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  • अयोध्या के बाद MP की अयोध्या में भी मचा था ,हड़कंप रामराजा मंदिर से गायब हुए थे कैश और आभूषण

    अयोध्या के बाद MP की अयोध्या में भी मचा था ,हड़कंप रामराजा मंदिर से गायब हुए थे कैश और आभूषण


    नई दिल्ली । अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी को लेकर देशभर में चल रही चर्चाओं के बीच मध्य प्रदेश का एक पुराना मामला फिर सुर्खियों में आ गया है। यह मामला बुंदेलखंड की अयोध्या कहे जाने वाले ओरछा स्थित रामराजा सरकार मंदिर से जुड़ा है जहां वर्ष 2017 में चंदे की राशि और आभूषणों में कथित गड़बड़ी का मामला सामने आया था। उस समय इस घटना ने प्रदेशभर में हलचल मचा दी थी और मंदिर प्रबंधन पर कई गंभीर सवाल खड़े हुए थे।

    ओरछा का रामराजा सरकार मंदिर मध्य प्रदेश के सबसे प्रसिद्ध धार्मिक स्थलों में गिना जाता है। यहां भगवान श्रीराम को राजा के रूप में पूजा जाता है और देशभर से बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में मंदिर के चढ़ावे और संपत्तियों में कथित अनियमितता की खबर सामने आने के बाद लोगों की धार्मिक भावनाएं भी आहत हुई थीं।

    मामला उस समय का है जब निवाड़ी जिला अस्तित्व में नहीं आया था और ओरछा अविभाजित टीकमगढ़ जिले का हिस्सा था। आरोप लगाए गए कि मंदिर के खातों दान राशि आभूषणों नगद बही खातों स्टॉक रजिस्टर तथा मंदिर की चल और अचल संपत्तियों के प्रबंधन में वित्तीय अनियमितताएं हुई हैं। जांच के दौरान यह भी कहा गया कि मंदिर से नकदी और कुछ आभूषण गायब पाए गए थे।

    इस मामले में मंदिर के तत्कालीन लिपिक मुन्नालाल तिवारी को आरोपी बनाया गया और उनके खिलाफ धोखाधड़ी सहित विभिन्न धाराओं में प्रकरण दर्ज किया गया। हालांकि जांच लंबे समय तक चलती रही लेकिन कथित चंदा चोरी कांड का कोई स्पष्ट निष्कर्ष सामने नहीं आ सका। यही कारण रहा कि यह मामला वर्षों तक कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रियाओं में उलझा रहा।

    बाद में मामला मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की जबलपुर पीठ पहुंचा। सुनवाई के दौरान अदालत ने जांच प्रक्रिया में हुई देरी पर गंभीर टिप्पणी की। अदालत ने कहा कि किसी भी नागरिक के सिर पर आपराधिक मुकदमे की तलवार अनिश्चितकाल तक नहीं लटकाई जा सकती। केवल प्रशासनिक कठिनाइयों अधिकारियों के तबादलों सेवानिवृत्ति या दस्तावेज जुटाने में लगने वाला समय जांच को वर्षों तक लंबित रखने का आधार नहीं बन सकता।

    हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि अत्यधिक देरी संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत नागरिकों को प्राप्त त्वरित और निष्पक्ष न्याय के अधिकार का उल्लंघन है। इसी आधार पर अदालत ने दर्ज एफआईआर को रद्द कर दिया। यह फैसला उस समय काफी चर्चित रहा था क्योंकि अदालत ने जांच एजेंसियों और प्रशासनिक तंत्र की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए थे।

    हालांकि राज्य सरकार ने इस फैसले से असहमति जताई थी और बाद में एकलपीठ के निर्णय के खिलाफ अपील करने की तैयारी भी शुरू की थी। ऐसे में यह मामला पूरी तरह समाप्त नहीं माना गया और कानूनी स्तर पर इसकी चर्चा जारी रही।

    अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावे को लेकर उठे ताजा विवाद के बीच ओरछा का यह पुराना मामला एक बार फिर चर्चा में है। दोनों घटनाएं यह सवाल जरूर खड़ा करती हैं कि देश के प्रमुख धार्मिक स्थलों पर मिलने वाले चढ़ावे और संपत्तियों के प्रबंधन में पारदर्शिता तथा जवाबदेही सुनिश्चित करना कितना आवश्यक है।

  • निर्जला एकादशी 2026 से पहले कर लें ,ये जरूरी तैयारियां तभी मिलेगा व्रत का पूर्ण फल

    निर्जला एकादशी 2026 से पहले कर लें ,ये जरूरी तैयारियां तभी मिलेगा व्रत का पूर्ण फल


    नई दिल्ली । हिंदू धर्म में एकादशी तिथि का विशेष महत्व माना गया है लेकिन सभी एकादशियों में निर्जला एकादशी को सबसे श्रेष्ठ और पुण्यदायी माना गया है। मान्यता है कि जो श्रद्धालु विधि विधान से निर्जला एकादशी का व्रत करते हैं उन्हें वर्ष भर की 24 एकादशियों के व्रत के समान पुण्य प्राप्त होता है। यही कारण है कि इस व्रत को अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। वर्ष 2026 में निर्जला एकादशी का व्रत 25 जून गुरुवार को रखा जाएगा लेकिन इसकी तैयारी और नियम एक दिन पहले दशमी तिथि से ही प्रारंभ हो जाते हैं।

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार व्रत का पूर्ण फल तभी प्राप्त होता है जब श्रद्धालु दशमी तिथि से ही संयम और नियमों का पालन शुरू कर दें। इस दिन भोजन और दिनचर्या दोनों में विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है।

    दशमी तिथि के दिन केवल सात्विक भोजन ग्रहण करना चाहिए। भोजन में प्याज लहसुन और तामसिक पदार्थों का सेवन नहीं करना चाहिए। शाम के समय सूर्यास्त से पहले हल्का और सुपाच्य भोजन कर लेना उचित माना गया है। इसके बाद अन्न का त्याग कर देना चाहिए। कई श्रद्धालु दशमी की रात से ही जल का सेवन भी बंद कर देते हैं ताकि अगले दिन निर्जला व्रत का पालन पूरी निष्ठा के साथ कर सकें।

    एकादशी के दिन बाल धोना शुभ नहीं माना जाता इसलिए व्रत रखने वाले लोगों को दशमी तिथि में ही स्नान के साथ बाल धो लेने चाहिए। इससे व्रत के दिन किसी प्रकार की असुविधा भी नहीं होती और धार्मिक नियमों का पालन भी हो जाता है।

    भगवान विष्णु की पूजा में तुलसी दल का विशेष महत्व है। बिना तुलसी के विष्णु पूजन अधूरा माना जाता है। हालांकि एकादशी के दिन तुलसी के पौधे को स्पर्श करना या पत्तियां तोड़ना वर्जित माना गया है। इसलिए पूजा के लिए आवश्यक तुलसी दल दशमी तिथि में ही तोड़कर सुरक्षित रख लेना चाहिए। एकादशी के दिन तुलसी माता को दूर से प्रणाम कर दीपक अर्पित किया जा सकता है।

    धार्मिक ग्रंथों के अनुसार दशमी तिथि की रात्रि में भगवान विष्णु का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प लेना चाहिए। श्रद्धा और विश्वास के साथ लिया गया यह संकल्प व्रत की सफलता का आधार माना जाता है। इसके बाद व्रती को द्वादशी तिथि में पारण होने तक नियमों का पालन करना चाहिए।

    निर्जला एकादशी केवल उपवास का पर्व नहीं बल्कि आत्मसंयम और भक्ति का महापर्व है। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा आराधना जप और दान का विशेष महत्व बताया गया है। मान्यता है कि श्रद्धा पूर्वक किया गया यह व्रत जीवन में सुख समृद्धि और आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त करता है। इसलिए यदि आप इस वर्ष निर्जला एकादशी का व्रत रखने जा रहे हैं तो दशमी तिथि से ही इसकी तैयारी शुरू कर लें ताकि आपको व्रत का संपूर्ण और शुभ फल प्राप्त हो सके।

  • 19 साल की दीया मिर्जा से सलमान खान ने कही थी ऐसी बात, आज भी नहीं भूलीं एक्ट्रेस

    19 साल की दीया मिर्जा से सलमान खान ने कही थी ऐसी बात, आज भी नहीं भूलीं एक्ट्रेस


    नई दिल्ली । बॉलीवुड अभिनेत्री दीया मिर्जा ने हाल ही में फिल्म निर्माता और कोरियोग्राफर फराह खान के व्लॉग में अपने करियर के शुरुआती दिनों से जुड़ा एक दिलचस्प और मजेदार किस्सा साझा किया। बातचीत के दौरान दीया ने न सिर्फ अपने घर और करियर की यादें ताजा कीं बल्कि सलमान खान के साथ फिल्म तुमको न भूल पाएंगे की शूटिंग के दौरान हुई एक मजेदार घटना का भी जिक्र किया।

    फराह खान अपने कुक दिलीप के साथ दीया मिर्जा के घर पहुंचीं थीं। बातचीत के दौरान दीया ने बताया कि उन्होंने यह घर अपनी शुरुआती फिल्म तुमको न भूल पाएंगे से मिली फीस से खरीदा था। उन्होंने कहा कि यह जगह उनके लिए बेहद खास है और शहर की भागदौड़ से दूर उन्हें यहां सुकून मिलता है।

    बातचीत के दौरान दोनों ने फिल्म की शूटिंग से जुड़ी पुरानी यादों को भी साझा किया। दीया ने फराह से पूछा कि क्या उन्हें वह गाना याद है जिसकी शूटिंग के दौरान लाखों लोगों की भीड़ जमा हो गई थी। इस पर फराह ने बताया कि उस दौर में कलाकारों के पास आज जैसी सुविधाएं नहीं होती थीं। कई बार कलाकारों को पेड़ों के पीछे या अस्थायी जगहों पर कपड़े बदलने पड़ते थे। फराह ने हंसते हुए कहा कि सलमान खान भी बिना किसी झिझक के वहीं कपड़े बदल लिया करते थे।

    इसके बाद बातचीत का सबसे दिलचस्प हिस्सा सामने आया। जब फराह ने दीया से कहा कि उन्हें दोबारा सलमान खान के साथ काम करना चाहिए तो दीया ने एक पुराना किस्सा सुनाया। उन्होंने बताया कि जब वह महज 19 साल की थीं तब एक शूटिंग के दौरान उन्होंने फिल्म में सलमान खान की मां का किरदार निभा रही अभिनेत्री को देखा। दीया को लगा कि वह अभिनेत्री उम्र में काफी युवा थीं और उन्होंने इस बात का जिक्र सलमान से कर दिया।

    दीया के मुताबिक उनकी बात सुनकर सलमान खान ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया कि चिंता मत करो एक दिन तुम भी मेरी मां का रोल करोगी। सलमान की यह बात सुनकर उस समय सभी हंस पड़े थे। सालों बाद भी यह मजेदार टिप्पणी दीया को याद है और उन्होंने इसे बड़े ही हल्के अंदाज में साझा किया।

    बात को आगे बढ़ाते हुए फराह खान ने भी मजाक किया और अपने कुक दिलीप से पूछा कि क्या दीया सलमान खान की मां जैसी लगती हैं। इस पर दिलीप ने जवाब दिया कि नहीं वह तो उनकी छोटी बहन जैसी लगती हैं। दिलीप का जवाब सुनकर वहां मौजूद सभी लोग हंस पड़े।

    यह पूरा किस्सा न सिर्फ बॉलीवुड के पुराने दिनों की झलक दिखाता है बल्कि यह भी बताता है कि सेट पर कलाकारों के बीच किस तरह का दोस्ताना माहौल हुआ करता था। सलमान खान की मजाकिया शैली और दीया मिर्जा की सादगी ने इस यादगार घटना को एक बार फिर चर्चा में ला दिया।

  • चीन का अनोखा प्रयोग: बनाया 20 मंजिला एयर प्यूरीफायर टावर, जानिए कितनी हवा कर सकता है साफ

    चीन का अनोखा प्रयोग: बनाया 20 मंजिला एयर प्यूरीफायर टावर, जानिए कितनी हवा कर सकता है साफ

    नई दिल्ली। वायु प्रदूषण से निपटने के लिए चीन ने एक बेहद अनोखा और विशाल प्रयोग किया है। देश के शान्शी प्रांत के शिआन शहर में दुनिया का सबसे बड़ा एयर प्यूरीफायर टॉवर बनाया गया है, जिसकी ऊंचाई 100 मीटर से अधिक है। यह लगभग 20 मंजिला इमारत के बराबर माना जाता है।

    इस परियोजना को चीनी विज्ञान अकादमी के इंस्टीट्यूट ऑफ अर्थ एनवायरनमेंट ने विकसित किया है। वैज्ञानिकों का दावा है कि यह टॉवर प्रतिदिन करीब 1 करोड़ घन मीटर (10 मिलियन क्यूबिक मीटर) तक शुद्ध हवा उत्पन्न करने में सक्षम है, जिससे आसपास के बड़े क्षेत्र की वायु गुणवत्ता में सुधार दर्ज किया गया है।

    सौर ऊर्जा आधारित अनोखी तकनीक

    यह एयर प्यूरीफायर पारंपरिक बिजली आधारित सिस्टम पर पूरी तरह निर्भर नहीं है। इसके आधार क्षेत्र में बड़े कांच के ग्रीनहाउस बनाए गए हैं। प्रदूषित हवा इन संरचनाओं में प्रवेश करती है, जहां सूर्य की गर्मी से यह गर्म होकर ऊपर उठती है।

    इसके बाद यह हवा टॉवर के भीतर लगे कई फिल्टर सिस्टम से गुजरती है, जो धूल, धुआं और अन्य हानिकारक कणों को छान लेते हैं। सौर ऊर्जा पर आधारित होने के कारण इसे दिन के समय बहुत कम अतिरिक्त ऊर्जा की आवश्यकता होती है।

    PM2.5 स्तर में आई कमी

    अध्ययन के दौरान टॉवर के आसपास लगभग 10 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में निगरानी के लिए कई स्टेशन लगाए गए थे। आंकड़ों के अनुसार, भारी प्रदूषण वाले दिनों में PM2.5 जैसे खतरनाक कणों में औसतन 15 प्रतिशत तक की कमी दर्ज की गई।

    वैज्ञानिकों के मुताबिक, कई मौकों पर यह प्रणाली गंभीर स्मॉग को मध्यम स्तर तक लाने में भी सफल रही। हालांकि, शोधकर्ताओं ने यह भी स्पष्ट किया है कि यह शुरुआती परिणाम हैं और दीर्घकालिक अध्ययन के बाद ही अंतिम निष्कर्ष सामने आएंगे।

    भविष्य में और बड़े प्रोजेक्ट की योजना

    इस परियोजना को चीन के लंबे समय से चले आ रहे स्मॉग संकट से निपटने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयोग माना जा रहा है। वैज्ञानिक अब इससे भी बड़ा मॉडल विकसित करने की योजना पर काम कर रहे हैं, जिसकी ऊंचाई लगभग 500 मीटर और व्यास 200 मीटर तक हो सकता है।

    ऐसी प्रस्तावित प्रणाली के साथ विशाल ग्रीनहाउस जोड़े जाने की योजना है, जिससे किसी छोटे शहर की हवा को भी साफ करने की क्षमता विकसित की जा सके। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि वायु प्रदूषण का स्थायी समाधान केवल ऐसी तकनीकों से नहीं, बल्कि उत्सर्जन में कमी और स्वच्छ ऊर्जा के व्यापक उपयोग से ही संभव होगा।

  • चीन ने 10 अमेरिकी रक्षा कंपनियों पर लगाया निर्यात प्रतिबंध, 46 फर्मों की खरीद पर भी रोक

    चीन ने 10 अमेरिकी रक्षा कंपनियों पर लगाया निर्यात प्रतिबंध, 46 फर्मों की खरीद पर भी रोक

    बीजिंग। अमेरिका और चीन के बीच जारी कारोबारी एवं रणनीतिक टकराव एक बार फिर तेज हो गया है। चीन ने अमेरिका की हालिया कार्रवाई के जवाब में 10 अमेरिकी सैन्य क्षेत्र से जुड़ी कंपनियों पर निर्यात प्रतिबंध लगाने के साथ 46 रक्षा कंपनियों के उत्पादों की सरकारी खरीद पर भी रोक लगा दी है।

    चीन के वाणिज्य मंत्रालय ने सोमवार को घोषणा करते हुए कहा कि देश की कंपनियां अब इन 10 अमेरिकी फर्मों को दोहरे उपयोग (डुअल-यूज) वाली वस्तुओं का निर्यात नहीं करेंगी। ऐसी वस्तुएं वे होती हैं जिनका इस्तेमाल नागरिक और सैन्य दोनों उद्देश्यों के लिए किया जा सकता है।

    राष्ट्रीय सुरक्षा का हवाला देकर उठाया कदम

    चीन का कहना है कि यह फैसला राष्ट्रीय सुरक्षा हितों की रक्षा और अमेरिकी सरकार द्वारा चीनी सैन्य कंपनियों की सूची का दायरा बढ़ाने के जवाब में लिया गया है। प्रतिबंधित अमेरिकी कंपनियों में सैन्य ड्रोन निर्माण और दुर्लभ खनिजों के क्षेत्र से जुड़ी कंपनियां भी शामिल हैं।

    वहीं, चीन के वित्त मंत्रालय ने सरकारी विभागों और संस्थानों को 46 अमेरिकी रक्षा कंपनियों से उत्पाद खरीदने पर रोक लगाने का निर्देश दिया है। इनमें लॉकहीड मार्टिन और रेथियॉन मिसाइल्स एंड डिफेंस जैसी प्रमुख रक्षा कंपनियां भी शामिल हैं। हालांकि, चीन ने यह भी स्पष्ट किया है कि अत्यावश्यक वस्तुओं के लिए विशेष निर्यात अनुमति का आवेदन किया जा सकता है।

    अमेरिकी सूची में शामिल हुईं अलीबाबा और बायजू

    इस महीने की शुरुआत में अमेरिकी रक्षा विभाग ने कई चीनी प्रौद्योगिकी कंपनियों को उन संस्थाओं की सूची में जोड़ा था, जिनके बारे में अमेरिका का दावा है कि उनके चीन की सेना से संबंध हैं। इस सूची में अलीबाबा और बायजू जैसी कंपनियों के नाम भी शामिल किए गए।

    बायजू ने अमेरिकी आरोपों को पूरी तरह निराधार बताते हुए खारिज कर दिया है। अमेरिकी सूची में शामिल होने के बाद इन कंपनियों के लिए अमेरिकी सेना से जुड़े कॉन्ट्रैक्ट हासिल करना संभव नहीं रहेगा। चीन ने इस कदम की आलोचना करते हुए कहा था कि यह कार्रवाई मई में राष्ट्रपति शी जिनपिंग और डोनाल्ड ट्रंप के बीच बनी सहमति की भावना के विपरीत है।

    तकनीक और व्यापार को लेकर जारी है खींचतान

    दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच व्यापारिक तनाव लंबे समय से जारी है। इसका केंद्र आयात शुल्क, उन्नत तकनीक और वैश्विक आपूर्ति शृंखलाओं पर नियंत्रण को लेकर बढ़ती प्रतिस्पर्धा है। अमेरिका ने चीनी उत्पादों पर कई बार अतिरिक्त आयात शुल्क लगाए हैं, जिसके जवाब में चीन ने भी अमेरिकी वस्तुओं और कृषि उत्पादों पर प्रतिशोधात्मक शुल्क लागू किए। इसके अलावा सेमीकंडक्टर, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) और क्वांटम कंप्यूटिंग जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में बढ़ती प्रतिस्पर्धा के चलते दोनों देशों ने एक-दूसरे पर कई निर्यात नियंत्रण और प्रतिबंध लगाए हैं।

  • मानसून की सुस्ती से बढ़ी कृषि क्षेत्र की चिंता, कपास-सोयाबीन की बुआई घटी, टेक्सटाइल सेक्टर पर पड़ सकता है असर

    मानसून की सुस्ती से बढ़ी कृषि क्षेत्र की चिंता, कपास-सोयाबीन की बुआई घटी, टेक्सटाइल सेक्टर पर पड़ सकता है असर

    नई दिल्ली। दक्षिण-पश्चिम मानसून की धीमी रफ्तार ने देश में खरीफ सीजन की तैयारियों पर असर डालना शुरू कर दिया है। अब तक सामान्य से 43 फीसदी कम बारिश दर्ज होने के कारण कपास और सोयाबीन जैसी प्रमुख नकदी फसलों की बुआई अपेक्षा से काफी पीछे चल रही है। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जल्द पर्याप्त बारिश नहीं हुई तो इसका असर कृषि उत्पादन के साथ-साथ उद्योगों पर भी दिखाई दे सकता है।

    कृषि मंत्रालय के 19 जून तक के आंकड़ों के अनुसार, देश में कपास की बुआई 17.13 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में हुई है, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह आंकड़ा 22.82 लाख हेक्टेयर था। यानी इस बार करीब 5.69 लाख हेक्टेयर कम क्षेत्र में कपास बोई गई है। कपास के रकबे में आई यह गिरावट संकेत दे रही है कि किसान फिलहाल इस फसल की ओर कम रुझान दिखा रहे हैं।

    विशेषज्ञों के अनुसार यदि अगले कुछ सप्ताह में कपास की बुआई में तेजी नहीं आई तो कच्चे कपास और यार्न की कीमतों में उछाल आ सकता है, जिससे वस्त्र उद्योग की लागत बढ़ने की आशंका है।

    सोयाबीन की सुस्ती से तिलहन क्षेत्र भी प्रभावित

    कपास के साथ-साथ तिलहन फसलों की बुआई भी दबाव में है। इसकी प्रमुख वजह सोयाबीन की धीमी बुआई है। पिछले वर्ष इसी अवधि में सोयाबीन का रकबा 2.50 लाख हेक्टेयर था, जो इस बार घटकर 1.30 लाख हेक्टेयर रह गया है। यानी करीब 1.20 लाख हेक्टेयर की कमी दर्ज की गई है।

    सोयाबीन के कमजोर प्रदर्शन का असर कुल तिलहन क्षेत्र पर भी पड़ा है। पिछले साल जहां तिलहन फसलों का रकबा 8.11 लाख हेक्टेयर था, वहीं इस बार यह घटकर 7.24 लाख हेक्टेयर रह गया है। हालांकि मूंगफली और सूरजमुखी की खेती में हल्की बढ़ोतरी दर्ज की गई है, लेकिन वह सोयाबीन की कमी की भरपाई नहीं कर पा रही है।

    धान और बाजरा किसानों की पहली पसंद बने

    इसके विपरीत धान और मोटे अनाजों की बुआई में वृद्धि दर्ज की गई है। धान का रकबा 4.26 लाख हेक्टेयर बढ़कर 12.36 लाख हेक्टेयर तक पहुंच गया है। वहीं बाजरा सहित मोटे अनाजों का क्षेत्रफल 2.14 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 4.05 लाख हेक्टेयर हो गया है।

    विशेषज्ञों का कहना है कि धान और मोटे अनाजों में सरकारी खरीद की मजबूत व्यवस्था और अपेक्षाकृत कम जोखिम किसानों को आकर्षित कर रहे हैं। दूसरी ओर कपास और सोयाबीन में वैश्विक बाजार की अनिश्चितता तथा कीट प्रकोप का खतरा किसानों को सतर्क बना रहा है।

    जल प्रबंधन व्यवस्था पर मूडीज की चिंता

    इस बीच, मूडीज रेटिंग्स ने अपनी ताजा रिपोर्ट में भारत की जल प्रबंधन व्यवस्था को लेकर चिंता जताई है। एजेंसी का कहना है कि पानी के आवंटन, मूल्य निर्धारण और वितरण से जुड़ी मौजूदा व्यवस्थाएं देश के लिए वित्तीय और क्रेडिट जोखिम पैदा कर रही हैं।

    रिपोर्ट के अनुसार यदि जल प्रबंधन ढांचे में समय रहते सुधार नहीं किए गए तो भविष्य में राज्यों की वित्तीय स्थिति और उनकी क्रेडिट रेटिंग पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।

    खेती में खप रहा 80 फीसदी ताजा पानी

    मूडीज के मुताबिक भारत में पानी की कीमतें विशेष रूप से कृषि क्षेत्र के लिए अत्यधिक रियायती हैं। देश के कुल ताजे जल संसाधनों का लगभग 80 फीसदी हिस्सा खेती में उपयोग हो रहा है। सब्सिडी आधारित व्यवस्था के कारण पानी का अत्यधिक दोहन हो रहा है, जिससे भूजल स्तर लगातार नीचे जा रहा है।

    एआई और डाटा सेंटर भी बढ़ा रहे दबाव

    रिपोर्ट में एक नए उभरते खतरे की ओर भी संकेत किया गया है। देश में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और क्लाउड कंप्यूटिंग के विस्तार के साथ बड़े पैमाने पर डाटा सेंटर स्थापित किए जा रहे हैं। इन केंद्रों को ठंडा रखने के लिए भारी मात्रा में पानी की आवश्यकता होती है।

    मूडीज का मानना है कि डाटा सेंटरों की बढ़ती जल मांग पहले से दबाव झेल रही जल आपूर्ति व्यवस्था के लिए नई चुनौती बन सकती है। आने वाले वर्षों में सरकारों और यूटिलिटी कंपनियों को इस अतिरिक्त दबाव से निपटने के लिए प्रभावी रणनीति बनानी होगी।

  • राज कुमार की बेबाकी के आगे क्यों टिक गए ओम पुरी जानिए दिलचस्प किस्सा

    राज कुमार की बेबाकी के आगे क्यों टिक गए ओम पुरी जानिए दिलचस्प किस्सा


    नई दिल्ली। हिंदी सिनेमा में कई कलाकार अपनी मजबूत पर्सनैलिटी और बेबाक अंदाज के लिए जाने जाते रहे हैं और राज कुमार उनमें सबसे अलग माने जाते थे। उनकी छवि ऐसे अभिनेता की थी जो सेट पर किसी से भी बिना झिझक अपनी बात कह देते थे और कई बार यह बात सीधे तौर पर किसी की बेइज्जती जैसी लगती थी। लेकिन इसी इंडस्ट्री में एक ऐसा भी किस्सा सामने आता है जिसमें उनके सामने एक ऐसे अभिनेता आए जिनके बारे में कहा जाता है कि राज कुमार भी उनके सामने कुछ कहने से बच गए।

    यह कहानी जुड़ी है ओम पुरी से जिनका शुरुआती फिल्मी सफर काफी संघर्षों से भरा रहा। ओम पुरी जब इंडस्ट्री में आए तो उन्हें अपने लुक्स और साधारण पृष्ठभूमि के कारण कई तरह की टिप्पणियों का सामना करना पड़ा। उस दौर में शबाना आजमी ने भी उनके लुक्स को लेकर हल्का सा कमेंट किया था जिससे उन्हें यह अहसास हुआ कि फिल्म इंडस्ट्री में स्वीकार किए जाना आसान नहीं होता।

    इसी माहौल में ओम पुरी के मन में यह डर भी बैठ गया था कि जब वे राज कुमार जैसे सख्त और बेबाक अभिनेता के साथ काम करेंगे तो शायद उन्हें भी किसी तरह की तीखी टिप्पणी सुननी पड़ सकती है। इस डर की वजह से उन्होंने मन ही मन यह तय कर लिया था कि अगर शूटिंग के दौरान कुछ अपमानजनक हुआ तो वह फिल्म बीच में ही छोड़ देंगे।

    लेकिन वास्तविकता उनके डर से बिल्कुल अलग साबित हुई। ओम पुरी की एक्स वाइफ सीमा कपूर ने एक इंटरव्यू में बताया कि इंडस्ट्री में नए कलाकारों को कई बार उनके सीनियर्स द्वारा टारगेट किया जाता था और उन्हें मानसिक रूप से परेशान करने की कोशिश भी होती थी। लेकिन ओम पुरी ने अपने करियर में आगे बढ़ते हुए कभी भी किसी जूनियर के साथ वैसा व्यवहार नहीं किया।

    सीमा कपूर के अनुसार जब ओम पुरी ने राज कुमार के साथ काम किया तो एक अलग ही स्थिति देखने को मिली। राज कुमार की पर्सनैलिटी और उनके अभिनय का स्तर इतना मजबूत था कि वह सामने वाले को अपने आप सम्मान देने पर मजबूर कर देता था। ओम पुरी को पूरा डर था कि शायद उनके साथ भी कुछ अपमानजनक व्यवहार होगा लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ।

    बताया जाता है कि राज कुमार ने ओम पुरी के साथ किसी तरह की बेइज्जती या तंज जैसी बात नहीं की। इसका कारण यह माना जाता है कि ओम पुरी का अभिनय और उनका गंभीर रवैया इतना प्रभावशाली था कि राज कुमार ने उनके प्रति एक अलग सम्मान बनाए रखा। यह वही दौर था जब ओम पुरी अपने काम को लेकर पूरी तरह समर्पित थे और उनकी एक्टिंग इंडस्ट्री में अपनी अलग पहचान बना रही थी।

    सीमा कपूर ने यह भी बताया कि उस समय फिल्म इंडस्ट्री में नए कलाकारों को कई तरह की मानसिक चुनौतियों से गुजरना पड़ता था लेकिन टैलेंट और आत्मविश्वास धीरे धीरे उन्हें मजबूत बनाता था। ओम पुरी ने भी इसी संघर्ष से सीखकर अपने करियर में आगे बढ़ते हुए कभी किसी के साथ गलत व्यवहार नहीं किया।

    यह किस्सा आज भी फिल्म इंडस्ट्री के उस दौर की झलक दिखाता है जब पर्सनैलिटी और टैलेंट दोनों ही किसी भी कलाकार के लिए सबसे बड़ी ताकत होते थे।

  • फिल्मफेयर 1962 की वह रात जब दिलीप कुमार रह गए पीछे राज कपूर ने मारी बाजी

    फिल्मफेयर 1962 की वह रात जब दिलीप कुमार रह गए पीछे राज कपूर ने मारी बाजी


    नई दिल्ली। भारतीय सिनेमा के सुनहरे दौर में कई ऐसे मौके आए जब दर्शकों की पसंद और अवॉर्ड के फैसलों में अंतर देखने को मिला। ऐसा ही एक यादगार किस्सा साल 1962 के फिल्मफेयर अवॉर्ड से जुड़ा है। उस समय दिलीप कुमार और राज कपूर दोनों ही अपने करियर के शिखर पर थे और दोनों की फिल्मों ने दर्शकों के दिलों पर गहरी छाप छोड़ी थी। यह मुकाबला केवल दो कलाकारों के बीच नहीं था बल्कि दो अलग अलग तरह की फिल्मों और सोच के बीच भी था।

    साल 1961 में दिलीप कुमार की फिल्म गंगा जमुना ने बॉक्स ऑफिस पर बड़ी सफलता हासिल की। इस फिल्म में उन्होंने न सिर्फ मुख्य भूमिका निभाई बल्कि इसकी कहानी और पटकथा में भी योगदान दिया। यह फिल्म ग्रामीण पृष्ठभूमि पर आधारित थी और इसमें भाईचारे सामाजिक संघर्ष और पारिवारिक भावनाओं को गहराई से दिखाया गया था। दिलीप कुमार ने गंगा नाम के किरदार में ऐसा अभिनय किया जिसे आज भी उनके सबसे मजबूत प्रदर्शनों में गिना जाता है। वैजयंती माला ने भी इस फिल्म में अहम भूमिका निभाई और कहानी को और प्रभावशाली बनाया। यह फिल्म उस साल की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्मों में शामिल रही और इसे आलोचकों की भी खूब सराहना मिली।

    इसी दौरान राज कपूर की फिल्म जिस देश में गंगा बहती है भी चर्चा में थी। इस फिल्म में राज कपूर ने राजू नाम के एक ऐसे युवक का किरदार निभाया था जो अनाथ होता है और बाद में डाकुओं के समूह में पहुंच जाता है। कहानी में वह देखता है कि यह समूह अमीरों से लूटकर गरीबों की मदद करता है। धीरे धीरे उसका नजरिया बदलता है और वह अहिंसा और सुधार की राह पर चलता है। इस फिल्म का सामाजिक संदेश बहुत मजबूत था और यह आम जनता के बीच बेहद लोकप्रिय हुई।

    जब फिल्मफेयर अवॉर्ड 1962 में घोषणा हुई तो सभी को उम्मीद थी कि बेस्ट एक्टर का पुरस्कार दिलीप कुमार को मिलेगा क्योंकि गंगा जमुना को एक मास्टरपीस माना जा रहा था। लेकिन नतीजा चौंकाने वाला रहा और यह अवॉर्ड राज कपूर को मिल गया। उनके किरदार की सामाजिक न्याय की भावना और बदलाव की कहानी को निर्णायक माना गया। उस समय जूरी ने माना कि राज कपूर का किरदार समाज में सकारात्मक संदेश देने वाला था और यही उन्हें बढ़त दिला गया।

    इस फैसले ने फिल्म इंडस्ट्री में लंबे समय तक चर्चा पैदा की। एक तरफ दिलीप कुमार की गहरी भावनात्मक अभिनय शैली थी और दूसरी तरफ राज कपूर का सामाजिक संदेश से भरा चरित्र था। अंत में पुरस्कार उस किरदार को मिला जिसने सामाजिक बदलाव की सोच को दर्शाया।

    यह घटना आज भी बॉलीवुड इतिहास में एक महत्वपूर्ण उदाहरण के रूप में याद की जाती है जब कला की श्रेष्ठता केवल अभिनय से नहीं बल्कि उसके सामाजिक प्रभाव से भी तय हुई।

  • फिलाडेल्फिया में फ्रांस का जलवा एम्बाप्पे के दो गोल से नॉकआउट में एंट्री

    फिलाडेल्फिया में फ्रांस का जलवा एम्बाप्पे के दो गोल से नॉकआउट में एंट्री


    नई दिल्ली। फीफा वर्ल्ड कप 2026 में फ्रांस ने एक बार फिर अपना दमखम दिखाते हुए इराक को 3 0 से हराकर नॉकआउट राउंड में जगह पक्की कर ली। फिलाडेल्फिया में खेले गए इस मुकाबले में बारिश और खराब मौसम भी खेल का रोमांच कम नहीं कर सके और पूरे मैच में फ्रांस का दबदबा बना रहा। इस जीत के सबसे बड़े हीरो रहे Kylian Mbappé जिन्होंने दो गोल दागकर टीम को आसान जीत दिलाई।

    मैच की शुरुआत से ही फ्रांस ने आक्रामक खेल दिखाया। एम्बाप्पे ने 14वें मिनट में पहला गोल कर टीम को बढ़त दिला दी। इसके बाद इराक की टीम संभलने की कोशिश करती रही लेकिन फ्रांस का दबाव लगातार बढ़ता गया। दूसरे हाफ में 54वें मिनट में एम्बाप्पे ने एक और गोल कर स्कोर 2 0 कर दिया। यह गोल इराकी डिफेंडर की गलती का फायदा उठाकर किया गया, जिसमें एम्बाप्पे ने अपनी तेज रफ्तार और सटीक फिनिशिंग का बेहतरीन प्रदर्शन किया।

    इसके बाद उस्मान डेम्बेले ने तीसरा गोल कर फ्रांस की जीत पर मुहर लगा दी। इस जीत के साथ फ्रांस ने न केवल नॉकआउट राउंड में जगह बनाई बल्कि यह भी साबित कर दिया कि वह इस टूर्नामेंट की सबसे मजबूत दावेदार टीमों में शामिल है।

    यह मुकाबला मौसम की वजह से भी चर्चा में रहा। पहले हाफ के बाद तेज बारिश और तूफान की चेतावनी के चलते मैच को करीब दो घंटे तक रोकना पड़ा। मैदान पर पानी भर जाने के कारण खेल दोबारा शुरू कराना चुनौतीपूर्ण रहा लेकिन ग्राउंड स्टाफ की मेहनत के बाद मैच फिर से शुरू हुआ और फ्रांस ने अपनी लय बनाए रखी।

    इस मुकाबले में एम्बाप्पे के लिए यह और भी खास रहा क्योंकि यह उनका 100वां अंतरराष्ट्रीय मैच था। अपने करियर के इस अहम पड़ाव पर उन्होंने दो गोल कर इसे यादगार बना दिया। इस प्रदर्शन के साथ उन्होंने विश्व कप में अपने गोलों की संख्या 16 तक पहुंचा दी और कई दिग्गजों को पीछे छोड़ दिया।

    एम्बाप्पे ने इस उपलब्धि के साथ जर्मनी के मिरोस्लाव क्लोज की बराबरी कर ली और ब्राजील के दिग्गज रोनाल्डो को पीछे छोड़ दिया। अब उनसे आगे केवल अर्जेंटीना के कप्तान लियोनेल मेसी हैं जिनके नाम 18 विश्व कप गोल दर्ज हैं।

    इराक की टीम के लिए यह मैच निराशाजनक रहा। टीम के प्रमुख स्ट्राइकर अयमेन हुसैन चोट के कारण मैदान छोड़ने को मजबूर हुए जिससे टीम की आक्रामक क्षमता कमजोर पड़ गई। इराक के लिए यह विश्व कप में सिर्फ दूसरा ही मौका था और इस हार के बाद उनका आगे का सफर काफी मुश्किल हो गया है।

    दूसरी ओर ग्रुप I से नॉर्वे ने भी नॉकआउट में जगह बना ली है। इस ग्रुप में मुकाबला बेहद रोमांचक रहा जिसमें नॉर्वे ने सेनेगल को 3 2 से हराया। नॉर्वे की जीत में एर्लिंग हालैंड ने दो गोल दागे जबकि मार्कस पेडरसन ने एक गोल किया। सेनेगल की ओर से इस्माइला सार ने दोनों गोल किए।

    इस तरह फ्रांस और नॉर्वे दोनों ने नॉकआउट में प्रवेश कर लिया है और अब आगे के मुकाबलों में खिताब की दौड़ और भी दिलचस्प हो गई है।

  • एमपी में मानसून की रफ्तार सुस्त, 48 जिले बारिश में पिछड़े, आज 30 जिलों में वर्षा और 4 जिलों में लू का अलर्ट

    एमपी में मानसून की रफ्तार सुस्त, 48 जिले बारिश में पिछड़े, आज 30 जिलों में वर्षा और 4 जिलों में लू का अलर्ट


    भोपाल। मध्य प्रदेश में मानसून की देरी का असर साफ दिखाई दे रहा है। जून के अधिकांश दिन सूखे गुजरने से प्रदेश में अब तक सामान्य से 52 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है। मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार 1 जून से अब तक प्रदेश में औसतन 70.9 मिमी बारिश होनी चाहिए थी, जबकि केवल 34.3 मिमी वर्षा ही रिकॉर्ड की गई है। इंदौर, उज्जैन और ग्वालियर सहित 48 जिलों में सामान्य से कम बारिश हुई है।

    मानसून में देरी बनी कम बारिश की बड़ी वजह

    प्रदेश में मानसून के प्रवेश की सामान्य तिथि 15 जून मानी जाती है, लेकिन इस बार तय समय से 8 दिन बाद भी मानसून पूरी तरह सक्रिय नहीं हो पाया है। मौसम विभाग ने अगले दो से तीन दिनों में मानसून के आगमन की संभावना जताई है। आमतौर पर मानसून के जल्द सक्रिय होने पर तेज बारिश का दौर शुरू हो जाता है, जिससे वर्षा के आंकड़ों में तेजी आती है।

    हालांकि पूरे जून माह में प्री-मानसूनी गतिविधियां जारी हैं, फिर भी पूर्वी मध्य प्रदेश के जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभागों में औसत से 71 प्रतिशत कम वर्षा दर्ज की गई है। वहीं भोपाल, इंदौर, उज्जैन, नर्मदापुरम और ग्वालियर-चंबल क्षेत्र में औसत से 33 प्रतिशत कम बारिश हुई है।

    इन जिलों में बारिश सामान्य से कम

    अनूपपुर, बालाघाट, छतरपुर, छिंदवाड़ा, दमोह, डिंडौरी, जबलपुर, कटनी, मैहर, मंडला, मऊगंज, नरसिंहपुर, निवाड़ी, पांढुर्णा, पन्ना, रीवा, सागर, सतना, सिवनी, शहडोल, सीधी, सिंगरौली, टीकमगढ़, उमरिया, आलीराजपुर, बड़वानी, बैतूल, भिंड, बुरहानपुर, दतिया, देवास, धार, ग्वालियर, हरदा, इंदौर, झाबुआ, खंडवा, खरगोन, मुरैना, नर्मदापुरम, रायसेन, राजगढ़, रतलाम, शाजापुर, सीहोर, शिवपुरी, उज्जैन और विदिशा में सामान्य से कम बारिश दर्ज की गई।

    इन जिलों में सामान्य से अधिक वर्षा

    भोपाल, अशोकनगर, आगर-मालवा, गुना, मंदसौर, नीमच और श्योपुर ऐसे जिले रहे जहां औसत से अधिक बारिश रिकॉर्ड की गई।

    प्री-मानसून सक्रिय, कई जिलों में बरसे बादल

    सोमवार को प्रदेश में प्री-मानसूनी गतिविधियां तेज रहीं। धार में करीब 2 इंच और भोपाल में लगभग पौन इंच बारिश दर्ज की गई। इसके अलावा इंदौर, खंडवा, रायसेन, राजगढ़, उज्जैन, छिंदवाड़ा, जबलपुर, खजुराहो, सागर, सतना, सिवनी, बड़वानी, शाजापुर और सीहोर समेत कई जिलों में आंधी और बारिश का दौर देखने को मिला।

    पचमढ़ी रहा सबसे ठंडा, दतिया सबसे गर्म

    सोमवार को पचमढ़ी प्रदेश का सबसे ठंडा स्थान रहा, जहां अधिकतम तापमान 31.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। धार में 32.9, सिवनी में 34.2, रायसेन में 35.4 और शाजापुर में 35.7 डिग्री तापमान रिकॉर्ड हुआ। वहीं दतिया सबसे गर्म रहा, जहां पारा 42.2 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। सीधी, खजुराहो, टीकमगढ़-नौगांव और नरसिंहपुर में भी तापमान 40 डिग्री या उससे अधिक रहा। प्रदेश के प्रमुख शहरों में इंदौर का तापमान 34.7 डिग्री, उज्जैन 35 डिग्री, भोपाल 35.2 डिग्री, जबलपुर 36 डिग्री और ग्वालियर 40.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।

    आज का मौसम: 4 जिलों में लू, 30 जिलों में बारिश की संभावना

    मौसम विभाग ने मंगलवार को जबलपुर, मंडला, दमोह और उमरिया जिलों में हीटवेव (लू) का अलर्ट जारी किया है। वहीं ग्वालियर, श्योपुर, मुरैना, भिंड, दतिया, शहडोल, अनूपपुर, डिंडौरी, बालाघाट, सिवनी, पांढुर्णा, छिंदवाड़ा, नरसिंहपुर, सागर, विदिशा, रायसेन, नर्मदापुरम, बैतूल, भोपाल, सीहोर, हरदा, देवास, खंडवा, बुरहानपुर, खरगोन, इंदौर, धार, बड़वानी, आलीराजपुर और झाबुआ में तेज आंधी के साथ बारिश होने की संभावना है।

    इसके अलावा नीमच, मंदसौर, रतलाम, उज्जैन, शाजापुर, आगर-मालवा, राजगढ़, गुना, अशोकनगर, शिवपुरी, निवाड़ी, टीकमगढ़, छतरपुर, पन्ना, कटनी, सतना, मैहर, रीवा, मऊगंज, सीधी और सिंगरौली में गर्मी का असर बना रह सकता है।