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  • यूपी सरकार का बड़ा फैसला: 16 लाख कर्मचारियों का DA 60% हुआ

    यूपी सरकार का बड़ा फैसला: 16 लाख कर्मचारियों का DA 60% हुआ



    नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य कर्मचारियों को राहत देते हुए महंगाई भत्ते (DA) में 2% की बढ़ोतरी का आदेश जारी कर दिया है। इसके साथ ही अब राज्य कर्मचारियों का DA बढ़कर 58% से 60% हो गया है।यह निर्णय करीब 16 लाख सरकारी कर्मचारियों और पेंशन से जुड़े कर्मियों को सीधे लाभ देगा।

    कब से मिलेगा फायदा?
    सरकारी आदेश के अनुसार:

    बढ़ा हुआ DA 1 जनवरी 2026 से लागू माना जाएगा

    इसका भुगतान मई 2026 की सैलरी के साथ नकद किया जाएगा

    जनवरी से अप्रैल 2026 तक का बकाया (arrears) अलग से दिया जाएगा

    किन कर्मचारियों को मिलेगा लाभ?
    यह बढ़ोतरी इन सभी श्रेणियों पर लागू होगी:

    नियमित राज्य कर्मचारी

    सहायता प्राप्त शिक्षण एवं तकनीकी संस्थानों के कर्मचारी

    शहरी स्थानीय निकायों के कर्मचारी

    UGC वेतनमान में कार्यरत अधिकारी

    रिटायर कर्मचारियों के लिए खास प्रावधान
    सरकार ने रिटायरमेंट से जुड़े मामलों पर भी स्पष्ट निर्देश दिए हैं:

    जिनकी सेवा आदेश से पहले या बीच में समाप्त हुई है

    जो आने वाले 6 महीनों में रिटायर होंगे

    उन्हें DA का पूरा बकाया नकद (cash) में दिया जाएगा

    यह फैसला क्यों अहम है?
    महंगाई बढ़ने के बीच DA बढ़ोतरी:

    कर्मचारियों की क्रय शक्ति बढ़ाएगी

    राज्य अर्थव्यवस्था में खपत (consumption) को सपोर्ट करेगी

    केंद्र सरकार के DA संशोधन के बाद एक “aligning step” माना जा रहा है

  • लखनऊ में 60 दिन का अलर्ट: लागू हुई सख्त निषेधाज्ञा,प्रशासन ने कहा-शांति और सुरक्षा सर्वोपरि

    लखनऊ में 60 दिन का अलर्ट: लागू हुई सख्त निषेधाज्ञा,प्रशासन ने कहा-शांति और सुरक्षा सर्वोपरि



    लखनऊ । लखनऊ में प्रशासन ने कानून-व्यवस्था को मजबूत करने और आगामी धार्मिक व प्रशासनिक गतिविधियों को ध्यान में रखते हुए बड़ा कदम उठाया है। शहर में 60 दिनों के लिए निषेधाज्ञा लागू कर दी गई है, जो 19 जुलाई तक प्रभावी रहेगी। इस दौरान कई तरह की गतिविधियों पर सख्त प्रतिबंध रहेंगे और बिना अनुमति किसी भी प्रकार का सार्वजनिक आयोजन करना पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। प्रशासन का कहना है कि यह निर्णय बकरीद, बड़ा मंगल, मोहर्रम जैसे धार्मिक आयोजनों के साथ-साथ आने वाली प्रवेश परीक्षाओं को शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने के उद्देश्य से लिया गया है।

    लखनऊ में 60 दिन का अलर्ट: प्रशासन का बड़ा फैसला
    लखनऊ पुलिस कमिश्नरेट क्षेत्र में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 163 के तहत यह निषेधाज्ञा लागू की गई है। संयुक्त पुलिस आयुक्त (कानून एवं व्यवस्था) बबलू कुमार द्वारा जारी आदेश में साफ कहा गया है कि किसी भी तरह की भीड़, जुलूस या धरना-प्रदर्शन अब बिना अनुमति संभव नहीं होगा। शहर में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर पुलिस को सख्त निगरानी के निर्देश दिए गए हैं।

    5 से अधिक लोगों की सभा पर रोक, अनुमति जरूरी
    आदेश के अनुसार, बिना अनुमति पांच या उससे अधिक लोगों का एकत्र होना, समूह बनाना, जुलूस निकालना या किसी प्रकार का सार्वजनिक आयोजन करना प्रतिबंधित रहेगा। धार्मिक कार्यक्रमों जैसे भंडारा, मजलिस, जुलूस, चल समारोह या सांस्कृतिक आयोजन के लिए पहले से प्रशासनिक अनुमति लेना अनिवार्य होगा। रात 12 बजे से सुबह 6 बजे तक लाउडस्पीकर के उपयोग पर भी पूर्ण प्रतिबंध लगाया गया है।

    संवेदनशील क्षेत्रों में विशेष प्रतिबंध
    निषेधाज्ञा के तहत विधानसभा भवन और उसके आसपास के क्षेत्रों में ट्रैक्टर-ट्रॉली, घोड़ा गाड़ी, ज्वलनशील पदार्थ और हथियार लेकर प्रवेश पर रोक रहेगी। इसके अलावा लालबत्ती चौराहा, पार्क रोड, सिविल अस्पताल, अटल चौक, बंदरिया बाग, गोल्फ क्लब और कैसरबाग जैसे इलाकों में धरना या विरोध प्रदर्शन पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। प्रशासन ने साफ किया है कि इन क्षेत्रों में किसी भी प्रकार की अव्यवस्था बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

    ड्रोन, शूटिंग और सोशल मीडिया पर भी नजर
    लखनऊ में सरकारी भवनों जैसे लोकभवन, मुख्यमंत्री आवास और विधान भवन के आसपास ड्रोन उड़ाने या शूटिंग करने पर भी रोक लगा दी गई है। साथ ही सोशल मीडिया पर भड़काऊ पोस्ट, अफवाह या सांप्रदायिक तनाव फैलाने वाले कंटेंट पर कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी गई है। साइबर सेल को ऐसे मामलों पर लगातार निगरानी रखने के निर्देश दिए गए हैं।

    डिलीवरी स्टाफ और किरायेदारों की जांच अनिवार्य
    ऑनलाइन डिलीवरी सेवाओं जैसे जोमैटो, स्विगी और ब्लिंकिट के कर्मचारियों का पुलिस सत्यापन अनिवार्य कर दिया गया है। साइबर कैफे संचालकों को ग्राहकों का पूरा रिकॉर्ड रखने के निर्देश दिए गए हैं। वहीं मकान मालिकों को भी बिना किरायेदार सत्यापन के मकान न देने की सख्त हिदायत दी गई है।

    सख्त संदेश: नियम तोड़ा तो होगी कार्रवाई
    प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि आदेश का उल्लंघन करने वालों पर भारतीय न्याय संहिता की धारा 223 के तहत कार्रवाई की जाएगी। पुलिस का कहना है कि यह कदम शहर में शांति और सुरक्षा बनाए रखने के लिए जरूरी है।

  • यूपी का ‘धुरंधर’ लउआ गांव: 32 साल तक जिस गांव के पास रही विधायकी

    यूपी का ‘धुरंधर’ लउआ गांव: 32 साल तक जिस गांव के पास रही विधायकी

    नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले का लउआ गांव अपनी अनोखी राजनीतिक विरासत के लिए जाना जाता है। इस गांव से निकले दो नेताओं हृदय नारायण दीक्षित और उदय राज यादव ने पुरवा विधानसभा सीट पर दशकों तक दबदबा बनाए रखा और मिलकर आठ बार जीत दर्ज की।

    उत्तर प्रदेश की राजनीति में उन्नाव जिले का एक छोटा-सा गांव लउआ किसी राजनीतिक ‘हॉटस्पॉट’ से कम नहीं रहा है। पुरवा विधानसभा क्षेत्र के इस गांव ने पिछले कई दशकों में ऐसी राजनीतिक कहानी लिखी है, जिसे राज्य की चुनावी इतिहास में एक अलग पहचान मिली है। वर्ष 1985 से लेकर 2012 तक इस गांव के दो नेताओं ने बारी-बारी से विधानसभा सीट पर कब्जा जमाए रखा और कुल मिलाकर 32 वर्षों तक इस क्षेत्र की राजनीति पर प्रभाव बनाए रखा।

    इस गांव से निकलकर प्रदेश की राजनीति में अपनी मजबूत पहचान बनाने वाले दो प्रमुख नाम हैं—भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और पद्मश्री से सम्मानित हृदय नारायण दीक्षित और समाजवादी पार्टी के नेता उदय राज यादव। दोनों नेताओं ने अलग-अलग राजनीतिक दलों से चुनाव लड़कर पुरवा विधानसभा में लगातार सफलता हासिल की और अपने क्षेत्र को राजनीतिक नक्शे पर खास स्थान दिलाया।

    हृदय नारायण दीक्षित ने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत 1985 में निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में की और पहली ही बार में जीत हासिल की। इसके बाद उन्होंने 1989 में जनता दल, 1991 में जनता पार्टी और 1993 में समाजवादी पार्टी के टिकट पर लगातार जीत दर्ज की। इस तरह उन्होंने पुरवा विधानसभा से चार बार विधायक बनकर अपनी मजबूत राजनीतिक पकड़ साबित की। बाद में 2017 में उन्होंने बीजेपी के टिकट पर भगवंतनगर सीट से भी जीत दर्ज की और विधानसभा अध्यक्ष जैसे महत्वपूर्ण पद तक पहुंचे।

    दूसरी ओर, लउआ गांव के ही उदय राज यादव ने समाजवादी पार्टी के टिकट पर पुरवा विधानसभा में लगातार चार बार—1996, 2002, 2007 और 2012—जीत हासिल की। उनकी लोकप्रियता का आधार उनका मजबूत जनसंपर्क और गांव-गांव तक सीधा जुड़ाव रहा। हालांकि 2017 और 2022 के चुनावों में उन्हें हार का सामना करना पड़ा, लेकिन लंबे समय तक उनका प्रभाव क्षेत्र की राजनीति में बना रहा।

    पुरवा विधानसभा का चुनावी इतिहास भी काफी दिलचस्प रहा है। वर्ष 1952 से 2022 तक इस सीट पर कुल 18 विधानसभा चुनाव हुए, जिनमें से 8 बार जीत लउआ गांव के इन दोनों नेताओं के खाते में गई। यह आंकड़ा अपने आप में इस गांव के राजनीतिक प्रभाव को दर्शाता है।

    इस क्षेत्र की राजनीति की खास बात यह रही है कि यहां पार्टी से ज्यादा व्यक्तिगत छवि और जनता से जुड़ाव का असर देखने को मिलता रहा है। लोधी और यादव जाति के मतदाताओं की बड़ी संख्या, साथ ही सवर्ण और मुस्लिम वोटरों की निर्णायक भूमिका ने चुनावी समीकरणों को हमेशा रोचक बनाए रखा।

    दोनों नेताओं की सफलता का सबसे बड़ा कारण उनका निरंतर जनता से संपर्क और जमीनी स्तर पर मजबूत पकड़ रही। जहां हृदय नारायण दीक्षित अपनी वैचारिक और संगठनात्मक राजनीति के लिए जाने जाते हैं, वहीं उदय राज यादव जनसंपर्क आधारित समाजवादी राजनीति के प्रतीक रहे हैं।

    लउआ गांव की यह राजनीतिक कहानी आज भी यूपी की चुनावी राजनीति में एक मिसाल के रूप में देखी जाती है, जहां एक छोटे से गांव ने दो नेताओं के दम पर दशकों तक सत्ता समीकरणों को प्रभावित किया।

  • इकबाल अंसारी की मांग: गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित किया जाए, कुर्बानी को बताया अनुचित

    इकबाल अंसारी की मांग: गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित किया जाए, कुर्बानी को बताया अनुचित

    नई दिल्ली। बाबरी मस्जिद-राम जन्मभूमि मामले के पूर्व वादी इकबाल अंसारी ने गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने और उसकी कुर्बानी पर पूरी तरह रोक लगाने की मांग की है। उन्होंने कहा कि सभी धर्मों को एक-दूसरे की भावनाओं का सम्मान करना चाहिए और गाय का आदर करना सामाजिक एकता के लिए जरूरी है।

    उत्तर प्रदेश में बकरीद के मौके पर गाय की कुर्बानी और सार्वजनिक धार्मिक गतिविधियों को लेकर चल रही बहस के बीच बाबरी मस्जिद-राम जन्मभूमि केस के पूर्व वादी इकबाल अंसारी का बड़ा बयान सामने आया है। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा है कि गाय को “गौमाता” माना जाता है और इसका सम्मान हर नागरिक की जिम्मेदारी है, चाहे वह किसी भी धर्म का क्यों न हो।

    इकबाल अंसारी ने मांग की है कि सरकार गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करे, ताकि इसके संरक्षण और सम्मान को और मजबूती मिल सके। उन्होंने कहा कि गाय केवल एक पशु नहीं बल्कि भारतीय संस्कृति और आस्था से जुड़ी हुई है। ऐसे में उसकी कुर्बानी किसी भी स्थिति में उचित नहीं ठहराई जा सकती।

    उन्होंने यह भी कहा कि हम भारतीय मुसलमान हैं और देश की साझा परंपराओं का सम्मान करना हमारी जिम्मेदारी है। उनके अनुसार समाज में शांति और भाईचारे को बनाए रखने के लिए जरूरी है कि सभी धर्म एक-दूसरे की भावनाओं को समझें और उसका सम्मान करें। उन्होंने यह भी जोड़ा कि पड़ोसी धर्म की आस्था का ध्यान रखना भी सामाजिक सद्भाव का हिस्सा है।

    इकबाल अंसारी ने कहा कि गाय का दूध स्वास्थ्य के लिए बेहद लाभकारी है और इसे प्रकृति का एक उपयोगी उपहार माना जाता है। इसलिए गाय का संरक्षण और सम्मान और भी जरूरी हो जाता है। उन्होंने यह भी दावा किया कि इस्लाम भी निर्दोष और उपयोगी जीवों के प्रति क्रूरता को बढ़ावा नहीं देता, और समाज के कुछ लोग गलत कार्यों से पूरे समुदाय को बदनाम करते हैं।

    उन्होंने समाज के लोगों से अपील करते हुए कहा कि गायों के साथ किसी भी प्रकार का गलत व्यवहार नहीं होना चाहिए और जो भी ऐसा करता है, उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए। उनका कहना है कि इस मुद्दे को राजनीति से दूर रखना चाहिए और केवल सामाजिक सौहार्द के नजरिए से देखा जाना चाहिए।

    पूर्व वादी ने यह भी कहा कि यदि समाज में भाईचारा बनाए रखना है तो सभी धर्मों को एक-दूसरे की भावनाओं का सम्मान करना होगा। उन्होंने अयोध्या के संतों की राय का भी समर्थन करते हुए कहा कि धर्मों के बीच संवाद और सम्मान ही देश को मजबूत बनाता है।

    इस बयान पर विभिन्न राजनीतिक और सामाजिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आ रही हैं। कुछ लोग इसे सांप्रदायिक सौहार्द की दिशा में सकारात्मक कदम बता रहे हैं, तो कुछ इसे धार्मिक और राजनीतिक बहस से जोड़कर देख रहे हैं।

  • मौलाना मदनी बोले- गाय को दिया जाए राष्ट्रीय पशु का दर्जा….इससे मॉब लिंचिंग व हिंसा रुकेगी

    मौलाना मदनी बोले- गाय को दिया जाए राष्ट्रीय पशु का दर्जा….इससे मॉब लिंचिंग व हिंसा रुकेगी


    सहारनपुर।
    जमीयत उलमा-ए-हिंद (Jamiat Ulama-e-Hind) के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी (Maulana Arshad Madani) ने गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने की मांग की है। उन्होंने कहा, इससे गाय के नाम पर होने वाली मॉब लिंचिंग और हिंसा (Mob lynching and violence) पर रोक लग सकती है। सरकार गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने से क्यों बच रही है, यह बड़ा सवाल है।

    मदनी ने कहा, गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने पर मुसलमानों को कोई आपत्ति नहीं होगी, बल्कि उन्हें खुशी होगी कि समाज में नफरत और तनाव कम होगा। मदनी ने कहा कि गाय के मुद्दे को राजनीतिक और भावनात्मक हथियार बना दिया गया है।

  • प्रयागराज में गंगा नदी पर बनेगा नया पुल, फाफामऊ जाम से मिलेगी बड़ी राहत

    प्रयागराज में गंगा नदी पर बनेगा नया पुल, फाफामऊ जाम से मिलेगी बड़ी राहत


    नई दिल्ली। प्रयागराज में गंगा नदी पर फाफामऊ पुल के समानांतर एक और नया पुल बनाया जाएगा, जिससे शहर में जाम की समस्या से लोगों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। इस परियोजना के लिए जिलाधिकारी मनीष कुमार वर्मा ने राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) को विस्तृत प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिए हैं।

    जानकारी के अनुसार, यह नया पुल पुराने फाफामऊ पुल के पास गंगा नदी के अपस्ट्रीम हिस्से में प्रस्तावित है। इसके बनने से प्रयागराज में गंगा नदी पर कुल पुलों की संख्या बढ़कर 10 हो जाएगी। अधिकारियों का मानना है कि इस नए पुल के निर्माण से गंगापार क्षेत्र और शहर के उत्तरी हिस्से के बीच आवागमन पहले की तुलना में काफी आसान हो जाएगा और लोगों को जाम से बड़ी राहत मिलेगी।

    इस परियोजना को लेकर प्रशासन का कहना है कि बढ़ते ट्रैफिक दबाव को देखते हुए यह पुल बेहद जरूरी है, जिससे भविष्य में यातायात व्यवस्था को सुचारु रखा जा सकेगा।

  • झांसी दौरे पर कारागार मंत्री दारा सिंह चौहान का बयान: नमाज और पूजा के लिए स्थान निर्धारित, जेल सुधार पर दिया जोर

    झांसी दौरे पर कारागार मंत्री दारा सिंह चौहान का बयान: नमाज और पूजा के लिए स्थान निर्धारित, जेल सुधार पर दिया जोर


    झांसी । झांसी में प्रदेश सरकार के कारागार मंत्री दारा सिंह चौहान ने अपने दौरे के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सड़क पर नमाज को लेकर दिए गए बयान का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि नमाज हो या पूजा, सभी धार्मिक कार्यों के लिए स्थान निर्धारित हैं और इन्हें केवल तय स्थानों पर ही किया जाना चाहिए।

    मंत्री दारा सिंह चौहान सर्किट हाउस करीब एक घंटे की देरी से पहुंचे। उन्होंने देरी का कारण बताते हुए कहा कि वे कानपुर देहात में एक स्कूल बस हादसे में राहत और बचाव कार्य में शामिल थे, जिसकी वजह से उनका कार्यक्रम प्रभावित हुआ। झांसी पहुंचने पर उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया, जहां जेल अधीक्षक समेत अन्य अधिकारियों ने उनका स्वागत किया।

    मीडिया से बातचीत के दौरान कारागार मंत्री ने कहा कि प्रदेश की भाजपा सरकार जेल प्रशासन को सिर्फ बंदियों को रखने तक सीमित नहीं मानती, बल्कि उनका नैतिक और सामाजिक सुधार भी सुनिश्चित कर रही है। उन्होंने कहा कि जेलों में बंदियों के पुनर्वास पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है ताकि वे रिहाई के बाद समाज में सम्मानपूर्वक जीवन शुरू कर सकें।

    प्रदेश की जेलों में ओवरक्राउडिंग के सवाल पर दारा सिंह चौहान ने कहा कि यह समस्या पहले की तुलना में काफी कम हुई है और सरकार लगातार नई जेलों के निर्माण पर काम कर रही है। उन्होंने दावा किया कि आने वाले समय में यह समस्या पूरी तरह समाप्त हो जाएगी।

    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बयान का समर्थन करते हुए उन्होंने कहा कि धार्मिक ग्रंथों में भी पूजा और नमाज के लिए निश्चित स्थानों का उल्लेख है, इसलिए इसे लेकर जो कहा गया है वह सही है। वहीं, समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव के बयान पर पूछे गए सवाल पर उन्होंने अनभिज्ञता जताई।

  • झांसी में दर्दनाक हादसा: खाना खाने के बाद युवक ने लगाई फांसी, पत्नी ने देखा शव

    झांसी में दर्दनाक हादसा: खाना खाने के बाद युवक ने लगाई फांसी, पत्नी ने देखा शव



    झांसी । झांसी में एक दर्दनाक घटना सामने आई है, जहां एक 40 वर्षीय युवक ने अपने घर में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। घटना कोतवाली थाना क्षेत्र के दतिया गेट बाहर नकटा चौपड़ा मोहल्ले की है, जिससे पूरे इलाके में सनसनी फैल गई।

    जानकारी के अनुसार मृतक खेमचंद कुशवाहा पुत्र देवीप्रसाद कुशवाहा थे, जो ऑटो किराए पर चलवाने का काम करते थे। परिजनों के मुताबिक मंगलवार रात उन्होंने सामान्य रूप से परिवार के साथ खाना खाया और इसके बाद अपने ऊपर वाले कमरे में सोने चले गए। सब कुछ सामान्य लग रहा था, लेकिन कुछ ही घंटे बाद यह दुखद घटना सामने आ गई।

    रात करीब 11 बजे जब उनकी पत्नी प्रीति कमरे में पहुंची तो उन्होंने देखा कि खेमचंद फंदे से लटके हुए हैं। यह दृश्य देखकर वह चीख पड़ीं, जिसके बाद शोर सुनकर आसपास के लोग मौके पर पहुंच गए। तुरंत परिजनों ने पुलिस को सूचना दी।

    सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। फिलहाल आत्महत्या के कारणों का पता नहीं चल सका है और पुलिस पूरे मामले की जांच में जुट गई है।

    परिजनों के अनुसार मृतक खेमचंद का 6 साल का एक बेटा देवांश है। घटना के बाद परिवार में कोहराम मचा हुआ है और पत्नी प्रीति का रो-रोकर बुरा हाल है। अचानक हुई इस घटना से पूरा परिवार सदमे में है और गांव-मोहल्ले में भी शोक का माहौल है।

  • झांसी के गुरसराय CHC में मरीजों की भीड़, वायरल फीवर और डायरिया के मामलों में तेजी

    झांसी के गुरसराय CHC में मरीजों की भीड़, वायरल फीवर और डायरिया के मामलों में तेजी


    झांसी। झांसी के गुरसराय स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) में इन दिनों मरीजों की संख्या में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। अस्पताल में रोजाना बड़ी संख्या में लोग इलाज के लिए पहुंच रहे हैं, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं पर अतिरिक्त दबाव देखा जा रहा है। खासकर वायरल फीवर, उल्टी-दस्त और अन्य मौसमी बीमारियों के मरीजों की संख्या में तेजी आई है।

    अस्पताल के पर्चा काउंटर पर कार्यरत नमन और मनोज कुमार के अनुसार, प्रतिदिन लगभग 300 मरीजों के पर्चे बनाए जा रहे हैं। वहीं ओपीडी में आने वाले मरीजों की संख्या भी 300 से अधिक पहुंच रही है, जिससे पूरे केंद्र में भीड़ की स्थिति बनी रहती है।

    CHC के चिकित्सक डॉ. रवि अनुरागी ने जानकारी दी कि वर्तमान में प्रतिदिन 400 से अधिक मरीज उपचार के लिए पहुंच रहे हैं। इनमें सबसे ज्यादा मामले वायरल फीवर के हैं। इसके अलावा उल्टी, दस्त, टाइफाइड, खुजली, घुटनों में दर्द और दमा (अस्थमा) जैसी समस्याओं से पीड़ित मरीज भी बड़ी संख्या में इलाज के लिए आ रहे हैं।

    डॉ. अनुरागी ने बताया कि मौसमी बदलाव और संक्रमण के कारण ऐसे मामले बढ़ रहे हैं और लोगों को विशेष सतर्कता बरतने की जरूरत है। उन्होंने सलाह दी कि लोग पानी को उबालकर या फिल्टर करके ही पिएं और आसपास साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें ताकि मच्छरों और संक्रमण से बचाव हो सके।

    उन्होंने यह भी कहा कि खांसते या छींकते समय मुंह और नाक को टिश्यू या रूमाल से ढकना चाहिए और इस्तेमाल के बाद टिश्यू को तुरंत नष्ट कर देना चाहिए। यदि टिश्यू उपलब्ध न हो तो कोहनी का इस्तेमाल करना बेहतर विकल्प है। साथ ही हाथों को नियमित रूप से साबुन से अच्छी तरह धोने की सलाह दी गई है।

    चिकित्सक ने यह भी अपील की कि लोग अपने तौलिये, बर्तन और अन्य व्यक्तिगत वस्तुएं साझा न करें, क्योंकि इससे संक्रमण फैलने का खतरा बढ़ जाता है। घर और कार्यस्थल पर दरवाजों के हैंडल, मोबाइल फोन और अन्य बार-बार छुई जाने वाली सतहों को नियमित रूप से साफ और कीटाणुरहित करना भी जरूरी है।

    स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से अपील की है कि वे लक्षण दिखाई देने पर देरी न करें और तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पर जाकर जांच और उपचार कराएं, ताकि बीमारी को समय रहते नियंत्रित किया जा सके।

  • मायावती के घर पहुंचे कांग्रेस नेताओं को लगा झटका, BSP ने नहीं दी एंट्री; कांग्रेस ने जारी किया नोटिस

    मायावती के घर पहुंचे कांग्रेस नेताओं को लगा झटका, BSP ने नहीं दी एंट्री; कांग्रेस ने जारी किया नोटिस


    नई दिल्ली। Mayawati के लखनऊ स्थित आवास पर कांग्रेस के कुछ दलित नेताओं के पहुंचने से उत्तर प्रदेश की राजनीति में नया विवाद खड़ा हो गया है। बिना किसी तय कार्यक्रम के पहुंचे प्रतिनिधिमंडल को मायावती से मुलाकात नहीं मिल सकी, क्योंकि उनके आवास पर प्रवेश की अनुमति नहीं दी गई।

    यह घटना ऐसे समय पर हुई है जब यूपी की राजनीति में विपक्षी दलों के बीच संभावित गठबंधन और समीकरणों को लेकर लगातार चर्चाएं चल रही हैं। इसी बीच कांग्रेस पार्टी ने अपने नेताओं के इस अचानक दौरे को लेकर सख्त रुख अपनाते हुए उन्हें नोटिस जारी कर दिया है।

    क्या हुआ था पूरा मामला?
    कांग्रेस के अनुसूचित जाति विभाग के कुछ नेता लखनऊ में बैठक के बाद अचानक Mayawati से शिष्टाचार मुलाकात के लिए उनके आवास पहुंचे थे। हालांकि, यह मुलाकात पहले से तय नहीं थी, जिसके चलते उन्हें अंदर जाने की अनुमति नहीं मिली।

    प्रतिनिधिमंडल में शामिल नेताओं ने दावा किया कि यह केवल एक शिष्टाचार भेंट थी और इसका कोई राजनीतिक संदेश नहीं था। लेकिन पार्टी नेतृत्व ने इस पूरे घटनाक्रम को अनुशासनहीनता मानते हुए नोटिस जारी कर दिया।

    राजनीतिक मायने भी निकाले जा रहे
    यह घटना ऐसे समय में हुई है जब यूपी में विपक्षी दलों के बीच गठबंधन की चर्चाएं तेज हैं। कुछ ही घंटों पहले समाजवादी पार्टी प्रमुख Akhilesh Yadav ने 2027 चुनाव को लेकर कांग्रेस के साथ सहयोग के संकेत दिए थे। ऐसे में इस घटना ने राजनीतिक हलचल और बढ़ा दी है।

    कांग्रेस की सफाई
    कांग्रेस नेताओं का कहना है कि यह सिर्फ एक अचानक लिया गया शिष्टाचार निर्णय था और इसका कोई राजनीतिक उद्देश्य नहीं था। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि राहुल गांधी को लेकर कोई संदेश देने जैसी बात पूरी तरह गलत है।