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इस वर्ष केंद्र सरकार ने गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य MSP 2585 रुपये प्रति क्विंटल घोषित किया है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 160 रुपये अधिक है। बढ़ा हुआ समर्थन मूल्य किसानों के लिए राहत भरा माना जा रहा है। राज्य सरकार ने पूरे प्रदेश में 3186 पंजीयन केंद्र स्थापित किए हैं, ताकि किसानों को रजिस्ट्रेशन के लिए दूर-दराज न जाना पड़े और प्रक्रिया में किसी प्रकार की परेशानी न हो।
संभागवार आंकड़ों पर नजर डालें तो उज्जैन संभाग में सर्वाधिक 1,48,905 किसानों ने पंजीयन कराया है। भोपाल संभाग में 1,09,134 किसान, इंदौर संभाग में 54,587 किसान और जबलपुर संभाग में 39,885 किसान रजिस्ट्रेशन करा चुके हैं। इसके अलावा नर्मदापुरम में 34,181, सागर में 25,398, रीवा में 13,260, ग्वालियर में 9,695, चंबल में 4,692 और शहडोल संभाग में 2,551 किसानों ने पंजीयन कराया है। इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि प्रदेशभर में किसान खरीदी व्यवस्था को लेकर सक्रिय हैं।
किसानों की सुविधा के लिए पंजीयन की दोहरी व्यवस्था की गई है। नि:शुल्क पंजीयन ग्राम पंचायतों के सुविधा केंद्रों, जनपद पंचायत कार्यालयों, तहसील कार्यालयों और सहकारी समितियों में किया जा सकता है। वहीं सशुल्क पंजीयन के लिए एमपी ऑनलाइन कियोस्क, कॉमन सर्विस सेंटर CSC, लोक सेवा केंद्र और निजी साइबर कैफे की सुविधा उपलब्ध है। किसान अपनी सुविधा के अनुसार किसी भी माध्यम से पंजीयन करा सकते हैं।
खाद्य मंत्री ने बताया कि जिन किसानों के मोबाइल नंबर पिछले रबी और खरीफ सीजन से उपलब्ध हैं, उन्हें पंजीयन संबंधी जानकारी SMS के माध्यम से भेजी जा रही है। इसके साथ ही गांवों में डोंडी पिटवाकर, ग्राम पंचायत सूचना पटल पर सूचना चस्पा कर तथा समितियों और मंडियों में बैनर लगाकर व्यापक प्रचार-प्रसार किया जा रहा है, ताकि कोई भी किसान इस प्रक्रिया से वंचित न रह जाए।
राज्य सरकार का कहना है कि इस बार खरीदी प्रक्रिया को पारदर्शी और व्यवस्थित बनाने के लिए विशेष इंतजाम किए जा रहे हैं। पंजीयन से लेकर खरीदी और भुगतान तक की पूरी प्रक्रिया की ऑनलाइन मॉनिटरिंग की जाएगी, जिससे किसानों को समय पर भुगतान सुनिश्चित हो सके और किसी प्रकार की गड़बड़ी की गुंजाइश न रहे।
किसानों से अपील की गई है कि वे अंतिम तिथि 7 मार्च से पहले अपना पंजीयन अवश्य करा लें, ताकि समर्थन मूल्य पर गेहूं बेचने में किसी प्रकार की बाधा न आए।

भीलवाड़ा में स्व से सृष्टि तक मंगल ही हमारा संकल्प, सेवा ही हमारा परम धर्म के मूल मंत्र के साथ डॉ. यादव ने कहा कि भारतीय संस्कृति ही वह महान संस्कृति है, जो सबके मंगल की कामना करती है। उनका कहना था कि वसुधैव कुटुंबकम् के सिद्धांत से प्रेरणा लेकर हमें केवल मानव नहीं, पृथ्वी के सभी प्राणियों, पेड़ पौधों और समस्त सृष्टि के कल्याण के लिए जीना चाहिए। यही जीवन का उच्चतम लक्ष्य एवं परम सेवा धर्म है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी संस्कृति की जड़ें सेवा, समर्पण, विश्व बंधुत्व और सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय जैसी परोपकारी भावनाओं में निहित हैं। वे बोले कि जीवमात्र की सेवा ही श्रीहरि की सेवा है और सम्पूर्ण मानवता की सेवा धर्म है। उन्होंने यह भी बताया कि रा से राजस्थान और म से मध्यप्रदेश मिलकर राम की महिमा को आगे बढ़ा रहे हैं।
डॉ. यादव ने संतों की समाज में भूमिका की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि संतों के उपदेश नैतिक मूल्यों, करुणा, सद्भाव और समरसता को बढ़ावा देते हैं। पूज्य हंसरामजी महाराज ने धर्म, भक्ति, सेवा, सत्य तथा अहिंसा को जीवन में जीने का संदेश दिया है और हजारों असहायों को आश्रम के माध्यम से सहारा दिया है।
कार्यक्रम में तीन युवा संतों ईशानराम जी महाराज, केशवराम जी महाराज और सुमज्ञराम जी महाराज को दीक्षा दी गई, जिनका मुख्यमंत्री ने माल्यार्पण कर अभिनंदन किया। मुख्यमंत्री ने बताया कि उज्जैन में वर्ष 2028 में होने वाले सिंहस्थ महाकुंभ में देश विदेश के सभी साधु संतों का स्वागत किया जाएगा और उनकी आशीष रूपी ऊर्जा से देश को आगे बढ़ाने का आग्रह किया है।
राजस्थान सरकार के सहकारिता राज्यमंत्री गौतम कुमार दक ने भी मुख्यमंत्री का सम्मान किया और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में सामाजिक समरसता और धार्मिक पुनरुद्धार पर जोर दिया कार्यक्रम में सांसद दामोदर अग्रवाल, साधु संत, महामंडलेश्वर, मंडलेश्वर, महंत और बड़ी संख्या में धर्म श्रद्धालु मौजूद रहे।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अपने संदेश में कहा कि भारत के शूरवीर सैनिकों ने कठिन परिस्थितियों में भी अदम्य साहस का प्रदर्शन करते हुए मातृभूमि की गरिमा को अक्षुण्ण बनाए रखा। उन्होंने कहा कि भारतीय वायुसेना का पराक्रम केवल सैन्य शक्ति का प्रतीक नहीं, बल्कि राष्ट्र की एकजुटता, दृढ़ इच्छाशक्ति और आत्मसम्मान का भी प्रतीक है।
उन्होंने आगे कहा कि देश के जवानों का साहस आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा स्रोत है। राष्ट्र की सुरक्षा में अपना सर्वस्व न्यौछावर करने वाले सैनिकों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि पूरे देश को अपने वीर सपूतों पर सदैव गर्व रहेगा।
डॉ. यादव ने इस अवसर पर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि उनका बलिदान देशवासियों के लिए अमिट स्मृति है और राष्ट्र उनकी वीरता को सदैव याद रखेगा।

कूर्ग भारत का स्कॉटलैंड
ऋषिकेश अध्यात्म और एडवेंचर का संगम

जानकारी के अनुसार, नई परिवहन नीति के विरोध में प्रदेश के बस ऑपरेटर्स 2 मार्च को बस सेवा बंद रखेंगे। कई बसों पर हड़ताल संबंधी पर्चे भी चिपकाए गए हैं, जिनमें स्पष्ट रूप से 2 मार्च को बस संचालन ठप रखने की बात कही गई है। होली जैसे बड़े त्योहार से ठीक पहले बस सेवा बंद होने की स्थिति में यात्रियों को खासी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। स्वाभाविक रूप से बस सेवा प्रभावित होने पर यात्रियों का रुख रेलवे की ओर बढ़ेगा, जिससे ट्रेनों में भीड़ बढ़ने की संभावना है।
इसी को देखते हुए रेलवे प्रशासन ने अतिरिक्त भीड़ प्रबंधन के लिए विशेष ट्रेनों की घोषणा की है। भोपाल मंडल से रीवा, भोपाल और दानापुर के लिए स्पेशल ट्रेनें चलाई जाएंगी। गाड़ी संख्या 02192/02191 एक-एक ट्रिप 28 फरवरी 2026 को संचालित करेगी। वहीं गाड़ी संख्या 02186/02185 नंबर की स्पेशल ट्रेन 2 और 3 मार्च 2026 को दो-दो ट्रिप चलेगी।
इसके अलावा भोपाल-रीवा स्पेशल ट्रेन (01704/01703) 5 मार्च 2026 को एक ट्रिप करेगी। वहीं रानी कमलापति-दानापुर स्पेशल ट्रेन (01667/01668) 27 फरवरी और 2 मार्च को रवाना होगी। वापसी में यह ट्रेन 28 फरवरी और 3 मार्च को चलेगी। रेलवे के इस फैसले से त्योहार के दौरान घर जाने वाले यात्रियों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।
हालांकि बस हड़ताल और ट्रेनों में बढ़ती भीड़ की संभावना को देखते हुए यात्रियों को समय रहते टिकट बुक कराने और वैकल्पिक यात्रा योजना तैयार रखने की सलाह दी जा रही है। विशेष रूप से लंबी दूरी की यात्रा करने वाले यात्रियों को रेलवे की वेबसाइट या अधिकृत काउंटर से अपडेट लेते रहना चाहिए।
होली के अवसर पर हर वर्ष यात्रियों की संख्या में भारी वृद्धि देखी जाती है। ऐसे में बस सेवा बंद रहने और ट्रेनों में अतिरिक्त भीड़ के चलते यात्रा प्रबंधन प्रशासन के लिए भी चुनौती बन सकता है। फिलहाल रेलवे की ओर से की गई अतिरिक्त ट्रेनों की व्यवस्था को राहत भरा कदम माना जा रहा है, जबकि बस ऑपरेटरों की हड़ताल से परिवहन व्यवस्था पर असर पड़ना तय है।

कार्यक्रम की शुरुआत पितृ पर्वत पर वृक्षारोपण अभियान से हुई। यहां स्वयंसेवकों और प्रकृति प्रेमियों ने मिलकर 1,000 से अधिक पौधे लगाए। वृक्षारोपण के साथ ही गौ सेवा का आयोजन भी किया गया, जो न केवल पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने में सहायक है, बल्कि आध्यात्मिक दृष्टि से भी इसकी अहमियत है। डॉ. दिनेश सहारा के साथ उनके परिवार के सदस्य सुरेश सहारा, नितेश सहारा और मनीष सहारा सहित अन्य गणमान्य लोग भी मौजूद रहे और इस पुनीत कार्य में हिस्सा लिया।
शाम के समय ‘ग्रीन गोल्ड वॉकाथॉन’ का आयोजन किया गया, जो 3 किलोमीटर लंबी पदयात्रा थी। इस वॉकाथॉन में इंदौर के युवा, परिवार और बुजुर्ग भाग लेने के लिए उमड़े। इस पदयात्रा का मुख्य उद्देश्य लोगों में स्वच्छ और सुरक्षित भविष्य के प्रति सामूहिक जिम्मेदारी की भावना पैदा करना था। डॉ. दिनेश सहारा ने इस दौरान संदेश दिया कि पर्यावरण की रक्षा करना प्रत्येक नागरिक का नैतिक कर्तव्य है।
कार्यक्रम में समाजसेवा और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने वाले व्यक्तित्वों को सम्मानित किया गया। इसमें रंजन नेगी, सुरेश एमजी, प्रियंशु कुमाथ, सुधींद्र मोहन शर्मा, डॉ. जगदीश यादव और पुनीत पांडे जैसे नाम शामिल थे। कार्यक्रम का समापन Walk to Heal, Sing to Feel थीम पर आधारित भजन क्लबिंग के साथ हुआ। सुरम्य भजनों ने उपस्थित लोगों को भक्ति और आत्मचिंतन के गहरे भाव से जोड़ा।
अपने संबोधन में डॉ. दिनेश सहारा ने कहा कि हरा रंग केवल एक रंग नहीं, बल्कि जीवन की डोर है। उन्होंने जोर देकर कहा कि वृक्षारोपण, गौ सेवा और सामूहिक भजन ईश्वर और प्रकृति से जुड़ने के सरल माध्यम हैं। उन्होंने युवाओं को प्रेरित करते हुए कहा कि सच्चा उत्सव सेवा और जीवन के संरक्षण में निहित है। डॉ. सहारा ने सभी से सतत विकास और आध्यात्मिक जागरूकता को अपने दैनिक जीवन का हिस्सा बनाने की अपील की।
‘ग्रीन गोल्ड डे’ का यह आयोजन पर्यावरण संरक्षण, समाज सेवा और आध्यात्मिक जागरूकता को जोड़ने का अनूठा प्रयास माना जा रहा है। इंदौर के नागरिकों और युवा स्वयंसेवकों ने इस कार्यक्रम में बढ़-चढ़कर भाग लेकर एक संदेश दिया कि प्रकृति और समाज के प्रति जिम्मेदारी केवल एक दिन की नहीं बल्कि सतत प्रयासों से निभाई जा सकती है।

मुख्यमंत्री ने मुख्य सचिव और सामान्य प्रशासन विभाग को निर्देश दिया है कि गुरुवार सुबह 10 बजे से शाम 6 बजे तक तीनों भवनों में सभी कर्मचारियों की उपस्थिति, आने-जाने का समय और किसी भी प्रकार की अनधिकृत अनुपस्थिति का पूरा रिकॉर्ड तैयार किया जाए। इस प्रक्रिया में GAD की टीम हर कार्यालय में तैनात रहेगी और समयपालन की स्थिति का विस्तृत ब्यौरा तैयार करेगी।
सुरक्षा और प्रशासनिक दक्षता के लिहाज से यह कार्रवाई महत्वपूर्ण मानी जा रही है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने पहले ही अधिकारियों को समय से कार्यालय आने की हिदायत दी थी। उनका कहना है कि पांच दिन के कार्य सप्ताह के बावजूद कई अधिकारी समय पर कार्यालय नहीं पहुँचते, जिससे प्रशासनिक काम प्रभावित होता है। इस कारण उन्होंने सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है कि सभी कार्यालय समय पालन करें और कार्य सुचारू रूप से चले।
यह निरीक्षण ऐसे समय पर किया जा रहा है जब मुख्यमंत्री राज्य के बाहर हैं। वे वर्तमान में राजस्थान और छत्तीसगढ़ के दौरे पर हैं। आज सीएम भीलवाड़ा में उद्योगपतियों से मुलाकात कर निवेश संभावनाओं पर चर्चा करेंगे, इसके बाद वे अन्य कार्यक्रमों में भाग लेंगे और शाम को रायपुर लौटेंगे। इस दौरे के दौरान सचिवालयों में GAD टीम की तैनाती से यह संदेश स्पष्ट होता है कि समयपालन और प्रशासनिक अनुशासन को सख्ती से लागू किया जाएगा, भले ही मुख्यमंत्री दौरे पर हों।
विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह की कार्रवाई से अधिकारियों में समय पालन की भावना मजबूत होगी और कार्यालयीन कार्यों में बाधा कम होगी। वहीं, यह भी देखा जा रहा है कि ऐसे निरीक्षण से कर्मचारियों और अधिकारियों में जवाबदेही बढ़ती है और सरकारी कामकाज में पारदर्शिता आती है। GAD की टीम आने-जाने का पूरा रिकॉर्ड तैयार करेगी और अनाधिकृत अनुपस्थिति पाए जाने पर प्रशासनिक प्रक्रिया अपनाई जाएगी।
इस कदम के पीछे मुख्य उद्देश्य सरकारी कार्यों में सुचारू संचालन सुनिश्चित करना और प्रशासनिक जिम्मेदारियों में कोई कमी न रहने देना है। समयपालन और अनुशासन पर यह सख्त रुख मंत्रालयों में एक संदेश के रूप में देखा जा रहा है।

इस मामले पर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने संज्ञान लिया है। कोर्ट ने मुख्य सचिव महिला एवं बाल विकास प्रमुख सचिव आयुक्त कलेक्टर उज्जैन जिला महिला एवं बाल विकास अधिकारी और आश्रम अधीक्षक को नोटिस जारी कर दो सप्ताह में जवाब मांगा है। अदालत ने आश्रम की निरीक्षण रिपोर्ट पेश करने के निर्देश भी दिए हैं। मामले की अगली सुनवाई 12 मार्च 2026 को निर्धारित की गई है।
शासकीय चरक अस्पताल के रिकॉर्ड के अनुसार दिसंबर 2025 में 8 और जनवरी 2026 में 2 बच्चों की मौत हुई। सभी मामलों में पोस्टमॉर्टम शासकीय चरक भवन अस्पताल में थाना भैरवगढ़ पुलिस की मौजूदगी में कराया गया। अस्पताल के आरएमओ डॉ. चिन्मय चिंचोलेकर ने बताया कि अधिकांश बच्चों में एनीमिया जैसी गंभीर बीमारियां पाई गईं और कुछ को मृत अवस्था में लाया गया जबकि कुछ की इलाज के दौरान मौत हुई।
अंकित सेवाधाम आश्रम में वर्तमान में लगभग 250 निराश्रित और दिव्यांग बच्चे रह रहे हैं जिनमें से 50 से अधिक की हालत गंभीर बताई जा रही है। आश्रम संचालक सुधीर भाई गोयल ने कहा कि आश्रम में आने वाले अधिकांश बच्चे पहले से ही गंभीर बीमारियों से पीड़ित होते हैं। कई बच्चे स्वयं चलने-उठने या भोजन करने में असमर्थ हैं।
करीब 1.5 साल पहले इंदौर के युग पुरुष धाम आश्रम में बच्चों की मौत और बीमारी के मामलों के बाद प्रशासन ने उस आश्रम की मान्यता रद्द कर दी थी। इसके बाद वहां रह रहे 86 दिव्यांग बच्चों को उज्जैन के सेवाधाम आश्रम में शिफ्ट किया गया जिनमें अधिकांश मृतक भी शामिल थे।
सुधीर भाई गोयल ने कहा कि मृतक बच्चे पहले से गंभीर बीमारियों से ग्रसित थे। उनमें सांस लेने में कठिनाई खून की कमी और अन्य स्वास्थ्य समस्याएं थीं। उन्होंने यह भी बताया कि बच्चों का इलाज पहले से ही विभिन्न अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में चल रहा था और उनकी गंभीर स्थिति के कारण उन्हें आश्रम में रखा गया।
मामले की संवेदनशीलता और बच्चों की सुरक्षा को देखते हुए हाईकोर्ट ने सभी जिम्मेदार अधिकारियों से विस्तृत रिपोर्ट तलब की है। अदालत के नोटिस के बाद आश्रम और संबंधित स्वास्थ्य सुविधाओं की निगरानी और कड़ी करने की संभावना जताई जा रही है।