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  • महंगाई, महंगे किराए और भ्रष्टाचार के खिलाफ यूरोप में उग्र प्रदर्शन, फ्रांस से बाल्कन तक बढ़ा जनाक्रोश

    महंगाई, महंगे किराए और भ्रष्टाचार के खिलाफ यूरोप में उग्र प्रदर्शन, फ्रांस से बाल्कन तक बढ़ा जनाक्रोश


    नई दिल्ली ।
    यूरोप के कई देशों में बढ़ती महंगाई, महंगे आवास, कमजोर सार्वजनिक सेवाओं और सरकारी भ्रष्टाचार के खिलाफ जनाक्रोश तेज हो गया है। फ्रांस, इटली, स्पेन, पुर्तगाल और बाल्कन क्षेत्र के विभिन्न हिस्सों में लोग सड़कों पर उतरकर सरकारों की नीतियों के खिलाफ विरोध जता रहे हैं। कई स्थानों पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन हिंसक झड़पों, तोड़फोड़ और आगजनी में बदल गए हैं। युवाओं, छात्रों और कामगारों की भागीदारी ने इन आंदोलनों को व्यापक रूप दे दिया है।

    फ्रांस में आंदोलन की शुरुआत माध्यमिक विद्यालयों में शिक्षकों और शैक्षणिक संसाधनों की कमी के विरोध से हुई। छात्र तीन सप्ताह से अधिक समय तक स्कूलों की नाकेबंदी कर रहे थे। बाद में श्रमिक संगठन सीजीटी और आम नागरिक भी इसमें शामिल हो गए। इसके बाद प्रदर्शन महंगाई और पेंशन नीतियों के विरोध तक फैल गया। पेरिस, मार्सिले, ल्योन और बोर्डो में झड़पों तथा लूटपाट की घटनाएं हुईं। लिमोज में 19वीं सदी के ऐतिहासिक सिटी हॉल को आग लगाए जाने से भारी नुकसान हुआ। देशभर में अब तक 2,400 लोगों की गिरफ्तारी की जानकारी सामने आई है। राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने कहा कि गणराज्य और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वालों से नुकसान की भरपाई कराई जाएगी।

    इटली में महंगाई और घटती क्रय शक्ति के खिलाफ ‘इटालिया इन पियाजा’ आंदोलन के तहत हजारों लोग प्रदर्शन कर रहे हैं। मिलान, ट्यूरिन और बोलोन्या में निकाले गए मार्च के दौरान कुछ स्थानों पर हिंसा भड़क गई। दुकानों में लूटपाट और वाहनों में आग लगाने की घटनाएं हुईं, जबकि सुरक्षा बलों के 14 जवान घायल हो गए। मिलान में दो दिनों के दौरान 271 लोगों को गिरफ्तार किया गया, जिनमें अधिकांश नाबालिग बताए गए हैं। प्रदर्शनकारी रोजगार की सुरक्षा, न्यूनतम वेतन में बढ़ोतरी और सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं के लिए अधिक बजट की मांग कर रहे हैं।

    स्पेन और पुर्तगाल में आवास संकट विरोध प्रदर्शनों का प्रमुख कारण बन गया है। स्पेन में न्यूनतम मासिक वेतन 1,221 यूरो बताया गया है, जबकि 80 वर्ग मीटर के सामान्य अपार्टमेंट का औसत किराया 1,130 यूरो तक पहुंच गया है। इस अंतर के कारण कई लोगों के लिए भोजन, परिवहन और अन्य जरूरतों पर खर्च करना मुश्किल हो रहा है। बार्सिलोना और मैड्रिड के पुएर्ता डेल सोल चौक पर प्रदर्शनकारियों ने कई सप्ताह से तंबू लगा रखे हैं। 87 वर्षीय मारिकारमेन को घर से बेदखल किए जाने और बाद में अस्पताल में उनकी मृत्यु की घटना ने भी आक्रोश बढ़ाया है। मैड्रिड में प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षकों ने वेतन वृद्धि की मांग पर अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू की है। लिस्बन और पोर्टो में भी विरोध जारी है।

    बाल्कन क्षेत्र में अल्बानिया और सर्बिया में सरकारों के खिलाफ असंतोष प्रमुख मुद्दा बना हुआ है। अल्बानिया की राजधानी तिराना में लगातार छठे दिन विरोध प्रदर्शन हिंसक रहे। छात्रों और युवाओं के ‘फ्लेमिंगो’ आंदोलन से जुड़े प्रदर्शनकारियों ने शिक्षा मंत्रालय के बाहर बैरिकेड्स में आग लगाई और प्रधानमंत्री एदि रामा के इस्तीफे की मांग की। रामा ने आरोप लगाया कि अति-वामपंथी एंटीफा समूह प्रदर्शनकारियों को भड़का रहे हैं। सर्बिया में विश्वविद्यालय के छात्र पिछले दो वर्षों से भ्रष्टाचार के खिलाफ आंदोलन कर रहे हैं। वे 25 अक्टूबर 2026 को होने वाले आम चुनावों से पहले राष्ट्रपति अलेक्जेंडर वुसिक की सत्ता में वापसी की संभावनाओं को चुनौती दे रहे हैं।

    इन घटनाओं ने यूरोप में राजनीतिक अस्थिरता और आगामी चुनावों को लेकर चिंताएं बढ़ाई हैं। कई देशों में दक्षिणपंथी और राष्ट्रवादी दल आर्थिक असंतोष को राजनीतिक मुद्दा बना रहे हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फ्रांस की हिंसा के लिए प्रवासियों को जिम्मेदार ठहराते हुए सीमाएं पूरी तरह बंद करने की मांग की है। हालांकि, फ्रांस के स्थानीय प्रशासन ने विरोध के पीछे आम नागरिकों की आर्थिक परेशानियों और जीवन स्तर में गिरावट को प्रमुख कारण बताया है। महंगाई, आवास और सार्वजनिक सेवाओं से जुड़ी समस्याओं पर सरकारें कितनी प्रभावी राहत देती हैं, इसका असर आने वाले महीनों में यूरोप की सामाजिक और राजनीतिक स्थिति पर पड़ सकता है।

  • दशहरा 2026 आज, विजयादशमी पर जानें पर्व का महत्व, शुभ मुहूर्त और अपनों को बधाई देने के खास संदेश

    दशहरा 2026 आज, विजयादशमी पर जानें पर्व का महत्व, शुभ मुहूर्त और अपनों को बधाई देने के खास संदेश

    नई दिल्ली । दशहरा और विजयादशमी का पर्व मंगलवार, 20 अक्टूबर 2026 को मनाया जा रहा है। यह त्योहार बुराई पर अच्छाई और अधर्म पर धर्म की विजय का प्रतीक माना जाता है। इस अवसर पर देशभर में लोग भगवान श्रीराम की पूजा-अर्चना करते हैं और रावण दहन के माध्यम से बुराइयों के अंत का संदेश देते हैं। दशहरा केवल धार्मिक आस्था से जुड़ा पर्व नहीं है, बल्कि यह सत्य, साहस, सदाचार और सकारात्मक सोच के साथ जीवन जीने की प्रेरणा भी देता है।

    विजयादशमी के अवसर पर परिवार, दोस्तों और प्रियजनों को शुभकामनाएं देने की परंपरा भी खास महत्व रखती है। लोग इस दिन संदेशों, प्रेरणादायक विचारों और सामाजिक माध्यमों पर साझा किए जाने वाले स्टेटस के जरिए एक-दूसरे को पर्व की बधाई देते हैं। शुभकामना संदेशों में सुख, शांति, समृद्धि, सफलता और खुशहाली की कामना प्रमुख रूप से शामिल रहती है।

    दशहरा हिंदू पंचांग के अनुसार आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को मनाया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक, इसी दिन भगवान श्रीराम ने लंका के राजा रावण का वध किया था। इस घटना को अधर्म पर धर्म की विजय के रूप में याद किया जाता है। वहीं, कुछ परंपराओं में विजयादशमी को देवी दुर्गा की महिषासुर पर विजय से भी जोड़कर देखा जाता है। इस तरह यह पर्व अलग-अलग धार्मिक मान्यताओं के माध्यम से शक्ति, धर्म और सत्य की स्थापना का संदेश देता है।

    दशहरे पर रावण दहन की परंपरा इस पर्व का प्रमुख आकर्षण है। रावण के दस सिरों को प्रतीकात्मक रूप से मनुष्य के भीतर मौजूद नकारात्मक प्रवृत्तियों से जोड़ा जाता है। इनमें अहंकार, क्रोध, लोभ, मोह, ईर्ष्या, घृणा, भय और वासना जैसी बुराइयां शामिल हैं। रावण दहन के जरिए लोगों को यह संदेश दिया जाता है कि जीवन में केवल बाहरी बुराइयों का विरोध करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि अपनी गलत आदतों और नकारात्मक विचारों को दूर करने का प्रयास भी जरूरी है।

    20 अक्टूबर को दशहरा पूजा के लिए बताए गए प्रमुख शुभ समय में विजय मुहूर्त दोपहर 1 बजकर 59 मिनट से 2 बजकर 45 मिनट तक निर्धारित बताया गया है। वहीं, प्रदोष काल शाम 5 बजकर 47 मिनट से शुरू होगा। इसी समय को ध्यान में रखते हुए रावण दहन शाम 5 बजकर 47 मिनट के बाद करने का उल्लेख है। हालांकि, पूजा और अन्य धार्मिक कार्यों के लिए स्थानीय पंचांग तथा क्षेत्रीय परंपराओं के अनुसार समय की पुष्टि करना उचित माना जाता है।

    दशहरे पर भेजे जाने वाले शुभकामना संदेशों में भगवान श्रीराम की कृपा, परिवार की खुशहाली और जीवन में सफलता की कामना की जाती है। लोग अपने प्रियजनों को संदेश भेजकर उनके जीवन में सुख, शांति और समृद्धि बने रहने की प्रार्थना करते हैं। कुछ संदेश जीवन की चुनौतियों का सामना करने, कठिन परिस्थितियों में साहस बनाए रखने और सत्य का साथ देने की प्रेरणा देते हैं।

    प्रेरणादायक विचारों में यह संदेश प्रमुख है कि बुराई चाहे कितनी भी प्रभावशाली क्यों न दिखाई दे, अंततः अच्छाई का महत्व बना रहता है। विजयादशमी लोगों को अपने व्यवहार में प्रेम, सद्भाव और सकारात्मकता अपनाने की सीख भी देती है। इस अवसर पर अहंकार और नफरत छोड़कर आपसी सम्मान तथा विश्वास को मजबूत करने का संकल्प लिया जा सकता है।

    WhatsApp स्टेटस के जरिए भी लोग दशहरा की शुभकामनाएं साझा करते हैं। जय श्रीराम, सत्य की जीत और असत्य के अंत जैसे संदेश इस अवसर पर विशेष रूप से प्रासंगिक रहते हैं। इन संदेशों का उद्देश्य पर्व की भावना को अपनों तक पहुंचाना और जीवन में अच्छे विचारों को अपनाने के लिए प्रेरित करना है।

    दशहरा 2026 का पर्व धार्मिक आस्था के साथ आत्ममंथन का अवसर भी प्रदान करता है। भगवान श्रीराम की विजय और रावण दहन की परंपरा लोगों को याद दिलाती है कि सत्य, संयम और सदाचार का रास्ता जीवन में महत्वपूर्ण है। विजयादशमी पर एक-दूसरे को शुभकामनाएं देने के साथ अपनी बुराइयों को दूर करने और सकारात्मक बदलाव की शुरुआत करने का संकल्प इस त्योहार के संदेश को सार्थक बना सकता है।

  • विजयादशमी पर इंदौर में शस्त्र पूजन के साथ पुलिस को बड़ा तोहफा, लाइट और अनाउंसमेंट सिस्टम से लैस होंगी 50 आधुनिक बाइक

    विजयादशमी पर इंदौर में शस्त्र पूजन के साथ पुलिस को बड़ा तोहफा, लाइट और अनाउंसमेंट सिस्टम से लैस होंगी 50 आधुनिक बाइक


    इंदौर । मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव मंगलवार को विजयादशमी के अवसर पर इंदौर की डीआरपी लाइन में शस्त्र पूजन करेंगे। इस कार्यक्रम में इंदौर पुलिस को होंडा कंपनी की ओर से कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी यानी CSR फंड के तहत 50 हाईटेक बाइक भी सौंपी जाएंगी। इन आधुनिक बाइकों के मिलने से शहर में पुलिस की गश्त को मजबूती मिलने की उम्मीद है। खासतौर पर संकरी गलियों और भीड़भाड़ वाले इलाकों में पुलिसकर्मियों को तेजी से पहुंचने में मदद मिलेगी। इन बाइकों में पुलिस लाइट और अनाउंसमेंट सिस्टम जैसी सुविधाएं उपलब्ध रहेंगी।

    इंदौर की डीआरपी लाइन में हर साल विजयादशमी पर शस्त्र पूजन का आयोजन किया जाता है। इस बार मुख्यमंत्री की मौजूदगी को देखते हुए परिसर में विशेष तैयारियां की गई हैं। पूजा स्थल को सजाया गया है और कार्यक्रम के लिए अन्य व्यवस्थाएं भी पूरी कर ली गई हैं। आयोजन में पुलिस कमिश्नर संतोष सिंह एडिशनल पुलिस कमिश्नर राजेश सिंह और मयंक अवस्थी सहित अन्य वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के शामिल होने की जानकारी दी गई है। शस्त्र पूजन विजयादशमी की परंपरा का हिस्सा है और पुलिस विभाग में इसे विशेष महत्व दिया जाता है।

    कार्यक्रम के दौरान पुलिस को मिलने वाली 50 बाइक की खासियत भी चर्चा में है। ये 350 सीसी क्षमता वाली बाइक होंगी जिनमें पुलिस लाइट और अनाउंसमेंट सिस्टम लगाया गया है। जरूरत पड़ने पर पुलिसकर्मी इन बाइकों पर लगे सिस्टम के माध्यम से लोगों तक जरूरी संदेश पहुंचा सकेंगे। इसके अलावा बाइकों में हेलमेट रखने की व्यवस्था भी की गई है। इन सुविधाओं का उद्देश्य पुलिस की गश्त को अधिक सुविधाजनक बनाना और आपात स्थिति में मौके पर पहुंचकर कार्रवाई करने में मदद करना है।

    शहर के कई हिस्सों में ऐसी संकरी गलियां और भीड़भाड़ वाले क्षेत्र हैं जहां बड़े पुलिस वाहन आसानी से नहीं पहुंच पाते। ऐसे स्थानों पर बाइक से गश्त करना अपेक्षाकृत आसान होता है। नई बाइक मिलने के बाद पुलिसकर्मी संकरी सड़कों और घनी आबादी वाले इलाकों में बेहतर तरीके से आवाजाही कर सकेंगे। किसी घटना या संदिग्ध गतिविधि की सूचना मिलने पर मौके तक पहुंचने में भी मदद मिल सकती है। इससे पुलिस की मौजूदगी बढ़ाने और संवेदनशील क्षेत्रों पर नजर रखने में सहायता मिलने की उम्मीद है।

    पुलिस की गश्त व्यवस्था में दोपहिया वाहनों की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जाती है। बड़े वाहनों की तुलना में बाइक से तंग रास्तों पर पहुंचना और भीड़ के बीच से निकलना आसान होता है। अनाउंसमेंट सिस्टम के जरिए पुलिसकर्मी भीड़ को दिशा-निर्देश देने या जरूरी सूचना प्रसारित करने का काम भी कर सकेंगे। हालांकि इन सुविधाओं का वास्तविक असर इनके उपयोग और तैनाती के तरीके पर निर्भर करेगा। पुलिस विभाग की ओर से इन बाइकों का इस्तेमाल शहर की जरूरतों के अनुसार किया जाएगा।

    विजयादशमी के अवसर पर इंदौर के विभिन्न थानों में भी शस्त्र पूजन के कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। संबंधित थानों में अधिकारी अपने स्तर पर पूजा-अर्चना करेंगे। वहीं डीआरपी लाइन में मुख्यमंत्री की मौजूदगी में होने वाला आयोजन खास रहेगा क्योंकि इसी अवसर पर पुलिस को 50 आधुनिक बाइक भी सौंपी जाएंगी। इस पहल से इंदौर पुलिस की गश्त व्यवस्था को बेहतर बनाने और शहर के अलग-अलग इलाकों में तेजी से पहुंचने की क्षमता बढ़ाने की उम्मीद है।

  • मुंबई अंडरवर्ल्ड में दाऊद की डी-कंपनी से लॉरेंस बिश्नोई नेटवर्क तक बदला अपराध का तरीका

    मुंबई अंडरवर्ल्ड में दाऊद की डी-कंपनी से लॉरेंस बिश्नोई नेटवर्क तक बदला अपराध का तरीका

    नई दिल्ली । मुंबई में अंडरवर्ल्ड का इतिहास कई दशकों पुराना है। 1980 और 1990 के दशक में दाऊद इब्राहिम की डी-कंपनी का प्रभाव इतना व्यापक माना जाता था कि उसका नाम फिल्म उद्योग, कारोबार और आपराधिक गतिविधियों से जुड़ने लगा था। उस दौर में हाजी मस्तान, करीम लाला और वरदराजन मुदलियार जैसे नामों के बाद दाऊद का नेटवर्क तेजी से उभरा। अब फिल्मी हस्तियों से जुड़ी गोलीबारी की घटनाओं के बाद लॉरेंस बिश्नोई गैंग की गतिविधियों और मुंबई में उसकी मौजूदगी को लेकर चर्चा बढ़ गई है।

    डी-कंपनी का प्रभाव 1980 के दशक के आखिरी वर्षों और 1990 के शुरुआती दौर में बढ़ा। उस समय दाऊद इब्राहिम, छोटा शकील, अबू सलेम और छोटा राजन जैसे नाम मुंबई के आपराधिक जगत में चर्चित थे। आरोप लगते रहे कि अंडरवर्ल्ड ने फिल्मों में अवैध धन लगाया और कलाकारों, निर्माताओं तथा फिल्म वितरण से जुड़े लोगों पर दबाव बनाया। कुछ फिल्मी हस्तियों और निर्माताओं को सुरक्षा भी मांगनी पड़ी थी। इस दौर में अपराध जगत और बॉलीवुड के संबंधों को लेकर कई मामले सामने आए।

    1993 के मुंबई बम धमाकों के बाद पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों ने अंडरवर्ल्ड नेटवर्क के खिलाफ कार्रवाई तेज कर दी। दाऊद इब्राहिम भारत से बाहर चला गया। मुंबई पुलिस की अपराध शाखा की कार्रवाई, गिरफ्तारियों और महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण कानून यानी मकोका के इस्तेमाल से पुराने गिरोहों पर दबाव बढ़ा। छोटा राजन के जेल जाने और डी-कंपनी के नेटवर्क के कमजोर पड़ने के साथ मुंबई में संगठित अपराध का पुराना स्वरूप भी बदलने लगा। फिल्म उद्योग में कॉर्पोरेट निवेश और स्टूडियो व्यवस्था के विस्तार ने अवैध धन पर निर्भरता कम करने में भूमिका निभाई।

    इसी बीच उत्तर भारत में लॉरेंस बिश्नोई और गोल्डी बराड़ का नेटवर्क विकसित हुआ। उपलब्ध विवरणों के अनुसार, करीब 2012 में पंजाब विश्वविद्यालय की छात्र राजनीति और छात्र संगठन एसओपीयू से जुड़े विवादों के दौरान लॉरेंस का गिरोह सक्रिय हुआ। कॉलेज के झगड़ों, आपसी रंजिश और स्थानीय विवादों के बीच उसने युवाओं को अपने साथ जोड़ना शुरू किया। 2013 में एक विरोधी उम्मीदवार की हत्या के बाद संपत नेहरा का नाम भी गिरोह से जुड़ा। 2018 में सलमान खान को निशाना बनाने के इरादे से मुंबई में रेकी किए जाने की बात भी सामने आई थी।

    वर्ष 2015 से अलग-अलग जेलों में बंद रहने के बावजूद लॉरेंस बिश्नोई का नेटवर्क विभिन्न राज्यों में फैला। गोल्डी बराड़, काला जठेड़ी, रोहित गोदारा और अनमोल बिश्नोई जैसे नाम इस नेटवर्क से जुड़े बताए जाते हैं। इस गिरोह की गतिविधियों में सोशल मीडिया, विदेश से संपर्क और जेल के भीतर से कथित तौर पर संचालित संचार व्यवस्था की भूमिका की चर्चा होती रही है। हालांकि, किसी विशेष घटना में गिरोह की भूमिका का निर्धारण जांच और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर ही किया जा सकता है।

    मुंबई में हाल की घटनाओं ने इस नेटवर्क को फिर चर्चा में ला दिया है। फरवरी 2026 में फिल्म निर्देशक रोहित शेट्टी के जुहू स्थित घर के बाहर गोलीबारी हुई थी। इस मामले में बिश्नोई गैंग के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किए जाने की बात सामने आई। इसके बाद 18 अक्टूबर 2026 को अभिनेता टाइगर श्रॉफ की कार पर जुहू इलाके में गोलीबारी की खबर आई। उपलब्ध विवरण के अनुसार, इस घटना में अभिनेता सुरक्षित रहे। इन मामलों के बाद फिल्मी हस्तियों की सुरक्षा और जबरन वसूली की आशंकाओं को लेकर सवाल उठे हैं।

    हालांकि, इन घटनाओं के आधार पर लॉरेंस बिश्नोई गैंग को 1990 के दशक की डी-कंपनी के समान व्यापक नियंत्रण वाला संगठन मानना जल्दबाजी होगी। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, मुंबई में रंगदारी के मामले 2024 में 199 थे, जो 2025 में बढ़कर 314 हो गए। लेकिन सभी मामलों को बिश्नोई गैंग से जोड़कर नहीं देखा जा सकता। पुलिस के अनुसार, इनमें स्थानीय स्तर पर सक्रिय छोटे अपराधियों से जुड़े मामले भी शामिल हैं।

    डी-कंपनी का प्रभाव बंदरगाहों, हवाला, रियल एस्टेट, स्थानीय कारोबार और फिल्म उद्योग तक फैला हुआ बताया जाता था। इसके विपरीत, लॉरेंस बिश्नोई गैंग के मुंबई में स्थायी आर्थिक और जमीनी ढांचे को लेकर ऐसी व्यापक तस्वीर सामने नहीं आई है। उसके नेटवर्क पर उत्तर भारत और विदेश में मौजूद लोगों के जरिए गतिविधियां चलाने तथा सोशल मीडिया पर वारदातों की जिम्मेदारी लेकर प्रचार हासिल करने के आरोप लगते रहे हैं। इसलिए मुंबई में अंडरवर्ल्ड का बदलता दौर केवल नामों का बदलाव नहीं, बल्कि अपराध के तरीकों, संपर्क व्यवस्था और पुलिस के सामने खड़ी चुनौतियों में आए परिवर्तन से भी जुड़ा है।

  • भारत-न्यूजीलैंड मुक्त व्यापार समझौते से इंजीनियरिंग निर्यात पांच साल में दोगुना होने की उम्मीद

    भारत-न्यूजीलैंड मुक्त व्यापार समझौते से इंजीनियरिंग निर्यात पांच साल में दोगुना होने की उम्मीद

    नई दिल्ली । भारत और न्यूजीलैंड के बीच मुक्त व्यापार समझौता लागू होने से भारतीय इंजीनियरिंग क्षेत्र को नए अवसर मिलने की उम्मीद है। उद्योग जगत का अनुमान है कि इस समझौते के बाद अगले पांच वर्षों में न्यूजीलैंड को भारत का इंजीनियरिंग निर्यात लगभग दोगुना होकर 28 से 30 करोड़ डॉलर तक पहुंच सकता है। इससे भारतीय निर्माताओं को न्यूजीलैंड के बाजार में अपनी पहुंच बढ़ाने और नए व्यापारिक अवसर तलाशने में मदद मिलने की संभावना है।

    इंजीनियरिंग निर्यात संवर्धन परिषद इंडिया के अध्यक्ष पंकज चड्ढा ने समझौते को भारतीय इंजीनियरिंग उद्योग के लिए महत्वपूर्ण अवसर बताया। उन्होंने कहा कि न्यूजीलैंड भारतीय इंजीनियरिंग उत्पादों के लिए अपेक्षाकृत छोटा बाजार है, लेकिन वहां विकास की पर्याप्त संभावनाएं मौजूद हैं। उनके मुताबिक, मुक्त व्यापार समझौते के लागू होने से इस बाजार में भारतीय कंपनियों के लिए नए रास्ते खुलेंगे।

    भारत का न्यूजीलैंड को इंजीनियरिंग वस्तुओं का निर्यात वर्ष 2024-25 में 12.98 करोड़ डॉलर था, जो 2025-26 में बढ़कर 14.05 करोड़ डॉलर हो गया। निर्यात में हुई इस बढ़ोतरी के बीच उद्योग को उम्मीद है कि व्यापार समझौते से दोनों देशों के बीच इंजीनियरिंग उत्पादों का कारोबार और मजबूत होगा। शुल्क संबंधी रियायतों और बेहतर व्यापारिक पहुंच से भारतीय निर्माताओं को न्यूजीलैंड में अपनी प्रतिस्पर्धात्मक स्थिति सुधारने का अवसर मिल सकता है।

    भारत से न्यूजीलैंड भेजे जाने वाले प्रमुख इंजीनियरिंग उत्पादों में ऑटोमोबाइल, डेयरी उद्योग में इस्तेमाल होने वाली औद्योगिक मशीनरी, चिकित्सा एवं वैज्ञानिक उपकरण, कार्यालय संबंधी उपकरण तथा लोहा और इस्पात उत्पाद शामिल हैं। इन क्षेत्रों में भारतीय कंपनियों के लिए मांग बढ़ने की संभावनाएं हैं। समझौते के बाद निर्यातकों को अपने उत्पादों की पहुंच बढ़ाने और न्यूजीलैंड के बाजार की जरूरतों के अनुरूप कारोबार का विस्तार करने में मदद मिलने की उम्मीद है।

    पंकज चड्ढा ने विशेष रूप से सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों यानी एमएसएमई के लिए इस समझौते को उपयोगी बताया। उनके अनुसार, मुक्त व्यापार समझौता छोटे और मध्यम स्तर के भारतीय इंजीनियरिंग निर्यातकों को अपने उत्पाद पोर्टफोलियो में विविधता लाने का अवसर देगा। इससे वे पारंपरिक बाजारों पर निर्भरता कम करने के साथ न्यूजीलैंड में अपनी व्यावसायिक मौजूदगी बढ़ाने की दिशा में काम कर सकेंगे।

    उद्योग की अपेक्षा है कि आने वाले वर्षों में भारतीय कंपनियां न्यूजीलैंड में इंजीनियरिंग वस्तुओं की आपूर्ति बढ़ाने के लिए नए ग्राहक तलाशेंगी और कारोबार के नए अवसरों का लाभ उठाएंगी। हालांकि, निर्यात में वास्तविक वृद्धि बाजार की मांग, कंपनियों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता और समझौते से मिलने वाले लाभों का उपयोग करने की उनकी क्षमता पर निर्भर करेगी।

    इंजीनियरिंग निर्यात संवर्धन परिषद इंडिया के अनुमान के मुताबिक, अगले पांच वर्षों में न्यूजीलैंड को भारत का इंजीनियरिंग निर्यात बढ़कर 28 से 30 करोड़ डॉलर तक पहुंच सकता है। यह वर्ष 2025-26 के 14.05 करोड़ डॉलर के निर्यात की तुलना में लगभग दोगुना होगा। दोनों देशों के बीच इंजीनियरिंग व्यापार संबंध मजबूत होने से वर्ष 2030 तक भारत के 250 अरब डॉलर के इंजीनियरिंग निर्यात लक्ष्य को हासिल करने की व्यापक कोशिशों को भी बल मिलने की उम्मीद है।

  • टाइगर श्रॉफ पर फायरिंग के बाद बढ़ाई गई सुरक्षा, बॉडीगार्ड के साथ पुलिसकर्मी तैनात, तीन आरोपी गिरफ्तार

    टाइगर श्रॉफ पर फायरिंग के बाद बढ़ाई गई सुरक्षा, बॉडीगार्ड के साथ पुलिसकर्मी तैनात, तीन आरोपी गिरफ्तार


    नई दिल्ली ।
    बॉलीवुड अभिनेता टाइगर श्रॉफ पर फायरिंग की घटना के बाद उनकी सुरक्षा बढ़ा दी गई है। मुंबई पुलिस ने अभिनेता की सुरक्षा के लिए बॉडीगार्ड के साथ पुलिसकर्मियों को भी तैनात किया है। मामले में अब तक तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि अभिनेता को निशाना बनाने के पीछे क्या वजह थी और इस घटना में किन लोगों की भूमिका रही है।

    फायरिंग की घटना के बाद सुरक्षा व्यवस्था में किए गए बदलाव के तहत टाइगर श्रॉफ के साथ निजी सुरक्षा कर्मियों के अलावा पुलिसकर्मी भी तैनात किए गए हैं। उनके नजदीकी पुलिस थाने से एक अधिकारी और कुछ जवानों को सुरक्षा संबंधी जिम्मेदारी दी गई है। हालांकि, पुलिस ने अभी यह स्पष्ट नहीं किया है कि अभिनेता को किस स्तर की सुरक्षा उपलब्ध कराई गई है। जांच अधिकारी मामले से जुड़े विभिन्न पहलुओं की पड़ताल कर रहे हैं।

    प्रारंभिक जांच में पुलिस को आशंका है कि फायरिंग के पीछे लोगों के बीच डर पैदा करने और अभिनेता से पैसे वसूलने की कोशिश हो सकती है। जांच के दौरान लॉरेंस बिश्नोई गिरोह की संभावित भूमिका का पहलू भी सामने आया है। हालांकि, पुलिस ने अभी तक हमले के उद्देश्य या किसी गिरोह की संलिप्तता की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। अधिकारियों का कहना है कि जांच आगे बढ़ने के साथ ही घटना के पीछे की परिस्थितियां स्पष्ट हो सकेंगी।

    इस मामले में तीन आरोपियों की गिरफ्तारी पुलिस के लिए महत्वपूर्ण कड़ी मानी जा रही है। जानकारी के अनुसार, तीनों को सोमवार सुबह राजस्थान के कोटा रेलवे स्टेशन पर एक ट्रेन से पकड़ा गया। पुलिस ने करीब 15 मिनट तक चले अभियान के बाद उन्हें हिरासत में लिया। उस समय तीनों पुणे-जयपुर सुपरफास्ट एक्सप्रेस के सामान्य श्रेणी के डिब्बे में सफर कर रहे थे। ट्रेन सुबह 10 बजकर 17 मिनट पर कोटा स्टेशन पहुंची थी।

    कोटा की पुलिस अधीक्षक तेजस्वनी गौतम के मुताबिक, गिरफ्तार आरोपियों में बिहार के बेगूसराय निवासी ऋतिक उर्फ रोशन और हरियाणा के सोनीपत निवासी रेहान शामिल हैं। उपलब्ध जानकारी में तीसरे आरोपी की पहचान का पूरा विवरण नहीं दिया गया है। पुलिस गिरफ्तारी के बाद आरोपियों से पूछताछ और मामले से जुड़े तथ्यों की जांच कर रही है।

    जांच का एक अहम पहलू यह पता लगाना है कि फायरिंग की योजना कैसे बनाई गई और आरोपियों के बीच क्या संपर्क था। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि घटना को अंजाम देने के पीछे आर्थिक मांग, धमकी या किसी अन्य कारण की भूमिका रही है या नहीं। फिलहाल इन संभावनाओं को जांच के स्तर पर देखा जा रहा है। किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले पुलिस सभी संबंधित साक्ष्यों और आरोपियों से मिली जानकारी का परीक्षण कर रही है।

    टाइगर श्रॉफ की सुरक्षा बढ़ाए जाने के बाद अब मामले की जांच और आरोपियों से पूछताछ पर ध्यान केंद्रित है। पुलिस यह स्पष्ट करने की कोशिश कर रही है कि फायरिंग की घटना में गिरफ्तार लोगों की क्या भूमिका थी और क्या इसके पीछे कोई संगठित गिरोह सक्रिय था। हमले के कारणों, संभावित साजिश और अन्य संबंधित लोगों के बारे में स्थिति जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

  • MP में दशहरे पर शस्त्र पूजन की परंपरा, भोपाल पुलिस लाइन में जुटे जनप्रतिनिधि और पुलिस अधिकारी, सत्य-धर्म के मार्ग पर चलने का संदेश

    MP में दशहरे पर शस्त्र पूजन की परंपरा, भोपाल पुलिस लाइन में जुटे जनप्रतिनिधि और पुलिस अधिकारी, सत्य-धर्म के मार्ग पर चलने का संदेश


    भोपाल । विजयादशमी के अवसर पर मध्य प्रदेश में मंगलवार को शस्त्र पूजन के आयोजन किए गए। राजधानी भोपाल में नेहरू नगर स्थित पुलिस लाइन ग्राउंड में आयोजित कार्यक्रम में मंत्री विश्वास सारंग और सांसद आलोक शर्मा सहित कई जनप्रतिनिधि और वरिष्ठ पुलिस अधिकारी शामिल हुए। इस दौरान पारंपरिक विधि-विधान से शस्त्रों का पूजन किया गया। कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने सुख-समृद्धि शांति और उन्नति की कामना की। विजयादशमी पर आयोजित इस कार्यक्रम में सनातन परंपराओं और शस्त्र पूजन के महत्व पर भी जोर दिया गया।

    भोपाल पुलिस लाइन में आयोजित कार्यक्रम में महापौर मालती राय विधायक भगवानदास सबनानी कमिश्नर कर्मवीर शर्मा पुलिस कमिश्नर संजय कुमार और संयुक्त पुलिस कमिश्नर शैलेंद्र सिंह चौहान भी मौजूद रहे। जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों ने पूजा में भाग लिया। विजयादशमी पर शस्त्र पूजन की परंपरा को शक्ति साहस और सुरक्षा के प्रतीक के रूप में देखा जाता है। इसी परंपरा के तहत भोपाल में भी आयोजन किया गया। कार्यक्रम में शामिल लोगों ने समाज और प्रदेश में शांति तथा समृद्धि बनाए रखने की कामना की।

    मंत्री विश्वास सारंग ने विजयादशमी को बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक पर्व बताया। उन्होंने कहा कि यह त्योहार पूरे विश्व में उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। उनके मुताबिक विजयादशमी लोगों को सत्य धर्म और न्याय के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती है। उन्होंने शस्त्रों को शक्ति साहस और राष्ट्र की सुरक्षा का प्रतीक बताते हुए कहा कि भारतीय परंपराओं में शस्त्र पूजन का विशेष महत्व है। यह परंपरा लोगों को अपनी संस्कृति और मूल्यों से जुड़े रहने का संदेश देती है।

    सारंग ने कहा कि सनातन परंपराएं केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं हैं बल्कि वे लोगों को अपने कर्तव्यों और जिम्मेदारियों का भी बोध कराती हैं। विजयादशमी के अवसर पर शस्त्रों की पूजा इसी सांस्कृतिक परंपरा का हिस्सा है। उन्होंने कहा कि इस दिन लोग बुराई पर अच्छाई की जीत का संकल्प लेते हैं और समाज में सकारात्मकता तथा सद्भाव बनाए रखने की प्रेरणा प्राप्त करते हैं।

    भोपाल के अलावा मध्य प्रदेश के अन्य हिस्सों में भी विजयादशमी पर शस्त्र पूजन के कार्यक्रम आयोजित किए गए। इन आयोजनों में पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार पूजा-अर्चना की गई। शस्त्र पूजन की परंपरा ऐतिहासिक और सांस्कृतिक रूप से महत्वपूर्ण मानी जाती है। इसमें शक्ति के साथ जिम्मेदारी और सुरक्षा के भाव को भी जोड़ा जाता है। पुलिस लाइन में आयोजित कार्यक्रम में जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों की मौजूदगी ने आयोजन को औपचारिक स्वरूप दिया।

    विजयादशमी का पर्व देशभर में अलग-अलग परंपराओं के साथ मनाया जाता है। कहीं रावण दहन के जरिए बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश दिया जाता है तो कहीं शस्त्र पूजन के माध्यम से शक्ति और कर्तव्य के महत्व को याद किया जाता है। भोपाल में आयोजित कार्यक्रम भी इसी परंपरा का हिस्सा रहा। इस अवसर पर उपस्थित लोगों ने प्रदेश में सुख-समृद्धि शांति और उन्नति की कामना की।

  • राम मंदिर के चंदे पर दिग्विजय की पदयात्रा को लेकर हर्षा का बयान, पूछा- पहले मंदिर निर्माण पर उत्साह क्यों नहीं दिखाया

    राम मंदिर के चंदे पर दिग्विजय की पदयात्रा को लेकर हर्षा का बयान, पूछा- पहले मंदिर निर्माण पर उत्साह क्यों नहीं दिखाया


    भोपाल । मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में मॉडल से साध्वी बनीं हर्षा रिछारिया ने पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह की उज्जैन से अयोध्या तक प्रस्तावित सत्य सनातन स्वाभिमान यात्रा पर सवाल उठाए हैं। हर्षा ने दिग्विजय सिंह का सीधे नाम लिए बिना उन पर निशाना साधते हुए कहा कि जब अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण हुआ था तब वैसा उत्साह और खुशी दिखाई नहीं दी जैसी अब मंदिर के चंदे को लेकर सवाल उठाने में नजर आ रही है। उन्होंने यह भी सवाल किया कि चुनाव नजदीक आने पर ही भगवान राम की याद क्यों आ रही है और अब उन्हें इंसाफ दिलाने की बात क्यों की जा रही है।

    दशहरे से पहले दिए गए अपने बयान में हर्षा रिछारिया ने कहा कि एक ओर देशभर में विजयादशमी का पर्व बुराई पर अच्छाई और अधर्म पर धर्म की जीत के प्रतीक के रूप में मनाया जा रहा है वहीं दूसरी ओर मध्य प्रदेश के एक पूर्व मुख्यमंत्री उज्जैन से अयोध्या तक पदयात्रा निकालने की तैयारी कर रहे हैं। हर्षा के मुताबिक इस यात्रा का उद्देश्य राम मंदिर के निर्माण के लिए जुटाए गए चंदे में कथित अनियमितताओं को लेकर सवाल उठाना है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि अब संबंधित नेता भगवान राम को इंसाफ दिलाने का संकल्प लेकर यात्रा पर निकल रहे हैं।

    हर्षा ने राम मंदिर निर्माण से जुड़ी लंबी कानूनी लड़ाई का जिक्र करते हुए विपक्ष की भूमिका पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि मंदिर निर्माण के फैसले के समय विरोध किया गया था और अतीत में भगवान राम के अस्तित्व तथा रामसेतु को लेकर भी सवाल उठाए गए थे। हर्षा का कहना है कि जब राम मंदिर का निर्माण हुआ तब वैसी खुशी और उत्साह दिखाई नहीं दिया जैसा अब मंदिर के चंदे से जुड़े आरोपों को लेकर दिखाया जा रहा है। हालांकि मंदिर निर्माण और उससे जुड़े राजनीतिक विवादों पर अलग-अलग दलों और नेताओं के अपने-अपने विचार रहे हैं।

    अपने बयान में हर्षा ने यात्रा के समय और उसके पीछे की मंशा को लेकर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने पूछा कि राम मंदिर बनने के बाद अब अचानक भगवान राम की शरण में जाने की जरूरत क्यों महसूस हो रही है। उन्होंने चुनाव नजदीक होने या किसी व्यक्ति को पद दिलाने जैसी संभावनाओं का उल्लेख करते हुए यात्रा के उद्देश्य पर सवाल उठाया। ये हर्षा के राजनीतिक आरोप और उनकी व्यक्तिगत व्याख्या हैं। उन्होंने यह भी कहा कि यात्रा निकालने वाले की मंशा पूरी होगी या नहीं यह उन्हें नहीं पता लेकिन देश के लिए जो उचित होगा वही होना चाहिए।

    बयान के आखिर में हर्षा रिछारिया ने दिग्विजय सिंह को यात्रा के लिए शुभकामनाएं भी दीं। उन्होंने कहा कि प्रयास करना चाहिए और अंत में हर व्यक्ति राम की शरण में जाता है। उनके इस बयान के बाद दिग्विजय सिंह की प्रस्तावित पदयात्रा को लेकर राजनीतिक और धार्मिक मुद्दों पर चर्चा तेज हो गई है।

    दिग्विजय सिंह ने उज्जैन से अयोध्या तक करीब 950 से 1000 किलोमीटर की पदयात्रा का ऐलान किया है। यात्रा का उद्देश्य राम मंदिर के लिए जुटाए गए चंदे में कथित अनियमितताओं के मुद्दे को उठाना बताया गया है। प्रस्तावित यात्रा में विभिन्न स्थानों पर लोगों और सामाजिक संगठनों के जुड़ने की संभावना है। हर्षा रिछारिया के बयान ने इस यात्रा को लेकर राजनीतिक बहस को एक नया मोड़ दिया है। अब इस मुद्दे पर संबंधित नेताओं की प्रतिक्रियाओं और यात्रा के दौरान उठाए जाने वाले सवालों पर नजर रहेगी।

  • नरवर में माता विसर्जन जुलूस के दौरान अचानक शुरू हुई मारपीट, मोटे महादेव मंदिर के पास हंगामा, अब तक शिकायत नहीं

    नरवर में माता विसर्जन जुलूस के दौरान अचानक शुरू हुई मारपीट, मोटे महादेव मंदिर के पास हंगामा, अब तक शिकायत नहीं


    शिवपुरी। मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले के नरवर कस्बे में माता की प्रतिमाओं के विसर्जन जुलूस के दौरान दो गुटों के बीच विवाद हो गया। मंगलवार को हुए इस घटनाक्रम में दोनों पक्षों के युवकों के बीच जमकर लात-घूंसे चले। विवाद बढ़ने से मौके पर अफरा-तफरी की स्थिति बन गई। हालात को नियंत्रित करने के लिए वहां मौजूद पुलिसकर्मियों को हस्तक्षेप करना पड़ा। स्थिति संभालने के दौरान पुलिस ने लाठियां चलाकर दोनों पक्षों को अलग किया और झगड़ा शांत कराया। घटना मोटे महादेव मंदिर के पास पेट्रोल पंप के सामने की बताई जा रही है।

    जानकारी के अनुसार नरवर में नवरात्र के अवसर पर स्थापित माता की प्रतिमाओं को नवमी की शाम नगर भ्रमण कराया जा रहा था। इसके बाद प्रतिमाओं को विसर्जन के लिए लखना तालाब ले जाया जा रहा था। जुलूस में श्रद्धालु शामिल थे और प्रतिमाओं को विसर्जन स्थल तक ले जाने की तैयारी चल रही थी। इसी दौरान जुलूस में शामिल दो पक्षों के बीच किसी बात को लेकर कहासुनी शुरू हो गई। शुरुआत में हुआ विवाद देखते ही देखते बढ़ गया और दोनों पक्षों के युवक आमने-सामने आ गए।

    कुछ ही देर में विवाद ने मारपीट का रूप ले लिया। दोनों ओर से युवकों के बीच लात-घूंसे चलने लगे। जुलूस के दौरान अचानक हुए इस घटनाक्रम से वहां मौजूद लोगों में हलचल मच गई। स्थिति बिगड़ती देख पुलिस ने तत्काल हस्तक्षेप किया। पुलिसकर्मियों ने दोनों पक्षों को अलग करने और भीड़ को नियंत्रित करने का प्रयास किया। विवाद बढ़ने पर पुलिस को लाठियां चलानी पड़ीं। इसके बाद झगड़े को शांत कराया गया और मौके पर स्थिति को संभाला गया।

    माता की प्रतिमाओं का विसर्जन धार्मिक आस्था से जुड़ा आयोजन होता है जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल होते हैं। ऐसे में जुलूस के बीच मारपीट की घटना से आयोजन के दौरान सुरक्षा और व्यवस्था को लेकर सवाल उठे हैं। हालांकि विवाद किस बात को लेकर शुरू हुआ और इसमें शामिल लोगों के बीच पहले से कोई रंजिश थी या नहीं इसकी जानकारी अभी सामने नहीं आई है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार दोनों पक्षों के बीच कहासुनी के बाद मारपीट शुरू हुई थी। घटना के पीछे की वास्तविक वजह पुलिस जांच या संबंधित पक्षों के बयान सामने आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

    नरवर थाना प्रभारी अरुण प्रताप सिंह ने बताया कि घटना के संबंध में अब तक किसी भी पक्ष की ओर से थाने में शिकायत दर्ज नहीं कराई गई है। शिकायत नहीं मिलने के कारण फिलहाल मामले में आगे की कार्रवाई को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है। पुलिस की मौजूदगी में विवाद शांत करा दिया गया था। यदि किसी पक्ष की ओर से शिकायत दी जाती है तो उसके आधार पर मामले की जांच और आवश्यक कार्रवाई की जा सकती है।

    फिलहाल घटना में शामिल युवकों की पहचान और विवाद की वजह को लेकर विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है। माता विसर्जन जुलूस के दौरान हुई इस मारपीट ने धार्मिक आयोजन के बीच तनाव की स्थिति पैदा कर दी। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर हालात नियंत्रित किए और जुलूस के दौरान व्यवस्था संभाली। अब तक किसी पक्ष की शिकायत दर्ज नहीं होने के कारण मामले में अगला कदम शिकायत और उपलब्ध तथ्यों के आधार पर तय होगा।

  • खेत से घर लौट रहा किसान आग की चपेट में आया, बिजली के तारों से सुलगी मक्के की करप, लाखों के नुकसान की आशंका

    खेत से घर लौट रहा किसान आग की चपेट में आया, बिजली के तारों से सुलगी मक्के की करप, लाखों के नुकसान की आशंका


    शिवपुरी। मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले में मंगलवार सुबह एक हादसे में किसान की मक्के की पूरी करप जलकर राख हो गई। घटना इंदार थाना क्षेत्र के बामौर खुर्द गांव की है। यहां खेत से मक्के की करप ट्रैक्टर-ट्रॉली में भरकर घर ले जा रहे किसान मोहन सिंह कुशवाह की ट्रॉली बिजली के तारों के संपर्क में आ गई। तार छूते ही सूखी मक्के की करप में आग लग गई और देखते ही देखते लपटें तेज हो गईं। हालांकि समय रहते ग्रामीणों ने मोर्चा संभाल लिया और जलती हुई करप को ट्रॉली से नीचे गिराना शुरू कर दिया। इससे आग ट्रैक्टर तक नहीं पहुंच सकी और चालक की जान बच गई।

    जानकारी के अनुसार किसान मोहन सिंह कुशवाह अपने खेत से मक्के की करप ट्रैक्टर-ट्रॉली में भरकर घर लौट रहे थे। रास्ते में बिजली के खंभों पर लटके पंप लाइन के तार ट्रॉली में भरी करप से टकरा गए। तारों के संपर्क में आते ही सूखी फसल ने आग पकड़ ली। कुछ ही देर में ट्रॉली में भरी करप जलने लगी। अचानक आग भड़कने से मौके पर अफरा तफरी मच गई। किसान के सामने एक ओर उसकी मेहनत से जुटाई गई फसल जलने का खतरा था तो दूसरी ओर आग के ट्रैक्टर तक पहुंचने की आशंका भी बनी हुई थी।

    घटना के दौरान आसपास मौजूद ग्रामीण तुरंत मदद के लिए आगे आए। उन्होंने लाठियों की मदद से ट्रॉली में जल रही करप को नीचे गिराना शुरू किया। ग्रामीणों ने तेजी से एक के बाद एक जलती हुई फसल को नीचे गिराया ताकि आग ट्रैक्टर और ट्रॉली के दूसरे हिस्सों तक न फैल सके। उनकी तत्परता से आग को वाहन तक पहुंचने से रोकने में मदद मिली। इससे ट्रैक्टर-ट्रॉली जलने से बच गए और चालक भी सुरक्षित रहा। यदि आग वाहन तक पहुंच जाती तो बड़ा हादसा हो सकता था।

    हालांकि इस प्रयास के बावजूद किसान की मक्के की पूरी करप जलकर राख हो गई। फसल के नष्ट होने से किसान को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा है। मक्के की करप पशुओं के चारे सहित खेती से जुड़े अन्य कामों में उपयोग की जाती है। ऐसे में पूरी करप का जल जाना किसान के लिए परेशानी बढ़ाने वाला है। नुकसान की वास्तविक कीमत कितनी है इसकी जानकारी सामने नहीं आई है।

    इस घटना ने गांवों में खेतों से फसल और चारा ले जाते समय बिजली की लाइनों से होने वाले खतरे को भी उजागर किया है। ट्रैक्टर-ट्रॉली में ऊंचाई तक भरी सूखी फसल बिजली के तारों के संपर्क में आ जाए तो आग लगने का जोखिम बढ़ जाता है। खासकर पंप लाइन के तार यदि नीचे लटक रहे हों तो किसानों और ग्रामीणों के लिए खतरा पैदा हो सकता है। ऐसे में बिजली लाइनों की उचित ऊंचाई और रखरखाव पर ध्यान देना जरूरी है। फिलहाल इस हादसे में राहत की बात यह रही कि किसान की जान बच गई और ट्रैक्टर-ट्रॉली सुरक्षित रहे लेकिन उसकी पूरी मक्के की करप जलने से बड़ा नुकसान हुआ।