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  • बेंगलुरु जा रही एयर इंडिया एक्सप्रेस की फ्लाइट से टकराया पक्षी, सभी 148 यात्री सुरक्षित उतरे

    बेंगलुरु जा रही एयर इंडिया एक्सप्रेस की फ्लाइट से टकराया पक्षी, सभी 148 यात्री सुरक्षित उतरे


    नई दिल्ली । विशाखापत्तनम से बेंगलुरु जा रही एयर इंडिया एक्सप्रेस की उड़ान IX2065 पक्षी से टकरा गई। घटना के बावजूद विमान ने अपनी यात्रा पूरी की और बेंगलुरु के केम्पेगौड़ा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर सुरक्षित लैंडिंग की। विमान में सवार सभी 148 यात्री सुरक्षित हैं। अधिकारियों के अनुसार, घटना में किसी यात्री या चालक दल के सदस्य के घायल होने की सूचना नहीं मिली है।

    विमान के हवाई अड्डे पर उतरने के बाद उसे पार्किंग स्टैंड पर ले जाया गया। निर्धारित सुरक्षा प्रक्रियाओं के तहत ग्राउंड इंजीनियरों और तकनीकी विशेषज्ञों ने विमान की विस्तृत जांच शुरू कर दी है। इस जांच का उद्देश्य पक्षी से टकराने के कारण विमान के बाहरी ढांचे, इंजन या अन्य तकनीकी हिस्सों को संभावित नुकसान का पता लगाना है। जांच पूरी होने के बाद ही विमान की स्थिति के बारे में अधिक स्पष्ट जानकारी मिल सकेगी।

    विमानन क्षेत्र में पक्षियों से टकराने की घटनाओं को गंभीरता से लिया जाता है, क्योंकि ऐसी स्थिति में विमान के इंजन और अन्य महत्वपूर्ण हिस्सों पर असर पड़ने की आशंका रहती है। इसलिए सुरक्षित लैंडिंग के बाद भी तकनीकी निरीक्षण आवश्यक होता है। इस मामले में विमान ने बिना किसी अप्रिय घटना के बेंगलुरु में उतरकर अपनी यात्रा पूरी की। फिलहाल उपलब्ध जानकारी के अनुसार, सभी यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित रही।

    यह घटना ऐसे समय में सामने आई है, जब भारतीय विमानन क्षेत्र में सुरक्षा से जुड़ी अन्य घटनाओं और अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों पर भी नजर रखी जा रही है। इसी महीने फ्रैंकफर्ट से दिल्ली आ रही एयर इंडिया की एक उड़ान को सुरक्षा संबंधी अलर्ट के बाद जयपुर में उतारा गया था। उस विमान से कथित तौर पर ‘स्क्वॉक 7500’ संकेत प्रसारित हुआ था। विमानन क्षेत्र में यह कोड विमान अपहरण जैसी गंभीर सुरक्षा स्थिति का संकेत देता है।

    यह अलर्ट अहमदाबाद एयर ट्रैफिक कंट्रोल को मिला था। इसके बाद विमान को जयपुर में सुरक्षित उतारा गया। हालांकि, उस समय संकेत जारी होने के वास्तविक कारणों के बारे में तत्काल स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई थी। दोनों घटनाएं अलग-अलग परिस्थितियों से संबंधित हैं, लेकिन इनके बीच विमान संचालन और सुरक्षा प्रक्रियाओं का महत्व प्रमुख रूप से सामने आता है।

    इस बीच, पश्चिम एशिया में बदलते सुरक्षा हालात का असर भारतीय विमानन कंपनियों की अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर भी पड़ रहा है। कई एयरलाइंस ने सऊदी अरब के प्रमुख शहरों के लिए अपनी सेवाएं अस्थायी रूप से निलंबित की हैं। इनमें रियाद, जेद्दा और दम्माम के साथ कुछ कंपनियों की मदीना जाने वाली उड़ानें भी शामिल हैं।

    एयर इंडिया ने रियाद, दम्माम और जेद्दा से आने-जाने वाली अपनी उड़ानें 20 अक्टूबर तक रद्द रखने की घोषणा की है। प्रभावित यात्रियों को पूरा रिफंड दिया जा रहा है। एयर इंडिया एक्सप्रेस ने भी दम्माम, जेद्दा और रियाद की उड़ानों का निलंबन इसी तारीख तक बढ़ाया है। वहीं, इंडिगो ने इन तीन शहरों के अलावा मदीना की उड़ानें 24 अक्टूबर तक रद्द की हैं। अकासा एयर ने रियाद के लिए निलंबन 24 अक्टूबर और जेद्दा के लिए 21 अक्टूबर तक बढ़ाया है।

    एयरलाइंस ने कहा है कि यात्रियों और चालक दल की सुरक्षा उनकी प्राथमिकता है और वे क्षेत्रीय हालात पर लगातार नजर रख रही हैं। बेंगलुरु में पक्षी से टकराने की घटना के बाद विमान की तकनीकी जांच जारी है, जबकि सभी 148 यात्रियों के सुरक्षित होने की पुष्टि की गई है।

  • भारत-न्यूजीलैंड मुक्त व्यापार समझौता लागू, भारतीय निर्यात को 100 प्रतिशत शुल्क-मुक्त पहुंच और किसानों को नए अवसर

    भारत-न्यूजीलैंड मुक्त व्यापार समझौता लागू, भारतीय निर्यात को 100 प्रतिशत शुल्क-मुक्त पहुंच और किसानों को नए अवसर


    नई दिल्ली ।
    भारत और न्यूजीलैंड के बीच मुक्त व्यापार समझौता मंगलवार, 20 अक्टूबर 2026 से लागू हो गया है। इस समझौते से भारतीय निर्यातकों को न्यूजीलैंड के बाजार में 100 प्रतिशत शुल्क-मुक्त पहुंच मिलेगी। इसका लाभ विशेष रूप से सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई), किसानों, महिलाओं, युवाओं और श्रम-प्रधान उद्योगों को मिलने की उम्मीद है। समझौते में व्यापार के अवसर बढ़ाने के साथ भारत के संवेदनशील कृषि क्षेत्रों के हितों की सुरक्षा पर भी ध्यान दिया गया है।

    केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि शुल्क-मुक्त बाजार पहुंच से भारतीय कारोबारियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी मौजूदगी बढ़ाने का अवसर मिलेगा। उनके अनुसार, इस समझौते से पेशेवरों के लिए भी नए अवसर खुलेंगे और भारत के मूलभूत हित सुरक्षित रहेंगे। उन्होंने इसे दोनों देशों की आर्थिक साझेदारी में एक नए अध्याय की शुरुआत बताया।

    कृषि क्षेत्र को लेकर मंत्री ने कहा कि भारतीय किसानों को फल, सब्जियां, मसाले और अन्य कृषि उत्पादों के लिए न्यूजीलैंड में बाजार के नए अवसर मिलेंगे। इसके साथ ही उत्पादकता बढ़ाने, किसानों की आय मजबूत करने और उनकी आजीविका बेहतर बनाने के लिए आपसी सहयोग को प्रोत्साहन मिलेगा। हालांकि, डेयरी जैसे संवेदनशील क्षेत्रों को समझौते में पूरी तरह संरक्षण दिया गया है। इससे व्यापार विस्तार के साथ किसानों के हितों को सुरक्षित रखने की व्यवस्था की गई है।

    भारतीय विनिर्माण क्षेत्र के लिए भी इस समझौते को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पीयूष गोयल ने महाराष्ट्र के पुणे में निर्मित जेसीबी मशीन की न्यूजीलैंड को पहली खेप के निर्यात को हरी झंडी दिखाई। उन्होंने कहा कि न्यूजीलैंड में निर्मित भारतीय मशीनों का इस्तेमाल बढ़ना देश के विनिर्माण उद्योग के लिए नए अवसरों का संकेत है। इससे भारतीय उत्पादों को विदेशी बाजारों में अपनी पहुंच बढ़ाने में मदद मिल सकती है।

    वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल के अनुसार, मुक्त व्यापार समझौते केवल आयात-निर्यात शुल्क घटाने तक सीमित नहीं होते। ये व्यापार, निवेश और आपूर्ति श्रृंखलाओं के बेहतर एकीकरण के माध्यम से दीर्घकालिक आर्थिक साझेदारी को मजबूत करते हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे समझौतों से नियामकीय मंजूरियों की प्रक्रिया आसान होती है और दोनों देशों के बीच कारोबार करना अधिक सुविधाजनक बनता है।

    सरकार का अनुमान है कि भारत-न्यूजीलैंड एफटीए आने वाले वर्षों में द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। इसके अतिरिक्त, यह समझौता कृषि, विनिर्माण, बुनियादी ढांचे और स्टार्टअप सहित विभिन्न क्षेत्रों में न्यूजीलैंड से भारत में 20 अरब डॉलर तक के निवेश का रास्ता खोल सकता है। इससे कारोबारी सहयोग और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की संभावना है।

    सेवा क्षेत्र में सूचना प्रौद्योगिकी, पेशेवर सेवाओं, निर्माण, पर्यटन और दृश्य-श्रव्य सेवाओं से जुड़ी भारतीय कंपनियों को न्यूजीलैंड के बाजार में अवसर मिलेंगे। इन क्षेत्रों में बाजार तक पहुंच बढ़ने से भारतीय सेवा प्रदाताओं को अंतरराष्ट्रीय कारोबार का विस्तार करने में मदद मिल सकती है।

    दवा और चिकित्सा उपकरण उद्योग के लिए भी समझौते में महत्वपूर्ण प्रावधान हैं। न्यूजीलैंड अब वैश्विक स्तर पर मान्यता प्राप्त नियामकों की ओर से जारी निरीक्षण मंजूरियों को स्वीकार करेगा। इससे भारतीय फार्मास्यूटिकल और मेडिकल डिवाइस निर्यातकों के लिए नियामकीय अनुपालन का बोझ कम हो सकता है और उत्पादों को बाजार तक पहुंचाने की प्रक्रिया तेज हो सकती है। कुल मिलाकर, इस समझौते का उद्देश्य भारत और न्यूजीलैंड के बीच व्यापार, निवेश और पेशेवर सहयोग को व्यापक बनाना है, जबकि भारत के संवेदनशील क्षेत्रों के हितों को सुरक्षित रखना भी इसकी प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल है।

  • दशहरे पर एनएसई और बीएसई बंद, एमसीएक्स में शाम से शुरू होगा कारोबार, जानें निवेशकों के लिए पूरा शेड्यूल

    दशहरे पर एनएसई और बीएसई बंद, एमसीएक्स में शाम से शुरू होगा कारोबार, जानें निवेशकों के लिए पूरा शेड्यूल

    नई दिल्ली । दशहरा यानी विजयादशमी के अवसर पर मंगलवार, 20 अक्टूबर 2026 को भारतीय शेयर बाजार में कारोबार बंद है। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) और बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) ने इस दिन को अपने वार्षिक अवकाश कैलेंडर में शामिल किया है। इसके चलते निवेशक आज शेयरों की खरीद-बिक्री नहीं कर सकेंगे। इक्विटी बाजार के साथ डेरिवेटिव्स और अन्य संबंधित कारोबारी खंडों में भी गतिविधियां स्थगित रहेंगी।

    शेयर बाजार में यह अवकाश ऐसे समय आया है, जब पिछले कारोबारी दिन यानी सोमवार को प्रमुख सूचकांकों में तेज गिरावट दर्ज की गई थी। निजी बैंकिंग शेयरों में कमजोरी, कंपनियों के उम्मीद से कमजोर तिमाही नतीजों और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने बाजार पर दबाव बनाया। सोमवार को निफ्टी 50 में करीब 257.20 अंकों की गिरावट आई और यह 22,888.95 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं, सेंसेक्स 876.37 अंक टूटकर 73,852.90 पर आ गया।

    सोमवार की बिकवाली का असर बाजार के अधिकांश क्षेत्रीय सूचकांकों पर देखने को मिला। हालांकि, निफ्टी पीएसयू बैंक इंडेक्स ने इस रुझान से अलग प्रदर्शन किया और 2.41 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की। इसके बाद दशहरा अवकाश के कारण निवेशकों को घरेलू शेयर बाजार में अगली कारोबारी गतिविधियों के लिए एक दिन इंतजार करना होगा।

    एनएसई और बीएसई में आज केवल सामान्य शेयर कारोबार ही नहीं, बल्कि फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस (एफएंडओ) में भी ट्रेडिंग बंद है। सिक्योरिटीज लेंडिंग एंड बॉरोइंग (एसएलबी), करेंसी डेरिवेटिव्स और इंटरेस्ट रेट डेरिवेटिव्स सेगमेंट में भी कोई कारोबारी सत्र नहीं होगा। इन सभी गतिविधियों के लिए नियमित कारोबार दोबारा शुरू होने का इंतजार करना पड़ेगा।

    हालांकि, कमोडिटी बाजार में कारोबार करने वाले निवेशकों के लिए शाम को ट्रेडिंग का अवसर उपलब्ध रहेगा। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) में सुबह का सत्र बंद रहेगा। इस एक्सचेंज पर सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक कारोबार नहीं होगा, लेकिन शाम 5 बजे से ट्रेडिंग दोबारा शुरू हो जाएगी। इस तरह सोना, चांदी, कच्चे तेल और अन्य कमोडिटी से जुड़े वायदा अनुबंधों में निवेशक शाम के सत्र के दौरान कारोबार कर सकेंगे।

    एमसीएक्स का शाम का सत्र रात 11:30 बजे तक या कुछ अनुबंधों के लिए रात 11:55 बजे तक चल सकता है। वास्तविक कारोबारी समय संबंधित अनुबंध और एक्सचेंज के निर्धारित कार्यक्रम पर निर्भर करेगा। इसलिए कमोडिटी बाजार में सक्रिय निवेशकों के लिए ट्रेडिंग से पहले अपने संबंधित अनुबंध का समय देखना जरूरी है।

    घरेलू शेयर बाजार बंद रहने के बावजूद अंतरराष्ट्रीय बाजारों में सोना, चांदी और कच्चे तेल जैसी कमोडिटी की कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। ऐसे में एमसीएक्स का शाम का सत्र वैश्विक बाजारों में होने वाले बदलावों के अनुसार कारोबार करने का अवसर देता है। हालांकि, निवेशकों को बाजार की परिस्थितियों और संबंधित अनुबंधों की शर्तों को ध्यान में रखकर ही निर्णय लेना चाहिए।

    दशहरा अवकाश के बाद एनएसई और बीएसई में नियमित कारोबार बुधवार, 21 अक्टूबर 2026 से शुरू होगा। इसके बाद निवेशक सामान्य कारोबारी समय के अनुसार शेयरों की खरीद-बिक्री कर सकेंगे।

    वर्ष 2026 में दशहरे के बाद शेयर बाजार के प्रमुख अवकाशों में 10 नवंबर को दिवाली बलिप्रतिपदा, 24 नवंबर को प्रकाश पर्व श्री गुरु नानक देव जी और 25 दिसंबर को क्रिसमस शामिल हैं। एमसीएक्स में दिवाली बलिप्रतिपदा और गुरु नानक जयंती पर सुबह का सत्र बंद रहने, जबकि शाम का सत्र चालू रहने का कार्यक्रम है। क्रिसमस के दिन कमोडिटी एक्सचेंज पर पूरे दिन कारोबार बंद रहेगा।

  • दशहरे पर अक्षरधाम मंदिर में 108 यज्ञकुंडों के साथ विश्व शांति महायज्ञ, हजारों श्रद्धालुओं ने लिया हिस्सा

    दशहरे पर अक्षरधाम मंदिर में 108 यज्ञकुंडों के साथ विश्व शांति महायज्ञ, हजारों श्रद्धालुओं ने लिया हिस्सा

    नई दिल्ली । विजयदशमी के पावन अवसर पर दिल्ली स्थित स्वामिनारायण अक्षरधाम मंदिर में विश्व शांति महायज्ञ का भव्य आयोजन किया गया। इस धार्मिक अनुष्ठान में देश-विदेश के विभिन्न मंदिरों से आए 30 संतों और महंतों ने हिस्सा लिया। संतों ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच विश्व में शांति, सद्भाव और भाईचारे की स्थापना के लिए प्रार्थना की। इस अवसर पर हजारों श्रद्धालु यजमान के रूप में शामिल हुए और मंगलमय भविष्य की कामना के साथ धार्मिक संकल्प लिए।

    महायज्ञ के आयोजन को लेकर अक्षरधाम मंदिर परिसर को विशेष रूप से सजाया गया था। परिसर में रंगोली बनाई गई और ध्वज-पताकाएं लगाई गईं। उत्सव के वातावरण में सुबह छह बजे संतों ने वैदिक मंत्रों के उच्चारण के साथ यज्ञ का शुभारंभ किया। वैदिक परंपराओं के अनुसार, अनुष्ठान के दौरान 108 यज्ञकुंडों में पवित्र आहुतियां अर्पित की गईं। धार्मिक कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। महिलाओं और बच्चों की भी उल्लेखनीय उपस्थिति रही।

    विश्व शांति महायज्ञ का उद्देश्य केवल धार्मिक अनुष्ठान तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसके माध्यम से पूरी दुनिया में शांति और सौहार्द का संदेश दिया गया। श्रद्धालुओं ने प्रार्थना की कि विभिन्न देशों और क्षेत्रों में जारी युद्ध, हिंसा तथा अशांति की परिस्थितियां समाप्त हों। लोगों के बीच आपसी विश्वास बढ़े और समाज में प्रेम, सहयोग तथा भाईचारे की भावना मजबूत हो।

    इस आयोजन की परंपरा बीएपीएस स्वामिनारायण संस्था के प्रमुख महंतस्वामी महाराज से जुड़ी है। उनके द्वारा विश्व शांति यज्ञ की शुरुआत किए जाने के बाद से हर साल दशहरे के अवसर पर अक्षरधाम परिसर में इस महायज्ञ का आयोजन किया जाता रहा है। इस वार्षिक परंपरा के जरिए विजयदशमी के धार्मिक महत्व को व्यापक सामाजिक और वैश्विक संदेश के साथ जोड़ा जाता है।

    कार्यक्रम के दौरान महंतस्वामी महाराज के संदेश को भी दोहराया गया। संदेश में कामना की गई कि दुनिया में जहां भी युद्ध, हिंसा और अराजकता की स्थिति है, उसका जल्द अंत हो। सभी लोग प्रेम, सद्भाव और भाईचारे के साथ जीवन व्यतीत करें। साथ ही प्रत्येक व्यक्ति के जीवन में श्रद्धा, भक्ति और निष्ठा की भावना विकसित हो। इस उद्देश्य के लिए भगवान स्वामिनारायण के चरणों में प्रार्थना की गई।

    विजयदशमी को परंपरागत रूप से बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक माना जाता है। इसी भावना के अनुरूप महायज्ञ में शामिल श्रद्धालुओं ने व्यक्तिगत कल्याण के साथ-साथ संपूर्ण विश्व की सुख-समृद्धि और शांति की कामना की। लोगों ने समाज में एकता, सहिष्णुता और परस्पर सम्मान बढ़ाने का संकल्प भी लिया।

    अनुष्ठान के दौरान उपस्थित लोगों को अपने जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने की प्रेरणा दी गई। श्रद्धालुओं ने नकारात्मकता, अहंकार और घृणा जैसी भावनाओं को त्यागकर सकारात्मक सोच अपनाने का संकल्प लिया। आयोजन के जरिए यह संदेश दिया गया कि शांति की स्थापना के लिए व्यक्तिगत आचरण और सामाजिक व्यवहार में प्रेम तथा सद्भाव को महत्व देना आवश्यक है।

    अक्षरधाम में आयोजित इस महायज्ञ ने विजयदशमी के अवसर पर धार्मिक आस्था के साथ वैश्विक कल्याण की भावना को प्रमुखता दी। वैदिक मंत्रोच्चार, सामूहिक आहुतियों और श्रद्धालुओं की भागीदारी के बीच विश्व शांति की कामना की गई। आयोजन का केंद्रीय संदेश यही रहा कि युद्ध और हिंसा से मुक्त दुनिया के निर्माण के लिए प्रेम, एकता और भाईचारे की भावना को मजबूत किया जाना चाहिए।

  • जबलपुर नगर निगम आयुक्त के ट्रांसफर पर सियासी घमासान, भाजपा विधायक ने राम से की तुलना, कांग्रेस ने जताई आपत्ति

    जबलपुर नगर निगम आयुक्त के ट्रांसफर पर सियासी घमासान, भाजपा विधायक ने राम से की तुलना, कांग्रेस ने जताई आपत्ति


    जबलपुर । जबलपुर में नगर निगम आयुक्त रामप्रकाश अहिरवार के तबादले को लेकर सियासी विवाद खड़ा हो गया है। पाटन से भाजपा विधायक अजय विश्नोई की सोशल मीडिया पोस्ट चर्चा में आ गई जिसमें उन्होंने दशहरे के दिन जबलपुर से राम का हरण हो जाने की बात लिखी। पोस्ट सामने आने के बाद कांग्रेस नेताओं ने इस पर आपत्ति जताई। विवाद बढ़ने के बीच विधायक ने अपनी पोस्ट हटा दी लेकिन तबादले को लेकर राजनीतिक चर्चा जारी है।

    राज्य शासन की ओर से दो दिन पहले अधिकारियों के तबादले का आदेश जारी किया गया था। इसके तहत जबलपुर नगर निगम आयुक्त रामप्रकाश अहिरवार को भोपाल नगर निगम आयुक्त बनाया गया है। इस प्रशासनिक बदलाव के बाद विधायक अजय विश्नोई ने सोशल मीडिया पर टिप्पणी करते हुए लिखा कि दशहरे के दिन जबलपुर से राम का हरण हो गया। पोस्ट में रामप्रकाश अहिरवार के नाम में राम शब्द को लेकर भगवान श्रीराम से तुलना किए जाने का अर्थ निकाला गया। इसके बाद सोशल मीडिया पर इस टिप्पणी को लेकर प्रतिक्रियाएं सामने आने लगीं।

    पोस्ट वायरल होने के बाद कांग्रेस नेताओं ने भी सवाल उठाए। युवा कांग्रेस नेता दृगपाल सिंह लोदी ने आपत्ति जताते हुए पूछा कि रामप्रकाश अहिरवार की तुलना भगवान श्रीराम से क्यों की गई। इस टिप्पणी को लेकर राजनीतिक बहस शुरू हो गई। हालांकि उपलब्ध जानकारी के अनुसार विधायक विश्नोई ने बाद में अपनी पोस्ट हटा दी। इसके बावजूद यह मामला शहर के राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बना हुआ है।

    इस घटनाक्रम में नगर निगम आयुक्त का तबादला और उस पर की गई राजनीतिक टिप्पणी दोनों चर्चा के केंद्र में हैं। अहिरवार को भोपाल नगर निगम आयुक्त बनाए जाने के बाद जबलपुर में नए प्रशासनिक नेतृत्व को लेकर भी सवाल उठ सकते हैं। वहीं विधायक की पोस्ट ने धार्मिक प्रतीकों के राजनीतिक इस्तेमाल को लेकर बहस छेड़ दी है। कांग्रेस नेताओं ने टिप्पणी पर आपत्ति जताई जबकि पोस्ट हटाए जाने के बाद विवाद की चर्चा सोशल मीडिया पर जारी रही।

    इस मामले में एक तथ्यात्मक गलती भी सामने आई। युवा कांग्रेस नेता दृगपाल सिंह लोदी ने अपनी पोस्ट में अजय विश्नोई को कांग्रेस का विधायक बता दिया जबकि विश्नोई भाजपा के नेता हैं और पाटन विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हैं। ऐसे में विवाद के बीच राजनीतिक पहचान को लेकर भी गलत जानकारी साझा होने का मामला सामने आया।

    फिलहाल उपलब्ध जानकारी में विधायक अजय विश्नोई की पोस्ट हटाए जाने और कांग्रेस नेताओं की आपत्ति की बात सामने आई है। नगर निगम आयुक्त का तबादला शासन के आदेश के तहत हुआ है जबकि पोस्ट को लेकर उठे सवाल राजनीतिक प्रतिक्रिया का हिस्सा हैं। इस पूरे घटनाक्रम ने प्रशासनिक फेरबदल के साथ दशहरे के धार्मिक संदर्भ को जोड़कर नई बहस पैदा कर दी है।

  • होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव के लिए अमेरिका जिम्मेदार, ईरान के विदेश मंत्री अराघची ने कूटनीति पर दिया जोर

    होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव के लिए अमेरिका जिम्मेदार, ईरान के विदेश मंत्री अराघची ने कूटनीति पर दिया जोर

    नई दिल्ली । होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ते तनाव के बीच ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने अमेरिका को क्षेत्रीय असुरक्षा के लिए जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने कहा कि क्षेत्रीय विवादों का समाधान सैन्य कार्रवाई के बजाय कूटनीति और राजनीतिक बातचीत के माध्यम से किया जाना चाहिए। तेहरान में सोमवार को रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव के साथ संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में अराघची ने पड़ोसी देशों से क्षेत्र की सुरक्षा के लिए साझा व्यवस्था विकसित करने की अपील भी की।

    अराघची के मुताबिक, होर्मुज जलडमरूमध्य और आसपास के क्षेत्र में असुरक्षा की प्रमुख वजह अमेरिका की नीतियां और ईरान के खिलाफ जारी सैन्य तथा आर्थिक दबाव हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि अमेरिका और इजरायल की सैन्य कार्रवाई ने क्षेत्रीय परिस्थितियों को और तनावपूर्ण बनाया है। ईरान का कहना है कि मौजूदा संकट को केवल सैन्य शक्ति के इस्तेमाल से हल नहीं किया जा सकता। इसके लिए संबंधित देशों के बीच संवाद और राजनीतिक प्रयास आवश्यक हैं।

    ईरानी विदेश मंत्री ने क्षेत्रीय देशों के नेतृत्व में सुरक्षा व्यवस्था बनाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि ऐसी पहल का स्वागत किया जाना चाहिए, जिसके तहत विदेशी सेनाओं की मौजूदगी के बिना क्षेत्र के देश अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए मिलकर काम करें। उनके अनुसार, क्षेत्र की स्थिरता के लिए स्थानीय देशों की भागीदारी और आपसी सहयोग महत्वपूर्ण है। यह प्रस्ताव ऐसे समय आया है, जब होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर ईरान और अमेरिका के बीच तनाव बना हुआ है।

    होर्मुज जलडमरूमध्य फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी और अरब सागर से जोड़ने वाला रणनीतिक समुद्री मार्ग है। वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए इसका विशेष महत्व है। सामान्य परिस्थितियों में दुनिया के कुल तेल और अन्य हाइड्रोकार्बन परिवहन का बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से गुजरता है। इस कारण यहां जहाजों की आवाजाही में बाधा आने या सुरक्षा संकट बढ़ने से ऊर्जा बाजारों और अंतरराष्ट्रीय आपूर्ति व्यवस्था पर असर पड़ सकता है।

    ईरान और अमेरिका के बीच जारी टकराव का प्रभाव इस समुद्री मार्ग की सुरक्षा पर भी दिखाई दे रहा है। ईरान इस जलमार्ग पर अपने नियंत्रण का दावा करता रहा है, जबकि अमेरिका ने ईरानी बंदरगाहों के आसपास नौसैनिक नाकेबंदी बनाए रखी है। दोनों देशों के बीच तनाव और समुद्री गतिविधियों को लेकर मतभेदों ने क्षेत्र में सुरक्षा संबंधी चिंताएं बढ़ाई हैं। ऐसे माहौल में अराघची ने कूटनीतिक समाधान और क्षेत्रीय सहयोग को प्राथमिकता देने की बात कही है।

    रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने भी ईरान के साथ बातचीत के दौरान क्षेत्रीय संकट का समाधान खोजने के लिए राजनीतिक प्रयासों का समर्थन किया। तेहरान की यात्रा के दौरान उन्होंने अराघची और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान से मुलाकात की। रूस ने ईरान के साथ अपने राजनीतिक और आर्थिक संबंध जारी रखने की प्रतिबद्धता जताई है। लावरोव ने कहा कि मॉस्को दोनों देशों के बीच सहयोग और विभिन्न परियोजनाओं को आगे बढ़ाने के लिए तैयार है।

    रूस और ईरान का कहना है कि क्षेत्रीय विवादों को बातचीत के जरिए सुलझाने के प्रयास जारी रहने चाहिए। दोनों देशों के बीच चर्चा में ऊर्जा, परिवहन और आर्थिक सहयोग से जुड़े विषय भी शामिल रहे। रूस ने क्षेत्रीय संकट को कम करने और राजनीतिक समाधान की संभावनाओं पर काम करने की इच्छा जताई है। हालांकि, अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत में गतिरोध बने रहने के कारण तनाव कम करने की राह चुनौतीपूर्ण बनी हुई है।

    अराघची के बयान से स्पष्ट है कि ईरान क्षेत्रीय सुरक्षा के मुद्दे पर विदेशी सैन्य मौजूदगी के बजाय पड़ोसी देशों की भागीदारी वाली व्यवस्था का समर्थन कर रहा है। वहीं, रूस भी कूटनीति और बातचीत के जरिए तनाव कम करने की बात कर रहा है। आने वाले समय में होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता इस बात पर निर्भर करेगी कि संबंधित देश आपसी मतभेदों को बातचीत के माध्यम से सुलझाने के लिए किस तरह आगे बढ़ते हैं।

  • ग्वालियर हादसे में 15 मौतों के बाद पीड़ित परिवारों का दर्द, सीएम से 3 से 7 मिनट की मुलाकात, घायलों ने इलाज पर उठाए सवाल

    ग्वालियर हादसे में 15 मौतों के बाद पीड़ित परिवारों का दर्द, सीएम से 3 से 7 मिनट की मुलाकात, घायलों ने इलाज पर उठाए सवाल


    ग्वालियर । ग्वालियर के शीतला माता मंदिर के प्रवेश द्वार पर हुए भीषण हादसे में 15 लोगों की मौत के बाद पीड़ित परिवारों में नाराजगी बनी हुई है। हादसे में अपनों को खोने वाले परिजन प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल उठा रहे हैं। इसी बीच मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के ग्वालियर दौरे से पहले पुलिस और प्रशासन के अधिकारी सक्रिय हो गए। जिला प्रशासन पुलिस और नगर निगम के अधिकारियों ने अस्पताल से लेकर पीड़ित परिवारों के घरों तक व्यवस्थाओं का जायजा लिया। कलेक्टर रुचिका चौहान और एसपी धर्मवीर सिंह यादव भी मुख्यमंत्री के पहुंचने से पहले संबंधित स्थानों पर पहुंचे और तैयारियों की जानकारी ली।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया और प्रभारी मंत्री तुलसी सिलावट के साथ पीड़ित परिवारों से मिलने पहुंचे। हालांकि कई परिवारों के साथ उनकी मुलाकात तीन से सात मिनट तक ही रही। इस दौरान परिजनों ने नौकरी आवास और आर्थिक सहायता की मांग रखी। लेकिन श्रद्धालुओं की भीड़ के बीच ट्रक मंदिर तक कैसे पहुंचा और सुरक्षा व्यवस्था में कहां चूक हुई जैसे सवाल इन मुलाकातों में प्रमुखता से सामने नहीं आए।

    मुख्यमंत्री के ट्रॉमा सेंटर पहुंचने के दौरान बाहर मौजूद कुछ घायलों और उनके परिजनों ने इलाज को लेकर नाराजगी जताई। शिवम ने आरोप लगाया कि ट्रॉमा सेंटर में उचित इलाज नहीं मिलने के कारण उन्हें निजी अस्पताल जाना पड़ा जहां 15 हजार रुपये खर्च हुए। उनका कहना था कि प्रशासन मुफ्त इलाज की बात कर रहा है लेकिन खर्च की गई रकम वापस नहीं मिली। वहीं कोमल ने शिकायत की कि घायल कल्पना परिहार को 24 घंटे तक जरूरी पट्टा नहीं मिला और उन्हें बाजार से 15 हजार रुपये में खरीदना पड़ा। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री से मुलाकात कराने का भरोसा दिया गया था लेकिन ऐसा नहीं हुआ। शैलेंद्र शर्मा ने दावा किया कि मुख्यमंत्री के आने से पहले अस्पताल में पंखे लगाए गए जाले हटाए गए और बेडशीट बदली गईं। उन्होंने मुख्यमंत्री से नहीं मिल पाने की भी शिकायत की।

    महेशपुरा में मुख्यमंत्री शाम करीब 4 बजकर 57 मिनट पर पहुंचे। इससे पहले स्थानीय नेता वीरेंद्र गुर्जर मृतक दिव्यांश कुशवाह के भाई शुभम को समझाते नजर आए। मुख्यमंत्री के काफिले के आने की सूचना मिलने पर उन्होंने लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की। इसके बाद मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्री सिंधिया ने दिव्यांश के पिता अशोक कुशवाह और उनके बेटे शुभम को सांत्वना दी। बातचीत के दौरान मुख्यमंत्री ने परिवार के मकान और आवास योजना के बारे में पूछा। अशोक कुशवाह ने बताया कि उनका एक कमरे का अपना मकान है और उन्होंने शुभम के लिए नौकरी की मांग रखी। करीब तीन मिनट में यह मुलाकात समाप्त हो गई।

    इसके बाद मुख्यमंत्री महलगांव में मृतक सतेंद्र गुर्जर के घर पहुंचे। वहां उनके पिता जगदीश गुर्जर भावुक हो गए। सतेंद्र के ताऊ रामचित्र ने परिवार के एक सदस्य को नौकरी देने की मांग रखी। पार्षद गिर्राज कंसाना के अनुसार मुख्यमंत्री ने जरूरी दस्तावेज भेजने को कहा और आर्थिक सहायता का चेक देकर आगे बढ़ गए। गल्ला कोठार में मुख्यमंत्री ने मृतक प्रिंस और निकेश के परिवारों से मुलाकात की। परिजनों ने कमाने वाले बेटों की मौत से आजीविका पर आए संकट की जानकारी दी और नौकरी तथा आवास की मांग रखी।

    गदाईपुरा के शिवनगर में मुख्यमंत्री ने मृतक हेमंत राठौर पवन राठौर और लव अमन तथा अशोक त्यागी के परिजनों से भी मुलाकात की। यहां कांग्रेस नेता सुनील शर्मा और स्थानीय लोगों ने ज्ञापन सौंपकर मृतकों के परिवारों को 25-25 लाख रुपये घायलों को 10-10 लाख रुपये और प्रत्येक प्रभावित परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने की मांग की। हादसे के बाद परिवारों के सामने आर्थिक सुरक्षा और भविष्य की चिंता बनी हुई है। वहीं ट्रक मंदिर परिसर तक कैसे पहुंचा और सुरक्षा व्यवस्था की जिम्मेदारी किसकी थी इन सवालों का जवाब हादसे की जांच के लिहाज से अहम बना हुआ है।

  • चुनाव आयोग के समर्थन में 27 देशों के 400 से अधिक भारतवंशी, विपक्षी प्रदर्शनों पर जताई चिंता

    चुनाव आयोग के समर्थन में 27 देशों के 400 से अधिक भारतवंशी, विपक्षी प्रदर्शनों पर जताई चिंता

    नई दिल्ली । चुनाव आयोग के खिलाफ विपक्षी दलों की ओर से किए जा रहे प्रदर्शनों के बीच दुनिया के 27 देशों में रहने वाले 400 से अधिक भारतीय मूल के छात्रों, शोधकर्ताओं और पूर्व विद्यार्थियों ने आयोग के समर्थन में संयुक्त बयान जारी किया है। ‘भारत को अराजकता से बचाएं’ शीर्षक वाले इस बयान में प्रदर्शन के तरीकों पर चिंता जताते हुए कहा गया है कि ऐसे कदम संवैधानिक संस्थाओं के प्रति जनता के विश्वास को कमजोर कर सकते हैं। बयान पर हस्ताक्षर करने वालों ने लोकतांत्रिक व्यवस्था की रक्षा के लिए संवैधानिक प्रक्रियाओं और संस्थाओं का सम्मान करने की आवश्यकता बताई है।

    संयुक्त बयान में बाबासाहब आंबेडकर के विचारों का उल्लेख करते हुए कहा गया कि लोकतंत्र में मतभेदों का समाधान संवैधानिक तरीकों से किया जाना चाहिए। हस्ताक्षरकर्ताओं ने सड़कों पर होने वाले अराजकतापूर्ण प्रदर्शनों की आलोचना की और कहा कि लोकतंत्र को बचाने के नाम पर ऐसी गतिविधियां नहीं होनी चाहिए, जिनसे संवैधानिक लोकतांत्रिक व्यवस्था कमजोर पड़े। उनके मुताबिक, लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं और संस्थाओं पर भरोसा बनाए रखना देश के भविष्य के लिए महत्वपूर्ण है।

    बयान में आरोप लगाया गया है कि भारतीय लोकतंत्र को लेकर संदेह पैदा करने की अनुचित कोशिश की जा रही है। इसमें अदालतों में विचाराधीन मामलों को इस उद्देश्य के लिए इस्तेमाल किए जाने और फिर प्रदर्शनों के माध्यम से इस मुद्दे को आगे बढ़ाने पर आपत्ति जताई गई है। हस्ताक्षरकर्ताओं ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था की रक्षा का दावा करने वालों को यह भी सुनिश्चित करना चाहिए कि उनके तरीके संवैधानिक शासन को नुकसान न पहुंचाएं। हालांकि, ये बातें बयान जारी करने वाले समूह के आरोप और विचार हैं।

    यह बयान ऐसे समय आया है, जब विपक्षी दल चुनाव आयोग के कामकाज और चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठा रहे हैं। विपक्षी नेताओं ने चुनावों में गड़बड़ी के आरोप लगाते हुए आयोग के खिलाफ प्रदर्शन किए हैं। इसी बीच कॉकरोच जनता पार्टी ने भी आयोग के विरोध में कई प्रदर्शन किए हैं। इन आंदोलनों की अगुवाई अभिजीत दीपके कर रहे हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इस सिलसिले में उन्हें दो बार हिरासत में भी लिया गया है।

    संयुक्त बयान में हस्ताक्षरकर्ताओं ने मौजूदा राजनीतिक माहौल पर दुख और हैरानी जताई है। उनका कहना है कि कुछ हलकों में चुनाव परिणामों को स्वीकार नहीं करने, संवैधानिक संस्थाओं पर लगातार सवाल उठाने और संसद के बजाय सड़कों पर आंदोलन को प्राथमिकता देने की प्रवृत्ति दिखाई दे रही है। बयान में कहा गया कि दुनिया के अलग-अलग देशों में रहने वाले भारतीय मूल के लोगों के रूप में वे भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था और उसके भविष्य को लेकर चिंतित हैं।

    हस्ताक्षर करने वाले लोग अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, जर्मनी, फ्रांस, जापान और सिंगापुर समेत 27 देशों के विश्वविद्यालयों से जुड़े हैं। इनमें मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (एमआईटी), हार्वर्ड विश्वविद्यालय, ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय, कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय, स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय और लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स जैसे संस्थानों से जुड़े छात्र, शोधकर्ता और पूर्व विद्यार्थी शामिल हैं।

    बयान में एक महत्वपूर्ण स्पष्टीकरण भी दिया गया है कि हस्ताक्षरकर्ताओं का इन विश्वविद्यालयों से जुड़ा होना संबंधित संस्थानों की आधिकारिक सहमति या समर्थन का प्रमाण नहीं है। यानी यह बयान इसमें हस्ताक्षर करने वाले व्यक्तियों का सामूहिक रुख है, न कि इन विश्वविद्यालयों की ओर से जारी आधिकारिक वक्तव्य। इस तरह चुनाव आयोग के समर्थन में सामने आए इस बयान ने चुनाव प्रक्रिया, संवैधानिक संस्थाओं और विरोध प्रदर्शनों के तरीकों को लेकर जारी बहस में एक नया पक्ष सामने रखा है।

  • ग्वालियर के हजार बिस्तर अस्पताल में बड़ी लापरवाही, फायर हाइड्रेंट के उपकरण गायब, ICU और नवजातों की सुरक्षा पर सवाल

    ग्वालियर के हजार बिस्तर अस्पताल में बड़ी लापरवाही, फायर हाइड्रेंट के उपकरण गायब, ICU और नवजातों की सुरक्षा पर सवाल


    ग्वालियर । मध्य प्रदेश के ग्वालियर में करीब 400 करोड़ रुपये की लागत से बने हजार बिस्तर अस्पताल की अग्नि सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। अस्पताल में आग बुझाने के लिए लगाए गए फायर हाइड्रेंट सिस्टम के कई जरूरी उपकरण गायब मिले हैं। इनमें पाइप नोजल और होज रील कपलिंग जैसे सामान शामिल हैं। हैरानी की बात यह है कि इन उपकरणों के गायब होने की जानकारी अस्पताल प्रबंधन को सिस्टम की जांच के दौरान मिली। जिस अस्पताल में रोजाना सैकड़ों मरीज भर्ती रहते हैं वहां आग जैसी आपात स्थिति से निपटने की तैयारी पर सवाल उठना स्वाभाविक है।

    हजार बिस्तर अस्पताल में प्रतिदिन औसतन 200 से 300 मरीज भर्ती रहते हैं। इनमें आईसीयू में उपचार करा रहे गंभीर मरीज नवजात शिशु उनकी माताएं और बुजुर्ग भी शामिल हैं। ऐसे मरीजों को आग लगने की स्थिति में सुरक्षित स्थान पर पहुंचाना आसान नहीं होता। बहुमंजिला अस्पताल में मरीजों को बाहर निकालने के लिए पर्याप्त समय और प्रशिक्षित कर्मचारियों के साथ काम करने वाली अग्निशमन व्यवस्था जरूरी होती है। ऐसे में फायर हाइड्रेंट सिस्टम के अहम उपकरणों का गायब होना मरीजों और उनके परिजनों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ाता है।

    अस्पताल प्रबंधन के अनुसार नई बिल्डिंग हैंडओवर होने के बाद फायर सेफ्टी के कुछ उपकरण चोरी होने की बात सामने आई है। हालांकि उपकरण कब चोरी हुए और कुल कितने सामान गायब हैं इसकी स्पष्ट जानकारी उपलब्ध नहीं है। इस मामले ने अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था और नियमित निगरानी पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। अगर फायर सिस्टम के उपकरण लंबे समय से गायब थे तो समय रहते उनकी कमी का पता क्यों नहीं चला यह भी जांच का विषय है। अस्पताल जैसे संवेदनशील स्थान पर सुरक्षा उपकरणों का नियमित भौतिक सत्यापन बेहद जरूरी है ताकि किसी भी कमी को आपात स्थिति आने से पहले दूर किया जा सके।

    मौके पर लगे फायर बॉक्स की हालत भी चिंता बढ़ाने वाली बताई गई है। इसके अलावा अस्पताल में लगे कुछ अग्निशमन सिलेंडरों पर एक्सपायरी डेट स्पष्ट रूप से नहीं मिली। ऐसे में केवल उपकरणों की मौजूदगी ही पर्याप्त नहीं है बल्कि उनका सही हालत में होना और जरूरत पड़ने पर काम करना भी जरूरी है। आग लगने की स्थिति में शुरुआती कुछ मिनट बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। यदि जरूरी पाइप और नोजल उपलब्ध नहीं हों तो आग पर शुरुआती स्तर पर काबू पाने में परेशानी हो सकती है। इससे मरीजों को सुरक्षित निकालने और आग को फैलने से रोकने की चुनौती बढ़ सकती है।

    हजार बिस्तर अस्पताल के अधीक्षक डॉ. सुधीर सक्सेना ने बताया कि अज्ञात चोर फायर सेफ्टी के उपकरण चुरा ले गए हैं। नए उपकरण खरीदने के लिए वरिष्ठ कार्यालय को प्रस्ताव भेजा गया है। उन्होंने कहा कि आग लगने की स्थिति से निपटने के लिए सिस्टम दुरुस्त है। उपकरणों की जांच के लिए निजी एजेंसियों से बातचीत चल रही है और जल्द ही मॉक ड्रिल भी कराई जाएगी। हालांकि फायर हाइड्रेंट के कुछ जरूरी उपकरणों के गायब मिलने के बाद पूरी व्यवस्था की वास्तविक स्थिति का परीक्षण महत्वपूर्ण हो गया है।

    इस घटना ने अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था की निगरानी को लेकर कई सवाल खड़े किए हैं। अस्पताल में सुरक्षा गार्ड और जिम्मेदार अधिकारी तैनात होने के बावजूद उपकरण कैसे गायब हुए और नियमित जांच में इसका पता क्यों नहीं चला इस पर जवाबदेही तय करना जरूरी है। नए उपकरण खरीदने का प्रस्ताव भेजना एक कदम हो सकता है लेकिन इसके साथ पूरे फायर सिस्टम का निरीक्षण करना सभी उपकरणों की कार्यक्षमता जांचना और कर्मचारियों को आपात स्थिति से निपटने का प्रशिक्षण देना भी आवश्यक है। अस्पताल में भर्ती मरीज अपनी सुरक्षा के लिए व्यवस्था पर निर्भर रहते हैं। इसलिए अग्नि सुरक्षा में किसी भी कमी को जल्द दूर करना और भविष्य में ऐसी घटना रोकने के लिए निगरानी मजबूत करना बेहद जरूरी है।

  • यमन में हूतियों का सैन्य शिविर पर मिसाइल हमला, 53 सैनिकों की मौत और 200 से अधिक घायल

    यमन में हूतियों का सैन्य शिविर पर मिसाइल हमला, 53 सैनिकों की मौत और 200 से अधिक घायल


    नई दिल्ली ।
    यमन में हूती विद्रोहियों और सरकार समर्थक बलों के बीच संघर्ष एक बार फिर तेज हो गया है। सोमवार को दक्षिणी यमन के शबवा प्रांत स्थित अल-अलम सैन्य शिविर पर बैलिस्टिक मिसाइलों से हमला किया गया। इस हमले में कम से कम 53 सैनिकों की मौत हो गई, जबकि 200 से अधिक जवान घायल बताए गए हैं। मृतकों में ज्यादातर नए भर्ती हुए सैनिक शामिल हैं। यह हमला ऐसे समय हुआ है, जब देश में लंबे समय से जारी गृहयुद्ध और क्षेत्रीय तनाव के कारण सुरक्षा स्थिति पहले से ही चुनौतीपूर्ण बनी हुई है।

    यमन की सेना के प्रवक्ता कर्नल माजेद अल-नजिली के अनुसार, ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने पुलिस और सुरक्षा बलों के प्रशिक्षण केंद्र को निशाना बनाते हुए तीन बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं। हालांकि, उन्होंने हताहतों की संख्या की पुष्टि नहीं की। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त यमन सरकार के दो सैन्य अधिकारियों ने हमले में कम से कम 53 सैनिकों की मौत और 200 से अधिक जवानों के घायल होने की जानकारी दी। हूती विद्रोहियों के नियंत्रण वाली समाचार एजेंसी ने भी हमले में कई लोगों के मारे जाने और घायल होने की बात कही, लेकिन मृतकों और घायलों की संख्या नहीं बताई।

    अल-अलम सैन्य शिविर शबवा प्रांत की राजधानी अटक के उत्तर में जर्दान जिले में स्थित है। पहले इस शिविर का इस्तेमाल संयुक्त अरब अमीरात के समर्थन वाले एक सशस्त्र समूह द्वारा किया जाता था। यह इलाका सरकार के नियंत्रण वाले मारीब प्रांत तक पहुंचने वाले मार्ग पर स्थित है। इस कारण सैन्य और जरूरी आपूर्ति को सरकारी बलों तक पहुंचाने में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका है। एक सैन्य अधिकारी के मुताबिक, हमले में निशाना बनाए गए जवान रैपिड इंटरवेंशन नाम से गठित नई सुरक्षा इकाई का हिस्सा थे। इस इकाई को क्षेत्र की सुरक्षा और रक्षा की जिम्मेदारी सौंपी गई थी।

    यमन में संघर्ष बढ़ने के पीछे कई क्षेत्रीय और आंतरिक कारण बताए जा रहे हैं। हूती विद्रोहियों और सऊदी अरब समर्थित सरकारी बलों के बीच पिछले कई महीनों से टकराव तेज हुआ है। ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव का असर भी क्षेत्र की परिस्थितियों पर पड़ा है। वर्ष 2022 में हुआ संघर्षविराम यमन के गृहयुद्ध में लड़ाई को काफी हद तक रोकने में सफल रहा था, लेकिन हालिया घटनाओं के बीच उस व्यवस्था की प्रभावशीलता कमजोर पड़ती दिखाई दे रही है।

    इस बीच उत्तरी यमन के हूती नियंत्रित सादा प्रांत में रविवार को हवाई हमला हुआ। हूती प्रशासन के स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक, इस हमले में कम से कम नौ लोगों की मौत हुई, जिनमें पांच बच्चे और दो महिलाएं शामिल थीं। हूतियों ने हमले के लिए सऊदी अरब के नेतृत्व वाले बलों को जिम्मेदार ठहराया है। सप्ताहांत के दौरान हुए कई हमलों में 30 से अधिक लोगों के मारे जाने या घायल होने का दावा भी किया गया। हालांकि, सऊदी अरब की ओर से इन आरोपों पर तत्काल कोई टिप्पणी नहीं आई।

    सऊदी अरब और लाल सागर के आसपास भी तनाव बढ़ने की खबरें हैं। हूती विद्रोहियों ने हाल के हफ्तों में सऊदी अरब पर हमले दोबारा शुरू किए हैं। उनका आरोप है कि सऊदी अरब यमन की सरकार का समर्थन कर रहा है। इन हमलों में सऊदी हवाई अड्डों, तेल ठिकानों और सैन्य सुविधाओं को निशाना बनाए जाने की जानकारी दी गई है। उपलब्ध विवरण के अनुसार, इन घटनाओं से हजारों उड़ानें प्रभावित हुई हैं और 19 लोगों की मौत हुई है। सऊदी तेल कंपनी अरामको के मुख्यालय पर भी हमला किए जाने की बात सामने आई है।

    लाल सागर के तट और बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य के आसपास हूतियों की गतिविधियां भी क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही हैं। यह समुद्री मार्ग अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए अहम है और वैश्विक माल परिवहन में इसकी बड़ी भूमिका है। इस रणनीतिक क्षेत्र पर नियंत्रण को लेकर तनाव के बीच सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन ने इसी महीने सैन्य अभियान शुरू किया है। इसका उद्देश्य क्षेत्र से हूती विद्रोहियों को पीछे हटाना और वहां दोबारा नियंत्रण स्थापित करना बताया गया है। हालिया मिसाइल हमले ने यमन में संघर्ष के और गंभीर होने की आशंकाओं को बढ़ा दिया है।