Blog

  • आसिम मुनीर का इशारा, जिस मकसद से बना पाकिस्तान वो हासिल करेंगे

    आसिम मुनीर का इशारा, जिस मकसद से बना पाकिस्तान वो हासिल करेंगे

    लाहोर। पाकिस्तान के चीफ ऑफ डिफेंस, फील्ड मार्शल आसिम मुनीर का एक बयान काफी चर्चा में है। इस बयान में आसिम मुनीर ने कहा कि पाकिस्तान इस्लाम के नाम पर अस्तित्व में आया था। अब वह इस मोड़ पर है, जहां वह अपने इस लक्ष्य को हासिल कर सकता है। खास बात यह है कि जब मुनीर ने यह बात कही तब वहां पर प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ, पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ, पंजाब की मुख्यमंत्री मरियम नवाज समेत कई अन्य वरिष्ठ सिविल और मिलिट्री अधिकारी मौजूद थे। इसके अलावा कैबिनेट मंत्री, पॉलिटिकल लीडर्स और शरीफ परिवार के सदस्य मौजूद थे। मौका था, नवाज शरीफ के नाती और मरियम नवाज के बेटे जुनैद सफदर की शादी का रिसेप्शन का।

    कहां बोल रहे थे मुनीर
    इस दौरान पत्रकारों से बात करते हुए आसिम मुनीर ने कहा कि पाकिस्तान तेजी से अपने लक्ष्य की तरफ बढ़ रहा है।

    इंडिया टुडे के मुताबिक मुनीर ने कहा कि पाकिस्तान को इस्लाम के नाम पर बनाया गया था। आज यह इस्लामिक देशों में अलग अहमियत रखता है। उन्होंने आगे कहा कि अल्लाह के रास्ते पर आगे बढ़ना खास नियामत है। पाकिस्तान ने हाल के दिनों में मुस्लिम एकता के नाम पर कुछ देशों से डिफेंस और फाइनेंस की डील की है। इन देशों में सऊदी अरब और तुर्की का नाम प्रमुख है। इसके अलावा पाकिस्तान इस्लामिक नाटो बनाने की भी योजना बना रहा है।

    अंतर्राष्ट्रीय पहचान की बात
    इतना ही नहीं, मुनीर ने अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पाकिस्तान का दबदबा बढ़ाने की बात की। संभवत: वह डोनाल्ड ट्रंप के साथ वाइट हाउस में मीटिंग और डिनर की तरफ इशारा कर रहे थे। इसके अलावा पाकिस्तान के गाजा पीस में शामिल होने का भी उन्होंने जिक्र किया। इतना ही नहीं, मुनीर ने यह भी बताने की कोशिश की कि मई 2025 में भारत के साथ युद्ध में पाकिस्तान हावी रहा था।

    कैसे अलग हैं मुनीर
    बता दें कि फील्ड मार्शल आसिम मुनीर अपने पूर्ववर्तियों से काफी अलग हैं। पिछले आर्मी चीफ ज्यादातर सैंडहर्स्ट-प्रशिक्षित अधिकारी थे, जो औपचारिक रूप से राजनीति और धर्म दोनों से दूर रहते थे, और उन्हें पश्चिमी संगीत और व्हिस्की का शौक था। इसके उलट मुनीर, हाफिए-ए-कुरान हैं। हाफिज-ए-कुरान उसे कहते हैं, जिसे कुरान याद है। ऐसे में मुनीर के लिए धर्म एक बड़ा आधार है। मुनीर, मिलिट्री इंटेलीजेंस और आईएसआई दोनों के मुखिया हैं। उनके पद ग्रहण करने के बाद से ही पाकिस्तानी सेना में धर्म की तरफ रुझान दिखाई देने लगा है।

    सेना में धर्म का बढ़ता प्रभाव
    मुनीर के नेतृत्व में, सेना ने न केवल राज्य की रक्षा करने के रूप में ही नहीं, बल्कि इस्लाम की रक्षा करने के रूप में भी अधिक स्पष्ट रूप से प्रस्तुत किया है। इसमें 7वीं सदी के अरबी और इस्लामी प्रतीकों का भारी इस्तेमाल किया गया है। सशस्त्र विरोधियों, जिनमें बलोचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा के विद्रोही शामिल हैं, को ‘फितना अल-खवारिज’ और ‘फितना अल-हिंदुस्तान’ कहा गया है, जिससे उन्हें धर्मभ्रष्ट विद्रोही और भारतीय दलाल के रूप में चित्रित किया गया है।

  • बांग्लादेश में भारत विरोधी खुलासा, चीनी राजदूत को ‘चिकन नेक’ के पास लेकर गई यूनुस सरकार

    बांग्लादेश में भारत विरोधी खुलासा, चीनी राजदूत को ‘चिकन नेक’ के पास लेकर गई यूनुस सरकार

    बांग्लादेश में भारत विरोधी खुलासा, चीनी राजदूत को ‘चिकन नेक’ के पास लेकर गई यूनुस सरकार
    ढाका । भारत-बांग्लादेश संबंधों में जारी तनाव के बीच एक महत्वपूर्ण घटना सामने आई है। बांग्लादेश की अंतरिम सरकार ने चीन के राजदूत याओ वेन को तीस्ता नदी परियोजना क्षेत्र में जाने की अनुमति दी, जो भारत के रणनीतिक सिलीगुड़ी कॉरिडोर के बेहद करीब स्थित है। इसे ‘चिकन नेक’ के नाम से भी जाना जाता है। यह 22 किलोमीटर चौड़ा संकरा भू-भाग भारत की मुख्य भूमि को पूर्वोत्तर राज्यों से जोड़ता है।

    चीनी राजदूत याओ वेन ने सोमवार को रंगपुर जिले के कौनिया उपजिला में तीस्ता नदी के कटाव प्रभावित क्षेत्र का दौरा किया। इस दौरान बांग्लादेश की पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन सलाहकार सैयदा रिजवाना हसन उनके साथ थीं।

    मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली बांग्लादेश की अंतरिम सरकार ने कहा है कि चीनी राजदूत का यह दौरा तीस्ता रिवर कॉम्प्रिहेंसिव मैनेजमेंट एंड रेस्टोरेशन प्रोजेक्ट (TMP) के तहत चल रहे तकनीकी मूल्यांकन से जुड़ा हुआ है। यूनुस पिछले साल चीन में दिए गए अपने उस बयान को लेकर विवादों में रहे थे, जिसमें उन्होंने चीनी अर्थव्यवस्था के विस्तार और भारत के लैंडलॉक्ड पूर्वोत्तर की बात कही थी- इन टिप्पणियों की गूंज दिसंबर में ढाका सहित कई बांग्लादेशी शहरों में हुए भारत-विरोधी प्रदर्शनों तक सुनाई दी थी, जहां भारतीय राजनयिक ठिकानों को निशाना बनाया गया।
    चीन जल्द कार्यान्वयन का इच्छुक

    बांग्लादेश की जल संसाधन सलाहकार सैयदा रिजवाना हसन ने कहा कि चीन तीस्ता मास्टर प्लान (TMP) को जल्द से जल्द लागू करने का इच्छुक है। उनके अनुसार- बांग्लादेश और चीन दोनों ही TMP को अमल में लाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि परियोजना की जांच-परख (स्क्रूटनी) की प्रक्रिया अभी पूरी नहीं हुई है, इसलिए फिलहाल काम शुरू करना संभव नहीं है।
    भारत और पश्चिम बंगाल की चिंताएं

    बांग्लादेश के उत्तरी जिलों में कृषि और आजीविका के लिए तीस्ता नदी जीवनरेखा मानी जाती है। लेकिन भारत के लिए- खासतौर पर पश्चिम बंगाल के लिए भी यह नदी उतनी ही अहम है। इसी कारण तीस्ता जल-बंटवारे को लेकर दशकों से बातचीत चल रही है, मगर पश्चिम बंगाल सरकार की चिंताओं के चलते अंतिम समझौता अब तक नहीं हो सका है।

    ढाका-बीजिंग बातचीत

    रविवार को चीनी राजदूत याओ वेन और बांग्लादेश के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार खलीलुर रहमान के बीच हुई बैठक के बाद यूनुस की प्रेस विंग ने सोशल मीडिया मंच X पर बताया- दोनों पक्षों ने साझा हितों के मुद्दों पर विचारों का आदान-प्रदान किया और बांग्लादेश–चीन की दीर्घकालिक मित्रता व विकास सहयोग की पुष्टि की।

    पोस्ट के मुताबिक, बातचीत में तीस्ता रिवर कॉम्प्रिहेंसिव मैनेजमेंट एंड रेस्टोरेशन प्रोजेक्ट और प्रस्तावित बांग्लादेश–चीन फ्रेंडशिप हॉस्पिटल जैसे मुद्दे भी शामिल थे। इसमें यह भी कहा गया कि चीनी राजदूत ने परियोजना क्षेत्र का दौरा करने की जानकारी दी और तकनीकी मूल्यांकन को तेजी से पूरा करने की चीन की प्रतिबद्धता दोहराई।

    बांग्लादेश सरकार ने बताया कि चीनी राजदूत ने देश के लोकतांत्रिक बदलाव के लिए अपने देश का समर्थन जताया और आगामी राष्ट्रीय चुनावों के सफल आयोजन की शुभकामनाएं भी दीं। गौरतलब है कि 2024 में मुख्य सलाहकार नियुक्त किए गए मुहम्मद यूनुस ने 2025 में चीन में दिए एक इंटरव्यू में बीजिंग से बांग्लादेश में मजबूत आर्थिक ढांचे के निर्माण का आह्वान किया था। उन्होंने बांग्लादेश को क्षेत्र में समुद्र का एकमात्र संरक्षक बताते हुए उसके रणनीतिक महत्व का जिक्र किया था।

    सिलीगुड़ी कॉरिडोर भारत के लिए रणनीतिक गला है, क्योंकि कोई भी व्यवधान पूर्वोत्तर के लगभग 5 करोड़ लोगों की सुरक्षा को खतरे में डाल सकता है। यह क्षेत्र नेपाल, भूटान, बांग्लादेश और चीन से घिरा हुआ है। हाल के महीनों में बांग्लादेश द्वारा लालमोनिरहाट पुराने एयरबेस को सक्रिय करने और चीन की संभावित भागीदारी की खबरें भी भारत के लिए चिंता का विषय रही हैं।

  • करूर भगदड़ मामला: CBI ने विजय से की 6 घंटे तक पूछताछ, अब होगा फैसला ?

    करूर भगदड़ मामला: CBI ने विजय से की 6 घंटे तक पूछताछ, अब होगा फैसला ?

    नई दिल्ली । केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने करूर भगदड़ मामले के सिलसिले में तमिलगा वेत्री कषगम (TVK) प्रमुख विजय से सोमवार को एजेंसी मुख्यालय में लगभग छह घंटे तक पूछताछ की। अधिकारियों ने बताया कि विजय पूर्वाह्न 10:20 बजे लग्जरी एसयूवी के काफिले में लोधी रोड स्थित सीबीआई मुख्यालय पहुंचे, जहां बड़ी संख्या में बैरिकेड लगाए गए थे। उन्होंने बताया कि पूछताछ के बाद विजय शाम को लगभग पांच बजे अपनी एसयूवी से सीबीआई मुख्यालय से बाहर आए, गाड़ी से उतरे, हाथ हिलाकर समर्थकों एवं मीडियाकर्मियों का अभिवादन किया और फिर वापस एसयूवी में बैठकर उस पांच सितारा होटल के लिए रवाना हो गए, जहां वह ठहरे हुए हैं। इससे पहले, विजय से 12 जनवरी को यहां सीबीआई मुख्यालय में छह घंटे से अधिक समय तक पूछताछ की गई थी।

    अधिकारियों के मुताबिक, टीवीके प्रमुख को 13 जनवरी को फिर से आने के लिए कहा गया था, लेकिन अभिनेता ने पोंगल का हवाला देते हुए दूसरी तारीख मांगी थी, जिसके बाद सीबीआई ने उन्हें सोमवार को दूसरे दौर की पूछताछ के लिए तलब किया था।

    विजय से पूछताछ पूरी होने के बाद टीवीके के संयुक्त महासचिव सीटी निर्मल कुमार ने सीबीआई मुख्यालय के बाहर संवाददाताओं से कहा कि बहुत सारी अफवाहें फैलाई जा रही हैं, जो सच नहीं हैं। हम सभी जानते हैं कि करूर में क्या हुआ था। जब गृह मंत्री पिछले दिनों तमिलनाडु आए थे, तब प्रदेश भाजपा अध्यक्ष नैनार नागेंद्रन ने खुले तौर पर कहा था कि करूर से मौजूदा विधायक सेंथिल बालाजी 41 लोगों की मौत के लिए जिम्मेदार हैं और उन्हें तलब किए जाने तथा उनसे पूछताछ किए जाने की जरूरत है।

    उन्होंने कहा कि हम जांच एजेंसियों के साथ सहयोग कर रहे हैं। कृपया किसी भी तरह की गलत सूचना न फैलाएं। विजय को आगे की पूछताछ के लिए कोई समन जारी नहीं किया गया है। निर्मल कुमार ने कहा कि हम जानते हैं कि इस घटना के लिए कौन जिम्मेदार है, किसने ऐसा किया है और इसके पीछे क्या कारण है। इसलिए हमें कोई अपराधबोध नहीं है…

    हमारे नेता सहयोग करना चाहते थे। हम चाहते हैं कि असली अपराधी को न्याय के कटघरे में लाया जाए… हमें जांच के लिए उपस्थित होने में कोई संकोच नहीं है।

    अधिकारियों के अनुसार, विजय से सीबीआई की भ्रष्टाचार विरोधी इकाई से चुने गए उप अधीक्षक रैंक के एक अधिकारी के नेतृत्व वाली टीम ने पूछताछ की। उन्होंने बताया कि टीवीके प्रमुख से रैली से जुड़े फैसलों, उनके देर से पहुंचने और भाषण जारी रखने के कारणों, मौके पर मची अफरा-तफरी की जानकारी होने, भीड़ की संख्या और भीड़ प्रबंधन में हुई चूक से संबंधित कई सवाल पूछे गए। अधिकारियों ने कहा कि आरोपपत्र में व्यक्तियों की भूमिका तय करने का फैसला विजय, उनकी पार्टी के वरिष्ठ पदाधिकारियों और रैली की अनुमति देने तथा उसके प्रबंधन में शामिल पुलिस व जिला प्रशासन के अधिकारियों के बयानों के गहन विश्लेषण के बाद ही लिया जाएगा।

    गौरतलब है कि उच्चतम न्यायालय के आदेश के बाद सीबीआई ने करूर भगदड़ मामले की जांच विशेष जांच दल (SIT) से अपने हाथ में ली थी। केंद्रीय जांच एजेंसी 27 सितंबर 2025 को तमिलनाडु के करूर में हुई भगदड़ की घटना से जुड़े सबूत जुटा रही है, जिसमें 41 लोगों की जान चली गई थी और 60 से अधिक लोग घायल हो गए थे।
  • कोर्ट रूम में ही भिड़ गए कपिल सिब्बल और ASG राजू, जानिए पूरा मामला

    कोर्ट रूम में ही भिड़ गए कपिल सिब्बल और ASG राजू, जानिए पूरा मामला

    नई दिल्ली । दिल्ली हाई कोर्ट में सोमवार (19 जनवरी) को बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री, पूर्व रेल मंत्री और राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव की कथित लैंड-फॉर-जॉब्स स्कैम मामले को रद्द करने की एक याचिका पर सुनवाई हो रही थी। लालू यादव की तरफ से वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल मामले में पैरवी कर रहे थे, जबकि सीबीआई की तरफ से एडिशनल सॉलिसिटर जनरल (ASG) एसवी राजू पक्ष रख रहे थे लेकिन कोर्ट रूम कुछ ऐसा हुआ कि दोनों आपस में ही उलझ गए और दोनों के बीच खूब बीच तीखी बहस हुई। लालू यादव ने हाई कोर्ट में याचिका दायर कर कथित लैंड-फॉर-जॉब्स घोटाले के मामले को रद्द करने की मांग की थी।

    किस बात पर हुआ विवाद?
    इस दौरान कपिल सिब्बल ने दलील दी कि इस मामले में मुकदमा चलाने के लिए पूर्व अनुमति (सैंक्शन) जरूरी है, जो नहीं ली गई। उन्होंने कहा कि सीबीआई ने खुद पहले इस मामले में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की थी, ऐसे में अब उसी के खिलाफ दलील देना गलत है।

    इस पर सीबीआई की ओर से पेश ASG एसवी राजू ने सिब्बल की दलीलों पर आपत्ति जताई और आरोप लगाया कि वह नए मुद्दे उठा रहे हैं और कानून की गलत व्याख्या कर रहे हैं। ASG राजू ने कहा, “सिब्बल ने नए मुद्दे पर बहस की है। मुझे सही कानून बताना है। मिस्टर सिब्बल गुमराह करने वाली दलीलें देते हैं और मुझे बहस नहीं करने देते।”

    कोर्ट में बढ़ा तनाव, तीखी बहस
    ASG राजू के इस आरोप पर कपिल सिब्बल नाराज हो गए और उन्होंने तपाक के कहा, “आपने ऐसा कहने की हिम्मत कैसे की कि मैंने अदालत को गुमराह किया है। मैंने कभी किसी कोर्ट को गुमराह नहीं किया।

    आप होंगे एडिशनल सॉलिसिटर जनरल, लेकिन जज नहीं हैं।” इसके जवाब में ASG राजू ने कहा, “हां, आपने कोर्ट को गुमराह किया है, यह मेरी दलील है और मैं बताऊंगा कि आपने कैसे गुमराह किया और आप मुझे बताने नहीं दे रहे हैं।” उन्होंने कहा कि अदालत के सामने सही कानून रखना उनका कर्तव्य है और वह अपनी बात पर कायम हैं।
    जज ने किया हस्तक्षेप
    बहस के दौरान कपिल सिब्बल ने राजू की पेशेवर मर्यादा पर भी सवाल उठाए, जिससे माहौल और तनावपूर्ण हो गया। हालांकि, ASG राजू ने अपेक्षाकृत शांत लहजे में कहा कि वह सिब्बल का सम्मान करते हैं, लेकिन कानूनी स्थिति स्पष्ट करना जरूरी है। मामले की सुनवाई कर रहे जस्टिस ररविंदर डुडेजा ने कोर्ट रूम में स्थिति को संभालते हुए कहा, “माहौल को थोड़ा शांत होने दीजिए।” इसके बाद कोर्ट ने दिन की सुनवाई समाप्त कर दी।
    आगे क्या फैसला हुआ?

    हाई कोर्ट ने दोनों पक्षों को निर्देश दिया कि वे अपनी-अपनी संक्षिप्त लिखित दलीलें दाखिल करें। ये दलीलें अधिकतम पांच पन्नों की होंगी और एक सप्ताह के भीतर जमा करनी होंगी। इसके बाद मामले पर आगे विचार किया जाएगा।
    क्या है लैंड-फॉर-जॉब्स मामला?

    सीबीआई का आरोप है कि 2004 से 2009 के बीच, जब लालू प्रसाद यादव रेल मंत्री थे, तब रेलवे में ग्रुप-डी की नौकरियों के बदले उनके परिवार और करीबी लोगों के नाम पर जमीन ली गई। सीबीआई ने इस मामले में 2022 में केस दर्ज किया और बाद में लालू यादव, उनके परिवार के सदस्यों और अन्य लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की। लालू यादव ने हाई कोर्ट में दलील दी है कि यह जांच भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत जरूरी पूर्व अनुमति के बिना शुरू की गई, इसलिए पूरा मामला रद्द किया जाना चाहिए।

  • ट्रंप की ग्रीनलैंड पर कब्जे की धमकी… अमेरिका ने पिटुफिक स्पेस बेस पर भेजा मिलिट्री एयरक्राफ्ट

    ट्रंप की ग्रीनलैंड पर कब्जे की धमकी… अमेरिका ने पिटुफिक स्पेस बेस पर भेजा मिलिट्री एयरक्राफ्ट


    वाशिंगटन।
    अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) की ग्रीनलैंड पर (Occupation of Greenland) कब्जा करने की धमकियों के बीच अब अमेरिका ने एक ऐसा कदम उठाया जिससे तनाव और बढ़ गया है। अमेरिका ने हाल ही में ग्रीनलैंड के पिटुफिक स्पेस बेस (Pitufik Space Base) पर एक नॉर्थ अमेरिकन एयरोस्पेस डिफेंस कमांड (NORAD) विमान की तैनाती कर दी है। मिलिट्री एयरक्राफ्ट की तैनाती को लेकर अमेरिका का कहना है कि यह विमान अपने पुराने लक्ष्य को हासिल करने में मदद करेगा। अमेरिका ने यह भी कहा कि यह कार्रवाई डेनमार्क और ग्रीनलैंड को बताकर की गई है।

    बता दें कि पिटुफिक स्पेस बेस एक अहम अमेरिकी मिलिट्री इंस्टॉलेशन और कम्युनिकेशन हब है। यहां एक मिसाइल वॉर्निंग सिस्टम भी है जो उत्तर अमेरिका की सुरक्षा के लिए बहुत जरूरी है। वहीं हाई आर्कटिक में इसकी लोकेशन को वजह से इस क्षेत्र में इसका अहम रणनीतिक महत्व है।

    अमेरिका से पहले डेनमार्क ने भी ग्रीनलैंड में अपनी मिलिट्री मौजूदगी बढ़ा दी है। रिपोर्ट्स के मुताबिक सोमवार को कई डेनिश सैनिकों और मिलिट्री उपकरणों को ले जाने वाले कई विमान द्वीप पर उतारे गए हैं। डेनिश रक्षा बलों ने बताया है कि देश की सेना प्रमुख के साथ सैनिकों की एक बड़ी टुकड़ी को नुक और कांगेरलुसुआक में तैनात किया गया है। इससे पहले यहां डेनिश सुरक्षा बलों के नेतृत्व में एक मल्टीनेशनल मिलिट्री एक्सरसाइज भी हुआ था।

    ट्रंप ने लगाया 10 फीसदी टैरिफ
    इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने डेनमार्क, फिनलैंड, फ्रांस, जर्मनी, नीदरलैंड्स, नॉर्वे, स्वीडन और ब्रिटेन पर 10 फीसदी अतिरिक्त आयात शुल्क लगाने की घोषणा की थी। ट्रंप ने इन देशों द्वारा ग्रीनलैंड की राजधानी नूक में ‘ऑपरेशन आर्कटिक एंड्योरेंस’ नाम के एक सैन्य अभ्यास के तहत सैनिक तैनात करने के बाद यह कदम उठाया।

    नाटो देशों का कहना है कि यह तैनाती ग्रीनलैंड की स्वायत्तता के समर्थन के लिए की गई थी, खासकर उन रिपोर्टों के बाद, जिनमें दावा किया गया था कि ट्रंप प्रशासन संसाधन-समृद्ध इस आर्कटिक द्वीप को “राष्ट्रीय सुरक्षा कारणों” से अपने अधीन करना चाहता है। इसके जवाब में ट्रंप ने कहा कि यह आयात शुल्क एक फरवरी से लागू होगा और एक जून से बढ़ाकर 25 प्रतिशत कर दिया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि यह शुल्क तब तक लागू रहेगा जब तक ग्रीनलैंड की पूर्ण और सम्पूर्ण खरीद को लेकर कोई समझौता नहीं हो जाता।

    यूरोपीय नेताओं ने प्रस्तावित आयात शुल्क की कड़ी निंदा की है और चेतावनी दी कि इस तरह के कदम अटलांटिक पार संबंधों को कमजोर कर सकते हैं और एक खतरनाक गिरावट के चक्र को जन्म दे सकते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि डेनमार्क के नेतृत्व वाला सैन्य अभ्यास आवश्यक सुरक्षा जरूरतों के जवाब में है और इससे किसी को कोई खतरा नहीं है।

  • भारतीय बाजारों की कमान अब घरेलू निवेशकों के हाथ… वैश्विक उथल-पुथल के बाद भी स्थिति मजबूत

    भारतीय बाजारों की कमान अब घरेलू निवेशकों के हाथ… वैश्विक उथल-पुथल के बाद भी स्थिति मजबूत


    नई दिल्ली।
    रूसी तेल (Russian oil), वेनेजुएला (Venezuela), ईरान में प्रदर्शन (Iran protests) और ग्रीनलैंड पर कब्जे की मंशा हर थोड़े समय बाद इन मुद्दों से शेयर बाजार (Stock market) सहमे हैं। इन सबके बीच भारतीय शेयर बाजार (Indian Stock Market) में ज्यादा गिरावट देखने को नहीं मिल रही। हालांकि कुछ सेक्टर में गिरावट है, स्मॉल कैप और मिड कैप में मुनाफावसूली चल रही है लेकिन सूचकांक इस गिरावट को दर्शा नहीं रहे हैं। इस संबंध में बाजार विशेषज्ञ अनुज गुप्ता से सवाल किए गए। पेश हैं उनके जवाब-

    विदेशियों की तेज बिकवाली से भी बाजार क्यों नहीं टूटा?
    अब भारतीय शेयर बाजार पूरी तरह विदेशी निवेशकों पर निर्भर नहीं है। घरेलू संस्थागत निवेशक-जैसे म्यूचुअल फंड, बीमा कंपनियां और ईपीएफओ लगातार खरीदारी कर रहे हैं। एसआईपी के जरिए बढ़ती रिटेल भागीदारी से हर महीने आने वाला स्थायी निवेश विदेशी बिकवाली की भरपाई कर देता है।

    क्या भारतीय शेयर बाजार अब घरेलू निवेशकों से चल रहा है?
    हां, काफी हद तक। पहले बाजार विदेश निवेशकों के मूड पर निर्भर रहता था, लेकिन अब घरेलू निवेशकों की हिस्सेदारी बढ़ गई है। यही वजह है कि विदेशी बिकवाली का असर सीमित दिखता है। भारतीय बाजार का ढांचा बदल रहा है- देसी संस्थानों की हिस्सेदारी रिकॉर्ड पर है, एसआईपी से रिटेल निवेश साल-दर-साल बढ़ रहा, बाजार में लंबी अवधि का पैसा ज्यादा आ रहा है।

    ज्यादातर शेयर गिर रहे हैं, फिर भी निफ्टी-सेंसेक्स क्यों टिके हैं?
    निफ्टी और सेंसेक्स कुछ बड़ी कंपनियों पर आधारित हैं। इन बड़े शेयरों का अधिमान इतना ज्यादा होता है कि अगर वे स्थिर रहें, तो सूचकांक भी स्थिर रहते हैं, चाहे बाकी शेयर गिर रहे हों। सूचकांकों की हकीकत यह है कि निफ्टी के शीर्ष 10 शेयरों का अधिमान 60% है, इसमें बैंक और आईटी सेक्टर का दबदबा है और छोटे शेयरों का असर सीमित है।

    सूचकांक में गड़बड़ी हो रही है?
    नहीं, इसे सूचकांक प्रबंधन कहना सही नहीं है। यह सूचकांकों की बनावट का असर है। कुछ गिने-चुने बड़े शेयर पूरे सूचकांकों की दिशा तय करते हैं। यह ‘खेल’ संभव नहीं है क्योंकि सूचकांकों के नियम तय और पारदर्शी होते हैं, उनका अधिमान पहले से निर्धारित है, कोई रोज इनके उतार-चढ़ाव को नियंत्रित नहीं कर सकता।

    तो क्या बाजार की असली हालत सूचकांक इंडेक्स नहीं दिखा रहे?
    पूरी तरह नहीं। सूचकांक दिशा दिखाते हैं, लेकिन अंदरूनी हालात नहीं। इस समय गिरने वाले शेयरों की संख्या बढ़ने वालों से ज्यादा है, यानी बाजार के भीतर करेक्शन चल रहा है।

    मिडकैप और स्मॉलकैप शेयर ज्यादा क्यों टूट रहे हैं?
    इन शेयरों में पहले बहुत तेज तेजी आई थी। मूल्याकंन महंगे हो गए थे, इसलिए निवेशक अब मुनाफावसूली कर रहे हैं। साथ ही जोखिम से बचने की प्रवृत्ति भी बढ़ी है।

    खुदरा निवेशकों की भूमिका कितनी अहम है?
    बहुत अहम। करोड़ों रिटेल निवेशक एसआईपी के जरिए हर महीने निवेश कर रहे हैं। यह पैसा बाजार को स्थिरता देता है।

  • शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद को संगम में स्नान से नहीं…. वाहन से जाने से रोका,,,प्रशासन ने दी सफाई

    शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद को संगम में स्नान से नहीं…. वाहन से जाने से रोका,,,प्रशासन ने दी सफाई


    प्रयागराज।
    उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के प्रयागराज (Prayagraj) में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद (Shankaracharya Avimukteshwaranand) को संगम जाने से रोके जाने को लेकर अब प्रशासन ने सफाई दी है। मेला प्राधिकरण के आईसीसीसी सभागार में आयोजित प्रेसवार्ता में अफसरों ने स्पष्ट किया कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को संगम स्नान से नहीं रोका गया था, यह भ्रम फैलाया जा रहा है। उनसे वाहन से उतरकर स्नान के लिए पैदल जाने का अनुरोध किया गया था। तीन घंटे तक लगातार आग्रह करने के बाद भी वह अपनी जिद पर अड़े रहे। बिना अनुमति के मौनी अमावस्या (Mauni Amavasya) जैसे महत्वपूर्ण स्नान पर्व की व्यवस्था में व्यवधान उत्पन्न करने का प्रयास किया।

    मंडलायुक्त सौम्या अग्रवाल ने कहा कि मौनी अमावस्या से एक दिन पहले स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने दो वाहनों की अनुमति मांगी थी लेकिन मेला प्रशासन ने अत्यधिक भीड़ व सुरक्षा का हवाला देते हुए मना कर दिया था। इसके बावजूद बड़ी संख्या में समर्थकों के साथ पालकी पर सवार होकर संगम नोज के करीब तक पहुंच गए। पुलिस आयुक्त जोगेंद्र कुमार ने बताया कि पीपा पुल नंबर दो को एक दिन पहले से बंद रखा गया था। एएसपी कल्पवासी थाना प्रभारी ने रोकने का प्रयास किया, लेकिन स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के समर्थकों ने बैरिकेड तोड़ दिया। सीसीटीवी फुटेज के साक्ष्य के आधार पर विधिक कार्रवाई की जाएगी। साधु-संतों की पिटाई के जो आरोप लगाए जा रहे हैं, उसकी जांच कराई जाएगी।

    मेलाधिकारी ऋषिराज ने कहा कि मौनी स्नान पर्व पर किसी तरह के वाहन का इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं दी गई थी। वहीं, डीएम मनीष वर्मा ने कहा कि श्रद्धालुओं की सुरक्षा व सुविधा प्राथमिकता थी। इसी कड़ी में अविमुक्तेश्वरानंद को वाहन लेकर संगम नोज तक जाने से रोका गया था। ताकि किसी तरह की भगदड़ की स्थिति उत्पन्न न हो सके।


    शंकराचार्य का प्रोटोकॉल देने पर है रोक: मेलाधिकारी

    मेलाधिकारी ऋषिराज ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने 14 अक्तूबर 2022 को स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को शंकराचार्य के तहत प्रोटोकॉल देने पर रोक लगाने का आदेश दिया है। न्यायालय के आदेश का पालन करते हुए मेला में उन्हें शंकराचार्य ज्योतिषपीठ नहीं बल्कि बद्रिका आश्रम सेवा शिविर के नाम पर जमीन आवंटित की गई है। प्रेसवार्ता के दौरान अफसर अविमुक्तेश्वरानंद को स्वामी के नाम से ही संबोधित करते रहे।

  • अवैध प्रवासन बनी चुनौती.. 5 साल में 81 देशों ने एक लाख से ज्यादा भारतीयों को किया डिपोर्ट

    अवैध प्रवासन बनी चुनौती.. 5 साल में 81 देशों ने एक लाख से ज्यादा भारतीयों को किया डिपोर्ट


    नई दिल्ली।
    अवैध प्रवासन (Illegal Migration) सभी देशों के लिए चुनौती बनी हुई है। कई देशों में यह राजनीतिक मुद्दा भी बना है। विदेश मंत्रालय (Ministry of External Affairs) के आंकड़े बताते हैं कि विदेशों में भारतीयों के अवैध रुप से प्रवासन (Illegal Migration of Indians) के मामले बढ़ रहे हैं। पिछले पांच सालों के दौरान 81 देशों से एक लाख से भी ज्यादा भारतीयों को डिपोर्ट (Deport-वापस भेजना) किया गया है। यह संख्या लगातार बढ़ रही है। मौजूदा समय में औसतन 25 हजार भारतीय हर साल डिपोर्ट होकर आ रहे हैं। जबकि, पांच साल पहले तक यह संख्या 14-15 हजार के बीच होती थी।

    विदेश मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार दुनिया के तमाम छोटे बड़े देशों से भारतीयों को डिपोर्ट किया जा रहा है। यहां तक की बांग्लादेश, म्यांमार, श्रीलंका, कंबोडिया से भी सैकड़ों भारतीयों को डिपोर्ट किया गया है। 2021-2025 के दौरान करीब 1.05 लाख भारतीय वापस भेजे गए हैं।


    विदेशों से वापस भेजने के दो प्रमुख कारण

    विदेश मंत्रालय के अनुसार दो प्रमुख कारणों से डिपोर्ट किया जाता है। एक वीजा की अवधि खत्म होने के बावजूद अवैध रुप से रहने के कारण। दूसरे, बिना वर्क वीजा के किसी दूसरे देश में रोजगार करना। कुछ मामलों में छोटे-मोटे आपराधिक कृत्यों के कारण भी डिपोर्ट कर दिया जाता है। मंत्रालय के अनुसार पिछले पांच सालों में सबसे ज्यादा 68258 भारतीयों को सऊदी अरब से डिपोर्ट किया गया है। दूसरे नंबर पर अमेरिका से 7824 तथा मलेशिया से 6553 लोगों को डिपोर्ट किया गया।

    कुछ देशों से डिपोर्ट होने वालों की संख्या में भारी इजाफा हुआ है। 2021 में अमेरिका से 808 लोग डिपोर्ट हुए थे लेकिन 2025 में यह संख्या 3812 हो गई। यूएई से तब 358 डिपोर्ट हुए थे लेकिन 2025 में यह 1467 पहुंच गई। इसी प्रकार म्यांमार से डिपोर्ट होने वालों की संख्या 338 से बढ़कर 1591 हो गई। बहरीन से वापस भेजे गए भारतीय 273 से बढ़कर 764 तक हो गए। बांग्लादेश से 64 से 156, थाइलैंड से 256 से 481, मालदीव से 16 से 127, कंबोडिया से 44 से 305, कनाडा से 27 से 188 लोग भारत भेजे गए हैं।


    अमेरिका और खाड़ी देशों से सबसे अधिक भारतीय भेजे गए

    आंकड़े बताते हैं कि अमेरिका, खाड़ी देशों के साथ-साथ यूरोप के छोटे देशों से भी बड़े पैमाने पर लोग डिपोर्ट होकर भारत आ रहे हैं। इनमें जार्जिया से 133, पनामा से 188, पोलेंड से 127, यूके से 578, म्यांमार से 2165, चीन से 1000, बांग्लादेश से 478, श्रीलंका से 1866 भारतीय पिछले पांच सालों में वापस भेजे गए हैं।

    अवैध प्रवासन चुनौती
    हालांकि सभी देश इस प्रकार के आंकड़ों को साझा नहीं करते हैं। विदेश मंत्रालय के ये आंकड़े अपने दूतावासों से मिले हैं। लेकिन डिपोर्ट होने वाले नागरिक चीन, पाकिस्तान, बांग्लादेश, श्रीलंका सभी के हैं। दरअसल, ज्यादातर मामले रोजगार से जुड़े हैं जिसके चलते में लोग गलत वीजा पर रोजगार करते हैं या वीजा खत्म होने के बाद भी काम करते रहते हैं।


    कैसे होते हैं डिपोर्ट

    यदि कोई भारतीय डिपोर्ट किया जाता है तो संबंधित देश भारत के दूतावास से संपर्क करता है। दूतावास उसकी नागरिकता की पुष्टि होने के बाद उसे भारत भेजने की अनुमति देता है। इसके लिए जरूरी दस्तावेज जारी किया जाता है।

  • US-भारत ट्रेड डील पर रोड़ा बन सकती है दाल… इंपोर्ट ड्यूटी लगाने से अमेरिका को लगी मिर्ची

    US-भारत ट्रेड डील पर रोड़ा बन सकती है दाल… इंपोर्ट ड्यूटी लगाने से अमेरिका को लगी मिर्ची


    वाशिंगटन।
    अमेरिका और भारत (America and India) के बीच ट्रेड डील (Trade deal) एक बार फिर अटकती नजर आ रही है। इस बार इस डील के रास्ते में रोड़ा बनी है दाल। दो अमेरिकी सांसदों ने इसको लेकर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (President Donald Trump) को पत्र लिखा है। इसमें ट्रंप से कहा गया है कि वो भारत पर दबाव बनाएं कि अमेरिकी दालों (American pulses) के आयात से 30 फीसदी इंपोर्ट ड्यूटी (30 Percent Import Duty) हटाई जाए। अमेरिकी सांसदों ने भारत द्वारा लगाई गई इंपोर्ट ड्यूटी को गैर-जरूरी बताया गया है। साथ ही इनका यह भी कहना है कि इसकी वजह से अमेरिकी उत्पादकों को काफी नुकसान हो रहा है। बता दें कि भारत ने यह आयात शुल्क अमेरिका द्वारा भारत पर 50 फीसदी टैरिफ लगाने के बाद लगाया है। आशंका है कि इसके चलते अमेरिका-भारत के बीच चल रही ट्रेड डील फिर पटरी से उतर सकती है।


    सांसदों के लेटर में क्या कहा गया

    अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को यह पत्र रिपब्लिकन सीनेटरों ने लिखे हैं। इनमें से एक हैं मोंटाना से स्टीव डेन्स और दूसरे हैं उत्तरी डकोटा से केविन क्रेमर। पत्र में कहा गया है कि उनके राज्य दो बड़े दाल उत्पादकों में से हैं, जिसमें मटर भी शामिल है। भारत इनका सबसे बड़ा उपभोक्ता है, जो विश्व का 27 फीसदी है। इसके मुताबिक भारत में लेंटिल्स, चिकपीज, सूखी दालों और मटर की सबसे ज्यादा खपत है। लेकिन भारत ने इन श्रेणियों में अमेरिकी निर्यात पर टैरिफ लगा रखा है। अमेरिकी सांसदों ने कहा कि भारत ने पिछले साल 30 अक्टूबर को पीली दाल पर भी 30 फीसदी टैरिफ लगा दिया।


    पीएम मोदी से बात करने की सलाह

    अमेरिकी सांसदों ने भारत द्वारा लगाए गए टैरिफ को अनफेयर बताते हुए अमेरिकी दाल उत्पादकों को नुकसान होने की बात कही है। साथ ही अमेरिकी सांसदों ने राष्ट्रपति ट्रंप को सलाह दी है कि वह दाल पर भारत द्वारा लगाए गए टैरिफ को लेकर पीएम मोदी से बात करें। ताकि दोनों देशों के बीच एक सहयोग बने, जिससे अमेरिकी उत्पादकों और भारतीय उपभोक्ताओं दोनों को फायदा मिल सके। दोनों सीनेटरों ने अपने राज्यों में बेहतर कृषि उत्पादों के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति का शुक्रिया भी अदा किया।


    लंबे समय से तनाव

    बता दें कि टैरिफ के मुद्दे पर भारत और अमेरिका के बीच लंबे समय से तनाव कायम है। इसकी शुरुआत अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारत पर 50 प्रतिशत शुल्क (टैरिफ) लगाने के बाद हुई। इस टैरिफ में रूसी कच्चे तेल की खरीद पर 25 प्रतिशत का अतिरिक्त शुल्क भी शामिल है। इन तनावों के बीच अमेरिकी अधिकारियों द्वारा भारत के प्रति गलत टिप्पणियां माहौल को और खराब कर रही हैं। कुछ दिन पहले ही वाइट हाउस के व्यापार सलाहकार पीटर नवारो ने एक बार फिर भारत की आलोचना करते हुए सवाल उठाया कि अमेरिका के नागरिक भारत में कृत्रिम मेधा (एआई) के लिए भुगतान क्यों कर रहे हैं?

  • भारत दौरे पर आए UAE के राष्ट्रपति, PM मोदी ने गिफ्ट किया शाही झूला… साथ झूलते भी दिखे

    भारत दौरे पर आए UAE के राष्ट्रपति, PM मोदी ने गिफ्ट किया शाही झूला… साथ झूलते भी दिखे


    नई दिल्ली।
    एक दिन के भारत दौरे (India visit) पर आए यूएई के राष्ट्रपति मोहम्मद बिन जायेद अल नाहयान (UAE President Mohammed bin Zayed Al Nahyan) का एयरपोर्ट पर ही शानदार स्वागत किया गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) प्रोटोकॉल तोड़कर उनकी अगुवाई करने दिल्ली एयरपोर्ट पर पहुंचे थे। दोनों नेता बेहद गर्मजोशी के साथ गले मिले। मुलाकात के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें पारंपरिक तोहफे भी दिए।

    प्रधानमंत्री मोदी ने यूएई के राष्ट्रपति को शाही नक्काशीदार एक झूला गिफ्ट किया। इसमें गुजराती हस्तशिल्प की कलाकारी दिखाई देती है। इसके अलावा झूला अच्छे संबंधों और सहजता का प्रतीक है। इसके अलावा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चांदी की एक संदूक में पश्मीना शॉल भी नाहयान को गिफ्ट किया। यह चांदी का ब़क्स तेलंगाना में बनाया गया है। दोनों गिफ्ट एक साथ देकर भारत की साझी विरासत और परंपरा को दिखाने का प्रयास किया गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और नाहयान साथ में झूले पर बैठे भी नजर आए।

    यह उपहार वर्ष 2026 को संयुक्त अरब अमीरात द्वारा ‘परिवार का वर्ष’ घोषित किए जाने के संदर्भ में भी विशेष रूप से सार्थक है। प्रधानमंत्री ने उन्हें एक सुसज्जित चांदी के बॉक्स में पश्मीना शॉल भी भेंट की। यह पश्मीना शाल कश्मीर की है और अत्यंत महीन ऊन से हाथ से बनाई जाती है, जिससे यह मुलायम, हल्की और गर्म होती है। शाल को तेलंगाना में निर्मित एक सजावटी चांदी के बॉक्स में रखा गया है। ये दोनों उपहार मिलकर भारत की समृद्ध हथकरघा और हस्तशिल्प परंपरा का प्रतिनिधित्व करते हैं।

    इसी प्रकार, सुसज्जित चांदी के बॉक्स में रखी गई पश्मीना शाल शेखा फातिमा बिंत मुबारक अल केतबी को भी भेंट की गई। उन्हें चांदी के बॉक्स में कश्मीरी केसर भी उपहार स्वरूप प्रदान किया गया। कश्मीर घाटी में उगाया जाने वाला केसर अपने गहरे लाल रेशों और तीव्र सुगंध के लिए विशेष रूप से प्रसिद्ध और विशेष माना जाता है।