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  • धान रोपाई के दौरान बड़ा हादसा, करंट की चपेट में आकर दो किसानों की दर्दनाक मौत

    धान रोपाई के दौरान बड़ा हादसा, करंट की चपेट में आकर दो किसानों की दर्दनाक मौत


    नई दिल्ली । उत्तर प्रदेश के अमेठी जिले में एक दर्दनाक हादसे ने पूरे इलाके को झकझोर दिया है जहां खेत में करंट फैलने से दो किसानों की मौके पर ही मौत हो गई। यह घटना जगदीशपुर कोतवाली क्षेत्र के हरपालपुर गांव की है जहां धान की रोपाई का काम चल रहा था। बताया जा रहा है कि खेत के पास लगे एक विद्युत पोल से अचानक केबल टूटकर पानी से भरे खेत में गिर गई जिससे पूरे खेत में करंट फैल गया।

    इसी दौरान किसान हीरालाल प्रजापति उम्र 52 वर्ष और रामबोध यादव उम्र 55 वर्ष काम कर रहे थे। करंट लगने से हीरालाल मौके पर ही गंभीर रूप से झुलस गए जबकि उन्हें बचाने पहुंचे रामबोध यादव भी करंट की चपेट में आ गए और दोनों बुरी तरह घायल हो गए। ग्रामीणों ने तत्काल दोनों को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र जगदीशपुर पहुंचाया जहां चिकित्सकों ने जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया।

    घटना की जानकारी मिलते ही पूरे गांव में कोहराम मच गया और परिजनों का रो रोकर बुरा हाल हो गया। ग्रामीणों ने प्रशासन से लापरवाही के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। सूचना मिलने पर अमेठी पुलिस मौके पर पहुंची और दोनों शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया।

    पुलिस अधिकारियों के अनुसार पूरे मामले की जांच की जा रही है और यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि बिजली के तार की मरम्मत या रखरखाव में कहीं कोई लापरवाही तो नहीं हुई।  प्रभारी निरीक्षक ने बताया कि जांच के आधार पर आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इस दर्दनाक हादसे ने ग्रामीण क्षेत्र में बिजली सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

  • योगी आदित्यनाथ का ललितपुर दौरा ,स्वास्थ्य शिक्षा और इंफ्रास्ट्रक्चर पर बड़ा फोकस

    योगी आदित्यनाथ का ललितपुर दौरा ,स्वास्थ्य शिक्षा और इंफ्रास्ट्रक्चर पर बड़ा फोकस


    नई दिल्ली । उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ आज ललितपुर जिले के दौरे पर रहेंगे जहां वे 1766 करोड़ रुपये की लागत से बने राजकीय मेडिकल कॉलेज सहित कुल 221 विकास परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास करेंगे। इस दौरे को बुंदेलखंड क्षेत्र के विकास के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि इससे स्वास्थ्य सेवाओं शिक्षा और बुनियादी ढांचे को नई मजबूती मिलने की उम्मीद है।

    मुख्यमंत्री का यह दौरा कई धार्मिक और विकासात्मक कार्यक्रमों से जुड़ा रहेगा। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार सीएम योगी सुबह मध्य प्रदेश के दतिया स्थित प्रसिद्ध पीतांबरा पीठ मंदिर में विधि विधान से दर्शन पूजन करेंगे और आशीर्वाद प्राप्त करेंगे। इसके बाद वह राजकीय हेलीकॉप्टर से ललितपुर पहुंचेंगे जहां पुलिस लाइन हेलीपैड पर उनका आगमन होगा।

    वहां से वे सीधे तुवन मंदिर जाएंगे और दर्शन पूजन के बाद कार्यक्रम स्थल के लिए रवाना होंगे। इस पूरे दौरे को लेकर प्रशासन ने सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए हैं और सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। कार्यक्रम स्थल पर बड़ी संख्या में लोगों के पहुंचने की संभावना को देखते हुए व्यवस्था को सुव्यवस्थित किया गया है।

    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने दौरे को लेकर सोशल मीडिया पर भी प्रतिक्रिया दी और कहा कि ललितपुर की धरती वीरता और सांस्कृतिक विरासत के लिए जानी जाती है और आज यह विकास के एक नए अध्याय की साक्षी बनेगी। उन्होंने कहा कि डबल इंजन सरकार का यह प्रयास बुंदेलखंड को आत्मनिर्भर और समृद्ध बनाने की दिशा में मजबूत कदम साबित होगा।

    सीएम के अनुसार 1766 करोड़ की इन परियोजनाओं के जरिए क्षेत्र में स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर किया जाएगा और शिक्षा के क्षेत्र में नए अवसर पैदा होंगे। मेडिकल कॉलेज के लोकार्पण से स्थानीय स्तर पर चिकित्सा शिक्षा और इलाज की सुविधाएं बढ़ेंगी जिससे लोगों को बड़े शहरों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। इसके साथ ही 221 परियोजनाओं में सड़कें, भवन, जल आपूर्ति और अन्य बुनियादी ढांचे से जुड़े कार्य शामिल हैं जो क्षेत्र के समग्र विकास को गति देंगे।

    सरकार का दावा है कि इन परियोजनाओं से रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। इस दौरे को आगामी विकास योजनाओं की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है जिससे बुंदेलखंड क्षेत्र में बड़े बदलाव की उम्मीद जताई जा रही है।

  • ट्रस्ट में हलचल, जांच के बीच बड़े अधिकारियों के हटने और कई कर्मियों पर शिकंजे के संकेत

    ट्रस्ट में हलचल, जांच के बीच बड़े अधिकारियों के हटने और कई कर्मियों पर शिकंजे के संकेत


    नई दिल्ली । राम मंदिर से जुड़े दान संग्रह में कथित अनियमितताओं की जांच अब एक नए और अहम मोड़ पर पहुंचती दिखाई दे रही है। जांच एजेंसियों और ट्रस्ट से जुड़े सूत्रों के अनुसार श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के कुछ वरिष्ठ पदाधिकारी स्वेच्छा से अपने पदों से अलग हो सकते हैं। माना जा रहा है कि यह कदम जांच की पारदर्शिता बनाए रखने और प्रशासनिक जिम्मेदारी तय करने की प्रक्रिया के तहत उठाया जा सकता है। हालांकि इस पर अंतिम निर्णय अभी स्पष्ट नहीं है।

    सूत्रों के मुताबिक जांच के दायरे में अब केवल संदिग्ध कर्मचारियों तक ही मामला सीमित नहीं रहा, बल्कि उन सभी जिम्मेदार पदों की भूमिका भी परखी जा रही है जिन पर दान प्रक्रिया की निगरानी और पारदर्शिता बनाए रखने की जिम्मेदारी थी। इसमें गणना करने वाले कर्मियों, कैश हैंडलिंग से जुड़े कर्मचारियों और कुछ बैंक कर्मियों की भूमिका पर भी सवाल उठे हैं। जांच एजेंसियों का मानना है कि किसी भी वित्तीय प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखना सामूहिक जिम्मेदारी होती है, और यदि इसमें चूक हुई है तो उसकी भी जांच जरूरी है।

    जांच से जुड़े संकेतों के अनुसार कुछ नाम ऐसे भी सामने आए हैं जिन पर आगे चलकर कानूनी कार्रवाई हो सकती है। इनमें कथित रूप से रकम के हेरफेर में शामिल कर्मचारियों के साथ कुछ बैंकिंग स्तर के लोग भी जांच के घेरे में आ सकते हैं। संभावना जताई जा रही है कि जांच पूरी होने के बाद एफआईआर दर्ज करने और गिरफ्तारी की प्रक्रिया आगे बढ़ सकती है, हालांकि यह जांच की दिशा और निष्कर्ष पर निर्भर करेगा।

    इसी बीच ट्रस्ट प्रशासन से जुड़े कुछ वरिष्ठ नाम भी चर्चा में आए हैं। सूत्रों के अनुसार महासचिव स्तर के पदाधिकारियों सहित कुछ अन्य जिम्मेदार अधिकारियों के ट्रस्ट से अलग होने की संभावना जताई जा रही है। इसे प्रशासनिक जवाबदेही और संगठनात्मक शुद्धिकरण के तौर पर देखा जा रहा है।

    जांच टीम ने मंदिर परिसर में नियुक्तियों और व्यवस्थाओं की व्यापक समीक्षा भी शुरू कर दी है। 22 जनवरी 2024 को प्राण प्रतिष्ठा के बाद से अब तक की नियुक्तियों, प्रशासनिक फैसलों और सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े सभी पहलुओं की पड़ताल की जा रही है। मंदिर परिसर में लगभग 800 कर्मी कार्यरत बताए जाते हैं, जिनमें एक बड़ा हिस्सा ट्रस्ट द्वारा नियुक्त है।

    सूत्रों के अनुसार सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े एक लंबे समय से तैनात कर्मी की भूमिका भी जांच के दायरे में है, जिसकी सेवा अवधि लगभग 17 वर्षों से अधिक बताई जा रही है। जांच एजेंसियां यह भी देख रही हैं कि इतने लंबे कार्यकाल में उसकी जिम्मेदारियां और कार्यक्षेत्र किस प्रकार का रहा और क्या उसमें किसी प्रकार की लापरवाही या मिलीभगत के संकेत मिलते हैं।

    फिलहाल पूरा मामला जांच के प्रारंभिक लेकिन महत्वपूर्ण चरण में है, जहां दस्तावेज, बयान और प्रशासनिक रिकॉर्ड के आधार पर सच्चाई तक पहुंचने की कोशिश की जा रही है। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट हो सकता है कि यह जांच किन बड़े निष्कर्षों और कार्रवाई तक पहुंचती है।

  • राम मंदिर दान घोटाला जांच में उलझन, सीसीटीवी बैकअप और फुटेज विवाद बना बड़ी चुनौती

    राम मंदिर दान घोटाला जांच में उलझन, सीसीटीवी बैकअप और फुटेज विवाद बना बड़ी चुनौती


    नई दिल्ली । अयोध्या स्थित राम मंदिर से जुड़े दान संग्रह में कथित अनियमितताओं के मामले ने जांच एजेंसियों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। विशेष जांच दल यानी एसआईटी के सामने सबसे बड़ी चुनौती ठोस डिजिटल साक्ष्यों को एकत्र करना है, क्योंकि घटनास्थल पर लगे सीसीटीवी कैमरों का बैकअप सीमित अवधि का ही है। जानकारी के अनुसार, सिस्टम में केवल लगभग 45 दिन का ही रिकॉर्ड सुरक्षित रहता है, जिससे पुराने समय की गतिविधियों की पुष्टि कर पाना बेहद कठिन हो गया है।

    जांच में सामने आया है कि उपलब्ध फुटेज में कुछ जगहों पर छेड़छाड़ के संकेत भी मिले हैं, जिससे मामले की जटिलता और बढ़ गई है। इसी कारण अब जांच मुख्य रूप से फोरेंसिक विश्लेषण, कर्मचारियों के बयान और पूछताछ में सामने आ रहे तथ्यों पर केंद्रित हो गई है। एसआईटी लगातार संदिग्ध कर्मचारियों और संबंधित पदाधिकारियों से अलग अलग पूछताछ कर रही है ताकि घटनाक्रम की परतें खोली जा सकें।

    राम मंदिर ट्रस्ट से जुड़े एक पूर्व पदाधिकारी द्वारा लगाए गए आरोपों में यह भी कहा गया था कि कुछ महीनों की सीसीटीवी रिकॉर्डिंग डिलीट की गई थी। हालांकि तकनीकी सीमाओं और बैकअप उपलब्ध न होने के कारण इन दावों की पुष्टि करना कठिन साबित हो रहा है। जांच एजेंसियों का मानना है कि यदि हाल के 45 दिनों में किसी प्रकार की गड़बड़ी हुई है तो उसके साक्ष्य मिलने की संभावना अधिक है, लेकिन उससे पहले की घटनाओं को प्रमाणित करना चुनौतीपूर्ण है।

    सूत्रों के अनुसार, जांच में अब तक पूछताछ के दौरान कई विरोधाभासी बयान सामने आए हैं। कुछ संदिग्धों ने लंबे समय से वित्तीय हेरफेर की बात स्वीकार करने के संकेत दिए हैं, जिससे जांच को एक नई दिशा मिली है। हालांकि यह स्पष्ट करना अभी बाकी है कि कथित गड़बड़ी कब से और किस स्तर पर चल रही थी।

    जांच का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि कथित रूप से नकदी और अन्य चढ़ावे की राशि के प्रबंधन में अनियमितता के आरोप सामने आए हैं। लेकिन बिना मजबूत डिजिटल साक्ष्य के केवल बयानों के आधार पर निष्कर्ष तक पहुंचना आसान नहीं होगा। इसी वजह से एसआईटी का फोकस अब तकनीकी जांच, फोरेंसिक रिपोर्ट और क्रॉस वेरिफिकेशन पर बढ़ गया है।

    पूरे मामले में जांच एजेंसियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती यही है कि सीमित सीसीटीवी डेटा और विवादित आरोपों के बीच वास्तविक सच्चाई को निष्पक्ष तरीके से सामने लाया जाए। जांच आगे बढ़ने के साथ ही उम्मीद है कि नए तथ्य सामने आएंगे, जो पूरे प्रकरण की परतें खोल सकते हैं।

  • RS चुनावः झारखंड से 2 सीट और 3 उम्मीदवार… आज मतदान के बाद शाम तक साफ हो जाएगी तस्वीर

    RS चुनावः झारखंड से 2 सीट और 3 उम्मीदवार… आज मतदान के बाद शाम तक साफ हो जाएगी तस्वीर


    रांची।
    झारखंड में राज्यसभा की 2 सीटों के लिए आज वोटिंग होनी है. मतदान सुबह 9 बजे से शाम 4 बजे तक विधानसभा परिसर में बने मतदान केंद्र पर होगा. शाम तक रिजल्ट भी आ जाएगा. झारखंड की दो सीटों पर तीन उम्मीदवार होने की वजह से चुनाव दिलचस्प हो गया है।

    तीसरे निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में परिमल नाथवानी है, जिनका समर्थन एनडीए कर रहा है. एनडीए के पास 24 विधायक हैं. इनमें बीजेपी के 21, AJSU, जेडीयू और LJP(R) का 1-1 विधायक है. वहीं, झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के पास 34 विधायक हैं।

    राज्यसभा की सीट जीतने के लिए 28 विधायकों का समर्थन चाहिए. पहली सीट पर JMM उम्मीदवार बैद्यनाथ राम की जीत तय है. लेकिन असली लड़ाई दूसरी सीट के लिए है. दूसरी सीट पर कांग्रेस उम्मीदवार प्रणव झा और एनडीए समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नाथवानी हैं. एनडीए को जीत के लिए सिर्फ 4 वोट और चाहिए, जबकि कांग्रेस के पास 14 वोट कम पड़ रहे हैं।

    राज्यसभा चुनाव के लिए इंडिया और एनडीए के बीच अपना कुनबा बचाना सबसे बड़ी चुनौती है. सोमवार को सीएम आवास पर कांग्रेस प्रभारी के राजू ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से मुलाकात के बाद साफ कर दिया था कि गठबंधन की सरकार को समर्थन दे रहे सभी 56 विधायकों को 16 और 17 जून को सीएम हाउस में हाजिरी लगानी होगी. के राजू ने बताया था कि वहां डिनर के दौरान मॉक पोल भी होगा. विधायकों को भी शहर में ही रहने का निर्देश दिया गया है.

    इधर NDA ने भी अपने विधायकों को एकजुट रखने के लिए सभी 24 विधायकों को एक साथ रांची के रेडिसन ब्लू में रहने के निर्देश दिए है. दो दिन से विधायक यहीं हैं और यहीं से वोटिंग के लिए जाएंगे. यानी पॉलिटिक्स होटल में शिफ्ट हो गई है.

    जाहिर है ऐसा इसलिए किया गया है कि पोचिंग की संभावना न हो. एनडीए के नेता भी बीजेपी प्रदेश कार्यालय में सोमवार को आयोजित गठबंधन के बैठक के बाद चौंकन्ना हो गए हैं. बैठक से 7विधायक नदारद थे. चंपई सोरेन समेत सरयू राय सरीखे नेता बैठक में नहीं थे।

    कांग्रेस के नेता भी आग में घी का काम ये कहकर डालते रहे कि NDA के तीन विधायक संपर्क में है. हालांकि बाद में चंपई सोरेन के साथ नाथवानी की तस्वीर सामने सोशल मीडिया पर आई और सरयू राय की भी तस्वीर देखने को मिली।


    इंडिया ब्लॉक के 56 विधायक, फिर क्यों चिंता?

    वहीं, कांग्रेस और JMM के दावे हैं कि जब हेमंत सरकार को 56 विधायकों का समर्थन है तो कहां चिंता का विषय है? 2सीट के लिए जीत के लिए 56 विधायकों की ही जरूरत है. लिहाजा दोनों सीट पर उनके ही उम्मीदवार जीतेंगे।

    दोनों गठबंधन ने बैठके की है. दोनों ने मॉक पोल भी किया है. संसदीय कार्य मंत्री राधा कृष्णा किशोर ने मंगलवार रात सीएम हाउस में बैठक के बाद बताया था कि दोनों सीट पर उनकी जीत होगी. मॉक पोल में कांग्रेस को 27 और JMM को 27 मत मिले थे.


    एनडीए को क्रॉस वोटिंग से उम्मीद

    इस बीच NDA की उम्मीदें कोर्स वोटिंग पर टिकी है और इंडिया ब्लॉक क्रॉस वोटिंग रोकने के लिए हर कोशिश कर रहा है. इसी कोशिश पर उसकी जीत का दारोमदार है. एनडीए समर्थित परिमल नाथवानी का कहना है कि भले ही 4 वोट कम है लेकिन झारखंड से वो 2008 और 2014 में भी राज्यसभा जा चुके हैं और सभी ने उनका काम देखा है. उनका कहना है कि अंतरात्मा की आवाज पर उन्हें जीत के लिए 28 वोट मिल जाएंगे।


    दो सीटों पर क्यों हो रहे हैं चुनाव?

    बीजेपी के सांसद दीपक प्रकाश का कार्यकाल खत्म हो रहा. दूसरी सीट शिबू सोरेन की थी, जिनका निधन हो चुका है. हालांकि, शिबू सोरेन अगर होते तो उनका कार्यकाल भी खत्म हो जाता।

  • ममता बनर्जी को एक और झटका…..असली TMC के नाम और सिंबल पर दावा ठोकेंगे बागी सांसद!

    ममता बनर्जी को एक और झटका…..असली TMC के नाम और सिंबल पर दावा ठोकेंगे बागी सांसद!


    कोलकाता
    । पश्चिम बंगाल (West Bengal) में सत्ता छिनते ही ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) को एक के बाद झटके मिले रहे हैं। रविवार को ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) को गहरा जख्म देकर तृणमूल कांग्रेस (Trinamool Congress) के बागी सांसदों ने अब त्रिपुरा की एक पार्टी संग विलय का फैसला कर लिया है। इन सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला (Lok Sabha Speaker Om Birla) से मिलकर लोकसभा में अलग सीट की व्यवस्था करने की मांग भी की है। इधर पार्टी से नए-नए बागी हुए सुदीप बंदोपाध्याय ने रविवार को संकेत दे दिए हैं कि बागी खेमा अगले महीने टीएमसी के नाम और सिंबल पर अपना दावा ठोकेगा। ऐसे में यह चर्चाएं भी तेज हो गई हैं कि NDA को लोकसभा में अपना सबसे बड़ा सहयोगी मिलने जा रहा है।

    इससे पहले लोकसभा में दो-तिहाई सांसदों की बगावत के बाद, बागी खेमे को जिस ‘हेवीवेट’ की तलाश थी, वह भी अब पूरी हो गई है। कभी ममता बनर्जी के सबसे भरोसेमंद और लोकसभा में टीएमसी के संसदीय दल के नेता रहे सुदीप बंदोपाध्याय भी अब आधिकारिक तौर पर बागी गुट में शामिल हो गए हैं। बागी गुट में शामिल होते ही सुदीप बंदोपाध्याय ने ममता बनर्जी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने एक बयान में कहा है बागियों का त्रिपुरा नेशनल सिटीजंस पार्टी (NCP) में विलय केवल एक अस्थायी व्यवस्था है।


    क्या है प्लान?

    लोकसभा में टीएमसी के 28 में से 20 सांसदों का समर्थन होने की बात दोहराते हुए सुदीप बंदोपाध्याय ने बागियों की लॉन्ग टर्म रणनीति का खुलासा किया। उन्होंने पत्रकारों के साथ बातचीत में कहा, “जब आप 2-तिहाई बहुमत के साथ पार्टी छोड़ते हैं, तो यही सिस्टम है। आप पहले ही दिन जा के नहीं बोल सकते कि हमें पार्टी का सिंबल दे दो।” उन्होंने आगे कहा कि बागी खेमा जुलाई में चुनाव आयोग और कोर्ट के सामने आधिकारिक मांग रखेगा कि उन्हें ही असली तृणमूल माना जाए, क्योंकि हमारे पास दो-तिहाई बहुमत है। इसके बाद कोर्ट इस पर फैसला करेगा।

    गौरतलब है कि रविवार को तृणमूल कांग्रेस में संकट उस वक्त और गहरा गया जब बागी सांसदों ने त्रिपुरा की एक बेहद कम चर्चित ‘नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया’ (NCPI) में विलय की घोषणा कर दी। यह पार्टी अब लोकसभा में भाजपा के नेतृत्व वाली NDA सरकार को समर्थन देगी। लोकसभा अध्यक्ष से मुलाकात के बाद बागी सांसदों की अगुवाई करने वालीं काकोली घोष दस्तीदार ने एक बयान में कहा कि तृणमूल कांग्रेस के 20 सांसदों ने बिरला को सौंपे गए आवेदन पर साइन किए हैं। उन्होंने कहा, ”तृणमूल कांग्रेस के दो-तिहाई लोकसभा सदस्यों ने एक अलग समूह के रूप में मान्यता देने के लिए लोकसभा अध्यक्ष को पत्र सौंपा है। हम नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया में अपना विलय करेंगे और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) का समर्थन करेंगे।”


    त्रिपुरा की पार्टी है NCPI

    ‘नेशनलिस्ट सिटीजन्स पार्टी ऑफ इंडिया’ त्रिपुरा की एक रजिस्टर्ड पार्टी है। हालांकि इसकी कोई खास राजनीतिक मौजूदगी नहीं है। पार्टी ने 2023 के त्रिपुरा विधानसभा चुनाव में कुछ सीटों पर चुनाव लड़ा था। लेकिन इसके उम्मीदवार या तो नोटा से पीछे रहे या उन्हें उससे बस कुछ ही ज्यादा वोट मिले। इस बीच भाजपा ने कहा है कि अगर टीएमसी के सांसद NDA का समर्थन करना चाहते हैं तो यह देश के लिए अच्छा होगा।


    बीजेपी की सबसे बड़ी सहयोगी बनेगी TMC

    लोकसभा में अगर टीएमसी के इस खेमे ने NDA को समर्थन दिया तो पार्टी बीजेपी की सबसे बड़ी सहयोगी भी बन सकती है। बता दें कि बीजेपी के पास केंद्र में फिलहाल NDA के दो बड़े सहयोगी का समर्थन है। इसमें आंध्र प्रदेश की टीडीपी में 16 सांसद और ​जनता दल (यूनाइटेड) के 12 सांसद शामिल हैं। अब 20 से ज्यादा बागी टीएमसी सांसदों के समर्थन ने सदन में NDA की संख्या 313 तक बढ़ सकती है।

  • Bihar: वैशाली में बंद गोदाम में छुपा रखी थी 70 लाख की प्रतिबंधित सिरप जब्त… 175 कार्टन जब्त

    Bihar: वैशाली में बंद गोदाम में छुपा रखी थी 70 लाख की प्रतिबंधित सिरप जब्त… 175 कार्टन जब्त


    वैशाली।
    बिहार (Bihar) के वैशाली जिले (Vaishali district) से नशे के अवैध कारोबार (Illegal Drug Trade) का एक बड़ा मामला सामने आया है. पुलिस ने गुप्त सूचना के आधार पर औद्योगिक थाना क्षेत्र में स्थित सिपेट संस्था के पास एक बंद पड़े गोदाम में छापेमारी कर भारी मात्रा में प्रतिबंधित कफ सिरप (Banned Cough Syrup) बरामद किया है. इस कार्रवाई में पुलिस ने 175 कार्टन कफ सिरप जब्त किया है, जिसकी अनुमानित कीमत 60 से 70 लाख रुपये बताई जा रही है. बरामद की गई कुल मात्रा करीब 2100 लीटर है।


    गोदाम के अंदर कार्टन में छिपाकर रखी गई थी सिरप

    जानकारी के अनुसार पुलिस को लंबे समय से सूचना मिल रही थी कि इस इलाके में एक बंद गोदाम का इस्तेमाल अवैध रूप से नशीले पदार्थों के भंडारण के लिए किया जा रहा है. सूचना की पुष्टि होने के बाद सदर अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी (एसडीपीओ) के नेतृत्व में एक विशेष टीम गठित की गई. टीम ने दंडाधिकारी की मौजूदगी में मौके पर पहुंचकर गोदाम की तलाशी ली. जब गोदाम को खोला गया तो अंदर रखे गए कार्टनों को देखकर पुलिस भी हैरान रह गई. वहां बड़ी संख्या में प्रतिबंधित कफ सिरप के कार्टन छिपाकर रखे गए थे।

    पुलिस ने सभी कार्टनों को जब्त कर लिया और मामले की जांच शुरू कर दी है. हालांकि छापेमारी के दौरान मौके से किसी भी व्यक्ति की गिरफ्तारी नहीं हो सकी. लेकिन जांच में यह पता चला है कि इस गोदाम को पटना निवासी आकाश कुमार नाम के व्यक्ति ने लीज पर ले रखा था. प्रारंभिक जांच में उसके इस अवैध कारोबार में संलिप्त होने के संकेत मिले हैं, जिसके बाद उसके खिलाफ औद्योगिक थाना में मामला दर्ज कर लिया गया है और आगे की कार्रवाई की जा रही है।


    नशे के रूप में इस्तेमाल होती सिरफ

    सदर एसडीपीओ सुबोध कुमार ने बताया कि बरामद कफ सिरप की बड़ी खेप को नशे के रूप में अवैध इस्तेमाल के लिए जमा किया गया था. उन्होंने कहा कि पुलिस पूरे नेटवर्क की जांच कर रही है कि यह खेप कहां से लाई गई थी और इसे किन-किन लोगों तक पहुंचाया जाना था. इस कार्रवाई के बाद इलाके में अवैध नशे के कारोबार को लेकर हड़कंप मच गया है. पुलिस का कहना है कि जल्द ही इस पूरे रैकेट का खुलासा किया जाएगा और इसमें शामिल अन्य लोगों की भी गिरफ्तारी सुनिश्चित की जाएगी.

  • बिहार में NEET के नाम पर चल रहा था ऑनलाइन ठगी का खेल, चार गिरफ्तार

    बिहार में NEET के नाम पर चल रहा था ऑनलाइन ठगी का खेल, चार गिरफ्तार


    मुजफ्फरपुर।
    देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा (Medical Entrance Examination) NEET का नाम एक बार फिर सुर्खियों में है. पिछले महीने ही पेपर लीक (Paper leak) के बाद परीक्षा व्यवस्था पर सवाल उठे थे. मामला इतना बढ़ा कि परीक्षा को लेकर बड़े स्तर पर जांच शुरू हुई, कई गिरफ्तारियां हुईं और कई राज्यों में छापेमारी तक हुई. अब जबकि 21 जून को दोबारा परीक्षा आयोजित होने जा रही है, उससे पहले बिहार (Bihar) से सामने आई एक घटना ने फिर अभ्यर्थियों और अभिभावकों की चिंता बढ़ा दी है.

    मुजफ्फरपुर में पुलिस ने एक ऐसे गिरोह का पर्दाफाश किया है जो NEET परीक्षा का कथित प्रश्नपत्र उपलब्ध कराने के नाम पर छात्रों और उनके परिजनों से ऑनलाइन ठगी (Online Fraud) कर रहा था. गिरोह टेलीग्राम जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल कर युवाओं को अपने जाल में फंसा रहा था. पुलिस ने इस मामले में चार लोगों को गिरफ्तार किया है. इससे पहले गिरोह के मुख्य आरोपी को जेल भेजा जा चुका है. अब तक कुल पांच आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है।


    टेलीग्राम पर बिक रहा था फर्जी पेपर

    पुलिस जांच में सामने आया है कि आरोपी सोशल मीडिया पर ऐसे ग्रुप और चैनल चला रहे थे, जहां NEET परीक्षा का असली प्रश्नपत्र उपलब्ध कराने का दावा किया जाता था. छात्रों और अभिभावकों को भरोसा दिलाया जाता था कि उनके पास परीक्षा से पहले ही पेपर पहुंच जाएगा और इसके बदले मोटी रकम मांगी जाती थी. परीक्षा की तैयारी में जुटे हजारों छात्र और उनके परिवार बेहतर भविष्य की उम्मीद में ऐसे झांसों का शिकार बन जाते थे. आरोपियों ने इसी मनोविज्ञान का फायदा उठाकर ठगी का पूरा नेटवर्क खड़ा कर लिया था।


    एक सूचना और खुल गई पूरी परत

    मुजफ्फरपुर के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक कांतेश कुमार मिश्रा के अनुसार, 2 जून को पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी कि सिकंदरपुर थाना क्षेत्र से संचालित एक गिरोह NEET परीक्षा का फर्जी प्रश्नपत्र तैयार कर उसे टेलीग्राम के जरिए बेच रहा है. सूचना मिलते ही पुलिस टीम ने बालूघाट स्थित एक किराये के मकान पर छापेमारी की. वहां से गिरोह के मुख्य आरोपी मनीष झा को गिरफ्तार किया गया. तलाशी के दौरान उसके कब्जे से चार मोबाइल फोन और एक लैपटॉप बरामद हुआ. शुरुआती जांच में ही कई महत्वपूर्ण डिजिटल साक्ष्य हाथ लगे, जिसके बाद मामले की गंभीरता बढ़ गई।


    बनाई गई विशेष जांच टीम

    मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए एसएसपी के निर्देश पर एक विशेष जांच दल का गठन किया गया. पुलिस अधीक्षक नगर के पर्यवेक्षण और एएसपी नगर-1 के नेतृत्व में टीम ने तकनीकी निगरानी और मानवीय सूचनाओं के आधार पर जांच को आगे बढ़ाया. मोबाइल फोन, सोशल मीडिया अकाउंट और बैंकिंग लेनदेन की पड़ताल के बाद पुलिस को गिरोह के अन्य सदस्यों तक पहुंचने में सफलता मिली. लगातार चलाए गए अभियान के दौरान नगर थाना क्षेत्र से हर्ष, अमन कुमार और कन्हैया कुमार उर्फ मानव को गिरफ्तार किया गया. वहीं सिकंदरपुर थाना क्षेत्र से हर्ष कनोडिया को दबोच लिया गया।


    पूछताछ में खुला ठगी का तरीका

    पुलिस अधिकारियों के मुताबिक पूछताछ में गिरफ्तार आरोपियों ने स्वीकार किया है कि वे टेलीग्राम के माध्यम से छात्रों और उनके अभिभावकों से संपर्क करते थे. उन्हें यह विश्वास दिलाया जाता था कि परीक्षा से पहले असली प्रश्नपत्र उपलब्ध करा दिया जाएगा. आरोपी पहले कुछ नमूना सामग्री भेजते थे और फिर ऑनलाइन भुगतान की मांग करते थे. रकम मिलने के बाद या तो फर्जी प्रश्नपत्र भेज दिया जाता था या फिर संपर्क तोड़ दिया जाता था. जांच में यह भी सामने आया कि ठगी से प्राप्त धनराशि मुख्य आरोपी तक पहुंचाई जाती थी, जो पूरे नेटवर्क का संचालन कर रहा था।


    मोबाइल से मिले अहम सुराग

    गिरफ्तार आरोपियों के पास से तीन और मोबाइल फोन बरामद किए गए हैं. पुलिस अब इन उपकरणों की फॉरेंसिक जांच करा रही है. माना जा रहा है कि इनके जरिए कई राज्यों के छात्रों और अभिभावकों से संपर्क किया गया था. जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने में जुटी हैं कि गिरोह का नेटवर्क कितना बड़ा था और क्या इसके तार अन्य राज्यों से भी जुड़े हुए हैं. पुलिस आरोपियों के आपराधिक इतिहास की भी जांच कर रही है।


    21 जून की परीक्षा से पहले अलर्ट

    अब जबकि 21 जून को परीक्षा आयोजित होनी है, पुलिस और प्रशासन अभ्यर्थियों से विशेष सतर्कता बरतने की अपील कर रहे हैं. अधिकारियों का कहना है कि कोई भी संस्था, व्यक्ति या सोशल मीडिया चैनल परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र उपलब्ध कराने का दावा करता है तो उस पर भरोसा न करें. विशेषज्ञों का भी मानना है कि प्रतियोगी परीक्षाओं के दौरान सोशल मीडिया पर सक्रिय ऐसे गिरोह छात्रों की मानसिक स्थिति और भविष्य की चिंता का फायदा उठाते हैं. इसलिए किसी भी संदिग्ध संदेश, लिंक या ऑफर से बचना जरूरी है।


    पुलिस की चेतावनी

    पुलिस का कहना है कि राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगी परीक्षाओं के नाम पर ठगी करने वाले गिरोहों के खिलाफ अभियान लगातार जारी रहेगा. मामले में अन्य संदिग्धों की पहचान की जा रही है और जल्द ही और गिरफ्तारियां हो सकती हैं. फिलहाल मुजफ्फरपुर पुलिस की कार्रवाई ने एक बार फिर यह साफ कर दिया है कि परीक्षा सीजन शुरू होते ही साइबर ठग भी सक्रिय हो जाते हैं. ऐसे में छात्रों और अभिभावकों को किसी शॉर्टकट के बजाय अपनी मेहनत और तैयारी पर भरोसा करना ही सबसे सुरक्षित रास्ता है।

  • कोलकाता एयरपोर्ट से हटेगी बांकड़ा मस्जिद…. रनवे से मात्र 240 मीटर पर दूरी पर है स्थित

    कोलकाता एयरपोर्ट से हटेगी बांकड़ा मस्जिद…. रनवे से मात्र 240 मीटर पर दूरी पर है स्थित


    कोलकाता।
    पश्चिम बंगाल (West Bengal) में शुभेंदु सरकार (Shubhendu Sarkar) आने के बाद कई बड़े बदलाव देखने को मिल रहे हैं। कोलकाता एयरपोर्ट (Kolkata Airport) पर बनी बांकड़ा मस्जिद (Bankada Mosque) को वहां से हटाया जाएगा। यह मस्जिद एयरपोर्ट के हाई सिक्योरिटी एयरसाइड जोन के अंदर बनी हुई है, जबकि अंतरराष्ट्रीय विमानन नियमों के अनुसार, रनवे से कम से कम 240 मीटर की दूरी पर ही कोई निर्माण होना चाहिए। इस मस्जिद को अब वहां से हटाया जाएगा।

    कोलकाता एयरपोर्ट अथॉरिटी ने एयरपोर्ट के सेकेंडरी रनवे के नजदीक बनी बांकड़ा मस्जिद को दूसरी जगह शिफ्ट करने की योजना को कन्फर्म किया है। एयरपोर्ट डायरेक्टर विक्रम सिंह ने कहा कि पुरानी टर्मिनल बिल्डिंग को इस साल हज ऑपरेशन पूरा होने के बाद गिरा दिया जाएगा। नेताजी सुभाष चंद्र बोस इंटरनेशनल एयरपोर्ट के अंदर मौजूद यह मस्जिद लगभग 130 सालों से भी पुरानी बताई जाती है।


    मस्जिद हटने से दिक्कतें होंगी दूर

    इस मस्जिद को वहां से हटाकर दूसरी जगह ले जाने से एयरपोर्ट पर आ रहीं तमाम ऑपरेशनल दिक्कतें दूर हो सकती हैं। बता दें कि पिछले कई दशकों में नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने रनवे से मस्जिद हटाने की कई कोशिश की थी। यहां तक कि ज्योति बसु, ममता बनर्जी की सरकारों में भी इसे हटाने के प्रयास किए गए थे, लेकिन सफलता नहीं मिल की।


    रनवे के काफी करीब है मस्जिद

    विमानन अधिकारियों का कहना है कि मस्जिद के रनवे के करीब होने से सुरक्षा, नेविगेशन और भविष्य के विस्तार में बाधा पैदा होती है। यह मस्जिद सेकेंडरी रनवे के छोर से लगभग 165 मीटर की दूरी पर स्थित है, जबकि मानकों के अनुसार अधिक सुरक्षा दूरी होनी चाहिए। पिछले महीने राज्य में शुभेंदु सरकार बनने के बाद इसे हटाने के लिए बातचीत तेज हुई थी। मस्जिद प्रबंधन और प्रशासन के बीच भी बातचीत से सहमति बनाने की कोशिश की गई थी।

  • ED ने अनिल अंबानी ग्रुप के दो पूर्व अधिकारियों को किया गिरफ्तार

    ED ने अनिल अंबानी ग्रुप के दो पूर्व अधिकारियों को किया गिरफ्तार


    मुंबई।
    प्रवर्तन निदेशालय (Enforcement Directorate- ED) ने शुक्रवार अनिल अंबानी (Anil Ambani) के करीबी और रिलायंस ग्रुप (Reliance Group) के पूर्व ग्रुप मैनेजिंग डायरेक्टर और रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर के वाइस-चेयरमैन सतीश सेठ (Satish Seth) को मुंबई में गिरफ्तार कर लिया. गिरफ्तारी के बाद उन्हें एक स्थानीय अदालत में पेश किया गया है, जहां से ईडी को ट्रांजिट रिमांड मिल गई है. अब उन्हें दिल्ली लाया जा रहा है.

    एक रिपोर्ट के अनुसार, अधिकारियों ने बताया कि प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने शुक्रवार को मुंबई में रिलायंस अनिल अंबानी ग्रुप (RAAG) के दो पूर्व अधिकारियों को प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत गिरफ्तार किया।

    उन्होंने बताया कि गिरफ्तार के बाद सतीश को स्थानीय अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें 48 घंटे की ट्रांजिट रिमांड पर भेज दिया गया है. चूंकि ये मामले दिल्ली में दर्ज है तो जांच एजेंसी की टीम रिमांड अवधि में सतीश को दिल्ली लाकर अदालत में पेश करेगी और आगे की पूछताछ-जांच के लिए हिरासत की मांग करेगी।

    केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने इस साल मार्च महीने में ही सतीश सेठ और गौतम दोशी के खिलाफ मामला दर्ज किया था. सीबीआई की टीम ने इस जांच के हिस्से के रूप में दोनों अधिकारियों के परिसरों और ठिकानों पर छापेमारी भी की थी. सीबीआई की इसी शिकायत को आधार बनाकर ईडी ने दोनों के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग के तहत अपनी जांच शुरू की है।

    सीबीआई के अनुसार, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) कुल 11 बैंकों के उस कंसोर्टियम (समूह) का एक प्रमुख सदस्य था, जिसने रिलायंस टेलीकॉम लिमिटेड को कुल 735 करोड़ रुपये की टर्म लोन सुविधा मंजूर की थी. इसी स्वीकृत लोन में से 114.98 करोड़ रुपये की राशि में भारी धोखाधड़ी और वित्तीय हेरफेर करने का गंभीर आरोप इन दोनों अधिकारियों पर लगा है।

    बता दें कि सतीश सेठ को लंबे समय तक अनिल अंबानी का बेहद करीबी और भरोसेमंद सहयोगी माना जाता रहा है जो रिलायंस ग्रुप के ग्रुप मैनेजिंग डायरेक्टर और रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर के वाइस-चेयरमैन के रूप में भी अपनी सेवाएं दे चुके हैं. अब प्रवर्तन निदेशालय इस पूरे बैंक लोन फ्रॉड मामले में सतीश सेठ और गौतम दोशी दोनों की वास्तविक भूमिकाओं की गहराई से जांच कर रहा है।