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  • लापता महिलाओं और बच्चों की तलाश पर हाई कोर्ट का बड़ा सवाल: कितने केस लंबित, पुलिस ने अब तक क्या किया?

    लापता महिलाओं और बच्चों की तलाश पर हाई कोर्ट का बड़ा सवाल: कितने केस लंबित, पुलिस ने अब तक क्या किया?


    इंदौर। इंदौर जिले में महिलाओं और बच्चों के लापता होने के मामलों को लेकर मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर बेंच ने सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने वर्ष 2021 से अब तक लापता हुई महिलाओं और बच्चों से जुड़े मामलों का विस्तृत रिकॉर्ड राज्य सरकार से मांगा है। डबल बेंच ने सरकार और संबंधित पक्षों को नोटिस जारी करते हुए यह बताने को कहा है कि इस अवधि में कितने लोग लापता हुए हैं। इनमें से कितनों को पुलिस बरामद कर चुकी है और कितने मामले अभी भी लंबित हैं। अदालत ने उन मामलों की वर्तमान स्थिति की जानकारी भी मांगी है जिनमें अब तक लापता महिलाओं और बच्चों का कोई सुराग नहीं मिल पाया है।

    यह मामला एक जनहित याचिका से जुड़ा है जिसमें इंदौर जिले में महिलाओं और बच्चों के लगातार लापता होने तथा उनकी तलाश में देरी का मुद्दा उठाया गया है। याचिका में कहा गया है कि सिर्फ लापता होने के मामलों की संख्या सामने रखना पर्याप्त नहीं है बल्कि यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि पुलिस और प्रशासन ने उनकी तलाश के लिए अब तक क्या कार्रवाई की है। खासतौर पर लंबे समय से लंबित मामलों में जांच किस स्तर पर पहुंची है और संबंधित अधिकारियों ने उन्हें सुलझाने के लिए क्या प्रयास किए हैं इसकी जानकारी भी सामने आनी चाहिए। अदालत के निर्देश के बाद अब सरकार को इन सभी पहलुओं पर जवाब देना होगा।

    याचिकाकर्ता की ओर से लापता महिलाओं और बच्चों के मामलों की वास्तविक स्थिति का आकलन करने के लिए विशेषज्ञ समिति गठित करने की मांग भी की गई है। याचिका में तर्क दिया गया है कि ऐसे मामलों की नियमित और स्वतंत्र समीक्षा जरूरी है ताकि यह पता चल सके कि पुलिस की कार्रवाई किस दिशा में आगे बढ़ रही है और किन मामलों में अतिरिक्त प्रयास की जरूरत है। वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के स्तर पर इन प्रकरणों की समय समय पर समीक्षा करने की मांग भी रखी गई है। साथ ही एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट को अधिक प्रभावी बनाने और पुलिस प्रशासन तथा दूसरे संबंधित विभागों के बीच बेहतर समन्वय की जरूरत बताई गई है।

    मामले की गंभीरता इसलिए भी बढ़ जाती है क्योंकि लापता महिलाओं और बच्चों की तलाश केवल एक सामान्य पुलिस प्रक्रिया नहीं बल्कि उनकी सुरक्षा और गरिमा से जुड़ा संवेदनशील विषय है। याचिका में संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन और गरिमा के अधिकार का भी उल्लेख किया गया है। याचिकाकर्ता का कहना है कि किसी महिला या बच्चे के लापता होने के बाद शुरुआती समय में तेजी से कार्रवाई बेहद महत्वपूर्ण होती है। लंबे समय तक मामला लंबित रहने पर परिवार की चिंता बढ़ने के साथ तलाश की प्रक्रिया भी चुनौतीपूर्ण हो सकती है।

    इस मामले में विशेषज्ञ समिति बनाने के साथ केंद्र सरकार की ओर से जारी दिशा निर्देशों के प्रभावी पालन की मांग भी की गई है। अदालत से यह आग्रह किया गया है कि लापता महिलाओं और बच्चों के मामलों की निगरानी के लिए स्पष्ट व्यवस्था बनाई जाए और जिलेवार आंकड़ों को नियमित रूप से सामने लाया जाए। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार याचिका में सरकारी आंकड़ों की उपलब्धता और उन्हें सार्वजनिक किए जाने को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं।

    अब हाई कोर्ट के नोटिस के बाद राज्य सरकार और संबंधित विभागों को वर्ष 2021 से अब तक के मामलों का विस्तृत ब्यौरा अदालत के सामने रखना होगा। इसमें लापता महिलाओं और बच्चों की संख्या बरामदगी की स्थिति लंबित मामलों की संख्या और उनकी तलाश के लिए की गई कार्रवाई शामिल हो सकती है। आगामी सुनवाई में इन आंकड़ों के सामने आने के बाद यह तस्वीर और स्पष्ट होगी कि इंदौर जिले में लापता महिलाओं और बच्चों के मामलों में पुलिस की कार्रवाई किस स्थिति में है और लंबे समय से लंबित मामलों को लेकर आगे क्या कदम उठाए जा सकते हैं।

  • इंदौर नगर निगम ARO के दो ठिकानों पर लोकायुक्त का छापा, 31 साल की नौकरी में 80 लाख वेतन के मुकाबले मिली 2.53 करोड़ संपत्ति

    इंदौर नगर निगम ARO के दो ठिकानों पर लोकायुक्त का छापा, 31 साल की नौकरी में 80 लाख वेतन के मुकाबले मिली 2.53 करोड़ संपत्ति

    मध्य प्रदेश। के इंदौर में लोकायुक्त पुलिस ने नगर पालिक निगम के सहायक राजस्व अधिकारी जितेंद्र कुमार पांडेय के दो ठिकानों पर एक साथ छापेमार कार्रवाई की है। कार्रवाई आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के आरोपों से जुड़ी है। जांच के दौरान अधिकारी के 31 वर्ष के सेवाकाल में प्राप्त अनुमानित वेतन और सामने आए कुल व्यय के बीच बड़ा अंतर पाया गया है।

    लोकायुक्त के अनुसार जितेंद्र कुमार पांडेय को पूरे सेवाकाल में करीब 80 लाख रुपये का अनुमानित वेतन प्राप्त हुआ। इसके मुकाबले जांच में करीब 2.53 करोड़ रुपये की संपत्ति और व्यय का पता चलने की बात सामने आई है। प्रारंभिक गणना के अनुसार यह राशि उनकी वैध आय से करीब 1.73 करोड़ रुपये अधिक बताई गई है।

    जांच एजेंसी के मुताबिक यह अंतर अनुमानित वैध आय की तुलना में 216.35 प्रतिशत अधिक है। इसी आधार पर अधिकारी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण संशोधन अधिनियम 2018 की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। कार्रवाई के दौरान संपत्तियों और अन्य वित्तीय रिकॉर्ड से जुड़े दस्तावेजों की जांच की जा रही है।

    लोकायुक्त की टीम ने इंदौर में अधिकारी से जुड़े दो ठिकानों पर एक साथ तलाशी शुरू की। जांच में सामने आया कि अधिकारी की पत्नी भावना पांडेय के नाम पर आनंद नगर एक्सटेंशन, नवलखा चितावद और गजाधर नगर क्षेत्र में संपत्तियां होने की जानकारी मिली है।

    एक संपत्ति पर जी प्लस तीन मंजिला भवन का निर्माण किए जाने की बात सामने आई है। यह भवन 40 बाय 50 आकार के भूखंड पर बनाया गया है। जांच के अनुसार इस निर्माण पर करीब 1.20 करोड़ रुपये खर्च किए जाने का अनुमान लगाया गया है। लोकायुक्त टीम अब निर्माण लागत और संपत्ति के स्वामित्व से जुड़े दस्तावेजों की जांच कर रही है।

    इसी तरह गजाधर नगर, चितावद क्षेत्र में गुलमोहर का बगीचा इलाके में एक अन्य भूखंड पर जी प्लस दो मंजिला भवन का निर्माण पाया गया है। इस भवन में छात्रावास संचालित किए जाने की जानकारी सामने आई है। जांच के मुताबिक इस निर्माण पर करीब 91.50 लाख रुपये खर्च किए जाने का अनुमान है।

    लोकायुक्त की प्रारंभिक जांच में अधिकारी की पत्नी, पुत्र और पुत्री के नाम से चार पहिया और दो पहिया वाहन खरीदे जाने तथा अन्य खर्चों की जानकारी भी सामने आई है। इन मदों में करीब 14 लाख रुपये खर्च होने का अनुमान लगाया गया है।

    अधिकारी की संपत्तियों और खर्चों का आकलन करने के बाद लोकायुक्त टीम ने आय और व्यय के बीच अंतर को गंभीरता से लिया है। जांच अधिकारियों का कहना है कि तलाशी की कार्रवाई अभी जारी है और दस्तावेजों तथा अन्य संपत्तियों की विस्तृत जांच के बाद वास्तविक स्थिति और स्पष्ट होगी।

    कार्रवाई वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश पर की गई। इंदौर लोकायुक्त पुलिस की टीम में उप पुलिस अधीक्षक सुनील तालान, उप पुलिस अधीक्षक आनंद चौहान, निरीक्षक आशुतोष मिठास और निरीक्षक सचिन पटेरिया सहित अन्य अधिकारी शामिल हैं। टीम दोनों ठिकानों पर दस्तावेजों, संपत्तियों और संबंधित रिकॉर्ड की पड़ताल कर रही है।

    मामले में आगे की जांच के दौरान यह भी निर्धारित किया जाएगा कि सामने आई संपत्तियों और खर्चों का भुगतान किन माध्यमों से किया गया तथा उनकी वैध आय से उनका क्या संबंध है। तलाशी पूरी होने और दस्तावेजों के परीक्षण के बाद ही अनुपातहीन संपत्ति की अंतिम स्थिति स्पष्ट होगी। फिलहाल लोकायुक्त पुलिस की कार्रवाई जारी है और मामले में आगे कानूनी प्रक्रिया जांच के निष्कर्षों के आधार पर आगे बढ़ेगी।

  • स्वतंत्रता दिवस पर दिल्ली में बदलेगी ट्रैफिक व्यवस्था, सुबह 4 से 10 बजे तक लाल किले के आसपास कई रास्ते बंद रहेंगे

    स्वतंत्रता दिवस पर दिल्ली में बदलेगी ट्रैफिक व्यवस्था, सुबह 4 से 10 बजे तक लाल किले के आसपास कई रास्ते बंद रहेंगे

    नई दिल्ली । स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर लाल किले में आयोजित होने वाले राष्ट्रीय समारोह को देखते हुए दिल्ली में यातायात व्यवस्था में बड़ा बदलाव किया गया है। दिल्ली यातायात पुलिस ने 15 अगस्त को राजधानी के कई प्रमुख मार्गों पर वाहनों की आवाजाही को लेकर विशेष व्यवस्था लागू करने की तैयारी की है। सुरक्षा कारणों से शनिवार सुबह 4 बजे से सुबह 10 बजे तक लाल किले और उसके आसपास के कई रास्तों पर सामान्य यातायात प्रतिबंधित रहेगा।

    यातायात पुलिस ने लोगों से अपील की है कि वे स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान लाल किले और आसपास के प्रतिबंधित क्षेत्रों में अनावश्यक यात्रा से बचें। जिन लोगों को जरूरी काम से घर से निकलना है, उन्हें अपनी यात्रा पहले से निर्धारित करने और सामान्य दिनों की तुलना में अतिरिक्त समय लेकर चलने की सलाह दी गई है।

    लाल किले के आसपास नेताजी सुभाष मार्ग पर दिल्ली गेट से छत्ता रेल चौक तक यातायात प्रभावित रहेगा। इसके अलावा लोथियन रोड और दिल्ली के मुख्य डाकघर से छत्ता रेल चौक की दिशा में भी वाहनों की आवाजाही पर प्रतिबंध रहेगा। एसपी मुखर्जी मार्ग से यमुना बाजार चौक की ओर जाने वाले रास्ते पर भी यातायात व्यवस्था बदली जाएगी।

    चांदनी चौक मार्ग पर फाउंटेन चौक से लाल किले की तरफ जाने वाले वाहनों को भी सामान्य रूप से आवाजाही की अनुमति नहीं होगी। निशाद राज मार्ग, एस्प्लेनेड रोड और संपर्क मार्ग से नेताजी सुभाष मार्ग की ओर जाने वाले हिस्सों में भी सुरक्षा व्यवस्था के अनुरूप यातायात प्रतिबंध लागू रहेगा।

    राजघाट से अंतरराज्यीय बस अड्डे की ओर जाने वाली रिंग रोड और कश्मीरी गेट के आसपास भी यातायात प्रभावित रहेगा। इन क्षेत्रों में निर्धारित सुरक्षा व्यवस्था के तहत केवल अधिकृत पहचान वाले वाहनों को प्रवेश की अनुमति दी जाएगी। पुलिस ने वाहन चालकों से प्रतिबंधित क्षेत्रों में जाने के बजाय वैकल्पिक मार्गों का इस्तेमाल करने की अपील की है।

    यातायात पुलिस ने इंडिया गेट के आसपास सी-हेक्सागन, कॉपरनिकस मार्ग, मंडी हाउस, तिलक मार्ग और मथुरा मार्ग जैसे प्रमुख मार्गों पर भी अनावश्यक आवाजाही से बचने की सलाह दी है। बीएसजेड मार्ग और जेएल नेहरू मार्ग की ओर जाने वाले यात्रियों को भी यात्रा से पहले मार्ग की स्थिति को ध्यान में रखने को कहा गया है।

    निजामुद्दीन खट्टा से अंतरराज्यीय बस अड्डे के बीच रिंग रोड तथा कश्मीरी गेट से बाहरी रिंग रोड होते हुए सलीमगढ़ बाईपास की ओर जाने वाले मार्ग पर भी यातायात दबाव और सुरक्षा व्यवस्था के कारण अतिरिक्त सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।

    स्वतंत्रता दिवस को देखते हुए दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था भी कड़ी की गई है। राजधानी की सीमाओं, प्रमुख बाजारों, मॉल, होटलों और संवेदनशील स्थानों पर निगरानी बढ़ाई गई है। पुलिस की गश्त और वाहनों की जांच के साथ सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए अतिरिक्त बल की तैनाती की गई है।

    सुरक्षा एजेंसियां संभावित आपात स्थिति से निपटने के लिए तैयारियों का अभ्यास भी कर रही हैं। संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी के लिए तकनीकी साधनों का इस्तेमाल किया जा रहा है। पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि वे यातायात संकेतों का पालन करें और मौके पर तैनात पुलिसकर्मियों के निर्देशों को प्राथमिकता दें।

    स्वतंत्रता दिवस के दिन दिल्ली में बड़ी संख्या में लोगों की आवाजाही को देखते हुए पुलिस ने नागरिकों से संयम बरतने और यात्रा की योजना पहले से बनाने को कहा है। प्रतिबंधित मार्गों से बचने और निर्धारित वैकल्पिक रास्तों का इस्तेमाल करने से यातायात को सुचारु बनाए रखने में मदद मिलेगी।

  • हाथ में नहीं ठेले पर तिरंगा और साथ में सफाई का जज्बा, 70 साल के भोला ने पेश की देशभक्ति की मिसाल

    हाथ में नहीं ठेले पर तिरंगा और साथ में सफाई का जज्बा, 70 साल के भोला ने पेश की देशभक्ति की मिसाल


    इंदौर। इंदौर में गुरुवार को निकली राष्ट्रपथ तिरंगा यात्रा में हजारों लोग देशभक्ति के रंग में नजर आए। हाथों में तिरंगा लेकर लोग देशभक्ति के गीतों पर आगे बढ़ रहे थे। देवी अहिल्या विश्वविद्यालय के तक्षशिला परिसर से शुरू हुई यह यात्रा भंवरकुआं से राजीव गांधी चौराहे की ओर बढ़ रही थी। सड़कों पर जगह जगह तिरंगे दिखाई दे रहे थे और पूरा माहौल देशभक्ति से सराबोर था। लेकिन इस विशाल यात्रा के पीछे चल रहे एक बुजुर्ग ने अपने अलग अंदाज से लोगों का ध्यान खींच लिया।

    यात्रा का आखिरी हिस्सा भंवरकुआं चौराहा पार कर चुका था। इसी दौरान 70 साल से अधिक उम्र के भोला बाबूलाल शिंदे अपना ठेला लेकर धीरे धीरे यात्रा के पीछे चलते दिखाई दिए। उनके ठेले पर तिरंगा लगा हुआ था। एक हाथ ठेले के हत्थे पर था और उनकी नजर लगातार सड़क पर पड़ी खाली प्लास्टिक की बोतलों पर थी। जहां भी उन्हें बोतल दिखाई देती वे ठेला रोकते और झुककर उसे उठाकर ठेले में रख लेते। इसके बाद वे फिर आगे बढ़ जाते।

    तिरंगा यात्रा में शामिल लोगों के लिए रास्ते में जगह जगह पानी और जीरू की छोटी बोतलों की व्यवस्था की गई थी। लोग पानी और जीरू पीकर आगे बढ़ते गए लेकिन कई खाली बोतलें सड़क पर ही छूट गईं। भोला इन बोतलों को एक एक करके उठाते रहे। यात्रा आगे बढ़ती रही और उनके पीछे पीछे ठेला भी चलता रहा। ठेले पर लगा तिरंगा और उसमें जमा होती प्लास्टिक की बोतलें एक साथ आगे बढ़ती रहीं।

    भोला किसी संस्था की ओर से सफाई करने नहीं निकले थे और न ही किसी ने उन्हें ऐसा करने की जिम्मेदारी दी थी। उन्होंने सड़क पर गंदगी देखी तो खुद ही बोतलें उठाना शुरू कर दिया। भंडारी ब्रिज इलाके में रहने वाले भोला बाबूलाल शिंदे भंगार बीनने और उसे बेचने का काम करते हैं। लोगों ने जब उन्हें इस तरह बोतलें बटोरते देखा तो उनसे बातचीत की। उन्होंने बताया कि वे यात्रा के पीछे पीछे राजीव गांधी चौराहे तक जाएंगे और रास्ते में सड़क पर पड़ी बोतलें उठाते रहेंगे।

    जब उनसे पूछा गया कि वह ऐसा क्यों कर रहे हैं तो उन्होंने बेहद सहज अंदाज में कहा कि अपने देश में सफाई अच्छी होना चाहिए इसलिए सफाई कर रहा हूं। उनकी यह बात वहां मौजूद लोगों को भी प्रभावित कर गई। हजारों लोग तिरंगा लेकर देशभक्ति का संदेश दे रहे थे और यात्रा के सबसे पीछे एक बुजुर्ग अपने काम से स्वच्छता का संदेश दे रहे थे।

    भोला के लिए सड़क से उठाई जा रही ये बोतलें केवल कचरा नहीं थीं। इनमें उनकी रोजी रोटी भी छिपी थी। जब उनसे पूछा गया कि इन बोतलों का क्या करेंगे तो उन्होंने बताया कि इन्हें दुकानदार को बेच देंगे और उससे मिलने वाले पैसे से रोटी का इंतजाम करेंगे। यानी जिस कचरे को लोग सड़क पर छोड़कर आगे बढ़ गए थे वही भोला के लिए मेहनत और कमाई का जरिया भी था।

    इस पूरे दृश्य में देशभक्ति का एक अलग रूप दिखाई दिया। तिरंगा यात्रा में शामिल हजारों लोग राष्ट्रप्रेम का उत्सव मना रहे थे जबकि भोला अपने छोटे से ठेले के साथ उसी भावना को सफाई और मेहनत से जोड़ रहे थे। उनके ठेले पर लगा तिरंगा और सड़क से उठाई जा रही प्लास्टिक की बोतलें यह संदेश देती नजर आईं कि देश के प्रति जिम्मेदारी केवल नारों और आयोजनों तक सीमित नहीं है। अपने आसपास की जगह को साफ रखना और ईमानदारी से मेहनत करना भी देश के प्रति सम्मान का एक तरीका हो सकता है।

  • बस में सवार बदमाशों ने चालाकी से वारदात को अंजाम देकर व्यापारी का पांच किलो सोने से भरा बैग छीना।

    बस में सवार बदमाशों ने चालाकी से वारदात को अंजाम देकर व्यापारी का पांच किलो सोने से भरा बैग छीना।

    मध्य प्रदेश के रतलाम जिले में महू-नीमच हाईवे पर एक भीषण और सनसनीखेज लूट की वारदात सामने आई है। बड़नगर से रतलाम लौट रहे एक सराफा व्यापारी को निशाना बनाते हुए अज्ञात बदमाशों ने चलती बस के भीतर से लगभग पांच किलोग्राम सोने के जेवरों से भरा बैग लूट लिया। लूटे गए आभूषणों की अनुमानित कीमत साढ़े सात करोड़ रुपये बताई जा रही है।

    प्राप्त जानकारी के अनुसार, रतलाम के जैन कॉलोनी निवासी सराफा व्यवसायी अर्पित चौरड़िया आसपास के क्षेत्रों में स्वर्ण आभूषणों का व्यापार करते हैं। वे गुरुवार शाम बड़नगर क्षेत्र में व्यापारियों को जेवर दिखाने और व्यापारिक सिलसिले में गए थे। काम निपटाने के बाद वे रात करीब आठ बजे बड़नगर से रतलाम जाने वाली एक निजी बस में सवार हुए थे।

    व्यापारी के साथ ही बड़नगर से चार-पांच संदिग्ध यात्री भी उसी बस में सवार हुए थे। रात करीब सवा नौ बजे जब बस बिलपांक थाना क्षेत्र के अंतर्गत रेन-मऊ फंटे के पास पहुंची, तब एक यात्री ने उतरने के बहाने चालक से बस रुकवाई। बस के रुकते ही भीतर मौजूद दो अन्य बदमाशों ने झपट्टा मारकर व्यापारी से जेवरों का बैग छीन लिया और बाहर खड़े अपने अन्य साथियों के साथ अंधेरे का फायदा उठाकर मौके से फरार हो गए।

    घटना के तुरंत बाद पीड़ित व्यापारी ने धराड़ पुलिस चौकी पहुंचकर अधिकारियों को मामले की सूचना दी। साढ़े सात करोड़ रुपये मूल्य के पांच किलो सोने की लूट की खबर मिलते ही पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया। सूचना मिलते ही बिलपांक थाना प्रभारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे और पूरे इलाके की घेराबंदी शुरू कर दी।

    वारदात की गंभीरता को देखते हुए पुलिस महानिरीक्षक, पुलिस अधीक्षक अमित कुमार तथा अपर पुलिस अधीक्षक सहित वरिष्ठ प्रशासनिक और पुलिस अधिकारी घटनास्थल पर पहुंचे। वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशन में त्वरित कार्रवाई करते हुए जिले की सभी सीमाओं पर सख्त नाकाबंदी लागू कर दी गई है और संदिग्ध वाहनों की तलाशी ली जा रही है।

    मध्य प्रदेश के मालवा अंचल में हाईवे पर हुई इस बड़ी आपराधिक वारदात के बाद व्यापारिक जगत और स्थानीय निवासियों में भारी आक्रोश और असुरक्षा का माहौल है। रतलाम और उज्जैन संभाग के सराफा व्यापारियों ने पुलिस प्रशासन से आरोपियों को जल्द से जल्द गिरफ्तार करने और लूटे गए आभूषणों को बरामद करने की मांग की है।

    जांच प्रक्रिया को गति देने के लिए फॉरेंसिक विशेषज्ञों और डॉग स्क्वाड की टीमों को मौके पर बुलाया गया है। पुलिस द्वारा बड़नगर से लेकर बिलपांक टोल नाके और आसपास के सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं। प्राथमिक जांच में आशंका जताई जा रही है कि बदमाशों ने व्यापारी की रेकी की थी और योजनाबद्ध तरीके से बस में सवार होकर वारदात को अंजाम दिया।

    फिलहाल बिलपांक थाना पुलिस ने व्यापारी के बयानों के आधार पर अज्ञात बदमाशों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस की विशेष टीमें संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही हैं और दावा किया जा रहा है कि जल्द ही इस बड़ी लूट की गुत्थी सुलझा ली जाएगी।

  • PWD इंजीनियर आरती यादव की मौत मामले में बड़ा मोड़, पति निलेश यादव पर प्रताड़ना का केस दर्ज

    PWD इंजीनियर आरती यादव की मौत मामले में बड़ा मोड़, पति निलेश यादव पर प्रताड़ना का केस दर्ज


    इंदौर। इंदौर के पलासिया इलाके में PWD की महिला इंजीनियर आरती यादव की मौत के मामले में पुलिस ने करीब 20 दिन बाद उनके पति निलेश यादव के खिलाफ प्रताड़ना से जुड़ी धाराओं में FIR दर्ज की है। आरती की मौत के बाद मायके पक्ष ने पति और ससुराल पक्ष पर गंभीर आरोप लगाते हुए मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की थी। शिकायत को गंभीरता से लेते हुए पुलिस ने जांच के लिए SIT का गठन किया था। जांच के बाद पलासिया पुलिस ने गुरुवार देर रात पति के खिलाफ प्रकरण दर्ज किया। पुलिस अब FIR में लगाए गए आरोपों और सामने आए साक्ष्यों के आधार पर आगे की जांच कर रही है।

    आरती यादव PWD में वरिष्ठ इंजीनियर के पद पर पदस्थ थीं। उनके पति निलेश यादव भी लोक निर्माण विभाग में कार्यरत हैं। दोनों की शादी करीब 10 साल पहले हुई थी और दंपती की दो बेटियां हैं। आरती का मायका इंदौर के सुखलिया इलाके में बताया गया है जबकि उनका ससुराल झाबुआ में है। घटना के बाद मायके पक्ष ने आरोप लगाया था कि पति पत्नी के बीच लंबे समय से तनाव चल रहा था और इसी वजह से आरती मानसिक दबाव में थीं।

    पुलिस के मुताबिक आरती ने पलासिया स्थित अपने सरकारी क्वार्टर में फांसी लगाकर आत्महत्या का प्रयास किया था। इसके बाद उनके पति निलेश उन्हें अस्पताल लेकर पहुंचे थे। अस्पताल में उपचार के दौरान अगले दिन आरती की मौत हो गई। घटना के बाद मामला पहले मर्ग के तौर पर जांच में लिया गया था। लेकिन मायके पक्ष की शिकायत और लगाए गए आरोपों के बाद पुलिस ने जांच का दायरा बढ़ा दिया।

    जांच के लिए गठित SIT ने मामले से जुड़े अलग-अलग पहलुओं को खंगाला। पुलिस ने आरती के मायके पक्ष के लोगों के बयान दर्ज किए। इसके अलावा पति और पत्नी के संबंधों तथा घटना से पहले की परिस्थितियों को समझने के लिए अन्य संबंधित लोगों से भी पूछताछ की गई। दंपती की दोनों बेटियों के बयान भी जांच का हिस्सा रहे। पुलिस ने इन बयानों के साथ उपलब्ध परिस्थितिजन्य साक्ष्यों को भी जांच में शामिल किया।

    इससे पहले आरती के भाई उपेन्द्र ने दोनों के बीच लंबे समय से तनाव होने की बात कही थी। मायके पक्ष ने पुलिस से पूरे मामले की गहराई से जांच करने और यदि प्रताड़ना के आरोप सही पाए जाएं तो कानूनी कार्रवाई करने की मांग की थी। हालांकि मामले में लगाए गए आरोपों को लेकर अंतिम निष्कर्ष पुलिस की जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही सामने आएगा।

    आरती की मौत से जुड़े मामले में सामने आए कुछ अन्य दावों की भी अलग-अलग रिपोर्टों में चर्चा हुई थी। मायके पक्ष ने पति और ससुराल वालों पर गंभीर आरोप लगाए थे और घटना की परिस्थितियों पर सवाल उठाए थे। हालांकि इन आरोपों की पुष्टि होना अभी बाकी है। पुलिस सभी तथ्यों को जांच का हिस्सा बनाकर आगे बढ़ रही है।

    अब पति निलेश यादव के खिलाफ FIR दर्ज होने के बाद मामले में कानूनी जांच का नया चरण शुरू हो गया है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश करेगी कि आरती को कथित तौर पर किस तरह की प्रताड़ना का सामना करना पड़ा था और उसका उनकी मौत से कोई संबंध था या नहीं। जांच में सामने आने वाले बयान और अन्य साक्ष्य आगे की कार्रवाई की दिशा तय करेंगे।

    फिलहाल पुलिस ने FIR दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। ऐसे संवेदनशील मामले में आरोपों और प्रमाणित तथ्यों के बीच अंतर बनाए रखना जरूरी है। आरती की मौत के वास्तविक कारणों और पति के खिलाफ लगाए गए आरोपों की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

  • धार्मिक शुचिता को ध्यान में रखते हुए रामलला के अर्चक अब बिना सिलाई वाले पीत वस्त्रों में नजर आएंगे।

    धार्मिक शुचिता को ध्यान में रखते हुए रामलला के अर्चक अब बिना सिलाई वाले पीत वस्त्रों में नजर आएंगे।


    नई दिल्ली । 
    अयोध्या स्थित भव्य राम जन्मभूमि मंदिर में श्रीरामलला की पूजा-अर्चना व्यवस्था को और अधिक सुव्यवस्थित तथा मर्यादित बनाने के लिए एक महत्वपूर्ण फैसला लिया गया है। मंदिर ट्रस्ट द्वारा तय की गई नई व्यवस्था के अंतर्गत अब गर्भगृह में सेवा देने वाले सभी अर्चक एक समान पारंपरिक वेशभूषा में नजर आएंगे। यह नया ड्रेस कोड 15 अगस्त से प्रभावी रूप से लागू किया जाएगा।

    नए ड्रेस कोड के दिशानिर्देशों के अनुसार, ग्रीष्म ऋतु के दौरान सभी अर्चक नीचे पीली धोती और ऊपर बिना सिला हुआ पीला रेशमी अंगवस्त्र धारण करेंगे। कंधों पर रखा जाने वाला यह अंगवस्त्र पूरी तरह से बिना सिलाई का होगा। धार्मिक परंपराओं में गर्भगृह की पवित्रता और शुचिता को बनाए रखने के लिए बिना सिले रेशमी वस्त्रों के उपयोग को विशेष रूप से प्राथमिकता दी जाती है।

    मौसम में परिवर्तन के अनुसार पुजारियों के परिधान सामग्री में बदलाव किया जाएगा, लेकिन वस्त्रों का रंग पीला ही रहेगा। आगामी शीत ऋतु के आगमन पर मौसम के अनुकूल पीले रंग के ऊनी वस्त्र उपलब्ध कराए जाएंगे। धार्मिक न्यास समिति के अनुसार, सनातन और वैष्णव परंपराओं में सूती अथवा सिले हुए कपड़ों की तुलना में रेशमी और ऊनी वस्त्रों को पूजा-अर्चना के दौरान सर्वाधिक शुद्ध माना गया है।

    पूजा-अर्चना में संलग्न पुजारियों का कार्य समय और रोस्टर प्रत्येक माह की अमावस्या और पूर्णिमा तिथियों के अनुसार परिवर्तित होता रहता है। रोस्टर में बदलाव के साथ ही नए वस्त्र कोड का पालन अनिवार्य कर दिया गया है। मंदिर प्रबंधन ने स्पष्ट किया है कि इस पहल का उद्देश्य पूजा व्यवस्था में एकरूपता और धार्मिक मर्यादाओं का पूर्ण पालन सुनिश्चित करना है।

    अयोध्या में रामलला के नए ड्रेस कोड और धार्मिक अनुष्ठानों की शुचिता को लेकर देश भर के श्रद्धालुओं में विशेष श्रद्धा देखी जा रही है। मध्य प्रदेश के इंदौर, भोपाल और उज्जैन जैसे सांस्कृतिक शहरों के राम भक्तों और धार्मिक विद्वानों ने भी इस पारंपरिक पहल का स्वागत किया है। मध्य प्रदेश के प्रमुख मंदिरों में भी इस प्रकार की वैदिक परंपराओं का विशेष ध्यान रखा जाता है।

    श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट द्वारा मंदिर परिसर की सुरक्षा, प्रबंधन और दान व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए लगातार समीक्षा बैठकें की जा रही हैं। पूर्व में सामने आई व्यवस्थात्मक कमियों को दूर करते हुए प्रबंधन में कई व्यापक सुधार किए गए हैं, जिसमें कर्मचारियों और अर्चकों की कार्यशैली को और अधिक अनुशासित बनाना शामिल है।

    वैदिक आचार्यों और धार्मिक मामलों के विशेषज्ञों का मानना है कि पवित्र गर्भगृह के भीतर मर्यादा और शुचिता का पालन सर्वोपरि होता है। बिना सिले वस्त्र धारण कर पूजा-अर्चना करने की यह प्राचीन पद्धति राम मंदिर की भव्यता और सनातन संस्कृति के गौरव को और अधिक प्रगाढ़ बनाएगी।

    इस नए नियम के लागू होने के बाद मंदिर आने वाले लाखों श्रद्धालुओं को रामलला के दर्शन के साथ-साथ अर्चकों की एकरूप और सात्विक वेशभूषा का अनूठा अनुभव प्राप्त होगा, जो मंदिर की पावन छवि को एक नया आयाम प्रदान करेगा।

  • इंदौर में फिर बदलेगा मौसम का मिजाज! घने बादलों के बीच तेज बारिश का अनुमान, सीजन में 18 इंच बरसा पानी

    इंदौर में फिर बदलेगा मौसम का मिजाज! घने बादलों के बीच तेज बारिश का अनुमान, सीजन में 18 इंच बरसा पानी


    इंदौर। इंदौर में शुक्रवार सुबह से मौसम ने करवट ली और शहर के आसमान पर घने बादल छा गए। कई इलाकों में हल्की बूंदाबांदी भी देखने को मिली। लंबे समय से रुक रुककर हो रही बारिश के बीच अब मौसम विशेषज्ञों ने आने वाले दिनों में बारिश की गतिविधियां बढ़ने की संभावना जताई है। बंगाल की खाड़ी में बने मौसम सिस्टम के कारण मध्य प्रदेश में मानसून के सक्रिय होने के संकेत मिल रहे हैं। मौजूदा मौसम पूर्वानुमान में भी इंदौर के लिए आने वाले दिनों में बादल और बारिश का दौर बने रहने के संकेत हैं।

    इस मानसून सीजन में इंदौर में अब तक करीब 18 इंच बारिश दर्ज हो चुकी है। हालांकि अगस्त की शुरुआत से अब तक बारिश का जोर बहुत ज्यादा नहीं रहा है। शहर में कई दिनों से कभी बूंदाबांदी तो कभी हल्की बारिश का सिलसिला जारी है लेकिन किसी दिन भी बारिश ने लंबा और तेज दौर नहीं बनाया। ऐसे में मौसम के जानकारों की नजर अब मानसून के बचे करीब डेढ़ महीने पर है। अगर आने वाले दिनों में सक्रिय सिस्टम बनते रहे तो इंदौर में बारिश का आंकड़ा सामान्य से ऊपर जाने की संभावना बन सकती है।

    मौसम में बदलाव की बड़ी वजह बंगाल की खाड़ी में बना निम्न दबाव का क्षेत्र है। भारत मौसम विज्ञान विभाग के मुताबिक 12 अगस्त को उत्तर बंगाल की खाड़ी और पश्चिम बंगाल बांग्लादेश के तटवर्ती इलाकों के पास निम्न दबाव का क्षेत्र बना था। इसके बाद यह सिस्टम और सक्रिय हुआ। इसके प्रभाव से मध्य भारत में बारिश की गतिविधियों में बढ़ोतरी की संभावना बनी है।

    इस मौसम सिस्टम का असर मध्य प्रदेश के पूर्वी हिस्सों में ज्यादा दिखाई दे सकता है। कुछ इलाकों में भारी बारिश की संभावना भी जताई गई है। वहीं पश्चिमी मध्य प्रदेश के जिलों में भी बारिश की गतिविधियां बढ़ सकती हैं। इंदौर में इसका असर बादल छाने और बारिश के दौर के रूप में देखने को मिल सकता है। मौजूदा पूर्वानुमान में इंदौर में 14 अगस्त से आगे भी बादल और बारिश की संभावना बनी हुई है।

    अगस्त का महीना इंदौर के लिए बारिश के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जाता है। शहर में इस महीने औसतन करीब 10 से 11 इंच बारिश होती है और कई दिनों तक बारिश का दौर देखने को मिलता है। इतिहास में अगस्त के दौरान इससे कहीं ज्यादा बारिश भी दर्ज हो चुकी है। वर्ष 1944 में अगस्त महीने में करीब 28 इंच बारिश का रिकॉर्ड बताया जाता है। वहीं 22 अगस्त 2020 को 24 घंटे के दौरान करीब साढ़े 10 इंच बारिश दर्ज की गई थी।

    इस लिहाज से अगस्त के बाकी दिनों में बनने वाले मौसम सिस्टम इंदौर के लिए काफी अहम रहेंगे। यदि बंगाल की खाड़ी से लगातार सिस्टम बनते रहे और मानसून ट्रफ सक्रिय रही तो शहर में बारिश का जोर बढ़ सकता है। इससे न केवल मौजूदा बारिश के आंकड़े में सुधार होगा बल्कि पूरे सीजन की कुल बारिश भी औसत के आसपास या उससे ऊपर पहुंच सकती है।

    फिलहाल शुक्रवार सुबह घने बादलों और बूंदाबांदी ने शहरवासियों को एक बार फिर तेज बारिश की उम्मीद दी है। हालांकि किसी एक दिन के मौसम को देखकर पूरे सीजन की स्थिति तय नहीं की जा सकती। आने वाले दिनों में सिस्टम की दिशा और उसकी सक्रियता यह तय करेगी कि इंदौर में बारिश कितनी तेज और कितने लंबे दौर तक होती है। फिलहाल मौसम का बदला मिजाज मानसून के लिए राहत भरे संकेत जरूर दे रहा है।

  • संसद के मानसून सत्र में विपक्षी एकजुटता और छात्र आंदोलनों के कारण बैकफुट पर आई एनडीए सरकार।

    संसद के मानसून सत्र में विपक्षी एकजुटता और छात्र आंदोलनों के कारण बैकफुट पर आई एनडीए सरकार।

    नई दिल्ली । संसद के हाल ही में संपन्न हुए मानसून सत्र के दौरान देश की राजनीतिक फिजां में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। सत्र की शुरुआत से पहले जहां सत्तारूढ़ गठबंधन मजबूत स्थिति में नजर आ रहा था, वहीं सत्र के दौरान हुए घटनाक्रमों और छात्र आंदोलनों के कारण विपक्षी दल सरकार पर रणनीतिक दबाव बनाने में पूरी तरह सफल रहे।

    मानसून सत्र की शुरुआत से ठीक पहले राजनीतिक समीकरण एनडीए के पक्ष में दिखाई दे रहे थे। विभिन्न राज्यों के राजनीतिक घटनाक्रमों से विपक्षी दल मनोवैज्ञानिक दबाव महसूस कर रहे थे। हालांकि, सत्र के दौरान देश के कई हिस्सों में शुरू हुए छात्र आंदोलनों, पेपर लीक विवादों और पुलिस कार्रवाई के मुद्दों ने पूरे परिदृश्य को बदलकर रख दिया।

    संसद भवन के भीतर और बाहर कांग्रेस की अगुवाई में एकजुट हुए विपक्षी दलों ने इन संवेदनशील मुद्दों को प्रमुखता से उठाया। सरकार के खिलाफ बने इस माहौल को बांकीपुर और दतिया उप-चुनावों में सत्तारूढ़ दल को मिली शिकस्त ने और अधिक बल दिया। इन चुनावी नतीजों से विपक्षी सांसदों का उत्साह और आक्रामकता दोनों में बढ़ोतरी दर्ज की गई।

    विपक्ष के कड़े तेवरों और लगातार जारी हंगामे के कारण सरकार को कई महत्वपूर्ण विधायी प्रस्तावों पर अपने कदम पीछे खींचने पड़े। एफसीआरए संशोधन विधेयक को आगे की समीक्षा के लिए संसद की स्थायी समिति के पास भेजने का निर्णय लिया गया। इसके अलावा महिला आरक्षण और परिसीमन जैसे बड़े विधेयकों पर भी विस्तृत चर्चा संभव नहीं हो सकी।

    सत्र के दौरान विभिन्न क्षेत्रीय दलों के बीच अभूतपूर्व समन्वय देखने को मिला। तमिलनाडु की सत्तारूढ़ डीएमके, समाजवादी पार्टी और कांग्रेस ने अलग-अलग मुद्दों पर एक-दूसरे का पुरजोर समर्थन किया। नीट परीक्षा में अनियमितताओं और छात्रों पर हुई कार्रवाई के मुद्दे पर पूरा विपक्ष एक सुर में गृह मंत्री से जवाब मांगने पर अड़ा रहा, जिससे सदन की कार्यवाही बार-बार बाधित हुई।

    संसदीय गतिरोध का असर देश के विभिन्न राज्यों की राजनीति पर भी स्पष्ट रूप से देखा जा रहा है। मध्य प्रदेश के दतिया उप-चुनाव में आए नतीजों और राज्य के युवाओं से जुड़े रोजगार व परीक्षा संबंधी मुद्दों को लेकर स्थानीय स्तर पर भी राजनीतिक सरगर्मी बढ़ गई है। मध्य प्रदेश में भी छात्र संगठनों द्वारा इन मुद्दों को लेकर लगातार संवाद और प्रदर्शन किए जा रहे हैं।

    मानसून सत्र के दौरान नीट परीक्षा विवाद, विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान विधेयक और जनहित से जुड़े कई महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत चर्चा अधूरी रह गई। लगातार होते स्थगन के कारण विभिन्न क्षेत्रों के सांसदों द्वारा उठाए जाने वाले शून्यकाल के मुद्दे भी सदन के पटल पर प्रस्तुत नहीं किए जा सके।

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मानसून सत्र में जिस तरह से विपक्षी दलों ने एकजुटता दिखाई है, उससे आने वाले राज्य विधानसभा चुनावों में मुकाबला दिलचस्प होने की संभावना है। छात्र आंदोलनों और जनहित के मुद्दों को आगे भी बरकरार रखना विपक्ष के लिए एक बड़ी चुनौती सिद्ध होगा।

  • पूर्णिया के झंडा चौक पर 1947 की ऐतिहासिक रात से लगातार निभाई जा रही मध्यरात्रि ध्वजारोहण की अनोखी परंपरा।

    पूर्णिया के झंडा चौक पर 1947 की ऐतिहासिक रात से लगातार निभाई जा रही मध्यरात्रि ध्वजारोहण की अनोखी परंपरा।

    नई दिल्ली । स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर जब पूरा देश 15 अगस्त की सुबह राष्ट्रीय ध्वज फहराने और जश्न की तैयारियों में जुटा होता है, वहीं बिहार के पूर्णिया जिले में एक अनोखी और ऐतिहासिक परंपरा दशकों से निभाई जा रही है। शहर के भट्ठा बाजार स्थित प्रसिद्ध झंडा चौक पर 14 अगस्त की मध्यरात्रि ठीक 12 बजकर 01 मिनट पर तिरंगा फहराया जाता है। स्वतंत्रता संग्राम से जुड़ी यह ऐतिहासिक और गौरवशाली परंपरा विगत 79 वर्षों से लगातार बिना किसी रुकावट के जारी है।

    इस अनूठी परंपरा की शुरुआत 14 अगस्त 1947 की उस ऐतिहासिक रात को हुई थी, जब पूरा देश आजादी की औपचारिक घोषणा का बेसब्री से इंतजार कर रहा था। उस वक्त पूर्णिया के स्थानीय नागरिक और स्वतंत्रता सेनानी भट्ठा बाजार स्थित एक दुकान के बाहर रेडियो पर प्रसारित हो रहे समाचार सुन रहे थे। जैसे ही ऑल इंडिया रेडियो पर देश के स्वतंत्र होने की आधिकारिक घोषणा हुई, पूरा क्षेत्र देश भक्ति के जयकारों से गूंज उठा।

    स्वतंत्रता सेनानी रामेश्वर प्रसाद सिंह और उनके सहयोगियों ने तय किया कि आजादी की पहली सांस के साथ ही राष्ट्रीय ध्वज फहराया जाएगा। उन्होंने तुरंत बांस और रस्सी की व्यवस्था की और रात ठीक 12:01 बजे तिरंगा फहरा दिया। इस ऐतिहासिक घटना के बाद ही उस स्थान का नाम औपचारिक रूप से ‘झंडा चौक’ रखा गया और वहां मौजूद लोगों ने हर वर्ष इस परंपरा को इसी समय दोहराने का सामूहिक संकल्प लिया।

    वर्ष 1947 में ली गई वह शपथ आज भी पूरी निष्ठा और राष्ट्रीय सम्मान के साथ निभाई जा रही है। शुरुआत करने वाले स्वतंत्रता सेनानियों के निधन के बाद उनकी अगली पीढ़ियां इस धरोहर और परंपरा को आगे बढ़ा रही हैं। स्थानीय नागरिक और सामाजिक कार्यकर्ता हर साल 14 अगस्त की रात झंडा चौक पर एकत्र होते हैं और घड़ी की सुई 12:01 पर पहुंचते ही राष्ट्रगान और देशभक्ति के नारों के साथ ध्वजारोहण करते हैं।

    मध्य प्रदेश सहित देश के विभिन्न हिस्सों में स्वतंत्रता दिवस को लेकर अभूतपूर्व उत्साह देखा जा रहा है। भोपाल, इंदौर और ग्वालियर जैसे शहरों में जहां 15 अगस्त की सुबह प्रभात फेरियों और मुख्य समारोहों के साथ तिरंगा फहराया जाता है, वहीं बिहार के पूर्णिया की यह मध्यरात्रि ध्वजारोहण की परंपरा पूरे देश के लिए कौतूहल और प्रेरणा का विषय बनी रहती है।

    हर साल की तरह इस बार भी 14 अगस्त की देर रात झंडा चौक पर भारी संख्या में जनसैलाब उमड़ा। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी के हाथों में राष्ट्रीय ध्वज नजर आया। रोशनी से जगमगाते चौराहे पर रात 12:01 बजते ही जैसे ही तिरंगा लहराया गया, पूरा माहौल भारत माता की जय और वंदे मातरम के उद्घोष से गुंजायमान हो उठा।

    यह ऐतिहासिक आयोजन केवल एक रस्म नहीं बल्कि उन अमर सेनानियों के प्रति श्रद्धांजलि है, जिन्होंने देश की आजादी के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया। पूर्णिया वासियों के लिए यह क्षण अत्यंत गर्व और स्वाभिमान का प्रतीक है, जो नई पीढ़ी को अपनी जड़ों और राष्ट्रीय इतिहास से जोड़े रखता है।

    स्थानीय प्रशासन और पुलिस विभाग द्वारा भी इस वार्षिक आयोजन के अवसर पर सुरक्षा और व्यवस्था के व्यापक इंतजाम किए जाते हैं। 79 वर्षों से चली आ रही यह निष्ठा साबित करती है कि देशभक्ति का यह जज्बा आने वाले कई दशकों तक इसी तरह अमर रहेगा।