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  • जसपाल राणा के निधन पर राष्ट्र शोकाकुल, राष्ट्रपति मुर्मु से लेकर कई दिग्गज नेताओं ने दी श्रद्धांजलि

    जसपाल राणा के निधन पर राष्ट्र शोकाकुल, राष्ट्रपति मुर्मु से लेकर कई दिग्गज नेताओं ने दी श्रद्धांजलि


    नई दिल्ली। भारतीय निशानेबाजी के दिग्गज खिलाड़ी, प्रख्यात कोच और पद्मश्री सम्मानित जसपाल राणा के निधन से पूरे देश में शोक की लहर दौड़ गई है। खेल जगत की इस बड़ी क्षति पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से लेकर केंद्र और राज्यों के अनेक वरिष्ठ नेताओं ने गहरा दुख व्यक्त करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की है। नेताओं ने अपने संदेशों में जसपाल राणा के खेल जीवन, उनके योगदान और युवा खिलाड़ियों को तैयार करने में निभाई गई उनकी महत्वपूर्ण भूमिका को याद किया।

    जानकारी के अनुसार, जर्मनी के म्युनिख में आयोजित आईएसएसएफ वर्ल्ड कप से भारतीय दल के साथ लौटते समय उनकी तबीयत अचानक बिगड़ गई थी। इसके बाद उन्हें दिल्ली के साकेत स्थित एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां 49 वर्ष की आयु में उनका निधन हो गया। उनके निधन की खबर सामने आते ही खेल जगत और राजनीतिक क्षेत्र में शोक की लहर फैल गई।

    राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने अपने शोक संदेश में कहा कि जसपाल राणा भारतीय खेलों के ऐसे प्रतीक थे जिन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का गौरव बढ़ाया। उन्होंने कहा कि एक खिलाड़ी और मार्गदर्शक के रूप में उनका योगदान सदैव याद रखा जाएगा तथा उनका समर्पण आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करता रहेगा।

    केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने भी गहरा दुख व्यक्त करते हुए कहा कि भारतीय शूटिंग में जसपाल राणा का योगदान अमूल्य है। उन्होंने कहा कि युवा प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने के लिए उनका समर्पण हमेशा याद रखा जाएगा। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने उनके निधन को भारतीय खेल जगत के लिए अपूरणीय क्षति बताते हुए कहा कि उन्होंने अपने शानदार करियर के दौरान देश को विश्व मंच पर गौरवान्वित किया।

    केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि जसपाल राणा ने अपनी प्रतिभा, अनुशासन और समर्पण के बल पर भारत को अनेक गौरवपूर्ण क्षण दिए। उन्होंने कहा कि खिलाड़ी और कोच दोनों रूपों में उनका योगदान भारतीय खेल इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज रहेगा।

    उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी शोक व्यक्त करते हुए कहा कि जसपाल राणा का निधन भारतीय खेल जगत के लिए बड़ी क्षति है। उन्होंने कहा कि वैश्विक स्तर पर भारत को सम्मान दिलाने वाली उनकी उपलब्धियां और युवा खिलाड़ियों के मार्गदर्शन में निभाई गई भूमिका सदैव स्मरणीय रहेगी। उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने भी उन्हें भारतीय निशानेबाजी का गौरव बताते हुए श्रद्धांजलि दी।

    उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने जसपाल राणा को देवभूमि उत्तराखंड का गौरव बताते हुए कहा कि उनका व्यक्तित्व और कृतित्व आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्रोत बना रहेगा। वहीं दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने भी उनके निधन को खेल जगत के लिए बड़ी क्षति करार दिया।

    राजनीतिक दलों के नेताओं ने भी गहरा दुख व्यक्त किया। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि जसपाल राणा भारतीय खेलों की सबसे बड़ी हस्तियों में से एक थे। उन्होंने न केवल देश का नाम विश्वभर में रोशन किया बल्कि नई पीढ़ी के निशानेबाजों को भी तैयार किया। कांग्रेस सांसद और बीसीसीआई उपाध्यक्ष राजीव शुक्ला ने कहा कि भारतीय निशानेबाजी के स्वर्णिम अध्यायों में जसपाल राणा का नाम हमेशा सम्मान के साथ लिया जाएगा।

    जसपाल राणा ने अपने करियर में अनेक अंतरराष्ट्रीय पदक जीतकर भारत को गौरवान्वित किया था। बाद में कोच के रूप में उन्होंने कई युवा खिलाड़ियों को विश्वस्तरीय मंच तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनके निधन से भारतीय खेल जगत ने एक ऐसे मार्गदर्शक को खो दिया है, जिसकी कमी लंबे समय तक महसूस की जाएगी।

  • फीफा वर्ल्ड कप 2026: दक्षिण कोरिया की शानदार शुरुआत, चेकिया को 2-1 से हराकर दर्ज की दमदार जीत

    फीफा वर्ल्ड कप 2026: दक्षिण कोरिया की शानदार शुरुआत, चेकिया को 2-1 से हराकर दर्ज की दमदार जीत


    नई दिल्ली। फीफा वर्ल्ड कप 2026 में दक्षिण कोरिया ने अपने अभियान की शानदार शुरुआत करते हुए चेकिया को 2-1 से हराकर जीत दर्ज की। रोमांच से भरपूर इस मुकाबले में दक्षिण कोरिया ने दूसरे हाफ में एक गोल से पिछड़ने के बावजूद जबरदस्त वापसी की और अंततः मुकाबला अपने नाम कर लिया। इस जीत के साथ कोरियाई टीम ने टूर्नामेंट में अपने इरादे साफ कर दिए हैं।

    मैच की शुरुआत से ही दोनों टीमों ने आक्रामक रुख अपनाया। शुरुआती मिनटों में दक्षिण कोरिया ने गेंद पर बेहतर नियंत्रण रखते हुए चेकिया के डिफेंस पर लगातार दबाव बनाया। मैच के नौवें मिनट में कोरिया को फ्री किक के रूप में शानदार मौका मिला, लेकिन चेकिया के मजबूत रक्षापंक्ति ने उसे नाकाम कर दिया। इसके बाद 11वें मिनट में मिले कॉर्नर का भी दक्षिण कोरिया फायदा नहीं उठा सका।

    पहले हाफ में कोरिया ने कई हमले किए, लेकिन चेकिया का डिफेंस मजबूती से खड़ा रहा। दूसरी ओर चेकिया ने भी कुछ अच्छे मूव बनाए, हालांकि वह भी गोल करने में सफल नहीं हो सकी। दोनों टीमों के बीच कड़ा संघर्ष देखने को मिला और पहले 45 मिनट तक स्कोर 0-0 पर बराबरी पर रहा।

    दूसरे हाफ में चेकिया ने अधिक आक्रामक अंदाज में खेलना शुरू किया। इसका फायदा उसे 59वें मिनट में मिला जब लाडिसलाव क्रेजकी ने शानदार हेडर के जरिए गेंद को जाल में पहुंचाकर अपनी टीम को 1-0 की बढ़त दिला दी। इस गोल के बाद ऐसा लग रहा था कि मुकाबले का रुख चेकिया की ओर झुक सकता है, लेकिन दक्षिण कोरिया ने हार नहीं मानी।

    एक गोल से पीछे होने के बाद कोरियाई खिलाड़ियों ने अपनी गति और आक्रमण को और तेज किया। लगातार प्रयासों का परिणाम 67वें मिनट में मिला, जब हांग इन बियोम ने शानदार गोल दागकर स्कोर 1-1 से बराबर कर दिया। इस गोल ने दक्षिण कोरिया में नया जोश भर दिया और टीम ने जीत के लिए दबाव बनाए रखा।

    बराबरी का गोल मिलने के बाद दक्षिण कोरिया ने आक्रमण जारी रखा। मैच के 80वें मिनट में ओह हियोन ग्यू ने बेहतरीन फिनिशिंग का प्रदर्शन करते हुए टीम को 2-1 की बढ़त दिला दी। यह गोल मैच का निर्णायक क्षण साबित हुआ। इसके बाद चेकिया ने वापसी की भरपूर कोशिश की और कई हमले किए, लेकिन दक्षिण कोरिया के डिफेंस ने कोई गलती नहीं की।

    अंतिम मिनटों में मुकाबला बेहद रोमांचक रहा, लेकिन दक्षिण कोरिया ने संयम बनाए रखा और चेकिया को बराबरी का मौका नहीं दिया। निर्धारित समय समाप्त होने पर स्कोर 2-1 रहा और दक्षिण कोरिया ने फीफा वर्ल्ड कप 2026 में जीत के साथ अपने सफर की शुरुआत की। यह जीत टीम के आत्मविश्वास को बढ़ाने वाली साबित हो सकती है, जबकि चेकिया को अगले मुकाबलों में वापसी के लिए अधिक मजबूत प्रदर्शन करना होगा।

  • जसपाल राणा का निधन: भारतीय शूटिंग के ‘गोल्डन बॉय’ को नम आंखों से विदाई, खिलाड़ी से कोच तक रहा स्वर्णिम सफर

    जसपाल राणा का निधन: भारतीय शूटिंग के ‘गोल्डन बॉय’ को नम आंखों से विदाई, खिलाड़ी से कोच तक रहा स्वर्णिम सफर


    नई दिल्ली। भारतीय निशानेबाजी जगत ने शुक्रवार को अपने सबसे चमकदार सितारों में से एक को खो दिया। पूर्व एशियाई खेल स्वर्ण पदक विजेता, अंतरराष्ट्रीय स्तर के शूटर और प्रतिष्ठित कोच जसपाल राणा का 49 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उनके निधन से न केवल भारतीय शूटिंग समुदाय बल्कि पूरे खेल जगत में शोक की लहर है। दशकों तक अपनी उपलब्धियों और समर्पण से भारतीय खेलों को गौरवान्वित करने वाले जसपाल राणा को भारतीय शूटिंग का ‘गोल्डन बॉय’ कहा जाता था।

    28 जून 1976 को उत्तराखंड के उत्तरकाशी में जन्मे जसपाल राणा का खेल जीवन बेहद प्रेरणादायक रहा। सेना पृष्ठभूमि वाले परिवार में जन्मे राणा को बचपन से ही अनुशासन और खेल भावना का माहौल मिला। उनके पिता नारायण राणा ने ही उन्हें शूटिंग की शुरुआती बारीकियां सिखाईं और वही उनके पहले कोच बने। कम उम्र में ही उनकी प्रतिभा सामने आने लगी थी। मात्र 12 वर्ष की उम्र में उन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनानी शुरू कर दी थी।

    वर्ष 1988 की राष्ट्रीय शूटिंग चैंपियनशिप में रजत पदक जीतकर उन्होंने अपने उज्ज्वल भविष्य की झलक दिखा दी थी। इसके बाद 1994 में इटली में आयोजित जूनियर विश्व शूटिंग चैंपियनशिप में शानदार प्रदर्शन कर उन्होंने अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत का नाम रोशन किया। यही वह दौर था जब दुनिया ने भारतीय शूटिंग के इस उभरते सितारे को गंभीरता से लेना शुरू किया।

    जसपाल राणा ने 1996 के अटलांटा ओलंपिक में भारत का प्रतिनिधित्व किया। हालांकि वह ओलंपिक पदक नहीं जीत सके, लेकिन अन्य अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में उन्होंने अभूतपूर्व सफलता हासिल की। कॉमनवेल्थ खेलों में उनका प्रदर्शन विशेष रूप से उल्लेखनीय रहा। चार कॉमनवेल्थ खेलों में हिस्सा लेते हुए उन्होंने कुल 15 पदक जीते, जिनमें 9 स्वर्ण पदक शामिल थे। वर्ष 2002 के मैनचेस्टर कॉमनवेल्थ खेलों में उन्होंने अकेले छह पदक जीतकर इतिहास रच दिया था।

    एशियाई खेलों में भी उनका दबदबा देखने को मिला। 2006 के दोहा एशियाई खेलों में उन्होंने तीन स्वर्ण और एक रजत पदक जीतकर भारत का गौरव बढ़ाया। इसी दौरान 25 मीटर सेंटर फायर पिस्टल स्पर्धा में 590 अंक हासिल कर उन्होंने विश्व रिकॉर्ड की बराबरी की थी, जो उनकी तकनीकी दक्षता और मानसिक मजबूती का प्रमाण था।

    खिलाड़ी के रूप में शानदार करियर के बाद जसपाल राणा ने कोचिंग की जिम्मेदारी संभाली और भारतीय निशानेबाजी को नई दिशा दी। उन्होंने कई युवा खिलाड़ियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर के लिए तैयार किया। उनकी कोचिंग में भारतीय निशानेबाजों ने विश्व स्तर पर सफलता हासिल की। विशेष रूप से मनु भाकर की उपलब्धियों में उनका योगदान बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। उनकी देखरेख में मनु ने अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में शानदार प्रदर्शन कर भारतीय शूटिंग को नई पहचान दिलाई।

    खेल के प्रति उनके समर्पण और उपलब्धियों को देखते हुए उन्हें अर्जुन पुरस्कार, पद्मश्री और द्रोणाचार्य पुरस्कार जैसे प्रतिष्ठित सम्मानों से नवाजा गया। ये सम्मान उनके बहुआयामी योगदान की गवाही देते हैं।

    जसपाल राणा ने ऐसे समय में भारतीय शूटिंग को लोकप्रिय बनाया, जब यह खेल सीमित दायरे में सिमटा हुआ था। उन्होंने न केवल पदक जीते बल्कि एक पूरी पीढ़ी को प्रेरित भी किया। उनके निधन के साथ भारतीय शूटिंग के एक गौरवशाली अध्याय का अंत जरूर हुआ है, लेकिन उनकी उपलब्धियां और योगदान हमेशा आने वाली पीढ़ियों को प्रेरणा देते रहेंगे।

  • जसपाल राणा के निधन पर देश शोकाकुल, पीएम मोदी और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने जताया गहरा दुख

    जसपाल राणा के निधन पर देश शोकाकुल, पीएम मोदी और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने जताया गहरा दुख


    नई दिल्ली। भारतीय शूटिंग जगत के दिग्गज खिलाड़ी और कोच जसपाल राणा के निधन से पूरे देश में शोक की लहर है। 49 वर्ष की आयु में उनके निधन की खबर सामने आने के बाद खेल जगत, राजनीतिक नेतृत्व और उनके प्रशंसकों ने गहरा दुख व्यक्त किया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और भारतीय राष्ट्रीय राइफल संघ (एनआरएआई) के पदाधिकारियों ने उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए भारतीय खेलों में उनके योगदान को याद किया।

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर शोक संदेश जारी करते हुए कहा कि जसपाल राणा का निधन भारतीय खेल जगत के लिए एक बड़ी क्षति है। प्रधानमंत्री ने लिखा कि राणा ने शूटिंग में अपनी असाधारण उपलब्धियों से देश का गौरव बढ़ाया और एक मार्गदर्शक के रूप में भी नई पीढ़ी के खिलाड़ियों को प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि जसपाल राणा का समर्पण, अनुशासन और खेलों के प्रति प्रतिबद्धता उन्हें हमेशा सम्मान दिलाती रहेगी। प्रधानमंत्री ने शोक संतप्त परिवार, मित्रों और खेल समुदाय के प्रति अपनी संवेदनाएं व्यक्त करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।

    रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी जसपाल राणा के निधन पर गहरा दुख जताया। उन्होंने अपने संदेश में कहा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का नाम रोशन करने वाले इस महान खिलाड़ी का अचानक निधन बेहद दुखद है। राजनाथ सिंह ने कहा कि जसपाल राणा न केवल एक उत्कृष्ट शूटर और कोच थे, बल्कि बेहद सरल, सहज और नेकदिल इंसान भी थे। उन्होंने भारत में शूटिंग को लोकप्रिय बनाने और युवा खिलाड़ियों को इस खेल की ओर आकर्षित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

    रक्षा मंत्री ने अपने संदेश में यह भी कहा कि जसपाल राणा ने विश्व शूटिंग चैंपियनशिप और एशियाई खेलों जैसे बड़े मंचों पर भारत को स्वर्ण पदक दिलाकर देश का मान बढ़ाया। उनके अनुसार, राणा का जाना भारतीय खेल जगत के लिए एक अपूरणीय क्षति है, जिसकी भरपाई आसान नहीं होगी।

    भारतीय राष्ट्रीय राइफल संघ (एनआरएआई) के अध्यक्ष कलिकेश नारायण सिंह देव ने भी उनके निधन पर शोक व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि जसपाल राणा केवल एक चैंपियन खिलाड़ी ही नहीं, बल्कि एक उत्कृष्ट मेंटोर भी थे। उन्होंने कहा कि भारतीय शूटिंग समुदाय को उनकी कमी हमेशा महसूस होगी और उनका योगदान आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करता रहेगा।

    जसपाल राणा भारतीय शूटिंग के सबसे सफल खिलाड़ियों में गिने जाते हैं। उन्होंने अपने करियर के दौरान एशियाई खेलों, कॉमनवेल्थ गेम्स और अन्य अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भारत के लिए कई पदक जीते। खिलाड़ी के रूप में सफलता हासिल करने के बाद उन्होंने कोचिंग में भी उल्लेखनीय योगदान दिया और कई युवा निशानेबाजों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सफलता दिलाई।

    दो बार की ओलंपिक पदक विजेता भारतीय शूटर मनु भाकर सहित कई शीर्ष खिलाड़ियों के करियर को संवारने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही। वर्तमान में वह भारतीय पिस्टल निशानेबाजों के हाई-परफॉर्मेंस कोच के रूप में कार्यरत थे और भारतीय शूटिंग टीम को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में जुटे हुए थे।

    रिपोर्ट्स के अनुसार, हाल ही में जर्मनी के म्यूनिख में आयोजित आईएसएसएफ वर्ल्ड कप से लौटते समय उनकी तबीयत बिगड़ गई थी, जिसके बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उनके निधन से भारतीय खेल जगत ने एक ऐसे व्यक्तित्व को खो दिया है, जिसने अपने प्रदर्शन, नेतृत्व और मार्गदर्शन से भारतीय शूटिंग को वैश्विक पहचान दिलाने में अहम भूमिका निभाई।

  • पूर्व भारतीय शूटर और द्रोणाचार्य अवॉर्डी जसपाल राणा का निधन, खेल जगत में शोक की लहर

    पूर्व भारतीय शूटर और द्रोणाचार्य अवॉर्डी जसपाल राणा का निधन, खेल जगत में शोक की लहर


    नई दिल्ली। भारतीय शूटिंग जगत को शुक्रवार को उस समय बड़ा झटका लगा, जब पूर्व अंतरराष्ट्रीय निशानेबाज और प्रतिष्ठित कोच जसपाल राणा के निधन की खबर सामने आई। 49 वर्ष की उम्र में उनके निधन से खेल जगत में शोक की लहर दौड़ गई है। जसपाल राणा न केवल भारत के सबसे सफल निशानेबाजों में शामिल थे, बल्कि उन्होंने कोच के रूप में भी भारतीय शूटिंग को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

    रिपोर्ट्स के अनुसार, जसपाल राणा हाल ही में जर्मनी के म्यूनिख में आयोजित आईएसएसएफ वर्ल्ड कप से लौट रहे थे। यात्रा के दौरान उनकी तबीयत अचानक बिगड़ गई, जिसके बाद उन्हें दिल्ली के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया। हालांकि चिकित्सकों के प्रयासों के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका। उनके निधन की खबर सामने आते ही खेल जगत, खिलाड़ियों और प्रशंसकों के बीच शोक की भावना फैल गई।

    जसपाल राणा भारतीय शूटिंग के उन चुनिंदा खिलाड़ियों में रहे, जिन्होंने अंतरराष्ट्रीय मंच पर देश का नाम रोशन किया। उन्होंने एशियाई खेलों, कॉमनवेल्थ गेम्स और एशियाई चैंपियनशिप में कई पदक जीतकर भारतीय निशानेबाजी को नई पहचान दिलाई। अपने करियर के दौरान उन्होंने चार कॉमनवेल्थ खेलों—1994, 1998, 2002 और 2006—में भारत का प्रतिनिधित्व किया और कुल 15 पदक अपने नाम किए। इनमें 9 स्वर्ण, 4 रजत और 2 कांस्य पदक शामिल रहे। इसके अलावा एशियाई खेलों में भी उन्होंने शानदार प्रदर्शन करते हुए देश को कई महत्वपूर्ण पदक दिलाए।

    खिलाड़ी के रूप में सफलता हासिल करने के बाद जसपाल राणा ने कोचिंग की जिम्मेदारी संभाली और नई पीढ़ी के खिलाड़ियों को तैयार करने में जुट गए। भारतीय राष्ट्रीय राइफल संघ (एनआरएआई) ने उन्हें 25 मीटर पिस्टल स्पर्धा के लिए हाई परफॉर्मेंस कोच नियुक्त किया था। उनकी कोचिंग शैली अनुशासन, तकनीकी दक्षता और कड़े प्रशिक्षण के लिए जानी जाती थी। उनके मार्गदर्शन में कई युवा निशानेबाजों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सफलता हासिल की।

    भारतीय स्टार शूटर मनु भाकर की सफलता में भी जसपाल राणा की भूमिका को बेहद अहम माना जाता है। उनकी देखरेख में मनु ने अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में उल्लेखनीय प्रदर्शन किया और भारतीय शूटिंग को नई पहचान दिलाई। बतौर कोच उनके योगदान को देखते हुए भारत सरकार ने वर्ष 2020 में उन्हें प्रतिष्ठित द्रोणाचार्य पुरस्कार से सम्मानित किया था।

    हाल के वर्षों में भी जसपाल राणा भारतीय शूटिंग टीम के साथ सक्रिय रूप से जुड़े हुए थे। म्यूनिख में आयोजित आईएसएसएफ वर्ल्ड कप में भारतीय पिस्टल टीम ने उनके मार्गदर्शन में दो स्वर्ण और दो रजत पदक जीतकर शानदार प्रदर्शन किया था। यह उपलब्धि उनकी कोचिंग क्षमता और खेल के प्रति समर्पण को दर्शाती है।

    भारतीय राष्ट्रीय राइफल संघ (एनआरएआई) के अध्यक्ष कलिकेश नारायण सिंह देव ने उनके निधन पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए कहा कि जसपाल राणा केवल एक महान खिलाड़ी ही नहीं, बल्कि उत्कृष्ट मार्गदर्शक और प्रेरणास्रोत भी थे। उनका योगदान हमेशा भारतीय खेल इतिहास में याद रखा जाएगा।

    जसपाल राणा का निधन भारतीय शूटिंग समुदाय के लिए अपूरणीय क्षति माना जा रहा है। उन्होंने अपने समर्पण, उपलब्धियों और मार्गदर्शन से भारतीय निशानेबाजी को नई दिशा दी। आने वाली पीढ़ियां उन्हें एक महान खिलाड़ी, सफल कोच और खेल के सच्चे दूत के रूप में हमेशा याद रखेंगी।

  • शाई होप की कप्तानी पारी से वेस्टइंडीज की शानदार जीत, पहले टी20 में श्रीलंका को 7 विकेट से हराया

    शाई होप की कप्तानी पारी से वेस्टइंडीज की शानदार जीत, पहले टी20 में श्रीलंका को 7 विकेट से हराया


    नई दिल्ली।  कप्तान शाई होप की शानदार अर्धशतकीय पारी और गेंदबाजों के दमदार प्रदर्शन की बदौलत वेस्टइंडीज ने पहले टी20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबले में श्रीलंका को 7 विकेट से हराकर तीन मैचों की सीरीज का विजयी आगाज किया। किंग्स्टन के ऐतिहासिक सबीना पार्क मैदान पर खेले गए मुकाबले में मेजबान टीम ने 148 रनों का लक्ष्य 19.2 ओवर में केवल तीन विकेट खोकर हासिल कर लिया।

    लक्ष्य का पीछा करने उतरी वेस्टइंडीज की शुरुआत बेहद आक्रामक रही। कप्तान शाई होप और ब्रैंडन किंग ने पहले विकेट के लिए तेजतर्रार साझेदारी करते हुए टीम को मजबूत आधार प्रदान किया। दोनों बल्लेबाजों ने महज 6.2 ओवर में 67 रन जोड़कर श्रीलंकाई गेंदबाजों पर दबाव बना दिया। ब्रैंडन किंग ने 22 गेंदों में 37 रन की विस्फोटक पारी खेली, जिसमें दो चौके और तीन छक्के शामिल रहे।

    किंग के आउट होने के बाद शिमरोन हेटमायर ने भी तेज शुरुआत की और 9 गेंदों में 17 रन बनाए। हालांकि वह अपनी पारी को बड़ी पारी में नहीं बदल सके और वानिंदु हसरंगा का शिकार बन गए। इसके बावजूद वेस्टइंडीज की रन गति पर कोई असर नहीं पड़ा।

    कप्तान शाई होप ने जिम्मेदारी संभालते हुए एक छोर पर डटे रहे और शानदार बल्लेबाजी का प्रदर्शन किया। उन्होंने 54 गेंदों में नाबाद 65 रन बनाए, जिसमें पांच चौके और दो छक्के शामिल थे। होप ने संयम और आक्रामकता का बेहतरीन संतुलन दिखाते हुए टीम को जीत की मंजिल तक पहुंचाया। रोस्टन चेज ने 16 रन का योगदान दिया, जबकि रोवमैन पॉवेल 10 रन बनाकर नाबाद लौटे।

    श्रीलंका की ओर से गेंदबाजी में वानिंदु हसरंगा सबसे सफल गेंदबाज रहे। उन्होंने दो महत्वपूर्ण विकेट हासिल किए, लेकिन अन्य गेंदबाज वेस्टइंडीज के बल्लेबाजों पर प्रभावी दबाव बनाने में सफल नहीं हो सके।

    इससे पहले टॉस जीतकर बल्लेबाजी करने उतरी श्रीलंका की टीम निर्धारित 20 ओवर में 9 विकेट खोकर 147 रन ही बना सकी। टीम को पथुम निसांका और कुसल मेंडिस ने अच्छी शुरुआत दिलाई। दोनों ने पहले विकेट के लिए 41 रन जोड़े। निसांका 18 रन बनाकर आउट हुए, जबकि कुसल मेंडिस ने 23 गेंदों में 36 रन की उपयोगी पारी खेली।

    मध्यक्रम में लगातार विकेट गिरने से श्रीलंका की पारी लड़खड़ा गई। लसिथ क्रुस्पुल्ले बिना खाता खोले पवेलियन लौट गए, जबकि पवन रत्नायके केवल चार रन ही बना सके। ऐसे कठिन समय में कामिंदु मेंडिस ने शानदार संघर्ष दिखाया और 39 गेंदों में 51 रन की महत्वपूर्ण पारी खेली। उन्होंने अपनी पारी में चार चौके और दो छक्के लगाए। दासुन शनाका ने भी 22 रन का योगदान देकर टीम को सम्मानजनक स्कोर तक पहुंचाने में मदद की।

    वेस्टइंडीज की गेंदबाजी में जेसन होल्डर और शेमार जोसेफ ने अहम भूमिका निभाई। होल्डर ने चार ओवर में केवल 18 रन देकर तीन विकेट झटके, जबकि जोसेफ ने भी तीन विकेट हासिल कर श्रीलंका के बल्लेबाजी क्रम को झकझोर दिया। रोस्टन चेज ने भी एक विकेट अपने नाम किया।

    इस जीत के साथ वेस्टइंडीज ने तीन मैचों की टी20 श्रृंखला में 1-0 की बढ़त बना ली है। अब टीम की नजर अगले मुकाबले में जीत दर्ज कर सीरीज पर पकड़ मजबूत करने पर होगी, जबकि श्रीलंका वापसी के इरादे से मैदान में उतरेगा।

  • गिल्बर्टो मोरा ने रचा इतिहास, फीफा वर्ल्ड कप में मेक्सिको के सबसे युवा खिलाड़ी बने

    गिल्बर्टो मोरा ने रचा इतिहास, फीफा वर्ल्ड कप में मेक्सिको के सबसे युवा खिलाड़ी बने


    नई दिल्ली। फीफा वर्ल्ड कप 2026 के उद्घाटन मुकाबलों के बीच मेक्सिको को एक नया फुटबॉल सितारा मिल गया है। महज 17 साल की उम्र में गिल्बर्टो मोरा ने मैदान पर कदम रखते ही इतिहास रच दिया। वह फीफा वर्ल्ड कप में मेक्सिको का प्रतिनिधित्व करने वाले सबसे कम उम्र के खिलाड़ी बन गए हैं। इस उपलब्धि ने उन्हें न केवल देश के फुटबॉल इतिहास में विशेष स्थान दिलाया है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल जगत का भी ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया है।

    मेक्सिको सिटी स्टेडियम में खेले गए मुकाबले के दौरान 65वें मिनट में जब कोच ने मोरा को मैदान पर उतारने का फैसला किया, तब दर्शकों ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया। स्टेडियम तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। दर्शकों के बीच मौजूद मशहूर बॉक्सिंग स्टार कैनेलो अल्वारेज भी इस ऐतिहासिक पल के साक्षी बने और उन्होंने युवा खिलाड़ी का उत्साहवर्धन किया।

    17 साल और 240 दिन की उम्र में वर्ल्ड कप में उतरकर मोरा ने एक बड़ा रिकॉर्ड अपने नाम किया। वह फीफा विश्व कप के इतिहास में खेलने वाले छठे सबसे कम उम्र के फुटबॉलर बन गए हैं। उनसे पहले इस सूची में ब्राजील के महान फुटबॉलर पेले, कैमरून के सैमुअल इटो, उत्तरी आयरलैंड के नॉर्मन व्हाइटसाइड, नाइजीरिया के फेमी ओपाबुनमी और कैमरून के सॉलोमन ओलेम्बे जैसे दिग्गज खिलाड़ियों के नाम दर्ज हैं।

    दक्षिणी मेक्सिको के टक्सटला गुटिरेज में जन्मे गिल्बर्टो मोरा का सफर बेहद प्रेरणादायक रहा है। तिजुआना में पले-बढ़े इस खिलाड़ी ने 16 वर्ष की उम्र पूरी होने से ठीक पहले पेशेवर फुटबॉल में पदार्पण किया था। कम उम्र में ही उन्होंने अपने कौशल, खेल समझ और आत्मविश्वास से कोचों और विशेषज्ञों को प्रभावित कर दिया था।

    मोरा ने 2025 में आयोजित फीफा अंडर-20 विश्व कप में भी शानदार प्रदर्शन किया था। उस प्रतियोगिता में मेक्सिको की टीम क्वार्टर फाइनल तक पहुंची थी और मोरा ने अपनी उम्र से कहीं अधिक परिपक्व खेल का परिचय दिया था। उनकी तकनीकी क्षमता और खेल को नियंत्रित करने की कला ने उन्हें युवा प्रतिभाओं की सूची में सबसे आगे ला खड़ा किया।

    मेक्सिको की सीनियर राष्ट्रीय टीम में उनका पदार्पण 2025 के कॉनकाकाफ गोल्ड कप के दौरान हुआ। मुख्य कोच जेवियर एगुइरे ने उन पर भरोसा जताया और युवा खिलाड़ी ने उस विश्वास को सही साबित किया। सऊदी अरब के खिलाफ क्वार्टर फाइनल मुकाबले में उन्होंने पहली बार सीनियर टीम की जर्सी पहनी और सबसे कम उम्र में राष्ट्रीय टीम का प्रतिनिधित्व करने का रिकॉर्ड भी अपने नाम किया। इसके बाद सेमीफाइनल में उन्होंने राउल जिमेनेज के गोल में अहम भूमिका निभाकर अपनी उपयोगिता साबित की।

    गिल्बर्टो मोरा को उनकी बेहतरीन खेल समझ, दबाव में संयम बनाए रखने की क्षमता और रचनात्मक पासिंग के लिए जाना जाता है। मैदान पर उनकी मौजूदगी विपक्षी टीम के लिए चुनौती बनती है। विशेषज्ञों का मानना है कि वह आने वाले वर्षों में मेक्सिको फुटबॉल की सबसे बड़ी उम्मीदों में से एक साबित हो सकते हैं। फीफा वर्ल्ड कप 2026 में बना यह रिकॉर्ड उनके उज्ज्वल भविष्य की ओर एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

  • फीफा वर्ल्ड कप 2026 में मेक्सिको की शानदार शुरुआत, साउथ अफ्रीका को 2-0 से रौंदा

    फीफा वर्ल्ड कप 2026 में मेक्सिको की शानदार शुरुआत, साउथ अफ्रीका को 2-0 से रौंदा


    नई दिल्ली। फीफा वर्ल्ड कप 2026 की शुरुआत मेक्सिको के लिए बेहद यादगार रही। घरेलू सरजमीं पर खेले गए टूर्नामेंट के उद्घाटन मुकाबले में मेक्सिको ने शानदार प्रदर्शन करते हुए साउथ अफ्रीका को 2-0 से शिकस्त दी। एज्टेका स्टेडियम में हजारों दर्शकों की मौजूदगी में मेक्सिकन टीम ने शुरुआत से ही मुकाबले पर अपना दबदबा कायम रखा और पूरे मैच में विपक्षी टीम को खुलकर खेलने का मौका नहीं दिया।

    मुकाबले की शुरुआत से ही मेक्सिको ने आक्रामक खेल का प्रदर्शन किया। गेंद पर नियंत्रण रखने के साथ-साथ टीम ने लगातार साउथ अफ्रीका के डिफेंस पर दबाव बनाया। इसी दबाव का परिणाम पहले हाफ में देखने को मिला, जब जूलियन क्विनोनेस ने शानदार गोल कर अपनी टीम को बढ़त दिलाई। यह फीफा वर्ल्ड कप 2026 का पहला गोल भी था, जिससे क्विनोनेस ने इतिहास में अपना नाम दर्ज करा लिया। उनके गोल के साथ ही स्टेडियम में मौजूद प्रशंसकों के बीच जबरदस्त उत्साह देखने को मिला।

    क्विनोनेस पूरे मुकाबले में बेहतरीन फॉर्म में नजर आए। उनकी गति, मूवमेंट और आक्रामकता ने साउथ अफ्रीका के रक्षापंक्ति को लगातार परेशान किया। पहले हाफ में उनके पास एक और गोल करने का अवसर भी आया, लेकिन साउथ अफ्रीकी डिफेंडरों ने किसी तरह खतरे को टाल दिया। पहले 45 मिनट के खेल के बाद मेक्सिको 1-0 की बढ़त के साथ हाफ टाइम तक पहुंचा।

    दूसरे हाफ की शुरुआत साउथ अफ्रीका के लिए निराशाजनक रही। मेक्सिको के ब्रायन गुटिरेज को गोल की ओर बढ़ने से रोकने के प्रयास में याया सिथोल ने फाउल किया, जिसके बाद रेफरी ने उन्हें सीधे रेड कार्ड दिखा दिया। इस फैसले के बाद साउथ अफ्रीका को शेष मुकाबला 10 खिलाड़ियों के साथ खेलना पड़ा।

    संख्या बल में बढ़त मिलने के बाद मेक्सिको ने अपना हमला और तेज कर दिया। इसका फायदा टीम को जल्द ही मिला जब अनुभवी स्ट्राइकर राउल जिमेनेज ने शानदार फिनिश के साथ गेंद को जाल में पहुंचाकर स्कोर 2-0 कर दिया। जिमेनेज के इस गोल ने मेक्सिको की जीत लगभग सुनिश्चित कर दी और घरेलू दर्शकों का उत्साह चरम पर पहुंच गया।

    साउथ अफ्रीका की परेशानियां यहीं समाप्त नहीं हुईं। टीम के खिलाड़ी थेम्बा जवाने को हिंसक व्यवहार के कारण रेड कार्ड दिखाया गया, जिसके बाद टीम केवल नौ खिलाड़ियों के साथ मैदान पर रह गई। दो खिलाड़ियों की कमी के कारण साउथ अफ्रीका के लिए मुकाबले में वापसी करना लगभग असंभव हो गया।

    हालांकि मैच के अंतिम चरण में मेक्सिको को भी एक झटका लगा, जब डिफेंडर सीजर मोंटेस को लापरवाह चुनौती के लिए रेड कार्ड दिखाया गया। इसके बावजूद मैच के परिणाम पर कोई असर नहीं पड़ा और मेक्सिको ने 2-0 की प्रभावशाली जीत के साथ टूर्नामेंट में अपने अभियान का शानदार आगाज किया। जूलियन क्विनोनेस और राउल जिमेनेज इस जीत के सबसे बड़े नायक साबित हुए, जिनके दमदार प्रदर्शन ने मेक्सिको को शुरुआती बढ़त दिलाने के साथ जीत की राह भी आसान बनाई।

  • बेलफास्ट हिंसा से भारत के आयरलैंड दौरे पर संकट, वैभव सूर्यवंशी के डेब्यू पर भी मंडराया खतरा

    बेलफास्ट हिंसा से भारत के आयरलैंड दौरे पर संकट, वैभव सूर्यवंशी के डेब्यू पर भी मंडराया खतरा


    नई दिल्ली। भारत और आयरलैंड के बीच इस महीने होने वाली टी20 सीरीज पर अनिश्चितता के बादल छा गए हैं। उत्तरी आयरलैंड की राजधानी बेलफास्ट और आसपास के इलाकों में हाल ही में भड़की हिंसा ने सुरक्षा संबंधी चिंताओं को बढ़ा दिया है, जिसके चलते क्रिकेट आयरलैंड और भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। फिलहाल सीरीज को लेकर कोई अंतिम फैसला नहीं लिया गया है, लेकिन मौजूदा हालात ने खिलाड़ियों, अधिकारियों और प्रशंसकों की चिंता बढ़ा दी है।

    भारतीय टीम को अफगानिस्तान के खिलाफ घरेलू श्रृंखला समाप्त करने के बाद आयरलैंड दौरे पर जाना है, जहां उसे दो मैचों की टी20 सीरीज खेलनी है। इसके बाद टीम इंग्लैंड दौरे के लिए रवाना होगी। ऐसे में आयरलैंड दौरा भारतीय टीम के कार्यक्रम का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है। हालांकि बेलफास्ट में उत्पन्न सुरक्षा संकट ने इस पूरे कार्यक्रम को प्रभावित करने की आशंका पैदा कर दी है।

    उत्तरी आयरलैंड में हालात उस समय बिगड़ गए जब एक चाकूबाजी की घटना के बाद सामाजिक और नस्ली तनाव बढ़ गया। विभिन्न मीडिया रिपोर्टों के अनुसार घटना के बाद कई क्षेत्रों में हिंसक प्रदर्शन शुरू हो गए। प्रदर्शनकारियों द्वारा वाहनों में आग लगाने, दुकानों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को नुकसान पहुंचाने तथा सार्वजनिक संपत्तियों को निशाना बनाने की खबरें सामने आईं। इसके बाद सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हो गईं और कई गतिविधियों पर असर पड़ा।

    इसी क्रम में लिस्बर्न में आयोजित होने वाला इंटर-प्रोविंशियल टी20 फेस्टिवल भी रद्द कर दिया गया। क्रिकेट आयरलैंड ने एक आधिकारिक बयान जारी कर कहा कि वह प्रभावित क्षेत्रों की स्थिति पर लगातार नजर रखे हुए है। बोर्ड ने स्पष्ट किया कि खिलाड़ियों, कोचों, मैच अधिकारियों और दर्शकों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। साथ ही यह भी कहा गया कि आयरिश सीनियर कप और नेशनल कप के मैचों को लेकर अगले कुछ दिनों में स्थिति की समीक्षा के बाद फैसला लिया जाएगा।

    क्रिकेट आयरलैंड का कहना है कि वह स्थानीय प्रशासन और संबंधित एजेंसियों के साथ लगातार संपर्क में है और जैसे-जैसे नई जानकारी सामने आएगी, उसके अनुसार निर्णय लिया जाएगा। इस बयान से साफ है कि बोर्ड फिलहाल कोई जोखिम लेने के मूड में नहीं है।

    दूसरी ओर, बीसीसीआई भी हालात पर करीबी नजर रखे हुए है। रिपोर्टों के अनुसार भारतीय बोर्ड ने सुरक्षा से जुड़े हर पहलू की समीक्षा शुरू कर दी है। बीसीसीआई के सूत्रों का कहना है कि मैचों के आयोजन स्थल को लेकर अंतिम फैसला क्रिकेट आयरलैंड को करना है। यदि आयरलैंड बोर्ड किसी बदलाव का प्रस्ताव रखता है तो भारतीय बोर्ड उस पर विचार करेगा।

    इस अनिश्चितता का असर भारतीय क्रिकेट के उभरते सितारे वैभव सूर्यवंशी पर भी पड़ सकता है। माना जा रहा है कि आयरलैंड दौरे पर उन्हें अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में पदार्पण का मौका मिल सकता था। यदि सीरीज स्थगित होती है, रद्द होती है या कार्यक्रम में बड़ा बदलाव किया जाता है, तो उनके डेब्यू का इंतजार और लंबा हो सकता है।

    हालांकि अभी तक किसी भी बोर्ड ने सीरीज को रद्द करने या स्थानांतरित करने की आधिकारिक घोषणा नहीं की है। दोनों क्रिकेट बोर्ड स्थिति का मूल्यांकन कर रहे हैं और सुरक्षा एजेंसियों की सलाह का इंतजार कर रहे हैं। ऐसे में क्रिकेट प्रेमियों की नजरें अब आने वाले दिनों पर टिकी हैं, जब इस महत्वपूर्ण टी20 श्रृंखला के भविष्य को लेकर अंतिम फैसला सामने आ सकता है। फिलहाल इतना तय है कि खिलाड़ियों की सुरक्षा सर्वोपरि रहेगी और उसी के आधार पर आगे की रणनीति तय की जाएगी।

  • श्रीलंका दौरे के लिए घोषित हुई जूनियर टीम इंडिया, विकेटकीपर-बल्लेबाज अन्वय द्रविड़ को मिली जगह

    श्रीलंका दौरे के लिए घोषित हुई जूनियर टीम इंडिया, विकेटकीपर-बल्लेबाज अन्वय द्रविड़ को मिली जगह

    नई दिल्ली ।  भारतीय क्रिकेट के इतिहास में ‘द वॉल’ के नाम से मशहूर पूर्व महान कप्तान राहुल द्रविड़ के परिवार से एक और प्रतिभावान खिलाड़ी ने राष्ट्रीय स्तर पर अपनी दस्तक दे दी है। भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) की जूनियर चयन समिति ने अगले महीने से शुरू होने वाले श्रीलंका दौरे के लिए भारत की पुरुष अंडर-19 टीम का आधिकारिक तौर पर एलान कर दिया है। इस घोषित टीम में राहुल द्रविड़ के छोटे बेटे अन्वय द्रविड़ को पहली बार भारतीय अंडर-19 वनडे टीम में शामिल किया गया है। 17 वर्षीय युवा विकेटकीपर-बल्लेबाज को घरेलू क्रिकेट के आयु वर्ग में लगातार बेहतरीन खेल दिखाने का यह सबसे बड़ा पुरस्कार मिला है।

    शरत श्रीधरन की अगुवाई वाली जूनियर राष्ट्रीय चयन समिति ने श्रीलंका के खिलाफ होने वाली तीन वनडे मैचों की सीरीज और दो मल्टी-डे मुकाबलों के लिए दो अलग-अलग टीमों का चयन किया है। आगामी दौरा 4 जुलाई 2026 से श्रीलंका के हंबनटोटा मैदान पर शुरू होने जा रहा है। मध्य प्रदेश क्रिकेट संघ से जुड़े होनहार खिलाड़ी यशवर्धन सिंह चौहान को चयनकर्ताओं ने इस महत्वपूर्ण दौरे के लिए वनडे टीम की कप्तानी सौंपकर उन पर बड़ा भरोसा जताया है, जबकि लक्ष्य रायचंदानी को टीम का उपकप्तान नियुक्त किया गया है। राष्ट्रीय चयनकर्ताओं की नजरें इस दौरे के माध्यम से युवा खिलाड़ियों की क्षमता को परखने पर टिकी हैं।

    अन्वय द्रविड़ को मुख्य रूप से 15 सदस्यीय वनडे टीम में बतौर विकेटकीपर-बल्लेबाज शामिल किया गया है, जहां उनके साथ रजत बघेल दूसरे विकेटकीपर के विकल्प के रूप में मौजूद रहेंगे। अन्वय के बड़े भाई समित द्रविड़ भी कर्नाटक की अंडर-19 टीम की तरफ से घरेलू क्रिकेट खेल चुके हैं, लेकिन राष्ट्रीय स्तर पर जूनियर टीम इंडिया की नीली जर्सी पहनने का मौका पाने वाले अन्वय अपने परिवार के पहले युवा सदस्य बन गए हैं। खेल विशेषज्ञों का मानना है कि तकनीकी रूप से सक्षम इस युवा खिलाड़ी में अपने पिता की तरह लंबी और धैर्यपूर्ण पारियां खेलने की अद्भुत क्षमता मौजूद है।

    घरेलू स्तर पर अन्वय द्रविड़ के हालिया आंकड़ों पर नजर डालें तो वे लगातार चयनकर्ताओं के रडार पर बने हुए थे। हाल ही में आयोजित हुई वीनू मांकड़ ट्रॉफी में उन्होंने कर्नाटक अंडर-19 टीम की कप्तानी की जिम्मेदारी संभालते हुए टीम को क्वार्टर फाइनल तक पहुंचाने में मुख्य भूमिका अदा की थी। इस प्रतिष्ठित टूर्नामेंट की छह पारियों में शानदार बल्लेबाजी करते हुए उन्होंने 220 रन बनाए थे। टूर्नामेंट के दौरान हिमाचल प्रदेश के खिलाफ एक बेहद दबाव वाले मैच की दूसरी पारी में उन्होंने नाबाद 82 रनों की मैच जिताऊ पारी खेली थी, जिसने राष्ट्रीय चयनकर्ताओं का ध्यान अपनी ओर मजबूती से आकर्षित किया था। इससे पूर्व वे अंडर-16 विजय मर्चेंट ट्रॉफी में भी शानदार शतक जमा चुके हैं।

    भारतीय क्रिकेट बोर्ड के राष्ट्रीय चयनकर्ता इस आगामी श्रीलंका दौरे को वर्ष 2028 में आयोजित होने वाले अंडर-19 विश्व कप की तैयारियों के शुरुआती रोडमैप के रूप में देख रहे हैं। चूंकि अन्वय द्रविड़ की उम्र वर्तमान में केवल 17 वर्ष है, इसलिए वे दो साल बाद होने वाले अगले आईसीसी अंडर-19 विश्व कप में खेलने के लिए पूरी तरह पात्र रहेंगे। ऐसे में श्रीलंका की चुनौतीपूर्ण पिचों और उपमहाद्वीपीय परिस्थितियों में मिलने वाला यह अंतर्राष्ट्रीय अनुभव उनके क्रिकेट कौशल को और अधिक निखारने में बेहद गेम-चेंजर साबित हो सकता है। भारतीय जूनियर टीम जून के अंतिम सप्ताह में पड़ोसी देश श्रीलंका के लिए उड़ान भरेगी।

    प्रतियोगिता के तय कार्यक्रम के अनुसार, भारत और श्रीलंका के बीच पहला वनडे मैच 4 जुलाई को हंबनटोटा में खेला जाएगा, जिसके बाद दूसरा और तीसरा वनडे क्रमशः 6 और 9 जुलाई को इसी मैदान पर आयोजित होगा। सीमित ओवरों की यह सीरीज समाप्त होने के बाद दोनों देशों के बीच गॉल और कोलंबो के ऐतिहासिक मैदानों पर चार दिवसीय मल्टी-डे मैच खेले जाएंगे। भारतीय क्रिकेट के फैंस के साथ-साथ तमाम विश्लेषकों की निगाहें अब यशवर्धन सिंह चौहान की कप्तानी और विकेट के पीछे तथा आगे अन्वय द्रविड़ के प्रदर्शन पर टिकी रहने वाली हैं।