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  • काशी विश्वनाथ-ज्ञानवापी विवाद का हल मध्यस्थता से निकालने का प्रयास… कल लगेगी विशेष लोक अदालत

    काशी विश्वनाथ-ज्ञानवापी विवाद का हल मध्यस्थता से निकालने का प्रयास… कल लगेगी विशेष लोक अदालत


    वाराणसी।
    वाराणसी (Varanasi) के काशी विश्वनाथ मंदिर (Kashi Vishwanath Temple) और ज्ञानवापी मस्जिद (Gyanvapi Mosque) विवाद को सुलझाने के लिए सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने एक महत्वपूर्ण पहल की है। शीर्ष अदालत ने मामले को सीधे निर्णय देने के बजाय विशेष लोक अदालत और मध्यस्थता के माध्यम से दोनों पक्षों (हिंदू और मुस्लिम) को बातचीत से समाधान निकालने का निर्देश दिया है। इस संबंध में 14 जुलाई को जिला एवं सत्र न्यायालय परिसर स्थित केंद्र में मध्यस्थता की तारीख तय की गई है, जिसमें हिंदू और मुस्लिम दोनों पक्षों के वादी और अधिवक्ता शामिल होंगे।

    इसके बाद, आगामी 21 से 23 अगस्त तक तीन दिनों की विशेष लोक अदालत लगेगी, जहां दोनों पक्षों को आमने-सामने बैठाया जाएगा। सुप्रीम कोर्ट को पूरी उम्मीद है कि इस बातचीत से कोई न कोई सकारात्मक रास्ता जरूर निकलेगा। मामले से जुड़े अधिवक्ता पंडित सुधीर त्रिपाठी ने कहा कि ज्ञानवापी से संबंधित लंबित मुकदमों के मध्यस्थता से समाधान के संबंध में जिला स्तर पर नोटिस जारी किया गया है। ज्ञानवापी से जुड़ी सात पत्रावलियों के संबंध में नौ जुलाई को सभी पक्षों को सूचना दी गई थी। अब 14 जुलाई को दोनों पक्षों को बुलाया गया है।

    अधिवक्ता सुधीर त्रिपाठी ने कहा कि तीन महीने तक चले एएसआई सर्वे में मंदिर के अवशेष मिलने की बात सामने आई है और उनका पक्ष है कि मस्जिद का निर्माण मंदिर के ढांचे पर किया गया। उन्होंने कहा कि यदि मंदिर पक्ष को सौंप दिया जाता है तो वे दूसरे पक्ष पर किसी प्रकार की सजा या जुर्माने की मांग नहीं करेंगे। हालांकि, यदि समाधान नहीं निकलता है तो मुकदमे की कानूनी प्रक्रिया आगे जारी रहेगी।


    दोनों पक्षों का क्या दावा

    ज्ञानवापी विवाद में हिंदू पक्ष का दावा है कि मस्जिद की जगह पर पहले एक प्राचीन और मूल काशी विश्वनाथ मंदिर स्थित था। मुगल बादशाह औरंगजेब ने 1669 में इस मंदिर को तुड़वा दिया था और उसके अवशेषों पर ज्ञानवापी मस्जिद का निर्माण कराया था। मुस्लिम पक्ष मंदिर सौंपने के लिए तैयार होता है तो इस मध्यस्थता को सफल माना जाएगा। एसआई सर्वे के दौरान मंदिर से जुड़े पर्याप्त साक्ष्य मिले हैं। दूसरी ओर, मुस्लिम पक्ष का कहना है कि यह भूमि वक्फ बोर्ड की है और यहां सदियों से नमाज पढ़ी जा रही है। अगर सहमति से किसी निष्कर्ष तक पहुंचते हैं। उसके आधार पर अदालत आगे का आदेश पारित कर सकती है।


    डेढ़ वर्ष बाद समाधान की ओर बढ़ा ज्ञानवापी केस
    वाराणसी। ज्ञानवापी विवाद के समाधान के लिए जिला एवं सत्र न्यायालय परिसर स्थित मध्यस्थता केंद्र में 14 जुलाई को जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव एवं मध्यस्थता केंद्र प्रभारी जज राजीव मुकुल पांडेय की अध्यक्षता में हिंदू-मुस्लिम दोनों पक्षों की बैठक होने जा रही है। इससे ज्ञानवापी मुकदमे में सरगर्मी बढ़ेगी।

    याचिकाकर्ता अधिवक्ता अश्वनी उपाध्याय की एक याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने 12 दिसम्बर 2024 को ज्ञानवापी को लेकर नया मुकदमा दाखिल और स्वीकार करने पर रोक लगा दी है। सुप्रीम कोर्ट की तीन मेंबर वाली बेंच ने प्लेसेज ऑफ वर्शिप एक्ट (विशेष प्रावधानों) 1991 की कुछ धाराओं की वैधता पर सवाल उठाने वाली छह याचिकाओं पर सुनवाई की थी।

    बेंच ने कहा था कि हम इस कानून के दायरे, उसकी शक्तियों और ढांचे को जांच रहे हैं। ऐसे में यही उचित होगा कि बाकी सभी अदालतें अपने हाथ रोक लें। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से याचिकाओं पर चार हफ्ते में अपना पक्ष रखने को कहा था। केंद्र के जवाब दाखिल करने तक खंडपीठ ने सुनवाई से मना कर दिया था। कोर्ट ने कहा था कि पुराने मुकदमों में सुनवाई जारी रहेगी।

    सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद हाईकोर्ट से लेकर सेशन कोर्ट की विभिन्न अदालतों में लम्बित ज्ञानवापी के केसों में सुनवाई धीमी पड़ गई। आदेश के दृष्टिगत कई मामलों में अगली सुनवाई कई तिथियों से नहीं हो पा रही है। सुप्रीम कोर्ट की नई पहल के बाद करीब डेढ़ वर्ष बाद समाधान की नई संभावना दिखने लगी है।


    मध्यस्थता केंद्र में वादी-प्रतिवादी और अधिवक्ता सहित 30 लोग रहेंगे

    मध्यस्थता केंद्र में ज्ञानवापी के चार मुकदमों से जुड़े सभी वादी-प्रतिवादी और अधिवक्ता मौजूद रहेंगे। सुनवाई केंद्र प्रभारी जज की अध्यक्षता में होगी। निगरानी के लिए जिला जज भी शामिल हो सकते हैं।

    सभी पक्षकार और अधिवक्ता के हिसाब से तकरीबन 30 से ज्यादा लोग वार्ता में शामिल हो सकते हैं। इनमें वादी सोहनलाल आर्या, लक्ष्मी देवी, सीता साहू, रेखा पाठक, मंजू व्यास, शैलेंद्र पाठक व्यास के अलावा वादी अधिवक्ता विष्णुशंकर जैन, सुधीर त्रिपाठी, सुभाष नंदन चतुर्वेदी, जिला प्रशासन की ओर से विशेष अधिवक्ता राजेश मिश्र के साथ ही एएसआई और प्रतिवादी अंजुमन इंतेजामिया मसाजिद, सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड और ईएसआई के भी अधिवक्ता के रहने की संभावना है। वहीं, प्रतिवादी अंजुमन इंतेजामिया के अधिवक्ताओं ने नोटिस मिलने से इनकार किया है।

    मुफ्ती-ए-बनारस मौ. अब्दुल बातिन नोमानी ने कहा कि कोर्ट के इस आदेश के बारे में मुझे जानकारी नहीं है। कोर्ट ने अगर ऐसा कहा है तो हमारी कमेटी इस पर बैठकर विचार करेगी। हम लोग आपसी सहमति के बाद ही कुछ कह सकते हैं।

    वाद मित्र विजय शंकर रस्तोगी के अनुसार मध्यस्थता केंद्र से कोई नोटिस या सूचना नहीं मिली है। मेरा मुकदमा सिविल जज सीनियर डिविजन की कोर्ट में विचाराधीन है। यह 1991 के ज्ञानवापी के मूलवाद से जुड़ा है। इसमें ज्ञानवापी के धार्मिक स्ट्रक्चर का निर्धारण होना है।

    अधिवक्ता एवं पक्षकार मुख्तार अहमद अंसारी इस मामले को विशेष लोक अदालत में नहीं भेजा जाना चाहिए। अगर ऐसा हो रहा है तो यह मुस्लिम समाज पर दबाव बनाना है। जब प्लसेस ऑफ वर्शिप एक्ट 1991 सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है तो जल्दीबाजी क्यों? सुप्रीम कोर्ट पहले इस एक्ट का निस्तारण कर दे। फिर, इस तरह की पहल होनी चाहिए।

  • जम्मू- कश्मीर के बारामूला जिले में महसूस किए गए भूकंप के झटके…. तीव्रता 3.6 दर्ज

    जम्मू- कश्मीर के बारामूला जिले में महसूस किए गए भूकंप के झटके…. तीव्रता 3.6 दर्ज


    श्रीनगर।
    जम्मू-कश्मीर (Jammu and Kashmir) के बारामूला जिले (Baramulla district) में सोमवार तड़के भूकंप (Earthquake) के हल्के झटके महसूस किए गए. राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र (NCS) के अनुसार, भूकंप की तीव्रता (Earthquake Intensity 3.6) रिक्टर स्केल (Richter scale) पर 3.6 दर्ज की गई. यह भूकंप रात करीब 2 बजे आया और इसका केंद्र जमीन से 10 किलोमीटर की गहराई में था.

    भूकंप के झटके बारामूला के अलावा कश्मीर घाटी के कई अन्य इलाकों में भी महसूस किए गए. अचानक आए झटकों से लोगों में कुछ देर के लिए दहशत फैल गई. एहतियात के तौर पर कई लोग अपने घरों और इमारतों से बाहर निकल आए. हालांकि, किसी तरह के जान-माल के नुकसान या किसी के घायल होने की सूचना नहीं मिली।

    राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर भूकंप की जानकारी दी. इसी साल फरवरी में भी बारामूला जिले में 4.6 तीव्रता का भूकंप आया था. उस समय पट्टन क्षेत्र भूकंप का केंद्र था और घाटी के कई हिस्सों में झटके महसूस किए गए थे. कश्मीर भूकंपीय दृष्टि से बेहद संवेदनशील माना जाता है. यह इलाका उच्च भूकंपीय जोन में स्थित है, जहां टेक्टोनिक प्लेटों की लगातार गतिविधियों के कारण समय-समय पर भूकंप के झटके महसूस होते रहते हैं।

    इससे पहले 9 जुलाई को सुबह-सुबह महाराष्ट्र के मराठवाड़ा क्षेत्र में भूकंप के हल्के झटके महसूस किए गए थे. नांदेड़, हिंगोली और परभणी जिलों में भूकंप के झटके महसूस किए गए. झटके हल्की तीव्रता के थे, लेकिन लोग दाहशत में अपने घरों से बाहर निकल आए.

    गत 27 जून को अफगानिस्तान के हिंदूकुश क्षेत्र में 6.2 तीव्रता का भूकंप आया था. भूकंप का केंद्र पूर्वोत्तर अफगानिस्तान में कालाफगान से करीब 81 किलोमीटर दूर, 36.442° उत्तरी अक्षांश और 70.672° पूर्वी देशांतर पर और धरती की सतह से 215 किलोमीटर की गहराई में था. भूकंप का केंद्र धरती की सतह से अत्यधिक गहराई में होने के कारण इसके झटके पाकिस्तान, भारत के उत्तरी हिस्से, चीन, ताजिकिस्तान, उज्बेकिस्तान, किर्गिस्तान और तुर्कमेनिस्तान समेत कई देशों में महसूस किए गए थे।

  • राम मंदिर केस: घोटाले में लिप्त बैंककर्मी को बनाया चढ़ावे की रकम का गणना प्रभारी, बगैर जांच रखे कर्मचारी

    राम मंदिर केस: घोटाले में लिप्त बैंककर्मी को बनाया चढ़ावे की रकम का गणना प्रभारी, बगैर जांच रखे कर्मचारी


    लखनऊ।
    राम मंदिर चढ़ावा चोरी (Ram Mandir offerings theft) केस में जेल भेजे गए आरोपी सुभाष श्रीवास्तव (Subhash Srivastava) को लेकर एसआईटी की विस्तृत जांच में बड़ा खुलासा हुआ है। सुभाष जब बैंक में था, तब उसे घोटाले के आरोप में बर्खास्त किया गया था। हालांकि बाद में वह कोर्ट से बहाली का आदेश लेकर आया था। ऐसे में सवाल उठता है कि ट्रस्ट ने बिना किसी जांच-पड़ताल के सुभाष को नौकरी पर रखा। वह भी सबसे संवेदनशील कार्य गणना का इंचार्ज बना दिया। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि ट्रस्ट ने किस कदर आंखें मूंदकर काम किया।

    मामले में अब तक कुल आठ आरोपी जेल भेजे गए हैं। इसमें गणना इंचार्ज सुभाष श्रीवास्तव भी शामिल है। गणना प्रक्रिया की देखरेख करने से लेकर नकदी आदि बैंक भिजवाने तक की जिम्मेदारी सुभाष की थी। जांच में सामने आया था कि उसकी मिलीभगत की वजह से आरोपी रकम पार करते रहे थे। वहीं, जब एसआईटी प्रकरण की विस्तृत जांच कर रही है, तो उसमें एक और चौंकाने वाला तथ्य उजागर हुआ। पता चला कि सुभाष सिंडिकेट बैंक में काम करता था। उसी दौरान गबन व घोटाले का एक मामला हुआ था। विभागीय जांच के बाद सुभाष श्रीवास्तव को बैंक से बर्खास्त कर दिया गया था। कार्रवाई के खिलाफ वह कोर्ट पहुंचा था, जहां से उसे बहाली का आदेश मिला था। बहाल होने के बाद उसने नौकरी ज्वाइन की थी। रिटायर होने के बाद वह राम मंदिर में काम करने लगा था।


    प्रमुखता से जांच में शामिल किया

    सूत्रों के अनुसार मंदिर में नौकरी पर लोगों को रखने की प्रक्रिया को एसआईटी ने बेहद अहम माना है। मनचाहे तरीके से तमाम कर्मचारियों को रखा गया था। इसी में सुभाष को भी रखने का मामला सामने आया है। सूत्रों का कहना है कि सुभाष ट्रस्ट के पदाधिकारियों के संपर्क में था। लिहाजा, जब वह रिटायर हुआ तो बिना जांच के उसे नौकरी पर रख लिया गया था। लोग बताते हैं, उसका दावा था कि वह सेवा करता है, इसलिए सैलरी नहीं लेता है। टिन्नू की शह पर सुभाष ही तय करता था कि गणना में किसकी ड्यूटी लगाई जाएगी।

  • दीक्षांत समारोह में गूंजी छात्रों की आवाज: राज्यपाल ने हॉस्टल की बिजली और सुविधाओं पर मांगा जवाब

    दीक्षांत समारोह में गूंजी छात्रों की आवाज: राज्यपाल ने हॉस्टल की बिजली और सुविधाओं पर मांगा जवाब


    कानपुर कानपुर स्थित हरकोर्ट बटलर टेक्निकल यूनिवर्सिटी (HBTU) के आठवें दीक्षांत समारोह में शुक्रवार को शिक्षा और उपलब्धियों के साथ-साथ छात्रों की मूलभूत सुविधाओं का मुद्दा भी प्रमुखता से छाया रहा। समारोह की अध्यक्षता करने पहुंचीं उत्तर प्रदेश की राज्यपाल एवं कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल ने विश्वविद्यालय प्रशासन से हॉस्टलों की व्यवस्थाओं को लेकर तीखे सवाल पूछे और स्पष्ट शब्दों में कहा कि एक साल पहले जिन समस्याओं की ओर ध्यान दिलाया गया था, वे आज भी जस की तस बनी हुई हैं।

    अध्यक्षीय संबोधन के दौरान राज्यपाल ने फाइनेंस कंट्रोलर और कुलसचिव से पूछा कि आखिर हॉस्टलों में बिजली की समस्या अब तक क्यों बनी हुई है। उन्होंने कहा कि छात्रों को कपड़े धोने के लिए वॉशिंग मशीन जैसी बुनियादी सुविधा तक उपलब्ध नहीं है। उन्होंने सीधे सवाल किया कि क्या विश्वविद्यालय के पास बजट की कमी है और यदि नहीं तो फिर इन सुविधाओं को अब तक क्यों नहीं सुधारा गया। राज्यपाल की इस टिप्पणी पर सभागार में मौजूद छात्र-छात्राओं ने तालियां बजाकर उनका समर्थन किया।

    दीक्षांत समारोह के दौरान राज्यपाल ने एक क्लिक के जरिए सभी 996 विद्यार्थियों की डिग्रियां डिजिलॉकर पर जारी कीं। हालांकि उन्होंने इस बात पर भी नाराजगी जताई कि छात्र डिजिलॉकर का अपेक्षित उपयोग नहीं कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि जब सरकार बेहतर डिजिटल सुविधाएं उपलब्ध करा रही है तो उनका अधिक से अधिक इस्तेमाल होना चाहिए। उन्होंने परीक्षा नियंत्रक को कम डाउनलोड के कारणों की जानकारी लेकर राजभवन में प्रस्तुत होने के निर्देश भी दिए।

    समारोह में कुल 996 छात्र-छात्राओं को 1071 डिग्रियां प्रदान की गईं। कुछ विद्यार्थियों को मेजर और माइनर पाठ्यक्रम पूरा करने के कारण दो-दो डिग्रियां भी मिलीं। विश्वविद्यालय के मेधावी छात्रों को सम्मानित किया गया। बीटेक इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग के छात्र प्रज्ञान वर्मा को कुलाधिपति स्वर्ण पदक, कुलपति स्वर्ण पदक और एक प्रायोजित स्वर्ण पदक सहित तीन सम्मान प्रदान किए गए। इसके साथ ही उन्हें 40 हजार रुपये का नकद पुरस्कार भी दिया गया। कुल 47 मेधावी छात्र-छात्राओं को विभिन्न पदकों और पुरस्कारों से सम्मानित किया गया।

    राज्यपाल ने छात्राओं को तकनीकी शिक्षा और नवाचार के क्षेत्र में आगे आने का भी आह्वान किया। उन्होंने कहा कि आज की बेटियां हर क्षेत्र में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा रही हैं और तकनीक के क्षेत्र में भी उन्हें नेतृत्व की भूमिका निभानी चाहिए। उन्होंने उन्नाव की आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों को किट और शैक्षणिक सामग्री वितरित करते हुए बच्चों के सर्वांगीण विकास पर विशेष ध्यान देने की बात कही। समारोह में प्रस्तुति देने वाले स्कूली बच्चों से बातचीत कर उन्हें चॉकलेट देकर उनका उत्साह भी बढ़ाया।

    दीक्षांत समारोह के मुख्य अतिथि और एफडीडीआई के अध्यक्ष राजेंद्र कुमार जालान ने स्वयं को HBTU का पूर्व छात्र बताते हुए कहा कि इस संस्थान ने उन्हें जीवन में आगे बढ़ने की प्रेरणा दी और आज यहां से निकलने वाले विद्यार्थी भी देश-दुनिया में अपनी पहचान बनाएंगे।

    शिक्षा, उपलब्धियों और सम्मान के इस समारोह में राज्यपाल का प्रशासन को दिया गया स्पष्ट संदेश सबसे अधिक चर्चा का विषय रहा। उन्होंने संकेत दिया कि तकनीकी संस्थानों में केवल उत्कृष्ट परिणाम ही नहीं, बल्कि छात्रों के लिए बेहतर बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराना भी विश्वविद्यालय की सर्वोच्च जिम्मेदारी है।

  • यूपी में मानसून का कहर: 30 शहरों में मूसलाधार बारिश, नहर टूटी, कब्रिस्तान से बाहर आए शव; 49 जिलों में अलर्ट

    यूपी में मानसून का कहर: 30 शहरों में मूसलाधार बारिश, नहर टूटी, कब्रिस्तान से बाहर आए शव; 49 जिलों में अलर्ट


    उत्तरप्रदेश । उत्तर प्रदेश में मानसून ने पूरी तरह रफ्तार पकड़ ली है और इसकी पहली बड़ी मार प्रदेश के कई जिलों पर साफ दिखाई देने लगी है। शुक्रवार सुबह से वाराणसी, प्रयागराज, कानपुर, लखनऊ, सहारनपुर, बांदा, हापुड़, बिजनौर, प्रतापगढ़ समेत करीब 30 शहरों में रुक-रुककर तेज बारिश का दौर जारी है। लगातार हो रही बारिश के कारण कई इलाकों में सड़कें तालाब बन गई हैं, निचले क्षेत्रों में पानी घरों तक पहुंच गया है और जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है।

    सहारनपुर में भारी बारिश ने बेहद संवेदनशील स्थिति पैदा कर दी। कब्रिस्तान की मिट्टी बह जाने से कई पुराने शवों के अवशेष बाहर आ गए, जिससे स्थानीय लोगों में चिंता और भय का माहौल बन गया। वहीं मुजफ्फरनगर में नहर ओवरफ्लो होकर टूट गई, जिससे आसपास के खेतों में पानी भर गया और किसानों की फसलें प्रभावित होने लगीं।

    बिजनौर के चांदपुर क्षेत्र में सरकारी जूनियर हाईस्कूल की दीवार अचानक भरभराकर गिर गई। राहत की बात यह रही कि घटना के समय स्कूल में कोई मौजूद नहीं था, जिससे बड़ा हादसा टल गया। वाराणसी और प्रतापगढ़ में गलियां जलमग्न हो गईं, जबकि प्रयागराज में जलभराव के कारण एक कार नाले में जा घुसी। स्थानीय लोगों की मदद से वाहन चालक को सुरक्षित बाहर निकाला गया।

    हापुड़ के कई इलाकों में दो-दो फीट तक पानी भर गया है, जबकि बांदा में बारिश का पानी घरों में घुसने से लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। लखनऊ में पूरी रात बारिश होने के बाद सुबह भी बारिश का सिलसिला जारी रहा, जिससे शहर के कई इलाकों में जलभराव की स्थिति बनी रही।

    खराब मौसम को देखते हुए मेरठ, सहारनपुर, गाजियाबाद, मुरादाबाद समेत 13 जिलों में कक्षा 12 तक के सभी स्कूल बंद कर दिए गए हैं। प्रशासन ने लोगों से अत्यंत आवश्यक होने पर ही घर से बाहर निकलने की अपील की है।

    बारिश से जुड़े हादसों में पिछले 48 घंटों के दौरान प्रदेश में 13 लोगों की जान जा चुकी है। संभल में सड़क दुर्घटना में एक बुजुर्ग महिला की मौत हो गई, जबकि मुजफ्फरनगर और बदायूं में कच्चे मकानों की दीवार गिरने से दो महिलाओं की जान चली गई। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सभी जिलाधिकारियों और अधिकारियों को फील्ड में उतरकर राहत एवं बचाव कार्य तेज करने तथा प्रभावित परिवारों को तत्काल सहायता और मुआवजा उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं।

    मौसम विभाग के अनुसार बंगाल की खाड़ी से सक्रिय हुआ मानसूनी सिस्टम अब मध्य प्रदेश के आसपास पहुंच चुका है, जिसका व्यापक असर उत्तर प्रदेश में देखने को मिल रहा है। भारतीय मौसम विभाग ने प्रदेश के 49 जिलों में गरज-चमक के साथ बारिश का अलर्ट जारी किया है और अगले पांच दिनों तक भारी बारिश का सिलसिला जारी रहने की संभावना जताई है।

    गुरुवार को भी प्रदेश के 69 शहरों में बारिश दर्ज की गई थी। बिजनौर के नजीबाबाद में 24 घंटे के दौरान 306 मिमी वर्षा रिकॉर्ड की गई, जो 1952 के बाद चौथी सबसे अधिक और जुलाई महीने की तीसरी सबसे बड़ी बारिश मानी गई है। लगातार सक्रिय मानसून को देखते हुए प्रशासन और मौसम विभाग दोनों ही लोगों से सतर्क रहने और जलभराव वाले इलाकों से दूरी बनाए रखने की अपील कर रहे हैं।

  • राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामला गरमाया, कर्मचारियों ने छोड़ी नौकरी; CBI जांच की मांग पर सुप्रीम कोर्ट करेगा सुनवाई

    राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामला गरमाया, कर्मचारियों ने छोड़ी नौकरी; CBI जांच की मांग पर सुप्रीम कोर्ट करेगा सुनवाई

    अयोध्या । अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावे से जुड़ी कथित अनियमितताओं का मामला अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। शीर्ष अदालत 13 जुलाई को इस प्रकरण से संबंधित तीन याचिकाओं पर सुनवाई करेगी। इन याचिकाओं में मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को सौंपने, विशेष जांच दल (SIT) गठित करने और मंदिर में दान प्रबंधन की समीक्षा के लिए विशेषज्ञ समिति बनाने की मांग की गई है।

    इस बीच चढ़ावा गिनने वाले 23 कर्मचारियों ने सामूहिक रूप से इस्तीफा देकर नया विवाद खड़ा कर दिया है। कर्मचारियों का कहना है कि पहले जहां चढ़ावे में बड़ी संख्या में 500 रुपये के नोट आते थे, वहीं अब 10 और 20 रुपये के नोटों की संख्या काफी बढ़ गई है। इससे नकदी की गिनती में अधिक समय लग रहा है और कार्यभार कई गुना बढ़ गया है।

    कर्मचारियों के मुताबिक पहले 500 रुपये के नोटों की 70 से 80 गड्डियां तैयार हो जाती थीं, जबकि अब मुश्किल से 15 गड्डियां बन पाती हैं। इसके अलावा पहले दो शिफ्टों में होने वाला काम अब सुबह 9 बजे से शाम 6 बजे तक एक ही शिफ्ट में कराया जा रहा है, जबकि वेतन में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई। इस्तीफों के बाद बैंक के पास अब केवल 13 गणना कर्मी ही बचे हैं।

    चढ़ावा विवाद का असर अयोध्या से बाहर भी देखने को मिला है। नेपाल के जनकपुर स्थित जानकी मंदिर के महंत रोशन दास ने इस घटना पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए कहा कि भगवान श्रीराम के किसी मंदिर में इस तरह की घटना न पहले कभी सुनी और न देखी। उन्होंने दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। महंत ने बताया कि सावन माह में जनकपुर से 5 से 7 श्रद्धालुओं का प्रतिनिधिमंडल अयोध्या पहुंचकर दर्शन करेगा और अपनी संवेदना प्रकट करेगा।

    इधर, विवाद के बीच श्रीराम जन्मभूमि मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र अयोध्या पहुंचे। उन्होंने हनुमानगढ़ी में पूजा-अर्चना करने के बाद मंदिर निर्माण कार्यों की समीक्षा की और इंजीनियरों व ट्रस्ट से जुड़े अधिकारियों के साथ बैठक कर निर्माण की प्रगति की जानकारी ली।

    मामले को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि रामभक्तों पर गोली चलाने वाले आज आस्था की बात कर रहे हैं। वहीं कांग्रेस नेताओं ने निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए सरकार पर सवाल उठाए हैं। विपक्षी नेताओं का कहना है कि पूरे मामले की स्वतंत्र एजेंसी से जांच होनी चाहिए ताकि सच्चाई सामने आ सके।

    अब इस बहुचर्चित मामले पर सभी की निगाहें 13 जुलाई को होने वाली सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई पर टिकी हैं, जहां जांच की दिशा और आगे की प्रक्रिया को लेकर महत्वपूर्ण फैसला सामने आ सकता है।

  • राज्यसभा उपचुनावः बंगाल में ममता के साथ खेला…BJP ने TMC से आए तीनों सांसदों को बनाया उम्मीदवार

    राज्यसभा उपचुनावः बंगाल में ममता के साथ खेला…BJP ने TMC से आए तीनों सांसदों को बनाया उम्मीदवार


    नई दिल्ली।
    पश्चिम बंगाल (West Bengal) में चुनाव आयोग (Election Commission) ने खाली हुई राज्यसभा (Rajya Sabha) की तीन सीटों पर उपचुनाव (By-election) की घोषणा कर दी है. इस हादसे की सबसे दिलचस्प बात ये है कि उपचुनाव के बाद भी संसद के उच्च सदन में भेजने वाले चेहरे वही रहने की उम्मीद है, बस उनकी पार्टी का रंग बदल चुका है।

    BJP इन तीनों सीटों पर जीत दर्ज करने के लिए पूरी तरह आश्वस्त नजर आ रही है. दूसरी तरफ, आपसी गुटबाजी और बिखराव से जूझ रही तृणमूल कांग्रेस के सामने राज्यसभा में अपनी ताकत और कम होने का बड़ा खतरा मंडरा रहा है।

    जून में टीएमसी के तीन पूर्व राज्यसभा सांसदों- सुखेंदु शेखर राय, सुष्मिता देव और प्रकाश चिक बड़ाइक ने अपनी ही पार्टी और राज्यसभा सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था. विधानसभा चुनाव में टीएमसी की करारी हार के बाद इन नेताओं ने नेतृत्व पर सवाल उठाए थे।


    बीजेपी में शामिल होते ही उम्मीदवार घोषित

    सुखेंदु शेखर राय, सुष्मिता देव और प्रकाश चिक बड़ाइक अब ये बीजेपी का दामन थाम चुके हैं. उन्होंने आज ही बीजेपी जॉइन की और पार्टी ने आज ही उन्हें ही अपना उम्मीदवार बना दिया है।

    संसदीय नियमों के मुताबिक, सुखेंदु शेखर राय और प्रकाश चिक बड़ाइक का कार्यकाल सितंबर 2029 तक था, जबकि सुष्मिता देव का कार्यकाल अप्रैल 2030 तक चलना था. अब इन खाली सीटों पर 24 जुलाई को उपचुनाव होने जा रहे हैं और यही तीनों नेता एक बार फिर उम्मीदवार होंगे. सिर्फ उनकी पार्टी नई होगी।


    विधानसभा का गणित: बीजेपी का पलड़ा भारी

    बंगाल विधानसभा के मौजूदा आंकड़ों को देखें तो नंबर गेम पूरी तरह से बीजेपी के पक्ष में झुका हुआ है. 294 सदस्यीय विधानसभा में बीजेपी के पास अपने 208 विधायक हैं. राज्यसभा चुनाव के सिस्टम के मुताबिक, तीन सीटों वाले इस उपचुनाव में किसी भी उम्मीदवार को जीतने के लिए लगभग 70 वोटों की जरूरत होगी।

    बीजेपी के पास विधायकों की संख्या इतनी ज्यादा है कि वो बिना किसी बाहरी समर्थन के अपने तीनों उम्मीदवारों को आसानी से 70, 69 और 69 वोट दिला सकती है. इस गणित के कारण बीजेपी की तीनों सीटों पर जीत पूरी तरह पक्की मानी जा रही है.


    दो गुटों में बंटी टीएमसी, चुनौती बड़ी

    बीजेपी के इस बड़े ‘खेले’ के सामने टीएमसी बेबस नजर आ रही है. किसी भी विरोधी उम्मीदवार को जीतने के लिए कम से कम 70 वोटों की जरूरत होगी. वैसे तो टीएमसी के टिकट पर जीते विधायकों की कुल संख्या अभी भी करीब 80 है. लेकिन पार्टी के भीतर मचे घमासान ने इसे कमजोर कर दिया है. टीएमसी के विधायक अब दो धड़ों में बंट चुके हैं- एक खेमा ममता बनर्जी के साथ है, तो दूसरा बागी गुट विधानसभा में विपक्ष के नेता रीताब्रत बनर्जी के नेतृत्व में काम कर रहा है।

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अगर टीएमसी एकजुट होती, तो वह कम से कम एक सीट के लिए मुकाबला कड़ा कर सकती थी. लेकिन अंदरूनी लड़ाई इतनी बढ़ चुकी है कि दोनों गुटों के बीच किसी आम सहमति की गुंजाइश खत्म हो गई है. बागी गुट का दावा है कि टीएमसी के 80 में से 58 विधायकों ने पहले ही रीताब्रत बनर्जी का समर्थन किया था और अब उनके साथ करीब 65 विधायक हैं।


    ‘विश्वासघात’ बनाम ‘नेतृत्व का संकट’

    ममता बनर्जी का खेमा इस नुकसान को कम आंकने की कोशिश कर रहा है. उनका कहना है कि ये उन नेताओं का ‘विश्वासघात’ है जिन्होंने संकट के समय पार्टी को छोड़ दिया. टीएमसी के एक वरिष्ठ नेता ने कहा, ‘ये सीटें टीएमसी की थीं, जो पिछले चुनाव में पार्टी की ताकत के दम पर जीती गई थीं. कुछ लोगों ने मुश्किल समय में पार्टी छोड़ दी, बंगाल की जनता सब देख रही है।

    दूसरी तरफ, बागी गुट के नेताओं का कहना है कि ये कोई आम इस्तीफा नहीं है, बल्कि ये पार्टी के शीर्ष नेतृत्व को लेकर अविश्वास का नतीजा है. उन्होंने कहा, ‘नेतृत्व ने संगठन के भीतर से मिल रही चेतावनियों को नजरअंदाज किया, जिसका नतीजा विधानसभा चुनाव में देखने को मिला. असली मुद्दा राज्यसभा सीट का नहीं, बल्कि ये है कि चुने हुए प्रतिनिधियों का अब मौजूदा नेतृत्व पर भरोसा क्यों नहीं रहा।

    फिलहाल, दोनों गुटों के बीच टीएमसी के नाम, सिंबल और संगठन पर कब्जे की लड़ाई चुनाव आयोग के सामने लंबित है. अगर 24 जुलाई को होने वाले उपचुनाव में बीजेपी इन तीनों सीटों पर जीत हासिल करती है, तो राज्यसभा में उसकी ताकत बढ़ेगी और टीएमसी का कद घटेगा।

  • ईडी ने TMC के 440 करोड़ रुपये किए फ्रीज….पार्टी बोली- राजनीति से प्रेरित कार्रवाई

    ईडी ने TMC के 440 करोड़ रुपये किए फ्रीज….पार्टी बोली- राजनीति से प्रेरित कार्रवाई


    कोलकाता।
    पश्चिम बंगाल चुनाव (West Bengal Elections) में हार के साथ सत्ता गंवाने के बाद अपने नेताओं की बगावत (Rebellion) झेल रही ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) की अगुवाई वाली तृणमूल कांग्रेस (Trinamool Congress) अब एक नई मुश्किल में घिर गई है. प्रवर्तन निदेशालय (Enforcement Directorate) यानी ईडी ने टीएमसी के बैंक खातों में जमा 440 करोड़ रुपये धनराशि फ्रीज कर दी है. ईडी ने इस कार्रवाई के पीछे एविएशन कंपनी केयरवेल और उससे जुड़ी एक कंपनी के खाते में 2023 से 2026 के बीच 160 करोड़ रुपये ट्रांसफर किए जाने को वजह बताया है।

    ईडी अब वित्तीय लेनदेन में धोखाधड़ी के एंगल से जांच की बात कह रही है. वहीं, ईडी के इस एक्शन को टीएमसी ने राजनीति से प्रेरित, मनमानी और अवैध बताया है. टीएमसी ने ईडी के इस एक्शन को लेकर बयान जारी कर कहा है कि खातों में जमा धनराशि की पूरी जानकारी पार्टी चुनाव आयोग और आयकर विभाग को पारदर्शी तरीके से उपलब्ध कराती रही है।

    टीएमसी की ओर से कहा गया है कि पार्टी ने चंदे से संबंधित जानकारी समय-समय पर चुनाव आयोग् और आयकर विभाग को दी है. हर साल पार्टियों के चंदे से जुड़ी जानकारियां चुनाव आयोग की वेबसाइट पर सार्वजनिक भी की जाती है. टीएमसी ने दावा कहा है कि इलेक्टोरल बॉन्ड से जुड़ी जानकारियां केंद्र सरकार के पास भी पहले से ही उपलब्ध हैं. ये बॉन्ड भारतीय स्टेट बैंक की ओर से जारी किए गए थे और बाद में इनका विवरण सुप्रीम कोर्ट को भी दिया गया था।

    टीएमसी ने केंद्र सरकार पर राजनीतिक विरोधियों को निशाना बनाने के लिए केंद्रीय एजेंसियों के उपयोग का आरोप लगाया और कहा कि यह लोकतांत्रिक संस्थाओं और निष्पक्ष राजनीतिक प्रतिस्पर्धा के लिए लेवल प्लेइंग फील्ड के सिद्धांत पर गंभीर हमला है. गौरतलब है कि ईडी ने यह कार्रवाई ऐसे समय की है, जब टीएमसी में पार्टी के नाम-निशान पर कब्जे की जंग छिड़ी हुई है।

    ऋतब्रत बनर्जी की अगुवाई वाले गुट ने पार्टी संगठन, इसके नाम और निशान पर दावा किया है. बागी गुट ने नेतृत्व की लड़ाई पर फैसला होने तक बैंकों से पार्टी खाते से लेनदेन रोकने की भी अपील की थी. अब ईडी ने ही जमा धनराशि फ्रीज कर दी है।

  • अयोध्या में क्या होने वाला है बड़ा फैसला? चंपत राय के लेटर से मची हलचल संतों की महाबैठक की तैयारी

    अयोध्या में क्या होने वाला है बड़ा फैसला? चंपत राय के लेटर से मची हलचल संतों की महाबैठक की तैयारी


    नई दिल्ली । अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को लेकर एक बार फिर चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय के दो दिनों के भीतर सामने आए पत्रों ने न केवल संगठन के भीतर हलचल बढ़ा दी है बल्कि संत समाज और रामभक्तों के बीच भी नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है। लगातार हो रही बैठकों और वरिष्ठ पदाधिकारियों की सक्रियता ने इस बात के संकेत दिए हैं कि आने वाले दिनों में ट्रस्ट की व्यवस्था और कार्यप्रणाली को लेकर कोई बड़ा फैसला सामने आ सकता है। हालांकि अब तक किसी भी स्तर पर आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।

    सूत्रों के अनुसार चंपत राय के पत्र सार्वजनिक होने के बाद ट्रस्ट के नए महासचिव कृष्ण मोहन और कोषाध्यक्ष महंत गोविंद देवगिरी ने उनसे मुलाकात की। इसके बाद कई प्रमुख संत महंत और ट्रस्ट से जुड़े वरिष्ठ लोगों ने भी अलग अलग बैठकों में हिस्सा लिया। इन मुलाकातों को सामान्य प्रक्रिया से अलग माना जा रहा है क्योंकि इनका उद्देश्य ट्रस्ट में बने मौजूदा हालात पर चर्चा और आगे की रणनीति तय करना बताया जा रहा है।

    बताया जा रहा है कि महासचिव पद से हटाए जाने के बाद चंपत राय खुद को उपेक्षित महसूस कर रहे हैं। हाल ही में जारी उनके पत्रों में भी उनकी पीड़ा झलकने की बात कही जा रही है। पत्रों के सार्वजनिक होने के बाद संगठन के भीतर यह कोशिश तेज हो गई है कि किसी तरह विवाद और अधिक न बढ़े तथा स्थिति को सामान्य बनाया जाए। इसी कारण लगातार संवाद और बैठकों का सिलसिला जारी है।

    जानकारी के मुताबिक राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और विश्व हिंदू परिषद के कुछ वरिष्ठ पदाधिकारियों ने भी चंपत राय से संपर्क किया है। उनसे संगठनात्मक मर्यादा बनाए रखने और पूरे मामले को शांतिपूर्वक सुलझाने का आग्रह किया गया है। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में सभी पक्षों के बीच समन्वय स्थापित करने का प्रयास और तेज होगा।

    इधर ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष महंत गोविंद देवगिरी से कई प्रमुख संतों ने विस्तृत चर्चा की। बैठक के बाद संतों ने संकेत दिए कि निकट भविष्य में ऐसा परिवर्तन देखने को मिल सकता है जिसकी व्यापक स्तर पर सराहना होगी। संत समाज का कहना है कि राम मंदिर आंदोलन में संतों की भूमिका हमेशा महत्वपूर्ण रही है इसलिए ट्रस्ट की व्यवस्था में भी उनका प्रभावी प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया जाना चाहिए। उनका मानना है कि भविष्य में निर्णय प्रक्रिया में संतों की अधिक भागीदारी से संगठन और अधिक मजबूत होगा।

    सूत्रों के अनुसार 22 जुलाई को प्रस्तावित ट्रस्ट की बैठक से पहले संतों की एक बड़ी बैठक आयोजित की जा सकती है जिसमें देशभर से सैकड़ों संत और महंत शामिल हो सकते हैं। इस बैठक का उद्देश्य हाल के विवादों के बाद समाज में बने भ्रम को दूर करना और राम मंदिर ट्रस्ट के प्रति सकारात्मक संदेश देना बताया जा रहा है। साथ ही यह भी स्पष्ट किया जाएगा कि कथित अनियमितताओं में पूरे ट्रस्ट की भूमिका नहीं बल्कि केवल कुछ व्यक्तियों पर कार्रवाई की गई है।

    फिलहाल अयोध्या में लगातार हो रही बैठकों और बढ़ी गतिविधियों ने यह साफ कर दिया है कि राम मंदिर ट्रस्ट आने वाले दिनों में संगठनात्मक स्तर पर कुछ अहम फैसले ले सकता है। हालांकि इन बैठकों का अंतिम परिणाम क्या होगा और संभावित बदलाव किस रूप में सामने आएंगे इसका जवाब आने वाले समय में ही मिल सकेगा।

  • आगरा में रिश्तों का खूनी अंत: पंचायत के बाद पति ने पत्नी को चाकुओं से गोद डाला

    आगरा में रिश्तों का खूनी अंत: पंचायत के बाद पति ने पत्नी को चाकुओं से गोद डाला


    आगरा आगरा के ताजगंज क्षेत्र में घरेलू विवाद सुलझाने के लिए बुलाई गई पंचायत उस समय खौफनाक घटना में बदल गई जब पत्नी द्वारा सार्वजनिक रूप से थप्पड़ मारे जाने से नाराज पति ने कुछ ही देर बाद लौटकर उसकी चाकू से हत्या कर दी। आरोपी ने महिला के पेट पर लगातार छह वार किए, जिससे उसकी मौके पर ही हालत गंभीर हो गई। अस्पताल ले जाने पर डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। पुलिस ने आरोपी पति को हिरासत में लेकर मामले की जांच शुरू कर दी है।

    मृतका कुंती पिछले आठ महीने से अपने मायके में रह रही थी। पति-पत्नी के बीच लंबे समय से विवाद चल रहा था और महिला ने गुजारा भत्ता के लिए अदालत में याचिका भी दायर कर रखी थी। दोनों के बीच समझौते की कोशिश के लिए मंगलवार को परिवार और रिश्तेदारों की मौजूदगी में पंचायत बुलाई गई थी।

    पंचायत के दौरान पति रणवीर अपनी पत्नी को जबरन अपने साथ ले जाने की कोशिश करने लगा। कुंती ने इसका विरोध किया और गुस्से में सबके सामने उसे दो थप्पड़ मार दिए। इसके बाद रणवीर अपने पिता के साथ वहां से चला गया, लेकिन उसके मन में बदले की भावना बनी रही।

    पुलिस के अनुसार आरोपी रास्ते में बाजार पहुंचा और करीब 40 रुपये में एक धारदार चाकू खरीदा। इसके बाद वह दोबारा ससुराल पहुंचा। उस समय कुंती घर के कमरे में मौजूद थी। रणवीर उसे घसीटकर बरामदे में ले आया और देखते ही देखते उसके पेट पर ताबड़तोड़ चाकू से वार कर दिए।

    महिला की चीख-पुकार सुनकर परिजन दौड़कर मौके पर पहुंचे और आरोपी को पकड़ लिया। गंभीर रूप से घायल कुंती को तत्काल अस्पताल ले जाया गया, लेकिन अत्यधिक रक्तस्राव के कारण डॉक्टर उसे बचा नहीं सके। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और आरोपी को गिरफ्तार कर लिया।

    मृतका के परिजनों ने बताया कि घटना से एक दिन पहले रणवीर ने मोबाइल पर पत्नी की हत्या से जुड़े वीडियो भेजे थे। इनमें एक वीडियो में पति द्वारा पत्नी की हत्या और दूसरे में एक महिला की हत्या के बाद शव छिपाने का दृश्य दिखाया गया था। परिजनों का आरोप है कि इससे स्पष्ट है कि आरोपी पहले से ही वारदात की योजना बना चुका था।

    पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और हत्या के पीछे की परिस्थितियों तथा आरोपी की पूर्व योजना के पहलुओं की जांच की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि मामले में उपलब्ध सभी साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।