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  • रोजगार संकट की ओर बढ़ रही दुनिया….विश्व बैंक के अध्यक्ष बोले- 10 साल में 80 करोड़ युवा होंगे बेरोजगार

    रोजगार संकट की ओर बढ़ रही दुनिया….विश्व बैंक के अध्यक्ष बोले- 10 साल में 80 करोड़ युवा होंगे बेरोजगार


    बैंकॉक।
    विश्व बैंक के अध्यक्ष अजय बंगा (World Bank President Ajay Banga) ने भविष्य के रोजगार संकट (Employment Crisis) को लेकर चौंकाने वाली चेतावनी जारी की है। बंगा ने अनुमान जताया है कि अगले 10-15 वर्षों में दुनिया भर के लगभग 120 करोड़ कुशल (स्किल्ड) युवा रोजगार बाजार में प्रवेश करेंगे लेकिन रोजगार 40 करोड़ को ही मिल पाएगा।

    बैंकॉक में अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) International Monetary Fund – IMF) और विश्व बैंक समूह की वार्षिक बैठकों के पूर्ण सत्र को संबोधित करते हुए बंगा ने कहा कि आने वाले समय में लगभग 80 करोड़ युवाओं के सामने बेरोजगारी का बड़ा संकट खड़ा हो सकता है। विश्व बैंक अध्यक्ष ने चेतावनी दी कि विकासशील देश इस समय दोहरी मार झेल रहे हैं। एक तरफ उन पर विदेशी कर्ज का बोझ लगातार बढ़ता जा रहा है, तो दूसरी तरफ विकास कार्यों के लिए मिलने वाली अंतरराष्ट्रीय सहायता में भारी कमी आई है। इसके साथ ही दुनिया भर में चल रहे लगातार युद्ध और तनाव के कारण वैश्विक विकास भी प्रभावित हो रहा है। सरकारों के पास विकास योजनाओं और रोजगार सृजन के लिए बजट की भारी कमी है। बंगा ने वैश्विक नेताओं और नीति निर्माताओं से अपील की है कि वे भविष्य को देखते हुए अपनी आर्थिक नीतियों में तत्काल सुधार करें।


    भारतीय उपमहाद्वीप के युवाओं पर दोहरा असर

    भारतीय उपमहाद्वीप (भारत, बांग्लादेश, पाकिस्तान, नेपाल) दुनिया के सबसे युवा क्षेत्रों में से है, जहां अकेले भारत के श्रम बाजार में हर साल लगभग 1.2 करोड़ (12 मिलियन) युवा प्रवेश करते हैं। नीतियों के क्रियान्वयन के आधार पर युवाओं पर इसके दोहरे प्रभाव पड़ सकते हैं। यदि विश्व बैंक के मॉडल के अनुसार निजी क्षेत्र और बुनियादी ढांचे में निवेश बढ़ता है, तो बड़े पैमाने पर गुणवत्तापूर्ण नौकरियां पैदा होंगी। इससे युवाओं को वित्तीय स्वतंत्रता और बेहतर जीवन स्तर मिलेगा।

    जहां विकसित देशों की आबादी बूढ़ी हो रही है, वहीं भारतीय उपमहाद्वीप के युवा यदि कौशल के मामले में अपग्रेड हो जाते हैं, तो वे वैश्विक नौकरी बाजार की जरूरतों को पूरा कर सकेंगे। विश्व बैंक के कार्यक्रमों (जैसे भारत में आईटीआई का आधुनिकीकरण) में कम से कम 25% से 30% महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित की जा रही है, जिससे युवा महिलाओं को उच्च वेतन वाली नौकरियों में आने का अवसर मिलेगा।


    सार्वजनिक वित्त, निजी निवेश का मॉडल सुझाया

    इस संकट से निपटने के लिए विश्व बैंक के अध्यक्ष ने सार्वजनिक वित्त, निजी निवेश, तकनीक और परोपकार को एक साथ जोड़ने वाला नया विकास मॉडल सुझाया है। विश्व बैंक के अनुसार, 90% नौकरियां निजी क्षेत्र से आती हैं। इसलिए, सरकारों को व्यापार-अनुकूल नियामक सुधार करने चाहिए और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योगों को आसानी से ऋण उपलब्ध कराना चाहिए ताकि वे बड़े पैमाने पर रोजगार सृजित कर सकें।

    विश्व बैंक ने पांच प्रमुख क्षेत्रों की पहचान की है जो सबसे ज्यादा नौकरियां दे सकते हैं। इसमें बुनियादी ढांचा, मूल्यवर्धित विनिर्माण, तकनीक-संचालित कृषि, स्वास्थ्य सेवा और पर्यटन शामिल है। विश्व बैंक ने पारंपरिक शिक्षा के बजाय युवाओं को डिजिटल तकनीक, एआई और उद्योगों की बदलती मांगों के अनुसार प्रशिक्षित करने पर जोर दिया है। इसके साथ ही दक्षिण एशिया के कार्यबल के लिए पर्यावरण के अनुकूल या ‘ग्रीन जॉब्स’ के लिए मौजूदा कौशलों को थोड़ा अपग्रेड या अनुकूलित करने की आवश्यकता पर बल दिया गया है।


    रोजगार अंतर नहीं पाटा गया तो नकारात्मक प्रभाव भी

    दक्षिण एशिया में पहले से ही रोजगार की कमी के चलते युवाओं में असंतोष देखा गया है। यदि इस 80 करोड़ के वैश्विक रोजगार अंतर को पाटने में विफलता मिलती है, तो उपमहाद्वीप में सामाजिक अस्थिरता और विरोध प्रदर्शन बढ़ सकते हैं। स्थानीय स्तर पर सम्मानजनक नौकरियां न मिलने पर युवाओं में विदेशों की ओर पलायन करने (अवैध प्रवासन सहित) का दबाव काफी ज्यादा बढ़ जाएगा। साथ ही डिग्री होने के बावजूद सही हुनर न होने से युवा ‘बेरोजगार’ या ‘अंडर-एम्प्लॉयड’ (योग्यता से कम स्तर का काम करने वाले) रह जाएंगे, जिससे गरीबी का दुष्चक्र बना रहेगा।

  • भारतीय अर्थव्यवस्था का जलवा… एक्सपर्ट का दावा- अमीर देशों की बराबरी पर पहुंच रही GDP ग्रोथ

    भारतीय अर्थव्यवस्था का जलवा… एक्सपर्ट का दावा- अमीर देशों की बराबरी पर पहुंच रही GDP ग्रोथ


    नई दिल्ली।
    भारतीय अर्थव्यवस्था (Indian Economy) के लिए लगातार गुड न्यूज आ रही हैं. आईएमएफ (IMF) से लेकर वर्ल्ड बैंक *World Bank( तक ने Indian Economy का लोहा माना है. तमाम एजेंसियों ने भारत की जीडीपी ग्रोथ (GDP growth) के अनुमान को बढ़ाकर तमाम ग्लोबल चुनौतियों के बावजूद देश की बढ़ती रफ्तार पर अपनी मोहर लगाई है. अब कोरियाई अर्थशास्त्री (Korean Economist) ने एक और खुशखबरी देते हुए कहा है कि भारत की प्रति व्यक्ति जीडीपी अमीर देशों के बराबर पहुंच रही है. उन्होंने आंकड़ों के साथ सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक के बाद एक कई पोस्ट के जरिए इसे समझाया है।


    जीवन स्तर में तेजी से हो रहा सुधार

    दक्षिण कोरियाई इकोनॉमिस्ट क्युंगहून किम (South Korean Economist Kyunghoon Kim) के अनुसार, भारत की आर्थिक प्रगति का आकलन सिर्फ इस आधार पर नहीं किया जाना चाहिए कि देश आज कितना गरीब या अमीर है, बल्कि इस आधार पर किया जाना चाहिए कि देश में जीवन स्तर कितनी तेजी से सुधर रहा है और यह कितनी तेजी से अन्य अर्थव्यवस्थाओं के साथ प्रतिस्पर्धा कर रहा है. उन्होंने कहा कि भारत की बढ़ती प्रति व्यक्ति आय और गरीबी में आई भारी गिरावट सराहनीय है.

    कोरिया इंस्टीट्यूट फॉर इंटरनेशनल इकोनॉमिक पॉलिसी (KIIP) में भारत और दक्षिण एशिया टीम के प्रमुख क्युंगहून किम ने रविवार को कहा कि भारत की मध्यम अवधि की विकास संभावनाओं के बारे में उनके पहले के आकलन पर ऐसी टिप्पणियां आई थीं, जिनमें सुझाव दिया गया था कि भारत अभी भी गरीब है. उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्विटर (अब एक्स) पर एक लंबे-चौड़े पोस्ट में लिखा, ‘अधिक उपयोगी प्रश्न यह है कि क्या जीवन स्तर तेजी से बढ़ रहा है और क्या भारत इस मामले में आगे बढ़ रहा है?’


    ‘प्रति व्यक्ति GDP में तेज इजाफा’

    किम ने अपनी पोस्ट में आंकड़े शेयर करते हुए बताया है कि 2025 में भारत की प्रति व्यक्ति जीडीपी 2,702 डॉलर थी, या क्रय शक्ति समता (PPP) के लिए समायोजित करने पर यह 11,784 डॉलर थी. ऐतिहासिक तुलनाओं के लिए, उन्होंने 2021 की स्थिर पीपीपी प्राइस पर प्रति व्यक्ति जीडीपी का उपयोग किया, जो 2025 में 10,039 डॉलर थी.

    किम ने बताया कि विश्व बैंक द्वारा भारत को 2007 तक निम्न-आय वाले देश के रूप में वर्गीकृत किया गया था. 1990 में, भारत की प्रति व्यक्ति जीडीपी निम्न-आय वाले देशों के औसत से केवल 15% अधिक थी. वहीं 2025 तक यह उस औसत से चार गुना से भी अधिक चुकी थी और मध्यम आय वाले देशों के औसत का 64% तक हो गई, जिसमें से अधिकांश वृद्धि पिछले सिर्फ एक दशक में हुई है. उन्होंने कहा कि भारत की तुलना मध्यम आय वाली अर्थव्यवस्थाओं से करने पर भी सुधार स्पष्ट रूप से दिखाई दिया, इस समूह में चीन और वियतनाम जैसे तेजी से बढ़ते देश शामिल हैं।


    ‘अमीर देशों के साथ अंतर कम कर रहा भारत’

    किम के मुताबिक, भारत अमीर देशों के साथ आय के अंतर को कम करने की दिशा में लगातार प्रयासरत है. उच्च आय वाली अर्थव्यवस्थाओं के मुकाबले भारत की प्रगति धीमी, लेकिन लगातार हो रही है. 1990 में, भारत की प्रति व्यक्ति जीडीपी उच्च आय वाले देशों के औसत का मात्र 6% थी, 2025 तक, यह हिस्सा बढ़कर 17% हो गया था।

    हालांकि, अर्थशास्त्री ने इस सुधार के पीछे कई धनी देशों में धीमी आर्थिक ग्रोथ को भी कारण बताया. भारत की प्रति व्यक्ति जीडीपी भी वैश्विक औसत के लगभग आधे के करीब पहुंच रही है, जबकि 1990 में यह सिर्फ एक-पांचवें हिस्से के बराबर थी।


    भारत की तारीफ में ये बोले किम

    किम ने अपनी पोस्ट में लिखा, ‘कुल मिलाकर, भारत निम्न-आय वाले देशों से और आगे निकल रहा है, उच्च-आय वाले देशों के बराबर पहुंच रहा है और मध्यम-आय वाले औसत की ओर तेजी से प्रगति कर रहा है.’ उन्होंने इस धारणा को भी चुनौती दी कि विकासशील देश स्वतः ही धनी अर्थव्यवस्थाओं के बराबर पहुंच जाते हैं. उन्होंने कहा, ‘बराबरी होना स्वतः होने वाली बात नहीं है।

    अर्थशास्त्री के मुताबिक, गरीबी में रहने वाले भारतीयों की संख्या में 627 मिलियन की कमी आई है. भारत की आर्थिक प्रगति के सबसे महत्वपूर्ण परिणामों में से एक गरीबी में कमी आना रहा है. 4.40 डॉलर प्रति दिन की गरीबी रेखा पर, भारत की गरीबी दर 2004 में 73% से घटकर 2023 में सिर्फ 14% हो गई. किम ने कहा कि भारत की लगभग 1.4 अरब आबादी को देखते हुए ये सुधार विशेष रूप से महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने आगे लिखा कि, ‘मेरा निष्कर्ष वही है, भारत के सामने भले कई चुनौतियां हैं, लेकिन इसकी आर्थिक ग्रोख, विशेष रूप से पिछले दशक में, और सकारात्मक मध्यम अवधि के विकास के दृष्टिकोण सराहनीय हैं. 1.4 अरब लोगों के देश के लिए यह प्रगति बेहद महत्वपूर्ण है।

  • इक्वाडोर के चर्च में लाइव प्रार्थना के दौरान पादरी पर गिरा ईसा मसीह का भारी क्रॉस, सिर में गंभीर चोट से मौत

    इक्वाडोर के चर्च में लाइव प्रार्थना के दौरान पादरी पर गिरा ईसा मसीह का भारी क्रॉस, सिर में गंभीर चोट से मौत

    नई दिल्ली । दक्षिण अमेरिकी देश इक्वाडोर के गुआयाक्विल शहर में चर्च के भीतर एक दर्दनाक हादसा हुआ। यहां प्रार्थना सभा के लाइव प्रसारण के दौरान कैथोलिक पादरी पैट्रिक अल्फ्रेडो सांचेज मोलिनारी के ऊपर अचानक ईसा मसीह का भारी लकड़ी का क्रॉस गिर गया। इस हादसे में पादरी के सिर पर गंभीर चोट लगी, जिसके कारण उनकी मौत हो गई। घटना 17 अक्टूबर की बताई गई है। जिस समय यह दुर्घटना हुई, उस वक्त चर्च में प्रार्थना सेवा चल रही थी और उसका सोशल मीडिया पर सीधा प्रसारण किया जा रहा था। हादसे का दृश्य कैमरे में रिकॉर्ड हो गया, जिसके बाद इसका वीडियो तेजी से फैलने लगा।

    यह घटना गुआयाक्विल स्थित न्यूस्ट्रा सेनोरा डेल परपेटुआ सोकोरो चर्च में हुई। जानकारी के मुताबिक, पादरी सांचेज मोलिनारी चर्च में मंच के पास खड़े होकर धार्मिक अनुष्ठान कर रहे थे और लोगों को संबोधित कर रहे थे। इसी दौरान दीवार पर लगा भारी लकड़ी का क्रूसीफिक्स अचानक अपनी जगह से उखड़ गया और सीधे उनके सिर पर आ गिरा। क्रूसीफिक्स ईसा मसीह को क्रॉस पर दर्शाने वाला धार्मिक प्रतीक होता है। अचानक हुए इस हादसे से वहां मौजूद लोगों में अफरा-तफरी मच गई। पादरी को गंभीर चोट लगने के कारण उनकी जान नहीं बचाई जा सकी।

    इस पूरी घटना का प्रसारण इंटरनेट पर लाइव हो रहा था। बताया गया कि हजारों लोग उस समय प्रार्थना सभा को देख रहे थे। इसी वजह से हादसे का दृश्य बड़ी संख्या में लोगों तक पहुंच गया। वीडियो में पादरी को चर्च के भीतर खड़े होकर श्रद्धालुओं को संबोधित करते देखा जा सकता है। कुछ ही क्षणों बाद उनके ऊपर क्रॉस गिर जाता है और वह नीचे गिर पड़ते हैं। घटना की अचानक हुई प्रकृति और धार्मिक सभा के दौरान हुई इस दुर्घटना ने लोगों को स्तब्ध कर दिया।

    पादरी की मौत की पुष्टि कैथोलिक प्रशासन ने रविवार को की। उनके निधन के बाद धार्मिक समुदाय की ओर से शोक व्यक्त किया गया। पादरी सांचेज मोलिनारी के लिए साझा किए गए एक भावुक संदेश में कहा गया कि वह ईश्वर के पास चले गए हैं। संदेश में उनके लिए शाश्वत शांति की प्रार्थना की गई और उनकी आत्मा को शांति मिलने की कामना की गई। उनके निधन से जुड़े इस संदेश के सामने आने के बाद श्रद्धालुओं और घटना के बारे में जानने वाले लोगों ने दुख जताया।

    इस हादसे को लेकर एक और बात चर्चा में है। बताया जा रहा है कि क्रॉस गिरने से कुछ ही समय पहले पादरी मृत्यु के विषय पर लोगों को संबोधित कर रहे थे। वह श्रद्धालुओं को जीवन की नश्वरता और ईश्वर के साथ बिताए समय के महत्व के बारे में समझा रहे थे। उनके कथित अंतिम संबोधन में कहा गया था कि एक दिन यहां मौजूद सभी लोगों को मृत्यु का सामना करना पड़ेगा। उन्होंने यह भी कहा था कि दूसरी गतिविधियों में समय बिताने की तुलना में ईश्वर, भाई-बहनों और परिवार के साथ बिताया गया समय अधिक महत्वपूर्ण होता है।

    पादरी के कथित अंतिम शब्दों को लेकर इंटरनेट पर कई तरह की चर्चाएं हो रही हैं। हालांकि, इन शब्दों की स्वतंत्र पुष्टि की जानकारी उपलब्ध नहीं है। इसलिए इन्हें उनके प्रमाणित अंतिम शब्द मानने के बजाय घटना से जुड़े दावे के रूप में ही देखा जाना चाहिए।चर्च में हुई इस दुर्घटना ने धार्मिक कार्यक्रमों के लाइव प्रसारण के दौरान सामने आए एक अप्रत्याशित हादसे की ओर लोगों का ध्यान खींचा है। फिलहाल उपलब्ध जानकारी के अनुसार, पादरी की मौत भारी लकड़ी का क्रूसीफिक्स सिर पर गिरने से लगी गंभीर चोट के कारण हुई। प्रार्थना सभा के दौरान हुई इस घटना का वीडियो सामने आने के बाद मामला व्यापक चर्चा में आ गया है।

  • फ्रांस में हिंसक प्रदर्शन से बिगड़े हालात, ट्रंप ने मैक्रों से सीमाएं बंद करने को कहा, वेंस ने भी उठाए सवाल

    फ्रांस में हिंसक प्रदर्शन से बिगड़े हालात, ट्रंप ने मैक्रों से सीमाएं बंद करने को कहा, वेंस ने भी उठाए सवाल

    नई दिल्ली । फ्रांस में महंगाई, शिक्षा व्यवस्था और सरकारी सेवाओं की स्थिति को लेकर शुरू हुए विरोध प्रदर्शन हिंसक घटनाओं में बदल गए हैं। 17 अक्टूबर को हुए प्रदर्शनों के बाद 18 अक्टूबर को देश के कई हिस्सों में तोड़फोड़, दुकानों में लूटपाट और आगजनी की घटनाएं सामने आईं। इन घटनाओं के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फ्रांस की स्थिति पर प्रतिक्रिया देते हुए फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों से देश की सीमाएं बंद करने की अपील की। ट्रंप ने चेतावनी दी कि यदि समय रहते कदम नहीं उठाए गए, तो हालात और बिगड़ सकते हैं। वहीं, अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने भी फ्रांस में हुई हिंसा को लेकर वहां की सरकारों की नीतियों और विविधता से जुड़े मुद्दों पर सवाल उठाए हैं।

    ट्रंप ने फ्रांस में हो रही घटनाओं को लेकर कहा कि देश में बाहर से आने वाले ऐसे लोगों की वजह से हालात बिगड़ रहे हैं, जिनके दिलों में नफरत है। उन्होंने फ्रांस को एक महान देश बताते हुए कहा कि इस तरह की परिस्थितियां देश को कमजोर कर सकती हैं। ट्रंप ने मैक्रों से आग्रह किया कि बहुत देर होने से पहले सीमाओं को बंद कर नियंत्रण स्थापित किया जाए। उनके बयान के बाद फ्रांस में विरोध प्रदर्शनों और आव्रजन नीतियों को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा तेज हो गई है।

    इससे पहले ट्रंप ने फ्रांस की क्रांति से जुड़े ऐतिहासिक संदर्भ का उल्लेख करते हुए मजाकिया अंदाज में कहा था कि फ्रांस क्रांति के लिए प्रसिद्ध है और लोग वहां जाकर क्रांति में शामिल हो सकते हैं। हालांकि, हिंसक घटनाओं के बाद उनका रुख अधिक सख्त नजर आया। उन्होंने मौजूदा स्थिति को फ्रांस के लिए गंभीर बताते हुए सीमाओं पर नियंत्रण को जरूरी बताया।

    अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने भी फ्रांस में हुई हिंसा पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि पश्चिमी देशों की उदारवादी सरकारों ने दया और विविधता के नाम पर तीसरी दुनिया के लोगों को फ्रांस सहित दूसरे देशों में आने दिया, लेकिन उनके समाज में घुलने-मिलने और अनुकूलता से जुड़े बुनियादी सवालों को नजरअंदाज किया गया। वेंस के अनुसार, सरकारों को पहले ही संभावित समस्याओं को लेकर चेतावनी दी गई थी, लेकिन समय रहते आवश्यक कदम नहीं उठाए गए।

    लिमोजेस शहर के ऐतिहासिक सिटी हॉल में आग लगने की घटना का उल्लेख करते हुए वेंस ने चिंता जताई। यह इमारत करीब 143 साल पुरानी है और आग के कारण इसका कुछ हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया। वेंस ने उम्मीद जताई कि फ्रांस इस स्थिति पर काबू पाएगा और अपनी ऐतिहासिक इमारतों को आगे होने वाले नुकसान से बचा सकेगा। उन्होंने अमेरिकी नागरिकों से भी फ्रांस में हो रही घटनाओं पर ध्यान देने की अपील की।

    फ्रांस में विरोध प्रदर्शनों का मुख्य कारण महंगाई, शिक्षा व्यवस्था की समस्याएं और सरकारी सेवाओं की खराब स्थिति बताई गई है। इन मुद्दों को लेकर छात्र, ट्रेड यूनियन और अन्य समूह सड़कों पर उतरे थे। फ्रांस के गृह मंत्रालय के अनुसार, 17 अक्टूबर को हुए प्रदर्शनों में करीब 5 लाख 50 हजार लोग शामिल हुए। वहीं, आयोजकों ने प्रदर्शनकारियों की संख्या लगभग 8 लाख बताई। इस तरह प्रदर्शनों में शामिल लोगों की संख्या को लेकर सरकारी आंकड़ों और आयोजकों के दावों में अंतर सामने आया।

    प्रदर्शन शुरुआत में आर्थिक परेशानियों और सार्वजनिक सुविधाओं से जुड़ी शिकायतों को लेकर किए गए थे, लेकिन बाद में कई जगहों पर स्थिति हिंसक हो गई। कुछ समूहों की पुलिस के साथ झड़प हुई, दुकानों में लूटपाट की गई और कई शहरों में इमारतों को आग के हवाले कर दिया गया। अधिकारियों के मुताबिक, घटनाओं के बाद करीब 1800 लोगों को गिरफ्तार किया गया। हिंसा के दौरान सैकड़ों पुलिसकर्मी और आपातकालीन सेवाओं से जुड़े कर्मचारी भी घायल हुए।

    लिमोजेस में ऐतिहासिक सिटी हॉल को नुकसान पहुंचने की घटना ने स्थिति की गंभीरता को और स्पष्ट किया है। विरोध प्रदर्शनों के पीछे आर्थिक और सार्वजनिक सेवाओं से जुड़ी शिकायतें हैं, जबकि अमेरिकी नेतृत्व ने आव्रजन और विविधता की नीतियों को लेकर अलग दृष्टिकोण सामने रखा है। फिलहाल फ्रांस में हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं और हिंसक घटनाओं के बाद स्थिति को नियंत्रित करना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती है।

  • इंदौर में 23 अक्टूबर से सेमीकंडक्टर समिट, 50 से अधिक कंपनियां दिखाएंगी तकनीक; 6,200 करोड़ के निवेश पर नजर

    इंदौर में 23 अक्टूबर से सेमीकंडक्टर समिट, 50 से अधिक कंपनियां दिखाएंगी तकनीक; 6,200 करोड़ के निवेश पर नजर

    मध्य प्रदेश: में सेमीकंडक्टर उद्योग के विस्तार और निवेश की संभावनाओं को बढ़ावा देने के लिए इंदौर में 23 और 24 अक्टूबर को मध्य प्रदेश सेमीकंडक्टर समिट-2026 का आयोजन किया जाएगा। दो दिवसीय यह कार्यक्रम ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर में होगा। इसमें सेमीकंडक्टर क्षेत्र से जुड़ी कंपनियों, निवेशकों, उद्योग विशेषज्ञों, शिक्षाविदों और स्टार्टअप प्रतिनिधियों के शामिल होने की संभावना है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव पहले दिन उद्घाटन सत्र को संबोधित करेंगे।

    समिट में सेमीकंडक्टर उद्योग की विभिन्न तकनीकों, विनिर्माण की संभावनाओं और इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र में नए अवसरों पर चर्चा होगी। चिप डिजाइन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन और आधुनिक तकनीकी समाधानों को लेकर विशेषज्ञ अपने विचार रखेंगे। आयोजन का प्रमुख उद्देश्य प्रदेश में इस क्षेत्र के लिए निवेश आकर्षित करना और उद्योग से जुड़े लोगों के बीच सहयोग बढ़ाना है।

    समिट के दौरान 50 से अधिक कंपनियां अपनी तकनीक, उत्पादों और समाधानों का प्रदर्शन करेंगी। प्रदर्शनी में चिप डिजाइन, सेमीकंडक्टर पैकेजिंग एवं टेस्टिंग, तकनीकी उपकरण, विनिर्माण में इस्तेमाल होने वाली सामग्री और इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन से जुड़ी कंपनियां शामिल होंगी। कार्यक्रम में आठ पैनल चर्चाएं, पांच राउंडटेबल बैठकें और दो मुख्य व्याख्यान आयोजित किए जाएंगे। इनके माध्यम से उद्योग की जरूरतों, तकनीकी विकास और निवेश से संबंधित मुद्दों पर विचार-विमर्श किया जाएगा।

    पहले दिन की चर्चाओं में मध्य प्रदेश को सेमीकंडक्टर पैकेजिंग एवं टेस्टिंग हब के रूप में विकसित करने की संभावनाओं पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। इसके अलावा फैबलेस इकोसिस्टम, सेमीकंडक्टर विनिर्माण और आपूर्ति शृंखला को मजबूत बनाने जैसे विषय भी एजेंडे में शामिल हैं। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के लिए जरूरी अधोसंरचना, बौद्धिक संपदा और इस क्षेत्र में शिक्षण संस्थानों की भूमिका पर भी चर्चा होगी।

    दूसरे दिन का कार्यक्रम चिप टेक्नोलॉजी, AI और इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादों के निर्माण पर केंद्रित रहेगा। डिजाइन सेवाओं, अनुसंधान एवं विकास और तकनीकी रूप से प्रशिक्षित युवाओं को तैयार करने की जरूरत पर भी विचार किया जाएगा। इसके साथ ही फोटोनिक्स, क्वांटम टेक्नोलॉजी और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSME) से जुड़े विषयों पर बैठकें होंगी। इन चर्चाओं में तकनीकी नवाचार और उद्योग की बदलती जरूरतों के अनुरूप कौशल विकास के अवसरों पर ध्यान दिया जाएगा।

    कार्यक्रम के समापन समारोह में मध्य प्रदेश सेमीकॉन स्टार्टअप प्रतियोगिता के अंतिम चरण में चयनित विजेताओं को सम्मानित किया जाएगा। इस प्रतियोगिता का उद्देश्य सेमीकंडक्टर क्षेत्र में काम कर रहे स्टार्टअप और नए तकनीकी समाधानों को प्रोत्साहित करना है। इससे इस क्षेत्र में नए उद्यमों को सामने लाने और तकनीकी नवाचार को बढ़ावा देने की कोशिश की जाएगी।

    सेमीकंडक्टर उद्योग में निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए राज्य सरकार ने मध्य प्रदेश सेमीकंडक्टर नीति-2025 को मंजूरी दी है। इस नीति के तहत पात्र निवेश परियोजनाओं के लिए 25 प्रतिशत सब्सिडी और 10 साल तक दो रुपये प्रति यूनिट की दर से बिजली उपलब्ध कराने का प्रावधान है। इन प्रोत्साहनों के जरिए प्रदेश में सेमीकंडक्टर से संबंधित औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ाने की योजना है।

    इसी क्षेत्र में पारस सेमीकंडक्टर्स ने 6,200 करोड़ रुपये के प्रस्तावित निवेश से उन्नत सेमीकंडक्टर असेंबली एवं टेस्टिंग (OSAT) सुविधा स्थापित करने के लिए समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं। प्रस्तावित परियोजना से प्रदेश में सेमीकंडक्टर विनिर्माण और उससे जुड़ी औद्योगिक गतिविधियों के विस्तार की संभावनाएं हैं। समिट में निवेश के अवसरों और नीतिगत प्रोत्साहनों पर चर्चा के साथ उद्योग, शिक्षा और अनुसंधान संस्थानों के बीच सहयोग बढ़ाने पर भी जोर रहेगा। तकनीकी अधोसंरचना, अनुसंधान, नवाचार और कुशल मानव संसाधन का विकास इस क्षेत्र के विस्तार से जुड़े प्रमुख विषय होंगे।

  • विजयादशमी पर मध्यप्रदेश में होगा शस्त्र-पूजन, इंदौर में मुख्यमंत्री मोहन यादव करेंगे पूजा, 31 जिलों में मंत्री संभालेंगे जिम्मेदारी

    विजयादशमी पर मध्यप्रदेश में होगा शस्त्र-पूजन, इंदौर में मुख्यमंत्री मोहन यादव करेंगे पूजा, 31 जिलों में मंत्री संभालेंगे जिम्मेदारी

    मध्यप्रदेश: में विजयादशमी के अवसर पर 20 अक्टूबर 2026 को प्रदेशव्यापी शस्त्र-पूजन कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। राज्य सरकार ने इस आयोजन के लिए जिलों के अनुसार जिम्मेदारियां तय की हैं। मुख्यमंत्री मोहन यादव इंदौर में आयोजित कार्यक्रम में शामिल होकर शस्त्र-पूजन करेंगे। वहीं, प्रदेश के 31 जिलों में मंत्री और अन्य प्रमुख जनप्रतिनिधि मौजूद रहेंगे। शेष 24 जिलों में कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक कार्यक्रम की जिम्मेदारी संभालेंगे।

    सरकार की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम का उद्देश्य विजयादशमी पर शस्त्र-पूजन की परंपरा को आगे बढ़ाना और सुरक्षा, साहस तथा राष्ट्र के प्रति सम्मान के भाव को रेखांकित करना है। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने इस परंपरा को देश की सैन्य शक्ति, सुरक्षा और स्वतंत्रता के प्रति सम्मान का प्रतीक बताया है। उनका कहना है कि शस्त्र-पूजन को साहस, आत्मरक्षा और अन्याय के खिलाफ खड़े होने की भावना से जोड़कर देखा जाना चाहिए।

    इन जिलों में प्रमुख नेता करेंगे शस्त्र-पूजन
    राज्य सरकार ने कई जिलों में मंत्रियों और प्रमुख जनप्रतिनिधियों को कार्यक्रम की जिम्मेदारी सौंपी है। इंदौर में मुख्यमंत्री मोहन यादव शस्त्र-पूजन करेंगे। ग्वालियर में विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर कार्यक्रम की अगुवाई करेंगे। मंदसौर में उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा और रीवा में उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल शस्त्र-पूजन में शामिल होंगे।

    राजधानी भोपाल में मंत्री विश्वास सारंग पूजा-अर्चना करेंगे। धार में मंत्री कैलाश विजयवर्गीय कार्यक्रम में मौजूद रहेंगे। नरसिंहपुर में मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल और जबलपुर में मंत्री राकेश सिंह शस्त्र-पूजन करेंगे। सीहोर में मंत्री करण सिंह वर्मा तथा नर्मदापुरम में मंत्री उदय प्रताप सिंह कार्यक्रम की जिम्मेदारी संभालेंगे।इनके अलावा प्रदेश के अन्य जिलों में भी मंत्रियों और जनप्रतिनिधियों को जिम्मेदारियां दी गई हैं। सरकार की योजना के अनुसार, कुल 31 जिलों में मंत्री स्तर पर कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।

    24 जिलों में प्रशासन संभालेगा जिम्मेदारी
    प्रदेश के बाकी 24 जिलों में शस्त्र-पूजन कार्यक्रम के संचालन की जिम्मेदारी जिला प्रशासन को दी गई है। इन स्थानों पर कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक मिलकर आयोजन की व्यवस्था सुनिश्चित करेंगे। इस तरह सरकार ने प्रदेश के सभी जिलों में कार्यक्रम आयोजित करने की योजना बनाई है।प्रशासनिक अधिकारियों की भागीदारी के जरिए यह सुनिश्चित किया जाएगा कि निर्धारित कार्यक्रम संबंधित जिलों में आयोजित हो सके। शस्त्र-पूजन में सुरक्षा से जुड़े विभागों की भूमिका भी महत्वपूर्ण रहेगी।

    विजयादशमी पर शस्त्र-पूजन का धार्मिक महत्व
    सनातन परंपरा में शस्त्रों को शक्ति, साहस और आत्मरक्षा का प्रतीक माना जाता है। विजयादशमी पर शस्त्र-पूजन की परंपरा का उद्देश्य शक्ति के सदुपयोग और अन्याय के विरुद्ध खड़े होने की भावना को मजबूत करना है। इस अवसर पर सैनिक और पुलिसकर्मी अपने हथियारों की पूजा करते हैं, जबकि कई अन्य क्षेत्रों में लोग अपने कामकाज से जुड़े औजारों का पूजन करते हैं।


    शस्त्र-पूजन की एक मान्यता महाभारत काल से जुड़ी है। धार्मिक कथाओं के अनुसार, पांडवों ने अज्ञातवास के दौरान अपने हथियार शमी के पेड़ के नीचे छिपाए थे। अज्ञातवास पूरा होने के बाद अर्जुन ने शमी के पेड़ से अपने शस्त्र निकाले और राजा विराट के राज्य की रक्षा के लिए कौरवों की सेना का सामना किया। इसी मान्यता के कारण कई स्थानों पर विजयादशमी के दिन शमी के पेड़ और शस्त्रों की पूजा की जाती है।

    राम और दुर्गा की विजय से जुड़ा पर्व
    विजयादशमी को भगवान श्रीराम की रावण पर विजय और मां दुर्गा द्वारा महिषासुर के वध की मान्यताओं से भी जोड़ा जाता है। दोनों प्रसंग बुराई, अन्याय और अधर्म पर अच्छाई की जीत का संदेश देते हैं। इसी भावना के साथ शस्त्र-पूजन में शक्ति का इस्तेमाल सही उद्देश्यों, सुरक्षा और धर्म की रक्षा के लिए करने का संकल्प लिया जाता है।

    मध्यप्रदेश में होने वाला यह आयोजन धार्मिक परंपरा के साथ-साथ सुरक्षा और जिम्मेदारी के महत्व को भी सामने रखेगा। प्रदेश के सभी 55 जिलों में तय व्यवस्था के अनुसार कार्यक्रम संपन्न कराने की जिम्मेदारी मंत्रियों और प्रशासनिक अधिकारियों को सौंपी गई है।

  • मध्यप्रदेश को मिल सकते हैं 13 नए IAS अधिकारी, दिल्ली में आज DPC बैठक, चार विवादित नामों पर टिकी नजरें

    मध्यप्रदेश को मिल सकते हैं 13 नए IAS अधिकारी, दिल्ली में आज DPC बैठक, चार विवादित नामों पर टिकी नजरें


    मध्यप्रदेश: को जल्द ही भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) के 13 नए अधिकारी मिल सकते हैं। सोमवार, 19 अक्टूबर 2026 को दिल्ली में विभागीय पदोन्नति समिति (DPC) की बैठक आयोजित होनी है। इसमें राज्य प्रशासनिक सेवा के 39 अधिकारियों के नामों पर विचार किया जाएगा। वरिष्ठता और निर्धारित मूल्यांकन प्रक्रिया के आधार पर 13 अधिकारियों को आईएएस अवॉर्ड दिए जाने की संभावना है। हालांकि, प्रस्तावित सूची में शामिल चार अधिकारियों के नाम विवादों से जुड़े होने के कारण बैठक के फैसले पर सबकी नजरें टिकी हैं।

    यह बैठक मध्यप्रदेश के प्रशासनिक ढांचे के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। समिति अधिकारियों की गोपनीय रिपोर्ट, सेवा रिकॉर्ड और वरिष्ठता सहित निर्धारित मानकों के आधार पर उनके नामों का मूल्यांकन करेगी। इसके बाद तय होगा कि आईएएस अवॉर्ड के लिए किन अधिकारियों के नामों को मंजूरी मिलती है।

    इन 13 अधिकारियों के नाम सूची में शामिल
    प्रस्तावित सूची में सामान्य प्रशासन विभाग के उप सचिव जयेंद्र कुमार विजयवत का नाम शामिल है। राज्य निर्वाचन आयोग में उप सचिव मनोज मालवीय और परिवहन विभाग के उप सचिव कमल नागर भी आईएएस अवॉर्ड के दावेदारों में हैं।

    इसके अलावा शहडोल की अपर कलेक्टर मिनिषा पांडेय, भोपाल जिला पंचायत की मुख्य कार्यपालन अधिकारी इला तिवारी और इंदौर संभाग में उपायुक्त (राजस्व) सपना एम. लोवंशी का नाम भी सूची में शामिल है। बुरहानपुर की अपर कलेक्टर नीता राठौर और शाजापुर जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी शैलेंद्र सिंह सोलंकी भी इस दौड़ में हैं।

    अन्य दावेदारों में भोपाल स्थित लोकायुक्त कार्यालय की उप सचिव रानी पासी, आयुष विभाग की उप सचिव रंजना देवड़ा, महिला एवं बाल विकास विभाग की उप सचिव माधवी नागेंद्र और पर्यावरण विभाग की उप सचिव वर्षा सोलंकी शामिल हैं। माध्यमिक शिक्षा मंडल की अतिरिक्त सचिव प्रियंका गोयल का नाम भी प्रस्तावित 13 अधिकारियों की सूची में है।

    चार विवादित नामों पर क्यों टिकी नजरें?
    आईएएस अवॉर्ड की प्रक्रिया में चार नामों को लेकर विवाद की चर्चा है। महीप किशोर तेजस्वी के नाम पर कांग्रेस नेता केके मिश्रा ने आपत्ति दर्ज कराई है। वहीं, आरटीआई कार्यकर्ता अजय दुबे ने सपना एम. लोवंशी के नाम पर विरोध जताया है।

    हालांकि, उपलब्ध जानकारी में यह स्पष्ट नहीं है कि सामान्य प्रशासन विभाग ने इन आपत्तियों को स्वीकार किया है या नहीं। यह भी साफ नहीं है कि तेजस्वी और लोवंशी उन चार अधिकारियों में शामिल हैं या नहीं, जिनके नामों को लेकर विवाद बताया जा रहा है। इसलिए अंतिम सूची में इन अधिकारियों की स्थिति का पता बैठक के निर्णय के बाद ही चलेगा।

    चार नाम अटके तो इन अधिकारियों को मिल सकता है मौका
    यदि विवादित नामों पर सहमति नहीं बनती है या कुछ नाम चयन प्रक्रिया में आगे नहीं बढ़ पाते हैं, तो वरिष्ठता क्रम में अन्य अधिकारियों पर विचार किया जा सकता है। संभावित विकल्पों में हरदा जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी नरोत्तम प्रसाद भार्गव, मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग में अपर नियंत्रक निधि सिंह राजपूत, सामान्य प्रशासन विभाग के कार्मिक शाखा में उप सचिव निमिषा जायसवाल और उज्जैन जिला पंचायत एवं विकास प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालन अधिकारी संदीप कुमार सोनी के नाम शामिल हैं। हालांकि, इन अधिकारियों के चयन की संभावना भी अंतिम मूल्यांकन और उपलब्ध पदों के आधार पर तय होगी।

    चार श्रेणियों में होगा अधिकारियों का मूल्यांकन
    प्रस्तावित 39 अधिकारियों के नामों पर विचार करते समय उनकी गोपनीय चरित्रावली (CR) और वरिष्ठता को महत्व दिया जाएगा। मूल्यांकन के तहत अधिकारियों को आउटस्टैंडिंग, वेरी गुड, गुड और अनफिट जैसी श्रेणियों में रखा जा सकता है। पहले आउटस्टैंडिंग श्रेणी के अधिकारियों पर विचार होगा। इसके बाद उपलब्ध कोटे के अनुसार वेरी गुड और गुड श्रेणी के अधिकारियों के नामों पर विचार किया जाएगा।

    यह प्रक्रिया सामान्य पदोन्नति से अलग है। इसे योग्यता के आधार पर नियुक्ति की प्रक्रिया माना जाता है। इसमें अधिकारियों की पिछले पांच वर्षों की गोपनीय रिपोर्ट महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इसी कारण किसी अधिकारी की वर्तमान वरिष्ठता के बावजूद उसका चयन मूल्यांकन के परिणाम पर निर्भर कर सकता है।

    अब दिल्ली में होने वाली बैठक के निर्णय से तय होगा कि मध्यप्रदेश के किन अधिकारियों को आईएएस अवॉर्ड मिलता है। साथ ही विवादित नामों की स्थिति और संभावित वैकल्पिक अधिकारियों के चयन को लेकर भी तस्वीर स्पष्ट होने की उम्मीद है।

  • मध्यप्रदेश में घी की गुणवत्ता पर बड़ा सवाल, 50 से ज्यादा नमूने जांच में फेल, 42 उत्पाद वापस मंगाने के निर्देश और 8 पर बिक्री रोक

    मध्यप्रदेश में घी की गुणवत्ता पर बड़ा सवाल, 50 से ज्यादा नमूने जांच में फेल, 42 उत्पाद वापस मंगाने के निर्देश और 8 पर बिक्री रोक


    मध्यप्रदेश:
    में घी की गुणवत्ता को लेकर खाद्य सुरक्षा से जुड़ी चिंता बढ़ गई है। खाद्य एवं औषधि प्रशासन की जांच में घी के 50 से ज्यादा नमूने निर्धारित गुणवत्ता जांच में फेल पाए गए हैं। इसके बाद विभाग ने 42 उत्पादों को बाजार से वापस मंगाने के निर्देश दिए हैं, जबकि आठ उत्पादों की बिक्री पर रोक लगाई गई है। उपभोक्ताओं से संबंधित उत्पाद नहीं खरीदने और यदि पहले खरीद चुके हैं तो उन्हें वापस करने की अपील की गई है।

    घी भारतीय रसोई में इस्तेमाल होने वाला प्रमुख खाद्य पदार्थ है। ऐसे में बड़ी संख्या में नमूनों का जांच में असुरक्षित पाया जाना उपभोक्ताओं के लिए महत्वपूर्ण मामला है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में सभी नमूनों के फेल होने के पीछे की वजह स्पष्ट नहीं की गई है। इसलिए यह कहना उचित नहीं होगा कि प्रत्येक उत्पाद में मिलावट ही पाई गई है। गुणवत्ता संबंधी खामी का वास्तविक कारण विस्तृत जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।

    जांच में इन ब्रांडों के नाम आए सामने

    जांच में जिन घी उत्पादों के नमूने असुरक्षित बताए गए हैं, उनमें अनिक घी, सात्विक केश देसी घी, श्रीमूल एगमार्क शुद्ध घी और एसआरएमएआई मिल्क क्रीम एगमार्क घी शामिल हैं। इसके अलावा अमृत शुद्ध घी, नंद कृष्ण घी और मधुसूदन देसी घी के नमूने भी जांच में फेल बताए गए हैं।

    सूची में देसी गाय का घी संगठन, जवासी काउ देशी घी, संगठन काउ घी, डेयरी सरस घी और जेबीएस ऑर्गेनिक गाय का घी भी शामिल हैं। खुशबू ब्रांड घी, गसांता प्रीमियम काउ घी, गुमर योर काउ घी, श्री शुद्ध एगमार्क घी और वास्तु एगमार्क घी के नमूने भी असुरक्षित पाए जाने की जानकारी दी गई है।

    जिलों में उत्पादों की बिक्री पर कार्रवाई
    जांच के बाद प्रदेश के अलग-अलग जिलों में कुछ उत्पादों की बिक्री रोकने के आदेश जारी किए गए हैं। छिंदवाड़ा में पतंजलि काउ घी के पैक की बिक्री पर रोक लगाई गई है। कटनी में अनिक घी और नर्मदापुरम में संगठन काउ घी की बिक्री रोकने के निर्देश दिए गए हैं।

    धार जिले में चार घी उत्पादों की बिक्री रोकने की जानकारी सामने आई है। इनमें अनिक देसी घी, श्रीमूल घी, एसआरएमएआई मिल्क क्रीम एगमार्क घी और अमृत शुद्ध घी शामिल हैं। वहीं, इंदौर में पीवर इंदौरी लाल मिर्च पाउडर की बिक्री पर रोक लगाई गई है। इससे स्पष्ट होता है कि खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता जांच केवल घी तक सीमित नहीं है, बल्कि अन्य खाद्य उत्पाद भी जांच के दायरे में हैं।

    उपभोक्ता क्या सावधानी बरतें
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    विभाग ने जिन उत्पादों को लेकर निर्देश जारी किए हैं, उन्हें खरीदने से बचने और पहले से खरीदे गए संबंधित उत्पादों को वापस करने की अपील की है। उपभोक्ताओं को पैकेट पर लिखे ब्रांड, उत्पाद का नाम और बैच संबंधी जानकारी ध्यान से देखनी चाहिए। किसी उत्पाद के असुरक्षित पाए जाने की सूचना मिलने पर उसे इस्तेमाल करने के बजाय संबंधित खाद्य सुरक्षा विभाग से मार्गदर्शन लेना उचित है।

    जांच में नमूना फेल होने का अर्थ यह है कि संबंधित उत्पाद निर्धारित जांच मानकों पर खरा नहीं उतरा। हालांकि, इससे अपने आप यह साबित नहीं होता कि उसे खा चुके प्रत्येक व्यक्ति की सेहत को नुकसान हुआ है। उपलब्ध जानकारी में ऐसे उपभोक्ताओं पर स्वास्थ्य प्रभाव को लेकर कोई निश्चित निष्कर्ष नहीं दिया गया है।

    तेज जांच और पारदर्शिता की जरूरत
    इस मामले ने खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता जांच की गति और निगरानी व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े किए हैं। विशेषज्ञों ने जांच प्रक्रिया तेज करने और खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए प्रभावी व्यवस्था विकसित करने की जरूरत पर जोर दिया है। समय पर जांच और कार्रवाई होने से असुरक्षित उत्पादों की बिक्री रोकने में मदद मिल सकती है।

    घी के 50 से ज्यादा नमूनों का असुरक्षित पाया जाना उपभोक्ताओं के लिए सतर्क रहने का संकेत है। अब जांच के निष्कर्षों, उत्पादों की वापसी और बिक्री पर लगाई गई रोक के प्रभावी क्रियान्वयन पर ध्यान देना जरूरी होगा।

  • Gold Price Today: 19 अक्टूबर को सोने के भाव में तेजी, दिल्ली, मुंबई, भोपाल और इंदौर समेत जानें 24K, 22K और 18K के ताजा रेट

    Gold Price Today: 19 अक्टूबर को सोने के भाव में तेजी, दिल्ली, मुंबई, भोपाल और इंदौर समेत जानें 24K, 22K और 18K के ताजा रेट


    नई दिल्ली ।
    19 अक्टूबर 2026 को सोने की कीमतों में तेजी देखने को मिली। दो दिन के अंतराल के बाद बाजार खुलते ही सोने के वायदा भाव में बढ़त दर्ज की गई। शुरुआती कारोबार में 24 कैरेट सोने का वायदा मूल्य 421 रुपये यानी 0.28 प्रतिशत बढ़कर 1,48,339 रुपये प्रति 10 ग्राम हो गया। पिछले कारोबारी सत्र में यह 1,47,918 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ था।

    सोने की कीमतों में अलग-अलग बाजार दरों के अनुसार अंतर भी देखने को मिला। एक दर के मुताबिक 24 कैरेट सोने की कीमत 1,48,610 रुपये प्रति 10 ग्राम रही, जबकि दूसरी दर के अनुसार इसका भाव 1,47,810 रुपये प्रति 10 ग्राम दर्ज किया गया। अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमत 4,199.60 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गई। ऐसे में सोना खरीदने की योजना बना रहे लोगों के लिए अपने शहर का ताजा भाव जानना जरूरी है।

    देश के प्रमुख शहरों में सोने की कीमतें

    19 अक्टूबर को दिल्ली में 24 कैरेट सोने का भाव 1,47,810 रुपये, 22 कैरेट का 1,35,500 रुपये और 18 कैरेट का 1,10,890 रुपये प्रति 10 ग्राम रहा। मुंबई और कोलकाता में 24 कैरेट सोना 1,47,660 रुपये, 22 कैरेट 1,35,350 रुपये और 18 कैरेट 1,10,740 रुपये प्रति 10 ग्राम दर्ज किया गया।

    पटना में 24 कैरेट सोने की कीमत 1,47,710 रुपये, 22 कैरेट की 1,35,400 रुपये और 18 कैरेट की 1,10,790 रुपये प्रति 10 ग्राम रही। भोपाल, इंदौर, अहमदाबाद, वडोदरा और सूरत में भी यही दरें दर्ज की गईं। वहीं, लखनऊ, मेरठ, अयोध्या, कानपुर, आगरा, वाराणसी, प्रयागराज, नोएडा, गाजियाबाद, गुरुग्राम, जयपुर और चंडीगढ़ में 24 कैरेट सोने का भाव 1,47,810 रुपये प्रति 10 ग्राम रहा।

    चेन्नई में 24 कैरेट सोना 1,47,660 रुपये और 22 कैरेट सोना 1,35,350 रुपये प्रति 10 ग्राम दर्ज किया गया। यहां 18 कैरेट सोने की कीमत 1,11,250 रुपये रही। पुणे, नागपुर, बेंगलुरु, हैदराबाद और भुवनेश्वर सहित कई अन्य शहरों में 24 कैरेट सोने का भाव 1,47,660 रुपये प्रति 10 ग्राम रहा। नासिक और वसई-विरार में 24 कैरेट सोने की कीमत 1,47,690 रुपये दर्ज की गई।

    पिछले कारोबारी सत्र में सोने का हाल
    पिछले कारोबारी सत्र में दिल्ली के सर्राफा बाजार में सोने की कीमतें स्थिर रही थीं। 99.9 प्रतिशत शुद्धता वाले सोने का भाव सभी करों सहित 1,49,900 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बना रहा। हालांकि, सप्ताह के दौरान कीमतों में कुल 4,500 रुपये यानी लगभग तीन प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई थी। अंतरराष्ट्रीय बाजार में हाजिर सोना 0.30 प्रतिशत बढ़कर 4,183.34 डॉलर प्रति औंस पहुंच गया था।

    वायदा बाजार में दिसंबर में आपूर्ति वाले सोने के अनुबंध की कीमत 876 रुपये यानी 0.59 प्रतिशत बढ़कर 1,48,365 रुपये प्रति 10 ग्राम हो गई थी। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर न्यूयॉर्क में सोने का भाव 4,171.84 डॉलर प्रति औंस दर्ज किया गया था। मजबूत हाजिर मांग और कारोबारियों की नई खरीदारी से वायदा कीमतों को सहारा मिला।

    रुपये की मजबूती का सोने पर असर
    भारतीय रुपये की मजबूती भी घरेलू सोने की कीमतों को प्रभावित कर रही है। पिछले कारोबारी सत्र में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया सात पैसे मजबूत होकर 94.92 प्रति डॉलर पर बंद हुआ था। रुपये में लगातार छठे कारोबारी सत्र में मजबूती दर्ज की गई।

    भारत अपनी सोने की जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है। ऐसे में रुपये की मजबूती से आयात लागत कम हो सकती है और घरेलू बाजार में सोने की कीमतों में तेजी सीमित रह सकती है। बाजार के जानकारों के अनुसार, सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट के बाद कुछ सुधार देखने को मिला है। सोना 1.49 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर से नीचे आने के बाद नुकसान की भरपाई करने की कोशिश कर रहा है।

    आने वाले समय में सोने का कारोबार सीमित दायरे में रहने के साथ हल्की तेजी दिखा सकता है। बाजार की दिशा पर कच्चे तेल की कीमतों का असर भी महत्वपूर्ण रह सकता है। हालांकि, सोने के भाव में शहर, शुद्धता और स्थानीय बाजार के अनुसार अंतर हो सकता है। खरीदारी से पहले संबंधित शहर के ताजा भाव और आभूषणों पर लागू अतिरिक्त शुल्क की जानकारी लेना उपयोगी रहेगा।

  • खुद IMF से मांग रहा मदद, अब दुनिया को कर्ज संभालना सिखाएगा पाकिस्तान, बॉरोअर्स प्लेटफॉर्म की मिली कमान

    खुद IMF से मांग रहा मदद, अब दुनिया को कर्ज संभालना सिखाएगा पाकिस्तान, बॉरोअर्स प्लेटफॉर्म की मिली कमान


    नई दिल्ली। खुद अरबों डॉलर के विदेशी कर्ज के बोझ तले दबा पाकिस्तान अब दूसरे विकासशील देशों को कर्ज प्रबंधन के गुर सिखाने और उनकी आर्थिक चिंताओं को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उठाने की जिम्मेदारी निभाएगा। संयुक्त राष्ट्र के समर्थन वाले ‘बॉरोअर्स प्लेटफॉर्म’ यानी कर्ज लेने वाले देशों के मंच की अध्यक्षता पाकिस्तान को मिली है। पाकिस्तान के वित्त मंत्री मुहम्मद औरंगजेब ने 12 अक्टूबर को बैंकॉक में मंच की गवर्निंग काउंसिल के अध्यक्ष का पद संभाला।

    पाकिस्तान की इस नियुक्ति पर इसलिए चर्चा हो रही है, क्योंकि उसकी अर्थव्यवस्था लंबे समय से बाहरी वित्तीय मदद पर निर्भर है। हालांकि, इस मंच की अगुवाई करने से पाकिस्तान का अपना कर्ज कम नहीं होगा। न ही उसे कर्ज चुकाने की शर्तों में किसी तरह की विशेष राहत मिलेगी। इस मंच का उद्देश्य विकासशील देशों को कर्ज प्रबंधन के अनुभव साझा करने, आर्थिक सुधारों पर चर्चा करने और विकास के लिए वित्त जुटाने के बेहतर विकल्प तलाशने का अवसर देना है।

    IMF से फिर मदद की उम्मीद, पहले भी मिल चुके हैं राहत पैकेज

    पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि वह लगातार अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) से वित्तीय सहायता मांगता रहा है। 7 अक्टूबर को पाकिस्तान और IMF के बीच एक समझौते पर सहमति बनी थी। इसके तहत पाकिस्तान को करीब 1.21 अरब डॉलर की मदद मिल सकती है। हालांकि, इस सहायता के लिए IMF के कार्यकारी बोर्ड की मंजूरी जरूरी है।

    इससे पहले 2023 में पाकिस्तान को 3 अरब डॉलर का IMF राहत पैकेज मिला था, जिसने उसे संप्रभु डिफॉल्ट यानी कर्ज चुकाने में पूरी तरह नाकाम होने की स्थिति से बचने में मदद की। इसके बाद 2024 में देश के लिए 7 अरब डॉलर का एक और कार्यक्रम मंजूर किया गया। जलवायु से जुड़ी चुनौतियों से निपटने के लिए पाकिस्तान ने IMF से 1.3 अरब डॉलर का अलग ऋण भी हासिल किया।

    स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान के आंकड़ों के मुताबिक, मार्च 2026 के अंत तक देश का कुल बाहरी कर्ज और देनदारियां 137.55 अरब डॉलर थीं। ऐसे में कर्ज प्रबंधन से जुड़े मंच की अध्यक्षता मिलना पाकिस्तान के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक अहम जिम्मेदारी है, लेकिन इससे उसकी आर्थिक चुनौतियां अपने आप दूर नहीं होंगी।

    क्या है बॉरोअर्स प्लेटफॉर्म?

    बॉरोअर्स प्लेटफॉर्म विकासशील देशों के लिए बनाया गया ऐसा मंच है, जहां कर्ज लेने वाले देश अपनी समस्याओं, अनुभवों और आर्थिक सुधारों से जुड़े उपायों पर चर्चा कर सकते हैं। इसका उद्देश्य कर्ज के बेहतर प्रबंधन, विकास के लिए वित्त जुटाने और अंतरराष्ट्रीय वित्तीय व्यवस्था में कर्जदार देशों की चिंताओं को मजबूती से सामने लाने के लिए स्थायी व्यवस्था तैयार करना है।

    इस मंच को संयुक्त राष्ट्र की संस्था UNCTAD यानी व्यापार और विकास पर संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन का सचिवालय सहयोग देता है। इसका विचार जुलाई 2025 में स्पेन के सेविले में आयोजित विकास वित्त सम्मेलन के दौरान सामने आया था। इसके बाद 15 अप्रैल 2026 को वॉशिंगटन में इसे औपचारिक रूप से शुरू किया गया।

    अब तक कर्ज देने वाले देशों के बीच समन्वय के लिए कई व्यवस्थाएं मौजूद रही हैं, लेकिन कर्ज लेने वाले देशों के पास आपसी सहयोग के लिए ऐसा स्थायी मंच नहीं था। बॉरोअर्स प्लेटफॉर्म इसी कमी को दूर करने की कोशिश है।

    UNCTAD में कर्ज और विकास से जुड़े मामलों की प्रमुख पेनेलोप हॉकिन्स ने अप्रैल में मंच की शुरुआत के दौरान कहा था कि कर्ज देने वाले देशों के समूह ‘पेरिस क्लब’ को इस तरह के समन्वय का करीब 70 साल का अनुभव है।

    पाकिस्तान पहले से रहा है मंच की तैयारी में शामिल

    पाकिस्तान इस मंच को तैयार करने की प्रक्रिया में पहले से भागीदारी कर रहा था। वह मिस्र की अगुवाई वाले कार्य समूह का उपाध्यक्ष था। इस समूह में कोलंबिया, होंडुरास, मालदीव, नेपाल और जाम्बिया भी शामिल थे। समूह ने मंच के कामकाज, सदस्यता और संचालन से जुड़े नियम तैयार करने में योगदान दिया।

    UNCTAD के अनुसार, मंच के सदस्य हर साल अपना अध्यक्ष चुनते हैं। इसकी गवर्निंग काउंसिल में वित्त मंत्री, केंद्रीय बैंक के गवर्नर और अन्य वरिष्ठ अधिकारी शामिल होते हैं, जो मंच की प्राथमिकताएं तय करते हैं। वहीं, संचालन समिति तकनीकी और व्यावहारिक कामकाज संभालती है।

    कर्ज प्रबंधन और आर्थिक सुधारों पर रहेगा जोर

    पाकिस्तान के वित्त मंत्री मुहम्मद औरंगजेब ने कहा है कि उनका देश कर्ज प्रबंधन को बेहतर बनाने, आर्थिक सुधारों के अनुभव साझा करने और विकास के लिए वित्त जुटाने के नए तरीके तलाशने पर ध्यान देगा। उन्होंने योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू करने और उनके नतीजों का आकलन करने की जरूरत पर भी जोर दिया है।

    हालांकि, अध्यक्ष के रूप में पाकिस्तान को दूसरे देशों के कर्ज की शर्तों पर बातचीत करने या अपने लिए भुगतान में राहत हासिल करने का अधिकार नहीं मिलेगा। UNCTAD के मुताबिक, यह मंच अपने सदस्यों की ओर से कर्ज की शर्तों या भुगतान को लेकर बातचीत नहीं करेगा। इसके बजाय यह कर्ज से जुड़ी मौजूदा व्यवस्थाओं के साथ मिलकर काम करेगा।

    कुल मिलाकर, पाकिस्तान की भूमिका कर्ज से परेशान विकासशील देशों को एक साझा मंच उपलब्ध कराने, उनके अनुभवों का आदान-प्रदान बढ़ाने और उनकी समस्याओं को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उठाने की होगी। मंच की अध्यक्षता से उसे कूटनीतिक भूमिका निभाने का अवसर जरूर मिलेगा, लेकिन अपने विदेशी कर्ज और उसे चुकाने की जिम्मेदारी से उसे कोई छूट नहीं मिलेगी।