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  • अमित शाह का दावा, आईएसआई समर्थित आतंकी नेटवर्क ध्वस्त, कई राज्यों में संयुक्त अभियान के दौरान हथियार और विस्फोटक बरामद

    अमित शाह का दावा, आईएसआई समर्थित आतंकी नेटवर्क ध्वस्त, कई राज्यों में संयुक्त अभियान के दौरान हथियार और विस्फोटक बरामद

    नई दिल्ली ।केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सोमवार को दावा किया कि स्वतंत्रता दिवस से पहले सुरक्षा एजेंसियों ने पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई समर्थित बताए जा रहे शहजाद भट्टी नेटवर्क के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है। उनके अनुसार 14 राज्यों में एक साथ चलाए गए अभियान के दौरान 200 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया गया और आतंकी गतिविधियों से जुड़ी सामग्री बरामद की गई।

    अमित शाह के मुताबिक सुरक्षा एजेंसियों और विभिन्न राज्यों की पुलिस ने 12 अगस्त को रियल टाइम इंटेलिजेंस शेयरिंग सिस्टम के जरिए समन्वित अभियान चलाया। कार्रवाई का उद्देश्य स्वतंत्रता दिवस के आसपास संभावित आतंकी गतिविधियों और हिंसा की साजिशों को समय रहते रोकना था। इस अभियान में उत्तर प्रदेश, दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, महाराष्ट्र, उत्तराखंड, कर्नाटक, गुजरात, बिहार, तेलंगाना, हिमाचल प्रदेश, जम्मू कश्मीर और केरल को शामिल किया गया।

    गिरफ्तारियों के आंकड़ों के अनुसार उत्तर प्रदेश में 62, हरियाणा में 52, दिल्ली में 51 और पंजाब में 44 लोगों को पकड़ा गया। राजस्थान में 15, महाराष्ट्र में आठ और उत्तराखंड में पांच गिरफ्तारियां हुईं। गुजरात, कर्नाटक और बिहार में तीन तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया, जबकि तेलंगाना, हिमाचल प्रदेश, जम्मू कश्मीर और केरल में दो दो लोगों को पकड़ा गया।

    गृह मंत्री ने कहा कि कार्रवाई के दौरान बड़ी संख्या में संदिग्ध आतंकी गतिविधियों में इस्तेमाल होने वाली सामग्री बरामद की गई। इनमें आईईडी, पिस्तौल, जिंदा कारतूस और ग्रेनेड शामिल हैं। कुछ ग्रेनेड पर पाकिस्तान ऑर्डनेंस फैक्ट्री की मार्किंग मिलने की बात भी सामने आई है। इसके अलावा जासूसी और निगरानी के लिए इस्तेमाल किए जा रहे सीसीटीवी कैमरे भी बरामद किए गए।

    सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार शहजाद भट्टी नेटवर्क को पाकिस्तान स्थित और आईएसआई समर्थित आतंकी सिंडिकेट के रूप में देखा जा रहा है। आरोप है कि यह नेटवर्क भारत में ग्रेनेड, आईईडी और पेट्रोल बम हमलों के अलावा लक्षित हत्याओं जैसी गतिविधियों में स्थानीय सहयोगियों का इस्तेमाल करता था।

    एजेंसियों के अनुसार नेटवर्क से जुड़े स्थानीय लोगों को कथित तौर पर धन उपलब्ध कराया जाता था और उनसे पुलिस, रक्षा प्रतिष्ठानों तथा धार्मिक स्थलों की रेकी कराने जैसे काम लिए जाते थे। निगरानी के लिए विभिन्न स्थानों पर सीसीटीवी कैमरे लगाए जाने की बात भी जांच में सामने आई है।

    अमित शाह ने इस कार्रवाई को आतंकवाद के खिलाफ सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति का उदाहरण बताया। उन्होंने कहा कि सुरक्षा बलों की समयबद्ध कार्रवाई से संभावित विध्वंसक योजनाओं को नाकाम किया गया। स्वतंत्रता दिवस जैसे संवेदनशील अवसर से पहले इतने बड़े स्तर पर की गई कार्रवाई को सुरक्षा व्यवस्था के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    बताया गया है कि इस नेटवर्क के खिलाफ अब तक 80 से अधिक प्राथमिकी दर्ज की जा चुकी हैं। मामलों में गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम, भारतीय न्याय संहिता, शस्त्र अधिनियम, मादक पदार्थ संबंधी कानून और विस्फोटक पदार्थ अधिनियम जैसी धाराओं का इस्तेमाल किया गया है।

    सुरक्षा एजेंसियां गिरफ्तार किए गए लोगों की भूमिका, उनके आपसी संपर्क, वित्तीय नेटवर्क और सीमा पार से संभावित संबंधों की जांच कर रही हैं। बरामद हथियारों और अन्य सामग्री के स्रोत की भी पड़ताल की जा रही है। अधिकारियों का मानना है कि आगे की जांच में नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों और उसकी गतिविधियों के बारे में और जानकारी सामने आ सकती है।

  • भारत बना दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मत्स्य उत्पादक देश, वैश्विक उत्पादन में करीब 8 प्रतिशत हिस्सेदारी दर्ज

    भारत बना दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मत्स्य उत्पादक देश, वैश्विक उत्पादन में करीब 8 प्रतिशत हिस्सेदारी दर्ज

    नई दिल्ली ।भारत का मत्स्य और जलीय कृषि क्षेत्र देश की अर्थव्यवस्था में लगातार महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। सरकार के अनुसार भारत अब दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मत्स्य उत्पादक देश है और वैश्विक मत्स्य उत्पादन में करीब 8 प्रतिशत योगदान करता है। जलीय कृषि उत्पादन के मामले में भी भारत दूसरे स्थान पर है, जबकि झींगा उत्पादन और निर्यात के क्षेत्र में देश दुनिया के प्रमुख देशों में शामिल है।

    मत्स्य क्षेत्र का विस्तार सीधे तौर पर बड़ी आबादी की आजीविका से जुड़ा हुआ है। सरकार के मुताबिक देश में करीब तीन करोड़ मछुआरों और मत्स्य किसानों की आजीविका इस क्षेत्र पर निर्भर है। मछली पकड़ने और उत्पादन के अलावा प्रसंस्करण, परिवहन, भंडारण, विपणन और निर्यात जैसी गतिविधियों के जरिए भी मत्स्य मूल्य शृंखला में रोजगार के बड़े अवसर पैदा होते हैं।

    सरकार ने बताया कि वर्ष 2015 से अब तक मत्स्य क्षेत्र के सतत विकास और आधुनिकीकरण के लिए 39,272 करोड़ रुपये का संचयी निवेश किया गया है। यह निवेश ब्लू रिवोल्यूशन, फिशरीज एंड एक्वाकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट फंड, प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना और प्रधानमंत्री मत्स्य किसान समृद्धि सह-योजना जैसी विभिन्न पहलों के माध्यम से किया गया है।

    इन योजनाओं का उद्देश्य मत्स्य उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ क्षेत्र में आधुनिक बुनियादी ढांचे को मजबूत करना है। उत्पादन से लेकर बाजार तक पूरी मूल्य शृंखला को बेहतर बनाने पर जोर दिया जा रहा है, ताकि मछुआरों और मत्स्य किसानों को बेहतर बाजार, तकनीक और आय के अवसर उपलब्ध हो सकें।

    मत्स्य क्षेत्र में युवाओं और उद्यमशील किसानों की भागीदारी को भी सरकार महत्वपूर्ण मान रही है। आधुनिक जलीय कृषि तकनीक, डिजिटल ट्रेसबिलिटी, कोल्ड चेन प्रबंधन, मूल्य संवर्धन, ब्रांडिंग और मार्केटिंग जैसे क्षेत्रों में नई तकनीकों का इस्तेमाल बढ़ रहा है। इससे पारंपरिक मत्स्य गतिविधियों को अधिक संगठित और बाजार आधारित बनाने की संभावनाएं बढ़ी हैं।

    सरकार का मानना है कि युवाओं की सक्रिय भागीदारी भारत की ब्लू इकोनॉमी को मजबूती दे सकती है। मत्स्य उत्पादन के साथ प्रसंस्करण और निर्यात क्षमता बढ़ने से ग्रामीण और तटीय क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियों को भी गति मिलने की उम्मीद है।

    प्रधानमंत्री मत्स्य किसान समृद्धि सह-योजना को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने फरवरी 2024 में मंजूरी दी थी। यह प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के अंतर्गत केंद्रीय क्षेत्र की उप-योजना है और वित्त वर्ष 2023-24 से 2026-27 तक चार वर्षों के लिए लागू की जा रही है। इसके लिए करीब 6,000 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।

    यह योजना देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में लागू है। इसका उद्देश्य वित्तीय और तकनीकी सहायता के जरिए मत्स्य क्षेत्र की संरचनात्मक कमियों को दूर करना, संस्थागत सुधारों को बढ़ावा देना, उत्पादकता बढ़ाना और आधुनिक तकनीक को अपनाने में मदद करना है।

    योजना के तहत बाजार तक पहुंच मजबूत करने और मत्स्य किसानों की आय बढ़ाने पर भी ध्यान दिया जा रहा है। उत्पादन के बाद होने वाले नुकसान को कम करने के लिए बेहतर भंडारण और कोल्ड चेन सुविधाओं का विस्तार भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    स्वतंत्रता दिवस समारोह के बाद मत्स्य पालन विभाग ने योजना के लाभार्थियों और उनके जीवनसाथियों के साथ विशेष संवाद कार्यक्रम आयोजित किया। इसका उद्देश्य मत्स्य क्षेत्र से जुड़े लोगों के योगदान को सम्मानित करना और सरकारी योजनाओं से मिले बदलावों को सामने लाना था। भारत की बढ़ती उत्पादन क्षमता, आधुनिक तकनीक और निर्यात संभावनाओं को देखते हुए मत्स्य क्षेत्र आने वाले वर्षों में देश की ब्लू इकोनॉमी और ग्रामीण रोजगार का अहम आधार बन सकता है।

  • विझिंजम पोर्ट से मंगलवार को शुरू होगा पूर्ण निर्यात-आयात संचालन, केरल के वैश्विक व्यापार को मिलेगी नई रफ्तार

    विझिंजम पोर्ट से मंगलवार को शुरू होगा पूर्ण निर्यात-आयात संचालन, केरल के वैश्विक व्यापार को मिलेगी नई रफ्तार

    नई दिल्ली । केरल का विझिंजम अंतरराष्ट्रीय बंदरगाह मंगलवार से पूर्ण निर्यात-आयात संचालन के साथ अपने विकास के नए चरण में प्रवेश करेगा। भारत के पहले गहरे पानी वाले कंटेनर ट्रांसशिपमेंट बंदरगाह के रूप में विकसित किए गए विझिंजम में अब ट्रांसशिपमेंट गतिविधियों के साथ प्रत्यक्ष वाणिज्यिक व्यापार संचालन भी शुरू होगा। इसे केरल की अर्थव्यवस्था, निर्यात क्षमता और लॉजिस्टिक्स क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण बदलाव माना जा रहा है।

    पूर्ण निर्यात-आयात संचालन की शुरुआत के अवसर पर सुबह 10:45 बजे पहले निर्यात कंटेनर को रवाना किया जाएगा। कार्यक्रम में केंद्रीय पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे। इस शुरुआत के साथ केरल के निर्यातकों को अपने माल को अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचाने के लिए दूसरे ट्रांसशिपमेंट केंद्रों पर निर्भरता कम करने का विकल्प मिलेगा।

    अब तक विझिंजम मुख्य रूप से ट्रांसशिपमेंट हब के तौर पर विकसित किया गया है। नई व्यवस्था के बाद यहां से केरल और देश के अन्य हिस्सों के निर्यातक सीधे विदेशी बाजारों के लिए कंटेनर भेज सकेंगे। इससे कोलंबो, सिंगापुर और दुबई जैसे पारंपरिक ट्रांसशिपमेंट केंद्रों के जरिए माल भेजने की आवश्यकता कुछ मामलों में कम हो सकती है। इसका असर परिवहन समय और लॉजिस्टिक्स लागत पर भी पड़ने की उम्मीद है।

    विझिंजम की सबसे बड़ी विशेषताओं में इसकी प्राकृतिक समुद्री गहराई और रणनीतिक भौगोलिक स्थिति शामिल है। बंदरगाह में करीब 20 से 24 मीटर की प्राकृतिक गहराई है, जिससे यहां बड़े कंटेनर जहाजों को संभालने की क्षमता विकसित हुई है। यह अंतरराष्ट्रीय ईस्ट-वेस्ट शिपिंग कॉरिडोर से लगभग 10 समुद्री मील की दूरी पर स्थित है, जिससे वैश्विक समुद्री व्यापार के प्रमुख मार्गों तक इसकी पहुंच मजबूत होती है।

    परीक्षण संचालन के दौरान स्पेन के वालेंसिया भेजा गया पहला निर्यात कंटेनर इस क्षमता का प्रदर्शन कर चुका है। अब नियमित निर्यात-आयात संचालन शुरू होने के बाद कृषि उत्पाद, मसाले, काजू, समुद्री उत्पाद, हथकरघा और वस्त्र जैसे क्षेत्रों से जुड़े कारोबारियों को इसका लाभ मिलने की संभावना है। खास तौर पर छोटे और मध्यम उद्यमों के लिए अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंच आसान होने की उम्मीद है।

    बंदरगाह के विस्तार का असर केवल समुद्री व्यापार तक सीमित रहने की संभावना नहीं है। वेयरहाउस, कोल्ड स्टोरेज, कंटेनर फ्रेट स्टेशन और लॉजिस्टिक्स पार्क जैसी सहायक सुविधाओं की मांग बढ़ सकती है। इससे तिरुवनंतपुरम और आसपास के क्षेत्रों में निवेश तथा रोजगार के नए अवसर बनने की संभावना है।

    राज्य सरकार इस अवसर के साथ बंदरगाह आधारित आर्थिक विकास को गति देने के लिए मिशन समुद्र शुरू कर रही है। इसके तहत विझिंजम मैरीटाइम इकोनॉमिक रीजन विकसित करने की योजना है। इसमें आठ औद्योगिक क्लस्टर और तीन नए शहरों को विकसित करने के साथ केरल की करीब 600 किलोमीटर लंबी तटरेखा को आर्थिक गतिविधियों से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है।

    सरकार ने इस पहल के लिए 400 करोड़ रुपये का कैटेलिटिक फंड निर्धारित किया है। इसका इस्तेमाल बंदरगाह और कनेक्टिविटी, लॉजिस्टिक्स, औद्योगिक क्लस्टर, नए शहरों, कार्यक्रम प्रबंधन और क्षमता निर्माण से जुड़ी 14 उप-योजनाओं में किया जाएगा। वर्ष 2031 तक निजी निवेश के जरिए सार्वजनिक निवेश की तुलना में कई गुना अधिक आर्थिक गतिविधि पैदा करने की उम्मीद जताई गई है।

    विझिंजम के संचालन का जिम्मा अदाणी पोर्ट्स के पास है। मजबूत सड़क और रेल संपर्क के साथ बंदरगाह के विस्तार से केरल के विनिर्माण, सेवा और निर्यात क्षेत्रों को नई संभावनाएं मिल सकती हैं। पूर्ण निर्यात-आयात संचालन शुरू होने के बाद विझिंजम केवल ट्रांसशिपमेंट केंद्र नहीं, बल्कि केरल के लिए वैश्विक व्यापार और औद्योगिक विकास का प्रमुख द्वार बनने की दिशा में आगे बढ़ेगा।

  • बीजेपी ने नई राष्ट्रीय टीम के साथ संगठन मजबूत किया, जानिए राष्ट्रीय अध्यक्ष से बूथ स्तर तक कैसे चलता है पार्टी का ढांचा

    बीजेपी ने नई राष्ट्रीय टीम के साथ संगठन मजबूत किया, जानिए राष्ट्रीय अध्यक्ष से बूथ स्तर तक कैसे चलता है पार्टी का ढांचा


    नई दिल्ली : 
    भारतीय जनता पार्टी ने 17 अगस्त 2026 को अपनी नई राष्ट्रीय टीम का ऐलान किया है। राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के नेतृत्व में तैयार की गई इस टीम में स्मृति ईरानी को राष्ट्रीय महासचिव और वसुंधरा राजे को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी दी गई है। बीएल संतोष संगठन महामंत्री के पद पर बने हुए हैं। नई टीम में 13 राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और आठ महासचिव शामिल किए गए हैं।

    नई टीम का गठन ऐसे समय हुआ है जब उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियां धीरे धीरे तेज हो रही हैं। संगठन में उत्तर प्रदेश के आठ पदाधिकारियों को जगह मिली है। इसके अलावा दिल्ली से 10, महाराष्ट्र से पांच, राजस्थान और उत्तराखंड से चार चार तथा पंजाब और बिहार से दो दो चेहरों को स्थान मिला है। इससे राज्यों के प्रतिनिधित्व और चुनावी प्राथमिकताओं का संकेत मिलता है।

    बीजेपी की सबसे बड़ी संगठनात्मक विशेषता उसका बहुस्तरीय ढांचा है। पार्टी की संरचना राष्ट्रीय स्तर से शुरू होकर राज्य, जिला, मंडल और बूथ तक जाती है। इस व्यवस्था का उद्देश्य केंद्रीय स्तर पर तय रणनीति को स्थानीय स्तर तक पहुंचाना और बूथ स्तर से मिलने वाले फीडबैक को ऊपर तक ले जाना है।

    संगठन के शीर्ष स्तर पर मार्गदर्शक मंडल की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जाती है। इसके बाद पार्टी के प्रमुख निर्णय लेने वाले निकाय और राष्ट्रीय अध्यक्ष का स्थान आता है। राष्ट्रीय अध्यक्ष संगठन का सर्वोच्च पद होता है। पार्टी संविधान के अनुसार अध्यक्ष के चुनाव के लिए निर्धारित प्रक्रिया और योग्यता तय है तथा कार्यकाल तीन वर्ष का होता है।

    राष्ट्रीय अध्यक्ष के साथ राष्ट्रीय कार्यकारिणी पार्टी की रणनीति और संगठनात्मक दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाती है। इसमें राष्ट्रीय उपाध्यक्ष, महासचिव, सचिव और कोषाध्यक्ष जैसे पद शामिल होते हैं। राष्ट्रीय महासचिवों में संगठन महामंत्री का पद विशेष महत्व रखता है, क्योंकि संगठन के नियमित संचालन और विभिन्न स्तरों के बीच समन्वय की जिम्मेदारी इससे जुड़ी होती है।

    राष्ट्रीय स्तर के बाद राज्य संगठन पार्टी की रणनीति को जमीन पर लागू करता है। राज्य परिषद और राज्य कार्यकारिणी इसके प्रमुख अंग हैं। राज्य परिषद प्रदेश अध्यक्ष के चुनाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है, जबकि राज्य कार्यकारिणी संगठन की राजनीतिक और प्रशासनिक गतिविधियों को आगे बढ़ाती है।

    प्रदेश अध्यक्ष अपनी टीम में उपाध्यक्ष, महासचिव, सचिव और कोषाध्यक्ष जैसे पदों पर नियुक्तियां करता है। राज्य स्तर पर संगठन महामंत्री की भूमिका भी महत्वपूर्ण होती है और उसकी नियुक्ति के लिए राष्ट्रीय स्तर की सहमति आवश्यक होती है। इससे राष्ट्रीय और राज्य इकाइयों के बीच तालमेल बनाए रखने की व्यवस्था मजबूत होती है।

    राज्य के नीचे जिला और मंडल स्तर का संगठन आता है। इसके बाद सबसे महत्वपूर्ण इकाई बूथ है। बीजेपी की चुनावी रणनीति में बूथ स्तर पर संगठन को मजबूत रखना लंबे समय से प्राथमिकता रहा है। बूथ अध्यक्ष स्थानीय स्तर पर पार्टी की गतिविधियों का संचालन करता है, जबकि पन्ना प्रमुख मतदाता सूची के एक हिस्से की जिम्मेदारी संभालते हुए मतदाताओं से सीधे संपर्क करता है।

    संगठनात्मक चुनावों के हालिया आंकड़ों के अनुसार, देश के 1,036 जिलों में से 978 में जिला अध्यक्षों का चुनाव पूरा हो चुका है। इसी तरह 17,743 मंडलों में से 16,469 मंडल अध्यक्ष चुने जा चुके हैं, जबकि 10,70,462 बूथों में से 7,88,197 बूथ अध्यक्षों का चुनाव पूरा हुआ है।

    बीजेपी में संगठन निर्माण की प्रक्रिया को संगठन पर्व कहा जाता है। इसमें बूथ से मंडल, जिला और प्रदेश स्तर होते हुए राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव तक क्रम आगे बढ़ता है। पार्टी के विभिन्न मोर्चे भी इसी ढांचे का हिस्सा हैं। युवा, महिला, किसान, ओबीसी, एससी, एसटी और अल्पसंख्यक मोर्चों के जरिए अलग अलग सामाजिक समूहों तक संगठन की पहुंच बनाने की कोशिश की जाती है। यही बहुस्तरीय व्यवस्था बीजेपी के चुनावी संगठन की सबसे महत्वपूर्ण विशेषताओं में शामिल है।

  • आरबीआई ने एनबीएफसी से रिवॉल्विंग क्रेडिट नियमों पर मांगी राय, जोखिम नियंत्रण और आंतरिक अनुपालन मजबूत करने पर जोर

    आरबीआई ने एनबीएफसी से रिवॉल्विंग क्रेडिट नियमों पर मांगी राय, जोखिम नियंत्रण और आंतरिक अनुपालन मजबूत करने पर जोर

    नई दिल्ली । भारतीय रिजर्व बैंक ने गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों यानी एनबीएफसी के तेजी से बढ़ते कारोबार और नए डिजिटल लेंडिंग मॉडल से जुड़े जोखिमों को लेकर निगरानी बढ़ा दी है। केंद्रीय बैंक ने प्रस्तावित रिवॉल्विंग क्रेडिट नियमों पर एनबीएफसी से राय मांगी है। इसके साथ ही कंपनियों को मजबूत अनुपालन व्यवस्था, आंतरिक ऑडिट और जोखिम प्रबंधन ढांचे पर विशेष ध्यान देने की सलाह दी गई है।

    आरबीआई और एनबीएफसी के वरिष्ठ अधिकारियों के बीच हुई बैठक में तेजी से विस्तार कर रहे लेंडिंग सेगमेंट से जुड़े जोखिमों पर चर्चा हुई। केंद्रीय बैंक ने वित्तीय संस्थानों से कहा कि नए उत्पादों और कारोबारी मॉडल से जुड़े संभावित जोखिमों की पहचान शुरुआती स्तर पर ही की जाए, ताकि किसी कमजोरी के बड़े संकट में बदलने से पहले उसे नियंत्रित किया जा सके।

    रिवॉल्विंग क्रेडिट ऐसे ऋण या क्रेडिट सुविधा से संबंधित है, जिसमें ग्राहक निर्धारित सीमा के भीतर जरूरत के अनुसार राशि का इस्तेमाल कर सकता है और भुगतान के बाद उपलब्ध क्रेडिट सीमा फिर से उपयोग कर सकता है। इस तरह के उत्पादों के विस्तार के साथ उनके जोखिम और नियामकीय अनुपालन को लेकर भी केंद्रीय बैंक का ध्यान बढ़ा है।

    आरबीआई ने एनबीएफसी के आंतरिक नियंत्रण तंत्र को मजबूत करने की जरूरत पर जोर दिया। इसके तहत कंपनियों से अपेक्षा की गई है कि वे अपने कारोबार में जोखिमों की नियमित समीक्षा करें और आंतरिक ऑडिट व्यवस्था को प्रभावी बनाएं। खासतौर पर तेजी से विकसित हो रहे तकनीक आधारित उत्पादों में जोखिम की निगरानी को महत्वपूर्ण माना गया है।

    एनबीएफसी अक्सर टेक्नोलॉजी आधारित लेंडिंग उत्पादों और नए कारोबारी मॉडल को जल्दी अपनाने वाली वित्तीय संस्थाओं में शामिल होती हैं। डिजिटल माध्यमों से ग्राहकों तक पहुंच, ऋण आवेदन, मूल्यांकन और सर्विसिंग की प्रक्रिया तेज हुई है। ऐसे में इन कंपनियों के अनुभव से मिलने वाली जानकारी भविष्य में उभरते वित्तीय क्षेत्रों के लिए नियामकीय ढांचा तैयार करने में मददगार हो सकती है।

    केंद्रीय बैंक एनबीएफसी के नियामकीय ढांचे को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप और मजबूत बनाने पर भी विचार कर रहा है। इसका उद्देश्य वित्तीय प्रणाली में स्थिरता बनाए रखने के साथ नए कारोबारी मॉडल से उत्पन्न होने वाले जोखिमों को समय रहते नियंत्रित करना है।

    बैठक में स्व-नियामक संगठनों यानी एसआरओ की भूमिका पर भी चर्चा हुई। आरबीआई ने स्पष्ट किया कि एसआरओ को समानांतर नियामक के रूप में काम नहीं करना चाहिए। उनकी भूमिका उद्योग में नियमों के अनुपालन को बढ़ावा देने और उभरते जोखिमों की पहचान तथा समाधान में सहयोग करने की होनी चाहिए। उन्हें उद्योग की पहली सुरक्षा पंक्ति के रूप में प्रभावी भूमिका निभाने की अपेक्षा की गई है।

    ग्राहक शिकायतों के समाधान को लेकर भी एनबीएफसी को स्पष्ट सलाह दी गई है। कंपनियों से कहा गया है कि वे शिकायत निवारण व्यवस्था को मजबूत करें और ग्राहकों की शिकायतों का समाधान निर्धारित समयसीमा के भीतर प्रभावी तरीके से सुनिश्चित करें। डिजिटल लेंडिंग के बढ़ते इस्तेमाल के बीच ग्राहक सेवा और पारदर्शिता को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    इसके साथ ही एनबीएफसी को डिजिटल लेंडिंग से संबंधित मौजूदा नियामकीय ढांचे और डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण कानून का पूरी तरह पालन करने को कहा गया है। ग्राहकों को जोड़ने, ऋण का आकलन करने और सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए तकनीक पर बढ़ती निर्भरता के कारण डेटा सुरक्षा और गोपनीयता का महत्व भी बढ़ गया है।

    आरबीआई की यह पहल ऐसे समय में सामने आई है जब एनबीएफसी क्षेत्र में नए डिजिटल उत्पादों और कारोबारी मॉडलों का तेजी से विस्तार हो रहा है। प्रस्तावित रिवॉल्विंग क्रेडिट नियमों पर उद्योग की राय लेने के साथ केंद्रीय बैंक जोखिम आधारित निगरानी को मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। आने वाले समय में इन सुझावों और नियामकीय समीक्षा के आधार पर एनबीएफसी क्षेत्र के लिए अनुपालन और जोखिम प्रबंधन से जुड़े नियमों में बदलाव की दिशा स्पष्ट हो सकती है।

  • ₹11200 करोड़ का जेवर एयरपोर्ट और भारी बारिश का दावा! वायरल तस्वीर के बाद सुरक्षा और जलनिकासी पर चर्चा

    ₹11200 करोड़ का जेवर एयरपोर्ट और भारी बारिश का दावा! वायरल तस्वीर के बाद सुरक्षा और जलनिकासी पर चर्चा


    नई दिल्ली । नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट को लेकर सोशल मीडिया पर सामने आई एक तस्वीर ने बारिश के दौरान एयरपोर्ट परिसर की तैयारियों और जलनिकासी व्यवस्था को लेकर चर्चा तेज कर दी है। तस्वीर में एयरपोर्ट के आसपास बड़े स्तर पर पानी भरा हुआ दिखाई दे रहा है और पार्किंग तथा सड़क जैसे हिस्से भी जलमग्न नजर आ रहे हैं। तस्वीर के साथ दावा किया जा रहा है कि भारी बारिश के बाद जेवर एयरपोर्ट का बड़ा हिस्सा पानी में डूब गया। हालांकि तस्वीर और उसके साथ किए जा रहे दावे की स्वतंत्र पुष्टि के बिना इसे वास्तविक स्थिति का प्रमाण नहीं माना जा सकता।

    तस्वीर में एयरपोर्ट जैसी इमारत और उसके सामने बड़ी मात्रा में जमा पानी दिखाई देता है। कई वाहन पानी के बीच खड़े नजर आ रहे हैं जबकि आसपास के रास्ते भी जलभराव की चपेट में दिखाई दे रहे हैं। इसी आधार पर सोशल मीडिया पर तरह तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। कुछ लोग इसे भारी बारिश के दौरान जलनिकासी व्यवस्था की परीक्षा के तौर पर देख रहे हैं तो कुछ लोग तस्वीर की वास्तविकता पर सवाल उठा रहे हैं।

    जेवर में विकसित हो रहा नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट उत्तर प्रदेश के बड़े बुनियादी ढांचा प्रोजेक्ट्स में शामिल है। इसे दिल्ली एनसीआर के लिए एक महत्वपूर्ण एयर कनेक्टिविटी प्रोजेक्ट के तौर पर देखा जा रहा है। एयरपोर्ट के निर्माण से क्षेत्र में कारोबार पर्यटन रोजगार और रियल एस्टेट गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद जताई जाती रही है। ऐसे में बारिश के दौरान जलभराव से जुड़ी कोई भी तस्वीर स्वाभाविक रूप से लोगों का ध्यान खींचती है।

    किसी भी बड़े एयरपोर्ट के लिए बारिश के पानी की निकासी बेहद महत्वपूर्ण होती है। रनवे टैक्सीवे पार्किंग एप्रन और यात्रियों के आवागमन वाले हिस्सों में जलभराव रोकना एयरपोर्ट संचालन की अहम जरूरत होती है। खासतौर पर मानसून के दौरान कम समय में होने वाली तेज बारिश के पानी को तेजी से बाहर निकालने के लिए प्रभावी ड्रेनेज सिस्टम जरूरी होता है। अगर किसी एयरपोर्ट परिसर में लंबे समय तक पानी जमा रहता है तो इससे यातायात और संचालन के साथ बुनियादी ढांचे पर भी असर पड़ सकता है।

    हालांकि वायरल तस्वीर को देखकर सीधे यह निष्कर्ष निकालना सही नहीं होगा कि पूरा एयरपोर्ट जलमग्न हो गया या परियोजना की पूरी व्यवस्था विफल हो गई है। सोशल मीडिया पर वायरल होने वाली तस्वीरों के साथ कई बार गलत संदर्भ भी जोड़ दिए जाते हैं। तस्वीर पुरानी हो सकती है किसी दूसरे स्थान की हो सकती है या डिजिटल रूप से बदली गई हो सकती है। इसलिए आधिकारिक पुष्टि के बिना बड़े दावे को तथ्य मानने से बचना जरूरी है।

    इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण बात यह होगी कि एयरपोर्ट प्रबंधन या संबंधित प्रशासन की ओर से बारिश और जलभराव को लेकर क्या आधिकारिक जानकारी सामने आती है। अगर वास्तव में परिसर के किसी हिस्से में पानी जमा हुआ है तो इसकी वजह और जलनिकासी व्यवस्था की स्थिति की जानकारी भी सामने आनी चाहिए।

    फिलहाल वायरल तस्वीर ने जेवर एयरपोर्ट की बारिश से निपटने की तैयारियों को लेकर बहस जरूर छेड़ दी है। लेकिन तस्वीर के आधार पर किसी निष्कर्ष पर पहुंचने के बजाय आधिकारिक जानकारी और विश्वसनीय रिपोर्ट का इंतजार करना ज्यादा उचित होगा।

  • अमिताभ बच्चन ने मुंबई में तीन फ्लोर 33 लाख मासिक किराए पर दिए, पांच साल में 21.88 करोड़ की डील

    अमिताभ बच्चन ने मुंबई में तीन फ्लोर 33 लाख मासिक किराए पर दिए, पांच साल में 21.88 करोड़ की डील


    नई दिल्ली ।
    बॉलीवुड के महानायक अमिताभ बच्चन फिल्मों के साथ अपने रियल एस्टेट निवेश को लेकर भी लगातार चर्चा में रहते हैं। अब मुंबई के अंधेरी वेस्ट स्थित ओशिवारा इलाके में उनकी एक नई प्रॉपर्टी डील सामने आई है। उन्होंने सिग्नेचर बिल्डिंग की तीन ऊपरी मंजिलें एक न्यूट्रिशन ब्रांड को पांच साल की लीज पर दी हैं। इस सौदे से उन्हें हर महीने 33 लाख रुपये किराए के तौर पर मिलने की जानकारी सामने आई है।

    प्रॉपर्टी से जुड़े दस्तावेजों के अनुसार, यह लीज अंधेरी वेस्ट में लिंक रोड पर स्थित सिग्नेचर बिल्डिंग के तीन फ्लोर के लिए हुई है। इन तीनों मंजिलों का कुल कारपेट एरिया करीब 8,428 वर्ग फुट बताया गया है। पांच साल की लीज 15 अगस्त 2026 से शुरू हुई है।

    इस पूरे लीज एग्रीमेंट की अवधि में किराए की कुल रकम करीब 21.88 करोड़ रुपये बैठती है। मौजूदा दर के हिसाब से प्रति वर्ग फुट मासिक किराया लगभग 392 रुपये है। समझौते में किराए में हर साल पांच प्रतिशत बढ़ोतरी का प्रावधान भी रखा गया है। यानी लीज आगे बढ़ने के साथ अमिताभ बच्चन की मासिक आय में भी निर्धारित वृद्धि होती रहेगी।

    इस सौदे में सिर्फ कार्यालय या व्यावसायिक जगह का इस्तेमाल ही शामिल नहीं है, बल्कि पार्किंग की सुविधा भी दी गई है। दस्तावेजों के मुताबिक, किरायेदार को बिल्डिंग की निर्धारित पार्किंग में नौ गाड़ियां खड़ी करने का अधिकार मिला है। इसके अलावा करीब 1.98 करोड़ रुपये की सिक्योरिटी डिपॉजिट भी जमा की गई है।

    जिस कंपनी ने ये तीन फ्लोर लीज पर लिए हैं, वह न्यूट्रिशन क्षेत्र में काम करने वाली TruNativ F&B Private Limited है। इस नए सौदे के साथ अमिताभ बच्चन के मुंबई स्थित कमर्शियल रियल एस्टेट पोर्टफोलियो में एक और संपत्ति जुड़ गई है। इससे पहले भी वह अपनी कई व्यावसायिक संपत्तियों को कॉरपोरेट कंपनियों को किराए पर दे चुके हैं।

    साल 2023 में अमिताभ बच्चन ने मुंबई की लोटस सिग्नेचर बिल्डिंग में चार ऑफिस यूनिट्स वॉर्नर म्यूजिक प्राइवेट लिमिटेड को किराए पर दी थीं। उस सौदे में उन्हें करीब 17.30 लाख रुपये प्रति माह किराया मिलने की जानकारी सामने आई थी। उस लीज में 12 समर्पित पार्किंग स्पेस भी शामिल थे।

    अमिताभ बच्चन का रियल एस्टेट निवेश मुंबई तक सीमित नहीं है। अयोध्या में भी उन्होंने जमीन में निवेश किया है। मार्च 2026 में उन्होंने करीब 2.67 एकड़ जमीन 35 करोड़ रुपये में खरीदी थी। यह अयोध्या में संबंधित डेवलपर के साथ उनका तीसरा निवेश बताया गया है।

    अयोध्या की जमीन को लेकर डेवलपर की ओर से यह भी बताया गया था कि अमिताभ बच्चन ने खुद जमीन खरीदने को लेकर संपर्क किया था। इस निवेश के साथ अभिनेता की रियल एस्टेट गतिविधियों का दायरा मुंबई से बाहर भी बढ़ता दिखाई देता है।

    मुंबई में तीन फ्लोर की ताजा लीज यह बताती है कि अमिताभ बच्चन की संपत्ति से नियमित आय का एक महत्वपूर्ण माध्यम कमर्शियल रियल एस्टेट भी है। पांच साल में 21.88 करोड़ रुपये की अनुमानित किराया राशि और सालाना पांच प्रतिशत बढ़ोतरी का प्रावधान इस सौदे को खास बनाता है। हालांकि, इस संबंध में संबंधित पक्षों की ओर से विस्तृत सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

  • गोविंदा-सुनीता विवाद के बीच कश्मीरा शाह का प्यार पर भावुक पोस्ट, शादी और बेवफाई को लेकर उठाए गंभीर सवाल

    गोविंदा-सुनीता विवाद के बीच कश्मीरा शाह का प्यार पर भावुक पोस्ट, शादी और बेवफाई को लेकर उठाए गंभीर सवाल

    नई दिल्ली ।बॉलीवुड अभिनेता गोविंदा और उनकी पत्नी सुनीता आहूजा के रिश्ते को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच अब अभिनेत्री कश्मीरा शाह की एक सोशल मीडिया पोस्ट ने ध्यान खींचा है। कश्मीरा ने अपने पोस्ट में प्यार, शादी और रिश्तों में भरोसे को लेकर सवाल उठाए हैं। उन्होंने लंबे समय तक कायम रहने वाले सच्चे प्यार के अस्तित्व पर भी अपनी निराशा जाहिर की।

    कश्मीरा शाह ने आसमान की एक तस्वीर साझा करते हुए भावुक अंदाज में लिखा कि क्या सच्चा प्यार वास्तव में वैसा ही होता है, जैसा लोग उसके बारे में सोचते हैं। उन्होंने सवाल किया कि क्या कोई व्यक्ति किसी दूसरे इंसान से इतना प्यार कर सकता है कि उसके लिए बहुत कुछ करे और उसे हमेशा खास महसूस कराए।

    अपने संदेश में कश्मीरा ने रिश्तों में बढ़ती दूरी और शादी टूटने की घटनाओं का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि लोगों को एक-दूसरे को धोखा देते और शादियों को टूटते देखकर वह निराश हैं। साथ ही उन्होंने यह भी संकेत दिया कि शायद उन्हें रिश्तों को लेकर अपनी सोच का दोबारा मूल्यांकन करने की जरूरत है।

    कश्मीरा की यह पोस्ट ऐसे समय सामने आई है, जब गोविंदा और सुनीता आहूजा की शादीशुदा जिंदगी को लेकर लगातार चर्चा हो रही है। दोनों के बीच लंबे समय से अनबन की खबरें सामने आती रही हैं और हाल के दिनों में दोनों की ओर से दिए गए अलग-अलग बयानों ने इस चर्चा को और बढ़ा दिया है।

    सुनीता आहूजा ने अपने वैवाहिक जीवन को लेकर कई खुलासे किए हैं। उन्होंने गोविंदा पर दूसरी महिलाओं के साथ संबंध होने का आरोप लगाया है। इसी बीच अभिनेता का नाम अभिनेत्री रानी स्वर्णकार के साथ भी जोड़ा जा रहा है। हालांकि इन चर्चाओं को लेकर अलग-अलग दावे सामने आए हैं और किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले संबंधित पक्षों के बयानों को ध्यान में रखना जरूरी है।

    हाल ही में सुनीता आहूजा का एक बयान भी चर्चा में आया था, जिसमें उन्होंने गोविंदा को शुगर डैडी कहकर संबोधित किया था। उनके इस बयान ने सोशल मीडिया और मनोरंजन जगत में काफी ध्यान आकर्षित किया। इसके बाद गोविंदा ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी और कम उम्र की अभिनेत्री के साथ उनकी जोड़ी बनने को अफेयर से जोड़ने पर आपत्ति जताई।

    गोविंदा ने कहा कि किसी कम उम्र की अभिनेत्री के साथ काम करने या उनकी जोड़ी बनने का यह अर्थ नहीं है कि दोनों के बीच प्रेम संबंध हैं। उन्होंने बॉलीवुड में ऐसे कई उदाहरणों का हवाला देते हुए कहा कि उम्र के बड़े अंतर के बावजूद कलाकार एक साथ फिल्मों में काम करते रहे हैं।

    अभिनेता ने यह भी कहा कि सुनीता उन्हें उनके प्रशंसकों की नजर में नीचे दिखाने का कोई अवसर नहीं छोड़ती हैं। उनके इस बयान के बाद दोनों के रिश्ते को लेकर चर्चाएं और तेज हो गईं।

    इस पूरे विवाद के बीच कश्मीरा शाह का पोस्ट सीधे तौर पर गोविंदा और सुनीता के बारे में है या सामान्य तौर पर रिश्तों को लेकर उनकी व्यक्तिगत भावना है, यह स्पष्ट नहीं है। उन्होंने अपने संदेश में किसी का नाम लेकर आरोप नहीं लगाया है। हालांकि पोस्ट के सामने आने का समय ऐसा है कि इसे मौजूदा विवाद से जोड़कर देखा जा रहा है।

    कश्मीरा शाह, गोविंदा के भांजे कृष्णा अभिषेक की पत्नी हैं। कृष्णा और गोविंदा के परिवार के बीच भी अतीत में मतभेद सार्वजनिक रूप से चर्चा में रहे हैं। ऐसे में कश्मीरा की रिश्तों को लेकर की गई टिप्पणी ने मनोरंजन जगत में लोगों का ध्यान आकर्षित किया है।

    फिलहाल गोविंदा और सुनीता आहूजा के रिश्ते को लेकर सामने आ रही चर्चाओं के बीच कश्मीरा का संदेश एक अलग नजरिया पेश करता है। उनके पोस्ट ने प्यार, विश्वास, शादी और रिश्तों में वफादारी जैसे मुद्दों पर सोशल मीडिया पर बहस को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है।

  • मानसून में छोटी सी लापरवाही पड़ सकती है भारी, बारिश के दौरान सुरक्षित रहने के लिए अपनाएं ये आसान उपाय

    मानसून में छोटी सी लापरवाही पड़ सकती है भारी, बारिश के दौरान सुरक्षित रहने के लिए अपनाएं ये आसान उपाय


    नई दिल्ली । बरसात का मौसम गर्मी से राहत लेकर आता है लेकिन इसके साथ कई तरह की परेशानियां भी बढ़ जाती हैं। तेज बारिश के दौरान जलभराव सड़कों पर फिसलन बिजली का खतरा और संक्रमण जैसी समस्याएं सामने आ सकती हैं। ऐसे में बारिश का आनंद लेने के साथ अपनी सुरक्षा का ध्यान रखना भी बेहद जरूरी है। थोड़ी सी सावधानी अपनाकर बरसात के मौसम में खुद को और परिवार को कई परेशानियों से बचाया जा सकता है।

    बारिश के दौरान घर से बाहर निकलते समय सबसे पहले मौसम की स्थिति पर ध्यान देना चाहिए। अगर तेज बारिश या आंधी की संभावना हो तो गैर जरूरी यात्रा को टालना बेहतर रहता है। बाहर जाना जरूरी हो तो छाता रेनकोट और पानी से बचाने वाले जूते साथ रखें। लंबे समय तक गीले कपड़ों में रहने से असहजता बढ़ सकती है इसलिए घर पहुंचने के बाद कपड़े बदल लेना चाहिए और शरीर को अच्छी तरह सुखाना चाहिए।

    बरसात में सड़कों पर पानी जमा होने की समस्या आम है। ऐसे रास्तों से पैदल गुजरते समय विशेष सावधानी बरतनी चाहिए क्योंकि पानी के नीचे गड्ढे खुले मैनहोल या टूटे हुए हिस्से दिखाई नहीं देते। जलभराव वाले रास्ते में उतरने से बचना सबसे सुरक्षित विकल्प है। अगर वाहन से सफर कर रहे हैं तो पानी की गहराई का अंदाजा लगाए बिना वाहन आगे नहीं बढ़ाना चाहिए। बाइक और स्कूटर चलाने वालों को फिसलन वाली सड़कों पर गति कम रखनी चाहिए।

    बारिश के दौरान बिजली से जुड़े खतरे को भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। तेज आंधी और बिजली चमकने के समय खुले मैदान पेड़ के नीचे या बिजली के खंभों के पास खड़े होने से बचना चाहिए। घर में भी गीले हाथों से बिजली के स्विच और उपकरणों को छूने से बचें। अगर किसी जगह बिजली के तार टूटकर पानी में गिरे दिखाई दें तो उसके आसपास जाने के बजाय संबंधित विभाग को सूचना देना चाहिए।

    मानसून के दौरान साफ पानी और भोजन का ध्यान रखना भी जरूरी है। बारिश के मौसम में दूषित पानी और खुले में रखे भोजन से पेट से जुड़ी परेशानियां बढ़ सकती हैं। इसलिए साफ और सुरक्षित पानी का इस्तेमाल करें। फल और सब्जियों को अच्छी तरह धोकर ही इस्तेमाल करें। सड़क किनारे खुले में रखे भोजन को खाने से बचना बेहतर है। घर में भी खाने की चीजों को ढककर रखना चाहिए।

    मच्छरों से बचाव भी बरसात में जरूरी हो जाता है। घर के आसपास पानी जमा न होने दें क्योंकि रुका हुआ पानी मच्छरों के पनपने का कारण बन सकता है। कूलर गमले छत और अन्य जगहों पर जमा पानी को नियमित रूप से साफ करना चाहिए। सोते समय जरूरत के अनुसार मच्छरदानी या सुरक्षित मच्छर नियंत्रण उपायों का इस्तेमाल किया जा सकता है।

    बरसात में बच्चों और बुजुर्गों का विशेष ध्यान रखना चाहिए। उन्हें जलभराव वाले इलाकों और तेज बारिश के दौरान बाहर जाने से रोकना बेहतर है। अगर बारिश के दौरान घर में पानी भरने लगे तो बिजली के उपकरणों से दूरी बनाएं और जरूरत पड़ने पर सुरक्षित स्थान पर जाएं।

    कुल मिलाकर मानसून का मौसम खुशनुमा जरूर है लेकिन सुरक्षा में लापरवाही नुकसान पहुंचा सकती है। मौसम की जानकारी रखना साफ पानी और भोजन का इस्तेमाल करना जलभराव से बचना और बिजली से जुड़े खतरों के प्रति सतर्क रहना बारिश के मौसम में सुरक्षित रहने के सबसे जरूरी उपायों में शामिल हैं।

  • भूपेंद्र पटेल सैन फ्रांसिस्को पहुंचे, वाइब्रेंट गुजरात 2027 से पहले निवेशकों और टेक्नोलॉजी लीडर्स से करेंगे अहम मुलाकातें

    भूपेंद्र पटेल सैन फ्रांसिस्को पहुंचे, वाइब्रेंट गुजरात 2027 से पहले निवेशकों और टेक्नोलॉजी लीडर्स से करेंगे अहम मुलाकातें

    नई दिल्ली । गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल सोमवार को सैन फ्रांसिस्को पहुंच गए। उनके साथ राज्य का एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल भी अमेरिका पहुंचा है। यह दौरा गुजरात में विदेशी निवेश आकर्षित करने और जनवरी 2027 में प्रस्तावित वाइब्रेंट गुजरात ग्लोबल समिट में अंतरराष्ट्रीय भागीदारी को मजबूत करने के उद्देश्य से किया जा रहा है।

    सैन फ्रांसिस्को पहुंचने पर गुजराती समुदाय के प्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री का स्वागत किया। इसके बाद पटेल अपने अमेरिकी कार्यक्रमों की शुरुआत सैन फ्रांसिस्को में गुजराती समुदाय के सदस्यों के साथ बैठक से करेंगे। इस दौरान गुजरात के आर्थिक विकास, निवेश की संभावनाओं और राज्य के साथ वैश्विक कारोबारी समुदाय के संबंधों को मजबूत करने पर बातचीत होने की संभावना है।

    मुख्यमंत्री का यह विदेश दौरा 17 से 24 अगस्त तक अमेरिका और कनाडा में चलेगा। अमेरिकी चरण के दौरान सैन फ्रांसिस्को के अलावा वाशिंगटन डीसी और न्यूयॉर्क में भी निवेशकों, उद्योग संगठनों, तकनीकी क्षेत्र के प्रतिनिधियों और कारोबारियों के साथ बैठकें प्रस्तावित हैं। इसके बाद प्रतिनिधिमंडल कनाडा के टोरंटो जाएगा।

    दौरे के दौरान राउंड टेबल कॉन्फ्रेंस और आमने-सामने की कारोबारी बैठकों का आयोजन किया जाएगा। इन कार्यक्रमों में गुजरात को निवेश के प्रमुख केंद्र के रूप में प्रस्तुत करने के साथ राज्य में विदेशी कंपनियों के लिए उपलब्ध अवसरों की जानकारी दी जाएगी। विशेष रूप से विनिर्माण, रसायन, फार्मास्यूटिकल्स, ऊर्जा और प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रों में निवेश की संभावनाओं पर जोर रहने की उम्मीद है।

    मुख्यमंत्री के साथ गुजरात सरकार के कई वरिष्ठ अधिकारी भी दौरे पर हैं। प्रतिनिधिमंडल में मुख्य सचिव एम.के. दास, वित्त विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव टी. नटराजन, उद्योग एवं खान विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव ममता वर्मा, प्रधान सचिव संजीव कुमार और मुख्यमंत्री के अतिरिक्त प्रधान सचिव डॉ. विक्रांत पांडे शामिल हैं।

    इस यात्रा में गुजरात के व्यापार और उद्योग क्षेत्र के प्रतिनिधियों की भी भागीदारी है। उद्योग प्रतिनिधिमंडल में 22 कंपनियों के प्रतिनिधि शामिल हैं। इनमें विनिर्माण, केमिकल, फार्मास्यूटिकल्स, ऊर्जा और टेक्नोलॉजी क्षेत्रों से जुड़े वरिष्ठ कारोबारी प्रतिनिधि शामिल हैं। इससे सरकारी प्रतिनिधिमंडल के साथ उद्योग जगत की सीधी भागीदारी को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

    वाइब्रेंट गुजरात ग्लोबल समिट 2027 को ध्यान में रखते हुए मुख्यमंत्री का यह दौरा राज्य की निवेश रणनीति के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। जनवरी 2027 में होने वाले अगले संस्करण से पहले गुजरात सरकार अंतरराष्ट्रीय निवेशकों और उद्योग समूहों के साथ संपर्क बढ़ाने पर जोर दे रही है।

    बताया जा रहा है कि 25 से अधिक वर्षों के बाद गुजरात के किसी मौजूदा मुख्यमंत्री का यह पहला आधिकारिक अमेरिका दौरा है। ऐसे में इस यात्रा को राज्य सरकार की वैश्विक निवेश पहुंच बढ़ाने की कोशिश के रूप में भी देखा जा रहा है।

    गुजरात सरकार का लक्ष्य विदेशी निवेश के साथ-साथ राज्य के उद्योगों को वैश्विक कारोबारी नेटवर्क से जोड़ना भी है। अमेरिका और कनाडा में होने वाली बैठकों के दौरान संभावित निवेश, औद्योगिक साझेदारी, तकनीकी सहयोग और गुजरात में नई परियोजनाओं की संभावनाओं पर बातचीत होगी।

    मुख्यमंत्री का यह दौरा ऐसे समय हो रहा है जब राज्य सरकार वाइब्रेंट गुजरात ग्लोबल समिट के अगले संस्करण की तैयारियों को गति दे रही है। अंतरराष्ट्रीय निवेशकों के साथ शुरुआती बातचीत से संभावित भागीदारी और निवेश प्रस्तावों को समिट से पहले आगे बढ़ाने का अवसर मिल सकता है। इससे गुजरात की औद्योगिक और निवेश संबंधी प्राथमिकताओं को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत करने में भी मदद मिलने की संभावना है।