Blog

  • ब्यूटी रूटीन में शामिल करें चावल का आटा, त्वचा की देखभाल में कैसे करें इस्तेमाल और किन गलतियों से बचें

    ब्यूटी रूटीन में शामिल करें चावल का आटा, त्वचा की देखभाल में कैसे करें इस्तेमाल और किन गलतियों से बचें


    नई दिल्ली ।आजकल स्किन केयर के लिए लोग महंगे प्रोडक्ट्स के साथ घरेलू नुस्खों की तरफ भी तेजी से रुख कर रहे हैं। इन्हीं घरेलू उपायों में चावल का आटा यानी Rice Flour भी काफी लोकप्रिय है। इसे कई लोग चेहरे पर फेस पैक या हल्के क्लेंजर की तरह इस्तेमाल करते हैं। चावल का आटा त्वचा को मुलायम महसूस कराने और चेहरे से अतिरिक्त गंदगी हटाने में मदद कर सकता है। हालांकि इसे किसी चमत्कारी उपचार की तरह नहीं देखना चाहिए। त्वचा विशेषज्ञों के अनुसार किसी भी घरेलू फेस मास्क का इस्तेमाल व्यक्ति की त्वचा के प्रकार और संवेदनशीलता को ध्यान में रखकर करना चाहिए। गलत तरीके से या बहुत ज्यादा इस्तेमाल करने पर जलन और रूखापन भी हो सकता है।

    चावल के आटे से फेस पैक बनाने का तरीका बेहद आसान है। इसके लिए एक से दो चम्मच बारीक चावल का आटा लें और इसमें जरूरत के अनुसार सादा पानी या एलोवेरा जेल मिलाकर हल्का पेस्ट तैयार कर सकते हैं। अगर त्वचा रूखी है तो इसमें एक साधारण मॉइस्चराइजिंग बेस मिलाने का विकल्प रखा जा सकता है। पेस्ट को चेहरे पर बहुत हल्के हाथों से लगाएं और आंखों तथा होंठों के आसपास के हिस्से से बचाएं। इसे कुछ मिनट तक लगा रहने दें और फिर सामान्य पानी से धीरे से धो लें। चेहरे को साफ करने के बाद त्वचा पर उपयुक्त मॉइस्चराइजर लगाना जरूरी है।

    चावल के आटे का इस्तेमाल करते समय सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इसे चेहरे पर जोर से रगड़ना नहीं चाहिए। कई लोग इसे स्क्रब की तरह इस्तेमाल करते हुए त्वचा को तेजी से घिसते हैं लेकिन इससे त्वचा की ऊपरी परत में जलन हो सकती है। अमेरिकन एकेडमी ऑफ डर्मेटोलॉजी भी चेहरे पर इस्तेमाल होने वाले मास्क और एक्सफोलिएटिंग प्रोडक्ट्स को बहुत ज्यादा या बार बार इस्तेमाल करने से सावधान करती है क्योंकि इससे त्वचा में रूखापन और जलन बढ़ सकती है।

    अगर आपकी त्वचा संवेदनशील है या पहले से लालिमा खुजली जलन या किसी तरह की एलर्जी की समस्या रहती है तो घरेलू फेस पैक को सीधे पूरे चेहरे पर लगाने से पहले छोटे हिस्से पर परीक्षण करना बेहतर है। किसी नए स्किन केयर प्रोडक्ट या मास्क को पहले छोटे क्षेत्र पर टेस्ट करने की सलाह त्वचा विशेषज्ञ भी देते हैं। अगर लगाने के बाद खुजली जलन या चुभन महसूस हो तो इसे तुरंत धो देना चाहिए।

    मुंहासे वाली त्वचा पर भी चावल के आटे को इलाज समझकर इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। फेस मास्क सामान्य स्किन केयर रूटीन का हिस्सा हो सकता है लेकिन यह मुंहासे एक्जिमा या दूसरी त्वचा संबंधी बीमारी का उपचार नहीं है। ऐसी समस्या लगातार बनी रहती है तो त्वचा विशेषज्ञ से सलाह लेना बेहतर होता है। सही स्किन केयर में चेहरे की नियमित सफाई मॉइस्चराइजिंग और धूप से बचाव भी महत्वपूर्ण है।

    चावल के आटे से बने फेस पैक का इस्तेमाल करते समय खुशबू वाले या ऐसे अतिरिक्त पदार्थ मिलाने से बचना चाहिए जो आपकी त्वचा को पहले से परेशान करते हों। खासकर संवेदनशील त्वचा में कम सामग्री वाला सरल फेस पैक बेहतर विकल्प हो सकता है। किसी भी घरेलू नुस्खे का इस्तेमाल रोजाना करने की जरूरत नहीं है। त्वचा की प्रतिक्रिया देखकर सीमित इस्तेमाल करना अधिक समझदारी है।

    इस तरह Rice Flour Skin Care को एक आसान घरेलू विकल्प के तौर पर देखा जा सकता है लेकिन इससे तुरंत गोरी या बेदाग त्वचा मिलने का दावा सही नहीं माना जाना चाहिए। चेहरे की अच्छी सेहत के लिए नियमित देखभाल संतुलित दिनचर्या पर्याप्त नींद पानी और रोजाना सन प्रोटेक्शन ज्यादा महत्वपूर्ण हैं। अगर चावल के आटे का फेस पैक आपकी त्वचा को सूट करता है तो इसे अपनी सामान्य स्किन केयर रूटीन के साथ सीमित रूप में शामिल किया जा सकता है।

  • बार-बार थकान बाल झड़ना और घाव देर से भरना नहीं है सामान्य, शरीर में इन पोषक तत्वों की कमी का हो सकता है संकेत

    बार-बार थकान बाल झड़ना और घाव देर से भरना नहीं है सामान्य, शरीर में इन पोषक तत्वों की कमी का हो सकता है संकेत

    नई दिल्ली । शरीर को स्वस्थ रखने के लिए विटामिन और मिनरल्स की जरूरत होती है। इन पोषक तत्वों की मात्रा भले ही कम चाहिए होती है लेकिन शरीर के कई जरूरी काम इन्हीं पर निर्भर करते हैं। खून बनाने से लेकर नसों की कार्यप्रणाली प्रतिरोधक क्षमता त्वचा बालों और ऊर्जा के स्तर को बनाए रखने में इनका महत्वपूर्ण योगदान होता है। यही वजह है कि जब शरीर में आयरन जिंक या विटामिन B12 जैसे पोषक तत्वों की कमी होने लगती है तो कुछ बदलाव दिखाई दे सकते हैं। कई बार लोग इन संकेतों को सामान्य कमजोरी तनाव या नींद की कमी मानकर नजरअंदाज कर देते हैं।

    लगातार थकान और कमजोरी पोषण की कमी से जुड़ा एक आम संकेत हो सकता है। अगर पर्याप्त नींद लेने और सामान्य दिनचर्या के बावजूद शरीर में हर समय ऊर्जा की कमी महसूस हो रही है तो इसकी वजह जानना जरूरी है। आयरन की कमी से एनीमिया हो सकता है जिसमें थकान कमजोरी और एकाग्रता में परेशानी जैसी समस्याएं हो सकती हैं। विटामिन B12 की कमी में भी कमजोरी और थकान महसूस हो सकती है। हालांकि केवल थकान के आधार पर यह तय नहीं किया जा सकता कि शरीर में किस पोषक तत्व की कमी है क्योंकि इसके कई अन्य कारण भी हो सकते हैं।

    आयरन की कमी बढ़ने पर कुछ लोगों में त्वचा का रंग सामान्य से फीका दिखाई दे सकता है। चक्कर आना या थोड़ा काम करने पर सांस फूलना भी एनीमिया से जुड़ा हो सकता है। ऐसी स्थिति में बिना सलाह के आयरन की दवा शुरू करने के बजाय डॉक्टर से जांच कराना बेहतर होता है। जरूरत पड़ने पर रक्त जांच के माध्यम से हीमोग्लोबिन और आयरन की स्थिति का पता लगाया जा सकता है।

    बालों का लगातार झड़ना भी कई कारणों से हो सकता है। तनाव हार्मोन में बदलाव भोजन की कमी और कुछ स्वास्थ्य समस्याएं बालों के झड़ने की वजह बन सकती हैं। आयरन की कमी या एनीमिया भी कुछ मामलों में बालों की सेहत को प्रभावित कर सकता है। इसलिए केवल बाल झड़ने को देखकर किसी एक विटामिन या मिनरल की कमी मान लेना सही नहीं है।

    जिंक शरीर के लिए जरूरी मिनरल्स में शामिल है। यह प्रतिरोधक क्षमता और घाव भरने जैसी प्रक्रियाओं में भूमिका निभाता है। जिंक की कमी होने पर घाव सामान्य से देर से भरने की समस्या दिखाई दे सकती है। बार बार संक्रमण होना या बालों से जुड़ी परेशानियां भी कुछ मामलों में जिंक की कमी से संबंधित हो सकती हैं। हालांकि इन लक्षणों के पीछे अन्य स्वास्थ्य कारण भी हो सकते हैं।

    विटामिन B12 शरीर की नसों और लाल रक्त कोशिकाओं के लिए महत्वपूर्ण है। इसकी कमी लंबे समय तक रहने पर कमजोरी के साथ हाथ पैरों में झनझनाहट या सुन्नपन जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं। कुछ लोगों में एकाग्रता और याददाश्त से जुड़ी परेशानियां भी देखी जा सकती हैं। इसलिए ऐसे लक्षण लगातार बने रहने पर चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है।

    पोषक तत्वों की कमी से बचने के लिए संतुलित और विविध आहार लेना महत्वपूर्ण है। भोजन में दालें हरी सब्जियां साबुत अनाज दूध और उससे बने खाद्य पदार्थ अंडे मांस या अन्य उपलब्ध पोषक स्रोतों को शामिल किया जा सकता है। यदि किसी व्यक्ति को लंबे समय से कमजोरी बाल झड़ने घाव देर से भरने चक्कर या हाथ पैरों में झनझनाहट जैसी समस्या हो रही है तो खुद से सप्लीमेंट लेने के बजाय डॉक्टर से सलाह लेकर जरूरी जांच कराना बेहतर है। सही कारण की पहचान के बाद ही उचित उपचार और पोषण की योजना बनाई जानी चाहिए।

  • बार-बार थकान बाल झड़ना और घाव देर से भरना नहीं है सामान्य, शरीर में इन पोषक तत्वों की कमी का हो सकता है संकेत

    बार-बार थकान बाल झड़ना और घाव देर से भरना नहीं है सामान्य, शरीर में इन पोषक तत्वों की कमी का हो सकता है संकेत

    नई दिल्ली । शरीर को स्वस्थ रखने के लिए विटामिन और मिनरल्स की जरूरत होती है। इन पोषक तत्वों की मात्रा भले ही कम चाहिए होती है लेकिन शरीर के कई जरूरी काम इन्हीं पर निर्भर करते हैं। खून बनाने से लेकर नसों की कार्यप्रणाली प्रतिरोधक क्षमता त्वचा बालों और ऊर्जा के स्तर को बनाए रखने में इनका महत्वपूर्ण योगदान होता है। यही वजह है कि जब शरीर में आयरन जिंक या विटामिन B12 जैसे पोषक तत्वों की कमी होने लगती है तो कुछ बदलाव दिखाई दे सकते हैं। कई बार लोग इन संकेतों को सामान्य कमजोरी तनाव या नींद की कमी मानकर नजरअंदाज कर देते हैं।

    लगातार थकान और कमजोरी पोषण की कमी से जुड़ा एक आम संकेत हो सकता है। अगर पर्याप्त नींद लेने और सामान्य दिनचर्या के बावजूद शरीर में हर समय ऊर्जा की कमी महसूस हो रही है तो इसकी वजह जानना जरूरी है। आयरन की कमी से एनीमिया हो सकता है जिसमें थकान कमजोरी और एकाग्रता में परेशानी जैसी समस्याएं हो सकती हैं। विटामिन B12 की कमी में भी कमजोरी और थकान महसूस हो सकती है। हालांकि केवल थकान के आधार पर यह तय नहीं किया जा सकता कि शरीर में किस पोषक तत्व की कमी है क्योंकि इसके कई अन्य कारण भी हो सकते हैं।

    आयरन की कमी बढ़ने पर कुछ लोगों में त्वचा का रंग सामान्य से फीका दिखाई दे सकता है। चक्कर आना या थोड़ा काम करने पर सांस फूलना भी एनीमिया से जुड़ा हो सकता है। ऐसी स्थिति में बिना सलाह के आयरन की दवा शुरू करने के बजाय डॉक्टर से जांच कराना बेहतर होता है। जरूरत पड़ने पर रक्त जांच के माध्यम से हीमोग्लोबिन और आयरन की स्थिति का पता लगाया जा सकता है।

    बालों का लगातार झड़ना भी कई कारणों से हो सकता है। तनाव हार्मोन में बदलाव भोजन की कमी और कुछ स्वास्थ्य समस्याएं बालों के झड़ने की वजह बन सकती हैं। आयरन की कमी या एनीमिया भी कुछ मामलों में बालों की सेहत को प्रभावित कर सकता है। इसलिए केवल बाल झड़ने को देखकर किसी एक विटामिन या मिनरल की कमी मान लेना सही नहीं है।

    जिंक शरीर के लिए जरूरी मिनरल्स में शामिल है। यह प्रतिरोधक क्षमता और घाव भरने जैसी प्रक्रियाओं में भूमिका निभाता है। जिंक की कमी होने पर घाव सामान्य से देर से भरने की समस्या दिखाई दे सकती है। बार बार संक्रमण होना या बालों से जुड़ी परेशानियां भी कुछ मामलों में जिंक की कमी से संबंधित हो सकती हैं। हालांकि इन लक्षणों के पीछे अन्य स्वास्थ्य कारण भी हो सकते हैं।

    विटामिन B12 शरीर की नसों और लाल रक्त कोशिकाओं के लिए महत्वपूर्ण है। इसकी कमी लंबे समय तक रहने पर कमजोरी के साथ हाथ पैरों में झनझनाहट या सुन्नपन जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं। कुछ लोगों में एकाग्रता और याददाश्त से जुड़ी परेशानियां भी देखी जा सकती हैं। इसलिए ऐसे लक्षण लगातार बने रहने पर चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है।

    पोषक तत्वों की कमी से बचने के लिए संतुलित और विविध आहार लेना महत्वपूर्ण है। भोजन में दालें हरी सब्जियां साबुत अनाज दूध और उससे बने खाद्य पदार्थ अंडे मांस या अन्य उपलब्ध पोषक स्रोतों को शामिल किया जा सकता है। यदि किसी व्यक्ति को लंबे समय से कमजोरी बाल झड़ने घाव देर से भरने चक्कर या हाथ पैरों में झनझनाहट जैसी समस्या हो रही है तो खुद से सप्लीमेंट लेने के बजाय डॉक्टर से सलाह लेकर जरूरी जांच कराना बेहतर है। सही कारण की पहचान के बाद ही उचित उपचार और पोषण की योजना बनाई जानी चाहिए।

  • OTT Release This Week: 17 से 23 अगस्त तक ओटीटी पर लगेगा मनोरंजन का तड़का, 8 फिल्में-सीरीज होंगी रिलीज

    OTT Release This Week: 17 से 23 अगस्त तक ओटीटी पर लगेगा मनोरंजन का तड़का, 8 फिल्में-सीरीज होंगी रिलीज


    नई दिल्ली । अगस्त का तीसरा हफ्ता ओटीटी दर्शकों के लिए काफी खास रहने वाला है। 17 से 23 अगस्त के बीच नेटफ्लिक्स और जियो हॉटस्टार समेत कई बड़े ओटीटी प्लेटफॉर्म पर फिल्में और सीरीज रिलीज होने जा रही हैं। इस हफ्ते रोमांटिक कॉमेडी से लेकर क्राइम थ्रिलर सुपरहीरो ड्रामा डॉक्यूमेंट्री और रियलिटी शो तक देखने को मिलेगा। अगर आप सिनेमाघर जाने के बजाय घर बैठे नई फिल्म या सीरीज देखने का इंतजार कर रहे हैं तो इस हफ्ते आपके पास कई विकल्प मौजूद रहेंगे।

    इस हफ्ते की शुरुआत जियो हॉटस्टार की सुपरहीरो सीरीज लैंटर्न्स से होगी। यह सीरीज 17 अगस्त को रिलीज होगी। इसकी कहानी नए रिक्रूट जॉन स्टीवर्ट और लैंटर्न लेजेंड हैल जॉर्डन के इर्द गिर्द घूमती है। दोनों एक हत्या की जांच के दौरान धरती से जुड़े कई गहरे रहस्यों का सामना करते हैं। सुपरहीरो और मिस्ट्री पसंद करने वाले दर्शकों के लिए यह सीरीज खास हो सकती है।

    18 अगस्त को नेटफ्लिक्स पर सील टीम रिलीज होगी। यह अमेरिकी सस्पेंस सीरीज एक नेवी टीम की कहानी पर आधारित है। टीम के सदस्य खतरनाक मिशन को अंजाम देने के साथ अपनी निजी जिंदगी की परेशानियों से भी जूझते नजर आएंगे। इसी दिन जियो हॉटस्टार पर लोकप्रिय डार्क सिटकॉम इट्स ऑलवेज सनी इन फिलाडेल्फिया का 18वां सीजन भी स्ट्रीम होगा। इस सीरीज की IMDb रेटिंग 8.8 बताई गई है।

    19 अगस्त को नेटफ्लिक्स पर फ्रीफॉल: ए रेकनिंग फॉर बोइंग नाम की डॉक्यूमेंट्री रिलीज होगी। रॉरी कैनेडी के निर्देशन में बनी यह डॉक्यूमेंट्री बोइंग व्हिसलब्लोअर जॉन बार्नेट की मौत के बाद सामने आए घटनाक्रम पर केंद्रित है। वास्तविक घटनाओं और कॉरपोरेट विवादों में रुचि रखने वाले दर्शकों के लिए यह एक महत्वपूर्ण रिलीज हो सकती है।

    20 अगस्त को नेटफ्लिक्स पर स्वीडिश क्राइम थ्रिलर सीरीज ब्लड सैक्रिफाइस दस्तक देगी। कहानी दो पुलिस अधिकारियों की हत्या के बाद शुरू होती है। मामले की जांच कर रहा एक डिटेक्टिव हत्यारे तक पहुंचने के लिए अपने पिता के साथ वर्षों बाद फिर से जुड़ता है। अपराध और रहस्य से भरपूर यह सीरीज दर्शकों को अंत तक बांधे रखने की कोशिश करेगी।

    21 अगस्त को नेटफ्लिक्स पर रोमांटिक कॉमेडी फिल्म प्यार प्रेमा कल्याणम रिलीज होगी। फिल्म की कहानी पावी नाम की इंफ्लुएंसर के इर्द गिर्द है जो शादी के बाद अपना घर छोड़कर जाने से इनकार कर देती है। इसके बाद उसका पति उसी के घर में रहने का फैसला करता है। अब दोनों एक साथ कैसे एडजस्ट करते हैं यही फिल्म की कहानी को आगे बढ़ाता है।

    इसी दिन जियो हॉटस्टार पर ठुकरा के मेरा प्यार सीजन 2 भी रिलीज होगा। यह रिवेंज पॉलिटिकल रोमांटिक थ्रिलर सीरीज है और इसके नए एपिसोड हर शुक्रवार स्ट्रीम होंगे। सीरीज को लेकर दर्शकों के बीच पहले से ही उत्सुकता बनी हुई है।

    22 और 23 अगस्त को नेटफ्लिक्स पर हसल रियलिटी शो के नए एपिसोड देखने को मिलेंगे। इसमें कंटेस्टेंट्स अपने रैप और म्यूजिक टैलेंट का प्रदर्शन करते हैं। शो को रैपर बादशाह जज कर रहे हैं और हर शनिवार तथा रविवार इसके नए एपिसोड स्ट्रीम किए जाते हैं।

    इस तरह 17 से 23 अगस्त के बीच ओटीटी पर अलग-अलग जॉनर की आठ फिल्में और सीरीज दर्शकों का मनोरंजन करेंगी। अगर आपको रोमांस पसंद है तो प्यार प्रेमा कल्याणम अच्छा विकल्प हो सकता है वहीं क्राइम थ्रिलर के शौकीन ब्लड सैक्रिफाइस देख सकते हैं। सुपरहीरो फैंस के लिए लैंटर्न्स और रियलिटी शो पसंद करने वालों के लिए हसल इस हफ्ते खास आकर्षण रहने वाला है।

  • सैफ-सोहा और सबा की धार्मिक परवरिश पर खुलासा, शर्मिला टैगोर ने सिखाया इस्लाम; बोलीं- अल्लाह का नाम लूंगी

    सैफ-सोहा और सबा की धार्मिक परवरिश पर खुलासा, शर्मिला टैगोर ने सिखाया इस्लाम; बोलीं- अल्लाह का नाम लूंगी


    नई दिल्ली । बॉलीवुड की दिग्गज अभिनेत्री शर्मिला टैगोर और पूर्व भारतीय क्रिकेटर मंसूर अली खान पटौदी की शादी हमेशा से ही लोगों के बीच चर्चा का विषय रही है। दोनों ने साल 1969 में शादी की थी। शर्मिला टैगोर हिंदू परिवार से आती थीं जबकि मंसूर अली खान पटौदी मुस्लिम परिवार से थे। शादी के बाद शर्मिला ने इस्लाम अपनाया और अपने तीनों बच्चों सैफ अली खान सोहा अली खान और सबा अली खान को भी इस्लाम की शिक्षा दी। अब उनकी बेटी सबा अली खान ने अपने परिवार की धार्मिक परवरिश को लेकर खुलकर बात की है।

    बिग बॉलीवुड बफ के यूट्यूब चैनल पर बातचीत के दौरान सबा अली खान ने बताया कि उनके बचपन में घर का माहौल इस्लामिक परंपराओं से जुड़ा हुआ था। उन्होंने कहा कि उनकी मां शर्मिला टैगोर ने उन्हें और उनके भाई-बहनों को इस्लाम के बारे में समझाया और रमजान समेत धार्मिक परंपराओं की जानकारी दी। सबा के मुताबिक उनके घर में हिंदू धर्म की पूजा के लिए कोई मंदिर नहीं था और बचपन में उन्होंने घर पर हिंदू धार्मिक परंपराओं का पालन नहीं किया।

    सबा ने अपनी आस्था के बारे में बताते हुए कहा कि जब वह भगवान के बारे में सोचती हैं तो उनके मन में अल्लाह का नाम आता है। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अपनी आस्था को लेकर उनका नजरिया दूसरे धर्मों के प्रति सम्मान से अलग नहीं है। उनका कहना था कि किसी एक धर्म को मानने का मतलब यह नहीं है कि व्यक्ति दूसरे धर्मों का सम्मान करना छोड़ दे।

    सबा ने बताया कि उनके माता-पिता ने उन्हें किसी धार्मिक पहचान को जबरन अपनाने के लिए मजबूर नहीं किया था। उनके अनुसार शर्मिला टैगोर ने बच्चों को इस्लाम से परिचित कराया ताकि उनकी धार्मिक समझ और बुनियाद स्पष्ट रहे। इसके साथ ही बच्चों को अपनी आस्था को समझने और अपने तरीके से आगे बढ़ने की आजादी भी मिली।

    दिलचस्प बात यह है कि भले ही उनके घर में इस्लामिक परंपराओं का पालन होता था लेकिन परिवार में दूसरे धर्मों के त्योहारों को भी मनाया जाता था। सबा ने बताया कि वह होली दिवाली और क्रिसमस जैसे त्योहार मनाते हुए बड़ी हुई हैं। उनके मुताबिक उनके भाई और बहन ने अलग-अलग धर्मों में शादी की और परिवार में अलग-अलग धार्मिक मान्यताओं के लिए जगह रही। यही वजह है कि उनके परिवार में धार्मिक विविधता हमेशा दिखाई देती रही है।

    सबा के बयान से यह भी साफ होता है कि उनके परिवार में धर्म को लेकर व्यक्तिगत आस्था को महत्व दिया गया। उन्होंने कहा कि आस्था बेहद निजी विषय है और इसे किसी व्यक्ति पर थोपा नहीं जाना चाहिए। उनके मुताबिक उनकी मां ने उन्हें इस्लाम के बारे में बताया लेकिन आगे चलकर अपनी आस्था को लेकर चुनाव करने की स्वतंत्रता भी दी।

    शर्मिला टैगोर ने अपने फिल्मी करियर के दौरान हिंदी सिनेमा में खास पहचान बनाई थी। 1960 और 1970 के दशक में उन्होंने कई सफल फिल्मों में काम किया। इसी दौरान उनकी मुलाकात तत्कालीन भारतीय क्रिकेटर मंसूर अली खान पटौदी से हुई। दोनों ने 1969 में शादी की। इस शादी के बाद शर्मिला टैगोर ने इस्लाम अपनाया और उनके परिवार की धार्मिक परवरिश भी उसी पृष्ठभूमि में हुई।

    आज सैफ अली खान और सोहा अली खान फिल्म इंडस्ट्री के जाने-पहचाने नाम हैं जबकि सबा अली खान अपने परिवार और उससे जुड़ी यादों को सोशल मीडिया पर साझा करती रहती हैं। सबा का ताजा बयान एक बार फिर बताता है कि पटौदी परिवार में अलग-अलग धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं का किस तरह मेल रहा है।

  • 'मेरा रेवेन्यू मत रोकिए…' जब शाहरुख खान ने विवादित विज्ञापनों पर दिया था बेबाक जवाब

    'मेरा रेवेन्यू मत रोकिए…' जब शाहरुख खान ने विवादित विज्ञापनों पर दिया था बेबाक जवाब


    नई दिल्ली । महाराष्ट्र फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन यानी FDA की ओर से विमल इलायची के विज्ञापन को लेकर शाहरुख खान अजय देवगन और टाइगर श्रॉफ को कारण बताओ नोटिस जारी किए जाने के बाद एक पुराना बयान फिर चर्चा में आ गया है। FDA ने इन तीनों कलाकारों से विज्ञापन को लेकर जवाब मांगा है। विभाग का मानना है कि विमल इलायची का विज्ञापन राज्य में प्रतिबंधित पान मसाला और तंबाकू उत्पादों का सरोगेट विज्ञापन हो सकता है। तीनों कलाकारों को नोटिस का जवाब देने के लिए 15 दिनों का समय दिया गया है।

    इस पूरे विवाद के बीच शाहरुख खान का कई साल पुराना इंटरव्यू सोशल मीडिया और मनोरंजन जगत में फिर चर्चा का विषय बन गया है। उस इंटरव्यू में पत्रकार करण थापर ने शाहरुख से सेलिब्रिटीज के उन प्रोडक्ट्स के विज्ञापन करने पर सवाल किया था जिनके स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर पड़ने की बात कही जाती है। सवाल के दौरान सॉफ्ट ड्रिंक के विज्ञापनों का भी जिक्र हुआ था और कहा गया था कि बच्चों पर बड़े सितारों के विज्ञापन का प्रभाव पड़ता है।

    इस पर शाहरुख खान ने उस समय तर्क दिया था कि अगर सरकार को किसी प्रोडक्ट से इतनी आपत्ति है और वह उसे समाज के लिए नुकसानदायक मानती है तो उसे देश में बनाने और बेचने की अनुमति ही नहीं दी जानी चाहिए। शाहरुख ने कहा था कि अगर सिगरेट खराब है तो सरकार उसके निर्माण पर रोक लगाए और अगर सॉफ्ट ड्रिंक को नुकसानदायक माना जाता है तो उसके उत्पादन को बंद किया जाना चाहिए। उनका सवाल था कि जब सरकार ऐसे उत्पादों से मिलने वाले राजस्व को रोक नहीं रही है तो कलाकारों की कमाई को लेकर सवाल क्यों उठाए जाते हैं।

    शाहरुख ने खुद को एक अभिनेता बताते हुए कहा था कि उनका काम अभिनय करना और उससे कमाई करना है। उनके मुताबिक यदि कोई उत्पाद गलत है तो उसके उत्पादन को ही बंद किया जाना चाहिए। इसी पुराने बयान के कारण मौजूदा विवाद के बीच शाहरुख का पक्ष एक बार फिर चर्चा में आ गया है। हालांकि वर्तमान FDA नोटिस को लेकर शाहरुख खान या अजय देवगन और टाइगर श्रॉफ की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

    FDA के नोटिस के मुताबिक तीनों कलाकारों को यह स्पष्ट करना होगा कि विमल इलायची वास्तव में एक अलग उत्पाद है या फिर इसके जरिए प्रतिबंधित विमल पान मसाला और तंबाकू उत्पादों का अप्रत्यक्ष रूप से प्रचार किया जा रहा है। विभाग ने विज्ञापन से जुड़े कई दस्तावेज और जानकारियां भी मांगी हैं।

    नोटिस में कलाकारों से उन टीवी चैनलों डिजिटल प्लेटफॉर्म और सोशल मीडिया माध्यमों की जानकारी मांगी गई है जहां यह विज्ञापन प्रसारित या प्रकाशित हुआ। इसके साथ ही विज्ञापन की अवधि और उसे प्रसारित किए जाने से जुड़ी जानकारी भी उपलब्ध कराने को कहा गया है। FDA ने कलाकारों और ब्रांड के मालिक के बीच हुए कमर्शियल या कानूनी समझौते से संबंधित दस्तावेज भी मांगे हैं।

    अब तीनों सितारों को निर्धारित 15 दिनों के भीतर लिखित जवाब और जरूरी दस्तावेज FDA के सामने पेश करने होंगे। रिपोर्ट्स के मुताबिक जवाब नहीं देने या संतोषजनक जानकारी उपलब्ध नहीं कराने की स्थिति में आगे कानूनी कार्रवाई और जुर्माने का सामना करना पड़ सकता है। फिलहाल मामले में कलाकारों के जवाब का इंतजार है। वहीं शाहरुख खान का पुराना बयान इस विवाद के बीच एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर रहा है कि प्रतिबंधित या विवादित उत्पादों के प्रचार की जिम्मेदारी सिर्फ विज्ञापन करने वाले सेलिब्रिटीज की है या फिर ऐसे उत्पादों के निर्माण और बिक्री पर भी समान रूप से सवाल उठना चाहिए।

  • गाजा सीजफायर पर ट्रंप का बड़ा दांव: दामाद जेरेड कुशनर ने हमास नेता से मिस्र में की सीधी बातचीत

    गाजा सीजफायर पर ट्रंप का बड़ा दांव: दामाद जेरेड कुशनर ने हमास नेता से मिस्र में की सीधी बातचीत


    नई दिल्ली । गाजा में लंबे समय से अटकी सीजफायर डील को आगे बढ़ाने के लिए अमेरिका ने अपनी कूटनीतिक कोशिश तेज कर दी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दामाद और अमेरिकी वार्ताकार जेरेड कुशनर ने रविवार को मिस्र में हमास के प्रमुख खलील अल हय्या से मुलाकात की। दोनों नेताओं के बीच यह बैठक दो घंटे से ज्यादा समय तक चली। बातचीत में मिस्र कतर और तुर्किये के अधिकारी भी मौजूद रहे। इस मुलाकात को गाजा में युद्धविराम की कोशिशों के लिहाज से अहम माना जा रहा है क्योंकि लंबे समय से इजरायल और हमास के बीच कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर सहमति नहीं बन पा रही है।

    कुशनर की हमास नेता से मुलाकात अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के 15 सूत्रीय गाजा रोडमैप को आगे बढ़ाने की कोशिश का हिस्सा है। इस प्रस्ताव में गाजा में युद्धविराम के साथ हमास के हथियार छोड़ने इजरायली सेना की गाजा से वापसी और युद्ध प्रभावित क्षेत्र के पुनर्निर्माण जैसे मुद्दे शामिल हैं। हमास ने इस योजना के प्रति अपनी प्रतिबद्धता जताई है लेकिन इजरायल ने अब तक इसे स्वीकार नहीं किया है। इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू का कहना है कि जब तक हमास पूरी तरह निरस्त्र नहीं हो जाता तब तक इजरायली सेना गाजा से पीछे नहीं हटेगी।

    मिस्र में हुई बातचीत के दौरान हमास ने अपनी शर्त भी स्पष्ट कर दी। हमास का कहना है कि किसी भी योजना को लागू करने से पहले इजरायल को गाजा में सैन्य हमले रोकने होंगे और अपनी सेना को तथाकथित येलो लाइन तक पीछे हटाना होगा। इसके बाद 14 दिनों की बातचीत शुरू हो सकती है जिसमें युद्धविराम योजना को लागू करने की समयसीमा और दूसरे जरूरी मुद्दों पर चर्चा की जाएगी। दूसरी ओर इजरायल की सबसे बड़ी शर्त हमास का पूर्ण निरस्त्रीकरण है। यही मुद्दा दोनों पक्षों के बीच समझौते की राह में सबसे बड़ी बाधाओं में से एक बना हुआ है।

    कुशनर की भूमिका इस समय इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि वह ट्रंप प्रशासन की ओर से बातचीत को आगे बढ़ाने वाले प्रमुख चेहरों में शामिल हैं। हमास के साथ मुलाकात के बाद उनकी इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से भी मुलाकात प्रस्तावित है। इस बैठक में पूर्व ब्रिटिश प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर और ट्रंप के बोर्ड ऑफ पीस के निदेशक निकोलाय म्लादेनोव भी शामिल होंगे। इसका उद्देश्य दोनों पक्षों के बीच मौजूद मतभेदों को कम करना और प्रस्तावित रोडमैप को आगे बढ़ाने की संभावनाएं तलाशना है।

    अमेरिकी प्रयासों के बीच कई मुस्लिम और अरब देशों ने भी इजरायल से ट्रंप की योजना को स्वीकार करने की अपील की है। सऊदी अरब संयुक्त अरब अमीरात जॉर्डन पाकिस्तान इंडोनेशिया मिस्र कतर और तुर्किये समेत कई देशों ने गाजा में संघर्ष खत्म करने के लिए प्रस्ताव पर सकारात्मक रुख अपनाने की मांग की है।

    हालांकि जमीन पर हालात अब भी चुनौतीपूर्ण बने हुए हैं। गाजा के बड़े हिस्से पर इजरायली सेना के नियंत्रण और हमास के हथियार छोड़ने के मुद्दे को लेकर गतिरोध जारी है। ऐसे समय में कुशनर की हमास नेता से सीधी मुलाकात को अमेरिका की ओर से दोनों पक्षों पर दबाव बढ़ाने और बातचीत को किसी संभावित समझौते तक पहुंचाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। अब निगाहें कुशनर की नेतन्याहू के साथ होने वाली बातचीत और उसके बाद सामने आने वाले रुख पर टिकी हैं। अगर दोनों पक्ष अपनी प्रमुख शर्तों में कुछ लचीलापन दिखाते हैं तो गाजा में लंबे समय से लंबित सीजफायर समझौते की दिशा में आगे बढ़ने की उम्मीद बन सकती है।

  • अन्नामलाई का बड़ा दावा- अमित शाह ने दिल्ली आने को कहा था, मैंने ठुकराया ऑफर; मेकेदातु और भ्रष्टाचार पर भी बरसे

    अन्नामलाई का बड़ा दावा- अमित शाह ने दिल्ली आने को कहा था, मैंने ठुकराया ऑफर; मेकेदातु और भ्रष्टाचार पर भी बरसे


    नई दिल्ली । तमिलनाडु की राजनीति में पूर्व बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष के अन्नामलाई के एक बयान ने नई चर्चा छेड़ दी है। अन्नामलाई ने दावा किया है कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने उन्हें दिल्ली बुलाकर पार्टी में बड़ी जिम्मेदारी संभालने और लंबे समय तक राजधानी में रहने को कहा था। हालांकि उन्होंने यह प्रस्ताव स्वीकार नहीं किया और तमिलनाडु में रहकर लोगों के बीच काम करने का फैसला किया। अन्नामलाई ने कहा कि उनके लिए राज्य में रहकर जनता के मुद्दों पर काम करना ज्यादा महत्वपूर्ण है।

    अन्नामलाई के मुताबिक अमित शाह ने उनसे दिल्ली आकर जिम्मेदारी संभालने और करीब तीन साल से अधिक समय तक वहां रहने को कहा था। उन्होंने अमित शाह से स्पष्ट तौर पर कहा कि यह उनके लिए सही नहीं रहेगा। इसके बाद उन्होंने तमिलनाडु में ही रहकर सामाजिक और राजनीतिक बदलाव के लिए काम करने का फैसला किया। अन्नामलाई ने यह भी कहा कि वह बीजेपी के भीतर रहें या पार्टी से बाहर हों लेकिन जिन सिद्धांतों पर अमित शाह के साथ काम किया है उन्हें हमेशा अपने काम में आगे बढ़ाते रहेंगे।

    उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब तमिलनाडु बीजेपी में उनकी भूमिका और भविष्य को लेकर लगातार चर्चाएं होती रही हैं। अन्नामलाई अब वी द लीडर आंदोलन से भी जुड़े हैं और राज्य की राजनीति में सक्रिय बने हुए हैं। उन्होंने कहा कि उनका लक्ष्य तमिलनाडु के लोगों के हितों के लिए काम करना और सामाजिक बदलाव की दिशा में अपनी भूमिका निभाना है।

    मेकेदातु बांध परियोजना को लेकर भी अन्नामलाई ने अपना रुख साफ किया। उन्होंने कहा कि तमिलनाडु के हितों से जुड़े इस मुद्दे पर उन्होंने हमेशा आवाज उठाई है। उनका दावा है कि जब वह बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष थे तब भी तमिलनाडु बीजेपी ने मेकेदातु परियोजना का विरोध किया था। उन्होंने कहा कि बेंगलुरु के लोगों को पीने का पानी मिलना चाहिए लेकिन इसके लिए तमिलनाडु के हितों की अनदेखी नहीं की जा सकती।

    अन्नामलाई ने कहा कि जब किसी परियोजना का असर दो राज्यों पर पड़ता है तो दोनों राज्यों के मुख्यमंत्रियों को साथ बैठकर बातचीत करनी चाहिए और ऐसा समाधान निकालना चाहिए जिससे दोनों पक्षों के हितों का ध्यान रखा जा सके। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर भरोसा जताते हुए कहा कि वह ईमानदार नेता हैं और गलत काम नहीं करते।

    तमिलनाडु सरकार पर निशाना साधते हुए अन्नामलाई ने भ्रष्टाचार के मुद्दे पर भी चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि सरकार को कम से कम एक साल काम करने का अवसर दिया जाना चाहिए और उसके बाद उसके प्रदर्शन का आकलन किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर सरकार ठीक से काम नहीं करती है तो वह सबसे पहले सवाल उठाएंगे। साथ ही उन्होंने लोगों से जल्दबाजी में हंगामा करने के बजाय सरकार को काम करने का मौका देने की अपील की।

    हालांकि अन्नामलाई ने आरोप लगाया कि भ्रष्टाचार रोकने के दावों के बावजूद कुछ जगहों पर रिश्वतखोरी फिर शुरू हो गई है। उन्होंने दावा किया कि कुछ मंत्रियों के खिलाफ उनके पास कथित ऑडियो सबूत भी हैं। अन्नामलाई ने मुख्यमंत्री को चेतावनी देते हुए कहा कि वह एक साल बाद मुद्दा उठाने से पहले ही सरकार को आगाह कर रहे हैं। उनका कहना है कि यदि मुख्यमंत्री वास्तव में भ्रष्टाचार खत्म करना चाहते हैं तो उन्हें यह सुनिश्चित करना होगा कि उनके मंत्री भी उसी नीति पर चलें।

    अन्नामलाई के बयान ने एक तरफ बीजेपी में उनकी भूमिका को लेकर चर्चा बढ़ा दी है तो दूसरी तरफ तमिलनाडु की राजनीति में उनके अगले कदम पर भी निगाहें टिक गई हैं। दिल्ली की जिम्मेदारी को ठुकराकर राज्य में सक्रिय रहने का उनका दावा आने वाले समय में उनकी राजनीतिक रणनीति के लिए कितना अहम साबित होगा यह देखना दिलचस्प होगा।

  • सावन के तीसरे सोमवार पर शिव भक्तों के लिए बड़ा अवसर, नाग पंचमी के साथ खास संयोग; ऐसे करें भोलेनाथ का जलाभिषेक

    सावन के तीसरे सोमवार पर शिव भक्तों के लिए बड़ा अवसर, नाग पंचमी के साथ खास संयोग; ऐसे करें भोलेनाथ का जलाभिषेक


    नई दिल्ली । हिंदू धर्म में सावन का महीना भगवान शिव की आराधना के लिए विशेष माना जाता है। सावन के प्रत्येक सोमवार को शिव भक्त व्रत रखते हैं और भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक करके सुख शांति और समृद्धि की कामना करते हैं। इस बार 17 अगस्त 2026 को सावन का तीसरा सोमवार मनाया जाएगा और इसी दिन नाग पंचमी भी पड़ रही है। पंचांग के अनुसार पंचमी तिथि 16 अगस्त की शाम से शुरू होकर 17 अगस्त की शाम तक रहेगी और उदया तिथि के आधार पर नाग पंचमी 17 अगस्त को मनाई जाएगी। इस वजह से सावन सोमवार और नाग पंचमी का एक साथ पड़ना धार्मिक दृष्टि से खास माना जा रहा है।

    इस दिन भगवान शिव के साथ नाग देवता की पूजा करने की परंपरा है। धार्मिक मान्यता के अनुसार नाग भगवान शिव से जुड़े हुए हैं और शिवजी के गले में नाग के विराजमान होने के कारण नाग पंचमी की पूजा का संबंध शिव आराधना से भी माना जाता है। श्रद्धालु इस दिन शिव मंदिर जाकर शिवलिंग पर जल अर्पित कर सकते हैं और बेलपत्र पुष्प अक्षत तथा अपनी श्रद्धा के अनुसार अन्य पूजन सामग्री चढ़ा सकते हैं। नाग देवता की प्रतिमा या शिवलिंग के साथ स्थापित नाग प्रतिमा की भी पूजा की जा सकती है।

    17 अगस्त को शिवलिंग पर जलाभिषेक के लिए अलग अलग पंचांगों में समय में थोड़ा अंतर मिल सकता है। आपके दिए गए पंचांग के अनुसार ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4 बजकर 24 मिनट से 5 बजकर 8 मिनट तक रहेगा। इसके बाद सुबह 5 बजकर 51 मिनट से 7 बजकर 30 मिनट तक अमृत सर्वोत्तम मुहूर्त बताया गया है। सुबह 9 बजकर 8 मिनट से 10 बजकर 47 मिनट तक शुभ उत्तम मुहूर्त रहेगा। वहीं अभिजीत मुहूर्त दिन में 11 बजकर 59 मिनट से दोपहर 12 बजकर 51 मिनट तक बताया गया है। स्थानीय सूर्योदय और शहर के अनुसार मुहूर्त में कुछ अंतर संभव है इसलिए पूजा के लिए अपने क्षेत्र के पंचांग को प्राथमिकता देना बेहतर रहेगा। नाग पंचमी के लिए भी अलग पंचांगों में सुबह के मुहूर्त में कुछ मिनट का अंतर दिया गया है।

    सावन सोमवार की पूजा के लिए सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करने के बाद भगवान शिव का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प लिया जा सकता है। इसके बाद शिवलिंग पर स्वच्छ जल अर्पित करें। श्रद्धा के अनुसार दूध और पंचामृत से अभिषेक भी किया जा सकता है। भगवान शिव को बेलपत्र पुष्प और फल अर्पित करें तथा धूप और दीप जलाकर पूजा करें। इसके बाद ॐ नमः शिवाय मंत्र का जाप करना और शिव आरती करना धार्मिक परंपरा का हिस्सा माना जाता है।

    व्रत रखने वाले श्रद्धालु अपनी क्षमता के अनुसार फलाहार या जलाहार कर सकते हैं। कई परंपराओं में सावन सोमवार के व्रत में अनाज और सामान्य नमक से परहेज किया जाता है। हालांकि व्रत के नियम परिवार और परंपरा के अनुसार अलग हो सकते हैं। स्वास्थ्य संबंधी परेशानी वाले लोगों को कठिन या निर्जला व्रत रखने से पहले चिकित्सकीय सलाह लेना उचित है।

    इस दिन नाग पंचमी होने के कारण नाग देवता की प्रतिमा पर भी जल पुष्प और पूजा सामग्री अर्पित की जा सकती है। जीवित सांपों को पकड़कर पूजा करने या उन्हें जबरन दूध पिलाने से बचना चाहिए। धार्मिक आस्था का पालन करते हुए नाग देवता की प्रतिमा का पूजन करना अधिक सुरक्षित तरीका है।

    इस तरह 17 अगस्त का दिन शिव भक्तों के लिए धार्मिक रूप से विशेष माना जा रहा है। सावन सोमवार और नाग पंचमी का यह मेल श्रद्धालुओं को एक ही दिन भगवान शिव और नाग देवता की आराधना का अवसर देगा। पूजा में सबसे महत्वपूर्ण श्रद्धा संयम और सकारात्मक भाव माना जाता है। ज्योतिष से जुड़े शुभ प्रभावों को धार्मिक मान्यता के रूप में ही देखना चाहिए क्योंकि इनके प्रभावों का वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।

  • क्यों खास हैं नाग? कालसर्प दोष, अश्लेषा नक्षत्र और नागयज्ञ से जुड़ी है हजारों साल पुरानी परंपरा

    क्यों खास हैं नाग? कालसर्प दोष, अश्लेषा नक्षत्र और नागयज्ञ से जुड़ी है हजारों साल पुरानी परंपरा


    नई दिल्ली । सावन शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को नाग पंचमी के रूप में मनाया जाता है। भारतीय परंपरा में नागों का महत्व केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं है बल्कि ज्योतिष पौराणिक कथाओं लोकविश्वास और प्रकृति से भी उनका गहरा संबंध बताया गया है। खेतों में फसलों की रक्षा करने वाले सांपों से लेकर भगवान शिव के गले में विराजमान नाग तक भारतीय संस्कृति में सर्प को कई अलग अलग रूपों में देखा गया है। यही वजह है कि नाग पंचमी के अवसर पर नाग पूजा की परंपरा सदियों से चली आ रही है।

    ज्योतिष की बात करें तो सर्पों का संबंध राहु से जोड़ा जाता है। मान्यता के अनुसार नवग्रहों में राहु के अधिदेवता काल और प्रतिदेवता सर्प माने जाते हैं। इसी कारण राहु से जुड़े दोषों की शांति के लिए सर्प और नाग देवता की पूजा का विधान बताया जाता है। कुंडली में कालसर्प दोष होने की स्थिति में भी ज्योतिषीय परंपराओं में नाग पूजा और उससे जुड़े उपाय बताए जाते हैं। हालांकि कालसर्प दोष को लेकर ज्योतिषियों के बीच अलग अलग मत भी पाए जाते हैं।

    नागों का संबंध केवल ग्रहों तक ही सीमित नहीं है। 27 नक्षत्रों में अश्लेषा नक्षत्र के देवता भी सर्प माने गए हैं। ज्योतिषीय मान्यताओं में अश्लेषा का संबंध नाग शक्ति से जोड़ा जाता है। इसी तरह प्राचीन ज्योतिष परंपराओं में नक्षत्रों के वाहनों और प्राकृतिक घटनाओं के बीच संबंध जोड़कर वर्षा के अनुमान लगाने की परंपरा भी बताई गई है। बारिश के मौसम में आकाशीय घटनाओं को समझने में इन प्रतीकों का उपयोग प्राचीन काल से होता रहा है।

    भारतीय पौराणिक कथाओं में नागों की भूमिका और भी व्यापक है। रामायण में लक्ष्मण को शेषनाग का अवतार माना जाता है जबकि महाभारत की परंपरा में बलराम का संबंध भी शेषनाग से जोड़ा जाता है। रामायण में मेघनाद की पत्नी सुलोचना को नागकन्या बताया गया है। वहीं सुरसा का उल्लेख नागों की माता के रूप में मिलता है। इन कथाओं में नाग केवल एक जीव के रूप में नहीं बल्कि शक्ति और रहस्य के प्रतीक के तौर पर भी दिखाई देते हैं।

    महाभारत में भी नागों की कहानी बेहद महत्वपूर्ण है। अर्जुन का विवाह नागकन्या उलूपी से हुआ था। आगे चलकर राजा परीक्षित की मृत्यु तक्षक नाग के डंसने से हुई। परीक्षित की मृत्यु से क्रोधित उनके पुत्र जन्मेजय ने नागों के विनाश के लिए नागयज्ञ शुरू कराया। कहा जाता है कि इस यज्ञ में बड़ी संख्या में नाग अग्नि में गिरने लगे थे। इसी दौरान ऋषि जरत्कारु के पुत्र आस्तीक ने यज्ञ को रुकवाया और नागों की रक्षा की। इस कथा को नाग पंचमी की धार्मिक परंपराओं से भी जोड़ा जाता है।

    नागों का उल्लेख कृष्ण की कथाओं में भी मिलता है। भगवान श्रीकृष्ण द्वारा कालिया नाग के दमन की कथा भारतीय लोकजीवन में बेहद प्रसिद्ध है। वहीं महाभारत में भीम के नागलोक पहुंचने और वहां उन्हें असाधारण शक्ति प्राप्त होने का वर्णन मिलता है। मेघनाद द्वारा राम और लक्ष्मण को नागपाश में बांधने की कथा भी नागों के महत्व को दर्शाती है।

    भारतीय परंपरा में नागों को केवल भय और विष का प्रतीक नहीं माना गया बल्कि उन्हें शक्ति संरक्षण उर्वरता और प्रकृति से जोड़कर भी देखा गया है। कश्मीर का अनंतनाग भी नाग परंपरा से जुड़ा एक महत्वपूर्ण नाम है। इतिहास और लोककथाओं में इस क्षेत्र का संबंध नागों से बताया गया है।

    इस तरह कालसर्प दोष की ज्योतिषीय मान्यताओं से लेकर जन्मेजय के नागयज्ञ तक और कृष्ण की कालिया नाग कथा से लेकर शेषनाग की पौराणिक अवधारणा तक नाग भारतीय संस्कृति के अनेक स्तरों पर दिखाई देते हैं। यही वजह है कि नाग पंचमी केवल सांपों की पूजा का पर्व नहीं बल्कि भारतीय सभ्यता में प्रकृति पौराणिक परंपरा और धार्मिक प्रतीकों के बीच गहरे संबंध को समझने का अवसर भी है।