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  • चमोली टनल हादसा: पानी और मलबा गले तक भरा…., नीले ड्रमों के सहारे रेस्क्यू में जुटे जवान

    चमोली टनल हादसा: पानी और मलबा गले तक भरा…., नीले ड्रमों के सहारे रेस्क्यू में जुटे जवान


    चमोली।
    अलकनंदा नदी (Alaknanda River) पर निर्माणाधीन विष्णुगाड-पीपलकोटी जल विद्युत परियोजना (Vishnugad-Pipalkoti Hydroelectric Project) की टीआरटी (टेल रेस टनल) में जिस स्थान पर मजदूर काम कर रहे थे, वहां से करीब 150 मीटर दूर हुए भूस्खलन (Landslide) के बाद पानी के साथ पत्थर और मलबा टनल के अंदर घुस गया, जिसकी चपेट में कई मजदूर आ गए।

    बताया जा रहा है कि टनल में गले तक पानी और मलबा भर गया है। रात करीब दस बजे एनडीआरएफ की टीमें तीन वाहनों से टनल में घुसी। नीले रंग के ड्रम भी टनल में ले जाए गए हैं। पानी में इन ड्रमों के सहारे आगे बढ़कर जवान रेस्क्यू अभियान में जुटे हैं। देर रात तक घायलों का रेस्क्यू अभियान जारी था।

    वहीं, टनल में अधिक पानी भरने के कारण रेस्क्यू में दिक्कतें आ रही हैं। एसपी चमोली सुरजीत सिंह पंवार ने बताया कि श्रीनगर गढ़वाल से राफ्ट मंगाई गई है, उससे लापता छह लोगों का रेस्क्यू किया जाएगा।

    उधर, प्रोजेक्ट निदेशक शरद कुमार ने घटना पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए कहा कि यह एक अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण हादसा है। उन्होंने बताया कि हमारी पहली प्राथमिकता सभी फंसे हुए लोगों को सुरक्षित बाहर निकालना है। इसके लिए सभी संसाधनों को पूरी तरह से लगाया गया है। उन्होंने कहा कि प्रभावित परिवारों को हर संभव सहायता प्रदान की जाएगी और घटना की विस्तृत जांच कराई जाएगी।

    बताया कि प्रोजेक्ट की मैनेजमेंट टीम भी राहत एवं बचाव कार्य में पूरी तरह जुटी हुई है। प्रशासन के साथ मिलकर स्थिति को नियंत्रित करने के प्रयास किए जा रहे हैं। राहत कार्य तब तक जारी रहेगा, जब तक सभी लोगों को सुरक्षित बाहर नहीं निकाल लिया जाता।

    बताया कि घटना की जानकारी मिलते ही तुरंत राहत एवं बचाव कार्य शुरू कर दिया गया था। मौके पर रेस्क्यू ऑपरेशन लगातार जारी है और अन्य फंसे हुए लोगों को निकालने के प्रयास तेज कर दिए गए हैं।

  • E20 पेट्रोल पर नया विवाद: कार कंपनियों की ईमेल बातचीत में सामने आई चिंता तो SIAM ने क्यों वापस लिया पत्र?

    E20 पेट्रोल पर नया विवाद: कार कंपनियों की ईमेल बातचीत में सामने आई चिंता तो SIAM ने क्यों वापस लिया पत्र?


    नई दिल्ली। देशभर में E20 पेट्रोल को लेकर चल रही बहस के बीच एक नई रिपोर्ट ने ऑटो सेक्टर में हलचल बढ़ा दी है। पेट्रोल में 20 प्रतिशत इथेनॉल ब्लेंडिंग को लेकर पहले से ही वाहन मालिकों के बीच कई तरह की चिंताएं सामने आती रही हैं। अब Reuters की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि Tata Motors Maruti Suzuki और Mahindra जैसी बड़ी ऑटो कंपनियों के अधिकारी भी E20 फ्यूल की गुणवत्ता को लेकर आपस में चर्चा कर रहे थे। कंपनियों के बीच हुई ईमेल बातचीत में पेट्रोल में क्लोराइड और नमी की मात्रा को लेकर चिंता सामने आने की बात कही गई है।

    भारत में E20 फ्यूल को पेट्रोलियम आयात पर निर्भरता कम करने और प्रदूषण घटाने के उद्देश्य से बढ़ावा दिया गया है। सरकार की इथेनॉल ब्लेंडिंग नीति के तहत देशभर में E20 पेट्रोल का इस्तेमाल बढ़ाया गया है। लेकिन इसके साथ ही वाहन मालिकों की चिंता भी बढ़ी है कि लंबे समय तक ऐसे ईंधन के इस्तेमाल का गाड़ियों पर क्या असर पड़ेगा। इसी बीच ऑटो कंपनियों से जुड़े कुछ आंतरिक डेटा ने इस बहस को और गंभीर बना दिया है।

    रिपोर्ट के मुताबिक कई ऑटोमेकर्स ने करीब एक साल की अवधि में 21 राज्यों के 250 से ज्यादा पेट्रोल पंपों से ईंधन के सैंपल इकट्ठा कर उनकी जांच की थी। दावा है कि 18 राज्यों के कई सैंपल में क्लोराइड की मात्रा और नमी का स्तर ज्यादा पाया गया। कंपनियों से जुड़े अधिकारियों के बीच हुई बातचीत में इन तत्वों की वजह से वाहनों के कुछ हिस्सों में संभावित समस्याओं को लेकर चिंता जताई गई थी।

    हालांकि इस पूरे मामले में एक महत्वपूर्ण बात यह है कि ऑटो कंपनियां सार्वजनिक तौर पर E20 फ्यूल का विरोध नहीं कर रही हैं। बल्कि उद्योग संगठन SIAM ने भी बाद में सरकार को भेजे गए अपने पत्र को वापस ले लिया था। 28 जुलाई को भेजी गई शिकायत में E20 पेट्रोल में संभावित मिलावट और गुणवत्ता को लेकर चिंता जताई गई थी लेकिन बाद में SIAM ने कहा कि पत्र में इस्तेमाल किए गए कुछ आंकड़ों की और जांच तथा वैलिडेशन की जरूरत है।

    SIAM के मुताबिक यह डेटा आंतरिक चर्चा और वैलिडेशन के लिए जुटाया गया था। संगठन का कहना है कि टेस्टिंग का आधार और सैंपल साइज किसी अंतिम निष्कर्ष तक पहुंचने के लिए पर्याप्त नहीं था। इसी वजह से सरकार को भेजे गए पत्र को वापस लेने का फैसला किया गया। साथ ही SIAM इस विषय पर ज्यादा व्यापक और वैज्ञानिक अध्ययन कराने की योजना बना रहा है।

    इस बीच पेट्रोलियम मंत्रालय की तरफ से इस रिपोर्ट पर कोई विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि SIAM का पत्र मिलने से करीब दो सप्ताह पहले ही सरकारी तेल कंपनियां पेट्रोल पंपों पर ईंधन की गुणवत्ता और संभावित मिलावट की जांच शुरू कर चुकी थीं। उनके मुताबिक जांच में केवल चार मामले ही इस तरह की समस्या से जुड़े मिले।

    सरकारी तेल कंपनियों ने भी रैंडम और वैज्ञानिक परीक्षणों के आधार पर E20 पेट्रोल की गुणवत्ता को लेकर बड़ी चिंता की बात को खारिज किया है। उनका कहना है कि किए गए परीक्षणों में ईंधन में ऐसी कोई व्यापक समस्या सामने नहीं आई जिससे वाहन मालिकों को घबराने की जरूरत हो।

    वहीं Mahindra ने Reuters की रिपोर्ट में ईमेल के आधार पर निकाले गए निष्कर्षों को पूरी तरह गलत बताया है। कंपनी का कहना है कि उपलब्ध जानकारी के आधार पर निकाले गए परिणाम सही नहीं हैं। दूसरी तरफ Maruti Suzuki और Tata Motors की ओर से इस मामले में कोई विस्तृत जवाब नहीं दिया गया है।

    पूरे विवाद का सबसे अहम पहलू यही है कि एक तरफ सरकारी तेल कंपनियां E20 पेट्रोल की गुणवत्ता को लेकर आश्वस्त कर रही हैं और दूसरी तरफ ऑटो इंडस्ट्री के भीतर हुए परीक्षणों तथा बातचीत को लेकर रिपोर्ट में अलग तस्वीर सामने आई है। ऐसे में अभी यह निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगा कि E20 पेट्रोल सभी वाहनों के लिए नुकसानदायक है। फिलहाल सबसे जरूरी है कि ईंधन की गुणवत्ता और संभावित क्लोराइड तथा नमी की समस्या को लेकर व्यापक वैज्ञानिक जांच हो और उसके निष्कर्ष सार्वजनिक किए जाएं। इससे वाहन मालिकों के बीच बनी आशंकाओं को भी स्पष्ट जवाब मिल सकेगा।

  • आजादी की पूर्व संध्या पर क्या कर रहा था भारत? 14 अगस्त 1947 की रात लिए गए थे नए राष्ट्र के बड़े फैसले

    आजादी की पूर्व संध्या पर क्या कर रहा था भारत? 14 अगस्त 1947 की रात लिए गए थे नए राष्ट्र के बड़े फैसले


    नई दिल्ली। 14 अगस्त 1947 भारत के इतिहास का ऐसा दिन था जब देश ब्रिटिश शासन से आजादी मिलने से महज कुछ घंटे दूर था। हालांकि यह दिन केवल 15 अगस्त का इंतजार करने तक सीमित नहीं था बल्कि इसी दौरान स्वतंत्र भारत की सरकार का ढांचा तैयार हो चुका था। नेताओं के बीच मंत्रालयों की जिम्मेदारियां तय की जा रही थीं और संविधान सभा अपने उस ऐतिहासिक मध्यरात्रि सत्र की तैयारी में जुटी थी जिसने भारत के इतिहास की दिशा बदल दी। सत्ता हस्तांतरण के साथ ही नए भारत के सामने शासन चलाने से लेकर आर्थिक व्यवस्था संभालने और रियासतों को एक राजनीतिक व्यवस्था में जोड़ने तक कई बड़ी चुनौतियां मौजूद थीं।

    स्वतंत्र भारत की पहली कैबिनेट में देश के प्रमुख नेताओं को महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां दी गई थीं। जवाहरलाल नेहरू प्रधानमंत्री के साथ विदेश मामलों कॉमनवेल्थ संबंधों और वैज्ञानिक अनुसंधान की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। सरदार वल्लभभाई पटेल को गृह सूचना एवं प्रसारण तथा रियासतों से जुड़े विभाग मिले थे। यह जिम्मेदारी बेहद महत्वपूर्ण थी क्योंकि उस समय भारत के सामने सैकड़ों रियासतों को नई राजनीतिक व्यवस्था से जोड़ने की चुनौती थी। डॉ. राजेंद्र प्रसाद को खाद्य एवं कृषि और मौलाना अबुल कलाम आजाद को शिक्षा विभाग सौंपा गया था।

    डॉ. जॉन मथाई के पास रेलवे एवं परिवहन जबकि सरदार बलदेव सिंह के पास रक्षा विभाग था। जगजीवन राम को श्रम मंत्रालय की जिम्मेदारी मिली थी। सीएच भाभा को वाणिज्य और रफी अहमद किदवई को संचार विभाग सौंपा गया। राजकुमारी अमृत कौर स्वास्थ्य मंत्रालय संभालने वाली थीं जबकि डॉ. बीआर आंबेडकर को कानून विभाग की जिम्मेदारी मिली। आरके षणमुखम चेट्टी के पास वित्त मंत्रालय था जबकि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी को उद्योग एवं आपूर्ति और एनवी गाडगिल को कार्य खान एवं बिजली विभाग दिया गया था।

    यह कैबिनेट अचानक तैयार नहीं हुई थी। स्वतंत्र भारत की सरकार बनाने की प्रक्रिया पहले से चल रही थी। 4 अगस्त 1947 को जवाहरलाल नेहरू ने लॉर्ड माउंटबेटन को नई कैबिनेट के सदस्यों के नाम भेजे थे। विभागों का अंतिम बंटवारा सरकार की शुरुआती बैठकों में तय किया जाना था। यानी 14 अगस्त तक भारत केवल आजादी का जश्न मनाने की तैयारी नहीं कर रहा था बल्कि शासन की पूरी जिम्मेदारी अपने हाथों में लेने की तैयारी भी कर चुका था।

    इसके बाद आया वह ऐतिहासिक क्षण जिसका इंतजार पूरे देश को था। 14 अगस्त की मध्यरात्रि को संविधान सभा का विशेष सत्र हुआ। इसी दौरान जवाहरलाल नेहरू ने अपना प्रसिद्ध ट्रिस्ट विद डेस्टिनी भाषण दिया। नेहरू ने कहा कि जब दुनिया का बड़ा हिस्सा सो रहा होगा तब भारत जीवन और स्वतंत्रता के लिए जागेगा। उनके भाषण में आजादी की खुशी के साथ उस जिम्मेदारी का भी उल्लेख था जो नए राष्ट्र के सामने खड़ी थी।

    नेहरू के लिए आजादी केवल सत्ता हासिल करने का अवसर नहीं थी। उन्होंने भारत की सेवा को देश की करोड़ों जनता की सेवा से जोड़ा और गरीबी अज्ञानता बीमारी तथा असमानता से जूझ रहे लोगों के जीवन को बेहतर बनाने की जिम्मेदारी पर जोर दिया। उनका संदेश साफ था कि स्वतंत्रता के बाद असली काम शुरू होना था। देश को अपने सपनों को वास्तविकता में बदलने के लिए लगातार मेहनत करनी थी।

    इसी मध्यरात्रि सत्र में भारत और उसके लोगों की सेवा करने का संकल्प भी लिया गया। इसमें देश को दुनिया में उसका उचित स्थान दिलाने के साथ विश्व शांति और मानव कल्याण में योगदान देने की प्रतिबद्धता शामिल थी। आजादी की उस रात संविधान सभा में गीत गाने को लेकर भी चर्चा हुई थी। उस समय भारत का कोई आधिकारिक राष्ट्रगान नहीं था और इस कारण कार्यक्रम में गायन को लेकर भी विचार किया गया।

    आजादी के साथ राष्ट्रीय ध्वज भी नए भारत की पहचान का प्रमुख प्रतीक बन चुका था। संविधान सभा ने 22 जुलाई 1947 को राष्ट्रीय ध्वज से जुड़े महत्वपूर्ण निर्णय किए थे। तिरंगे में मौजूद चक्र को भी विशेष प्रतीकात्मक अर्थ दिया गया था। यह ध्वज भारत के अतीत की विरासत और भविष्य की आकांक्षाओं को जोड़ने वाला प्रतीक बनकर सामने आया।

    सत्ता हस्तांतरण के साथ आर्थिक मोर्चे पर भी तैयारियां चल रही थीं। भारत और ब्रिटेन के बीच वित्तीय मुद्दों पर बातचीत हो रही थी और स्टर्लिंग बैलेंस से जुड़े समझौते किए जा रहे थे। वहीं रियासतों का एकीकरण भी नए भारत की सबसे बड़ी चुनौतियों में शामिल था। यानी 14 अगस्त की रात जब देश आजादी की दहलीज पर खड़ा था तब एक तरफ उत्सव की तैयारी थी और दूसरी तरफ एक विशाल राष्ट्र को संभालने की जिम्मेदारी सामने थी।

    इस तरह 14 अगस्त 1947 की रात केवल आजादी से पहले की रात नहीं थी। यह उस भारत की नींव रखने वाली रात थी जिसे अपनी सरकार खुद चलानी थी अपनी समस्याओं का समाधान खुद तलाशना था और अपने भविष्य का निर्माण अपने फैसलों से करना था। आधी रात को देश ने स्वतंत्रता हासिल की लेकिन उसी क्षण नए भारत के निर्माण की जिम्मेदारी भी उसके नेताओं और करोड़ों नागरिकों के कंधों पर आ गई।

  • पत्नी के नाम G+3 और G+2 बिल्डिंग समेत करोड़ों की संपत्ति! इंदौर निगम अधिकारी के घर लोकायुक्त की बड़ी कार्रवाई

    पत्नी के नाम G+3 और G+2 बिल्डिंग समेत करोड़ों की संपत्ति! इंदौर निगम अधिकारी के घर लोकायुक्त की बड़ी कार्रवाई


    इंदौर  इंदौर नगर निगम के सहायक राजस्व अधिकारी जितेंद्र कुमार पांडेय के ठिकानों पर लोकायुक्त ने शुक्रवार सुबह बड़ी कार्रवाई की। आय से अधिक संपत्ति की शिकायत और प्रारंभिक जांच के आधार पर लोकायुक्त की करीब 20 सदस्यीय टीम ने सुबह लगभग 6 बजे उनके घर और उनकी पत्नी भावना पांडेय के नाम दर्ज हॉस्टल समेत दो ठिकानों पर एक साथ छापा मारा। कार्रवाई के दौरान अधिकारियों ने संपत्ति से जुड़े दस्तावेज और अन्य रिकॉर्ड खंगालना शुरू किया। लोकायुक्त की प्रारंभिक जांच में अधिकारी की वैध आय और सामने आई संपत्ति के बीच बड़ा अंतर होने की बात कही गई है।

    लोकायुक्त एसपी राजेश सहाय के मुताबिक जितेंद्र कुमार पांडेय नगर निगम में करीब 31 साल से नौकरी कर रहे हैं। उनके पूरे सेवाकाल में करीब 80 लाख रुपये वेतन के रूप में मिलने का अनुमान लगाया गया है। दूसरी तरफ प्रारंभिक जांच में करीब 2.53 करोड़ रुपये की संपत्ति और खर्च से जुड़े आंकड़े सामने आए हैं। अधिकारियों के अनुसार इन दोनों आंकड़ों के बीच करीब 1.73 करोड़ रुपये का अंतर है। प्रारंभिक गणना में इसे करीब 216.35 प्रतिशत अनुपातहीन संपत्ति बताया गया है। हालांकि लोकायुक्त ने साफ किया है कि अभी यह आंकड़ा अंतिम नहीं है। दस्तावेजों और संपत्तियों के विस्तृत सत्यापन के बाद ही आय से अधिक संपत्ति की वास्तविक स्थिति सामने आएगी।

    कार्रवाई के दौरान लोकायुक्त की टीम ने पांडेय की संपत्तियों से जुड़े दस्तावेजों की जांच शुरू की। टीम में डीएसपी सुनील तालान आनंद चौहान और निरीक्षक आशुतोष मिठास तथा सचिन पटेरिया समेत अन्य अधिकारी शामिल रहे। जांच का मुख्य फोकस अधिकारी की आय के स्रोत और उनके परिवार के नाम खरीदी गई संपत्तियों के बीच तालमेल पर है।

    प्रारंभिक जांच में पांडेय की पत्नी भावना पांडेय के नाम दो इमारतें सामने आने की बात कही गई है। पहली इमारत आनंद नगर एक्सटेंशन में बताई गई है। नवलखा-चितावद क्षेत्र में 40×50 फीट के प्लॉट पर इस भवन का निर्माण हुआ है। यह G+3 इमारत है और इसके निर्माण पर करीब 1.20 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान लगाया गया है। लोकायुक्त की टीम अब यह पता लगा रही है कि इस संपत्ति के निर्माण और खरीद के लिए रकम का स्रोत क्या था।

    दूसरी इमारत गजाधर नगर चितावद के गुलमोहर का बगीचा इलाके में भावना पांडेय के नाम बताई गई है। यह G+2 बिल्डिंग है और इसमें हॉस्टल संचालित होने की जानकारी सामने आई है। इसके निर्माण पर करीब 91.50 लाख रुपये खर्च होने का प्रारंभिक अनुमान लगाया गया है। दोनों संपत्तियों के दस्तावेजों की जांच के साथ उनके निर्माण की लागत और मौजूदा मूल्य का भी सत्यापन किया जा रहा है।

    लोकायुक्त की जांच में पांडेय के परिवार के नाम कई वाहन खरीदे जाने की जानकारी भी सामने आई है। पत्नी बेटे और बेटी के नाम चार पहिया और दोपहिया वाहन होने की बात कही गई है। इन वाहनों पर करीब 14 लाख रुपये खर्च होने का प्रारंभिक आकलन है। अब जांच एजेंसी यह देख रही है कि इन संपत्तियों और वाहनों की खरीद के लिए इस्तेमाल रकम का स्रोत क्या रहा।

    अधिकारियों का कहना है कि छापे के दौरान मिले दस्तावेजों और अन्य रिकॉर्ड की जांच पूरी होने के बाद ही अनुपातहीन संपत्ति का अंतिम आंकड़ा तय किया जाएगा। यानी फिलहाल सामने आए आंकड़ों को प्रारंभिक माना जा रहा है और जांच आगे बढ़ने के साथ संपत्ति का कुल मूल्य बढ़ या घट सकता है।

    इंदौर की इस कार्रवाई के बीच जबलपुर लोकायुक्त की एक अन्य कार्रवाई भी चर्चा में है। सिवनी में पदस्थ बाबू सुभाष शर्मा के जबलपुर और सिवनी स्थित पांच ठिकानों पर छापे में करोड़ों रुपये की जमीन प्लॉट फार्महाउस और मकानों से जुड़े दस्तावेज मिलने की जानकारी सामने आई थी। इससे मध्य प्रदेश में लोकायुक्त की आय से अधिक संपत्ति के मामलों में लगातार चल रही कार्रवाई एक बार फिर चर्चा में आ गई है।

  • कैनेडियन ओपन में झांग शुआई-सिनियाकोवा का जलवा! एरानी-मेलिचर को हराकर बिना सेट गंवाए जीता डबल्स खिताब

    कैनेडियन ओपन में झांग शुआई-सिनियाकोवा का जलवा! एरानी-मेलिचर को हराकर बिना सेट गंवाए जीता डबल्स खिताब


    नई दिल्ली। कैनेडियन ओपन 2026 में चीन की झांग शुआई और चेक रिपब्लिक की कैटरीना सिनियाकोवा की जोड़ी ने महिला डबल्स का खिताब अपने नाम कर लिया है। टॉप सीड इस जोड़ी ने टोरंटो में खेले गए फाइनल मुकाबले में तीसरी वरीयता प्राप्त सारा एरानी और निकोल मेलिचर-मार्टिनेज की जोड़ी को सीधे सेटों में 6-3 6-4 से हराया। इस जीत के साथ झांग और सिनियाकोवा ने पूरे टूर्नामेंट में एक भी सेट गंवाए बिना ट्रॉफी अपने नाम की और एक खास उपलब्धि भी हासिल की।

    झांग शुआई और कैटरीना सिनियाकोवा की यह जीत इसलिए भी खास रही क्योंकि उन्होंने पूरे टूर्नामेंट में लगातार मजबूत विरोधियों का सामना किया। दोनों खिलाड़ियों ने पहले ही राउंड से अपने खेल में शानदार तालमेल दिखाया और दबाव के बावजूद मुकाबलों पर पकड़ बनाए रखी। फाइनल में भी उन्होंने एरानी और मेलिचर-मार्टिनेज को ज्यादा मौके नहीं दिए। पहले सेट में 6-3 की जीत के बाद उन्होंने दूसरे सेट में 6-4 से मुकाबला खत्म करते हुए खिताब पर कब्जा कर लिया।

    इस जीत के साथ झांग और सिनियाकोवा 2017 में एकातेरिना मकारोवा और एलेना वेस्नीना के बाद कैनेडियन ओपन महिला डबल्स का खिताब बिना कोई सेट गंवाए जीतने वाली पहली जोड़ी बन गई हैं। यह उपलब्धि उनके पूरे टूर्नामेंट में दबदबे को दिखाती है। दोनों खिलाड़ियों ने शुरुआत से लेकर फाइनल तक लगातार उच्च स्तर का प्रदर्शन किया और किसी भी मुकाबले में अपनी लय टूटने नहीं दी।

    टूर्नामेंट के शुरुआती तीन राउंड में भी झांग और सिनियाकोवा को कड़ी चुनौती मिली। उनकी जीत के सिलसिले में हर राउंड में कम से कम एक ग्रैंड स्लैम चैंपियन के खिलाफ मुकाबला शामिल रहा। शुरुआती दौर में उन्होंने सोराना सिर्स्टिया और मिरा एंड्रीवा की जोड़ी को हराया। इसके बाद दूसरे राउंड में उनका सामना कोको गॉफ और कैटी मैकनेली से हुआ। झांग और सिनियाकोवा ने इस मुकाबले में शानदार प्रदर्शन करते हुए 6-0 6-4 से जीत दर्ज की। क्वार्टर फाइनल में उन्होंने स्टॉर्म हंटर और डेसिरेट क्रावजिक की जोड़ी को मात देकर सेमीफाइनल और फिर फाइनल का रास्ता तय किया।

    दोनों खिलाड़ियों के लिए यह खिताब व्यक्तिगत तौर पर भी बेहद महत्वपूर्ण रहा। डब्ल्यूटीए टूर की अनुभवी डबल्स खिलाड़ियों में शामिल झांग और सिनियाकोवा ने बतौर जोड़ी अपना तीसरा खिताब जीता। वहीं डब्ल्यूटीए 1000 स्तर पर यह उनकी पहली ट्रॉफी रही। झांग के लिए यह इस साल की चौथी डबल्स ट्रॉफी है और उनके करियर की कुल 19वीं ट्रॉफी बन गई है। दूसरी तरफ सिनियाकोवा ने इस सीजन की अपनी चौथी डब्ल्यूटीए 1000 ट्रॉफी हासिल की और चीनी खिलाड़ी झांग के साथ यह उनकी पहली डब्ल्यूटीए 1000 खिताबी जीत रही।

    खिताब जीतने के बाद झांग शुआई ने अपनी जोड़ीदार सिनियाकोवा की जमकर तारीफ की। उन्होंने कहा कि टूर्नामेंट में उन्हें कई मजबूत विरोधियों का सामना करना पड़ा और इनमें ग्रैंड स्लैम चैंपियन भी शामिल थे। इसके बावजूद दोनों ने लगातार ऊंचे स्तर का टेनिस खेला और हर मुकाबले में अपनी रणनीति को बेहतर तरीके से लागू किया।

    झांग ने अपनी सफलता का बड़ा श्रेय सिनियाकोवा को दिया। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टनर ने पूरे टूर्नामेंट में उनकी काफी मदद की और इसी वजह से दोनों इतना अच्छा प्रदर्शन कर सकीं। झांग के मुताबिक दोनों खिलाड़ी हर दिन एक-दूसरे के साथ बेहतर तालमेल बना रही हैं और इस प्रदर्शन से दोनों काफी खुश हैं।

    कैनेडियन ओपन की यह जीत झांग शुआई और कैटरीना सिनियाकोवा की जोड़ी के लिए बड़ी उपलब्धि है। बिना कोई सेट गंवाए खिताब जीतने के बाद अब इस जोड़ी की नजर सीजन के बाकी बड़े टूर्नामेंटों पर होगी। जिस तरह दोनों ने टोरंटो में मजबूत विरोधियों को मात दी है उससे उनके बीच तालमेल और आत्मविश्वास साफ नजर आता है।

  • स्वियाटेक ने लौटाया अपना जलवा! रायबाकिना को सीधे सेटों में हराकर बनीं कैनेडियन ओपन चैंपियन

    स्वियाटेक ने लौटाया अपना जलवा! रायबाकिना को सीधे सेटों में हराकर बनीं कैनेडियन ओपन चैंपियन


    नई दिल्ली। पोलैंड की स्टार टेनिस खिलाड़ी इगा स्वियाटेक ने आखिरकार लंबे इंतजार के बाद खिताबी सूखा खत्म कर दिया है। स्वियाटेक ने कैनेडियन ओपन 2026 महिला एकल का खिताब अपने नाम कर लिया। टोरंटो में खेले गए फाइनल मुकाबले में सातवीं वरीयता प्राप्त स्वियाटेक ने दुनिया की नंबर दो खिलाड़ी एलेना रायबाकिना को सीधे सेटों में 6-2, 6-3 से मात दी। इस जीत के साथ स्वियाटेक ने इस सीजन की अपनी पहली ट्रॉफी हासिल की। उनके लिए यह जीत इसलिए भी खास है क्योंकि पिछले कुछ महीनों से उन्हें खिताब नहीं जीत पाने के कारण आलोचनाओं का सामना करना पड़ रहा था।

    फाइनल में स्वियाटेक ने शुरुआत से ही अपने खेल पर नियंत्रण बनाए रखा। पहले सेट में उन्होंने रायबाकिना पर दबाव बनाया और अपनी आक्रामकता के दम पर लगातार अंक जुटाए। दूसरी ओर रायबाकिना की गलतियों ने उनकी मुश्किलें और बढ़ा दीं। कजाकिस्तान की खिलाड़ी ने लगातार दो डबल फॉल्ट किए और इसके कारण महत्वपूर्ण ब्रेक पॉइंट गंवा दिया। स्वियाटेक ने मौके का फायदा उठाते हुए अपनी बढ़त मजबूत की और पहला सेट 6-2 से अपने नाम कर लिया।

    दूसरे सेट में भी मुकाबले की तस्वीर ज्यादा नहीं बदली। रायबाकिना को अपनी गलतियों का खामियाजा भुगतना पड़ा। उनके दो बैकहैंड शॉट चूकने से स्वियाटेक को एक और ब्रेक हासिल करने का मौका मिला और पोलिश खिलाड़ी ने इसे हाथ से जाने नहीं दिया। रायबाकिना ने वापसी की कोशिश जरूर की और एक चैंपियनशिप पॉइंट बचाने में भी सफल रहीं लेकिन स्वियाटेक ने अगले मौके पर मैच खत्म कर दिया। उन्होंने दूसरा सेट 6-3 से जीतकर खिताब पर कब्जा जमा लिया।

    स्वियाटेक के लिए यह जीत केवल एक ट्रॉफी नहीं बल्कि आत्मविश्वास लौटाने वाली उपलब्धि भी है। पिछले सितंबर के बाद यह उनका पहला खिताब है। लगातार खिताब से दूर रहने के कारण उनके प्रदर्शन पर सवाल उठ रहे थे लेकिन कैनेडियन ओपन में उन्होंने पूरे टूर्नामेंट के दौरान अपने खेल में निरंतरता दिखाई और फाइनल में भी दबाव के बीच बेहतरीन प्रदर्शन किया। अब उनकी नजर यूएस ओपन पर होगी और कैनेडियन ओपन की यह जीत उनके लिए ग्रैंड स्लैम से पहले मनोबल बढ़ाने वाली साबित हो सकती है।

    खिताब जीतने के बाद स्वियाटेक ने अपनी भावनाएं खुलकर जाहिर कीं। उन्होंने माना कि पिछले कुछ महीने उनके लिए आसान नहीं रहे हैं। ऑनलाइन और सोशल मीडिया पर लगातार होने वाली आलोचनाओं और लोगों की राय से निपटना उनके लिए चुनौतीपूर्ण रहा। इसके बावजूद उन्होंने अपने खेल में बदलाव करने और खुद को बेहतर बनाने पर ध्यान केंद्रित किया। स्वियाटेक ने कहा कि उनके आसपास मौजूद लोगों का समर्थन उन्हें हर दिन आगे बढ़ने और अपना सर्वश्रेष्ठ देने के लिए प्रेरित करता रहा।

    स्वियाटेक ने अपनी खिताबी जीत को उन लोगों को समर्पित किया जिन्हें गलत तरीके से जज किया जाता है या जिन्हें खेल और जिंदगी के दूसरे क्षेत्रों में नफरत का सामना करना पड़ता है। उन्होंने संदेश दिया कि नकारात्मक विचारों को खुद पर हावी होने देना सही नहीं है। इसके बजाय आगे बढ़ते रहना अपनी कोशिशों पर ध्यान देना और खुद पर भरोसा बनाए रखना जरूरी है।

    कैनेडियन ओपन की यह जीत स्वियाटेक के लिए एक नए दौर की शुरुआत भी मानी जा सकती है। लंबे अंतराल के बाद मिली ट्रॉफी ने उनके आत्मविश्वास को मजबूत किया है। अब सभी की नजरें इस बात पर होंगी कि वह इस लय को यूएस ओपन तक कैसे कायम रखती हैं और क्या इस जीत के बाद ग्रैंड स्लैम में भी अपना दबदबा दोबारा कायम कर पाती हैं।

  • पहले वनडे में ही इतिहास रच गए लाइल रॉबर्टसन! 6 विकेट लेकर स्कॉटलैंड को दिलाई 170 रन की बड़ी जीत

    पहले वनडे में ही इतिहास रच गए लाइल रॉबर्टसन! 6 विकेट लेकर स्कॉटलैंड को दिलाई 170 रन की बड़ी जीत


    नई दिल्ली। स्कॉटलैंड के 23 वर्षीय ऑफ स्पिनर लाइल रॉबर्टसन ने वनडे क्रिकेट में अपने डेब्यू को यादगार बना दिया। आईसीसी पुरुष क्रिकेट विश्व कप लीग 2 के तहत स्कॉटलैंड और कनाडा के बीच डंडी में खेले गए मुकाबले में रॉबर्टसन ने गेंद से ऐसा कमाल किया कि उनका नाम वनडे डेब्यू पर सबसे शानदार गेंदबाजी करने वाले खिलाड़ियों की सूची में शामिल हो गया। उन्होंने अपने पहले ही वनडे मुकाबले में 10 ओवर की गेंदबाजी करते हुए 52 रन देकर 6 विकेट झटके। उनकी इस शानदार गेंदबाजी ने स्कॉटलैंड को कनाडा के खिलाफ 170 रन की बड़ी जीत दिलाने में अहम भूमिका निभाई।

    लाइल रॉबर्टसन के लिए यह मुकाबला इसलिए भी खास रहा क्योंकि वनडे करियर की पहली ही पारी में उन्होंने विपक्षी बल्लेबाजी क्रम को पूरी तरह परेशान कर दिया। ऑफ स्पिनर ने लगातार विकेट निकालकर कनाडा की रन चेज को पटरी से उतार दिया। 10 ओवर में 52 रन देकर 6 विकेट का उनका आंकड़ा वनडे क्रिकेट में डेब्यू करते हुए किसी गेंदबाज का चौथा सर्वश्रेष्ठ स्पेल रहा। इस प्रदर्शन के साथ रॉबर्टसन ने अपने अंतरराष्ट्रीय करियर की शुरुआत बेहद प्रभावशाली अंदाज में की है।

    वनडे डेब्यू पर सर्वश्रेष्ठ गेंदबाजी का रिकॉर्ड भी स्कॉटलैंड के ही गेंदबाज चार्ली कैसल के नाम दर्ज है। कैसल ने 2024 में ओमान के खिलाफ अपने डेब्यू मैच में महज 21 रन देकर 7 विकेट हासिल किए थे। उनका यह प्रदर्शन वनडे क्रिकेट में डेब्यू करने वाले किसी गेंदबाज का सबसे बेहतरीन स्पेल है। दूसरे नंबर पर दक्षिण अफ्रीका के तेज गेंदबाज कगिसो रबाडा का नाम आता है। रबाडा ने 2015 में बांग्लादेश के खिलाफ वनडे डेब्यू करते हुए 16 रन देकर 6 विकेट झटके थे।

    इस सूची में तीसरे स्थान पर वेस्टइंडीज के फिदेल एडवर्ड्स हैं। उन्होंने 2003 में जिम्बाब्वे के खिलाफ डेब्यू मुकाबले में 22 रन देकर 6 विकेट हासिल किए थे। अब लाइल रॉबर्टसन ने 52 रन देकर 6 विकेट के प्रदर्शन के साथ इस खास सूची में चौथा स्थान हासिल किया है। नामीबिया के जैन फ्रीलिंक पांचवें स्थान पर हैं जिन्होंने 2019 में ओमान के खिलाफ डेब्यू करते हुए 13 रन देकर 5 विकेट लिए थे।

    मुकाबले की बात करें तो स्कॉटलैंड ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने का फैसला किया। टीम ने शुरुआत से ही आक्रामक बल्लेबाजी की और निर्धारित 50 ओवर में 7 विकेट खोकर 347 रन का विशाल स्कोर खड़ा किया। कप्तान रिची बेरिंगटन ने शानदार शतकीय पारी खेलते हुए 120 रन बनाए। उनके अलावा मैथ्यू क्रॉस ने 51 रन और ब्रैंडन मैकमुलेन ने 64 रन की महत्वपूर्ण पारी खेली। इन पारियों की बदौलत स्कॉटलैंड ने कनाडा के सामने जीत के लिए 348 रन का बड़ा लक्ष्य रखा।

    लक्ष्य का पीछा करने उतरी कनाडाई टीम स्कॉटलैंड की गेंदबाजी के सामने टिक नहीं सकी। कनाडा की पूरी टीम 35 ओवर में 177 रन बनाकर ऑलआउट हो गई। परगट सिंह ने टीम की ओर से सबसे ज्यादा 42 रन बनाए लेकिन दूसरे छोर से उन्हें पर्याप्त सहयोग नहीं मिल सका। स्कॉटलैंड के गेंदबाजों ने नियमित अंतराल पर विकेट निकालते हुए कनाडा की पारी को समेट दिया।

    इस तरह स्कॉटलैंड ने यह मुकाबला 170 रन के बड़े अंतर से अपने नाम किया। हालांकि जीत में कई खिलाड़ियों का योगदान रहा लेकिन लाइल रॉबर्टसन का डेब्यू स्पेल सबसे ज्यादा चर्चा में रहा। महज 23 साल की उम्र में वनडे क्रिकेट की शुरुआत करते हुए इतिहास के शीर्ष डेब्यू स्पेल में जगह बनाना उनके करियर के लिए बड़ी उपलब्धि है। अब क्रिकेट प्रशंसकों की नजर इस युवा ऑफ स्पिनर के आने वाले मुकाबलों पर रहेगी कि क्या वह अपने डेब्यू के प्रदर्शन को आगे भी बरकरार रख पाते हैं।

  • MP में सियासत से सिस्टम तक सवाल ही सवाल! मंत्री ने राहुल गांधी को दिया रांची का टिकट ऑफर, उफनती नर्मदा में विधायक का स्टंट

    MP में सियासत से सिस्टम तक सवाल ही सवाल! मंत्री ने राहुल गांधी को दिया रांची का टिकट ऑफर, उफनती नर्मदा में विधायक का स्टंट


    भोपाल। मध्य प्रदेश की राजनीति और प्रशासन से जुड़ी घटनाएं इन दिनों कई सवाल खड़े कर रही हैं। कहीं देशभक्ति के नाम पर निकाली गई तिरंगा यात्रा में नेता और अधिकारी पैदल चलते नजर आए तो उनके पीछे खाली सरकारी और निजी वाहनों का काफिला चलता रहा। कहीं उफनती नर्मदा की लहरों के बीच भाजपा विधायक और अधिकारी बिना लाइफ जैकेट नाव में सवार दिखाई दिए। वहीं राहुल गांधी के मध्य प्रदेश दौरे से पहले मंत्री विश्वास सारंग ने उन्हें झारखंड के रांची जाने की सलाह देते हुए टिकट तक कराने का ऑफर दे दिया। इन घटनाओं ने राजनीतिक बयानबाजी से लेकर प्रशासनिक व्यवस्था और सुरक्षा इंतजामों तक कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

    रतलाम में तिरंगा यात्रा के दौरान महापौर कलेक्टर और अन्य नेता अधिकारी करीब डेढ़ किलोमीटर तक हाथों में तिरंगा लेकर पैदल चले। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से पेट्रोल और डीजल बचाने की अपील के बीच इस यात्रा की एक तस्वीर चर्चा का विषय बन गई। वजह थी पैदल चल रहे नेताओं और अधिकारियों के पीछे चलता खाली वाहनों का काफिला। इन गाड़ियों में ड्राइवरों के अलावा कोई सवार नहीं था। ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है कि जब अधिकारी और जनप्रतिनिधि खुद पैदल यात्रा कर रहे थे तो उनके खाली वाहनों को साथ चलाने की जरूरत क्यों पड़ी। लोगों का सवाल है कि क्या इस तरह ईंधन की खपत को कम किया जा सकता था।

    महेश्वर में तिरंगा यात्रा के दौरान सुरक्षा से जुड़ा मामला और ज्यादा गंभीर नजर आया। बारिश के मौसम में नर्मदा नदी उफान पर है और नदी की धार तेज होने के बावजूद भाजपा विधायक राजकुमार मेव टीआई समेत अन्य नेता और अधिकारी नाव में सवार हो गए। तस्वीरों के मुताबिक नाव पर सवार लोगों ने लाइफ जैकेट नहीं पहनी थी। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जब आम लोगों को नदी और जलाशयों में सुरक्षा नियमों का पालन करने की सलाह दी जाती है तो जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों के लिए इन नियमों का पालन कितना जरूरी है। देशभक्ति का उत्साह अपनी जगह है लेकिन उफनती नदी में सुरक्षा से समझौता किसी बड़े हादसे का कारण बन सकता है।

    इधर कांग्रेस नेता राहुल गांधी के सितंबर में उज्जैन आने की संभावित चर्चा के बीच मध्य प्रदेश के मंत्री विश्वास सारंग ने उन पर राजनीतिक तंज कसा है। सारंग ने राहुल गांधी को मध्य प्रदेश आने से पहले रांची जाने की सलाह दी। उनका कहना है कि राहुल गांधी दिल्ली में जेन-जी के विरोध प्रदर्शन में शामिल हुए लेकिन झारखंड की राजधानी रांची में प्रदर्शन कर रहे छात्र-छात्राओं के खिलाफ कार्रवाई के दौरान वहां नहीं पहुंचे। इसी मुद्दे को लेकर मंत्री ने राहुल गांधी से पहले रांची जाने को कहा और यहां तक कहा कि वह उनकी दिल्ली से रांची की टिकट करा देंगे। हालांकि राहुल गांधी के मध्य प्रदेश दौरे की तारीख अभी तय नहीं हुई है। ऐसे में टिकट वाला बयान फिलहाल सियासी तंज के तौर पर ही देखा जा रहा है।

    अब बात प्रशासनिक व्यवस्था की। स्वतंत्रता दिवस से ठीक पहले मध्य प्रदेश के लाखों शिक्षक ई-अटेंडेंस की तकनीकी परेशानी से जूझते रहे। दिनभर स्कूल में ड्यूटी करने के बाद शिक्षकों को आउट-पंच करना था लेकिन ई-अटेंडेंस पोर्टल में तकनीकी समस्या के कारण पंच नहीं हो पा रहा था। शिक्षकों की चिंता इसलिए बढ़ गई क्योंकि अटेंडेंस दर्ज नहीं होने पर वेतन कटने का डर था। नियम के मुताबिक शिक्षकों को स्कूल के 200 मीटर के दायरे में रहकर अटेंडेंस लगानी होती है। लिहाजा कई शिक्षक घंटों तक स्कूल में बैठकर पोर्टल ठीक होने का इंतजार करते रहे।

    देर शाम जब पोर्टल की समस्या दूर हुई तो विभाग की ओर से शिक्षकों को संदेश भेजकर राहत दी गई कि वे जहां हैं वहीं से अटेंडेंस लगा सकते हैं। हालांकि शिक्षकों के लिए यह समस्या नई नहीं है। प्रदेश के कई हिस्सों में नेटवर्क और तकनीकी दिक्कतों के कारण ई-अटेंडेंस व्यवस्था को लेकर लगातार परेशानी सामने आती रही है। ऐसे में सवाल सिर्फ पोर्टल के कुछ घंटों तक ठप रहने का नहीं बल्कि ऐसी व्यवस्था का है जिसमें तकनीकी खामी का खामियाजा कर्मचारियों को भुगतने का डर बना रहता है।

    कुल मिलाकर तिरंगा यात्रा से लेकर नर्मदा की लहरों और ई-अटेंडेंस की तकनीकी दिक्कत तक मध्य प्रदेश की इन घटनाओं ने अलग-अलग मुद्दों पर बहस छेड़ दी है। कहीं ईंधन बचाने की जरूरत पर सवाल है तो कहीं सुरक्षा नियमों के पालन पर। वहीं राजनीतिक बयानबाजी ने राहुल गांधी के संभावित मध्य प्रदेश दौरे को भी सियासी रंग दे दिया है।

  • मध्य प्रदेश में स्ट्रॉन्ग सिस्टम एक्टिव! 12 जिलों में भारी बारिश का अलर्ट, भोपाल-इंदौर समेत कई शहरों में भी बरसेंगे बादल

    मध्य प्रदेश में स्ट्रॉन्ग सिस्टम एक्टिव! 12 जिलों में भारी बारिश का अलर्ट, भोपाल-इंदौर समेत कई शहरों में भी बरसेंगे बादल


    भोपाल मध्य प्रदेश में मानसून एक बार फिर सक्रिय हो गया है। प्रदेश के पूर्वी हिस्से में बारिश का स्ट्रॉन्ग सिस्टम बनने से शुक्रवार को जबलपुर रीवा शहडोल और सागर संभाग में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। मौसम विभाग के मुताबिक अगले 24 घंटे में प्रदेश के 12 जिलों में 4 इंच या उससे ज्यादा बारिश होने की संभावना है। वहीं भोपाल इंदौर समेत कई अन्य जिलों में कहीं तेज तो कहीं हल्की बारिश हो सकती है। लगातार कुछ दिनों तक बारिश से दूरी बनी रहने के बाद गुरुवार को प्रदेश के कई हिस्सों में पानी गिरा जिससे उमस से परेशान लोगों को राहत मिली।

    मौसम विभाग के अनुसार सागर नर्मदापुरम नरसिंहपुर बालाघाट मंडला डिंडौरी अनूपपुर शहडोल कटनी मऊगंज सीधी और सिंगरौली में अगले 24 घंटे के दौरान भारी बारिश हो सकती है। इन जिलों में कुछ स्थानों पर 4 इंच से अधिक पानी गिरने का अनुमान है। इसके अलावा भोपाल रायसेन सीहोर राजगढ़ विदिशा इंदौर धार अलीराजपुर बड़वानी खंडवा खरगोन उज्जैन देवास रतलाम ग्वालियर रीवा सतना छिंदवाड़ा सिवनी पन्ना दमोह छतरपुर टीकमगढ़ समेत कई जिलों में भी बारिश का दौर जारी रहने की संभावना है।

    मौसम विशेषज्ञ शैलेंद्र कुमार नायक के अनुसार बंगाल की खाड़ी में 12 अगस्त की सुबह निम्न दबाव का क्षेत्र सक्रिय हुआ था जो 13 अगस्त की सुबह डिप्रेशन में बदल गया। यह सिस्टम उत्तर पश्चिम दिशा में पश्चिम बंगाल और झारखंड की ओर बढ़ रहा है। इसके प्रभाव से मानसून ट्रफ के सक्रिय रहने की संभावना है। यही वजह है कि मध्य प्रदेश में आने वाले दिनों में बारिश का दौर जारी रह सकता है। पूर्वी मध्य प्रदेश में भारी से बहुत भारी बारिश की स्थिति भी बन सकती है।

    गुरुवार को करीब सात दिन बाद प्रदेश के कई इलाकों में बारिश हुई। इससे लंबे समय से उमस और गर्मी से परेशान लोगों को राहत मिली। हालांकि बारिश के आंकड़ों पर नजर डालें तो प्रदेश अभी भी सामान्य से पीछे चल रहा है। मौसम केंद्र के मुताबिक मध्य प्रदेश में अब तक करीब 524.8 मिलीमीटर यानी 20.7 इंच बारिश दर्ज हुई है। सामान्य तौर पर इस अवधि तक करीब 597 मिलीमीटर यानी 23.5 इंच बारिश होनी चाहिए थी। इस लिहाज से प्रदेश में बारिश करीब 12 प्रतिशत कम है।

    पूर्वी मध्य प्रदेश में बारिश की कमी ज्यादा है। जबलपुर रीवा सागर और शहडोल संभाग में सामान्य से करीब 19 प्रतिशत तक कम बारिश दर्ज की गई है। बालाघाट छतरपुर छिंदवाड़ा दमोह डिंडौरी जबलपुर कटनी मैहर मंडला नरसिंहपुर पन्ना रीवा सागर सतना सिवनी शहडोल सीधी सिंगरौली टीकमगढ़ और उमरिया समेत कई जिलों में सामान्य से कम पानी गिरा है। पश्चिमी हिस्से में भी कई जिले बारिश की कमी से जूझ रहे हैं। हालांकि भोपाल गुना सीहोर राजगढ़ ग्वालियर अनूपपुर भिंड बुरहानपुर देवास बड़वानी खंडवा और खरगोन में औसत से ज्यादा बारिश दर्ज की गई है।

    इस मानसून सीजन में जून के दौरान प्रदेश में बारिश करीब 14 प्रतिशत कम रही थी। जुलाई की शुरुआत में अच्छी बारिश से स्थिति कुछ सुधरी लेकिन इसके बाद मानसून ने दो बार ब्रेक लिया। कई दिनों तक बारिश नहीं होने से आंकड़ा फिर सामान्य से नीचे चला गया। जुलाई में बारिश का कोटा पूरा होने के बावजूद जून की कमी पूरी नहीं हो सकी। अब अगस्त में सक्रिय हुए सिस्टम से उम्मीद है कि प्रदेश में बारिश की कमी कुछ हद तक दूर होगी।

    राजधानी भोपाल में अगस्त महीने में भारी बारिश का इतिहास रहा है। अगस्त 2006 में करीब 35 इंच बारिश दर्ज हुई थी। 14 अगस्त 2006 को 24 घंटे में करीब 12 इंच बारिश होने का रिकॉर्ड भी रहा है। इंदौर में अगस्त महीने में सर्वाधिक करीब 28 इंच बारिश का रिकॉर्ड 1944 में दर्ज हुआ था। ग्वालियर में 24 घंटे में करीब साढ़े 8 इंच बारिश का रिकॉर्ड 1927 का है। जबलपुर में अगस्त 1923 में करीब 44 इंच बारिश दर्ज होने का ऐतिहासिक रिकॉर्ड है। उज्जैन में भी अगस्त 2006 में करीब 35 इंच बारिश दर्ज की गई थी।

    फिलहाल मौसम का रुख देखते हुए पूर्वी मध्य प्रदेश के लोगों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है। भारी बारिश के दौरान नदी नालों और निचले इलाकों में जलभराव की स्थिति बन सकती है। ऐसे में मौसम विभाग की चेतावनी पर नजर रखना और अनावश्यक रूप से जलभराव वाले रास्तों पर जाने से बचना बेहतर रहेगा।

  • MP में मानसून टूरिज्म का जबरदस्त क्रेज! मांडू में 14 से 16 अगस्त तक नो रूम, दतिया में 95% कमरे बुक

    MP में मानसून टूरिज्म का जबरदस्त क्रेज! मांडू में 14 से 16 अगस्त तक नो रूम, दतिया में 95% कमरे बुक

    मध्य प्रदेश मध्य प्रदेश में मानसून के साथ पर्यटन का रंग भी गहरा हो गया है। बारिश के बाद झरनों पहाड़ियों नदियों और ऐतिहासिक स्मारकों की खूबसूरती पर्यटकों को आकर्षित कर रही है। वहीं सावन सोमवार और नागपंचमी जैसे धार्मिक आयोजनों ने उज्जैन और दूसरे धार्मिक स्थलों पर श्रद्धालुओं की संख्या कई गुना बढ़ा दी है। पचमढ़ी मांडू महेश्वर उज्जैन दतिया नलखेड़ा और ओरछा जैसे प्रमुख पर्यटन और धार्मिक केंद्रों में वीकेंड के दौरान होटल और गेस्ट हाउस की बुकिंग तेजी से बढ़ रही है। कई जगहों पर कमरे पहले से बुक हो चुके हैं और जहां कमरे उपलब्ध हैं वहां बढ़ती मांग के कारण किराया भी सामान्य दिनों की तुलना में बढ़ गया है।

    मांडू में बारिश के मौसम में ऐतिहासिक इमारतों और पहाड़ियों का नजारा बेहद आकर्षक हो जाता है। यही वजह है कि 14 से 16 अगस्त के बीच यहां होटल पूरी तरह बुक बताए जा रहे हैं। मांडू में करीब 2 सरकारी और 20 निजी होटल के अलावा 2 धर्मशालाएं हैं। यहां लगभग 800 कमरों की उपलब्धता है। सामान्य तौर पर कमरों का किराया 500 रुपए से शुरू होकर 10 हजार रुपए तक पहुंचता है। धर्मशालाओं में करीब 2 हजार रुपए तक में ठहरने की सुविधा मिल सकती है। मांडू में जहाज महल रानी रूपमती महल बाज बहादुर महल अशरफी महल और होशंग शाह का मकबरा जैसे ऐतिहासिक स्थल पर्यटकों के प्रमुख आकर्षण हैं।

    उज्जैन में स्थिति और ज्यादा खास है। सावन सोमवार और नागपंचमी एक साथ पड़ने के कारण श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ने की संभावना है। शनिवार और रविवार को करीब 3 से 4 लाख श्रद्धालुओं के पहुंचने का अनुमान है जबकि सावन सोमवार और नागपंचमी के दिन यह संख्या 5 से 6 लाख तक पहुंच सकती है। इसके चलते शहर के अधिकांश होटल पहले ही बुक हो चुके हैं। बचे हुए कमरों के किराए में भी बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। सामान्य दिनों में 1500 रुपए में मिलने वाला कमरा वीकेंड पर करीब 2000 रुपए तक पहुंच गया है। महाकाल लोक के आसपास छोटे होटलों में किराया लगभग दोगुना तक बढ़ा है जबकि बड़े होटल 15 से 35 प्रतिशत तक अधिक कीमत ले रहे हैं।

    नर्मदा किनारे बसे महेश्वर में भी पर्यटकों की अच्छी भीड़ है। यहां 120 से ज्यादा होटल होम स्टे रिजॉर्ट धर्मशालाएं और पर्यटन निगम के ठहरने के विकल्प मौजूद हैं। कमरे का शुरुआती किराया करीब 1200 रुपए है लेकिन हेरिटेज और लग्जरी प्रॉपर्टीज में रॉयल रूम की कीमत 60 हजार रुपए तक पहुंच रही है। महेश्वर आने वाले पर्यटक अक्सर ओंकारेश्वर उज्जैन और मांडू का भी रुख करते हैं। अहिल्याबाई होलकर की विरासत होलकर फोर्ट और नर्मदा के घाट यहां के प्रमुख आकर्षण हैं।

    आगर मालवा के नलखेड़ा में मां बगलामुखी मंदिर के कारण हर शनिवार और रविवार श्रद्धालुओं की अच्छी भीड़ रहती है। शहर में करीब 45 होटल हैं और कमरों का किराया 500 से 4500 रुपए तक है। वीकेंड को देखते हुए यहां भी एडवांस बुकिंग शुरू हो चुकी है।

    ओरछा में राजा राम मंदिर के कारण धार्मिक पर्यटन लगातार बना रहता है। यहां करीब 15 बड़े और 50 छोटे होटल के साथ लगभग 20 होम स्टे हैं। कमरों का किराया 3 हजार से 15 हजार रुपए तक बताया जाता है। वहीं दतिया में पीतांबरा माता मंदिर के चलते श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ रही है। शहर के करीब 90 होटल और धर्मशालाओं में लगभग 95 प्रतिशत कमरे पहले ही बुक हो चुके हैं।

    खजुराहो में फिलहाल पर्यटन सीजन अपेक्षाकृत कमजोर बताया जा रहा है लेकिन वीकेंड पर यहां भी पर्यटकों की संख्या बढ़ती है। करीब 200 होटल होम स्टे और अन्य ठहरने के विकल्प मौजूद हैं। फाइव स्टार होटलों का टैरिफ 30 से 60 हजार रुपए तक जबकि थ्री स्टार होटलों में ऑफ सीजन में करीब 5 से 7 हजार और सीजन में 10 से 12 हजार रुपए तक किराया पहुंच सकता है।

    ऐसे में अगर इस वीकेंड मध्य प्रदेश के किसी पर्यटन या धार्मिक स्थल पर घूमने का प्लान है तो होटल की एडवांस बुकिंग कराना समझदारी होगी। मानसून की खूबसूरती और धार्मिक आयोजनों के कारण इस समय कई लोकप्रिय जगहों पर आखिरी समय में कमरा मिलना मुश्किल हो सकता है।