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  • हापुड़ में प्रॉपर्टी डीलर की दिनदहाड़े हत्या से सनसनी, बीजेपी नेता समेत 8 पर केस दर्ज, एनकाउंटर की मांग पर अड़ी परिवार

    हापुड़ में प्रॉपर्टी डीलर की दिनदहाड़े हत्या से सनसनी, बीजेपी नेता समेत 8 पर केस दर्ज, एनकाउंटर की मांग पर अड़ी परिवार




    नई दिल्ली। हापुड़ में प्रॉपर्टी विवाद को लेकर एक दर्दनाक वारदात सामने आई है, जहां सोमवार रात शादी समारोह से लौट रहे प्रॉपर्टी डीलर अतुल तोमर (32) की गोली मारकर हत्या कर दी गई। यह घटना पिलखुआ थाना क्षेत्र के रिलायंस रोड इलाके में हुई, जिससे पूरे क्षेत्र में सनसनी फैल गई है।

    जानकारी के अनुसार अतुल तोमर गाजियाबाद के भोजपुर में एक शादी समारोह में शामिल होकर लौट रहे थे, तभी रास्ते में बाइक सवार बदमाशों ने उनकी कार को रोक लिया। आरोप है कि हमलावरों ने पहले कार का शीशा तोड़ने की कोशिश की और फिर ताबड़तोड़ फायरिंग कर दी, जिसमें एक गोली अतुल के सीने में लग गई। गंभीर हालत में उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।

    परिजनों का आरोप है कि पिछले तीन साल से एक प्लॉट को लेकर विवाद चल रहा था, जिसमें कुछ स्थानीय प्रॉपर्टी डीलर शामिल थे। इसी रंजिश के चलते हत्या को अंजाम दिया गया है। परिवार ने यह भी आरोप लगाया है कि धमकियों के बावजूद पुलिस ने पहले गंभीरता से कार्रवाई नहीं की।

    इस मामले में पुलिस ने बीजेपी जिला मंत्री नवीन तोमर समेत 8 लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की है। पुलिस के अनुसार, दो आरोपियों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है, जबकि मुख्य आरोपी मंजीत सहित अन्य फरार हैं। पुलिस टीम लगातार दबिश दे रही है और सीसीटीवी फुटेज व कॉल डिटेल्स के आधार पर जांच आगे बढ़ाई जा रही है।

    परिजनों में गुस्सा है और उन्होंने आरोपियों के एनकाउंटर की मांग करते हुए अंतिम संस्कार रोक दिया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जल्द ही सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर मामले का खुलासा किया जाएगा।

  • यूपी में बड़ा खुलासा: सोशल मीडिया और विदेशी नेटवर्क के जरिए युवाओं के ब्रेनवॉश का खतरनाक मॉडल सामने आया

    यूपी में बड़ा खुलासा: सोशल मीडिया और विदेशी नेटवर्क के जरिए युवाओं के ब्रेनवॉश का खतरनाक मॉडल सामने आया



    नई दिल्ली। यूपी में पिछले कुछ वर्षों में एटीएस और पुलिस की जांचों के दौरान एक ऐसा गंभीर और जटिल पैटर्न सामने आया है, जिसमें सोशल मीडिया, हनीट्रैप, आर्थिक लालच और विदेशी फंडिंग के जरिए युवाओं को पहले प्रभावित किया गया और फिर कथित रूप से उन्हें अवैध गतिविधियों में इस्तेमाल करने की कोशिश की गई। जांच एजेंसियों के अनुसार यह पूरा नेटवर्क एक संगठित तरीके से काम करता है, जिसमें डिजिटल प्लेटफॉर्म्स का इस्तेमाल करके ब्रेनवॉश और संपर्क स्थापित किए जाते हैं।

    रिपोर्ट्स और जांचों के मुताबिक कुछ मामलों में यह भी सामने आया है कि इस नेटवर्क में ऐसे युवाओं को शामिल किया गया जिनकी पहचान बदलकर या फर्जी नामों के जरिए उन्हें आगे इस्तेमाल किया गया। एटीएस की कार्रवाई में कुछ ऐसे मॉड्यूल पकड़े गए हैं जिनमें धर्मांतरण से जुड़े मामलों के साथ-साथ संदिग्ध विदेशी संपर्क और फंडिंग के संकेत मिले हैं।

    वर्ष 2021 में उत्तर प्रदेश में एक बड़ा मामला सामने आया था, जिसमें उमर गौतम और मुफ्ती काजी जहांगीर आलम कासमी की गिरफ्तारी हुई थी। आरोप था कि ये लोग विदेशी फंडिंग के जरिए ट्रस्ट और संस्थानों के माध्यम से आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को विभिन्न प्रलोभन देकर कथित रूप से धर्मांतरण गतिविधियों में शामिल कर रहे थे। इसी तरह मौलाना कलीम सिद्दीकी का नाम भी एक अलग मामले में सामने आया था, जिसमें जांच एजेंसियों ने अवैध नेटवर्क से जुड़े आरोप लगाए थे।

    हाल के वर्षों में बलरामपुर और आगरा जैसे जिलों में भी इसी तरह के अलग-अलग मामले सामने आए हैं, जहां सोशल मीडिया और डिजिटल माध्यमों के जरिए संपर्क बनाकर लोगों को प्रभावित करने और कट्टरपंथी सामग्री तक पहुंचाने की बात जांच में सामने आई है। कुछ मामलों में विदेश से फंडिंग और संपर्क के संकेत भी जांच एजेंसियों द्वारा बताए गए हैं, हालांकि हर केस की कानूनी प्रक्रिया अभी जारी है।

    जांच एजेंसियों के अनुसार ऐसे नेटवर्क आमतौर पर तीन चरणों में काम करते हैं—पहला भावनात्मक या डिजिटल संपर्क, दूसरा आर्थिक या सामाजिक प्रलोभन, और तीसरा विचारधारा आधारित प्रभाव। इसके लिए टेलीग्राम, इंस्टाग्राम और अन्य मैसेजिंग ऐप्स का इस्तेमाल किए जाने की बात सामने आई है।

    एटीएस का कहना है कि यह एक गंभीर सुरक्षा से जुड़ा मुद्दा है, जिसकी जांच लगातार जारी है और कई मामलों में गिरफ्तारियां और पूछताछ की प्रक्रिया चल रही है। हालांकि, हर मामले में निष्कर्ष अदालत और विस्तृत जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।

  • धामपुर शुगर मिल के संस्थापक विजय कुमार गोयल का निधन, किडनी दान जैसी मिसाल से समाज में छोड़ी अमिट छाप

    धामपुर शुगर मिल के संस्थापक विजय कुमार गोयल का निधन, किडनी दान जैसी मिसाल से समाज में छोड़ी अमिट छाप





    नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले स्थित धामपुर शुगर मिल्स (DSM) के संस्थापक और वरिष्ठ उद्योगपति कुंवर विजय कुमार गोयल का 86 वर्ष की आयु में दिल्ली में निधन हो गया। वे लंबे समय से बीमार चल रहे थे और रविवार को उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके निधन से उद्योग जगत और स्थानीय क्षेत्र में शोक की लहर है।

    विजय कुमार गोयल को उत्तर भारत के चीनी उद्योग का एक प्रमुख स्तंभ माना जाता था। उन्होंने धामपुर शुगर मिल सहित कई शुगर यूनिट्स की स्थापना की और गन्ना उत्पादन व चीनी उद्योग में आधुनिक तकनीकों को बढ़ावा दिया। उनके नेतृत्व में यह उद्योग न सिर्फ मजबूत हुआ बल्कि हजारों लोगों को रोजगार भी मिला। उन्हें उनके योगदान के लिए “चीनी उद्योग का भीष्म पितामह” भी कहा जाता था।

    गोयल केवल एक सफल उद्योगपति ही नहीं बल्कि एक संवेदनशील समाजसेवी भी थे। उनके जीवन की सबसे प्रेरणादायक घटना तब सामने आई जब उन्होंने एक अनजान व्यक्ति को अपनी एक किडनी दान कर दी थी। बताया जाता है कि उन्होंने अखबार में एक मेधावी इंजीनियर की गंभीर हालत के बारे में पढ़ने के बाद बिना किसी को बताए हैदराबाद जाकर किडनी ट्रांसप्लांट कर दिया था। यह घटना उनके निस्वार्थ स्वभाव का बड़ा उदाहरण मानी जाती है।

    उनके परिवार और कर्मचारियों के अनुसार, विजय कुमार गोयल हमेशा अपने उद्योग से जुड़े लोगों और उनके परिवारों के कल्याण के लिए काम करते रहे। वे कर्मचारियों के बच्चों की शिक्षा, खेल और विकास में विशेष रुचि लेते थे। उन्होंने स्क्वैश जैसे खेलों के लिए सुविधाएं भी विकसित कराईं, जिससे कई युवा खिलाड़ियों को राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचने का मौका मिला।

    गोयल को उनके उत्कृष्ट कार्यों के लिए पिछले वर्ष उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड से भी सम्मानित किया गया था। उनका पूरा जीवन उद्योग, सेवा और मानवता के समर्पण का प्रतीक माना जाता है।

    उनका अंतिम संस्कार दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट में किया गया, जहां उनके पुत्र गौतम गोयल ने मुखाग्नि दी। उद्योग जगत के कई दिग्गजों, कर्मचारियों और शुभचिंतकों ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।

    विजय कुमार गोयल का निधन न केवल एक उद्योगपति की विदाई है, बल्कि एक ऐसे व्यक्तित्व का अंत है जिसने अपने काम और सेवा दोनों से समाज में गहरी छाप छोड़ी।

  • झांसी में गर्मी का कहर: 39°C पार तापमान, तेज धूप और लू से जनजीवन बेहाल

    झांसी में गर्मी का कहर: 39°C पार तापमान, तेज धूप और लू से जनजीवन बेहाल



    नई दिल्ली। झांसी में मंगलवार को मौसम ने एक बार फिर गर्मी का तीखा रूप दिखाया, जहां सुबह से ही तेज धूप और गर्म हवाओं ने लोगों को परेशान कर दिया। शहर में सुबह 11 बजे तक तापमान 39 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जिससे दिन की शुरुआत ही झुलसाने वाली गर्मी के साथ हुई। जैसे-जैसे दिन आगे बढ़ा, सड़कों पर गर्मी का असर और ज्यादा महसूस किया गया और दोपहर होते-होते लोगों की आवाजाही काफी कम हो गई।

    भीषण गर्मी के कारण बाजारों और चौराहों पर सामान्य दिनों की तुलना में भीड़ कम नजर आई। लोग जरूरी काम होने पर ही घरों से बाहर निकल रहे हैं। तेज धूप और लू से बचने के लिए कई लोग मुंह पर कपड़ा बांधकर या सिर ढककर बाहर निकलते दिखे। सबसे ज्यादा असर दिहाड़ी मजदूरों, रिक्शा चालकों और सड़क पर काम करने वाले लोगों पर पड़ा, जो छांव और पेड़ों के नीचे राहत तलाशते नजर आए।

    गर्मी बढ़ने के साथ ही शहर में ठंडे पेय पदार्थों की मांग भी बढ़ गई है। शिकंजी, जूस और ठंडे पेय की दुकानों पर लोगों की भीड़ देखी जा रही है, क्योंकि लोग गर्मी से राहत पाने के लिए इनका सहारा ले रहे हैं। मौसम विभाग के अनुसार दिन के आगे बढ़ने के साथ तापमान में और वृद्धि हो सकती है और दोपहर बाद पारा 40 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचने की संभावना है।

    हालांकि मौसम विभाग ने थोड़ी राहत की संभावना भी जताई है। भारतीय मौसम विभाग (IMD) के अनुसार दोपहर बाद आसमान में बादल छा सकते हैं और हल्की बारिश भी हो सकती है। यदि ऐसा होता है तो लोगों को कुछ समय के लिए गर्मी और उमस से राहत मिल सकती है, लेकिन फिलहाल पूरे दिन तेज गर्मी और उमस बने रहने का अनुमान है।

    मौसम विभाग ने लोगों से अपील की है कि वे धूप में अनावश्यक बाहर निकलने से बचें, पर्याप्त पानी पीते रहें और गर्मी से बचाव के सभी जरूरी उपाय अपनाएं, ताकि लू और डिहाइड्रेशन जैसी समस्याओं से बचा जा सके।

  • यूपी की सियासत में बयानबाज़ी का तुफान: राजभर ने अखिलेश पर साधा निशाना, सांसद के बयान से मचा बवाल

    यूपी की सियासत में बयानबाज़ी का तुफान: राजभर ने अखिलेश पर साधा निशाना, सांसद के बयान से मचा बवाल



    नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर तीखी बयानबाज़ी देखने को मिली है, जहां सपा सांसद अजेंद्र सिंह लोधी द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर की गई कथित अमर्यादित टिप्पणी के बाद सियासी माहौल गरमा गया है। इस बयान को लेकर एनडीए सहयोगी और यूपी सरकार में मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने समाजवादी पार्टी और इसके अध्यक्ष अखिलेश यादव पर कड़ा हमला बोला है।

    ओमप्रकाश राजभर ने आरोप लगाया कि सपा सांसद का बयान व्यक्तिगत नहीं बल्कि पार्टी नेतृत्व की सोच का परिणाम है। उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव अपने समर्थकों और नेताओं पर गहरा प्रभाव रखते हैं और उनके अनुसार ही पार्टी का राजनीतिक व्यवहार तय होता है। राजभर ने अपने बयान में यह भी कहा कि विपक्षी दलों में अक्सर नेताओं के बीच बयानबाज़ी और कटु भाषा देखने को मिलती है, जो लोकतांत्रिक मर्यादाओं के खिलाफ है।

    राजभर ने सोशल मीडिया पर टिप्पणी करते हुए सपा नेतृत्व की आलोचना की और मांग की कि इस तरह के बयानों के लिए जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि जनप्रतिनिधियों से अपेक्षा की जाती है कि वे सार्वजनिक मंचों पर मर्यादित भाषा का इस्तेमाल करें, ताकि राजनीतिक संवाद की गरिमा बनी रहे।

    यह विवाद उस समय और बढ़ गया जब सपा सांसद अजेंद्र सिंह लोधी ने एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री के खिलाफ तीखी टिप्पणी की और सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए। उन्होंने बिजली व्यवस्था, स्मार्ट मीटर, कृषि नीतियों और अन्य मुद्दों को लेकर सरकार की आलोचना की और विपक्षी रुख अपनाया।

    हालांकि, इस पूरे मामले पर समाजवादी पार्टी की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले समय में यह मुद्दा और बड़ा राजनीतिक विवाद बन सकता है।

    उत्तर प्रदेश की राजनीति में सत्ता और विपक्ष के बीच यह जुबानी जंग एक बार फिर यह दिखाती है कि चुनावी माहौल नजदीक आते ही बयानबाज़ी और आरोप-प्रत्यारोप तेज हो जाते हैं, जिससे राजनीतिक तापमान लगातार बढ़ता जा रहा है।

  • ऊर्जा संकट और पीएम अपील पर सियासी संग्राम: मायावती ने उठाए आर्थिक हालात पर सवाल, कोरोना काल की दिलाई याद

    ऊर्जा संकट और पीएम अपील पर सियासी संग्राम: मायावती ने उठाए आर्थिक हालात पर सवाल, कोरोना काल की दिलाई याद




    नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हालिया अपील, जिसमें उन्होंने वैश्विक ऊर्जा संकट और अंतरराष्ट्रीय हालातों को देखते हुए देशवासियों से संयमित जीवनशैली अपनाने की बात कही थी, उस पर अब राजनीतिक बहस तेज हो गई है। पीएम मोदी ने लोगों से पेट्रोल-डीजल की खपत कम करने, सार्वजनिक परिवहन और कार पूलिंग अपनाने, एक साल तक विदेश यात्रा सीमित करने, सोने की खरीद पर नियंत्रण रखने और वर्क फ्रॉम होम को बढ़ावा देने जैसी अपीलें की थीं। उनका कहना था कि इससे देश की ऊर्जा खपत घटेगी और विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव कम होगा।

    इस अपील के बाद बहुजन समाज पार्टी (BSP) प्रमुख और उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने सोशल मीडिया पर बयान जारी करते हुए कहा कि देश पहले ही कोरोना महामारी के आर्थिक झटकों से उबर रहा है और आम जनता अभी भी रोज़गार और महंगाई के दबाव में जी रही है। ऐसे में सरकार को केवल संयम की अपील करने के बजाय लोगों को वास्तविक आर्थिक राहत देने की दिशा में ठोस कदम उठाने चाहिए।

    मायावती ने अपने बयान में कहा कि देश के करोड़ों गरीब और मेहनतकश लोग पहले ही कठिन परिस्थितियों से गुजर रहे हैं और उनके पास अब और ज्यादा आर्थिक बोझ सहने की क्षमता नहीं बची है। उन्होंने यह भी कहा कि मौजूदा वैश्विक तनाव और ऊर्जा संकट के कारण आर्थिक स्थिति और बिगड़ने की आशंका है, जिसका सीधा असर आम जनता के जीवन पर पड़ेगा।

    उन्होंने कोरोना काल को याद करते हुए कहा कि उस समय भी जनता ने भारी कठिनाइयों का सामना किया था और आज भी उसका असर पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। ऐसे में सरकार की जिम्मेदारी बनती है कि वह केवल सुझाव या अपील देने के बजाय गरीब और मध्यम वर्ग के लिए ठोस आर्थिक सहायता और राहत योजनाएं लागू करे।

    पीएम मोदी की अपील का उद्देश्य ऊर्जा बचत और आयात पर निर्भरता कम करना बताया जा रहा है, खासकर ऐसे समय में जब पश्चिम एशिया में तनाव और वैश्विक तेल बाजार में अस्थिरता बनी हुई है। सरकार का मानना है कि घरेलू स्तर पर संयम और संसाधनों के बेहतर उपयोग से आर्थिक दबाव को कम किया जा सकता है।

    कुल मिलाकर इस मुद्दे ने एक बार फिर से देश में आर्थिक नीतियों और जनता पर पड़ने वाले असर को लेकर राजनीतिक बहस को तेज कर दिया है, जहां एक ओर सरकार संयम और बचत पर जोर दे रही है, वहीं विपक्ष गरीब और मध्यम वर्ग की वास्तविक स्थिति को केंद्र में रखकर राहत की मांग कर रहा है।

  • झांसी बुंदेलखंड यूनिवर्सिटी में लॉ छात्र से मारपीट का मामला: विरोध के बाद गार्ड सस्पेंड, छात्रों का धरना जारी

    झांसी बुंदेलखंड यूनिवर्सिटी में लॉ छात्र से मारपीट का मामला: विरोध के बाद गार्ड सस्पेंड, छात्रों का धरना जारी



    नई दिल्ली। झांसी स्थित Bundelkhand University में लॉ छात्र के साथ हुई कथित मारपीट का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। घटना के बाद छात्रों के भारी विरोध और प्रदर्शन के बीच आरोपी सिक्योरिटी गार्ड को निलंबित कर दिया गया है।

    क्या है पूरा मामला?
    घटना विश्वविद्यालय के परीक्षा भवन में हुई बताई जा रही है, जहां लॉ विभाग के छात्र परीक्षा देने पहुंचे थे। इसी दौरान सुरक्षा गार्ड और छात्रों के बीच विवाद हो गया, जो बाद में मारपीट में बदल गया। घटना का वीडियो सामने आने के बाद मामला और गंभीर हो गया।

    छात्रों का गुस्सा और प्रदर्शन
    आरोपी गार्ड पर कार्रवाई न होने से नाराज छात्रों ने सोमवार को  यूनिवर्सिटी के मुख्य गेट पर ताला लगा दिया। करीब 5 घंटे तक धरना प्रदर्शन किया। प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की  इस दौरान पुलिस और छात्रों के बीच हल्की झड़प भी हुई।

    गार्ड सस्पेंड, लेकिन छात्र अब भी नाराज
    बढ़ते विरोध के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने आरोपी सिक्योरिटी गार्ड अमित को निलंबित कर दिया है।लेकिन छात्र अभी भी मांग कर रहे हैं किअन्य जिम्मेदार गार्डों पर भी कार्रवाई होसार्वजनिक माफी दी जाए।सुरक्षा व्यवस्था में बदलाव किया जाए।

    छात्र संगठनों का समर्थन
    इस आंदोलन को कई छात्र संगठनों का समर्थन मिला, जिनमें शामिल हैं:एबीवीपी एनएसयूआई
    समाजवादी छात्रसभाआजाद समाज पार्टी छात्र संगठन सभी ने दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है।छात्रों ने चेतावनी दी है कि अगर 7 दिनों के भीतर उनकी मांगें पूरी नहीं हुईं तो क्रमिक अनशन शुरू किया जाएगा।आंदोलन और तेज किया जाएगाBundelkhand University में हुआ यह मामला अब सिर्फ एक मारपीट की घटना नहीं रहा, बल्कि प्रशासनिक जवाबदेही और सुरक्षा व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े कर रहा है। फिलहाल छात्रों और प्रशासन के बीच बातचीत और तनाव दोनों जारी हैं।

  • तमिलनाडुः CM विजय का एक और बड़ा एक्शन.. मंदिरों और स्कूलों के आसपास के शराब ठेके तत्काल बंद करने के आदेश

    तमिलनाडुः CM विजय का एक और बड़ा एक्शन.. मंदिरों और स्कूलों के आसपास के शराब ठेके तत्काल बंद करने के आदेश


    चेन्नई।
    तमिलनाडु (Tamil Nadu) में मुख्यमंत्री (Chief Minister) पद की शपथ लेते ही सी जोसेफ विजय (C Joseph Vijay) ऐक्शन मोड में हैं। उन्होंने बड़ा आदेश देते हुए कहा है कि पूजा के स्थलों, स्कूलों और बस अड्डों के आसपास 500 मीटर के दायरे में सभी शराब की सरकारी दुकानें तत्काल बंद कर दी जाएं। सख्त आदेश जारी करते हुए विजय ने कहा है कि यह फैसला दो हफ्ते के अंदर ही लागू होगा।

    बता दें कि मुख्यमंत्री बनते ही मंच पर ही उन्होंने अपने वादों को पूरा करने के लिए तीन फैसलों पर साइन कर दिए थे। पहला आदेश 200 यूनिट फ्री बिजली देने को लेकर था। दूसरा आदेश महिलाओं की सुरक्षा के लिए स्पेशल टास्क फोर्स गठित करने और तीसरा नशे की सस्या से निपटने के लिए हर जिले में विशेष फोर्स का गठन करना था।

    सोमवार को ही सीएम विजय समेत सभी नवनिर्वाचित विधायकों ने विधानसभा में शपथ ली है। सबसे पहले मुख्यमंत्री विजय ने विधायक के रूप में शपथ ली और मंत्रियों में एन आनंद, आधव अर्जुन, केजी अरुणराज, केए सेनगोट्टैयन, पी वेंकटरमणन, आर निर्मलकुमार, राजमोहन और टीके प्रभु ने भी शपथ ली। इसके बाद द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) विधायक दल के नेता और पूर्व उपमुख्यमंत्री उदयनिधि स्टालिन, पूर्व मुख्यमंत्री पलानीस्वामी और ओ. पनीरसेल्वम तथा अन्य विधायकों ने पद की शपथ ली।

    विजय, उदयनिधि और पनीरसेल्वम उन विधायकों में शामिल थे जिन्होंने “पूर्ण निष्ठा” के नाम पर शपथ ली। पलानीस्वामी और पीएमके की सौम्या अंबुमणि उन विधायकों में शामिल थीं, जिन्होंने ईश्वर के नाम पर शपथ ली। महिला मंत्री कीर्तना शुरुआत में अपना निर्वाचन प्रमाण-पत्र पेश नहीं कर सकीं और उन्हें इसे लाने के लिए वापस जाना पड़ा।

    जब विधानसभा के प्रधान सचिव के. श्रीनिवासन ने माइक पर कीर्तना का नाम शपथ लेने के लिए पुकारा, तो वह मुख्यमंत्री की कुर्सी के सामने बने मंच की ओर बढ़ीं। विधानसभा की परंपरा के अनुसार, शपथ लेने वाले विधायक कार्यवाहक अध्यक्ष की ओर मुख करके खड़े होते हैं। जैसे ही कीर्तना मंच के पास पहुंचीं, सचिव श्रीनिवासन ने हाथ उठाकर उनसे निर्वाचन प्रमाण-पत्र मांगा। हालांकि, वह प्रमाण-पत्र पेश नहीं कर सकीं। श्रीनिवासन को उन्होंने क्या जवाब दिया, यह स्पष्ट रूप से पता नहीं चल सका है।

    बाद में, कीर्तना प्रमाण-पत्र सदन में लेकर आईं और अधिकारी को सौंप दिया तथा ईश्वर के नाम पर शपथ ली। वेलाचेरी से ‘तमिलगा वेत्री कषगम’ (टीवीके) के विधायक आर. कुमार जब अपना निर्वाचन प्रमाण-पत्र जमा करने के बाद शपथ लेने ही वाले थे, तभी अधिकारी श्रीनिवासन ने उन्हें रोक दिया। श्रीनिवासन ने कुमार का ध्यान इस ओर दिलाया कि उनके द्वारा जमा किए गए प्रमाण-पत्र पर किसी अन्य व्यक्ति का नाम दर्ज है।

  • बंगाल में BJP सरकार का एक्शन.. ममता शासन के कई फैसले पर चली कलम, कई अफसरों को किया बाहर

    बंगाल में BJP सरकार का एक्शन.. ममता शासन के कई फैसले पर चली कलम, कई अफसरों को किया बाहर


    कोलकाता।
    पश्चिम बंगाल (West Bengal) में सत्ता परिवर्तन के तुरंत बाद नई बीजेपी सरकार (New BJP Government) ने तेज और आक्रामक शुरुआत की है. मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी (Chief Minister Shubhendu Adhikari) की पहली कैबिनेट बैठक में ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) शासनकाल के कई फैसलों पर CM अधिकारी की कलम तेजी से चली. ममता सरकार द्वारा नियुक्त कई रिटायर्ड IAS-IPS अधिकारियों को सरकारी दफ्तरों से बाहर करने का फैसला लिया गया, जबकि पुरानी नीतियों को पलटते हुए नई दिशा दी गई।

    एक अहम फैसले में अधिकारी सरकार ने BSF को बांग्लादेश सीमा पर बाड़ लगाने के लिए 600 एकड़ जमीन तुरंत ट्रांसफर करने का फैसला किया है. इसके अलावा सरकार ने जनगणना शुरू करने, ममता काल की IAS-IPS ट्रेनिंग नीति को बदलने और भारतीय न्याय संहिता (BNS) को तुरंत लागू करने जैसे बड़े फैसले लिए।

    नए CM शुभेंदु अधिकारी ने साफ संदेश दिया कि अफसरों को ‘येस मैन’ बनने की जरूरत नहीं है और वहीं करें जो ‘राष्ट्र और राज्य हित’ के लिए सर्वोपरि हो. दरअसल ममता राज के ‘मोहरों’ पर चल रही CM अधिकारी की कलम अब बदलाव की नई इबारत लिख रही है।

    मुख्यमंत्री अधिकारी ने कहा कि पश्चिम बंगाल में सुशासन, सुरक्षा और डबल इंजन सरकार का नया सफर देश भर के दूसरे BJP शासित राज्यों में चले विकास के उसी रास्ते पर आगे बढ़ेगा।


    बंगाल सरकार ने सोमवार को पहली कैबिनेट में क्या क्या फैसले लिए.

    1. बंगाल में आयुष्मान भारत योजना लागू की जाएगी. इसके साथ ही कई अन्य केंद्रीय कल्याणकारी परियोजनाएं भी इसमें शामिल होंगी. जैसे पीएम जन आरोग्य योजना, किसानों के लिए फसल बीमा देने वाली पीएम फसल बीमा योजना, सरकारी स्कूलों को अपग्रेड करने के लिए पीएम स्कूल्स फॉर राइजिंग इंडिया (पीएम एसएचआरआई) योजना, कारीगरों और शिल्पकारों की मदद करने वाली पीएम विश्वकर्मा योजना, महिलाओं की शिक्षा और सशक्तीकरण के लिए बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजना और सब्सिडी वाले रसोई गैस कनेक्शन के लिए उज्ज्वला 3.0 योजना. ममता बनर्जी ने इन योजनाओं को राज्य में लागू नहीं किया था।

    2. आज से बीएनएस (भारतीय न्याय संहिता) लागू हो जाएगा. सीएम ने आरोप लगाया कि पिछली सरकार ने संविधान का उल्लंघन करते हुए बीएनएस लागू नहीं किया था. आईपीसी और सीआरपीसी पर ही काम हो रहा था।

    3. भारत-बांग्लादेश सीमा पर बाड़ लगाने के लिए केंद्र को जमीन का ट्रांसफर प्रोसेस तुरंत शुरू होगा. कैबिनेट ने चीफ सेक्रेटरी और राज्य के लैंड और लैंड रेवेन्यू डिपार्टमेंट के सेक्रेटरी को अगले 45 दिनों के अंदर प्रोसेस पूरा करने का अधिकार दिया है.”

    4. बीजेपी के जिन 321 कार्यकर्ताओं ने बंगाल में जान गंवाई, उनके परिवारों की पूरी जिम्मेदारी सरकार लेगी. बीजेपी का दावा है कि बंगाल में ममता सरकार के दौरान उसके 300 से ज्यादा कार्यकर्ताओं की राजनीतिक हिंसा में हत्या हुई।

    5.पश्चिम बंगाल सरकार ने राज्य सरकार के अधीन गैर-सांविधिक निकायों, बोर्डों, संगठनों और सार्वजनिक उपक्रमों में नियुक्त सभी मनोनीत सदस्यों, निदेशकों और अध्यक्षों के कार्यकाल को तत्काल प्रभाव से समाप्त करने का निर्देश जारी किया. इसके साथ ही राज्य सरकार ने 60 वर्ष की सामान्य सेवानिवृत्ति आयु के बाद एक्सटेंशन या री-अपॉइंटमेंट पर कार्यरत अधिकारियों और कर्मचारियों की सेवाएं भी तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दिया है।

    6. विधानसभा चुनाव के दौरान पश्चिम बंगाल के चीफ इलेक्टोरल ऑफिसर रहे मनोज अग्रवाल को शुभेंदु अधिकारी की BJP सरकार में राज्य का नया चीफ सेक्रेटरी बनाया गया है. सोमवार को जारी एक ऑफिशियल ऑर्डर के मुताबिक वर्तमान चीफ सेक्रेटरी दुष्यंत नरियाला को नई दिल्ली में प्रिंसिपल रेजिडेंट कमिश्नर नियुक्त किया गया है. इसके अलावा एडमिनिस्ट्रेटिव सुधारों के तहत, राज्य के IAS अधिकारी अब दूसरे राज्यों की तरह केंद्र सरकार के ट्रेनिंग प्रोग्राम में हिस्सा लेंगे।

    7. पश्चिम बंगाल सरकार ने 1 जून से बसों में महिलाओं के लिए फ्री बस सेवा की शुरुआत की है. ये बीजेपी के चुनावी वादे का हिस्सा था।

    8. CM शुभेंदु ने सरकारी नौकरी की परीक्षाओं में बैठने वाले उम्मीदवारों के लिए ऊपरी उम्र सीमा में पांच साल की छूट की घोषणा की है. इस घोषणा से अब जनरल कैटेगरी के आवेदकों को मौजूदा उम्र सीमा 40 से 45 साल तक की छूट मिलेगी, और SC, ST और OBC कैटेगरी के लोग मौजूदा उम्र सीमा 43 से 48 साल तक नौकरियों के लिए अप्लाई कर सकेंगे।

    9. अधिकारी सरकार ने पश्चिम बंगाल में तुरंत जनगणना शुरू करने का फैसला किया है. मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछली सरकार जनगणना प्रक्रिया के बारे में केंद्रीय गृह मंत्रालय के 16 जून, 2025 के निर्देश को लागू करने में नाकाम रही थी. मौजूदा सरकार ने पेंडिंग एडमिनिस्ट्रेटिव सर्कुलर को तुरंत लागू कर दिया है।

    10. सीएम शुभेंदु अधिकारी ने कहा है कि उनकी सरकार ममता शासन की किसी भी योजना को बंद नहीं करेगी. हालांकि मुख्यमंत्री ने कहा कि हम उन लोगों की पहचान करेंगे और उन्हें हटाएंगे जो इस देश के लोगों के लिए बनी वेलफेयर मदद पाने के हकदार नहीं हैं, जैसे मरे हुए लोग और गैर-भारतीय।

    सीएम अधिकारी ने कहा कि यह सरकार घमंड पर नहीं चलेगी, बल्कि यह सरकार सिद्धांतों पर चलेगी. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के “डर बाहर, भरोसा अंदर” के संदेश का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि नई सरकार पश्चिम बंगाल के लोगों की सुरक्षा, भरोसा और विकास पक्का करने के लिए पूरी तरह तैयार है।

  • पश्चिम बंगाल में नई सरकार का कामकाज शुरू…. CM शुभेंदु ने मंत्रियों को बांटे विभाग

    पश्चिम बंगाल में नई सरकार का कामकाज शुरू…. CM शुभेंदु ने मंत्रियों को बांटे विभाग


    कोलकाता।
    पश्चिम बंगाल (West Bengal) विधानसभा चुनाव (Assembly Elections) में प्रचंड जीत के बाद नई बीजेपी सरकार (New BJP government) ने राज्य में प्रशासनिक कामकाज को तेजी से पटरी पर लाने की कोशिश शुरू कर दी है. मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी (Chief Minister Shubhendu Adhikari) ने भी सोमवार को मंत्रियों के बीच विभागों का बंटवारा कर दिया. गृह, वित्त और कर्मचारियों ​अधिकारियों की ट्रांसफर पोस्टिंग से जुड़े कार्मिक जैसे महत्वपूर्ण विभाग मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने अपने पास रखे हैं।


    दिलीप घोष:

    बीजेपी के वरिष्ठ नेता और खड़गपुर सदर से विधायक दिलीप घोष को ग्रामीण विकास, पंचायती राज और पशु संसाधन विभाग की जिम्मेदारी सौंपी गई है. यह विभाग राज्य में ग्रामीण प्रशासन और जमीनी योजनाओं के क्रियान्वयन के लिहाज से बेहद अहम माना जाता है।


    अशोक कीर्तनिया:

    बनगांव उत्तर के विधायक अशोक कीर्तनिया को खाद्य विभाग का प्रभार दिया गया है. पश्चिम बंगाल की राजनीति में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) का बड़ा महत्व रहा है, ऐसे में यह विभाग भी काफी अहम माना जा रहा है. यह विभाग राज्य भर में पब्लिक डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम के जरिए खाद्य सामग्री के वितरण और कल्याणकारी योजनाओं के कार्यान्वयन की देखरेख करेगा।


    खुदिराम टुडू:

    रानीबांध विधायक खुदिराम टुडू को पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग सौंपा गया है. इसे आदिवासी और पिछड़े वर्गों के बीच बीजेपी की पकड़ मजबूत करने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है. यह मंत्रालय पूरे बंगाल में पिछड़े समुदायों के लिए कल्याणकारी योजनाओं, छात्रवृत्तियों और सामाजिक विकास कार्यक्रमों पर ध्यान केंद्रित करता है.


    अग्निमित्रा पॉल:

    आसनसोल उत्तर की विधायक और पार्टी में प्रमुख महिला चेहरा अग्निमित्रा पॉल को महिला एवं बाल विकास विभाग और नगर विकास विभाग की जिम्मेदारी सौंपी गई है. वह शुभेंदु कैबिनेट की इकलौती महिला मंत्री हैं. महिलाओं के लिए कल्याणकारी कार्यक्रमों के संचालन और महिला सुरक्षा के पहलों को बढ़ावा देने के अलावा शहरों के इंफ्रास्ट्रक्चर में सुधार के लिहाज से अग्निमित्रा को मिले दोनों विभाग भाजपा सरकार के लिए काफी महत्वपूर्ण हैं.


    निशीथ प्रमाणिक:

    माथाभांगा विधायक निशीथ प्रमाणिक को खेल और युवा कल्याण के साथ-साथ उत्तर बंगाल के विकास का प्रभार दिया गया है. यह पोर्टफोलियो महत्वपूर्ण है क्योंकि हालिया चुनाव में भी भाजपा ने उत्तरी बंगाल में अपना मजबूत आधार बनाए रखा और उसका लक्ष्य इस क्षेत्र में अपनी उपस्थिति को और मजबूत करना है.


    मंत्रिमंडल के जरिए साधा समीकरण

    नई कैबिनेट में शामिल नेताओं का चयन राजनीतिक और सामाजिक समीकरणों को ध्यान में रखकर किया गया है. दिलीप घोष लंबे समय तक पश्चिम बंगाल बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष रहे और राज्य में पार्टी का संगठन खड़ा करने में उनकी अहम भूमिका रही.

    अग्निमित्रा पॉल को कैबिनेट में जगह देकर बीजेपी महिला वोटरों को साधने की कोशिश कर रही है, जबकि खुदीराम टुडू और अशोक कीर्तनिया के जरिए आदिवासी और मतुआ समुदाय तक पहुंच मजबूत करने की रणनीति दिखाई दे रही है. वहीं निशीथ प्रमाणिक के जरिए बीजेपी ने मंत्रिमंडल में युवा प्रतिनिधित्व को जगह दी है.


    चुनाव में बीजेपी की ऐतिहासिक जीत

    बंगाल विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने 294 में से 207 सीटें जीतकर ऐतिहासिक जीत दर्ज की, जबकि ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस 80 सीटों पर सिमट गई. इस प्रचंड बहुमत ने नई सरकार को बिना किसी गठबंधन दबाव के अपनी नीतियां लागू करने की ताकत दी है.


    पहली कैबिनेट बैठक में 5 बड़े फैसले

    नई सरकार ने मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की अध्यक्षता में हुई पहली कैबिनेट बैठक में ही कई केंद्रीय योजनाओं को राज्य में लागू करने का ऐलान किया. इनमें आयुष्मान भारत, पीएम जन आरोग्य योजना, पीएम श्री, विश्वकर्मा योजना, बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ और उज्ज्वला योजना शामिल हैं.

    शुभेंदु सरकार ने बंगाल में भारतीय न्याय संहिता (BNS) लागू करने, सरकारी नौकरियों की अधिकतम आयु सीमा में 5 साल की बढ़ोतरी और आईएएस अधिकारियों को केंद्र सरकार के ट्रेनिंग प्रोग्राम में शामिल करने जैसे प्रशासनिक सुधारों से जुड़े फैसले लिए हैं.


    सुशासन और पारदर्शिता पर रहेगा जोर

    कैबिनेट बैठक के बाद मीडिया से बातचीत में मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने कहा है कि उनकी सरकार ‘सुशासन और पारदर्शिता’ को प्राथमिकता देगी. उन्होंने यह भी भरोसा दिलाया कि पिछली सरकार के दौरान शुरू की गईं कल्याणकारी योजनाएं जारी रहेंगी, लेकिन लाभार्थियों का सत्यापन सख्ती से किया जाएगा ताकि किसी तरह की गड़बड़ी न हो. मुख्यमंत्री ने बांग्लादेश सीमा से लगे जिलों में बीएसएफ को फेंसिंग के लिए लैंड ट्रांसफर की प्रक्रिया को भी 45 दिनों के भीतर पूरा करने का निर्देश अधिकारियों को दिया।