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  • भूजल में यूरेनियम की खतरनाक मौजूदगी ने बढ़ाई चिंता, 18 राज्यों के 151 जिले प्रभावित

    भूजल में यूरेनियम की खतरनाक मौजूदगी ने बढ़ाई चिंता, 18 राज्यों के 151 जिले प्रभावित


    नई दिल्ली।
    देश के कई राज्यों के भूजल (Groundwater) में यूरेनियम (Uranium) की खतरनाक मौजूदगी (Dangerous presence) सामने आई है। कई क्षेत्रों में पीने के पानी में भी यूरेनियम (Uranium) की मात्रा विश्व स्वास्थ्य संगठन (World Health Organization) के तय सुरक्षित मानकों से कई गुना अधिक है। कुल 14,377 नमूनों की जांच में यूरेनियम की सांद्रता 0 से 2,876 माइक्रोग्राम प्रति लीटर तक दर्ज की गई, जो डब्ल्यूएचओ की 30 माइक्रोग्राम प्रति लीटर सीमा से 96 गुना तक अधिक है।

    18 राज्यों के 151 जिले आंशिक रूप से इस समस्या से प्रभावित पाए गए हैं, जबकि पंजाब सबसे अधिक प्रभावित राज्य के रूप में सामने आया है। यह जानकारी सेंट्रल ग्राउंड वाटर बोर्ड की पहली राष्ट्रीय स्तर की निगरानी में सामने आई है। सेंट्रल ग्राउंड वाटर बोर्ड के अनुसार देश में पहली बार वर्ष 2019-20 में भूजल में यूरेनियम की राष्ट्रीय स्तर पर निगरानी की गई। इसके तहत 14,377 भूजल नमूनों की जांच की गई, जिन्हें नियमित रूप से मॉनिटर किया जा रहा है।

    रिपोर्ट में यह स्पष्ट हुआ कि कई क्षेत्रों में भूजल में यूरेनियम की सांद्रता सामान्य स्तर से काफी अधिक है, जिससे पेयजल सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता पैदा हुई है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने पीने के पानी में यूरेनियम की अधिकतम स्वीकार्य सीमा 30 माइक्रोग्राम प्रति लीटर निर्धारित की है। इसे पार्ट्स प्रति बिलियन यानी पीपीबी भी कहा जाता है। इसके विपरीत भारतीय मानक ब्यूरो ने अभी तक यूरेनियम के लिए कोई अलग मानक तय नहीं किया है।


    एईआरबी की 60 पीपीबी सीमा पर भी पंजाब शीर्ष पर

    परमाणु ऊर्जा नियामक बोर्ड की 60 माइक्रोग्राम प्रति लीटर सीमा के आधार पर भी पंजाब सबसे अधिक प्रभावित राज्य रहा, जहां 6 फीसदी कुओं में यूरेनियम की मात्रा 60 पीपीबी से अधिक पाई गई। दिल्ली में यह आंकड़ा 5 और हरियाणा में 4.4 फीसदी दर्ज किया गया।

    तेलंगाना में 2.6, आंध्र प्रदेश में 2, राजस्थान में 1.2 , छत्तीसगढ़ में 1.1, तमिलनाडु में 0.9, कर्नाटक में 0.7 , मध्य प्रदेश में 0.6 उत्तर प्रदेश में 0.4 तथा झारखंड में 0.25 फीसदी कुओं में यूरेनियम की सांद्रता एईआरबी द्वारा तय मानकों से अधिक मिली।


    स्वास्थ्य पर बढ़ी चिंता

    विशेषज्ञों के अनुसार लंबे समय तक यूरेनियम युक्त पानी के सेवन से सबसे अधिक असर किडनी पर पड़ता है, क्योंकि यूरेनियम एक रासायनिक रूप से विषैला तत्व भी है। इससे गुर्दों की कार्यक्षमता प्रभावित हो सकती है, हड्डियों पर असर पड़ सकता है और लंबे समय में कैंसर जैसी आशंकाएं भी बढ़ सकती हैं, हालांकि वैज्ञानिकों के अनुसार सामान्यतः इसका रासायनिक विषाक्त प्रभाव विकिरण प्रभाव से अधिक गंभीर माना जाता है।

    बच्चों, गर्भवती महिलाओं और भूजल पर निर्भर ग्रामीण आबादी के लिए यह खतरा और अधिक संवेदनशील माना जाता है। खासतौर पर ग्रामीण और भूजल पर निर्भर आबादी के लिए यह स्थिति अधिक चिंता का विषय है।

  • गर्मी में शरीर को ठंडक देने वाला देसी ड्रिंक: झटपट गुलकंद ठंडाई बनाना सीखें

    गर्मी में शरीर को ठंडक देने वाला देसी ड्रिंक: झटपट गुलकंद ठंडाई बनाना सीखें

    नई दिल्ली। गर्मी का मौसम अपने साथ तेज धूप, लू और शरीर में थकान जैसी कई समस्याएं लेकर आता है। इस समय शरीर को ऐसे पेय की जरूरत होती है जो न सिर्फ ठंडक दे बल्कि ऊर्जा भी प्रदान करे। पारंपरिक भारतीय रसोई में ऐसे कई प्राकृतिक विकल्प मौजूद हैं, जिनमें गुलकंद ठंडाई एक बेहद लोकप्रिय और प्रभावी पेय माना जाता है। यह ड्रिंक गर्मी में शरीर को तुरंत राहत देने के साथ-साथ अंदरूनी ताजगी भी बनाए रखती है।

    गुलकंद ठंडाई की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसे बहुत कम समय में घर पर आसानी से तैयार किया जा सकता है। इसमें उपयोग होने वाली सामग्री पूरी तरह प्राकृतिक होती है, जो शरीर को नुकसान पहुंचाए बिना ठंडक और पोषण प्रदान करती है। गुलकंद, दूध और ड्राई फ्रूट्स का संयोजन इसे एक संपूर्ण हेल्दी ड्रिंक बनाता है, जो गर्मियों में शरीर को संतुलित रखने में मदद करता है।

    इस पेय को बनाने के लिए सबसे पहले कुछ मुख्य सामग्री जैसे बादाम, काजू, सौंफ, खसखस और इलायची को थोड़ी देर के लिए पानी में भिगोया जाता है ताकि वे नरम हो जाएं और आसानी से पीसे जा सकें। इसके बाद इन्हें मिक्सर में डालकर एक स्मूद पेस्ट तैयार किया जाता है, जो ठंडाई का बेस तैयार करता है। यह पेस्ट न केवल स्वाद बढ़ाता है बल्कि शरीर को आवश्यक पोषक तत्व भी देता है।

    इसके बाद ठंडा दूध लिया जाता है और उसमें गुलकंद मिलाया जाता है। गुलकंद अपने ठंडक देने वाले गुणों के कारण शरीर के तापमान को नियंत्रित रखने में मदद करता है और गर्मी के असर को कम करता है। दूध में गुलकंद अच्छी तरह मिलाने के बाद तैयार ड्राई फ्रूट्स पेस्ट इसमें डाला जाता है। इस मिश्रण को अच्छे से मिलाने पर एक गाढ़ी और स्वादिष्ट ठंडाई तैयार हो जाती है।

    स्वाद और खुशबू को और बेहतर बनाने के लिए इसमें गुलाब जल और थोड़ी चीनी भी मिलाई जाती है। इसके बाद इसे गिलास में डालकर ऊपर से बर्फ के टुकड़े और कटे हुए ड्राई फ्रूट्स डालकर परोसा जाता है। यह ठंडाई पीने में जितनी स्वादिष्ट होती है, उतनी ही शरीर को ठंडक और राहत देने वाली भी होती है।

    गुलकंद ठंडाई केवल स्वाद के लिए ही नहीं बल्कि स्वास्थ्य के लिए भी बहुत लाभकारी मानी जाती है। यह शरीर को डिहाइड्रेशन से बचाने में मदद करती है, लू के प्रभाव को कम करती है और पाचन तंत्र को भी बेहतर बनाती है। गर्मी में होने वाली थकान और कमजोरी को दूर करने में यह एक प्राकृतिक ऊर्जा स्रोत की तरह काम करती है।

    नियमित रूप से सीमित मात्रा में इसका सेवन शरीर को तरोताजा और ऊर्जावान बनाए रखने में मदद कर सकता है। यह बच्चों से लेकर बड़ों तक सभी के लिए एक सुरक्षित और लाभकारी पेय विकल्प है, जिसे गर्मियों के मौसम में जरूर अपनाया जा सकता है।

  • बंगाल में हिंदुत्व को लेकर सियासी संग्राम शुरू, ‘जय महाकाली’ बनाम ‘जय श्रीराम’ का गूंज रहा नारा

    बंगाल में हिंदुत्व को लेकर सियासी संग्राम शुरू, ‘जय महाकाली’ बनाम ‘जय श्रीराम’ का गूंज रहा नारा


    कोलकाता। पश्चिम बंगाल की राजनीति इस समय पहचान और वर्चस्व की लड़ाई में बदलती नजर आ रही है। ऊपर से चुनावी शोर और आरोप-प्रत्यारोप भले ही हावी हों, लेकिन भीतर ही भीतर हिंदुत्व की लहर एक अहम भूमिका निभाती दिख रही है। यह ऐसा कारक बन चुका है, जो स्थापित राजनीतिक समीकरणों को चुनौती दे रहा है और सत्ता के समीकरण बदलने की क्षमता रखता है।

    राज्य की राजनीति अब पारंपरिक मुद्दों से आगे बढ़कर धार्मिक और सांस्कृतिक प्रतीकों के इर्द-गिर्द सिमटती जा रही है। यह मुकाबला एक तरह से शक्ति उपासना और ‘जय श्रीराम’ के नारों के बीच खिंचती रेखा जैसा बन गया है, जहां हर रैली और बयान का अलग राजनीतिक अर्थ निकाला जा रहा है।

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मंदिर दौरों को केवल धार्मिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक व्यापक सांस्कृतिक संदेश के रूप में देखा जा रहा है। दक्षिणेश्वर, बेलूर मठ, मतुआ धाम और कालीघाट जैसे प्रमुख स्थलों पर उनकी मौजूदगी ने राजनीतिक माहौल को नया आयाम दिया है। इसके चलते राज्य में ‘जय महाकाली’ के साथ ‘जय श्रीराम’ का नारा भी तेजी से राजनीतिक पहचान का हिस्सा बनता जा रहा है।

    भाजपा का मानना है कि पहले चरण के मतदान में मतदाताओं की सक्रियता बदलाव के संकेत दे रही है। पार्टी रणनीतिकार इसे मौन मतदाता की प्रतिक्रिया के रूप में देख रहे हैं, जो भविष्य के परिणामों को प्रभावित कर सकती है। चुनावी रणनीति के स्तर पर केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने खुद मैदान में उतरकर कमान संभाली है। कोलकाता में लगातार सक्रिय रहते हुए वे उन क्षेत्रों पर फोकस कर रहे हैं, जहां पहले भाजपा की पकड़ कमजोर मानी जाती थी। उनके साथ संगठनात्मक स्तर पर सुनील बंसल बूथ प्रबंधन को मजबूत करने में जुटे हैं, जिससे पार्टी जमीनी स्तर पर अपनी स्थिति बेहतर करने की कोशिश कर रही है।

    जिन सीटों पर मुकाबला होना है, वे तृणमूल कांग्रेस का गढ़ मानी जाती हैं। पिछले चुनाव में भाजपा यहां सीमित सफलता हासिल कर सकी थी, लेकिन इस बार पार्टी को माहौल अपने पक्ष में बदलता नजर आ रहा है। सुरक्षा और चुनाव के बाद भी केंद्रीय बलों की मौजूदगी को लेकर दिए गए संदेश को भाजपा समर्थकों के लिए भरोसे के रूप में देखा जा रहा है।

    दूसरी ओर, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस चुनौती का जवाब अपनी अलग रणनीति से देने का प्रयास किया है। उन्होंने बंगाली अस्मिता और धार्मिक समावेश को केंद्र में रखते हुए प्रचार तेज किया है। मंदिरों में जाकर वे यह संदेश दे रही हैं कि राज्य की सांस्कृतिक पहचान को बाहरी नजरिये से नहीं समझा जा सकता।

    इस रणनीति में अभिषेक बनर्जी की भूमिका भी अहम मानी जा रही है। वे युवाओं को जोड़ने के लिए नए तरीके अपना रहे हैं और भाजपा के खिलाफ आक्रामक अभियान चला रहे हैं। तृणमूल के अन्य नेता भी जमीनी स्तर पर सक्रिय होकर चुनावी विमर्श को धार्मिक मुद्दों से हटाकर विकास, अधिकार और केंद्र-राज्य संबंधों की ओर मोड़ने की कोशिश कर रहे हैं। कुल मिलाकर, पश्चिम बंगाल में यह चुनाव अब केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि प्रतीकों, पहचान और विचारधाराओं की टकराहट का रूप ले चुका है, जहां हर पक्ष अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए पूरी ताकत झोंक रहा है।

  • एमपी में भीषण गर्मी का सितम जारी, खजुराहो में 10 साल का रिकॉर्ड टूटा, 46 डिग्री पहुंचा पारा

    एमपी में भीषण गर्मी का सितम जारी, खजुराहो में 10 साल का रिकॉर्ड टूटा, 46 डिग्री पहुंचा पारा


    भोपाल। मध्य प्रदेश इस समय भीषण गर्मी की मार झेल रहा है। पर्यटन नगरी खजुराहो में सोमवार को तापमान 46 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया, जिसने पिछले 10 साल का रिकॉर्ड तोड़ दिया। छतरपुर जिले का नौगांव प्रदेश का दूसरा सबसे गर्म स्थान रहा। मौसम विभाग ने मंगलवार के लिए 4 जिलों में लू और 12 जिलों में आंधी-बारिश की चेतावनी जारी की है।

    मौसम विभाग के अनुसार, प्रदेश में 1 मई तक तेज गर्मी के बीच बारिश की भी संभावना बनी हुई है। साइक्लोनिक सर्कुलेशन और ट्रफ सिस्टम के सक्रिय होने से यह बदलाव देखने को मिलेगा। हालांकि, 28 अप्रैल से लू के असर में कुछ कमी आने की उम्मीद जताई गई है। छिंदवाड़ा, पांढुर्णा, सिवनी, मंडला और बालाघाट में मंगलवार को लू चलने की चेतावनी जारी की गई है। ग्वालियर, श्योपुर, मुरैना, भिंड, दतिया, शिवपुरी, निवाड़ी, टीकमगढ़, छतरपुर, पन्ना, सतना और रीवा में गरज-चमक के साथ तेज हवाएं और बारिश होने की संभावना है।

    कई शहरों में 44 डिग्री के पार तापमान
    सोमवार को खजुराहो (46.0°C) और नौगांव (45.5°C) के अलावा श्योपुर और दतिया सहित कुल 13 शहरों में तापमान 44 डिग्री या उससे अधिक दर्ज किया गया। भोपाल और ग्वालियर में 43.4°C, इंदौर में 42.0°C, उज्जैन में 42.4°C और जबलपुर में 42.7°C तापमान रिकॉर्ड हुआ। खजुराहो में जहां 10 साल का रिकॉर्ड टूट चुका है, वहीं अब सर्वकालिक रिकॉर्ड पर भी खतरा मंडरा रहा है। 29 अप्रैल 1993 को यहां अधिकतम तापमान 46.9 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया था। यदि गर्मी का यही सिलसिला जारी रहा, तो यह रिकॉर्ड भी टूट सकता है।

    गर्मी से बचाव के लिए सलाह
    मौसम विभाग ने लोगों को गर्मी से बचने के लिए सावधानी बरतने की सलाह दी है। दिनभर पर्याप्त पानी पीने, शरीर को हाइड्रेट रखने, दोपहर में धूप से बचने और हल्के व सूती कपड़े पहनने की अपील की गई है। बच्चों और बुजुर्गों को विशेष ध्यान रखने की सलाह दी गई है।

  • सोमवार का अंक राशिफल: जानें सभी मूलांक के लिए दिन कैसा रहेगा..

    सोमवार का अंक राशिफल: जानें सभी मूलांक के लिए दिन कैसा रहेगा..

    नई दिल्ली। 27 अप्रैल 2026 का दिन अंक ज्योतिष के दृष्टिकोण से विशेष माना जा रहा है, क्योंकि आज का भाग्यांक 5 है, जो बुध ग्रह से प्रभावित होता है। बुध ग्रह को बुद्धि, संवाद, व्यापार और त्वरित निर्णय लेने की क्षमता का प्रतीक माना जाता है। ऐसे में आज का दिन कई लोगों के लिए नए अवसर लेकर आ सकता है, जबकि कुछ को सोच-समझकर कदम उठाने की सलाह दी जाती है।

    अंक ज्योतिष के अनुसार हर व्यक्ति का मूलांक उसके जीवन की ऊर्जा और स्वभाव को दर्शाता है। आज मूलांक 1 से 9 तक के सभी जातकों पर अलग-अलग प्रभाव देखने को मिल सकता है, जो उनके करियर, आर्थिक स्थिति, स्वास्थ्य और निजी जीवन को प्रभावित करेगा।

    मूलांक 1 के जातकों के लिए आज नेतृत्व और आत्मविश्वास बढ़ने के संकेत हैं। कार्यक्षेत्र में आगे बढ़ने के मौके मिल सकते हैं, लेकिन अहंकार से बचना जरूरी रहेगा ताकि रिश्तों में संतुलन बना रहे।

    मूलांक 2 के लोगों के लिए दिन भावनात्मक रूप से थोड़ा संवेदनशील रह सकता है। दूसरों के साथ तालमेल बनाए रखना आवश्यक होगा और अनावश्यक बहस से बचना बेहतर रहेगा।

    मूलांक 3 वालों के लिए आज रचनात्मकता और नए विचारों का दिन है। अपने विचारों को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करने पर सफलता मिलने की संभावना है और कार्यस्थल पर प्रशंसा भी मिल सकती है।

    मूलांक 4 के जातकों को आज मेहनत और धैर्य के साथ आगे बढ़ना होगा। कुछ कार्यों में रुकावटें आ सकती हैं, लेकिन निरंतर प्रयास से स्थिति धीरे-धीरे सुधरेगी।

    मूलांक 5 के लिए आज का दिन विशेष रूप से अनुकूल माना जा रहा है। नए अवसर, यात्रा और बदलाव के संकेत मिल रहे हैं। व्यापार और नौकरी दोनों में प्रगति की संभावना मजबूत है।

    मूलांक 6 वालों के लिए दिन संबंधों में संतुलन और सामंजस्य बनाए रखने का है। पारिवारिक जीवन में शांति बनी रहेगी और पुराने संबंध मजबूत हो सकते हैं।

    मूलांक 7 के जातकों के लिए आज आत्मचिंतन और मानसिक शांति का समय है। कार्यों की गति थोड़ी धीमी रह सकती है, लेकिन योजना बनाने के लिए यह समय उपयोगी रहेगा।

    मूलांक 8 वालों के लिए जिम्मेदारियों का दबाव रह सकता है। कार्यक्षेत्र में अनुशासन बनाए रखना जरूरी होगा, हालांकि आर्थिक स्थिति में धीरे-धीरे सुधार के संकेत हैं।

    मूलांक 9 के जातकों के लिए दिन ऊर्जा और उत्साह से भरा रहेगा। कार्यों में तेजी आएगी और सामाजिक गतिविधियों में भाग लेने के अवसर मिल सकते हैं।

  • आज का राशिफल 27 अप्रैल 2026: मेष और सिंह के लिए सफलता के संकेत, वृषभ और कन्या रहें सतर्क

    आज का राशिफल 27 अप्रैल 2026: मेष और सिंह के लिए सफलता के संकेत, वृषभ और कन्या रहें सतर्क


    नई दिल्ली। 27 अप्रैल 2026 का दिन ज्योतिषीय दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि चंद्रमा और अन्य ग्रहों की चाल कई राशियों के जीवन में बदलाव के संकेत दे रही है। आज का दिन कुछ लोगों के लिए सफलता, आत्मविश्वास और नए अवसरों का द्वार खोल सकता है, जबकि कुछ राशियों को धैर्य और सावधानी के साथ आगे बढ़ने की सलाह दी जा रही है। यह दिन खासकर करियर, आर्थिक स्थिति, प्रेम संबंध और स्वास्थ्य के मामलों में मिश्रित परिणाम देने वाला रहेगा।

    मेष राशि के जातकों के लिए आज का दिन ऊर्जा और उत्साह से भरपूर रहेगा। कार्यक्षेत्र में नए अवसर मिल सकते हैं और नेतृत्व क्षमता उभरकर सामने आएगी। सिंह राशि वालों के लिए भी यह समय आत्मविश्वास बढ़ाने और सामाजिक प्रतिष्ठा हासिल करने का है। इन दोनों राशियों को अपने प्रयासों का सकारात्मक परिणाम मिलने की संभावना है। दूसरी ओर वृषभ और कन्या राशि के जातकों को आज आर्थिक मामलों में सावधानी बरतनी होगी। अनावश्यक खर्च या जल्दबाजी में लिया गया निर्णय नुकसान दे सकता है, इसलिए सोच-समझकर आगे बढ़ना जरूरी होगा।

    मिथुन और तुला राशि के लिए दिन संतुलन बनाने का है। काम और निजी जीवन के बीच तालमेल बनाए रखना जरूरी रहेगा। छोटी-मोटी परेशानियां आ सकती हैं, लेकिन संवाद और समझदारी से उनका समाधान संभव है। कर्क राशि के जातकों को भावनात्मक रूप से थोड़ा संवेदनशील रहना पड़ सकता है, इसलिए परिवार और निजी संबंधों में धैर्य बनाए रखना बेहतर होगा।

    वृश्चिक और धनु राशि वालों के लिए दिन सकारात्मक बदलाव लेकर आ सकता है। नए अवसर, यात्राएं और सीखने के मौके मिलने की संभावना है। यह समय आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने और नई योजनाओं को शुरू करने के लिए अनुकूल माना जा रहा है। मकर और कुंभ राशि के जातकों को आज संयम और सावधानी से काम लेना होगा, क्योंकि कार्यक्षेत्र में कुछ दबाव या चुनौतियां सामने आ सकती हैं। धैर्य और योजना के साथ काम करने से स्थिति बेहतर होगी।

    मीन राशि के लिए आज का दिन सहयोग और टीमवर्क पर आधारित रहेगा। रिश्तों में मधुरता बढ़ेगी और पुराने संपर्क फिर से सक्रिय हो सकते हैं। यह समय भावनात्मक संतुलन बनाए रखने और सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ने का संकेत देता है।

  • सोना पहनने से बदल सकता है भाग्य? इन राशियों को लेकर ज्योतिष में कही गई अहम सावधानियां

    सोना पहनने से बदल सकता है भाग्य? इन राशियों को लेकर ज्योतिष में कही गई अहम सावधानियां

    नई दिल्ली। सोने के आभूषण भारतीय परंपरा और संस्कृति में विशेष महत्व रखते हैं। इसे केवल एक कीमती धातु नहीं बल्कि ज्योतिषीय दृष्टि से ग्रहों से जुड़ा शक्तिशाली तत्व भी माना जाता है। परंपरागत मान्यताओं के अनुसार सोने का संबंध सूर्य और गुरु ग्रह से जोड़ा जाता है, जिन्हें जीवन में ऊर्जा, आत्मविश्वास और सम्मान का कारक माना जाता है।

    ज्योतिष के अनुसार सोना हर व्यक्ति के लिए समान परिणाम नहीं देता। इसका प्रभाव व्यक्ति की राशि, ग्रहों की स्थिति और जन्म कुंडली पर निर्भर करता है। यही कारण है कि कुछ परिस्थितियों में सोना अत्यंत शुभ माना जाता है, जबकि कुछ मामलों में इसे पहनने से पहले सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है।

    मान्यताओं के अनुसार मेष, कन्या और धनु राशि के जातकों के लिए सोने की अंगूठी पहनने को लेकर विशेष सावधानी बताई जाती है। कहा जाता है कि इन राशियों पर सोने का प्रभाव कभी-कभी असंतुलित परिणाम दे सकता है। ऐसी धारणा है कि गलत तरीके से सोना पहनने पर जीवन में आर्थिक उतार-चढ़ाव, मानसिक तनाव या कार्यों में बाधाएं उत्पन्न हो सकती हैं।

    हालांकि यह सभी विचार पूरी तरह परंपरागत और मान्यताओं पर आधारित हैं, जिनका कोई वैज्ञानिक प्रमाण मौजूद नहीं है। आधुनिक दृष्टिकोण में इन्हें आस्था और सांस्कृतिक विश्वास का हिस्सा माना जाता है।

    ज्योतिष में सोना पहनने को लेकर कुछ नियम भी बताए गए हैं। कुछ परंपराओं में कहा जाता है कि सोने की अंगूठी को तर्जनी उंगली में पहनना शुभ होता है, जबकि कुछ स्थितियों में बाएं हाथ में सोना पहनने से बचने की सलाह दी जाती है। इसके अलावा गले में सोने की चेन पहनने को सकारात्मक ऊर्जा और संबंधों में स्थिरता से जोड़ा जाता है।

    कुछ मान्यताओं में यह भी कहा गया है कि स्वास्थ्य से जुड़ी छोटी समस्याओं में सोने के आभूषण सहायक माने जा सकते हैं, लेकिन यह पूरी तरह विश्वास पर आधारित है और चिकित्सा विज्ञान इसका समर्थन नहीं करता।

  • बॉक्स ऑफिस पर बड़ा टकराव तय, यश की ‘टॉक्सिक’ और महेश बाबू की फिल्म आमने-सामने

    बॉक्स ऑफिस पर बड़ा टकराव तय, यश की ‘टॉक्सिक’ और महेश बाबू की फिल्म आमने-सामने

    नई दिल्ली। साउथ फिल्म इंडस्ट्री में एक बार फिर बड़े बॉक्स ऑफिस क्लैश की स्थिति बनती दिखाई दे रही है, जहां यश की बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘टॉक्सिक’ अपनी रिलीज को लेकर चर्चा के केंद्र में है। पहले भी इस फिल्म की रिलीज डेट कई बार बदली जा चुकी है, लेकिन अब एक बार फिर नई परिस्थितियों के कारण इसकी रणनीति पर सवाल खड़े हो गए हैं।

    ताजा स्थिति के अनुसार ‘टॉक्सिक’ की संभावित रिलीज खिड़की पर एक नई बड़ी फिल्म के आने से टकराव की स्थिति बन गई है। यह नई फिल्म महेश बाबू से जुड़े प्रोजेक्ट के रूप में सामने आ रही है, जिसे ‘राव बहादुर’ नाम से जाना जा रहा है। दोनों फिल्मों की रिलीज समय के बेहद करीब होने के कारण बॉक्स ऑफिस पर सीधा मुकाबला लगभग तय माना जा रहा है।

    ‘टॉक्सिक’ को लेकर पहले भी कई बार अनिश्चितता बनी रही है। कभी प्रोडक्शन से जुड़े कारण, तो कभी रिलीज रणनीति में बदलाव के चलते इसकी रिलीज आगे खिसकती रही। हर बार फिल्म किसी न किसी बड़े प्रोजेक्ट से टकराने की स्थिति में आ जाती है, जिससे इसकी रिलीज योजना लगातार प्रभावित होती रही है।

    दूसरी ओर, ‘राव बहादुर’ भी अपने अनोखे विषय और प्रस्तुति को लेकर चर्चा में है। फिल्म की कहानी एक अलग और गंभीर पृष्ठभूमि पर आधारित बताई जा रही है, जिसमें रहस्य और मनोवैज्ञानिक पहलुओं को प्रमुखता दी गई है। इसकी घोषणा के बाद से ही दर्शकों में इसे लेकर उत्सुकता बनी हुई है।

    दोनों फिल्मों की शैली और विषय अलग होने के बावजूद रिलीज का समय इतना करीब है कि दर्शकों का बंटना तय माना जा रहा है। यही कारण है कि फिल्म व्यापार से जुड़े विशेषज्ञ इसे एक बड़ा क्लैश मान रहे हैं, जिसका असर दोनों फिल्मों के प्रदर्शन पर पड़ सकता है।

    यश की ‘टॉक्सिक’ अपने बड़े बजट, एक्शन और स्टार पावर के कारण चर्चा में रहती है, जबकि दूसरी ओर ‘राव बहादुर’ अपनी कहानी और गंभीर ट्रीटमेंट के कारण एक अलग दर्शक वर्ग को आकर्षित कर सकती है। ऐसे में यह मुकाबला सिर्फ फिल्मों का नहीं, बल्कि दर्शकों की पसंद और बाजार की दिशा का भी बन सकता है।

    फिलहाल दोनों फिल्मों की रिलीज डेट को लेकर अंतिम निर्णय स्पष्ट नहीं हुआ है, लेकिन मौजूदा हालात संकेत दे रहे हैं कि बॉक्स ऑफिस पर एक बड़ा आमना-सामना देखने को मिल सकता है।

    कुल मिलाकर, ‘टॉक्सिक’ एक बार फिर बड़े टकराव के केंद्र में आ गई है और अब सभी की नजर इस बात पर है कि आने वाले समय में रिलीज रणनीति में कोई बदलाव होता है या फिर यह सीधा मुकाबला सिनेमाघरों में देखने को मिलेगा।

  • पाकिस्तान में लश्कर कमांडर की हत्या, अज्ञात हमलावरों ने बरसाईं गोलियां

    पाकिस्तान में लश्कर कमांडर की हत्या, अज्ञात हमलावरों ने बरसाईं गोलियां


    इस्लामाबाद। पाकिस्तान में एक बार फिर ‘अननोन गनमैन’ की कार्रवाई सामने आई है। इस बार निशाना आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े वरिष्ठ कमांडर शेख यूसुफ अफरीदी बने, जिन्हें अज्ञात हमलावरों ने गोली मारकर मौत के घाट उतार दिया।
    पाकिस्तानी मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में अफरीदी पर अचानक अंधाधुंध फायरिंग की गई, जिससे मौके पर ही उसकी मौत हो गई। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू कर दी, हालांकि अब तक किसी भी आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हो सकी है।

    हाफिज सईद का करीबी बताया जाता था
    शेख यूसुफ अफरीदी को हाफिज सईद का करीबी सहयोगी माना जाता था।

    बताया जाता है कि वह लंबे समय से संगठन के लिए काम कर रहा था और खैबर पख्तूनख्वा क्षेत्र में नेटवर्क संभालता था। आरोप है कि वह युवाओं को तैयार कर उन्हें कश्मीर समेत अन्य क्षेत्रों में भेजने में सक्रिय भूमिका निभाता था। अफरीदी कई मौकों पर सार्वजनिक कार्यक्रमों में भी सईद के साथ नजर आ चुका था।

    टारगेट किलिंग का शक, जांच जारी
    स्थानीय पुलिस के मुताबिक, शुरुआती जांच में यह मामला टारगेट किलिंग का प्रतीत होता है।

    हमलावरों की पहचान और गिरफ्तारी के लिए तलाशी अभियान चलाया जा रहा है। अभी तक किसी भी संगठन ने इस हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है।

    ‘अननोन गनमैन’ की घटनाएं बढ़ीं
    गौरतलब है कि पाकिस्तान में हाल के महीनों में अज्ञात हमलावरों द्वारा इस तरह की घटनाएं बढ़ी हैं, जिनमें कई विवादित और भारत-विरोधी गतिविधियों से जुड़े लोगों को निशाना बनाया गया है। हालांकि इन घटनाओं के पीछे किसका हाथ है, इसे लेकर आधिकारिक तौर पर कुछ भी स्पष्ट नहीं किया गया है।

    भारत का स्पष्ट रुख
    इन घटनाओं को लेकर तरह-तरह के कयास लगाए जाते रहे हैं, लेकिन भारत सरकार ने हमेशा साफ किया है कि वह किसी भी देश की संप्रभुता का सम्मान करती है और ऐसी गतिविधियों में शामिल नहीं है।

    कुल मिलाकर, अफरीदी की हत्या ने पाकिस्तान में सुरक्षा व्यवस्था और आतंकी नेटवर्क से जुड़े समीकरणों को लेकर नए सवाल खड़े कर दिए हैं।

  • बांग्लादेश में मंदिर पुजारी की संदिग्ध मौत, पेड़ से लटका मिला शव; हत्या का आरोप

    बांग्लादेश में मंदिर पुजारी की संदिग्ध मौत, पेड़ से लटका मिला शव; हत्या का आरोप


    ढाका। बांग्लादेश में एक हिंदू मंदिर से जुड़े पुजारी की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत का मामला सामने आया है। घर से लापता होने के तीन दिन बाद उनका शव पेड़ से लटका मिला, जिसके बाद अल्पसंख्यक समुदाय ने इसे हत्या बताते हुए दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है।

    बांग्लादेश हिंदू बौद्ध ईसाई एकता परिषद के अनुसार, कोक्स बाजार सदर उपजिला के खुरुशकुल यूनियन स्थित शिव-काली मंदिर के पुजारी और संरक्षक 40 वर्षीय नयन साधु का शव चटगांव जिले के दोहाजारी क्षेत्र के पास पहाड़ी इलाके में बरामद किया गया। वे मंदिर की देखरेख के साथ पूजा-अर्चना का कार्य भी संभालते थे।

    तीन दिन पहले हुए थे लापता

    स्थानीय पुलिस के मुताबिक 19 अप्रैल की शाम दो अज्ञात व्यक्ति नयन साधु को अपने साथ ले गए थे। इसके बाद से वह लापता थे। तीन दिन बाद गांव के बाहरी क्षेत्र में उनका शव मिला। पुलिस ने अभी तक यह स्पष्ट नहीं किया है कि मामला हत्या का है या आत्महत्या का।

    समुदाय ने उठाए सवाल

    घटना के बाद बांग्लादेश हिंदू बौद्ध ईसाई एकता परिषद ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए दोषियों की तत्काल गिरफ्तारी की मांग की है।

    परिषद से जुड़ी काजल देबनाथ ने सवाल उठाया कि एक छोटे और दूरदराज मंदिर के साधारण देखरेखकर्ता को निशाना बनाने के पीछे क्या कारण हो सकता है।

    वहीं बांग्लादेश पूजा उत्सव परिषद की कोक्स बाजार इकाई के महासचिव जॉनी धर ने कहा कि लापता होने के तीन दिन बाद शव मिलने से हत्या की आशंका और गहरी हो गई है।

    पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार

    पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और कहा है कि रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के वास्तविक कारणों का पता चल सकेगा। नयन साधु की पत्नी ने 19 अप्रैल को गुमशुदगी की शिकायत दर्ज कराई थी, जिसके बाद जांच शुरू की गई।

    सांप्रदायिक घटनाओं पर चिंता

    गौरतलब है कि बांग्लादेश हिंदू बौद्ध ईसाई एकता परिषद की हालिया रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2025 की पहली तिमाही में देश में सांप्रदायिक हिंसा की 133 घटनाएं दर्ज की गई हैं। इससे अल्पसंख्यक समुदाय की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ी है।

    इस घटना ने एक बार फिर बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा और कानून-व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।