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  • यश की 'टॉक्सिक' को सेंसर बोर्ड की हरी झंडी, 194 मिनट का रनटाइम और A सर्टिफिकेट

    यश की 'टॉक्सिक' को सेंसर बोर्ड की हरी झंडी, 194 मिनट का रनटाइम और A सर्टिफिकेट


    नई दिल्ली। कन्नड़ सुपरस्टार यश की बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘टॉक्सिक: ए फेयरी टेल फॉर ग्रोन-अप्स’ को लेकर दर्शकों का इंतजार अब अपने अंतिम पड़ाव पर पहुंच गया है। गीतू मोहनदास के निर्देशन में बनी इस एक्शन थ्रिलर फिल्म को केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड यानी CBFC से A सर्टिफिकेट मिल गया है। इसके साथ ही फिल्म के रनटाइम की आधिकारिक जानकारी भी सामने आ गई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक फिल्म करीब 194 मिनट यानी 3 घंटे 14 मिनट लंबी है। फिल्म को 13 अगस्त को CBFC के बेंगलुरु क्षेत्रीय कार्यालय से प्रमाणित किया गया है।

    ‘A’ सर्टिफिकेट का मतलब है कि फिल्म को केवल वयस्क दर्शक ही सिनेमाघरों में देख सकेंगे। वहीं तीन घंटे से ज्यादा की अवधि ने भी फिल्म को लेकर उत्सुकता बढ़ा दी है। हालांकि केवल लंबे रनटाइम या A सर्टिफिकेट के आधार पर फिल्म की सामग्री के बारे में निश्चित निष्कर्ष निकालना सही नहीं होगा। इतना जरूर है कि फिल्म को लेकर मेकर्स ने शुरुआत से ही इसे आम मसाला फिल्म से अलग और वयस्क दर्शकों के लिए तैयार किए गए डार्क एक्शन ड्रामा के रूप में पेश किया है।

    फिल्म की कहानी आजादी के बाद के गोवा की पृष्ठभूमि में रखी गई है। कहानी ऐसे दौर को दिखाती है जहां हिंसा सत्ता लालच नफरत और अपराध का गहरा असर दिखाई देता है। इसी माहौल में एक गैंगस्टर अपने जीवन के फैसलों और उनके परिणामों से जूझता नजर आता है। कहानी में वफादारी सही और गलत के बीच संघर्ष तथा खुद को बदलने की कोशिश जैसे पहलू अहम बताए गए हैं। यानी ‘टॉक्सिक’ में सिर्फ एक्शन ही नहीं बल्कि किरदारों के भीतर चलने वाली जंग को भी प्रमुखता दी गई है।

    फिल्म के ट्रेलर ने यश के किरदार को लेकर पहले ही जबरदस्त चर्चा पैदा कर दी है। यश फिल्म में राया नाम के किरदार में नजर आ रहे हैं। ट्रेलर में उनका अंदाज बेहद आक्रामक और खतरनाक दिखाई देता है। सत्ता और अपनी ताकत के नशे में डूबा यह किरदार अपने आसपास के लोगों के लिए मुश्किलें खड़ी करता है। कहानी जैसे-जैसे आगे बढ़ती है वैसे-वैसे उसके रिश्तों और फैसलों का असर भी सामने आता है।

    ‘टॉक्सिक’ की एक और बड़ी खासियत इसकी स्टारकास्ट है। फिल्म में यश के साथ कियारा आडवाणी नयनतारा तारा सुतारिया हुमा कुरैशी और रुक्मिणी वसंत जैसे कलाकार महत्वपूर्ण भूमिकाओं में नजर आएंगे। फिल्म को कन्नड़ और अंग्रेजी में तैयार किया गया है और इसे हिंदी तमिल तेलुगु तथा मलयालम समेत कई भाषाओं में दर्शकों तक पहुंचाने की तैयारी है। फिल्म का संगीत और बैकग्राउंड स्कोर रवि बसरूर से जुड़ा है जबकि इसके बड़े एक्शन सीक्वेंस पर भी खास काम किया गया है।

    फिल्म की रिलीज डेट भी कई बार बदली जा चुकी है। अलग-अलग कारणों से इसकी रिलीज आगे खिसकती रही और अब मेकर्स ने 26 अगस्त 2026 को दुनिया भर के सिनेमाघरों में रिलीज की तारीख तय की है। ऐसे में CBFC से सर्टिफिकेट मिलने के बाद फिल्म की रिलीज का रास्ता साफ हो गया है। अब नजर इस बात पर है कि यश का यह डार्क और बड़े पैमाने वाला अवतार बॉक्स ऑफिस पर दर्शकों को कितना प्रभावित करता है।

  • गोरखा भर्ती पर नेपाल में फिर उठी आवाज, प्रदर्शनकारियों ने कहा- गल्फ जाने से बेहतर भारतीय सेना में सेवा

    गोरखा भर्ती पर नेपाल में फिर उठी आवाज, प्रदर्शनकारियों ने कहा- गल्फ जाने से बेहतर भारतीय सेना में सेवा


    नई दिल्ली। नेपाल के पोखरा में पूर्व गोरखा सैनिकों और उनके समर्थकों ने भारतीय सेना में नेपाली युवाओं की भर्ती दोबारा शुरू करने की मांग को लेकर प्रदर्शन किया है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि नेपाली युवाओं को गल्फ देशों में रोजगार तलाशने के लिए मजबूर करने के बजाय भारतीय सेना में अग्निवीर के तौर पर सेवा करने का अवसर मिलना चाहिए। यह प्रदर्शन ऐसे समय हुआ है जब भारतीय सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ के नेपाल दौरे की तैयारियां चल रही हैं। जनरल सेठ 16 अगस्त से नेपाल के पांच दिवसीय दौरे पर जाने वाले हैं।

    रिपोर्ट के मुताबिक बुधवार 12 अगस्त को पोखरा में इंडियन एक्स सर्विसमैन गोरखा ब्रिगेड नेपाल पोखरा की ओर से प्रदर्शन आयोजित किया गया। इसमें पूर्व सैनिकों के साथ उनके परिवारों और नेपाली युवाओं ने भी हिस्सा लिया। प्रदर्शनकारियों ने जिला प्रशासन कार्यालय के माध्यम से नेपाल की संघीय सरकार को दो सूत्रीय ज्ञापन सौंपा। उनकी प्रमुख मांग भारतीय सेना में नेपाली युवाओं की भर्ती तत्काल फिर शुरू करना है। इसके साथ ही सैनिक शब्द वाले पूर्व सैनिक संगठनों के नवीनीकरण की मांग भी ज्ञापन में शामिल है।

    गोरखा सैनिकों और भारतीय सेना के बीच संबंधों का इतिहास काफी पुराना है। नेपाली नागरिक लंबे समय से भारतीय सेना में सेवा देते रहे हैं। प्रदर्शन कर रहे पूर्व सैनिकों का कहना है कि इस परंपरा ने कई पीढ़ियों को रोजगार और सम्मान दिया है। उनके मुताबिक भर्ती रुकने से बड़ी संख्या में नेपाली युवाओं के लिए सेना में जाने का रास्ता बंद हुआ है और इसका असर उन परिवारों पर भी पड़ा है जिनकी पीढ़ियां भारतीय सेना से जुड़ी रही हैं।

    भारतीय सेना में नेपाली गोरखाओं की भर्ती का मुद्दा अग्निपथ योजना लागू होने के बाद जटिल हो गया। भारत ने 2022 में अग्निपथ योजना शुरू की थी। इसके तहत अग्निवीरों की शुरुआती सेवा अवधि चार साल होती है और प्रदर्शन तथा सेना की जरूरत के आधार पर अधिकतम 25 प्रतिशत तक अग्निवीरों को आगे लंबी सेवा के लिए रखा जा सकता है। बाकी अग्निवीर सेवा पूरी होने के बाद बाहर आते हैं और उन्हें निर्धारित एकमुश्त राशि मिलती है। नेपाल सरकार ने इसी चार साल की सेवा व्यवस्था और उसके बाद युवाओं के भविष्य को लेकर सवाल उठाते हुए नेपाली युवाओं की भर्ती को आगे बढ़ाने की अनुमति नहीं दी।

    पूर्व चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान भी इस मुद्दे पर कह चुके हैं कि अब फैसला नेपाल सरकार को करना है। उनका कहना था कि नेपाली नागरिकों के लिए अलग और भारतीय नागरिकों के लिए अलग भर्ती व्यवस्था नहीं हो सकती। ऐसे में नेपाल को तय करना होगा कि वह अग्निपथ योजना के तहत अपने युवाओं को भारतीय सेना में भेजना चाहता है या नहीं।

    पोखरा में प्रदर्शन कर रहे पूर्व गोरखा सैनिकों ने साफ किया है कि वे इस मुद्दे पर पीछे हटने के मूड में नहीं हैं। उनका कहना है कि अगर भर्ती जल्द शुरू नहीं की गई तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। प्रदर्शनकारियों की यह मांग अब भारत नेपाल संबंधों और गोरखा भर्ती की पुरानी परंपरा के बीच एक अहम मुद्दे के तौर पर सामने आई है। वहीं भारतीय सेना प्रमुख के प्रस्तावित नेपाल दौरे से पहले इस प्रदर्शन ने पूरे मामले को और चर्चा में ला दिया है।

  • 22 अगस्त से बदलेगा ग्रहों का खेल! सिंह राशि में सूर्य-बुध की युति, 3 राशियों को करियर और धन में लाभ के संकेत

    22 अगस्त से बदलेगा ग्रहों का खेल! सिंह राशि में सूर्य-बुध की युति, 3 राशियों को करियर और धन में लाभ के संकेत


    नई दिल्ली। ज्योतिष शास्त्र में सूर्य और बुध की युति को बुधादित्य योग से जोड़ा जाता है। सूर्य को आत्मविश्वास नेतृत्व मान सम्मान और प्रशासनिक क्षमता का कारक माना जाता है जबकि बुध बुद्धि तर्क संवाद व्यापार और गणना से संबंधित ग्रह माने जाते हैं। ऐसे में जब दोनों ग्रह एक ही राशि में आते हैं तो ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार इसका असर व्यक्ति की निर्णय क्षमता करियर और आर्थिक मामलों पर दिखाई दे सकता है। अगस्त 2026 में बुध के सिंह राशि में प्रवेश के साथ सूर्य और बुध की युति बनने की बात कही जा रही है। उपलब्ध ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार बुध 22 अगस्त को सिंह राशि में प्रवेश करेगा।

    सिंह राशि सूर्य की अपनी राशि मानी जाती है। इसलिए सूर्य के सिंह में मौजूद रहने के दौरान बुध का यहां आना ज्योतिषीय दृष्टि से खास संयोग माना जा रहा है। हालांकि किसी व्यक्ति की कुंडली में इस योग का वास्तविक फल केवल राशि देखकर तय नहीं किया जा सकता। लग्न भाव ग्रहों की स्थिति दशा और अन्य ग्रहों के प्रभाव को भी देखा जाता है। इसलिए नीचे बताए गए परिणाम सामान्य ज्योतिषीय मान्यताओं पर आधारित हैं।

    मेष राशि के जातकों के लिए सिंह राशि पंचम भाव से संबंधित मानी जाती है। पंचम भाव को शिक्षा बुद्धि रचनात्मकता संतान और प्रतियोगिता से जोड़ा जाता है। ऐसे में बुधादित्य योग के दौरान विद्यार्थियों को पढ़ाई और प्रतियोगी परीक्षाओं में बेहतर एकाग्रता का अनुभव हो सकता है। नौकरी करने वाले लोगों के लिए नई जिम्मेदारियां या करियर में आगे बढ़ने के अवसर बन सकते हैं। व्यापार से जुड़े जातकों को नई योजनाओं पर काम करने और अपने संपर्कों का लाभ उठाने का मौका मिल सकता है। हालांकि निवेश के मामले में केवल ज्योतिषीय अनुमान के आधार पर जोखिम लेने से बचना चाहिए।

    सिंह राशि वालों के लिए यह युति सबसे खास मानी जा रही है क्योंकि सूर्य और बुध का संयोग उनकी ही राशि में बनने वाला है। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार इससे आत्मविश्वास संचार क्षमता और निर्णय लेने की क्षमता मजबूत हो सकती है। नौकरीपेशा लोगों को अपनी प्रतिभा दिखाने के अवसर मिल सकते हैं और कार्यक्षेत्र में वरिष्ठ अधिकारियों का सहयोग प्राप्त होने की संभावना बन सकती है। व्यापारियों के लिए नए संपर्क और कारोबारी बातचीत महत्वपूर्ण साबित हो सकती है। सामाजिक स्तर पर भी मान सम्मान बढ़ने के संकेत बताए जा रहे हैं।

    धनु राशि के जातकों के लिए सिंह राशि नवम भाव से संबंधित होती है। नवम भाव को भाग्य धर्म उच्च शिक्षा लंबी यात्राओं और गुरुजनों से जोड़ा जाता है। इसलिए इस अवधि को धनु राशि वालों के लिए नए अवसरों और रुके कामों में गति से जोड़कर देखा जा रहा है। उच्च शिक्षा की तैयारी कर रहे लोगों को फायदा मिल सकता है। नौकरी या कारोबार के सिलसिले में यात्रा के अवसर बन सकते हैं और नए लोगों से संपर्क भविष्य में उपयोगी साबित हो सकता है। पिता या वरिष्ठ लोगों से सहयोग मिलने की संभावना भी ज्योतिषीय मान्यताओं में बताई जाती है।

    बुधादित्य योग को लेकर धार्मिक और ज्योतिषीय परंपराओं में कुछ उपाय भी बताए जाते हैं। सूर्य को मजबूत करने के लिए सुबह तांबे के पात्र से सूर्यदेव को जल अर्पित कर सूर्य मंत्र का जाप करने की परंपरा है। बुधवार को भगवान गणेश की पूजा करना और अपनी क्षमता के अनुसार हरी वस्तुओं का दान करना भी कुछ ज्योतिषीय परंपराओं में शुभ माना जाता है। हालांकि किसी भी ग्रह दोष या व्यक्तिगत समस्या के लिए उपाय अपनाने से पहले अपनी कुंडली के अनुसार योग्य ज्योतिष विशेषज्ञ की सलाह लेना बेहतर होता है।

    कुल मिलाकर 22 अगस्त 2026 को सिंह राशि में सूर्य और बुध की युति को ज्योतिष की नजर से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। मेष सिंह और धनु राशि के जातकों के लिए इसे करियर शिक्षा व्यापार और भाग्य से जुड़े मामलों में सकारात्मक अवसरों का समय बताया जा रहा है। लेकिन इसे निश्चित भविष्यवाणी के बजाय ज्योतिषीय मान्यता के रूप में ही देखना चाहिए क्योंकि किसी भी व्यक्ति के जीवन में ग्रहों का प्रभाव उसकी पूरी जन्मकुंडली के आधार पर अलग अलग हो सकता है।

  • पंजोखरा साहिब विवाद ने पकड़ा तूल, NH-44 पर घंटों बवाल; लाठीचार्ज और आंसू गैस के बाद हालात काबू में

    पंजोखरा साहिब विवाद ने पकड़ा तूल, NH-44 पर घंटों बवाल; लाठीचार्ज और आंसू गैस के बाद हालात काबू में


    नई दिल्ली। हरियाणा के अंबाला में पंजोखरा साहिब विवाद को लेकर गुरुवार को हालात बेहद तनावपूर्ण हो गए। गुरसिमरन सिंह मंड के खिलाफ कार्रवाई की मांग और हिरासत में लिए गए सिख युवाओं की रिहाई को लेकर बड़ी संख्या में सिख संगत ने प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस की बैरिकेडिंग तोड़ते हुए नेशनल हाईवे पर पहुंचकर जाम लगा दिया। कई घंटे तक चले इस घटनाक्रम के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव हुआ और स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को लाठीचार्ज और आंसू गैस का सहारा लेना पड़ा।

    मामला पंजोखरा साहिब में गुरसिमरन सिंह मंड से जुड़े पुराने विवाद के बाद शुरू हुआ था। 7 अगस्त को मंड पर कथित हमले के मामले में पुलिस ने दो युवकों को गिरफ्तार किया था। इसके बाद सिख संगठनों की ओर से इन युवकों की गिरफ्तारी का विरोध शुरू हो गया। संगत की मांग थी कि युवकों के खिलाफ की गई कार्रवाई पर रोक लगाई जाए और मंड के खिलाफ भी मामला दर्ज किया जाए। इसी मांग को लेकर पंजोखरा साहिब में बैठक हुई जिसमें पंजाब से भी सिख संगठनों के लोगों के पहुंचने की बात सामने आई।

    गुरुवार को प्रदर्शनकारी गुरुद्वारा साहिब से बाहर निकले और नेशनल हाईवे की ओर बढ़ने लगे। पुलिस ने उन्हें रोकने के लिए कई जगह बैरिकेडिंग की थी। स्थिति बिगड़ने पर आंसू गैस के गोले भी छोड़े गए लेकिन प्रदर्शनकारी आगे बढ़ते रहे। आखिरकार संगत ने हाईवे पर पहुंचकर यातायात रोक दिया। इससे दोनों तरफ वाहनों की लंबी कतारें लग गईं और आम लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। रिपोर्टों के अनुसार हाईवे पर कई घंटे तक यातायात बाधित रहा।

    इस बीच प्रदर्शनकारियों के दबाव के बाद पुलिस ने गुरसिमरन सिंह मंड और उनके बेटे भवजोत सिंह के खिलाफ FIR दर्ज कर दी। हालांकि FIR दर्ज होने के बाद भी प्रदर्शन समाप्त नहीं हुआ। संगत ने प्रदर्शन के दौरान हिरासत में लिए गए सिख युवाओं की तत्काल रिहाई की मांग रख दी। पुलिस और सिख प्रतिनिधियों के बीच कई दौर की बातचीत हुई लेकिन दोनों पक्षों के बीच सहमति नहीं बन सकी। प्रदर्शनकारी युवाओं की रिहाई और मामले में कार्रवाई को लेकर अपनी मांग पर अड़े रहे।

    शाम होते होते पुलिस ने हाईवे खाली कराने की तैयारी शुरू कर दी। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों से रास्ता खोलने की अपील की लेकिन जब गतिरोध खत्म नहीं हुआ तो कार्रवाई की गई। पुलिस ने लाठीचार्ज किया और आंसू गैस के गोले छोड़कर प्रदर्शनकारियों को पीछे हटाने की कोशिश की। इसी दौरान दोनों पक्षों के बीच हिंसक झड़प हो गई। स्थिति इतनी बिगड़ गई कि पुलिसकर्मियों को भी गंभीर चोटें आईं।

    हिंसा के दौरान नारायणगढ़ के DSP वीरेंद्र शर्मा के अंगूठे पर गंभीर चोट लगी और उनका अंगूठा कट गया। शुरुआती रिपोर्टों के मुताबिक करीब छह से सात पुलिसकर्मी घायल हुए हैं। कुछ गंभीर रूप से घायल पुलिसकर्मियों को अस्पताल में भर्ती कराया गया। NDTV की रिपोर्ट में भी DSP समेत कई पुलिसकर्मियों के घायल होने की जानकारी दी गई है। प्रदर्शनकारियों के घायल होने की खबर भी सामने आई है।

    पुलिस का कहना है कि कानून व्यवस्था बनाए रखना उसकी प्राथमिक जिम्मेदारी है और सार्वजनिक मार्ग को लंबे समय तक बाधित नहीं रहने दिया जा सकता। अधिकारियों ने लोगों से शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने और कानून हाथ में नहीं लेने की अपील की है। दूसरी ओर सिख संगठनों की ओर से युवाओं की गिरफ्तारी और पूरे विवाद को लेकर नाराजगी बनी हुई है।

    कई घंटे तक चले हंगामे के बाद पुलिस ने हाईवे को खाली कराया और यातायात बहाल करने की कोशिश की। हालांकि पंजोखरा साहिब विवाद को लेकर इलाके में तनाव बना हुआ है। पुलिस ने स्थिति को देखते हुए अतिरिक्त बल तैनात किया है। अब पूरे घटनाक्रम में हिंसा के दौरान घायल हुए लोगों और प्रदर्शनकारियों की मांगों के साथ साथ पुलिस कार्रवाई को लेकर भी आगे की कानूनी प्रक्रिया पर नजर रहेगी।

  • हरियाली तीज कब है? 14 अगस्त की शाम से शुरू होगी तृतीया, 15 अगस्त को रखा जाएगा व्रत

    हरियाली तीज कब है? 14 अगस्त की शाम से शुरू होगी तृतीया, 15 अगस्त को रखा जाएगा व्रत

    नई दिल्ली। सनातन धर्म में हरियाली तीज का पर्व सुहागिन महिलाओं के लिए बेहद खास माना जाता है। सावन मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाए जाने वाले इस पर्व पर महिलाएं पति की लंबी आयु सुखी वैवाहिक जीवन और अखंड सौभाग्य की कामना से व्रत रखती हैं। इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करने की परंपरा है। सावन में चारों ओर दिखाई देने वाली हरियाली के कारण इस पर्व को हरियाली तीज कहा जाता है। इस दिन महिलाएं हरे रंग के कपड़े पहनती हैं हरी चूड़ियां धारण करती हैं मेहंदी लगाती हैं और सोलह श्रृंगार करके झूला झूलने के साथ तीज के लोकगीत गाती हैं।

    इस बार हरियाली तीज की तारीख को लेकर 14 और 15 अगस्त के बीच कंफ्यूजन बना हुआ है। पंचांग के अनुसार तृतीया तिथि 14 अगस्त से शुरू हो रही है लेकिन उदया तिथि के आधार पर हरियाली तीज का व्रत 15 अगस्त 2026 शनिवार को रखा जाएगा। दिल्ली के लिए द्रिक पंचांग भी 15 अगस्त को ही हरियाली तीज का पर्व बता रहा है। हालांकि अलग अलग शहरों के पंचांग में तिथि शुरू होने और समाप्त होने के समय में अंतर हो सकता है।

    पंचांग के अनुसार तृतीया तिथि 14 अगस्त को सुबह 9 बजकर 16 मिनट से शुरू होकर 15 अगस्त को सुबह 7 बजकर 58 मिनट तक रहेगी।因此 15 अगस्त को सूर्योदय के समय तृतीया तिथि होने के कारण इसी दिन व्रत और पर्व मनाया जाएगा। अपने शहर के अनुसार पूजा का सटीक समय जानने के लिए स्थानीय पंचांग देखना उचित रहेगा।

    हरियाली तीज के दिन महिलाएं सुबह जल्दी उठकर स्नान करती हैं और स्वच्छ वस्त्र पहनकर व्रत का संकल्प लेती हैं। इसके बाद पूजा स्थल की साफ सफाई करके भगवान शिव माता पार्वती और भगवान गणेश की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित की जाती है। कुछ परंपराओं में बालू या मिट्टी से शिव पार्वती और गणेश जी की प्रतिमा बनाने का भी विधान बताया गया है। पूजा में माता पार्वती को सुहाग की सामग्री अर्पित की जाती है जबकि भगवान शिव को बेलपत्र फल और अन्य पूजन सामग्री चढ़ाई जाती है। इसके बाद धूप दीप जलाकर आरती की जाती है और हरियाली तीज की व्रत कथा सुनी या पढ़ी जाती है।

    धार्मिक मान्यता के अनुसार हरियाली तीज का संबंध माता पार्वती की कठोर तपस्या से है। मान्यता है कि माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए लंबे समय तक तप किया था और उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें पत्नी के रूप में स्वीकार किया। इसी वजह से विवाहित महिलाएं इस दिन शिव और पार्वती की पूजा करके अपने दांपत्य जीवन में प्रेम सुख और स्थिरता की कामना करती हैं।

    इस दिन व्रत रखने वाली महिलाएं अपनी परंपरा के अनुसार निर्जला या फलाहार व्रत रखती हैं। हालांकि निर्जला व्रत हर व्यक्ति के लिए जरूरी नहीं है। स्वास्थ्य संबंधी परेशानी होने पर व्रत की कठोरता से बचना और अपनी सेहत को प्राथमिकता देना उचित माना जाता है। पूजा के साथ महिलाएं सास या घर की वरिष्ठ महिलाओं को सुहाग सामग्री और उपहार देकर उनका आशीर्वाद भी ले सकती हैं।

    हरियाली तीज पर हरे रंग को विशेष महत्व दिया जाता है। हरे वस्त्र और हरी चूड़ियां पहनना इस पर्व की पारंपरिक पहचान है। इसके अलावा पौधरोपण को भी इस दिन शुभ माना जाता है। सावन और हरियाली से जुड़े इस पर्व पर एक पौधा लगाकर प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी का संदेश भी दिया जा सकता है।

    इस तरह 14 अगस्त से तृतीया तिथि शुरू होने के बावजूद हरियाली तीज 15 अगस्त 2026 शनिवार को मनाई जाएगी। इसलिए 14 या 15 अगस्त को लेकर परेशान होने की जरूरत नहीं है। व्रत रखने वाली महिलाएं 15 अगस्त को अपनी पारिवारिक परंपरा और स्थानीय पंचांग के अनुसार भगवान शिव और माता पार्वती की विधि पूर्वक पूजा कर सकती हैं।

  • सालों तक आरोपों और जांच के बीच रहीं रिया चक्रवर्ती, Karan Johar के शो में बोलीं- अब नहीं चाहिए ट्रेटर का टैग

    सालों तक आरोपों और जांच के बीच रहीं रिया चक्रवर्ती, Karan Johar के शो में बोलीं- अब नहीं चाहिए ट्रेटर का टैग


    नई दिल्ली। अभिनेत्री रिया चक्रवर्ती एक बार फिर अपने बीते मुश्किल दौर को लेकर चर्चा में हैं। रियलिटी शो द ट्रेटर्स सीजन 2 में नजर आ रहीं रिया ने होस्ट करण जौहर के सामने अपनी भावनाएं खुलकर जाहिर कीं। शो में जब उनसे पूछा गया कि वह इनोसेंट बनना पसंद करेंगी या ट्रेटर तो रिया ने बिना किसी हिचकिचाहट के कहा कि वह इनोसेंट रहना चाहेंगी। उनके इस जवाब में साल 2020 के बाद उनकी जिंदगी में आए बदलाव और लंबे समय तक चले विवाद का दर्द साफ नजर आया।

    करण जौहर के सवाल का जवाब देते हुए रिया ने कहा कि इसी साल उन्हें क्लीन चिट मिली है और इसी साल लोगों को पता चला है कि वह बेगुनाह हैं। उन्होंने कहा कि वह काफी लंबे समय तक शक के घेरे में रही हैं और अब उन्हें यह स्थिति पसंद नहीं है। रिया के मुताबिक उन्होंने कई साल तक ऐसा दौर देखा है जब लोगों की नजर में उन्हें संदेह की नजर से देखा जाता रहा। द ट्रेटर्स के खेल से जुड़े एक सामान्य सवाल के दौरान रिया का यह जवाब उनकी निजी जिंदगी के बेहद संवेदनशील अध्याय की तरफ इशारा करता नजर आया।

    सुशांत सिंह राजपूत की मौत के बाद साल 2020 में रिया चक्रवर्ती देशभर में चर्चा के केंद्र में आ गई थीं। सुशांत की मौत के मामले की जांच के साथ ड्रग्स से जुड़े मामले में भी रिया और उनके भाई शोविक चक्रवर्ती से पूछताछ हुई थी। नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो ने ड्रग्स मामले में दोनों को गिरफ्तार किया था। रिया को जेल में भी समय बिताना पड़ा था। इस पूरे घटनाक्रम के बाद उनकी निजी और पेशेवर जिंदगी पर भी काफी असर पड़ा।

    समय के साथ सुशांत सिंह राजपूत की मौत के मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो यानी CBI तक पहुंची। 2025 में CBI ने मामले में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल करते हुए इसे आत्महत्या का मामला माना और किसी साजिश या आपराधिक भूमिका का सबूत नहीं मिलने की बात सामने आई। इस रिपोर्ट के बाद रिया और उनके परिवार को मामले में बड़ी राहत मिली। हालांकि ड्रग्स से जुड़े मामले की कानूनी स्थिति अलग थी और उसे सुशांत की मौत की जांच से अलग समझना जरूरी है।

    रिया इससे पहले भी कई मौकों पर उस दौर के अपने अनुभवों के बारे में बात कर चुकी हैं। उन्होंने बताया है कि सुशांत की मौत के बाद उन्हें मीडिया ट्रायल और सामाजिक दबाव का सामना करना पड़ा। जेल जाने और लंबे समय तक काम से दूर रहने का असर भी उनकी जिंदगी पर पड़ा। रिया ने अपने पुराने इंटरव्यू में मानसिक स्वास्थ्य पर पड़े प्रभाव को लेकर भी बात की थी।

    अब द ट्रेटर्स सीजन 2 में रिया एक बिल्कुल अलग माहौल में दिखाई दे रही हैं। यह रियलिटी शो रणनीति शक और भरोसे के खेल पर आधारित है। इसमें कंटेस्टेंट्स को इनोसेंट्स और ट्रेटर्स की भूमिका में बांटा जाता है। इनोसेंट्स को छिपे हुए ट्रेटर्स को पहचानकर उन्हें गेम से बाहर करना होता है जबकि ट्रेटर्स अपनी पहचान छिपाकर दूसरे खिलाड़ियों के खिलाफ रणनीति बनाते हैं।

    रिया का इनोसेंट बनने की इच्छा जताना इसलिए भी चर्चा में आ गया क्योंकि यह उनके वास्तविक जीवन के अनुभवों से जुड़ा हुआ महसूस हुआ। करण जौहर के सामने उन्होंने जिस तरह अपने अतीत का जिक्र किया उससे साफ हुआ कि सालों तक चले विवाद और शक का दौर उनकी यादों में आज भी गहरा असर छोड़ता है। हालांकि अब वह अपनी जिंदगी में आगे बढ़ने और नए काम के जरिए अपनी पहचान बनाने की कोशिश कर रही हैं। द ट्रेटर्स 2 में उनकी मौजूदगी इसी नए दौर की ओर इशारा करती है।

  • 3 फीट का कद, हौसला आसमान से ऊंचा! KBC 18 में छाए डॉ. गणेश बरैया की कहानी सुन भावुक हुए लोग

    3 फीट का कद, हौसला आसमान से ऊंचा! KBC 18 में छाए डॉ. गणेश बरैया की कहानी सुन भावुक हुए लोग


    नई दिल्ली। अमिताभ बच्चन के लोकप्रिय क्विज शो कौन बनेगा करोड़पति 18 में इस बार हॉट सीट पर पहुंचे डॉ. गणेश बरैया ने अपने खेल से ज्यादा अपनी जिंदगी की कहानी से लोगों का ध्यान खींचा। गुजरात के भावनगर जिले के गोरखी गांव से आने वाले गणेश का कद भले ही करीब 3 फीट है लेकिन उनके हौसले और संघर्ष की कहानी किसी बड़े प्रेरणादायक किरदार से कम नहीं है। KBC 18 के हालिया एपिसोड में उन्होंने अपने बचपन से लेकर डॉक्टर बनने तक के सफर के कई ऐसे किस्से साझा किए जिन्हें सुनकर दर्शक भावुक हो गए।

    गणेश बरैया जन्म से ड्वार्फिज्म की चुनौती से जूझते रहे हैं और उनके शरीर का 72 प्रतिशत हिस्सा लोकोमोटर डिसेबिलिटी से प्रभावित है। इसके बावजूद उन्होंने पढ़ाई में कभी अपनी शारीरिक स्थिति को बाधा नहीं बनने दिया। उन्होंने 12वीं कक्षा में 87 प्रतिशत अंक हासिल किए और साल 2018 में NEET परीक्षा भी पास की। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक उन्होंने दिव्यांग कोटे के तहत मेडिकल प्रवेश परीक्षा में सफलता हासिल की थी। हालांकि डॉक्टर बनने की उनकी राह इतनी आसान नहीं थी। मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया की ओर से उनकी शारीरिक अक्षमता को लेकर MBBS में प्रवेश पर आपत्ति जताई गई थी।

    इसके बाद गणेश के स्कूल प्रिंसिपल डॉ. दलपत कटारिया उनके साथ मजबूती से खड़े हुए। मामला अदालत तक पहुंचा और लंबी कानूनी लड़ाई के बाद सुप्रीम कोर्ट से गणेश के पक्ष में फैसला आया। इसके बाद 2019 में उन्हें भावनगर मेडिकल कॉलेज में दाखिला मिला और उन्होंने MBBS की पढ़ाई पूरी की। पढ़ाई के दौरान भी उन्हें कई मुश्किलों का सामना करना पड़ा लेकिन शिक्षकों और दोस्तों के सहयोग से उन्होंने अपनी मंजिल हासिल की।

    गणेश की जिंदगी का सबसे भावुक अध्याय उनके बचपन से जुड़ा है। उन्होंने KBC में बताया कि जब वह छोटे थे तब सर्कस से जुड़े कुछ लोग उनके घर पहुंचे थे। उनके पिता को गणेश को अपने साथ ले जाने के बदले 5 लाख रुपये देने का प्रस्ताव दिया गया था। लेकिन उनके पिता ने पैसों के बजाय बेटे की पढ़ाई और सम्मान को चुना। इस घटना की पुष्टि पहले की रिपोर्टों में भी हुई है। इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक गणेश करीब 10 साल के थे जब एक सर्कस मंडली ने उन्हें खरीदने के लिए 5 लाख रुपये की पेशकश की थी। उनके पिता ने यह प्रस्ताव ठुकरा दिया और इसके बाद गणेश की सुरक्षा को लेकर और भी सतर्क रहे।

    गणेश बताते हैं कि उनकी बहनें उन्हें गोद में उठाकर स्कूल ले जाती थीं और उनके पिता उन्हें कंधे पर बैठाकर पढ़ने भेजते थे। परिवार के इसी भरोसे ने उन्हें आगे बढ़ने की ताकत दी। आज वही गणेश भावनगर के अस्पताल में डॉक्टर के तौर पर मरीजों की सेवा कर रहे हैं। रिपोर्टों के अनुसार वह मेडिकल ऑफिसर के रूप में काम कर चुके हैं और अस्पताल में मरीजों के इलाज से जुड़े काम में सक्रिय रहे हैं।

    KBC 18 में गणेश ने फास्टेस्ट फिंगर फर्स्ट चैलेंज जीतकर हॉट सीट तक अपनी जगह बनाई। उन्होंने शुरुआती सवालों का सही जवाब देते हुए 3 लाख रुपये के सवाल तक का सफर तय किया लेकिन उस समय तक उनकी सभी लाइफलाइन खत्म हो चुकी थीं। सवाल का सही जवाब नहीं दे पाने के कारण उनकी जीती हुई रकम घटकर 25 हजार रुपये रह गई और उनकी KBC यात्रा वहीं समाप्त हो गई।

    गणेश बरैया की कहानी इस बात की मिसाल है कि किसी इंसान की पहचान उसके कद या शारीरिक स्थिति से नहीं बल्कि उसके हौसले और काम से होती है। जिस बच्चे को कभी सर्कस में भेजने के लिए 5 लाख रुपये की पेशकश की गई थी आज वही बच्चा डॉक्टर बनकर मरीजों की जिंदगी बचाने के काम में जुटा है। KBC की हॉट सीट पर गणेश की मौजूदगी ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि सपनों की कोई ऊंचाई नहीं होती और मजबूत इरादों के सामने मुश्किल से मुश्किल रास्ता भी आसान हो सकता है।

  • गणेश चतुर्थी पर होगा India-Afghanistan T20 का महामुकाबला? ACB ने BCCI से मांगी 14 सितंबर की तारीख

    गणेश चतुर्थी पर होगा India-Afghanistan T20 का महामुकाबला? ACB ने BCCI से मांगी 14 सितंबर की तारीख


    नई दिल्ली। भारत और अफगानिस्तान के बीच सितंबर में होने वाली तीन मैचों की T20 इंटरनेशनल सीरीज को लेकर बड़ा अपडेट सामने आया है। दोनों टीमों के बीच मुकाबलों का कार्यक्रम पहले ही तय हो चुका है लेकिन अब अफगानिस्तान क्रिकेट बोर्ड यानी ACB इसमें एक बदलाव चाहता है। ACB ने भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड यानी BCCI से संपर्क कर सीरीज के एक मुकाबले को 14 सितंबर को कराने का प्रस्ताव रखा है। खास बात यह है कि 14 सितंबर को गणेश चतुर्थी है। फिलहाल दोनों बोर्ड के बीच इस प्रस्ताव पर बातचीत चल रही है और अंतिम फैसला BCCI की मंजूरी के बाद ही होगा।

    मौजूदा कार्यक्रम के मुताबिक भारत और अफगानिस्तान के बीच तीनों T20 मुकाबले दिल्ली के अरुण जेटली स्टेडियम में खेले जाने हैं। पहला मैच 13 सितंबर को दूसरा 15 सितंबर और तीसरा मुकाबला 17 सितंबर को निर्धारित है। BCCI ने भी इस कार्यक्रम की पुष्टि की है। अब ACB चाहता है कि 13 या 15 सितंबर को होने वाले मुकाबलों में से किसी एक को 14 सितंबर को आयोजित किया जाए। यानी मैचों की संख्या में कोई बदलाव नहीं होगा बल्कि सिर्फ एक मुकाबले की तारीख बदली जाएगी।

    सवाल यह है कि आखिर ACB सोमवार यानी 14 सितंबर को ही मुकाबला क्यों कराना चाहता है। दरअसल 14 सितंबर को गणेश चतुर्थी का त्योहार है और इस मौके पर दिल्ली में आंशिक छुट्टी रहने की उम्मीद है। आमतौर पर सोमवार को क्रिकेट मैच कराने पर कामकाजी दिन होने के कारण स्टेडियम में दर्शकों की संख्या कम रहने की आशंका रहती है। लेकिन गणेश चतुर्थी के कारण छुट्टी और त्योहार का माहौल होने से ACB को उम्मीद है कि मैच के लिए बड़ी संख्या में दर्शक स्टेडियम पहुंच सकते हैं। इससे मुकाबले की दर्शक उपस्थिति और फैन एंगेजमेंट बेहतर होने की संभावना है।

    अगर BCCI इस प्रस्ताव पर सहमत हो जाता है तो भारत और अफगानिस्तान के बीच होने वाली सीरीज का एक मुकाबला गणेश चतुर्थी के दिन खेला जाएगा। हालांकि अभी इसे अंतिम कार्यक्रम नहीं माना जा सकता। जब तक BCCI की मंजूरी नहीं मिलती तब तक आधिकारिक शेड्यूल 13 15 और 17 सितंबर का ही रहेगा।

    इस सीरीज की एक और खास बात यह है कि मुकाबले भारत में होने के बावजूद इसे अफगानिस्तान की घरेलू सीरीज माना जा रहा है। सुरक्षा परिस्थितियों के कारण अफगानिस्तान लंबे समय से अपने कई अंतरराष्ट्रीय घरेलू मुकाबले विदेशों में आयोजित करता रहा है। इस बार दिल्ली को उसके होम मैचों के लिए चुना गया है। Reuters के मुताबिक भारत ने अफगानिस्तान को इस महत्वपूर्ण सीरीज की मेजबानी के लिए अपनी सुविधाएं उपलब्ध कराई हैं।

    भारत और अफगानिस्तान के लिए यह सीरीज एशियन गेम्स की तैयारियों के लिहाज से भी अहम होगी। दोनों टीमें आगामी बड़े मुकाबलों से पहले T20 फॉर्मेट में अपनी तैयारियों को परखना चाहेंगी। दिल्ली में लगातार तीन मुकाबले होने से खिलाड़ियों को परिस्थितियों के अनुरूप खुद को ढालने का मौका भी मिलेगा।

    इस बीच भारत के बांग्लादेश दौरे को लेकर भी स्थिति बदलती नजर आ रही है। पहले सितंबर में भारतीय टीम के बांग्लादेश दौरे का कार्यक्रम सामने आया था लेकिन अब अफगानिस्तान के खिलाफ T20 सीरीज की पुष्टि के बाद उस दौरे की संभावना कम बताई जा रही है। ऐसे में सितंबर में भारतीय टीम के लिए अफगानिस्तान के खिलाफ दिल्ली में होने वाली T20 सीरीज महत्वपूर्ण मुकाबलों में से एक हो सकती है।

    फिलहाल क्रिकेट फैंस की नजर BCCI के फैसले पर है। अगर भारतीय बोर्ड ACB के प्रस्ताव को मंजूरी दे देता है तो 14 सितंबर को गणेश चतुर्थी के दिन दिल्ली में भारत और अफगानिस्तान के बीच T20 मुकाबला देखने को मिल सकता है। यानी अभी मैच की तारीख बदली नहीं है लेकिन ACB की मांग ने सीरीज के कार्यक्रम में एक दिलचस्प ट्विस्ट जरूर ला दिया है।

  • US: ट्रंप के नए आदेश से बदल जाएगी बच्चों के टीकाकरण की व्यवस्था….

    US: ट्रंप के नए आदेश से बदल जाएगी बच्चों के टीकाकरण की व्यवस्था….


    वॉशिंगटन ।
    अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) के नए कार्यकारी आदेश से बच्चों के टीकाकरण (Child Vaccination) की मौजूदा व्यवस्था में बड़ा बदलाव आने की संभावना है। आदेश में खसरा, गलसुआ और रूबेला यानी एमएमआर जैसे संयुक्त टीकों को अलग-अलग टीकों में बांटने और जहां संभव हो, टीकों के बीच ज्यादा अंतर रखने की बात कही गई है। विशेषज्ञों के मुताबिक इसका असर सिर्फ टीका लगाने के तरीके पर नहीं पड़ेगा, बल्कि दवा कंपनियों, डॉक्टरों और माता-पिता पर भी पड़ेगा। सबसे बड़ी चुनौती यह है कि अमेरिका में इन बीमारियों के अलग-अलग टीके दशकों से व्यापक रूप से इस्तेमाल नहीं हुए हैं।

    ट्रंप के आदेश में आखिर क्या बदलने की बात कही गई?
    ट्रंप के आदेश के तहत संघीय अधिकारियों को 90 दिनों के भीतर एमएमआर टीके को अलग-अलग करने और दूसरे टीकों के बीच अंतर बढ़ाने की योजना तैयार करने को कहा गया है। अभी एमएमआर टीका तीनों बीमारियों से एक साथ बचाव करता है। अमेरिका में इस तीन-इन-वन व्यवस्था का इस्तेमाल 1970 के दशक से मानक रूप में हो रहा है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि संयुक्त टीकों से बच्चों के स्कूल जाने की उम्र तक संक्रामक बीमारियों से पूरी तरह सुरक्षित होने की संभावना बढ़ती है।

    क्या कंपनियों को दशकों पुराने टीके फिर बनाने पड़ेंगे?
    अमेरिका में फिलहाल खसरा, गलसुआ और रूबेला के अलग-अलग टीके उपलब्ध नहीं हैं। इन तीनों बीमारियों के लिए खाद्य एवं औषधि प्रशासन से मंजूर टीके संयुक्त रूप में हैं। अगर उन्हें अलग किया जाता है तो दवा कंपनियों को पुराने व्यक्तिगत टीकों का उत्पादन फिर शुरू करना होगा। इसके लिए नए अध्ययन, उत्पादन सुविधाएं और संघीय मंजूरी की जरूरत पड़ सकती है। विशेषज्ञों के मुताबिक नई वैक्सीन फैक्टरी तैयार करने और उसे मंजूरी मिलने में करीब पांच साल तक लग सकते हैं। इसके अलावा कंपनियों को नए उत्पादन संयंत्रों पर करोड़ों डॉलर खर्च करने पड़ सकते हैं।


    क्या अलग-अलग टीकों को मंजूरी लेना भी मुश्किल होगा?

    अलग-अलग टीकों को तैयार करने के बाद उन्हें अलग-अलग मंजूरी की प्रक्रिया से गुजरना पड़ सकता है। पूर्व एफडीए वैक्सीन प्रमुख जेसी गुडमैन के मुताबिक कंपनियों को यह दिखाने के लिए बड़े अध्ययन करने पड़ सकते हैं कि नए व्यक्तिगत टीके बच्चों में मौजूदा टीकों जैसी प्रतिरोधक क्षमता पैदा करते हैं। साथ ही उत्पादन की नई प्रक्रिया और संयंत्र की सुरक्षा भी साबित करनी होगी। अमेरिका में दशकों से व्यक्तिगत खसरा टीके का बड़े स्तर पर उत्पादन नहीं हुआ है। इसलिए यह प्रक्रिया सामान्य बदलाव की तुलना में काफी जटिल हो सकती है।

    माता-पिता को बच्चों को लेकर कितने ज्यादा चक्कर लगाने पड़ेंगे?
    एमएमआर टीका फिलहाल दो खुराक में दिया जाता है। पहली खुराक आम तौर पर एक साल की उम्र में और दूसरी चार साल की उम्र के बाद दी जाती है। अगर हर खुराक को खसरा, गलसुआ और रूबेला के तीन अलग-अलग टीकों में बांट दिया जाए तो छह अलग-अलग टीकाकरण यात्राएं करनी पड़ सकती हैं। दूसरे संक्रामक रोगों के टीकों के बीच भी अंतर बढ़ाया गया तो डॉक्टर के चक्कर और बढ़ सकते हैं। विशेषज्ञों को डर है कि ज्यादा समय और खर्च के कारण कुछ माता-पिता टीकाकरण के लिए अपॉइंटमेंट छोड़ सकते हैं।


    क्या इससे बच्चों का टीकाकरण कम हो सकता?

    स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि टीकाकरण की प्रक्रिया जितनी लंबी और महंगी होगी, उतने ही ज्यादा लोगों के बीच इसे पूरा कराना मुश्किल हो सकता है। विशेषज्ञ एना डर्बिन ने कहा कि संयुक्त टीकों को अलग करने का कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है और इससे व्यवस्था कम सुविधाजनक और महंगी हो सकती है। इसके विपरीत ट्रंप प्रशासन का कहना है कि इस बदलाव से माता-पिता को बच्चों के टीकाकरण के समय और अंतर को लेकर ज्यादा विकल्प मिलेंगे और इससे तीनों बीमारियों के खिलाफ टीकाकरण दर बढ़ सकती है।


    क्या ट्रंप का यह आदेश कंपनियों को टीके बनाने के लिए मजबूर कर सकता?

    आदेश के बावजूद दवा कंपनियों को नए व्यक्तिगत टीके बनाने और मंजूरी के लिए आवेदन करने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता। कंपनियों के लिए भी अलग टीके बनाना कारोबारी रूप से आकर्षक नहीं हो सकता, क्योंकि वे पहले से संयुक्त टीके बेच रही हैं। मर्क और जीएसके ने अपने मौजूदा टीकों की सुरक्षा और प्रभावशीलता पर भरोसा जताया है। मर्क ने कहा है कि अब तक ऐसा कोई प्रकाशित वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है, जो एमएमआर टीके को तीन अलग-अलग टीकों में बांटने से कोई फायदा दिखाता हो।


    क्या यह आदेश तुरंत लागू हो जाएगा?

    ट्रंप के आदेश के बावजूद बदलाव तुरंत लागू होना तय नहीं है। संघीय अधिकारियों को पहले योजनाएं तैयार करनी होंगी और फिर अलग-अलग टीकों के विकास, उत्पादन और मंजूरी की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। विशेषज्ञों ने भी इसकी कानूनी और व्यावहारिक प्रभावशीलता पर सवाल उठाए हैं। व्हाइट हाउस और एफडीए दवा कंपनियों को नए टीके विकसित करने के लिए सीधे मजबूर नहीं कर सकते। ऐसे में ट्रंप प्रशासन के आदेश और वास्तविक टीकाकरण व्यवस्था में बदलाव के बीच लंबी प्रक्रिया हो सकती है। यही वजह है कि आने वाले समय में इस योजना को लेकर वैज्ञानिक, कारोबारी और कानूनी स्तर पर बहस तेज होने की संभावना है।

  • शादमान इस्लाम का विकेट लेते ही स्टार्क का ऐतिहासिक कमाल, हेराथ को पीछे छोड़ा और कपिल देव के क्लब में पहुंचे

    शादमान इस्लाम का विकेट लेते ही स्टार्क का ऐतिहासिक कमाल, हेराथ को पीछे छोड़ा और कपिल देव के क्लब में पहुंचे


    नई दिल्ली। ऑस्ट्रेलिया के दिग्गज तेज गेंदबाज मिचेल स्टार्क ने टेस्ट क्रिकेट में अपने शानदार करियर का एक और सुनहरा अध्याय जोड़ दिया है। बांग्लादेश के खिलाफ डार्विन में खेले जा रहे पहले टेस्ट में शादमान इस्लाम का विकेट लेते ही स्टार्क ने इतिहास रच दिया। इस विकेट के साथ उनके टेस्ट क्रिकेट में 434 विकेट पूरे हो गए और वह टेस्ट इतिहास में सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले बाएं हाथ के गेंदबाज बन गए। स्टार्क ने इस मामले में श्रीलंका के महान स्पिनर रंगना हेराथ को पीछे छोड़ दिया है। मैच शुरू होने से पहले स्टार्क और हेराथ दोनों के नाम 433 टेस्ट विकेट थे।

    बांग्लादेश की पहली पारी के नौवें ओवर में स्टार्क ने शादमान इस्लाम को अपनी गेंद पर आउट किया। नाथन लायन ने उनका कैच पकड़ा और इसी विकेट के साथ स्टार्क के नाम एक बड़ा रिकॉर्ड दर्ज हो गया। 36 साल के स्टार्क अब टेस्ट क्रिकेट में सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले खब्बू गेंदबाज हैं। उनके नाम 434 विकेट हो चुके हैं जबकि रंगना हेराथ ने अपने टेस्ट करियर में 433 विकेट हासिल किए थे।

    स्टार्क की यह उपलब्धि इसलिए भी खास है क्योंकि 434 विकेट के आंकड़े तक पहुंचते ही उन्होंने भारत के महान कप्तान और दिग्गज ऑलराउंडर कपिल देव की भी बराबरी कर ली। कपिल देव ने 1978 से 1994 के बीच 131 टेस्ट मैच खेलकर 434 विकेट लिए थे। स्टार्क ने यह आंकड़ा अपने 106वें टेस्ट मैच में हासिल किया है। इस तरह टेस्ट क्रिकेट में सर्वाधिक विकेट लेने वाले गेंदबाजों की सूची में स्टार्क और कपिल देव अब संयुक्त रूप से 11वें स्थान पर हैं।

    बाएं हाथ के गेंदबाजों की बात करें तो स्टार्क इस सूची में सबसे ऊपर पहुंच चुके हैं। उनके बाद रंगना हेराथ 433 विकेट के साथ दूसरे स्थान पर हैं। पाकिस्तान के महान तेज गेंदबाज वसीम अकरम 414 विकेट के साथ तीसरे स्थान पर हैं। न्यूजीलैंड के डेनियल वेटोरी ने 362 विकेट लिए हैं जबकि श्रीलंका के चामिंडा वास के नाम 355 विकेट हैं। भारत के रवींद्र जडेजा भी 348 टेस्ट विकेट के साथ इस खास सूची में शामिल हैं।

    अब स्टार्क की नजर टेस्ट क्रिकेट के सर्वकालिक सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले गेंदबाजों की टॉप-10 सूची पर है। इस सूची में दक्षिण अफ्रीका के दिग्गज तेज गेंदबाज डेल स्टेन 439 विकेट के साथ 10वें स्थान पर हैं। स्टार्क के खाते में फिलहाल 434 विकेट हैं। यानी स्टेन को पीछे छोड़कर टॉप-10 में जगह बनाने के लिए स्टार्क को छह और विकेट हासिल करने होंगे। जिस तरह वह लगातार विकेट चटका रहे हैं उसे देखते हुए यह मुकाम भी उनके लिए ज्यादा दूर नजर नहीं आता।

    स्टार्क ने अक्टूबर 2010 में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में कदम रखा था। अपनी तेज रफ्तार गेंदबाजी स्विंग और खतरनाक यॉर्कर के दम पर उन्होंने दुनिया के सबसे प्रभावशाली तेज गेंदबाजों में अपनी जगह बनाई। खासकर बड़े टूर्नामेंट में उनका प्रदर्शन ऑस्ट्रेलिया की सफलता का अहम हिस्सा रहा है। वह 2015 और 2023 में वनडे विश्व कप जीतने वाली ऑस्ट्रेलियाई टीम का हिस्सा रहे। 2015 विश्व कप में उनके शानदार प्रदर्शन के लिए उन्हें प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट भी चुना गया था।

    स्टार्क उन चुनिंदा क्रिकेटरों में शामिल हैं जिन्होंने वनडे विश्व कप टी20 विश्व कप और वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप का खिताब जीता है। वनडे क्रिकेट में भी उनका रिकॉर्ड शानदार है। उन्होंने 130 वनडे इंटरनेशनल मुकाबलों में 23.58 की औसत से 247 विकेट हासिल किए हैं। सितंबर 2025 में उन्होंने टी20 इंटरनेशनल क्रिकेट से संन्यास ले लिया था लेकिन टेस्ट क्रिकेट में उनका शानदार सफर अब भी जारी है।

    शादमान इस्लाम का विकेट स्टार्क के लिए सिर्फ एक और विकेट नहीं था बल्कि यह उनके लंबे अंतरराष्ट्रीय करियर की एक ऐतिहासिक उपलब्धि बन गया। रंगना हेराथ को पीछे छोड़कर टेस्ट के सबसे सफल खब्बू गेंदबाज बनने के बाद अब उनकी निगाहें डेल स्टेन के 439 विकेट पर हैं। अगर स्टार्क छह और विकेट हासिल कर लेते हैं तो टेस्ट क्रिकेट के सर्वकालिक टॉप-10 गेंदबाजों में उनका नाम भी दर्ज हो जाएगा।