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  • एफआईएच प्रो लीग का शानदार अंत भारत ने शूटआउट में इंग्लैंड को हराया वर्ल्ड कप से पहले बढ़ाया आत्मविश्वास

    एफआईएच प्रो लीग का शानदार अंत भारत ने शूटआउट में इंग्लैंड को हराया वर्ल्ड कप से पहले बढ़ाया आत्मविश्वास


    नई दिल्ली । एफआईएच प्रो लीग के अपने अंतिम मुकाबले में भारतीय पुरुष हॉकी टीम ने शानदार जुझारूपन और मजबूत डिफेंस का प्रदर्शन करते हुए मेजबान इंग्लैंड को पेनल्टी शूटआउट में 3-2 से हरा दिया। लंदन के ली वैली हॉकी एंड टेनिस सेंटर में खेले गए इस मुकाबले के निर्धारित 60 मिनट तक दोनों टीमें एक भी गोल नहीं कर सकीं और स्कोर 0-0 रहा। इसके बाद मैच का फैसला शूटआउट से हुआ जिसमें भारतीय खिलाड़ियों ने बेहतरीन संयम दिखाते हुए जीत अपने नाम कर ली। यह जीत इसलिए भी खास रही क्योंकि हॉकी विश्व कप से पहले भारत का यह आखिरी अंतरराष्ट्रीय मुकाबला था और टीम ने शानदार प्रदर्शन के साथ अपना आत्मविश्वास बढ़ाया।

    पूरे मुकाबले में इंग्लैंड ने शुरुआत से ही आक्रामक खेल दिखाया और पहले क्वार्टर में कई बार भारतीय गोल पर दबाव बनाया। शुरुआती पेनल्टी कॉर्नर पर इंग्लैंड के पास बढ़त लेने का अच्छा मौका था लेकिन भारतीय गोलकीपर मोहित शशिकुमार ने शानदार बचाव करते हुए टीम को शुरुआती झटका नहीं लगने दिया। उन्होंने पूरे मुकाबले में कई महत्वपूर्ण सेव किए और विपक्षी खिलाड़ियों को गोल करने का कोई मौका नहीं दिया। भारत की ओर से भी अभिषेक को पहले क्वार्टर में बेहतरीन अवसर मिला लेकिन वह उसे गोल में नहीं बदल सके।

    दूसरे क्वार्टर में भी मुकाबला पूरी तरह संतुलित रहा। इंग्लैंड ने लगातार भारतीय डी में प्रवेश करने की कोशिश की लेकिन भारतीय डिफेंस चट्टान की तरह खड़ा रहा। दूसरी ओर भारत ने भी जवाबी हमले किए। जरमनप्रीत सिंह ने शानदार मूव बनाते हुए गोल का प्रयास किया लेकिन इंग्लैंड के गोलकीपर ने बेहतरीन बचाव कर स्कोर बराबर बनाए रखा। पहले हाफ के अंत तक दोनों टीमें गोल करने में नाकाम रहीं।

    तीसरे क्वार्टर में भारतीय टीम ने आक्रमण की रफ्तार बढ़ा दी। कप्तान हार्दिक सिंह ने मिडफील्ड से शानदार दौड़ लगाकर कई मौके बनाए और टीम को पेनल्टी कॉर्नर भी दिलाया लेकिन अमनदीप लाकड़ा इस अवसर का फायदा नहीं उठा सके। इसी क्वार्टर में इंग्लैंड को पेनल्टी स्ट्रोक मिला लेकिन भारत ने वीडियो रेफरल लिया। रिप्ले में साफ हुआ कि भारतीय खिलाड़ी का टैकल पूरी तरह सही था जिसके बाद अंपायर ने अपना फैसला बदल दिया। यह पल मैच का सबसे बड़ा टर्निंग प्वाइंट साबित हुआ क्योंकि भारत ने संभावित गोल से खुद को बचा लिया।

    चौथे क्वार्टर में दोनों टीमों ने जीत के लिए पूरा दम लगा दिया। भारतीय गोलकीपर सूरज करकेरा ने भी कई शानदार बचाव किए और इंग्लैंड को बढ़त लेने का मौका नहीं दिया। भारत को भी लगातार पेनल्टी कॉर्नर मिले लेकिन मेजबान टीम का डिफेंस मजबूत रहा। आखिरकार निर्धारित समय तक कोई भी टीम गोल नहीं कर सकी और मुकाबला शूटआउट तक पहुंच गया।

    शूटआउट में भारत की ओर से अभिषेक शिलानंद लाकड़ा और कप्तान हार्दिक सिंह ने शानदार गोल किए जबकि भारतीय गोलकीपरों ने विपक्षी खिलाड़ियों को रोकते हुए टीम को 3-2 से जीत दिलाई। पूरे मुकाबले में शानदार रक्षात्मक प्रदर्शन करने वाले संजय को प्लेयर ऑफ द मैच चुना गया। उनकी सूझबूझ भरी डिफेंडिंग और दबाव के क्षणों में शांत प्रदर्शन ने भारत की जीत में अहम भूमिका निभाई।

    विश्व कप से पहले मिली यह जीत भारतीय टीम के लिए मनोबल बढ़ाने वाली साबित होगी। मजबूत डिफेंस शानदार गोलकीपिंग और दबाव में संयम बनाए रखने की क्षमता ने यह संकेत दिया है कि टीम बड़े टूर्नामेंट के लिए पूरी तरह तैयार है।

  • इंजरी टाइम में कप्तान का गोल बना इतिहास कनाडा ने साउथ अफ्रीका को हराकर राउंड ऑफ 16 का टिकट कटाया

    इंजरी टाइम में कप्तान का गोल बना इतिहास कनाडा ने साउथ अफ्रीका को हराकर राउंड ऑफ 16 का टिकट कटाया


    नई दिल्ली । फीफा वर्ल्ड कप 2026 में सह मेजबान कनाडा ने अपने फुटबॉल इतिहास का सबसे यादगार अध्याय लिखते हुए पहली बार विश्व कप के अंतिम 16 में जगह बना ली है। लॉस एंजिलिस स्टेडियम में खेले गए राउंड ऑफ 32 के मुकाबले में कनाडा ने साउथ अफ्रीका को 1 0 से हराकर न केवल ऐतिहासिक जीत दर्ज की बल्कि अपने घरेलू प्रशंसकों को भी जश्न मनाने का बड़ा मौका दिया। इस हार के साथ साउथ अफ्रीका का टूर्नामेंट में सफर समाप्त हो गया।

    मुकाबले की शुरुआत में साउथ अफ्रीका ने आक्रामक खेल दिखाया और लगातार कनाडा के डिफेंस पर दबाव बनाया। शुरुआती मिनटों में अफ्रीकी टीम ने कई अच्छे मूव तैयार किए लेकिन अंतिम क्षणों में फिनिशिंग की कमी के कारण गोल नहीं कर सकी। कनाडा की रक्षापंक्ति ने धैर्य के साथ खेलते हुए सभी हमलों को नाकाम कर दिया।

    पहले हाफ के अंतिम चरण में कनाडा ने भी जवाबी हमला बोला और गोल करने के दो शानदार मौके बनाए। मोइज बॉम्बिटो का दमदार हेडर लगभग गोल में तब्दील होने ही वाला था लेकिन साउथ अफ्रीका के डिफेंडर ऑब्रे मॉडिबा ने गोललाइन से शानदार क्लियरेंस कर अपनी टीम को बचा लिया। इसके बाद ताजोन बुकानन ने जोरदार शॉट लगाया लेकिन गोलकीपर रोनवेन विलियम्स ने बेहतरीन बचाव करते हुए स्कोर बराबर बनाए रखा। पहले हाफ की समाप्ति तक दोनों टीमें गोल करने में असफल रहीं।

    दूसरे हाफ में कनाडा ने अपने खेल की रफ्तार बढ़ा दी और लगातार साउथ अफ्रीका के गोल पर हमले किए। हालांकि मजबूत डिफेंस और शानदार गोलकीपिंग की बदौलत साउथ अफ्रीका लंबे समय तक मुकाबले में बना रहा। मैच के 75वें मिनट में कनाडा ने बड़ा दांव खेलते हुए अपने स्टार खिलाड़ी अल्फोंसो डेविस को मैदान पर उतारा। डेविस के आने के बाद कनाडा के आक्रमण में नई जान आ गई। उनकी तेज रफ्तार और शानदार ड्रिब्लिंग ने विरोधी टीम की रक्षापंक्ति को लगातार दबाव में रखा।

    जब मुकाबला अतिरिक्त समय की ओर बढ़ता दिखाई दे रहा था तब इंजरी टाइम के दूसरे मिनट में कनाडा को वह पल मिला जिसका पूरे देश को इंतजार था। कप्तान स्टीफन यूस्टाक्वियो ने बॉक्स के बाहर से शानदार शॉट लगाया जो सीधे गोलपोस्ट में जाकर समा गया। इस शानदार गोल ने स्टेडियम में मौजूद हजारों दर्शकों को खुशी से झूमने पर मजबूर कर दिया और कनाडा ने 1 0 की यादगार जीत अपने नाम कर ली।

    यह जीत कनाडा के फुटबॉल इतिहास में मील का पत्थर साबित हुई। इससे पहले टीम 1986 और 2022 के फीफा विश्व कप में हिस्सा ले चुकी थी लेकिन दोनों बार ग्रुप चरण से आगे नहीं बढ़ सकी थी। इस बार टीम ने इतिहास बदलते हुए पहली बार अंतिम 16 में प्रवेश किया और विश्व फुटबॉल में अपनी नई पहचान दर्ज कराई।

    अब कनाडा की नजर अगले मुकाबले में जीत हासिल कर क्वार्टर फाइनल में पहुंचने पर होगी जबकि साउथ अफ्रीका को टूर्नामेंट से बाहर होने की निराशा के साथ घर लौटना पड़ेगा। इस ऐतिहासिक जीत ने साबित कर दिया कि कनाडा अब विश्व फुटबॉल में उभरती हुई ताकत बन चुका है।

  • रोच और सील्स की घातक गेंदबाजी से वेस्टइंडीज का धमाका श्रीलंका को पारी और 217 रन से हराकर सीरीज में बनाई बढ़त

    रोच और सील्स की घातक गेंदबाजी से वेस्टइंडीज का धमाका श्रीलंका को पारी और 217 रन से हराकर सीरीज में बनाई बढ़त


    नई दिल्ली । एंटीगुआ के विवियन रिचर्ड्स क्रिकेट स्टेडियम में खेले गए पहले टेस्ट मैच में वेस्टइंडीज ने शानदार प्रदर्शन करते हुए श्रीलंका को एक पारी और 217 रन के विशाल अंतर से हराकर दो मैचों की टेस्ट सीरीज में 1 0 की बढ़त बना ली। बल्लेबाजी और गेंदबाजी दोनों विभागों में कैरेबियाई टीम पूरी तरह हावी रही। खास तौर पर केमार रोच और जेयडन सील्स की धारदार गेंदबाजी ने श्रीलंका की दूसरी पारी को पूरी तरह तहस नहस कर दिया।

    पहली पारी में 318 रन से पिछड़ने के बाद दूसरी बार बल्लेबाजी करने उतरी श्रीलंका की शुरुआत बेहद खराब रही। टीम ने शुरुआती विकेट जल्दी गंवा दिए और किसी भी बल्लेबाज को बड़ी साझेदारी बनाने का मौका नहीं मिला। पथुम निसांका केवल 3 रन बनाकर आउट हो गए जबकि निशान मदुष्का भी सिर्फ 2 रन बनाकर पवेलियन लौट गए। कसुन राजिथा और कामिंदु मेंडिस भी सस्ते में आउट हो गए जिससे टीम गहरे संकट में पहुंच गई।

    पहली पारी में शानदार शतक लगाने वाले धनंजय डी सिल्वा दूसरी पारी में खाता भी नहीं खोल सके। उनके जल्दी आउट होने से श्रीलंका की उम्मीदें लगभग खत्म हो गईं। मध्यक्रम भी पूरी तरह विफल रहा और विकेट लगातार गिरते रहे।

    ऐसे मुश्किल समय में दिनेश चांदीमल ने अकेले संघर्ष करने की कोशिश की। उन्होंने 60 गेंदों में 43 रन की जुझारू पारी खेली और कुछ आकर्षक चौके भी लगाए लेकिन दूसरे छोर से उन्हें किसी बल्लेबाज का साथ नहीं मिला। कुशल मेंडिस केवल 8 रन बनाकर आउट हुए जबकि मिलन प्रियनाथ रत्नायके और असिथा फर्नांडो बिना खाता खोले पवेलियन लौट गए। सोनल दिनुशा 12 रन बनाकर नाबाद रहे लेकिन पूरी टीम केवल 101 रन पर सिमट गई।

    वेस्टइंडीज की ओर से अनुभवी तेज गेंदबाज केमार रोच ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 4 विकेट झटके। जेयडन सील्स ने भी अपनी तेज और सटीक गेंदबाजी से 3 विकेट हासिल किए। शेमार जोसेफ ने 2 जबकि अल्जारी जोसेफ ने 1 विकेट लेकर श्रीलंका की बल्लेबाजी की कमर तोड़ दी।

    इससे पहले श्रीलंका ने पहली पारी में 308 रन बनाए थे। कप्तान धनंजय डी सिल्वा ने 120 रन की शानदार शतकीय पारी खेली थी जबकि दिनेश चांदीमल ने 54 रन का अहम योगदान दिया था। हालांकि बाकी बल्लेबाज बड़ी पारियां खेलने में नाकाम रहे।

    जवाब में वेस्टइंडीज ने पहली पारी में बल्लेबाजी का शानदार प्रदर्शन किया और 9 विकेट पर 626 रन बनाकर अपनी पारी घोषित कर दी। आमिर जांगू ने 233 रन की यादगार पारी खेली जबकि कप्तान रोस्टन चेज 194 रन बनाकर टीम को विशाल स्कोर तक पहुंचाने में सफल रहे। इन दोनों बल्लेबाजों की दमदार पारियों की बदौलत वेस्टइंडीज ने पहली पारी में 318 रन की बड़ी बढ़त हासिल की जो अंततः मैच का निर्णायक अंतर साबित हुई।

    इस जीत के साथ वेस्टइंडीज ने न सिर्फ सीरीज में बढ़त बना ली बल्कि अपने गेंदबाजों और बल्लेबाजों के बेहतरीन संतुलन का भी शानदार प्रदर्शन किया। अब कैरेबियाई टीम की नजर दूसरे टेस्ट में जीत दर्ज कर सीरीज अपने नाम करने पर होगी जबकि श्रीलंका वापसी के इरादे से अगले मुकाबले में उतरेगा।

  • विश्व कप से शर्मनाक विदाई के बाद साउथ कोरिया में बड़ा फैसला हेड कोच होंग म्युंगबो ने दिया इस्तीफा

    विश्व कप से शर्मनाक विदाई के बाद साउथ कोरिया में बड़ा फैसला हेड कोच होंग म्युंगबो ने दिया इस्तीफा


    नई दिल्ली । फीफा विश्व कप 2026 में ग्रुप स्टेज से बाहर होने के बाद साउथ कोरिया की फुटबॉल टीम में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। टीम के अनुभवी हेड कोच होंग म्युंगबो ने अपने पद से इस्तीफा देकर विश्व कप में मिली निराशाजनक हार की पूरी जिम्मेदारी अपने ऊपर ले ली। उन्होंने साफ कहा कि राष्ट्रीय टीम के मुख्य कोच के रूप में अंतिम परिणाम ही सबसे महत्वपूर्ण होता है और जब वह देश की उम्मीदों पर खरे नहीं उतर सके तो पद पर बने रहने का कोई औचित्य नहीं है।

    साउथ कोरिया ने टूर्नामेंट की शुरुआत शानदार अंदाज में की थी। पहले मुकाबले में टीम ने चेकिया को 2 1 से हराकर अपने अभियान की बेहतरीन शुरुआत की थी। इस जीत के बाद माना जा रहा था कि टीम आसानी से नॉकआउट चरण में पहुंच जाएगी। लेकिन अगले दो मुकाबलों में पूरी तस्वीर बदल गई। मेक्सिको और साउथ अफ्रीका के खिलाफ लगातार 1 0 से मिली हार ने टीम की मुश्किलें बढ़ा दीं। अंक तालिका में तीसरे स्थान पर रहने के बावजूद साउथ कोरिया सर्वश्रेष्ठ तीसरे स्थान वाली आठ टीमों में भी जगह नहीं बना सका और ग्रुप चरण से ही टूर्नामेंट से बाहर हो गया।

    विश्व कप से बाहर होने के बाद आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में 57 वर्षीय होंग म्युंगबो भावुक नजर आए। उन्होंने कहा कि देश के लाखों फुटबॉल प्रशंसकों ने टीम पर भरोसा जताया था लेकिन वह उनकी उम्मीदों पर खरे नहीं उतर सके। उन्होंने कहा कि उन्होंने पूरी ईमानदारी और समर्पण के साथ जिम्मेदारी निभाने की कोशिश की लेकिन टीम को अपेक्षित सफलता नहीं दिला पाए। इसी कारण उन्होंने अपने पद से इस्तीफा देने का फैसला लिया है।

    होंग म्युंगबो ने अपने सहयोगी कोचों और सपोर्ट स्टाफ का भी आभार जताया। उन्होंने कहा कि पूरी टीम ने कठिन परिस्थितियों में भी पूरी मेहनत और समर्पण के साथ काम किया लेकिन कई बार प्रयासों के बावजूद परिणाम आपके पक्ष में नहीं आते। उन्होंने यह भी कहा कि राष्ट्रीय टीम का नेतृत्व करना उनके लिए हमेशा गर्व की बात रही है।

    होंग म्युंगबो ने वर्ष 2024 में दूसरी बार साउथ कोरिया की राष्ट्रीय टीम की कमान संभाली थी। उनके दूसरे कार्यकाल में टीम ने कुल 26 मुकाबले खेले जिनमें 15 मैच जीते जबकि 6 में हार का सामना करना पड़ा और 5 मुकाबले ड्रॉ रहे। इससे पहले भी वह 2013 और 2014 के दौरान राष्ट्रीय टीम के मुख्य कोच रह चुके हैं।

    कोच बनने से पहले होंग म्युंगबो साउथ कोरिया के सबसे सफल फुटबॉल खिलाड़ियों में गिने जाते थे। उन्होंने अपने अंतरराष्ट्रीय करियर में देश के लिए 136 मुकाबले खेले और लंबे समय तक टीम के प्रमुख डिफेंडर रहे। वर्ष 2009 में उन्होंने अपने कोचिंग करियर की शुरुआत की और बाद में राष्ट्रीय टीम के साथ कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं।

    अपने विदाई संदेश में होंग म्युंगबो ने कहा कि भले ही वह मुख्य कोच का पद छोड़ रहे हों लेकिन साउथ कोरिया के फुटबॉल के प्रति उनका समर्पण और प्यार कभी कम नहीं होगा। उन्होंने विश्वास जताया कि मौजूदा टीम भविष्य में मजबूत वापसी करेगी और आने वाले बड़े टूर्नामेंटों में बेहतर प्रदर्शन करेगी। उन्होंने कहा कि अब वह एक समर्थक के रूप में हमेशा अपनी राष्ट्रीय टीम का हौसला बढ़ाते रहेंगे और उम्मीद करेंगे कि कोरियाई फुटबॉल फिर नई ऊंचाइयों को छुए।

  • रचिन और मिचेल का कमाल फिर गेंदबाजों का वार इंग्लैंड पर हार का खतरा मंडराया

    रचिन और मिचेल का कमाल फिर गेंदबाजों का वार इंग्लैंड पर हार का खतरा मंडराया


    नई दिल्ली । इंग्लैंड और न्यूजीलैंड के बीच ट्रेंट ब्रिज में खेले जा रहे तीसरे टेस्ट मैच का चौथा दिन पूरी तरह मेहमान टीम के नाम रहा। न्यूजीलैंड ने पहले बल्लेबाजी में मजबूत बढ़त हासिल की और फिर गेंदबाजों के दम पर इंग्लैंड के शीर्ष क्रम को झटके देकर मुकाबले पर अपनी पकड़ मजबूत कर ली। चौथे दिन का खेल समाप्त होने तक इंग्लैंड ने दूसरी पारी में चार विकेट खोकर 103 रन बनाए हैं। अब अंतिम दिन मेजबान टीम को जीत के लिए 270 रन की जरूरत है जबकि उसके केवल छह विकेट शेष हैं।

    373 रन के कठिन लक्ष्य का पीछा करने उतरी इंग्लैंड को कप्तान बेन स्टोक्स और बेन डकेट ने तेज शुरुआत दिलाई। दोनों बल्लेबाजों ने पहले विकेट के लिए 50 रन जोड़कर टीम को सकारात्मक शुरुआत दी। स्टोक्स ने शुरुआत से ही आक्रामक बल्लेबाजी की और केवल 20 गेंदों में 30 रन बना डाले लेकिन बड़ी पारी खेलने से पहले ही उनका विकेट गिर गया। उनके आउट होते ही इंग्लैंड की पारी लड़खड़ा गई।

    स्टोक्स के बाद बल्लेबाजी करने आए जैकब बेथेल बिना खाता खोले ही पवेलियन लौट गए। न्यूजीलैंड के गेंदबाज जैकरी फाउल्क्स ने उन्हें एलबीडब्ल्यू आउट कर इंग्लैंड पर दबाव और बढ़ा दिया। इसके बाद हैरी ब्रूक ने कुछ आकर्षक शॉट लगाए और केवल नौ गेंदों में 21 रन बनाए लेकिन उनकी पारी भी ज्यादा देर नहीं चल सकी। दूसरी ओर बेन डकेट ने संयम के साथ बल्लेबाजी करते हुए 42 गेंदों में 36 रन बनाए लेकिन वह भी टीम को मजबूत स्थिति में नहीं पहुंचा सके।

    दिन का खेल समाप्त होने तक अनुभवी बल्लेबाज जो रूट नौ रन और एमिलियो गे छह रन बनाकर क्रीज पर मौजूद थे। अब इंग्लैंड की सारी उम्मीदें इन दोनों बल्लेबाजों पर टिकी होंगी। अगर अंतिम दिन टीम को जीत हासिल करनी है तो इन दोनों को लंबी साझेदारी निभानी होगी।

    इससे पहले न्यूजीलैंड ने अपनी दूसरी पारी नौ विकेट पर 288 रन बनाकर घोषित की। टीम की ओर से रचिन रविंद्र और डेरिल मिचेल ने शानदार बल्लेबाजी का प्रदर्शन किया। दोनों ने चौथे विकेट के लिए 129 रन की महत्वपूर्ण साझेदारी कर इंग्लैंड के सामने चुनौतीपूर्ण लक्ष्य खड़ा किया। रचिन रविंद्र शतक से चूक गए और 149 गेंदों में 94 रन बनाकर आउट हुए जबकि डेरिल मिचेल ने नाबाद 100 रन की शानदार पारी खेली। उनकी इस पारी ने न्यूजीलैंड की बढ़त को निर्णायक बना दिया।

    इंग्लैंड की ओर से जोफ्रा आर्चर ने सबसे प्रभावी गेंदबाजी करते हुए 53 रन देकर चार विकेट झटके। गस एटकिंसन और कप्तान बेन स्टोक्स ने दो दो विकेट अपने नाम किए लेकिन न्यूजीलैंड तब तक मजबूत बढ़त हासिल कर चुका था।

    पहली पारी में न्यूजीलैंड ने इंग्लैंड के 354 रन के जवाब में 438 रन बनाकर 84 रन की बढ़त बनाई थी। दूसरी पारी में 288 रन जोड़ने के बाद उसने इंग्लैंड के सामने 373 रन का मुश्किल लक्ष्य रखा। अब अंतिम दिन मुकाबला पूरी तरह रोमांचक मोड़ पर पहुंच चुका है। इंग्लैंड को जीत के लिए 270 रन बनाने हैं जबकि न्यूजीलैंड को सीरीज में अहम बढ़त लेने के लिए केवल छह विकेट की जरूरत है।

  • टॉप ऑर्डर फ्लॉप खराब कॉम्बिनेशन और कमजोर बल्लेबाजी टीम इंडिया की हार के पांच बड़े कारण

    टॉप ऑर्डर फ्लॉप खराब कॉम्बिनेशन और कमजोर बल्लेबाजी टीम इंडिया की हार के पांच बड़े कारण


    नई दिल्ली । भारतीय क्रिकेट टीम को आयरलैंड के खिलाफ पहली बार टी20 अंतरराष्ट्रीय सीरीज में हार का सामना करना पड़ा है। बेलफास्ट में खेले गए दूसरे मुकाबले में एक रन की रोमांचक हार के साथ भारत ने दो मैचों की सीरीज 2 0 से गंवा दी। इस हार ने टीम इंडिया की तैयारियों रणनीति और बल्लेबाजी क्रम पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पूरी सीरीज के दौरान भारतीय टीम कई विभागों में उम्मीदों पर खरी नहीं उतर सकी और यही उसकी हार का सबसे बड़ा कारण बना।

    सबसे बड़ी चिंता टीम इंडिया के टॉप ऑर्डर का खराब प्रदर्शन रहा। सलामी बल्लेबाजों और शुरुआती क्रम के बल्लेबाजों ने दोनों मुकाबलों में निराश किया। संजू सैमसन पूरी सीरीज में रन बनाने के लिए संघर्ष करते नजर आए। पहले मैच में वह केवल पांच रन बना सके जबकि दूसरे मुकाबले में बिना खाता खोले पवेलियन लौट गए। अभिषेक शर्मा ने पहले मैच में शानदार 49 रन बनाए लेकिन दूसरे मैच में शून्य पर आउट हो गए। ईशान किशन भी दोनों मैचों में प्रभाव छोड़ने में नाकाम रहे और कुल मिलाकर केवल 13 रन ही बना सके। शुरुआती बल्लेबाजों की नाकामी ने पूरी टीम पर अतिरिक्त दबाव डाल दिया।

    दूसरा बड़ा कारण कप्तान श्रेयस अय्यर का फीका प्रदर्शन रहा। बतौर कप्तान यह उनकी पहली टी20 सीरीज थी और उनसे बड़ी पारी की उम्मीद थी लेकिन उनका बल्ला पूरी तरह शांत रहा। दो मुकाबलों में वह केवल 13 रन बना सके। कप्तान का खराब प्रदर्शन टीम के आत्मविश्वास पर भी असर डालता है और यही इस सीरीज में देखने को मिला।

    भारतीय टीम का मध्यक्रम भी उम्मीदों पर खरा नहीं उतर सका। हार्दिक पांड्या की गैरमौजूदगी साफ महसूस हुई। अक्षर पटेल शिवम दुबे और अन्य बल्लेबाज बड़ी पारियां खेलने में असफल रहे। तिलक वर्मा ने दूसरे मैच में अर्धशतक जरूर लगाया लेकिन उनका स्ट्राइक रेट टी20 क्रिकेट के हिसाब से काफी धीमा रहा। तेजी से रन नहीं बनने के कारण टीम बड़ा स्कोर खड़ा नहीं कर सकी और इसका फायदा आयरलैंड को मिला।

    टीम चयन और प्लेइंग इलेवन का संतुलन भी सवालों के घेरे में रहा। पहले मुकाबले में दो स्पिनरों के साथ उतरने का फैसला परिस्थितियों के अनुकूल नहीं था। वॉशिंगटन सुंदर से केवल एक ओवर गेंदबाजी कराई गई जिसमें उन्होंने 19 रन खर्च किए। वहीं तेज गेंदबाज प्रसिद्ध कृष्णा को मौका देना भी टीम के लिए महंगा साबित हुआ। उन्होंने चार ओवर में बिना विकेट लिए 57 रन लुटा दिए जिससे आयरलैंड को खुलकर खेलने का मौका मिल गया।

    पांचवां बड़ा कारण युवा प्रतिभा वैभव सूर्यवंशी को मौका नहीं देना माना जा रहा है। पहले मैच में बल्लेबाजी के खराब प्रदर्शन के बावजूद टीम प्रबंधन ने दूसरे मुकाबले में भी उन्हें अंतिम एकादश में शामिल नहीं किया। भारत ए के लिए हालिया शानदार प्रदर्शन के बाद उम्मीद थी कि उन्हें अवसर मिलेगा लेकिन ऐसा नहीं हुआ। कई क्रिकेट विशेषज्ञों का मानना है कि वैभव जैसे आक्रामक बल्लेबाज मैच का रुख बदलने की क्षमता रखते थे।

    इस सीरीज ने भारतीय टीम को यह स्पष्ट संदेश दिया है कि केवल प्रतिभा के दम पर लगातार सफलता हासिल नहीं की जा सकती। बेहतर टीम संयोजन स्पष्ट बल्लेबाजी क्रम और परिस्थितियों के अनुसार रणनीति बनाना उतना ही जरूरी है। आगामी बड़े टूर्नामेंटों से पहले टीम प्रबंधन को इन कमियों पर गंभीरता से काम करना होगा ताकि भविष्य में ऐसी निराशाजनक हार से बचा जा सके।

  • यूएस ओपन बैडमिंटन में किदांबी श्रीकांत का सपना टूटा फाइनल में सु ली यांग ने रोका खिताब का इंतजार

    यूएस ओपन बैडमिंटन में किदांबी श्रीकांत का सपना टूटा फाइनल में सु ली यांग ने रोका खिताब का इंतजार


    नई दिल्ली । भारतीय बैडमिंटन स्टार और दुनिया के पूर्व नंबर एक खिलाड़ी किदांबी श्रीकांत का यूएस ओपन बैडमिंटन टूर्नामेंट में खिताब जीतने का सपना एक बार फिर अधूरा रह गया। फुलर्टन में खेले गए रोमांचक फाइनल मुकाबले में उन्हें चीनी ताइपे के युवा खिलाड़ी सु ली यांग के हाथों तीन गेम तक चले संघर्षपूर्ण मुकाबले में हार का सामना करना पड़ा। इस हार के साथ ही श्रीकांत का बीडब्ल्यूएफ वर्ल्ड टूर खिताब जीतने का करीब नौ साल लंबा इंतजार और बढ़ गया।

    33 वर्षीय श्रीकांत ने अपने से नौ साल छोटे प्रतिद्वंद्वी के खिलाफ पूरे मुकाबले में जबरदस्त जुझारूपन दिखाया। एक घंटे नौ मिनट तक चले इस मुकाबले में उन्होंने शानदार वापसी भी की लेकिन निर्णायक गेम में थकान उन पर भारी पड़ गई। अंत में उन्हें 15 21 21 16 और 9 21 से हार स्वीकार करनी पड़ी।

    यह मुकाबला शुरुआत से ही बेहद प्रतिस्पर्धी रहा। पहले गेम में सु ली यांग ने तेज शुरुआत करते हुए शुरुआती बढ़त बना ली। हालांकि श्रीकांत ने शानदार वापसी करते हुए स्कोर बराबर कर दिया लेकिन इसके बाद ताइवानी खिलाड़ी ने लगातार अंक जुटाकर पहला गेम अपने नाम कर लिया। पहले गेम में मिली हार के बावजूद भारतीय खिलाड़ी ने हिम्मत नहीं हारी और दूसरे गेम में बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए मुकाबले में वापसी की।

    दूसरे गेम में दोनों खिलाड़ियों के बीच कांटे की टक्कर देखने को मिली लेकिन मध्यांतर के बाद श्रीकांत ने लगातार अंक बटोरते हुए मजबूत बढ़त बना ली। उन्होंने आक्रामक खेल का प्रदर्शन करते हुए दूसरा गेम 21 16 से जीत लिया और मुकाबले को निर्णायक तीसरे गेम तक पहुंचा दिया। इस जीत के बाद भारतीय प्रशंसकों को उम्मीद थी कि श्रीकांत लंबे समय बाद किसी बड़े अंतरराष्ट्रीय खिताब पर कब्जा जमा लेंगे।

    हालांकि निर्णायक गेम में मुकाबले का रुख पूरी तरह बदल गया। लगातार दो गेम तक चले संघर्ष का असर श्रीकांत की फिटनेस और गति पर साफ दिखाई दिया। दूसरी ओर सु ली यांग ने मौके का पूरा फायदा उठाया और लगातार अंक हासिल करते हुए मुकाबले पर पूरी तरह नियंत्रण बना लिया। उन्होंने तीसरा गेम 21 9 से जीतकर अपने करियर का पहला बीडब्ल्यूएफ वर्ल्ड टूर खिताब अपने नाम कर लिया।

    यह दोनों खिलाड़ियों के बीच तीसरी भिड़ंत थी। इससे पहले दोनों ने एक एक मुकाबला जीता था। हाल ही में थाईलैंड ओपन में भी सु ली यांग ने श्रीकांत को हराया था और यूएस ओपन फाइनल में भी उन्होंने अपनी बढ़त कायम रखी।

    हार के बाद भी श्रीकांत ने सकारात्मक सोच दिखाई। उन्होंने कहा कि उनकी मेहनत सही दिशा में जा रही है और उन्हें अपने खेल पर भरोसा है। उनके अनुसार अब केवल महत्वपूर्ण मौकों पर अहम अंक जीतने की जरूरत है। उन्होंने अपने प्रतिद्वंद्वी की तारीफ करते हुए कहा कि सु ली यांग पिछले कुछ महीनों से शानदार प्रदर्शन कर रहे हैं और फाइनल में भी उन्होंने दबाव वाले पलों का बेहतर इस्तेमाल किया।

    वहीं खिताब जीतने के बाद सु ली यांग अपनी खुशी छिपा नहीं सके। उन्होंने कहा कि उन्हें अभी भी विश्वास नहीं हो रहा कि उन्होंने अपना पहला बीडब्ल्यूएफ वर्ल्ड टूर खिताब जीत लिया है। उन्होंने बताया कि अंतिम गेम में दोनों खिलाड़ी थक चुके थे लेकिन उन्होंने खुद पर भरोसा बनाए रखा और लगातार लड़ते रहने का फैसला किया। उन्होंने कहा कि इस उपलब्धि के लिए उन्होंने लंबे समय तक मेहनत की है और भविष्य में भी कई बड़े खिताब जीतने का लक्ष्य लेकर आगे बढ़ेंगे।

    भले ही श्रीकांत इस बार ट्रॉफी जीतने से चूक गए हों लेकिन पूरे टूर्नामेंट में उनका प्रदर्शन यह संकेत देता है कि वह एक बार फिर शीर्ष स्तर पर वापसी की राह पर हैं। आने वाले टूर्नामेंटों में भारतीय प्रशंसकों को उनसे बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद रहेगी।

  • भारत की हार पर अंजुम चोपड़ा का बड़ा बयान गलत रणनीति बनी बाहर होने की वजह हरमनप्रीत को बताया सबसे बेहतर कप्तान

    भारत की हार पर अंजुम चोपड़ा का बड़ा बयान गलत रणनीति बनी बाहर होने की वजह हरमनप्रीत को बताया सबसे बेहतर कप्तान


    नई दिल्ली । महिला टी20 विश्व कप 2026 में भारतीय टीम का सफर ग्रुप चरण में ही समाप्त हो गया। ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ मिली हार ने करोड़ों भारतीय क्रिकेट प्रेमियों की उम्मीदों को झटका दिया। टीम के बाहर होने के बाद भारत की पूर्व कप्तान अंजुम चोपड़ा ने भारतीय टीम की रणनीति बल्लेबाजी क्रम और टीम संयोजन पर कई गंभीर सवाल उठाए हैं। हालांकि उन्होंने कप्तान हरमनप्रीत कौर का बचाव करते हुए उन्हें मौजूदा समय में भारतीय टीम के लिए सबसे उपयुक्त कप्तान बताया है।

    अंजुम चोपड़ा का मानना है कि ऑस्ट्रेलिया जैसी मजबूत टीम के खिलाफ 170 रन का लक्ष्य पर्याप्त नहीं था। उनके अनुसार यह स्कोर सामान्य परिस्थितियों में अच्छा माना जा सकता है लेकिन विश्व कप जैसे बड़े मुकाबले में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ इससे अधिक आक्रामक बल्लेबाजी की जरूरत थी। उन्होंने कहा कि यदि भारतीय टीम को मुकाबला जीतना था तो कम से कम 180 से 190 रन तक पहुंचने की कोशिश करनी चाहिए थी ताकि गेंदबाजों के पास लक्ष्य बचाने के लिए पर्याप्त अवसर मौजूद रहें।

    उन्होंने यह भी कहा कि केवल एक या दो शुरुआती विकेट लेकर ऑस्ट्रेलिया जैसी टीम को दबाव में नहीं लाया जा सकता। ऐसी मजबूत टीमों के खिलाफ गेंदबाजों को अतिरिक्त रन का सहारा चाहिए होता है। भारतीय बल्लेबाजों ने अच्छी शुरुआत के बावजूद अंतिम ओवरों में अपेक्षित तेजी नहीं दिखाई जिसका असर कुल स्कोर पर साफ दिखाई दिया।

    अंजुम चोपड़ा ने टीम प्रबंधन के बल्लेबाजी क्रम पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि विस्फोटक बल्लेबाज ऋचा घोष को पहले बल्लेबाजी के लिए भेजा जाना चाहिए था। यदि वह 17वें ओवर तक क्रीज पर आ जातीं तो टीम को अंतिम ओवरों में तेज रन बनाने का फायदा मिल सकता था। उनके अनुसार ऋचा को एक ओवर देर से भेजने के कारण भारत को वह फिनिशिंग नहीं मिल सकी जिसकी टीम को जरूरत थी।

    उन्होंने बल्लेबाजी क्रम में लगातार बदलाव को भी हार की बड़ी वजह बताया। अंजुम ने सवाल उठाया कि यदि यास्तिका भाटिया को नंबर तीन बल्लेबाज माना गया था तो इस अहम मुकाबले में उन्हें उसी स्थान पर क्यों नहीं उतारा गया। इसी तरह इंग्लैंड सीरीज में नंबर तीन पर खेलने वाली जेमिमा रोड्रिग्स की भूमिका भी विश्व कप में बदल दी गई। उनका मानना है कि लगातार बदलाव से खिलाड़ी अपनी भूमिका को लेकर पूरी तरह सहज नहीं हो पाते और इसका असर प्रदर्शन पर दिखाई देता है।

    पूर्व कप्तान ने सुझाव दिया कि हरमनप्रीत कौर को नंबर तीन पर बल्लेबाजी करनी चाहिए जबकि ऋचा घोष को नंबर चार पर स्थायी भूमिका दी जानी चाहिए। उनके अनुसार भारतीय टीम की सबसे बड़ी ताकत बल्लेबाजी है जबकि गेंदबाजी अभी भी उतनी मजबूत नहीं मानी जाती। इसलिए टीम को अपनी बल्लेबाजी क्षमता का पूरा फायदा उठाना चाहिए और बड़े लक्ष्य खड़े करने की मानसिकता विकसित करनी होगी।

    अंजुम चोपड़ा ने पांचवें गेंदबाज की कमी को भी भारत की लगातार बनी हुई समस्या बताया। उनके अनुसार यह कमजोरी पूरे टूर्नामेंट में दिखाई दी और ऑस्ट्रेलिया जैसी मजबूत टीम ने इसका पूरा फायदा उठाया।

    हालांकि उन्होंने कप्तान हरमनप्रीत कौर का खुलकर समर्थन किया। अंजुम ने कहा कि मौजूदा समय में भारतीय महिला टीम के पास हरमनप्रीत से बेहतर कप्तानी का विकल्प नहीं है। उन्होंने माना कि टीम को बल्लेबाजी से लेकर गेंदबाजी और रणनीति तक कई क्षेत्रों में सुधार की जरूरत है लेकिन नेतृत्व के मामले में हरमनप्रीत अभी भी सबसे भरोसेमंद विकल्प हैं।

    पूर्व कप्तान ने कहा कि भारतीय टीम को अब अगले टूर्नामेंट की तैयारी तुरंत शुरू करनी चाहिए और ऐसे बल्लेबाजों की पहचान करनी चाहिए जो निडर होकर बड़े शॉट खेल सकें। उनका मानना है कि आधुनिक टी20 क्रिकेट में केवल सम्मानजनक स्कोर नहीं बल्कि मैच जिताने वाले बड़े लक्ष्य बनाने की सोच ही सफलता की कुंजी है।

  • कप्तान श्रेयस अय्यर के नाम दर्ज हुआ बेहद शर्मनाक रिकॉर्ड, आयरलैंड के हाथों क्लीन स्वीप के बाद कप्तानी और बल्लेबाजी पर उठे गंभीर सवाल

    कप्तान श्रेयस अय्यर के नाम दर्ज हुआ बेहद शर्मनाक रिकॉर्ड, आयरलैंड के हाथों क्लीन स्वीप के बाद कप्तानी और बल्लेबाजी पर उठे गंभीर सवाल

    नई दिल्ली। आईसीसी टी20 वर्ल्ड कप का खिताब जीतने के ठीक बाद भारतीय क्रिकेट टीम को एक ऐसा जख्म मिला है, जिसे प्रशंसक लंबे समय तक नहीं भूल पाएंगे। चयनकर्ताओं द्वारा सूर्यकुमार यादव की जगह श्रेयस अय्यर को टीम की कमान सौंपने का फैसला पहले ही दौरे पर बेहद निराशाजनक साबित हुआ है। कप्तानी के अपने पहले विदेशी असाइनमेंट पर गए अय्यर के नेतृत्व में भारतीय टीम को आयरलैंड जैसी कमतर आंकी जाने वाली टीम के खिलाफ दो मैचों की टी20 अंतरराष्ट्रीय सीरीज में 0-2 से क्लीन स्वीप का सामना करना पड़ा है। इस करारी शिकस्त के साथ ही श्रेयस अय्यर के नाम एक बेहद अनचाहा और शर्मनाक रिकॉर्ड दर्ज हो गया है।

    इस संक्षिप्त श्रृंखला के दौरान भारतीय टीम को दोनों ही मुकाबलों में परिस्थितियों के आगे घुटने टेकने पड़े। बेलफास्ट में शुक्रवार को खेले गए पहले मैच में मेजबान आयरलैंड ने भारत को 34 रनों के बड़े अंतर से पटखनी दी थी। इसके बाद रविवार को उसी मैदान पर खेले गए दूसरे बेहद रोमांचक मुकाबले में भी भारतीय टीम लक्ष्य से महज 1 रन दूर रह गई। इन दोनों लगातार पराजयों के कारण श्रेयस अय्यर भारतीय पुरुष क्रिकेट इतिहास में अपनी कप्तानी के शुरुआती दोनों टी20 अंतरराष्ट्रीय मैच हारने वाले महज दूसरे कप्तान बन गए हैं। उनसे पहले जून 2022 में ऋषभ पंत ने दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ घरेलू सीरीज में बतौर कप्तान अपने शुरुआती दो मैच गंवाए थे।

    इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) में तीन अलग-अलग फ्रेंचाइजी को अपनी कप्तानी में फाइनल तक पहुंचाने का गौरव रखने वाले 31 वर्षीय श्रेयस अय्यर के लिए यह सीरीज व्यक्तिगत तौर पर भी किसी बुरे सपने जैसी रही। कप्तानी के दबाव के बीच उनका अपना बल्ला पूरी तरह खामोश नजर आया। पहले टी20 मैच में उन्होंने महज 3 रन बनाए, जबकि दूसरे मुकाबले में चौथे नंबर पर बल्लेबाजी के लिए उतरने के बाद वे सिर्फ 10 रनों का योगदान दे सके। कप्तान के इस लचर प्रदर्शन ने मध्यक्रम को पूरी तरह संकट में डाल दिया, जिसका सीधा असर टीम के नतीजों पर देखने को मिला।

    आयरलैंड के खिलाफ मिली यह शिकस्त ऐतिहासिक रूप से भी भारतीय टीम के लिए एक बड़ा ऐतिहासिक धब्बा बन गई है। पहले मैच में मिली हार अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के किसी भी प्रारूप में आयरलैंड के खिलाफ भारत की पहली पराजय थी। वहीं, दूसरे मैच में मिली एक रन की हार के साथ ही भारत ने इतिहास में पहली बार आयरलैंड के विरुद्ध कोई टी20 सीरीज गंवाई है। इस शर्मनाक प्रदर्शन के कारण भारतीय टीम का पिछले 29 महीनों से चला आ रहा लगातार 16 टी20 अंतरराष्ट्रीय सीरीज जीतने का अजेय रथ और शानदार लय भी पूरी तरह बिखर गई है।

    इस बेहद खराब शुरुआत के बाद अब श्रेयस अय्यर और भारतीय टीम प्रबंधन के सामने साख बचाने की बड़ी चुनौती है। भारतीय पुरुष क्रिकेट टीम अगले सप्ताह इंग्लैंड के दौरे पर रवाना होगी, जहां उसे 5 टी20 अंतरराष्ट्रीय और 3 वनडे मैचों की सीरीज खेलनी है। टी20 सीरीज के लिए चयनकर्ताओं ने उसी स्क्वॉड को बरकरार रखा है और कमान अय्यर के हाथों में ही रहेगी। यह सीरीज 1 जुलाई से चेस्टर-ले-स्ट्रीट में शुरू होने जा रही है। इस बीच घरेलू क्रिकेट के 15 वर्षीय युवा धुरंधर वैभव सूर्यवंशी को प्लेइंग इलेवन में शामिल करने की मांग तेज हो गई है, जो इंग्लैंड दौरे पर अपना अंतरराष्ट्रीय डेब्यू कर सकते हैं।

  • टी20 सीरीज में आयरलैंड के हाथों 0-2 से पिटी भारतीय टीम, निराशाजनक प्रदर्शन के बाद हेड कोच गौतम गंभीर और कप्तान श्रेयस अय्यर निशाने पर

    टी20 सीरीज में आयरलैंड के हाथों 0-2 से पिटी भारतीय टीम, निराशाजनक प्रदर्शन के बाद हेड कोच गौतम गंभीर और कप्तान श्रेयस अय्यर निशाने पर

    नई दिल्ली। भारतीय क्रिकेट टीम को विदेशी सरजमीं पर एक बड़ा झटका लगा है, जहां आयरलैंड के खिलाफ खेली गई दो मैचों की टी20 अंतरराष्ट्रीय सीरीज में उसे 0-2 से क्लीन स्वीप का सामना करना पड़ा है। इस चौंकाने वाली और निराशाजनक हार के बाद वैश्विक क्रिकेट जगत में भारतीय टीम के प्रदर्शन की भारी आलोचना हो रही है। इसी कड़ी में आइसलैंड क्रिकेट ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर एक बेहद तंजिया पोस्ट साझा की है, जिसने भारतीय क्रिकेट प्रशंसकों और प्रबंधन की चोट पर नमक छिड़कने का काम किया है। आइसलैंड क्रिकेट ने सीधे तौर पर भारतीय टीम के मुख्य कोच गौतम गंभीर की कोचिंग क्षमताओं पर निशाना साधा है।

    सोशल मीडिया पर तेजी से प्रसारित हो रहे इस बयान में आइसलैंड क्रिकेट ने व्यंग्यात्मक लहजे में लिखा कि उनकी अपनी कोचिंग टीम में गौतम गंभीर को नियुक्त करने की कोई योजना नहीं है। पोस्ट में आगे लिखा गया कि गंभीर में निश्चित रूप से एक अलग तरह की प्रतिभा है, क्योंकि स्टार खिलाड़ियों से सजी भारतीय टीम को लेकर आयरलैंड जैसी अपेक्षाकृत कमजोर टीम के खिलाफ इस तरह के परिणाम देना वाकई एक असाधारण और विशिष्ट काबिलियत को दर्शाता है। इस तीखे कटाक्ष के बाद क्रिकेट गलियारों में भारतीय टीम के रणनीतिक स्तर और कोचिंग स्टाफ की जवाबदेही को लेकर बहस तेज हो गई है।

    श्रृंखला के घटनाक्रम की बात करें तो बेलफास्ट में खेले गए पहले मुकाबले में भारत को 34 रनों की करारी शिकस्त झेलनी पड़ी थी। इसके बाद रविवार को खेले गए दूसरे और अंतिम मैच में, जो कि बारिश से प्रभावित रहा, आयरलैंड ने सूझबूझ का परिचय देते हुए भारतीय टीम को रोमांचक मोड़ पर महज एक रन से पराजित कर दिया। हालांकि पूरी सीरीज के दौरान भारतीय गेंदबाजों ने अपेक्षाकृत अनुशासित और सराहनीय प्रदर्शन किया, लेकिन बल्लेबाजों के निराशाजनक रवैये ने टीम की लुटिया डुबो दी। दोनों ही मुकाबलों में भारतीय बल्लेबाजी क्रम पूरी तरह ताश के पत्तों की तरह बिखरता नजर आया।

    इस सीरीज में टीम इंडिया की अगुवाई कर रहे कार्यवाहक कप्तान श्रेयस अय्यर और हाल ही में समाप्त हुए टी20 विश्व कप 2026 में ‘प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट’ रहे विकेटकीपर बल्लेबाज संजू सैमसन जैसे स्थापित खिलाड़ी उम्मीदों पर खरे नहीं उतर सके। पूरे दौरे पर इन प्रमुख बल्लेबाजों का बल्ला पूरी तरह खामोश रहा, जिसका खामियाजा टीम को भुगतना पड़ा। इस हार के साथ ही श्रेयस अय्यर भारत के ऐसे दूसरे कप्तान बन गए हैं, जिन्हें अपनी कप्तानी के शुरुआती दोनों टी20 अंतरराष्ट्रीय मैचों में पराजय का स्वाद चखना पड़ा है। इस लचर प्रदर्शन के बाद चयनकर्ताओं और टीम संयोजन पर भी सवाल उठने लगे हैं।

    इस करारी हार के झटके से उबरने के लिए भारतीय टीम के पास बेहद कम समय है, क्योंकि उसके सामने अगली बड़ी चुनौती इंग्लैंड की है। भारतीय दल इसी सप्ताह पांच मैचों की टी20 अंतरराष्ट्रीय श्रृंखला के लिए इंग्लैंड का दौरा करने वाला है। इस दौरे का पहला मुकाबला 1 जुलाई को चेस्टर-ले-स्ट्रीट के रिवरसाइड ग्राउंड पर खेला जाएगा। इसके बाद आगामी मैच क्रमशः 4, 7, 9 और 11 जुलाई को ओल्ड ट्रैफर्ड, नॉटिंघम, ब्रिस्टल और साउथेम्प्टन में आयोजित होने हैं। कप्तान श्रेयस अय्यर और मुख्य कोच गौतम गंभीर के लिए इंग्लैंड का यह दौरा अपनी रणनीतियों को सुधारने और साख बचाने के लिहाज से अत्यंत महत्वपूर्ण होने जा रहा है।