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  • अपमान किसी भी कीमत पर मंजूर नहीं', सोशल मीडिया पर छवि धूमिल करने के खिलाफ थाने पहुंचे पूर्व कप्तान सौरव गांगुली

    अपमान किसी भी कीमत पर मंजूर नहीं', सोशल मीडिया पर छवि धूमिल करने के खिलाफ थाने पहुंचे पूर्व कप्तान सौरव गांगुली

    नई दिल्ली । भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान और भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) के पूर्व अध्यक्ष सौरव गांगुली ने अपनी सामाजिक व पेशेवर प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाए जाने के खिलाफ सख्त कानूनी रुख अख्तियार कर लिया है। सोशल मीडिया पर लगातार उनके खिलाफ की जा रही अपमानजनक और भ्रामक टिप्पणियों से आहत होकर पूर्व दिग्गज क्रिकेटर ने पुलिस का दरवाजा खटखटाया है। सौरव गांगुली ने कोलकाता के ठाकुरपुकुर थाने में इस संबंध में एक औपचारिक लिखित शिकायत दर्ज कराई है। अपनी शिकायत में उन्होंने स्पष्ट तौर पर आरोप लगाया है कि कुछ असामाजिक तत्वों द्वारा इंटरनेट मीडिया पर उनके खिलाफ बेहद आपत्तिजनक, भ्रामक और मानहानिकारक कंटेंट फैलाकर आम जनता के बीच उनकी साफ-सुथरी साख को धूमिल करने की गहरी साजिश रची जा रही है।

    पूर्व कप्तान द्वारा पुलिस को सौंपी गई शिकायत में मुख्य रूप से ‘सौरव गांगुली फैंस’ (Sourav Ganguly Fans) नाम के एक बेहद लोकप्रिय फेसबुक पेज का विशेष उल्लेख किया गया है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, इस फेसबुक पेज पर वर्तमान में ३६ लाख से भी अधिक फॉलोअर्स जुड़े हुए हैं और इस मंच के संचालक इसे सौरव गांगुली का आधिकारिक फैन पेज होने का दावा करते हैं। शिकायत पत्र के मुताबिक, इसी बड़े मंच का दुरुपयोग करते हुए पिछले कुछ समय से लगातार ऐसे पोस्ट पब्लिश किए जा रहे हैं, जो आम लोगों के बीच गांगुली की छवि को नकारात्मक रूप से प्रभावित कर रहे हैं। गांगुली ने अपनी शिकायत के साथ इस फेसबुक पेज के लिंक्स, कुछ स्क्रीनशॉट्स और इससे जुड़ी एक खेल वेबसाइट की अहम जानकारियां भी साक्ष्य के तौर पर पुलिस प्रशासन से साझा की हैं।

    सार्वजनिक जीवन में आलोचना और व्यक्तिगत मानहानि के बीच के अंतर को स्पष्ट करते हुए सौरव गांगुली ने अपने आवेदन में बेहद गंभीर बातें कही हैं। उन्होंने साफ शब्दों में लिखा है कि एक पब्लिक फिगर होने के नाते वह इस बात को अच्छी तरह समझते हैं कि लोगों की अलग-अलग राय होना और आलोचनाएं मिलना सार्वजनिक जीवन का ही एक स्वाभाविक हिस्सा होता है। लेकिन, किसी की प्रतिष्ठा को जानबूझकर ठेस पहुंचाने के इरादे से झूठी, अपमानजनक और दुर्भावनापूर्ण बातें फैलाना किसी भी सभ्य समाज में स्वीकार्य नहीं हो सकता। गांगुली ने जोर देकर कहा है कि अपनी साख की रक्षा के लिए और इस तरह की भ्रामक गतिविधियों पर रोक लगाने के लिए आरोपियों के खिलाफ तत्काल और कड़ी कानूनी कार्रवाई किया जाना बेहद अनिवार्य हो गया है।

    इस हाई-प्रोफाइल मामले पर कोलकाता पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने पूर्व बीसीसीआई अध्यक्ष की तरफ से शिकायत मिलने की आधिकारिक पुष्टि कर दी है। पुलिस प्रशासन के मुताबिक, गांगुली की लिखित अर्जी के आधार पर संबंधित फेसबुक पेज के एडमिन और उससे जुड़े संदिग्धों के खिलाफ मामला दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है और साइबर सेल की मदद से पूरे मामले की गहनता से तकनीकी जांच की जा रही है। इस कानूनी विवाद के बीच, हाल ही में राजनीतिक गलियारों में उड़े एक बड़े बवंडर पर भी सौरव गांगुली ने अपनी चुप्पी तोड़ी है, जिसमें दावा किया जा रहा था कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने गांगुली के जरिए सांसद यूसुफ पठान को इस्तीफा देने का संदेश भिजवाया था।

    इस पूरे सियासी विवाद को पूरी तरह से सिरे से खारिज करते हुए सौरव गांगुली और सांसद यूसुफ पठान दोनों ने ही इसे पूरी तरह से काल्पनिक, फर्जी और मनगढ़ंत करार दिया है। पूर्व कप्तान ने स्पष्ट किया कि मुख्यमंत्री की तरफ से उन्हें ऐसा कोई भी संदेश देने के लिए कभी नहीं कहा गया और न ही उनकी इस विषय पर यूसुफ पठान से कोई बातचीत हुई है। फिलहाल, पुलिस इस पूरे घटनाक्रम और सोशल मीडिया पेज के जरिए फैलाई जा रही नकारात्मकता के पीछे छिपे वास्तविक चेहरों की पहचान करने में जुट गई है, ताकि इस प्रतिष्ठित खिलाड़ी की मानहानि करने वालों को कानून के कटघरे में खड़ा किया जा सके।

  • वैभव सूर्यवंशी विवाद में घिरे: श्रीलंकाई खिलाड़ियों से भिड़ंत के बाद कार्रवाई का खतरा, डेब्यू पर भी नजरें

    वैभव सूर्यवंशी विवाद में घिरे: श्रीलंकाई खिलाड़ियों से भिड़ंत के बाद कार्रवाई का खतरा, डेब्यू पर भी नजरें

    नई दिल्ली । भारतीय क्रिकेट के उभरते सितारे Vaibhav Suryavanshi एक बार फिर सुर्खियों में हैं, लेकिन इस बार वजह उनका प्रदर्शन नहीं बल्कि मैदान पर हुआ विवाद है। दांबुला में खेले गए इंडिया-ए और श्रीलंका-ए के मुकाबले में सुपर ओवर की हार के बाद युवा बल्लेबाज का गुस्सा कैमरों में कैद हो गया। मैच खत्म होने के बाद श्रीलंकाई खिलाड़ियों के साथ उनकी तीखी बहस और कथित धक्का-मुक्की ने खेल जगत में चर्चा छेड़ दी है। यह घटना ऐसे समय सामने आई है जब 15 वर्षीय बल्लेबाज को भारतीय क्रिकेट का भविष्य माना जा रहा है और जल्द ही अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में पदार्पण की संभावनाएं भी जताई जा रही हैं।

    सुपर ओवर की हार के बाद बढ़ा तनाव
    मुकाबला बेहद रोमांचक रहा और विजेता का फैसला सुपर ओवर में हुआ। श्रीलंका-ए ने पहले बल्लेबाजी करते हुए चुनौतीपूर्ण स्कोर खड़ा किया, जिसके जवाब में इंडिया-ए लक्ष्य हासिल नहीं कर सकी। हार के बाद मैदान पर दोनों टीमों के खिलाड़ियों के बीच माहौल तनावपूर्ण हो गया। रिपोर्ट्स के अनुसार, श्रीलंका-ए के एक खिलाड़ी की टिप्पणी के बाद वैभव सूर्यवंशी नाराज हो गए। टीवी फुटेज में उन्हें काफी आक्रामक अंदाज में देखा गया। कुछ समय के लिए दोनों पक्षों के खिलाड़ी आमने-सामने आ गए, जिसके बाद अनुभवी विकेटकीपर Niroshan Dickwella ने बीच-बचाव कर मामला शांत कराया।

    अंपायर के फैसले पर भी जताई थी नाराजगी
    मैच के दौरान भी तनाव देखने को मिला था। सुपर ओवर में एक गेंद को नो-बॉल दिए जाने पर इंडिया-ए खेमे ने आपत्ति जताई थी। कप्तान Tilak Varma अंपायर के फैसले से असहमत नजर आए थे। उसी दौरान वैभव भी अंपायर से चर्चा करते दिखाई दिए। स्थिति को संभालने के लिए टीम प्रबंधन को हस्तक्षेप करना पड़ा और कोच ने युवा बल्लेबाज को वहां से हटाया।

    क्या मिल सकती है सजा?
    अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि इस घटना पर क्या कार्रवाई होगी। फिलहाल मैच रेफरी की ओर से कोई आधिकारिक फैसला सामने नहीं आया है। यदि समीक्षा में यह पाया जाता है कि खिलाड़ी ने अनुचित शारीरिक संपर्क किया या खेल भावना के विपरीत व्यवहार किया, तो चेतावनी, जुर्माना या अन्य अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है। हालांकि यह मुकाबला आधिकारिक अंतरराष्ट्रीय मैच नहीं था, इसलिए सीधे तौर पर आईसीसी की कड़ी अनुशासनात्मक प्रक्रिया लागू होने की संभावना कम मानी जा रही है। इसके बावजूद मैच अधिकारियों और संबंधित क्रिकेट बोर्ड के पास कार्रवाई का अधिकार रहता है।

    शानदार प्रदर्शन के बीच लगा विवाद का दा
    पिछले कुछ महीनों में Vaibhav Suryavanshi ने अपनी बल्लेबाजी से क्रिकेट जगत का ध्यान खींचा है। कम उम्र में लगातार प्रभावशाली प्रदर्शन करते हुए उन्होंने भविष्य के बड़े सितारे के रूप में पहचान बनाई है। लेकिन खेल विशेषज्ञों का मानना है कि बड़े स्तर पर सफलता केवल प्रतिभा से नहीं मिलती, बल्कि संयम, अनुशासन और दबाव में खुद को नियंत्रित रखने की क्षमता भी उतनी ही जरूरी होती है। ऐसे में यह घटना युवा खिलाड़ी के लिए एक महत्वपूर्ण सीख साबित हो सकती है।

    अब सबकी नजर रेफरी के फैसले पर
    क्रिकेट प्रेमियों और चयनकर्ताओं की निगाहें अब मैच रेफरी की रिपोर्ट पर टिकी हैं। यह देखना दिलचस्प होगा कि घटना को कितनी गंभीरता से लिया जाता है और क्या इसका असर वैभव के संभावित अंतरराष्ट्रीय डेब्यू पर पड़ता है या नहीं। फिलहाल इतना तय है कि मैदान पर हुआ यह विवाद युवा बल्लेबाज के करियर की सबसे चर्चित घटनाओं में शामिल हो गया है।

  • भारत फीफा वर्ल्ड कप कब खेलेगा? 1950 का अधूरा सपना आज भी करोड़ों दिलों में जिंदा

    भारत फीफा वर्ल्ड कप कब खेलेगा? 1950 का अधूरा सपना आज भी करोड़ों दिलों में जिंदा


    नई दिल्ली । जब भी फीफा वर्ल्ड कप का आगाज होता है, भारत में फुटबॉल प्रेमियों का उत्साह चरम पर पहुंच जाता है। करोड़ों भारतीय रातभर जागकर मैच देखते हैं, अपनी पसंदीदा टीमों का समर्थन करते हैं और सोशल मीडिया पर फुटबॉल की चर्चा में डूब जाते हैं। लेकिन हर बार एक सवाल दिलों को कचोटता है आखिर भारत खुद फीफा वर्ल्ड कप कब खेलेगा?  दुनिया की सबसे बड़ी आबादी वाले देशों में शामिल भारत आज भी फुटबॉल के सबसे बड़े मंच से दूर है। वर्तमान में भारत फीफा रैंकिंग में काफी पीछे है और एशियाई फुटबॉल में भी उसकी स्थिति मजबूत नहीं मानी जाती। हालात ऐसे हैं कि टीम अगले एएफसी एशियन कप के लिए भी क्वालिफाई नहीं कर सकी, जिसने भारतीय फुटबॉल की चुनौतियों को एक बार फिर उजागर कर दिया।

    1950: जब भारत वर्ल्ड कप खेलने के सबसे करीब थ
    बहुत कम लोग जानते हैं कि भारत एक बार फीफा वर्ल्ड कप में खेलने के बेहद करीब पहुंच चुका था। 1950 में ब्राजील में आयोजित विश्व कप के लिए भारत को बिना क्वालिफाइंग मैच खेले ही जगह मिल गई थी। एशियाई ग्रुप की अन्य टीमें हट गई थीं, जिसके कारण भारत को सीधी एंट्री मिली। भारत को मजबूत टीमों के साथ ग्रुप में रखा गया था, लेकिन टीम टूर्नामेंट में हिस्सा नहीं ले सकी। वर्षों तक यह माना जाता रहा कि खिलाड़ियों को नंगे पैर खेलने की अनुमति नहीं मिलने के कारण भारत ने नाम वापस लिया था। हालांकि वास्तविक कारण आर्थिक कठिनाइयां, यात्रा खर्च और उस समय फुटबॉल प्रशासन की प्राथमिकताएं थीं। उस दौर में राष्ट्रीय स्तर पर ओलंपिक को विश्व कप से अधिक महत्व दिया जाता था।

    स्वर्णिम दौर के बाद क्यों आई गिरावट
    भारतीय फुटबॉल का इतिहास गौरवशाली भी रहा है। 1962 के एशियाई खेलों में भारत ने दक्षिण कोरिया को हराकर स्वर्ण पदक जीता था। उस दौर में भारतीय टीम एशिया की ताकतवर टीमों में गिनी जाती थी। बाद में 1970 एशियाई खेलों में भी भारत ने कांस्य पदक हासिल किया। लेकिन इसके बाद भारतीय फुटबॉल धीरे-धीरे पिछड़ता चला गया। जबकि जापान, दक्षिण कोरिया, ईरान और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों ने अपने फुटबॉल ढांचे को लगातार मजबूत किया और विश्व फुटबॉल में पहचान बनाई।

    क्या सिर्फ क्रिकेट जिम्मेदार है?
    अक्सर कहा जाता है कि भारत में क्रिकेट की लोकप्रियता फुटबॉल के विकास में बाधा बनी। इसमें कुछ सच्चाई जरूर है, क्योंकि अधिकांश निवेश, मीडिया कवरेज और प्रायोजक क्रिकेट की ओर केंद्रित रहते हैं। लेकिन पूरी तस्वीर इससे कहीं बड़ी है। जापान और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में भी कई खेल लोकप्रिय हैं, फिर भी उन्होंने मजबूत फुटबॉल संरचना विकसित की। भारत की सबसे बड़ी समस्या जमीनी स्तर पर मजबूत व्यवस्था का अभाव, कोचों की कमी, कमजोर स्काउटिंग सिस्टम और प्रशासनिक अस्थिरता रही है।

    उम्मीद अभी बाकी है
    2026 से फीफा वर्ल्ड कप में टीमों की संख्या 32 से बढ़ाकर 48 कर दी गई है। इससे एशियाई देशों के लिए क्वालिफिकेशन के अवसर बढ़े हैं। हालांकि सिर्फ अतिरिक्त स्लॉट मिलने से भारत विश्व कप नहीं पहुंच जाएगा।

    भारत को स्कूल स्तर पर फुटबॉल को बढ़ावा देना होगा, आधुनिक अकादमियों का विस्तार करना होगा, हजारों प्रशिक्षित कोच तैयार करने होंगे और लंबी अवधि की स्पष्ट योजना पर काम करना होगा। यदि सही दिशा में लगातार निवेश और प्रयास किए जाएं तो आने वाले वर्षों में भारत विश्व कप के सपने को साकार कर सकता है।

  • एजबेस्टन में टूटा दुबई का ऐतिहासिक रिकॉर्ड: भारत-पाकिस्तान महामुकाबले को देखने उमड़ा दर्शकों का सैलाब, महिला क्रिकेट में रचा गया नया इतिहास

    एजबेस्टन में टूटा दुबई का ऐतिहासिक रिकॉर्ड: भारत-पाकिस्तान महामुकाबले को देखने उमड़ा दर्शकों का सैलाब, महिला क्रिकेट में रचा गया नया इतिहास

    नई दिल्ली। अंतरराष्ट्रीय महिला क्रिकेट के इतिहास में रविवार का दिन एक नया मील का पत्थर साबित हुआ, जब आईसीसी विमेंस टी20 वर्ल्ड कप 2026 के ग्रुप चरण में भारत और पाकिस्तान की पारंपरिक प्रतिद्वंद्विता को देखने के लिए स्टेडियम में फैंस का अभूतपूर्व सैलाब उमड़ पड़ा। इंग्लैंड के बर्मिंघम स्थित ऐतिहासिक एजबेस्टन मैदान पर खेले गए इस महामुकाबले ने दर्शकों की उपस्थिति के मामले में दो साल पुराना एक बड़ा वैश्विक रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिया। इस मैच को लाइव देखने के लिए कुल 18,814 दर्शक स्टेडियम पहुंचे थे, जो महिला टी20 विश्व कप के इतिहास में किसी भी ग्रुप या लीग स्टेज के मैच के लिए अब तक की सबसे बड़ी दर्शक संख्या दर्ज की गई है। इस ऐतिहासिक उपस्थिति ने सिद्ध कर दिया है कि महिला क्रिकेट में भी भारत और पाकिस्तान के बीच होने वाले मुकाबलों की लोकप्रियता का ग्राफ वैश्विक स्तर पर बेहद तेजी से बढ़ रहा है।

    क्रिकेट जगत में दर्शकों की इस संख्या को एक क्रांतिकारी बदलाव के रूप में देखा जा रहा है। इससे पहले विमेंस टी20 वर्ल्ड कप के इतिहास में किसी लीग मैच में सबसे ज्यादा दर्शक जुटने का रिकॉर्ड संयुक्त अरब अमीरात के नाम दर्ज था। छह अक्टूबर 2024 को दुबई इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम में खेले गए भारत-पाकिस्तान मुकाबले के दौरान 15,935 दर्शकों की उपस्थिति दर्ज की गई थी, जिसे तब तक का सबसे बड़ा रिकॉर्ड माना जा रहा था। बर्मिंघम के मैदान पर ब्रिटिश धरती पर क्रिकेट प्रेमियों ने इस पुराने रिकॉर्ड को पूरी तरह से चकनाचूर कर दिया। यह आंकड़ा स्पष्ट करता है कि न सिर्फ उपमहाद्वीप बल्कि यूरोपीय देशों में भी दक्षिण एशियाई क्रिकेट के इस बड़े टकराव को लेकर खेल प्रेमियों में जबरदस्त दीवानगी और लालायित रहने का भाव मौजूद है।

    मैदान के भीतर के प्रदर्शन की बात करें तो दर्शकों के इस भारी जनसमर्थन के बीच भारतीय महिला क्रिकेट टीम ने अपने खेल का स्तर बेहद ऊंचा रखा और पाकिस्तान को हर मोर्चे पर पस्त कर दिया। पहले बल्लेबाजी करते हुए भारतीय टीम ने स्कोर बोर्ड पर 170 रनों का चुनौतीपूर्ण और विशाल स्कोर खड़ा किया था। इसके जवाब में 171 रनों के लक्ष्य का पीछा करने उतरी पाकिस्तानी टीम भारतीय गेंदबाजों के सटीक और धारदार आक्रमण के सामने बेबस नजर आई और महज 106 रनों के मामूली स्कोर पर पूरी तरह सिमट गई। भारत ने यह मुकाबला 64 रनों के एक बहुत बड़े अंतर से अपने नाम कर टूर्नामेंट के पॉइंट्स टेबल में अपनी स्थिति को सुदृढ़ कर लिया है। महिला टी20 विश्व कप के इतिहास में दोनों टीमों के बीच खेले गए कुल 9 मुकाबलों में यह भारत की 7वीं शानदार जीत है।

    इस ऐतिहासिक मुकाबले की सबसे बड़ी स्टार और मैच की वास्तविक हीरो ऑलराउंडर दीप्ति शर्मा रहीं। उन्होंने मैदान पर चौतरफा प्रदर्शन करते हुए न सिर्फ बल्ले से महत्वपूर्ण योगदान दिया बल्कि फील्डिंग के दौरान एक शानदार रन आउट भी किया। इसके बाद अपनी घातक स्पिन गेंदबाजी के दम पर उन्होंने पांच पाकिस्तानी बल्लेबाजों को पवेलियन की राह दिखाई। इस शानदार स्पेल की बदौलत दीप्ति शर्मा ने अंतरराष्ट्रीय टी20 क्रिकेट के इतिहास में सबसे ज्यादा विकेट चटकाने वाली दुनिया की अग्रणी गेंदबाज बनने का गौरव भी हासिल कर लिया है। उनके इस ऐतिहासिक कीर्तिमान और टीम की प्रचंड जीत ने एजबेस्टन में मौजूद हजारों भारतीय समर्थकों के उत्साह को कई गुना बढ़ा दिया।

    भारतीय महिला टीम इस एकतरफा और रिकॉर्डतोड़ जीत से मिले आत्मविश्वास के साथ अब अपने अगले अभियान की तैयारियों में जुट गई है। टूर्नामेंट के ग्रुप चरण में भारत का अगला मुकाबला आगामी 17 जून को नीदरलैंड्स के खिलाफ होना तय है। खेल विशेषज्ञों का मानना है कि इस मैच में बनी नई ऐतिहासिक दर्शक संख्या और दीप्ति शर्मा जैसे सीनियर खिलाड़ियों का यह विश्वस्तरीय प्रदर्शन पूरी टीम को पहली बार टी20 विश्व कप का खिताब जीतने के अपने मुख्य लक्ष्य की ओर तेजी से आगे बढ़ने में एक बड़ी मनोवैज्ञानिक ऊर्जा प्रदान करेगा।

  • दीप्ति शर्मा के 'पंजे' और मंधाना के अर्धशतक से उड़ी पाकिस्तानी टीम, भारतीय महिला टीम की ऐतिहासिक और एकतरफा जीत

    दीप्ति शर्मा के 'पंजे' और मंधाना के अर्धशतक से उड़ी पाकिस्तानी टीम, भारतीय महिला टीम की ऐतिहासिक और एकतरफा जीत

    नई दिल्ली। आईसीसी विमेंस टी20 वर्ल्ड कप 2026 में भारतीय महिला क्रिकेट टीम ने अपने अभियान की शुरुआत धमाकेदार अंदाज में की है। बर्मिंघम के एजबेस्टन मैदान पर खेले गए इस हाई-वोल्टेज मुकाबले में कप्तान हरमनप्रीत कौर की अगुवाई में भारतीय टीम ने चिर-प्रतिद्वंद्वी पाकिस्तान को 64 रनों के बड़े अंतर से पराजित किया। इस एकतरफा जीत के साथ ही भारत ने टूर्नामेंट में अपनी मजबूत दावेदारी पेश कर दी है। मैच में टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने उतरी भारतीय टीम ने निर्धारित 20 ओवरों में पाकिस्तान के सामने 171 रनों का चुनौतीपूर्ण लक्ष्य रखा था, जिसके जवाब में पाकिस्तानी टीम महज 106 रनों पर ढेर हो गई।

    भारतीय टीम की इस शानदार और ऐतिहासिक जीत में सलामी बल्लेबाज स्मृति मंधाना और स्टार ऑलराउंडर दीप्ति शर्मा ने मुख्य भूमिका निभाई। स्मृति मंधाना ने पाकिस्तानी गेंदबाजों की जमकर खबर लेते हुए 44 गेंदों पर 68 रनों की बेहद प्रभावशाली पारी खेली, जिसमें नौ आकर्षक चौके और दो गगनचुंबी छक्के शामिल रहे। मध्यक्रम में कप्तान हरमनप्रीत कौर ने सूझबूझ का परिचय देते हुए 36 रन बनाए, जबकि अंतिम ओवरों में विकेटकीपर बल्लेबाज ऋचा घोष ने महज 17 गेंदों पर ताबड़तोड़ 34 रन कूटकर भारतीय टीम के स्कोर को एक सम्मानजनक और मजबूत स्थिति तक पहुंचाया। पाकिस्तान की ओर से कप्तान फातिमा सना और सादिया इकबाल ने जरूर कुछ सफलताएं हासिल कीं, लेकिन वे भारतीय बल्लेबाजों पर अंकुश लगाने में नाकाम रहीं।

    लक्ष्य का पीछा करने उतरी पाकिस्तान टीम की शुरुआत बेहद खराब रही और भारतीय गेंदबाजों के सटीक आक्रमण के सामने उनकी बल्लेबाजी ताश के पत्तों की तरह बिखर गई। पाकिस्तान की तरफ से केवल सलामी बल्लेबाज मुनीबा अली ही भारतीय गेंदबाजों का डटकर सामना कर सकीं, जिन्होंने 35 गेंदों में 41 रनों का योगदान दिया। उनके अलावा आलिया रियाज ने 18 रन, गुल फिरोजा और आयशा जफर ने 12-12 रन बनाए। टीम की बाकी सात बल्लेबाज दहाई का आंकड़ा भी छूने में पूरी तरह नाकाम रहीं और पूरी टीम 17 ओवरों में ही पवेलियन लौट गई।

    भारत की इस ऐतिहासिक गेंदबाजी प्रदर्शन की कमान दीप्ति शर्मा के हाथों में रही, जिन्होंने अपनी फिरकी के जाल में पाकिस्तानी बल्लेबाजों को ऐसा उलझाया कि उन्होंने अकेले ही 5 विकेट चटकाकर विपक्षी टीम की कमर तोड़ दी। दीप्ति के इस घातक स्पेल के अलावा श्री चरणी ने बेहतरीन लाइन-लेंथ से गेंदबाजी करते हुए 3 विकेट अपने नाम किए, जबकि सलामी बल्लेबाज शेफाली वर्मा ने भी पार्ट-टाइम स्पिनर के तौर पर 1 विकेट हासिल किया। इस मैच की खास बात यह रही कि पाकिस्तानी टीम के कुल 9 विकेट भारतीय स्पिन गेंदबाजों के खाते में गए, जबकि एक बल्लेबाज मुनीबा अली रन आउट होकर पवेलियन लौटीं।

    इस शानदार जीत के बाद भारतीय महिला टीम का मनोबल सातवें आसमान पर है और टीम अब अपने अगले मुकाबले में 17 जून को नीदरलैंड्स का सामना करने के लिए मैदान पर उतरेगी। भारतीय टीम आज तक विमेंस टी20 वर्ल्ड कप का खिताब अपने नाम नहीं कर सकी है, जहां उनका सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन साल 2020 में उपविजेता के रूप में रहा था। इस बार हरमनप्रीत कौर की कप्तानी में भारतीय टीम का एकमात्र लक्ष्य पहली बार विश्व विजेता बनकर इतिहास रचना है, जिसकी शुरुआत उन्होंने चिर-प्रतिद्वंद्वी पर एकतरफा जीत दर्ज करके कर दी है।

  • धर्मशाला वनडे: शुभमन गिल संग तालमेल में भारी चूक, रन आउट होकर गुस्से में पवेलियन लौटे रोहित शर्मा, तोड़ा 37 साल पुराना रिकॉर्ड

    धर्मशाला वनडे: शुभमन गिल संग तालमेल में भारी चूक, रन आउट होकर गुस्से में पवेलियन लौटे रोहित शर्मा, तोड़ा 37 साल पुराना रिकॉर्ड

    नई दिल्ली। भारत और अफगानिस्तान के बीच धर्मशाला के सुरम्य मैदान पर खेले गए पहले वनडे मुकाबले में एक ऐसा नाटकीय मोड़ देखने को मिला, जिसने मैदान पर मौजूद दर्शकों के साथ-साथ करोड़ों क्रिकेट प्रेमियों को हैरान कर दिया। शानदार बल्लेबाजी कर रहे अनुभवी सलामी बल्लेबाज रोहित शर्मा अपने जोड़ीदार और कप्तान शुभमन गिल के साथ रन लेने के दौरान हुई एक बड़ी गलतफहमी का शिकार हो गए। इस तालमेल की कमी के कारण ‘हिटमैन’ को बेहद दुर्भाग्यपूर्ण तरीके से रन आउट होकर क्रीज छोड़नी पड़ी, जिसके बाद वे मैदान से बाहर जाते समय अपने गुस्से और निराशा को छुपा नहीं सके।

    बारिश के खलल के कारण इस मुकाबले को अंपायरों द्वारा 25-25 ओवर का कर दिया गया था, जहां भारतीय टीम को जीत के लिए 195 रनों का चुनौतीपूर्ण लक्ष्य मिला था। इस कठिन लक्ष्य का पीछा करने उतरी भारतीय सलामी जोड़ी ने टीम को एक बेहद सधी हुई और आक्रामक शुरुआत दिलाई। रोहित शर्मा और शुभमन गिल ने अफगानी गेंदबाजों पर शुरुआत से ही दबाव बनाते हुए पहले विकेट के लिए महज 46 रन जोड़ दिए थे। दोनों ही खिलाड़ी बिना किसी जोखिम के आसानी से रन चुरा रहे थे और बाउंड्री बटोर रहे थे, जिससे भारतीय पारी बेहद मजबूत स्थिति की तरफ बढ़ रही थी।

    यह पूरा वाकया भारतीय पारी के छठे ओवर के दौरान घटित हुआ, जब अफगानिस्तान के युवा मिस्ट्री स्पिनर अल्लाह गजनफर गेंदबाजी मोर्चे पर तैनात थे। रोहित शर्मा ने उनकी एक गेंद को हल्के हाथों से मिडविकेट की दिशा में ढकेला और एक त्वरित सिंगल चुराने के लिए तेजी से दौड़ पड़े। उनके जोड़ीदार शुभमन गिल ने भी शुरुआत में इस रन के लिए सकारात्मक प्रतिक्रिया दी और अपने कदम आगे बढ़ाए, लेकिन फील्डर की फुर्ती को देखते हुए गिल ने अचानक अपना मन बदल लिया और बीच रास्ते से ही रोहित को वापस लौटने की ‘ना’ कह दी।

    शुभमन गिल का यह फैसला रोहित के लिए काफी देर से आया क्योंकि तब तक वे क्रीज से बहुत आगे निकल चुके थे और उनके लिए वापस मुड़ना लगभग असंभव था। इसके बावजूद रोहित शर्मा ने डाइव लगाकर क्रीज में सुरक्षित लौटने का पूरा प्रयास किया, लेकिन अफगानिस्तान के स्टार स्पिनर राशिद खान ने बिना कोई गलती किए बेहद फुर्ती से गेंद को विकेटकीपर की तरफ थ्रो किया, जिन्होंने तुरंत गिल्लियां बिखेर दीं। यह रन आउट इतना साफ था कि थर्ड अंपायर द्वारा रिप्ले देखे जाने की औपचारिकता पूरी होने से पहले ही रोहित शर्मा बेहद गुस्से और झुंझलाहट में पवेलियन की तरफ चल दिए।

    रोहित शर्मा भले ही केवल 16 रन बनाकर आउट हो गए और एक बड़ी पारी खेलने से चूक गए, लेकिन इस संक्षिप्त उपस्थिति के दौरान भी उन्होंने भारतीय क्रिकेट इतिहास के पन्नों में अपना नाम स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज करा लिया। 39 साल और 44 दिन की उम्र में इस मुकाबले में उतरते ही वे भारत के लिए वनडे अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट खेलने वाले सबसे उम्रदराज खिलाड़ी बन गए। इसके साथ ही उन्होंने साल 1983 की विश्व विजेता टीम के महान सदस्य मोहिंदर अमरनाथ का करीब 37 साल पुराना रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिया, जिन्होंने 1989 में 39 साल और 36 दिन की उम्र में अपना आखिरी वनडे खेला था।

    इसके अतिरिक्त रोहित शर्मा ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में बतौर ओपनर खेलते हुए अपने 16000 रन भी पूरे कर लिए और ऐसा करने वाले वे देश के पहले सलामी बल्लेबाज बन गए हैं। हालांकि भारतीय टीम ने कप्तान शुभमन गिल की शानदार कप्तानी पारी की बदौलत इस मुकाबले को सात विकेट से अपने नाम कर लिया और सीरीज में बढ़त बना ली, लेकिन रोहित का यह रन आउट क्रिकेट पंडितों के बीच चर्चा का मुख्य विषय बना रहा। अब भारतीय टीम के पूर्व कप्तान लखनऊ में होने वाले अगले वनडे मुकाबले में अपनी इस निराशा को भुलाकर एक धाकड़ पारी खेलने के इरादे से मैदान पर उतरेंगे।

  • वीरेंद्र सहवाग की बड़ी भविष्यवाणी: रोहित शर्मा के वनडे संन्यास के बाद यशस्वी जायसवाल बनेंगे टीम इंडिया के नियमित ओपनर

    वीरेंद्र सहवाग की बड़ी भविष्यवाणी: रोहित शर्मा के वनडे संन्यास के बाद यशस्वी जायसवाल बनेंगे टीम इंडिया के नियमित ओपनर

    नई दिल्ली। भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व विस्फोटक सलामी बल्लेबाज वीरेंद्र सहवाग ने युवा सनसनी यशस्वी जायसवाल के वनडे और सीमित ओवरों के करियर को लेकर एक बेहद महत्वपूर्ण और बड़ी भविष्यवाणी की है। वर्तमान में भारत और अफगानिस्तान के बीच खेली जा रही तीन मैचों की वनडे श्रृंखला के दौरान टीम संयोजन को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच सहवाग का यह बयान सामने आया है। आईपीएल 2026 के फाइनल मुकाबले के दौरान स्टार बल्लेबाज विराट कोहली के हैमस्ट्रिंग की चोट का शिकार होने के बाद यशस्वी जायसवाल को बैकअप के रूप में भारतीय टीम में शामिल किया गया है।

    मुख्य रूप से शीर्ष क्रम और ओपनिंग स्लॉट में बल्लेबाजी करने वाले यशस्वी जायसवाल के लिए इस समय भारतीय वनडे टीम के अंतिम ग्यारह खिलाड़ियों में जगह बनाना एक बड़ी चुनौती साबित हो रहा है। अफगानिस्तान के खिलाफ सीरीज के लिए टीम में चुने जाने के बावजूद उन्हें बेंच पर बैठना पड़ रहा है। इस स्थिति पर क्रिकेट विशेषज्ञों के बीच लगातार बहस चल रही है कि क्या इतने प्रतिभाशाली खिलाड़ी को अंतिम एकादश से बाहर रखना सही है। इसी विषय पर अपनी बेबाक राय रखते हुए पूर्व क्रिकेटर वीरेंद्र सहवाग ने जायसवाल के भविष्य को लेकर एक सकारात्मक और दूरदर्शी खाका खींचा है।

    वीरेंद्र सहवाग ने स्पष्ट रूप से माना कि इस समय भारतीय वनडे टीम के शीर्ष क्रम में जगह बनाना किसी भी नए खिलाड़ी के लिए बेहद कठिन है। उन्होंने मौजूदा टीम समीकरण का हवाला देते हुए कहा कि वर्तमान में शुभमन गिल टीम के कप्तान की भूमिका निभा रहे हैं और रोहित शर्मा जैसा अनुभवी और दिग्गज खिलाड़ी भी बतौर ओपनर टीम की पहली पसंद बना हुआ है। ऐसी मजबूत और स्थापित ओपनिंग जोड़ी के रहते यशस्वी जायसवाल को प्लेइंग इलेवन में शामिल करना टीम प्रबंधन के लिए आसान नहीं है, क्योंकि वे मध्यक्रम के बल्लेबाज नहीं हैं और शीर्ष क्रम में कोई जगह खाली नहीं है।

    पूर्व सलामी बल्लेबाज ने जायसवाल के उज्ज्वल भविष्य पर भरोसा जताते हुए कहा कि युवा खिलाड़ी को निराश होने की बिल्कुल जरूरत नहीं है, क्योंकि उनका समय जल्द ही आने वाला है। सहवाग के अनुसार, जैसे ही सीनियर खिलाड़ी रोहित शर्मा वनडे क्रिकेट को अलविदा कहेंगे और अपने संन्यास की घोषणा करेंगे, वैसे ही यशस्वी जायसवाल के लिए भारतीय वनडे और व्हाइट-बॉल क्रिकेट के दरवाजे पूरी तरह से खुल जाएंगे। रोहित के हटने के बाद जायसवाल को राष्ट्रीय टीम में लगातार और नियमित रूप से खेलने के मौके मिलने शुरू हो जाएंगे, जो उनके करियर को एक नई ऊंचाई पर ले जाएगा।

    इस आगामी रेस में चुनौतियों का जिक्र करते हुए सहवाग ने यह भी जोड़ा कि यशस्वी जायसवाल को टीम में अपनी जगह पक्की करने के लिए ऋतुराज गायकवाड़ जैसे प्रतिभाशाली खिलाड़ियों से कड़ी टक्कर मिल सकती है। गायकवाड़ भी लगातार घरेलू क्रिकेट और मिले हुए मौकों पर शानदार प्रदर्शन कर अपनी दावेदारी मजबूत कर रहे हैं। हालांकि, सहवाग का मानना है कि यदि भारतीय चयनकर्ता और टीम प्रबंधन भविष्य के बड़े टूर्नामेंटों के लिए अपनी टीम में तीन मुख्य ओपनर बल्लेबाजों का चयन करते हैं, तो यशस्वी जायसवाल निश्चित रूप से उन शीर्ष विकल्पों में शामिल होंगे।

    वर्तमान समय में यशस्वी जायसवाल ने टेस्ट और टी20 अंतरराष्ट्रीय प्रारूप में अपनी आक्रामक बल्लेबाजी से गहरी छाप छोड़ी है। सहवाग जैसे महान खिलाड़ी की इस भविष्यवाणी से साफ है कि भविष्य की भारतीय वनडे टीम के निर्माण में जायसवाल को एक मुख्य स्तंभ के रूप में देखा जा रहा है। भले ही अफगानिस्तान के खिलाफ श्रृंखला में वे अंतिम एकादश का हिस्सा न बन पा रहे हों, लेकिन रोहित शर्मा के युग के बाद भारतीय क्रिकेट के सीमित ओवरों के प्रारूप में यशस्वी जायसवाल और शुभमन गिल की जोड़ी को भविष्य की सलामी जोड़ी के रूप में तैयार किया जा रहा है।

  • महिला टी20 विश्व कप: पाकिस्तान के खिलाफ 'नो हैंडशेक' विवाद पर कप्तान हरमनप्रीत कौर का बड़ा बयान, कहा- हमारा पूरा ध्यान सिर्फ क्रिकेट पर

    महिला टी20 विश्व कप: पाकिस्तान के खिलाफ 'नो हैंडशेक' विवाद पर कप्तान हरमनप्रीत कौर का बड़ा बयान, कहा- हमारा पूरा ध्यान सिर्फ क्रिकेट पर


    नई दिल्ली।
    महिला टी20 विश्व कप में पारंपरिक प्रतिद्वंद्वी पाकिस्तान के खिलाफ होने वाले महामुकाबले से पहले भारतीय खेमे में रणनीतिक तैयारियां तेज हो गई हैं। इस हाई-प्रोफाइल मैच की संवेदनशीलता और मैदान के बाहर चल रही चर्चाओं के बीच भारतीय कप्तान हरमनप्रीत कौर ने एक महत्वपूर्ण प्रेस कॉन्फ्रेंस में हिस्सा लिया। इस दौरान मीडिया जगत में लंबे समय से चर्चा का विषय बनी ‘नो हैंडशेक नीति’ को लेकर कप्तान से तीखे सवाल पूछे गए, जिस पर उन्होंने बेहद परिपक्व और कूटनीतिक रुख अपनाया।

    हालिया क्रिकेट इतिहास पर नजर डालें तो पुरुष एशिया कप 2025 के बाद से भारत और पाकिस्तान के बीच खेले गए विभिन्न मुकाबलों में एक अलग तरह की कड़ाहट देखी गई है। राइजिंग स्टार्स एशिया कप, अंडर-19 एशिया कप और पिछले महिला विश्व कप के दौरान भी भारतीय खिलाड़ियों द्वारा पाकिस्तानी टीम के साथ मैच के बाद हाथ न मिलाने का चलन सुर्खियों में रहा था। पिछले आईसीसी टूर्नामेंट में खुद हरमनप्रीत कौर और पाकिस्तानी कप्तान फातिमा सना के बीच हाथ न मिलाने की घटना सोशल मीडिया पर काफी वायरल हुई थी, जिसके बाद से दोनों देशों के खेल प्रेमियों और विश्लेषकों के बीच इस नीति को लेकर तरह-तरह के कयास लगाए जा रहे थे।

    मैच की पूर्व संध्या पर आयोजित आधिकारिक प्रेस कॉन्फ्रेंस में जब कप्तान हरमनप्रीत कौर से इस विशिष्ट व्यवहार और आगामी मैच में इसकी पुनरावृत्ति को लेकर सीधा सवाल किया गया, तो उन्होंने किसी भी प्रकार के नए विवाद को जन्म देने से साफ इनकार कर दिया। हरमनप्रीत ने नीति के अस्तित्व या उसकी वजहों पर कोई भी टिप्पणी करने से परहेज करते हुए सीधे तौर पर खेल को प्राथमिकता दी। उन्होंने बेहद पेशेवर अंदाज में कहा कि भारतीय टीम यहां केवल क्रिकेट खेलने के उद्देश्य से आई है और ड्रेसिंग रूम के भीतर खिलाड़ियों के बीच मैदान से इतर की किसी भी दूसरी चीज या विवाद पर कोई चर्चा नहीं होती है।

    भारतीय कप्तान ने इस ऐतिहासिक मुकाबले से जुड़े मानसिक दबाव को भी स्वीकार किया। उन्होंने अपने बचपन के दिनों को याद करते हुए कहा कि एक प्रशंसक के रूप में भी उन्होंने हमेशा भारत-पाकिस्तान मैच के असाधारण दबाव को महसूस किया है। अब जबकि वह खुद मैदान पर देश का प्रतिनिधित्व कर रही हैं और टीम की कमान संभाल रही हैं, तो जिम्मेदारी और दबाव का स्तर कई गुना बढ़ जाता है। इसके बावजूद, टीम प्रबंधन की ओर से खिलाड़ियों को यही सलाह दी गई है कि वे इस मुकाबले को एक सामान्य क्रिकेट मैच की तरह लें और मैदान पर खेल का पूरा आनंद उठाएं ताकि दबाव उनके प्रदर्शन पर हावी न हो सके।

    रणनीतिक दृष्टिकोण से भारतीय टीम के लिए यह मुकाबला बेहद अहम माना जा रहा है। हरमनप्रीत कौर का मानना है कि किसी भी बड़े आईसीसी टूर्नामेंट में पहला मैच पूरी टीम का लय और आगे का माहौल तय करता है। भारतीय टीम पिछले एकदिवसीय विश्व कप की तरह ही इस बार भी सकारात्मक और आक्रामक सोच के साथ अपने अभियान की शुरुआत करने के लिए पूरी तरह तैयार है। टीम का प्राथमिक लक्ष्य इस कड़े मुकाबले को जीतकर टूर्नामेंट में अपनी स्थिति को मजबूत करना और अंक तालिका में बढ़त हासिल करना है।

    सांख्यिकीय आंकड़ों की बात करें तो टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में भारतीय महिला टीम का पलड़ा पाकिस्तान पर हमेशा से भारी रहा है। दोनों देशों के बीच अब तक खेले गए कुल मुकाबलों में भारत ने 13 बार जीत का स्वाद चखा है, जबकि पाकिस्तानी टीम केवल तीन बार ही जीत दर्ज करने में सफल हो सकी है। वहीं, अगर सिर्फ महिला टी20 विश्व कप के इतिहास को देखें तो वहां भी भारतीय टीम 6-2 की बड़ी बढ़त के साथ मानसिक रूप से मजबूत स्थिति में है। हालिया फॉर्म भी भारत के पक्ष में है, जहां टीम इंडिया लगातार तीन मैचों में पाकिस्तान को शिकस्त दे चुकी है। इस मजबूत रिकॉर्ड के साथ भारतीय टीम मैदान पर अपनी बादशाहत बरकरार रखने उतरेगी, जबकि पाकिस्तान की टीम इस बड़े मंच पर भारत के खिलाफ अपनी हार के सिलसिले को तोड़ने का प्रयास करेगी।

  • भारतीय निशानेबाजी को बड़ा झटका: दिग्गज शूटर और कोच Jaspal Rana के निधन पर खेल जगत शोकाकुल

    भारतीय निशानेबाजी को बड़ा झटका: दिग्गज शूटर और कोच Jaspal Rana के निधन पर खेल जगत शोकाकुल


    नई दिल्ली । भारतीय खेल जगत ने एक ऐसे सितारे को खो दिया है, जिसने देश में निशानेबाजी को नई पहचान दिलाने में अहम भूमिका निभाई। दिग्गज शूटर और कोच Jaspal Rana के असामयिक निधन से पूरे खेल जगत में शोक की लहर दौड़ गई है। 49 वर्ष की उम्र में उनका निधन भारतीय निशानेबाजी के लिए एक ऐसी क्षति माना जा रहा है, जिसकी भरपाई निकट भविष्य में संभव नहीं दिखती।

    शुक्रवार को दिल्ली में उनके निधन के बाद उनका पार्थिव शरीर देहरादून स्थित आवास ले जाया गया, जहां उन्हें राजकीय सम्मान के साथ श्रद्धांजलि दी गई। शनिवार को उनका अंतिम संस्कार Manikarnika Ghat में किया जाना है। परिवारजन उनके पार्थिव शरीर को निजी विमान से वाराणसी लेकर पहुंचे, जहां एयरपोर्ट पर बड़ी संख्या में खेल प्रेमियों, खिलाड़ियों और शुभचिंतकों ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। इसके बाद उनकी अंतिम यात्रा मणिकर्णिका घाट के लिए रवाना हुई।

    वाराणसी एयरपोर्ट पर मौजूद उनके साथियों और पूर्व खिलाड़ियों ने भावुक होकर उन्हें याद किया। पूर्व खिलाड़ी वीरेंद्र उपाध्याय ने कहा कि जसपाल राणा का जाना भारतीय खेल जगत के लिए अपूरणीय क्षति है। उन्होंने कहा कि इतनी कम उम्र में उनका निधन बेहद दुखद है और खेल जगत ने एक महान प्रतिभा को खो दिया है।

    अंतरराष्ट्रीय कोच रोहित जैन ने उन्हें भारतीय पिस्टल शूटिंग का अग्रदूत बताते हुए कहा कि उन्होंने देश में निशानेबाजी को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया। उनके अनुसार, जब उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड एक राज्य हुआ करते थे, तब जसपाल राणा ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदक जीतकर पूरे देश का ध्यान इस खेल की ओर आकर्षित किया था। उन्होंने कहा कि मौजूदा दौर में उनके जैसा समर्पित और सफल कोच मिलना बेहद कठिन है।

    पूर्व राष्ट्रीय शूटर रामेंद्र शर्मा ने भी गहरा दुख व्यक्त करते हुए कहा कि उन्होंने 1987 से जसपाल राणा को खेलते देखा था। उनके मुताबिक, राणा देश के पहले ऐसे खिलाड़ी थे जिन्होंने जूनियर विश्व स्तर पर बड़ी सफलता हासिल कर भारतीय निशानेबाजी को नई दिशा दी। उन्होंने कहा कि जसपाल राणा की उपलब्धियों ने देश के हजारों युवा खिलाड़ियों को प्रेरित किया और शूटिंग खेल को लोकप्रिय बनाने में उनकी भूमिका बेहद महत्वपूर्ण रही।

    पूर्व राइफल शूटर पंकज श्रीवास्तव ने कहा कि जसपाल राणा ने अपने प्रदर्शन से यह साबित किया कि भारतीय खिलाड़ी विदेशों में भी विश्वस्तरीय सफलता हासिल कर सकते हैं। उन्होंने कई अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में पदक जीतकर देश का नाम रोशन किया और विश्व रिकॉर्ड भी अपने नाम किया। श्रीवास्तव ने बताया कि कम उम्र में ही उन्हें Arjuna Award से सम्मानित किया गया था। बाद में उन्हें Padma Shri सहित कई प्रतिष्ठित सम्मानों से नवाजा गया।

    खेल विशेषज्ञों का मानना है कि खिलाड़ी, मार्गदर्शक और कोच के रूप में जसपाल राणा का योगदान भारतीय निशानेबाजी के इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज रहेगा। उनकी उपलब्धियां आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेंगी और भारतीय खेल जगत हमेशा उनके योगदान को याद रखेगा।

  • तेजस शिरसे ने रचा इतिहास, 110 मीटर हर्डल्स में बनाया नया राष्ट्रीय रिकॉर्ड; कॉमनवेल्थ गेम्स का टिकट लगभग पक्का

    तेजस शिरसे ने रचा इतिहास, 110 मीटर हर्डल्स में बनाया नया राष्ट्रीय रिकॉर्ड; कॉमनवेल्थ गेम्स का टिकट लगभग पक्का


    नई दिल्ली । भारतीय एथलेटिक्स को शनिवार को एक बड़ी उपलब्धि हासिल हुई, जब युवा हर्डलर Tejas Shirse ने पुरुषों की 110 मीटर हर्डल्स स्पर्धा में नया राष्ट्रीय रिकॉर्ड कायम कर इतिहास रच दिया। लुधियाना में आयोजित Indian Athletics Series 9 के दौरान तेजस ने 13.27 सेकंड का समय निकालते हुए न केवल स्वर्ण पदक अपने नाम किया, बल्कि अपने ही पुराने राष्ट्रीय रिकॉर्ड को भी पीछे छोड़ दिया।

    24 वर्षीय तेजस शिरसे ने इससे पहले 2024 में 13.41 सेकंड का राष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाया था। अब उन्होंने अपने प्रदर्शन में उल्लेखनीय सुधार करते हुए 13.27 सेकंड का समय दर्ज किया है। यह उपलब्धि भारतीय ट्रैक एवं फील्ड इतिहास के सर्वश्रेष्ठ स्प्रिंट-हर्डल प्रदर्शनों में गिनी जा रही है। खास बात यह है कि उनका यह प्रदर्शन Athletics Federation of India द्वारा निर्धारित कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 क्वालिफिकेशन मार्क 13.39 सेकंड से भी बेहतर रहा।

    प्रतियोगिता के दौरान तेजस ने शुरुआत से ही अपना दबदबा बनाए रखा। ‘बी’ फाइनल में उन्होंने ब्लॉक्स से शानदार शुरुआत की और शुरुआती चरण में बढ़त हासिल कर ली। अंतिम हर्डल से हल्का संपर्क होने के बावजूद उन्होंने अपनी गति कम नहीं होने दी और शानदार अंदाज में फिनिश लाइन पार की। उनका समय देखते ही स्टेडियम में मौजूद दर्शकों और अधिकारियों ने उनकी उपलब्धि का स्वागत किया। इस रेस में Krishik M 13.55 सेकंड के समय के साथ दूसरे स्थान पर रहे।

    तेजस का यह प्रदर्शन हाल के महीनों में उनकी लगातार प्रगति को भी दर्शाता है। पिछले महीने रांची में आयोजित Federation Cup Athletics Championships में उन्होंने 13.50 सेकंड का समय निकालकर स्वर्ण पदक जीता था। अब 13.27 सेकंड का समय उन्हें वर्ष 2026 की महाद्वीपीय रैंकिंग में शीर्ष खिलाड़ियों के बीच ला खड़ा करता है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार उनका प्रदर्शन इस समय कॉन्टिनेंटल सूची में छठे स्थान पर है।

    भारतीय एथलेटिक्स के लिहाज से यह उपलब्धि इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि यदि तेजस का चयन कॉमनवेल्थ गेम्स टीम में होता है तो वह 2014 के बाद इस प्रतिष्ठित प्रतियोगिता में भाग लेने वाले पहले भारतीय पुरुष हर्डलर बन सकते हैं। इससे पहले Siddhanth Thingalaya ने भारत का प्रतिनिधित्व किया था।

    दूसरी ओर, प्रतियोगिता में कुछ खिलाड़ियों के लिए निराशाजनक नतीजे भी सामने आए। पुरुषों की 800 मीटर दौड़ में Mohammed Afsal अपेक्षित प्रदर्शन नहीं कर सके। उन्होंने 1 मिनट 47 सेकंड का समय निकाला, जो कॉमनवेल्थ गेम्स क्वालिफिकेशन मानक 1 मिनट 45 सेकंड से पीछे रहा। ऐसे में उनके चयन की संभावनाओं को बड़ा झटका लग सकता है।

    जैवलिन थ्रो स्पर्धा में भी खिलाड़ियों के बीच कॉमनवेल्थ गेम्स टीम में जगह बनाने की होड़ देखने को मिली। Sachin Yadav चोट के कारण प्रतियोगिता से बाहर रहे, जबकि दो बार के ओलंपिक पदक विजेता Neeraj Chopra अभी पूरी तरह फिटनेस हासिल करने की प्रक्रिया में हैं। ऐसे में Rohit Yadav, Shivam Lohakare और Kishore Kumar Jena जैसे खिलाड़ियों के लिए राष्ट्रीय टीम में जगह बनाने का अवसर खुला हुआ है।

    तेजस शिरसे की इस उपलब्धि ने भारतीय एथलेटिक्स को नई ऊर्जा दी है और आगामी अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के लिए उम्मीदें भी बढ़ा दी हैं।