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  • Delhi: लाल किला बम ब्लास्ट मामले में NIA ने 2 और आतंकियों को दबोचा, अब तक 11 गिरफ्तार

    Delhi: लाल किला बम ब्लास्ट मामले में NIA ने 2 और आतंकियों को दबोचा, अब तक 11 गिरफ्तार


    नई दिल्ली।
    एनआईए (NIA) ने दिल्ली (Delhi) के लाल किला (Red Fort) के पास हुए बम ब्लास्ट (Bomb Blast) के मामले में दो और आतंकियों (Two Another Terrorists) को दबोचा है। इन आतंकियों के नाम जमीर अहमद और तुफैल अहमद हैं। इसके साथ ही इस मामले में कुल गिरफ्तारियों की संख्या 11 हो गई है। जांच में सामने आया है कि इन दोनों ने मुख्य आरोपी उमर उन नबी को हथियार और गोला-बारूद सप्लाई किए थे। ये दोनों अंसार गजवत-उल-हिंद संगठन के सक्रिय सदस्य हैं। दोनों कई आतंकी साजिशों में शामिल रहे हैं।


    शाजिश में शामिल थे दोनों आरोपी

    एनआईए की ओर से जारी एक बयान में कहा गया है कि जमीर अहमद अहंगर गांदरबल का रहने वाला है जबकि तुफैल अहमद भट श्रीनगर का निवासी है। आरोप है कि दोनों दिल्ली ब्लास्ट से जुड़ी साजिश में एक्टिव रूप से शामिल थे। इन आरोपियों ने मामले के मुख्य आरोपी डॉ. उमर को हथियार सप्लाई किए थे।


    अंसार गजवत-उल-हिंद के गुर्गे हैं दोनों आरोपी

    पिछले साल 10 नवंबर को दिल्ली में लाल किला के पास हुए कार बम धमाके में कई लोग मारे गए थे और कई लोग घायल हुए थे। मुख्य आरोपी उमर उन नबी भी इस धमाके में मारा गया था। एनआईए इस हमले की जांच कर रही है। एनआईए ने अपनी जांच में पाया कि जमीर और तुफैल अंसार गजवत-उल-हिंद आतंकी संगठन के सक्रिय गुर्गे हैं।


    दिल्ली ब्लास्ट के साथ कई आतंकी साजिशों का रहे हैं हिस्सा

    बयान में कहा गया है कि एनआईए जम्मू-कश्मीर पुलिस, हरियाणा पुलिस और अन्य एजेंसियों के साथ कोऑर्डिनेशन के तहत काम कर रही है। जांच में यह भी पता चला है कि जमीर और तुफैल विस्फोट की साजिश के साथ कई अन्य आतंकी साजिशों का भी हिस्सा थे।


    आरोपी जुटा रहे थे गोला बारूद

    बयान में कहा गया है कि एनआईए ने व्यापक जांच और सबूतों की गहराई से छानबीन की। एनआईए ने पाया कि दोनों ही आरोपी देश के खिलाफ इस्तेमाल के लिए हथियारों और गोला-बारूद के संग्रह में लगे हुए थे।


    डॉ. उमर के साथ ये भी रहे हैं शामिल

    एनआईए ने कहा कि राष्ट्रीय आतंकवाद-रोधी एजेंसी की जांच से यह बात सामने आई कि दिल्ली बम विस्फोट की साजिश डॉ. उमर ने अन्य आरोपियों मुजम्मिल गनई, शाहीन सईद, मुफ्ती इरफान, अदील अहमद राथर के साथ मिलकर रची थी। उसने कहा कि इसके अलावा 5 अन्य ने भी साजिशकर्ताओं को पनाह और रसद संबंधी सहायता प्रदान की थी। इन नौ लोगों को जम्मू-कश्मीर और हरियाणा के विभिन्न स्थानों से पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है।

  • मनी लॉन्ड्रिंग केस में ED की बड़ी कार्रवाई… अनिल अंबानी के मुम्बई स्थित घर 'अबोड' को किया जब्त

    मनी लॉन्ड्रिंग केस में ED की बड़ी कार्रवाई… अनिल अंबानी के मुम्बई स्थित घर 'अबोड' को किया जब्त


    मुम्बई।
    प्रवर्तन निदेशालय (Enforcement Directorate- ED) ने मनी लॉन्ड्रिंग विरोधी कानून (Anti-Money Laundering Laws – PMLA) के तहत बड़ी कार्रवाई की है। रिपोर्ट के अनुसार, ईडी ने अनिल अंबानी (Anil Ambani) के मुंबई स्थित घर ‘अबोड’ को जब्त कर लिया है। जब्त घर की कीमत 3,716 करोड़ रुपये बताई जा रही है। ईडी के अनुसार, अनिल अंबानी और उनके ग्रप की कंपनियों के खिलाफ अब तक कुल अटैचमेंट की कार्रवाई 15000 करोड़ से अधिक हो चुकी है। बता दें कि 23 फरवरी को बॉम्बे उच्च न्यायालय ने उद्योगपति अनिल अंबानी को झटका देते हुए एकल न्यायाधीश पीठ के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें उनके एवं रिलायंस कम्युनिकेशंस लिमिटेड के बैंक खातों को ‘धोखाधड़ी’ वाला वर्गीकृत करने की कार्यवाही पर रोक लगाई गई थी।

    यह आदेश मुख्य न्यायाधीश चंद्रशेखर और न्यायमूर्ति गौतम ए अंखड की खंडपीठ ने बैंक ऑफ बड़ौदा, आईडीबीआई बैंक, इंडियन ओवरसीज बैंक और ऑडिटर बीडीओ इंडिया एलएलपी की याचिका पर पारित किया। पीठ ने ‘उल्टे’ और ‘गैर-कानूनी’ अंतरिम आदेश को रद्द कर दिया और अंबानी की इसके अभियान पर रोक लगाने के निवेदन को भी ठुकरा दिया।

    पीठ ने कहा, “जैसा कि हम पहले ही सुन चुके हैं कि 24 दिसंबर, 2025 का अंतरिम फैसला गैर-कानूनी है और इस प्रक्रिया में गड़बड़ी है इसलिए अगले कुछ सप्ताह के लिए इस आदेश के लागू होने पर रोक लगाने का निवेदन गैर-कानूनी आदेश को जारी रखने और गैर-कानूनी काम को जारी रखने के बराबर होगी। इसलिए अनिल अंबानी की तरफ से इस फैसले के लागू होने पर रोक लगाने के निवेदन को खारिज किया जाता है।”

    दिसंबर 2025 में जब अनिल अंबानी के खिलाफ मामला विचाराधीन था, न्यायमूर्ति मिलिंद एन जाधव की एकल न्यायाधीश पीठ ने उनको कुछ समय के लिए राहत दी। इस आदेश ने तीनों बैंकों की सभी कार्रवाइयों पर रोक लगा दी और उन्हें कारण बताओ नोटिस और धोखाधड़ी आदेश पर आगे बढ़ने से रोक दिया, जिससे उन्हें दो-जजों की पीठ के सामने अपील करने के लिए मजबूर होना पड़ा।

  • ट्रंप टैरिफ अमान्य होने के बाद आयातकों ने की रिफंड की मांग… निचली अदालतों में 1500 से ज्यादा केस दायर

    ट्रंप टैरिफ अमान्य होने के बाद आयातकों ने की रिफंड की मांग… निचली अदालतों में 1500 से ज्यादा केस दायर


    वाशिंगटन।
    अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट (American Supreme Court) द्वारा राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (President Donald Trump) के ग्लोबल टैरिफ (Global Tariff) को अमान्य घोषित करने के बाद, इन शुल्कों को चुनौती देने वाले व्यवसायों ने निचली अदालतों में कानूनी कार्यवाही फिर से शुरू करने का अनुरोध किया है ताकि वे सरकार से रिफंड पाने की प्रक्रिया शुरू कर सकें। मंगलवार को, उन चुनौतियों को देने वालों के वकीलों, जिन्होंने न्यायालय के समक्ष सफलतापूर्वक मुकदमा लड़ा था, यूएस कोर्ट ऑफ अपील्स फॉर द फेडरल सर्किट से अनुरोध किया कि वह पिछले साल के अपने उस फैसले को औपचारिक रूप दे, जिसमें ट्रंप के तथाकथित “पारस्परिक” टैरिफ को अवैध घोषित किया गया था।

    इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट के बहुमत ने 20 फरवरी को बरकरार रखा था। इसके बाद यह मामला यूएस कोर्ट ऑफ इंटरनेशनल ट्रेड में वापस जाएगा, जहाँ अगले कदम तय होंगे, जिसमें यह भी शामिल होगा कि क्या आयातकों को उनका पैसा वापस मिलना चाहिए।


    रिफंड प्रक्रिया शुरू करने की मांग

    छोटे व्यवसायों के समूह के वकीलों ने ट्रेड कोर्ट में तीन जजों के पैनल से एक नया निषेधाज्ञा जारी करने का अनुरोध दाखिल किया, जो प्रशासन को टैरिफ नीति लागू करने से रोके और रिफंड प्रक्रिया शुरू करे।

    ब्लूमबर्ग न्यूज के विश्लेषण के अनुसार, अब तक 1,500 से अधिक रिफंड मुकदमे दायर किए जा चुके हैं। इनमें से अधिकांश मुकदमे उन आयातकों ने दायर किए थे, जब सुप्रीम कोर्ट ने नवंबर में मामले की सुनवाई की थी, और ट्रेड कोर्ट ने उन्हें तब तक रोक दिया था जब तक जज फैसला नहीं दे देते।


    त्वरित कार्रवाई की आवश्यकता

    बुधवार को, उन अन्य कंपनियों के वकीलों ने जिन्होंने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का इंतजार करते हुए रिफंड मुकदमे दायर किए थे, ट्रेड कोर्ट से इस सप्ताह या जल्द से जल्द सुनवाई आयोजित करने का अनुरोध किया। उन्होंने तत्काल कार्रवाई की मांग करते हुए तर्क दिया कि “वादी को और नुकसान और मुकदमेबाजी की जटिलता से बचा जा सके, जो हर गुजरते दिन के साथ बढ़ती जाती है।” पिछले साल लिखित दस्तावेजों में, न्याय विभाग के वकीलों ने ट्रेड कोर्ट को बताया था कि अगर मुकदमा जीत जाते हैं तो उन्हें ब्याज सहित रिफंड मिलेगा।


    ट्रंप के बयान से पैदा हुई अनिश्चितता

    सुप्रीम कोर्ट के फैसले की घोषणा के तुरंत बाद, ट्रंप ने ऐसी टिप्पणी की जिससे संकेत मिला कि सरकार रिफंड का भुगतान करने का विरोध कर सकती है। उन्होंने कहा, “मुझे लगता है कि इस पर मुकदमा चलाना होगा,” और यह भी अनुमान लगाया कि इस मुद्दे को सुलझने में वर्षों लग सकते हैं। लिबर्टी जस्टिस सेंटर के वरिष्ठ वकील जेफरी श्वाब ने कहा कि राष्ट्रपति के बयानों ने “चीजों को थोड़ा धुंधला कर दिया है,” इसलिए वे ट्रेड कोर्ट से जल्द से जल्द स्पष्टता की उम्मीद कर रहे हैं।


    व्यापक प्रभाव की संभावना

    छोटे व्यवसायों के वकीलों ने मंगलवार को ट्रेड कोर्ट को बताया कि इस मामले में अपनाई गई कोई भी रिफंड प्रक्रिया दावा करने वाली बाकी कंपनियों के लिए “जल्दी राहत प्रदान करने का खाका” बन सकती है। ट्रेड वकीलों का मानना है कि प्रशासन के लिए रिफंड का विरोध करना कानूनी रूप से कठिन होगा, क्योंकि न्याय विभाग ने न केवल मूल वादियों को भुगतान किए जाने की बात कही थी, बल्कि यह भी कहा था कि सरकार अन्य मामलों में रिफंड से संबंधित महत्वपूर्ण मुद्दों पर सहमति जताएगी।


    नए टैरिफ की चुनौतियां

    सुप्रीम कोर्ट ने 6-3 के बहुमत से फैसला सुनाया कि ट्रंप ने 1977 के इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पॉवर्स एक्ट के तहत अवैध रूप से टैरिफ लगाए थे। सुप्रीम कोर्ट के फैसले की घोषणा के तुरंत बाद, ट्रंप ने एक अलग प्राधिकरण – 1974 के ट्रेड एक्ट के तहत वैश्विक टैरिफ का एक नया दौर लगाने वाली घोषणा पर हस्ताक्षर किए। कानूनी विशेषज्ञों ने भविष्यवाणी की है कि प्रशासन को उन शुल्कों को भी चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।

  • ट्रंप ने अपने सबसे लंबे संबोधन में बोले 5 बड़े झूठ… US के मीडिया ने ही किया फैक्ट चेक

    ट्रंप ने अपने सबसे लंबे संबोधन में बोले 5 बड़े झूठ… US के मीडिया ने ही किया फैक्ट चेक


    वॉशिंगटन।
    अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) ने स्टेट ऑफ द यूनियन संबोधन (State of the Union Address) में सबसे लंबा भाषण देकर इतिहास रच दिया। इस दौरान डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर से 8 जंगें रुकवाने का दावा किया तो वहीं अर्थव्यवस्था, टैरिफ वॉर समेत कई मसलों पर बढ़-चढ़कर दावे किए। डोनाल्ड ट्रंप दावे करने में आगे रहे हैं, लेकिन अकसर गलत तथ्य दे देते हैं। ऐसा ही मंगलवार की रात को भी हुआ, जब उन्होंने जनता के सामने कई गलत तथ्य रख दिए। लेकिन डोनाल्ड ट्रंप के बोले गए झूठ ज्यादातर देर तक टिक नहीं सके। अमेरिका के ही कई अखबारों ने उनका फैक्ट चेक कर दिया है।


    अर्थव्यवस्था, नौकरी और निवेश पर क्या गलत दावा

    डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया कि हमारी इकॉनमी तेजी से बढ़ रही है। अमेरिकी दुनिया में हॉटेस्ट है। उनका दावा था कि हमारे पास काफी नौकरियां हैं। पहले के मुकाबले अमेरिका में सबसे ज्यादा लोगों के पास जॉब्स हैं। यह इतिहास में सबसे अधिक है। लेकिन डेटा कुछ और कहता है। अमेरिकी आंकड़ों के अनुसार 2025 में अमेरिका में नौकरी पाने वालों की संख्या में बड़ी गिरावट आई है। यह आंकड़ा कोरोना काल के किसी भी साल के मुकाबले कम रहा है। अमेरिकी लेबर ब्यूरो के अनुसार 2025 में अमेरिका में सिर्फ 1 लाख 81 हजार ही नई नौकरियां जुड़ीं।


    एरिना के कत्ल में प्रवासी शख्स के शामिल होने का दावा, क्या सच

    अमेरिकी लीडर ने यह दावा भी किया कि एरिना जारुस्का का कत्ल एक प्रवासी ने किया था। उनका कहना कि एक खूंखार अपराधी ने इस कांड को अंजाम दिया, जो खुली सीमाओं से आ गया था। वह यहां मुक्त होकर घूम रहा था। लेकिन उनका यह फैक्ट भी गलत निकला। एरिना के कत्ल में गिरफ्तार डिकार्लोस ब्राउन जूनियर कोई प्रवासी नहीं है। बता दें कि डोनाल्ड ट्रंप लगातार यह कहते रहे हैं कि अमेरिका में बाहर से आने वाले लोग ही ज्यादातर हिंसा के जिम्मेदार रहे हैं।


    बिजली की कीमत कम होने की बात निकली गलत

    अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि अमेरिका में की कीमतें घट रही हैं। इतनी कमी आई है कि यकीन नहीं होता। लेकिन सच्चाई कुछ और है। अमेरिका में प्रति परिवार ऊर्जा का बिल बीते एक साल में 6.7 पर्सेंट तक बढ़ गया है। वह लगातार कहते रहे हैं कि देश में बिजली की कीमत कम हो जाएगी, लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ है। सच्चाई यह है कि डोनाल्ड ट्रंप के आने के बाद से कई यूटिलिटी कंपनियों ने मांग की है कि रेट बढ़ाए जाएं। यह इजाफा हुआ भी है। कहा जा रहा है कि 2035 तक 18 फीसदी की बढ़ोतरी हो जाएगी।


    गैस वाला बयान भी ट्रंप का झूठा ही साबित हुआ

    ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिका में गैस की कीमत अब 1.99 डॉलर प्रति गैलन तक हो गई है। लेकिन बीते कुछ दिन पहले पर्यावरण को लेकर लगी पाबंदियों के चलते इसमें इजाफा होने की चर्चा है। इससे स्पष्ट है कि आने वाला समय रेट बढ़ने का रहेगा। यही नहीं कुछ राज्यों में अब भी कीमत 4.60 डॉलर प्रति गैलन है। इस तरह ट्रंप का दावा यहां भी गलत निकला है।


    8 जंगें रुकने का दावा भी झूठा, गाजा में अब भी हो रहीं मौतें

    अब बात करते हैं, डोनाल्ड ट्रंप के युद्ध वाले दावों की। उन्होंने एक बार फिर से कहा कि उन्होंने अपने कार्यकाल के शुरुआती 10 महीनों में 8 जंगें रुकवा दीं। अब इस मामले में भी सच्चाई यह है कि अमेरिका का दखल 6 जंगों में ही रहा है। अन्य दो युद्ध ऐसे रहे हैं, जिसमें उसका कोई रोल नहीं रहा। इसके अलावा कई लोगों ने तो इन 6 में भी उसे कोई क्रेडिट नहीं दिया है। ट्रंप ने गाजा में सीजफायर का दावा किया है, लेकिन वहां अब भी इजरायल के हमले जारी हैं और हर दिन ही कुछ मारे जा रहे हैं।
     

    अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) ने स्टेट ऑफ द यूनियन संबोधन (State of the Union Address) में सबसे लंबा भाषण देकर इतिहास रच दिया। इस दौरान डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर से 8 जंगें रुकवाने का दावा किया तो वहीं अर्थव्यवस्था, टैरिफ वॉर समेत कई मसलों पर बढ़-चढ़कर दावे किए। डोनाल्ड ट्रंप दावे करने में आगे रहे हैं, लेकिन अकसर गलत तथ्य दे देते हैं। ऐसा ही मंगलवार की रात को भी हुआ, जब उन्होंने जनता के सामने कई गलत तथ्य रख दिए। लेकिन डोनाल्ड ट्रंप के बोले गए झूठ ज्यादातर देर तक टिक नहीं सके। अमेरिका के ही कई अखबारों ने उनका फैक्ट चेक कर दिया है।


    अर्थव्यवस्था, नौकरी और निवेश पर क्या गलत दावा

    डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया कि हमारी इकॉनमी तेजी से बढ़ रही है। अमेरिकी दुनिया में हॉटेस्ट है। उनका दावा था कि हमारे पास काफी नौकरियां हैं। पहले के मुकाबले अमेरिका में सबसे ज्यादा लोगों के पास जॉब्स हैं। यह इतिहास में सबसे अधिक है। लेकिन डेटा कुछ और कहता है। अमेरिकी आंकड़ों के अनुसार 2025 में अमेरिका में नौकरी पाने वालों की संख्या में बड़ी गिरावट आई है। यह आंकड़ा कोरोना काल के किसी भी साल के मुकाबले कम रहा है। अमेरिकी लेबर ब्यूरो के अनुसार 2025 में अमेरिका में सिर्फ 1 लाख 81 हजार ही नई नौकरियां जुड़ीं।


    एरिना के कत्ल में प्रवासी शख्स के शामिल होने का दावा, क्या सच

    अमेरिकी लीडर ने यह दावा भी किया कि एरिना जारुस्का का कत्ल एक प्रवासी ने किया था। उनका कहना कि एक खूंखार अपराधी ने इस कांड को अंजाम दिया, जो खुली सीमाओं से आ गया था। वह यहां मुक्त होकर घूम रहा था। लेकिन उनका यह फैक्ट भी गलत निकला। एरिना के कत्ल में गिरफ्तार डिकार्लोस ब्राउन जूनियर कोई प्रवासी नहीं है। बता दें कि डोनाल्ड ट्रंप लगातार यह कहते रहे हैं कि अमेरिका में बाहर से आने वाले लोग ही ज्यादातर हिंसा के जिम्मेदार रहे हैं।


    बिजली की कीमत कम होने की बात निकली गलत

    अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि अमेरिका में की कीमतें घट रही हैं। इतनी कमी आई है कि यकीन नहीं होता। लेकिन सच्चाई कुछ और है। अमेरिका में प्रति परिवार ऊर्जा का बिल बीते एक साल में 6.7 पर्सेंट तक बढ़ गया है। वह लगातार कहते रहे हैं कि देश में बिजली की कीमत कम हो जाएगी, लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ है। सच्चाई यह है कि डोनाल्ड ट्रंप के आने के बाद से कई यूटिलिटी कंपनियों ने मांग की है कि रेट बढ़ाए जाएं। यह इजाफा हुआ भी है। कहा जा रहा है कि 2035 तक 18 फीसदी की बढ़ोतरी हो जाएगी।


    गैस वाला बयान भी ट्रंप का झूठा ही साबित हुआ

    ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिका में गैस की कीमत अब 1.99 डॉलर प्रति गैलन तक हो गई है। लेकिन बीते कुछ दिन पहले पर्यावरण को लेकर लगी पाबंदियों के चलते इसमें इजाफा होने की चर्चा है। इससे स्पष्ट है कि आने वाला समय रेट बढ़ने का रहेगा। यही नहीं कुछ राज्यों में अब भी कीमत 4.60 डॉलर प्रति गैलन है। इस तरह ट्रंप का दावा यहां भी गलत निकला है।


    8 जंगें रुकने का दावा भी झूठा, गाजा में अब भी हो रहीं मौतें

    अब बात करते हैं, डोनाल्ड ट्रंप के युद्ध वाले दावों की। उन्होंने एक बार फिर से कहा कि उन्होंने अपने कार्यकाल के शुरुआती 10 महीनों में 8 जंगें रुकवा दीं। अब इस मामले में भी सच्चाई यह है कि अमेरिका का दखल 6 जंगों में ही रहा है। अन्य दो युद्ध ऐसे रहे हैं, जिसमें उसका कोई रोल नहीं रहा। इसके अलावा कई लोगों ने तो इन 6 में भी उसे कोई क्रेडिट नहीं दिया है। ट्रंप ने गाजा में सीजफायर का दावा किया है, लेकिन वहां अब भी इजरायल के हमले जारी हैं और हर दिन ही कुछ मारे जा रहे हैं।

  • करदाता को अब बताना होगा मकान मालिक से उसका क्या रिश्ता है…1 अप्रैल से बदलेंगे नियम

    करदाता को अब बताना होगा मकान मालिक से उसका क्या रिश्ता है…1 अप्रैल से बदलेंगे नियम

    Tax

    नई दिल्ली। सरकार (Government) ने नए आयकर अधिनियम, 2025 (New Income Tax Act, 2025) के तहत मसौदा आयकर नियम और फॉर्म जारी किए हैं, जिनमें किराया भत्ते (एचआरए) के दावों में पारदर्शिता बढ़ाने, विदेशी आय पर कर क्रेडिट के दावों की कड़ी जांच और ऑडिटर की जिम्मेदारी बढ़ाने का प्रस्ताव है। सरकार (Government) ने नए आयकर अधिनियम, 2025 (New Income Tax Act, 2025) के तहत मसौदा आयकर नियम और फॉर्म जारी किए हैं, जिनमें किराया भत्ते (एचआरए) के दावों में पारदर्शिता बढ़ाने, विदेशी आय पर कर क्रेडिट के दावों की कड़ी जांच और ऑडिटर की जिम्मेदारी बढ़ाने का प्रस्ताव है। नया आयकर अधिनियम एक अप्रैल, 2026 से लागू होगा। सरकार ने हितधारकों के लिए नियमों का मसौदा एवं फॉर्म जारी किए हैं। इसके आधार पर अंतिम नियम एवं फॉर्म अगले महीने अधिसूचित किए जाएंगे।

    नियमों के मसौदे के मुताबिक, नए फॉर्म 124 में करदाता को यह बताना होगा कि वह जिस मकान मालिक को किराया दे रहा है, उससे उसका कोई पारिवारिक या कोई अन्य संबंध तो नहीं है। फिलहाल एचआरए का दावा करते समय कर्मचारी अपने नियोक्ता को किराये का अनुमानित विवरण देता है, लेकिन मकान मालिक के साथ संबंध का खुलासा करना अनिवार्य नहीं है।


    फर्जी किराया दावों पर लगाम लगेगी

    कर विशेषज्ञों का मानना है कि मकान मालिक और किरायेदार के बीच के संबंधों का खुलासा अनिवार्य किए जाने से फर्जी या बढ़ा-चढ़ाकर दिखाए गए किराया दावों पर अंकुश लगेगा। नांगिया ग्लोबल एडवाइजर्स फर्म में साझेदार संदीप झुनझुनवाला ने कहा, ‘यह प्रावधान वास्तविक व्यवस्थाओं को प्रभावित किए बगैर कृत्रिम दावों की पहचान में मदद करेगा। इससे पारदर्शिता बढ़ेगी और अनुचित दावों को खारिज करना आसान होगा।’


    किन्हें देनी होगी जानकारी?

    अगर आप सालाना एक लाख रुपए से ज्यादा किराया किसी मकान मालिक को देते हैं, तो आपको फॉर्म 124 में मकान मालिक के साथ अपना रिश्ता बताना होगा। यह नियम उन मामलों पर लागू होगा, जहां किराया पति या पत्नी, माता-पिता, भाई-बहन या दूसरे रिश्तेदारों को दिया जा रहा है।


    कौन-कौन सी जानकारी देनी होगी?

    एचआरए क्लेम करते समय वेतन पर काम करने वाले करदाताओं को मकान मालिक की ये जानकारी देनी होगी -नाम, पता, पैन, मकान मालिक से संबंध। इसका मकसद यह पक्का करना है कि रिश्तेदारों को दिए गए किराए के लिए एचआरए दावा असली और सत्यापित हो।


    परिवार को किराया देना अब भी मान्य

    नए नियम में परिवार के सदस्य को किराया देने पर रोक नहीं है। आप एचआरए छूट का दावा कर सकते हैं। इसके लिए जरूरी है – वैध किराया अनुबंध, किराया नगद की बजाय बैंक ट्रांसफर के जरिए देना होगा। मकान मालिक की तरफ से उस किराये की आय को अपने आयकर रिटर्न में दिखाना होगा।


    जानकारी न देने पर क्या होगा?

    अगर कोई टैक्सपेयर रिश्तेदारी की जानकारी नहीं देता या फर्जी दावा करता है, तो इसे आय की गलत रिपोर्टिंग माना जा सकता है। इसके लिए आयकर अधिनियम 2025 की धारा 439 के तहत टैक्स चोरी की राशि के 200% तक जुर्माना लगाया जा सकता है। इसके अलावा भुगतान या मकान मालिक की आय में गड़बड़ी मिलने पर नोटिस भी मिल सकता है।


    ऑडिटर की भूमिका और सख्त की गई

    नियमों के मसौदे में विदेशी आय पर कर क्रेडिट के दावों के खुलासे के लिए ऑडिटर के साथ कंपनियों की भी जवाबदेही बढ़ाने का प्रस्ताव किया गया है। विदेशी आय पर कर क्रेडिट के दावों के लिए प्रस्तावित फॉर्म 44 में ऑडिटर की भूमिका और सख्त की गई है। अब चार्टर्ड अकाउंटेंट को विदेशी टैक्स कटौती प्रमाणपत्र, भुगतान का प्रमाण, विनिमय दर रूपांतरण और कर संधि की पात्रता की स्वतंत्र जांच करनी होगी। विशेषज्ञों का कहना है कि यह उन मामलों में चुनौतीपूर्ण हो सकता है जहां विदेशी देशों में एकीकृत कर विवरण जारी होते हैं या कर को अलग वित्त वर्ष में अदा किया जाता है।


    कंपनियों के लिए सख्त पैन आवेदन प्रक्रिया

    मसौदा प्रस्ताव में कंपनियों के लिए पैन आवेदन प्रक्रिया भी सख्त की गई है। अब आवेदन करते समय यह घोषणा देना अनिवार्य होगा कि कंपनी के पास पहले से से कोई पैन नहीं है। शाखाओं, परियोजना कार्यालयों या पूर्ववर्ती इकाइयों के नाम पर पहले से पैन होने की स्थिति में दोहराव से बचने के लिए आंतरिक जांच जरूरी होगी। झुनझुनवाला ने कहा कि यह प्रावधान डेटाबेस की शुचिता मजबूत करेगा, लेकिन आवेदकों की जिम्मेदारी भी बढ़ाएगा।

    ऑडिटर की आपत्ति का असर बताना होगा
    नए कर ऑडिट फॉर्म 26 में यह अनिवार्य किया गया है कि वैधानिक ऑडिटर की रिपोर्ट में यदि कोई प्रतिकूल टिप्पणी, अस्वीकरण या पात्रता है तो उसका आय, हानि या बुक प्रॉफिट पर प्रभाव स्पष्ट किया जाए।

    उदाहरण के लिए, यदि राजस्व मान्यता, शेयर मूल्यांकन या प्रावधान में कमी पर आपत्ति दर्ज होती है, तो कर ऑडिटर को देखना होगा कि इससे कर-योग्य आय को कम करके तो नहीं दिखाया गया। इसके अलावा, कर ऑडिट रिपोर्ट में इस्तेमाल किए गए अकाउंटिंग सॉफ्टवेयर, क्लाउड या सर्वर का विवरण, आईपी पता, डेटा भंडारण का देश और भारत में स्थित बैकअप सर्वर का पता भी बताना होगा। विशेषज्ञों का मानना है कि नए प्रावधानों से अनुपालन की लागत बढ़ सकती है लेकिन इससे पारदर्शिता और जवाबदेही में मजबूती आने की संभावना है।

  • मोदी की इजरायल यात्रा पर कांग्रेस का हमला, नेतन्याहू से मुलाकात को बताया …

    मोदी की इजरायल यात्रा पर कांग्रेस का हमला, नेतन्याहू से मुलाकात को बताया …

    नई दिल्ली। कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दो दिवसीय इजरायल यात्रा को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा राजनीतिक हमला बोला है। पार्टी ने कहा कि ऐसे समय में जब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इजरायली नेतृत्व की आलोचना हो रही है, तब भारतीय प्रधानमंत्री की यह यात्रा कई नैतिक सवाल खड़े करती है।

    कांग्रेस नेताओं ने प्रधानमंत्री की इजरायली समकक्ष बेंजामिन नेतन्याहू से प्रस्तावित मुलाकात को लेकर भी आपत्ति जताई और गाजा की स्थिति पर स्पष्ट रुख अपनाने की मांग की।

    जयराम रमेश ने ऐतिहासिक रुख का दिलाया हवाला
    कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि भारत का इतिहास फिलिस्तीनी मुद्दे पर संतुलित और सिद्धांत आधारित रहा है, लेकिन मौजूदा कूटनीतिक रुख उस परंपरा से अलग दिखाई देता है।
    उन्होंने आरोप लगाया कि गाजा में भारी तबाही और वेस्ट बैंक में बस्तियों के विस्तार जैसे मुद्दों पर भारत को अधिक स्पष्टता दिखानी चाहिए।

    रमेश ने भारत के पुराने रुख की याद दिलाते हुए पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के 1960 के गाजा दौरे और बाद के दशकों में फिलिस्तीन के समर्थन से जुड़े निर्णयों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भारत ने 1988 में फिलिस्तीन को औपचारिक मान्यता देकर वैश्विक मंच पर एक स्वतंत्र नीति का परिचय दिया था।

    प्रियंका गांधी ने गाजा का मुद्दा उठाने की अपील
    की

    कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने उम्मीद जताई कि प्रधानमंत्री अपनी यात्रा के दौरान इजरायली संसद नेसेट को संबोधित करते हुए गाजा पट्टी की मानवीय स्थिति का जिक्र करेंगे और निर्दोष नागरिकों के लिए न्याय की बात उठाएंगे।

    उन्होंने कहा कि भारत का ऐतिहासिक दायित्व रहा है कि वह अंतरराष्ट्रीय मंच पर शांति, न्याय और मानवीय मूल्यों की वकालत करता रहे।

    सरकार का फोकस: रणनीतिक और द्विपक्षीय सहयोग

    प्रधानमंत्री की यह यात्रा दोनों देशों के बीच रक्षा, प्रौद्योगिकी और व्यापार सहयोग को और मजबूत करने के उद्देश्य से हो रही है।

    2017 में मोदी की पहली इजरायल यात्रा के दौरान संबंधों को “रणनीतिक साझेदारी” का दर्जा दिया गया था, जिसके बाद कृषि, रक्षा तकनीक, जल प्रबंधन और नवाचार के क्षेत्रों में सहयोग बढ़ा है।

    राजनीतिक बनाम कूटनीतिक बहस

    इस मुद्दे ने एक बार फिर भारत की पश्चिम एशिया नीति को लेकर घरेलू राजनीतिक बहस तेज कर दी है—एक तरफ रणनीतिक साझेदारी को प्राथमिकता देने की दलील है, तो दूसरी ओर मानवीय और ऐतिहासिक दृष्टिकोण को बनाए रखने की मांग उठ रही है।

  • मेघालय विधानसभा में अनोखा दृश्य: विधायक पत्नी ने CM पति से ही पूछ लिया हिसाब

    मेघालय विधानसभा में अनोखा दृश्य: विधायक पत्नी ने CM पति से ही पूछ लिया हिसाब


    नई दिल्ली।
    मेघालय विधानसभा में उस समय दिलचस्प स्थिति बन गई, जब सत्तारूढ़ नेशनल पीपल्स पार्टी (NPP) की विधायक मेहताब चांदी ए संगमा ने प्रश्नकाल के दौरान अपने ही पति और मुख्यमंत्री कोनराड के. संगमा से विकास योजनाओं की प्रगति पर सीधे सवाल कर दिए।

    सदन में नीतिगत मुद्दे पर हुई यह औपचारिक बहस चर्चा का विषय बन गई और इसे लोकतांत्रिक जवाबदेही का अनोखा उदाहरण माना जा रहा है।


    पशुपालन और मत्स्य शिक्षा परियोजनाओं पर उठाए सवाल

    गांबेग्रे क्षेत्र की विधायक ने वर्ष 2022 में स्वीकृत पशुपालन और मत्स्य क्षेत्र से जुड़े शैक्षणिक संस्थानों की प्रगति पर जानकारी मांगी।



    उन्होंने पूछा कि प्रस्तावित एक वेटरनरी कॉलेज, दो फिशरीज कॉलेज और एक डेयरी कॉलेज की स्थापना में अब तक क्या कदम उठाए गए हैं।

    इसके साथ ही उन्होंने राज्य के पशु चिकित्सा प्रशिक्षण केंद्रों में कर्मियों की कमी का मुद्दा उठाते हुए कहा कि इससे पशुधन आधारित आजीविका प्रभावित हो रही है।


    मुख्यमंत्री ने बताई देरी की वजह

    मुख्यमंत्री ने जवाब देते हुए कहा कि परियोजनाएं राज्य के पशुपालन क्षेत्र को मजबूत करने के उद्देश्य से शुरू की गई हैं, लेकिन भूमि चयन, विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) और मानव संसाधन योजना जैसी प्रक्रियाओं के कारण समय लगा।

    उन्होंने बताया कि:

    • वेटरनरी कॉलेज की स्थापना पर लगभग 334 करोड़ रुपये खर्च का अनुमान है।

    • इसके लिए किर्डेमकुलाई (री-भोई जिला) में करीब 800 एकड़ भूमि चिन्हित की गई है।

    • संस्थान में 19 विभाग प्रस्तावित किए गए हैं।


    सरकार का भरोसा—अब तेज होगी प्रक्रिया

    मुख्यमंत्री ने आश्वासन दिया कि 2022 में स्वीकृत इन संस्थानों की स्थापना की प्रक्रिया को अब गति दी जाएगी। उन्होंने कहा कि राज्य की बड़ी आबादी पशुपालन और इससे जुड़े व्यवसायों पर निर्भर है, इसलिए इन परियोजनाओं का समय पर पूरा होना अत्यंत आवश्यक है।

    मानव संसाधन की कमी को लेकर भी उन्होंने रिक्त पदों को शीघ्र भरने और प्रशिक्षण व्यवस्था को मजबूत करने का भरोसा दिलाया।


    जवाबदेही की मिसाल बना घटनाक्रम

    सदन में यह मामला इसलिए सुर्खियों में रहा क्योंकि एक विधायक ने निजी संबंधों से अलग हटकर सरकार से सार्वजनिक रूप से जवाब मांगा। राजनीतिक विश्लेषकों ने इसे स्वस्थ लोकतांत्रिक परंपरा और संस्थागत जवाबदेही का सकारात्मक संकेत बताया है।

  • पाकिस्तानी यूनिवर्सिटी का अजीब ‘फरमान’ वायरल: साथ दिखे लड़का-लड़की तो करा देंगे निकाह?

    पाकिस्तानी यूनिवर्सिटी का अजीब ‘फरमान’ वायरल: साथ दिखे लड़का-लड़की तो करा देंगे निकाह?


    लाहौर।
    हमदर्द यूनिवर्सिटी इन दिनों सोशल मीडिया पर जबरदस्त चर्चा और ट्रोलिंग का विषय बनी हुई है। वजह बना रमजान के दौरान जारी बताया जा रहा एक कथित नोटिस, जिसमें कैंपस में लड़के और लड़की के साथ खड़े होने पर आपत्ति जताने और यहां तक कि उनका “निकाह” कराए जाने जैसी बात लिखी होने का दावा किया जा रहा है।


    वायरल नोटिस में क्या कहा गया?

    सोशल मीडिया पर फैल रहे स्क्रीनशॉट के अनुसार, छात्रों को संबोधित करते हुए कहा गया है कि पवित्र महीने के दौरान किसी भी “कपल” का कैंपस में साथ खड़ा होना सख्त मना है।

    कथित तौर पर इसमें चेतावनी दी गई कि यदि कोई लड़का-लड़की साथ पाया गया तो उनका “तुरंत निकाह” करवा दिया जाएगा।

    इसके साथ ही छात्रों को संस्थान की “पवित्रता बनाए रखने” और अनावश्यक नजदीकी से बचने की सलाह देने की बात भी कही गई है।



    वायरल सामग्री में मजाकिया अंदाज में यह दावा भी किया जा रहा है कि नियम तोड़ने वालों को वलीमा (रिसेप्शन) का खर्च खुद उठाना होगा।


    असली या फर्जी? प्रामाणिकता पर सवाल

    इस कथित नोटिस की सत्यता को लेकर अब भी स्थिति स्पष्ट नहीं है।

    कई लोग इसे फर्जी बता रहे हैं और कह रहे हैं कि ऐसा कोई आधिकारिक आदेश जारी नहीं हुआ। विश्वविद्यालय की ओर से भी अब तक कोई औपचारिक पुष्टि सामने नहीं आई है, जिससे मामला और चर्चा में आ गया है।


    सोशल मीडिया पर यूजर्स ने लिए मजे

    नोटिस वायरल होते ही इंटरनेट पर मीम्स और मजेदार प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई—

    • “रिश्ता कराने का तरीका थोड़ा कैज़ुअल है।”

    • “जिनके घर वाले नहीं मान रहे, उनके लिए सुनहरा मौका!”

    • “अब तो क्रश के पास जाकर खड़े होना पड़ेगा।”

    • “ऐसी यूनिवर्सिटी में एडमिशन कैसे लें?”

    छात्रों और कंटेंट क्रिएटर्स ने रील्स बनाकर इस कथित आदेश का हास्यपूर्ण अंदाज में मजाक उड़ाया, जिससे मामला तेजी से फैल गया।


    बहस का मुद्दा क्या बना?

    चाहे नोटिस असली हो या फर्जी, लेकिन इस घटना ने कैंपस अनुशासन, व्यक्तिगत स्वतंत्रता और सोशल मीडिया पर अपुष्ट सूचनाओं के तेज प्रसार को लेकर नई बहस छेड़ दी है—कि बिना पुष्टि के वायरल सामग्री किस तरह सार्वजनिक धारणा को प्रभावित कर सकती है।

  • वोटिंग अनिवार्य बनाने पर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी, NOTA की उपयोगिता पर जताई शंका

    वोटिंग अनिवार्य बनाने पर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी, NOTA की उपयोगिता पर जताई शंका


    नई दिल्ली।
    सुप्रीम कोर्ट ने मतदान को लेकर महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा है कि लोकतंत्र को मजबूत बनाने के लिए अधिक से अधिक नागरिकों का मतदान केंद्र तक पहुंचना जरूरी है। अदालत ने यह भी संकेत दिया कि वोटिंग को अनिवार्य बनाने जैसे उपायों पर विचार किया जा सकता है, ताकि लोग अपने मताधिकार का सक्रिय रूप से इस्तेमाल करें।

    यह टिप्पणी उस जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान आई, जिसमें मांग की गई है कि यदि किसी निर्वाचन क्षेत्र में केवल एक उम्मीदवार ही मैदान में हो, तब भी उसे निर्विरोध विजयी घोषित करने के बजाय चुनाव कराया जाए, ताकि मतदाता “इनमें से कोई नहीं” (NOTA) का विकल्प चुन सकें।


    अदालत ने पूछा—क्या NOTA से बदली है स्थिति?

    सुनवाई के दौरान पीठ ने यह सवाल उठाया कि NOTA लागू होने के बाद क्या वास्तव में:

    • मतदान प्रतिशत में वृद्धि हुई है?

    • उम्मीदवारों की गुणवत्ता में सुधार देखने को मिला है?

    अदालत ने कहा कि कभी-कभी ऐसा लगता है कि कोई प्रभावी व्यवस्था होनी चाहिए—बहुत कठोर नहीं, लेकिन ऐसी कि नागरिक मतदान के लिए प्रेरित हों।


    ग्रामीण बनाम शहरी मतदान पर भी चर्चा

    सुनवाई के दौरान यह भी उल्लेख किया गया कि ग्रामीण क्षेत्रों में मतदान को अक्सर एक उत्सव की तरह देखा जाता है। लोग समूह में मतदान करने जाते हैं, जबकि अनुभव बताता है कि शिक्षित और आर्थिक रूप से संपन्न वर्ग कई बार मतदान में अपेक्षाकृत कम भागीदारी करता है।


    किस प्रावधान को दी गई है चुनौती?

    याचिका में जनप्रतिनिधित्व कानून की उस धारा को चुनौती दी गई है, जिसके तहत यदि चुनाव मैदान में केवल एक उम्मीदवार रह जाता है, तो उसे बिना मतदान के निर्वाचित घोषित किया जा सकता है।

    याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि इस स्थिति में मतदाताओं को NOTA का विकल्प प्रयोग करने का अवसर ही नहीं मिलता, जिससे लोकतांत्रिक अभिव्यक्ति सीमित हो जाती है।


    याचिकाकर्ताओं का पक्ष

    याचिका में कहा गया कि यदि NOTA के परिणामों को वास्तविक प्रभाव दिया जाए, तो अधिक मतदाता मतदान के लिए प्रेरित होंगे। वर्तमान व्यवस्था में NOTA चुनने का कोई प्रत्यक्ष परिणाम नहीं निकलता, जिससे मतदाताओं का उत्साह कम होता है।


    व्यापक बहस की शुरुआत

    अदालत की इन टिप्पणियों ने अनिवार्य मतदान, मतदाता सहभागिता और NOTA की प्रभावशीलता जैसे मुद्दों पर नई बहस छेड़ दी है। मामला अभी विचाराधीन है और आगे की सुनवाई में इस पर विस्तृत कानूनी विमर्श होने की संभावना है।

  • सड़क दुर्घटना में मदद करने वालों को दिल्ली सरकार देगी ₹25,000 कैश, शुरू हुई 'राह-वीर योजना'

    सड़क दुर्घटना में मदद करने वालों को दिल्ली सरकार देगी ₹25,000 कैश, शुरू हुई 'राह-वीर योजना'


    नई दिल्ली। दिल्ली सरकार ने रोड एक्सीडेंट्स में तुरंत मदद देने और पीड़ितों की जान बचाने के मकसद से ‘राह-वीर योजना’ की शुरुआत की है। इस स्कीम के तहत, जो भी नागरिक किसी सड़क हादसे में गंभीर रूप से घायल व्यक्ति की मदद करेगा और उसे अस्पताल पहुंचाएगा, उसे सरकार ₹25,000 कैश प्राइज के साथ एक सम्मान पत्र भी दिया जाएगा। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने स्कीम का ऐलान करते हुए बताया कि इसका उद्देश्य समाज में अच्छे काम करने वालों का मनोबल बढ़ाना और लोगों को तुरंत मदद के लिए प्रोत्साहित करना है।

    गोल्डन आवर में जान बचाने का मकसद
    ‘राह-वीर योजना’ का सबसे बड़ा लक्ष्य एक्सीडेंट के तुरंत बाद के शुरुआती समय यानी ‘गोल्डन आवर’ का सही इस्तेमाल करना है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि घायल व्यक्ति को एक्सीडेंट के तुरंत बाद मेडिकल मदद मिल जाए, तो उसकी जान बचने की संभावना कई गुना बढ़ जाती है। सरकार चाहती है कि लोग पुलिसिया कार्रवाई या कानूनी झंझटों के डर को भूलकर मानवीय आधार पर मदद के लिए आगे आएं और घायलों को समय पर अस्पताल पहुंचाएं।

    ईनाम की धनराशि और राष्ट्रीय सम्मान
    स्कीम के नियमों के अनुसार, एक ही एक्सीडेंट में अगर कोई व्यक्ति एक से अधिक पीड़ितों की सहायता करता है, तो भी उसे अधिकतम ₹25,000 की प्रोत्साहन राशि ही दी जाएगी। इसके अलावा, साल भर में चुने गए 10 सबसे बेहतरीन ‘राह-वीरों’ को केंद्र सरकार की ओर से1 लाख का राष्ट्रीय पुरस्कार और सम्मान प्रमाण पत्र देकर विशेष सम्मानित किया जाएगा।
    कानूनी डर को खत्म करने की पहल
    ‘राह-वीर योजना’ केवल वित्तीय मदद तक सीमित नहीं है, बल्कि यह समाज को यह संदेश देती है कि एक्सीडेंट पीड़ितों की मदद करना अब किसी कानूनी जोखिम का कारण नहीं बनेगा। अक्सर लोग पूछताछ और अदालती प्रक्रिया के डर से मदद करने से कतराते हैं, लेकिन इस स्कीम के तहत मददगारों को परेशान नहीं किया जाएगा और उन्हें समाज के रक्षक के रूप में सम्मानित किया जाएगा।