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  • कनॉट प्लेस में प्रदर्शन से पहले दिल्ली पुलिस की कार्रवाई, कॉक्रोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दिपके हिरासत में

    कनॉट प्लेस में प्रदर्शन से पहले दिल्ली पुलिस की कार्रवाई, कॉक्रोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दिपके हिरासत में

    नई दिल्ली । दिल्ली पुलिस ने शुक्रवार, 16 अक्टूबर 2026 को कॉक्रोच जनता पार्टी (सीजेपी) के संस्थापक अभिजीत दिपके को एहतियाती हिरासत में ले लिया। यह कार्रवाई कनॉट प्लेस के सेंट्रल पार्क में प्रस्तावित ‘लहरा दो तिरंगा’ विरोध प्रदर्शन से पहले की गई। दिपके ने इस प्रदर्शन का आह्वान किया था। पुलिस ने इससे पहले उन्हें नोटिस जारी कर कनॉट प्लेस में बिना कानूनी अनुमति लोगों को एकत्र करने पर आपत्ति जताई थी।

    अभिजीत दिपके को राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के प्रवक्ता अनीश गवांडे के आवास से निकलने के बाद हिरासत में लिया गया। इस दौरान पुलिस अधिकारी ने उन्हें बताया कि कनॉट प्लेस में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 163 के तहत प्रतिबंधात्मक आदेश लागू हैं और इसी आधार पर उन्हें एहतियाती हिरासत में लिया जा रहा है।

    सीजेपी की ओर से शुक्रवार को कनॉट प्लेस के सेंट्रल पार्क में ‘लहरा दो तिरंगा’ प्रदर्शन आयोजित करने का आह्वान किया गया था। पुलिस के अनुसार, सोशल मीडिया के माध्यम से लोगों से शाम पांच बजे कनॉट प्लेस में जुटने की अपील की गई थी। हालांकि, प्रस्तावित प्रदर्शन के लिए आवश्यक कानूनी अनुमति नहीं ली गई थी। इसी वजह से पुलिस ने दिपके को नोटिस जारी किया था।

    पुलिस ने अपने नोटिस में दिल्ली हाई कोर्ट के निर्देशों का हवाला देते हुए कहा था कि कनॉट प्लेस में बिना अनुमति भीड़ जुटने से यातायात व्यवस्था, कानून-व्यवस्था और सार्वजनिक सुरक्षा प्रभावित हो सकती है। इसके अलावा, क्षेत्र में होने वाली व्यावसायिक गतिविधियों पर भी असर पड़ने की आशंका जताई गई थी। पुलिस ने कहा कि कनॉट प्लेस राजधानी का प्रमुख व्यावसायिक इलाका है, जहां बड़ी संख्या में दुकानें, शोरूम, रेस्तरां, होटल, बैंक और कार्यालय संचालित होते हैं।

    नोटिस में यह भी कहा गया था कि प्रदर्शन के कारण कारोबारियों के साथ-साथ वहां काम करने वाले कर्मचारियों की आजीविका प्रभावित हो सकती है। कनॉट प्लेस में किसी भी बड़े जमावड़े से आम लोगों की आवाजाही और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के कामकाज में बाधा आने की आशंका को पुलिस ने अपनी कार्रवाई का एक प्रमुख आधार बताया।

    पुलिस ने राजीव चौक मेट्रो स्टेशन का उल्लेख करते हुए भीड़ जुटने से पैदा होने वाली संभावित समस्याओं पर चिंता जताई थी। यह स्टेशन ब्लू और येलो लाइन को जोड़ने वाला प्रमुख मेट्रो केंद्र है। पुलिस के अनुसार, यहां से प्रतिदिन करीब दो लाख यात्री सफर करते हैं। ऐसे में प्रदर्शन के दौरान लोगों की संख्या बढ़ने पर यातायात जाम, अव्यवस्था और भगदड़ जैसी स्थिति उत्पन्न होने का खतरा हो सकता है।

    दिल्ली पुलिस ने स्पष्ट किया था कि कनॉट प्लेस में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 163 के तहत प्रतिबंधात्मक आदेश लागू हैं। इन आदेशों का उल्लंघन करने पर भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 223 और अन्य संबंधित कानूनी प्रावधानों के तहत कार्रवाई की जा सकती है।

    नोटिस के जरिए दिपके को कनॉट प्लेस और उसके आसपास किसी भी प्रकार का प्रदर्शन, जुलूस या रैली आयोजित नहीं करने तथा लाउडस्पीकर का इस्तेमाल नहीं करने का निर्देश दिया गया था। पुलिस ने यह भी कहा था कि कनॉट प्लेस अधिसूचित प्रदर्शन स्थल नहीं है। किसी अन्य निर्धारित स्थान पर प्रदर्शन करने के लिए भी पहले संबंधित अधिकारियों से कानूनी अनुमति लेना आवश्यक है।

    इस तरह, प्रस्तावित विरोध प्रदर्शन से पहले पुलिस ने प्रतिबंधात्मक आदेशों और सार्वजनिक व्यवस्था से जुड़ी आशंकाओं का हवाला देते हुए कार्रवाई की। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, दिपके को एहतियाती हिरासत में लिया गया; प्रदर्शन के आयोजन और आगे की कार्रवाई से संबंधित अतिरिक्त विवरण सामने नहीं आया है।

  • टीकमगढ़ में मृत गाय को लोडर से बांधकर सड़क पर घसीटा, घटना का वीडियो वायरल होने से लोगों में आक्रोश

    टीकमगढ़ में मृत गाय को लोडर से बांधकर सड़क पर घसीटा, घटना का वीडियो वायरल होने से लोगों में आक्रोश

    मध्य प्रदेश: के टीकमगढ़ जिले में मृत गाय के शव के साथ अमानवीय व्यवहार का मामला सामने आया है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक वीडियो में दो लोग मृत गाय को लोडर वाहन से बांधकर सड़क पर घसीटते दिखाई दे रहे हैं। घटना का वीडियो सामने आने के बाद लोगों में नाराजगी देखी जा रही है। हालांकि, घटना में शामिल लोगों की पहचान और इस मामले में प्रशासन की ओर से की गई कार्रवाई को लेकर फिलहाल विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है।

    बताया जा रहा है कि यह घटना टीकमगढ़ शहर के सागर हाईवे मार्ग पर स्थित नए बस स्टैंड के बायपास रोड की है। वायरल वीडियो में एक लोडर वाहन पर सवार लोग मृत गाय के शव को वाहन से बांधकर ले जाते दिखाई दे रहे हैं। वीडियो में वाहन तेज गति से आगे बढ़ता नजर आता है और गाय का शव सड़क पर घिसटता हुआ दिखाई देता है।

    घटना से जुड़े वीडियो के सामने आने के बाद मृत पशु के साथ किए गए व्यवहार को लेकर सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय स्तर पर इस घटना को लेकर नाराजगी की बात कही जा रही है। मृत गाय के शव को इस तरह सड़क पर घसीटकर ले जाने की परिस्थितियां क्या थीं और ऐसा करने के पीछे संबंधित लोगों का उद्देश्य क्या था, इसकी जानकारी अभी स्पष्ट नहीं है।

    इस घटना ने मृत पशुओं के निपटान और उनके शवों को एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाने के तरीके पर भी सवाल खड़े किए हैं। किसी पशु की मृत्यु के बाद उसके शव को उचित तरीके से हटाना जरूरी होता है, ताकि सार्वजनिक स्थानों पर असुविधा न हो और स्वच्छता संबंधी समस्याएं पैदा न हों। लेकिन वायरल वीडियो में दिखाई दे रहा तरीका पशु के शव के प्रति असंवेदनशील व्यवहार को दर्शाता है।

    घटना का स्थान शहर के बायपास मार्ग पर बताया जा रहा है। ऐसे में वीडियो के आधार पर संबंधित वाहन और उसमें सवार लोगों की पहचान करना जांच का अहम हिस्सा हो सकता है। यदि आसपास के क्षेत्र में सीसीटीवी कैमरे उपलब्ध हैं, तो उनकी फुटेज से भी घटना के समय, वाहन की आवाजाही और संबंधित व्यक्तियों के बारे में जानकारी जुटाई जा सकती है। हालांकि, ऐसी किसी जांच या कार्रवाई की आधिकारिक पुष्टि उपलब्ध विवरण में नहीं है।

    इस मामले में यह भी स्पष्ट होना बाकी है कि मृत गाय का शव कहां से लाया गया था और उसे किस स्थान पर ले जाया जा रहा था। वीडियो में दिखाई दे रहे लोगों ने शव को वाहन से बांधकर ले जाने का फैसला क्यों किया, इस सवाल का जवाब भी संबंधित व्यक्तियों की पहचान और पूछताछ के बाद ही सामने आ सकता है।

    पशुओं के प्रति क्रूरता से जुड़े मामलों में पशु क्रूरता निवारण अधिनियम, 1960 सहित लागू कानूनी प्रावधानों के तहत कार्रवाई का प्रश्न परिस्थितियों और उपलब्ध साक्ष्यों पर निर्भर करता है। इस मामले में भी किसी कानूनी कार्रवाई की स्थिति जानने के लिए संबंधित अधिकारियों की आधिकारिक जानकारी महत्वपूर्ण होगी। फिलहाल वायरल वीडियो के आधार पर किसी व्यक्ति को दोषी ठहराना उचित नहीं होगा।

    टीकमगढ़ की इस घटना ने मृत गाय के शव को ले जाने के तरीके को लेकर चिंता पैदा की है। अब मामले में संबंधित लोगों की पहचान, घटना की वास्तविक परिस्थितियों और प्रशासन की संभावित कार्रवाई को लेकर आधिकारिक जानकारी का इंतजार है।

  • दतिया विधायक घनश्याम सिंह को हाईकोर्ट का नोटिस, 1991 के आपराधिक मामले की जानकारी छिपाने के आरोप से बढ़ी हलचल

    दतिया विधायक घनश्याम सिंह को हाईकोर्ट का नोटिस, 1991 के आपराधिक मामले की जानकारी छिपाने के आरोप से बढ़ी हलचल

    मध्य प्रदेश: की दतिया विधानसभा सीट एक बार फिर कानूनी और राजनीतिक चर्चाओं में आ गई है। कांग्रेस विधायक घनश्याम सिंह को नामांकन पत्र में आपराधिक मामले की जानकारी नहीं देने के आरोप से जुड़े प्रकरण में ग्वालियर हाईकोर्ट ने नोटिस जारी किया है। अदालत ने यह कदम इस मामले में दायर याचिका पर उठाया है। नोटिस सामने आने के बाद दतिया में संभावित उपचुनाव को लेकर चर्चाएं शुरू हो गई हैं, हालांकि फिलहाल उपचुनाव की स्थिति बनने की कोई पुष्टि नहीं हुई है।

    यह मामला वर्ष 1991 में कांग्रेस के एक प्रदर्शन के दौरान दर्ज एफआईआर से जुड़ा बताया जा रहा है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, उस प्रदर्शन के दौरान घनश्याम सिंह सहित कुछ अन्य लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था। आरोप है कि दतिया विधानसभा उपचुनाव के दौरान नामांकन पत्र दाखिल करते समय घनश्याम सिंह ने इस आपराधिक मामले का उल्लेख नहीं किया था।

    इसी आरोप को आधार बनाकर दीपक बेलपत्री सहित कुछ लोगों की ओर से हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई है। याचिका में नामांकन पत्र में आपराधिक मामले की जानकारी नहीं दिए जाने का मुद्दा उठाया गया है। अब अदालत ने विधायक को नोटिस जारी कर इस मामले में जवाब मांगा है। फिलहाल नोटिस जारी होने का अर्थ आरोपों का साबित होना नहीं है। मामले में आगे की स्थिति संबंधित पक्षों के जवाब और अदालत की कार्यवाही पर निर्भर करेगी।

    इस घटनाक्रम के बीच कांग्रेस के प्रदेश महासचिव अवधेश नायक ने प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट से नोटिस मिलना कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा है और इसे जरूरत से ज्यादा बड़ा मुद्दा नहीं बनाया जाना चाहिए। नायक ने इस मामले को लेकर राजेंद्र भारती की भूमिका पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि इस घटनाक्रम के पीछे भारती की भूमिका हो सकती है।

    अवधेश नायक ने राजेंद्र भारती पर कानूनी प्रक्रियाओं और दस्तावेजों के माध्यम से राजनीतिक नुकसान पहुंचाने का आरोप भी लगाया। उन्होंने दावा किया कि वर्ष 2023 में उनका टिकट कटने के पीछे भी भारती की भूमिका थी। ये आरोप नायक की ओर से लगाए गए हैं। उपलब्ध जानकारी में इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि या राजेंद्र भारती की इस मामले पर प्रतिक्रिया का विवरण नहीं है।

    दतिया विधानसभा क्षेत्र की राजनीतिक परिस्थितियों के कारण भी यह मामला चर्चा में है। उपलब्ध विवरण के मुताबिक, वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव और उसके बाद हुए उपचुनाव में भाजपा को इस सीट पर हार का सामना करना पड़ा था, जबकि कांग्रेस ने दोनों चुनावों में जीत दर्ज की थी। ऐसे में विधायक को जारी हुए नोटिस के बाद स्थानीय राजनीति में इस मामले को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।

    अब सबसे अहम सवाल यह है कि पुराने आपराधिक मामले और नामांकन पत्र में जानकारी नहीं देने के आरोप पर अदालत आगे क्या रुख अपनाती है। यदि कानूनी कार्यवाही में कोई ऐसा आदेश आता है जिसका विधानसभा सदस्यता पर प्रभाव पड़ता हो, तो उसके राजनीतिक परिणाम भी हो सकते हैं। हालांकि, केवल नोटिस जारी होने से विधायक की सदस्यता समाप्त नहीं होती और न ही अपने आप उपचुनाव की स्थिति बनती है।

    फिलहाल ग्वालियर हाईकोर्ट के नोटिस के बाद मामले की कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ने का इंतजार है। विधायक का जवाब, याचिका में उठाए गए सवालों पर अदालत का विचार और आगे आने वाले आदेश ही तय करेंगे कि इस प्रकरण का दतिया की राजनीति पर क्या असर पड़ता है।

  • भोपाल के बैरागढ़ में 12 वर्षीय बच्ची की हत्या, कृष्णा कॉम्प्लेक्स के पीछे खंडहर में मिला शव

    भोपाल के बैरागढ़ में 12 वर्षीय बच्ची की हत्या, कृष्णा कॉम्प्लेक्स के पीछे खंडहर में मिला शव

    मध्य प्रदेश: की राजधानी भोपाल के बैरागढ़ थाना क्षेत्र में 12 वर्षीय बच्ची की हत्या का मामला सामने आया है। गुरुवार रात से लापता बच्ची का शव शुक्रवार को कृष्णा कॉम्प्लेक्स के पीछे स्थित एक खंडहरनुमा इमारत से बरामद किया गया। घटना की जानकारी मिलने के बाद पुलिस और फॉरेंसिक साइंस लैब (एफएसएल) की टीम मौके पर पहुंची और जांच शुरू की। बच्ची की मौत की परिस्थितियों का पता लगाने के लिए घटनास्थल से साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं।

    प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, बच्ची गुरुवार रात करीब आठ बजे किसी काम से अपने घर से निकली थी। इसके बाद वह वापस नहीं लौटी। काफी समय बीतने के बावजूद जब परिजनों को बच्ची का कोई पता नहीं चला, तो उन्होंने अपने स्तर पर उसकी तलाश शुरू की। आसपास के इलाकों में खोजबीन करने के साथ रिश्तेदारों से भी संपर्क किया गया, लेकिन बच्ची के बारे में कोई जानकारी नहीं मिल सकी।

    परिजनों की ओर से तलाश किए जाने के बाद भी जब बच्ची का पता नहीं चला, तो वे देर रात बैरागढ़ थाने पहुंचे और उसकी गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई। पुलिस ने शिकायत मिलने के बाद बच्ची की तलाश शुरू की। मामले की गंभीरता को देखते हुए उसकी तलाश के साथ उससे जुड़ी परिस्थितियों की जानकारी जुटाने का प्रयास किया गया।

    शुक्रवार सुबह पुलिस को सूचना मिली कि कृष्णा कॉम्प्लेक्स के पीछे बने एक खंडहर में बच्ची का शव पड़ा हुआ है। सूचना मिलते ही बैरागढ़ थाना प्रभारी और वरिष्ठ पुलिस अधिकारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। शव मिलने की जानकारी सामने आने के बाद घटनास्थल का निरीक्षण किया गया और मामले की जांच के लिए आवश्यक कदम उठाए गए।

    घटनास्थल पर एफएसएल की विशेष टीम को भी बुलाया गया। फॉरेंसिक विशेषज्ञों ने खंडहर और उसके आसपास के क्षेत्र का बारीकी से निरीक्षण किया। टीम ने घटनास्थल से फिंगरप्रिंट समेत अन्य संभावित साक्ष्य एकत्र किए। इन साक्ष्यों की जांच से बच्ची की मौत से जुड़ी परिस्थितियों और घटना में शामिल व्यक्ति के बारे में जानकारी मिलने की उम्मीद है।

    पुलिस के सामने सबसे अहम सवाल यह है कि घर से निकलने के बाद बच्ची कहां गई और कृष्णा कॉम्प्लेक्स के पीछे स्थित खंडहर तक कैसे पहुंची। जांच में यह भी पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि बच्ची के साथ कोई अन्य व्यक्ति था या नहीं। फिलहाल घटना से जुड़े इन पहलुओं पर जांच जारी है और किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले साक्ष्यों का विश्लेषण किया जा रहा है।

    पुलिस घटनास्थल के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज भी खंगाल रही है। इसके साथ ही बच्ची के परिजनों और परिचितों से पूछताछ की जा रही है, ताकि उसके घर से निकलने के बाद की गतिविधियों के बारे में जानकारी जुटाई जा सके। आसपास के क्षेत्र में उपलब्ध साक्ष्यों और लोगों से मिलने वाली जानकारी को जांच का हिस्सा बनाया जा रहा है।

    बच्ची का शव खंडहर में मिलने के बाद इलाके में चिंता का माहौल है। पुलिस का प्रयास है कि घटनाक्रम की कड़ियों को जोड़कर यह पता लगाया जाए कि बच्ची की मौत किन परिस्थितियों में हुई और इसके लिए कौन जिम्मेदार है। मामले में आगे की कार्रवाई जांच के दौरान सामने आने वाले तथ्यों और फॉरेंसिक साक्ष्यों के आधार पर की जाएगी।

    फिलहाल पुलिस और एफएसएल की टीम मामले की जांच में जुटी हैं। बच्ची की मौत से जुड़े कारणों, घटनास्थल तक पहुंचने की परिस्थितियों और संभावित आरोपी की पहचान को लेकर आधिकारिक जांच के निष्कर्ष सामने आना बाकी हैं।

  • ध्रुव राठी के खिलाफ दिल्ली में शिकायत, पासपोर्ट जब्त करने और फंडिंग जांच की मांग के साथ NSA कार्रवाई का मुद्दा उठा

    ध्रुव राठी के खिलाफ दिल्ली में शिकायत, पासपोर्ट जब्त करने और फंडिंग जांच की मांग के साथ NSA कार्रवाई का मुद्दा उठा

    नई दिल्ली ।यूट्यूबर ध्रुव राठी के खिलाफ उनके कथित बयान को लेकर विवाद बढ़ गया है। दिल्ली में एक वकील ने पुलिस अधिकारियों के समक्ष शिकायत दर्ज कराते हुए उनके खिलाफ जांच और कानूनी कार्रवाई की मांग की है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि राठी के कुछ बयानों से भारतीय सेना और पुलिस को सरकार के खिलाफ विद्रोह के लिए उकसाने की कोशिश की गई।शिकायतकर्ता ने उनके पासपोर्ट को जब्त करने और आर्थिक स्रोतों की जांच कराने की मांग भी की है। हालांकि, ये आरोप हैं और इनके आधार पर किसी अपराध का दोष सिद्ध नहीं होता।

    शिकायतकर्ता विवेक गर्ग ने दिल्ली पुलिस आयुक्त, उत्तरी जिले के पुलिस उपायुक्त और रूप नगर थाने के प्रभारी को शिकायत दी है। इसमें सोशल मीडिया पर उपलब्ध वीडियो का हवाला देते हुए कथित बयानों की जांच करने की अपील की गई है। शिकायतकर्ता का दावा है कि इन बयानों की प्रकृति गंभीर है और इनके पीछे संभावित साजिश की आशंका की जांच की जानी चाहिए। उन्होंने भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज करने का अनुरोध भी किया है।

    शिकायत में ध्रुव राठी के आर्थिक स्रोतों और कथित संपर्कों की पड़ताल करने की मांग शामिल है। इसके साथ ही शिकायतकर्ता ने पासपोर्ट जब्त करने की अपील की है। फिलहाल, उपलब्ध जानकारी में शिकायत के आधार पर पुलिस की ओर से किसी अंतिम निष्कर्ष या आरोपों के सिद्ध होने की पुष्टि नहीं है। शिकायत दर्ज होने और जांच की मांग किए जाने को किसी व्यक्ति के खिलाफ अपराध साबित होने के रूप में नहीं देखा जा सकता।

    इस मामले में उत्तर प्रदेश के पूर्व पुलिस महानिदेशक डॉ. विक्रम सिंह ने भी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने ध्रुव राठी के सेना और पुलिस से संबंधित कथित बयान पर आपत्ति जताते हुए राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (एनएसए) के तहत कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि ऐसे बयान गंभीर प्रकृति के हो सकते हैं और इन पर कानूनी दृष्टि से विचार किया जाना चाहिए। उन्होंने सरकार से राठी के खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत मामला दर्ज करने की मांग उठाई है।

    डॉ. विक्रम सिंह ने आरोप लगाया कि जर्मनी में रहने वाले ध्रुव राठी भारत आकर युवाओं को प्रभावित कर रहे हैं और एक साक्षात्कार में सेना तथा पुलिस को बगावत के लिए कहने जैसी बातें सामने आई हैं। उन्होंने कथित बयान को देश की सुरक्षा के लिहाज से गंभीर बताया। हालांकि, इन आरोपों और मांगों पर संबंधित अधिकारियों की ओर से कार्रवाई की स्थिति के बारे में उपलब्ध विवरण में स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई है।

    ध्रुव राठी इससे पहले भी एक आपराधिक मानहानि मामले को लेकर चर्चा में रहे हैं। दिल्ली की साकेत अदालत ने इस पुराने मामले में उनके खिलाफ नए सिरे से समन जारी करने का आदेश दिया है। यह मामला विकास सांक्रित्यायन, जिन्हें विकास पांडे के नाम से भी जाना जाता है, की शिकायत पर दर्ज हुआ था।

    शिकायतकर्ता का आरोप है कि ध्रुव राठी के ‘बीजेपी आईटी सेल पार्ट-2’ नामक वीडियो को लेकर मानहानि का मामला दायर किया गया था।अदालत ने समन की तामील के लिए दस्ती सेवा की अनुमति भी दी है। इस मामले में अगली सुनवाई 17 अक्टूबर को निर्धारित बताई गई है। यह मानहानि प्रकरण मौजूदा शिकायत से अलग है और दोनों मामलों की कानूनी प्रक्रिया को अलग-अलग समझना जरूरी है।

    ध्रुव राठी के खिलाफ शिकायत और एनएसए के तहत कार्रवाई की मांग ने अभिव्यक्ति, सार्वजनिक बयानों और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े सवालों पर बहस को बढ़ाया है। अब मामले में आगे की स्थिति पुलिस की जांच, उपलब्ध साक्ष्यों और संबंधित कानूनी प्रक्रियाओं पर निर्भर करेगी।

  • अमेरिकी-रूसी डीजल समझौते पर जेलेंस्की का विरोध, ट्रंप की अपील ठुकराकर रूसी तेल रिफाइनरियों पर हमले जारी रखने का ऐलान

    अमेरिकी-रूसी डीजल समझौते पर जेलेंस्की का विरोध, ट्रंप की अपील ठुकराकर रूसी तेल रिफाइनरियों पर हमले जारी रखने का ऐलान

    नई दिल्ली ।रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध के बीच अमेरिका और यूक्रेन के संबंधों में एक बार फिर तनाव बढ़ गया है। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की उस मांग को मानने से इनकार कर दिया है, जिसमें यूक्रेन से रूसी तेल रिफाइनरियों पर हमले रोकने के लिए कहा गया था। जेलेंस्की के इस रुख से दोनों देशों के बीच मतभेद खुलकर सामने आए हैं।

    यह विवाद ऐसे समय बढ़ा है, जब अमेरिका ने पिछले सप्ताह रूस पर लगाए गए कुछ प्रतिबंधों में ढील दी। इसके बदले रूस ने वैश्विक बाजार में बड़ी मात्रा में डीजल की आपूर्ति करने पर सहमति जताई। इस समझौते को लेकर यूक्रेन ने नाराजगी जाहिर की है। जेलेंस्की का मानना है कि रूस को ऊर्जा कारोबार से मिलने वाली अतिरिक्त राहत युद्ध जारी रखने की उसकी क्षमता को मजबूत कर सकती है।

    यूक्रेन ने इस समझौते को कमजोर फैसला बताते हुए चिंता जताई है कि रूस को ऊर्जा क्षेत्र से होने वाली कमाई युद्ध जारी रखने में मदद कर सकती है। जेलेंस्की का कहना है कि रूस को आर्थिक राहत मिलने से यूक्रेन के खिलाफ उसकी सैन्य कार्रवाई लंबी खिंच सकती है। इस समझौते की यूरोप में भी आलोचना हुई है। यूक्रेन का रुख है कि रूस की ऊर्जा सुविधाओं पर हमले उसकी सैन्य क्षमता और युद्ध से जुड़े संसाधनों को कमजोर करने की रणनीति का हिस्सा हैं।

    इस बीच, ट्रंप ने एक साक्षात्कार में जेलेंस्की की आलोचना करते हुए कहा कि उनके साथ बातचीत करना आसान नहीं है। अमेरिकी राष्ट्रपति ने आरोप लगाया कि जेलेंस्की समझौता करने की बात तो करते हैं, लेकिन वास्तव में इसके लिए तैयार नहीं हैं। ट्रंप ने यह भी कहा कि वह यूक्रेनी राष्ट्रपति के बड़े प्रशंसक नहीं हैं और उनके नेतृत्व में यूक्रेन को भारी नुकसान हुआ है।

    ट्रंप ने रूस और यूक्रेन की सैन्य क्षमताओं की तुलना करते हुए कहा कि रूस एक बड़ा देश है और उसके पास बड़ी संख्या में सैनिक उपलब्ध हैं, जबकि यूक्रेन के पास इतनी बड़ी जनशक्ति नहीं है। उन्होंने रूसी तेल रिफाइनरियों पर यूक्रेन के हमलों की भी आलोचना की। उनका तर्क है कि डीजल उत्पादन से जुड़ी सुविधाओं को निशाना बनाने से वैश्विक ऊर्जा बाजार प्रभावित हो सकता है और तेल की कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है।

    रूसी तेल रिफाइनरियों पर हमले रोकने को लेकर अमेरिका और यूक्रेन के बीच मतभेद ऐसे समय सामने आए हैं, जब ऊर्जा प्रतिष्ठानों पर हमलों को लेकर अस्थायी संघर्षविराम की कोशिशें भी प्रभावित हुई हैं। यूक्रेन का कहना है कि रूस की ओर से उसके ऊर्जा बुनियादी ढांचे पर हमले जारी रहने के कारण वह एकतरफा तौर पर अपनी कार्रवाई रोककर नहीं रख सकता। कीव के अनुसार, ऊर्जा ठिकानों पर हमले रोकने की किसी भी व्यवस्था में दोनों पक्षों की ओर से समान प्रतिबद्धता जरूरी है।

    इस घटनाक्रम से अमेरिका और यूक्रेन के बीच कूटनीतिक मतभेद और गहरे होने की आशंका बढ़ी है। एक ओर ट्रंप प्रशासन ऊर्जा बाजार में आपूर्ति बढ़ाने और रूसी रिफाइनरियों पर हमले रोकने पर जोर दे रहा है, वहीं यूक्रेन अपनी सैन्य रणनीति में बदलाव करने को तैयार नहीं दिख रहा। दोनों देशों के बीच इस मुद्दे पर सहमति बनती है या नहीं, इसका असर युद्ध की आगे की दिशा और रूस के ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े घटनाक्रमों पर पड़ सकता है।

  • यूपी चुनाव 2027 के लिए बीजेपी की तैयारी तेज, पीएम मोदी की संभावित 12 रैलियों और 133 सीटों पर खास नजर

    यूपी चुनाव 2027 के लिए बीजेपी की तैयारी तेज, पीएम मोदी की संभावित 12 रैलियों और 133 सीटों पर खास नजर

    नई दिल्ली ।उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले भारतीय जनता पार्टी ने अपनी चुनावी तैयारियों को गति देने की रणनीति बनाई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संभावित प्रदेश दौरों, विकास परियोजनाओं के उद्घाटन और शिलान्यास तथा संगठन को बूथ स्तर पर मजबूत करने की योजना पर काम किया जा रहा है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, नवंबर 2026 के मध्य से प्रधानमंत्री के उत्तर प्रदेश दौरे शुरू हो सकते हैं। चुनाव की घोषणा से पहले करीब 12 कार्यक्रमों और रैलियों के जरिए जनता तक सरकार के कामकाज और विकास योजनाओं को पहुंचाने की तैयारी है।

    प्रधानमंत्री के संभावित कार्यक्रमों की रूपरेखा प्रदेश की 18 कमिश्नरियों को ध्यान में रखकर तैयार की जा रही है। पार्टी की योजना केंद्र सरकार और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली राज्य सरकार की उपलब्धियों को सामने रखने की है। इसके लिए विकास योजनाओं, परिवहन सुविधाओं, धार्मिक पर्यटन और निवेश से जुड़ी परियोजनाओं को प्रमुखता दिए जाने की संभावना है। हालांकि, रैलियों और दौरों का अंतिम कार्यक्रम अभी आधिकारिक रूप से घोषित नहीं हुआ है।

    विकास परियोजनाओं को चुनावी तैयारी का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया जा रहा है। संभावित कार्यक्रमों में वाराणसी अर्बन रोपवे, कानपुर मेट्रो के अगले चरण और आगरा मेट्रो के नए भूमिगत स्टेशनों का उद्घाटन शामिल हो सकता है। लखनऊ मेट्रो के ईस्ट-वेस्ट कॉरिडोर के शिलान्यास की संभावना भी जताई गई है। इन परियोजनाओं के जरिए शहरी परिवहन और कनेक्टिविटी से जुड़े कामों को जनता के सामने रखने की योजना है।

    इसके अलावा अयोध्या में राम मंदिर परिसर की चारदीवारी और संग्रहालय, जेवर में एचसीएल-फॉक्सकॉन की सेमीकंडक्टर इकाई, चित्रकूट लिंक एक्सप्रेसवे और वाराणसी के गंजारी में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम से जुड़े कार्यक्रमों पर भी विचार किया जा रहा है। नोएडा में एक्वा लाइन मेट्रो के सेक्टर-142 से बॉटनिकल गार्डन तक विस्तार, जेवर एयरपोर्ट के कार्गो हब और वृंदावन के बांके बिहारी कॉरिडोर से संबंधित परियोजनाएं भी संभावित एजेंडे में शामिल बताई गई हैं।

    संगठन के स्तर पर बीजेपी की नजर 133 विधानसभा सीटों पर है। वाराणसी में प्रस्तावित बैठक में काशी और गोरक्ष प्रांत की इन सीटों को लेकर रणनीति पर चर्चा हो सकती है। बूथ कार्यकर्ताओं से संपर्क, विभिन्न सामाजिक समूहों के साथ बैठकें और सरकार के कामकाज की जानकारी लोगों तक पहुंचाने पर जोर देने की योजना है।

    पार्टी करीब 12 हजार विस्तारकों की तैनाती की तैयारी भी कर रही है। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत प्रत्येक 15 बूथ पर एक विस्तारक लगाने पर विचार किया जा रहा है। इसके साथ लगभग 80 हजार संगठनात्मक बैठकें आयोजित करने की योजना बताई गई है। कमजोर बूथों और उन विधानसभा क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा, जहां पार्टी को अपनी संगठनात्मक स्थिति मजबूत करने की जरूरत महसूस होती है।

    चुनावी अभियान में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ समेत कई वरिष्ठ नेताओं की भूमिका रहने की संभावना है। नितिन गडकरी, स्मृति ईरानी, केशव प्रसाद मौर्य, स्वतंत्र देव सिंह और हेमा मालिनी सहित अन्य नेताओं को भी प्रचार अभियान में शामिल किया जा सकता है। संगठन से जुड़े नितिन नवीन और विनोद तावड़े समेत अन्य नेताओं की जिम्मेदारियां भी महत्वपूर्ण हो सकती हैं।

    दिसंबर 2026 से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के आनुषंगिक संगठनों के संगठन प्रभारियों के उत्तर प्रदेश में प्रवास की संभावना भी जताई गई है। यह अभियान करीब तीन महीने तक चल सकता है। इस दौरान जनसंपर्क, सामाजिक संपर्क और संगठनात्मक समन्वय पर ध्यान दिए जाने की बात कही गई है।इस तरह बीजेपी की तैयारी में प्रधानमंत्री की संभावित रैलियों, विकास परियोजनाओं, वरिष्ठ नेताओं के प्रचार और बूथ स्तर पर संगठन मजबूत करने जैसे कई पहलू शामिल हैं। हालांकि, प्रस्तावित कार्यक्रमों और परियोजनाओं से जुड़े आयोजनों की अंतिम तारीखों तथा विस्तृत कार्यक्रम की आधिकारिक पुष्टि होना बाकी है।

  • मेरठ सांप कांड में पत्नी रविता और प्रेमी अमरदीप को फांसी, पोस्टमार्टम रिपोर्ट से खुला हत्या का राज

    मेरठ सांप कांड में पत्नी रविता और प्रेमी अमरदीप को फांसी, पोस्टमार्टम रिपोर्ट से खुला हत्या का राज


    नई दिल्ली ।उत्तर प्रदेश के मेरठ में चर्चित सांप कांड में अदालत ने अमित कश्यप की हत्या के मामले में उसकी पत्नी रविता और उसके प्रेमी अमरदीप को फांसी की सजा सुनाई है। बहसूमा थाना क्षेत्र के अकबरपुर सादात गांव से जुड़े इस मामले में दोनों को हत्या का दोषी पाया गया। अपर जिला जज, कोर्ट संख्या-12 ने मामले की सुनवाई के बाद यह फैसला सुनाया। इस प्रकरण में शुरुआत में अमित की मौत को सांप के काटने से हुई घटना माना जा रहा था, लेकिन पोस्टमार्टम रिपोर्ट सामने आने के बाद जांच की दिशा बदल गई।

    यह घटना 12 अप्रैल 2025 की है। उस दिन अमित कश्यप अपने घर के अंदर मृत पाया गया था। उसके शव के पास एक सांप भी मौजूद था। घटनास्थल पर पहुंचे पुलिसकर्मियों ने सांप को पकड़कर एक डिब्बे में बंद कर दिया और अमित के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। शुरुआती परिस्थितियों में आशंका जताई गई कि अमित की मौत सर्पदंश के कारण हुई होगी।

    हालांकि, पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत की वजह दम घुटना सामने आई। इस खुलासे के बाद पुलिस ने मामले को संभावित हत्या के रूप में लेकर जांच शुरू की। जांच आगे बढ़ने पर अमित की पत्नी रविता और गांव के ही युवक अमरदीप के संबंधों की जानकारी सामने आई। पुलिस के मुताबिक, रविता और अमरदीप के बीच प्रेम संबंध थे और अमरदीप का अमित के घर आना-जाना लगा रहता था। वह अमित के साथ काम भी करता था।

    जांच में आरोप लगाया गया कि रविता और अमरदीप ने मिलकर अमित की हत्या की योजना बनाई थी। इसके बाद उसकी मौत को सांप के काटने से हुई घटना के रूप में दिखाने की कोशिश की गई। पुलिस ने इस मामले में उस व्यक्ति से भी पूछताछ की, जिस पर सांप उपलब्ध कराने का आरोप था। जांच के दौरान उसे सरकारी गवाह बनाया गया। अभियोजन पक्ष ने अदालत के समक्ष ऐसे साक्ष्य पेश किए, जिनके आधार पर दोनों आरोपियों के खिलाफ हत्या की साजिश और वारदात में शामिल होने का मामला रखा गया।

    अदालत ने सुनवाई के दौरान पेश किए गए साक्ष्यों और मामले से जुड़े तथ्यों पर विचार किया। सात अक्टूबर 2026 को रविता और अमरदीप को हत्या का दोषी ठहराया गया था। इसके बाद 16 अक्टूबर को दोनों को मृत्युदंड सुनाए जाने की जानकारी सामने आई। इस फैसले के साथ ही अमित कश्यप की हत्या का मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया है। हालांकि, मृत्युदंड के फैसले के बाद आगे की न्यायिक प्रक्रिया और अपील की स्थिति इस मामले में महत्वपूर्ण होगी।

    मेरठ में यह मामला उस चर्चित नीले ड्रम हत्याकांड की याद भी दिला रहा है, जिसमें सौरभ राजपूत की हत्या के मामले में उसकी पत्नी मुस्कान रस्तोगी और उसके प्रेमी साहिल को भी फांसी की सजा सुनाए जाने की खबर सामने आई थी। दोनों मामलों में पति की हत्या के आरोप में पत्नी और उसके प्रेमी को दोषी ठहराए जाने की समानता चर्चा का विषय बनी है।

    अमित कश्यप हत्याकांड में सबसे अहम मोड़ पोस्टमार्टम रिपोर्ट रही, जिसने शुरुआती तौर पर दिखाई दे रही सर्पदंश की आशंका को बदल दिया। इसके बाद पुलिस की जांच, आरोपियों के संबंधों और अभियोजन पक्ष की ओर से पेश किए गए साक्ष्यों के आधार पर मामला अदालत तक पहुंचा। अदालत के फैसले के बाद अब इस प्रकरण में आगे की कानूनी प्रक्रिया पर नजर रहेगी।

  • ट्विशा शर्मा डेथ केस में सुप्रीम कोर्ट का बड़ा कदम, भोपाल की अदालत में सुनवाई पर अंतरिम रोक

    ट्विशा शर्मा डेथ केस में सुप्रीम कोर्ट का बड़ा कदम, भोपाल की अदालत में सुनवाई पर अंतरिम रोक

    नई दिल्ली । पूर्व मॉडल और अभिनेत्री ट्विशा शर्मा की संदिग्ध मौत के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने महत्वपूर्ण कदम उठाया है। शीर्ष अदालत ने मामले की सुनवाई भोपाल से दिल्ली स्थानांतरित करने की मांग वाली याचिका पर केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई), गिरिबाला सिंह और समर्थ सिंह को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। इसके साथ ही अदालत ने भोपाल की निचली अदालत में चल रही सुनवाई पर अंतरिम रोक लगा दी है। यह याचिका ट्विशा के पिता की ओर से दायर की गई है।

    ट्विशा के पिता ने अपनी याचिका में मांग की है कि उनकी बेटी की मौत से जुड़े मामले की सुनवाई भोपाल के बजाय दिल्ली में कराई जाए। सुप्रीम कोर्ट ने इस मांग पर संबंधित पक्षों से जवाब तलब किया है। साथ ही, याचिका पर आगे विचार किए जाने तक भोपाल की अदालत में चल रही कार्यवाही पर अंतरिम रोक लगाने का आदेश दिया है। मामले की सुनवाई का स्थान बदलने को लेकर अंतिम निर्णय अभी होना बाकी है।

    ट्विशा शर्मा की मौत का मामला उनके परिवार की ओर से घटना पर सवाल उठाए जाने और निष्पक्ष जांच की मांग किए जाने के बाद चर्चा में आया था। ट्विशा पूर्व मॉडल और अभिनेत्री थीं। उन्होंने मॉडलिंग के अलावा तेलुगु फिल्मों में भी काम किया था। बाद में उन्होंने एमबीए की पढ़ाई पूरी की और कॉर्पोरेट क्षेत्र में काम करने लगीं।

    उपलब्ध जानकारी के अनुसार, ट्विशा की मुलाकात समर्थ सिंह से एक वैवाहिक वेबसाइट के माध्यम से हुई थी। दोनों की शादी दिसंबर 2025 में हुई थी। इसके बाद 12 मई को ट्विशा भोपाल स्थित अपने ससुराल में मृत पाई गई थीं। उनकी मौत के बाद मायके पक्ष ने घटना की परिस्थितियों को लेकर गंभीर सवाल उठाए और मामले की जांच की मांग की।

    ट्विशा के परिजनों ने उनके पति समर्थ सिंह और ससुराल के अन्य सदस्यों पर दहेज उत्पीड़न तथा मानसिक प्रताड़ना के आरोप लगाए हैं। उनके पिता नवनिधि शर्मा ने दावा किया था कि शादी से पहले ही समर्थ का व्यवहार ठीक नहीं था। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि हनीमून के दौरान उनकी बेटी के साथ दुर्व्यवहार किया गया था। परिवार की ओर से समर्थ की मां और पूर्व न्यायाधीश गिरिबाला सिंह पर भी दहेज के लिए ट्विशा को परेशान करने का आरोप लगाया गया है।

    मामले में सामने आई पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार, ट्विशा के सिर, कान और हाथ पर चोट के निशान पाए गए थे। रिपोर्ट में इन चोटों के मौत से पहले लगने की बात सामने आई थी। हालांकि, चोटों की परिस्थितियों और मौत से उनके संबंध को लेकर जांच तथा न्यायिक प्रक्रिया के निष्कर्षों को अलग-अलग समझना जरूरी है।

    इस मामले में ट्विशा के पति समर्थ सिंह और उनकी सास गिरिबाला सिंह को गिरफ्तार किया गया था। वहीं, जमानत याचिका में गिरिबाला सिंह की ओर से बहू के व्यवहार और कथित नशे की आदत को लेकर आरोप लगाए गए थे। आवेदन में दावा किया गया था कि ट्विशा को ड्रग्स की लत थी और नशा नहीं मिलने पर उनका व्यवहार असामान्य हो जाता था। ये दावे जमानत आवेदन में लगाए गए आरोप हैं, इन्हें अपने आप में न्यायिक रूप से सिद्ध तथ्य नहीं माना जा सकता।

    ट्विशा के भाई हर्षित शर्मा ने भी परिवार की स्थिति को लेकर जानकारी दी थी। उनके मुताबिक, ट्विशा काफी परेशान थीं और उन्होंने अपनी बेबसी जाहिर करते हुए नोएडा लौटने की इच्छा जताई थी।
    अब सुप्रीम कोर्ट के नोटिस और भोपाल की अदालत में सुनवाई पर लगी अंतरिम रोक के बाद मामले की आगे की प्रक्रिया संबंधित पक्षों के जवाब पर निर्भर करेगी। दिल्ली में सुनवाई स्थानांतरित करने की मांग पर अंतिम फैसला आना बाकी है। इस बीच, ट्विशा की मौत से जुड़े आरोपों और परिस्थितियों पर न्यायिक प्रक्रिया के तहत विचार जारी रहेगा।

  • 440 टन प्याज लेकर अगरतला पहुंचेगी पहली कांदा एक्सप्रेस, त्योहारों से पहले पूर्वोत्तर में आपूर्ति बढ़ाने की तैयारी

    440 टन प्याज लेकर अगरतला पहुंचेगी पहली कांदा एक्सप्रेस, त्योहारों से पहले पूर्वोत्तर में आपूर्ति बढ़ाने की तैयारी

    नई दिल्ली ।त्योहारी सीजन से पहले पूर्वोत्तर भारत में प्याज की उपलब्धता बढ़ाने और उपभोक्ताओं को किफायती दरों पर इसकी आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने वितरण व्यवस्था का विस्तार किया है। इसी प्रयास के तहत लगभग 440 मीट्रिक टन प्याज लेकर पहली कांदा एक्सप्रेस के 18 अक्टूबर तक त्रिपुरा की राजधानी अगरतला पहुंचने की उम्मीद है। इस पहल का उद्देश्य क्षेत्र के प्रमुख बाजारों में प्याज की उपलब्धता मजबूत करना और त्योहारों के दौरान मांग को पूरा करने में मदद करना है।

    सरकार मूल्य स्थिरीकरण कोष के तहत उपलब्ध प्याज के बफर स्टॉक को पूर्वोत्तर के विभिन्न क्षेत्रों तक पहुंचा रही है। इसके लिए रेल और सड़क दोनों माध्यमों का इस्तेमाल किया जा रहा है।
    त्योहारी सीजन में प्याज की मांग बढ़ने की संभावना को देखते हुए आपूर्ति का दायरा बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है, ताकि उपभोक्ताओं को बाजार में पर्याप्त मात्रा में प्याज उपलब्ध हो सके।

    पहली कांदा एक्सप्रेस के अगरतला पहुंचने से त्रिपुरा में प्याज की आपूर्ति को अतिरिक्त सहारा मिलने की उम्मीद है। इस पहल के तहत राज्य के आठ में से सात जिलों में बाजारों तक प्याज पहुंचाने की योजना है। इनमें धलाई, दक्षिण त्रिपुरा, खोवाई, उनाकोटी, पश्चिम त्रिपुरा, गोमती और सिपाहीजाला शामिल हैं। इन जिलों में आपूर्ति बढ़ने से स्थानीय बाजारों में प्याज की उपलब्धता बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है।

    पूर्वोत्तर क्षेत्र में बफर स्टॉक से प्याज पहुंचाने के लिए इससे पहले भी रेल और सड़क मार्ग का उपयोग किया गया है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, 840 मीट्रिक टन और 452 मीट्रिक टन प्याज लेकर दो कांदा एक्सप्रेस रेल रैक भेजे जा चुके हैं। इसके अलावा 44 ट्रकों के जरिए कुल 1,513.46 मीट्रिक टन बफर प्याज क्षेत्र में पहुंचाया गया है।

    इस आपूर्ति व्यवस्था के जरिए असम, त्रिपुरा और नागालैंड के प्रमुख उपभोक्ता केंद्रों तक प्याज पहुंचाया गया है। इनमें असम के कामरूप और गुवाहाटी के साथ त्रिपुरा के गोमती और सिपाहीजाला तथा नागालैंड के दीमापुर, कोहिमा, निउलैंड और चुमौकेदिमा जैसे क्षेत्र शामिल हैं। विभिन्न परिवहन माध्यमों से वितरण बढ़ाने का उद्देश्य प्रमुख बाजारों तक प्याज की नियमित उपलब्धता सुनिश्चित करना है।

    असम में पिछले कुछ सप्ताह के दौरान खुदरा प्याज की कीमतों में भी गिरावट दर्ज की गई है। राज्य के लगभग 12 केंद्रों पर खुदरा कीमतें एक रुपये से आठ रुपये प्रति किलोग्राम तक कम हुई हैं। इसके साथ ही असम और देश के औसत खुदरा मूल्य के बीच का अंतर भी पिछले दो वर्षों की तुलना में काफी घटा है।

    दो वर्ष पहले असम में प्याज का औसत खुदरा मूल्य 61.96 रुपये प्रति किलोग्राम था, जबकि अखिल भारतीय औसत कीमत 54.13 रुपये प्रति किलोग्राम दर्ज की गई थी। उस समय दोनों के बीच 7.83 रुपये प्रति किलोग्राम का अंतर था। मौजूदा आंकड़ों के अनुसार, असम में औसत खुदरा कीमत 54.30 रुपये प्रति किलोग्राम है, जबकि देश का औसत 53.07 रुपये प्रति किलोग्राम है। इस तरह कीमतों का अंतर घटकर 1.23 रुपये प्रति किलोग्राम रह गया है।

    देश की प्रमुख मंडियों में भी प्याज की कीमतों में नरमी देखने को मिली है। खरीफ फसल की नई आवक बढ़ने के साथ अखिल भारतीय औसत मंडी मूल्य सितंबर में लगभग 3,600 रुपये प्रति क्विंटल से घटकर अक्टूबर में करीब 3,300 रुपये प्रति क्विंटल रह गया है।

    सरकार की इस व्यवस्था में बफर स्टॉक से प्याज का वितरण बढ़ाने के साथ परिवहन के विभिन्न साधनों का इस्तेमाल किया जा रहा है। त्योहारों से पहले अगरतला और पूर्वोत्तर के अन्य बाजारों में अतिरिक्त आपूर्ति पहुंचने से प्याज की उपलब्धता मजबूत करने में मदद मिलने की उम्मीद है।