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  • ब्रेस्ट में गांठ को न करें नजरअंदाज, कम उम्र में भी हो सकता है कैंसर, इलाज से पहले फर्टिलिटी प्रिजर्वेशन पर दें ध्यान

    ब्रेस्ट में गांठ को न करें नजरअंदाज, कम उम्र में भी हो सकता है कैंसर, इलाज से पहले फर्टिलिटी प्रिजर्वेशन पर दें ध्यान


    इंदौर । ब्रेस्ट कैंसर को अक्सर बढ़ती उम्र से जुड़ी बीमारी माना जाता है लेकिन अब कम उम्र की महिलाओं में भी इसके मामले सामने आ रहे हैं। इंदौर और आसपास के क्षेत्रों में सामने आए कुछ मामलों ने इस बीमारी के शुरुआती लक्षणों को गंभीरता से लेने की जरूरत को फिर उजागर किया है। एक निजी कंपनी में काम करने वाली 30 वर्षीय युवती को ब्रेस्ट कैंसर होने के बाद इलाज के साथ भविष्य में मां बनने की चिंता भी सताने लगी। वहीं उज्जैन की 35 वर्षीय महिला ने स्तन में गांठ को शुरुआत में सामान्य समस्या समझकर नजरअंदाज किया लेकिन जांच कराने पर कैंसर की पुष्टि हुई। एक अन्य 33 वर्षीय महिला के मामले में पारिवारिक इतिहास की जांच के दौरान आनुवंशिक कारण सामने आया।
    ये मामले बताते हैं कि स्तन में होने वाले बदलावों को नजरअंदाज करना नुकसानदायक हो सकता है। अक्टूबर को दुनिया भर में ब्रेस्ट कैंसर जागरूकता माह के रूप में मनाया जाता है। इस दौरान विशेषज्ञ महिलाओं को बीमारी के जोखिम कारकों शुरुआती लक्षणों और उपलब्ध उपचार विकल्पों के बारे में जागरूक रहने की सलाह देते हैं। डॉक्टरों के मुताबिक समय पर पहचान और उचित उपचार से बीमारी से लड़ने की संभावनाएं बेहतर हो सकती हैं।
    इंदौर के कंसल्टेंट मेडिकल ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ. प्रांजिल मंडलोई के अनुसार अल्कोहल का सेवन धूम्रपान मोटापा और शारीरिक गतिविधियों की कमी जैसे कारकों पर ध्यान देना जरूरी है। नियमित शारीरिक गतिविधि वजन नियंत्रित रखने और हार्मोनल तथा मेटाबॉलिक स्वास्थ्य बेहतर बनाए रखने में मदद करती है। कुछ अध्ययनों में नियमित व्यायाम करने वाली महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर का जोखिम कम पाया गया है। हालांकि किसी एक जीवनशैली कारक से हर महिला में कैंसर होने या न होने का निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता।
    कम उम्र में कैंसर का पता चलने पर इलाज के साथ भविष्य में परिवार बढ़ाने की चिंता भी सामने आती है। विशेषज्ञों के मुताबिक कुछ महिलाएं उपचार पूरा होने के बाद मां बन सकती हैं। लेकिन गर्भधारण का सही समय कैंसर के प्रकार उसकी अवस्था और इस्तेमाल किए जाने वाले उपचार पर निर्भर करता है। कुछ दवाएं और कीमोथेरेपी प्रजनन क्षमता को प्रभावित कर सकती हैं। इसलिए उपचार शुरू करने से पहले ही डॉक्टर से इस विषय पर चर्चा करना उपयोगी है। जरूरत के अनुसार एग फ्रीजिंग या एम्ब्रियो फ्रीजिंग जैसे विकल्पों पर विचार किया जा सकता है। इलाज के बाद गर्भधारण की योजना कैंसर विशेषज्ञ और प्रजनन विशेषज्ञ की सलाह से बनानी चाहिए।
    ब्रेस्ट कैंसर के जोखिम का आकलन करते समय पारिवारिक इतिहास भी महत्वपूर्ण होता है। यदि मां बहन नानी मौसी या परिवार के अन्य करीबी सदस्यों को ब्रेस्ट कैंसर हुआ हो तो डॉक्टर से जांच और आनुवंशिक जोखिम के बारे में चर्चा करनी चाहिए। कुछ मामलों में BRCA1 और BRCA2 जैसे जीन में बदलाव बीमारी का खतरा बढ़ा सकते हैं। विशेषज्ञ की सलाह पर आनुवंशिक जांच कराई जा सकती है। यदि किसी परिवार में ऐसे बदलाव की पुष्टि होती है तो दूसरे सदस्यों के जोखिम और स्क्रीनिंग की योजना भी व्यक्तिगत आधार पर तय की जा सकती है।
    डॉक्टरों के मुताबिक सामान्य जोखिम वाली महिलाओं को 40 वर्ष की उम्र के बाद मैमोग्राफी स्क्रीनिंग के बारे में चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए। हालांकि जांच शुरू करने की उम्र और अंतराल व्यक्तिगत जोखिम तथा लागू दिशा-निर्देशों के आधार पर तय होते हैं। जिन महिलाओं में आनुवंशिक या पारिवारिक जोखिम अधिक है उन्हें कम उम्र से ही विशेष निगरानी की जरूरत हो सकती है।
    ब्रेस्ट कैंसर के उपचार में भी कई विकल्प उपलब्ध हुए हैं। अब हर मरीज को कीमोथेरेपी देना जरूरी नहीं होता। कैंसर की बायोलॉजी और स्टेज के अनुसार हॉर्मोन थेरेपी टार्गेटेड थेरेपी इम्यूनोथेरेपी और एंटीबॉडी ड्रग कॉन्जुगेट जैसी दवाओं का इस्तेमाल किया जा सकता है।
    कुछ मरीजों में जीनोमिक टेस्ट से उपचार के फैसले में मदद मिलती है। वहीं चुनिंदा एडवांस्ड मामलों में लिक्विड बायोप्सी के जरिए खून में मौजूद कैंसर से जुड़े आनुवंशिक बदलावों की जानकारी मिल सकती है। कौन सा उपचार उपयुक्त होगा यह मरीज की रिपोर्ट और बीमारी की स्थिति पर निर्भर करता है।
    सर्जिकल ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ. रितेश तपकिरे के अनुसार स्तन में नई गांठ आकार में बदलाव त्वचा पर सिकुड़न या गड्ढा निप्पल का अंदर की ओर मुड़ना अथवा असामान्य स्राव जैसे लक्षणों पर चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए। हर गांठ कैंसर नहीं होती लेकिन उसकी वजह की पुष्टि जांच से ही हो सकती है। इसलिए लक्षण बने रहने पर देर किए बिना डॉक्टर से संपर्क करना जरूरी है।

  • बंगाल के दुर्गा पूजा पंडाल में भगदड़ पर चिराग पासवान ने जताया दुख, राहुल गांधी और बिहार के मुद्दों पर भी दिया बयान

    बंगाल के दुर्गा पूजा पंडाल में भगदड़ पर चिराग पासवान ने जताया दुख, राहुल गांधी और बिहार के मुद्दों पर भी दिया बयान


    नई दिल्ली ।
    पश्चिम बंगाल में दुर्गा पूजा पंडाल में हुई भगदड़ की घटना पर केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने दुख जताया है। उन्होंने कहा कि इस हादसे से प्रभावित परिवारों के साथ सरकार खड़ी है। कोलकाता के चोरबागान दुर्गा पूजा पंडाल में हुई इस घटना में अब तक 19 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 25 लोग घायल हुए हैं। मामले में सात लोगों को गिरफ्तार किए जाने की जानकारी सामने आई है। हादसे के बाद राजनीतिक गलियारों में भी इस घटना को लेकर प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।

    चिराग पासवान ने कहा कि पीड़ित परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त करना और इस मुश्किल समय में उनके साथ खड़ा रहना जरूरी है। उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के कार्यक्रम रद्द करने का उल्लेख करते हुए कहा कि यह कदम सरकार की संवेदनशीलता को दर्शाता है। उनके मुताबिक, ऐसी दुखद घटना के समय प्रभावित लोगों के साथ खड़े होने और उनकी पीड़ा को समझने की जरूरत है।

    इस दौरान चिराग पासवान ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल में इतनी गंभीर घटना होने के बावजूद राहुल गांधी की गोवा में बड़ी रैली प्रस्तावित है। चिराग ने इस स्थिति का उल्लेख करते हुए राहुल गांधी की संवेदनशीलता पर सवाल उठाए और कहा कि उन्हें भी इस मामले में संवेदनशीलता दिखानी चाहिए। यह टिप्पणी उन्होंने बंगाल हादसे के संदर्भ में की।

    चिराग पासवान ने अभिनेता इमरान खान को भारत छोड़ने का नोटिस दिए जाने से जुड़े सवाल पर भी अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि किसी विदेशी व्यक्ति का भारत आकर विरोध प्रदर्शन करना स्वीकार नहीं किया जा सकता। उनके अनुसार, सरकार ने इस मामले में उचित कदम उठाया है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि भारत सरकार को अस्थिर करने की कोशिशें की जा रही हैं और ऐसी गतिविधियों को स्वीकार नहीं किया जाना चाहिए।

    बिहार के मंत्री भगवान सिंह कुशवाहा के उस बयान पर भी चिराग पासवान ने आपत्ति जताई, जिसमें कथित तौर पर कहा गया था कि हत्याएं होती रहती हैं। चिराग ने कहा कि किसी भी घटना का होना शर्म की बात है और ऐसी घटनाएं नहीं होनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि इस तरह की घटनाओं को लेकर इस प्रकार की टिप्पणी नहीं की जानी चाहिए। उनके बयान से स्पष्ट हुआ कि वे ऐसी घटनाओं को सामान्य बताने वाले दृष्टिकोण से सहमत नहीं हैं।

    बिहार की राजनीति से जुड़े सवालों पर भी चिराग पासवान ने अपनी बात रखी। राघोपुर में हुए नाव हादसे को लेकर तेजस्वी यादव की ओर से सरकार पर सवाल उठाए जाने के संदर्भ में चिराग ने कहा कि वह जिम्मेदारी लेते हैं, क्योंकि वे उस क्षेत्र के सांसद हैं। इस बयान के जरिए उन्होंने अपने संसदीय क्षेत्र से जुड़े मामले पर जवाबदेही की बात कही।

    विधान परिषद चुनाव में जनता दल यूनाइटेड के विधायक अनंत सिंह द्वारा अपनी ही पार्टी की उम्मीदवार का विरोध किए जाने के सवाल पर चिराग ने कहा कि वह किसी दूसरी पार्टी के आंतरिक मामले पर टिप्पणी नहीं करना चाहते। हालांकि, उन्होंने चुनाव परिणाम को लेकर विश्वास जताया। उनका कहना था कि जिस तरह विधानसभा चुनाव में परिणाम सामने आए थे, उसी तर्ज पर विधान परिषद चुनाव में भी नतीजे आएंगे और उनका गठबंधन सभी सीटों पर जीत दर्ज करेगा।

    पश्चिम बंगाल की भगदड़ से लेकर बिहार के हादसों और राजनीतिक घटनाक्रम तक, चिराग पासवान ने अलग-अलग मुद्दों पर अपनी प्रतिक्रिया दी। उनके बयानों में पीड़ित परिवारों के प्रति संवेदना, सार्वजनिक घटनाओं पर जवाबदेही और राजनीतिक विरोधियों की टिप्पणियों पर सवाल प्रमुख रहे।

  • कोलकाता दुर्गा पूजा भगदड़ में 19 मौतों के बाद भाजपा विधायक सजल घोष के ‘नसीब’ वाले बयान पर विवाद

    कोलकाता दुर्गा पूजा भगदड़ में 19 मौतों के बाद भाजपा विधायक सजल घोष के ‘नसीब’ वाले बयान पर विवाद

    नई दिल्ली ।पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता के चोरबागान दुर्गा पूजा पंडाल में भगदड़ के दौरान 19 लोगों की मौत के बाद राजनीतिक विवाद भी शुरू हो गया है। इस हादसे पर भारतीय जनता पार्टी के विधायक सजल घोष के बयान को लेकर सवाल उठ रहे हैं। उन्होंने घटना पर दुख जताते हुए कहा कि कोई नहीं जानता कि रात में क्या हो सकता है। उन्होंने हादसे को नसीब से जोड़ते हुए यह भी कहा कि कोई भी व्यवस्था पूरी तरह सुरक्षित नहीं हो सकती।

    सजल घोष ने कहा कि ऐसी घटनाओं में गलतियां हो सकती हैं और किसी भी व्यवस्था को सौ फीसदी सुरक्षित नहीं माना जा सकता। उन्होंने अपने बयान में कहा कि यह नसीब की बात है और कोई नहीं बता सकता कि रात में क्या होने वाला है। उनके इस बयान के बाद हादसे के समय की व्यवस्थाओं और जिम्मेदारी को लेकर चर्चा तेज हो गई है।

    विधायक ने कहा कि किसी दुर्घटना को पूरी तरह रोक पाना हमेशा संभव नहीं होता। उन्होंने अमेरिका में राष्ट्रपति की सुरक्षा से जुड़ी घटनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि वहां भी सुरक्षा व्यवस्था हर परिस्थिति में पूरी तरह सफल नहीं रही है। उन्होंने भारत के दो प्रधानमंत्रियों की मौत का उल्लेख करते हुए कहा कि गलतियां हो जाती हैं और दुर्घटनाओं को पूरी तरह रोकने की गारंटी नहीं दी जा सकती।

    सजल घोष ने यह भी कहा कि अभी यह निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी कि चोरबागान पंडाल में हुई भगदड़ के लिए गलती किस स्तर पर हुई। उनके मुताबिक, अगर बारिश नहीं हुई होती तो संभव है कि ऐसी स्थिति पैदा नहीं होती। उन्होंने किसी तरह की जानकारी छिपाने की कोशिश किए जाने की बात से भी इनकार किया। हालांकि, हादसे के वास्तविक कारणों और जिम्मेदारी को लेकर अंतिम निष्कर्ष जांच के तथ्यों के आधार पर ही सामने आ सकेगा।

    घटना के बाद सात लोगों को गिरफ्तार किए जाने की जानकारी भी सामने आई है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में गिरफ्तार किए गए लोगों की पहचान, उनकी भूमिका और उन पर लगाए गए आरोपों का विस्तृत विवरण नहीं दिया गया है। मामले में आगे की कार्रवाई और जांच के निष्कर्षों को लेकर स्थिति स्पष्ट होना बाकी है।

    विधायक ने पीड़ित परिवारों को दी जा रही आर्थिक सहायता का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि मृतकों में से दो लोग उनके विधानसभा क्षेत्र के निवासी थे। उनके अनुसार, राज्य सरकार ने प्रत्येक मृतक के परिवार को 25 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने का आश्वासन दिया है। इसके अलावा घायलों को पांच लाख रुपये की सहायता और उनके इलाज का पूरा खर्च उठाने की बात कही गई है।

    इस हादसे ने दुर्गा पूजा पंडालों में भीड़ प्रबंधन, सुरक्षा इंतजाम और आपात स्थिति से निपटने की तैयारियों पर भी सवाल खड़े किए हैं। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के जुटने वाले आयोजनों में प्रवेश और निकास की व्यवस्था, भीड़ की निगरानी तथा मौसम से जुड़ी परिस्थितियों को संभालना महत्वपूर्ण होता है। हालांकि, चोरबागान पंडाल में इन व्यवस्थाओं में कहां कमी रही, इसकी पुष्टि उपलब्ध जानकारी से नहीं होती।

    सजल घोष के बयान को लेकर उठे विवाद के बीच हादसे में जान गंवाने वाले लोगों और घायल हुए श्रद्धालुओं की स्थिति सबसे महत्वपूर्ण बनी हुई है। परिवारों को आर्थिक सहायता देने की घोषणा के साथ-साथ दुर्घटना के कारणों और जिम्मेदारी से जुड़े सवालों के जवाब सामने आना बाकी हैं। जांच से जुड़े तथ्यों के स्पष्ट होने के बाद ही यह निर्धारित हो सकेगा कि भगदड़ किन परिस्थितियों में हुई और ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए किन कदमों की आवश्यकता है।

  • भोपाल में कुएं में मिला युवक का शव, दो साल से चल रहा था इलाज, मर्ग कायम कर मौत की परिस्थितियों की जांच में जुटी पुलिस

    भोपाल में कुएं में मिला युवक का शव, दो साल से चल रहा था इलाज, मर्ग कायम कर मौत की परिस्थितियों की जांच में जुटी पुलिस


    भोपाल । भोपाल के सुखी सेवनिया इलाके में रविवार सुबह उस समय हड़कंप मच गया जब सुरभि कॉलेज के पास स्थित एक कुएं में 23 वर्षीय युवक का शव मिला। सूचना मिलने के बाद पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कुएं से बाहर निकलवाया। मृतक की पहचान विशाल वंशकार पिता छोटेलाल वंशकार निवासी सुखी सेवनिया के रूप में हुई है। बताया जा रहा है कि विशाल पिछले चार दिनों से घर नहीं लौटा था। हालांकि परिजनों ने उसकी गुमशुदगी की रिपोर्ट पुलिस में दर्ज नहीं कराई थी। युवक का शव मिलने के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है।
    जानकारी के अनुसार रविवार सुबह सुरभि कॉलेज के पास स्थित कुएं में ग्रामीणों ने एक युवक का शव देखा। इसके बाद उन्होंने पुलिस को सूचना दी। पुलिस टीम तत्काल मौके पर पहुंची और आवश्यक कार्रवाई करते हुए शव को कुएं से बाहर निकलवाया। पहचान की प्रक्रिया पूरी होने पर मृतक के परिजनों को सूचना दी गई। इसके बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए गांधी मेडिकल कॉलेज की मर्चुरी भेजा गया। रविवार दोपहर पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी होने के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया।
    मृतक के बड़े भाई राजेश वंशकार ने बताया कि विशाल के दिमाग का पिछले करीब दो साल से इलाज चल रहा था। उनके अनुसार बीते कुछ समय से उसकी मानसिक स्थिति में परेशानी बढ़ गई थी। वह कई-कई दिनों तक बिना किसी को बताए घर से बाहर चला जाता था और फिर कुछ समय बाद वापस लौट आता था। परिवार के मुताबिक पहले भी उसके घर से बाहर रहने की ऐसी स्थिति बनती रही थी।
    परिजनों ने बताया कि इसी वजह से जब विशाल चार दिनों तक घर नहीं लौटा तो उन्होंने उसकी गुमशुदगी दर्ज नहीं कराई। परिवार को उम्मीद थी कि वह पहले की तरह खुद ही वापस आ जाएगा। हालांकि इस बार उसका शव कुएं में मिलने की खबर सामने आई। घटना के बाद परिवार में शोक का माहौल है। फिलहाल उपलब्ध जानकारी के अनुसार परिजनों ने किसी व्यक्ति पर संदेह जताते हुए कोई आरोप नहीं लगाया है।
    पुलिस अब इस बात का पता लगाने में जुटी है कि विशाल कुएं तक कैसे पहुंचा और उसकी मौत किन परिस्थितियों में हुई। युवक के घर से निकलने से लेकर शव मिलने तक की घटनाओं को समझने के लिए सभी पहलुओं पर जांच की जा रही है। कुएं में गिरने की आशंका समेत अन्य संभावित परिस्थितियों की पुष्टि जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही हो सकेगी। अभी मौत की वास्तविक वजह स्पष्ट नहीं हुई है।
    सुखी सेवनिया पुलिस ने मामले में मर्ग कायम कर लिया है। पुलिस के मुताबिक पोस्टमार्टम रिपोर्ट मिलने के बाद मौत के कारणों को समझने में मदद मिलेगी। जांच के दौरान जरूरी तथ्यों और परिस्थितियों का भी सत्यापन किया जाएगा। फिलहाल मामले में किसी तरह की आपराधिक घटना की पुष्टि नहीं हुई है। पुलिस जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि युवक की मौत कैसे हुई। घटना ने इलाके में चिंता का माहौल पैदा कर दिया है।

  • नवाबों की रुबात में VIP कोटे पर क्यों मचा घमासान, आम हाजियों के लिए बनी सुविधा के आवंटन पर उठे सवाल

    नवाबों की रुबात में VIP कोटे पर क्यों मचा घमासान, आम हाजियों के लिए बनी सुविधा के आवंटन पर उठे सवाल


    भोपाल । भोपाल रियासत के नवाबों और बेगमों की ओर से हज यात्रियों को राहत देने के उद्देश्य से बनाई गई रुबात की सुविधा एक बार फिर चर्चा में है। मक्का में हाजियों के ठहरने के लिए उपलब्ध इस व्यवस्था के आवंटन को लेकर शनिवार को आयोजित कुर्रा यानी लॉटरी के दौरान विवाद हो गया। औकाफ-ए-शाही भोपाल की ओर से आयोजित प्रक्रिया में भोपाल सीहोर और रायसेन के कुल 1288 आवेदकों में से 200 हाजियों का चयन किया गया। इसके अलावा 25 आवेदकों को प्रतीक्षा सूची में रखा गया। लेकिन चयन के लिए निर्धारित 200 सीटों में से 10 सीटें वीआईपी कोटे के लिए आरक्षित रखने के मुद्दे पर हंगामा खड़ा हो गया। आम हाजियों और उनके परिजनों ने इस व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए सभी आवेदकों को समान अवसर देने की मांग की।
    कुर्रा शनिवार सुबह करीब 10:30 बजे कोहेफिजा स्थित सूफिया मस्जिद में आयोजित किया गया। प्रक्रिया शुरू होते ही वीआईपी कोटे को लेकर आपत्ति सामने आने लगी। विरोध कर रहे लोगों का कहना था कि रुबातें आम हाजियों को ठहरने की सुविधा उपलब्ध कराने के लिए बनाई गई थीं। इनका मकसद यात्रियों को मक्का में महंगे होटलों के खर्च से राहत देना था। ऐसे में जब सीमित सीटों के लिए बड़ी संख्या में लोग आवेदन कर रहे हैं तो कुछ सीटें विशेष श्रेणी के लिए आरक्षित रखने का आधार स्पष्ट होना चाहिए। लोगों ने चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता और सभी आवेदकों के लिए समान अवसर सुनिश्चित करने की मांग उठाई।
    रुबात की व्यवस्था भोपाल रियासत के नवाबों और बेगमों की उस पहल से जुड़ी है जिसके तहत भोपाल सीहोर और रायसेन के हाजियों को पवित्र शहरों में ठहरने की सुविधा देने का प्रयास किया गया था। हज यात्रा के दौरान आवास पर होने वाला खर्च यात्रियों के कुल बजट का बड़ा हिस्सा हो सकता है। ऐसे में रुबात में ठहरने की सुविधा मिलने से हाजियों को आर्थिक राहत मिलती है। इसी वजह से हर साल बड़ी संख्या में आवेदक इस सुविधा के लिए उम्मीद लगाए रहते हैं। इस बार भी 1288 लोगों के आवेदन आने से सीमित सीटों के मुकाबले मांग का अंतर साफ दिखाई दिया।
    कुर्रा के आयोजन स्थल को लेकर भी चर्चा हुई। आमतौर पर यह प्रक्रिया मोती मस्जिद में आयोजित की जाती रही है लेकिन इस बार कार्यक्रम को कोहेफिजा स्थित सूफिया मस्जिद में रखा गया। औकाफ-ए-शाही की ओर से स्थान बदलने की वजह पार्किंग की समस्या बताई गई। हालांकि आयोजन स्थल में बदलाव के साथ ही वीआईपी कोटे को लेकर उठे सवालों ने कार्यक्रम के दौरान असंतोष को और बढ़ा दिया।
    रुबात की सुविधा पिछले कुछ वर्षों से विवादों और कानूनी पेचीदगियों के कारण प्रभावित रही है। इसके चलते हाजियों को ठहरने के लिए अपने स्तर पर होटल की व्यवस्था करनी पड़ती है और यात्रा पर अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ता है। रुबातों के संचालन और आवंटन को लेकर स्थानीय मुस्लिम समाज तथा औकाफ-ए-शाही की भूमिका पर भी समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं। ऐसे में इस बार का विवाद केवल सीटों के बंटवारे तक सीमित नहीं है बल्कि यह भी सवाल सामने ला रहा है कि इस सुविधा का लाभ जरूरतमंद हाजियों तक किस तरह पहुंचाया जाए।
    कार्यक्रम में शहर काजी सैयद मुश्ताक अली नदवी शहर मुफ्ती अबुल कलाम उत्तर भोपाल विधायक आतिफ अकील और औकाफ-ए-शाही की एग्जीक्यूटिव कम एडवाइजरी कमेटी के सदस्य आजम अली खान मौजूद रहे। कार्यक्रम की शुरुआत कुरान की तिलावत से हुई और समापन शहर काजी की दुआ के साथ किया गया। चयन प्रक्रिया के लिए स्टेट हज कमेटी से प्राप्त सूची का इस्तेमाल किया गया।
    अब विवाद के केंद्र में यह सवाल है कि जब 1288 आवेदकों के मुकाबले केवल 200 हाजियों को सुविधा मिलनी है तो वीआईपी कोटे के लिए सीटें आरक्षित करने का आधार क्या है। आवंटन प्रक्रिया को लेकर उठी आपत्तियों के बीच पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करना अहम हो गया है। आम हाजियों की मांग है कि रुबात जैसी जनहित की सुविधा में चयन के नियम स्पष्ट हों और आवंटन को लेकर किसी तरह का संदेह न रहे।

  • कोलकाता दुर्गा पूजा पंडाल भगदड़ में 19 मौतें, सात गिरफ्तार, धारा 163 लागू और आयोजनों पर बढ़ी सख्ती

    कोलकाता दुर्गा पूजा पंडाल भगदड़ में 19 मौतें, सात गिरफ्तार, धारा 163 लागू और आयोजनों पर बढ़ी सख्ती


    नई दिल्ली ।पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में दुर्गा पूजा पंडाल में हुई भगदड़ के बाद प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है। उत्तर कोलकाता के मुक्तारामबाबू स्ट्रीट स्थित चोरबागान सार्वजनीन दुर्गा पूजा पंडाल में शनिवार रात हुए हादसे में 19 लोगों की मौत हो गई, जबकि 25 लोग घायल हुए हैं। घटना के बाद पुलिस ने पंडाल समिति से जुड़े सात लोगों को गिरफ्तार किया है। इसके अलावा भीड़भाड़ वाले कई पूजा आयोजनों को अस्थायी रूप से पंडाल बंद रखने की सलाह दी गई है।

    हादसे के समय बारिश हो रही थी। इसी दौरान पंडाल में अचानक भीड़ का दबाव बढ़ने से भगदड़ मच गई। मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के अनुसार, मृतकों में 13 महिलाएं और एक बच्चा शामिल हैं। उन्होंने बताया कि 19 में से 17 लोगों की मौत घटनास्थल पर ही हो गई थी। घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनका उपचार जारी है। घायलों में 24 लोगों की हालत खतरे से बाहर बताई गई, जबकि एक व्यक्ति की स्थिति गंभीर बनी हुई है।

    घटना की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने पंडाल समिति से जुड़े 12 लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ की। इसके बाद सात लोगों को गिरफ्तार किया गया। राज्य सरकार ने मामले की जांच के लिए विशेष जांच दल गठित करने की बात कही है। प्रशासन हादसे के बाद सुरक्षा इंतजामों की समीक्षा कर रहा है और शहर के विभिन्न पूजा पंडालों में भीड़ प्रबंधन पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

    कोलकाता में दुर्गा पूजा के अवसर पर करीब 3,500 पंडाल लगाए गए हैं। वहीं, पूरे पश्चिम बंगाल में लगभग 58,000 पूजा आयोजनों की बात कही गई है। ऐसे में प्रशासन के सामने श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने की बड़ी चुनौती है। पुलिस कई पंडालों का निरीक्षण कर रही है और भीड़भाड़ वाले आयोजनों को आवश्यक सावधानियां बरतने के निर्देश दिए जा रहे हैं।

    हादसे के बाद कोलकाता के कुछ इलाकों में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 163 लागू की गई है। यह प्रतिबंध 18 अक्टूबर से 20 अक्टूबर तक तीन दिनों के लिए प्रभावी रहेगा। आदेश के तहत कोलकाता मेडिकल कॉलेज और आसपास के क्षेत्रों सहित निर्धारित इलाकों में रैली, सभा, जुलूस, धरना और प्रदर्शन पर रोक लगाई गई है। प्रशासन ने यह कदम सार्वजनिक व्यवस्था बिगड़ने, शांति भंग होने और सुरक्षा संबंधी जोखिमों की आशंका को देखते हुए उठाया है।

    केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह रविवार सुबह घायलों से मिलने उस अस्पताल पहुंचे, जहां भगदड़ में घायल लोगों का इलाज किया जा रहा है। उनके साथ मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी भी मौजूद थे। इससे पहले शाह ने कालीघाट मंदिर में पूजा-अर्चना की थी। हादसे के बाद उन्होंने दुर्गा पूजा पंडालों में जाने का अपना निर्धारित कार्यक्रम रद्द कर दिया।

    मुख्यमंत्री ने मृतकों के परिवारों और घायलों के लिए आर्थिक सहायता की घोषणा भी की। उन्होंने बताया कि मृतकों के 19 परिवारों को प्रत्येक को 25 लाख रुपये मुआवजा और परिवार के एक सदस्य को नौकरी दी जाएगी। घायलों के इलाज का पूरा खर्च सरकार उठाएगी। इसके अलावा प्रत्येक घायल को पांच लाख रुपये का अतिरिक्त मुआवजा देने की घोषणा की गई है। मुख्यमंत्री ने बताया कि वह 13 पीड़ित परिवारों से व्यक्तिगत रूप से मिल चुके हैं और उन्हें सरकार की ओर से हरसंभव सहायता का भरोसा दिया है।

    मुख्यमंत्री ने राज्य के सभी दुर्गा पूजा आयोजकों से सुरक्षा संबंधी निर्देशों का पालन करने की अपील की है। उन्होंने पर्याप्त रोशनी, प्रवेश और निकास के उचित रास्ते, भीड़ नियंत्रण तथा पुलिस और अग्निशमन विभाग के निर्देशों का पालन सुनिश्चित करने पर जोर दिया। हादसे के बाद प्रशासन का मुख्य ध्यान पूजा स्थलों पर सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने और ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने पर है।

  • जनादेश के आगे साबुन के बुलबुले की तरह फूटे सत्ता परिवर्तन के सपने, शिवराज ने विपक्ष को घेरा, कल खोलेंगे राज

    जनादेश के आगे साबुन के बुलबुले की तरह फूटे सत्ता परिवर्तन के सपने, शिवराज ने विपक्ष को घेरा, कल खोलेंगे राज


    भोपाल । केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सत्ता परिवर्तन यानी रिजीम चेंज की बहस के बीच कांग्रेस और विपक्षी दलों पर तीखा राजनीतिक हमला बोला है। सोशल मीडिया पर साझा की गई अपनी पोस्ट में उन्होंने रिजीम चेंज गैंग का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि कुछ लोग सत्ता परिवर्तन के सपने देख रहे हैं और इसके लिए तरह-तरह के नैरेटिव गढ़ रहे हैं। शिवराज ने कहा कि जनता के जनादेश के सामने ऐसे सपने साबुन के बुलबुले की तरह फूट जाते हैं। उन्होंने विपक्ष पर तंज कसते हुए सवाल किया कि आखिर भारत में उनकी दाल क्यों नहीं गल रही। साथ ही उन्होंने ऐलान किया कि अगर विपक्ष को अपनी स्थिति समझ नहीं आती तो वे अगले दिन इसका जवाब देंगे।
    शिवराज सिंह चौहान की यह टिप्पणी ऐसे समय सामने आई है जब देश की राजनीति में रिजीम चेंज को लेकर बयानबाजी तेज है। कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा चुनाव के जरिए सरकार बदलने की बात कह चुके हैं। वहीं वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण ने भी सत्ता परिवर्तन की लड़ाई का उल्लेख किया था। इन बयानों के बाद राजनीतिक गलियारों में इस मुद्दे पर बहस जारी है। शिवराज ने अपनी पोस्ट में किसी नेता का नाम सीधे तौर पर नहीं लिया लेकिन रिजीम चेंज गैंग कहकर विपक्षी खेमे पर निशाना साधा।
    केंद्रीय मंत्री ने अपने तंज में चुनावी नतीजों और छात्र संगठनों की जीत का भी उल्लेख किया। उन्होंने पंजाब यूनिवर्सिटी और दिल्ली यूनिवर्सिटी में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद यानी एबीवीपी की जीत का जिक्र किया। इसके साथ ही ओडिशा के 13 विश्वविद्यालयों में एबीवीपी को मिली सफलता को भी अपने तर्क का हिस्सा बनाया। शिवराज का कहना था कि इन नतीजों को जनता के रुख के संकेत के रूप में देखा जाना चाहिए। उन्होंने गुजरात के निकाय चुनावों और असम पश्चिम बंगाल तथा पुडुचेरी के उपचुनावों का भी उल्लेख किया।
    शिवराज सिंह चौहान ने अपनी पोस्ट में कहा कि गांव हो या शहर युवा हों या आम नागरिक जनता का मूड कुछ और है जबकि रिजीम चेंज गैंग की स्क्रिप्ट कुछ और चल रही है। उनके बयान का संकेत इस ओर था कि राजनीतिक विरोधियों की रणनीति और जनता के वास्तविक रुझान के बीच अंतर है। उन्होंने सवाल उठाया कि लगातार चुनावी हार के बाद भी विपक्ष अपनी रणनीति पर आत्ममंथन क्यों नहीं कर रहा है।
    केंद्रीय मंत्री ने विपक्ष को सलाह देते हुए कहा कि उसे अपनी स्थिति का आकलन करना चाहिए और यह समझने की कोशिश करनी चाहिए कि जनता उसके संदेश को किस तरह स्वीकार कर रही है। उनके मुताबिक केवल सत्ता परिवर्तन की बात करने या राजनीतिक नैरेटिव तैयार करने से जनसमर्थन हासिल नहीं किया जा सकता। लोकतंत्र में जनता का फैसला सबसे अहम होता है और चुनावी नतीजे उसी का संकेत देते हैं।
    अपनी पोस्ट के अंत में शिवराज ने विपक्ष पर कटाक्ष करते हुए कहा कि यदि रिजीम चेंज गैंग आत्ममंथन के बाद भी बात नहीं समझ पाता तो वे अगले दिन बताएंगे कि उसकी दाल क्यों नहीं गल रही। उनके इस बयान ने राजनीतिक चर्चा को और तेज कर दिया है। अब सबकी नजर इस बात पर रहेगी कि शिवराज सिंह चौहान अगले दिन अपने वादे के मुताबिक क्या नया तर्क रखते हैं और विपक्ष की ओर से इस टिप्पणी पर कैसी प्रतिक्रिया आती है। फिलहाल उनका बयान सत्ता परिवर्तन की बहस के बीच भाजपा और विपक्ष के बीच जारी राजनीतिक जुबानी जंग का नया हिस्सा बन गया है।

  • MP में 27% OBC आरक्षण लागू करने की मांग फिर तेज, राहुल गांधी बोले- छात्रों की आवाज दबाई जा रही, संस्थाओं पर कब्जे का आरोप

    MP में 27% OBC आरक्षण लागू करने की मांग फिर तेज, राहुल गांधी बोले- छात्रों की आवाज दबाई जा रही, संस्थाओं पर कब्जे का आरोप


    भोपाल । लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने एक ऑडियो संदेश जारी कर बीते एक महीने के अपने कार्यक्रमों और लोगों से मुलाकातों का ब्योरा साझा किया है। इस संदेश में उन्होंने मध्य प्रदेश में अन्य पिछड़ा वर्ग यानी ओबीसी आरक्षण को पूरी तरह लागू करने की मांग के साथ आदिवासी परिवारों की परेशानियों और छात्रों से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाया। राहुल गांधी ने इंदौर में आयोजित छात्रों की गूंज कार्यक्रम का उल्लेख करते हुए शिक्षा व्यवस्था और छात्रावासों की स्थिति पर सवाल उठाए। उन्होंने केंद्र और राज्य की राजनीति से जुड़े कई मुद्दों पर अपनी बात रखते हुए आरोप लगाया कि देश की संस्थाओं पर कब्जा करने की कोशिश की जा रही है।
    राहुल गांधी ने छात्रों के बीच अपनी बातचीत का जिक्र करते हुए कहा कि मौजूदा व्यवस्था में छात्रों की समस्याओं को पर्याप्त महत्व नहीं दिया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व में एक समूह देश की संस्थाओं पर अपना प्रभाव बढ़ा रहा है। इसी संदर्भ में उन्होंने कहा कि सिस्टम को अंधभक्त चाहिए छात्र नहीं। राहुल ने इंदौर में छात्रों के साथ शिक्षा बजट में कटौती और छात्रावासों की कमी जैसे मुद्दों पर चर्चा होने की बात भी कही।
    उनके मुताबिक छात्रों ने परीक्षा में कथित अनियमितताओं और बुनियादी सुविधाओं की कमी को लेकर अपनी चिंताएं साझा कीं। उन्होंने सत्य निकेतन की त्रासदी का भी उल्लेख किया और कहा कि शिक्षा से जुड़े सवालों को गंभीरता से समझने की जरूरत है। राहुल गांधी ने महाराष्ट्र के नासिक में भूख हड़ताल कर रहे आदिवासी छात्रों से मुलाकात का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि छात्रावासों के नियमों और परिस्थितियों को लेकर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को पत्र लिखा गया था। राहुल के अनुसार इसके बाद हॉस्टल में रहने की आयु सीमा वापस ले ली गई। उन्होंने महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग की परीक्षा में कथित अनियमितताओं और पेपर लीक के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे छात्रों को समर्थन देने की बात भी कही।
    मध्य प्रदेश के संदर्भ में राहुल गांधी ने इंदौर के कार्यक्रम के बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को पत्र लिखकर 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण पूरी तरह लागू करने की मांग किए जाने की जानकारी दी। यह मुद्दा प्रदेश में लंबे समय से राजनीतिक और कानूनी चर्चा का विषय बना हुआ है। राहुल गांधी ने कहा कि पिछड़े वर्गों को उनका अधिकार मिलना चाहिए। हालांकि आरक्षण के क्रियान्वयन की वास्तविक स्थिति संबंधित कानूनी प्रक्रियाओं और सरकारी फैसलों पर निर्भर करती है।
    राहुल गांधी ने बालाघाट में उन आदिवासी परिवारों से मुलाकात का भी उल्लेख किया जिन्होंने कुपोषण और बीमारी के कारण अपने बच्चों को खोया था। उन्होंने इस मुलाकात को बेहद भावुक बताते हुए कहा कि कुछ दुख ऐसे होते हैं जिनके सामने शब्द भी कम पड़ जाते हैं। उनके अनुसार उस दौरान उनका उद्देश्य परिवारों का दर्द सुनना और उनकी परिस्थितियों को समझना था। इस मुद्दे के जरिए उन्होंने आदिवासी क्षेत्रों में स्वास्थ्य और पोषण से जुड़ी चुनौतियों की ओर ध्यान दिलाया।
    अपने ऑडियो संदेश में राहुल गांधी ने दिल्ली की बेला एस्टेट झुग्गी बस्ती का दौरा करने का भी जिक्र किया। उन्होंने दावा किया कि विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर के बाद वहां 729 में से 728 लोगों ने मतदान का अधिकार खो दिया। यह राहुल गांधी का दावा है। उन्होंने निष्पक्ष परीक्षाओं की मांग कर रहे प्रदर्शनकारियों की बातों का उल्लेख करते हुए पुलिस कार्रवाई और गोलीबारी से जुड़े आरोप भी सामने रखे।
    राहुल गांधी ने वोट चोरी के आरोपों को संस्थाओं और संविधान से जोड़ते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग दोहराई। इसके अलावा उन्होंने 30 सितंबर को नई दिल्ली के कॉन्स्टीट्यूशन क्लब में इंडिया गठबंधन के नेताओं के साथ हुई बैठक का जिक्र किया। उनके अनुसार बैठक में मतदान के अधिकार की रक्षा के तरीकों पर चर्चा हुई। राहुल ने रायबरेली में विकास कार्यों की समीक्षा के लिए हुई दिशा बैठक और मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम से मुलाकात का भी उल्लेख किया। महात्मा गांधी की जयंती पर राजघाट जाकर श्रद्धांजलि देने की बात के साथ उन्होंने संदेश समाप्त किया। उनके इस बयान के बाद मध्य प्रदेश में ओबीसी आरक्षण और छात्रों की समस्याओं को लेकर राजनीतिक बहस तेज होने की संभावना है।

  • मध्य प्रदेश में शिक्षक पात्रता परीक्षा को लेकर हलचल तेज, 32 हजार से अधिक पदोन्नतियां अटकीं, परीक्षा केंद्रों के निर्धारण की तैयारी

    मध्य प्रदेश में शिक्षक पात्रता परीक्षा को लेकर हलचल तेज, 32 हजार से अधिक पदोन्नतियां अटकीं, परीक्षा केंद्रों के निर्धारण की तैयारी


    भोपाल । मध्य प्रदेश में शिक्षक पात्रता परीक्षा यानी टीईटी को लेकर तैयारियां अब अगले चरण में पहुंच गई हैं। आवेदन प्रक्रिया पूरी होने के बाद अब माध्यमिक शिक्षा मंडल आवेदकों की जिला और संभागवार सूची तैयार करने की दिशा में काम करेगा। इस सूची के आधार पर यह तय किया जाएगा कि प्रदेश के अलग-अलग क्षेत्रों में कितने परीक्षा केंद्रों की जरूरत होगी और उन्हें कहां बनाया जाना उचित रहेगा। परीक्षा की व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने के लिए शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में पदस्थ शिक्षकों का ब्योरा भी अलग-अलग तैयार किया जाएगा।
    टीईटी के लिए कुल 34 हजार 200 शिक्षकों ने आवेदन किया है। जबकि प्रदेश में करीब डेढ़ लाख शिक्षकों के आवेदन करने की संभावना जताई जा रही थी। आवेदन की अंतिम तारीख दो बार बढ़ाए जाने के बावजूद आवेदकों की संख्या में अपेक्षा के मुताबिक बढ़ोतरी नहीं हुई। अब परीक्षा से जुड़ी तैयारियां इसी वास्तविक संख्या को ध्यान में रखकर की जाएंगी। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक आवेदन करने वालों में लगभग 20 हजार सरकारी स्कूलों के शिक्षक हैं जबकि करीब 14 हजार शिक्षक निजी स्कूलों से जुड़े हैं।
    स्कूल शिक्षा विभाग ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद सितंबर में शिक्षक पात्रता परीक्षा के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू की थी। आवेदन जमा करने की अंतिम तारीख 11 अक्टूबर निर्धारित की गई थी। प्रक्रिया पूरी होने के बाद अब माध्यमिक शिक्षा मंडल को कर्मचारी चयन मंडल से सभी आवेदकों की विस्तृत सूची मिलने का इंतजार है। सूची उपलब्ध होने के बाद शिक्षकों की पदस्थापना और उनके कार्यक्षेत्र के आधार पर आंकड़े तैयार किए जाएंगे।
    जिला और संभागवार सूची तैयार होने से परीक्षा केंद्रों की योजना बनाने में मदद मिलेगी। अधिकारियों को यह जानकारी मिल सकेगी कि किस जिले में कितने शिक्षकों ने आवेदन किया है और उनमें से कितने शहरी तथा कितने ग्रामीण क्षेत्रों में पदस्थ हैं। इसके आधार पर केंद्रों की संख्या और उनकी जगह तय करने पर विचार किया जाएगा। कोशिश रहेगी कि परीक्षा की व्यवस्था आवेदकों की संख्या और क्षेत्रीय जरूरतों के अनुरूप बनाई जा सके।
    परीक्षा की तारीख और केंद्रों के निर्धारण को लेकर दशहरे के बाद अधिकारियों की बैठक प्रस्तावित है। इसमें माध्यमिक शिक्षा मंडल के सचिव बुद्धेश वैद्य और लोक शिक्षण आयुक्त अभिषेक सिंह सहित संबंधित अधिकारी शामिल हो सकते हैं। बैठक में आवेदकों की संख्या के साथ परीक्षा कराने के लिए जरूरी संसाधनों और व्यवस्थाओं पर चर्चा होगी। इसके बाद परीक्षा की तारीख तय करने और आधिकारिक कार्यक्रम जारी करने की दिशा में आगे की कार्रवाई की जा सकती है।
    इस परीक्षा का महत्व इसलिए भी बढ़ गया है क्योंकि प्रदेश में स्कूल शिक्षा विभाग के 32 हजार से अधिक पदों पर पदोन्नति की प्रक्रिया इसके इंतजार में है। परीक्षा उत्तीर्ण करने वाले सरकारी शिक्षकों को रिक्त पदों की उपलब्धता और लागू नियमों के अनुसार पदोन्नति का अवसर मिल सकता है। विभागीय स्तर पर जनवरी में परिणाम आने की स्थिति में पदोन्नति प्रक्रिया आगे बढ़ने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि वास्तविक समयसीमा परीक्षा के आयोजन परिणाम और उपलब्ध रिक्त पदों पर निर्भर करेगी।
    दूसरी ओर शिक्षक संगठनों का विरोध भी जारी है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से मुलाकात के बाद अध्यापक शिक्षक संयुक्त मोर्चा ने 22 दिसंबर तक अपना आंदोलन स्थगित किया है लेकिन संगठन अब भी टीईटी नहीं कराने की मांग पर कायम है। संगठन चाहता है कि विधानसभा में संकल्प पारित कर तमिलनाडु सरकार की तर्ज पर केंद्र सरकार को कानून में बदलाव का प्रस्ताव भेजा जाए। फिलहाल राज्य सरकार की ओर से इस मांग को मंजूरी नहीं मिली है। ऐसे में एक तरफ परीक्षा केंद्रों और तारीख को लेकर तैयारियां आगे बढ़ रही हैं तो दूसरी तरफ शिक्षक संगठनों की मांग के कारण यह मुद्दा लगातार चर्चा में बना हुआ है।

  • BJP की बैठक में मास्टर प्लान और परिसीमन पर मंथन, ध्रुवनारायण बोले पूरा ड्राफ्ट रद्द हो, आलोक शर्मा ने विधानसभा सीटों को लेकर उठाए सवाल

    BJP की बैठक में मास्टर प्लान और परिसीमन पर मंथन, ध्रुवनारायण बोले पूरा ड्राफ्ट रद्द हो, आलोक शर्मा ने विधानसभा सीटों को लेकर उठाए सवाल


    भोपाल । भोपाल में मास्टर प्लान के प्रस्तावित ड्राफ्ट को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। भारतीय जनता पार्टी की कोर ग्रुप बैठक में पार्टी के नेताओं ने ही इस ड्राफ्ट पर आपत्ति जताई और इसे लेकर जनता तथा व्यापारियों में नाराजगी होने की बात कही। शनिवार को प्रदेश भाजपा कार्यालय में आयोजित भोपाल जिले की बैठक में मध्य विधानसभा के पूर्व विधायक ध्रुवनारायण सिंह ने मास्टर प्लान के ड्राफ्ट को पूरी तरह रद्द करने की मांग रखी। वहीं सांसद आलोक शर्मा ने विधानसभा सीटों के आगामी परिसीमन को लेकर पिछले परिसीमन की खामियों का मुद्दा उठाया। बैठक में दोनों विषयों पर नेताओं ने अपनी राय रखी।
    ध्रुवनारायण सिंह ने कहा कि भोपाल के मास्टर प्लान के ड्राफ्ट से शहर के लोगों और व्यापारियों में नाराजगी है। उनके मुताबिक प्रस्तावित योजना को लेकर लोगों की चिंताओं को गंभीरता से समझने की जरूरत है। उन्होंने मांग की कि मौजूदा ड्राफ्ट को रद्द किया जाए। मास्टर प्लान शहर के विकास और भविष्य की जरूरतों से जुड़ा अहम दस्तावेज होता है। ऐसे में इसके प्रावधानों को लेकर जनप्रतिनिधियों और प्रभावित लोगों की आपत्तियां चर्चा का विषय बन गई हैं। बैठक में उठी मांग से संकेत मिला कि इस मुद्दे पर भाजपा के भीतर भी विचार-विमर्श की जरूरत महसूस की जा रही है।
    बैठक में आगामी विधानसभा परिसीमन पर भी चर्चा हुई। सांसद आलोक शर्मा ने पिछले परिसीमन की प्रक्रिया में खामियां होने की बात कही। उन्होंने कहा कि उस प्रक्रिया के चलते भोपाल की दो विधानसभा सीटें कांग्रेस के खाते में चली गई थीं। उनका कहना था कि इस बार परिसीमन के दौरान विशेष सावधानी बरतनी होगी। निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाओं में बदलाव का असर प्रतिनिधित्व और चुनावी समीकरणों पर पड़ सकता है। इसलिए इस प्रक्रिया को लेकर पार्टी नेताओं ने अपनी राय रखी और भविष्य की तैयारियों पर चर्चा की।
    परिसीमन के संबंध में पूर्व विधायक ध्रुवनारायण सिंह ने सुझाव दिया कि मुस्लिम बहुल इलाकों को एक विधानसभा क्षेत्र में शामिल किया जाना चाहिए। उन्होंने अनुसूचित जाति की बहुलता वाले क्षेत्रों को भी इसमें जोड़ने का सुझाव दिया ताकि संबंधित सीट को अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित किए जाने की संभावना बन सके। हालांकि परिसीमन और आरक्षण का निर्धारण संबंधित कानूनी प्रावधानों तथा निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार होता है। किसी सीट की सीमाओं या आरक्षण में बदलाव केवल राजनीतिक सुझाव के आधार पर तय नहीं किया जा सकता। इस मुद्दे पर आगे क्या निर्णय होगा यह संबंधित प्रक्रिया और नियमों पर निर्भर करेगा।
    बैठक की अध्यक्षता प्रदेश संगठन महामंत्री चंद्रशेखर ने की। उन्होंने भोपाल और रायसेन जिले के कोर ग्रुप तथा जिला स्तर के नेताओं से संगठन की गतिविधियों पर चर्चा की। चंद्रशेखर ने संगठन को मजबूत बनाने के लिए नियमित जनसंपर्क और कार्यकर्ताओं के बीच बेहतर समन्वय पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि पार्टी की मजबूती उसके समर्पित कार्यकर्ताओं और जनता के बीच निरंतर उपस्थिति से जुड़ी है। संगठनात्मक गतिविधियां केवल औपचारिकता तक सीमित नहीं रहनी चाहिए बल्कि लोगों की समस्याओं को समझने और उनके समाधान के लिए काम करना जरूरी है।
    चंद्रशेखर ने बूथ स्तर पर सक्रियता बढ़ाने और समाज के विभिन्न वर्गों से संवाद कायम रखने की जरूरत भी बताई। उन्होंने जिला अध्यक्षों से संगठनात्मक कार्यक्रमों की प्रगति की जानकारी ली और नियमित बैठकों तथा जनसंपर्क अभियानों की समीक्षा पर जोर दिया। बैठक में जहां संगठन को मजबूत करने की रणनीति पर चर्चा हुई वहीं मास्टर प्लान और परिसीमन जैसे मुद्दों ने राजनीतिक विमर्श को भी केंद्र में रखा। अब देखना होगा कि भोपाल के मास्टर प्लान पर उठी आपत्तियों और परिसीमन से जुड़े सुझावों पर आगे क्या कदम उठाए जाते हैं।