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  • गणेश जी को प्रसन्न करना है तो जरूर करें ये उपाय, घर में आएगी सकारात्मक ऊर्जा और विघ्न होंगे दूर

    गणेश जी को प्रसन्न करना है तो जरूर करें ये उपाय, घर में आएगी सकारात्मक ऊर्जा और विघ्न होंगे दूर


    नई दिल्ली। हिंदू धर्म में भगवान गणेश को प्रथम पूजनीय देवता माना जाता है। किसी भी शुभ काम की शुरुआत से पहले गणेश जी की पूजा करने की परंपरा है। धार्मिक मान्यता है कि भगवान गणेश की आराधना करने से जीवन में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं और व्यक्ति को बुद्धि विवेक तथा सफलता का आशीर्वाद प्राप्त होता है। यही वजह है कि भक्त बुधवार के दिन विशेष रूप से गणेश जी की पूजा करते हैं। यदि आप भी गणपति बप्पा को प्रसन्न करना चाहते हैं तो पूजा के साथ कुछ आसान धार्मिक उपाय किए जा सकते हैं।

    गणेश जी की पूजा के लिए सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ कपड़े पहनकर पूजा स्थान की सफाई करें। इसके बाद भगवान गणेश की प्रतिमा या तस्वीर के सामने दीपक जलाएं और श्रद्धा के साथ उनका ध्यान करें। पूजा की शुरुआत गणेश जी के स्मरण से करना शुभ माना जाता है। भगवान को लाल या पीले फूल अर्पित किए जा सकते हैं। इसके साथ दूर्वा चढ़ाने की विशेष परंपरा है। धार्मिक मान्यता के अनुसार गणेश जी को दूर्वा बेहद प्रिय है और पूजा में इसे अर्पित करने से गणपति बप्पा की कृपा प्राप्त होने की मान्यता है।

    गणेश जी को प्रसन्न करने के लिए मोदक या लड्डू का भोग लगाना भी शुभ माना जाता है। अगर मोदक उपलब्ध न हो तो अपनी श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार किसी सात्विक मिठाई का भोग लगाया जा सकता है। पूजा के दौरान भगवान गणेश से अपने मन की बात कहें और जीवन की परेशानियों को दूर करने की प्रार्थना करें। माना जाता है कि सच्चे मन से की गई प्रार्थना व्यक्ति के मन में सकारात्मकता और आत्मविश्वास बढ़ाती है।

    भगवान गणेश को सिंदूर अर्पित करने की भी धार्मिक परंपरा है। पूजा के दौरान सिंदूर चढ़ाकर गणेश जी का ध्यान किया जा सकता है। इसके अलावा गणेश मंत्र का जाप करना भी शुभ माना जाता है। गणपति बप्पा का स्मरण करते हुए ओम गं गणपतये नमः मंत्र का जाप किया जा सकता है। नियमित रूप से मंत्र जाप करने से मन को एकाग्र करने और सकारात्मक सोच विकसित करने में मदद मिलने की मान्यता है।

    बुधवार के दिन गणेश जी की पूजा का विशेष महत्व बताया गया है। इस दिन हरी मूंग का दान करना या जरूरतमंद व्यक्ति को भोजन कराना भी शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार बुधवार का संबंध बुध ग्रह से है और बुध को बुद्धि तथा वाणी का कारक माना जाता है। इसलिए इस दिन गणेश जी की पूजा करने से बुद्धि और विवेक से जुड़े शुभ परिणाम मिलने की मान्यता है।

    गणेश जी को प्रसन्न करने के लिए केवल पूजा करना ही पर्याप्त नहीं माना जाता बल्कि व्यवहार में भी सकारात्मकता रखना जरूरी बताया गया है। किसी जरूरतमंद की मदद करना गरीब व्यक्ति को भोजन कराना और अपनी क्षमता के अनुसार दान करना शुभ माना जाता है। इसके साथ ही झूठ बोलने अपशब्द कहने किसी का अपमान करने और क्रोध करने से बचना चाहिए। भगवान गणेश को विवेक और सद्बुद्धि का देवता माना जाता है इसलिए अच्छे आचरण को भी उनकी कृपा से जोड़कर देखा जाता है।

    घर में गणेश जी की पूजा करते समय साफ सफाई का विशेष ध्यान रखें। पूजा स्थान पर नियमित रूप से दीपक जलाएं और श्रद्धा के साथ आरती करें। किसी भी उपाय को दिखावे के बजाय विश्वास और सकारात्मक भावना के साथ करना बेहतर माना जाता है।

    कुल मिलाकर भगवान गणेश को प्रसन्न करने के लिए दूर्वा अर्पित करना मोदक का भोग लगाना सिंदूर चढ़ाना मंत्र जाप करना और जरूरतमंदों की मदद करना जैसे उपाय धार्मिक मान्यताओं में शुभ बताए गए हैं। मान्यता है कि इससे जीवन में सकारात्मक ऊर्जा आती है और बाधाओं से मुकाबला करने का आत्मविश्वास बढ़ता है। हालांकि इन उपायों से जुड़े लाभ धार्मिक और ज्योतिषीय मान्यताओं पर आधारित हैं और इन्हें वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित उपाय नहीं माना जाता।

  • मिसाइल हमले के आरोपों पर ईरान का यूएई को जवाब, तेहरान बोला- पहले सबूत दें, फिर लगाएं इल्जाम

    मिसाइल हमले के आरोपों पर ईरान का यूएई को जवाब, तेहरान बोला- पहले सबूत दें, फिर लगाएं इल्जाम


    नई दिल्ली। ईरान और संयुक्त अरब अमीरात के बीच तनाव एक बार फिर गंभीर मोड़ पर पहुंचता दिखाई दे रहा है। यूएई की ओर से ईरान पर दो बैलिस्टिक मिसाइल दागने का आरोप लगाए जाने के बाद तेहरान ने इन दावों को सिरे से खारिज कर दिया है। ईरान के विदेश मंत्रालय ने आरोपों को बेबुनियाद बताते हुए कहा है कि बिना ठोस सबूत के इस तरह के गंभीर आरोप लगाने से क्षेत्रीय तनाव और बढ़ सकता है। ईरान ने यह भी संकेत दिया है कि मिसाइल घटना के पीछे किसी फॉल्स फ्लैग ऑपरेशन की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

    यूएई के रक्षा मंत्रालय के अनुसार ईरान से दो बैलिस्टिक मिसाइलें दागी गई थीं। दोनों मिसाइलें समुद्र में गिरीं। इनमें से एक यूएई के क्षेत्रीय जल क्षेत्र में जबकि दूसरी उसके बाहर गिरी। यूएई का दावा है कि मिसाइलों का निशाना समुद्री यातायात हो सकता था। हालांकि इस घटना में किसी व्यक्ति के घायल होने या किसी तरह के नुकसान की जानकारी सामने नहीं आई है। यूएई प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे अफवाहों और गलत सूचनाओं पर भरोसा न करें और सुरक्षा से जुड़ी जानकारी के लिए केवल आधिकारिक स्रोतों पर विश्वास करें।

    मिसाइल घटना के बाद यूएई के गृह मंत्रालय ने लोगों के मोबाइल फोन पर सुरक्षा अलर्ट भी भेजा। शुरुआती खतरे की चेतावनी के बाद प्रशासन ने स्थिति को सुरक्षित बताया और लोगों से सामान्य गतिविधियां फिर शुरू करने की अपील की। दूसरी तरफ ईरान ने यूएई के आरोपों पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले ठोस और विश्वसनीय सबूत सामने रखे जाने चाहिए। तेहरान ने चेतावनी दी कि बिना प्रमाण के आरोप क्षेत्र में किसी बड़े टकराव की वजह बन सकते हैं।

    इस पूरे घटनाक्रम के बीच यूएई ने ईरान के साथ अपने संबंधों को लेकर बड़ा फैसला भी लिया है। यूएई के विदेश मंत्रालय की संचार निदेशक अफरा अल हमेली के मुताबिक क्षेत्रीय परिस्थितियों को देखते हुए ईरान के साथ सभी व्यापारिक वाणिज्यिक और वित्तीय लेनदेन अगले आदेश तक निलंबित कर दिए गए हैं। इस फैसले से दोनों देशों के बीच पहले से तनावपूर्ण संबंधों पर और असर पड़ने की आशंका है।

    मिसाइल विवाद ऐसे समय सामने आया है जब होर्मुज स्ट्रेट को लेकर क्षेत्रीय तनाव पहले से बेहद संवेदनशील बना हुआ है। यह समुद्री मार्ग खाड़ी क्षेत्र के लिए रणनीतिक और आर्थिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण है। यहां किसी भी सैन्य गतिविधि या सुरक्षा संकट का असर केवल ईरान और यूएई तक सीमित नहीं रह सकता बल्कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति पर भी पड़ सकता है।

    फिलहाल ईरान जहां मिसाइल हमले के आरोपों को पूरी तरह नकार रहा है वहीं यूएई अपने सुरक्षा आकलन के आधार पर घटना को गंभीर मान रहा है। दोनों देशों के बीच बढ़ते आरोप प्रत्यारोप ने खाड़ी क्षेत्र में नई चिंता पैदा कर दी है। आने वाले दिनों में इस घटना को लेकर और तथ्य सामने आने के साथ ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि मिसाइलें वास्तव में कहां से दागी गई थीं और उनका वास्तविक उद्देश्य क्या था। फिलहाल इतना तय है कि इस विवाद ने ईरान और यूएई के बीच तनाव को और गहरा कर दिया है और होर्मुज क्षेत्र में किसी भी नए घटनाक्रम पर पूरी दुनिया की नजर बनी हुई है।

  • ऑस्ट्रेलिया के पूर्व क्रिकेटर डेविड वॉर्नर को सजा, कोर्ट ने लगाया जुर्माना; कार में इंटरलॉक डिवाइस लगाना होगा

    ऑस्ट्रेलिया के पूर्व क्रिकेटर डेविड वॉर्नर को सजा, कोर्ट ने लगाया जुर्माना; कार में इंटरलॉक डिवाइस लगाना होगा


    नई दिल्ली। ऑस्ट्रेलिया के पूर्व सलामी बल्लेबाज डेविड वॉर्नर की मुश्किलें बढ़ गई हैं। शराब पीकर गाड़ी चलाने के मामले में सिडनी की अदालत ने उन्हें दोषी करार दिया है। अदालत ने वॉर्नर पर 1500 ऑस्ट्रेलियाई डॉलर का जुर्माना लगाया है। इसके साथ ही अब उन्हें दोबारा वाहन चलाने के लिए इंटरलॉक डिवाइस से जुड़ी शर्तों का पालन करना होगा। इस मामले में अदालत ने यह भी माना कि घटना के समय वाहन में बच्चे मौजूद थे इसलिए मामला और गंभीर हो गया था।

    यह पूरा मामला 5 अप्रैल 2026 का है। ईस्टर संडे के दिन डेविड वॉर्नर एक वाहन चला रहे थे और सिडनी में रैंडम ब्रेथ-टेस्टिंग साइट के पास पहुंचने से पहले उन्होंने गाड़ी रोक दी थी। इसी दौरान पुलिस की नजर उन पर गई। जांच में उनके शरीर में अल्कोहल की मात्रा कानूनी सीमा से दोगुने से भी ज्यादा पाई गई। इसके बाद उन पर मिड-रेंज ड्रिंक-ड्राइविंग का आरोप लगाया गया।

    मामले की सुनवाई के दौरान वॉर्नर ने पिछले महीने अदालत में ड्रिंक-ड्राइविंग के आरोप को स्वीकार कर लिया था। इसके बाद अदालत ने अंतिम सजा के लिए 18 अगस्त की तारीख तय की थी। सुनवाई के दौरान अदालत के सामने घटना से जुड़े कई पहलू रखे गए और अंत में जज क्लेयर फॉर्नन ने वॉर्नर को दोषी मानते हुए जुर्माने की सजा सुनाई।

    इस मामले में एक अहम बात यह भी सामने आई कि रैंडम ब्रेथ टेस्टिंग साइट के पास पहुंचने से पहले वॉर्नर ने कथित तौर पर वाहन में मौजूद एक यात्री के साथ सीट बदलने की कोशिश की थी। पुलिस जांच के बाद उन पर शराब पीकर गाड़ी चलाने का मामला दर्ज किया गया। अदालत ने पूरे मामले को गंभीरता से लिया और खास तौर पर इस बात को ध्यान में रखा कि घटना के समय कार में बच्चे भी मौजूद थे।

    वॉर्नर के वकील अवैस अहमद ने अदालत में उनका पक्ष रखते हुए कहा कि इस मामले की मीडिया कवरेज के कारण वॉर्नर को पहले ही काफी सार्वजनिक दबाव और नुकसान का सामना करना पड़ा है। बचाव पक्ष ने यह भी दलील दी कि इस घटना का असर उनके पेशेवर जीवन और भविष्य के व्यावसायिक अवसरों पर पड़ सकता है। वॉर्नर अभी अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास ले चुके हैं लेकिन दुनिया भर की टी20 फ्रेंचाइजी लीग में खेलने के अवसर उनके करियर का हिस्सा रहे हैं।

    हालांकि अदालत ने मीडिया कवरेज और सोशल मीडिया टिप्पणियों को ध्यान में रखा लेकिन जज ने साफ किया कि सजा तय करने में सबसे महत्वपूर्ण उद्देश्य लोगों को शराब पीकर गाड़ी चलाने से रोकना है। अदालत के मुताबिक यह केवल किसी एक व्यक्ति की गलती का मामला नहीं है बल्कि सड़क सुरक्षा से जुड़ा गंभीर विषय है। कार में बच्चों की मौजूदगी ने इस मामले की गंभीरता को और बढ़ा दिया।

    अब वॉर्नर को वाहन चलाने के लिए इंटरलॉक लाइसेंस से जुड़ी प्रक्रिया पूरी करनी होगी। इसके लिए उनकी कार में एक इंटरलॉक डिवाइस लगाया जाएगा। यह डिवाइस वाहन को तब तक स्टार्ट होने से रोक सकता है जब तक चालक की सांस की जांच में अल्कोहल की मौजूदगी निर्धारित सीमा के भीतर न हो। अदालत की शर्तों के अनुसार वॉर्नर को इस व्यवस्था का पालन करने के बाद ही वाहन चलाने की अनुमति होगी।

    डेविड वॉर्नर ऑस्ट्रेलिया के सबसे चर्चित क्रिकेटरों में शामिल रहे हैं। टेस्ट क्रिकेट में लंबे समय तक टीम के प्रमुख सलामी बल्लेबाज रहे वॉर्नर ने अपने आक्रामक अंदाज से दुनियाभर में पहचान बनाई। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास के बाद भी वह टी20 क्रिकेट और फ्रेंचाइजी लीग से जुड़े रहे हैं। ऐसे में अदालत का यह फैसला उनके व्यक्तिगत जीवन के साथ-साथ भविष्य के पेशेवर अवसरों पर भी असर डाल सकता है।

    इस मामले ने एक बार फिर शराब पीकर वाहन चलाने के खतरों को लेकर बहस छेड़ दी है। अदालत ने अपने फैसले के जरिए यह संदेश भी दिया कि सड़क सुरक्षा के नियम किसी भी व्यक्ति की लोकप्रियता या सार्वजनिक पहचान से अलग हैं। वॉर्नर के लिए अब आगे की राह अदालत द्वारा तय शर्तों का पालन करने और भविष्य में ऐसी स्थिति से बचने की होगी।

  • डोनाल्ड ट्रंप और किंम जोंग उन के बीच इसी साल नवंबर में होने वाली है बड़ी मीटिंग

    डोनाल्ड ट्रंप और किंम जोंग उन के बीच इसी साल नवंबर में होने वाली है बड़ी मीटिंग


    नई दिल्ली।
    अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) और नॉर्थ कोरिया के नेता किम जोंग उन (North Korean leader Kim Jong Un) के बीच एक बार फिर आमने-सामने मुलाकात की तैयारी चल रही है. रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप अपने अधिकारियों से इस साल नवंबर में किम के साथ बैठक कराने को लेकर चर्चा कर रहे हैं. यह मुलाकात ट्रंप की एशिया यात्रा के दौरान चीन के शेनझेन में होने वाली एशिया-पैसिफिक इकोनॉमिक कोऑपरेशन (Asia-Pacific Economic Cooperation) यानी APEC बैठक के आसपास हो सकती है।

    ट्रंप और किम की संभावित मुलाकात ऐसे वक्त हो रही है, जब कोरियाई प्रायद्वीप में अमेरिका, दक्षिण कोरिया और नॉर्थ कोरिया के बीच सैन्य तनाव एक बार फिर चर्चा में है. खास बात यह है कि ट्रंप ने हाल ही में दक्षिण कोरिया के साथ होने वाली संयुक्त सैन्य ड्रिल को सीमित करने का निर्देश दिया है।

    ट्रंप ने सोशल मीडिया पर कहा कि ये सैन्य अभ्यास महंगे हैं और नॉर्थ कोरिया के लिए एक गलत और दुश्मनी के संकेत भेजते हैं. उन्होंने दक्षिण कोरिया की तरफ से ईरान के खिलाफ अमेरिका-इजरायल की जंग में मदद नहीं करने पर भी नाराजगी जताई।


    ट्रंप ने बताया किम जोंग उन मिलने को तैयार, दिया रिस्पॉन्स

    राष्ट्रपति ट्रंप ने सोमवार को यह भी दावा किया कि किम जोंग उन ने उनके हालिया संपर्क का जवाब दिया है. जब उनसे पूछा गया कि किम ने उनकी बातचीत की अपील का जवाब क्यों नहीं दिया, तो ट्रंप ने कहा, “आपको कैसे पता कि उसने जवाब नहीं दिया?” इसके बाद उन्होंने कहा, “हां, उसने जवाब दिया है.”

    राष्ट्रपति ट्रंप ने इस बातचीत को “बहुत सकारात्मक” बताया, हालांकि उन्होंने इसकी कोई जानकारी साझा नहीं की. नॉर्थ कोरिया की तरफ से तत्काल कोई प्रतिक्रिया नहीं आई. उधर, दक्षिण कोरिया ने साफ किया है कि अमेरिका के साथ सैन्य अभ्यास का मकसद नॉर्थ कोरिया पर हमला करना नहीं है.

    पहले कब-कब मिले ट्रंप-किम?
    अगर ट्रंप और किम जोंग उन की प्रस्तावित मुलाकात होती है, तो यह ट्रंप के पहले कार्यकाल के बाद दोनों नेताओं की पहली आमने-सामने बैठक होगी. इससे पहले दोनों नेताओं के बीच तीन अहम मुलाकातें हो चुकी हैं:

    – जून 2018, सिंगापुर समिट: ट्रंप और किम की यह पहली ऐतिहासिक मुलाकात थी. किसी मौजूदा अमेरिकी राष्ट्रपति और नॉर्थ कोरिया के नेता के बीच पहली बार आमने-सामने बातचीत हुई. दोनों देशों ने कोरियाई प्रायद्वीप के परमाणु निरस्त्रीकरण की दिशा में काम करने पर सहमति जताई.

    – फरवरी 2019, हनोई समिट: दोनों नेताओं की दूसरी औपचारिक बैठक वियतनाम के हनोई में हुई. हालांकि, परमाणु निरस्त्रीकरण और नॉर्थ कोरिया पर लगे प्रतिबंधों में राहत को लेकर दोनों देशों के बीच सहमति नहीं बन सकी और बैठक बिना किसी समझौते के खत्म हो गई.

    – जून 2019, DMZ मुलाकात: ट्रंप और किम ने कोरियाई सीमा पर स्थित डिमिलिटराइज्ड जोन यानी DMZ में अचानक मुलाकात की. इस दौरान ट्रंप नॉर्थ कोरिया की सीमा में कुछ कदम अंदर जाने वाले पहले मौजूदा अमेरिकी राष्ट्रपति बने. यह मुलाकात काफी प्रतीकात्मक रही और दोनों नेताओं के बीच व्यक्तिगत कूटनीति की एक और मिसाल बनी.

  • भारत की तर्ज पर अमेरिका में भी SIR ….. वोटर लिस्ट की सफाई में जुटे ट्रंप, अब तक मिले 24 हजार फर्जी मतदाता

    भारत की तर्ज पर अमेरिका में भी SIR ….. वोटर लिस्ट की सफाई में जुटे ट्रंप, अब तक मिले 24 हजार फर्जी मतदाता


    वाशिंगटन।
    अमेरिका (America) में वोटर लिस्ट (Voter List) की शुद्धता को लेकर बहस एक बार फिर तेज हो गई है. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) ने दावा किया है कि 2020 के वोटर रिकॉर्ड और नागरिकता संबंधी रिकॉर्ड के मिलान किया गया है. इस दावे के मुताबिक, 12.8 करोड़ मतदाताओं के शुरुआती विश्लेषण में 24 हजार से अधिक गैर-नागरिक मतदाताओं की पहचान हुई है।

    ट्रंप ने इसकी जानकारी अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth पर पोस्ट की और कहा कि अब बचे हुए 3.2 करोड़ मतदाताओं के रिकॉर्ड की भी जांच की जाएगी जिसके बाद यह आंकड़ा और बढ़ सकता है।

    ट्रंप ने लिखा, ‘पहले 12.8 करोड़ मतदाताओं के रिकॉर्ड की जांच में यूएस सेंसस ब्यूरो ने साबित कर दिया है कि 24,000 से अधिक गैर-नागरिकों ने अवैध वोट डाले. अभी अगले 3.2 करोड़ मतदाताओं का विश्लेषण बाकी है और यह आंकड़ा और बढ़ेगा. मैं चुनाव जीता था! हमें हर हाल में ‘सेव अमेरिका एक्ट’ पास करना होगा.।

    व्हाइट हाउस द्वारा जारी किए गए आंकड़ों के अनुसार, जिन गैर-नागरिकों के वोटर रिकॉर्ड मिले हैं उनमें मेक्सिको में जन्मे लोगों की संख्या सबसे अधिक (3,800) बताई गई है. इसके बाद कनाडा (950), फिलीपींस (900), जमैका (900), जर्मनी (700), ब्रिटेन (650), क्यूबा (450), वियतनाम (400), हैती (400) और दक्षिण कोरिया (350)का नंबर आता है. ट्रंप का दावा है कि है कि बाकी बचे 3.2 करोड़ वोटों के विश्लेषण के बाद यह संख्या और बढ़ सकती है।

    ट्रंप ने कहा कि यूएस सेंसस ब्यूरो 2020 के मतदाता रिकॉर्ड की नागरिकता संबंधी रिकॉर्ड के साथ जांच कर रहा है. उन्होंने इसे चुनावी पारदर्शिता से जोड़ते हुए दावा किया कि इससे 2020 के चुनाव को लेकर उनकी पुरानी आपत्तियां पुख्ता होती हैं. हालांकि, ट्रंप के इन दावों को लेकर भी सवार उठ रहे हैं।

    इस पूरे विवाद के बीच ट्रंप ने एक बार फिर ‘सेव अमेरिका एक्ट’ को पारित करने की मांग दोहराई है. इस प्रस्तावित कानून के तहत संघीय चुनावों में मतदान के लिए नागरिकता का प्रमाण और फोटो पहचान पत्र अनिवार्य करने का प्रावधान है. साथ ही राज्यों को मतदाता सूचियों से गैर-नागरिकों के नाम हटाने की दिशा में भी कदम उठाने होंगे।

    भारत के चुनावी मॉडल की कर चुके हैं तारीफ
    दिलचस्प बात यह है कि ट्रंप ने इस मुद्दे पर भारत के चुनावी मॉडल की भी सराहना की थी. उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के साथ हुई बातचीत का जिक्र करते हुए कहा था कि भारत में 64.6 करोड़ मतदाताओं ने मतदान किया और लगभग सभी मतदाताओं के पास वैध फोटो पहचान पत्र था. ट्रंप ने भारत की मतदाता पहचान प्रणाली को अमेरिका के लिए एक उदाहरण बताया।

    हालांकि, इस मुद्दे पर अमेरिका में राजनीतिक मतभेद भी सामने आए हैं. आलोचकों का कहना है कि बड़े पैमाने पर गैर-नागरिकों के मतदान के दावों के समर्थन में पर्याप्त सार्वजनिक साक्ष्य उपलब्ध नहीं हैं, जबकि ट्रंप प्रशासन इसे चुनावी सुधारों के लिए एक महत्वपूर्ण आधार मान रहा है।

  • गॉल में इतिहास रचने उतरेगी श्रीलंका की टीम! 288 रन का टारगेट, सफल हुआ रन चेज तो बनेगा बड़ा रिकॉर्ड

    गॉल में इतिहास रचने उतरेगी श्रीलंका की टीम! 288 रन का टारगेट, सफल हुआ रन चेज तो बनेगा बड़ा रिकॉर्ड


    नई दिल्ली। भारत और श्रीलंका के बीच गॉल में खेले जा रहे पहले टेस्ट का रोमांच अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। टीम इंडिया ने श्रीलंका के सामने जीत के लिए 372 रन का बड़ा लक्ष्य रखा है। चौथे दिन का खेल खत्म होने तक श्रीलंका ने 34 ओवर में 84 रन पर 4 विकेट गंवा दिए हैं। अब मेजबान टीम को टेस्ट जीतने के लिए आखिरी दिन 288 रन और बनाने होंगे। वहीं भारत को जीत के लिए सिर्फ 6 विकेट की जरूरत है। आंकड़े भारत के पक्ष में नजर आ रहे हैं लेकिन श्रीलंका का टेस्ट इतिहास बताता है कि वह 350 रन से ज्यादा के लक्ष्य का सफल पीछा करने का कारनामा पहले भी कर चुका है।

    श्रीलंका के नाम टेस्ट क्रिकेट में सबसे बड़ा सफल रन चेज 388 रन का है। जुलाई 2017 में कोलंबो के आर प्रेमदासा स्टेडियम में जिम्बाब्वे के खिलाफ श्रीलंकाई टीम ने यह ऐतिहासिक जीत दर्ज की थी। उस मुकाबले में जिम्बाब्वे ने पहली पारी में 356 रन बनाए थे जबकि श्रीलंका ने 346 रन बनाए। इसके बाद जिम्बाब्वे ने दूसरी पारी में 377 रन बनाए और श्रीलंका के सामने 388 रन का लक्ष्य रखा। मेजबान टीम ने शानदार बल्लेबाजी करते हुए 391 रन बनाकर 4 विकेट से मुकाबला अपने नाम कर लिया था।

    उस ऐतिहासिक रन चेज में निरोशन डिकवेला ने 81 रन की अहम पारी खेली थी जबकि असेला गुणारत्ने 80 रन बनाकर नाबाद रहे थे। दोनों बल्लेबाजों के बीच छठे विकेट के लिए 121 रन की निर्णायक साझेदारी हुई थी। इस जीत ने श्रीलंका को टेस्ट इतिहास के सबसे यादगार रन चेज में शामिल कर दिया।

    श्रीलंका ने इससे पहले भी 350 से ज्यादा रन के लक्ष्य का सफल पीछा किया है। साल 2006 में कोलंबो में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ श्रीलंका ने 352 रन का लक्ष्य हासिल किया था। दक्षिण अफ्रीका ने चौथी पारी में जीत के लिए 352 रन का लक्ष्य रखा था और श्रीलंका ने 352 रन बनाकर मुकाबला जीत लिया था। इस मैच में महेला जयवर्धने ने 123 रन की शानदार पारी खेलकर टीम की जीत में बड़ी भूमिका निभाई थी।

    यानी श्रीलंका की टीम टेस्ट क्रिकेट में दो बार 350 या उससे ज्यादा रन के लक्ष्य को सफलतापूर्वक हासिल कर चुकी है। अब गॉल में उसके सामने 372 रन का लक्ष्य है। यह लक्ष्य उसके 352 रन वाले दूसरे सबसे बड़े सफल रन चेज से 20 रन ज्यादा है। अगर श्रीलंका आखिरी दिन 372 रन तक पहुंच जाता है तो यह उसके टेस्ट इतिहास का तीसरा सबसे बड़ा सफल रन चेज बन जाएगा।

    हालांकि भारत के खिलाफ यह चुनौती आसान नहीं होगी। चौथे दिन भारतीय गेंदबाजों ने श्रीलंका को शुरुआती झटके देकर दबाव में ला दिया। दिन का खेल खत्म होने तक श्रीलंका ने 84 रन पर 4 विकेट गंवा दिए। कप्तान धनंजय डी सिल्वा 31 रन बनाकर नाबाद हैं जबकि सोनल दिनुषा 25 रन पर खेल रहे हैं। दोनों बल्लेबाजों पर पांचवें दिन टीम की उम्मीदों का बड़ा दारोमदार रहेगा।

    गॉल में श्रीलंका के सामने सिर्फ 288 रन बनाने की चुनौती नहीं है बल्कि भारतीय गेंदबाजों के खिलाफ पूरे दिन टिके रहने की परीक्षा भी होगी। टेस्ट मैच की चौथी पारी में बड़ा लक्ष्य हासिल करना वैसे ही मुश्किल माना जाता है और यहां श्रीलंका के पास सिर्फ 6 विकेट बचे हैं। दूसरी ओर भारत के पास मैच खत्म करने का स्पष्ट मौका है।

    गॉल में विदेशी टीम द्वारा श्रीलंका के खिलाफ सबसे बड़ा सफल रन चेज पाकिस्तान के नाम है। पाकिस्तान ने 2015 में पल्लेकेले में श्रीलंका के खिलाफ 377 रन का लक्ष्य हासिल किया था। उसने 382 रन बनाकर मुकाबला जीता था। ऐसे में मौजूदा 372 रन का लक्ष्य उस रिकॉर्ड से सिर्फ 5 रन कम है।

    अब मुकाबले का पूरा दारोमदार पांचवें दिन पर है। श्रीलंका अगर 288 रन और बना लेता है तो वह न केवल भारत के खिलाफ यादगार जीत दर्ज करेगा बल्कि अपने टेस्ट इतिहास में तीसरा सबसे बड़ा सफल रन चेज भी पूरा कर लेगा। दूसरी तरफ भारत के पास छह विकेट लेकर गॉल टेस्ट अपने नाम करने का मौका है। ऐसे में 19 अगस्त का पांचवां दिन दोनों टीमों के लिए बेहद महत्वपूर्ण और रोमांचक रहने वाला है।

  • US-Iran War: होर्मुज पर कम हो रहा ईरान का नियंत्रण…. 80 फीसदी जहाजों ने बदला रूट

    US-Iran War: होर्मुज पर कम हो रहा ईरान का नियंत्रण…. 80 फीसदी जहाजों ने बदला रूट


    वाशिंगटन।
    अमेरिका-ईरान युद्ध (America-Iran War) का सबसे विवादास्पद मोर्चा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) है. तेहरान और वाशिंगटन दोनों इस रणनीतिक जलमार्ग पर अपना दबदबा जता रहे हैं, लेकिन शिपिंग डेटा फर्म (Shipping data firm) ने दावा किया है कि होर्मुज पर ईरान (Iran) का नियंत्रण कमजोर पड़ रहा है. ट्रैकिंग फर्म केपलर के आंकड़ों के अनुसार, पिछले दो हफ्तों में 80 फीसदी से ज्यादा जहाजों ने ईरानी मार्ग को छोड़कर अमेरिका द्वारा अधिकृत ओमान रूट का रुख किया है।

    ट्रैकिंग फर्म केपलर (Kpler) के शिपिंग डेटा के अनुसार, होर्मुज से गुजरने वाले 80 फीसदी से अधिक वाणिज्यिक जहाजों ने पिछले दो हफ्तों में ईरान के मार्ग को छोड़कर ओमान की ओर वाले रूट का इस्तेमाल किया है. संयुक्त राष्ट्र द्वारा अधिकृत इस समुद्री रास्ते का ईरान कड़ा विरोध करता रहा है. अमेरिकी नौसेना बलों की मौजूदगी और सुरक्षा के भरोसे जहाज ईरानी हमलों के जोखिम के बावजूद ओमान के तटवर्ती रास्ते से आवाजाही कर रहे हैं. इस बड़े बदलाव से इस रणनीतिक जलमार्ग पर तेहरान का दबदबा आंशिक रूप से कमजोर होता दिख रहा है।


    ओमान रूट पर शिफ्ट हुए जहाज

    केपलर के क्रूड ऑयल एनालिसिस प्रमुख हुमायूं फलकशाही के अनुसार, आंकड़े स्पष्ट संकेत देते हैं कि ईरान ने जलडमरूमध्य पर से कम से कम आंशिक नियंत्रण खो दिया है. एक महीने पहले तक ओमान वाले रूट पर न के बराबर शिपिंग गतिविधि देखी जा रही थी. ईरान इस जलमार्ग से गुजरने वाले जहाजों से ट्रांजिट शुल्क यानी टोल वसूलने की कोशिश कर रहा था, लेकिन जहाजों द्वारा ईरानी रूट से बचने के कारण तेहरान के लिए टोल लागू करना बेहद मुश्किल हो गया है।


    ज्यादातर देश नहीं देना चाहते टैक्स

    पिकरिंग एनर्जी पार्टनर्स के संस्थापक और मुख्य निवेश अधिकारी डैन पिकरिंग के मुताबिक मिडिल ईस्ट के अधिकांश लोग या पक्ष ईरान को टोल टैक्स नहीं देना चाहते हैं और न ही वे ऐसा कर रहे हैं. हालांकि, ईरान अभी-भी जहाजों को धमकाने और शिपिंग को बाधित करने की क्षमता रखता है. इसके बावजूद अमेरिकी नौसेना की मौजूदगी ने कमर्शियल ट्रैफिक को एक सुरक्षित और वैकल्पिक रास्ता दे दिया है।

    VLCC से ट्रांसफर हो रहा है कच्चा तेल
    तनाव के बीच खाड़ी देशों के तेल उत्पादकों ने भी कच्चे तेल के परिवहन का तरीका बदल दिया है. कुवैत, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने फारस की खाड़ी से होर्मुज के रास्ते तेल निकालने के लिए वेरी लार्ज क्रूड कैरियर्स (VLCCs) किराए पर लिए हैं. इसके बाद कच्चे तेल को ओमान की खाड़ी में खतरे के क्षेत्र से बाहर अन्य टैंकरों में ट्रांसफर किया जा रहा है।


    ट्रांसपोंडर बंद करने का जोखिम

    ईरानी हमलों के खतरे से बचने के लिए कई तेल टैंकरों ने अतिरिक्त कदम उठाए हैं. इन टैंकरों ने कई हफ्तों तक अपने ट्रांसपोंडर (पहचान सिग्नल) बंद रखे हैं. इससे ‘डार्क ट्रैफिक’ पैदा हो रहा है, जिससे पारंपरिक शिपिंग ट्रैकर्स के लिए तेल की वास्तविक आवाजाही का सटीक आकलन लगाना चुनौतीपूर्ण हो गया है. हालांकि, सैटेलाइट इमेजरी के जरिए कुछ जहाजों का पता लगाया जा सकता है.


    क्या है ट्रंप का दावा

    उधर, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) ने दावा किया है कि अमेरिकी नौसेना के संचालन के चलते इस जलडमरूमध्य पर अमेरिका का पूर्ण नियंत्रण है. ट्रंप ने होर्मुज का नक्शा साझा करते हुए इसे ‘नया अमेरिकी क्षेत्र’ तक घोषित करने की इच्छा जताई।

    वहीं, अमेरिकी ऊर्जा सचिव क्रिस राइट ने बताया कि एक हफ्ते में होर्मुज और परिवर्तित मार्गों से तेल की ढुलाई करीब 1.5 करोड़ बैरल प्रतिदिन रही जो युद्ध पूर्व के 2 करोड़ बैरल प्रतिदिन के करीब है. हालांकि, जमीनी हालात दोनों देशों के दावों से अलग हैं. ईरान के लगातार हमले और युद्ध पूर्व स्तर से कम तेल प्रवाह ये साबित करता है कि अमेरिका का भी इस जलमार्ग पर पूरी तरह अनियंत्रित कब्जा नहीं है. वहीं, दूसरी ओर जहाजों का ओमान रूट चुनना ये दर्शाता है कि ईरान भी अपनी शर्तों को मनवाने में संघर्ष कर रहा है।


    ईरान-ओमान की सीधी बातचीत से US नाखुश

    बता दें कि तनाव के बीच ईरान और ओमान के बीच नेविगेशन की स्वतंत्रता बहाल करने को लेकर सीधी बातचीत चल रही है. दोनों देश होर्मुज के साथ बॉर्डर साझा करते हैं. ये वार्ता बिना किसी प्रत्यक्ष अमेरिकी भागीदारी के हो रही है, जिससे डोनाल्ड ट्रंप खुश नहीं हैं. मौजूदा आंकड़े बताते हैं कि न तो ईरान और न ही अमेरिका इस जलमार्ग पर पूर्ण नियंत्रण का दावा कर सकते हैं।

  • PM केयर्स फंड के घरेलू चंदे में आई 30 फीसदी की गिरावट….. विदेशी चंदा भी तेजी से घटा

    PM केयर्स फंड के घरेलू चंदे में आई 30 फीसदी की गिरावट….. विदेशी चंदा भी तेजी से घटा


    नई दिल्ली।
    पीएम केयर्स फंड (PM CARES Fund) को लेकर कई अहम जानकारियां सामने आई हैं। जानकारी के मुताबिक वित्त वर्ष 2024-25 के दौरान ‘पीएम केयर्स’ (PM CARES) को मिलने वाले घरेलू चंदे (Domestic donations) में 30 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। घरेलू चंदा अब महज 479 करोड़ रुपये रह गया। वहीं विदेशी चंदा (Foreign contribution) 18 प्रतिशत गिरावट के साथ 92.8 लाख रुपये हो गया। पूरी डीटेल पीएम केयर्स फंड की ऑडिट रिपोर्ट में यह सामने आई है।

    रिपोर्ट के मुताबिक पीएम केयर्स फंड (प्रधानमंत्री नागरिक सहायता एवं आपातकालीन राहत कोष) में 31 मार्च, 2025 को कुल 8,452 करोड़ रुपये थे। एक साल पहले यह राशि 7,173 करोड़ रुपये थी। रिपोर्ट के अनुसार इसमें से 7,846 करोड़ रुपये फिक्स्ड डिपॉजिट में जमा हैं और 605 करोड़ रुपये बचत खाता में रखे गए थे।

    वित्त वर्ष 2023-24 में पीएम केयर्स कोष को 681.8 करोड़ रुपये घरेलू चंदा मिला था, जबकि कुल 1.13 करोड़ रुपये का विदेशी चंदा मिला था। कोष ने 2024-25 के दौरान पीएम केयर्स फॉर चिल्ड्रेन स्कीम पर 87.8 लाख रुपये खर्च किए हैं, जो इससे एक साल पहले के 15.37 करोड़ रुपये के मुकाबले काफी कम है। साल 2024-25 के दौरान 87.85 लाख रुपये का भुगतान किया गया, जबकि उससे पिछले वित्त वर्ष में यह आंकड़ा 15.6 करोड़ रुपये का था।


    संकटपूर्ण स्थिति से निपटने के लिए शुरुआत

    बता दें कि नरेंद्र मोदी सरकार ने पीएम केयर्स फंड की स्थापना मुख्य रूप से किसी भी प्रकार की आपातकालीन या संकटपूर्ण स्थिति से निपटने और प्रभावित लोगों को राहत प्रदान करने के उद्देश्य से की थी। इसे एक सार्वजनिक धर्मार्थ ट्रस्ट के रूप में पंजीकृत किया गया था। प्रधानमंत्री इस कोष के अध्यक्ष होते हैं। यह कोष पूरी तरह से स्वैच्छिक चंदे से चलता है और इसे कोई बजटीय सहायता नहीं मिलती है।

  • बर्थडे मनाने निकला परिवार, लौटकर आई मौत! 8 साल के मासूम ने बताया- पापा ने मां को चाकू मारा, बहन को तालाब में डुबोया

    बर्थडे मनाने निकला परिवार, लौटकर आई मौत! 8 साल के मासूम ने बताया- पापा ने मां को चाकू मारा, बहन को तालाब में डुबोया


    इंदौर इंदौर के कनाड़िया थाना क्षेत्र के झलारिया गांव में हुई एक खौफनाक वारदात ने पूरे इलाके को झकझोर दिया है। आरोप है कि एक व्यक्ति ने अपनी पत्नी की हत्या करने के बाद अपने ही दो बच्चों को तालाब में फेंक दिया। इस घटना में 10 साल की बेटी माही की मौत हो गई जबकि 8 साल का बेटा अजय किसी तरह पानी से बाहर निकलकर अपनी जान बचाने में कामयाब रहा। इसके बाद बच्चा किसी तरह पुलिस तक पहुंचा और उसने जो घटनाक्रम बताया उससे पुलिस भी हैरान रह गई। पुलिस ने आरोपी पिता सुनील चौहान को गिरफ्तार कर मामले की जांच शुरू कर दी है।

    पुलिस के अनुसार मृतका की पहचान 32 वर्षीय अनीता बाई के रूप में हुई है। उसका पति सुनील चौहान करीब 37 साल का है और पेशे से ड्राइवर है। बताया जा रहा है कि परिवार कुछ समय पहले ही झलारिया गांव में किराए के मकान में रहने आया था। मकान मालिक विक्रम चौधरी के मुताबिक घटना वाली रात सुनील अपनी पत्नी को जन्मदिन मनाने की बात कहकर रात करीब साढ़े नौ से दस बजे के बीच घर से बाहर लेकर गया था। उस समय दोनों बच्चे घर पर ही थे। कुछ देर बाद सुनील वापस आया और दोनों बच्चों को भी अपने साथ ले गया।

    इसके बाद घटनाक्रम ने बेहद भयावह रूप ले लिया। 8 साल के अजय के मुताबिक उसके माता-पिता के बीच पैसों को लेकर विवाद हुआ था। विवाद बढ़ने के बाद उसके पिता ने उसकी मां के साथ मारपीट की और चाकू से हमला किया। बच्चे ने पुलिस को बताया कि उसकी मां गंभीर रूप से घायल होकर तड़प रही थी और इसके बाद उसके पिता ने कथित तौर पर उसका गला भी दबाया। हालांकि हत्या की वास्तविक परिस्थितियों की पुष्टि पोस्टमॉर्टम और पुलिस जांच के बाद ही होगी।

    अजय के मुताबिक इसके बाद उसका पिता उसे और उसकी बहन माही को हिंगोनिया के पास स्थित तालाब पर ले गया। वहां दोनों बच्चों को पानी में फेंक दिया गया। अजय किसी तरह पानी से बाहर निकलने में सफल रहा। इसके बाद वह अकेला पुलिस तक पहुंचा और पूरी घटना की जानकारी दी। बच्चे की सूचना मिलते ही पुलिस ने आरोपी की तलाश शुरू कर दी और कुछ समय बाद उसे झलारिया गांव से पकड़ लिया।

    पुलिस पूछताछ के दौरान आरोपी की निशानदेही पर अनीता का शव बरामद किया गया। इसके बाद एसडीआरएफ की टीम ने तालाब में सर्च ऑपरेशन चलाया। रातभर चले तलाशी अभियान के बाद 10 साल की माही का शव भी तालाब से बरामद कर लिया गया। शुरुआती जांच में अनीता के शरीर पर चाकू के निशान मिलने की बात सामने आई है। पुलिस को गला घोंटने के भी संकेत मिले हैं। वहीं माही की मौत पानी में डूबने से होने की आशंका है। मौत की सटीक वजह पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट आने के बाद सामने आएगी।

    मृतका के मायके पक्ष ने आरोप लगाया है कि अनीता और सुनील के बीच लंबे समय से विवाद चल रहा था। अनीता के पिता सुखराम के मुताबिक सुनील पहले भी उनकी बेटी के साथ मारपीट करता था और कई साल पहले उसके खिलाफ पुलिस में शिकायत भी की गई थी। परिजनों का कहना है कि विवाद नया नहीं था और घरेलू हिंसा की घटनाएं पहले भी सामने आती रही थीं।

    परिजनों के अनुसार सुनील अनीता पर शक करता था और उसके दूसरे लोगों से बातचीत करने को लेकर विवाद करता था। करीब 20 दिन पहले भी मारपीट के बाद अनीता बच्चों के साथ इंदौर आई थी। परिवार की एक और बेटी अनुष्का भी सुनील के साथ नहीं रहती थी और दादा-दादी के पास रहती थी। परिजनों का आरोप है कि उसके साथ भी मारपीट की जाती थी।

    वहीं सुनील की रिश्तेदार मालती कौशल ने अनीता के चरित्र को लेकर लगाए जा रहे आरोपों को गलत बताया है। उनका कहना है कि अनीता का व्यवहार अच्छा था और उन्होंने कभी उसके चरित्र को लेकर ऐसी कोई बात नहीं देखी। उन्होंने यह भी कहा कि परिवार अलग-अलग रहता था इसलिए उन्हें घटना की पूरी जानकारी नहीं है।

    पुलिस अब इस पूरे मामले की कड़ियों को जोड़ने में जुटी है। जांच में यह पता लगाया जा रहा है कि हत्या अचानक हुए विवाद के बाद हुई या आरोपी ने पहले से इसकी योजना बनाई थी। पुलिस घटना की पूरी टाइमलाइन के साथ हत्या के कारण और आरोपी के बयानों की भी जांच कर रही है। इस दर्दनाक घटना में एक मां और उसकी 10 साल की बेटी की जान चली गई जबकि 8 साल का बेटा इस भयावह घटना का प्रत्यक्षदर्शी बन गया है।

  • बच्चों के पोषण पर संकट गहराया! प्रदेश के सभी 7 पोषण आहार प्लांट बंद, तय लक्ष्य से 130 दिन कम मिला आहार

    बच्चों के पोषण पर संकट गहराया! प्रदेश के सभी 7 पोषण आहार प्लांट बंद, तय लक्ष्य से 130 दिन कम मिला आहार


    मध्य प्रदेश मध्य प्रदेश में कुपोषण के खिलाफ चल रही योजनाओं के बीच पोषण व्यवस्था को लेकर चिंताजनक तस्वीर सामने आई है। मिशन पोषण 2.0 के तहत गर्भवती महिलाओं स्तनपान कराने वाली माताओं और 6 वर्ष तक के बच्चों को साल में कम से कम 300 दिन पोषण आहार दिया जाना चाहिए। लेकिन प्रदेश की करीब 97 हजार आंगनबाड़ियों में जुलाई तक लगभग 170 दिन ही नियमित पोषण आहार पहुंच सका। यानी जिन बच्चों और महिलाओं को सालभर पर्याप्त पोषण मिलना चाहिए था उन्हें तय अवधि के मुकाबले काफी कम दिनों तक आहार मिल पाया।

    स्थिति की गंभीरता इसलिए भी बढ़ जाती है क्योंकि प्रदेश में पोषण आहार तैयार करने वाले सभी 7 प्लांट बंद हो चुके हैं। रीवा सागर देवास शिवपुरी और होशंगाबाद समेत अलग-अलग जिलों में संचालित इन प्लांटों के बंद होने की वजह भारी आर्थिक घाटा बताया जा रहा है। नई व्यवस्था शुरू करने के लिए अभी तक टेंडर जारी नहीं होने की जानकारी सामने आई है। ऐसे में आंगनबाड़ियों तक नियमित पोषण आहार पहुंचाने की व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

    पोषण की स्थिति से जुड़े आंकड़े भी चिंता बढ़ा रहे हैं। एनएफएचएस-6 के आंकड़ों के मुताबिक देश के स्तर पर कुपोषण से जुड़े कई संकेतकों में सुधार दिखाई दिया है लेकिन मध्य प्रदेश में कुछ प्रमुख मानकों पर स्थिति कमजोर हुई है। प्रदेश में वेस्टिंग यानी बच्चे की लंबाई के अनुपात में कम वजन की स्थिति करीब 6 प्रतिशत बढ़ी है। अब लगभग हर चौथा बच्चा वेस्टिंग से प्रभावित बताया जा रहा है। स्टंटिंग यानी उम्र के हिसाब से कम लंबाई वाले बच्चों के आंकड़े में करीब 2 प्रतिशत सुधार हुआ है लेकिन अब भी 33.3 प्रतिशत बच्चे इस स्थिति से प्रभावित हैं।

    ग्रामीण क्षेत्रों की स्थिति और ज्यादा चिंताजनक बताई गई है। यहां अंडरवेट यानी उम्र के अनुपात में कम वजन वाले बच्चों का आंकड़ा पिछले सर्वे में करीब 33 प्रतिशत था जो बढ़कर 42 प्रतिशत से अधिक हो गया है। इसका मतलब है कि ग्रामीण इलाकों में हर 10 बच्चों में 4 से ज्यादा बच्चे कम वजन की समस्या से जूझ रहे हैं। यह आंकड़ा पोषण व्यवस्था की प्रभावशीलता और आंगनबाड़ी सेवाओं की पहुंच को लेकर गंभीर सवाल खड़े करता है।

    पोषण से जुड़ी सरकारी योजनाओं के बीच महिलाओं के लाभ को लेकर भी एक अलग मुद्दा सामने आया है। बैगा भारिया और सहरिया जनजातियों की महिला मुखिया को आहार अनुदान योजना के तहत पहले 1000 रुपए और अब 1500 रुपए प्रतिमाह दिए जाते हैं। दूसरी ओर लाड़ली बहना योजना के नियमों के अनुसार दूसरी योजना से 1500 रुपए या उससे अधिक की राशि पाने वाली महिला पात्र नहीं होती। इसी वजह से इन जनजातीय समुदायों की 3 लाख से अधिक पात्र महिलाओं के लाड़ली बहना योजना से बाहर होने की बात कही गई है।

    नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने इस व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा है कि आहार अनुदान का उद्देश्य पोषण उपलब्ध कराना है जबकि लाड़ली बहना योजना महिलाओं की आर्थिक आत्मनिर्भरता से जुड़ी है। उनका तर्क है कि दोनों योजनाओं का उद्देश्य अलग है इसलिए एक योजना का लाभ मिलने के आधार पर दूसरी योजना से महिलाओं को बाहर नहीं किया जाना चाहिए।

    मध्य प्रदेश में विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों की आबादी भी काफी बड़ी है। देश में 75 जनजातीय समूहों को विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूह के तौर पर चिन्हित किया गया है। मध्य प्रदेश में डिंडोरी मंडला बालाघाट अनूपपुर और उमरिया में बैगा समुदाय श्योपुर में सहरिया और छिंदवाड़ा के पातालकोट क्षेत्र में भारिया समुदाय की बड़ी आबादी रहती है। देश में करीब 45 लाख विशेष रूप से कमजोर जनजातीय आबादी में लगभग 12 लाख लोगों के मध्य प्रदेश में होने का दावा किया गया है।

    कुपोषण की जमीनी स्थिति दतिया से सामने आए एक मामले से भी समझी जा सकती है। सलैया पमार आदिवासी डेरा की 16 महीने की नीलू आदिवासी को उल्टी और दस्त के बाद 10 अगस्त को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उसका वजन 5.2 किलो बताया गया जबकि इस उम्र में सामान्य वजन करीब 10 किलो के आसपास होना चाहिए। हालत में सुधार के बाद परिवार उसे घर ले गया लेकिन बाद में तबीयत बिगड़ने से बच्ची की मौत हो गई।

    बताया गया कि गांव में छह अन्य बच्चे भी अतिकुपोषित हैं। बावजूद इसके बच्ची की मौत के बाद स्वास्थ्य टीम के समय पर गांव नहीं पहुंचने को लेकर सवाल उठे हैं। बीएमओ डॉ. राहुल चऊदा ने टीम भेजने की बात कही है जबकि कलेक्टर स्वप्निल वानखड़े ने मामले की जांच कराने की बात कही है।

    गांव की स्थिति में स्वास्थ्य और पोषण सेवाओं की दूसरी कमियां भी सामने आई हैं। स्थानीय स्तर पर उपस्वास्थ्य केंद्र बंद मिला। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता के अनुसार गांव में करीब 70 बच्चे हैं लेकिन पोषण ट्रैकर एप पर केवल 20 बच्चों का रिकॉर्ड दर्ज है। समग्र आईडी और आधार से जुड़ी दिक्कतों के कारण बाकी बच्चों को पोषण आहार नहीं मिलने की बात सामने आई है। गर्भवती महिलाओं को मिलने वाला टेक होम राशन भी करीब पांच महीने से नहीं पहुंचने का दावा किया गया है।

    यह स्थिति बताती है कि कुपोषण से लड़ाई सिर्फ योजनाओं की घोषणा तक सीमित नहीं रह सकती। बच्चों और गर्भवती महिलाओं तक समय पर पोषण आहार पहुंचना स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करना और पात्र हितग्राहियों का सही रिकॉर्ड तैयार करना भी उतना ही जरूरी है। जब पोषण आहार की निर्धारित अवधि 300 दिनों की हो और वितरण करीब 170 दिनों तक सीमित रह जाए तो व्यवस्था की निरंतरता पर सवाल उठना स्वाभाविक है। ऐसे में बंद पड़े प्लांटों को लेकर जल्द निर्णय और आंगनबाड़ी स्तर पर नियमित पोषण व्यवस्था बहाल करना सरकार के सामने बड़ी चुनौती है।