुआ। इसी के साथ वह उन चुनिंदा भारतीय कप्तानों की सूची में शामिल हो गए जिन्होंने अपने पहले टी20 कप्तानी मैच में हार का सामना किया। यह हार इसलिए भी बड़ी मानी जा रही है क्योंकि भारत का जनवरी 2024 से चला आ रहा टी20 अंतरराष्ट्रीय सीरीज में अजेय रहने का सिलसिला भी टूट गया।

    मुकाबले में आयरलैंड ने पहले बल्लेबाजी करते हुए भारत के सामने 183 रन का चुनौतीपूर्ण लक्ष्य रखा। जवाब में भारतीय बल्लेबाजी उम्मीदों पर खरी नहीं उतर सकी। नियमित अंतराल पर विकेट गिरते रहे और पूरी टीम 18.5 ओवर में 148 रन पर सिमट गई। भारतीय बल्लेबाज बड़ी साझेदारी बनाने में नाकाम रहे जबकि आयरलैंड के गेंदबाजों ने लगातार दबाव बनाए रखा। परिणामस्वरूप भारत को 34 रन से हार झेलनी पड़ी।

    इस हार के साथ श्रेयस अय्यर का नाम भारतीय क्रिकेट के कुछ बड़े कप्तानों के साथ एक अनचाही सूची में जुड़ गया। इससे पहले विराट कोहली भी अपने टी20 कप्तानी डेब्यू में जीत दर्ज नहीं कर सके थे। साल 2017 में कानपुर में इंग्लैंड के खिलाफ खेले गए अपने पहले टी20 मुकाबले में भारत को सात विकेट से हार मिली थी। विराट के नाम एक और अनोखा रिकॉर्ड दर्ज है। वह भारत के ऐसे पहले कप्तान बने जिन्होंने टेस्ट वनडे और टी20 तीनों प्रारूपों में कप्तानी की शुरुआत हार के साथ की।

    साल 2022 में ऋषभ पंत को दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ घरेलू टी20 सीरीज में कप्तानी का मौका मिला था। उस मुकाबले में भारत ने 211 रन का विशाल स्कोर खड़ा किया था लेकिन गेंदबाज लक्ष्य का बचाव नहीं कर सके और पंत का कप्तानी डेब्यू भी हार के साथ समाप्त हुआ।

    इसके बाद साल 2024 में शुभमन गिल को जिम्बाब्वे दौरे पर पहली बार टी20 टीम की कमान मिली थी। हरारे में खेले गए पहले मुकाबले में भारत को 13 रन से हार मिली थी। हालांकि गिल ने शानदार वापसी करते हुए पूरी सीरीज 4-1 से अपने नाम की और आलोचकों को करारा जवाब दिया था।

    अब साल 2026 में श्रेयस अय्यर भी इसी सूची का हिस्सा बन गए हैं। हालांकि क्रिकेट में एक मुकाबला किसी कप्तान की क्षमता तय नहीं करता। भारतीय टीम के सामने अब सीरीज में वापसी करने का मौका है और श्रेयस अय्यर की कोशिश होगी कि अगले मुकाबलों में टीम बेहतर प्रदर्शन करे तथा अपनी कप्तानी का सफल आगाज जीत के साथ आगे बढ़ाए। भारतीय टीम के पास मजबूत बल्लेबाजी और अनुभवी गेंदबाजी आक्रमण है इसलिए अगले मैचों में वापसी की पूरी उम्मीद बनी हुई है।