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  • दो दिन में बड़ी संख्या में गोवंश सड़क हादसों का शिकार रीवा में फिर 5 की मौत सड़क पर कीर्तन कर जताया विरोध

    दो दिन में बड़ी संख्या में गोवंश सड़क हादसों का शिकार रीवा में फिर 5 की मौत सड़क पर कीर्तन कर जताया विरोध


    रीवा । रीवा सीधी मार्ग पर गुढ़ थाना क्षेत्र के गुढ़वा पेट्रोल पंप के पास देर रात एक दर्दनाक सड़क हादसा सामने आया। तेज रफ्तार अज्ञात वाहन ने सड़क पर बैठे करीब 6 से 7 गोवंश को अपनी चपेट में ले लिया। हादसा इतना भीषण था कि पांच गोवंश की मौके पर ही मौत हो गई जबकि अन्य गोवंश घायल हो गए। घटना की जानकारी मिलते ही हिंदू संगठनों और गौ सेवा से जुड़े कार्यकर्ता मौके पर पहुंच गए। हादसे को लेकर लोगों में नाराजगी देखने को मिली और उन्होंने सड़क पर चक्काजाम कर विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया।

    घटना से नाराज लोग सड़क पर बैठकर कीर्तन करने लगे। प्रदर्शन के कारण रीवा सीधी मार्ग पर कुछ समय के लिए वाहनों की आवाजाही प्रभावित रही। प्रदर्शन कर रहे लोगों ने सड़क पर घायल अवस्था में पड़े गोवंश के उपचार की तत्काल व्यवस्था कराने की मांग की। साथ ही हादसे में मारे गए गोवंश को लेकर भी लोगों ने नाराजगी जताई। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि सड़क पर खुले में घूमने वाले गोवंश की वजह से लगातार हादसे हो रहे हैं और इस समस्या का स्थायी समाधान किया जाना जरूरी है।

    बताया जा रहा है कि घटना की जानकारी मिलने के बाद हिंदू संगठनों और गौ सेवकों के कार्यकर्ता मौके पर पहुंचे। उन्होंने प्रशासन से घायल गोवंश को उपचार उपलब्ध कराने और मृत गोवंश को सम्मानजनक तरीके से हटाने की मांग की। इसके साथ ही हादसे को अंजाम देने वाले अज्ञात वाहन की पहचान कर चालक के खिलाफ कार्रवाई की मांग भी उठाई गई।

    गोसेवकों के मुताबिक यह इस मार्ग पर लगातार दूसरा बड़ा हादसा है। इससे एक दिन पहले भी रीवा सीधी मार्ग पर कसई स्टैंड के पास करीब 12 गोवंश अज्ञात वाहन की चपेट में आ गए थे। लगातार दो दिनों में बड़ी संख्या में गोवंश के सड़क हादसों का शिकार होने से गौ सेवा से जुड़े लोगों में नाराजगी बढ़ गई है। उनका कहना है कि यदि समय रहते सड़क पर घूम रहे गोवंश को सुरक्षित स्थानों और गौशालाओं तक पहुंचाने की व्यवस्था की जाए तो ऐसे हादसों को रोका जा सकता है।

    गोसेवक राधा मोहन ने भी लगातार हो रहे हादसों को लेकर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि सड़क पर खुले में घूम रहे गोवंश के कारण आए दिन दुर्घटनाएं हो रही हैं। प्रशासन को अभियान चलाकर ऐसे गोवंश को सुरक्षित तरीके से गौशालाओं तक पहुंचाना चाहिए। उनका कहना है कि केवल हादसे के बाद कार्रवाई करने के बजाय समस्या के स्थायी समाधान पर ध्यान देने की जरूरत है।

    प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन के सामने कई मांगें रखीं। इनमें घायल गोवंश का तत्काल इलाज कराने के साथ सड़क पर घूम रहे गोवंश को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाना और हादसे के जिम्मेदार वाहन की पहचान कर कार्रवाई करना शामिल है। मांगों को लेकर लोगों ने कुछ समय तक चक्काजाम किया। मौके पर पहुंची पुलिस और प्रशासन की टीम ने लोगों को समझाइश दी जिसके बाद स्थिति सामान्य हुई।

    लगातार दो दिनों में हुए हादसों ने सड़क सुरक्षा के साथ आवारा गोवंश की समस्या को लेकर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना होगा कि प्रशासन इस समस्या से निपटने के लिए क्या स्थायी कदम उठाता है और अज्ञात वाहन की पहचान कर उसके चालक के खिलाफ क्या कार्रवाई की जाती है।

  • अमिताभ कांत ने बताया, देश हित में चीन के साथ सहयोग क्यों जरूरी, क्लीन टेक और औद्योगिक क्षमता पर दिया जोर

    अमिताभ कांत ने बताया, देश हित में चीन के साथ सहयोग क्यों जरूरी, क्लीन टेक और औद्योगिक क्षमता पर दिया जोर

    नई दिल्ली । इंडिया टुडे के BRICS Roundtable में नीति आयोग के पूर्व CEO अमिताभ कांत ने वैश्विक अर्थव्यवस्था, क्लीन टेक्नोलॉजी और भारत की औद्योगिक क्षमता पर विस्तार से विचार रखे. उन्होंने स्पष्ट किया कि वैश्विक उथल-पुथल के इस दौर में भारत के राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए अमेरिका और चीन दोनों पक्षों के साथ संतुलित रणनीति बनाकर काम करना अनिवार्य है.

    अमिताभ कांत के अनुसार, क्लीन टेक्नोलॉजी के लगभग सभी प्रमुख वर्टिकल्स में चीन का दबदबा है. दुनिया की करीब 95% क्लीन बैटरियां और 85% इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (EV) चीन में बनते हैं. इसके अलावा, क्रिटिकल मिनरल्स की प्रोसेसिंग तकनीक के साथ-साथ सोलर सेक्टर पर करीब 80% और विंड एनर्जी में 77% नियंत्रण चीन का ही है.

    दूसरी ओर, जीवाश्म ईंधन (Fossil Fuels) के बाजार में अमेरिका का बड़ा प्रभाव है. भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए अभी भी बड़े पैमाने पर जीवाश्म ईंधन का आयात करता है, जिस पर सालाना लगभग 180 अरब डॉलर का खर्च आता है. पश्चिम एशिया में तनाव या युद्ध की स्थिति बनते ही कच्चे तेल के दाम बढ़ते हैं, जिससे भारत के आयात बिल, रुपये की स्थिरता और पूरी अर्थव्यवस्था पर प्रतिकूल असर पड़ता है.

    देश हित में चीन के साथ काम करना क्यों है जरूरी?

    ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य को हासिल करने के लिए देश को भविष्य में तेजी से क्लीन टेक्नोलॉजी की दिशा में आगे बढ़ना होगा. ऐसे में भारत के राष्ट्रीय हित में चीन के साथ तकनीकी स्तर पर सहभागिता बनाना जरूरी है, लेकिन चीन को इस तकनीक को ‘वेपनाइज’ बनाने से रोकना होगा. चीन को यह तकनीक BRICS देशों और ग्लोबल साउथ के साथ साझा करनी चाहिए.

    चीन के नॉन-टैरिफ बैरियर्स और बाजार की असमानता

    चीन की नीति मुख्य रूप से निर्यात पर केंद्रित है, जबकि वह दूसरे देशों के आयात के लिए अपना बाजार आसानी से नहीं खोलता. चीन में मौजूद नॉन-टैरिफ बैरियर्स के कारण भारत के फार्मास्यूटिकल और ड्रग मैन्युफैक्चरर्स वहां आसानी से प्रवेश नहीं कर पाते. आगामी BRICS शिखर सम्मेलन और द्विपक्षीय वार्ताओं में भारत को चीन के सामने अपने बाजारों को खोलने और क्लीन टेक साझा करने का मुद्दा मजबूती से उठाना चाहिए.

    अमिताभ कांत ने कहा कि क्लीन टेक्नोलॉजी में किसी एक देश का अत्यधिक नियंत्रण वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए चुनौती बन सकता है। ग्लोबल साउथ के देशों के सतत विकास के लिए तकनीक, निवेश और बाजारों का आपस में साझा होना जरूरी है, ताकि एकाधिकार की स्थिति से बचा जा सके.

    भारत की आर्थिक वृद्धि पर बात करते हुए उन्होंने एक ग्लोबल इन्वेस्टमेंट बैंक की रिपोर्ट का हवाला दिया, जिसमें भारत में नई औद्योगिक क्रांति की बात कही गई है. इसके पीछे स्पेस, सेमीकंडक्टर, डेटा सेंटर, इलेक्ट्रॉनिक्स, सोलर और एयरोस्पेस जैसे हाई-ग्रोथ सेक्टर्स की मुख्य भूमिका है.

    भारत में औद्योगिक वृद्धि को रफ्तार देने के लिए सरकार ने उन क्षेत्रों को निजी कंपनियों और स्टार्टअप्स के लिए खोल दिया है, जिन पर पहले सरकारी नियंत्रण था. जियो-स्पेशियल, ड्रोन, स्पेस और डिफेंस सेक्टर्स में निजी भागीदारी और स्टार्टअप्स के आने से नई तकनीक, निवेश और प्रतिस्पर्धा को बड़ा प्रोत्साहन मिला है.

    डिजाइनिंग से आगे बढ़कर मैन्युफैक्चरिंग पर भारत का फोकस

    भारत अब केवल तकनीक और चिप डिजाइन करने तक सीमित नहीं रहना चाहता, बल्कि मैन्युफैक्चरिंग क्षमता भी बढ़ा रहा है. सेमीकंडक्टर PLI योजना की सफलता और इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग में आई तेजी इसका प्रमाण हैं. भारत का लक्ष्य घरेलू मांग पूरी करने के साथ-साथ ग्लोबल सप्लाई चेन का प्रमुख हिस्सा बनना है.

    BRICS देश दुनिया की कुल GDP का लगभग 40% हिस्सा संभालते हैं. अमिताभ कांत ने सुझाव दिया कि भारत को अपनी अध्यक्षता के दौरान संगठन का ध्यान राजनीतिक ध्रुवीकरण या ‘पश्चिम-विरोधी’ रुख पर ले जाने के बजाय व्यापार, निवेश, जलवायु और विकास जैसे व्यावहारिक मुद्दों पर केंद्रित रखना चाहिए.

    पश्चिम एशिया के तनाव और विभिन्न सदस्य देशों की अलग-अलग प्राथमिकताओं के बीच भारत को ‘कंसेंसस बिल्डिंग’ की भूमिका निभानी होगी. जैसा कि भारत ने G20 सम्मेलन में संवेदनशील मुद्दों पर आम सहमति बनाकर दिखाया था, वैसा ही नेतृत्व BRICS में भी दिखाकर सभी देशों को एक न्यूनतम साझा एजेंडे पर साथ लाना होगा.

  • कल्पना मिश्रा मामले में बढ़ा आक्रोश, 9 दिन से अनशन पर पिता; कांग्रेस ने भी तेज किया आंदोलन

    कल्पना मिश्रा मामले में बढ़ा आक्रोश, 9 दिन से अनशन पर पिता; कांग्रेस ने भी तेज किया आंदोलन


    रीवा । रीवा में कल्पना मिश्रा की मौत के मामले में न्याय और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की मांग को लेकर उनके पिता की भूख हड़ताल लगातार जारी है। गुरुवार को अनशन के नौवें दिन उनकी तबीयत बिगड़ गई। स्वास्थ्य में गिरावट का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वे अब ठीक से बैठ भी नहीं पा रहे हैं। कमजोरी बढ़ने के कारण उन्हें लेटकर ही अनशन करना पड़ रहा है। परिवार का कहना है कि लगातार कई दिनों तक भोजन नहीं लेने से उनकी हालत लगातार खराब होती जा रही है लेकिन इसके बावजूद वे अपनी मांग से पीछे हटने को तैयार नहीं हैं।

    कल्पना मिश्रा के पिता रीवा के सिरमौर चौराहे पर अनशन कर रहे हैं। परिजनों के मुताबिक पहले वे बैठकर भूख हड़ताल कर रहे थे लेकिन अब कमजोरी इतनी बढ़ गई है कि उनके लिए बैठना भी मुश्किल हो गया है। परिवार के लोगों ने बताया कि उनकी बातचीत करने की क्षमता भी प्रभावित हुई है। स्वास्थ्य बिगड़ने के बावजूद उन्होंने अनशन समाप्त करने से इनकार किया है। परिजनों का कहना है कि जब तक कल्पना को न्याय नहीं मिलता और मामले में जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई नहीं होती तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।

    कल्पना मिश्रा की मौत के बाद से ही परिवार की ओर से अस्पताल की व्यवस्थाओं और इलाज में कथित लापरवाही को लेकर सवाल उठाए जाते रहे हैं। परिवार का आरोप है कि इलाज के दौरान हुई लापरवाही के कारण यह स्थिति बनी। इसी को लेकर कार्रवाई की मांग लगातार उठाई जा रही है। परिवार की ओर से अलग अलग स्तर पर विरोध और प्रदर्शन भी किए जा रहे हैं। अब पिता की लगातार बिगड़ती सेहत ने इस मामले को और गंभीर बना दिया है।

    इधर कल्पना मिश्रा मामले को लेकर कांग्रेस का आंदोलन भी जारी है। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी गुरुवार को रीवा पहुंचे और अग्रसेन चौराहे पर पार्टी की ओर से चलाए जा रहे धरने में शामिल हुए। उन्होंने आंदोलन को समर्थन दिया। कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता और जनप्रतिनिधि पहले भी इस धरने में पहुंच चुके हैं। पार्टी नेताओं का कहना है कि रीवा की स्वास्थ्य व्यवस्था से जुड़े सवालों और कल्पना मिश्रा मामले में जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की मांग को लेकर आंदोलन जारी रहेगा।

    कांग्रेस की ओर से स्वास्थ्य व्यवस्था में सुधार और मामले की निष्पक्ष जांच की मांग भी उठाई जा रही है। पार्टी नेताओं का कहना है कि आम लोगों को बेहतर इलाज और जवाबदेह स्वास्थ्य व्यवस्था मिलनी चाहिए। वहीं कल्पना मिश्रा के परिवार का कहना है कि उनकी बेटी की मौत के मामले में जिम्मेदारी तय होना जरूरी है।

    सिरमौर चौराहे पर पिता की बिगड़ती हालत के बीच परिवार और समर्थकों की चिंता लगातार बढ़ रही है। नौ दिन से चल रही भूख हड़ताल का उनके स्वास्थ्य पर साफ असर दिखाई दे रहा है। इसके बावजूद परिवार का कहना है कि वे अपनी मांग पूरी होने तक अनशन समाप्त नहीं करेंगे। अब इस मामले में प्रशासन की ओर से क्या कदम उठाए जाते हैं और परिवार की मांगों पर किस तरह कार्रवाई होती है इस पर सभी की नजर बनी हुई है।

  • रिया अहीर और शहजाद पूनावाला में छिड़ी जुबानी जंग, ‘अंकल’ कहने पर राहुल गांधी और IQ का जिक्र कर भड़के

    रिया अहीर और शहजाद पूनावाला में छिड़ी जुबानी जंग, ‘अंकल’ कहने पर राहुल गांधी और IQ का जिक्र कर भड़के

    नई दिल्ली । रियलिटी शो बिग बॉस 20 में एंट्री नहीं मिलने के बाद मॉडल रिया अहीर और भाजपा के पूर्व प्रवक्ता शहजाद पूनावाला के बीच सोशल मीडिया पर जुबानी जंग छिड़ गई है। पूनावाला ने रिया पर निशाना साधते हुए उनके वायरल प्रोटेस्ट वीडियो और बिग बॉस में एंट्री को लेकर सवाल उठाए थे। इसके जवाब में रिया ने उन्हें ‘अंकल’ कहते हुए अपनी उम्र से तुलना की। इसके बाद पूनावाला ने भी पलटवार किया और राहुल गांधी का जिक्र करते हुए रिया की ‘मैथ्स’ और ‘आईक्यू’ पर तंज कसा।

    बिग बॉस में एंट्री नहीं मिलने के बाद शुरू हुआ विवाद

    मुंबई की मॉडल रिया अहीर उस समय चर्चा में आई थीं, जब विरोध प्रदर्शन के दौरान पुलिस वैन को रोकने का उनका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। इसके बाद वह बिग बॉस 20 में जनता के वोट से एंट्री पाने की दौड़ में शामिल हुईं। हालांकि, इस वोटिंग में पंजाबी अभिनेत्री लव गिल ने बाजी मारी और रिया शो में जगह नहीं बना सकीं।

    इसके बाद शहजाद पूनावाला ने एक रील के जरिए रिया पर निशाना साधा। उन्होंने उनके वायरल फोटो और बिग बॉस में एंट्री की कोशिश को लेकर सवाल उठाए। पूनावाला ने दावा किया कि रिया को ‘लेफ्ट-विंग इकोसिस्टम’ और ‘एंटी-मोदी यूट्यूबर्स’ का समर्थन हासिल था।

    पूनावाला ने यह भी आरोप लगाया कि रिया बिग बॉस के मंच का इस्तेमाल ‘एंटी-नेशनल’ और ‘एंटी-सनातन’ विचार फैलाने के लिए करना चाहती थीं। उन्होंने राहुल गांधी का भी जिक्र करते हुए रिया की हार पर तंज कसा।

    रिया ने शहजाद को कहा- ‘अंकल’

    पूनावाला की रील का जवाब रिया अहीर ने दो वीडियो के जरिए दिया। उन्होंने अपने जवाब की शुरुआत शहजाद पूनावाला को ‘अंकल’ कहकर की। रिया ने उनसे कहा कि उन्हें अपनी उम्र के लोगों के साथ राजनीति करनी चाहिए, ‘छोटी लड़कियों’ के साथ नहीं। रिया ने कहा कि पूनावाला उनकी उम्र से ‘दोगुने से भी ज्यादा’ हैं।

    रिया ने पूनावाला के उन दावों को भी खारिज किया, जिनमें उन्होंने राजनीतिक नेताओं के साथ उनके जुड़ाव की बात कही थी। उन्होंने कहा कि उनके खिलाफ इस्तेमाल की जा रही यही स्क्रिप्ट 50 अन्य ‘चीप इन्फ्लुएंसर्स’ भी इस्तेमाल कर चुके हैं।

    भारतीय सेना पर टिप्पणी को लेकर भी दिया जवाब

    रिया ने भारतीय सेना के सम्मान को लेकर लगाए गए आरोप पर भी जवाब दिया। उन्होंने कहा कि अगर कोई यह कह रहा है कि वह भारतीय सेना का सम्मान नहीं करतीं, तो उन्हें इसका सबूत दिखाना चाहिए। उन्होंने सवाल किया कि उन्होंने भारतीय सेना, किसी प्रोफेशनल, संस्था, धर्म या किसी व्यक्ति का कब अपमान किया है।

    रिया ने विरोध प्रदर्शन के दौरान पुलिस वाहन से जुड़ी अपनी टिप्पणी पर भी सफाई दी। उन्होंने लव गिल के साथ हुई बातचीत का जिक्र करते हुए कहा कि अगर ड्राइवर वाहन नहीं रोकता तो शायद उसी समय उनकी जिंदगी का उद्देश्य पूरा हो जाता।

    रिया ने अपने सोशल वर्क का भी किया जिक्र

    अपने दूसरे वीडियो में रिया ने लोगों की मदद करते हुए कुछ वीडियो साझा किए। इनमें महाराष्ट्र के लातूर जिले के एक कुष्ठ प्रभावित गांव का दौरा और स्कूली बच्चों को स्टेशनरी देने की कोशिशें शामिल थीं।

    रिया ने पूनावाला और उनके जैसे लोगों पर उन लोगों को निशाना बनाने का आरोप लगाया, जिनकी राजनीतिक सोच उनसे अलग है। उन्होंने यह भी कहा कि बिग बॉस का इस्तेमाल राजनीतिक एजेंडा या धर्म को बढ़ावा देने के लिए नहीं किया जा सकता क्योंकि यह शो मनोरंजन के लिए है।

    अपने वीडियो के अंत में रिया ने महिलाओं, मंदिर, इंस्टाग्राम और अपनी उम्र से आधी उम्र की लड़कियों को छोड़ देने की बात कहते हुए पूनावाला पर निशाना साधा।

    पूनावाला का पलटवार- ‘आप 28 की हैं, यंग गर्ल नहीं’

    रिया के जवाब के बाद पूनावाला ने सोशल मीडिया पर पलटवार किया। उन्होंने लिखा कि उन्हें अफसोस है कि रिया बिग बॉस के घर में एंट्री करने से पहले ही बाहर हो गईं।

    पूनावाला ने राहुल गांधी का जिक्र करते हुए कहा कि जब वह अपने चुनाव नहीं जीत सकते तो रिया को कैसे जिताएंगे। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उनकी मूल वीडियो मुख्य रूप से पत्रकार अरफा खानम शेरवानी को लेकर थी और रिया का जिक्र उसमें केवल एक हिस्से के तौर पर आया था।

    उम्र को लेकर रिया की टिप्पणी पर पूनावाला ने कहा कि रिया 28 साल की हैं और वह 38 साल के हैं, इसलिए तकनीकी रूप से वह उनकी उम्र से दोगुने नहीं हैं। इसके साथ ही उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि शायद स्कूल में ‘मैथ्स’ रिया का मजबूत विषय नहीं था।

    पूनावाला ने मजाकिया अंदाज में कहा कि शायद रिया ने उन्हें ‘56 साल के राहुल गांधी’ समझ लिया है। इसके बाद उन्होंने रिया के पुराने इंस्टाग्राम सब्सक्रिप्शन का भी जिक्र करते हुए उन पर तंज कसा।

    ‘आपका IQ और ज्ञान राहुल गांधी जैसा है’- पूनावाला

    पूनावाला ने अपने जवाब में रिया के ‘आईक्यू और नॉलेज’ पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि रिया उन्हें नहीं जानतीं तो यह ठीक है, लेकिन उनके मुताबिक रिया का आईक्यू और ज्ञान राहुल गांधी जैसा है। उन्होंने रिया के वंदे मातरम से जुड़े सवाल के दौरान दिए गए जवाब का भी जिक्र किया।

    इस तरह बिग बॉस 20 में एंट्री को लेकर शुरू हुआ विवाद अब सोशल मीडिया पर दोनों के बीच उम्र, राजनीति, प्रदर्शन और विचारधारा को लेकर तीखी बयानबाजी तक पहुंच गया है।

    कांग्रेस छोड़ भाजपा में आए पूनावाला ने भाजपा भी छोड़ी

    शहजाद पूनावाला का राजनीतिक सफर कांग्रेस से शुरू हुआ था। बाद में उन्होंने कांग्रेस छोड़कर भारतीय जनता पार्टी का दामन थामा और पार्टी के प्रमुख प्रवक्ताओं में शामिल रहे। हालांकि, अगस्त 2026 में उन्होंने भाजपा के सभी पदों और प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया। पूनावाला ने अपने फैसले के पीछे आर्थिक और निजी परिस्थितियों को वजह बताया। उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें अपने बुनियादी खर्चों के लिए पैसे की जरूरत है और अब वह निजी क्षेत्र में जाने की योजना बना रहे हैं।

    हालांकि इस बीच अटकलें लगाई जाने लगीं कि शहजाद पूनावाला फिर से कांग्रेस में वापसी कर सकते हैं। बाद में खुद शहजाद पूनावाला ने इन अटकलों पर विराम लगाते हुए इस तरह की खबरों को सिरे से खारिज कर दिया था। भाजपा छोड़ने के बावजूद उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा की विचारधारा के प्रति अपना समर्थन जारी रखने की बात कही थी।

  • शराब के खिलाफ प्रदर्शन में बवाल! शिवपुरी में महिलाओं और पुलिस-अबकारी टीम की भिड़ंत

    शराब के खिलाफ प्रदर्शन में बवाल! शिवपुरी में महिलाओं और पुलिस-अबकारी टीम की भिड़ंत


    शिवपुरी । शिवपुरी जिले में शराब दुकानों के विरोध को लेकर चल रहा प्रदर्शन गुरुवार को उस समय तनावपूर्ण हो गया जब अमोला थाना क्षेत्र के अमोल गांव में महिलाओं और पुलिस तथा आबकारी विभाग की टीम के बीच विवाद हो गया। शराब दुकान बंद कराने की मांग को लेकर पहुंची महिलाओं ने कथित तौर पर लाठियां उठा लीं और पुलिस तथा आबकारी कर्मचारियों की ओर बढ़ गईं। स्थिति बिगड़ने के बाद टीम को मौके से पीछे हटना पड़ा। घटना के वीडियो भी सामने आए हैं जिनमें प्रदर्शन के दौरान तनावपूर्ण स्थिति दिखाई दे रही है।

    जानकारी के अनुसार गुरुवार को पुलिस और आबकारी विभाग की टीम पहले से ही शराब दुकान पर मौजूद थी। इसी दौरान बड़ी संख्या में महिलाएं वहां पहुंचीं और दुकान बंद कराने की मांग करने लगीं। बातचीत के दौरान विवाद बढ़ गया और देखते ही देखते माहौल तनावपूर्ण हो गया। महिलाओं ने लाठियां हाथ में ले लीं और टीम की ओर बढ़ने लगीं। हालात को देखते हुए पुलिस और आबकारी कर्मचारियों ने पीछे हटना उचित समझा। दोपहर तक गांव में तनाव की स्थिति बनी रही और पुलिस मौके पर मौजूद रही।

    शिवपुरी जिले में शराब के खिलाफ महिलाओं का विरोध पिछले करीब एक महीने से अलग अलग इलाकों में जारी है। महिलाओं की ओर से अवैध और कच्ची शराब की बिक्री पर रोक लगाने की मांग लगातार उठाई जा रही है। पिछोर और खनियाधाना क्षेत्र में भी महिलाओं ने शराब के खिलाफ प्रदर्शन किया था। कई जगहों पर महिलाओं ने शराब बेचने वालों के ठिकानों से कच्ची और अवैध शराब बाहर निकालकर सड़क पर फेंक दी थी। कुछ स्थानों पर विरोध प्रदर्शन के दौरान चक्काजाम की स्थिति भी बनी।

    अमोला क्षेत्र में पिछले तीन दिनों से सरकारी शराब दुकानों को लेकर लगातार विरोध की घटनाएं सामने आ रही हैं। 8 सितंबर को नया अमोला नंबर दो में महिलाओं ने शराब दुकान में पहुंचकर शराब की पेटियां बाहर निकाल दी थीं और उनमें आग लगा दी थी। इसके बाद 9 सितंबर को भी महिलाएं दुकान हटाने की मांग को लेकर देर शाम तक मौके पर डटी रहीं। आबकारी विभाग की ओर से पांच दिन में दुकान हटाने के आश्वासन के बाद प्रदर्शन शांत हुआ था।

    इसी दौरान देर रात थरखेड़ा गांव में भी महिलाओं ने शराब दुकान के खिलाफ प्रदर्शन किया। यहां दुकान के भीतर रखी शराब की पेटियां बाहर निकालने की बात सामने आई। इसके अगले दिन अमोल गांव में शराब दुकान बंद कराने पहुंची महिलाओं और पुलिस तथा आबकारी टीम के बीच विवाद हो गया। लगातार तीन दिनों से सामने आ रही घटनाओं ने प्रशासन के सामने कानून व्यवस्था की चुनौती बढ़ा दी है।

    लगातार हो रहे विरोध के बीच शराब ठेकेदारों ने भी जिला आबकारी अधिकारी को ज्ञापन सौंपा है। ठेकेदारों ने आरोप लगाया है कि नया अमोला थरखेड़ा अमोल मायापुर और खोड़ की सरकारी शराब दुकानों में पिछले तीन दिनों के दौरान तोड़फोड़ और लूटपाट की घटनाएं हुई हैं। उनका कहना है कि दुकानों की सुरक्षा नहीं हो पाने से उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। ठेकेदारों ने इन परिस्थितियों के बीच शराब दुकानों के लाइसेंस सरेंडर करने की बात कही है।

    अब प्रशासन के सामने एक ओर महिलाओं की शराब विरोधी मांग और दूसरी ओर शराब ठेकेदारों की सुरक्षा तथा कारोबार से जुड़ी शिकायतें हैं। आने वाले दिनों में प्रशासन इस पूरे मामले में क्या कदम उठाता है और विरोध कर रही महिलाओं की मांग पर क्या निर्णय लिया जाता है इस पर सभी की नजर बनी हुई है।

  • भोपाल में रिहायशी प्लॉट पर कमर्शियल गतिविधियों पर सख्ती, 7 दिन में दस्तावेज नहीं मिले तो होगी कार्रवाई

    भोपाल में रिहायशी प्लॉट पर कमर्शियल गतिविधियों पर सख्ती, 7 दिन में दस्तावेज नहीं मिले तो होगी कार्रवाई


    भोपाल । भोपाल के रिहायशी इलाकों में आवासीय भूखंडों पर संचालित हो रही व्यावसायिक गतिविधियों को लेकर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। अदालत के इस आदेश के बाद ऐसे लोगों और प्रतिष्ठानों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं जो आवासीय जमीन का इस्तेमाल व्यावसायिक गतिविधियों के लिए कर रहे हैं। कोर्ट ने संबंधित पक्षकारों को निर्देश दिया है कि यदि उनके पास आवासीय भूखंड पर किसी तरह की व्यावसायिक गतिविधि संचालित करने की वैध अनुमति है तो उसके दस्तावेज सात दिन के भीतर भोपाल नगर निगम के सामने पेश करने होंगे। इसके बाद नगर निगम दस्तावेजों की जांच करेगा और यदि अनुमति वैध नहीं पाई जाती है तो नियमानुसार कार्रवाई की जा सकेगी।

    हाईकोर्ट का यह निर्देश ऐसे समय आया है जब रिहायशी इलाकों में आवासीय उपयोग के लिए निर्धारित जमीन पर होटल मॉल और दूसरे व्यावसायिक प्रतिष्ठान संचालित किए जाने को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं। स्थानीय रहवासियों की ओर से लंबे समय से शिकायतें सामने आती रही हैं कि इस तरह की गतिविधियों से उनके इलाकों की व्यवस्था प्रभावित होती है। खासकर ट्रैफिक और पार्किंग की समस्या के साथ शोर और सुरक्षा से जुड़ी परेशानियां बढ़ने की बात कही जाती रही है।

    अदालत ने अपने आदेश में यह भी स्पष्ट किया है कि तय समय सीमा में वैध अनुमति से जुड़े दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए गए तो नगर निगम सुप्रीम कोर्ट के राजेंद्र कुमार बड़जात्या मामले में वर्ष 2024 में दिए गए फैसले के अनुरूप कार्रवाई करने के लिए स्वतंत्र होगा। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद हुई सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने यह आदेश जारी किया है। इससे अब नगर निगम के लिए भी आगे की कार्रवाई को लेकर स्थिति अधिक स्पष्ट हो गई है।

    इस मामले में याचिकाकर्ता विवेक त्रिपाठी ने हाईकोर्ट के आदेश का स्वागत किया है। उनका कहना है कि रिहायशी क्षेत्रों को व्यावसायिक गतिविधियों के अनियंत्रित विस्तार से बचाने की दिशा में यह महत्वपूर्ण कदम है। उनके अनुसार अब नगर निगम के सामने न्यायिक निर्देश मौजूद हैं जिसके आधार पर संबंधित प्रतिष्ठानों की अनुमति की जांच की जा सकती है।

    रिहायशी इलाकों में रहने वाले लोगों को भी इस आदेश से उम्मीद जगी है। रहवासी लवनीश भाटी का कहना है कि कई इलाकों में लंबे समय से ट्रैफिक पार्किंग और दूसरी समस्याएं बनी हुई हैं। शिकायतों के बावजूद अपेक्षित समाधान नहीं मिलने से लोगों में नाराजगी रही है। अब हाईकोर्ट के आदेश के बाद उन्हें उम्मीद है कि नगर निगम जमीन पर प्रभावी कार्रवाई करेगा।

    संयुक्त रहवासी संघर्ष समिति ने भी अदालत के आदेश का स्वागत किया है। समिति ने नगर निगम से मांग की है कि रिहायशी इलाकों में संचालित व्यावसायिक प्रतिष्ठानों की अनुमति की जांच की जाए। जिन प्रतिष्ठानों के पास वैध अनुमति नहीं है उनके खिलाफ नियमों और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार कार्रवाई की जाए। फिलहाल आने वाले सात दिनों में संबंधित पक्षों को अपने दस्तावेज नगर निगम के सामने प्रस्तुत करने होंगे। इसके बाद दस्तावेजों की जांच और उनकी वैधता के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी।

  • MPSC छात्र की आत्महत्या के बाद अभिजीत दीपके परिवार से मिलेंगे, कर्ज और परीक्षा व्यवस्था को लेकर उठे सवाल

    MPSC छात्र की आत्महत्या के बाद अभिजीत दीपके परिवार से मिलेंगे, कर्ज और परीक्षा व्यवस्था को लेकर उठे सवाल

    नई दिल्ली । कॉकरोच जनता पार्टी फाउंडर अभिजीत दीपके MPSC परीक्षा की तैयारी कर रहे छात्र के परिवार से मिलने पहुंच रहे हैं। छात्र ने पुणे में खुदकुशी कर ली थी। पुलिस को शक है कि कर्ज से परेशान होकर यह कदम उठाया गया है। मृतक की पहचान प्रथमेश देशमुख के रूप में हुई है।

    दीपके ने गुरुवार को पोस्ट किया, ‘मैं MPSC के एक छात्र प्रथमेश देशमुख के शोकाकुल परिवार से मिलने जा रहा हूं, जिन्होंने कल आत्महत्या कर ली थी।’ खबर है कि सीजेपी पदाधिकारी सौरभ दास भी नोएडा पहुंच रहे हैं, जहां वह प्रशासन की तरफ से 5 लाख का नोटिस पाने वाले छात्र अक्षत से मुलाकात करेंगे।

    पुलिस उपायुक्त कृषिकेश रावले ने बताया कि मृतक प्रथमेश देशमुख एमपीएससी परीक्षा की तैयारी के लिए पुणे के नवी पेठ इलाके में किराये के मकान में रह रहा था। उन्होंने बताया कि वह सुबह कमरे में फंदे से लटका हुआ पाया गया, जिसके बाद कुछ निवासियों ने पुलिस को सूचना दी। उन्होंने बताया कि आत्महत्या का सही समय पोस्टमार्टम रिपोर्ट मिलने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।

    सुसाइड नोट मिला

    पुलिस ने जानकारी दी है, ‘देशमुख कथित रूप से आर्थिक दबाव में था और उसे कई लोगों के करीब ढाई लाख रुपये लौटाने थे। उसका परिवार भी आर्थिक परेशानियों का सामना कर रहा था। उसने एक नोट छोड़ा है, जिसमें लोगों से लिए कर्ज और लौटाई जा चुकी रकम के बारे में जानकारियां दी गईं हैं।’

    बताया गया कि दो पन्नों के इस नोट में 8-19 लोगों के नाम लिखे हैं। पुलिस यह पता लगाने के लिए उसके परिवार के सदस्यों से पूछताछ कर रही है कि उसने पैसे क्यों उधार लिए थे और मामले की जांच जारी है।

    छत्रपति संभाजीनगर में हो रहा है प्रदर्शन

    मंगलवार को छत्रपति संभाजीनगर में MPSC में कथित भ्रष्टाचार और पेपर लीक के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे थे। खास बात है कि यह दीपके का गृहनगर भी है। प्रदर्शनकारियों की मांग थी कि आयोग में शीर्ष पदों पर साफ छवि वाले अधिकारियों को नियुक्त किया जाए। इससे पहले सोमवार को पुणे में भी प्रदर्शन हुआ था और देशमुख ने पुणे में ही आत्महत्या की है।

    इसके अलावा प्रदर्शनकारी पूर्व में हुई परीक्षाओं पर भी सवाल उठा रहे हैं और जांच की भी मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि कोरोना वायरस महामारी के बाद हुई परीक्षाओं को लेकर भी संदेह है। एक छात्र ने कहा था, ‘हमें पता होना चाहिए कि आखिर क्या हो रहा है। मैं चार साल से पढ़ाई कर रहा हूं और परीक्षाएं दे रहा हूं। आज पैसे वाले लोग इसका फायदा उठा रहे हैं।’

  • फ्रिज खोला तो सामने आया नशे का काला कारोबार, जबलपुर पुलिस ने 24 नशीले इंजेक्शन किए जब्त

    फ्रिज खोला तो सामने आया नशे का काला कारोबार, जबलपुर पुलिस ने 24 नशीले इंजेक्शन किए जब्त


    जबलपुर । जबलपुर में नशे के अवैध कारोबार के खिलाफ पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए एक आरोपी को गिरफ्तार किया है। गोरखपुर थाना पुलिस ने सेठीनगर निवासी बड़कू सोनकर को उसके घर से पकड़ा है। पुलिस ने आरोपी के कब्जे से 24 प्रतिबंधित नशीले इंजेक्शन बरामद किए हैं। इनमें 11 बुप्रेनोरफिन और 13 फेनिरामाइन मैलेट के इंजेक्शन शामिल हैं। पुलिस ने नशीले इंजेक्शनों की बिक्री से मिले 3950 रुपए भी जब्त किए हैं। आरोपी के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है।

    पुलिस के मुताबिक 9 सितंबर को गोरखपुर थाना प्रभारी नितिन कमल को मुखबिर से सूचना मिली थी कि सेठीनगर निवासी बड़कू सोनकर अपने घर से नशीले इंजेक्शनों की बिक्री कर रहा है। सूचना मिलते ही पुलिस ने टीम तैयार की और बताए गए स्थान पर दबिश देने के लिए पहुंच गई। पुलिस को आशंका थी कि आरोपी नशीले इंजेक्शनों को किसी सुरक्षित जगह पर छिपाकर रख सकता है।

    पुलिस टीम ने घर की तलाशी शुरू की। इसी दौरान आंगन में निर्माणाधीन कमरे में रखा एक फ्रिज पुलिस के निशाने पर आया। फ्रिज की तलाशी लेने पर उसके अंदर एक थैला मिला। जब पुलिस ने थैला खोला तो उसमें प्रतिबंधित नशीले इंजेक्शन रखे हुए थे। गिनती करने पर कुल 24 इंजेक्शन बरामद हुए। इनमें 11 इंजेक्शन बुप्रेनोरफिन के जबकि 13 इंजेक्शन फेनिरामाइन मैलेट के बताए गए हैं।

    पुलिस ने मौके से नशीले इंजेक्शनों की बिक्री से प्राप्त 3950 रुपए भी जब्त किए। पूछताछ में आरोपी ने पुलिस को बताया कि वह इन प्रतिबंधित इंजेक्शनों को नशे के आदी लोगों को बेचता था। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि आरोपी को नशीले इंजेक्शनों की सप्लाई कहां से मिलती थी और इस अवैध कारोबार में उसके साथ और कौन लोग जुड़े हुए हैं।

    जांच के दौरान पुलिस को आरोपी का आपराधिक रिकॉर्ड भी मिला है। पुलिस के अनुसार बड़कू सोनकर आदतन अपराधी है और उसके खिलाफ पहले से छह से अधिक आपराधिक मामले दर्ज हैं। इनमें आर्म्स एक्ट के साथ सट्टा एक्ट एनडीपीएस एक्ट और आबकारी एक्ट से जुड़े मामले शामिल हैं। इस वजह से पुलिस आरोपी से पूछताछ में पुराने मामलों और नशे के नेटवर्क से जुड़े पहलुओं को भी खंगाल रही है।

    पुलिस ने आरोपी के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट की धारा 8/21 के तहत प्रकरण दर्ज किया है। अब जांच टीम यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि बरामद इंजेक्शन किस माध्यम से आरोपी तक पहुंचे थे और इनकी सप्लाई किन लोगों तक की जाती थी। पुलिस को उम्मीद है कि पूछताछ से नशीले इंजेक्शनों की अवैध सप्लाई से जुड़े दूसरे लोगों के बारे में भी जानकारी मिल सकती है।

    थाना प्रभारी नितिन कमल के नेतृत्व में पुलिस टीम मामले की जांच कर रही है। पुलिस का कहना है कि नशे के अवैध कारोबार के खिलाफ कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी। फिलहाल गिरफ्तार आरोपी से पूछताछ की जा रही है और उसके नेटवर्क से जुड़े संभावित लोगों की जानकारी जुटाई जा रही है।

  • उन्नाव के स्कूल में हेड मास्टर पर बच्चों की पिटाई और निजी काम कराने के गंभीर आरोप, वायरल वीडियो से मचा हड़कंप

    उन्नाव के स्कूल में हेड मास्टर पर बच्चों की पिटाई और निजी काम कराने के गंभीर आरोप, वायरल वीडियो से मचा हड़कंप

    नई दिल्ली । उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले से एक दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है. पुरवा तहसील के मदारपुर जूनियर स्कूल के हेड मास्टर पर स्कूली बच्चों को बेरहमी से पीटने का आरोप लगा है. साथ ही, उनका मानसिक और शारीरिक उत्पीड़न करने का भी गंभीर आरोप लगा है. इस घटना से जुड़ा एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसने शिक्षा विभाग की कार्यशैली और बच्चों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.

    छोटी-छोटी बातों पर बर्बरता के आरोप

    पीड़ित बच्चों के परिजनों के अनुसार, स्कूल के हेड मास्टर मासूम बच्चों से अपने व्यक्तिगत और गैर-शैक्षणिक काम करवाते थे. आरोप है कि अगर कोई स्टूडेंट उन्हें ‘गुड मॉर्निंग’ बोलना भूल जाता था, तो उसकी बेरहमी से पिटाई की जाती थी. इसके अलावा, हेड मास्टर बच्चों से अपनी निजी गाड़ी धुलवाता और टॉयलेट में पानी डालने जैसे काम भी जबरन करवाते थे. इन कामों को करने में जरा सी भी चूक होने पर बच्चों को बेरहमी से प्रताड़ित किया जाता था.

    परिजनों ने एसडीएम से की शिकायत

    जब बच्चों ने अपने साथ हो रही इस बर्बरता की जानकारी घर पर दी, तो परिजनों का गुस्सा फूट पड़ा. घटना से आक्रोशित परिजनों ने एसडीएम पुरवा से मुलाकात कर आरोपी हेड मास्टर के खिलाफ शिकायत की. परिजनों ने वायरल वीडियो का हवाला देते हुए आरोपी हेड मास्टर के खिलाफ कड़े कानूनी कदम उठाने की मांग की है. एसडीएम ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच के बाद सख्त कार्रवाई का आश्वासन दिया है.

    शिक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल

    सरकारी स्कूलों में बच्चों को बेहतर शिक्षा और सुरक्षित माहौल देने के बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, लेकिन मदारपुर जूनियर स्कूल की इस घटना ने सरकारी दावों की पोल खोलकर रख दी है. स्कूल में शिक्षा लेने जाने वाले मासूमों के साथ ऐसा दुर्व्यवहार न केवल उनके मानसिक स्वास्थ्य पर बुरा असर डालता है, बल्कि उनके मन में शिक्षा के प्रति खौफ भी पैदा करता है. फिलहाल, इस वायरल वीडियो और परिजनों की शिकायत के बाद बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) स्तर पर क्या कार्रवाई होती है ये देखने वाली बात होगी.

  • भारत के पास 190 परमाणु वॉरहेड, 225 तक हथियार बनाने की क्षमता, जल-थल-नभ से जवाब देने की तैयारी

    भारत के पास 190 परमाणु वॉरहेड, 225 तक हथियार बनाने की क्षमता, जल-थल-नभ से जवाब देने की तैयारी

    नई दिल्ली । चीन और पाकिस्तान की ओर से बढ़ते खतरे को देखते हुए भारत लगातार अपनी सैन्य क्षमताओं में इजाफा कर रहा है. भारत के परमाणु हथियारों को लेकर एक नई रिपोर्ट में कई बड़े खुलासे किए गए हैं.

    भारत के पास 190 न्यूक्लियर वॉरहेड

    रिपोर्ट के मुताबिक, भारत के पास अब करीब 190 परमाणु वॉरहेड मौजूद हैं. भारत ने अपने एटमी पावरबैंक को बेहद एडवांस और पावरफुल बना लिया है. रिपोर्ट में कहा गया कि भारत के पास करीब 140 से 225 परमाणु बम बनाने के लिए पर्याप्त मात्रा में ‘वेपन-ग्रेड प्लूटोनियम’ (परमाणु ईंधन) तैयार हो चुका है. इसमें भाभा एटॉमिक रिसर्च सेंटर (BARC) के ध्रुव रिएक्टर की अहम भूमिका रही है.

    नई रिपोर्ट के मुताबिक, भारत के पास अब 3 तरीके (न्यूक्लियर ट्रायड) से परमाणु हमला करने वाले 9 अलग-अलग सिस्टम पूरी तरह तैयार और चालू हैं. भारतीय वायुसेना के मिराज-2000 और जगुआर लड़ाकू विमानों को परमाणु हथियार ले जाने और सटीक निशाना लगाने के लिए आधुनिक एविओनिक्स से लैस रखा गया है.

    वहीं, अग्नि सीरीज (अग्नि-1 से लेकर अग्नि-5) और पृथ्वी मिसाइलें भारत की जमीन से मार करने वाली बड़ी ताकत हैं. अग्नि-5 की रेंज 5,000 किलोमीटर से ज्यादा है, जो पूरे एशिया और चीन के दूर के हिस्सों तक मार कर सकती है. इसके अलावा रिपोर्ट्स ये भी हैं कि भारत अग्नि 6 मिसाइल भी बना रहा है, जिसकी रेंज 12000 किलोमीटर तक है. इसके अलावा ब्रह्मोस सुपरसॉनिक मिसाइलों को भी न्यूक्लियर वॉरहेड से लैस किया जा सकता है.

    समुद्र से भी मार कर सकता है भारत

    इसके अलावा समुद्र में भी दुश्मनों पर हमला करने के लिए भारत ने कमर कस रखी है. भारत की स्वदेशी एटमी एनर्जी से चलने वाली पनडुब्बी आईएनएस अरिहंत और इस कैटेगरी की अन्य पनडुब्बियां समुद्र की गहराइयों में तैनात रहकर दुश्मन पर दूसरा जवाबी हमला करने की काबिलियत रखती हैं.

    इतन ही नहीं, अब भारत अपनी मिसाइलों को स्पेशल सीलबंद डिब्बों (कैनिस्टर) में रख रहा है. वहां ये लंबे वक्त तक सुरक्षित रहती हैं. इससे इन्हें सड़क या रेल मार्ग से कहीं भी ले जाना बेहद आसान होता है, और हमले का आदेश मिलते ही इन्हें कुछ ही मिनटों में लॉन्च किया जा सकता है.

    कई शहरों पर गिराए जा सकते हैं परमाणु बम!

    इसके अलावा, भारत Multiple Independently Targetable Re-entry Vehicle तकनीक पर भी काम कर रहा है, जिससे एक ही मिसाइल से एक साथ अलग-अलग शहरों या ठिकानों पर कई परमाणु बम गिराए जा सकते हैं.

    हालांकि, भारत सरकार अपने परमाणु हथियारों के बारे में कभी कोई आधिकारिक बयान नहीं देती. लेकिन DRDO अक्सर उन हथियारों के बारे में जानकारी देता है, जिन्हें वह विकसित कर रहा है. भारत की परमाणु नीति नो फर्स्ट यूज की है. यानी भारत खुद से पहले दुश्मन पर न्यूक्लियर अटैक नहीं करेगा. लेकिन अगर दुश्मन हिमाकत करता है तो भारत के 190 परमाणु हथियार दुनिया के नक्शे से दुश्मन देश का सफाया कर देंगे.