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  • रक्षाबंधन मेहंदी डिजाइन, भाई के नाम वाली मेहंदी, भाई बहन मेहंदी डिजाइन, राखी मोटिफ मेहंदी, सिंपल अरेबिक मेहंदी

    रक्षाबंधन मेहंदी डिजाइन, भाई के नाम वाली मेहंदी, भाई बहन मेहंदी डिजाइन, राखी मोटिफ मेहंदी, सिंपल अरेबिक मेहंदी


    नई दिल्ली । 
    रक्षाबंधन का त्योहार भाई और बहन के रिश्ते की मिठास, अपनापन और प्रेम को खास तरीके से मनाने का अवसर होता है। इस दिन राखी बांधने के साथ सजने संवरने की भी खास तैयारी की जाती है। सावन के मौसम में मेहंदी का रंग त्योहार की रौनक को और बढ़ा देता है। अगर आप इस रक्षाबंधन पर हाथों में ऐसी मेहंदी लगाना चाहती हैं, जो खूबसूरत होने के साथ त्योहार की भावना को भी दर्शाए, तो कुछ खास डिजाइन आपके लिए बेहतर विकल्प हो सकती हैं।

    भाई के नाम वाली मेहंदी रक्षाबंधन के लिए सबसे खास और भावनात्मक डिजाइन में शामिल की जा सकती है। हथेली के बीच में भाई, भैया या कोई प्यारा संदेश लिखकर उसके चारों ओर फूल और पत्तियों की बेल बनाई जा सकती है। इस डिजाइन को बहुत ज्यादा भरने की जरूरत नहीं होती। हल्की और साफ पैटर्न के साथ यह मेहंदी आकर्षक दिखाई देती है।

    भाई बहन थीम वाली मेहंदी भी इस मौके पर काफी खूबसूरत लगती है। हथेली पर भाई बहन की छोटी सी आकृति या राखी बांधने का दृश्य बनाया जा सकता है। इस तरह की डिजाइन रक्षाबंधन के रिश्ते को सीधे तौर पर प्रदर्शित करती है और सामान्य मेहंदी से अलग दिखाई देती है। जिन लोगों को थीम आधारित डिजाइन पसंद हैं, उनके लिए यह अच्छा विकल्प हो सकता है।

    राखी मोटिफ वाली मेहंदी भी इस बार हाथों पर सजाई जा सकती है। हथेली के बीच में राखी का डिजाइन बनाकर उसके चारों ओर छोटे फूल, पत्तियां और बिंदुओं का इस्तेमाल किया जा सकता है। इस डिजाइन में रक्षाबंधन की पहचान साफ नजर आती है और इसे अपनी पसंद के अनुसार छोटा या बड़ा रखा जा सकता है।

    अगर आपको ज्यादा भरी हुई मेहंदी पसंद नहीं है तो फ्लोरल अरेबिक डिजाइन बेहतर विकल्प हो सकती है। इसमें फूलों और बेलों को तिरछे पैटर्न में सजाया जाता है और हथेली का कुछ हिस्सा खाली रखा जाता है। इससे हाथों को हल्का, आधुनिक और सलीकेदार लुक मिलता है। यह डिजाइन पारंपरिक और आधुनिक अंदाज का संतुलन भी बनाती है।

    मंडला और जाली पैटर्न वाली मेहंदी उन लोगों के लिए उपयोगी है, जो कम समय में सुंदर डिजाइन चाहती हैं। हथेली के बीच में छोटा मंडला बनाकर उंगलियों पर जाली, पत्तियों या डॉट पैटर्न जोड़ा जा सकता है। यह डिजाइन ज्यादा जटिल नहीं होती और साफ-सुथरे तरीके से बनाई जाए तो काफी आकर्षक दिखाई देती है।

    अगर आपके पास मेहंदी लगाने के लिए ज्यादा समय नहीं है तो केवल उंगलियों और कलाई पर डिजाइन बनवाना भी अच्छा विकल्प है। फिंगर टिप मेहंदी में छोटी बेल, फूल, डॉट्स या ज्यामितीय पैटर्न बनाए जा सकते हैं। यह मिनिमल डिजाइन पारंपरिक त्योहार के साथ आधुनिक लुक भी देती है।

    रक्षाबंधन पर मेहंदी का चुनाव करते समय अपने कपड़ों, आभूषणों और पसंद को ध्यान में रखा जा सकता है। भारी पारंपरिक पोशाक के साथ भरी हुई डिजाइन और हल्के या आधुनिक परिधान के साथ अरेबिक या मिनिमल मेहंदी अच्छी लग सकती है। भाई के नाम या राखी मोटिफ वाली डिजाइन त्योहार की थीम को और खास बना सकती है। सबसे जरूरी है कि डिजाइन ऐसी हो जिसे आसानी से संभाला जा सके और आपके पूरे रक्षाबंधन लुक के साथ स्वाभाविक रूप से मेल खाए।

  • ग्रुप-3 भर्ती का नोटिफिकेशन जारी, MP में बंपर पदों पर मौका; आवेदन शुल्क से लेकर परीक्षा तक जानें पूरी डिटेल

    ग्रुप-3 भर्ती का नोटिफिकेशन जारी, MP में बंपर पदों पर मौका; आवेदन शुल्क से लेकर परीक्षा तक जानें पूरी डिटेल


    मध्य प्रदेशमध्य प्रदेश में सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए बड़ी खबर है। मध्य प्रदेश कर्मचारी चयन मंडल की ओर से ग्रुप-3 के तहत 1040 पदों पर भर्ती प्रक्रिया शुरू की गई है। इस भर्ती में सब इंजीनियर ड्राफ्ट्समैन प्रयोगशाला तकनीशियन समेत कई पद शामिल हैं। इच्छुक और पात्र उम्मीदवार 18 अगस्त से ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। आवेदन की अंतिम तारीख 1 सितंबर निर्धारित की गई है। भर्ती के लिए संयुक्त परीक्षा 6 अक्टूबर 2026 से शुरू होगी। ऐसे में उम्मीदवारों के पास आवेदन करने के साथ परीक्षा की तैयारी के लिए भी सीमित समय है।

    ग्रुप-3 भर्ती में अलग-अलग विभागों और संस्थानों के कई पद शामिल किए गए हैं। इनमें भोपाल विकास प्राधिकरण में सब इंजीनियर के 36 पद और इंदौर विकास प्राधिकरण में सब इंजीनियर के 44 पद बताए गए हैं। इसके अलावा ड्राफ्ट्समैन प्रयोगशाला तकनीशियन और अन्य समकक्ष पदों पर भी नियुक्तियां की जाएंगी। पदों की योग्यता और संबंधित तकनीकी शर्तें अलग-अलग हो सकती हैं इसलिए उम्मीदवारों को आवेदन करने से पहले भर्ती से जुड़ी आधिकारिक जानकारी और अपने पद की पात्रता जरूर जांचनी चाहिए।

    इस भर्ती के लिए आयु सीमा 18 से 40 वर्ष निर्धारित की गई है। पात्र आरक्षित श्रेणियों के उम्मीदवारों को नियमानुसार अधिकतम आयु सीमा में 5 वर्ष तक की छूट दी जाएगी। आवेदन शुल्क की बात करें तो सामान्य वर्ग के उम्मीदवारों के लिए 500 रुपए शुल्क निर्धारित है जबकि OBC EWS दिव्यांगजन SC और ST वर्ग के उम्मीदवारों के लिए 250 रुपए प्रति प्रश्नपत्र शुल्क रखा गया है। आवेदन करते समय उम्मीदवारों को शुल्क और अन्य प्रक्रिया की जानकारी ध्यान से जांचनी चाहिए।

    ग्रुप-3 की संयुक्त भर्ती परीक्षा 6 अक्टूबर 2026 से आयोजित की जाएगी। परीक्षा की तारीख शिफ्ट और परीक्षा केंद्र से जुड़ी जानकारी उम्मीदवारों को प्रवेश पत्र के माध्यम से मिलेगी। इसलिए आवेदन प्रक्रिया पूरी करने के बाद अभ्यर्थियों को कर्मचारी चयन मंडल की ओर से जारी होने वाले अपडेट पर लगातार नजर रखनी होगी। परीक्षा के लिए प्रवेश पत्र जारी होने के बाद उसमें दिए गए केंद्र और समय की जानकारी को ध्यान से देखना जरूरी होगा।

    परीक्षा में शामिल होने वाले उम्मीदवारों के लिए पहचान और दस्तावेजों से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण नियम भी हैं। आधार कार्ड का UIDAI से सत्यापन होना जरूरी बताया गया है। इसके अलावा वोटर आईडी PAN कार्ड आधार ड्राइविंग लाइसेंस या पासपोर्ट में से किसी एक मूल पहचान पत्र को साथ रखना होगा। उम्मीदवार को आधार कार्ड या ई आधार की कॉपी भी अपने साथ रखनी होगी। आधार नंबर या VID की आवश्यकता पड़ सकती है।

    परीक्षा केंद्र पर बायोमेट्रिक सत्यापन की व्यवस्था रहेगी। इसके लिए उम्मीदवारों को आधार का Unlock Status सुनिश्चित रखना होगा। परीक्षा केंद्र पर देर से पहुंचने वाले अभ्यर्थियों को प्रवेश नहीं दिया जा सकता है इसलिए उम्मीदवारों को निर्धारित समय से पहले केंद्र पहुंचना चाहिए। परीक्षा के दौरान मोबाइल फोन कैलकुलेटर डिजिटल वॉच और अन्य प्रतिबंधित इलेक्ट्रॉनिक उपकरण ले जाना मान्य नहीं होगा।

    उम्मीदवारों को आवेदन क्रमांक सुरक्षित रखना चाहिए क्योंकि आगे की प्रक्रिया में इसकी जरूरत पड़ सकती है। परीक्षा केंद्र पर प्रवेश पत्र और काला बॉल पेन साथ ले जाना जरूरी होगा। परीक्षा शुरू होने के बाद अभ्यर्थियों को परीक्षा कक्ष से बाहर जाने की अनुमति नहीं होगी। नियुक्ति के समय संबंधित प्रमाण पत्रों और दस्तावेजों की जांच की जाएगी इसलिए आवेदन में दी गई जानकारी और दस्तावेजों में किसी तरह की गलती नहीं होनी चाहिए।

    मध्य प्रदेश के रोजगार कार्यालय में जीवित पंजीयन भी भर्ती से जुड़ी पात्रता का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसलिए अभ्यर्थियों को अपने रोजगार पंजीयन की स्थिति पहले ही जांच लेनी चाहिए। बैगा सहरिया और भारिया जनजाति के उम्मीदवारों को इस भर्ती परीक्षा से अलग से छूट नहीं दी गई है। ऐसे अभ्यर्थियों को अनुसूचित जनजाति श्रेणी में आवेदन करने के निर्देश दिए गए हैं।

    सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे उम्मीदवारों के लिए यह भर्ती महत्वपूर्ण अवसर है क्योंकि एक साथ 1040 पदों पर नियुक्ति का मौका मिल रहा है। आवेदन की अंतिम तारीख नजदीक होने के कारण उम्मीदवारों को अंतिम समय का इंतजार करने के बजाय समय रहते आवेदन पूरा कर लेना चाहिए। साथ ही परीक्षा की तारीख को ध्यान में रखते हुए विषयवार तैयारी शुरू करना भी जरूरी है। आवेदन से पहले उम्मीदवार आधिकारिक भर्ती नियम पात्रता पदवार योग्यता और दस्तावेजों की शर्तों को अच्छी तरह पढ़ लें ताकि बाद में किसी तरह की परेशानी न हो।

  • मुआवजे पर उठे सवालों के बीच केंद्र ने दिया हिसाब, 5039 प्रभावित परिवारों को 590 करोड़ से ज्यादा का भुगतान

    मुआवजे पर उठे सवालों के बीच केंद्र ने दिया हिसाब, 5039 प्रभावित परिवारों को 590 करोड़ से ज्यादा का भुगतान


    भोपाल । केन-बेतवा लिंक परियोजना को लेकर मध्य प्रदेश में चल रहे विरोध प्रदर्शनों के बीच केंद्र सरकार ने मुआवजे और पुनर्वास को लेकर उठ रहे सवालों पर अपनी स्थिति स्पष्ट की है। जल शक्ति मंत्रालय की ओर से जारी पीआईबी प्रेस नोट में कहा गया है कि प्रभावित परिवारों को मुआवजा और पुनर्वास का लाभ नहीं मिलने से जुड़े आरोप सही नहीं हैं। सरकार के मुताबिक अधिकांश पात्र परिवारों को मुआवजा और पुनर्वास संबंधी लाभ दिया जा चुका है जबकि कुछ मामलों में केवल जरूरी कागजी औपचारिकताएं पूरी होना बाकी हैं।

    केन-बेतवा परियोजना को लेकर मध्य प्रदेश के कुछ इलाकों में जनजातीय परिवारों के बिना मुआवजे विस्थापन के आरोप लगाए जा रहे हैं। इन आरोपों के विरोध में चिता आंदोलन फांसी प्रदर्शन और जल सत्याग्रह जैसे प्रतीकात्मक प्रदर्शन भी किए गए हैं। सरकार का कहना है कि इन प्रदर्शनों में मुआवजे और पुनर्वास को लेकर जो दावे किए जा रहे हैं वे उपलब्ध सरकारी आंकड़ों से मेल नहीं खाते।

    सरकार के अनुसार परियोजना से प्रभावित कुल 5039 परिवारों की पहचान की गई है। इन परिवारों के लिए 629.87 करोड़ रुपए का मुआवजा निर्धारित किया गया है। इसमें से 590.74 करोड़ रुपए यानी करीब 93.78 प्रतिशत राशि का भुगतान किया जा चुका है। शेष राशि का भुगतान आवश्यक कानूनी और प्रशासनिक औपचारिकताएं पूरी होने के बाद किया जाएगा। सरकार का कहना है कि पात्र परिवारों को किसी तरह का लाभ न छूटे इसके लिए भूमि रिकॉर्ड का लगातार सत्यापन किया जा रहा है।

    कृषि भूमि के मुआवजे को लेकर भी सरकार ने आंकड़े जारी किए हैं। जुलाई 2026 तक 10913 प्रभावित लोगों की कृषि भूमि के लिए 360.66 करोड़ रुपए का मुआवजा निर्धारित किया गया था। इसमें से 320.45 करोड़ रुपए यानी 88.85 प्रतिशत राशि वितरित की जा चुकी है। वहीं मकान और दूसरी आवासीय परिसंपत्तियों के लिए 149.63 करोड़ रुपए स्वीकृत किए गए हैं जिसमें से 93.97 प्रतिशत राशि का भुगतान किया जा चुका है।

    सरकार के मुताबिक भूमि अधिग्रहण और पुनर्वास की प्रक्रिया 2013 के भूमि अधिग्रहण कानून और मध्य प्रदेश सरकार की ओर से 13 सितंबर 2023 को स्वीकृत विशेष पुनर्वास पैकेज के तहत की जा रही है। अधिगृहीत जमीन के लिए कानून के अनुसार निर्धारित मुआवजा या 12.50 लाख रुपए प्रति हेक्टेयर में से जो राशि अधिक होगी वह दी जा रही है। इसके अलावा मकान पेड़ कुएं ट्यूबवेल और अन्य अचल संपत्तियों के लिए भी नियमानुसार मुआवजा निर्धारित किया जा रहा है।

    पुनर्वास पैकेज में पात्र परिवारों के लिए प्लॉट से जुड़ी सहायता का भी प्रावधान है। ग्रामीण क्षेत्र में प्लॉट के लिए 7 लाख रुपए और शहरी क्षेत्र में प्लॉट के लिए 6.50 लाख रुपए दिए जाने की बात कही गई है। जो परिवार प्लॉट का विकल्प नहीं लेते हैं उन्हें एकमुश्त 12.50 लाख रुपए की सहायता देने का प्रावधान है। अनुसूचित क्षेत्रों में पात्र एससी-एसटी परिवारों के लिए अतिरिक्त आर्थिक सहायता का भी प्रावधान बताया गया है।

    प्रभावित परिवारों की समस्याओं को मौके पर सुनने और योजनाओं का लाभ पहुंचाने के लिए करौंदिया में विशेष शिविर भी लगाए गए हैं। सरकार के अनुसार इन शिविरों में पशुपालन सामाजिक सुरक्षा गरीबी रेखा लाड़ली बहना और लाड़ली लक्ष्मी जैसी योजनाओं से जुड़े मामलों पर कार्रवाई की गई। स्वास्थ्य सेवाओं के तहत 178 लोगों को उपचार दिया गया और आयुष दवाओं का वितरण भी किया गया। हैंडपंपों की मरम्मत तथा विद्यार्थियों की छात्रवृत्ति मैपिंग और किताबों के वितरण का काम भी किया गया। सरकार के मुताबिक पिछले दस दिनों में 86 प्रभावित लोगों के लिए 10.42 करोड़ रुपए की राशि स्वीकृत की गई है।

    विरोध प्रदर्शनों को लेकर सरकार ने एक गंभीर दावा भी किया है। पीआईबी के प्रेस नोट के मुताबिक हाल के आंदोलनों में शामिल कुछ लोगों के नाम परियोजना से प्रभावित परिवारों की सूची भू-अभिलेखों या मुआवजा रजिस्टर में नहीं पाए गए हैं। सरकार ने दावा किया है कि इन प्रदर्शनों में मुख्य रूप से बाहरी तत्व शामिल हैं जो परियोजना को लेकर भ्रामक और तथ्यात्मक रूप से गलत सूचनाएं फैलाने की कोशिश कर रहे हैं। हालांकि आंदोलनकारी पक्ष की ओर से इस दावे पर क्या प्रतिक्रिया आती है यह भी महत्वपूर्ण होगा।

    सरकार ने केन-बेतवा लिंक परियोजना के संभावित लाभ भी गिनाए हैं। इसे नेशनल पर्सपेक्टिव प्लान के तहत देश की पहली प्रमुख नदी जोड़ो परियोजना बताया गया है। योजना के तहत केन नदी के अतिरिक्त पानी को बेतवा नदी की ओर पहुंचाने का प्रस्ताव है ताकि मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र में सिंचाई और पेयजल की उपलब्धता बढ़ाई जा सके।

    सरकार के मुताबिक परियोजना से करीब 10.62 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई की सुविधा मिल सकती है। इसके साथ ही लगभग 62 लाख लोगों को पेयजल उपलब्ध कराने और 103 मेगावाट जलविद्युत उत्पादन का लाभ मिलने का दावा किया गया है। परियोजना की अनुमानित लागत 44604.99 करोड़ रुपए बताई गई है।

    केन-बेतवा परियोजना को लेकर एक तरफ सरकार मुआवजे और पुनर्वास प्रक्रिया को नियमों के अनुसार पूरा होने का दावा कर रही है तो दूसरी तरफ स्थानीय स्तर पर विरोध और विस्थापन से जुड़े सवाल लगातार उठ रहे हैं। ऐसे में परियोजना से प्रभावित परिवारों की वास्तविक स्थिति और उनकी मांगों पर आगे होने वाली कार्रवाई इस पूरे विवाद की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएगी।

  • MP Politics: उज्जैन में VIP कल्चर पर उठे सवाल, गुना में मंच पर भिड़े विधायक; मुरैना सांसद की भी फिसली जुबान

    MP Politics: उज्जैन में VIP कल्चर पर उठे सवाल, गुना में मंच पर भिड़े विधायक; मुरैना सांसद की भी फिसली जुबान


    भोपाल । मध्य प्रदेश की राजनीति और प्रशासन से जुड़ी घटनाओं में बुधवार को कई ऐसे मामले सामने आए जिन्होंने लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचा। कहीं धार्मिक स्थल पर VIP दर्शन को लेकर आम श्रद्धालुओं की परेशानी चर्चा में रही तो कहीं भाजपा के ही मंच पर विधायक आपस में उलझते नजर आए। खंडवा में आवारा कुत्तों की समस्या को लेकर एक अनोखा प्रदर्शन किया गया और मुरैना में भाजपा सांसद की जुबान ऐसी फिसली कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ही रेल मंत्री बता दिया। इन घटनाओं ने राजनीतिक गलियारों से लेकर सोशल मीडिया तक खूब चर्चा बटोरी।

    उज्जैन के नागचंद्रेश्वर मंदिर में नागपंचमी के मौके पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। यह मंदिर साल में सिर्फ एक बार नागपंचमी के दिन श्रद्धालुओं के लिए खुलता है। ऐसे में लाखों लोगों की आस्था इस मंदिर से जुड़ी होती है। लेकिन भीड़ के बीच VIP दर्शन को लेकर सवाल उठे। आरोप है कि कई VIP लोगों को गर्भगृह में जाकर आराम से पूजा और दर्शन का मौका मिला जबकि आम श्रद्धालु घंटों लाइन में खड़े रहे। बाहर श्रद्धालुओं को सुरक्षा व्यवस्था के तहत तेजी से आगे बढ़ाया जाता रहा और कई लोग ठीक से दर्शन भी नहीं कर सके।

    बताया गया कि मंत्री कैलाश विजयवर्गीय भाजपा विधायक गोलू शुक्ला कांग्रेस विधायक महेश परमार और भाजपा सांसद अनिल फिरोजिया की बेटी समेत कई VIP गर्भगृह तक पहुंचे। उन्होंने भगवान नागचंद्रेश्वर का जल और दूध से अभिषेक किया तथा पूजा अर्चना की। VIP दर्शन की तस्वीरों और वीडियो के सामने आने के बाद आम श्रद्धालुओं के बीच नाराजगी देखने को मिली। सवाल यही उठता रहा कि जब भगवान के दरबार में सभी भक्त समान हैं तो दर्शन व्यवस्था में इतना अंतर क्यों दिखाई देता है।

    इधर गुना में भाजपा विधायक पन्नालाल शाक्य के एक बयान को लेकर मंच पर ही विवाद की स्थिति बन गई। रामायण प्रसंग सुनाते हुए शाक्य ने माता सीता के लिए ऐसे शब्दों का इस्तेमाल किया जिस पर चाचौड़ा से भाजपा विधायक प्रियंका पेंची ने आपत्ति जताई। पन्नालाल शाक्य ने रामायण के युद्ध का जिक्र करते हुए कहा कि युद्ध में पुरुषों की मृत्यु हुई जबकि महिलाओं की नहीं। इसके बाद महाभारत का उदाहरण देते हुए भी उन्होंने इसी तरह की बात कही।

    मंच पर मौजूद प्रियंका पेंची ने उनकी बात को गलत बताते हुए आपत्ति दर्ज कराई। दोनों के बीच मंच से ही कुछ देर नोकझोंक हुई। प्रियंका पेंची ने कहा कि महिलाओं ने भी बलिदान दिया है और वह खुद भी महिला हैं। इस घटनाक्रम के बाद पन्नालाल शाक्य के बयान को लेकर विपक्ष को भी भाजपा पर हमला करने का मौका मिल गया।

    खंडवा में जनसुनवाई के दौरान विरोध प्रदर्शन का तरीका भी चर्चा में रहा। नगर निगम में नेता प्रतिपक्ष दीपक राठौर एक युवक को कुत्ते का गेटअप पहनाकर कलेक्ट्रेट पहुंच गए। आवारा कुत्तों की समस्या को लेकर उन्होंने इसी अंदाज में प्रशासन का ध्यान आकर्षित किया। युवक ने कुत्ते की वेशभूषा में कलेक्टर के नाम ज्ञापन सौंपा।

    नेता प्रतिपक्ष ने आरोप लगाया कि आवारा कुत्तों की नसबंदी और नियंत्रण के नाम पर करीब 40 लाख रुपए खर्च किए गए हैं लेकिन इसके बावजूद समस्या कम नहीं हुई। उन्होंने खर्च का हिसाब मांगते हुए कार्रवाई की मांग उठाई। मुद्दा गंभीर था लेकिन प्रदर्शन का तरीका लोगों के बीच चर्चा और मजाक का विषय भी बन गया।

    मुरैना में भाजपा सांसद शिवमंगल सिंह तोमर की जुबान भी फिसल गई। कैलारस से वीरपुर तक मेमो ट्रेन की शुरुआत के बाद मीडिया से बातचीत में उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को रेल मंत्री कह दिया। उन्होंने ट्रेन शुरू होने पर भारत सरकार के रेल मंत्री नरेंद्र मोदी को बधाई देने की बात कही। हालांकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रेल मंत्री नहीं बल्कि देश के प्रधानमंत्री हैं। सांसद के बयान का वीडियो सामने आने के बाद लोग सोशल मीडिया पर तरह तरह की प्रतिक्रियाएं देने लगे।

    इन घटनाओं के बीच मध्य प्रदेश भाजपा के संगठन को लेकर भी अंदरखाने चर्चाएं तेज हैं। पार्टी के राष्ट्रीय संगठन में प्रदेश के कई नेताओं को जिम्मेदारियां मिली हैं। इन नियुक्तियों के बाद नेताओं के बीच सीनियर और जूनियर को लेकर नई चर्चा शुरू होने की बात कही जा रही है। कुछ नेताओं को मिली जिम्मेदारियों को संगठन में अहम माना जा रहा है जबकि एक नेता की भूमिका को लेकर राजनीतिक हलकों में अलग अलग कयास लगाए जा रहे हैं।

    कुल मिलाकर उज्जैन से लेकर गुना खंडवा और मुरैना तक सामने आई ये घटनाएं मध्य प्रदेश की राजनीति और प्रशासन के अलग अलग रंग दिखाती हैं। कहीं VIP कल्चर को लेकर सवाल हैं तो कहीं नेताओं के बयान और प्रदर्शन के तरीके सुर्खियां बन रहे हैं। आने वाले दिनों में इनमें से कुछ मुद्दे राजनीतिक बहस का हिस्सा बन सकते हैं।

  • MP में फिर बदला मौसम का मिजाज! 12 जिलों में भारी बारिश की चेतावनी, इन 3 जिलों में आफत बन सकती है बारिश

    MP में फिर बदला मौसम का मिजाज! 12 जिलों में भारी बारिश की चेतावनी, इन 3 जिलों में आफत बन सकती है बारिश


    भोपाल । मध्य प्रदेश में एक बार फिर मानसून सक्रिय हो गया है और प्रदेश के पूर्वी हिस्से में बारिश का दौर तेज होने के संकेत हैं। मौसम विभाग के अनुसार टीकमगढ़ पन्ना और नरसिंहपुर में अगले 24 घंटे के दौरान अति भारी बारिश हो सकती है। इन जिलों में 4 से 8 इंच तक पानी गिरने की संभावना जताई गई है। इसके अलावा जबलपुर समेत 12 जिलों में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। इन जिलों में ढाई से 4 इंच तक बारिश होने का अनुमान है। बारिश का सबसे ज्यादा असर विंध्य बुंदेलखंड और महाकौशल क्षेत्र में देखने को मिल सकता है।

    मौसम विशेषज्ञ शैलेंद्र कुमार नायक के मुताबिक 18 अगस्त को झारखंड के ऊपर सक्रिय अवदाब ने पूर्वी मध्य प्रदेश को बारिश का मुख्य केंद्र बना दिया है। इसके प्रभाव से 19 अगस्त को प्रदेश के पूर्वी हिस्सों में भारी से अत्यधिक भारी बारिश की स्थिति बन सकती है। मौसम की गतिविधियां आने वाले दिनों में धीरे-धीरे मध्य और पश्चिमी मध्य प्रदेश की तरफ बढ़ सकती हैं। 20 से 24 अगस्त के बीच प्रदेश के कई हिस्सों में बारिश का दायरा बढ़ने के संकेत हैं।

    आज टीकमगढ़ पन्ना और नरसिंहपुर में अति भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट है। वहीं रायसेन सागर दमोह जबलपुर कटनी मंडला शहडोल सीधी मऊगंज रीवा सतना और छतरपुर में भारी बारिश हो सकती है। इन क्षेत्रों में ढाई से 4 इंच तक बारिश होने की संभावना जताई गई है। इसके अलावा भोपाल सीहोर राजगढ़ विदिशा इंदौर धार अलीराजपुर बुरहानपुर बड़वानी खंडवा खरगोन झाबुआ उज्जैन नीमच आगर-मालवा मंदसौर शाजापुर देवास रतलाम नर्मदापुरम बैतूल हरदा ग्वालियर गुना शिवपुरी दतिया अशोकनगर मुरैना भिंड श्योपुर छिंदवाड़ा सिवनी बालाघाट डिंडौरी पांढुर्णा सिंगरौली मैहर उमरिया अनूपपुर और निवाड़ी में भी मौसम बदला रह सकता है। यहां कहीं तेज तो कहीं हल्की बारिश होने के आसार हैं।

    लगातार बारिश के बीच जलाशयों में भी पानी की आवक बढ़ी है। जबलपुर के बरगी डैम के 9 गेट खोलकर पानी छोड़ा जा रहा है। ऐसे में निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की जरूरत है। नदी नालों के जलस्तर में बढ़ोतरी और स्थानीय जलभराव की स्थिति भी बन सकती है।

    प्रदेश में इस मानसूनी सीजन में अब तक 573.1 मिलीमीटर यानी करीब 22.6 इंच बारिश दर्ज की जा चुकी है। हालांकि सामान्य बारिश के मुकाबले अभी करीब 3 इंच पानी कम है। मध्य प्रदेश में इस समय तक सामान्य बारिश करीब 25.6 इंच होनी चाहिए थी। आंकड़ों के मुताबिक प्रदेश में कुल मिलाकर करीब 12 प्रतिशत बारिश कम हुई है। पूर्वी हिस्से में बारिश की कमी करीब 16 प्रतिशत और पश्चिमी हिस्से में करीब 9 प्रतिशत बताई गई है।

    प्रदेश के करीब 40 जिलों में सामान्य से कम बारिश दर्ज की गई है। पूर्वी हिस्से के कई जिलों में बारिश की कमी ज्यादा है। बालाघाट छतरपुर छिंदवाड़ा दमोह डिंडौरी जबलपुर कटनी मैहर मंडला मऊगंज नरसिंहपुर निवाड़ी पांढुर्णा पन्ना रीवा सागर सतना सिवनी और टीकमगढ़ जैसे जिलों में सामान्य से 4 प्रतिशत से लेकर 58 प्रतिशत तक कम बारिश दर्ज की गई है। वहीं पश्चिमी हिस्से में भी कई जिलों में बारिश का आंकड़ा सामान्य से नीचे है।

    इसके बावजूद कुछ जिलों में सामान्य से ज्यादा बारिश दर्ज की गई है। अनूपपुर शहडोल सीधी सिंगरौली उमरिया बड़वानी भिंड भोपाल बुरहानपुर देवास ग्वालियर खंडवा खरगोन राजगढ़ और गुना में औसत से ज्यादा बारिश हुई है।

    मौसम विभाग के मुताबिक जून में प्रदेश में सामान्य से करीब 14 प्रतिशत कम बारिश हुई थी। जुलाई में बारिश की स्थिति बेहतर हुई और महीने का कोटा पूरा हो गया लेकिन जून की कमी पूरी तरह दूर नहीं हो सकी। मानसून के बीच दो बार ब्रेक की स्थिति भी बनी जिसके कारण कई दिनों तक बारिश कमजोर रही। अब अगस्त के दूसरे हिस्से में सक्रिय सिस्टम के कारण बारिश की गतिविधियां फिर बढ़ रही हैं।

    मध्य प्रदेश में सामान्य मानसूनी बारिश करीब 37.3 इंच मानी जाती है। भोपाल इंदौर जबलपुर और ग्वालियर जैसे बड़े शहरों में सामान्य बारिश करीब 38 से 39 इंच तक रहती है। अगस्त के महीने में इन शहरों में बारिश का इतिहास भी काफी दिलचस्प रहा है।

    भोपाल में अगस्त महीने में सबसे ज्यादा बारिश का रिकॉर्ड 2006 में दर्ज हुआ था जब करीब 35 इंच पानी गिरा था। 14 अगस्त 2006 को 24 घंटे में करीब 12 इंच बारिश होने का रिकॉर्ड भी दर्ज है। इंदौर में अगस्त की सर्वाधिक मासिक बारिश करीब 28 इंच रही है जो 1944 में दर्ज हुई थी। 22 अगस्त 2020 को यहां 24 घंटे में करीब साढ़े 10 इंच बारिश हुई थी।

    ग्वालियर में 24 घंटे में साढ़े 8 इंच बारिश का रिकॉर्ड 10 अगस्त 1927 का है जबकि मासिक सर्वाधिक बारिश का रिकॉर्ड 1916 में करीब 28 इंच रहा था। जबलपुर में अगस्त की बारिश का रिकॉर्ड और भी बड़ा है। वर्ष 1923 में यहां एक महीने में करीब 44 इंच बारिश हुई थी और 20 अगस्त को 24 घंटे में करीब 13 इंच पानी गिरा था। उज्जैन में भी अगस्त के दौरान तेज बारिश का इतिहास रहा है। वर्ष 2006 में यहां करीब 35 इंच बारिश दर्ज की गई थी।

    फिलहाल मौसम का सबसे ज्यादा असर प्रदेश के पूर्वी हिस्से में दिखाई दे रहा है। अगले कुछ दिनों में सिस्टम के आगे बढ़ने के साथ मध्य और पश्चिमी मध्य प्रदेश में भी बारिश की गतिविधियां बढ़ सकती हैं। ऐसे में नदी नालों और निचले इलाकों के आसपास रहने वाले लोगों को मौसम की स्थिति पर नजर रखने और प्रशासन की चेतावनियों का पालन करने की सलाह दी जाती है।

  • भारत की तेल खरीद पर दोहरी मार: कच्चा तेल 10 डॉलर महंगा, रूसी क्रूड की छूट भी लगभग खत्म

    भारत की तेल खरीद पर दोहरी मार: कच्चा तेल 10 डॉलर महंगा, रूसी क्रूड की छूट भी लगभग खत्म


    नई दिल्ली। भारतीय तेल रिफाइनरियों के लिए कच्चा तेल खरीदना लगातार महंगा होता जा रहा है। ग्लोबल बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड की कीमत पिछले दो हफ्तों में करीब 10 डॉलर बढ़कर 91 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई है। वहीं, खाड़ी और पश्चिम अफ्रीकी तेल की कीमतों पर भी सप्लाई की कमी के चलते प्रीमियम बढ़ गया है। सबसे बड़ी चिंता यह है कि रूसी तेल पर मिलने वाली छूट लगभग खत्म हो चुकी है, जबकि वेनेजुएला के क्रूड पर भी डिस्काउंट काफी कम हो गया है।

    अगर खाड़ी क्षेत्र में तेल की सप्लाई सामान्य नहीं होती और रूसी क्रूड पर मिलने वाली छूट वापस नहीं आती, तो भारतीय रिफाइनरियों की लागत और बढ़ सकती है। इसका असर तेल कंपनियों के मार्जिन के साथ आगे चलकर पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर भी पड़ सकता है। एक अनुमान के मुताबिक, कच्चे तेल की कीमत में 10 डॉलर प्रति बैरल की बढ़ोतरी से कंपनियों को करीब 6 रुपये प्रति लीटर का नुकसान हो सकता है।

    खाड़ी का तेल ब्रेंट से करीब 10 डॉलर महंगा

    ‘द इकोनॉमिक टाइम्स’ के मुताबिक, बाजार में कच्चे तेल की कमी का फायदा ट्रेडर्स उठा रहे हैं। भारतीय रिफाइनरियों को खाड़ी देशों से तेल खरीदने के लिए स्पॉट मार्केट का सहारा लेना पड़ रहा है, जहां अतिरिक्त प्रीमियम वसूला जा रहा है।

    खाड़ी के सप्लायर दुबई-ओमान बेंचमार्क पर करीब 3 से 4 डॉलर प्रति बैरल अतिरिक्त प्रीमियम मांग रहे हैं। वहीं, दुबई-ओमान बेंचमार्क खुद ब्रेंट से करीब 6 से 7 डॉलर महंगा है। इस तरह भारतीय रिफाइनरों के लिए खाड़ी का कच्चा तेल ब्रेंट की तुलना में करीब 10 डॉलर प्रति बैरल तक महंगा पड़ रहा है।

    सऊदी अरामको की आधिकारिक सेल प्राइस दुबई-ओमान बेंचमार्क से 1.5 से 3 डॉलर नीचे जरूर हैं, लेकिन लाल सागर और होर्मुज स्ट्रेट में तनाव के कारण टर्म डील के तहत मिलने वाली सप्लाई प्रभावित हुई है। इससे भारतीय रिफाइनरियों की स्पॉट मार्केट पर निर्भरता बढ़ गई है।

    जहाजों की कमी ने बढ़ाई लागत

    संघर्ष वाले क्षेत्रों से कच्चा तेल लाने में जहाजों की उपलब्धता भी बड़ी चुनौती बन गई है। जोखिम वाले समुद्री रास्तों से तेल पहुंचाने के लिए ट्रेडर्स अतिरिक्त प्रीमियम मांग रहे हैं। टर्म कॉन्ट्रैक्ट में तेल सस्ता होने के बावजूद भारत तक उसे पहुंचाने के लिए पर्याप्त जहाज नहीं मिलना रिफाइनरों की लागत बढ़ा रहा है।

    पश्चिम अफ्रीकी क्रूड भी महंगा

    खाड़ी के बाद पश्चिम अफ्रीका से मिलने वाला कच्चा तेल भी भारतीय रिफाइनरियों के लिए महंगा हो गया है। इसके चलते कंपनियां अब वैकल्पिक स्रोतों पर नजर डाल रही हैं। अमेरिका, ब्राजील और गुयाना जैसे देशों से कच्चा तेल खरीदने के विकल्प पर भी विचार किया जा रहा है।

    रूसी तेल की सबसे बड़ी बढ़त खत्म

    कुछ समय पहले तक रूसी कच्चा तेल भारतीय रिफाइनरों के लिए सबसे आकर्षक विकल्पों में था। इसकी बड़ी वजह उस पर मिलने वाली भारी छूट थी। अब यह डिस्काउंट लगभग खत्म हो चुका है। वेनेजुएला के तेल पर मिलने वाली छूट भी काफी कम हो गई है।

    इससे भारतीय रिफाइनरियों के सामने दोहरी चुनौती खड़ी हो गई है—एक तरफ अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत बढ़ रही है और दूसरी तरफ सस्ता रूसी तेल भी पहले जैसा उपलब्ध नहीं है।

    अमेरिकी प्रतिबंध बढ़े तो मुश्किल और बढ़ेगी

    भारतीय तेल कंपनियों के लिए अमेरिकी प्रतिबंध भी बड़ा जोखिम हैं। अगर अमेरिका रूसी तेल खरीदने वाले देशों और कंपनियों पर प्रतिबंध और कड़े करता है, तो भारत के लिए रूसी क्रूड खरीदना और मुश्किल हो सकता है। ऐसे में रिफाइनरियों को दूसरे देशों से महंगा तेल खरीदना पड़ सकता है।

  • एग्रीगेटर कंपनियों की मनमानी के खिलाफ टैक्सी चालकों का मोर्चा, मंत्री से बैठक पर टिकी नजर

    एग्रीगेटर कंपनियों की मनमानी के खिलाफ टैक्सी चालकों का मोर्चा, मंत्री से बैठक पर टिकी नजर


    भोपाल । भोपाल में टैक्सी चालकों की हड़ताल के चलते बुधवार को कैब सेवाएं प्रभावित रहीं। मंगलवार रात 12 बजे से टैक्सी संचालन बंद होने के बाद रेलवे स्टेशन और एयरपोर्ट पहुंचने वाले यात्रियों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। ऑनलाइन कैब बुक करने के बावजूद कई यात्रियों को वाहन उपलब्ध नहीं हो सके। ऐसे में लोगों को ऑटो और दूसरे वैकल्पिक साधनों का सहारा लेना पड़ा। इस बीच टैक्सी यूनियन ने अपनी मांगों को लेकर आंदोलन जारी रखने का फैसला किया है। बुधवार को बोर्ड ऑफिस चौराहे पर टैक्सी चालक धरना प्रदर्शन करेंगे और इसके बाद यूनियन पदाधिकारी परिवहन मंत्री राव उदय प्रताप सिंह से मुलाकात करेंगे। मंत्री से बातचीत के बाद ही हड़ताल की आगे की दिशा तय की जाएगी।

    दरअसल टैक्सी संचालकों और परिवहन विभाग के अधिकारियों के बीच मंगलवार को हड़ताल को लेकर बैठक हुई थी। बैठक में टैक्सी यूनियन कल्याण समिति संपूर्ण भारत के सचिव नफीस उद्दीन और भोपाल टैक्सी चालक संघ के महामंत्री राजेश कुमार नागले समेत कई पदाधिकारी शामिल हुए। यूनियन और अधिकारियों के बीच ड्राइवरों की समस्याओं तथा टैक्सी संचालन से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई लेकिन बैठक में कोई अंतिम समाधान नहीं निकल सका। इसके बाद यूनियन ने बुधवार को परिवहन मंत्री के सामने अपनी मांगें रखने का निर्णय लिया है।

    टैक्सी संगठनों का कहना है कि मौजूदा परिस्थितियों में ड्राइवरों के लिए काम करना मुश्किल होता जा रहा है। यूनियन की प्रमुख मांग है कि सरकार टैक्सियों के लिए उचित किराया निर्धारित करे। इसके अलावा एग्रीगेटर कंपनियों की कथित मनमानी पर रोक लगाने की मांग भी की जा रही है। यूनियन का कहना है कि किराया और दूसरे नियमों को लेकर स्पष्ट व्यवस्था होनी चाहिए ताकि टैक्सी चालकों को काम के बदले उचित आमदनी मिल सके। संगठन ने प्राइवेट नंबर वाले वाहनों के व्यावसायिक इस्तेमाल पर भी कार्रवाई की मांग उठाई है।

    बुधवार को बोर्ड ऑफिस चौराहे पर होने वाला धरना इस आंदोलन का अहम हिस्सा माना जा रहा है। यहां टैक्सी चालक और यूनियन पदाधिकारी अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन करेंगे। इसके बाद प्रतिनिधिमंडल परिवहन मंत्री राव उदय प्रताप सिंह से मुलाकात करेगा। इस बैठक में ड्राइवरों की समस्याओं के साथ टैक्सी किराया तय करने और एग्रीगेटर कंपनियों से जुड़े मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है। यूनियन को उम्मीद है कि सरकार की ओर से उनकी मांगों पर कोई ठोस आश्वासन मिल सकता है।

    हड़ताल का सीधा असर आम यात्रियों पर भी पड़ रहा है। भोपाल रेलवे स्टेशन और एयरपोर्ट पर कैब नहीं मिलने के कारण यात्रियों को वैकल्पिक परिवहन साधनों का सहारा लेना पड़ रहा है। कई लोगों ने ऑनलाइन कैब बुक करने की कोशिश की लेकिन वाहन उपलब्ध नहीं होने से उन्हें परेशानी हुई। कुछ जगहों पर ऑटो चालकों द्वारा सामान्य से अधिक किराया लिए जाने की शिकायतें भी सामने आई हैं। यात्रियों का कहना है कि अचानक कैब सेवा बंद होने से खासकर रेलवे स्टेशन और एयरपोर्ट जाने वाले लोगों की मुश्किल बढ़ गई है।

    टैक्सी यूनियन का कहना है कि आंदोलन का अगला फैसला सरकार के रुख पर निर्भर करेगा। यदि परिवहन मंत्री के साथ बातचीत में मांगों को लेकर सकारात्मक आश्वासन मिलता है तो हड़ताल समाप्त करने पर विचार किया जा सकता है। वहीं अगर बातचीत बेनतीजा रहती है तो आंदोलन को आगे बढ़ाने का फैसला लिया जा सकता है। ऐसे में बुधवार को होने वाला धरना और परिवहन मंत्री के साथ प्रस्तावित बैठक भोपाल की टैक्सी सेवाओं के लिए बेहद अहम मानी जा रही है।

  • भोपाल में कमर्शियल सीलिंग के खिलाफ सड़क पर उतरे व्यापारी! मास्टर प्लान और मिक्स्ड लैंड यूज की मांग तेज

    भोपाल में कमर्शियल सीलिंग के खिलाफ सड़क पर उतरे व्यापारी! मास्टर प्लान और मिक्स्ड लैंड यूज की मांग तेज


    भोपाल  भोपाल में रहवासी इलाकों में चल रही कमर्शियल गतिविधियों के खिलाफ नगर निगम की कार्रवाई ने अब बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है। शहर में हजारों नोटिस जारी होने के बाद कारोबारियों का गुस्सा सड़क पर दिखाई देने लगा है। मंगलवार को रोशनपुरा चौराहे पर व्यापारियों ने प्रदर्शन और चक्काजाम किया और सरकार के सामने तीन विकल्प रखे। व्यापारियों का कहना है कि या तो भोपाल का मास्टर प्लान लागू किया जाए या गुजरात की तर्ज पर मिक्स्ड लैंड यूज की व्यवस्था की जाए या फिर नगर निगम की सीलिंग कार्रवाई को तत्काल रोका जाए। इन मांगों पर समाधान नहीं निकला तो व्यापारियों ने अनिश्चितकाल के लिए भोपाल बंद करने की चेतावनी दी है।

    10 नंबर मार्केट व्यापारी महासंघ के अध्यक्ष आनंद सोनी ने सरकार से कार्रवाई के बीच कारोबारियों को राहत देने की मांग की। उनका कहना है कि लंबे समय से लोग इन इलाकों में कारोबार कर रहे हैं और इसी व्यवसाय से उनके परिवारों की रोजी रोटी चल रही है। व्यापारियों का दावा है कि कार्रवाई का दायरा बढ़ा तो बड़ी संख्या में छोटे दुकानदार और उनसे जुड़े कर्मचारी बेरोजगार हो सकते हैं। व्यापारियों ने सवाल उठाया कि यदि कारोबार बंद हो गया तो बच्चों की पढ़ाई और परिवार का खर्च कैसे चलेगा।

    हाउसिंग बोर्ड क्षेत्र के कारोबारी राहुल जैन ने भी नोटिस मिलने के बाद चिंता जताई। उनका कहना है कि कई दुकानदार पहले से कर्ज में हैं। व्यापारियों का तर्क है कि उनकी संपत्तियों की रजिस्ट्री हुई है बिजली के कमर्शियल मीटर लगाए गए हैं और नगर निगम को संपत्ति कर सहित दूसरे करों का भुगतान भी किया जाता रहा है। ऐसे में अब कमर्शियल गतिविधियों को लेकर कार्रवाई किए जाने से कारोबारियों में असमंजस और नाराजगी दोनों बढ़ रही है।

    इस पूरे विवाद में मास्टर प्लान का मुद्दा भी केंद्र में आ गया है। व्यापारियों और कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि यदि समय पर नया मास्टर प्लान लागू होता तो शहर के अलग अलग हिस्सों में आवासीय और व्यावसायिक गतिविधियों के लिए स्पष्ट व्यवस्था बनाई जा सकती थी। व्यापारियों का दावा है कि भोपाल का पिछला मास्टर प्लान 1995 में आया था और इसके बाद प्रस्तावित नया प्लान लंबे समय से लंबित है। इसी बीच शहर का विस्तार लगातार होता गया और कई ऐसे इलाकों में कारोबार शुरू हो गए जहां अब कमर्शियल गतिविधियों को लेकर कार्रवाई की जा रही है।

    सीलिंग कार्रवाई के विरोध में पहली बार बड़ी संख्या में ब्यूटिशियन और महिला कारोबारी भी सड़क पर उतरीं। प्रदर्शन के दौरान एक ब्यूटिशियन ने सड़क पर ही मेकअप करके विरोध जताया। उनका कहना है कि ब्यूटी पार्लर सैलून और छोटे कारोबारों से बड़ी संख्या में लोगों का रोजगार जुड़ा है। यदि इन्हें बंद कराया गया तो सिर्फ दुकानदार ही नहीं बल्कि वहां काम करने वाले कर्मचारी और उनके परिवार भी प्रभावित होंगे।

    दूसरी ओर नगर निगम ने रहवासी भवनों के कमर्शियल इस्तेमाल को लेकर सर्वे और नोटिस की कार्रवाई तेज कर दी है। निगम के मुताबिक अब तक 7158 नोटिस जारी किए जा चुके हैं। सोमवार तक 6589 नोटिस दिए गए थे जबकि मंगलवार को 569 नए नोटिस जारी किए गए। निगम के सर्वे में संपत्ति कर रिकॉर्ड के आधार पर 62 हजार 500 से ज्यादा ऐसी संपत्तियां चिन्हित की गई हैं जहां रहवासी इलाकों में व्यावसायिक गतिविधियां संचालित होने की जानकारी सामने आई है। अधिकारियों के मुताबिक सर्वे का दायरा बढ़ने के साथ नोटिस की संख्या और बढ़ सकती है।

    नगर निगम की कार्रवाई केवल दुकानों तक सीमित नहीं रहने वाली है। मुख्य सड़कों के साथ उनसे जुड़ी गलियों में भी सर्वे किया जा रहा है। नदी और तालाब के किनारे ग्रीन बेल्ट बफर जोन और कैचमेंट एरिया में बने भवनों की भी जांच की जा रही है। अवैध मैरिज गार्डन और अनुमति के विपरीत निर्माण से जुड़े मामलों को भी जांच के दायरे में रखा गया है।

    निगम की ओर से बताया गया है कि कई मामलों में नोटिस के बाद निर्धारित समय पूरा होने पर आगे की प्रक्रिया शुरू होगी। अधिभोग उल्लंघन के मामलों की जांच के बाद अंतिम आदेश जारी किए जाएंगे और संबंधित लोगों को उल्लंघन समाप्त करने के लिए अंतिम सूचना दी जाएगी। सुनवाई की प्रक्रिया पूरी होने के बाद नियमों के मुताबिक आगे की कार्रवाई की जाएगी।

    इधर व्यापारियों ने सरकार को तीन विकल्प देकर साफ कर दिया है कि वे कार्रवाई के खिलाफ पीछे हटने के मूड में नहीं हैं। व्यापारियों की मांग है कि भोपाल का मास्टर प्लान जल्द लागू किया जाए और मिक्स्ड लैंड यूज की व्यावहारिक व्यवस्था बनाई जाए। उनका कहना है कि इससे शहर की वास्तविक जरूरतों को ध्यान में रखते हुए आवासीय और व्यावसायिक गतिविधियों के बीच संतुलन बनाया जा सकता है।

    फिलहाल भोपाल में नगर निगम की कार्रवाई और व्यापारियों के विरोध के बीच टकराव बढ़ता नजर आ रहा है। एक तरफ सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद निगम नियमों के पालन को लेकर कार्रवाई आगे बढ़ा रहा है तो दूसरी तरफ व्यापारी अपने कारोबार और रोजगार को लेकर समाधान की मांग कर रहे हैं। अब सरकार के रुख पर नजर रहेगी कि वह व्यापारियों की मांगों पर क्या रास्ता निकालती है। अगर बातचीत से समाधान नहीं निकला तो व्यापारियों की ओर से भोपाल बंद और बड़े आंदोलन की चेतावनी आने वाले दिनों में राजधानी की सियासत और प्रशासनिक व्यवस्था के लिए बड़ी चुनौती बन सकती है।

  • निगम परिषद की बैठक में गरमाएगा भोपाल का मुद्दा! सड़कें खुदी पड़ीं और सफाई व्यवस्था बदहाल फिर भी चर्चा से बाहर

    निगम परिषद की बैठक में गरमाएगा भोपाल का मुद्दा! सड़कें खुदी पड़ीं और सफाई व्यवस्था बदहाल फिर भी चर्चा से बाहर


    भोपाल  भोपाल नगर निगम परिषद की बैठक बुधवार 19 अगस्त को ISBT स्थित मीटिंग हॉल में आयोजित होने जा रही है। साल के पहले नियमित परिषद सम्मेलन को लेकर राजनीतिक हलचल तेज है। बैठक के एजेंडे में शहर की मौजूदा समस्याओं से जुड़े जनहित के मुद्दे शामिल नहीं होने पर विपक्ष ने सवाल खड़े किए हैं। विपक्ष का कहना है कि राजधानी की सड़कें बारिश के बाद बदहाल हो चुकी हैं कई इलाकों में जलभराव की समस्या सामने आ रही है और सफाई व्यवस्था को लेकर भी लोगों की शिकायतें लगातार बनी हुई हैं। इसके बावजूद इन अहम मुद्दों को परिषद की बैठक के एजेंडे में जगह नहीं दी गई है। ऐसे में बैठक के हंगामेदार रहने के आसार जताए जा रहे हैं।

    नगर निगम परिषद की बैठक की शुरुआत पार्षदों के सवाल जवाब से होगी। इसके बाद एजेंडे में शामिल प्रस्तावों पर चर्चा की जाएगी। बैठक सुबह 11 बजे शुरू होगी। बताया गया है कि सम्मेलन में नगर निगम की खाली हुई एक बिल्डिंग को किराए पर दिए जाने से जुड़े प्रस्ताव पर भी चर्चा होनी है। विपक्ष का कहना है कि जब शहर के सामने बुनियादी सुविधाओं से जुड़े कई सवाल खड़े हैं तो परिषद की बैठक में इन विषयों पर प्राथमिकता से चर्चा होनी चाहिए।

    बारिश के बाद भोपाल की सड़कों की स्थिति विपक्ष के प्रमुख मुद्दों में शामिल है। राजधानी में कई स्थानों पर सड़कें उखड़ी हुई हैं और कुछ इलाकों में सड़क निर्माण या दूसरे कामों के कारण रास्ते प्रभावित हैं। तेज बारिश के दौरान निचले इलाकों में पानी भरने की समस्या भी सामने आती है। ऐसे में आम लोगों को आवागमन में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। विपक्ष का सवाल है कि शहर की ऐसी स्थिति के बीच सड़क और जलभराव जैसे मुद्दे परिषद की बैठक में चर्चा का हिस्सा क्यों नहीं बनाए गए।

    सफाई व्यवस्था को लेकर भी विपक्ष नगर निगम को घेरने की तैयारी में है। कई इलाकों में बारिश के बाद कचरा जमा होने और जल निकासी से जुड़ी शिकायतों को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। विपक्ष का कहना है कि शहर की सफाई और बुनियादी सुविधाएं सीधे तौर पर आम लोगों के रोजमर्रा के जीवन से जुड़ी हैं। ऐसे में परिषद की बैठक में इन विषयों पर पार्षदों को सवाल पूछने और अधिकारियों से जवाब लेने का मौका मिलना चाहिए।

    नगर निगम में नेता प्रतिपक्ष शबिस्ता जकी ने एजेंडे को लेकर नाराजगी जताई है। उनका कहना है कि हर बैठक में शहर सरकार की ओर से जनहित के मुद्दों को पर्याप्त जगह नहीं दी जाती। उन्होंने दावा किया कि पिछली बैठक में भी जनहित से जुड़े विषयों पर चर्चा की मांग की गई थी लेकिन विपक्ष की बात नहीं सुनी गई। अब एक बार फिर शहर की प्रमुख समस्याओं को एजेंडे से बाहर रखने को लेकर विपक्ष ने सवाल उठाए हैं।

    सीनियर पार्षद योगेंद्र सिंह गुड्डू चौहान ने भी भोपाल की मौजूदा स्थिति को लेकर चिंता जताई है। उनके मुताबिक शहर की कई सड़कें जर्जर हो चुकी हैं और तेज बारिश के बाद राजधानी के बड़े हिस्से में पानी भरने की स्थिति बनी। उनका कहना है कि सफाई व्यवस्था भी कई स्थानों पर ठीक नहीं है। विपक्ष इन सभी मुद्दों को परिषद की बैठक में उठाने की तैयारी में है।

    यह सम्मेलन इस साल का पहला ऐसा परिषद सम्मेलन बताया जा रहा है जिसमें पार्षदों को सवाल जवाब के जरिए शहर से जुड़े मुद्दे उठाने का अवसर मिलेगा। इससे पहले इस साल दो सम्मेलन हुए हैं लेकिन उनमें एक महिला सशक्तिकरण और दूसरा कचरे के नए नियमों से संबंधित था। इन बैठकों में पार्षदों के सवाल जवाब का सामान्य प्रारूप नहीं था।

    अब बुधवार की बैठक में विपक्ष के तेवर और सत्ता पक्ष के जवाब पर सबकी नजर रहेगी। एजेंडे में जनहित के मुद्दों की कमी को लेकर विपक्ष पहले ही अपनी रणनीति स्पष्ट कर चुका है। ऐसे में सड़क जलभराव सफाई और शहर की बुनियादी सुविधाओं से जुड़े सवाल बैठक में जोरदार तरीके से उठने की संभावना है। अगर इन मुद्दों पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस होती है तो निगम परिषद का यह सम्मेलन हंगामेदार हो सकता है।

  • गुरु का अश्लेषा नक्षत्र में प्रवेश, इन 3 राशियों की बढ़ सकती है आर्थिक परेशानी; निवेश में सावधानी जरूरी

    गुरु का अश्लेषा नक्षत्र में प्रवेश, इन 3 राशियों की बढ़ सकती है आर्थिक परेशानी; निवेश में सावधानी जरूरी


    नई दिल्ली। वैदिक ज्योतिष में देवगुरु बृहस्पति को ज्ञान, सुख, समृद्धि और भाग्य का कारक माना जाता है। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, 19 अगस्त 2026 को बृहस्पति पुष्य नक्षत्र से निकलकर बुध के स्वामित्व वाले अश्लेषा नक्षत्र में प्रवेश करेंगे। अश्लेषा को संवेदनशील और बदलाव वाला नक्षत्र माना जाता है। माना जा रहा है कि गुरु के इस नक्षत्र परिवर्तन का असर सभी राशियों पर अलग-अलग पड़ेगा, लेकिन मिथुन, धनु और मीन राशि के जातकों को आर्थिक मामलों में विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है।

    मिथुन राशि: लेन-देन में सतर्क रहें
    मिथुन राशि के स्वामी बुध हैं और गुरु अश्लेषा नक्षत्र में प्रवेश कर रहे हैं। ज्योतिषीय गणना के अनुसार, यह गोचर धन और वाणी से जुड़े मामलों को प्रभावित कर सकता है। इस दौरान बातचीत में सावधानी बरतें, क्योंकि आपकी बात का गलत अर्थ निकाला जा सकता है।

    लेन-देन के मामलों में किसी पर आंख मूंदकर भरोसा करने से बचें। बजट बिगड़ने और अचानक खर्च बढ़ने की स्थिति बन सकती है।

    धनु राशि: जोखिम भरे निवेश से बचें
    धनु राशि के स्वामी स्वयं बृहस्पति हैं। गुरु का अश्लेषा नक्षत्र में प्रवेश इस राशि के लिए अचानक बदलाव और बाधाओं की स्थिति बना सकता है। बनते हुए कामों में रुकावट आ सकती है।

    ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, इस दौरान शेयर बाजार या अन्य जोखिम वाले निवेश में पैसा लगाने से बचना बेहतर रहेगा। खान-पान और पेट से जुड़ी समस्याओं को लेकर भी लापरवाही न बरतें।

    मीन राशि: खर्च बढ़ने से बिगड़ सकता है बजट
    मीन राशि के स्वामी भी बृहस्पति हैं। अश्लेषा नक्षत्र में गुरु का प्रवेश आपकी बौद्धिक क्षमता और निर्णय लेने की क्षमता को प्रभावित कर सकता है। विद्यार्थियों और कारोबारियों को एकाग्रता की कमी महसूस हो सकती है।

    बड़े फैसले भावनाओं में बहकर लेने से बचें। संतान से जुड़ी चिंता या अचानक होने वाले खर्च के कारण परिवार का बजट प्रभावित हो सकता है।

    ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार ये उपाय कर सकते हैं-
    – गुरुवार को भगवान विष्णु की पूजा करें और ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र का जाप करें।
    – जरूरतमंदों या मंदिर में चने की दाल, हल्दी या पीले वस्त्रों का दान करें।
    – गुरुवार को गाय को चने की दाल और गुड़ मिलाकर रोटी खिलाएं।