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  • IND vs ENG: टी20 सीरीज के लिए इंग्लैंड टीम घोषित, अनकैप्ड ऑलराउंडर जेम्स कोल्स की एंट्री से बढ़ी चर्चा

    IND vs ENG: टी20 सीरीज के लिए इंग्लैंड टीम घोषित, अनकैप्ड ऑलराउंडर जेम्स कोल्स की एंट्री से बढ़ी चर्चा


    नई दिल्ली । भारत और इंग्लैंड के बीच होने वाली पांच मैचों की टी20 सीरीज के लिए इंग्लैंड क्रिकेट टीम का आधिकारिक ऐलान कर दिया गया है। यह सीरीज 1 जुलाई से शुरू होगी, जिसका पहला मुकाबला चेस्टर ले स्ट्रीट में खेला जाएगा। वहीं सीरीज का अंतिम मैच 11 जुलाई को साउथम्प्टन में आयोजित होगा। इसके बाद दोनों टीमों के बीच वनडे सीरीज भी खेली जाएगी।

    इंग्लैंड की कमान इस बार हैरी ब्रूक के हाथों में होगी। चयनकर्ताओं ने सीमित ओवरों के प्रारूप में उन पर भरोसा जताते हुए कप्तानी की जिम्मेदारी बरकरार रखी है। ब्रूक इससे पहले टेस्ट टीम की कप्तानी नहीं कर पाए थे, लेकिन टी20 प्रारूप में वह टीम का नेतृत्व करेंगे।

    इस स्क्वॉड में सबसे बड़ी चर्चा 22 वर्षीय अनकैप्ड ऑलराउंडर जेम्स कोल्स की एंट्री को लेकर है। ससेक्स के इस युवा खिलाड़ी ने घरेलू क्रिकेट में शानदार प्रदर्शन के दम पर टीम में जगह बनाई है। हाल ही में उन्होंने काउंटी चैम्पियनशिप में ग्लेमॉर्गन के खिलाफ नाबाद 224 रनों की बेहतरीन पारी खेली थी, जो उनके फर्स्ट क्लास करियर का सर्वोच्च स्कोर है। टी20 ब्लास्ट में भी उन्होंने अपने ऑलराउंड प्रदर्शन से चयनकर्ताओं को प्रभावित किया था।

    टीम चयन में कुछ प्रमुख बदलाव भी देखने को मिले हैं। बेन डकेट को इस टी20 स्क्वॉड में शामिल नहीं किया गया है, जबकि जॉर्डन कॉक्स, सोनी बेकर और साकिब महमूद की वापसी हुई है। चोटों के कारण ब्रायडन कार्स और जेमी ओवर्टन जैसे खिलाड़ी चयन के लिए उपलब्ध नहीं थे, जिसके चलते चयनकर्ताओं ने अपेक्षाकृत बड़ा 17 सदस्यीय स्क्वॉड चुना है।

    इंग्लैंड के चयनकर्ता मार्कस नॉर्थ ने कहा कि जेम्स कोल्स ने अपने प्रदर्शन के दम पर यह अवसर अर्जित किया है। उन्होंने यह भी बताया कि न्यूजीलैंड के खिलाफ टेस्ट सीरीज के तुरंत बाद भारत के खिलाफ टी20 सीरीज शुरू होने के कारण टीम में अतिरिक्त विकल्प रखना जरूरी था।

    भारत और इंग्लैंड के बीच यह टी20 सीरीज बेहद रोमांचक होने की उम्मीद है, खासकर तब जब भारत की युवा बल्लेबाजी लाइनअप और इंग्लैंड की नई रणनीति आमने-सामने होंगी। इसके बाद वनडे सीरीज भी खेली जाएगी, जो दोनों टीमों के लिए आगामी ICC टूर्नामेंट्स की तैयारी का अहम हिस्सा मानी जा रही है।

  • भारत-अमेरिका रक्षा साझेदारी मजबूत: 482 मिलियन डॉलर का सपोर्ट पैकेज, अपाचे और M777 की बढ़ेगी ताकत

    भारत-अमेरिका रक्षा साझेदारी मजबूत: 482 मिलियन डॉलर का सपोर्ट पैकेज, अपाचे और M777 की बढ़ेगी ताकत


    नई दिल्ली । भारत और अमेरिका के बीच रक्षा सहयोग को एक और बड़ा बढ़ावा मिला है। अमेरिका ने भारत के लिए 482.2 मिलियन डॉलर यानी लगभग 4,555 करोड़ रुपये के सैन्य सहायता पैकेज को मंजूरी दी है। यह प्रस्तावित डील भारत के पास मौजूद AH-64E अपाचे अटैक हेलीकॉप्टर और M777A2 अल्ट्रा-लाइट हॉवित्जर तोपों के लिए सपोर्ट सर्विसेज से जुड़ी है। इस डील के तहत किसी नए हथियार की खरीद नहीं की जा रही है, बल्कि मौजूदा सिस्टम की ऑपरेशनल क्षमता को बनाए रखने और मजबूत करने पर जोर दिया गया है।

    अमेरिकी रक्षा सुरक्षा सहयोग एजेंसी यानी DSCA ने 17 जून को इस प्रस्ताव की औपचारिक सूचना फेडरल रजिस्टर में जारी की। इसके बाद इसे भारत-अमेरिका रक्षा साझेदारी में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि यह सहायता पैकेज भारत की रक्षा तैयारियों को मजबूत करेगा और मौजूदा एवं संभावित सुरक्षा चुनौतियों से निपटने की क्षमता को बेहतर बनाएगा।

    इस पैकेज में अपाचे हेलीकॉप्टरों और M777 हॉवित्जर तोपों के लिए तकनीकी सहायता, स्पेयर पार्ट्स, मेंटेनेंस सपोर्ट, लॉजिस्टिक सेवाएं और प्रशिक्षण शामिल हैं। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि ये दोनों अत्याधुनिक हथियार प्रणाली हमेशा युद्ध के लिए तैयार स्थिति में रहें।

    भारत पहले ही अमेरिका से M777A2 अल्ट्रा-लाइट हॉवित्जर तोपें खरीद चुका है, जिन्हें विशेष रूप से ऊंचाई वाले और दुर्गम इलाकों में तैनात करने के लिए डिजाइन किया गया है। इनका इस्तेमाल भारतीय सेना की आर्टिलरी क्षमता को मजबूत करने के लिए किया जाता है, खासकर सीमावर्ती और पहाड़ी क्षेत्रों में।

    इसी तरह, भारतीय सेना और वायुसेना के पास AH-64E अपाचे अटैक हेलीकॉप्टर भी मौजूद हैं, जिन्हें दुनिया के सबसे उन्नत कॉम्बैट हेलीकॉप्टरों में गिना जाता है। ये हेलीकॉप्टर सटीक हमलों और युद्ध के मैदान में समर्थन के लिए बेहद महत्वपूर्ण माने जाते हैं।

    भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने इस प्रस्ताव का स्वागत करते हुए कहा कि यह भारत-अमेरिका रक्षा साझेदारी को और गहरा करता है। उन्होंने कहा कि दोनों देश लगातार रक्षा क्षेत्र में मिलकर काम कर रहे हैं और यह सहयोग क्षेत्रीय सुरक्षा संतुलन के लिए भी अहम है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि यह डील केवल तकनीकी सहायता तक सीमित नहीं है, बल्कि यह दोनों देशों के बीच रणनीतिक भरोसे और दीर्घकालिक सैन्य सहयोग को भी दर्शाती है। हिंद-प्रशांत क्षेत्र में बदलते सुरक्षा हालात के बीच यह साझेदारी भारत की सैन्य तैयारी को और मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

    इस तरह यह 482 मिलियन डॉलर का पैकेज भारतीय सेना की मौजूदा क्षमता को बनाए रखने के साथ-साथ उसकी परिचालन दक्षता को भी बढ़ाएगा, जिससे अपाचे हेलीकॉप्टर और M777 हॉवित्जर सिस्टम और अधिक प्रभावी तरीके से काम कर सकेंगे।

  • कॉलेजियम पर सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी: सिर्फ वरिष्ठता से नहीं मिलता जज बनने का अधिकार

    कॉलेजियम पर सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी: सिर्फ वरिष्ठता से नहीं मिलता जज बनने का अधिकार


    नई दिल्ली । सुप्रीम कोर्ट ने न्यायपालिका में जजों की नियुक्ति और पदोन्नति से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में स्पष्ट संदेश देते हुए कहा है कि केवल वरिष्ठता किसी अधिकारी को हाईकोर्ट का जज बनने का अधिकार नहीं देती। अदालत ने दोहराया कि जजों के चयन की प्रक्रिया में उम्मीदवार की उपयुक्तता योग्यता और समग्र मूल्यांकन को प्राथमिकता दी जाती है। साथ ही शीर्ष अदालत ने यह भी स्पष्ट कर दिया कि हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम द्वारा लिए गए निर्णय न्यायिक समीक्षा और सूचना के अधिकार अधिनियम के दायरे से बाहर हैं।

    यह टिप्पणी हिमाचल प्रदेश के वरिष्ठ न्यायिक अधिकारी अरविंद मल्होत्रा की याचिका पर सुनवाई के दौरान की गई। मल्होत्रा ने दावा किया था कि उनकी उम्मीदवारी को उचित तरीके से नहीं देखा गया और उनसे जूनियर अधिकारियों को हाईकोर्ट जज के पद के लिए आगे बढ़ा दिया गया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि हाईकोर्ट कॉलेजियम ने सुप्रीम कोर्ट के पूर्व निर्देशों का पूरी तरह पालन नहीं किया।

    मामले की सुनवाई कर रही जस्टिस बी वी नागरत्ना और जस्टिस जोयमाल्या बागची की पीठ ने याचिका पर हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया। अदालत ने कहा कि कॉलेजियम के निर्णयों में दखल देना उचित नहीं होगा क्योंकि इससे पूरी चयन प्रक्रिया पर अनावश्यक विवाद खड़ा हो सकता है। पीठ ने कहा कि किसी भी उम्मीदवार का चयन व्यापक विचार विमर्श और मूल्यांकन के बाद किया जाता है तथा केवल वरिष्ठता के आधार पर किसी को प्राथमिकता नहीं दी जा सकती।

    सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से यह दलील दी गई कि पहले दिए गए एक आदेश में सुप्रीम कोर्ट ने चयन प्रक्रिया को अधिक सामूहिक और पारदर्शी बनाने की आवश्यकता जताई थी। हालांकि अदालत ने माना कि कॉलेजियम की प्रक्रिया अपने निर्धारित मानकों और उपलब्ध सूचनाओं के आधार पर संचालित होती है तथा इसमें उम्मीदवारों की उपयुक्तता का मूल्यांकन सबसे महत्वपूर्ण तत्व होता है।

    पीठ ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि किसी जूनियर अधिकारी की सिफारिश की जाती है तो इससे वरिष्ठ अधिकारी को स्वतः कानूनी चुनौती देने का अधिकार नहीं मिल जाता। अदालत के अनुसार कॉलेजियम का निर्णय उसकी संतुष्टि और उपलब्ध तथ्यों पर आधारित होता है और उस संतुष्टि को न्यायिक मंच पर चुनौती नहीं दी जा सकती। यही कारण है कि कॉलेजियम द्वारा की गई सिफारिशों को न्यायिक समीक्षा के दायरे से बाहर माना गया है।

    सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने हाल ही में हिमाचल प्रदेश से तीन न्यायिक अधिकारियों के नाम हाईकोर्ट जज के रूप में मंजूर किए थे। अदालत ने कहा कि इन नामों पर विचार करते समय सभी संबंधित दस्तावेजों सूचनाओं और रिपोर्टों का अध्ययन किया गया था। इसलिए एक बार कॉलेजियम द्वारा निर्णय ले लिए जाने के बाद अदालत उसके सही या गलत होने पर न्यायिक स्तर पर पुनर्विचार नहीं कर सकती।

    पीठ ने अरविंद मल्होत्रा को सलाह देते हुए कहा कि वे अभी अपेक्षाकृत युवा हैं और उन्हें धैर्य रखना चाहिए। साथ ही उन्हें यह स्वतंत्रता भी दी गई कि यदि उनके खिलाफ कोई लंबित जांच या प्रशासनिक प्रक्रिया है तो उसके शीघ्र निपटारे के लिए वे संबंधित हाईकोर्ट के समक्ष अपनी बात रख सकते हैं।

    इस फैसले के जरिए सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि न्यायपालिका में नियुक्ति की प्रक्रिया केवल वरिष्ठता पर आधारित नहीं है बल्कि योग्यता क्षमता निष्पक्षता और समग्र उपयुक्तता जैसे कई महत्वपूर्ण मानकों पर निर्भर करती है। अदालत का यह रुख भविष्य में जज नियुक्ति से जुड़े विवादों के लिए भी एक महत्वपूर्ण मार्गदर्शक माना जा रहा है।

  • Qatar : रास लफ्फान LNG कॉम्प्लेक्स में भीषण धमाका….13 लोगों की मौत, मृतकों में 12 भारतीय

    Qatar : रास लफ्फान LNG कॉम्प्लेक्स में भीषण धमाका….13 लोगों की मौत, मृतकों में 12 भारतीय


    दोहा।
    कतर (Qatar) के रास लफ्फान LNG कॉम्प्लेक्स (Ras Laffan LNG complex) में हुए भीषण धमाके में 13 लोगों की मौत हुई है जिनमें भारतीयों की संख्या 12 बताई जा रही है. वहीं, इस हादसे में 66 लोग घायल हुए हैं. भारतीय दूतावास (Indian Embassy) ने भी इस घटना पर चिंता जताई है. ये हादसा उस समय हुआ जब ईरानी मिसाइल हमले से प्रभावित गैस फैसिलिटी में काम दोबारा शुरू किया जा रहा था।

    कतर के अधिकारियों ने इस घटना को बरजान लोकल गैस सप्लाई फैसिलिटी में हुआ एक टेक्निकल एक्सीडेंट बताया है. यह सुविधा देश के सबसे बड़े LNG प्रोडक्शन और एक्सपोर्ट हब रास लफ्फान इंडस्ट्रियल सिटी का हिस्सा है. कतर के एनर्जी मंत्रालय ने बताया कि हादसे में 13 लोगों की मौत हुई है।

    दोहा स्थित भारतीय दूतावास ने इस हादसे पर गहरी चिंता जताई है. दूतावास ने कहा कि कई लोग घायल हुए हैं और कुछ लोगों के लापता होने की भी जानकारी सामने आई है. कतर के एनर्जी मिनिस्टर साद शेरिदा अल-काबी ने सोमवार को दोहा में मृतकों की संख्या की पुष्टि करते हुए इंडस्ट्रियल हादसा बताया।

    ईरान के होर्मुज स्ट्रेट पर नियंत्रण के बाद कतर ने अपना प्रोडक्शन को रोक दिया था. इसका असर ग्लोबल एनर्जी मार्केट पर पड़ा था. कतर अपने क्लाइंट्स को LNG शिपमेंट नहीं भेज पा रहा था. युद्ध को खत्म करने के लिए बातचीत शुरू होने और ईरान की पकड़ कमजोर होने के बाद एक्सपोर्ट टर्मिनल शुरू करने की कोशिश की जा रही थी।

    सरकारी कंपनी कतरएनर्जी के मुताबिक, रविवार रात बरजान गैस सप्लाई फैसिलिटी में काम के दौरान धमाका हुआ. इसके बाद आग लग गई. कतर दुनिया के सबसे बड़े नैचुरल गैस प्रोड्यूसर देशों में शामिल है. ऐसे में रास लफ्फान जैसे बड़े LNG हब में हुई यह घटना ग्लोबल एनर्जी सप्लाई को लेकर नई चिंता पैदा कर रही है।

  • Delhi: तकिया काले खान इलाके में बाल्मीकि बस्ती में लगी भीषण आग…. कई झुग्गियां जलीं

    Delhi: तकिया काले खान इलाके में बाल्मीकि बस्ती में लगी भीषण आग…. कई झुग्गियां जलीं


    नई दिल्ली।
    देश की राजधानी दिल्ली (Delhi) में एक बार फिर आग की घटना सामने आई है. मौलाना आजाद मेडिकल कॉलेज (Maulana Azad Medical College) के पीछे, तकिया काले खान इलाके (Takiya Kale Khan area) की बाल्मीकि बस्ती (Valmiki Basti) की झुग्गियों में भीषण आग लग गई. घटना की जानकारी मिलते ही दमकल की 24 गाड़ियां तुरंत मौके पर पहुंचीं।

    कड़ी मशक्कत के बाद अब आग पर पूरी तरह से काबू पा लिया गया है. राहत की बात ये है कि इस हादसे में फिलहाल किसी के हताहत होने या किसी की जान जाने की कोई खबर नहीं है।

    फायर ब्रिगेड अधिकारी ने बताया कि उन्हें 11 बजकर 22 मिनट पर आग की जानकारी मिली थी. आग की गंभीरता देखते हुए फायर ब्रिगेड की गाड़ियां बढ़ाई गईं और मशक्कत के बाद आग पर काबू पा लिया गया।


    रात करीब 11 बजे भड़की आग

    घटना के एक चश्मदीद मोहम्मद फैजान ने मीडिया को बताया, ‘रात के पौने 11 बज रहे थे. हम सामने बैठे थे और हमने आग की लपटें उठती हुई देखीं. तो हम इधर की तरफ भागकर आए तो देखा कि आग लग गई थी और आग ऐसी थी कि बुझाए नहीं बुझ रही थी. हम अंदर जा रहे थे तो उसकी लपटें हमारे ऊपर आ रही थीं।

    चश्मदीद ने आगे बताया, ‘एक बिल्डिंग में 8 लोग फंसे हुए थे, जिन्हें अंडरग्राउंड रास्ते से उन्हें निकाला गया. उनके बाहर आते ही सिलेंडर फटने लगे और आग बढ़ती चली गई. फिर फोन करने के 5 मिनट बाद ही एंबुलेंस और फायर ब्रिगेड आ गईं. जब हम बाहर निकल रहे थे, तब तक आग बेकाबू हो चुकी थी. फिर बिजली के खंभों में आग लगने लगी और आग बढ़ते-बढ़ते चारों तरफ फैल गई।


    लकड़ियों की भारी मात्रा के चलते बेकाबू हुई आग

    दूसरे चश्मदीद मोहम्मद यूसुफ ने बताया, ‘जब आग लगी तो हमने हल्की आग समझी और ड्रमों से पानी डालकर बुझाने की कोशिश की. हमने ऊपर सो रहे लोगों को बचाया, फिर लकड़ियां हटवाईं. लेकिन लकड़ियां बहुत थीं, लकड़ी की और पक्की झुग्गियां थीं लेकिन आग काबू नहीं आई. फिर हमें फायर ब्रिगेड की गाड़ियों ने आग से बाहर निकाला क्योंकि बिजली के तारों में भी आग लगी थी. हमने 5-10 लोगों को बचाया।

  • ब्रिटिश PM किएर स्टार्मर ने दिया इस्तीफा…. भारत के साथ रिश्तों की दी मजबूती

    ब्रिटिश PM किएर स्टार्मर ने दिया इस्तीफा…. भारत के साथ रिश्तों की दी मजबूती


    नई दिल्ली।
    किएर स्टार्मर (Keir Starmer) ने ब्रिटेन के प्रधानमंत्री (British Prime Minister) पद से इस्तीफा दे दिया है. उनके इस्तीफे के बाद अब लेबर पार्टी के लिए अपना नया लीडर चुनने का समय और बढ़ गया है. वहीं, नए चुने गए पार्लियामेंट मेंबर एंडी बर्नहैम (Parliament Member Andy Burnham) आने वाले हफ्तों में 10 डाउनिंग स्ट्रीट में चार्ज संभालने वाले हैं।

    ब्रिटिश इंडियन एक्सपर्ट्स का कहना है कि ब्रिटिश प्राइम मिनिस्टर के तौर पर उनके स्टार्मर ने सिर्फ भारत के साथ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट को पूरा किया. इसके साथ ही उन्होंने आगे के लिए भी आपसी रिश्तों को मजबूती दी, जिस पर देश के नए पीएम आगे काम कर सकते हैं।

    कोबरा बीयर के फाउंडर और इंडिया ऑल पार्टी पार्लियामेंट्री ग्रुप के को-चेयर लॉर्ड करण बिलिमोरिया ने कहा, ‘जब भारत की बात आती है, तो उनके प्राइम मिनिस्टर रहते हुए UK-इंडिया फ्री ट्रेड एग्रीमेंट पर साइन हुए थे, जिस पर हमने जनवरी 2022 में ही बातचीत शुरू कर दी थी।


    भारत-ब्रिटेन के रिश्तों की मजबूती में स्टार्मर का रोल

    बिलिमोरिया ने आगे कहा, ‘भारत उनके लिए एक खास रिश्ते और एक खास देश के तौर पर बहुत, बहुत जरूरी है, जहां UK की बात है और हमेशा रहेगी. लेबर पार्टी का अगला लीडर कोई भी हो, भारत उनकी टॉप प्रायोरिटी होगी और वो दुनिया की पांचवीं और छठी सबसे बड़ी इकॉनोमी और दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी इकॉनोमी भारत के बीच UK-भारत के रिश्ते के भविष्य को सबसे जरूरी मानेंगे।

    बिलिमोरिया ने स्टार्मर को एक ‘अच्छा इंसान’ बताया, जो बाइलेटरल पार्टनरशिप की बात आने पर हमेशा सुनते थे. उन्होंने बताया, ‘नौ साल तक, मैं एक के बाद एक प्राइम मिनिस्टर से कहता रहा, चाहे वो बोरिस जॉनसन हों, चाहे ऋषि सुनक हों, एक बड़ा बिजनेस डेलीगेशन भारत ले जाएं क्योंकि इससे बहुत बड़ा असर पड़ेगा. और उनमें से किसी ने ऐसा नहीं किया, लेकिन किएर स्टार्मर ने सुना और पिछले साल अक्टूबर में हम एक बड़ा बिजनेस डेलीगेशन मुंबई ले गए।


    ‘बिजनेस सरकार से पहले आता है…’

    यूके इंडिया बिजनेस काउंसिल के ग्रुप CEO डॉ. किशोर जयरामन ने इन डेवलपमेंट्स को ‘बदलाव का प्रोसेस’ बताया. जयरामन ने कहा, ‘जब FTA पर बातचीत हो रही थी, तब सरकार बदल गई. ग्रेट ब्रिटेन ने जो महानता दिखाई है, वो ये है कि वो सरकार से आगे है. बिजनेस सरकार से पहले आता है.’

    उन्होंने आगे कहा, ‘ये एक ऐसी पार्टनरशिप है जो बहुत लंबे समय तक चलेगी क्योंकि ये सिद्धांतों पर आधारित है, ये एक विन-विन एग्रीमेंट पर आधारित है और ये आगे बढ़ती रहेगी और ये दोनों तरफ की इंडस्ट्री को फायदा पहुंचाती रहेगी. UKIBC एक ट्रेड काउंसिल है जो बिजनेस ग्रोथ को बढ़ावा देती है और हम UK और इंडिया में बिजनेस को सपोर्ट करते रहेंगे और कॉरिडोर को बढ़ाते रहेंगे।


    ट्रेड एग्रीमेंट के जरिए मजबूत किए UK-इंडिया के रिश्ते

    टेक एंटरप्रेन्योर और AI पॉलिसी लैब्स के फाउंडर उदय नागराजू हाल ही में हाउस ऑफ लॉर्ड्स में सबसे नए ब्रिटिश इंडियन लेबर पीयर्स में से एक बने हैं. उनका भी मानना है कि स्टार्मर ने कॉम्प्रिहेंसिव इकोनॉमिक एंड ट्रेड एग्रीमेंट के साथ UK-इंडिया रिश्तों में एक बड़ा कदम आगे बढ़ाने में मदद की है।

    नागराजू ने कहा, ‘मुझे लगता है कि हमारे प्राइम मिनिस्टर, किएर स्टार्मर, इज्जत और एक सीरियस रिकॉर्ड के साथ ऑफिस छोड़ रहे हैं. उन्होंने लेबर पार्टी को सरकार में वापस लाया, स्थिरता और आर्थिक भरोसे को ब्रिटिश राजनीति के केंद्र में वापस लाया. उन्होंने 2024 के आम चुनाव से पहले वादा किया था कि उनके प्रधानमंत्री रहते लेबर सरकार भारत के साथ रिश्ते फिर से ठीक करेगी, जो उन्होंने पूरा किया. उन्होंने कहा, ‘CETA का क्रेडिट किएर और बेशक, भारत सरकार को भी जाता है।

    उन्होंने आगे कहा, ‘मुझे लगता है कि अगले लेबर प्राइम मिनिस्टर ग्रोथ, सिक्योरिटी, क्लीन एनर्जी स्किल्स, टेक, AI और भारत के साथ गहरी स्ट्रेटेजिक पार्टनरशिप के उस प्लेटफॉर्म पर काम करेंगे और उन्हें ऐसा करना चाहिए।


    ‘GDP में बड़े योगदान के लिए याद…’

    लेबर लीडर के तौर पर स्टार्मर के साथ मिलकर काम करने वाले कृष रावल ने स्टार्मर को ऐसा प्राइम मिनिस्टर बताया जिन्होंने भारत के साथ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट पर साइन किया. उनके मुताबिक स्टार्मर को ब्रिटेन की GDP में उनके बड़े योगदान के लिए याद किया जाएगा।

  • UP: लखनऊ अग्निकांड के बाद कानपुर में चला विशेष अभियान, फिजिक्स वाला समेत 22 कोचिंग संस्थान सील

    UP: लखनऊ अग्निकांड के बाद कानपुर में चला विशेष अभियान, फिजिक्स वाला समेत 22 कोचिंग संस्थान सील


    कानपुर।
    उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) की राजधानी लखनऊ (Lucknow) में कोचिंग संस्थान (Coaching Institute) से जुड़े हादसे के बाद कानपुर विकास प्राधिकरण (केडीए) ने शहर के प्रमुख कोचिंग हब काकादेव में बड़े पैमाने पर कार्रवाई शुरू कर दी है. सोमवार को चलाए गए विशेष अभियान (Special Campaign) के दौरान फिजिक्स वाला समेत 22 कोचिंग संस्थानों को सील कर दिया गया. जांच में इन संस्थानों में भवन और सुरक्षा संबंधी मानकों के उल्लंघन की बात सामने आने पर यह कार्रवाई की गई।

    केडीए अधिकारियों की टीम ने अलग-अलग क्षेत्रों में निरीक्षण कर उन संस्थानों को चिह्नित किया, जहां आवश्यक नियमों का पालन नहीं किया जा रहा था. कार्रवाई के दौरान संस्थानों को खाली कराया गया और बाद में उन्हें सील कर दिया गया।

    प्राधिकरण के अनुसार, अभियान के तहत विभिन्न जोनों में एक साथ कार्रवाई की गई. पहले चरण में 22 संस्थानों को चिह्नित किया गया है, जबकि अन्य कोचिंग संस्थानों की भी जांच की जा रही है. अधिकारियों का कहना है कि मानकों की अनदेखी पाए जाने पर आगे भी इसी तरह की कार्रवाई जारी रहेगी।

    सील किए गए संस्थानों में फिजिक्स वाला, वर्कस्पेस, महेंद्राज और केमिस्ट्री वाले संजीव राठौर जैसे चर्चित नाम शामिल हैं. कार्रवाई के दौरान बड़ी संख्या में अधिकारी और कर्मचारी मौके पर मौजूद रहे। वहीं, इस कार्रवाई के बाद स्थानीय लोगों ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल भी उठाए हैं. उनका कहना है कि शहर में लंबे समय से अनेक कोचिंग संस्थान बिना पर्याप्त सुरक्षा इंतजामों और निर्धारित मानकों के संचालित हो रहे हैं, लेकिन नियमित जांच नहीं की जाती।

    लोगों का आरोप है कि किसी बड़े हादसे के बाद ही विभाग सक्रिय होता है और फिर कुछ समय तक अभियान चलाकर कार्रवाई की जाती है। स्थानीय नागरिकों का मानना है कि यदि समय-समय पर निरीक्षण और नियमों के अनुपालन की समीक्षा होती रहे, तो ऐसी स्थिति पैदा होने से पहले ही कमियों को दूर किया जा सकता है और छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकती है।

  • PM मोदी जुलाई में करेंगे 3 देशों की यात्रा ! 38 साल बाद इस देश जाएगा कोई भारतीय प्रधानमंत्री

    PM मोदी जुलाई में करेंगे 3 देशों की यात्रा ! 38 साल बाद इस देश जाएगा कोई भारतीय प्रधानमंत्री


    नई दिल्ली।
    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) जुलाई के महीने में एक अहम विदेशी दौरे पर जा सकते हैं। जानकारी के मुताबिक, पीएम मोदी 6 से 11 जुलाई के बीच इंडो-पैसिफिक क्षेत्र (Indo-Pacific region) के तीन देशों- इंडोनेशिया (Indonesia), ऑस्ट्रेलिया (Australia) और न्यूजीलैंड (New Zealand) की यात्रा कर सकते हैं। तैयारियों से जुड़े लोगों का कहना है कि इस दौरे के दौरान राष्ट्राध्यक्षों के साथ द्विपक्षीय वार्ताएं और भारतीय समुदाय से बातचीत मुख्य एजेंडे में शामिल होगी।

    एक रिपोर्ट के मुताबिक, फिलहाल प्रधानमंत्री के इस प्रस्तावित दौरे का पूरा शेड्यूल अंतिम रूप से तैयार किया जा रहा है। प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) या विदेश मंत्रालय (MEA) की तरफ से अभी तक इस यात्रा को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। ऐसे में यात्रा की तारीखों, जगहों और कार्यक्रमों में बदलाव की संभावना भी बनी हुई है।


    किस देश में क्या रहेगा पीएम मोदी का एजेंडा?

    पीएम मोदी के इस संभावित 3 देशों के दौरे को रणनीतिक और व्यापारिक लिहाज से काफी अहम माना जा रहा है। दौरे का फोकस कुछ इस तरह रह सकता है।

    इंडोनेशिया: अपने दौरे के दौरान पीएम मोदी की मुलाकात इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्राबोवो सुबियांतो से हो सकती है। गौरतलब है कि इससे पहले 7 जून को नई दिल्ली में भारत-इंडोनेशिया संयुक्त आयोग की बैठक हुई थी। इसमें दोनों देशों ने रक्षा, समुद्री सुरक्षा, व्यापार, कनेक्टिविटी, ऊर्जा और आपसी संबंधों को लेकर समीक्षा की थी। पीएम मोदी की यह वार्ता इसी आधार पर आगे बढ़ सकती है।

    ऑस्ट्रेलिया: ऑस्ट्रेलिया दौरे पर पीएम मोदी वहां के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बानीज के साथ कई अहम मुद्दों पर चर्चा करेंगे। माना जा रहा है कि दोनों नेताओं की इस बातचीत का मुख्य फोकस व्यापक रणनीतिक साझेदारी (कम्प्रेहेंसिव स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप), रक्षा और सुरक्षा सहयोग, क्रिटिकल मिनरल्स (महत्वपूर्ण खनिजों), शिक्षा और व्यापार पर रहेगा।

    न्यूजीलैंड का ऐतिहासिक दौरा: इस यात्रा का सबसे खास हिस्सा न्यूजीलैंड का दौरा माना जा रहा है। यहां पीएम मोदी न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन के साथ वार्ता कर सकते हैं। यह दौरा इसलिए भी अहम है क्योंकि साल 1986 में पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की यात्रा के बाद किसी भी भारतीय प्रधानमंत्री का यह पहला न्यूजीलैंड दौरा होगा।


    फ्रांस दौरे से लौटे हैं पीएम मोदी

    बता दें कि हाल ही में प्रधानमंत्री मोदी 13 से 18 जून तक फ्रांस और स्लोवाकिया की यात्रा संपन्न करने के बाद लौट आए हैं। यात्रा के दौरान उन्होंने जी7 शिखर सम्मेलन में भाग लिया और विश्व के कई नेताओं के साथ द्विपक्षीय बैठकें कीं। प्रधानमंत्री मोदी 13 जून को भूमध्यसागरीय शहर नीस पहुंचे थे, जहां उन्होंने मैक्रों के साथ ‘भारत इनोवेट्स’ कार्यक्रम का उद्घाटन किया और द्विपक्षीय बैठक भी की। इससे पहले मोदी ने स्लोवाकिया की “ऐतिहासिक” यात्रा पूरी की। मोदी स्लोवाकिया की यात्रा करने वाले पहले भारतीय प्रधानमंत्री हैं।

  • US ने ईरान से तेल ब्रिक्री पर लगे प्रतिबंध को हटाया…. भारत को भी मिलेगा फायदा

    US ने ईरान से तेल ब्रिक्री पर लगे प्रतिबंध को हटाया…. भारत को भी मिलेगा फायदा


    तेहरान।
    अमेरिका (America) ने ईरान (Iran) के तेल सेक्टर (Oil sector) पर लगे कड़े प्रतिबंधों को अस्थायी तौर पर हटा दिया है। अमेरिकी ट्रेजरी विभाग की ओर से ईरान को 60 दिनों की राहत दी गई है। इसके तहत ईरान अब 21 अगस्त तक कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों (Crude Oil and Petroleum Products) की बिक्री कर सकेगा। अमेरिका के इस कदम का असर ग्लोबल एनर्जी मार्केट के साथ-साथ भारत पर भी देखने को मिलेगा।


    ईरान को क्यों मिली यह छूट?

    17 जून को अमेरिका और ईरान के बीच 60 दिनों के लिए एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर हुए थे। यह 60 दिनों की छूट उसी समझौते का हिस्सा है। इस समझौते के तहत ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में बिना किसी रोक-टोक के मुक्त आवाजाही (फ्री एंड ओपन ट्रांजिट) की अनुमति देने का वादा किया है।

    इसके अलावा, ईरान अब अपने देश में अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के निरीक्षकों को भी आने की इजाजत देगा। अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने स्विट्जरलैंड में हुई इस बातचीत को ‘अच्छी प्रगति’ बताया है और इसे एक बड़ी उपलब्धि करार दिया है।


    किन देशों को तेल बेच सकेगा ईरान?

    इस फैसले के बाद ईरान दुनिया के लगभग हर देश को अपना तेल और पेट्रोलियम उत्पाद बेच सकता है। हालांकि, अमेरिकी प्रतिबंधों का सामना कर रहे उत्तर कोरिया, क्यूबा और क्रीमिया को ईरान तेल नहीं बेच पाएगा। इस सौदे में एक अहम बात यह भी है कि ईरान को तेल का भुगतान अमेरिकी डॉलर में किया जा सकेगा।


    क्या अमेरिका भी करेगा ईरान से तेल का आयात?

    1979 की इस्लामी क्रांति के बाद से अमेरिका ने कभी भी ईरानी तेल का आयात नहीं किया है। लेकिन, अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट की ओर से जारी किए गए नए जनरल लाइसेंस के अनुसार, अगर तेल की बिक्री, डिलीवरी या ऑफलोडिंग की प्रक्रिया को पूरा करने के लिए जरूरी हुआ, तो ईरानी तेल को अमेरिका में भी आयात किया जा सकता है।


    भारत के लिए इस फैसले के क्या हैं मायने?

    साल 2019 में जब अमेरिका ने ईरान पर प्रतिबंध लगाए थे, उससे पहले तक भारत ईरानी तेल का एक बहुत बड़ा खरीदार था। भारत के अलावा दक्षिण कोरिया, जापान, ग्रीस, ताइवान, इटली और तुर्की भी बड़े खरीदार थे।

    2009 के आंकड़ों पर गौर करें तो भारत के कुल कच्चे तेल के आयात में ईरान की 14 फीसदी हिस्सेदारी थी और वह भारत का दूसरा सबसे बड़ा सप्लायर था। लेकिन 2019 में डोनाल्ड ट्रंप के राष्ट्रपति रहते हुए जब ईरान पर फिर से कड़े प्रतिबंध लगाए गए, तब नई दिल्ली ने तेहरान से तेल खरीदना पूरी तरह से बंद कर दिया था। मौजूदा समय में दुनिया भर में तेल सप्लाई की जो किल्लत और अस्थिरता चल रही है, उसे देखते हुए अमेरिका की इस 60 दिन की छूट से भारत को बड़ा फायदा होने की उम्मीद है।

    आपको बता दें कि फिलहाल भारत रूस से रिकॉर्ड स्तर पर तेल खरीद रहा है। मार्केट एनालिटिक्स फर्म केप्लर (Kpler) के अनुसार, केवल जून महीने में भारत ने रूस से 26 लाख बैरल प्रतिदिन तेल का आयात किया है, जो इसी अवधि में भारत के कुल कच्चे तेल आयात का लगभग 54 प्रतिशत है।

  • मेघालय में 530 मिमी बारिश से हालात गंभीर, असम समेत सात राज्यों के लिए मौसम विभाग का अलर्ट

    मेघालय में 530 मिमी बारिश से हालात गंभीर, असम समेत सात राज्यों के लिए मौसम विभाग का अलर्ट


    नई दिल्ली । पूर्वोत्तर भारत में मानसून ने एक बार फिर अपना रौद्र रूप दिखाना शुरू कर दिया है। भारत मौसम विज्ञान विभाग ने असम और मेघालय समेत कई पूर्वोत्तर राज्यों के लिए भारी से बहुत भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। मौसम विभाग के अनुसार 28 जून तक क्षेत्र के अधिकांश हिस्सों में व्यापक वर्षा गतिविधियां जारी रहने की संभावना है। इसके साथ ही कई स्थानों पर गरज-चमक और बिजली गिरने की घटनाएं भी हो सकती हैं।

    आईएमडी के ताजा पूर्वानुमान के मुताबिक अरुणाचल प्रदेश असम मेघालय नागालैंड मणिपुर मिजोरम और त्रिपुरा में आने वाले दिनों में लगातार बारिश का दौर बना रहेगा। 22 जून से 26 जून के बीच कई इलाकों में तेज हवाओं के साथ गरज-चमक और बिजली गिरने की आशंका जताई गई है। मौसम विभाग ने लोगों को सतर्क रहने और आवश्यक सावधानियां बरतने की सलाह दी है।

    रविवार को मेघालय और त्रिपुरा के कई क्षेत्रों में भारी बारिश दर्ज की गई। त्रिपुरा की राजधानी अगरतला में पिछले 24 घंटों के दौरान 102.5 मिमी वर्षा रिकॉर्ड की गई। लगातार बारिश के कारण शहर और आसपास के क्षेत्रों में जलभराव की स्थिति पैदा हो गई जिससे यातायात व्यवस्था प्रभावित हुई और लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा।

    वहीं मेघालय में बारिश ने कई रिकॉर्ड तोड़ दिए। पूर्वी खासी हिल्स जिले के मावसिनराम में मात्र 24 घंटे के भीतर 530 मिमी बारिश दर्ज की गई। मौसम विभाग के अधिकारियों के अनुसार यह मात्रा राजस्थान के कई शुष्क शहरों में छह महीने से अधिक समय में होने वाली कुल बारिश के बराबर है। इसके अलावा आरकेएम सोहरा में 470 मिमी और मावकिरवाट में 390 मिमी बारिश रिकॉर्ड की गई।

    लगातार हो रही मूसलाधार वर्षा का असर क्षेत्र के बुनियादी ढांचे पर भी दिखाई देने लगा है। शिलांग को भारत-बांग्लादेश सीमा पर स्थित डावकी से जोड़ने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग का एक हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया है। सड़क को नुकसान पहुंचने से वाहनों की आवाजाही प्रभावित हुई है और स्थानीय प्रशासन हालात पर नजर बनाए हुए है।

    मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार शेला में 100 मिमी विलियमनगर में 90 मिमी मावरिंगक्नेंग में 90 मिमी जोवाई में 80 मिमी बारापानी में 70 मिमी और रताछेरा में 70 मिमी बारिश दर्ज की गई। इन क्षेत्रों में भी लगातार बारिश के कारण जनजीवन प्रभावित हुआ है।

    दक्षिण-पश्चिम मानसून इस वर्ष 7 जून को पूर्वोत्तर भारत के अधिकांश हिस्सों में पहुंचा था जो सामान्य तिथि से दो दिन देर से था। हालांकि इसके बाद मानसून ने तेजी पकड़ी और सिक्किम सहित पूर्वोत्तर के सभी आठ राज्यों को पूरी तरह कवर कर लिया। मौसम वैज्ञानिकों का मानना है कि वर्तमान परिस्थितियां मानसून के और मजबूत होने के लिए अनुकूल हैं।

    विशेषज्ञों के अनुसार पूर्वोत्तर भारत की भौगोलिक संरचना घने वन क्षेत्र और पहाड़ी भूभाग के कारण यहां मानसूनी गतिविधियां अन्य क्षेत्रों की तुलना में अधिक स्थिर रहती हैं। यही वजह है कि अलनीनो जैसे वैश्विक मौसमीय प्रभावों का असर भी यहां अपेक्षाकृत कम देखने को मिलता है।

    मौसम विभाग का अनुमान है कि इस वर्ष दक्षिण-पश्चिम मानसून के दौरान पूर्वोत्तर राज्यों में सामान्य से लेकर सामान्य से अधिक वर्षा हो सकती है। ऐसे में प्रशासन और स्थानीय लोगों को अगले कुछ दिनों तक विशेष सतर्कता बरतने की जरूरत होगी क्योंकि भारी बारिश के चलते बाढ़ भूस्खलन और यातायात बाधित होने जैसी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं।