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  • भिलाई में बोरी में बंद मिली अज्ञात महिला की लाश पुलिस ने शुरू की जांच

    भिलाई में बोरी में बंद मिली अज्ञात महिला की लाश पुलिस ने शुरू की जांच

    भिलाई । भिलाई के चंद्रा मौर्या अंडरब्रिज के पास शुक्रवार सुबह एक बोरी में बंद अज्ञात महिला की लाश मिलने से पूरे इलाके में सनसनी फैल गई। यह घटना उस समय घटी जब सुबह के समय अंडरब्रिज से गुजर रहे लोगों की नजर बोरी से बाहर लटकते एक हाथ पर पड़ी। स्थानीय नागरिकों ने तत्काल पुलिस को सूचना दी जिसके बाद घटनास्थल पर पुलिस और जांच एजेंसियां पहुंची। पुलिस को मौके पर पहुंचते ही शव की स्थिति को देखकर यह साफ हो गया कि महिला की मौत किसी हिंसक तरीके से हुई हो सकती है। बोरी में बंद महिला का शव बहुत बुरी तरह से सड़ चुका था जिससे उसकी पहचान करना फिलहाल संभव नहीं हो सका है। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर मर्ग कायम कर लिया और घटनास्थल की छानबीन शुरू कर दी।

    पुलिस की जांच और फॉरेंसिक टीम की मदद

    पुलिस ने शव की जांच के लिए फॉरेंसिक एक्सपर्ट और डॉग स्क्वायड को भी घटनास्थल पर बुलाया। डॉग स्क्वायड के साथ पुलिस ने आसपास के इलाके की तलाशी ली ताकि किसी संदिग्ध व्यक्ति या वाहन की पहचान की जा सके। साथ ही आसपास के सीसीटीवी कैमरों की फुटेज भी खंगाली जा रही है। पुलिस का कहना है कि महिला की पहचान के लिए आसपास के सभी गांवों और इलाकों में तफ्तीश की जा रही है। पुलिस ने यह भी कहा कि शव मिलने के बाद घटनास्थल के पास के लोग भी चौंक गए हैं। फिलहाल आसपास के लोगों से पूछताछ जारी है ताकि कोई सुराग मिल सके। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है जहां विशेषज्ञ इसकी मौत के कारणों का पता लगाएंगे।

    अज्ञात महिला की पहचान में मुश्किलें

    पुलिस को शव से कोई ऐसी पहचान संबंधी दस्तावेज या अन्य सुराग नहीं मिले हैं जिससे महिला की पहचान हो सके। शव की स्थिति को देखकर माना जा रहा है कि महिला की मौत कुछ दिनों पहले ही हुई होगी। पुलिस की प्राथमिक जांच में यह भी पता चला है कि महिला का शव बोरी में बंद होने के कारण उसे यहां लाकर फेंका गया हो सकता है। इस मामले में पुलिस ने हत्या की आशंका जताई है और जांच की दिशा में विभिन्न पहलुओं पर विचार किया जा रहा है।

    इलाके में बढ़ी सुरक्षा जांच में सहयोग की अपील

    इस घटना के बाद इलाके में सुरक्षा को लेकर सवाल उठने लगे हैं। पुलिस ने स्थानीय लोगों से अपील की है कि अगर उन्हें घटनास्थल या किसी अन्य स्थान पर इस संदर्भ में कोई जानकारी मिले तो वे तत्काल पुलिस से संपर्क करें। साथ ही पुलिस ने यह भी बताया कि इस मामले में जल्द ही कुछ ठोस सुराग मिल सकते हैं और जांच जारी रहेगी। चंद्रा मौर्या अंडरब्रिज के आसपास के इलाके में पहले भी छोटी-मोटी घटनाएं घटित हो चुकी हैं लेकिन इस प्रकार का गंभीर अपराध इलाके में पहली बार हुआ है। स्थानीय नागरिकों में इस हत्या के बाद भय और चिंता का माहौल है और पुलिस को उनके सहयोग की उम्मीद है।

    निवारण के उपाय और पुलिस की ओर से कदम

    इस घटना के बाद पुलिस ने इलाके में गश्त बढ़ा दी है और भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए सुरक्षा उपायों को कड़ा किया है। साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि वे जनता से सहयोग की उम्मीद कर रहे हैं और जो भी व्यक्ति किसी संदिग्ध गतिविधि को देखे उसे तुरंत पुलिस को सूचित करना चाहिए। पुलिस यह भी सुनिश्चित कर रही है कि इलाके में सीसीटीवी कैमरों की मदद से हर अपराधी तक पहुंच बनाई जा सके।

  • CG सरकार ने शुरू की 24×7 तूहर टोकन ऐप सुविधा अब किसानों को मिलेगा बिना समय की बाध्यता के टोकन

    CG सरकार ने शुरू की 24×7 तूहर टोकन ऐप सुविधा अब किसानों को मिलेगा बिना समय की बाध्यता के टोकन


    रायपुर। छत्तीसगढ़ में धान खरीदी प्रक्रिया को सरल और सुविधाजनक बनाने के लिए राज्य सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। अब प्रदेश के किसान बिना किसी निर्धारित समय की बाध्यता के दिन-रात कभी भी अपनी पसंदीदा समय में तूहर टोकन ऐप के माध्यम से टोकन बुक कर सकेंगे। यह निर्णय किसानों के हित में लिया गया है जिससे उन्हें धान विक्रय की प्रक्रिया को बेहतर तरीके से प्रबंधित करने में मदद मिलेगी।

    राज्य सरकार ने घोषणा की है कि तूहर टोकन ऐप को अब 24×7 उपलब्ध करवा दिया जाएगा। पहले किसानों को केवल निर्धारित समय में ही टोकन बुक करने की अनुमति थी लेकिन अब यह सुविधा उन्हें किसी भी समय उपलब्ध होगी। यह कदम धान खरीदारी प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी और सुविधाजनक बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।

    मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने इस फैसले को लेकर कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य किसानों की सुविधा को सर्वोच्च प्राथमिकता देना है। उन्होंने बताया कि यह कदम किसानों को अपनी सुविधानुसार टोकन बुक करने की स्वतंत्रता देगा और इससे उनकी दिनचर्या में कोई भी व्यवधान नहीं होगा। इसके अलावा इस बदलाव से धान विक्रय के दौरान होने वाली भीड़ और तकनीकी दबाव की समस्या भी कम होगी जो पहले किसानों के लिए चुनौतीपूर्ण थी।

    अब किसान 13 जनवरी तक आने वाले 20 दिनों के लिए टोकन प्राप्त कर सकेंगे जिससे उन्हें धान विक्रय की योजना बनाने के लिए पर्याप्त समय मिलेगा। इससे किसानों को टोकन काटने में किसी तरह की कोई दिक्कत नहीं होगी।

    एक और महत्वपूर्ण कदम के तहत राज्य सरकार ने 2 एकड़ या उससे कम रकबा वाले छोटे किसानों के लिए भी अतिरिक्त राहत दी है। ये किसान अब 31 जनवरी तक तूहर टोकन ऐप के माध्यम से अपना टोकन बुक कर सकेंगे। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के निर्देश पर यह सुविधा लघु किसानों को विशेष रूप से प्रदान की गई है ताकि वे भी समय पर धान विक्रय कर सकें।

    राज्य सरकार ने यह सुनिश्चित किया है कि प्रत्येक सहकारी समिति को केवल उसकी निर्धारित सीमा के भीतर ही टोकन आबंटित किए जाएंगे। इस प्रकार से व्यवस्था पूरी तरह से पारदर्शी और योजनाबद्ध रहेगी। सरकार ने किसानों से यह अपील की है कि वे समय रहते तूहर टोकन ऐप के माध्यम से अपना टोकन प्राप्त करें ताकि वे किसी भी असुविधा से बच सकें और धान विक्रय में कोई परेशानी न हो।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार किसान हित में हर संभव कदम उठा रही है और उनकी मेहनत का पूरा सम्मान किया जाएगा। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसानों को धान विक्रय की प्रक्रिया में कोई भी कठिनाई न हो और वे बिना किसी दबाव के अपनी फसल को उचित मूल्य पर बेच सकें।

    छत्तीसगढ़ राज्य में कृषि और धान की खेती महत्वपूर्ण है और यह फैसला किसानों की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने और उनकी मेहनत को उचित मान्यता देने की दिशा में एक अहम कदम साबित होगा। किसानों की सुविधा के लिए राज्य सरकार द्वारा उठाए गए इस कदम से उम्मीद जताई जा रही है कि आने वाले समय में धान खरीदी में पारदर्शिता बढ़ेगी और किसानों का समय भी बच सकेगा।

  • उत्तर प्रदेश राजनीति में हलचल: नए डिप्टी सीएममंत्री विस्तार और पंकज सिंह सहित चर्चित चेहरों की मंत्री पद की दौड़

    उत्तर प्रदेश राजनीति में हलचल: नए डिप्टी सीएममंत्री विस्तार और पंकज सिंह सहित चर्चित चेहरों की मंत्री पद की दौड़


    नई दिल्ली । उत्तर प्रदेश की राजनीति में इन दिनों बड़े बदलाव की आहट सुनाई दे रही है। बीजेपी में संगठनात्मक फेरबदलनए डिप्टी सीएम की संभावनाएं और योगी सरकार में मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। ऐसे में यह बदलाव आगामी राजनीतिक समीकरणों को नया आकार दे सकते हैं।

    सूत्रों के मुताबिकबीजेपी की ओर से उत्तर प्रदेश को नया डिप्टी सीएम मिलने की संभावना जताई जा रही हैऔर इस रेस में सबसे मजबूत नाम साध्वी निरंजन ज्योति का है। उनके नाम को जातीय और सामाजिक समीकरणों के मद्देनज़र सबसे उपयुक्त माना जा रहा है। यदि उन्हें उप मुख्यमंत्री बनाया जाता हैतो यह पार्टी के भीतर नए संतुलन और संगठनात्मक ऊर्जा का संकेत हो सकता है।

    योगी सरकार के मंत्रिमंडल विस्तार की चर्चाएँ भी तेज हो गई हैंजिसमें 6 नए चेहरों को शामिल किए जाने की संभावना जताई जा रही है। उत्तर प्रदेश कैबिनेट में अभी 54 मंत्री हैंजबकि अधिकतम 60 मंत्री बनाए जा सकते हैं। इन नई नियुक्तियों में क्षेत्रीय और जातीय समीकरणों को ध्यान में रखते हुए संतुलन बनाए रखने का प्रयास किया जाएगा। मंत्रिमंडल में बदलाव केवल नए चेहरों की एंट्री तक सीमित नहीं रहेगा। कुछ मौजूदा मंत्रियों की छुट्टी की भी संभावना जताई जा रही हैताकि बेहतर प्रदर्शन करने वाले नेताओं को मौका मिल सके। पार्टी नेतृत्व प्रदर्शन आधारित मूल्यांकन के आधार पर संभावित मंत्रियों की सूची तैयार कर रहा है।

    इस बीचकुछ समाजवादी पार्टी के बागी विधायकों को भी मंत्री पद मिल सकता हैजो पार्टी के भीतर राजनीतिक रणनीति के हिस्से के रूप में देखी जा रही है। प्रमुख नामों में पूजा पाल और मनोज पांडेय शामिल हैं। इसके अलावाबीजेपी के वरिष्ठ नेता महेंद्र सिंह का नाम भी चर्चा में है। पंकज सिंहजो नोएडा के विधायक हैंको भी इस बार मंत्री बनाए जाने की संभावना है। उनका संगठनात्मक अनुभवक्षेत्रीय पकड़ और केंद्रीय नेतृत्व के साथ उनकी विश्वसनीयता उन्हें इस महत्वपूर्ण भूमिका के लिए एक मजबूत दावेदार बनाती है।

    यूपी बीजेपी अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह चौधरी के मंत्रिमंडल में शामिल होने की भी पूरी संभावना हैक्योंकि वह पार्टी संगठन में लंबे समय से सक्रिय हैं। उनके मंत्री पद पर शामिल होने से सरकार और संगठन के बीच तालमेल मजबूत हो सकता है। इस मंत्रिमंडल विस्तार के दौरानबीजेपी अपने सहयोगी दलों को भी उचित हिस्सेदारी देने का विचार कर रही है। राष्ट्रीय लोकदल और अपना दल के नेताओं को भी मंत्री बनाने की चर्चा हैजिससे NDA के भीतर साझेदारी और संतुलन को मजबूत किया जा सके। यूपी बीजेपी अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह चौधरी ने कहा है कि संगठन एक बड़ी जिम्मेदारी हैऔर संगठनात्मक बदलावों की प्रक्रिया अंतिम चरण में है। उनके बयान से यह स्पष्ट है कि जल्द ही अहम फैसले लिए जाएंगे।

  • अखिलेश यादव का 40,000 रुपये देने का वादा: अयोध्या की महिलाओं ने की ये बड़ी बात

    अखिलेश यादव का 40,000 रुपये देने का वादा: अयोध्या की महिलाओं ने की ये बड़ी बात


    नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश की राजनीति में विधानसभा चुनावों से पहले नेताओं के घोषणाएं और वादे चर्चा का विषय बन जाते हैं। हाल ही में समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने महिलाओं को सालाना 40,000 रुपये देने का वादा किया है। उन्होंने इसे बीजेपी के बिहार चुनाव में दिए गए 10,000 रुपये के वादे का जवाब बताया। इस घोषणा पर अयोध्या की महिलाओं की क्या राय है, यह जानने के लिए यूपी Tak की टीम ने गांव में जाकर उनकी प्रतिक्रिया ली।

    महिलाओं ने की उम्मीदें जाहिर

    अयोध्या के ग्रामीण इलाकों की महिलाओं ने इस योजना पर अपनी राय दी और अपनी उम्मीदों का इज़हार किया। एक स्थानीय महिला सुंदर कली ने कहा, अखिलेश यादव का यह प्रस्ताव अच्छा है, हम लोग मजदूरी करते हैं, इससे अच्छा होगा कि हमें पैसा मिले। अभी सरकार की तरफ से हमें कुछ नहीं मिलता, केवल मजदूरी करते हैं। अगर अखिलेश यादव देंगे तो ठीक है, नहीं तो हम अपना काम करते रहेंगे।

    विकास की उम्मीदें भी बनीं मुद्दा

    वहीं कश्मीरा देवी ने कहा, हम लोग मजदूरी करके अपना पेट पालते हैं। अगर सरकार कुछ मदद करेगी तो अच्छा रहेगा, लेकिन अभी तक कोई मदद नहीं मिली है। सरकार बढ़िया नहीं काम कर रही है, जो विकास करेगा हम उसके साथ रहेंगे। विमला देवी ने भी कहा, समाजवादी सरकार के समय पेंशन मिलती थी और सड़कें बनती थीं। अब कुछ नहीं मिल रहा है। हमें विकास और रोजगार दोनों चाहिए।

    महिलाओं की मांग-पैसा नहीं, विकास और रोजगार भी चाहिए

    ममता नाम की महिला ने कहा, यह अच्छा है कि पैसा मिलेगा, इससे हमारी रोज़ी-रोटी में मदद होगी। गरीब बच्चों को भी फायदा होगा, लेकिन सिर्फ पैसा नहीं, हमें काम भी चाहिए। अगर पैसा मिलेगा तो वोट देंगे, नहीं मिला तो कोई बात नहीं। वहीं अन्य महिलाओं ने भी इस योजना का स्वागत किया, लेकिन साफ किया कि अगर वादा पूरा नहीं हुआ तो वे वोट नहीं देंगी।

    योगी सरकार से तुलना

    महिलाओं ने योगी सरकार की योजनाओं के बारे में भी बात की। उन्होंने बताया कि उन्हें विधवा पेंशन के रूप में 2,000 रुपये मिलते हैं, लेकिन इसके बावजूद गांव में विकास की कमी महसूस हो रही है। रोज़मर्रा की सुविधाओं और रोजगार के मामले में उन्हें अभी भी कई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।

    समाजवादी पार्टी और बीजेपी का मुकाबला

    अखिलेश यादव का यह वादा महिलाओं के बीच उम्मीद और नाखुशी का मिश्रित असर छोड़ रहा है। हालांकि, उनका कहना है कि वे सिर्फ पैसे के लिए नहीं, बल्कि स्थिरता, रोजगार और विकास के लिए भी वोट देंगे। यह साफ है कि महिलाएं अपनी जिंदगी में सुधार और अपने गांव के विकास को भी उतना ही महत्व देती हैं जितना कि चुनावी वादों को।

  • कर्नाटक में सीएम पद को लेकर सियासी हलचल: सिद्धारमैया के बेटे के बयान ने बढ़ाई विवाद की गर्मी, डीके समर्थक भड़के

    कर्नाटक में सीएम पद को लेकर सियासी हलचल: सिद्धारमैया के बेटे के बयान ने बढ़ाई विवाद की गर्मी, डीके समर्थक भड़के


    कर्नाटक । में सीएम पद को लेकर सियासी तापमान एक बार फिर बढ़ता हुआ नजर आ रहा है। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के बेटे यतींद्र सिद्धारमैया के हालिया बयान ने कांग्रेस के भीतर बढ़ते मतभेदों को फिर से उकसाया है। यतींद्र ने कहा था कि मुख्यमंत्री पद में कोई बदलाव नहीं होगा और जो लोग नेतृत्व परिवर्तन का सपना देख रहे हैं, वे सिर्फ सपना ही देख सकते हैं। उनका यह बयान उप मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के समर्थकों को खटक गया और इसके बाद एक नई सियासी हलचल शुरू हो गई है।

    डीके शिवकुमार ने यतींद्र के बयान पर संयमित प्रतिक्रिया दी, लेकिन उनके समर्थक भड़क उठे। कांग्रेस विधायक इकबाल हुसैन ने कहा कि अगर कोई नेतृत्व पर सवाल उठाता है, तो नोटिस जारी किए जाते हैं। उन्होंने इस बयान को अनुशासनहीनता बताया और कहा कि हर किसी को अपनी सीमा समझनी चाहिए। वहीं, सिद्धारमैया के करीबी मंत्री बायरथी सुरेश ने यतींद्र का बचाव करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री हाईकमान के निर्देशों के अनुसार ही कार्य करेंगे, और नेतृत्व परिवर्तन के सवाल पर कोई निर्णय नहीं लिया गया है।

    कर्नाटक की सियासत में मुख्यमंत्री पद को लेकर विवाद नया नहीं है। शिवकुमार समर्थक अक्सर यह आरोप लगाते आए हैं कि सरकार गठन के समय 2.5 साल के पावर-शेयरिंग फॉर्मूले पर सहमति बनी थी, जिसके तहत सिद्धारमैया को कार्यकाल के आधे समय बाद पद छोड़ देना था। हालांकि, इस पर कोई खुला बयान नहीं आया है, लेकिन विवाद लगातार बने रहते हैं। अब यतींद्र के बयान ने एक बार फिर इस विवाद को तूल दे दिया है, जिससे हाईकमान को फिर से हस्तक्षेप करना पड़ सकता है।

  • यूपी में पेंशनरों के लिए बड़ा कदम: पेंशन और एरियर का भुगतान अब अलग-अलग होगा

    यूपी में पेंशनरों के लिए बड़ा कदम: पेंशन और एरियर का भुगतान अब अलग-अलग होगा


    नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश सरकार ने चित्रकूट कोषागार घोटाले के बाद पेंशन और पेंशन एरियर के भुगतान में सुधार करने का बड़ा फैसला लिया है। अब पेंशन और एरियर का भुगतान अलग-अलग सॉफ्टवेयर लिंक से जनरेट किया जाएगा, जिससे भुगतान प्रक्रिया को अधिक सुरक्षित और पारदर्शी बनाया जा सके। इस कदम का उद्देश्य भविष्य में किसी भी प्रकार की हेराफेरी और धोखाधड़ी को रोकना है।

    चित्रकूट कोषागार घोटाले का खुलासा और सख्त कदम

    चित्रकूट कोषागार में 43.13 करोड़ रुपये के घोटाले के बाद सरकार ने यह फैसला लिया है। इस घोटाले में एक वरिष्ठ लिपिक द्वारा सॉफ्टवेयर में हेरफेर करके फर्जी तरीके से करोड़ों रुपये ट्रांसफर किए गए थे। घोटाले के खुलासे के बाद सरकार ने एनआईसीएस सॉफ्टवेयर को नए ढांचे में विकसित करने का निर्णय लिया है। अब पेंशन और एरियर के बिल अलग-अलग लिंक से जनरेट होंगे और दोनों भुगतान समूहों को अलग पहचान देने के लिए अतिरिक्त जानकारी जोड़ी जाएगी।

    कोषागारों में विशेष जांच और सुरक्षा

    इस नई व्यवस्था से पेंशन और एरियर का भुगतान पारदर्शी होगा और किसी एक खाते में गलत तरीके से रकम ट्रांसफर होने की संभावना भी कम होगी। जिलाधिकारियों और कोषाधिकारियों को इस संबंध में आदेश जारी कर दिए गए हैं। इसके अलावा, सरकार ने 93 पेंशनरों की सूची तैयार की है जिनके खाते में गलत तरीके से पैसे ट्रांसफर किए गए थे। इन खातों की विशेष जांच की जा रही है और 24 जिलों के कोषागारों में ऑडिट भी कराया जाएगा।

    नई व्यवस्था से वित्तीय पारदर्शिता

    सरकार ने इस नई व्यवस्था से यह सुनिश्चित करने का प्रयास किया है कि पेंशन एरियर के भुगतान में हेराफेरी की कोई गुंजाइश न हो। इससे पेंशनरों को मिलने वाली राशि का भुगतान अधिक सुरक्षित और न्यायसंगत तरीके से किया जा सकेगा। यह कदम वित्तीय प्रणाली में पारदर्शिता लाएगा और पेंशनरों के अधिकारों की रक्षा करेगा।

    चित्रकूट कोषागार घोटाले के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने पेंशन और एरियर भुगतान को अलग-अलग सॉफ्टवेयर लिंक से जनरेट करने का फैसला लिया है। यह कदम पेंशन प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और सुरक्षित बनाएगा, जिससे भविष्य में किसी प्रकार की वित्तीय धोखाधड़ी को रोका जा सकेगा।

  • महाराष्ट्र में 8 साल बाद भी 6.56 लाख किसानों को नहीं मिली ऋण माफीसरकार ने केवल 500 करोड़ का किया प्रावधान

    महाराष्ट्र में 8 साल बाद भी 6.56 लाख किसानों को नहीं मिली ऋण माफीसरकार ने केवल 500 करोड़ का किया प्रावधान


    महाराष्ट्र । महाराष्ट्र सरकार की छत्रपति शिवाजी महाराज शेतकरी सम्मान योजना 2017 में किसानों को ऋण माफी देने के उद्देश्य से बनाई गई थी। इस योजना के तहत 6.56 लाख किसानों को ऋण माफी का लाभ देने का निर्णय लिया गया थालेकिन आठ साल का वक्त गुजरने के बावजूदइन किसानों को यह लाभ प्राप्त नहीं हो सका है। इस मुद्दे ने महाराष्ट्र के किसानों में गहरी नाराजगी पैदा कर दी हैक्योंकि राज्य सरकार ने इस योजना को लागू करने के लिए पर्याप्त राशि का प्रावधान नहीं किया है

    सहकारिता मंत्री बाबासाहेब पाटिल ने विधानसभा में एक लिखित उत्तर में स्वीकार किया कि इस योजना के तहत पात्र किसानों को ऋण माफी देने के लिए 5,975.51 करोड़ रुपये की आवश्यकता हैलेकिन सरकार ने केवल 500 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। इससे यह सवाल उठ रहा है कि क्या सरकार किसानों के साथ मजाक कर रही है और क्या न्यायालय के आदेशों का उल्लंघन किया जा रहा है?

    किसान नेताओं ने इस मुद्दे को लेकर सरकार की आलोचना की है। शिवसेना ठाकरे गुट के नेता भास्कर जाधव ने विधानसभा में इस मामले को उठाया और बताया कि उच्च न्यायालय ने भी सरकार को इस योजना को लागू करने का आदेश दिया थाफिर भी सरकार ने इसकी पूरी आवश्यकता का सिर्फ एक छोटा सा हिस्सा आवंटित किया है।

    इतना ही नहींमुख्यमंत्री सहायता निधि में अक्टूबर महीने में 1 अरब रुपये जमा हुएलेकिन अतिवृष्टि से प्रभावित किसानों को सिर्फ 75 हजार रुपये की सहायता दी गई। इस मामले को लेकर भी RTI कार्यकर्ता वैभव कोकाट ने जांच की और पाया कि सरकार की मदद किसानों तक नहीं पहुंच पा रही है। इसके अलावाई-केवाईसी की प्रक्रिया पूरी न होनेबैंक और आधार जानकारी में अंतरऔर पोर्टल पर तकनीकी त्रुटियों के कारण5 लाख 42 हजार 141 किसानों को घोषित मदद नहीं मिल पाई है।

    राज्य सरकार द्वारा घोषित 31,628 करोड़ रुपये की सहायता पैकेज भी केवल दिखावे का हिस्सा बनकर रह गया हैक्योंकि योजना की क्रियान्वयन में गंभीर समस्याएं आई हैं। इस सब के बीचकिसानों को प्राकृतिक आपदाओंफसल नुकसान और कर्ज जैसी गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ रहा हैऔर वे उम्मीद कर रहे हैं कि सरकार जल्द ही इस मामले में ठोस और प्रभावी कदम उठाएगी।

    किसानों के हित में यदि सरकार जल्द से जल्द ऋण माफी योजना को लागू नहीं करती और उनकी परेशानियों को ध्यान में नहीं रखतीतो यह राज्य में किसानों के बीच और अधिक असंतोष पैदा कर सकता है। इस बीचयह सवाल भी खड़ा हो रहा है कि आखिरकार किसानों को अपनी मेहनत का क्या फल मिलेगाजब सरकार द्वारा घोषित योजनाओं का लाभ उन्हें समय पर नहीं मिल रहा है।

  • शीतकालीन छुट्टियों के लिए गोवा जाने के इच्छुक यात्रियों के लिए रेलवे ने शुरू की स्पेशल ट्रेन

    शीतकालीन छुट्टियों के लिए गोवा जाने के इच्छुक यात्रियों के लिए रेलवे ने शुरू की स्पेशल ट्रेन


    रायपुर । इस शीतकालीन छुट्टियों में अगर आप गोवा जाने का प्लान बना रहे हैं तो अब आपके लिए रेलवे ने एक नई सुविधा शुरू की है। रेलवे 20 दिसंबर से बिलासपुर–मडगांव के बीच साप्ताहिक शीतकालीन स्पेशल ट्रेन चलाएगा ताकि यात्रियों को छुट्टियों में गोवा पहुंचने में कोई कठिनाई न हो। यह ट्रेन हर शनिवार को चलेगी और चार फेरे करेगी।

    विमान सेवाओं में अनिश्चितता के कारण रेलवे ने यह कदम उठाया है जिससे गोवा जाने वाले यात्रियों को एक आरामदायक और विश्वसनीय विकल्प मिल सके। रेलवे का यह कदम विशेष रूप से उन यात्रियों के लिए राहत देने वाला है जो विमान सेवाओं में हो रही अनिश्चितता के कारण यात्रा की योजना में बदलाव कर रहे थे।

    शीतकालीन स्पेशल ट्रेन का समय और मार्ग

    यह शीतकालीन स्पेशल ट्रेन 20 दिसंबर 27 दिसंबर 3 जनवरी और 10 जनवरी को बिलासपुर से मडगांव के लिए चलेगी जो प्रत्येक शनिवार को निर्धारित है। वहीं मडगांव से बिलासपुर के लिए यह ट्रेन 22 29 दिसंबर और 5 तथा 12 जनवरी को सोमवार को चलेगी। ट्रेन की संख्या 08241 बिलासपुर–मडगांव और 08242 मडगांव–बिलासपुर होगी।

    इस ट्रेन के माध्यम से यात्रियों को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी क्योंकि इस ट्रेन में 18 कोच की व्यवस्था की गई है जिसमें विभिन्न श्रेणियों की सीटें और सुविधा दी जाएगी। इसके साथ ही ट्रेन में पर्याप्त संख्या में सीटें उपलब्ध हैं जो यात्रियों की बढ़ी हुई मांग को पूरा करने में सहायक होगी।

    वाणिज्यिक ठहराव और कोच की सुविधा

    इस ट्रेन का वाणिज्यिक ठहराव दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के प्रमुख स्टेशनों जैसे बिलासपुर भाटापारा रायपुर दुर्ग राजनांदगांव गोंदिया और नागपुर पर होगा। इन स्टेशनों पर ट्रेन रुकने से यात्रियों को आरामदायक और सुविधाजनक यात्रा का अनुभव होगा।

    इसके अलावा शीतकालीन स्पेशल ट्रेन में यात्रियों की विभिन्न जरूरतों के हिसाब से कोच की व्यवस्था की गई है। ट्रेन में एक एसएलआरडी तीन सामान्य दो स्लीपर दो एसी-III इकोनामी आठ एसी-III एक एसी-II और जनरेटर कार सहित कुल 18 कोच की सुविधा उपलब्ध है। यह कोच विभिन्न यात्री वर्गों के लिए उपयुक्त हैं जिससे यात्रियों को यात्रा के दौरान आराम और सुविधा का अनुभव होगा।

    रेलवे की यह पहल क्यों है महत्वपूर्ण

    वर्तमान में विमान सेवाओं में अनिश्चितता और टिकट की उच्च कीमतों के कारण यात्रा की योजना बनाना मुश्किल हो गया था। ऐसे में रेलवे की यह पहल यात्रियों के लिए एक राहत की बात है। विशेष रूप से शीतकालीन छुट्टियों के दौरान गोवा जाने के इच्छुक यात्रियों के लिए यह एक उत्तम विकल्प साबित हो सकता है।

    इसके अलावा रेलवे का यह कदम पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी योगदान दे रहा है क्योंकि यात्रा के लिए कम से कम संसाधनों का उपयोग होता है। ट्रेन से यात्रा करने से यात्री जल्दी और सुरक्षित रूप से अपनी मंजिल तक पहुंच सकते हैं साथ ही यह एक किफायती और सुरक्षित विकल्प भी है।

    इस शीतकालीन सीजन में गोवा जाने की योजना बनाने वाले यात्रियों के लिए रेलवे द्वारा शुरू की गई शीतकालीन स्पेशल ट्रेन एक बेहतरीन विकल्प है। रेलवे का यह कदम न केवल यात्रियों की यात्रा को आरामदायक बनाएगा बल्कि उन्हें एक सुविधाजनक और विश्वसनीय यात्रा अनुभव भी प्रदान करेगा।

  • दिल्ली के प्रदूषण से त्रस्त BJD सांसद का बड़ा बयान संसद सत्र को अन्य शहरों में शिफ्ट करने की अपील

    दिल्ली के प्रदूषण से त्रस्त BJD सांसद का बड़ा बयान संसद सत्र को अन्य शहरों में शिफ्ट करने की अपील


    नई दिल्ली । दिल्ली में प्रदूषण की समस्या दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही है जिससे न केवल आम लोग बल्कि संसद के सदस्य भी प्रभावित हो रहे हैं। इस मुद्दे पर बीजू जनता दल राज्यसभा सदस्य मानस रंजन मंगराज ने सरकार से संसद के शीतकालीन और बजट सत्र को दिल्ली से बाहर अन्य शहरों में शिफ्ट करने की अपील की है। उनका कहना है कि प्रदूषण के स्तर के कारण संसद के सत्रों को दिल्ली से बाहर शिफ्ट करना आवश्यक है ताकि संसद के सदस्य और कर्मचारी स्वच्छ वायु में काम कर सकें और उनकी सेहत पर कोई प्रतिकूल प्रभाव न पड़े।

    प्रदूषण को मानव निर्मित आपदा करार

    सांसद मंगराज ने दिल्ली में प्रदूषण को “मानव निर्मित आपदा” बताया और इस पर गंभीर चिंता व्यक्त की। उन्होंने शून्यकाल के दौरान इस मुद्दे को उठाते हुए कहा कि दिल्ली के प्रदूषण को नियंत्रित करना अब एक बड़े संकट का रूप ले चुका है और इसके प्रभाव से न सिर्फ आम जनता बल्कि संसद के कार्य में लगे कर्मचारी भी प्रभावित हो रहे हैं। उन्होंने दिल्ली में वायु गुणवत्ता में सुधार होने तक संसद के सत्रों को अन्य शहरों में स्थानांतरित करने की मांग की।

    ओडिशा से तुलना संकटों से निपटने की क्षमता

    मानस रंजन मंगराज ने ओडिशा राज्य का उदाहरण देते हुए कहा कि उनका राज्य चक्रवात बाढ़ और अन्य प्राकृतिक आपदाओं से लड़ने में हमेशा तत्पर रहता है। उन्होंने बताया कि ओडिशा सरकार ने कितनी प्रभावी ढंग से इन संकटों से निपटने के लिए लोगों को सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट किया और हजारों लोगों की जान बचाई। मंगराज का कहना था कि जब ओडिशा जैसी जगह अपने नागरिकों को संकट से बाहर निकालने में सक्षम है तो दिल्ली में प्रदूषण के संकट को देखते हुए संसद के सत्र को कहीं और स्थानांतरित करने के लिए भारत सरकार को भी तत्पर होना चाहिए।

    सांसदों और कर्मचारियों की सुरक्षा की चिंता

    सांसद ने संसद के सदस्यों कर्मचारियों ड्राइवरों सफाई कर्मचारियों और सुरक्षा कर्मियों की सेहत को लेकर चिंता जताई। उनका कहना था कि प्रदूषण के बढ़ते स्तर के कारण ये सभी लोग रोजाना जहरीली हवा के संपर्क में आ रहे हैं और यह उनकी सेहत के लिए खतरनाक हो सकता है। मंगराज ने कहा “हम इन कर्मचारियों की तकलीफ को नजरअंदाज नहीं कर सकते। प्रदूषण के चरम स्तर पर संसद सत्र आयोजित करना अनावश्यक रूप से लोगों की जान को खतरे में डालता है।”

    वैकल्पिक शहरों का सुझाव

    बीजेडी सांसद ने दिल्ली की जगह कुछ अन्य शहरों का सुझाव भी दिया जहां प्रदूषण कम है और जो बेहतर वायु गुणवत्ता और बुनियादी ढांचे के साथ सत्र आयोजित करने के लिए उपयुक्त हो सकते हैं। इनमें ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर हैदराबाद बेंगलुरु गांधीनगर गोवा और देहरादून शामिल हैं। मंगराज ने इन शहरों को संसद सत्र के लिए आदर्श स्थान बताया और सरकार से अनुरोध किया कि बिना देरी किए इन शहरों में सत्र आयोजित करने की संभावना पर विचार करें।

    राजनीति से प्रेरित नहीं जीवन और सेहत की सुरक्षा

    सांसद ने यह भी स्पष्ट किया कि उनकी इस मांग का उद्देश्य राजनीति नहीं है बल्कि यह लोगों की जिंदगी और सम्मान से जुड़ा हुआ मुद्दा है। उन्होंने कहा “यह राजनीति की चीज नहीं है। यह जीवन और सम्मान की बात है। संसद को नेतृत्व दिखाना होगा और यह दिखाना होगा कि जीवन का अधिकार किसी भी राजनीतिक विवाद से पहले आता है।”

    प्रदूषण का असर

    दिल्ली में प्रदूषण की समस्या मुख्य रूप से अक्टूबर से जनवरी तक ज्यादा गंभीर हो जाती है। इस दौरान पराली जलाने वाहनों के उत्सर्जन और निर्माण कार्य से धूल के कारण वायु गुणवत्ता बहुत खराब हो जाती है। यही समय होता है जब संसद का शीतकालीन और बजट सत्र आयोजित किया जाता है। ऐसे में प्रदूषण के कारण सांस की बीमारी आंखों में जलन और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा बढ़ जाता है।

    दिल्ली में प्रदूषण के बढ़ते संकट ने अब संसद के सत्रों को भी प्रभावित करना शुरू कर दिया है। बीजेडी सांसद मानस रंजन मंगराज का यह बयान संसद के सत्रों को सुरक्षित और स्वस्थ वातावरण में आयोजित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हो सकता है। उनकी मांग से यह स्पष्ट है कि जब तक दिल्ली में वायु गुणवत्ता में सुधार नहीं होता तब तक सत्र को अन्य शहरों में स्थानांतरित करने का विचार किया जाना चाहिए। यह केवल संसद के सदस्यों की सेहत के लिए जरूरी नहीं बल्कि पूरे देश के नागरिकों के लिए एक उदाहरण प्रस्तुत करने का समय है।

  • SIR विवाद के बीच ममता बनर्जी का भड़काऊ बयान विपक्ष ने साधा निशाना

    SIR विवाद के बीच ममता बनर्जी का भड़काऊ बयान विपक्ष ने साधा निशाना


    नई दिल्ली । पश्चिम बंगाल में SIR प्रक्रिया को लेकर सियासी घमासान बढ़ता ही जा रहा है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का हालिया बयान इस विवाद में नया मोड़ लेकर आया है। ममता ने महिलाओं से अपील की कि वे वोटर लिस्ट की समीक्षा के दौरान यदि किसी का नाम हटाने की कोशिश की जाए तो रसोई के सामान के साथ तैयार रहें। उनका कहना था कि यदि दिल्ली से पुलिस भेजकर महिलाओं को डराने की कोशिश की गई तो वे किचन को हथियार बना सकती हैं। इस बयान ने सियासी हलकों में हलचल पैदा कर दी है और SIR विवाद को और हवा दी है।

    ममता का बयान: महिलाओं को रसोई से चेतावनी

    कृष्णानगर में आयोजित एक जनसभा में ममता बनर्जी ने वोटर लिस्ट की समीक्षा के मुद्दे पर कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने महिलाओं से कहा कि अगर चुनाव के दौरान दिल्ली से पुलिस भेजकर उन्हें डराने की कोशिश की गई तो महिलाएं रसोई के सामानों के साथ तैयार रहें क्योंकि आवश्यकता पड़ने पर किचन भी हथियार बन सकता है। ममता का यह बयान सीधे तौर पर बीजेपी की कथित दबावकारी राजनीति पर हमला माना जा रहा है।

    उनका कहना था कि महिलाएं इस लड़ाई में नेतृत्व करेंगी और पुरुष उनका समर्थन करेंगे। यह बयान उन आरोपों के संदर्भ में आया है जिसमें बीजेपी पर वोटर लिस्ट में गड़बड़ी और असहमति रखने वाले लोगों को डराने-धमकाने का आरोप लगाया जा रहा है। ममता बनर्जी का यह बयान बंगाल की राजनीतिक परिस्थितियों को और गर्म कर गया है जिससे राज्य में सियासी हलचल तेज हो गई है।

    बीजेपी और ममता के बीच तकरार

    ममता ने बीजेपी पर आरोप लगाया कि वह चुनावों में पैसे और बाहरी लोगों के सहारे समाज को बांटने की कोशिश करती है जो बंगाल की संस्कृति के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि बंगाल सदियों से सौहार्द और भाईचारे का प्रतीक रहा है और यहां दुर्गा पूजा से लेकर रमजान तक दोनों त्योहार मिल-जुलकर मनाए जाते हैं। ममता ने बीजेपी पर सांप्रदायिक राजनीति फैलाने का आरोप भी लगाया और सवाल किया कि क्या वे सच में भगवान कृष्ण की शिक्षाओं का पालन करते हैं जो शांति और मानवता की बात करते हैं न कि हिंसा और भेदभाव की।

    केंद्र पर बड़ा आरोप: बंगालियों को बांग्लादेशी बताने की साजिश

    ममता बनर्जी ने केंद्र सरकार और केंद्रीय गृह मंत्री पर भी तीखे आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि SIR प्रक्रिया के तहत बंगालियों को बांग्लादेशी घोषित किया जा रहा है और उन्हें डिटेंशन सेंटर भेजने की साजिश की जा रही है। ममता ने चेतावनी दी कि अगर किसी बंगाली को जबरन राज्य से बाहर किया गया तो उनकी सरकार उसे वापस लाने का तरीका जानती है।

    इस बयान ने राजनीतिक माहौल को और गर्म कर दिया है और ममता के आरोपों ने केंद्र सरकार को बैकफुट पर ला दिया है।ममता ने यह भी सवाल उठाया कि क्या अब उन्हें भी अपनी नागरिकता साबित करनी पड़ेगी जो राज्य में राजनीतिक तनाव को और गहरा करता है। उनके इस बयान ने SIR प्रक्रिया पर चल रही बहस को और तीव्र कर दिया है।

    SIR विवाद पर सियासी घमासान

    पश्चिम बंगाल में SIR प्रक्रिया को लेकर सियासी बयानबाजी तेज होती जा रही है। ममता बनर्जी इसे बंगालियों की पहचान और नागरिकता पर हमला मान रही हैं जबकि बीजेपी का कहना है कि यह केवल चुनावी पारदर्शिता और मतदाता सूची की शुद्धता सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक है। ममता बनर्जी का यह बयान केंद्र सरकार और बीजेपी के खिलाफ तीखा पलटवार है जो इसे चुनावी प्रक्रिया में सुधार मानते हैं।

    सियासी विश्लेषकों का मानना है कि ममता के बयान ने SIR विवाद को और गहरा कर दिया है और अब यह मुद्दा केवल चुनावी पारदर्शिता तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि राज्य में सांस्कृतिक और नागरिकता के सवालों से भी जुड़ जाएगा। ममता बनर्जी का यह बयान राजनीति में नई खींचतान का कारण बन सकता है और आने वाले दिनों में इस विवाद के और बढ़ने की संभावना है।

    SIR विवाद ने पश्चिम बंगाल की राजनीति को और उबाल दिया है और ममता बनर्जी के हालिया भड़काऊ बयान ने राजनीतिक तनाव को और बढ़ा दिया है। बीजेपी और ममता के बीच का यह टकराव अब एक नई दिशा की ओर बढ़ रहा है जिससे राज्य की राजनीति में और भी उतार चढ़ाव आ सकते हैं। ममता का बयान न केवल SIR प्रक्रिया के संदर्भ में है बल्कि यह बंगाल की सांस्कृतिक पहचान और नागरिकता से जुड़े बड़े मुद्दों को भी छेड़ता है। अब देखना यह होगा कि यह विवाद किस दिशा में जाता है और राज्य की राजनीति में क्या नया मोड़ आता है।