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  • फोकट सवाल पर बवाल: पत्रकार से बदसलूकी पर घिरे विजयवर्गीय, जीतू पटवारी ने मांगा इस्तीफा

    फोकट सवाल पर बवाल: पत्रकार से बदसलूकी पर घिरे विजयवर्गीय, जीतू पटवारी ने मांगा इस्तीफा



    इंदौर। इंदौर में जहरीले पानी से हुई मौतों के मामले ने अब सियासी तूफान खड़ा कर दिया है। इस मुद्दे पर सवाल पूछने वाले एक पत्रकार से मंत्री कैलाश विजयवर्गीय की बदसलूकी और अपशब्दों का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने इसे इंदौर को शर्मसार करने वाला बताते हुए विजयवर्गीय से तत्काल इस्तीफा लेने की मांग की है।

    पटवारी ने कहा कि इस पूरे मामले में सरकार पूरी तरह नाकाम साबित हुई है।

    जो जिम्मेदारी सरकार की थी, वह मीडिया ने निभाई। उन्होंने पत्रकारों का आभार जताते हुए कहा कि मंत्री ने मुफ्त इलाज के दावे किए, लेकिन जब उसी पर एक पत्रकार ने सवाल पूछा तो उसे गालियां दी गईं। कांग्रेस उस पत्रकार के साथ खड़ी है और उसके सम्मान में कोई कमी नहीं आने देगी।

    प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि सरकार की लापरवाही के कारण मासूम बच्चों समेत कई लोगों की जान गई है। उन्होंने कहा कि पहले 25 बच्चों की मौत हुई, अब 13 और लोगों की जान चली गई, लेकिन आज तक किसी दोषी को सजा नहीं मिली।

    पटवारी ने भाजपा सरकार को हत्यारी सरकार बताते हुए कहा कि जिस इंदौर को जनता ने स्वच्छता का तमगा दिलाया, उसी शहर की जनता को जहर मिला पानी पिलाया गया।

    कांग्रेस ने इस मामले की जांच के लिए दो पूर्व मंत्रियों के नेतृत्व में एक टीम गठित की है। पटवारी ने कहा कि जांच रिपोर्ट आने के बाद आगे की रणनीति तय की जाएगी। कांग्रेस की मांग है कि जिम्मेदार अधिकारियों और लोगों पर गैर-इरादतन हत्या का मामला दर्ज हो, पीड़ित परिवारों को एक-एक करोड़ रुपये का मुआवजा मिले और घायलों को बेहतर व निशुल्क इलाज उपलब्ध कराया जाए।

    इस बीच कांग्रेस के पूर्व सांसद उदित राज ने भी भाजपा पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार में गलती मानने की बजाय चोरी और सीनाजोरी की जाती है। हर घटना का ठीकरा विपक्ष या पुराने नेताओं पर फोड़ दिया जाता है। उन्होंने देशभर में बढ़ती हिंसा और कथित घोटालों का जिक्र करते हुए सरकार को कटघरे में खड़ा किया।

    घटना के बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव बुधवार शाम इंदौर पहुंचे और अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती मरीजों से मुलाकात की। अधिकारियों के साथ बैठक में उन्होंने कहा कि ऐसी कष्टदायक स्थिति दोबारा न बने, इसके लिए व्यापक इंतजाम किए जाएं। मुख्यमंत्री ने रिपोर्ट आने के बाद दोषियों पर सख्त कार्रवाई का आश्वासन दिया।

    दरअसल, बैठक के बाद मंत्री कैलाश विजयवर्गीय से जब एक रिपोर्टर ने अस्पताल में भर्ती मरीजों के इलाज खर्च के रिफंड को लेकर सवाल किया, तो मंत्री ने कहा, फोकट सवाल मत पूछो। रिपोर्टर के विरोध करने पर विजयवर्गीय ने आपा खोते हुए अपशब्द कह दिए। हालांकि बाद में उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपने शब्दों को लेकर खेद भी जताया, लेकिन तब तक यह मामला सियासी और सामाजिक बहस का बड़ा मुद्दा बन चुका था।

  • भोपाल में हादसा बाइक सवार युवक की अज्ञात वाहन से टक्कर में मौत, पुलिस जांच में जुटी

    भोपाल में हादसा बाइक सवार युवक की अज्ञात वाहन से टक्कर में मौत, पुलिस जांच में जुटी


    भोपाल। बैरसिया थाना इलाके में मंगलवार देर रात एक भयानक सड़क हादसे में 21 वर्षीय सुन्दर सिंह की मौत हो गई। सुन्दर, जो नवजीवन कॉलोनी मंडी गेट में किराए पर रहता था और मूल रूप से ललरिया थाना क्षेत्र का निवासी था, घर परिवार से मिलने के बाद लौट रहा था।

    सूत्रों के अनुसार, इस दौरान एक अज्ञात वाहन ने उसकी बाइक को टक्कर मार दी, जिससे सुन्दर गंभीर रूप से घायल हो गया। उसे तुरंत प्राइवेट अस्पताल में भर्ती कराया गया, लेकिन इलाज के दौरान बुधवार को उसकी मौत हो गई।

    पुलिस ने मर्ग कायम कर गहन जांच शुरू कर दी है।

    टक्कर मारने वाले वाहन चालक की पहचान और उसे पकड़ने के प्रयास जारी हैं। स्थानीय पुलिस ने कहा कि सभी सीसीटीवी फुटेज और आसपास के गवाहों से जानकारी जुटाई जा रही है, ताकि अपराधी को जल्द गिरफ्तार किया जा सके।भोपाल पुलिस ने जनता से अपील की है कि जो भी व्यक्ति इस हादसे का सीधा साक्षी हो, वह तुरंत पुलिस से संपर्क करें।
  • यूपी-एमपी के बाद बिहार में सिरप माफिया का नेटवर्क नेपाल से जुड़ा, सीतामढ़ी में 1500 बोतल प्रतिबंधित सिरप जब्त

    यूपी-एमपी के बाद बिहार में सिरप माफिया का नेटवर्क नेपाल से जुड़ा, सीतामढ़ी में 1500 बोतल प्रतिबंधित सिरप जब्त




    नई दिल्ली।
    यूपी और एमपी के बाद अब बिहार में प्रतिबंधित कोरेक्स सिरप का अवैध नेटवर्क तेजी से पैर पसार रहा है। सोमवार को सीतामढ़ी जिले में एक ही दिन में 1500 बोतल सिरप बरामद की गई, जिसमें सोनबरसा से 700 और चकमहिला से 800 बोतल जब्त हुई। इस कार्रवाई ने प्रशासन और समाज दोनों को चौंका दिया है।

    पुलिस ने दो छोटे धंधेबाजों को गिरफ्तार किया है, जबकि मुख्य सरगना अभी फरार है। पुलिस के अनुसार, यह नेटवर्क नेपाल से संचालित हो रहा है और शराबबंदी के बाद युवा वर्ग सिरप, टैबलेट और इंजेक्शन के जरिए नशे की ओर बढ़ रहा है।

    एसएसबी और एसटीएफ की सूचना पर छापेमारी में 8800 रुपये नकद, मोबाइल, बड़ी मात्रा में टैबलेट, इंजेक्शन और सैकड़ों बोतल सिरप बरामद हुए। पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि उन्हें हर महीने 15 हजार रुपये वेतन मिलता था और यह नेटवर्क लंबे समय से चल रहा है।

    स्थानीय लोगों और पुलिस की रिपोर्ट के अनुसार, नगर थाना क्षेत्र में यह अवैध कारोबार कई दिनों से संचालित था, लेकिन पुलिस की निगरानी कमजोर रही। एक ही दिन में 1500 बोतल की बरामदगी ने पुलिस की सतर्कता और निगरानी प्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

    शराबबंदी के बाद नशे के इस नए रूप से युवा पीढ़ी बर्बादी की ओर बढ़ रही है, जबकि असली सरगना कानून की पकड़ से दूर है। फिलहाल पुलिस छोटे धंधेबाजों पर कार्रवाई कर रही है, लेकिन मुख्य सरगना फरार होने के कारण नेटवर्क सक्रिय बना हुआ है।

    एसएसबी और एसटीएफ की छापेमारी में 8800 रुपये नकद, मोबाइल फोन, टैबलेट, इंजेक्शन और सैकड़ों बोतल प्रतिबंधित सिरप बरामद किए गए। पूछताछ में गिरफ्तार आरोपी ने स्वीकार किया कि वह दवाओं की बिक्री करता था और हर महीने उसे 15 हजार रुपये वेतन मिलता था।

  • भोपाल का ईरानी डेरा: संगठित अपराध का गढ़, सरदार राजू के नेतृत्व में फैली ठगी और लूट की साज़िश

    भोपाल का ईरानी डेरा: संगठित अपराध का गढ़, सरदार राजू के नेतृत्व में फैली ठगी और लूट की साज़िश


    भोपाल।  भोपाल की अमन कॉलोनी स्थित ईरानी डेरा संगठित अपराध का केंद्र बन चुका है। पुलिस के अनुसार, यहां रहने वाले करीब 70 से अधिक परिवारों के लगभग हर घर का कोई न कोई सदस्य अपराध में शामिल रहा है। चोरी, लूट, ठगी और फर्जीवाड़े के मामलों में इनका नाम मध्य प्रदेश के अलावा महाराष्ट्र, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और कर्नाटक समेत कई राज्यों की एफआईआर में दर्ज है।

    पुलिस ने हाल ही में ईरानी डेरे में बड़ी दबिश दी, जिसमें 32 लोग गिरफ्तार किए गए, जिनमें महिलाएं भी शामिल थीं। इस कार्रवाई में 21 बिना नंबर की स्पोर्ट्स बाइक, नकली नोट और अवैध हथियार बरामद हुए। पुलिस के अनुसार, गिरोह कबीलाई ढांचे में संचालित होता है, जिसमें अपराध से मिली रकम पहले सरदार को दी जाती है, और फिर कबीला तय करता है कि किसे कितना हिस्सा मिलेगा।

    डेरे का प्रमुख सरदार राजू ईरानी है, जिसकी उम्र करीब 47 साल है। वह भोपाल में रहता है, लेकिन देश के अलग-अलग राज्यों में संगीन वारदातों को अंजाम देता है। राजू कभी खुद को CBI अधिकारी, पुलिस अफसर या पत्रकार बताकर ठगी करता है। उसका भाई जाकिर ईरानी भी गिरोह का संचालन करता है और प्रॉपर्टी कब्जा, मारपीट, अडीबाजी और ठगी जैसे संगीन अपराधों में शामिल है।
    गिरोह की रणनीति में फर्जी पहचान और रिश्तों का नेटवर्क शामिल है। आरोपी अक्सर ‘सफर’ पर रहते हैं, जहां कुछ सीधे अपराध में शामिल होते हैं, कुछ चोरी का माल वापस लाते हैं और कुछ अपराध से मिली रकम कबीले तक पहुंचाते हैं।

    2014 में अमन कॉलोनी में हुई हिंसा और आगजनी की घटना के बाद ईरानी डेरा लगातार पुलिस निगरानी में रहा। इसी साल दिल्ली पुलिस ने डेरे से जुड़े मुर्तुजा अली और शिराज अली को मुठभेड़ के बाद गिरफ्तार किया था।

    पुलिस ने अब तक सलमान खान उर्फ गाय, अली तन्नु, सकीना, नवबहार अली, अजीज सैयद, समेत कई अन्य आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जबकि शेष की तलाश जारी है।

  • ‘उंगली नीचे करो’ TMC सांसदों ने चुनाव आयोग से की तीखी बहस SIR और वोटर लिस्ट में गड़बड़ी के आरोप

    ‘उंगली नीचे करो’ TMC सांसदों ने चुनाव आयोग से की तीखी बहस SIR और वोटर लिस्ट में गड़बड़ी के आरोप




    नई दिल्ली।
    तृणमूल कांग्रेस (TMC) के राष्ट्रीय महासचिव और राज्यसभा सांसद अभिषेक बनर्जी ने चुनाव आयोग (ECI) के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से SIR (सर्विलांस इन्टरव्यू रिकॉर्ड) और वोटर लिस्ट में कथित गड़बड़ियों को लेकर करीब ढाई घंटे तक बैठक की। बैठक के दौरान उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्य चुनाव आयुक्त ने उनसे उंगली उठाकर बात करने की कोशिश की, जिस पर बनर्जी ने कहा, “उंगली नीचे करके बात करें।
    आप मनोनीत हैं, हम निर्वाचित हैं। हम किसी के दास नहीं हैं।”

    अभिषेक बनर्जी ने कहा कि देश में अब ईवीएम से वोट चोरी नहीं हो रही, बल्कि सॉफ्टवेयर और एल्गोरिदम के जरिए वोटर लिस्ट में हेरफेर किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि TMC के 10 सांसदों और पश्चिम बंगाल सरकार के वरिष्ठ मंत्रियों ने आयोग से सवाल किए, लेकिन आयोग ने कोई ठोस जवाब नहीं दिया।

    साथ ही उन्होंने आयोग पर 28 नवंबर को पूछे गए सवालों का जवाब न देने और चयनित मीडिया को जानकारी देने का भी आरोप लगाया।

    TMC नेता ने दावा किया कि SIR के तहत 1.36 करोड़ मामलों में लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी बताई जा रही है, लेकिन आयोग ने अभी तक सूची सार्वजनिक नहीं की। उन्होंने आरोप लगाया कि ECI ऐप में गड़बड़ी है, दस्तावेज जमा होने के बावजूद नोटिस जारी नहीं हो रहे और नाम सॉफ्टवेयर के जरिए हटाए जा रहे हैं।

    उन्होंने यह भी कहा कि 60 साल से अधिक उम्र के बुजुर्गों, दिव्यांग और गंभीर बीमार लोगों को घंटों वेरिफिकेशन के लिए बैठाना अमानवीय है।

    अभिषेक बनर्जी ने बंगाल को बदनाम करने की कोशिश पर सवाल उठाया और कहा, रोहिंग्या और बांग्लादेशी घुसपैठियों के नाम पर झूठा प्रचार किया जा रहा है। अगर अवैध प्रवासी हैं तो उन्हें बाहर करने का हम समर्थन करेंगे, लेकिन झूठा प्रचार बर्दाश्त नहीं करेंगे। उन्होंने यह भी बताया कि अन्य 11 राज्यों में SIR चल रहा है, लेकिन बंगाल में सबसे कम डिलीशन होने के बावजूद सबसे ज्यादा सख्ती की जा रही है।

    अभिषेक बनर्जी ने विपक्षी दलों को चेताया कि वोट चोरी ईवीएम से नहीं, वोटर लिस्ट और सॉफ्टवेयर के जरिए हो रही है। उन्होंने दावा किया कि बीजेपी इसी तरीके से महाराष्ट्र, हरियाणा, दिल्ली और बिहार में जीत हासिल कर रही है। अंत में उन्होंने कहा, “पहले मतदाता तय करते थे कि सरकार कौन बनाएगा, अब सरकार तय कर रही है कि वोट डालने कौन जाएगा। लेकिन संविधान हमेशा रहेगा और 2026 में बंगाल की जनता फिर बीजेपी को हराएगी।

  • माघ मेला 2026 के लिए रोडवेज की स्पेशल बसें, 1 जनवरी से प्रयागराज पहुंचना होगा और आसान

    माघ मेला 2026 के लिए रोडवेज की स्पेशल बसें, 1 जनवरी से प्रयागराज पहुंचना होगा और आसान




    प्रयागराज।
    प्रयागराज में 1 जनवरी से शुरू हो रहे माघ मेला 2026 को लेकर उत्तर प्रदेश परिवहन निगम ने श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए व्यापक तैयारियां पूरी कर ली हैं। संगम स्नान के लिए देश-प्रदेश से आने वाले लाखों श्रद्धालुओं को सुगम, सुरक्षित और सस्ती परिवहन सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से विशेष रोडवेज बस सेवाएं शुरू की जा रही हैं। इससे माघ मेले के दौरान प्रयागराज पहुंचना और वहां से संगम घाट तक जाना बेहद आसान हो जाएगा।

    परिवहन निगम के अनुसार, गाजीपुर डिपो से प्रयागराज के लिए कुल 15 बसों का नियमित संचालन किया जाएगा।

    इनमें से 1 जनवरी से 13 जनवरी तक गाजीपुर डिपो की 10 बसें सीधे प्रयागराज के लिए चलाई जाएंगी, जबकि जनपद की पांच बसें वाराणसी मार्ग होते हुए झूसी तक संचालित होंगी। झूसी पहुंचने के बाद श्रद्धालुओं को संगम घाट तक पहुंचाने के लिए विशेष व्यवस्था की गई है।

    श्रद्धालुओं की भीड़ और पैदल चलने की परेशानी को देखते हुए झूसी से संगम घाट तक चार बसों की शटल सेवा चलाई जाएगी। ये बसें लगातार फेरे लगाती रहेंगी, ताकि श्रद्धालुओं को जाम और भीड़ से राहत मिल सके।

    यह विशेष परिवहन व्यवस्था 1 जनवरी से 17 फरवरी तक, यानी पूरे माघ मेला काल में जारी रहेगी।

    माघ मेले के दौरान संगम स्नान के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु प्रयागराज पहुंचते हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए परिवहन निगम ने बसों की संख्या में इजाफा किया है। विभाग के अधिकारियों के अनुसार, वर्तमान में गाजीपुर डिपो से 94 बसों का संचालन किया जा रहा है और माघ मेले के दौरान ग्रामीण रूटों पर भी अतिरिक्त बसें लगाई जाएंगी, ताकि दूर-दराज के गांवों से आने वाले श्रद्धालुओं को भी सुविधा मिल सके।

    इसके अलावा, प्रमुख बस अड्डों पर अतिरिक्त कर्मचारियों की तैनाती, टिकट काउंटरों की संख्या बढ़ाने, समय-सारिणी में लचीलापन और जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त फेरे लगाने की व्यवस्था की गई है।

    विशेष स्नान पर्वों के दौरान यात्रियों की संख्या में भारी बढ़ोतरी को देखते हुए परिवहन निगम ने सतर्कता बढ़ाने और बसों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।

    माघ मेले की प्रमुख स्नान तिथियों पर विशेष भीड़ रहने की संभावना है। इनमें पौष पूर्णिमा (13 जनवरी), मकर संक्रांति (14 जनवरी), मौनी अमावस्या (29 जनवरी), बसंत पंचमी (3 फरवरी) और माघी पूर्णिमा (12 फरवरी) शामिल हैं। इन तिथियों पर अतिरिक्त बसें और शटल सेवाएं चलाई जाएंगी।

    परिवहन निगम का कहना है कि श्रद्धालुओं को सुरक्षित, व्यवस्थित और सुगम यात्रा उपलब्ध कराना उनकी प्राथमिकता है। माघ मेला 2026 के दौरान यह विशेष बस सेवा श्रद्धालुओं के लिए बड़ी राहत साबित होगी।

  • ग्वालियर हाईकोर्ट ने 48 साल पुराने भूमि विवाद में किया फैसला, कब्जा अवैध, नगर निगम को कार्रवाई की अनुमति

    ग्वालियर हाईकोर्ट ने 48 साल पुराने भूमि विवाद में किया फैसला, कब्जा अवैध, नगर निगम को कार्रवाई की अनुमति



    ग्वालियर।
    ग्वालियर के तानसेन रोड पर नेचुरोपैथी अस्पताल के सामने की जमीन को लेकर 48 साल से चल रहे विवाद में हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि लीज की अवधि समाप्त होने के बाद जमीन पर कब्जा रखना पूरी तरह गैरकानूनी है। हाईकोर्ट ने कहा कि लीज खत्म होते ही उसका स्वतः अंत हो जाता है और उसके बाद जमीन पर बने रहना अतिक्रमण माना जाएगा।

    हाईकोर्ट ने निचली अदालतों के फैसले को सही ठहराते हुए अपीलकर्ताओं की दूसरी अपील खारिज कर दी।

    कोर्ट ने साथ ही नगर निगम ग्वालियर को जमीन पर कानून के अनुसार कार्रवाई करने की पूरी अनुमति दे दी है। अब नगर निगम इस जमीन पर उचित कार्रवाई कर सकता है और भविष्य में ऐसे मामलों को नियंत्रित कर सकेगा।

    यह विवाद तानसेन रोड पर स्थित नेचुरोपैथी अस्पताल के सामने की 3161.6 वर्गफुट जमीन को लेकर था। अपीलकर्ता, डॉ. मणिकांत शर्मा के वारिस, नगर निगम के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील कर रहे थे। उनका दावा था कि यह जमीन उनके पिता को लीज पर दी गई थी और बाद में इसका नवीनीकरण भी हुआ।

    सुनवाई के दौरान यह सामने आया कि लीज केवल 31 मार्च 1977 तक वैध थी और उसके बाद कोई वैध नवीनीकरण नहीं हुआ।

    अपीलकर्ताओं के वकील ने भी कोर्ट में माना कि लीज बढ़ाने से जुड़े कोई दस्तावेज उपलब्ध नहीं हैं। कोर्ट ने यह भी कहा कि अगर मान भी लिया जाए कि 1976 में लीज को 30 साल के लिए बढ़ाया गया था, तो वह 2007 में समाप्त हो चुकी थी।

    इस फैसले से यह स्पष्ट हो गया है कि बिना वैध लीज के जमीन पर कब्जा अवैध है, और अब नगर निगम को कानून के अनुसार कार्रवाई करने का अधिकार है। इस निर्णय से ग्वालियर में भूमि विवादों को लेकर प्रशासनिक स्पष्टता बढ़ेगी और भविष्य में ऐसे मामलों में कानून के पालन को मजबूती मिलेगी।

    हाईकोर्ट का यह फैसला यह संदेश देता है कि जमीन पर कब्जा कानून और दस्तावेजों के आधार पर ही वैध माना जाएगा और किसी भी प्रकार का अतिक्रमण बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। 48 साल पुराने इस विवाद का यह निपटारा ग्वालियर के भूमि विवाद मामलों में नियम और अनुशासन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

  • उपेंद्र कुशवाहा की RLM पर संकट: तीन नाराज विधायक दिल्ली में BJP से मिले, पार्टी में टूट की अटकलें तेज!

    उपेंद्र कुशवाहा की RLM पर संकट: तीन नाराज विधायक दिल्ली में BJP से मिले, पार्टी में टूट की अटकलें तेज!




    नई दिल्ली।
     बिहार की सियासत में राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) के लिए संकट के बादल गहरे होते जा रहे हैं। पार्टी प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा के चार विधायकों में से तीन के नाराज चलने की खबरों ने राजनीतिक गलियारों में खलबली मचा दी है। बाजपट्टी से रामेश्वर महतो, मधुबनी से माधव आनंद और दिनारा से आलोक कुमार सिंह की नाराजगी ने RLM के भीतर विभाजन की आशंका बढ़ा दी है।

    शपथ ग्रहण समारोह में असंतोष
    सूत्रों के अनुसार, नाराजगी की जड़ हालिया शपथ ग्रहण समारोह में देखने को मिली।

    उपेंद्र कुशवाहा ने अपने बेटे दीपक प्रकाश को बिना सदन सदस्य के मंत्री बनवाया, जबकि तीनों विधायकों की उम्मीद थी कि उन्हें ही मंत्री बनाया जाएगा। इस फैसले से पार्टी के भीतर ठंडा माहौल बन गया और विधायकों ने असंतोष जाहिर करना शुरू कर दिया।

    दिल्ली में BJP से मुलाकात
    नाराज विधायकों की राजनीतिक सक्रियता चर्चा में आई। हाल ही में ये तीनों विधायक भाजपा के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष नितिन नबीन से मिलने दिल्ली गए। इस मुलाकात ने बिहार की राजनीति में कयासों का बाजार गर्म कर दिया।

    खास बात यह है कि ये विधायक उपेंद्र कुशवाहा द्वारा आयोजित लिट्टी भोज कार्यक्रम में भी शामिल नहीं हुए, जिससे उनकी असहमति और स्पष्ट हुई।

    एकजुटता की तस्वीर
    तीनों विधायकों ने दिल्ली में एक तस्वीर साझा की, जिसमें वे एक साथ बैठे नजर आए। तस्वीर के कैप्शन में लिखा हम सब एकजुट हैं, आज भी साथ हैं और आगे भी साथ रहेंगे। एनडीए की मजबूती और बिहार के सर्वांगीण विकास के संकल्प के साथ, हम साथ-साथ हैं। जय एनडीए। राजनीतिक विश्लेषक इसे संकेत मान रहे हैं कि ये विधायक कुशवाहा का साथ छोड़कर सीधे BJP में शामिल हो सकते हैं या पार्टी पर दबाव बनाने की रणनीति अपना रहे हैं।

    RLM में टूट की संभावना
    अब सवाल यह है कि क्या ये विधायक उपेंद्र कुशवाहा पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहे हैं? क्या वे BJP के साथ जा सकते हैं या अपना अलग गुट बना सकते हैं? विशेषज्ञ मानते हैं कि RLM के चार विधायकों में से तीन की नाराजगी पार्टी की राजनीतिक स्थिति कमजोर कर सकती है। कुशवाहा की पत्नी स्नेहलता फिलहाल पार्टी के भीतर स्थिर सदस्य मानी जा रही हैं।

    महायुति गठबंधन पर असर
    राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि अगर ये विधायक कुशवाहा का साथ छोड़ते हैं, तो RLM की सियासी पकड़ कमजोर हो जाएगी और बिहार में महायुति गठबंधन संकट में पड़ सकता है। पार्टी नेतृत्व की रणनीति और विधायकों के फैसलों पर पूरी नजर रखी जा रही है।
    बिहार की राजनीति में यह घटनाक्रम साफ करता है कि छोटे दलों की आंतरिक असहमति बड़े गठबंधन को भी प्रभावित कर सकती है। RLM के भविष्य और उपेंद्र कुशवाहा की सियासी मजबूती पर सवाल खड़े हो गए हैं। आने वाले दिनों में पार्टी के भीतर उठाए गए कदम और विधायकों की गतिविधियां बिहार की सियासी दिशा तय करेंगी।

  • कलेक्टर–CEO के दावों की परतें खुलीं: राष्ट्रपति अवॉर्ड के पीछे का सच, जांच टीम के सामने बेनकाब हुआ ‘जल संरक्षण’ का फर्जीवाड़ा

    कलेक्टर–CEO के दावों की परतें खुलीं: राष्ट्रपति अवॉर्ड के पीछे का सच, जांच टीम के सामने बेनकाब हुआ ‘जल संरक्षण’ का फर्जीवाड़ा



    खंडवा। खंडवा जिले को जल संरक्षण के नाम पर मिले राष्ट्रपति पुरस्कार को लेकर बड़ा खुलासा सामने आया है। जहां एक चर्चित अखबार के पड़ताल के बाद भोपाल से सीनियर आईएएस दिनेश कुमार जैन के नेतृत्व में दो सदस्यीय जांच दल मंगलवार को खंडवा पहुंचा और मौके पर जाकर तथाकथित जल संरचनाओं का ‘रियलिटी चेक’ किया। जांच के दौरान जो सामने आया, उसने प्रशासन के दावों की पोल खोल दी।

    जांच दल चर्चित अखबार के रिपोर्ट के आधार परहरसूद जनपद समेत कई गांवों में पहुंचा।

    कहीं कागजों में तालाब मिले, तो जमीन पर सिर्फ मिट्टी का ढेर। कहीं 6 फीट गहरे सोख्ता गड्ढों का दावा था, लेकिन हकीकत में 1 फीट से भी कम गहराई निकली। टीम ने किसानों और ग्रामीणों से बात की, खुद गड्ढे खुदवाकर देखे और कई जगह देखकर चौंक गई।

    डोटखेड़ा गांव में खेत के बीच कागजों में तालाब दिखाया गया था, लेकिन मौके पर कोई जल संरचना नहीं मिली। सिर्फ मिट्टी फैलाकर तालाब का रूप देने की कोशिश की गई थी।

    पलानी माल गांव में ग्रामीणों ने खुद अधिकारियों को उन जगहों पर ले जाकर दिखाया, जहां सरकारी रिकॉर्ड और जमीन की सच्चाई बिल्कुल अलग थी। आंगनवाड़ी भवन में रूफ वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम अधूरा मिला, पाइप ही गायब था। आरोग्य केंद्र में सोख्ता गड्ढा नाममात्र का निकला, जिसे बारिश में ओवरफ्लो के बाद तोड़ दिया गया था।

    सबसे चौंकाने वाला मामला शाहपुरा माल गांव में सामने आया, जहां जांच दल के आने की सूचना मिलते ही पंचायत सचिव ने सुबह-सुबह जेसीबी से नया गड्ढा खुदवा दिया।

    जबकि रिकॉर्ड में उसका भुगतान पहले ही हो चुका था। तय साइज 10×10 फीट था, लेकिन मौके पर सिर्फ 1 फीट गहरा गड्ढा मिला, वो भी खेत के ऐसे कोने में जहां उसका कोई मतलब नहीं था।

    पूरा मामला तब उजागर हुआ जब 11 नवंबर को केंद्र सरकार ने खंडवा जिले को जल संरक्षण के लिए नेशनल वाटर अवॉर्ड और 2 करोड़ रुपये देने की घोषणा की। प्रशासन ने 1.29 लाख जल संरचनाओं के निर्माण का दावा किया था। लेकिन जांच में सामने आया कि कई तालाब, डक वैल और स्टॉप डैम सिर्फ कागजों में थे। कुछ तस्वीरें तो एआई द्वारा जनरेटेड पाई गईं। कहीं 150 सोख्ता गड्ढे दिखाए गए, तो जमीन पर 1–2 फीट के गड्ढे या सिर्फ पाइप नजर आए। कहीं 11 तालाबों का दावा था, लेकिन एक भी मौजूद नहीं था।

    अखबार के खुलासे के बाद अब भोपाल की टीम इन फर्जीवाड़ों की आधिकारिक तस्दीक कर रही है।

    साफ है कि खंडवा को मिला यह पुरस्कार जल संरक्षण की सफलता नहीं, बल्कि कागजी आंकड़ों और झूठे दावों पर खड़ा किया गया अब तक का सबसे बड़ा सरकारी भ्रम साबित हो रहा है।

    खंडवा के नारायण नगर इलाके में सामने आया मामला जल संरक्षण के नाम पर किए गए फर्जीवाड़े की एक और बानगी बन गया है।

    यहां रहने वाली शिक्षिका संध्या राजपूत को उच्च अधिकारियों की ओर से निर्देश दिया गया था कि वह अपने घर पर वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगवाएं। लेकिन हकीकत कुछ और ही निकली।

    जांच में सामने आया कि संध्या राजपूत के घर पर कोई वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम मौजूद नहीं था। इसके बजाय उनके घर से कुछ मकान दूर स्थित एक अन्य घर की छत से लगी पाइप को ही वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम बताकर पेश कर दिया गया। यह पाइप दरअसल छत का पानी सीधे नाली में पहुंचाने के लिए लगाई गई थी, जिसका जल संरक्षण या रिचार्ज से कोई लेना-देना नहीं था।

    इसके बावजूद उसी मकान की फोटो खींचकर प्रशासन को सौंप दी गई और कागजों में इसे वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम के रूप में दर्ज कर दिया गया। यह मामला साफ तौर पर दिखाता है कि कैसे जमीनी हकीकत को दरकिनार कर सिर्फ फोटो और फाइलों के सहारे योजनाओं की सफलता दिखाई गई, जबकि वास्तविकता में जल संरक्षण का कोई काम नहीं हुआ।

  • रतलाम की बेटी की रूह कंपा देने वाली दास्तां,सगे माता-पिता और मामा ही धकेलते थे देह व्यापार के दलदल में, भोपाल में दर्ज हुई FIR

    रतलाम की बेटी की रूह कंपा देने वाली दास्तां,सगे माता-पिता और मामा ही धकेलते थे देह व्यापार के दलदल में, भोपाल में दर्ज हुई FIR


    भोपाल। रिश्तों को शर्मसार कर देने वाली एक ऐसी घटना सामने आई है, जिसने मानवता को झकझोर कर रख दिया है। रतलाम जिले के एक गांव की 21 वर्षीय युवती ने अपने ही जन्मदाताओं और सगे मामाओं पर उसे देह व्यापार के नर्क में धकेलने का सनसनीखेज आरोप लगाया है। पिछले 7 सालों से जुल्म सह रही यह युवती किसी तरह जान बचाकर भोपाल पहुंची, जहां उसने पुलिस के सामने अपनी आपबीती सुनाई।
    7 साल की उम्र से सह रही थी जुल्म
    पीड़िता ने भोपाल के महिला थाने में दर्ज कराई अपनी शिकायत में बताया कि जब वह महज 14 साल की थी, तभी से उसके माता-पिता और दो मामा मिलकर उससे जबरन देह व्यापार करवा रहे थे। जिस उम्र में बच्चों के हाथों में किताबें होनी चाहिए, उस उम्र में उसे दरिंदगी के हवाले कर दिया गया।
    युवती का आरोप है कि जब भी वह इस घिनौने काम का विरोध करती, तो उसके परिजन उसे बेरहमी से पीटते और तरह-तरह की शारीरिक व मानसिक यातनाएं देते थे।

    नर्क से भागकर भोपाल में ली शरण
    सालों तक जुल्म की बेड़ियां सहने के बाद, युवती ने आखिरकार साहस जुटाया और मौका मिलते ही अपने गांव से भागकर भोपाल आ गई। यहां उसने वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों से गुहार लगाई और एक आवेदन के माध्यम से अपनी पूरी कहानी बयां की।

    पीड़िता की हालत और उसकी बातों की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने तत्काल कार्रवाई शुरू की।

    भोपाल में ‘जीरो’ पर FIR, अब रतलाम पुलिस करेगी जांच
    महिला थाना प्रभारी (TI) अंजना दुबे के अनुसार, 21 वर्षीय पीड़िता के बयानों के आधार पर उसके माता-पिता और दो मामा के खिलाफ गंभीर धाराओं में एफआईआर दर्ज की गई है।

    चूंकि मामला रतलाम जिले का है, इसलिए भोपाल पुलिस ने ‘जीरो पर एफआईआर’ दर्ज की है। अब केस डायरी आगे की वैधानिक कार्रवाई के लिए रतलाम पुलिस को सौंपी जा रही है।

    मामले के मुख्य आरोपी: सगे माता-पिता और दो मामा।
    पिछले 7 सालों से (14 वर्ष की आयु से) लगातार शोषण।
    अपराध: जबरन देह व्यापार और मारपीट।
    कानूनी स्थिति, भोपाल में जीरो FIR दर्ज, मामला रतलाम ट्रांसफर।
    यह मामला समाज के उस काले चेहरे को उजागर करता है जहां संरक्षक ही भक्षक बन गए। अब सबकी नजरें रतलाम पुलिस पर हैं कि वह इन आरोपियों के खिलाफ कितनी सख्त कार्रवाई करती है।