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  • सोने-चांदी के आभूषण निर्यात पर घटा ड्यूटी ड्रॉबैक, गोल्ड पर 3.1 प्रतिशत और सिल्वर पर करीब 9 प्रतिशत की कटौती

    सोने-चांदी के आभूषण निर्यात पर घटा ड्यूटी ड्रॉबैक, गोल्ड पर 3.1 प्रतिशत और सिल्वर पर करीब 9 प्रतिशत की कटौती

    नई दिल्ली । केंद्र सरकार ने सोने और चांदी के आभूषणों सहित कीमती धातुओं से बने उत्पादों के निर्यात पर मिलने वाली ड्यूटी ड्रॉबैक दरों में कटौती की है। नए संशोधन के तहत सोने के आभूषणों पर मिलने वाला रिफंड करीब 3.1 प्रतिशत और चांदी के आभूषणों तथा अन्य संबंधित उत्पादों पर मिलने वाला रिफंड लगभग 9 प्रतिशत घटा दिया गया है। इस बदलाव से भारतीय आभूषण निर्यातकों को पहले की तुलना में कम वित्तीय राहत मिलेगी। इसका असर कारोबार की लागत, लाभ के मार्जिन और अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्रतिस्पर्धा पर पड़ सकता है।
    वित्त मंत्रालय की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार, सोने के आभूषणों के निर्यात पर ड्यूटी ड्रॉबैक की दर 1,851.99 रुपये प्रति ग्राम से घटाकर 1,794.11 रुपये प्रति ग्राम कर दी गई है। इस तरह निर्यातकों को अब प्रत्येक ग्राम सोने के आभूषण पर पहले के मुकाबले 57.88 रुपये कम रिफंड मिलेगा। बड़ी मात्रा में आभूषणों का निर्यात करने वाली कंपनियों के लिए यह अंतर महत्वपूर्ण हो सकता है।
    चांदी के उत्पादों के मामले में कटौती अधिक है। चांदी के आभूषणों और अन्य संबंधित वस्तुओं के निर्यात पर मिलने वाली ड्यूटी ड्रॉबैक दर 29,501.09 रुपये प्रति किलोग्राम से घटाकर 26,859.02 रुपये प्रति किलोग्राम कर दी गई है। यानी निर्यातकों को अब प्रति किलोग्राम 2,642.07 रुपये कम रिफंड मिलेगा। इस बदलाव से चांदी के आभूषणों का कारोबार करने वाली कंपनियों की वित्तीय गणना प्रभावित हो सकती है।
    ड्यूटी ड्रॉबैक एक ऐसी व्यवस्था है, जिसके तहत निर्यातकों को निर्यात किए जाने वाले उत्पादों में इस्तेमाल हुए कच्चे माल और अन्य इनपुट पर चुकाए गए पात्र सीमा शुल्क तथा संबंधित शुल्कों का निर्धारित दरों के अनुसार रिफंड मिलता है। इसका उद्देश्य उत्पादन पर पड़ने वाले शुल्क के बोझ को कम करना और घरेलू उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्रतिस्पर्धी बनाए रखने में सहायता देना है। दरों में बदलाव होने से निर्यातकों को मिलने वाली इस वित्तीय राहत की मात्रा भी बदल जाती है।
    गौरतलब है कि इसी वर्ष जुलाई में सरकार ने सोने और चांदी के आभूषणों के लिए ड्यूटी ड्रॉबैक दरों में बड़ी बढ़ोतरी की थी। उस समय सोने के आभूषणों पर रिफंड की दर 773.17 रुपये प्रति ग्राम से बढ़ाकर 1,851.99 रुपये प्रति ग्राम की गई थी। इसी तरह चांदी के उत्पादों पर मिलने वाला रिफंड 14,990.66 रुपये प्रति किलोग्राम से बढ़ाकर 29,501.09 रुपये प्रति किलोग्राम कर दिया गया था। उस समय इस कदम से निर्यातकों को अधिक राहत मिलने की उम्मीद जताई गई थी।
    अब दरों में की गई कटौती से ज्वैलरी निर्यातकों, बुलियन कारोबारियों और विदेशों में सोने-चांदी के आभूषणों की बड़ी खेप भेजने वाली कंपनियों पर असर पड़ सकता है। कम रिफंड मिलने के कारण कारोबार की प्रभावी लागत बढ़ सकती है। यदि कंपनियां इस अतिरिक्त बोझ को अपने स्तर पर वहन करती हैं, तो उनके लाभ का मार्जिन कम हो सकता है। वहीं, यदि वे कीमतों में बदलाव करती हैं, तो अंतरराष्ट्रीय खरीदारों के साथ प्रतिस्पर्धा पर भी असर पड़ने की आशंका रहेगी।
    हालांकि, निर्यात पर वास्तविक प्रभाव वैश्विक बाजार में मांग, कीमती धातुओं की कीमतों और कारोबारियों की लागत संरचना जैसे कारकों पर भी निर्भर करेगा। यदि विदेशी बाजारों में भारतीय आभूषणों की मांग मजबूत रहती है, तो कंपनियां इस बदलाव के प्रभाव को कुछ हद तक संभाल सकती हैं। इसके बावजूद, नई दरों के लागू होने के बाद निर्यातकों को अपने खर्च और कारोबार की रणनीति का दोबारा आकलन करना पड़ सकता है।
  • त्योहारी सीजन से पहले गोल्ड ईटीएफ एफओएफ में नए निवेश पर रोक, एसआईपी और लंपसम निवेशकों के लिए बदले नियम

    त्योहारी सीजन से पहले गोल्ड ईटीएफ एफओएफ में नए निवेश पर रोक, एसआईपी और लंपसम निवेशकों के लिए बदले नियम

    नई दिल्ली ।त्योहारी सीजन में सोने की मांग बढ़ने से पहले कई म्यूचुअल फंड कंपनियों ने गोल्ड एक्सचेंज ट्रेडेड फंड (ईटीएफ) से जुड़े फंड-ऑफ-फंड्स (एफओएफ) में नए निवेश पर अस्थायी रोक लगा दी है। यह व्यवस्था 16 अक्टूबर 2026 से लागू किए जाने की जानकारी सामने आई है। इसके तहत नए एकमुश्त निवेश, नई सिस्टेमेटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (एसआईपी) के पंजीकरण और पहले से चल रही एसआईपी में अतिरिक्त निवेश से जुड़े कुछ अनुरोधों पर प्रतिबंध लगाया गया है।
    निवेशकों को भेजी गई सूचनाओं के अनुसार, यह रोक अगले आदेश तक लागू रहेगी। कुछ फंड हाउसों ने इसके दायरे में स्विच-इन लेनदेन और नई सिस्टेमेटिक ट्रांसफर प्लान (एसटीपी) के पंजीकरण को भी शामिल किया है। हालांकि, सभी कंपनियों के नियम और प्रतिबंधों का दायरा एक जैसा हो, यह जरूरी नहीं है। निवेशकों को संबंधित फंड हाउस की ओर से जारी सूचना के आधार पर अपने निवेश संबंधी फैसले लेने होंगे।
    गोल्ड ईटीएफ एफओएफ ऐसी म्यूचुअल फंड योजनाएं होती हैं, जो मुख्य रूप से गोल्ड ईटीएफ की इकाइयों में निवेश करती हैं। इनके माध्यम से निवेशक सीधे सोने के आभूषण या सिक्के खरीदे बिना सोने की कीमतों से जुड़े निवेश का विकल्प चुन सकते हैं। नए निवेश पर रोक का मतलब यह नहीं है कि इन योजनाओं में पहले से निवेश करने वाले सभी निवेशकों का पैसा निकालने पर भी प्रतिबंध लगा दिया गया है।
    फंड कंपनियों की ओर से जारी सूचनाओं में स्पष्ट किया गया है कि प्रतिबंध लागू होने से पहले पंजीकृत एसआईपी और एसटीपी की निर्धारित किस्तों का लेनदेन सामान्य रूप से जारी रहेगा। यानी पहले से पंजीकृत योजनाओं के तहत होने वाले नियमित निवेश पर सामान्य तौर पर असर नहीं पड़ेगा। हालांकि, मौजूदा एसआईपी में अतिरिक्त राशि जोड़ने या निवेश बढ़ाने के अनुरोधों पर रोक लागू हो सकती है।
    निवेशकों के लिए राहत की बात यह है कि रिडेम्प्शन यानी निवेश की रकम वापस लेने और स्विच-आउट के अनुरोधों पर इन प्रतिबंधों का असर नहीं पड़ेगा। इससे पहले से निवेश कर चुके लोगों के लिए अपनी इकाइयां भुनाने या दूसरी योजना में स्थानांतरित करने का विकल्प बना रहेगा। संबंधित कंपनियों ने यह भी बताया है कि निर्धारित कट-ऑफ समय के बाद जमा किए गए कुछ आवेदन अस्वीकार किए जा सकते हैं और निवेशकों की राशि वापस की जा सकती है।
    हालांकि, म्यूचुअल फंड कंपनियों की ओर से जारी सूचनाओं में नए निवेश पर रोक लगाने का कोई स्पष्ट कारण नहीं बताया गया है। एक फंड हाउस ने इसे नियामकीय स्तर पर हुई चर्चाओं के बाद उद्योग के माध्यम से मिले निर्देशों के अनुरूप उठाया गया कदम बताया है। इसलिए इस फैसले के पीछे किसी एक कारण को निश्चित रूप से जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता।
    यह कदम ऐसे समय उठाया गया है, जब दशहरा और दिवाली जैसे त्योहारों के दौरान भारत में सोने की मांग आमतौर पर बढ़ जाती है। इस अवधि में लोग आभूषणों और अन्य रूपों में सोना खरीदते हैं। भारत घरेलू जरूरतों को पूरा करने के लिए बड़े पैमाने पर सोने के आयात पर निर्भर है। आयात में बढ़ोतरी से व्यापार घाटे पर दबाव पड़ सकता है और रुपये की स्थिति भी प्रभावित हो सकती है।
    इस वर्ष की शुरुआत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं और पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के संदर्भ में विदेशी मुद्रा भंडार को सुरक्षित रखने की अपील की थी। उन्होंने नागरिकों से एक वर्ष तक सोना खरीदने से बचने का आग्रह किया था। प्रधानमंत्री ने समारोहों और अन्य अवसरों पर सोने के आभूषण नहीं खरीदने का संकल्प लेने की बात कही थी।
    फिलहाल गोल्ड ईटीएफ एफओएफ में नए निवेश पर लगी रोक अस्थायी है और अगले आदेश तक प्रभावी रहेगी। निवेश करने या एसआईपी में बदलाव करने की योजना बना रहे लोगों के लिए संबंधित म्यूचुअल फंड कंपनी की ताजा सूचना और लागू शर्तों की जांच करना जरूरी होगा।
  • निर्मला सीतारमण ने भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को जल्द अंतिम रूप देने पर दिया जोर, बातचीत अंतिम चरण में पहुंची

    निर्मला सीतारमण ने भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को जल्द अंतिम रूप देने पर दिया जोर, बातचीत अंतिम चरण में पहुंची

    नई दिल्ली ।केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित द्विपक्षीय व्यापार समझौते को जल्द अंतिम रूप देने की जरूरत पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि इस समझौते का निष्पादन वैश्विक व्यापार और दोनों देशों के आर्थिक संबंधों के हित में होगा। उनके अनुसार, भारत और अमेरिका के बीच चल रही बातचीत अब अंतिम चरण के करीब पहुंचती दिखाई दे रही है। ऐसे में समझौते को जल्द पूरा करना दोनों देशों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
    सीतारमण ने यह बात बैंकॉक में अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष और विश्व बैंक की वार्षिक बैठकों से इतर अटलांटिक काउंसिल के साथ बातचीत के दौरान कही। उन्होंने संकेत दिया कि व्यापार समझौते को लेकर दोनों देशों के बीच लगातार चर्चा हो रही है और इसके जल्द हस्ताक्षर के लिए तैयार होने की उम्मीद है।
    वित्त मंत्री ने वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल के हालिया बयान का भी उल्लेख किया। गोयल ने एक-दो दिन पहले उम्मीद जताई थी कि भारत-अमेरिका द्विपक्षीय व्यापार समझौता जल्द हस्ताक्षर के लिए तैयार हो सकता है। इससे पहले उन्होंने बताया था कि समझौते के पहले चरण को अंतिम रूप दिया जा चुका है और फिलहाल उसका कानूनी मसौदा तैयार किया जा रहा है।
    गोयल के अनुसार, समझौते को लागू करने से पहले यह सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण होगा कि भारत को समान प्रतिस्पर्धी अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में पर्याप्त प्रतिस्पर्धात्मक लाभ मिले। इस रुख से स्पष्ट है कि समझौते को आगे बढ़ाने के साथ भारत अपने आर्थिक और व्यापारिक हितों को भी ध्यान में रख रहा है।
    भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को लेकर अमेरिकी पक्ष की ओर से भी सकारात्मक संकेत दिए गए हैं। भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर ने गुरुवार को कहा था कि प्रस्तावित समझौते का व्यापक ढांचा तैयार हो चुका है और दोनों देश इसे अंतिम रूप देने के काफी करीब हैं। उन्होंने नई दिल्ली में आयोजित ब्लूमबर्ग न्यू इकॉनमी फोरम में यह बात कही थी।
    व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने की कोशिश ऐसे समय में हो रही है, जब वैश्विक अर्थव्यवस्था विभिन्न अनिश्चितताओं से गुजर रही है। ऐसे माहौल में दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंधों को मजबूत करने की पहल को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि, समझौते की अंतिम शर्तों और इसके लागू होने की तारीख को लेकर अभी स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है।
    बातचीत के दौरान सीतारमण ने भारत की आर्थिक वृद्धि का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि वैश्विक चुनौतियों के बावजूद देश अपनी विकास दर बनाए रखने में सफल रहा है। उनके अनुसार, कोविड महामारी के बाद पिछले चार से पांच वर्षों के दौरान भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में शामिल रहा है।
    वित्त मंत्री ने इस प्रदर्शन का श्रेय समावेशी विकास नीतियों, कौशल विकास में निवेश और वित्तीय अनुशासन को दिया। उन्होंने कहा कि सरकार सार्वजनिक धन के इस्तेमाल को लेकर अपनी जिम्मेदारी समझती है। आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों की सहायता करना जरूरी है, लेकिन इसके साथ सरकारी खर्च को अनुशासित बनाए रखना भी महत्वपूर्ण है।
    सीतारमण ने बुनियादी ढांचे के विकास में सार्वजनिक पूंजीगत व्यय की भूमिका पर भी जोर दिया। उनके मुताबिक, इस खर्च से देश में आधारभूत सुविधाओं के निर्माण को गति मिली है और अर्थव्यवस्था के विभिन्न क्षेत्रों पर इसका व्यापक गुणक प्रभाव पड़ा है। भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को जल्द पूरा करने की उनकी अपील के साथ आर्थिक विकास, वित्तीय अनुशासन और व्यापारिक प्रतिस्पर्धा से जुड़े मुद्दे भी चर्चा के केंद्र में रहे।
  • एलन मस्क के आरोपों पर रिलायंस का जवाब, कहा- स्टारलिंक समेत सभी कंपनियों पर भारत के नियम समान रूप से लागू

    एलन मस्क के आरोपों पर रिलायंस का जवाब, कहा- स्टारलिंक समेत सभी कंपनियों पर भारत के नियम समान रूप से लागू

    नई दिल्ली । भारत में सैटेलाइट संचार सेवाओं को लेकर प्रतिस्पर्धा के बीच रिलायंस इंडस्ट्रीज ने एलन मस्क के आरोपों पर अपनी स्थिति स्पष्ट की है। कंपनी ने कहा कि भारत में सैटेलाइट संचार क्षेत्र के लिए निर्धारित नियम और नीतियां घरेलू तथा विदेशी सभी कंपनियों पर समान रूप से लागू होती हैं। रिलायंस ने इस क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा का स्वागत करते हुए कहा कि हर कंपनी को देश के कानूनों का पालन करना होगा। यह बयान ऐसे समय आया है, जब स्टारलिंक की भारत में सेवाएं शुरू करने की प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं।
    रिलायंस ने कहा कि वह सैटेलाइट संचार क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा का स्वागत करती है और इसमें स्टारलिंक भी शामिल है। कंपनी के मुताबिक, जियो समेत सभी कंपनियों की जिम्मेदारी भारतीय उपभोक्ताओं को सेवाएं देना और देश के कानूनों तथा नीतियों का पालन करना है। रिलायंस ने स्पष्ट किया कि भारत में निवेश और नवाचार के लिए खुला माहौल है। देश में विकसित होने वाली तकनीक हो या विदेश से आने वाला निवेश, लोगों के जीवन में सुधार लाने वाली पहल का स्वागत किया जाता है।
    कंपनी ने कहा कि इस खुलेपन का आधार कानून का शासन और सभी के लिए समान प्रक्रिया है। भारत सरकार पहले ही स्पष्ट कर चुकी है कि सैटेलाइट संचार सेवाओं के लिए भारतीय और विदेशी आवेदकों के साथ समान व्यवहार किया जाता है। रिलायंस ने यह भी बताया कि जियो की अपनी सैटेलाइट सेवाएं शुरू करने के लिए भी विभिन्न मंजूरियों का इंतजार है। कंपनी के अनुसार, नियामकीय प्रक्रिया किसी एक कंपनी तक सीमित नहीं है, बल्कि संबंधित नियम सभी आवेदकों पर लागू होते हैं।
    रिलायंस ने प्रतिस्पर्धा को लेकर अपनी नीति का उल्लेख करते हुए कहा कि उसने कभी मुकाबले से पीछे हटने का रुख नहीं अपनाया। कंपनी के मुताबिक, प्रतिस्पर्धा से यह तय होता है कि कौन उपभोक्ताओं को बेहतर सेवाएं उपलब्ध कराता है। रिलायंस की दूरसंचार इकाई जियो ने वर्ष 2016 में भारतीय दूरसंचार बाजार में प्रवेश किया था। कंपनी ने बताया कि शुरुआत में उसके पास कोई ग्राहक नहीं था, लेकिन दस वर्षों में जियो के ग्राहकों की संख्या 53 करोड़ से अधिक हो गई। रिलायंस ने इसे डिजिटल सेवाओं और किफायती डेटा उपलब्ध कराने की अपनी यात्रा का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया।
    स्टारलिंक को भारत में सैटेलाइट संचार सेवाएं उपलब्ध कराने का लाइसेंस मिल चुका है। हालांकि, व्यावसायिक सेवाएं शुरू करने से पहले कंपनी को सुरक्षा संबंधी मंजूरियों और अन्य आवश्यक स्वीकृतियों की जरूरत है। इन प्रक्रियाओं के पूरा होने के बाद ही भारत में उसकी सेवाओं की शुरुआत का रास्ता साफ हो सकेगा।
    इस विवाद की पृष्ठभूमि में एलन मस्क की वे टिप्पणियां हैं, जिनमें उन्होंने भारत में स्टारलिंक की शुरुआत को लेकर उद्योगपति मुकेश अंबानी पर निशाना साधा था। पिछले सप्ताह सोशल मीडिया मंच एक्स पर मस्क ने व्यंग्यात्मक अंदाज में उन्हें “प्रिय प्रधानमंत्री अंबानी” कहकर संबोधित किया। उन्होंने आरोप लगाया कि अंबानी भारत में अपना एकाधिकार बनाए रखना चाहते हैं और स्टारलिंक को प्रतिस्पर्धा करने की अनुमति नहीं देना चाहते।
    मस्क ने अपनी पोस्ट में कहा कि उन्हें यह समझने में देर हुई कि भारत में वास्तविक फैसले लेने वाले अंबानी हैं। इसके साथ ही उन्होंने सवाल उठाया कि क्या स्टारलिंक को भारतीय बाजार में प्रतिस्पर्धा करने का अवसर दिया जाएगा। इन आरोपों के जवाब में रिलायंस ने समान नियमों और निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा पर जोर दिया है।
    भारत में सैटेलाइट इंटरनेट क्षेत्र में कंपनियों की भागीदारी और सेवाओं की शुरुआत नियामकीय मंजूरियों से जुड़ी है। ऐसे में रिलायंस का बयान इस बात पर केंद्रित है कि बाजार में प्रवेश करने वाली सभी कंपनियों को निर्धारित कानूनी और सुरक्षा प्रक्रियाओं का पालन करना होगा।
  • महिला क्रिकेट फैंस की बल्ले-बल्ले, रायपुर में भारत-जिम्बाब्वे T20 सीरीज के सभी मैचों में फ्री एंट्री, क्रिकेट को बढ़ावा देने की पहल

    महिला क्रिकेट फैंस की बल्ले-बल्ले, रायपुर में भारत-जिम्बाब्वे T20 सीरीज के सभी मैचों में फ्री एंट्री, क्रिकेट को बढ़ावा देने की पहल


    नई दिल्ली। भारत और जिम्बाब्वे की महिला क्रिकेट टीमों के बीच होने वाली टी20 सीरीज को लेकर क्रिकेट प्रेमियों के लिए अच्छी खबर सामने आई है। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में खेले जाने वाले तीनों टी20 मुकाबलों में महिला दर्शकों को निशुल्क प्रवेश दिया जाएगा। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के सुझाव के बाद छत्तीसगढ़ राज्य क्रिकेट संघ ने यह फैसला लिया है। इस पहल का उद्देश्य अधिक से अधिक महिला दर्शकों को स्टेडियम तक लाना और उन्हें भारतीय महिला क्रिकेट टीम का उत्साह बढ़ाने का अवसर देना है। नवरात्रि के दौरान होने वाले इन मुकाबलों में बड़ी संख्या में महिला प्रशंसकों के पहुंचने की उम्मीद जताई जा रही है।
    भारत और जिम्बाब्वे की महिला टीमों के बीच टी20 सीरीज के मुकाबले 16 अक्टूबर 18 अक्टूबर और 20 अक्टूबर को रायपुर के शहीद वीर नारायण सिंह अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम में खेले जाने हैं। छत्तीसगढ़ राज्य क्रिकेट संघ के एक सूत्र के मुताबिक संघ के पदाधिकारियों ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय को मैच देखने के लिए आमंत्रित किया था। इसी दौरान मुख्यमंत्री ने सुझाव दिया कि महिला दर्शकों को तीनों मुकाबलों में मुफ्त प्रवेश दिया जाना चाहिए। इसके बाद संघ ने इस प्रस्ताव पर अमल करने का निर्णय लिया। क्रिकेट संघ ने सोशल मीडिया के माध्यम से भी इस पहल की जानकारी साझा की और महिला प्रशंसकों से अधिक से अधिक संख्या में स्टेडियम पहुंचने की अपील की।

    इस फैसले को महिला क्रिकेट को प्रोत्साहित करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। महिला दर्शकों को मुफ्त प्रवेश मिलने से वे बिना टिकट की चिंता किए मैदान में पहुंचकर खिलाड़ियों का उत्साह बढ़ा सकेंगी। नवरात्रि के समय होने वाले इन मैचों से रायपुर में खेल और त्योहार का माहौल एक साथ देखने को मिल सकता है। आयोजकों की कोशिश है कि स्टेडियम में बड़ी संख्या में दर्शक मौजूद रहें और भारतीय टीम को घरेलू मैदान पर भरपूर समर्थन मिले।

    इस टी20 सीरीज की एक और खास बात यह है कि स्मृति मंधाना भारतीय महिला टीम की पूर्णकालिक कप्तान के रूप में अपनी पारी की शुरुआत करेंगी। उनकी कप्तानी में टीम के प्रदर्शन पर प्रशंसकों की नजर रहेगी। वहीं जिम्बाब्वे की महिला टीम के लिए भी यह दौरा महत्वपूर्ण है क्योंकि यह भारत के खिलाफ उसकी पहली द्विपक्षीय सीरीज होगी। दोनों टीमों के बीच होने वाले मुकाबले खिलाड़ियों को अपनी प्रतिभा दिखाने और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अनुभव हासिल करने का अवसर देंगे।

    रायपुर में पहली बार महिला अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मैच खेले जाने को लेकर भी उत्साह है। अब तक इस मैदान पर कई बड़े क्रिकेट मुकाबले आयोजित हो चुके हैं लेकिन महिला अंतरराष्ट्रीय मैच की मेजबानी शहर के लिए नया अनुभव होगी। महिला दर्शकों के लिए मुफ्त प्रवेश की घोषणा से इस आयोजन को और व्यापक पहचान मिलने की उम्मीद है। छत्तीसगढ़ राज्य क्रिकेट संघ के अध्यक्ष मोहन दास निदेशक विजय शाह पूर्व अध्यक्ष मुकुल तिवारी सचिव विन्तेश अग्रवाल और अन्य पदाधिकारियों ने मुख्यमंत्री को सीरीज के लिए आमंत्रित किया था।

    टी20 सीरीज के बाद भारत और जिम्बाब्वे की महिला टीमें वनडे मुकाबलों के लिए वडोदरा जाएंगी। वहां 23 से 28 अक्टूबर के बीच तीन मैचों की वनडे सीरीज खेली जाएगी। फिलहाल रायपुर में होने वाले टी20 मुकाबलों पर सभी की नजरें टिकी हैं। महिला दर्शकों को मुफ्त प्रवेश देने के फैसले से स्टेडियम में उत्साह बढ़ने की संभावना है और यह पहल महिला क्रिकेट के प्रति दर्शकों की भागीदारी को प्रोत्साहित कर सकती है।

  • MP में पेपर लीक और नकल के मामलों की सुनवाई होगी तेज, चार फास्ट ट्रैक कोर्ट गठित, दोषियों को सजा दिलाने पर सरकार का जोर

    MP में पेपर लीक और नकल के मामलों की सुनवाई होगी तेज, चार फास्ट ट्रैक कोर्ट गठित, दोषियों को सजा दिलाने पर सरकार का जोर


    भोपाल। मध्य प्रदेश में प्रतियोगी परीक्षाओं और बोर्ड परीक्षाओं से जुड़े अपराधों पर लगाम लगाने के लिए राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। पेपर लीक नकल और परीक्षा प्रक्रिया में गड़बड़ी से जुड़े मामलों की जल्द सुनवाई के लिए भोपाल इंदौर ग्वालियर और जबलपुर में चार फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाए गए हैं। इन अदालतों में चार्जशीट दाखिल होने के तीन महीने के भीतर ट्रायल पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इस पहल के साथ मध्य प्रदेश परीक्षा संबंधी अपराधों के लिए अलग फास्ट ट्रैक अदालतें बनाने वाला देश का पहला राज्य बन गया है। सरकार का उद्देश्य परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता मजबूत करना और मेहनत के दम पर परीक्षा देने वाले युवाओं के हितों की रक्षा करना है।
    राज्य सरकार के अनुसार यह कदम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की घोषणा और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देशों के बाद उठाया गया है। परीक्षा से जुड़े अपराधों के मामलों में अक्सर जांच और कानूनी प्रक्रिया लंबी होने से अभ्यर्थियों के मन में निष्पक्ष चयन को लेकर सवाल उठते हैं। नई व्यवस्था के जरिए ऐसे मामलों की सुनवाई को प्राथमिकता देने और कानूनी कार्रवाई में तेजी लाने की कोशिश की जा रही है। हालांकि तीन महीने में ट्रायल पूरा करने का लक्ष्य तय किया गया है लेकिन हर मामले में इस अवधि के भीतर फैसला आने की गारंटी नहीं है। सुनवाई का समय मामले की परिस्थितियों और कानूनी प्रक्रिया पर भी निर्भर करेगा।
    इन चार अदालतों के लिए अलग अलग जिलों का दायित्व तय किया गया है। भोपाल स्थित फास्ट ट्रैक कोर्ट भोपाल के साथ सीहोर रायसेन बैतूल नर्मदापुरम हरदा राजगढ़ और विदिशा जिलों से जुड़े मामलों की सुनवाई करेगी। इंदौर की अदालत इंदौर के अलावा धार रतलाम झाबुआ मंदसौर उज्जैन और देवास सहित मालवा निमाड़ क्षेत्र के मामलों को देखेगी। ग्वालियर स्थित कोर्ट ग्वालियर भिंड मुरैना शिवपुरी गुना दतिया अशोकनगर और टीकमगढ़ जैसे जिलों से जुड़े मामलों की सुनवाई करेगी। वहीं जबलपुर की अदालत को जबलपुर सागर रीवा सतना छिंदवाड़ा शहडोल और महाकौशल तथा बुंदेलखंड क्षेत्र के अन्य जिलों से संबंधित मामलों की जिम्मेदारी दी गई है।
    मामलों की प्रभावी पैरवी के लिए राज्य शासन ने विशेष अभियोजकों की नियुक्ति भी की है। इनकी जिम्मेदारी अदालत में साक्ष्य प्रस्तुत करने गवाहों से संबंधित प्रक्रिया को व्यवस्थित रखने और मामलों की पैरवी पर विशेष ध्यान देने की होगी। इसके साथ ही संबंधित जिलों के पुलिस अधीक्षकों के नेतृत्व में विशेष जांच दल यानी एसआईटी गठित किए गए हैं। इन दलों के जरिए परीक्षा अपराधों से जुड़े मामलों की जांच को व्यवस्थित करने और जरूरी साक्ष्य जुटाने पर जोर दिया जाएगा। जांच और अभियोजन के बीच बेहतर तालमेल से अदालत में सुनवाई की प्रक्रिया को गति देने की उम्मीद है।
    पेपर लीक और नकल जैसी घटनाएं केवल परीक्षा की विश्वसनीयता को प्रभावित नहीं करतीं बल्कि उन लाखों युवाओं के भविष्य पर भी असर डालती हैं जो प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में समय और संसाधन लगाते हैं। यदि परीक्षा से जुड़े अपराधों की समय पर जांच और सुनवाई होती है तो निष्पक्ष चयन प्रक्रिया में लोगों का भरोसा मजबूत हो सकता है। नई व्यवस्था में आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई कानून और अदालत में प्रस्तुत साक्ष्यों के आधार पर होगी। केवल आरोप लगने से किसी व्यक्ति को दोषी नहीं माना जा सकता।
    मध्य प्रदेश सरकार की इस पहल का वास्तविक असर अदालतों में मामलों की सुनवाई की गति और जांच की गुणवत्ता से सामने आएगा। विशेष अदालतों और अभियोजन व्यवस्था के माध्यम से सरकार परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता बनाए रखने तथा अनियमितताओं के खिलाफ प्रभावी कानूनी कार्रवाई को मजबूत करना चाहती है। अब इन अदालतों के कामकाज और निर्धारित समयसीमा के पालन पर नजर रहेगी।

  • 500 साल पुरानी आस्था का चमत्कारी धाम, जहां ज्वाला से प्रकट हुईं मां अष्टभुजा, नवरात्रि में उमड़ता है लाखों भक्तों का सैलाब

    500 साल पुरानी आस्था का चमत्कारी धाम, जहां ज्वाला से प्रकट हुईं मां अष्टभुजा, नवरात्रि में उमड़ता है लाखों भक्तों का सैलाब


    मऊगंज । मध्य प्रदेश के मऊगंज जिले के नईगढ़ी में स्थित मां अष्टभुजा का धाम करीब 500 वर्षों से श्रद्धा और आस्था का प्रमुख केंद्र माना जाता है। नवरात्रि के पावन अवसर पर यहां भक्तों की भीड़ उमड़ती है। मंदिर की घंटियों की ध्वनि और माता के जयकारों से पूरा क्षेत्र भक्तिमय हो उठता है। लोक मान्यताओं के अनुसार इस धाम का इतिहास एक ऐसी घटना से जुड़ा है जिसे श्रद्धालु मां आदिशक्ति के प्राकट्य की कथा के रूप में याद करते हैं। कभी घने जंगलों और सुनसान पगडंडियों के लिए पहचाना जाने वाला यह इलाका आज मां अष्टभुजा की आराधना के लिए दूर दूर तक प्रसिद्ध है। मध्य प्रदेश के अलावा उत्तर प्रदेश और छत्तीसगढ़ से भी श्रद्धालु यहां दर्शन करने पहुंचते हैं।
    स्थानीय लोकश्रुति के अनुसार लगभग पांच सौ वर्ष पहले इस क्षेत्र के घने जंगल में अचानक आग जैसी प्रचंड ज्वाला दिखाई दी थी। उसी समय लालगंज का एक यादव वहां से गुजर रहा था। जंगल को जलने से बचाने की भावना से उसने अपने लोटे का पानी उस ज्वाला पर डाल दिया। मान्यता है कि पानी अर्पित करते ही ज्वाला शांत हो गई और वहां पिंडी स्वरूप प्रकट हुआ। श्रद्धालु इसी घटना को मां अष्टभुजा के प्राकट्य से जोड़ते हैं। हालांकि यह कथा स्थानीय जनविश्वास और परंपरा का हिस्सा है जो पीढ़ियों से सुनाई जाती रही है। इसी मान्यता ने इस स्थान को धार्मिक पहचान दिलाई और समय के साथ यहां मंदिर विकसित हुआ।
    नईगढ़ी के नाम से जुड़ी एक अन्य रोचक लोककथा भी प्रचलित है। कहा जाता है कि उस समय सेंगर वंश के राजा प्रताप सिंह इस क्षेत्र में गढ़ी बनवा रहे थे। मान्यता के अनुसार माता ने राजा को स्वप्न में दर्शन देकर इस भूमि को अपनी आराधना के लिए छोड़ने का संदेश दिया। कथा के मुताबिक माता ने राजा को एक श्वेत खरगोश और श्यामवर्णी श्वान का संकेत दिया था। सुबह राजा ने वैसा ही दृश्य देखा और उस स्थान पर नई गढ़ी बसाने का निर्णय लिया। लोकविश्वास में इसी घटना को नईगढ़ी नगर के नामकरण से जोड़ा जाता है। मंदिर के पास बहने वाली देवलहा नदी और देवलहा जलप्रपात भी इस क्षेत्र की पहचान का हिस्सा हैं।
    वर्तमान मंदिर के निर्माण का श्रेय करीब 135 वर्ष पहले दुवगवां निवासी साधुराम कोड़रिया को दिया जाता है। बाद के वर्षों में मोतीलाल पांडेय सुमेदा और पटवारी राजेंद्र धर द्विवेदी हटवा सहित कई श्रद्धालुओं ने मंदिर के विकास और जीर्णोद्धार में योगदान दिया। समय के साथ यह धाम केवल स्थानीय लोगों का पूजा स्थल नहीं रहा बल्कि आसपास के जिलों और दूसरे राज्यों से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए भी महत्वपूर्ण धार्मिक केंद्र बन गया। सोमवार और गुरुवार को यहां विशेष रूप से भक्त पहुंचते हैं। नवरात्रि और आषाढ़ तथा श्रावण में आयोजित हरियाली पुजाई के दौरान मंदिर परिसर में विशेष रौनक रहती है।
    मां अष्टभुजा के दरबार से जुड़ी कई धार्मिक मान्यताएं भी प्रचलित हैं। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि सच्चे मन से मांगी गई मनोकामना माता के आशीर्वाद से पूरी होती है। यहां मुंडन संस्कार कर्ण छेदन सत्यनारायण कथा भजन कीर्तन और भंडारे जैसे धार्मिक आयोजन होते हैं। कुछ भक्त अपनी मनौती पूरी होने पर पारंपरिक रूप से विशेष अर्पण भी करते हैं। इन मान्यताओं को श्रद्धालु अपनी आस्था का हिस्सा मानते हैं। मंदिर के आसपास लगने वाली दुकानों से स्थानीय लोगों को रोजगार मिलता है और मेले के समय क्षेत्र की आर्थिक गतिविधियां भी बढ़ जाती हैं।
    श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए प्रशासन की ओर से धर्मशाला पेयजल और सामुदायिक भवन जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। मेले के दौरान भीड़ को व्यवस्थित करने और दर्शन को सुगम बनाने के लिए विशेष इंतजाम किए जाते हैं। करीब पांच शताब्दियों से चली आ रही लोकआस्था और लगभग 135 वर्ष पुराने मंदिर की परंपरा ने नईगढ़ी धाम को क्षेत्र की विशिष्ट धार्मिक पहचान दी है। नवरात्रि में यहां पहुंचने वाले भक्त माता के दर्शन कर सुख समृद्धि और परिवार के कल्याण की कामना करते हैं।

  • आदिवासी परिवारों के साथ अन्याय पर सरकार सख्त, कोसमी मामले की जांच के आदेश, दोषियों पर कार्रवाई का आश्वासन

    आदिवासी परिवारों के साथ अन्याय पर सरकार सख्त, कोसमी मामले की जांच के आदेश, दोषियों पर कार्रवाई का आश्वासन


    सीहोर । मध्य प्रदेश के सीहोर जिले के बुधनी क्षेत्र के कोसमी गांव में आदिवासी परिवारों के मकान तोड़े जाने का मामला अब मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव तक पहुंच गया है। गुरुवार देर शाम केंद्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने भोपाल स्थित मुख्यमंत्री निवास पर मुलाकात की। बैठक में वन विभाग की कार्रवाई से प्रभावित आदिवासी परिवारों की स्थिति और उनकी समस्याओं को लेकर चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने मामले की जांच कराने और जांच में दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई का आश्वासन दिया है। इस घटनाक्रम के बाद प्रभावित परिवारों को राहत मिलने की उम्मीद बढ़ी है।
    मुख्यमंत्री से मुलाकात के दौरान भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल भी मौजूद रहे। प्रतिनिधिमंडल में प्रभावित आदिवासी परिवारों के प्रतिनिधि भी शामिल थे। शिवराज सिंह चौहान ने कोसमी गांव में हुई कार्रवाई का मुद्दा उठाते हुए परिवारों को न्याय दिलाने की मांग की। वह पहले भी इस मामले पर नाराजगी जता चुके हैं। उनका कहना था कि मौके पर उन्होंने बच्चों को परेशान होते और महिलाओं को कठिन परिस्थितियों से गुजरते देखा था। अब मुख्यमंत्री के सामने मामला रखने के बाद उन्होंने प्रभावित परिवारों की समस्याओं के समाधान की जरूरत पर जोर दिया।
    जानकारी के मुताबिक 11 अक्टूबर को कोसमी गांव में वन विभाग की कार्रवाई के दौरान 12 परिवारों के मकान तोड़े गए थे। इसके बाद प्रभावित परिवारों ने अपने नुकसान को लेकर सवाल उठाए और मुआवजे की मांग की। परिवारों का कहना है कि उन्हें जमीन के पट्टे दिए जाएं और मकानों के साथ फसलों को हुए नुकसान की भरपाई की जाए। उन्होंने कार्रवाई के लिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ भी कदम उठाने की मांग की है। फिलहाल इस पूरे मामले में जांच और प्रशासनिक कार्रवाई को लेकर मुख्यमंत्री के आश्वासन पर परिवारों की नजर बनी हुई है।
    बैठक के बाद प्रशासनिक स्तर पर भी गतिविधियां तेज होने की जानकारी सामने आई है। बताया गया है कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देश पर कलेक्टर के. बालागुरु रात में कोनझीर पहुंचे और प्रभावित आदिवासी परिवारों से मुलाकात की। परिवारों को बस के जरिए वापस उनके घर पहुंचाने की व्यवस्था किए जाने की बात भी सामने आई है। सूत्रों के मुताबिक मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए हैं कि किसी भी आदिवासी परिवार को परेशान नहीं किया जाए और जहां लोग स्थापित हैं वहां उनके साथ संवेदनशीलता के साथ व्यवहार किया जाए। हालांकि मामले से जुड़े सभी तथ्यों और कार्रवाई की परिस्थितियों का स्पष्ट होना जांच के बाद ही संभव होगा।
    कोसमी गांव की घटना अब राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर चर्चा का विषय बन गई है। प्रभावित परिवारों की मांग है कि उन्हें केवल आश्वासन ही नहीं बल्कि वास्तविक राहत भी मिले। उनके अनुसार मकान और फसलें प्रभावित होने से उनके सामने रहने और आजीविका से जुड़ी समस्याएं खड़ी हुई हैं। ऐसे में मुआवजे और जमीन के पट्टों से संबंधित मांगों पर निर्णय महत्वपूर्ण होगा।
    इधर कोसमी मामले को लेकर आदिवासी समुदाय के कुछ लोगों ने भोपाल की ओर पैदल मार्च भी शुरू किया है। जानकारी के अनुसार ये परिवार शुक्रवार शाम तक राजधानी पहुंच सकते हैं। उनकी प्रमुख मांग है कि मकान तोड़े जाने के मामले में न्याय मिले और हुए नुकसान की भरपाई की जाए। मुख्यमंत्री की ओर से जांच और दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई का भरोसा दिए जाने के बाद अब आगे की प्रक्रिया महत्वपूर्ण मानी जा रही है। जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं और प्रभावित परिवारों को किस तरह राहत मिलती है इस पर सभी की नजर रहेगी।

  • जेलर 2 की रिकॉर्डतोड़ ओपनिंग, पहले दिन दुनियाभर में 125 करोड़ रुपये से ज्यादा की कमाई

    जेलर 2 की रिकॉर्डतोड़ ओपनिंग, पहले दिन दुनियाभर में 125 करोड़ रुपये से ज्यादा की कमाई

    नई दिल्ली । सुपरस्टार रजनीकांत की फिल्म जेलर 2 ने 15 अक्टूबर 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज होते ही बॉक्स ऑफिस पर शानदार शुरुआत की। फिल्म ने पहले दिन घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में मजबूत प्रदर्शन करते हुए दुनियाभर में 125.25 करोड़ रुपये का ग्रॉस कलेक्शन दर्ज किया। 75 साल की उम्र में भी रजनीकांत की लोकप्रियता का असर फिल्म की ओपनिंग में दिखाई दिया। शुरुआती आंकड़ों के मुताबिक, फिल्म ने भारतीय बॉक्स ऑफिस पर भी अच्छी कमाई की और तमिल सिनेमा की सबसे बड़ी ओपनिंग दर्ज करने वाली फिल्मों में अपनी जगह बना ली।
    फिल्म की एडवांस बुकिंग 10 अक्टूबर को शुरू हुई थी। यानी रिलीज से पांच दिन पहले दर्शकों के लिए टिकटों की बिक्री शुरू कर दी गई थी। कुछ विदेशी बाजारों में एडवांस बुकिंग एक दिन पहले ही शुरू हो गई थी। टिकटों की शुरुआती बिक्री से फिल्म को रिलीज से पहले ही अच्छा समर्थन मिला। इसके बाद सिनेमाघरों में प्रदर्शित होने के पहले दिन फिल्म ने विभिन्न भाषाओं में कुल 16,599 शोज के जरिए 59.70 करोड़ रुपये का नेट कलेक्शन किया।
    भारत में फिल्म का कुल ग्रॉस कलेक्शन 70.25 करोड़ रुपये रहा। इसमें तमिल, तेलुगु, हिंदी और कन्नड़ भाषाओं के संस्करणों का योगदान शामिल है। अलग-अलग भाषाओं में हुई कमाई के आंकड़े बताते हैं कि फिल्म को सबसे ज्यादा दर्शक तमिल संस्करण के लिए मिले। तेलुगु संस्करण ने भी पहले दिन के कारोबार में उल्लेखनीय योगदान दिया, जबकि हिंदी और कन्नड़ संस्करणों की कमाई तुलनात्मक रूप से कम रही।
    तमिल संस्करण ने पहले दिन 9,326 शोज के जरिए 43.35 करोड़ रुपये का नेट कलेक्शन किया। तेलुगु संस्करण को 2,792 शोज में प्रदर्शित किया गया, जिनसे 12.50 करोड़ रुपये की कमाई हुई। हिंदी संस्करण ने 4,371 शोज के माध्यम से 3.50 करोड़ रुपये का नेट कलेक्शन दर्ज किया। वहीं, कन्नड़ संस्करण के 110 शोज से 0.35 करोड़ रुपये की कमाई हुई। इन सभी भाषाओं के कारोबार को मिलाकर फिल्म का कुल घरेलू नेट कलेक्शन 59.70 करोड़ रुपये रहा।
    विदेशी बाजारों में भी फिल्म को अच्छी शुरुआत मिली। वहां पहले दिन का ग्रॉस कलेक्शन 55 करोड़ रुपये बताया गया है। भारत में 70.25 करोड़ रुपये के ग्रॉस कारोबार के साथ विदेशों से हुई कमाई जोड़ने पर फिल्म का वर्ल्डवाइड ग्रॉस कलेक्शन 125.25 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। इस तरह फिल्म ने रिलीज के पहले ही दिन वैश्विक बॉक्स ऑफिस पर 100 करोड़ रुपये का आंकड़ा पार कर लिया।
    तमिल सिनेमा में पहले दिन की कमाई के आधार पर जेलर 2 ने चौथा स्थान हासिल किया है। इससे आगे विजय की फिल्म लियो और रजनीकांत की कुली ने 65-65 करोड़ रुपये की ओपनिंग दर्ज की थी, जबकि रजनीकांत की ही फिल्म 2.0 ने पहले दिन 60 करोड़ रुपये कमाए थे। जेलर 2 का 59.70 करोड़ रुपये का घरेलू नेट कलेक्शन इसे इस सूची में चौथे स्थान पर रखता है।
    फिल्म ने पहले दिन की कमाई के मामले में बीस्ट, GOAT, जना नायकन और विक्रम जैसी तमिल फिल्मों को भी पीछे छोड़ दिया। बीस्ट ने 49 करोड़ रुपये, GOAT ने 44 करोड़ रुपये, जना नायकन ने 43 करोड़ रुपये और विक्रम ने 32 करोड़ रुपये की ओपनिंग दर्ज की थी। जेलर 2 की शुरुआत ने इसे तमिल सिनेमा की बड़ी ओपनिंग वाली फिल्मों की सूची में शामिल कर दिया है।
    रजनीकांत की इस फिल्म को दर्शकों से सकारात्मक प्रतिक्रियाएं मिलने की खबरों के बीच पहले दिन के बॉक्स ऑफिस आंकड़ों ने इसकी शुरुआत को खास बना दिया है। अब फिल्म की कमाई के अगले दिनों के आंकड़ों पर नजर रहेगी, जिनसे पता चलेगा कि यह शुरुआती प्रदर्शन आगे कितना कायम रह पाता है।
  • भोपाल में गरबा की धूम, सीएम मोहन यादव ने दिया संस्कृति और संस्कारों को सहेजने का संदेश, नवरात्रि में दिखी भक्ति की झलक

    भोपाल में गरबा की धूम, सीएम मोहन यादव ने दिया संस्कृति और संस्कारों को सहेजने का संदेश, नवरात्रि में दिखी भक्ति की झलक


    भोपाल । भोपाल के जंबूरी मैदान में गुरुवार को भोजपाल गरबा महोत्सव का भव्य शुभारंभ हुआ। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने दीप प्रज्ज्वलित कर महोत्सव की शुरुआत की। इस दौरान गरबा की आकर्षक प्रस्तुतियों और भक्ति गीतों से पूरा माहौल भक्तिमय हो गया। मुख्यमंत्री ने भजन गायन भी किया और प्रदेशवासियों को नवरात्रि की शुभकामनाएं देते हुए मां दुर्गा से सभी के सुख समृद्धि और कल्याण की कामना की। अपने संबोधन में उन्होंने भारतीय संस्कृति परंपराओं और विरासत पर गर्व करने का संदेश दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि देश और समाज कितना भी आधुनिक क्यों न हो जाए उसे अपनी जड़ों से जुड़ा रहना चाहिए। जिन समाजों ने अपनी सांस्कृतिक विरासत को सहेजकर रखा है वे विकास की नई ऊंचाइयों तक पहुंचे हैं।
    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि भारतीय संस्कृति में नारी शक्ति की उपासना का विशेष महत्व है। यहां कन्या को देवी का स्वरूप माना जाता है और मातृशक्ति के रूप में भी पूजा की जाती है। उन्होंने कहा कि नारी नारायणी हैं और शक्ति का प्रतीक हैं। मां दुर्गा के नौ स्वरूप हमें साहस पराक्रम और आत्मविश्वास की प्रेरणा देते हैं। शक्ति की भक्ति में ही सभी का कल्याण निहित है। नवरात्रि का पर्व केवल पूजा पाठ तक सीमित नहीं है बल्कि यह हमें अपनी परंपराओं को समझने और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा लाने का अवसर भी प्रदान करता है।
    मुख्यमंत्री ने लोगों से समाज में सद्भाव बढ़ाने और महिलाओं के सम्मान को प्राथमिकता देने की अपील की। उन्होंने कहा कि त्योहारों की सार्थकता तभी है जब उनके माध्यम से समाज में प्रेम और सहयोग की भावना मजबूत हो। लोगों को गरीब और जरूरतमंद परिवारों के जीवन में खुशियां लाने का संकल्प भी लेना चाहिए। भोजपाल गरबा महोत्सव में भक्ति और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के जरिए भारतीय परंपराओं की झलक देखने को मिली। कार्यक्रम में भोजपाल महोत्सव मेला समिति के संयोजक विकास वीरानी और समिति के अध्यक्ष सुनील यादव सहित अन्य पदाधिकारियों ने मुख्यमंत्री का स्वागत किया।
    मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले तीन वर्षों में भोजपाल गरबा महोत्सव लगातार भव्य और व्यापक होता गया है। इस वर्ष भी बड़ी संख्या में लोग आयोजन में शामिल होने पहुंचे हैं। गरबा केवल नृत्य का कार्यक्रम नहीं है बल्कि यह शक्ति की आराधना से मिलने वाली शांति खुशी और उत्साह को सामूहिक रूप से व्यक्त करने का माध्यम है। ऐसे आयोजन लोगों को एक साथ लाने और आपसी मेलजोल बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि खेल और शारीरिक गतिविधियों को जीवन का हिस्सा बनाना चाहिए ताकि लोग स्वस्थ और सक्रिय रह सकें।
    डॉ. मोहन यादव ने कहा कि सरकार का प्रयास है कि प्रदेश में प्रमुख त्योहार और सांस्कृतिक आयोजन सामूहिक उत्साह के साथ मनाए जाएं। मकर संक्रांति पर पतंग उत्सव सर्दियों में भोपाल उत्सव और जन्माष्टमी जैसे आयोजनों के माध्यम से सांस्कृतिक परंपराओं को आगे बढ़ाने की दिशा में काम किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसे कार्यक्रम नई पीढ़ी को अपनी विरासत से जोड़ने का अवसर देते हैं और समाज में एकता की भावना को मजबूत करते हैं।
    अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में दुनिया में भारत के बढ़ते मान सम्मान का भी उल्लेख किया। उन्होंने आशा जताई कि वर्ष 2047 में स्वतंत्रता के सौ वर्ष पूरे होने तक भारत हर क्षेत्र में अग्रणी देशों में शामिल होगा। उन्होंने भारतीय संस्कृति और गौरव का परचम पूरी दुनिया में ऊंचा रखने का आह्वान किया। साथ ही लोगों को आगामी दशहरे की अग्रिम शुभकामनाएं देते हुए अपनी परंपराओं को सहेजने और आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने का संदेश दिया। भोजपाल गरबा महोत्सव का शुभारंभ भक्ति उल्लास और सांस्कृतिक गौरव के माहौल में हुआ।