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  • भारतीय नौसेना को मिलेंगे दो एमक्यू-9बी सी गार्डियन ड्रोन, रक्षा मंत्रालय ने 1,943 करोड़ रुपये के अनुबंध पर किए हस्ताक्षर

    भारतीय नौसेना को मिलेंगे दो एमक्यू-9बी सी गार्डियन ड्रोन, रक्षा मंत्रालय ने 1,943 करोड़ रुपये के अनुबंध पर किए हस्ताक्षर

    नई दिल्ली ।भारतीय नौसेना की समुद्री निगरानी और खुफिया क्षमताओं को मजबूत करने की दिशा में केंद्र सरकार ने एक महत्वपूर्ण रक्षा समझौता किया है। रक्षा मंत्रालय ने अमेरिका की जनरल एटॉमिक्स एरोनॉटिकल सिस्टम्स इंक के साथ दो एमक्यू-9बी सी गार्डियन हाई एल्टीट्यूड लॉन्ग एंड्योरेंस रिमोटली पायलटेड एयरक्राफ्ट सिस्टम को लीज पर लेने के लिए करीब 1,943 करोड़ रुपये के अनुबंध पर हस्ताक्षर किए हैं।

    यह लीज व्यवस्था 30 महीने की अवधि के लिए होगी। अनुबंध पर सोमवार को नई दिल्ली स्थित कर्तव्य भवन-2 में हस्ताक्षर किए गए। इस अवसर पर रक्षा विभाग के अतिरिक्त सचिव और महानिदेशक अधिग्रहण ए. अनबारासु भी मौजूद रहे। समझौते का मुख्य उद्देश्य हिंद महासागर क्षेत्र में समुद्री गतिविधियों की निगरानी और उनसे जुड़ी खुफिया जानकारी जुटाने की नौसेना की क्षमता को बढ़ाना है।

    एमक्यू-9बी सी गार्डियन को लंबी अवधि तक उड़ान भरने और बड़े समुद्री क्षेत्र की निगरानी करने की क्षमता के लिए जाना जाता है। इसमें आधुनिक सेंसर, उन्नत निगरानी प्रणाली और विभिन्न प्रकार के पेलोड लगाए जा सकते हैं। इन क्षमताओं के कारण यह समुद्री क्षेत्र में लगातार निगरानी बनाए रखने के लिए उपयोगी प्लेटफॉर्म माना जाता है।

    रक्षा मंत्रालय के अनुसार इन ड्रोन की तैनाती से भारतीय नौसेना की मैरीटाइम डोमेन अवेयरनेस क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। ड्रोन समुद्र के विशाल हिस्सों में लगातार इंटेलिजेंस, सर्विलांस और रिकॉनिसेंस यानी आईएसआर कवरेज उपलब्ध कराने में मदद करेंगे। इससे समुद्री गतिविधियों पर लंबे समय तक नजर रखना और संदिग्ध गतिविधियों की पहचान करना आसान होगा।

    हिंद महासागर क्षेत्र भारत की समुद्री सुरक्षा के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है। इस क्षेत्र में व्यापारिक जहाजों की आवाजाही के साथ ऊर्जा और अन्य आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति से जुड़े महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग भी मौजूद हैं। ऐसे में समुद्र में होने वाली गतिविधियों की वास्तविक समय के करीब निगरानी और तेजी से प्रतिक्रिया देने की क्षमता नौसेना के लिए अहम है।

    एमक्यू-9बी सी गार्डियन की लंबी उड़ान क्षमता नौसेना को लंबे समय तक किसी विशेष समुद्री क्षेत्र पर निगरानी बनाए रखने में मदद कर सकती है। इसके जरिए जहाजों की आवाजाही, समुद्री गतिविधियों और संभावित सुरक्षा चुनौतियों से जुड़ी जानकारी जुटाने की क्षमता बढ़ेगी। इससे समुद्री सीमा सुरक्षा और रणनीतिक निगरानी अभियानों को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है।

    यह समझौता ऐसे समय हुआ है जब भारत हिंद महासागर क्षेत्र में अपनी समुद्री मौजूदगी और निगरानी ढांचे को लगातार मजबूत करने पर ध्यान दे रहा है। क्षेत्र में बदलते भू-राजनीतिक समीकरण और समुद्री सुरक्षा से जुड़ी चुनौतियों के बीच उन्नत मानव रहित प्लेटफॉर्म नौसेना की परिचालन क्षमता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

    रक्षा क्षेत्र में हाल के दिनों में सरकार की खरीद गतिविधियां भी तेज हुई हैं। पिछले सप्ताह रक्षा मंत्रालय ने भारतीय सेना के लिए करीब 1,577 करोड़ रुपये के दो अनुबंध किए थे। इन समझौतों के तहत लोइटर म्यूनिशन सिस्टम, संबंधित हथियार और अन्य उपकरणों की खरीद की जानी है।

    नौसेना के लिए एमक्यू-9बी सी गार्डियन की लीज भी इसी व्यापक रक्षा आधुनिकीकरण प्रक्रिया का हिस्सा है। लीज व्यवस्था के माध्यम से नौसेना को सीमित अवधि में आधुनिक निगरानी क्षमता उपलब्ध होगी। इससे परिचालन जरूरतों को पूरा करने के साथ समुद्री क्षेत्र में भारत की निगरानी और त्वरित प्रतिक्रिया क्षमता को मजबूत करने में मदद मिल सकती है।

  • Stock Market Today: सेंसेक्स 281 अंक गिरकर 78 हजार से नीचे, निफ्टी भी कमजोर; आईटी और एफएमसीजी शेयरों में बिकवाली

    Stock Market Today: सेंसेक्स 281 अंक गिरकर 78 हजार से नीचे, निफ्टी भी कमजोर; आईटी और एफएमसीजी शेयरों में बिकवाली


    नई दिल्ली । 
    भारतीय शेयर बाजार सोमवार को लगातार दबाव के बीच लाल निशान में बंद हुआ। कारोबारी सत्र के अंत में सेंसेक्स 281.09 अंक यानी 0.36 प्रतिशत की गिरावट के साथ 77,728.16 पर बंद हुआ। इसी तरह निफ्टी 78.35 अंक यानी 0.32 प्रतिशत टूटकर 24,287.65 के स्तर पर पहुंच गया। इस गिरावट के बावजूद बाजार के मिडकैप और स्मॉलकैप वर्ग में खरीदारी का रुझान देखने को मिला।

    सोमवार के कारोबार में आईटी और एफएमसीजी शेयरों पर सबसे ज्यादा दबाव दिखाई दिया। निफ्टी आईटी और निफ्टी एफएमसीजी प्रमुख कमजोर सेक्टरों में रहे। इनके अलावा निफ्टी कंजप्शन, निफ्टी सर्विसेज, निफ्टी हेल्थकेयर, निफ्टी फार्मा और निफ्टी पीएसयू बैंक भी गिरावट के साथ बंद हुए।

    इसके विपरीत रियल्टी और मेटल शेयरों में खरीदारी देखने को मिली। निफ्टी रियल्टी, निफ्टी मेटल, निफ्टी मीडिया, निफ्टी इंडिया डिफेंस, निफ्टी एनर्जी, निफ्टी प्राइवेट बैंक और निफ्टी इंडिया मैन्युफैक्चरिंग मजबूती के साथ बंद हुए। निफ्टी कमोडिटीज और निफ्टी पीएसई में भी तेजी दर्ज की गई।

    सेंसेक्स के प्रमुख शेयरों में टाटा स्टील, एक्सिस बैंक, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स, एचडीएफसी बैंक, एलएंडटी और बजाज फाइनेंस बढ़त के साथ बंद हुए। दूसरी ओर इन्फोसिस, एचसीएल टेक, सन फार्मा, टीसीएस और टेक महिंद्रा जैसे प्रमुख शेयरों में कमजोरी रही।

    आईटी क्षेत्र की बड़ी कंपनियों पर दबाव का असर पूरे बाजार के प्रमुख सूचकांकों पर पड़ा। इसके अलावा आईटीसी, ट्रेंट, एनटीपीसी, हिंदुस्तान यूनिलीवर, महिंद्रा एंड महिंद्रा और भारती एयरटेल समेत कई बड़े शेयर भी लाल निशान में बंद हुए। बजाज फिनसर्व, इंडिगो, अल्ट्राटेक सीमेंट, एशियन पेंट्स और मारुति सुजुकी में भी गिरावट दर्ज की गई।

    बड़े शेयरों में कमजोरी के बावजूद मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में निवेशकों की दिलचस्पी बनी रही। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 34.85 अंक यानी 0.05 प्रतिशत की मामूली बढ़त के साथ 63,817.00 पर बंद हुआ। वहीं निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 70.70 अंक यानी 0.36 प्रतिशत चढ़कर 19,809.25 पर पहुंच गया।

    बाजार के मौजूदा रुख में ऊर्जा लागत एक महत्वपूर्ण कारक बनी हुई है। कच्चे तेल की ऊंची कीमतों के कारण कंपनियों की इनपुट लागत पर दबाव बना हुआ है। इसका असर निकट अवधि में निवेशकों की धारणा पर पड़ सकता है। हालांकि वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही में कई कंपनियों के उम्मीद से बेहतर परिणामों ने आगे की कमाई को लेकर कुछ सकारात्मक संकेत दिए हैं।

    पहली तिमाही में कम लागत वाली इन्वेंट्री से कई कंपनियों के मुनाफे को सहारा मिला। हालांकि आने वाली तिमाहियों में महंगी इन्वेंट्री की खरीद बढ़ने पर कंपनियों के मार्जिन पर दबाव आने की आशंका बनी हुई है। इसलिए निवेशक कंपनियों की कमाई और लागत के रुझान पर विशेष नजर रख रहे हैं।

    बाजार में निवेशकों का रुझान अब उन सेक्टर और कंपनियों की ओर बढ़ रहा है, जहां भविष्य की कमाई अपेक्षाकृत स्पष्ट दिखाई देती है। इसी वजह से मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में चुनिंदा खरीदारी देखने को मिल रही है।

    घरेलू स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों और बॉन्ड यील्ड में बदलाव बाजार की दिशा के लिए महत्वपूर्ण बने हुए हैं। वहीं वैश्विक स्तर पर अमेरिकी डॉलर की कमजोरी और अपेक्षाकृत नरम उपभोक्ता आंकड़ों ने निकट अवधि में ब्याज दरों में बढ़ोतरी की आशंका को कुछ कम किया है। ऐसे संकेत लंबी अवधि में जोखिम लेने की क्षमता को समर्थन दे सकते हैं, लेकिन घरेलू लागत और वैश्विक घटनाक्रम के कारण बाजार में उतार-चढ़ाव बने रहने की संभावना है।

  • बीजेपी अध्यक्ष नितिन नवीन ने नई राष्ट्रीय टीम का किया ऐलान, स्मृति ईरानी महासचिव और 13 नेताओं को उपाध्यक्ष बनाया

    बीजेपी अध्यक्ष नितिन नवीन ने नई राष्ट्रीय टीम का किया ऐलान, स्मृति ईरानी महासचिव और 13 नेताओं को उपाध्यक्ष बनाया

    नई दिल्ली ।भारतीय जनता पार्टी ने राष्ट्रीय संगठन में लंबे इंतजार के बाद नई टीम का ऐलान कर दिया है। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के नेतृत्व में गठित नई टीम में युवा और अनुभवी नेताओं के बीच संतुलन बनाने पर जोर दिया गया है। संगठन में कई प्रमुख चेहरों को नई जिम्मेदारियां दी गई हैं, जबकि महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने का भी प्रयास किया गया है।

    नई राष्ट्रीय टीम में 13 राष्ट्रीय उपाध्यक्षों की नियुक्ति की गई है। इसके अलावा पार्टी संगठन में करीब 33 प्रतिशत महिला पदाधिकारियों को जिम्मेदारी दिए जाने की बात सामने आई है। नई नियुक्तियों में सबसे अधिक चर्चा पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी की वापसी को लेकर है। उन्हें राष्ट्रीय महासचिव की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

    स्मृति ईरानी बीजेपी की प्रमुख महिला नेताओं में रही हैं। केंद्रीय मंत्री के तौर पर उनकी भूमिका के अलावा पार्टी के संगठनात्मक और राजनीतिक अभियानों में भी उनकी सक्रियता रही है। राष्ट्रीय महासचिव के रूप में नई जिम्मेदारी मिलने के बाद संगठन में उनकी भूमिका एक बार फिर महत्वपूर्ण हो गई है।

    नई टीम में राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे और राम माधव को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाया गया है। उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत को भी राष्ट्रीय उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी दी गई है। ओडिशा के प्रमुख नेता बैजयंत जय पांडा को भी राष्ट्रीय उपाध्यक्ष नियुक्त किया गया है।

    इन नियुक्तियों के जरिए पार्टी ने अलग-अलग राज्यों और क्षेत्रों के अनुभवी नेताओं को राष्ट्रीय संगठन में जगह दी है। इससे संगठन में क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व को मजबूत करने के साथ आगामी राजनीतिक चुनौतियों के लिए नेतृत्व की नई व्यवस्था तैयार करने का संकेत मिलता है।

    बीजेपी अध्यक्ष नितिन नवीन ने नई राष्ट्रीय टीम के सभी नवनियुक्त पदाधिकारियों को बधाई और शुभकामनाएं दी हैं। उन्होंने कहा कि अनुभव और ऊर्जा से समृद्ध यह टीम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में संगठन को नई गति प्रदान करेगी। उन्होंने नवनियुक्त पदाधिकारियों से कार्यकर्ता भावना के साथ संगठन को और मजबूत करने की अपेक्षा जताई।

    नितिन नवीन ने यह भी कहा कि नई टीम विकसित भारत के संकल्प और राष्ट्रसेवा के लक्ष्य को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। पार्टी अध्यक्ष के बयान से स्पष्ट है कि नई टीम से संगठनात्मक विस्तार और राजनीतिक गतिविधियों में सक्रिय भूमिका निभाने की अपेक्षा की जा रही है।

    नितिन नवीन के बीजेपी अध्यक्ष बनने के करीब सात महीने बाद राष्ट्रीय टीम का गठन किया गया है। अध्यक्ष के रूप में उनकी नियुक्ति के बाद से ही नई टीम के ऐलान का इंतजार किया जा रहा था। अब संगठन में नई नियुक्तियों के साथ पार्टी ने राष्ट्रीय स्तर पर जिम्मेदारियों का पुनर्गठन पूरा कर लिया है।

    नई टीम का गठन ऐसे समय हुआ है जब बीजेपी के सामने आने वाले चुनावों और संगठनात्मक विस्तार की बड़ी चुनौतियां हैं। विशेष रूप से उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए राष्ट्रीय संगठन में किए गए बदलावों को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। उत्तर प्रदेश देश का सबसे अधिक राजनीतिक महत्व वाला राज्य है और वहां चुनावी सफलता राष्ट्रीय राजनीति पर भी व्यापक प्रभाव डालती है।

    नई जिम्मेदारियों के साथ पार्टी के वरिष्ठ नेताओं की सक्रियता बढ़ने की संभावना है। महिलाओं को संगठन में पर्याप्त प्रतिनिधित्व देने और अनुभवी नेताओं के साथ नई ऊर्जा को जोड़ने की रणनीति के जरिए बीजेपी ने राष्ट्रीय संगठन को नया स्वरूप देने का प्रयास किया है। अब नई टीम की वास्तविक भूमिका आगामी चुनावी और संगठनात्मक गतिविधियों में दिखाई देगी।

  • E20 पेट्रोल पर नई बहस, मुख्य आर्थिक सलाहकार ने पुरानी गाड़ियों के लिए E10 जारी रखने और E30 पर सावधानी बरतने को कहा

    E20 पेट्रोल पर नई बहस, मुख्य आर्थिक सलाहकार ने पुरानी गाड़ियों के लिए E10 जारी रखने और E30 पर सावधानी बरतने को कहा

    नई दिल्ली ।भारत में पेट्रोल में एथेनॉल मिश्रण को लेकर नई बहस शुरू हो गई है। सरकार के मुख्य आर्थिक सलाहकार वी. अनंत नागेश्वरन ने पुराने दोपहिया वाहनों के लिए पेट्रोल पंपों पर E10 पेट्रोल की उपलब्धता बनाए रखने की सलाह दी है। उनका कहना है कि देश में बड़ी संख्या में पुराने बाइक और स्कूटर ऐसे हैं, जिनके इंजन E20 ईंधन के लिए पूरी तरह अनुकूल नहीं हो सकते।

    नागेश्वरन के अनुसार, पुराने कार्बोरेटर आधारित इंजन E20 में मौजूद अधिक एथेनॉल के साथ हवा और ईंधन के मिश्रण को आधुनिक इंजनों की तरह प्रभावी तरीके से समायोजित नहीं कर पाते। ऐसी स्थिति में इंजन के अधिक गर्म होने और लंबे समय में रबर तथा अन्य संबंधित हिस्सों पर असर पड़ने की आशंका हो सकती है।

    मुख्य आर्थिक सलाहकार का सुझाव है कि जब तक पुराने वाहनों को E20 के अनुरूप तकनीकी रूप से अनुकूल नहीं बनाया जाता, तब तक उनके उपयोगकर्ताओं के लिए E10 पेट्रोल का विकल्प उपलब्ध रहना चाहिए। इससे पुराने वाहनों के मालिकों को अपनी जरूरत और वाहन की क्षमता के अनुसार ईंधन चुनने का अवसर मिल सकता है।

    भारत में पेट्रोल में एथेनॉल मिलाने की नीति का उद्देश्य पेट्रोलियम आयात पर निर्भरता कम करना, विदेशी मुद्रा की बचत करना और किसानों के लिए कृषि उत्पादों का अतिरिक्त बाजार तैयार करना है। एथेनॉल का उत्पादन मुख्य रूप से गन्ने के साथ-साथ मक्का और कुछ अन्य कृषि उत्पादों से किया जाता है। मिश्रण की मात्रा बढ़ने के साथ इन फसलों की मांग पर भी असर पड़ता है।

    नागेश्वरन ने एथेनॉल ब्लेंडिंग के खाद्य क्षेत्र पर पड़ने वाले संभावित प्रभावों को लेकर भी चिंता जताई है। उनके मुताबिक गन्ने, मक्का और चावल जैसी फसलों का अधिक इस्तेमाल एथेनॉल उत्पादन में होने पर पोल्ट्री और डेयरी उद्योग के लिए उपलब्ध चारे की लागत प्रभावित हो सकती है। इसका असर अंडे, चिकन और दूध जैसी आवश्यक वस्तुओं की कीमतों पर पड़ने की आशंका है।

    चीनी उद्योग पर भी इसका प्रभाव पड़ सकता है। गन्ने से बनने वाली चीनी का एक हिस्सा यदि एथेनॉल उत्पादन की ओर जाता है तो भविष्य में चीनी की उपलब्धता और कीमतों पर दबाव की स्थिति बन सकती है। इसी वजह से एथेनॉल नीति को केवल ईंधन की जरूरत के नजरिये से नहीं, बल्कि खाद्य आपूर्ति और कृषि बाजार के व्यापक संदर्भ में देखने की जरूरत बताई जा रही है।

    जल संसाधनों को लेकर भी सवाल उठाया गया है। गन्ने की खेती में बड़ी मात्रा में पानी की आवश्यकता होती है। ऐसे में एथेनॉल उत्पादन बढ़ाने के लिए गन्ने की खेती बढ़ने पर भूजल संसाधनों पर दबाव बढ़ सकता है। नागेश्वरन का कहना है कि एथेनॉल नीति का मूल्यांकन करते समय केवल कारखानों में इस्तेमाल होने वाले पानी का हिसाब पर्याप्त नहीं है। फसल उगाने में इस्तेमाल होने वाले भूजल को भी इसमें शामिल किया जाना चाहिए।

    सरकार की ओर से E20 नीति को लगातार समर्थन मिलता रहा है। नीति के पक्ष में यह तर्क दिया जाता है कि एथेनॉल मिश्रण बढ़ने से कच्चे तेल के आयात पर होने वाला खर्च कम करने में मदद मिलती है और किसानों को अपनी उपज के लिए अतिरिक्त बाजार मिलता है। वाहनों पर E20 के प्रभाव को लेकर किए गए परीक्षणों में बड़े पैमाने पर इंजन क्षति के स्पष्ट प्रमाण नहीं मिलने की बात भी सामने आई है।

    हालांकि E10 और E20 दोनों को समानांतर रूप से उपलब्ध कराने पर भंडारण, परिवहन और वितरण व्यवस्था की अतिरिक्त लागत का मुद्दा उठता है। अलग-अलग मिश्रण वाले पेट्रोल की उपलब्धता के लिए ईंधन आपूर्ति व्यवस्था में अतिरिक्त प्रबंधन की जरूरत पड़ सकती है।

    एथेनॉल मिश्रण को लेकर मौजूदा बहस का मूल सवाल यही है कि ऊर्जा सुरक्षा और आयात निर्भरता कम करने के साथ वाहन मालिकों, खाद्य कीमतों, किसानों और जल संसाधनों के हितों के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए। E30 की दिशा में आगे बढ़ने से पहले इन पहलुओं का व्यापक मूल्यांकन महत्वपूर्ण माना जा रहा है। वहीं पुराने वाहनों के लिए E10 उपलब्ध रखने का सुझाव मौजूदा नीति में व्यावहारिक विकल्प को लेकर नई चर्चा को जन्म दे रहा है।

  • बलूचिस्तान में BLA का 22 हमलों का दावा, आठ दिन में 26 पाकिस्तानी सुरक्षाकर्मियों को मारने की बात कही

    बलूचिस्तान में BLA का 22 हमलों का दावा, आठ दिन में 26 पाकिस्तानी सुरक्षाकर्मियों को मारने की बात कही

    नई दिल्ली ।पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में अलगाववादी संगठन बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी यानी बीएलए ने सुरक्षा बलों के खिलाफ अपने अभियान को लेकर बड़ा दावा किया है। संगठन ने सोमवार को जारी बयान में कहा कि उसके लड़ाकों ने पिछले आठ दिनों के दौरान प्रांत के अलग-अलग हिस्सों में 22 हमले किए। इन कार्रवाइयों में 26 पाकिस्तानी सुरक्षाकर्मियों के मारे जाने का दावा किया गया है।

    बीएलए के अनुसार, उसके निशाने पर पाकिस्तानी सेना, पुलिस चौकियां, सुरक्षा बलों के काफिले और सरकार समर्थित कथित हथियारबंद समूह रहे। संगठन ने सुरक्षा प्रतिष्ठानों के अलावा पुलों और कुछ व्यावसायिक वाहनों को भी निशाना बनाए जाने की बात कही है। हालांकि, संगठन द्वारा बताए गए हताहतों और हमलों के आंकड़ों की स्वतंत्र पुष्टि फिलहाल नहीं हुई है।

    बीएलए ने दावा किया कि कलात और सूरब क्षेत्रों में किए गए आईईडी हमलों में 20 पाकिस्तानी सुरक्षाकर्मी मारे गए। इसके अलावा चगाई, खारन और पंजगुर में पुलिस तथा सुरक्षा प्रतिष्ठानों को निशाना बनाए जाने की बात कही गई है। संगठन के अनुसार, अलग-अलग कार्रवाइयों के दौरान सुरक्षा बलों से जुड़े वाहनों और अन्य ठिकानों पर भी हमले किए गए।

    संगठन ने एक कथित सदस्य को जिंदा पकड़े जाने का भी दावा किया है। इसके अलावा बीएलए की ओर से सुरक्षा बलों के लिए इस्तेमाल किए जा रहे नौ वाहनों को नष्ट किए जाने की बात कही गई है। इन दावों को संगठन ने अपने व्यापक सशस्त्र अभियान का हिस्सा बताया है।

    बलूचिस्तान में बीएलए लंबे समय से पाकिस्तान सरकार और सेना के खिलाफ सशस्त्र अभियान चला रहा है। संगठन अलग बलूच राष्ट्र की मांग को लेकर सक्रिय है और समय-समय पर सुरक्षा बलों, सरकारी प्रतिष्ठानों, परिवहन मार्गों तथा आर्थिक परियोजनाओं को निशाना बनाने का दावा करता रहा है। क्षेत्र में लंबे समय से जारी राजनीतिक असंतोष, संसाधनों पर अधिकार और विकास से जुड़े मुद्दे भी इस संघर्ष की पृष्ठभूमि में रहे हैं।

    हालिया घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब बलूचिस्तान में सुरक्षा स्थिति पहले से ही चुनौतीपूर्ण बनी हुई है। अगस्त की शुरुआत में भी प्रांत के विभिन्न इलाकों में सुरक्षा अभियानों और हिंसक घटनाओं की खबरें सामने आई थीं। 12 अगस्त को सूरब जिले में एक कार्रवाई के दौरान पाकिस्तानी सुरक्षा बलों ने 10 आतंकवादियों को मार गिराने का दावा किया था, जबकि उसी दिन एक कार बम समय से पहले फटने की घटना में नागरिकों और विस्फोटक तैयार कर रहे लोगों की मौत हुई थी।

    बीएलए के ताजा दावों में कलात, सूरब, चगाई, खारन और पंजगुर जैसे इलाकों का उल्लेख किया गया है। इन क्षेत्रों में सुरक्षा प्रतिष्ठानों और आवागमन से जुड़े ढांचे पर हमलों की खबरें बलूचिस्तान में सक्रिय उग्रवादी गतिविधियों की व्यापकता को रेखांकित करती हैं।

    बलूचिस्तान पाकिस्तान का क्षेत्रफल के लिहाज से सबसे बड़ा प्रांत है और प्राकृतिक संसाधनों की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जाता है। लंबे समय से चल रहे अलगाववादी संघर्ष के कारण यहां सुरक्षा व्यवस्था पाकिस्तान सरकार के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई है। बीएलए की ओर से लगातार हमलों के दावे के बीच पाकिस्तानी सुरक्षा बलों पर प्रांत में निगरानी और अभियान बढ़ाने का दबाव भी बढ़ रहा है।

    हालांकि, किसी भी संघर्ष क्षेत्र में किसी संगठन द्वारा जारी किए गए हताहतों के आंकड़ों को स्वतंत्र पुष्टि के बिना अंतिम तथ्य नहीं माना जा सकता। इसलिए 22 हमलों और 26 सुरक्षाकर्मियों की मौत से जुड़े बीएलए के दावों की पुष्टि होने तक इन्हें संगठन के दावे के रूप में ही देखा जा रहा है।

  • सुप्रीम कोर्ट ने राहुल गांधी से जुड़े आय से अधिक संपत्ति मामले में CBI और ED जांच पर लगाई अंतरिम रोक

    सुप्रीम कोर्ट ने राहुल गांधी से जुड़े आय से अधिक संपत्ति मामले में CBI और ED जांच पर लगाई अंतरिम रोक

    नई दिल्ली । कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को आय से अधिक संपत्ति के आरोपों से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट से अंतरिम राहत मिली है। सर्वोच्च अदालत ने मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो और प्रवर्तन निदेशालय की जांच पर फिलहाल रोक लगा दी है। साथ ही अदालत ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के उस आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर संबंधित पक्षों से जवाब मांगा है, जिसके तहत दोनों जांच एजेंसियों को मामले की जांच करने के निर्देश दिए गए थे।

    मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने सोमवार को इस मामले की सुनवाई की। पीठ में न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना भी शामिल हैं। सुनवाई के दौरान अदालत ने शिकायतकर्ता के साथ-साथ CBI और ED को नोटिस जारी किया। सुप्रीम कोर्ट ने मामले की आगे की प्रक्रिया पर विचार करते हुए इलाहाबाद हाई कोर्ट में चल रही कार्यवाही को फिलहाल टालने का निर्देश दिया।

    इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ पीठ ने पहले आय से अधिक संपत्ति के आरोपों से संबंधित मामले में CBI और ED से जांच कराने का आदेश दिया था। इसी आदेश के खिलाफ राहुल गांधी की ओर से सुप्रीम कोर्ट का रुख किया गया। याचिका में हाई कोर्ट के आदेश को चुनौती देते हुए जांच एजेंसियों को दिए गए निर्देशों की प्रक्रिया पर सवाल उठाए गए हैं।

    सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि वह इस मामले के विभिन्न पहलुओं की समीक्षा करना चाहता है। अदालत ने विशेष रूप से इस बात पर विचार करने की जरूरत बताई कि जांच एजेंसियों को कार्रवाई के लिए किस प्रक्रिया के तहत निर्देश दिए गए। अदालत ने कहा कि न्यायिक प्रक्रिया में प्राकृतिक न्याय और निष्पक्षता के सिद्धांतों का पालन महत्वपूर्ण है।

    पीठ ने इलाहाबाद हाई कोर्ट से 20 अगस्त को प्रस्तावित सुनवाई को फिलहाल टालने को कहा है। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया कि राहुल गांधी की याचिका की प्रति शिकायतकर्ता को उपलब्ध कराई जाए, ताकि संबंधित पक्ष मामले में अपना पक्ष रख सकें। इस निर्देश के बाद हाई कोर्ट में होने वाली अगली कार्यवाही पर भी फिलहाल विराम लग गया है।

    सुप्रीम कोर्ट की ओर से मिली यह राहत फिलहाल अंतरिम प्रकृति की है। इसका अर्थ यह नहीं है कि आय से अधिक संपत्ति से जुड़े आरोपों पर अंतिम निर्णय हो गया है। अदालत ने अभी केवल जांच और संबंधित न्यायिक कार्यवाही को लेकर अंतरिम स्तर पर हस्तक्षेप किया है तथा मामले में आगे की सुनवाई के बाद स्थिति स्पष्ट होगी।

    मामले में CBI और ED को नोटिस जारी किए जाने के बाद अब दोनों जांच एजेंसियों के साथ शिकायतकर्ता का पक्ष भी अदालत के सामने आएगा। सुप्रीम कोर्ट इस बात पर विचार करेगा कि हाई कोर्ट द्वारा जांच के निर्देश दिए जाने की प्रक्रिया कानूनी और न्यायिक मानकों के अनुरूप थी या नहीं।

    राहुल गांधी के लिए यह आदेश फिलहाल महत्वपूर्ण कानूनी राहत माना जा रहा है, क्योंकि जांच एजेंसियों की कार्रवाई पर सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम रोक लगाई है। हालांकि मामले की अंतिम दिशा सर्वोच्च अदालत में होने वाली आगामी सुनवाई और उसके बाद दिए जाने वाले आदेश पर निर्भर करेगी।

  • बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता पद से हटे शहजाद पूनावाला, बोले पार्टी छोड़ रहा हूं लेकिन विचार और नेतृत्व का समर्थन जारी रहेगा

    बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता पद से हटे शहजाद पूनावाला, बोले पार्टी छोड़ रहा हूं लेकिन विचार और नेतृत्व का समर्थन जारी रहेगा

    नई दिल्ली । भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने सोमवार को पार्टी की सक्रिय प्राथमिक सदस्यता और राष्ट्रीय प्रवक्ता पद से इस्तीफा देने का फैसला किया। पूनावाला ने अपने इस्तीफे की जानकारी साझा करते हुए कहा कि पिछले कुछ दिनों की घटनाओं और व्यक्तिगत परिस्थितियों पर गंभीर विचार-विमर्श के बाद उन्होंने अपने निर्णय पर कायम रहने का फैसला किया है।

    पूनावाला के अनुसार उनका इस्तीफा पार्टी के लिए भी भावनात्मक विषय रहा। उन्होंने कहा कि पार्टी ने उनके त्यागपत्र को तुरंत स्वीकार करने से इनकार किया और उनसे अपने निर्णय पर पुनर्विचार करने का अनुरोध किया था। हालांकि, उन्होंने बताया कि विस्तृत विचार-विमर्श और गंभीर मनन के बाद उन्होंने बीजेपी की व्यवस्था से अलग होने का अंतिम निर्णय लिया।

    अपने इस्तीफे में पूनावाला ने बीजेपी के शीर्ष नेतृत्व के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, पार्टी अध्यक्ष नितिन नबीन, गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और संगठन महामंत्री बीएल संतोष के प्रति सम्मान और कृतज्ञता जाहिर की। उन्होंने कहा कि पिछले पांच वर्षों में पार्टी ने उन्हें जो मंच और अवसर दिए, उनके लिए वह नेतृत्व के आभारी हैं।

    पूनावाला ने अपने फैसले के पीछे आर्थिक और व्यक्तिगत परिस्थितियों का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि इन परिस्थितियों के कारण वह अब निजी क्षेत्र में प्रवेश करेंगे। उनके मुताबिक यह फैसला किसी राजनीतिक असहमति के बजाय वर्तमान निजी परिस्थितियों और भविष्य की पेशेवर दिशा से जुड़ा है।

    उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि पार्टी की सक्रिय राजनीति से अलग होने के बावजूद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बीजेपी के विचारों तथा कार्यों के प्रति उनका समर्थन बना रहेगा। उनका कहना है कि वह पार्टी की व्यवस्था छोड़ रहे हैं, लेकिन विचार और व्यक्तियों के प्रति उनका सम्मान कायम रहेगा। इस बयान के जरिए उन्होंने अपने इस्तीफे को राजनीतिक विचारधारा से अलग होने के रूप में पेश नहीं किया है।

    शहजाद पूनावाला का बीजेपी से जुड़ाव वर्ष 2017 के बाद हुआ था। इससे पहले उन्होंने कांग्रेस से इस्तीफा दिया था। बीजेपी में शामिल होने के बाद वह पार्टी के प्रमुख राष्ट्रीय प्रवक्ताओं में शामिल हो गए और विभिन्न टेलीविजन बहसों में बीजेपी का पक्ष रखते रहे।

    पिछले वर्षों में पूनावाला राजनीतिक मुद्दों पर पार्टी की ओर से मुखरता से अपनी बात रखते रहे हैं। खासकर विपक्षी दलों पर हमले और केंद्र सरकार की नीतियों के बचाव में उनकी भूमिका लगातार दिखाई देती रही। राष्ट्रीय प्रवक्ता के तौर पर उनकी सक्रियता ने उन्हें बीजेपी के चर्चित मीडिया चेहरों में शामिल किया।

    अब उनके इस्तीफे के बाद बीजेपी के मीडिया और प्रवक्ता तंत्र में भी यह एक महत्वपूर्ण बदलाव माना जा रहा है। हालांकि पूनावाला ने अपने बयान में पार्टी नेतृत्व के प्रति सम्मान और प्रधानमंत्री मोदी के दृष्टिकोण के समर्थन की बात कही है। इसलिए उनके फैसले को तत्काल किसी राजनीतिक खेमे में जाने के संकेत के तौर पर नहीं देखा जा सकता।

    पूनावाला ने अपने इस्तीफे के जरिए यह भी संकेत दिया है कि फिलहाल उनका अगला कदम निजी क्षेत्र में जाने का है। आर्थिक और व्यक्तिगत परिस्थितियों को निर्णय का आधार बताते हुए उन्होंने राजनीति से दूरी बनाने का फैसला किया है। बीजेपी में करीब पांच वर्षों तक सक्रिय भूमिका निभाने के बाद उनका यह कदम पार्टी के राजनीतिक और मीडिया सर्किल में चर्चा का विषय बन गया है।

  • नई दिल्ली में प्रधानमंत्री मोदी और मुख्यमंत्री फडणवीस की मुलाकात, केंद्र-महाराष्ट्र समन्वय और प्रमुख विकास परियोजनाओं पर बनी सहमति

    नई दिल्ली में प्रधानमंत्री मोदी और मुख्यमंत्री फडणवीस की मुलाकात, केंद्र-महाराष्ट्र समन्वय और प्रमुख विकास परियोजनाओं पर बनी सहमति

    नई दिल्ली । भारतीय जनता पार्टी में संगठनात्मक बदलाव की तैयारियां तेज हो गई हैं। पार्टी के नए राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की नई टीम को लेकर चर्चा अंतिम चरण में पहुंचती दिखाई दे रही है। माना जा रहा है कि राष्ट्रीय संगठन में कुछ पुराने और अनुभवी चेहरों को बरकरार रखते हुए युवाओं और महिलाओं को भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां दी जा सकती हैं। नई टीम का गठन ऐसे समय में होने जा रहा है, जब बीजेपी के सामने अगले कुछ वर्षों में कई महत्वपूर्ण चुनावी चुनौतियां हैं।

    पार्टी की राष्ट्रीय टीम में उपाध्यक्ष, महासचिव और अन्य प्रमुख संगठनात्मक पदों के लिए कई नामों पर विचार किए जाने की चर्चा है। इनमें हरीश द्विवेदी और विनोद तावड़े को महत्वपूर्ण जिम्मेदारी मिलने की संभावना बताई जा रही है। दोनों नेताओं के संगठनात्मक अनुभव और अलग-अलग राज्यों में उनकी राजनीतिक सक्रियता को देखते हुए उन्हें नई टीम में जगह दिए जाने की अटकलें तेज हैं।

    सुनील बंसल के भी नई टीम में बने रहने की संभावना जताई जा रही है। संगठन के स्तर पर उनका अनुभव पार्टी के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। ऐसे में नई टीम में अनुभवी नेताओं और नई पीढ़ी के चेहरों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश हो सकती है। पार्टी नेतृत्व संगठन को ऐसा स्वरूप देना चाहता है, जिसमें विभिन्न क्षेत्रों और आयु वर्गों को प्रतिनिधित्व मिले।

    नई टीम में युवाओं को अधिक अवसर देने पर भी विशेष जोर रहने की संभावना है। इसके साथ ही महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने की दिशा में भी फैसले किए जा सकते हैं। संगठन में 40 से 50 वर्ष की आयु वाले नेताओं को आगे लाने की चर्चा भी सामने आई है। इससे पार्टी में नई पीढ़ी के नेतृत्व को मजबूत करने की रणनीति का संकेत मिलता है।

    बीजेपी के लिए यह संगठनात्मक बदलाव इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि 2027 में कई राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं। उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और पंजाब जैसे राज्यों में होने वाले चुनाव पार्टी की रणनीति के लिए अहम रहेंगे। इन चुनावों के बाद 2029 में लोकसभा चुनाव भी होने हैं। ऐसे में राष्ट्रीय संगठन की नई टीम को चुनावी तैयारियों के साथ-साथ राज्यों में संगठन को मजबूत करने की जिम्मेदारी भी निभानी होगी।

    उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य में चुनावी समीकरण बीजेपी के लिए विशेष महत्व रखते हैं। वहीं उत्तराखंड और पंजाब में अलग राजनीतिक परिस्थितियां हैं। नई टीम का गठन करते समय अलग-अलग राज्यों की राजनीतिक और सामाजिक आवश्यकताओं को ध्यान में रखने की कोशिश की जा सकती है। क्षेत्रीय संतुलन के साथ सामाजिक प्रतिनिधित्व भी संगठनात्मक नियुक्तियों में महत्वपूर्ण कारक रह सकता है।

    इस बीच नितिन नवीन और बीजेपी के संगठन महामंत्री बीएल संतोष सोमवार शाम विशाखापट्टनम पहुंचने वाले हैं। दोनों नेता वहां राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की तीन दिवसीय बैठक में हिस्सा लेंगे। यह बैठक 19 से 21 अगस्त तक प्रस्तावित है, जिसमें संघ और उससे जुड़े संगठनों के बीच विभिन्न संगठनात्मक और समसामयिक मुद्दों पर चर्चा होनी है।

    बीजेपी की नई राष्ट्रीय टीम को लेकर अंतिम तस्वीर इसी बैठक के दौरान या उसके बाद स्पष्ट होने की संभावना है। हालांकि जब तक पार्टी की ओर से आधिकारिक घोषणा नहीं होती, तब तक संभावित नामों और जिम्मेदारियों को लेकर चल रही चर्चाओं को अंतिम फैसला नहीं माना जा सकता।

    नितिन नवीन के सामने नई टीम के गठन के साथ संगठन में अनुभव और युवा नेतृत्व के बीच संतुलन बनाने की चुनौती होगी। साथ ही आने वाले विधानसभा और लोकसभा चुनावों को देखते हुए राज्यों में पार्टी की चुनावी तैयारियों को गति देना भी महत्वपूर्ण होगा। नई राष्ट्रीय टीम से बीजेपी की संगठनात्मक प्राथमिकताओं और आगामी चुनावों की रणनीति की दिशा स्पष्ट होने की उम्मीद है।

  • बीजेपी की नई राष्ट्रीय टीम जल्द होगी घोषित, नितिन नवीन के साथ विनोद तावड़े और हरीश द्विवेदी को मिल सकती है अहम जिम्मेदारी

    बीजेपी की नई राष्ट्रीय टीम जल्द होगी घोषित, नितिन नवीन के साथ विनोद तावड़े और हरीश द्विवेदी को मिल सकती है अहम जिम्मेदारी

    नई दिल्ली ।भारतीय जनता पार्टी में संगठनात्मक बदलाव की तैयारियां तेज हो गई हैं। पार्टी के नए राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की नई टीम को लेकर चर्चा अंतिम चरण में पहुंचती दिखाई दे रही है। माना जा रहा है कि राष्ट्रीय संगठन में कुछ पुराने और अनुभवी चेहरों को बरकरार रखते हुए युवाओं और महिलाओं को भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां दी जा सकती हैं। नई टीम का गठन ऐसे समय में होने जा रहा है, जब बीजेपी के सामने अगले कुछ वर्षों में कई महत्वपूर्ण चुनावी चुनौतियां हैं।

    पार्टी की राष्ट्रीय टीम में उपाध्यक्ष, महासचिव और अन्य प्रमुख संगठनात्मक पदों के लिए कई नामों पर विचार किए जाने की चर्चा है। इनमें हरीश द्विवेदी और विनोद तावड़े को महत्वपूर्ण जिम्मेदारी मिलने की संभावना बताई जा रही है। दोनों नेताओं के संगठनात्मक अनुभव और अलग-अलग राज्यों में उनकी राजनीतिक सक्रियता को देखते हुए उन्हें नई टीम में जगह दिए जाने की अटकलें तेज हैं।

    सुनील बंसल के भी नई टीम में बने रहने की संभावना जताई जा रही है। संगठन के स्तर पर उनका अनुभव पार्टी के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। ऐसे में नई टीम में अनुभवी नेताओं और नई पीढ़ी के चेहरों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश हो सकती है। पार्टी नेतृत्व संगठन को ऐसा स्वरूप देना चाहता है, जिसमें विभिन्न क्षेत्रों और आयु वर्गों को प्रतिनिधित्व मिले।

    नई टीम में युवाओं को अधिक अवसर देने पर भी विशेष जोर रहने की संभावना है। इसके साथ ही महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने की दिशा में भी फैसले किए जा सकते हैं। संगठन में 40 से 50 वर्ष की आयु वाले नेताओं को आगे लाने की चर्चा भी सामने आई है। इससे पार्टी में नई पीढ़ी के नेतृत्व को मजबूत करने की रणनीति का संकेत मिलता है।

    बीजेपी के लिए यह संगठनात्मक बदलाव इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि 2027 में कई राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं। उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और पंजाब जैसे राज्यों में होने वाले चुनाव पार्टी की रणनीति के लिए अहम रहेंगे। इन चुनावों के बाद 2029 में लोकसभा चुनाव भी होने हैं। ऐसे में राष्ट्रीय संगठन की नई टीम को चुनावी तैयारियों के साथ-साथ राज्यों में संगठन को मजबूत करने की जिम्मेदारी भी निभानी होगी।

    उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य में चुनावी समीकरण बीजेपी के लिए विशेष महत्व रखते हैं। वहीं उत्तराखंड और पंजाब में अलग राजनीतिक परिस्थितियां हैं। नई टीम का गठन करते समय अलग-अलग राज्यों की राजनीतिक और सामाजिक आवश्यकताओं को ध्यान में रखने की कोशिश की जा सकती है। क्षेत्रीय संतुलन के साथ सामाजिक प्रतिनिधित्व भी संगठनात्मक नियुक्तियों में महत्वपूर्ण कारक रह सकता है।

    इस बीच नितिन नवीन और बीजेपी के संगठन महामंत्री बीएल संतोष सोमवार शाम विशाखापट्टनम पहुंचने वाले हैं। दोनों नेता वहां राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की तीन दिवसीय बैठक में हिस्सा लेंगे। यह बैठक 19 से 21 अगस्त तक प्रस्तावित है, जिसमें संघ और उससे जुड़े संगठनों के बीच विभिन्न संगठनात्मक और समसामयिक मुद्दों पर चर्चा होनी है।

    बीजेपी की नई राष्ट्रीय टीम को लेकर अंतिम तस्वीर इसी बैठक के दौरान या उसके बाद स्पष्ट होने की संभावना है। हालांकि जब तक पार्टी की ओर से आधिकारिक घोषणा नहीं होती, तब तक संभावित नामों और जिम्मेदारियों को लेकर चल रही चर्चाओं को अंतिम फैसला नहीं माना जा सकता।

    नितिन नवीन के सामने नई टीम के गठन के साथ संगठन में अनुभव और युवा नेतृत्व के बीच संतुलन बनाने की चुनौती होगी। साथ ही आने वाले विधानसभा और लोकसभा चुनावों को देखते हुए राज्यों में पार्टी की चुनावी तैयारियों को गति देना भी महत्वपूर्ण होगा। नई राष्ट्रीय टीम से बीजेपी की संगठनात्मक प्राथमिकताओं और आगामी चुनावों की रणनीति की दिशा स्पष्ट होने की उम्मीद है।

  • ‘दिमागी नक्सल’ बयान पर बीजेपी का चिदंबरम पर हमला, सुधांशु त्रिवेदी ने कांग्रेस से नक्सलवाद पर रुख स्पष्ट करने को कहा

    ‘दिमागी नक्सल’ बयान पर बीजेपी का चिदंबरम पर हमला, सुधांशु त्रिवेदी ने कांग्रेस से नक्सलवाद पर रुख स्पष्ट करने को कहा

    नई दिल्ली । ‘दिमागी नक्सल’ शब्द को लेकर बीजेपी और कांग्रेस के बीच राजनीतिक विवाद लगातार तेज होता जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर दिए गए संबोधन में नक्सली हिंसा के साथ नक्सली विचारधारा को बढ़ावा देने वाली सोच से सावधान रहने की बात कहे जाने के बाद इस मुद्दे पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी. चिदंबरम की टिप्पणी के बाद बीजेपी ने कांग्रेस पर सीधा हमला बोला है।

    पी. चिदंबरम ने प्रधानमंत्री के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यदि उन्हें ‘दिमागी नक्सली’ कहा जाता है तो उन्हें इस संबोधन पर गर्व है। उनके इस बयान को बीजेपी ने नक्सलवाद के मुद्दे पर कांग्रेस की सोच से जोड़ते हुए सवाल खड़े किए हैं। बीजेपी नेता सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि प्रधानमंत्री की टिप्पणी के कुछ ही समय बाद चिदंबरम का खुद को ‘दिमागी नक्सल’ बताना राजनीतिक बहस को नया मोड़ देता है।

    सुधांशु त्रिवेदी ने कांग्रेस से सवाल किया कि पार्टी नक्सलवाद के मुद्दे पर किस रुख के साथ खड़ी है। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के उस पुराने बयान का भी उल्लेख किया, जिसमें नक्सलवाद को देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बताया गया था। बीजेपी का तर्क है कि कांग्रेस को यह स्पष्ट करना चाहिए कि वह मनमोहन सिंह के पुराने रुख का समर्थन करती है या चिदंबरम की मौजूदा टिप्पणी को सही मानती है।

    बीजेपी ने इस बहस को देश में नक्सली हिंसा के पुराने हालात से भी जोड़ा है। पार्टी नेताओं के अनुसार, एक समय देश के कई हिस्सों में नक्सली गतिविधियों का व्यापक प्रभाव था और बड़ी संख्या में जिले प्रभावित बताए जाते थे। हिंसा के कारण सुरक्षाबलों और आम नागरिकों की जान जाने की घटनाएं भी सामने आती रही हैं।

    सुधांशु त्रिवेदी ने दावा किया कि केंद्र सरकार की सुरक्षा और विकास संबंधी कोशिशों के बाद नक्सली हिंसा में उल्लेखनीय कमी आई है। उन्होंने बताया कि सरकारी आंकड़ों के अनुसार 31 मई 2026 तक नक्सल प्रभावित जिलों की संख्या घटकर शून्य हो गई थी। बीजेपी इसे नक्सलवाद के खिलाफ लंबे समय से चलाए जा रहे अभियान की बड़ी उपलब्धि के रूप में पेश कर रही है।

    इस दौरान बस्तर का उदाहरण भी राजनीतिक चर्चा का हिस्सा बना। कभी नक्सली हिंसा के लिए चर्चा में रहने वाले बस्तर में अब खेल और अन्य सामाजिक गतिविधियों के विस्तार का उल्लेख करते हुए बीजेपी ने इसे बदले हुए माहौल का संकेत बताया। त्रिवेदी ने बस्तर ओलंपिक जैसी गतिविधियों का हवाला देकर कहा कि क्षेत्र में सामान्य स्थिति और विकास की दिशा में बदलाव दिखाई दे रहा है।

    विवाद की मूल शुरुआत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 15 अगस्त के भाषण से हुई थी। उन्होंने कहा था कि हथियार उठाने वाले नक्सलवाद का प्रभाव लगभग समाप्त हो चुका है, लेकिन ऐसी विचारधारा और सोच से सतर्क रहने की आवश्यकता है जो नक्सली विचारों को बढ़ावा देती हो। इसके बाद ‘दिमागी नक्सल’ शब्द राजनीतिक बहस का केंद्र बन गया।

    अब चिदंबरम की टिप्पणी और बीजेपी की प्रतिक्रिया के बाद यह मुद्दा कांग्रेस और बीजेपी के बीच वैचारिक तथा राजनीतिक टकराव का नया विषय बन गया है। आने वाले दिनों में दोनों दलों के बीच इस बयान को लेकर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप और तेज होने की संभावना है।