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  • आयुष्मान कार्ड का बड़ा लाभ, लाखों रुपये की एयर एम्बुलेंस सेवा मिली मुफ्त, बुजुर्ग की बची जान

    आयुष्मान कार्ड का बड़ा लाभ, लाखों रुपये की एयर एम्बुलेंस सेवा मिली मुफ्त, बुजुर्ग की बची जान


    नर्मदापुरम।नर्मदापुरम जिले में स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक पहल देखने को मिली जब पहली बार पीएम श्री एयर एम्बुलेंस सेवा के माध्यम से एक गंभीर मरीज को त्वरित उपचार के लिए एयरलिफ्ट कर नागपुर भेजा गया। इस अत्याधुनिक और महंगी चिकित्सा सुविधा का लाभ 83 वर्षीय बुजुर्ग रामगोपाल टोकसे को मिला जो गंभीर बीमारी से जूझ रहे थे। खास बात यह रही कि आयुष्मान भारत योजना के तहत पात्र होने के कारण मरीज को यह सुविधा पूरी तरह निशुल्क उपलब्ध कराई गई जिससे लाखों रुपये का खर्च बच गया।

    रसूलिया शिवाजीनगर निवासी रामगोपाल टोकसे नर्मदापुरम के एक निजी अस्पताल में उपचाररत थे। उनकी स्थिति अत्यंत गंभीर थी और वे ब्रेन हैमरेज तथा मल्टी ऑर्गन फेलियर जैसी जटिल स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे थे। चिकित्सकों ने उनकी नाजुक हालत को देखते हुए उच्च स्तरीय चिकित्सा सुविधा वाले अस्पताल में तत्काल रेफर करने की सलाह दी। इसके बाद परिजनों ने प्रशासन से पीएम श्री एयर एम्बुलेंस सेवा उपलब्ध कराने का अनुरोध किया।

    मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. नरसिंह गहलोत और डिप्टी कलेक्टर डॉ. बबिता राठौर के मार्गदर्शन में प्रशासन ने तुरंत कार्रवाई शुरू की। प्रारंभिक योजना के अनुसार हेलीकॉप्टर को नर्मदापुरम स्थित एसपीएम केंद्रीय विद्यालय मैदान में बनाए गए हेलीपैड पर उतरना था। हालांकि लगातार हो रही बारिश के कारण मैदान की स्थिति अनुकूल नहीं रही और अंतिम समय में स्थान परिवर्तन का निर्णय लेना पड़ा।

    स्थिति की गंभीरता को देखते हुए नर्मदापुरम प्रशासन ने सीहोर जिला प्रशासन से समन्वय स्थापित किया और बुधनी स्थित ट्राइडेंट कंपनी के हेलीपैड को वैकल्पिक स्थल के रूप में चुना गया। प्रशासनिक टीमों की सक्रियता और बेहतर समन्वय के कारण एयर एम्बुलेंस गुरुवार सुबह 11 बजकर 15 मिनट पर बुधनी पहुंची और मरीज को लेकर नागपुर के लिए रवाना हो गई।

    पूरे ऑपरेशन की सबसे बड़ी सफलता यह रही कि एयर एम्बुलेंस ने महज 1 घंटा 15 मिनट में नागपुर पहुंचकर नया रिकॉर्ड बनाया। दोपहर 12 बजकर 30 मिनट पर हेलीकॉप्टर नागपुर पहुंचा और मात्र 15 मिनट बाद मरीज को अस्पताल में भर्ती करा दिया गया। समय पर मिले इस उपचार से मरीज को बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध हो सकी।

    मरीज के पुत्र ऋतिक टोकसे ने इस सहायता के लिए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और जिला प्रशासन का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यदि यह सुविधा नहीं मिलती तो परिवार के लिए इतना बड़ा खर्च वहन करना संभव नहीं था। उन्होंने प्रशासन की त्वरित कार्रवाई और मानवीय संवेदनशीलता की सराहना की।

    नर्मदापुरम में पहली बार सफलतापूर्वक संचालित हुई पीएम श्री एयर एम्बुलेंस सेवा ने यह साबित कर दिया है कि आपातकालीन परिस्थितियों में आधुनिक स्वास्थ्य सेवाएं लोगों के लिए जीवनरक्षक साबित हो सकती हैं। यह पहल प्रदेश में स्वास्थ्य सुविधाओं को नई दिशा देने के साथ आम लोगों के लिए बड़ी राहत बनकर सामने आई है।

  • बारिश में बाधित नहीं होगा सफर, राष्ट्रीय राजमार्गों पर ड्रेनेज, निगरानी और रैपिड रिस्पॉन्स सिस्टम पर गडकरी का जोर

    बारिश में बाधित नहीं होगा सफर, राष्ट्रीय राजमार्गों पर ड्रेनेज, निगरानी और रैपिड रिस्पॉन्स सिस्टम पर गडकरी का जोर

    नई दिल्ली । मानसून के दौरान राष्ट्रीय राजमार्गों पर जलभराव, भूस्खलन और यातायात अवरोध जैसी समस्याओं को रोकने के लिए केंद्र सरकार ने तैयारियों को तेज करने के निर्देश दिए हैं। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में चल रही राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को स्पष्ट रूप से कहा है कि बारिश के मौसम में सड़क नेटवर्क को सुरक्षित, सुचारु और बाधारहित बनाए रखने के लिए सभी आवश्यक कदम समय रहते पूरे किए जाएं।

    हाल ही में आयोजित समीक्षा बैठकों में तेलंगाना, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में संचालित राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं की प्रगति, गुणवत्ता और रखरखाव की स्थिति का विस्तृत आकलन किया गया। इन क्षेत्रों में हजारों किलोमीटर लंबाई वाले राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क को ध्यान में रखते हुए मंत्रालय ने मानसून से पहले विशेष सतर्कता बरतने की आवश्यकता पर जोर दिया है। समीक्षा के दौरान सड़कों की वर्तमान स्थिति, निर्माण कार्यों की गति और सुरक्षा मानकों के अनुपालन पर भी चर्चा की गई।

    मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि राष्ट्रीय राजमार्गों पर प्रभावी ड्रेनेज व्यवस्था सुनिश्चित की जाए ताकि भारी बारिश के दौरान सड़कों पर पानी जमा न हो। अक्सर देखा जाता है कि अपर्याप्त जल निकासी व्यवस्था के कारण सड़कें जलमग्न हो जाती हैं, जिससे यातायात प्रभावित होने के साथ-साथ दुर्घटनाओं का खतरा भी बढ़ जाता है। इसी को ध्यान में रखते हुए ड्रेनेज सिस्टम को मजबूत बनाने को प्राथमिकता दी गई है।

    गडकरी ने पहाड़ी और संवेदनशील क्षेत्रों में ढलानों की स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए विशेष उपाय अपनाने के निर्देश भी दिए। जम्मू-कश्मीर और लद्दाख जैसे क्षेत्रों में मानसून और खराब मौसम के दौरान भूस्खलन की घटनाएं आम हैं, जिससे सड़क संपर्क बाधित हो सकता है। ऐसे में स्लोप स्टेबिलाइजेशन और सुरक्षा संरचनाओं को मजबूत बनाना आवश्यक माना गया है।

    समीक्षा बैठकों में यह भी स्पष्ट किया गया कि मौसम संबंधी आपात परिस्थितियों से निपटने के लिए त्वरित प्रतिक्रिया प्रणाली विकसित की जाए। इसके तहत ऐसे तंत्र तैयार किए जाएंगे जो किसी भी आपदा, सड़क अवरोध या संरचनात्मक समस्या की स्थिति में तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित कर सकें। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि राहत और मरम्मत कार्यों के लिए आवश्यक संसाधन पहले से उपलब्ध रखे जाएं ताकि यात्रियों को न्यूनतम असुविधा हो।

    मंत्री ने परियोजनाओं के समयबद्ध क्रियान्वयन और गुणवत्ता नियंत्रण पर भी विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि केवल निर्माण कार्य पूरा करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करना भी जरूरी है कि सड़कें लंबे समय तक टिकाऊ और सुरक्षित बनी रहें। इसके लिए आधुनिक इंजीनियरिंग तकनीकों, उन्नत निर्माण पद्धतियों और मजबूत निगरानी तंत्र को अपनाने की आवश्यकता बताई गई।

    गडकरी ने अधिकारियों और कार्यान्वयन एजेंसियों को जवाबदेही बढ़ाने तथा नियमित निरीक्षण करने के निर्देश दिए। उनका मानना है कि मजबूत निगरानी व्यवस्था से परियोजनाओं की गुणवत्ता में सुधार होगा और निर्माण के दौरान संभावित कमियों की समय रहते पहचान की जा सकेगी। इससे राष्ट्रीय राजमार्गों का दीर्घकालिक प्रदर्शन बेहतर होगा और रखरखाव की लागत भी कम की जा सकेगी।

    उन्होंने कहा कि अच्छी गुणवत्ता वाले और सुरक्षित राष्ट्रीय राजमार्ग केवल परिवहन सुविधा तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे क्षेत्रीय विकास, व्यापार, पर्यटन और रोजगार के अवसरों को भी गति देते हैं। ऐसे में मानसून से पहले व्यापक तैयारी करना और सड़क बुनियादी ढांचे को मौसम संबंधी चुनौतियों के लिए तैयार रखना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है। मंत्रालय का मानना है कि इन कदमों से राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क अधिक मजबूत, सुरक्षित और यात्रियों के लिए सुविधाजनक बन सकेगा।

  • नम आंखों से पंडित प्रदीप मिश्रा ने दी श्रद्धांजलि, लखनऊ हादसे में बच्चों की मौत पर जताया गहरा शोक

    नम आंखों से पंडित प्रदीप मिश्रा ने दी श्रद्धांजलि, लखनऊ हादसे में बच्चों की मौत पर जताया गहरा शोक


    सीहोर। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में हुए दर्दनाक हादसे ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। इस हृदयविदारक घटना पर अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त कथा वाचक पंडित प्रदीप मिश्रा ने गहरा दुख व्यक्त करते हुए मृत बच्चों को श्रद्धांजलि अर्पित की है। हादसे की जानकारी मिलते ही वे बेहद भावुक हो गए और उन्होंने पीड़ित परिवारों के प्रति अपनी संवेदनाएं व्यक्त कीं।

    कथा के दौरान जारी अपने संदेश में पंडित प्रदीप मिश्रा ने कहा कि मासूम बच्चों का असमय इस दुनिया से चले जाना अत्यंत पीड़ादायक और दुखद है। उन्होंने कहा कि किसी भी परिवार के लिए अपने बच्चे को खोने का दुख शब्दों में व्यक्त नहीं किया जा सकता। यह ऐसी क्षति है जिसकी भरपाई कभी संभव नहीं होती। उन्होंने कहा कि इस कठिन समय में उनकी संवेदनाएं पूरी तरह से उन परिवारों के साथ हैं जिन्होंने अपने प्रियजनों को खोया है।

    पंडित मिश्रा ने दिवंगत बच्चों को श्रद्धांजलि देते हुए ईश्वर से प्रार्थना की कि वे सभी मासूम आत्माओं को अपने श्रीचरणों में स्थान प्रदान करें। साथ ही उन्होंने भगवान शिव से प्रार्थना की कि शोक संतप्त परिवारों को इस असहनीय दुख को सहने की शक्ति और साहस मिले। उन्होंने कहा कि ऐसी घटनाएं पूरे समाज को भीतर तक झकझोर देती हैं और हर संवेदनशील व्यक्ति को पीड़ा पहुंचाती हैं।

    उन्होंने हादसे में घायल हुए लोगों के शीघ्र स्वस्थ होने की भी कामना की। पंडित प्रदीप मिश्रा ने कहा कि ईश्वर सभी घायलों को जल्द स्वास्थ्य लाभ प्रदान करें और उन्हें इस कठिन परिस्थिति से बाहर निकलने की शक्ति दें। उन्होंने लोगों से भी पीड़ित परिवारों के लिए प्रार्थना करने और दुख की इस घड़ी में उनके साथ खड़े रहने की अपील की।

    पंडित प्रदीप मिश्रा के इस भावुक संदेश के बाद देश और विदेश में मौजूद उनके लाखों अनुयायियों ने भी सोशल मीडिया और विभिन्न माध्यमों से हादसे पर शोक व्यक्त किया। श्रद्धालुओं ने दिवंगत बच्चों की आत्मा की शांति तथा पीड़ित परिवारों को संबल प्रदान करने के लिए प्रार्थनाएं कीं।

    लखनऊ की इस दुखद घटना ने एक बार फिर सभी को जीवन की अनिश्चितताओं का एहसास कराया है। पूरे देश में इस हादसे को लेकर शोक का माहौल है और लोग मृतकों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए पीड़ित परिवारों के प्रति संवेदना जता रहे हैं।

  • पीएम मोदी से मुलाकात के बाद अमेजन का बड़ा दांव, भारत में 1.24 लाख करोड़ रुपये के नए निवेश से एआई और क्लाउड सेक्टर को मिलेगी रफ्तार

    पीएम मोदी से मुलाकात के बाद अमेजन का बड़ा दांव, भारत में 1.24 लाख करोड़ रुपये के नए निवेश से एआई और क्लाउड सेक्टर को मिलेगी रफ्तार

    नई दिल्ली । भारत वैश्विक निवेशकों के लिए लगातार आकर्षण का केंद्र बनता जा रहा है और दुनिया की अग्रणी प्रौद्योगिकी एवं ई-कॉमर्स कंपनियां देश में अपनी मौजूदगी और निवेश बढ़ाने पर विशेष ध्यान दे रही हैं। इसी क्रम में अमेजन ने भारत में 13 अरब डॉलर यानी लगभग 1.24 लाख करोड़ रुपये के नए निवेश की घोषणा कर एक बड़ा संकेत दिया है। यह निवेश मुख्य रूप से कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) और क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर के विस्तार पर केंद्रित रहेगा।

    अमेजन के मुख्य कार्यकारी अधिकारी एंडी जेसी के भारत दौरे और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात के बाद यह घोषणा सामने आई है। कंपनी का कहना है कि भारत आने वाले वर्षों में उसके सबसे महत्वपूर्ण रणनीतिक बाजारों में शामिल रहेगा। नए निवेश के साथ देश में डिजिटल बुनियादी ढांचे को मजबूत करने, तकनीकी नवाचार को बढ़ावा देने और व्यवसायों को आधुनिक तकनीकों से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए जाएंगे।

    कंपनी के ताजा निवेश प्रस्ताव के बाद भारत में अमेजन की कुल घोषित निवेश योजना 48 अरब डॉलर तक पहुंच गई है। इससे पहले कंपनी ने दिसंबर 2025 में 35 अरब डॉलर के बड़े निवेश की घोषणा की थी। दोनों घोषणाओं को मिलाकर देखा जाए तो केवल छह महीनों के भीतर अमेजन ने भारत में 48 अरब डॉलर निवेश की प्रतिबद्धता जताई है, जो देश की डिजिटल अर्थव्यवस्था पर उसके बढ़ते विश्वास को दर्शाता है।

    अमेजन के अनुसार, वर्ष 2030 तक एआई और क्लाउड सेवाओं की मांग में तेज वृद्धि होने की संभावना है। इसी को ध्यान में रखते हुए कंपनी भारत में डेटा सेंटर, क्लाउड नेटवर्क, डिजिटल सेवाओं और एआई आधारित समाधानों के विस्तार पर विशेष फोकस करेगी। इससे न केवल बड़ी कंपनियों बल्कि स्टार्टअप, डेवलपर्स, छोटे व्यवसायों और सार्वजनिक संस्थानों को भी आधुनिक तकनीकी संसाधनों तक बेहतर पहुंच मिल सकेगी।

    कंपनी के वरिष्ठ नेतृत्व का मानना है कि भारत दुनिया के सबसे तेजी से विकसित हो रहे डिजिटल बाजारों में से एक है। ई-कॉमर्स, डिजिटल भुगतान, क्लाउड कंप्यूटिंग और एआई जैसे क्षेत्रों में तेजी से बढ़ती मांग ने वैश्विक कंपनियों के लिए नए अवसर पैदा किए हैं। अमेजन लंबे समय से भारतीय बाजार में सक्रिय है और लाखों ग्राहकों, विक्रेताओं तथा उद्यमियों को विभिन्न सेवाएं उपलब्ध करा रही है।

    एंडी जेसी ने भारत में कंपनी की भूमिका को केवल व्यवसाय तक सीमित न बताते हुए रोजगार और उद्यमिता से भी जोड़ा। उनके अनुसार, अमेजन ने प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लाखों रोजगार अवसरों के सृजन में योगदान दिया है। कंपनी का दावा है कि उसके डिजिटल प्लेटफॉर्म ने भारतीय उत्पादों को वैश्विक बाजारों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, जिससे निर्यात को भी बढ़ावा मिला है।

    कंपनी ने छोटे और मध्यम कारोबारियों को तकनीकी रूप से सशक्त बनाने की दिशा में भी कई योजनाएं तैयार की हैं। एआई आधारित समाधान, डिजिटल टूल्स और क्लाउड सेवाओं के माध्यम से लाखों छोटे व्यवसायों को आधुनिक तकनीक से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है। साथ ही शिक्षा क्षेत्र में भी तकनीकी पहुंच बढ़ाने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं, ताकि आने वाले वर्षों में अधिक से अधिक छात्रों और संस्थानों को डिजिटल संसाधनों का लाभ मिल सके।

    विशेषज्ञों का मानना है कि अमेजन की यह निवेश योजना भारत के डिजिटल परिवर्तन अभियान को नई गति दे सकती है। एआई, क्लाउड और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर में होने वाला निवेश न केवल तकनीकी क्षेत्र को मजबूत करेगा बल्कि रोजगार, नवाचार और आर्थिक विकास के नए अवसर भी पैदा करेगा। भारत में वैश्विक कंपनियों की बढ़ती भागीदारी यह संकेत देती है कि देश भविष्य की डिजिटल अर्थव्यवस्था के प्रमुख केंद्रों में अपनी मजबूत पहचान बना रहा है।

  • घर की चौखट से आत्मनिर्भरता तक का सफर, भरतपुर की महिलाओं ने मिट्टी की कला को बनाया आय और पहचान का नया माध्यम

    घर की चौखट से आत्मनिर्भरता तक का सफर, भरतपुर की महिलाओं ने मिट्टी की कला को बनाया आय और पहचान का नया माध्यम

    नई दिल्ली । राजस्थान के भरतपुर जिले में महिलाओं का पारंपरिक कौशल आज आर्थिक सशक्तिकरण का मजबूत माध्यम बनकर उभर रहा है। वर्षों से घरों तक सीमित रहने वाली मिट्टी और चीनी मिट्टी के बर्तन बनाने की कला अब महिलाओं को नई पहचान, सम्मान और आय प्रदान कर रही है। स्थानीय बाजारों में इन उत्पादों की बढ़ती मांग ने न केवल उनकी आर्थिक स्थिति को मजबूत किया है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी नई गति दी है।

    भरतपुर के शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में बड़ी संख्या में महिलाएं अपने घरों से ही मिट्टी और चीनी मिट्टी के विभिन्न उत्पाद तैयार कर रही हैं। इन उत्पादों में कुल्हड़, गिलास, कटोरी, प्लेट, सजावटी सामान और अन्य उपयोगी वस्तुएं शामिल हैं। पारंपरिक कारीगरी और आकर्षक डिजाइनों के कारण ये उत्पाद ग्राहकों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं। स्थानीय बाजारों के अलावा मेलों और विशेष आयोजनों में भी इनकी मांग लगातार बढ़ रही है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि आधुनिक दौर में पर्यावरण अनुकूल और पारंपरिक उत्पादों की ओर लोगों का झुकाव बढ़ा है। यही कारण है कि मिट्टी से बने बर्तनों को ग्राहक प्राथमिकता दे रहे हैं। इन उत्पादों की उपयोगिता के साथ-साथ इनका सांस्कृतिक महत्व भी लोगों को आकर्षित करता है। भरतपुर की महिलाओं ने इसी बदलती मांग को अवसर में बदलते हुए अपने कौशल को व्यवसाय का रूप दिया है।

    इस परिवर्तन में स्वयं सहायता समूहों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। समूहों से जुड़ने के बाद महिलाओं को आर्थिक सहायता, प्रशिक्षण और बाजार तक पहुंच जैसी सुविधाएं मिलने लगी हैं। इससे उनके काम में स्थिरता आई है और उत्पादन क्षमता भी बढ़ी है। कई महिलाएं अब व्यक्तिगत स्तर से आगे बढ़कर समूह आधारित उत्पादन और बिक्री मॉडल अपना रही हैं, जिससे उनकी आय में निरंतर वृद्धि हो रही है।

    महिलाओं द्वारा तैयार किए गए बर्तन और सजावटी उत्पाद सड़कों के किनारे लगाए गए स्टॉलों पर आसानी से देखे जा सकते हैं। स्थानीय निवासी, पर्यटक और राहगीर इन उत्पादों को पसंद कर रहे हैं। त्योहारों, धार्मिक आयोजनों और विशेष अवसरों पर इनकी बिक्री में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की जाती है। इससे महिलाओं को अतिरिक्त आय अर्जित करने का अवसर मिलता है और उनका आत्मविश्वास भी बढ़ता है।

    इन उत्पादों की कीमतें भी ग्राहकों की पहुंच के अनुरूप रखी जाती हैं। छोटे आकार के बर्तन कम कीमत पर उपलब्ध होते हैं, जबकि बड़े और विशेष डिजाइन वाले उत्पाद अपेक्षाकृत अधिक मूल्य पर बेचे जाते हैं। किफायती दरों और आकर्षक स्वरूप के कारण ग्राहक इनकी ओर आकर्षित होते हैं। यही वजह है कि स्थानीय बाजार में इन उत्पादों की मांग लगातार मजबूत बनी हुई है।

    आर्थिक लाभ के साथ-साथ इस पहल का सामाजिक प्रभाव भी दिखाई दे रहा है। जो महिलाएं पहले केवल घरेलू जिम्मेदारियों तक सीमित थीं, वे अब परिवार की आय में महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं। इससे उनके निर्णय लेने की क्षमता और सामाजिक भागीदारी में भी वृद्धि हुई है। ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं की यह बढ़ती सक्रियता अन्य महिलाओं को भी स्वरोजगार की दिशा में प्रेरित कर रही है।

    सरकार और प्रशासन द्वारा भी स्वयं सहायता समूहों और महिला उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न योजनाओं के माध्यम से सहयोग प्रदान किया जा रहा है। प्रशिक्षण कार्यक्रमों, वित्तीय सहायता और विपणन सुविधाओं के जरिए महिलाओं को अपने व्यवसाय को आगे बढ़ाने का अवसर मिल रहा है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर सृजित हो रहे हैं और स्थानीय स्तर पर आर्थिक गतिविधियों को मजबूती मिल रही है।

    भरतपुर की महिलाओं की यह सफलता कहानी दर्शाती है कि पारंपरिक हुनर यदि सही अवसर और समर्थन के साथ जोड़ा जाए तो वह आत्मनिर्भरता का मजबूत आधार बन सकता है। मिट्टी के बर्तनों के माध्यम से ये महिलाएं न केवल अपनी आर्थिक स्थिति सुधार रही हैं, बल्कि स्थानीय हस्तशिल्प परंपरा को भी नई पहचान दिला रही हैं। उनकी यह पहल आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को जमीनी स्तर पर साकार करने की एक प्रेरक मिसाल बनकर सामने आई है।

  • NCERT की नई कन्नड़ पाठ्यपुस्तक पर छिड़ा विवाद, ‘कृष्णा’ नाम और खान-पान को लेकर उठे सवालों पर बोर्ड ने दी विस्तृत सफाई

    NCERT की नई कन्नड़ पाठ्यपुस्तक पर छिड़ा विवाद, ‘कृष्णा’ नाम और खान-पान को लेकर उठे सवालों पर बोर्ड ने दी विस्तृत सफाई

    नई दिल्ली । राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) की कक्षा 6 की नई कन्नड़ पाठ्यपुस्तक को लेकर सोशल मीडिया और विभिन्न मंचों पर छिड़े विवाद के बीच शिक्षा बोर्ड को आधिकारिक स्पष्टीकरण जारी करना पड़ा है। हाल के दिनों में कुछ पोस्ट और रिपोर्टों में यह दावा किया गया था कि नई पाठ्यपुस्तक में ‘कृष्णा’ नाम से जुड़े संदर्भों में बदलाव किया गया है और भारत की खान-पान संस्कृति का वर्णन करते समय मांसाहारी भोजन को जानबूझकर नजरअंदाज किया गया है। इन दावों के वायरल होने के बाद NCERT ने पूरे मामले पर अपनी स्थिति स्पष्ट की है।

    बोर्ड ने कहा है कि नई पुस्तकों को लेकर सोशल मीडिया पर प्रसारित की जा रही कई जानकारियां अधूरी और भ्रामक हैं। परिषद के अनुसार पाठ्यपुस्तकों में किसी प्रकार के तथ्यात्मक बदलाव या सांस्कृतिक पक्षपात के आरोप निराधार हैं। शिक्षा बोर्ड का कहना है कि नई किताबों को निर्धारित शैक्षणिक प्रक्रियाओं, विशेषज्ञों की सलाह और राष्ट्रीय शिक्षा नीति के दिशा-निर्देशों के आधार पर तैयार किया गया है।

    विवाद का सबसे चर्चित पहलू ‘कृष्णा’ नाम से जुड़ा रहा। सोशल मीडिया पर यह दावा किया गया कि नई कन्नड़ पुस्तक में ‘कृष्णा’ नाम को हटाया गया या उसमें बदलाव किया गया है। इस पर NCERT ने स्पष्ट किया कि जिस संदर्भ की चर्चा की जा रही है, वह भूगोल विषय से संबंधित है और उसमें भारत की प्रमुख नदियों का वर्णन किया गया है। बोर्ड के अनुसार पुस्तक में कृष्णा नदी का नाम यथावत मौजूद है और उसमें किसी प्रकार का परिवर्तन नहीं किया गया है। परिषद ने कहा कि भौगोलिक तथ्यों को पूरी प्रामाणिकता के साथ प्रस्तुत किया गया है।

    दूसरा विवाद भोजन संस्कृति से जुड़ा रहा। कुछ लोगों ने आरोप लगाया कि पुस्तक में भारतीय खान-पान की विविधता को दर्शाते समय मांसाहारी भोजन के उल्लेख को शामिल नहीं किया गया। इस पर NCERT ने कहा कि भारत की सांस्कृतिक और सामाजिक विविधता को ध्यान में रखते हुए सामग्री तैयार की जाती है। पुस्तकों में विभिन्न क्षेत्रों की जीवनशैली, परंपराओं और खान-पान संबंधी विशेषताओं को संतुलित तरीके से प्रस्तुत करने का प्रयास किया गया है। बोर्ड का कहना है कि किसी विशेष भोजन पद्धति को जानबूझकर बाहर रखने का दावा वास्तविक तथ्यों से मेल नहीं खाता।

    NCERT ने यह भी स्पष्ट किया कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप तैयार की जा रही नई पुस्तकों का उद्देश्य विद्यार्थियों को केवल रटने की शिक्षा देना नहीं, बल्कि व्यावहारिक समझ और अनुभव आधारित सीखने को बढ़ावा देना है। इसी दृष्टिकोण से पाठ्यसामग्री को सरल, स्थानीय और विद्यार्थियों के परिवेश से जोड़ने का प्रयास किया जाता है। कई बार क्षेत्रीय भाषाओं में अनुवाद के दौरान उदाहरणों और संदर्भों को स्थानीय संदर्भों के अनुरूप प्रस्तुत किया जाता है, जिससे कुछ लोगों के बीच भ्रम की स्थिति उत्पन्न हो सकती है।

    बोर्ड ने कहा कि यदि किसी पाठ्यपुस्तक में भाषाई, तकनीकी या अनुवाद संबंधी कोई त्रुटि सामने आती है, तो उसे विशेषज्ञ समितियों की समीक्षा के बाद सुधारा जाता है। ऐसे मामलों को किसी छिपे हुए एजेंडे या बड़े वैचारिक बदलाव के रूप में प्रस्तुत करना उचित नहीं है। शिक्षा से जुड़े विषयों पर तथ्यात्मक जानकारी के आधार पर ही चर्चा होनी चाहिए।

    NCERT ने अभिभावकों, शिक्षकों और विद्यार्थियों से अपील की है कि वे सोशल मीडिया पर प्रसारित अपुष्ट सूचनाओं पर भरोसा करने से पहले आधिकारिक स्रोतों से जानकारी की पुष्टि करें। परिषद का कहना है कि सभी नई पाठ्यपुस्तकें और उनका डिजिटल संस्करण सार्वजनिक रूप से उपलब्ध हैं, जहां कोई भी व्यक्ति सामग्री की स्वयं जांच कर सकता है। बोर्ड ने दोहराया कि शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता, तथ्यात्मकता और शैक्षणिक गुणवत्ता बनाए रखना उसकी सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है।

  • देवास में दर्दनाक हादसा: तेज बहाव वाले रपटे को पार करना पड़ा भारी, दो युवकों की मौत

    देवास में दर्दनाक हादसा: तेज बहाव वाले रपटे को पार करना पड़ा भारी, दो युवकों की मौत

    देवास ।मध्य प्रदेश के देवास जिले में लगातार हो रही बारिश के बीच एक दर्दनाक हादसे ने पूरे क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया। सतवास थाना क्षेत्र के कोथमीर रपटे पर उफनते नाले को पार करने की कोशिश कर रहे बाइक सवार दो युवक तेज बहाव में बह गए। घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस, एसडीआरएफ और स्थानीय ग्रामीणों ने रातभर संयुक्त सर्च अभियान चलाया। कई घंटों की तलाश के बाद दोनों युवकों के शव अलग-अलग स्थानों से बरामद किए गए। हादसे के बाद पूरे इलाके में शोक और गम का माहौल है।

    जानकारी के अनुसार मृतक धर्मेंद्र उम्र 34 वर्ष और अमित उम्र 24 वर्ष कन्नौद के निवासी थे। दोनों पीपलकोटा स्थित एक निजी फाइनेंस कंपनी में कार्यरत थे। मंगलवार शाम काम खत्म करने के बाद दोनों बाइक से अपने घर लौट रहे थे। इसी दौरान पीपलकोटा और कोथमीर के बीच स्थित खेत वाले रपटे पर पहुंचे तो वहां नाले में तेज बहाव था। स्थानीय ग्रामीणों ने उन्हें आगे बढ़ने से रोकने और पानी कम होने तक इंतजार करने की सलाह दी, लेकिन दोनों ने जोखिम उठाते हुए नाले को पार करने का प्रयास किया।

    तेज बहाव के बीच बाइक का संतुलन बिगड़ गया और दोनों युवक बाइक समेत पानी में बह गए। देखते ही देखते वे नाले के तेज प्रवाह में ओझल हो गए। घटना की सूचना मिलते ही सतवास और कन्नौद पुलिस मौके पर पहुंची। इसके साथ ही एसडीआरएफ देवास की टीम को भी बुलाया गया। रातभर अंधेरे और खराब मौसम के बीच राहत एवं बचाव कार्य जारी रहा।

    सर्च अभियान के दौरान घटनास्थल से कुछ दूरी पर दोनों युवकों की बाइक बरामद कर ली गई थी, लेकिन युवकों का कोई सुराग नहीं मिला। बुधवार सुबह तलाश अभियान को और तेज किया गया। काफी प्रयासों के बाद धर्मेंद्र का शव घटनास्थल से लगभग डेढ़ किलोमीटर दूर मिला, जबकि अमित का शव करीब 6 से 7 किलोमीटर दूर बरामद किया गया। दोनों शवों को बाहर निकालकर पोस्टमार्टम के लिए सतवास शासकीय अस्पताल भेजा गया।

    घटना की सूचना मिलते ही कन्नौद-खातेगांव क्षेत्र के विधायक आशीष शर्मा भी सतवास शासकीय अस्पताल पहुंचे। उन्होंने मृतकों के परिजनों से मुलाकात कर गहरा दुख व्यक्त किया और उन्हें ढांढस बंधाया। विधायक ने आश्वासन दिया कि शासन स्तर पर पीड़ित परिवारों को हर संभव सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।

    बारिश के मौसम में इस तरह की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं, जहां लोग जल्दबाजी या जोखिम उठाने के कारण अपनी जान गंवा बैठते हैं। प्रशासन ने एक बार फिर नागरिकों से अपील की है कि उफनते नालों, पुल-पुलियों और रपटों को पार करने का प्रयास न करें। थोड़ी सी लापरवाही जानलेवा साबित हो सकती है। यह हादसा भी इसी बात की दर्दनाक याद दिलाता है कि प्राकृतिक परिस्थितियों के सामने सावधानी ही सबसे बड़ी सुरक्षा है।

  • राजस्थान का अनूठा ग्यारस माता मंदिर बना श्रद्धा का केंद्र, निर्जला एकादशी पर दूर-दूर से पहुंचे भक्त, दिनभर चले धार्मिक अनुष्ठान

    राजस्थान का अनूठा ग्यारस माता मंदिर बना श्रद्धा का केंद्र, निर्जला एकादशी पर दूर-दूर से पहुंचे भक्त, दिनभर चले धार्मिक अनुष्ठान

    नई दिल्ली । निर्जला एकादशी के पावन अवसर पर राजस्थान के भीलवाड़ा स्थित प्राचीन ग्यारस माता मंदिर में श्रद्धा और आस्था का अद्भुत संगम देखने को मिला। सुबह से ही मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लगनी शुरू हो गई थीं। विशेष रूप से महिलाओं ने बड़ी संख्या में पहुंचकर निर्जल व्रत, पूजा-अर्चना और धार्मिक अनुष्ठानों में भाग लिया। मंदिर परिसर दिनभर भक्ति, मंत्रोच्चार और धार्मिक गतिविधियों से गूंजता रहा।

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार निर्जला एकादशी वर्ष की सबसे महत्वपूर्ण एकादशियों में से एक मानी जाती है। कहा जाता है कि इस व्रत का पालन करने से पूरे वर्ष की एकादशियों के समान पुण्य फल प्राप्त होता है। इसी विश्वास के चलते प्रदेश के विभिन्न जिलों से श्रद्धालु ग्यारस माता के दर्शन के लिए यहां पहुंचे। मंदिर में महिलाओं ने फल, नारियल, जल से भरे मिट्टी के कलश, छाते और अन्य पूजन सामग्री अर्पित कर परिवार की सुख-समृद्धि तथा शांति की कामना की।

    मंदिर प्रशासन के अनुसार यह स्थल क्षेत्र की प्राचीन धार्मिक धरोहरों में शामिल है और इसकी विशेष पहचान ग्यारस माता के एकमात्र प्रमुख मंदिर के रूप में है। निर्जला एकादशी के अवसर पर यहां हर वर्ष बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। इस बार भी जयपुर, अजमेर, जोधपुर, कोटा, उदयपुर, किशनगढ़, बारां और अन्य क्षेत्रों से आए भक्तों ने माता के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया।

    मंदिर परिसर में विशेष धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन भी किया गया। कलश स्थापना, भजन-कीर्तन, कथा श्रवण और दान-पुण्य की गतिविधियां पूरे दिन जारी रहीं। श्रद्धालुओं के लिए ठंडाई और शीतल पेय पदार्थों का वितरण किया गया, जबकि जरूरतमंदों को विभिन्न उपयोगी वस्तुओं का दान भी किया गया। धार्मिक परंपरा के अनुसार निर्जला एकादशी पर जलदान और सेवा कार्यों को अत्यंत पुण्यकारी माना जाता है।

    मंदिर की एक विशेष पहचान यहां स्थित प्राचीन अग्निकुंड भी है, जहां अखंड ज्योति निरंतर प्रज्ज्वलित रहती है। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार इस अग्निकुंड की परिक्रमा करने से श्रद्धालुओं की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। इसी विश्वास के साथ बड़ी संख्या में महिलाएं दिनभर परिक्रमा करती हुई दिखाई दीं। मंदिर परिसर में भक्ति और श्रद्धा का वातावरण पूरे दिन बना रहा।

    श्रद्धालुओं का कहना है कि निर्जला एकादशी केवल व्रत और पूजा का पर्व नहीं, बल्कि आत्मसंयम, सेवा और आध्यात्मिक साधना का भी प्रतीक है। महिलाएं दिनभर निर्जल रहकर माता की आराधना करती हैं और धार्मिक कथाओं का श्रवण करती हैं। उनका विश्वास है कि इस व्रत के प्रभाव से परिवार में सुख, शांति और समृद्धि बनी रहती है।

    धार्मिक ग्रंथों में निर्जला एकादशी का विशेष महत्व बताया गया है। मान्यता है कि महाभारत काल में भीमसेन सभी एकादशी व्रतों का पालन नहीं कर पाते थे। तब उन्हें केवल ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष की निर्जला एकादशी का व्रत रखने की सलाह दी गई थी। इसी कारण इसे भीमसेनी एकादशी और पांडव एकादशी के नाम से भी जाना जाता है।

    गर्मी के मौसम में आयोजित होने वाले इस पर्व पर जलदान, छाता, मटका, पंखा और शीतल पेय पदार्थों का दान विशेष महत्व रखता है। श्रद्धालु इसे सेवा और परोपकार का अवसर मानते हैं। भीलवाड़ा का ग्यारस माता मंदिर न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र बना हुआ है, बल्कि यह राजस्थान की समृद्ध सांस्कृतिक और आध्यात्मिक परंपराओं का भी जीवंत प्रतीक माना जाता है, जहां हर वर्ष निर्जला एकादशी पर हजारों श्रद्धालु अपनी श्रद्धा अर्पित करने पहुंचते हैं।

  • मंदसौर में भीषण सड़क हादसा: एक्सप्रेस-वे पर ट्रक से टकराई कार, चार की जान गई, दो गंभीर

    मंदसौर में भीषण सड़क हादसा: एक्सप्रेस-वे पर ट्रक से टकराई कार, चार की जान गई, दो गंभीर

    मंदसौर ।मध्य प्रदेश के मंदसौर जिले में दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे पर गुरुवार को एक भीषण सड़क हादसे ने चार लोगों की जिंदगी छीन ली। सीतामऊ थाना क्षेत्र के तीतरोद गांव के पास हुए इस दर्दनाक हादसे में तेज रफ्तार कार आगे चल रहे ट्रक से पीछे जा टकराई। टक्कर इतनी भयावह थी कि कार पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई और उसमें सवार चार लोगों की मौके पर ही मौत हो गई। हादसे में दो अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं जिनका उपचार अस्पताल में जारी है।

    जानकारी के अनुसार दुर्घटना दोपहर करीब 11 बजे दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे पर हुई। महाराष्ट्र के औरंगाबाद से दिल्ली जा रही कार तेज गति से आगे बढ़ रही थी। इसी दौरान तीतरोद गांव के समीप कार चालक वाहन पर नियंत्रण नहीं रख सका और कार सामने चल रहे ट्रक में पीछे से जा घुसी। टक्कर इतनी जोरदार थी कि कार के परखच्चे उड़ गए और उसमें सवार लोग बुरी तरह फंस गए। आसपास मौजूद लोगों ने तुरंत पुलिस और राहत दल को सूचना दी।

    सूचना मिलते ही सीतामऊ थाना पुलिस और आपातकालीन सहायता दल मौके पर पहुंचे। काफी मशक्कत के बाद कार में फंसे लोगों को बाहर निकाला गया। घायलों को तत्काल सीतामऊ अस्पताल पहुंचाया गया जहां उनका उपचार शुरू किया गया। वहीं मृतकों के शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है।

    पुलिस ने हादसे में जान गंवाने वाले दो लोगों की पहचान रविन्द्र काले निवासी शास्त्री नगर जवाहर कॉलोनी औरंगाबाद तथा सचिन गंगाधर गजभारे निवासी नाहर क्लिनिक के सामने औरंगाबाद महाराष्ट्र के रूप में की है। अन्य दो मृतकों और दोनों घायलों की पहचान अभी नहीं हो सकी है। पुलिस उनकी पहचान करने और परिजनों को सूचना देने का प्रयास कर रही है।

    प्रारंभिक जांच में तेज रफ्तार और वाहन से नियंत्रण खोना हादसे का प्रमुख कारण माना जा रहा है। हालांकि पुलिस सभी पहलुओं की जांच कर रही है ताकि दुर्घटना की वास्तविक वजह सामने आ सके। हादसे के बाद ट्रक चालक वाहन सहित मौके से फरार हो गया। पुलिस अब एक्सप्रेस-वे पर लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाल रही है और ट्रक की पहचान कर चालक तक पहुंचने का प्रयास कर रही है।

    दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे पर लगातार बढ़ते सड़क हादसे एक बार फिर चिंता का विषय बन गए हैं। तेज रफ्तार और लापरवाही के कारण होने वाली दुर्घटनाएं कई परिवारों की खुशियां छीन रही हैं। इस हादसे ने न केवल मृतकों के परिजनों को गहरा आघात पहुंचाया है बल्कि पूरे क्षेत्र में शोक का माहौल भी पैदा कर दिया है। पुलिस ने वाहन चालकों से अपील की है कि वे एक्सप्रेस-वे पर निर्धारित गति सीमा का पालन करें और लंबी दूरी की यात्रा के दौरान पूरी सतर्कता बरतें ताकि ऐसे दर्दनाक हादसों से बचा जा सके।

  • पानी भरने की बात पर भड़की पुरानी रंजिश: मैहर में खूनी संघर्ष, 7 महिलाओं समेत 14 लोग गंभीर घायल

    पानी भरने की बात पर भड़की पुरानी रंजिश: मैहर में खूनी संघर्ष, 7 महिलाओं समेत 14 लोग गंभीर घायल

    मैहर। मध्य प्रदेश के मैहर जिले में जमीनी विवाद ने बुधवार रात हिंसक और खूनी रूप ले लिया। अमरपाटन थाना क्षेत्र के कहरी गांव में दो पड़ोसी परिवारों के बीच लंबे समय से चल रही रंजिश एक बार फिर भड़क उठी और देखते ही देखते दोनों पक्ष आमने-सामने आ गए। मामूली कहासुनी से शुरू हुआ विवाद कुछ ही मिनटों में इतना बढ़ गया कि लाठी-डंडे और धारदार हथियार निकल आए। दोनों ओर से हुए हमले में 7 महिलाओं सहित कुल 14 लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। घटना के बाद गांव में तनाव का माहौल बना हुआ है और पुलिस लगातार स्थिति पर नजर रखे हुए है।

    पुलिस के अनुसार कहरी गांव में रहने वाले बंसल समाज के दो परिवारों के बीच जमीन को लेकर काफी समय से विवाद चल रहा था। बुधवार रात विवादित जमीन पर पानी भरने को लेकर दोनों पक्षों के बीच बहस शुरू हुई। पहले तीखी नोकझोंक हुई और फिर देखते ही देखते मामला हिंसक संघर्ष में बदल गया। दोनों पक्षों के लोग लाठी-डंडे और धारदार हथियार लेकर एक-दूसरे पर टूट पड़े। गांव में अचानक मची चीख-पुकार और हंगामे से अफरा-तफरी का माहौल बन गया। स्थानीय ग्रामीणों ने बीच-बचाव का प्रयास किया लेकिन तब तक कई लोग गंभीर रूप से घायल होकर लहूलुहान हो चुके थे।

    घटना के बाद घायल किसी तरह अमरपाटन थाने पहुंचे। थाना प्रभारी विजय सिंह परस्ते ने घायलों की हालत गंभीर देखते हुए तत्काल एंबुलेंस और शासकीय वाहन की व्यवस्था कर सभी को अमरपाटन सिविल अस्पताल भिजवाया। हालांकि अस्पताल पहुंचने पर स्वास्थ्य व्यवस्था की गंभीर खामियां भी उजागर हो गईं। एक साथ 14 गंभीर घायलों के पहुंचने पर अस्पताल में पर्याप्त बेड उपलब्ध नहीं थे। मजबूरन डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मियों को कई घायलों का उपचार अस्पताल के बरामदे और फर्श पर करना पड़ा। घायल महिलाओं और पुरुषों को जमीन पर लिटाकर प्राथमिक उपचार दिया गया। उन्हें वहीं पट्टियां बांधी गईं और ड्रिप तथा इंजेक्शन लगाए गए।

    मारपीट में दोनों पक्षों के लोगों को गंभीर चोटें आई हैं। प्रथम पक्ष से सरिता बंसल, जितेंद्र, फूलचंद, साक्षी, आरती और प्रिया बंसल घायल हुए हैं। वहीं दूसरे पक्ष से समीर, बड्डी, सोमबाई, सुरेश, पार्वती, रमेश, मुकेश और तिजियाबाई बंसल को चोटें आई हैं। डॉक्टरों ने प्राथमिक उपचार के बाद सभी घायलों की हालत को देखते हुए उन्हें बेहतर इलाज के लिए जिला अस्पताल सतना रेफर कर दिया है।

    थाना प्रभारी विजय सिंह परस्ते ने बताया कि दोनों पक्षों के बीच पुराना जमीनी विवाद ही इस हिंसक घटना की मुख्य वजह है। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। अस्पताल में घायलों के बयान लिए जा रहे हैं और घटनास्थल से भी जरूरी साक्ष्य जुटाए गए हैं। पुलिस का कहना है कि जांच के आधार पर सभी आरोपियों की पहचान कर उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल गांव में पुलिस बल तैनात कर दिया गया है ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति को रोका जा सके।