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  • एमपी में 27% ओबीसी आरक्षण पर घमासान, विवेक तन्खा ने सरकार से मांगे ठोस आंकड़े, राकेश सिंह ने कांग्रेस को घेरा

    एमपी में 27% ओबीसी आरक्षण पर घमासान, विवेक तन्खा ने सरकार से मांगे ठोस आंकड़े, राकेश सिंह ने कांग्रेस को घेरा


    मध्य प्रदेश। में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) को 27 प्रतिशत आरक्षण देने के मुद्दे पर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के हालिया रुख के बाद कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी के बीच आरोप-प्रत्यारोप शुरू हो गए हैं। राज्यसभा सांसद और वरिष्ठ अधिवक्ता विवेक तन्खा ने राज्य सरकार से आरक्षण के समर्थन में ठोस आंकड़े जुटाकर सुप्रीम कोर्ट में पेश करने की मांग की है। वहीं, प्रदेश सरकार के मंत्री राकेश सिंह ने इस विवाद के लिए कांग्रेस की तत्कालीन सरकार को जिम्मेदार ठहराया है।

    जबलपुर पहुंचे विवेक तन्खा ने कहा कि कांग्रेस सरकार ने अध्यादेश के माध्यम से ओबीसी आरक्षण को 14 प्रतिशत से बढ़ाकर 27 प्रतिशत किया था। इसके बाद प्रदेश में सत्ता परिवर्तन हो गया, लेकिन कानून का बचाव करने की जिम्मेदारी राज्य सरकार की बनी रही। तन्खा के मुताबिक, वर्तमान सरकार को अदालत में इस व्यवस्था के समर्थन में पर्याप्त तथ्य और आंकड़े प्रस्तुत करने चाहिए थे।

    तन्खा ने हाईकोर्ट की कार्यवाही का उल्लेख करते हुए कहा कि राज्य सरकार की ओर से पर्याप्त और ठोस आंकड़े पेश नहीं किए जाने के कारण आरक्षण के पक्ष को मजबूती से रखने में कठिनाई हुई। उनका मानना है कि यदि अदालत के सामने समय रहते जरूरी आंकड़े रखे जाते, तो मामले की स्थिति अलग हो सकती थी। हालांकि, यह उनका आकलन है और अदालत के निर्णय का अंतिम आधार संबंधित कानूनी तथ्यों तथा न्यायिक निष्कर्षों पर निर्भर करता है।

    आरक्षण की सीमा को लेकर विवेक तन्खा ने सुप्रीम कोर्ट के इंदिरा साहनी मामले का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि इस मामले में नौ न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने सामान्य परिस्थितियों में कुल आरक्षण की सीमा 50 प्रतिशत निर्धारित की थी। इस सीमा से आगे जाने के लिए असाधारण परिस्थितियों को प्रमाणित करना आवश्यक है। इसके लिए राज्य सरकार को पिछड़ेपन और संबंधित परिस्थितियों के समर्थन में प्रामाणिक मात्रात्मक आंकड़े अदालत के सामने रखने होते हैं।

    तन्खा ने कहा कि कानूनी प्रक्रिया के तहत अभी भी राज्य सरकार के पास अपना पक्ष रखने का रास्ता है। यदि सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) दायर की है, तो उसे पूरी तैयारी के साथ आगे बढ़ना चाहिए। उनके अनुसार, आरक्षण से जुड़े मामले में आंकड़ों और कानूनी आधार की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। सरकार को उपलब्ध प्रशासनिक जानकारी और संबंधित तथ्यों के आधार पर अपना पक्ष प्रस्तुत करना चाहिए।

    उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि किसी सरकारी अध्यादेश या कानून का बचाव करने की प्राथमिक जिम्मेदारी संबंधित राज्य सरकार की होती है। राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि कानूनी प्रक्रिया में हस्तक्षेप या सहयोग कर सकते हैं, लेकिन सरकार के पास उपलब्ध आधिकारिक आंकड़ों और प्रशासनिक रिकॉर्ड को अदालत में पेश करने का दायित्व सरकार का ही है।

    दूसरी ओर, मंत्री राकेश सिंह ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि वर्ष 2019 में तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने पर्याप्त तैयारी के बिना ओबीसी आरक्षण बढ़ाने का कदम उठाया था। उनके अनुसार, संबंधित विधेयक में तकनीकी और कानूनी कमियां थीं, जिनके कारण मामला विवादों में उलझा। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने ओबीसी वर्ग के हितों के नाम पर ऐसा निर्णय लिया, जिसका कानूनी आधार पर्याप्त मजबूत नहीं था।

    राकेश सिंह ने कहा कि वर्तमान भाजपा सरकार ओबीसी सहित सभी वर्गों के अधिकारों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने भरोसा जताया कि सरकार कानूनी मंचों पर अपना पक्ष रखेगी और ऐसा समाधान तलाशने का प्रयास करेगी, जिससे किसी भी वर्ग के साथ अन्याय न हो।इस पूरे विवाद में अब राज्य सरकार की कानूनी रणनीति और सुप्रीम कोर्ट में पेश किए जाने वाले तथ्यों की भूमिका महत्वपूर्ण होगी। एक ओर विवेक तन्खा ने आंकड़ों के आधार पर मजबूत पैरवी की जरूरत बताई है, वहीं भाजपा ने आरक्षण से जुड़ी मौजूदा कानूनी स्थिति के लिए कांग्रेस की पूर्ववर्ती सरकार को जिम्मेदार ठहराया है।

  • ईरान पर परमाणु हथियार इस्तेमाल नहीं करेंगे ट्रंप, जमीनी सेना भेजने से भी किया इनकार, हमलों के लिए नए विकल्पों पर विचार

    ईरान पर परमाणु हथियार इस्तेमाल नहीं करेंगे ट्रंप, जमीनी सेना भेजने से भी किया इनकार, हमलों के लिए नए विकल्पों पर विचार


    नई दिल्ली ।अमेरिका और ईरान के बीच मध्य पूर्व में जारी संघर्ष के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सैन्य कार्रवाई को लेकर अपना रुख स्पष्ट किया है। उन्होंने कहा है कि अमेरिका ईरान के खिलाफ परमाणु हथियारों का इस्तेमाल नहीं करेगा। इसके साथ ही उन्होंने ईरान की जमीन पर अमेरिकी सैनिकों को तैनात करने की संभावना से भी इनकार किया है। हालांकि, ईरान के ऊर्जा ढांचे और परमाणु ठिकानों को निशाना बनाने के लिए अमेरिकी सैन्य स्तर पर नए विकल्पों पर विचार किए जाने की जानकारी सामने आई है।

    ट्रंप ने एक साक्षात्कार के दौरान परमाणु हथियारों के इस्तेमाल से जुड़े सवाल पर कहा कि उन्हें इसकी जरूरत नहीं है और वह ईरान के खिलाफ परमाणु हथियारों का इस्तेमाल नहीं करेंगे। उनसे यह भी पूछा गया कि क्या अमेरिका ईरान की जमीन पर अपने सैनिक भेजने पर विचार कर रहा है। इस पर उन्होंने कहा कि उन्हें ऐसा होता नहीं दिख रहा। उनके इस बयान से फिलहाल परमाणु हथियारों के इस्तेमाल और जमीनी सैनिकों की तैनाती को लेकर अमेरिकी प्रशासन की घोषित स्थिति सामने आई है।

    ईरान के खिलाफ संभावित सैन्य कार्रवाई को लेकर पारंपरिक हथियारों के इस्तेमाल पर भी चर्चा हो रही है। सामने आई जानकारी के मुताबिक, अमेरिकी सैन्य योजना से जुड़े अधिकारियों ने बताया है कि ट्रंप ने ईरान पर नए हमलों के विकल्प तैयार करने के निर्देश दिए हैं। इन विकल्पों में ईरान के ऊर्जा ढांचे और परमाणु ठिकानों को निशाना बनाने की योजनाएं शामिल हैं। इनमें अमेरिका के शक्तिशाली गैर-परमाणु बम एमओएबी का इस्तेमाल भी एक संभावित विकल्प बताया गया है।

    एमओएबी को आम तौर पर ‘मदर ऑफ ऑल बॉम्ब्स’ कहा जाता है। यह एक शक्तिशाली पारंपरिक बम है, परमाणु हथियार नहीं। ट्रंप ने भी बातचीत के दौरान इसी अंतर को स्पष्ट किया। परमाणु हथियारों के इस्तेमाल से इनकार करने के बावजूद, ईरान के खिलाफ पारंपरिक हथियारों से संभावित हमलों के विकल्पों पर विचार किए जाने की जानकारी सामने आई है।

    ईरान के पिकैक्स माउंटेन क्षेत्र में स्थित ठिकाने को निशाना बनाने का विचार भी चर्चा में है। ट्रंप ने कहा कि अमेरिका ईरान को परमाणु हथियार हासिल नहीं करने देना चाहता। उन्होंने दावा किया कि पहले किए गए अमेरिकी हमलों में ईरान के परमाणु ठिकानों को नुकसान पहुंचा है। उनके अनुसार, ईरान की कुछ परमाणु सुविधाएं पहाड़ों के नीचे स्थित हैं। इसी संदर्भ में पिकैक्स माउंटेन पर हमले की संभावना पर विचार किए जाने की बात कही गई है।

    हालांकि, उपलब्ध जानकारी से यह स्पष्ट नहीं है कि इन संभावित सैन्य विकल्पों में से किसी को अंतिम मंजूरी दी गई है या नहीं। फिलहाल नए हमलों की योजनाएं तैयार करने और विभिन्न विकल्पों पर विचार किए जाने की बात सामने आई है। इसलिए संभावित कार्रवाई और वास्तविक रूप से किए गए हमलों के बीच अंतर करना महत्वपूर्ण है।

    ट्रंप ने बातचीत के दौरान अमेरिका, रूस और चीन के परमाणु हथियार भंडार का भी उल्लेख किया। उन्होंने दावा किया कि अमेरिका के पास दुनिया का सबसे बड़ा परमाणु हथियार भंडार है, जबकि रूस दूसरे और चीन तीसरे स्थान पर है। उन्होंने यह भी कहा कि चीन अगले पांच वर्षों में अमेरिका के करीब पहुंच सकता है। यह उनका आकलन है, न कि भविष्य की स्थिति का स्वतंत्र रूप से प्रमाणित निष्कर्ष।

    अमेरिकी राष्ट्रपति के मुताबिक, अमेरिका रूस और चीन के साथ परमाणु हथियारों में कमी लाने को लेकर बातचीत कर रहा है। उन्होंने उम्मीद जताई कि इन चर्चाओं के जरिए परमाणु हथियारों को समाप्त करने की दिशा में कदम उठाए जा सकते हैं। इस तरह ट्रंप के बयान में एक ओर ईरान के खिलाफ परमाणु हथियारों और जमीनी सैनिकों के इस्तेमाल से इनकार किया गया है, वहीं दूसरी ओर संभावित पारंपरिक सैन्य कार्रवाई और वैश्विक परमाणु हथियारों में कमी को लेकर बातचीत का उल्लेख भी किया गया है।

  • सऊदी अरब जाने वाली उड़ानों पर 24 अक्टूबर तक रोक, एअर इंडिया और एअर इंडिया एक्सप्रेस ने यात्रियों को दी राहत

    सऊदी अरब जाने वाली उड़ानों पर 24 अक्टूबर तक रोक, एअर इंडिया और एअर इंडिया एक्सप्रेस ने यात्रियों को दी राहत

    नई दिल्ली ।सऊदी अरब के मौजूदा हालात को देखते हुए एअर इंडिया और एअर इंडिया एक्सप्रेस ने अपनी उड़ानों को लेकर बड़ा फैसला लिया है। दोनों एयरलाइंस ने सऊदी अरब के तीन प्रमुख शहरों जेद्दा, रियाद और दम्माम के लिए 24 अक्टूबर 2026 तक अपनी सभी उड़ानें अस्थायी रूप से रद्द कर दी हैं। इस फैसले से प्रभावित यात्रियों को राहत देने के लिए टिकट की तारीख बदलने और पूरा रिफंड लेने की सुविधा भी उपलब्ध कराई गई है।

    एयरलाइंस के इस निर्णय से उन यात्रियों की यात्रा योजनाएं प्रभावित हो सकती हैं, जिन्होंने निर्धारित अवधि के दौरान सऊदी अरब आने-जाने के लिए टिकट बुक कराए थे। ऐसे यात्रियों को अपनी यात्रा से संबंधित विकल्पों की जानकारी लेकर उसी के अनुसार आगे की योजना बनाने की सलाह दी गई है। यात्रियों के लिए तारीख बदलने की सुविधा बिना अतिरिक्त शुल्क के उपलब्ध कराई गई है।

    जिन यात्रियों के पास 15 अक्टूबर 2026 या उससे पहले की कन्फर्म बुकिंग है और जिनकी यात्रा 9 से 25 अक्टूबर के बीच निर्धारित थी, वे 10 नवंबर 2026 तक अपनी यात्रा की तारीख बिना अतिरिक्त शुल्क के बदल सकते हैं। इस व्यवस्था के तहत प्रभावित यात्रियों को अपनी यात्रा दोबारा निर्धारित करने का अवसर दिया गया है। हालांकि, यात्रा में बदलाव करते समय संबंधित एयरलाइन की शर्तों और उपलब्ध उड़ानों की जानकारी लेना जरूरी होगा।

    एयरलाइंस ने यात्रियों को वैकल्पिक स्टेशन से यात्रा करने का विकल्प भी दिया है। इसके तहत यात्री अपनी सुविधा और संबंधित एयरलाइन की सेवाओं के आधार पर खाड़ी सहयोग परिषद (जीसीसी) क्षेत्र के किसी दूसरे स्टेशन से आने-जाने के लिए बुकिंग में बदलाव कर सकते हैं। इस सुविधा का उद्देश्य उन यात्रियों को वैकल्पिक व्यवस्था उपलब्ध कराना है, जिनकी मूल उड़ानें रद्द कर दी गई हैं।

    एअर इंडिया के यात्रियों को दुबई या दोहा से आने-जाने वाली उड़ानों के लिए अपनी बुकिंग में बदलाव करने की सुविधा दी गई है। वहीं, एअर इंडिया एक्सप्रेस के यात्री अबू धाबी, अल ऐन, बहरीन, दोहा, दुबई, कुवैत, मस्कट, रास अल खैमाह, सलालाह या शारजाह से आने-जाने वाली उड़ानों के लिए अपनी बुकिंग बदल सकते हैं। इन विकल्पों के जरिए यात्री अपनी जरूरत और उपलब्ध सेवाओं के अनुसार यात्रा की नई योजना बना सकते हैं।

    जिन यात्रियों की उड़ानें रद्द हुई हैं और वे अब यात्रा नहीं करना चाहते, उनके लिए पूरा रिफंड लेने का विकल्प भी रखा गया है। ऐसे यात्री टिकट की तारीख बदलने के बजाय अपनी बुकिंग रद्द कर धनवापसी का अनुरोध कर सकते हैं। इस तरह प्रभावित यात्रियों के पास यात्रा को आगे बढ़ाने या उसे पूरी तरह छोड़ने के दोनों विकल्प उपलब्ध हैं।

    एयरलाइंस का यह फैसला सऊदी अरब में सुरक्षा संबंधी चिंताओं के बीच आया है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, ईरान समर्थित हूती समूह की हमले से जुड़ी गतिविधियों में तेजी आने की खबरों के बाद क्षेत्रीय हालात पर ध्यान दिया जा रहा है। इससे पहले ब्रिटेन के विदेश कार्यालय ने भी अपने नागरिकों के लिए यात्रा संबंधी सलाह जारी की थी। शुक्रवार को जारी सलाह में ब्रिटिश नागरिकों को सऊदी अरब की गैर-जरूरी यात्राओं से बचने की सिफारिश की गई थी।

    ऐसे हालात में सऊदी अरब जाने या वहां से भारत लौटने की योजना बना रहे यात्रियों के लिए अपनी उड़ान की स्थिति की पुष्टि करना महत्वपूर्ण है। जिन यात्रियों की बुकिंग प्रभावित हुई है, वे तारीख बदलने, वैकल्पिक स्टेशन से यात्रा करने या पूरा रिफंड लेने के विकल्पों पर विचार कर सकते हैं।

  • कमजोर मानसून के बीच सरकार का बड़ा फैसला, चीनी और गन्ने से बनने वाले एथेनॉल की खरीद पर लगाई रोक

    कमजोर मानसून के बीच सरकार का बड़ा फैसला, चीनी और गन्ने से बनने वाले एथेनॉल की खरीद पर लगाई रोक


    नई दिल्ली ।
    केंद्र सरकार ने चीनी की कीमतों को नियंत्रित रखने और गन्ने से बनने वाली चीनी की उपलब्धता बनाए रखने के उद्देश्य से एथेनॉल खरीद की नीति में बदलाव किया है। नए निर्देशों के तहत सरकारी ईंधन कंपनियां एक नवंबर 2026 से शुरू होने वाले नए आपूर्ति वर्ष में चीनी और गन्ने के रस से तैयार एथेनॉल की खरीद के लिए प्रस्ताव नहीं मांगेंगी। इस फैसले के पीछे कमजोर मानसून और गन्ने के उत्पादन पर पड़ने वाले प्रभाव को प्रमुख कारण माना गया है।

    सरकारी तेल कंपनियों ने नए आपूर्ति वर्ष के लिए लगभग 1,100 करोड़ लीटर एथेनॉल खरीदने का संयुक्त टेंडर जारी किया है। इसमें इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड, भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड, हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड, नुमालीगढ़ रिफाइनरी लिमिटेड और मैंगलोर रिफाइनरी एंड पेट्रोकेमिकल्स लिमिटेड शामिल हैं। टेंडर में एथेनॉल की खरीद के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले कच्चे माल से संबंधित शर्तें भी निर्धारित की गई हैं।

    नए टेंडर के अनुसार, गन्ने के रस, चीनी, चीनी के सिरप और बी-हेवी शीरे से तैयार एथेनॉल की आपूर्ति के लिए प्रस्ताव आमंत्रित नहीं किए गए हैं। इसका मतलब है कि सरकारी तेल कंपनियां इस आपूर्ति वर्ष में इन स्रोतों से बनने वाले एथेनॉल की खरीद नहीं करेंगी। हालांकि, एथेनॉल की कुल खरीद के लिए अन्य निर्धारित कच्चे माल का इस्तेमाल जारी रहेगा।

    भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा चीनी उत्पादक देश है। इस वर्ष देश में चीनी उत्पादन पिछले साल की तुलना में कम रहने की स्थिति का सामना करना पड़ रहा है। अल नीनो के प्रभाव के बीच एक दशक से अधिक समय में कमजोर मानसून दर्ज किया गया, जिससे गन्ने की फसल प्रभावित हुई है। गन्ने की उपलब्धता में कमी का असर चीनी उत्पादन पर पड़ सकता है। ऐसे में सरकार चीनी की आपूर्ति और कीमतों को ध्यान में रखते हुए एथेनॉल खरीद के लिए उपलब्ध कच्चे माल के इस्तेमाल में बदलाव कर रही है।

    भारत अपनी आयातित तेल पर निर्भरता कम करने के लिए एथेनॉल का इस्तेमाल बढ़ाने की दिशा में काम कर रहा है। एथेनॉल को पेट्रोल में मिलाकर इस्तेमाल किया जाता है, जिससे परिवहन क्षेत्र में पेट्रोलियम ईंधन की खपत को कम करने में मदद मिल सकती है। इसके उत्पादन के लिए गन्ने के साथ-साथ अनाज और अन्य अनुमत कच्चे माल का भी उपयोग किया जाता है। नए टेंडर में भी इन वैकल्पिक स्रोतों से तैयार एथेनॉल की आपूर्ति का प्रावधान रखा गया है।

    टेंडर में भाग लेने वाले आपूर्तिकर्ता सी-हेवी शीरे, खराब हो चुके खाद्यान्न, भारतीय खाद्य निगम से खरीदे गए अतिरिक्त चावल, मक्का और राष्ट्रीय जैव ईंधन नीति के तहत अनुमत अन्य कच्चे माल से उत्पादित एथेनॉल की पेशकश कर सकते हैं। इस व्यवस्था के तहत एथेनॉल की खरीद के लिए वैकल्पिक कच्चे माल के विकल्प उपलब्ध रहेंगे। इससे चीनी आधारित स्रोतों पर निर्भरता कम करते हुए निर्धारित मात्रा में एथेनॉल की खरीद की जा सकेगी।

    एथेनॉल खरीद से जुड़े बदलावों के साथ सरकार ने चीनी मिलों को अक्टूबर 2026 में उत्पादित चीनी की बिक्री के लिए भी अतिरिक्त अनुमति दी है। इसके तहत मिलें अक्टूबर में उत्पादित चीनी को अक्टूबर और नवंबर 2026 के दौरान नियमित मासिक रिलीज कोटे के अतिरिक्त बेच सकती हैं। यह अनुमति निर्धारित शर्तों के अनुसार लागू होगी।

    उदाहरण के तौर पर, यदि कोई चीनी मिल अक्टूबर में 1,000 मीट्रिक टन चीनी का उत्पादन करती है, तो वह इस मात्रा को अक्टूबर और नवंबर के दौरान बेच सकेगी। यह बिक्री दोनों महीनों के नियमित मासिक रिलीज कोटे के अतिरिक्त होगी। सरकार के इन फैसलों का उद्देश्य कमजोर मानसून के कारण गन्ने की उपलब्धता पर पड़ रहे असर के बीच चीनी की आपूर्ति और एथेनॉल उत्पादन के लिए कच्चे माल के इस्तेमाल में संतुलन बनाए रखना है।

  • काव्या मारन और अनिरुद्ध रविचंदर की शादी की चर्चाओं के बीच जानिए उनकी संपत्ति, परिवार और करियर से जुड़ी खास बातें

    काव्या मारन और अनिरुद्ध रविचंदर की शादी की चर्चाओं के बीच जानिए उनकी संपत्ति, परिवार और करियर से जुड़ी खास बातें

    नई दिल्ली ।आईपीएल फ्रेंचाइजी सनराइजर्स हैदराबाद की सह-मालकिन और मुख्य कार्यकारी अधिकारी काव्या मारन इन दिनों अपनी निजी जिंदगी और कारोबारी पृष्ठभूमि को लेकर चर्चा में हैं। संगीतकार अनिरुद्ध रविचंदर के साथ उनकी शादी की खबरों के बीच उनकी संपत्ति, परिवार और करियर को लेकर भी लोगों की दिलचस्पी बढ़ी है। हालांकि, दोनों की शादी की तारीख और समारोहों के बारे में अभी तक आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में विवाह से जुड़ी विभिन्न तारीखों और आयोजन स्थलों की जानकारी को फिलहाल दावों के रूप में ही देखा जाना चाहिए।

    काव्या मारन की व्यक्तिगत संपत्ति कितनी है, इसका सटीक और आधिकारिक आंकड़ा सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं है। वह देश के प्रमुख कारोबारी परिवारों में शामिल मारन परिवार से आती हैं। उनके पिता कलानिधि मारन सन ग्रुप के अध्यक्ष हैं। उनकी संपत्ति का अनुमान करीब 2.6 अरब डॉलर बताया गया है, जो भारतीय मुद्रा में लगभग 24,692 करोड़ रुपये के बराबर है। यह आंकड़ा उनके पिता की संपत्ति से संबंधित है, काव्या की व्यक्तिगत संपत्ति का प्रमाणित मूल्य नहीं है।

    कलानिधि मारन ने मीडिया कारोबार में अपनी अलग पहचान बनाई है। उन्होंने वर्ष 1993 में सन टीवी नेटवर्क की स्थापना की थी। समय के साथ यह नेटवर्क भारत के प्रमुख क्षेत्रीय टेलीविजन समूहों में शामिल हो गया। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इसके पास 37 टेलीविजन चैनल हैं और इसकी पहुंच देशभर में 14 करोड़ से अधिक घरों तक बताई गई है। इसी कारोबारी पृष्ठभूमि ने काव्या को मीडिया और खेल व्यवसाय से जुड़ने का अवसर दिया।

    काव्या मारन ने चेन्नई के स्टेला मारिस कॉलेज से स्नातक की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद उन्होंने यूनाइटेड किंगडम के वारविक बिजनेस स्कूल से प्रबंधन में एमबीए की डिग्री हासिल की। शिक्षा पूरी करने के बाद उन्होंने मीडिया और खेल कारोबार में अपनी भूमिका विकसित की। सन ग्रुप से जुड़ी होने के साथ-साथ वह सनराइजर्स हैदराबाद के संचालन और प्रबंधन में भी सक्रिय हैं।

    आईपीएल मैचों के दौरान काव्या अक्सर स्टेडियम में अपनी टीम का समर्थन करती दिखाई देती हैं। सनराइजर्स हैदराबाद की सह-मालकिन और सीईओ के रूप में उनकी पहचान क्रिकेट प्रशंसकों के बीच काफी लोकप्रिय हुई है। टीम के प्रदर्शन के दौरान उनकी मौजूदगी भी कई बार चर्चा का विषय बनती है। हालांकि, उनकी व्यक्तिगत संपत्ति का सटीक आकलन करने के लिए सार्वजनिक रूप से उपलब्ध प्रमाणित वित्तीय जानकारी पर्याप्त नहीं है।

    अनिरुद्ध रविचंदर के साथ उनकी शादी को लेकर अलग-अलग तारीखों की चर्चा सामने आई है। कुछ मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया कि दोनों 11 नवंबर को ग्रीस में शादी कर सकते हैं। इन्हीं खबरों में 14 नवंबर को चेन्नई के एक पांच सितारा होटल में रिसेप्शन आयोजित किए जाने की बात भी कही गई। हालांकि, इन तारीखों की संबंधित परिवारों की ओर से आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

    इस बीच तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी ने सोशल मीडिया पर तस्वीरें और वीडियो साझा किए थे। इनमें कलानिधि मारन और उनकी पत्नी कावेरी मारन हैदराबाद के जुबली हिल्स स्थित मुख्यमंत्री के आवास पर उनसे मुलाकात करते नजर आए। मुख्यमंत्री के अनुसार, दंपती ने उन्हें अपनी बेटी के रिसेप्शन में आमंत्रित किया था। उनके साझा किए गए संदेश में चेन्नई में 21 नवंबर को रिसेप्शन आयोजित होने की जानकारी दी गई थी। इससे शादी और रिसेप्शन की तारीखों को लेकर अलग-अलग दावों के बीच असमंजस बना हुआ है।

    शादी में संभावित मेहमानों को लेकर भी चर्चाएं हैं। दक्षिण भारतीय अभिनेता थलापति विजय को निमंत्रण दिए जाने की खबरें सामने आई हैं। इसके अलावा फिल्म और राजनीतिक जगत की अन्य प्रमुख हस्तियों के शामिल होने की अटकलें भी लगाई जा रही हैं। हालांकि, मेहमानों की पूरी सूची सार्वजनिक नहीं हुई है। विवाह समारोह का स्थान, तारीख और अन्य व्यवस्थाएं स्पष्ट होने के लिए दोनों परिवारों की आधिकारिक जानकारी का इंतजार करना होगा।

  • मध्य प्रदेश के सिंगरौली में 3.5 तीव्रता का भूकंप, दोपहर 2:12 बजे आए झटकों का केंद्र 10 किलोमीटर गहराई में

    मध्य प्रदेश के सिंगरौली में 3.5 तीव्रता का भूकंप, दोपहर 2:12 बजे आए झटकों का केंद्र 10 किलोमीटर गहराई में

    मध्य प्रदेश। के सिंगरौली जिले में शनिवार, 17 अक्टूबर 2026 को भूकंप के झटके दर्ज किए गए। भूकंप की तीव्रता रिक्टर स्केल पर 3.5 मापी गई। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, भूकंप दोपहर 2 बजकर 12 मिनट 35 सेकंड पर आया। इसका केंद्र जमीन से करीब 10 किलोमीटर की गहराई में स्थित था। सिंगरौली में भूकंप दर्ज होने की जानकारी सामने आने के बाद इस घटना का समय, तीव्रता और केंद्र की गहराई प्रमुख विवरण रहे।

    भूकंप की तीव्रता 3.5 होने के कारण इसे हल्की श्रेणी का भूकंप माना जाता है। इस स्तर के भूकंप के झटके कुछ लोगों को महसूस हो सकते हैं, जबकि कई बार लोग इन्हें महसूस नहीं कर पाते। झटकों का अनुभव आसपास के क्षेत्र, इमारत की स्थिति और व्यक्ति के स्थान जैसे कारकों पर निर्भर कर सकता है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि सिंगरौली में कितने लोगों ने झटके महसूस किए।भूकंप का केंद्र जमीन से 10 किलोमीटर नीचे बताया गया है। भूकंप विज्ञान में केंद्र की गहराई महत्वपूर्ण मानी जाती है, क्योंकि इससे सतह पर झटकों के प्रभाव को समझने में मदद मिलती है। हालांकि, केवल तीव्रता और गहराई के आधार पर किसी क्षेत्र में हुए नुकसान का निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता। इसके लिए स्थानीय स्थिति और नुकसान से जुड़ी अलग जानकारी की जरूरत होती है।

    सिंगरौली मध्य प्रदेश का एक प्रमुख ऊर्जा क्षेत्र है। यहां भूकंप के झटके दर्ज होने की खबर शनिवार दोपहर सामने आई। उपलब्ध विवरण में भूकंप की तीव्रता, समय और केंद्र की गहराई की जानकारी दी गई है। हालांकि, घटना के बाद किसी तरह के जान-माल के नुकसान, भवनों में दरार या अन्य प्रभावों के बारे में कोई पुष्ट जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई है।भूकंप की तीव्रता को समझने के लिए यह ध्यान रखना जरूरी है कि रिक्टर स्केल पर दर्ज संख्या भूकंप के परिमाण को दर्शाती है। 3.5 तीव्रता का भूकंप सामान्य तौर पर हल्के स्तर का होता है, लेकिन अलग-अलग स्थानों पर इसका अनुभव अलग हो सकता है। कम तीव्रता के झटके भी कुछ परिस्थितियों में महसूस किए जा सकते हैं, जबकि कुछ जगहों पर उनका पता नहीं चलता।

    भूकंप की घटना के संबंध में उपलब्ध जानकारी में किसी बड़े नुकसान या आपात स्थिति का उल्लेख नहीं है। ऐसे में नुकसान होने या नहीं होने के बारे में अतिरिक्त पुष्टि के बिना कोई निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा। घटना से जुड़े विवरणों में फिलहाल सबसे प्रमुख तथ्य यह है कि भूकंप शनिवार दोपहर दर्ज किया गया और इसकी तीव्रता 3.5 रही।भूकंप जैसी घटनाओं के दौरान लोगों को घबराने के बजाय सुरक्षा संबंधी निर्देशों का पालन करना चाहिए। यदि झटके महसूस हों, तो मजबूत मेज के नीचे सुरक्षित स्थान लेना, खिड़कियों और भारी वस्तुओं से दूरी बनाए रखना तथा लिफ्ट का उपयोग नहीं करना उपयोगी सावधानियां हैं। झटके रुकने के बाद आसपास की स्थिति देखकर ही बाहर निकलना चाहिए और स्थानीय प्रशासन के निर्देशों पर ध्यान देना चाहिए।

    सिंगरौली में 17 अक्टूबर को दर्ज इस भूकंप का केंद्र 10 किलोमीटर की गहराई में था और इसकी तीव्रता 3.5 मापी गई। घटना से संबंधित उपलब्ध जानकारी में किसी नुकसान की पुष्टि नहीं की गई है। आगे की स्थिति के बारे में निष्कर्ष निकालने के लिए स्थानीय प्रशासन या संबंधित विभागों की ओर से जारी होने वाली पुष्ट जानकारी महत्वपूर्ण होगी।

  • भोपाल में 12 साल की बच्ची की हत्या के बाद हंगामा, आरोपी को सौंपने की मांग पर तीन घंटे प्रदर्शन

    भोपाल में 12 साल की बच्ची की हत्या के बाद हंगामा, आरोपी को सौंपने की मांग पर तीन घंटे प्रदर्शन

    मध्य प्रदेश । की राजधानी भोपाल के बैरागढ़ इलाके में 12 वर्षीय बच्ची की हत्या के मामले में शनिवार, 17 अक्टूबर को लोगों ने जमकर विरोध प्रदर्शन किया। घटना से नाराज लोगों ने बैरागढ़ थाने के बाहर करीब तीन घंटे तक प्रदर्शन किया और आरोपी को कड़ी सजा देने की मांग की। प्रदर्शन के दौरान कुछ लोगों ने थाने के गेट पर धक्का देकर अंदर घुसने की कोशिश भी की, लेकिन पुलिस बल ने उन्हें रोक दिया। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल बुलाया गया।

    मामले में 23 वर्षीय आरोपी मोबिन को पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज और परिजनों से मिली जानकारी के आधार पर हिरासत में लिया। पुलिस के अनुसार, शुरुआती पूछताछ में उसके अपराध स्वीकार करने की बात सामने आई है। हालांकि, मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई जांच और मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर की जा रही है।

    घटना 15 अक्टूबर की रात की है, जब बैरागढ़ इलाके में रहने वाली 12 वर्षीय बच्ची घर से निकली थी, लेकिन वापस नहीं लौटी। परिजनों ने उसकी तलाश की। अगले दिन, 16 अक्टूबर को बच्ची का शव कृष्णा कॉम्प्लेक्स के पीछे स्थित एक खंडहर में मिला। शव मिलने के बाद इलाके में आक्रोश फैल गया और लोगों ने आरोपी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग शुरू कर दी।

    प्रारंभिक पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में बच्ची के साथ यौन हिंसा और गला घोंटकर हत्या किए जाने की पुष्टि होने की बात सामने आई है। घटनास्थल से जुड़े विवरण के अनुसार, बच्ची के मुंह में कपड़ा ठूंसा हुआ था और उसके शरीर के निचले हिस्से पर कपड़े नहीं थे। उसके सामने के दो दांत भी टूटे हुए बताए गए हैं। पुलिस मामले के सभी पहलुओं की जांच कर रही है।

    शनिवार को विरोध प्रदर्शन के दौरान बजरंग दल और विश्व हिंदू परिषद के कार्यकर्ता भी शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों ने आरोपी को फांसी देने, उसके मकान पर बुलडोजर चलाने और मामले की सुनवाई फास्ट ट्रैक अदालत में कराने की मांग की। कुछ लोगों ने आरोपी को पुलिस के हवाले करने के बजाय उन्हें सौंपने की मांग भी की। पुलिस ने भीड़ को थाने में प्रवेश करने से रोकने के लिए मुख्य गेट बंद कर दिए।

    प्रदर्शन का असर भोपाल-सीहोर रोड पर भी पड़ा। प्रदर्शनकारियों ने सड़क पर जाम लगा दिया, जिससे लगभग दो किलोमीटर तक वाहनों की कतार लग गई। इस दौरान यात्रियों और वाहन चालकों को परेशानी का सामना करना पड़ा। थाने के सामने महिलाएं भी धरने पर बैठीं। पुलिस अधिकारियों ने लगातार लोगों को समझाने की कोशिश की और अतिरिक्त बल की मदद से स्थिति संभालने का प्रयास किया।

    मामले में सहायक पुलिस आयुक्त रत्नेश तोमर ने बताया कि पुलिस ने हत्या और बहला-फुसलाकर ले जाने सहित गंभीर धाराओं में मामला दर्ज कर मुख्य आरोपी को गिरफ्तार किया है। उन्होंने कहा कि प्रारंभिक पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में यौन उत्पीड़न की पुष्टि हुई है। विस्तृत पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट मिलने के बाद मामले में जरूरत के अनुसार अतिरिक्त कानूनी धाराएं जोड़ी जाएंगी।

    पुलिस के अनुसार, घटना के बाद से अधिकारी पीड़ित परिवार के संपर्क में हैं। प्रदर्शनकारियों को भरोसा दिलाया गया कि मामले में कानूनी प्रक्रिया के तहत कार्रवाई की जाएगी और आरोपी के खिलाफ उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई होगी।

    करीब तीन घंटे तक चले विरोध प्रदर्शन और चक्काजाम के बाद प्रदर्शनकारी शांत हुए। इसके बाद परिजन बच्ची का शव अंतिम संस्कार के लिए घर ले गए। एहतियात के तौर पर इलाके में पुलिस बल तैनात रखा गया। घटना की जांच जारी है और विस्तृत पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट आने के बाद मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई स्पष्ट होगी।

  • राजस्थान में दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे पर दर्दनाक हादसा, भोपाल-बैतूल के 8 यात्रियों की मौत और 17 घायल

    राजस्थान में दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे पर दर्दनाक हादसा, भोपाल-बैतूल के 8 यात्रियों की मौत और 17 घायल

    नई दिल्ली ।राजस्थान के कोटा जिले में दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे पर शनिवार सुबह हुए सड़क हादसे में मध्य प्रदेश के भोपाल और बैतूल के आठ लोगों की मौत हो गई, जबकि 17 यात्री घायल हो गए। यात्रियों से भरा टैंपो ट्रैवलर अनियंत्रित होकर पुलिया से करीब 15 फीट नीचे जा गिरा। वाहन में सवार लोग भोपाल से राजस्थान के खाटूश्यामजी मंदिर में दर्शन करने जा रहे थे। हादसे के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई और बचाव दल को यात्रियों को बाहर निकालने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ी।

    यह दुर्घटना कोटा शहर से करीब 35 किलोमीटर दूर सिमलिया थाना क्षेत्र में कराड़िया टोल के पास सुबह लगभग छह बजे हुई। हादसे की सूचना मिलने के बाद पुलिस और बचाव दल घटनास्थल पर पहुंचे। सुबह के समय अंधेरा होने के कारण राहत और बचाव कार्य में कुछ देरी हुई। दुर्घटनाग्रस्त वाहन में कई यात्री फंस गए थे, जिन्हें बाहर निकालने के लिए बचाव दल को काफी प्रयास करना पड़ा।

    स्थानीय लोगों के अनुसार, टैंपो ट्रैवलर के पुलिया से नीचे गिरने के बाद कई यात्री वाहन के भीतर ही फंस गए थे। कुछ मृतकों के शव सीटों के बीच फंसे हुए थे। उन्हें बाहर निकालने में कठिनाई हुई। वहीं, घायल यात्रियों को सुरक्षित निकालने के लिए वाहन की खिड़कियां तोड़नी पड़ीं। हादसे में घायल 17 लोगों को उपचार के लिए अस्पताल पहुंचाया गया। दुर्घटना में जान गंवाने वालों में महिलाएं और युवा भी शामिल हैं।

    पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, मृतकों में बैतूल जिले के मुलताई, साईंखेड़ा और पाटन क्षेत्र के निवासी शामिल हैं। इसके अलावा भोपाल के राजीव नगर और शहर के अन्य हिस्सों के लोगों की भी इस हादसे में मौत हुई है। एक ही यात्रा पर निकले लोगों के साथ हुए हादसे से उनके परिवारों पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है।

    दुर्घटना में जान गंवाने वालों की सूची में 25 वर्षीय वैष्णवी गावंडे, 22 वर्षीय त्रिशा गोडकी और 27 वर्षीय सचिन गिरी के नाम शामिल हैं। इनके अलावा 55 वर्षीय कृष्णाराव गोडके और 50 वर्षीय अनिता की भी मौत हुई है। मृतकों में अरुणा, 26 वर्षीय ओम सूर्यवंशी और राजुराम उर्फ राजकुमार भी शामिल हैं, जिनकी उम्र करीब 50 वर्ष बताई गई है।

    अरुणा मध्य प्रदेश के बैतूल जिले के मुलताई क्षेत्र की निवासी थीं। वैष्णवी गावंडे बैतूल जिले के साईंखेड़ा थाना क्षेत्र के मीरापुर की रहने वाली थीं। त्रिशा गोडकी और कृष्णाराव गोडके का संबंध बैतूल जिले के पाटन क्षेत्र से था। अनिता भोपाल के राजीव नगर स्थित सेक्टर-ए की निवासी थीं, जबकि सचिन गिरी भोपाल के रहने वाले थे। ओम सूर्यवंशी बैतूल जिले के मुलताई थाना क्षेत्र के सरा गांव के निवासी थे। राजुराम उर्फ राजकुमार के पते की पूरी जानकारी उपलब्ध नहीं हो सकी है।

    हादसे में मृतकों की पहचान और उनके पते से संबंधित जानकारी पुलिस की ओर से साझा की गई है। मृतकों में अलग-अलग उम्र के लोगों के शामिल होने से इस दुर्घटना का असर कई परिवारों पर पड़ा है। भोपाल और बैतूल में रहने वाले परिजनों के लिए यह खबर गहरे दुख का कारण बनी है।

    फिलहाल दुर्घटना के कारणों की विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है। यह स्पष्ट नहीं हुआ है कि टैंपो ट्रैवलर किस वजह से अनियंत्रित हुआ और पुलिया से नीचे गिर गया। पुलिस हादसे से संबंधित जानकारी जुटा रही है। दुर्घटना में घायल यात्रियों का अस्पताल में उपचार किया जा रहा है। हादसे के बाद राहत और बचाव दल ने वाहन में फंसे लोगों को निकालने और घायलों को अस्पताल पहुंचाने का काम किया।

  • महुआ मोइत्रा ने उठाई सत्ता परिवर्तन की मांग, कपिल सिब्बल के बयान पर भाजपा और विपक्ष के बीच बढ़ा टकराव

    महुआ मोइत्रा ने उठाई सत्ता परिवर्तन की मांग, कपिल सिब्बल के बयान पर भाजपा और विपक्ष के बीच बढ़ा टकराव

    नई दिल्ली ।केंद्र सरकार को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच राजनीतिक टकराव तेज हो गया है। तृणमूल कांग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा ने सरकार पर निशाना साधते हुए सत्ता परिवर्तन की मांग की है। इससे पहले राज्यसभा सदस्य कपिल सिब्बल भी इसी मुद्दे पर केंद्र सरकार की आलोचना कर चुके हैं। दूसरी ओर, भारतीय जनता पार्टी ने विपक्ष पर लोकतांत्रिक व्यवस्था को कमजोर करने और राजनीतिक अस्थिरता पैदा करने की कोशिश करने के आरोप लगाए हैं।

    महुआ मोइत्रा ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर अपने बयान में कहा कि विपक्ष सत्ता परिवर्तन चाहता है। उन्होंने आरोप लगाया कि जो सरकार अपने ही निहत्थे नागरिकों को राष्ट्रीय ध्वज फहराने के लिए कथित रूप से अवैध तरीके से हिरासत में लेती है और उन्हें जेल भेजने के लिए पुलिस तंत्र का इस्तेमाल करती है, उसे सत्ता में बने रहने का अधिकार नहीं है। उन्होंने हिरासत की कार्रवाई और न्यायिक प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठाए। उनका यह बयान चुनावी अनियमितताओं के विरोध में हो रहे प्रदर्शनों को लेकर जारी राजनीतिक बहस के बीच आया है।

    इससे पहले कपिल सिब्बल ने भी सत्ता परिवर्तन की मांग को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा था। केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने विपक्षी दलों पर आरोप लगाया था कि वे बांग्लादेश की तर्ज पर सत्ता परिवर्तन की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा था कि विपक्षी दल अराजकता फैलाने के लिए युवाओं का इस्तेमाल कर रहे हैं।

    राजनाथ सिंह ने लखनऊ में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में कहा था कि लोकतंत्र किसी को भी अराजकता फैलाने या संवैधानिक संस्थाओं की विश्वसनीयता कमजोर करने की अनुमति नहीं देता। उन्होंने राष्ट्रीय राजधानी में कथित चुनावी अनियमितताओं के विरोध में हुए प्रदर्शनों को लेकर विपक्ष की भूमिका पर सवाल उठाए थे।

    रक्षा मंत्री के आरोपों का जवाब देते हुए कपिल सिब्बल ने कहा कि सत्ता परिवर्तन की मांग कांग्रेस या विपक्षी दलों की ओर से नहीं, बल्कि देश की जनता की ओर से उठ रही है। उन्होंने अपने बयान में मौजूदा सरकार की कार्यशैली पर सवाल खड़े किए। सिब्बल ने आरोप लगाया कि भ्रष्टाचार के खिलाफ आंदोलन के नारों के साथ सत्ता में आई सरकार ने बाद में भ्रष्टाचार को बढ़ावा दिया, संस्थाओं पर नियंत्रण स्थापित किया और मतदाता सूची में हेरफेर किया। उन्होंने कहा कि अब सरकार के जाने का समय आ गया है। ये आरोप विपक्ष की ओर से लगाए गए हैं।

    इस राजनीतिक विवाद में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने भी विपक्ष पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने उच्चतम न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण के सत्ता परिवर्तन संबंधी बयान का उल्लेख करते हुए कहा कि विपक्ष की टिप्पणियां देश को अस्थिर करने के कथित एजेंडे की ओर संकेत करती हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष चुनाव सुधारों, मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर या युवाओं के भविष्य के लिए नहीं, बल्कि किसी भी कीमत पर सत्ता हासिल करने के लिए प्रयास कर रहा है।

    नितिन नवीन ने सोशल मीडिया पर अपने बयान में सत्ता परिवर्तन जैसे शब्दों के इस्तेमाल को विपक्ष की मंशा से जोड़ते हुए विदेशी ताकतों के साथ मिलकर देश को अस्थिर करने का आरोप लगाया। उन्होंने विपक्ष की राजनीति को कथित तौर पर अर्बन नक्सल एजेंडे से भी जोड़ा। भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि लोकतंत्र में सत्ता हासिल करने का रास्ता जनता के जनादेश से होकर गुजरता है, न कि अराजकता के माध्यम से। उन्होंने दावा किया कि भाजपा और देश की जनता लोकतांत्रिक व्यवस्था को कमजोर करने के किसी भी प्रयास को सफल नहीं होने देंगी।

    सत्ता परिवर्तन को लेकर यह बयानबाजी ऐसे समय में हो रही है, जब चुनावी प्रक्रिया, मतदाता सूची के पुनरीक्षण और कथित अनियमितताओं को लेकर राजनीतिक दलों के बीच विवाद जारी है। विपक्ष सरकार की कार्यशैली और चुनावी प्रक्रिया पर सवाल उठा रहा है, जबकि भाजपा इन आरोपों को राजनीतिक अस्थिरता पैदा करने की कोशिश बता रही है। दोनों पक्षों के बीच आरोप-प्रत्यारोप से केंद्र सरकार और विपक्ष के बीच टकराव का मुद्दा और प्रमुख हो गया है।

  • यूपी चुनाव 2027 में ओवैसी की 200 सीटों पर तैयारी, सपा के PDA और कांग्रेस के समीकरण को मिल सकती है चुनौती

    यूपी चुनाव 2027 में ओवैसी की 200 सीटों पर तैयारी, सपा के PDA और कांग्रेस के समीकरण को मिल सकती है चुनौती

    नई दिल्ली ।उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) ने अपनी राजनीतिक तैयारियां तेज कर दी हैं। पार्टी प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी की रणनीति के तहत राज्य में मुस्लिम बहुल विधानसभा क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। पार्टी करीब 200 सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही है। हालांकि, समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के साथ संभावित गठबंधन को लेकर बातचीत की गुंजाइश भी बनी हुई है। ऐसे में चुनाव से पहले राज्य में विपक्षी दलों के बीच सीटों और मतदाताओं के समीकरण को लेकर चर्चा तेज हो सकती है।

    AIMIM की रणनीति का पहला हिस्सा उन विधानसभा क्षेत्रों पर केंद्रित है, जहां मुस्लिम मतदाताओं की संख्या चुनावी नतीजों को प्रभावित कर सकती है। पार्टी ऐसे क्षेत्रों में अपना संगठन मजबूत करने और स्थानीय स्तर पर राजनीतिक आधार बढ़ाने की तैयारी में है। इसके लिए उन सीटों की पहचान की जा रही है, जहां मुस्लिम मतदाताओं की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जाती है। पार्टी की कोशिश है कि इन इलाकों में स्थानीय नेतृत्व को आगे बढ़ाकर चुनावी मैदान में अपनी उपस्थिति मजबूत की जाए।

    दूसरी प्राथमिकता पश्चिमी उत्तर प्रदेश को बनाया गया है। इस क्षेत्र की लगभग 65 विधानसभा सीटों पर AIMIM विशेष ध्यान दे रही है। मेरठ समेत कई जिलों में पार्टी अपनी राजनीतिक पकड़ बढ़ाने की योजना बना रही है। इस रणनीति के तहत असदुद्दीन ओवैसी की जनसभाएं भी प्रस्तावित हैं। कार्यक्रम के अनुसार, 17 अक्टूबर को रामपुर में जनसभा, 24 अक्टूबर को कैराना में सभा और 14 नवंबर को मेरठ में बड़ी रैली आयोजित करने की योजना है। इन कार्यक्रमों के जरिए पार्टी अपने समर्थकों तक पहुंचने और संगठन को सक्रिय करने का प्रयास करेगी।

    AIMIM की तीसरी योजना राज्यभर में संगठन का विस्तार करने से जुड़ी है। यदि समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के साथ गठबंधन पर सहमति नहीं बनती है, तो पार्टी लगभग 200 विधानसभा सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारने के विकल्प पर काम कर रही है। इस संभावित रणनीति से विपक्षी दलों के बीच चुनावी प्रतिस्पर्धा का स्वरूप प्रभावित हो सकता है। खासकर उन सीटों पर मुकाबला दिलचस्प हो सकता है, जहां समाजवादी पार्टी, कांग्रेस और बहुजन समाज पार्टी पहले से अपना राजनीतिक आधार मजबूत करने की कोशिश करती रही हैं।

    पूर्वांचल में भी AIMIM ने कई विधानसभा क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित किया है। पार्टी की तैयारियों में आजमगढ़, जौनपुर, गाजीपुर, मऊ और बलिया जैसे जिले शामिल हैं। आजमगढ़ की मुबारकपुर, गोपालपुर, निजामाबाद और सदर सीटों पर पार्टी की नजर है। जौनपुर की सदर और शाहगंज सीटों के साथ मऊ की सदर तथा घोसी विधानसभा सीटों को भी रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इसके अलावा बहराइच और श्रावस्ती जैसे क्षेत्रों में भी संगठन विस्तार की योजना है।

    पार्टी की रणनीति में स्थानीय और प्रभावशाली नेताओं को शामिल करना भी अहम बताया जा रहा है। ऐसे नेताओं को प्राथमिकता देने की योजना है, जिन्हें दूसरे राजनीतिक दलों में पर्याप्त अवसर नहीं मिला है। AIMIM को उम्मीद है कि स्थानीय स्तर पर मजबूत चेहरों के जरिए वह अपने समर्थन का दायरा बढ़ा सकती है। हालांकि, इन प्रयासों का चुनावी परिणाम क्या होगा, यह उम्मीदवारों के चयन, संगठन की सक्रियता और मतदाताओं की प्रतिक्रिया पर निर्भर करेगा।

    गठबंधन को लेकर स्थिति अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। AIMIM की ओर से दूसरे विपक्षी दलों के साथ संभावित समझौते की संभावना खुली रखी गई है। इस महीने के अंत तक बातचीत को लेकर स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद जताई गई है। यदि गठबंधन नहीं बनता है, तो पार्टी स्वतंत्र रूप से चुनाव लड़ने की तैयारी को आगे बढ़ा सकती है। ऐसे में उत्तर प्रदेश की राजनीति में AIMIM की भूमिका और उसका प्रभाव आगामी चुनाव के दौरान महत्वपूर्ण चर्चा का विषय बना रह सकता है।