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  • मुनीर की नई साजिश! PoK में फिर सक्रिय हुए आतंकी कैंप, सफेद वर्दी पहनकर घुसे दो पाकिस्तानी आतंकी ढेर

    मुनीर की नई साजिश! PoK में फिर सक्रिय हुए आतंकी कैंप, सफेद वर्दी पहनकर घुसे दो पाकिस्तानी आतंकी ढेर

    नई दिल्ली । उत्तरी कश्मीर के कुपवाड़ा जिले में नियंत्रण रेखा (LoC) के पास घुसपैठ की कोशिश को भारतीय सुरक्षाबलों ने नाकाम कर दिया। केरन सेक्टर के जुमगुंड इलाके में चार संदिग्ध आतंकियों की गतिविधि सामने आने के बाद सुरक्षाबलों ने कार्रवाई की, जिसमें दो पाकिस्तानी आतंकियों को मार गिराया गया। बाकी दो संदिग्धों की तलाश के लिए इलाके में बड़े पैमाने पर तलाशी अभियान चलाया जा रहा है। यह घटना शनिवार, 17 अक्टूबर को हुई। सुरक्षाबलों की सतर्कता के चलते घुसपैठ की कोशिश कर रहे संदिग्ध सीमा पार कर भारतीय क्षेत्र में दाखिल होने में सफल नहीं हो सके।

    जुमगुंड इलाके में तड़के करीब तीन बजे तीन से चार संदिग्धों की हलचल देखी गई थी। इसके बाद सुरक्षाबलों ने तत्काल कार्रवाई की। मुठभेड़ के दौरान दो आतंकियों को मार गिराया गया, जबकि अन्य दो की तलाश जारी है। पूरे क्षेत्र में तलाशी अभियान चलाया जा रहा है, ताकि छिपे हुए संदिग्धों का पता लगाया जा सके और घुसपैठ की किसी भी अन्य कोशिश को रोका जा सके।

    इस घटना के बाद नियंत्रण रेखा से सटे संवेदनशील इलाकों में निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। पहाड़ी क्षेत्र में बर्फबारी शुरू होने के साथ ही घुसपैठ की आशंका को देखते हुए सुरक्षाबलों ने अपनी चौकसी बढ़ा दी है। ऊंचाई वाले दुर्गम इलाकों में मौसम और भौगोलिक परिस्थितियां सुरक्षा बलों के सामने चुनौती पेश करती हैं। ऐसे में संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखना और सीमा पर निगरानी बनाए रखना महत्वपूर्ण हो जाता है।

    जुमगुंड में घुसपैठ की कोशिश के दौरान आतंकियों ने बर्फ में छिपने के लिए सफेद रंग की वर्दी पहन रखी थी। इसे स्नो कैमफ्लेज कहा जाता है। इस तरह की वर्दी का इस्तेमाल बर्फ से ढके क्षेत्रों में तैनात सैनिक करते हैं। सफेद रंग होने के कारण यह बर्फीले वातावरण में आसानी से घुलमिल जाती है और दूर से व्यक्ति की पहचान करना मुश्किल बना सकती है। इसके साथ ही यह वर्दी अत्यधिक ठंड से बचाव में भी मदद करती है।

    बर्फबारी के बाद जुमगुंड का ऊंचाई वाला इलाका बर्फ से ढक गया था। माना जा रहा है कि संदिग्धों ने इसी परिस्थिति का फायदा उठाकर घुसपैठ की कोशिश की। हालांकि, सुरक्षाबलों की सतर्कता के कारण उनकी योजना सफल नहीं हो सकी। मुठभेड़ के बाद शेष संदिग्धों की तलाश जारी है। तलाशी अभियान के दौरान इलाके की निगरानी की जा रही है, ताकि किसी भी संदिग्ध गतिविधि को नजरअंदाज न किया जाए।

    इस बीच, पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में आतंकवादी गतिविधियों और प्रशिक्षण शिविरों को दोबारा सक्रिय किए जाने की आशंका भी सामने आई है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, भारत की सर्जिकल स्ट्राइक और हवाई हमलों में नष्ट किए गए कुछ आतंकवादी शिविरों को फिर से सक्रिय किया गया है। इन शिविरों में 100 से अधिक आतंकियों को प्रशिक्षण दिए जाने की बात कही गई है। प्रशिक्षण पूरा कर चुके आतंकियों को भारतीय क्षेत्र में घुसपैठ कराने की कोशिश किए जाने की आशंका जताई गई है।

    घुसपैठ और संदिग्ध गतिविधियों को रोकने के लिए पुंछ, राजौरी, कुपवाड़ा, उरी, गुरेज, केरन, माछेल और तंगधार जैसे क्षेत्रों में गश्त बढ़ाई गई है। नियंत्रण रेखा के साथ-साथ भीतरी इलाकों, कस्बों और शहरों में भी निगरानी तथा जांच तेज की गई है। सुरक्षाबलों का उद्देश्य आतंकियों और उनके मददगारों की पहचान कर उनकी गतिविधियों पर रोक लगाना है। जुमगुंड में मारे गए दो आतंकियों के बाद शेष संदिग्धों की तलाश जारी रहने के कारण सुरक्षा बल पूरे इलाके में सतर्क हैं।

  • Ind W vs ZIM W : शेफाली-मंधाना की तूफानी पारियां… टीम इंडिया ने जिम्बाब्वे को 9 विकेट से रौंदा

    Ind W vs ZIM W : शेफाली-मंधाना की तूफानी पारियां… टीम इंडिया ने जिम्बाब्वे को 9 विकेट से रौंदा


    रायपुर।
    शेफाली वर्मा (Shafali Verma) की तूफानी बल्लेबाजी और स्मृति मंधाना (Smriti Mandhana) की शानदार पारी के दम पर भारतीय महिला क्रिकेट टीम (Indian Women’s Cricket Team) ने जिम्बाब्वे (Zimbabwe) को दूसरे टी20 मुकाबले में नौ विकेट से हरा दिया। रविवार को खेले गए इस मैच में भारत ने 103 रनों के लक्ष्य को महज 8.5 ओवर में हासिल कर लिया। इस जीत के साथ ही टीम इंडिया ने तीन मैचों की टी20 सीरीज में 2-0 की अजेय बढ़त बना ली है। शेफाली वर्मा ने 25 गेंदों में 55 रनों की विस्फोटक पारी खेली, जबकि कप्तान स्मृति मंधाना 47 रन बनाकर नाबाद लौटीं। दोनों ने पहले विकेट के लिए 96 रनों की साझेदारी कर जिम्बाब्वे के गेंदबाजों को कोई मौका नहीं दिया। इस सीरीज जीत के साथ स्मृति मंधाना ने पूर्णकालिक कप्तान के रूप में अपने कार्यकाल की शुरुआत भी जीत के साथ की।


    शेफाली वर्मा ने 25 गेंदों में जड़ी फिफ्टी

    103 रनों के लक्ष्य का पीछा करने उतरी भारतीय टीम को शेफाली वर्मा और स्मृति मंधाना ने शानदार शुरुआत दिलाई। दोनों बल्लेबाजों ने शुरुआत से ही आक्रामक रुख अपनाया और जिम्बाब्वे के गेंदबाजों पर दबाव बना दिया।शेफाली ने महज 25 गेंदों में 55 रन बनाए। उन्होंने अपनी पारी के दौरान चौकों और छक्कों की बरसात की। ऑफ स्पिनर बिलव्ड बिजा की गेंद पर छक्का लगाकर शेफाली ने अपना अर्धशतक पूरा किया। यह उनके टी20 इंटरनेशनल करियर का 22वां अर्धशतक रहा। भारतीय ओपनर ने मिशेल मावुंगा के एक ओवर में लगातार तीन गेंदों पर 4, 4 और 6 रन बटोरकर अपने इरादे साफ कर दिए। उनकी आक्रामक बल्लेबाजी के सामने जिम्बाब्वे की गेंदबाज बेबस नजर आईं।


    स्मृति मंधाना ने भी दिखाया दम

    भारतीय कप्तान स्मृति मंधाना ने भी शानदार बल्लेबाजी की। उन्होंने नाबाद 47 रन बनाए और शेफाली के साथ मिलकर टीम को जीत की दहलीज तक पहुंचाया। मंधाना ने तेज गेंदबाज न्याशा ग्वांजुरा के खिलाफ लगातार चार चौके जड़कर अपनी लय का प्रदर्शन किया। इसके बाद उन्होंने ओलिंडर चारे की गेंद पर शानदार इनसाइड-आउट छक्का लगाकर भारत को जीत दिला दी। भारत ने 103 रनों का लक्ष्य सिर्फ 8.5 ओवर में एक विकेट खोकर हासिल कर लिया। शेफाली और मंधाना की साझेदारी ने मुकाबले को एकतरफा बना दिया।

    भारतीय गेंदबाजों ने जिम्बाब्वे को 102 रन पर रोका
    इससे पहले टॉस जीतकर बल्लेबाजी करने उतरी जिम्बाब्वे की टीम भारतीय गेंदबाजों के सामने बड़ा स्कोर खड़ा करने में नाकाम रही। निर्धारित 20 ओवर में टीम आठ विकेट खोकर सिर्फ 102 रन बना सकी। तेज गेंदबाज नंदनी शर्मा ने जिम्बाब्वे को शुरुआती झटका दिया। उन्होंने सलामी बल्लेबाज केलिस न्द्लोवु को 11 गेंदों में बिना खाता खोले बोल्ड कर दिया। पावरप्ले में जिम्बाब्वे की टीम एक विकेट के नुकसान पर सिर्फ 20 रन बना सकी। इस दौरान टीम को केवल एक चौका मिला। पावरप्ले समाप्त होने के दो गेंद बाद बिलव्ड बिजा भी पवेलियन लौट गईं, जिससे जिम्बाब्वे की मुश्किलें और बढ़ गईं।


    चिपो तिरिपानो और कप्तान जोसेफिन नकोमो ने संभाली पारी

    शुरुआती झटकों के बाद चिपो तिरिपानो और कप्तान जोसेफिन नकोमो ने पारी को संभालने की कोशिश की। दोनों के बीच चौथे विकेट के लिए 45 रनों की साझेदारी हुई, जो जिम्बाब्वे की पारी की सबसे बड़ी साझेदारी रही। तिरिपानो ने 32 गेंदों में 34 रन बनाए, जबकि नकोमो 27 रन बनाकर नाबाद रहीं। तिरिपानो को 20 और 22 रन के निजी स्कोर पर जीवनदान भी मिला। उन्होंने भारतीय स्पिनर श्री चरणी के खिलाफ लगातार दो रिवर्स स्वीप चौके भी लगाए। इस साझेदारी के दौरान जिम्बाब्वे की टीम ने सात चौके लगाए। सातवें से 15वें ओवर के बीच टीम ने 56 रन जुटाकर स्कोर को आगे बढ़ाया।


    निकी प्रसाद ने एक ओवर में दिए दो झटके

    भारत की ओर से ऑफ स्पिनर निकी प्रसाद ने शानदार गेंदबाजी करते हुए दो विकेट हासिल किए। उन्होंने तिरिपानो को विकेट के पीछे ऋचा घोष के हाथों कैच कराया और फिर न्याशा ग्वांजुरा को एलबीडब्ल्यू आउट कर दिया। निकी प्रसाद लगातार दो विकेट लेकर हैट्रिक के करीब पहुंच गई थीं, लेकिन वह यह उपलब्धि हासिल नहीं कर सकीं। इसके बावजूद भारतीय गेंदबाजों ने जिम्बाब्वे को बड़ा स्कोर बनाने से रोक दिया। भारतीय गेंदबाजों के सामूहिक प्रदर्शन के बाद बल्लेबाजों ने लक्ष्य को बेहद आसानी से हासिल कर लिया। इस जीत के साथ भारत ने तीन मैचों की सीरीज में 2-0 की अजेय बढ़त बना ली है।

  • मंगल के चंद्रमा फोबोस से मिट्टी लाएगा जापान का मिशन, 20 अक्टूबर को एच3 रॉकेट से होगी ऐतिहासिक अंतरिक्ष यात्रा की शुरुआत

    मंगल के चंद्रमा फोबोस से मिट्टी लाएगा जापान का मिशन, 20 अक्टूबर को एच3 रॉकेट से होगी ऐतिहासिक अंतरिक्ष यात्रा की शुरुआत

    नई दिल्ली । जापान मंगल ग्रह और उसके चंद्रमाओं से जुड़े रहस्यों को समझने के लिए एक महत्वाकांक्षी अंतरिक्ष मिशन लॉन्च करने की तैयारी कर रहा है। मार्शियन मून्स एक्सप्लोरेशन (एमएमएक्स) नाम के इस मिशन का मुख्य उद्देश्य मंगल के चंद्रमा फोबोस की सतह से मिट्टी के नमूने एकत्र करना और उन्हें पृथ्वी पर वापस लाना है। इसके लिए जापान एयरोस्पेस एक्सप्लोरेशन एजेंसी का एच3 रॉकेट 20 अक्टूबर को तानेगाशिमा स्पेस सेंटर से उड़ान भरने वाला है। इस मिशन को मंगल के आसपास के क्षेत्र से नमूने लाने के प्रयासों में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। योजना के अनुसार, अंतरिक्ष यान मंगल तक पहुंचने के बाद फोबोस की परिक्रमा करेगा और वहां से नमूने एकत्र करके पृथ्वी की ओर लौटेगा।

    मिशन की योजना के मुताबिक, अंतरिक्ष यान को मंगल तक पहुंचने में लगभग एक वर्ष लगेगा। इसके बाद यह करीब तीन साल तक फोबोस की परिक्रमा करेगा और उसकी सतह का अध्ययन करेगा। अभियान के दौरान कम से कम 10 ग्राम मिट्टी एकत्र करने का लक्ष्य रखा गया है। नमूनों को लेकर अंतरिक्ष यान के 2031 में पृथ्वी पर लौटने की योजना है। यदि यह अभियान निर्धारित योजना के अनुसार सफल होता है, तो वैज्ञानिकों को मंगल के चंद्रमाओं की संरचना और उनकी उत्पत्ति के बारे में प्रत्यक्ष जानकारी प्राप्त हो सकेगी।

    इस अभियान में आईडेफिक्स नाम का एक रोवर भी शामिल है। इसका नाम प्रसिद्ध फ्रांसीसी कॉमिक पात्र एस्टेरिक्स के कुत्ते के नाम पर रखा गया है। रोवर का काम फोबोस की सतह का निरीक्षण करना और लैंडिंग के लिए उपयुक्त स्थान का आकलन करने में मदद करना है। फोबोस पर गुरुत्वाकर्षण बेहद कमजोर है, इसलिए वहां सुरक्षित उतरना और सतह से नमूने एकत्र करना तकनीकी रूप से चुनौतीपूर्ण है। इसी वजह से अंतरिक्ष यान के उतरने वाले पैरों और सतह पर स्थिर रहने की व्यवस्था विकसित करना इस मिशन का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है।

    एमएमएक्स का उद्देश्य केवल मिट्टी के नमूने पृथ्वी पर लाना नहीं है। इस अभियान से वैज्ञानिक यह भी समझना चाहते हैं कि मंगल और उसके दोनों चंद्रमा फोबोस तथा डीमोस कैसे बने। अंतरिक्ष यान पृथ्वी की ओर लौटने से पहले डीमोस का भी निरीक्षण करेगा, लेकिन वहां उतरने की योजना नहीं है। दोनों चंद्रमाओं की बनावट, संरचना और विशेषताओं का अध्ययन मंगल के आसपास के क्षेत्र के इतिहास को समझने में मदद कर सकता है।

    मंगल के चंद्रमाओं की उत्पत्ति को लेकर वैज्ञानिकों के बीच प्रमुख रूप से दो परिकल्पनाएं चर्चा में हैं। पहली विशाल टकराव परिकल्पना के अनुसार, किसी बड़े खगोलीय पिंड के मंगल से टकराने के बाद निकले पदार्थ से उसके चंद्रमाओं का निर्माण हुआ हो सकता है। दूसरी परिकल्पना के मुताबिक, फोबोस और डीमोस मूल रूप से क्षुद्रग्रह थे, जिन्हें मंगल के गुरुत्वाकर्षण ने अपनी कक्षा में खींच लिया। फोबोस से प्राप्त मिट्टी के नमूनों का विश्लेषण इन दोनों संभावनाओं को समझने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

    इस शोध का महत्व सौरमंडल के दूसरे हिस्सों तक भी फैला हुआ है। बुध, शुक्र, पृथ्वी और मंगल जैसे चट्टानी ग्रहों के निर्माण और विकास को समझने से वैज्ञानिक यह जानने की कोशिश कर सकते हैं कि ग्रहों पर जीवन के अनुकूल वातावरण किन परिस्थितियों में विकसित हुआ। फोबोस की मिट्टी में मौजूद पदार्थों और खनिजों का अध्ययन इस दिशा में उपयोगी जानकारी दे सकता है।

    यह मिशन अंतरराष्ट्रीय सहयोग का भी उदाहरण है। इसमें फ्रांस के राष्ट्रीय अंतरिक्ष अध्ययन केंद्र, जर्मन एयरोस्पेस सेंटर, अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा, यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी और लगभग 20 विश्वविद्यालयों तथा तकनीकी कंपनियों का सहयोग शामिल है। इस अभियान से भविष्य में मंगल की खोज और वहां मानव अभियानों की तैयारी के लिए जरूरी तकनीकों को समझने में भी मदद मिल सकती है।

    जापान इससे पहले चंद्रमा पर उतरने के लिए स्मार्ट लैंडर फॉर इन्वेस्टिगेटिंग मून यानी स्लिम मिशन भेज चुका है। इसे मून स्नाइपर भी कहा जाता है। वर्ष 2024 में चंद्रमा की सतह पर उतरने के बाद यह पलट गया था, लेकिन इसके बावजूद इसने डेटा भेजना जारी रखा और चंद्रमा की कई लंबी रातों के दौरान भी सक्रिय रहा। अब एमएमएक्स मिशन के जरिए जापान मंगल के चंद्रमाओं से नमूने लाने और ग्रहों की उत्पत्ति से जुड़े सवालों के उत्तर खोजने की दिशा में आगे बढ़ना चाहता है।

  • इथेनॉल पर सरकार का अहम फैसला… पेट्रोल में मिश्रण पर फिलहाल रोक !

    इथेनॉल पर सरकार का अहम फैसला… पेट्रोल में मिश्रण पर फिलहाल रोक !


    नई दिल्ली।
    सरकार (Government) ने घरेलू स्तर पर चीनी (Sugar) की उपलब्धता बनाए रखने के लिए गन्ने के उत्पादों से बने इथेनॉल के पेट्रोल में मिश्रण (Petrol Sugarcane-Ethanol Blending) पर फिलहाल रोक लगाने का फैसला किया है। इसके तहत, सार्वजनिक क्षेत्र की पेट्रोलियम विपणन कंपनियों ने पेट्रोल में इथेनॉल (Ethanol Blending) मिलाने के लिए 2026-27 आपूर्ति वर्ष की ताजा खरीद निविदा में गन्ने के रस, चीनी की चाशनी और बी-हेवी शीरे से बने इथेनॉल को शामिल नहीं किया है।


    कितना इथेनॉल खरीदने की तैयारी, क्या पेट्रोल में भी मिश्रण?

    भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (बीपीसीएल) ने 16 अक्तूबर को पेट्रोलियम विपणन कंपनियों की ओर से जारी निविदा में नवंबर से शुरू होने वाले आपूर्ति वर्ष के लिए करीब 1,100 करोड़ लीटर इथेनॉल की खरीद के लिए बोलियां मांगी हैं। इसका उद्देश्य पेट्रोल में 20 प्रतिशत इथेनॉल मिलाने की जरूरत को पूरा करना है।


    मक्के से बने इथेनॉल पर क्या फैसला हुआ?

    निविदा के अनुसार, मक्का, टूटे चावल, भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) द्वारा खरीदे गए अधिशेष चावल और सी-हेवी शीरे से बने इथेनॉल की आपूर्ति के लिए बोलियां लगाई जा सकती हैं। निविदा में मक्के से बने इथेनॉल पर प्रोत्साहन राशि भी घटाकर 68.86 रुपये प्रति लीटर कर दी गई है, जो पहले 71.86 रुपये प्रति लीटर थी।


    कच्चे माल की खरीद की रणनीति में क्या बदलाव?

    गन्ने उत्पादों से बने इथेनॉल की खरीद पर पाबंदी से पेट्रोल मिश्रण कार्यक्रम के लिए कच्चे माल की खरीद की रणनीति में बदलाव होगा। इस कार्यक्रम में कच्चे तेल के आयात को कम करने व वाहनों से होने वाले उत्सर्जन में कटौती के लिए अनाज व गन्ने दोनों से बने इथेनॉल का इस्तेमाल किया जाता रहा है।


    क्या गन्ने का उत्पादन हो सकता है प्रभावित?

    सरकार की तरफ से यह कदम घरेलू स्तर पर चीनी की उपलब्धता को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच उठाया गया है। महाराष्ट्र और कर्नाटक सहित प्रमुख चीनी उत्पादक राज्यों में कम बारिश के कारण उत्पादन घटने और कीमतें बढ़ने का जोखिम पैदा हुआ है।

  • फ्रांस अकेले बनाएगा राफेल से भी उन्नत छठी पीढ़ी का लड़ाकू विमान, जर्मनी से अलग होने के बाद भारत से सहयोग की उम्मीद

    फ्रांस अकेले बनाएगा राफेल से भी उन्नत छठी पीढ़ी का लड़ाकू विमान, जर्मनी से अलग होने के बाद भारत से सहयोग की उम्मीद

    नई दिल्ली । फ्रांस अब छठी पीढ़ी का अत्याधुनिक लड़ाकू विमान बनाने की तैयारी अपने दम पर आगे बढ़ा रहा है। जर्मनी और स्पेन के साथ मिलकर विकसित किए जा रहे भविष्य के लड़ाकू विमान कार्यक्रम में मतभेदों के बाद फ्रांस ने अपनी रणनीति बदल दी है। इस नई योजना के तहत वह ऐसा विमान विकसित करना चाहता है, जो तकनीक और युद्धक क्षमताओं के मामले में मौजूदा राफेल लड़ाकू विमान से अधिक उन्नत हो। फ्रांस की सशस्त्र बल मंत्री कैथरीन वौत्रिन ने संसदीय सुनवाई के दौरान पुष्टि की कि जुलाई 2026 में परियोजना को राष्ट्रीय स्तर पर आगे बढ़ाने का निर्णय लिया गया था। अब फ्रांस तकनीकी विकास और उत्पादन पर अपना नियंत्रण बनाए रखते हुए इस महत्वाकांक्षी योजना को पूरा करना चाहता है।

    इस नई परियोजना का नाम अवियन डी कॉम्बैट डू फ्यूचर (ACF) रखा गया है, जिसका अर्थ भविष्य का लड़ाकू विमान है। इससे पहले यह कार्यक्रम फ्यूचर कॉम्बैट एयर सिस्टम (FCAS) के नाम से जाना जाता था। जर्मनी और स्पेन के साथ संयुक्त रूप से आगे बढ़ने की योजना में मतभेद सामने आने के बाद फ्रांस ने अलग रास्ता चुना। फ्रांसीसी वायुसेना प्रमुख जनरल जेरोम बेलेंजर के मुताबिक, अब इस कार्यक्रम को राष्ट्रीय स्तर पर विकसित करने की दिशा में काम किया जा रहा है। इसका उद्देश्य विमान के विकास से जुड़े अहम फैसलों और तकनीकी क्षमताओं पर फ्रांस का नियंत्रण बनाए रखना है।

    योजना के अनुसार, फ्रांस 2027 में नए विमान के प्रदर्शनकारी मॉडल यानी एयरक्राफ्ट डेमोंस्ट्रेटर पर काम शुरू करने की तैयारी कर रहा है। इस परियोजना में पहले से विकसित तकनीकों और राफेल के प्रस्तावित F5 संस्करण से मिलने वाली क्षमताओं का उपयोग किए जाने की योजना है। हालांकि, नए विमान के विकास के लिए विस्तृत तकनीकी कार्य और अन्य तैयारियां भी जरूरी होंगी। परियोजना का लक्ष्य 2040 के शुरुआती वर्षों तक इस छठी पीढ़ी के लड़ाकू विमान को तैयार करना है। यदि तय समयसीमा के अनुसार काम आगे बढ़ता है, तो यह फ्रांस की वायुसेना के लिए भविष्य में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

    नए विमान की योजना केवल एक लड़ाकू जेट तैयार करने तक सीमित नहीं है। इसमें ड्रोन, निर्देशित हथियारों और कॉम्बैट क्लाउड जैसी तकनीकों पर भी काम जारी रखने की बात कही गई है। कॉम्बैट क्लाउड का उद्देश्य युद्ध के दौरान विमान, ड्रोन और अन्य सैन्य प्रणालियों के बीच सूचनाओं के आदान-प्रदान और समन्वय को बेहतर बनाना है। इस तरह की तकनीकें भविष्य के हवाई अभियानों में महत्वपूर्ण हो सकती हैं। हालांकि, इन सभी क्षमताओं के अंतिम स्वरूप और नए विमान में उनके इस्तेमाल से संबंधित विस्तृत जानकारी अभी स्पष्ट नहीं है।

    फ्रांस के सामने इस परियोजना की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक इसका भारी वित्तीय खर्च है। देश के पास लड़ाकू विमान बनाने से जुड़ी महत्वपूर्ण तकनीकी क्षमताएं हैं, लेकिन छठी पीढ़ी के विमान को अकेले विकसित करने के लिए बड़े निवेश की आवश्यकता होगी। फ्रांस आर्थिक चुनौतियों का भी सामना कर रहा है। ऐसे में परियोजना को तय समय पर पूरा करने और विकास का खर्च उठाने के लिए उसे अतिरिक्त वित्तीय सहयोग की जरूरत पड़ सकती है।

    इसी वजह से फ्रांस अब केवल तकनीकी साझेदारों के बजाय वित्तीय निवेशकों की तलाश कर रहा है। इस संदर्भ में भारत का नाम महत्वपूर्ण माना जा रहा है। भारत पहले ही फ्रांस के साथ इस परियोजना में जुड़ने की इच्छा जता चुका है। दोनों देशों के बीच रक्षा क्षेत्र में सहयोग की संभावनाओं को देखते हुए भारत की भागीदारी पर चर्चा की गुंजाइश बनी हुई है। हालांकि, भारत की भूमिका किस रूप में होगी, कितना निवेश किया जाएगा और दोनों देशों के बीच किस तरह की व्यवस्था बनेगी, इसे लेकर अभी कोई अंतिम निर्णय सामने नहीं आया है।

    स्वीडन के साथ भी संभावित सहयोग को लेकर चर्चा होने की जानकारी दी गई है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि फ्रांस अपनी नई रणनीति के तहत किन देशों को वित्तीय या अन्य सहयोग के लिए अपने साथ जोड़ता है। फिलहाल उसका प्रमुख लक्ष्य छठी पीढ़ी के लड़ाकू विमान को 2040 के शुरुआती वर्षों तक तैयार करना है। जर्मनी और स्पेन के साथ संयुक्त परियोजना से अलग होने के बाद फ्रांस की यह नई योजना उसकी रक्षा नीति और भविष्य की सैन्य विमानन क्षमताओं के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

  • PAK: ऐतिहासिक राम लीला मंदिर को तोड़कर कमर्शियल प्लाजा बनाने की साजिश! विरोध के बाद प्रशासन ने जड़ा ताला

    PAK: ऐतिहासिक राम लीला मंदिर को तोड़कर कमर्शियल प्लाजा बनाने की साजिश! विरोध के बाद प्रशासन ने जड़ा ताला


    इस्लामाबाद।
    पाकिस्तान (Pakistan) के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत (Pakistan) स्थित डेरा इस्माइल खान (Dera Ismail Khan) के रहीम बाजार में स्थित ऐतिहासिक ‘राम लीला मंदिर’ (Historic ‘Ram Leela Mandir’) को स्थानीय प्रशासन ने शनिवार को ताला लगाकर पूरी तरह सील कर दिया है। मंदिर की ऐतिहासिक इमारत को ध्वस्त कर वहां कमर्शियल प्लाजा बनाने की कथित साजिश के सामने आने के बाद नागरिक समाज और अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय के कड़े विरोध के बाद प्रशासन को यह कदम उठाना पड़ा है।

    ACP हामिद सिद्दीकी के नेतृत्व में हुई इस कार्रवाई के बाद मंदिर परिसर में जारी हर तरह के निर्माण और तोड़फोड़ गतिविधियों पर रोक लगा दी गई है।


    तोड़फोड़ और कमर्शियल प्लाजा के खिलाफ नागरिक समाज का विरोध

    मंदिर को ध्वस्त कर व्यापारिक परिसर में बदलने की कोशिशों की खबर मिलने के बाद स्थानीय नागरिक समाज के प्रतिनिधियों और हिंदू समुदाय के नेताओं की एक आपातकालीन संयुक्त बैठक सुहैल अहमद आजमी (स्थानीय नागरिक समाज संगठन के अध्यक्ष) के कार्यालय में की गई। इस बैठक में पूर्व प्रांतीय असेंबली सदस्य (MPA) और हिंदू समुदाय के प्रतिनिधि किशोर कुमार, सामाजिक कार्यकर्ता मोहम्मद नौमान सहित नागरिक समाज के कई नेता शामिल हुए।

    बैठक में शामिल नेताओं ने मंदिर की जमीन को अवैध तरीके से कमर्शियल प्लाजा के लिए आवंटित किए जाने पर कड़ी आपत्ति जताई और पाकिस्तानी सांसदों से इस मामले को पाकिस्तान की नेशनल असेंबली में उठाने की अपील की।


    400 सांस्कृतिक विरासत इमारतों में शामिल है राम लीला मंदिर

    बैठक में वक्ताओं ने राम लीला मंदिर के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व पर जोर देते हुए बताया कि यह ऐतिहासिक मंदिर डेरा इस्माइल खान की उन लगभग 400 ऐतिहासिक इमारतों में शामिल है, जिन्हें ‘इवैक्यूई ट्रस्ट प्रॉपर्टी बोर्ड’ की ओर से सांस्कृतिक विरासत संपत्ति के रूप में शामिल किया गया है।

    नागरिक समाज ने चेतावनी दी कि ऐतिहासिक धरोहरों को ध्वस्त कर व्यापारिक परिसरों में तब्दील करने से शहर की सदियों पुरानी ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान पूरी तरह मिट जाएगी। नागरिक समाज, व्यापारिक समुदाय, साहित्यिक हलकों और विरासत संगठनों के प्रतिनिधियों ने एकजुट होकर ऐतिहासिक संपत्तियों को नुकसान पहुंचाने की किसी भी कोशिश का पुरजोर विरोध करने का संकल्प लिया।


    अधिकारियों की शक्तियों और कानूनी वैधता पर सवाल

    नागरिक समाज और हिंदू नेताओं ने सवाल उठाया कि संबंधित अधिकारियों ने कानूनी प्रक्रिया को दरकिनार कर मंदिर की जमीन पर कमर्शियल प्लाजा निर्माण की अनुमति कैसे दे दी। प्रतिभागियों ने मांग की है कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ जिला प्रशासन, नेशनल असेंबली के अध्यक्ष, पुरातत्व विभाग और अन्य संबंधित अधिकारियों के सामने शिकायत दर्ज कराई जाएगी।

  • सौरभ दास और आशुतोष रांका की जमानत में देरी पर विवाद, पुलिस ने आरोप नकारे, गलत बॉन्ड जमा करने की बात कही

    सौरभ दास और आशुतोष रांका की जमानत में देरी पर विवाद, पुलिस ने आरोप नकारे, गलत बॉन्ड जमा करने की बात कही


    नई दिल्ली ।
    सौरभ दास और आशुतोष रांका की जमानत प्रक्रिया में देरी को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) और दिल्ली पुलिस के बीच विवाद सामने आया है। पार्टी ने आरोप लगाया है कि उसके दोनों नेताओं की रिहाई की प्रक्रिया जानबूझकर धीमी की गई और चार जमानतदारों की गारंटी बिना स्पष्ट कारण बताए खारिज कर दी गई। पार्टी की लीगल हेड रत्ना सिंह ने विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट पर भी निर्धारित समय पर नहीं पहुंचने और सुनवाई नहीं करने का आरोप लगाया। दूसरी ओर, दिल्ली पुलिस ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि जमानत के लिए गलत बॉन्ड जमा किए जा रहे थे, जिन्हें स्वीकार करना संभव नहीं था। पुलिस के मुताबिक, कानूनी प्रक्रिया का पालन करना जरूरी है।

    सीजेपी की लीगल हेड रत्ना सिंह के अनुसार, वह सुबह 11 बजे से मंदिर मार्ग थाने में मौजूद थीं। उन्हें बताया गया था कि जमानत से संबंधित सुनवाई दोपहर 12 बजे होगी। उनका दावा है कि जमानत की लगभग सभी औपचारिकताएं पूरी हो चुकी थीं, लेकिन विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट शाम 4 बजकर 42 मिनट तक थाने नहीं पहुंचे थे। उन्होंने यह भी कहा कि शाम 5 बजे तक मजिस्ट्रेट अदालत कक्ष में नहीं आए और वहां पहुंचने के बाद भी जमानत के मामले पर सुनवाई नहीं की गई।

    रत्ना सिंह ने प्रक्रिया में देरी को लेकर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि सरकारी वकील पिछले चार दिनों से उपस्थित नहीं हो रहे थे, लेकिन संबंधित दिन वह मौजूद थे। उनके मुताबिक, कार्यवाही शुरू होने के करीब पांच मिनट के भीतर ही विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट ने अदालत को बताया कि उन्हें धमकी भरा संदेश मिला है। इसके बाद पूरी चर्चा धमकी के मुद्दे पर केंद्रित हो गई।

    सीजेपी की लीगल हेड का आरोप है कि इस घटनाक्रम से ऐसा प्रतीत हुआ कि जमानत की आवश्यक औपचारिकताएं पूरी होने के बावजूद दोनों नेताओं की रिहाई के सवाल पर ध्यान नहीं दिया गया। उन्होंने कहा कि पूरी प्रक्रिया में हुई देरी से वह निराश हैं। हालांकि, जमानत प्रक्रिया में जानबूझकर बाधा डालने के पार्टी के आरोपों को पुलिस ने स्वीकार नहीं किया है।

    पार्टी ने यह भी कहा कि यदि आशुतोष रांका और सौरभ दास को अगले दिन तक रिहा नहीं किया गया, तो वह उन लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करेगी, जिन पर दोनों नेताओं को अवैध हिरासत में रखवाने का आरोप है। सीजेपी के अनुसार, इस मामले में उसने वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल से भी कानूनी सलाह ली है। पार्टी का कहना है कि जमानत प्रक्रिया में हुई देरी को लेकर वह कानूनी विकल्पों पर विचार कर रही है।

    दूसरी ओर, दिल्ली पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने पार्टी के आरोपों को गलत बताते हुए कहा कि जमानत के लिए ऐसे बॉन्ड जमा किए जा रहे थे, जिन्हें स्वीकार नहीं किया जा सकता था। अधिकारी के मुताबिक, पुलिस के लिए निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का पालन करना अनिवार्य है और गलत जमानत बॉन्ड के आधार पर रिहाई की प्रक्रिया पूरी नहीं की जा सकती।

    पुलिस अधिकारी ने यह भी बताया कि रविवार को जमानत प्रक्रिया की सुनवाई के दौरान विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट ने धमकी भरे संदेश मिलने की जानकारी दी थी। अधिकारी के अनुसार, मजिस्ट्रेट ने कहा कि ऐसी धमकियों और जोखिम के बीच काम करना मुश्किल है। पुलिस ने इसी परिस्थिति को सुनवाई में देरी की वजह बताया है। अधिकारी ने यह भी कहा कि धमकी से संबंधित मामला दर्ज कर लिया गया है और उसकी जांच की जा रही है।

    इस पूरे मामले में दोनों पक्षों के दावे अलग-अलग हैं। सीजेपी जमानत प्रक्रिया में जानबूझकर देरी और अपने नेताओं को हिरासत में रखे जाने का आरोप लगा रही है, जबकि पुलिस का कहना है कि गलत बॉन्ड जमा होने और मजिस्ट्रेट को धमकी मिलने के कारण प्रक्रिया प्रभावित हुई। फिलहाल विवाद जमानत संबंधी औपचारिकताओं, सुनवाई में देरी और धमकी के आरोपों के इर्द-गिर्द केंद्रित है।

  • ट्रेन में मोबाइल पर तेज आवाज में गाने सुनना- रील देखना अब पड़ेगा महंगा, जुर्माने के साथ हो सकती है जेल..!

    ट्रेन में मोबाइल पर तेज आवाज में गाने सुनना- रील देखना अब पड़ेगा महंगा, जुर्माने के साथ हो सकती है जेल..!


    नई दिल्ली।
    ट्रेनों (Trains) और स्टेशन परिसरों (Station premises) में मोबाइल फोन (Mobile Phone) को स्पीकर मोड पर इस्तेमाल करने, तेज आवाज में गाने और रील देखने और देर रात तक ऊंची आवाज में फोन पर बात करने वाले यात्रियों के खिलाफ भारतीय रेलवे (Indian Railways) ने सख्त कदम उठाया है। द जन विश्वास (प्रावधानों का संशोधन) अधिनियम, 2024/2026 के तहत किए गए नए संशोधनों के लागू होने के बाद अब इसे एक दंडनीय अपराध बना दिया गया है।

    दक्षिण रेलवे सहित सभी रेलवे जोनों को सार्वजनिक उद्घोषणाओं और स्टेशनों पर नोटिस बोर्ड लगाकर यात्रियों को जागरूक करने और टिकट जांचकर्ताओं को ऑन-द-स्पॉट कार्रवाई करने का अधिकार देने के निर्देश दिए गए हैं।


    रेलवे का नया नियम और दंडात्मक प्रावधान

    रेलवे बोर्ड द्वारा जारी नए दिशा-निर्देशों के अनुसार, साथी यात्रियों की शांति भंग करने पर कई कड़े जुर्माने और कानूनी सजा का प्रावधान किया गया है। पहली बार इस नियम का उल्लंघन करने पर 1,000 रुपए का जुर्माना और ट्रेन से उतारा जा सकता है। दूसरी बार या लगातार ऐसा करने पर 5,000 रुपए तक का जुर्माना और 6 महीने की जेल (या दोनों) हो सकती है।

    यात्रियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे संगीत सुनने, रील्स या सीरियल देखने के लिए ईयरफोन का ही इस्तेमाल करें। फोन पर बातचीत धीमी आवाज में करें और मोबाइल की रिंगटोन को भी धीमी वॉल्यूम या वाइब्रेशन मोड पर रखें, खासकर रात 10 बजे से सुबह 6 बजे के दौरान।


    AC और वंदे भारत कोचों में सबसे ज्यादा परेशानी

    रेलवे की एडवाइजरी में कहा गया है कि बंद AC डिब्बों और वंदे भारत एक्सप्रेस जैसी शांत ट्रेनों में लाउड फोन कॉल, सोशल मीडिया रील्स और बच्चों के कार्टून की तेज आवाज से सह-यात्रियों को मानसिक परेशानी होती है। नियमित यात्रियों का कहना है कि स्लीपर क्लास की तुलना में एसी कोचों में बाहरी शोर कम होने के कारण मोबाइल का शोर ज्यादा परेशान करता है।

    रेल यात्रियों ने इस कदम का स्वागत किया है, लेकिन साथ ही यह मांग भी उठाई है कि TTE और RPF के जरिए इसका कड़ाई से पालन कराया जाए, क्योंकि रात के समय बार-बार शिकायत दर्ज कराना मुश्किल होता है।


    परेशानी होने पर कैसे करें शिकायत?

    अगर आपकी बोगी में कोई यात्री लगातार मना करने के बावजूद तेज आवाज में स्पीकर चला रहा है या उपद्रव कर रहा है, तो आप इन तरीकों से तुरंत शिकायत दर्ज करा सकते हैं:
    – रेल मदद ऐप के जरिए तुरंत अपनी पीएनआर (PNR) और कोच संख्या डालकर शिकायत दर्ज करें।
    – रेलवे हेल्पलाइन नंबर 139 पर कॉल करके चलती ट्रेन में शिकायत दर्ज कराएं।
    – ऑन-बोर्ड TTE, RPF जवानों या कोच अटेंडेंट को तुरंत सूचित करें।

  • J&K : मेजर रैंक के अफसर की पत्नी पर चीन एजेंट को संवेदनशील जानकारी साझा करने का आरोप…. केस दर्ज

    J&K : मेजर रैंक के अफसर की पत्नी पर चीन एजेंट को संवेदनशील जानकारी साझा करने का आरोप…. केस दर्ज


    नई दिल्ली।
    जम्मू-कश्मीर (Jammu and Kashmir) में एक मेजर रैंक के अधिकारी की पत्नी पर चीनी खुफिया एजेंसियों (Chinese intelligence agencies) के लिए संवेदनशील जानकारी साझा करने का आरोप लगा है। जासूसी के आरोप में महिला के खिलाफ पुलिस ने रविवार को केस दर्ज किया। आरोप है कि उसने राष्ट्रीय सुरक्षा मुद्दों पर एक शोध पत्र तैयार करके चीनी एजेंसी के साथ साझा किया। इन शोध पत्रों को लिखने के लिए उसने चैटजीपीटी (ChatGPT) और क्लाउड जैसे एआई टूल का इस्तेमाल किया था।

    अभी इस मामले में महिला को गिरफ्तार नहीं किया गया है, लेकिन एफआईआर दर्ज होने के बाद उससे पूछताछ की जा रही है। खबर है कि महिला जांच में पुलिस का पूरा सहयोग कर रही है। इसकी जांच एक उपाधीक्षक को सौंपी गई है। पुलिस के मुताबिक, तेलंगाना की रहने वाली यह महिला उच्च शिक्षित है। उसने 2021 में बेंगलुरु से अंतरराष्ट्रीय संबंधों में मास्टर डिग्री और 2022 में जिनेवा से स्नातकोत्तर या PG की पढ़ाई की है। 2023 में उसने संयुक्त राष्ट्र के साथ आईटी इंटर्नशिप की थी और वर्तमान में एक फ्रीलांस रिसर्चर के रूप में काम कर रही है। उसकी शादी अक्तूबर, 2023 में भारतीय सेना के एक मेजर से हुई थी।


    यूएन में चीनी नागरिक से बना संपर्क

    महिला ने अपनी यूएन इंटर्नशिप के दौरान कई विदेशी नागरिकों से बातचीत की थी। इसमें एक चीनी नागरिक भी शामिल था, जिसके साथ वह व्हाट्सऐप पर संपर्क में थी। इसके अलावा, 2024 में वह सोशल मीडिया के जरिये एक मलेशियाई नागरिक के संपर्क में थी, जो एक कंसल्टेंसी चलाता है और कथित तौर पर चीनी खुफिया एजेंसियों के लिए काम कर रहा था।


    स्टेशन पर पकड़ी महिला

    केंद्रीय खुफिया एजेंसी और पुलिस की एक संयुक्त टीम ने गत 14 अक्तूबर को जम्मूतवी रेलवे स्टेशन पर महिला को उस समय रोका, जब वह पठानकोट के लिए ट्रेन पकड़ने की तैयारी कर रही थी। उसे पास के एक सैन्य स्टेशन ले जाकर पूछताछ की गई और उसका मोबाइल फोन जब्त कर फोरेंसिक जांच के लिए भेज दिया गया है।


    एआई को आधार बनाया

    महिला का दावा है कि उसने जो भी सामग्री तैयार की, वह पूरी तरह से ओपन-सोर्स जानकारी और एआई प्लेटफॉर्म्स पर आधारित थी। जांच एजेंसियां यह पता लगाने के लिए उसके डिजिटल उपकरणों और वित्तीय लेनदेन का व्यापक फोरेंसिक विश्लेषण कर रही हैं कि क्या उसने फ्रीलांस रिसर्च के नाम पर जानबूझकर विदेशी संपर्कों के साथ संवेदनशील जानकारी साझा की थी।

    अधिकारियों के अनुसार, महिला के फोन से कई मुद्दों पर शोध लिखे दस्तावेज मिले हैं। इसमें जम्मू-कश्मीर में नियंत्रण रेखा, अरुणाचल प्रदेश में बुनियादी ढांचा परियोजनाओं और ड्रोन तैनाती जैसे संवेदनशील विषय हैं। मानेकशॉ सेंटर में भारत-इटली रक्षा बैठक, भारतीय सेना प्रमुख की अमेरिका यात्रा, भारत-रूस रक्षा समझौता आदि दस्तावेज मिले हैं।

    अधिकारियों के मुताबिक, इस मामले में शुक्रवार को जम्मू के गांधी नगर थाने में मामला दर्ज किया गया है। महिला पर जासूसी करने और गोपनीय सरकारी जानकारी को बिना अनुमति इस्तेमाल करने से जुड़े शासकीय गोपनीयता अधिनियम के तहत आरोप लगाए गए हैं। इसके अलावा आपराधिक साजिश रचने और देश की संप्रभुता के खिलाफ अपराधों से संबंधित भारतीय न्याय संहिता की धाराएं भी लगाई गई हैं।

  • ट्रंप और जिनपिंग के साथ बैठक करेंगे पुतिन….त्रिपक्षीय शिखर सम्मेलन का रखा प्रस्ताव

    ट्रंप और जिनपिंग के साथ बैठक करेंगे पुतिन….त्रिपक्षीय शिखर सम्मेलन का रखा प्रस्ताव


    मास्को।
    रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन (Russian President Vladimir Putin) ने अगले महीने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग (Chinese President Xi Jinping) के साथ एक त्रिपक्षीय शिखर सम्मेलन का प्रस्ताव रखा है। इस सम्मेलन में यूक्रेन संघर्ष पर चर्चा होगी। इसका उद्देश्य एक ऐसा शांति समझौता करना है जो मॉस्को के पक्ष में हो। यह जानकारी ‘द वॉल स्ट्रीट जर्नल’ (WSJ) की रिपोर्ट के अनुसार है।

    रिपोर्ट के अनुसार, यह प्रस्ताव राष्ट्रपति ट्रंप के साथ बेहतर होते संबंधों का फायदा उठाने की पुतिन की कोशिश को दिखाता है। इस कदम ने यूक्रेन और वाशिंगटन के यूरोपीय सहयोगियों के बीच चिंताएं पैदा कर दी हैं, खासकर इसलिए क्योंकि इसमें यूक्रेन का कोई प्रतिनिधित्व नहीं है।


    पुतिन ने बातचीत का प्रस्ताव कब रखा?

    इस मामले की जानकारी रखने वाले रूस के एक पूर्व खुफिया अधिकारी का हवाला देते हुए, डब्लूएसजे ने बताया कि पुतिन ने सबसे पहले 9 अक्तूबर को ट्रंप के साथ फोन पर बातचीत के दौरान एक त्रिपक्षीय बैठक का विचार रखा था। इसी बातचीत के दौरान एक समझौता भी हुआ, जिसके तहत अमेरिका को रूस से डीजल खरीदने और उसे वैश्विक बाजारों में वितरित करने की अनुमति मिल गई।


    क्रेमलिन के प्रवक्ता ने क्या कहा?

    क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने डब्लूएसजे को पुष्टि की कि एक संभावित बैठक को लेकर बातचीत चल रही है। पेस्कोव ने डब्लूएसजे से कहा, ‘बैठक या इसके संभावित एजेंडे को लेकर अभी तक कोई स्पष्ट सहमति नहीं बनी है, हालांकि तीनों पक्ष इस बात को मानते हैं कि ऐसी बैठक होने की एक संभावना हो सकती है।’


    अमेरिका के एक वरिष्ठ अधिकारी ने क्या कहा?

    वहीं, अमेरिका के एक वरिष्ठ अधिकारी ने ‘द वॉल स्ट्रीट जर्नल’ को बताया कि ट्रंप ने इस शिखर सम्मेलन के लिए औपचारिक रूप से सहमति नहीं दी है, लेकिन अधिकारी ने संकेत दिया कि युद्ध को सुलझाने की अपनी कोशिशों को देखते हुए, अमेरिकी राष्ट्रपति इस प्रस्ताव पर विचार कर सकते हैं।


    कब हो सकती है बैठक?

    बातचीत से जुड़े सूत्रों ने ‘द वॉल स्ट्रीट जर्नल’ को बताया कि क्रेमलिन ने सुझाव दिया है कि यह त्रिपक्षीय वार्ता आगामी ‘एशिया-पैसिफिक इकोनॉमिक कोऑपरेशन’ (APEC) शिखर सम्मेलन के साथ आयोजित की जा सकती है। यह सम्मेलन 18 और 19 नवंबर को दक्षिणी चीन के टेक हब, शेन्जेन में होने वाला है।

    मॉस्को और बीजिंग के बीच हाल ही में हुई बातचीत से जुड़े सूत्रों ने ‘द वॉल स्ट्रीट जर्नल’ को बताया कि रूसी राजनयिकों ने चीनी अधिकारियों के सामने एक प्रस्ताव रखा। चीनी अधिकारियों ने संकेत दिया कि अगर ट्रंप इसमें शामिल होने के लिए सहमत हो जाते हैं, तो उन्हें कोई आपत्ति नहीं होगी।


    ट्रंप ने जेलेंस्की पर क्या आरोप लगाया?

    रविवार को ट्रंप ने दावा किया कि रूस-यूक्रेन संघर्ष को खत्म करने के लिए चल रही बातचीत में काफी प्रगति हो रही है। उन्होंने मॉस्को के प्रति अपने प्रशासन के राजनयिक रुख का बचाव किया और यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की पर आरोप लगाया कि वे दो साल पहले एक बेहतर समझौता करने में विफल रहे थे।

    इसके साथ ही अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस और रूसी ऊर्जा खरीदने वाले बड़े देशों पर नए कड़े प्रतिबंधों और टैरिफ को फिलहाल लागू न करने के अपने फैसले का बचाव किया है। उनका कहना है कि वह यूक्रेन युद्ध को खत्म करने के लिए चल रही शांति वार्ता को नुकसान नहीं पहुंचाना चाहते। ट्रंप ने कहा कि उनकी सरकार युद्ध को खत्म करने के लिए बातचीत में प्रगति कर रही है। उनके मुताबिक, अगर इस समय रूस पर नए आर्थिक दबाव डाले गए, तो वह बातचीत की मेज छोड़ सकता है।