नई दिल्ली ।त्योहारी सीजन के बीच दुकानदारों को राहत मिली है। यूपीआई लेनदेन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) शुल्क लागू करने का फैसला फिलहाल टाल दिया गया है। यह व्यवस्था 15 अक्टूबर 2026 से लागू होने वाली थी, लेकिन अब इसे दीपावली के बाद तक स्थगित कर दिया गया है। नई तारीख को लेकर आगे निर्णय लिया जाएगा। इस फैसले से छोटे और बड़े कारोबारियों ने राहत की सांस ली है।
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यूपीआई भुगतान पर एमडीआर शुल्क लगाने का फैसला दीपावली तक टला, दुकानदार फिर लगाएंगे क्यूआर कोड, ग्राहकों को मिलेगी राहत
नई दिल्ली ।त्योहारी सीजन के बीच दुकानदारों को राहत मिली है। यूपीआई लेनदेन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) शुल्क लागू करने का फैसला फिलहाल टाल दिया गया है। यह व्यवस्था 15 अक्टूबर 2026 से लागू होने वाली थी, लेकिन अब इसे दीपावली के बाद तक स्थगित कर दिया गया है। नई तारीख को लेकर आगे निर्णय लिया जाएगा। इस फैसले से छोटे और बड़े कारोबारियों ने राहत की सांस ली है।यूपीआई भुगतान पर शुल्क लगाए जाने की खबर सामने आने के बाद कई दुकानदारों की चिंता बढ़ गई थी। कारोबारियों को आशंका थी कि अतिरिक्त शुल्क लागू होने से उनके खर्च में बढ़ोतरी होगी और इसका असर कारोबार पर पड़ सकता है। इसी वजह से कुछ दुकानदार ग्राहकों से यूपीआई के जरिए भुगतान लेने से बचने लगे थे। कई दुकानों पर नकद भुगतान को प्राथमिकता दी जा रही थी, जबकि कुछ कारोबारियों ने अपनी दुकानों से यूपीआई क्यूआर कोड हटाने भी शुरू कर दिए थे।अब शुल्क लागू करने का फैसला स्थगित होने से दुकानदारों को राहत मिली है। कई कारोबारियों का कहना है कि वे दोबारा अपनी दुकानों पर क्यूआर कोड लगाएंगे, ताकि ग्राहक पहले की तरह डिजिटल माध्यम से भुगतान कर सकें। त्योहारी मौसम में खरीदारी बढ़ने के दौरान यूपीआई भुगतान की सुविधा कारोबारियों और ग्राहकों, दोनों के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है। ऐसे में प्रस्तावित शुल्क पर रोक से दुकानदार फिलहाल अपने कारोबार पर ध्यान दे सकेंगे।प्रस्तावित व्यवस्था के तहत 2,000 रुपये से अधिक के चुनिंदा मर्चेंट यूपीआई लेनदेन पर 0.4 प्रतिशत एमडीआर शुल्क लगाए जाने की बात कही गई थी। हालांकि, अब इसकी समयसीमा आगे बढ़ा दी गई है। नई तारीख को लेकर अभी स्थिति स्पष्ट नहीं है। कारोबारियों को आगे होने वाले फैसले का इंतजार है कि शुल्क व्यवस्था किस तारीख से लागू होगी या इस संबंध में क्या निर्णय लिया जाएगा।दिल्ली के लाजपत नगर में एक दुकानदार ने कहा कि यूपीआई लेनदेन को शुल्क-मुक्त रखने से कारोबारियों को काफी फायदा हुआ है। त्योहारों के दौरान ग्राहक बिना किसी झिझक के यूपीआई से भुगतान कर रहे हैं। इससे दुकानों पर ग्राहकों की आवाजाही बनी रहती है और कारोबार सामान्य रूप से चलता है। दुकानदार के मुताबिक, डिजिटल भुगतान की सुविधा ग्राहकों के लिए उपयोगी है और इससे खरीदारी के समय भुगतान करना आसान रहता है।दुकानदार ने इस फैसले को सकारात्मक बताया। हालांकि, उसने यह भी कहा कि आगे इस व्यवस्था को जारी रखने के संबंध में क्या निर्णय लिया जाता है, यह देखना होगा। शुल्क लगाने की नई तारीख तय होने के बाद ही स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी।कारोबारियों का कहना है कि यूपीआई देश में डिजिटल भुगतान का प्रमुख माध्यम बन चुका है। ऐसे में इस तरह के लेनदेन पर अतिरिक्त शुल्क लगाने से छोटे दुकानदारों और ग्राहकों पर आर्थिक असर पड़ सकता है। फिलहाल फैसला टलने से दुकानदारों को राहत मिली है। अब वे त्योहारी सीजन में ग्राहकों को डिजिटल भुगतान की सुविधा देने और अपने कारोबार पर ध्यान केंद्रित करने की तैयारी कर रहे हैं। -

नशे के नेटवर्क पर सख्ती की तैयारी, रीवा संभाग में करोड़ों की ड्रग्स और 312 वाहन जब्त, युवाओं को बचाने पर फोकस
रीवा । मध्य प्रदेश के रीवा संभाग में नशे के अवैध कारोबार पर लगाम लगाने के लिए पुलिस और प्रशासन ने कार्रवाई तेज कर दी है। पिछले 18 महीनों के दौरान नशे के कारोबार में शामिल 1615 आरोपियों को जेल भेजा गया है। इस अवधि में गांजा और कोरेक्स से लेकर हेरोइन स्मैक ब्राउन शुगर और एमडी ड्रग्स जैसे नशीले पदार्थ जब्त किए गए हैं। इनकी कुल कीमत 13 करोड़ 17 लाख 39 हजार 600 रुपये बताई गई है। वहीं नशे के अवैध कारोबार में इस्तेमाल होने वाले दोपहिया और चारपहिया वाहनों को भी जब्त किया गया है। अब प्रशासन का जोर नशे के कारोबार को रोकने के साथ इसकी लत से पीड़ित लोगों के उपचार और पुनर्वास पर भी रहेगा।
उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल ने रीवा के सर्किट हाउस में आयोजित बैठक में नशामुक्त भारत अभियान की समीक्षा की। उन्होंने पुलिस और प्रशासन के अधिकारियों को नशे के कारोबार में शामिल लोगों के खिलाफ लगातार सख्त कार्रवाई करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि कार्रवाई केवल छोटे स्तर पर काम करने वाले लोगों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए बल्कि नशीले पदार्थों के उत्पादन और सप्लाई से जुड़े नेटवर्क तक पहुंचना जरूरी है। इसके लिए संबंधित विभागों के बीच समन्वय बनाकर अभियान चलाने पर जोर दिया गया।
बैठक में रीवा जोन के पुलिस महानिरीक्षक गौरव राजपूत ने पिछले 18 महीनों की कार्रवाई का ब्योरा प्रस्तुत किया। उनके मुताबिक इस दौरान 5535 किलो 931 ग्राम गांजा और 97 हजार 665 शीशी कोरेक्स जब्त की गई। इसके अलावा 4 लाख 13 हजार 310 नशीली टैबलेट और कैप्सूल बरामद किए गए। पुलिस ने अफीम के 450 हरे पौधों के साथ 123.6 ग्राम हेरोइन 206.54 ग्राम स्मैक 244 ग्राम ब्राउन शुगर और 3 किलो 87 ग्राम एमडी ड्रग्स भी जब्त की है। जब्त नशीले पदार्थों की कुल कीमत 13 करोड़ रुपये से अधिक आंकी गई है।
नशे के अवैध कारोबार में इस्तेमाल किए जाने वाले वाहनों पर भी कार्रवाई की गई। पुलिस ने 181 दोपहिया और 131 चारपहिया वाहन जब्त किए हैं। इन वाहनों की कुल कीमत 10 करोड़ 41 लाख 70 हजार रुपये बताई गई है। अधिकारियों का मानना है कि नशीले पदार्थों की सप्लाई में इस्तेमाल होने वाले संसाधनों पर कार्रवाई करना भी इस नेटवर्क को कमजोर करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
रीवा संभाग में अवैध शराब के कारोबार के खिलाफ भी अभियान चलाया गया। पिछले 18 महीनों में इस संबंध में 11 हजार 998 मामले दर्ज किए गए और 12 हजार 199 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। कार्रवाई के दौरान 35 हजार 890 लीटर अवैध देशी शराब और 22 हजार 807 लीटर विदेशी शराब जब्त की गई। जब्त शराब की कीमत 3 करोड़ 97 लाख 53 हजार 333 रुपये बताई गई है। उप मुख्यमंत्री ने उत्तर प्रदेश के अधिकारियों के साथ समन्वय बनाकर नशे के कारोबार पर प्रभावी कार्रवाई जारी रखने के निर्देश भी दिए।
राजेंद्र शुक्ल ने कहा कि विंध्य क्षेत्र में कृषि उद्योग व्यापार और बुनियादी सुविधाओं के विकास से लोगों की आमदनी बढ़ाने के प्रयास किए जा रहे हैं। ऐसे में युवाओं का नशे की गिरफ्त में आना गंभीर चिंता का विषय है। उन्होंने नशामुक्ति केंद्रों को सक्रिय करने और पीड़ितों को उपचार के साथ पुनर्वास की सुविधा देने पर जोर दिया। कलेक्टर नरेंद्र कुमार सूर्यवंशी ने बताया कि इसी सप्ताह नशे की लत से पीड़ित 50 लोगों की पहचान कर उन्हें पुनर्वास के लिए नशामुक्ति केंद्रों में भर्ती कराने की योजना है। कोरेक्स की लत से जूझ रहे लोगों की मदद के लिए स्वयंसेवी संस्थाओं का सहयोग भी लिया जाएगा।
बैठक में जनप्रतिनिधियों और सामाजिक संस्थाओं की भागीदारी बढ़ाने पर भी जोर दिया गया। प्रशासन की कोशिश है कि नशे के कारोबार के खिलाफ सख्त कार्रवाई के साथ लोगों को नशे से बाहर निकालने के लिए उपचार और जागरूकता पर भी काम किया जाए। -

मध्य प्रदेश के विकास को मिलेगी नई दिशा, 55 जिलों के लिए चयनित CM Fellows का प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू
मध्य प्रदेश। मध्य प्रदेश में सुशासन और विकास कार्यों को प्रभावी बनाने की दिशा में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने एक महत्वपूर्ण पहल की शुरुआत की है। बुधवार 14 अक्टूबर 2026 को भोपाल स्थित अटल बिहारी वाजपेयी सुशासन एवं नीति विश्लेषण संस्थान में मुख्यमंत्री यंग प्रोफेशनल फॉर डेवलपमेंट प्रोग्राम के तहत चयनित सीएम फेलोज के पांच दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम की शुरुआत की। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में प्रदेश के 55 जिलों के लिए चयनित सीएम फेलोज शामिल हो रहे हैं। इसका उद्देश्य युवा पेशेवरों को शासन व्यवस्था और विकास से जुड़े कार्यों की बेहतर समझ प्रदान करना है।
मुख्यमंत्री यंग प्रोफेशनल फॉर डेवलपमेंट प्रोग्राम के अंतर्गत चयनित इन प्रतिभागियों को पांच दिनों तक कार्यक्रम से संबंधित जरूरी जानकारी दी जाएगी। इसके साथ ही उन्हें विकास योजनाओं की प्रक्रिया और प्रशासनिक कार्यप्रणाली को समझने का अवसर मिलेगा। इस पहल के माध्यम से युवा पेशेवरों को प्रदेश में चल रहे विकास कार्यों से जोड़ने और सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन की प्रक्रिया से परिचित कराने पर जोर दिया जा रहा है।
राज्य सरकार की इस पहल में जिलों की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जा रही है। विकास योजनाओं को जमीन पर लागू करने के लिए प्रशासनिक व्यवस्था और स्थानीय जरूरतों की समझ जरूरी होती है। ऐसे में सीएम फेलोज के प्रशिक्षण का उद्देश्य उन्हें शासन की प्रक्रियाओं से परिचित कराना और विकास संबंधी कार्यों में उनकी भागीदारी के लिए तैयार करना है। प्रदेश के 55 जिलों के लिए चयनित प्रतिभागियों को एक साथ प्रशिक्षण दिए जाने से उन्हें कार्यक्रम के उद्देश्यों और काम करने के तरीकों को समझने का अवसर मिलेगा।
भोपाल स्थित अटल बिहारी वाजपेयी सुशासन एवं नीति विश्लेषण संस्थान में आयोजित यह कार्यक्रम सुशासन और नीति निर्माण से जुड़े विषयों पर केंद्रित है। प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को मुख्यमंत्री यंग प्रोफेशनल फॉर डेवलपमेंट प्रोग्राम की कार्यप्रणाली और उसके उद्देश्यों की जानकारी दी जाएगी। इसके जरिए युवा पेशेवरों को प्रशासनिक व्यवस्था के साथ समन्वय बनाकर काम करने और विकास योजनाओं की प्रक्रिया को समझने में मदद मिल सकती है।
सीएम फेलोज कार्यक्रम को युवा प्रतिभाओं और प्रशासनिक व्यवस्था के बीच बेहतर तालमेल विकसित करने की पहल के रूप में देखा जा रहा है। विकास कार्यों में प्रभावी भागीदारी के लिए योजनाओं की जानकारी के साथ उनके क्रियान्वयन की प्रक्रिया को समझना भी जरूरी है। पांच दिवसीय प्रशिक्षण इसी दिशा में एक कदम है। इसके माध्यम से चयनित प्रतिभागियों को अपनी जिम्मेदारियों और कार्यक्रम की अपेक्षाओं को समझने का अवसर मिलेगा।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ प्रदेश में विकास और सुशासन से जुड़ी पहल को आगे बढ़ाने के प्रयासों का हिस्सा है। अब प्रशिक्षण के दौरान दी जाने वाली जानकारी और उसके बाद जिलों में सीएम फेलोज की भूमिका महत्वपूर्ण रहेगी। उम्मीद है कि इस कार्यक्रम से युवा पेशेवरों को प्रशासनिक कामकाज की समझ विकसित करने और विकास संबंधी गतिविधियों में योगदान देने में मदद मिलेगी। -

मैहर में मां शारदा के दरबार में उमड़ा आस्था का सैलाब, सुबह 11 बजे तक 71 हजार से ज्यादा श्रद्धालुओं ने किए दर्शन
मैहर । शारदीय नवरात्र के पावन अवसर पर मध्य प्रदेश के मैहर स्थित त्रिकूट पर्वत पर विराजमान मां शारदा के दरबार में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही है। देश के अलग-अलग हिस्सों से भक्त माता के दर्शन करने पहुंच रहे हैं। बुधवार 14 अक्टूबर 2026 को भी सुबह से ही मंदिर में दर्शन के लिए श्रद्धालुओं के आने का सिलसिला जारी रहा। सुबह 11 बजे तक कुल 71 हजार 570 श्रद्धालु मां शारदा के दर्शन कर चुके थे। नवरात्र के दौरान बढ़ती भीड़ को देखते हुए प्रशासन और पुलिस ने सुरक्षा के साथ ही दर्शन व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने के लिए विशेष इंतजाम किए हैं।
मैहर में मां शारदा के दर्शन के लिए पहुंचने वाले श्रद्धालुओं में सबसे बड़ी संख्या पैदल मार्ग का इस्तेमाल करने वालों की रही। सुबह 11 बजे तक उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार 68 हजार 500 श्रद्धालु पैदल मार्ग से मंदिर पहुंचे। वहीं 870 भक्त वैन मार्ग के जरिए दर्शन करने पहुंचे। इसके अलावा रोपवे की सुविधा का उपयोग करते हुए 2 हजार 200 श्रद्धालुओं ने मंदिर तक पहुंचकर मां के दर्शन किए। इन तीनों माध्यमों से पहुंचे भक्तों की कुल संख्या 71 हजार 570 दर्ज की गई। नवरात्र के दौरान मंदिर परिसर और दर्शन मार्गों पर लगातार चहल पहल बनी हुई है।
मां शारदा के दरबार में उमड़ रही भीड़ के बीच श्रद्धालुओं को सुरक्षित और व्यवस्थित तरीके से दर्शन कराने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। मेले में तैनात पुलिसकर्मी लगातार व्यवस्था संभाल रहे हैं। महिलाओं और बुजुर्गों के साथ दिव्यांग श्रद्धालुओं को दर्शन के दौरान जरूरी सहायता उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है। भीड़ को नियंत्रित करने और किसी भी तरह की अव्यवस्था से बचने के लिए पुलिस बल को अलग-अलग स्थानों पर तैनात किया गया है। प्रशासन का जोर इस बात पर है कि भक्तों को दर्शन के लिए अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े।
नवरात्र मेले में श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था भी मजबूत की गई है। इससे पहले रीवा जोन के आईजी गौरव राजपूत और डीआईजी हेमंत चौहान ने मैहर पहुंचकर मां शारदा के दर्शन किए थे। इस दौरान उन्होंने मेले की सुरक्षा व्यवस्था का जायजा भी लिया। अधिकारियों के निरीक्षण के बाद पुलिस इंतजामों को और प्रभावी बनाने की दिशा में कदम उठाए गए।
मेले में सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए भोपाल स्थित पुलिस मुख्यालय से अतिरिक्त पुलिस बल उपलब्ध कराया गया है। पुलिस ट्रेनिंग सेंटर रीवा से एक उप पुलिस अधीक्षक सहित 100 आरक्षकों को मेला ड्यूटी में तैनात किया गया है। अतिरिक्त बल की तैनाती का उद्देश्य श्रद्धालुओं की आवाजाही पर नजर रखना और भीड़ के दबाव के बीच व्यवस्था को बनाए रखना है।
शारदीय नवरात्र के दौरान मैहर में मां शारदा के दर्शन के लिए भक्तों का पहुंचना जारी है। सुबह 11 बजे तक 71 हजार से अधिक श्रद्धालुओं का मंदिर पहुंचना मेले में उमड़ रही आस्था और उत्साह को दर्शाता है। प्रशासन और पुलिस की कोशिश है कि नवरात्र के शेष दिनों में भी श्रद्धालुओं को सुरक्षित माहौल और बेहतर व्यवस्था के बीच मां शारदा के दर्शन कराए जा सकें। -

सीमित संसाधन भी नहीं रोक सके ध्रुव की उड़ान, किसान पुत्र ने दो स्वर्ण और एक रजत पदक जीतकर रचा इतिहास
मऊगंज । मध्य प्रदेश के मऊगंज जिले के एक छोटे से ग्रामीण क्षेत्र से निकलकर कक्षा 10वीं के छात्र ध्रुव शुक्ला ने राज्य स्तरीय एथलेटिक्स प्रतियोगिता में शानदार प्रदर्शन किया है। शिवपुरी में आयोजित प्रतियोगिता में ध्रुव ने दो स्वर्ण और एक रजत पदक जीतकर अपने जिले का नाम रोशन किया। उन्होंने 100 मीटर और 200 मीटर दौड़ में पहला स्थान हासिल करते हुए स्वर्ण पदक अपने नाम किए। वहीं 4×100 मीटर रिले दौड़ में टीम का प्रतिनिधित्व करते हुए रजत पदक जीता। एक ही प्रतियोगिता में तीन पदक हासिल करने की इस उपलब्धि से उनके विद्यालय और परिवार में खुशी का माहौल है। ध्रुव की सफलता को उनकी मेहनत अनुशासन और खेल के प्रति समर्पण का परिणाम माना जा रहा है।
ध्रुव शुक्ला मऊगंज जिले के नईगढ़ी विकासखंड स्थित शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय खर्रा में कक्षा 10वीं के छात्र हैं। उनका परिवार खेती-किसानी से जुड़ा है। उनके पिता रामदीन शुक्ला खेती करके परिवार का भरण-पोषण करते हैं। साधारण किसान परिवार से आने वाले ध्रुव ने सीमित संसाधनों के बावजूद खेल के मैदान में अपनी प्रतिभा साबित की है। उनकी इस उपलब्धि ने यह दिखाया है कि किसी खिलाड़ी की सफलता केवल महंगी सुविधाओं पर निर्भर नहीं करती बल्कि नियमित अभ्यास दृढ़ इच्छाशक्ति और लक्ष्य के प्रति लगन भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
शिवपुरी में आयोजित राज्य स्तरीय एथलेटिक्स प्रतियोगिता में ध्रुव ने अपनी गति और खेल कौशल का परिचय दिया। 100 मीटर और 200 मीटर जैसी प्रतिस्पर्धी दौड़ों में स्वर्ण पदक हासिल करना उनकी तैयारी और मेहनत को दर्शाता है। इसके बाद उन्होंने 4×100 मीटर रिले दौड़ में अपनी टीम के साथ भाग लेते हुए रजत पदक जीता। व्यक्तिगत स्पर्धाओं के साथ टीम स्पर्धा में भी पदक हासिल करना उनके लिए खास उपलब्धि रही। इस प्रदर्शन के जरिए उन्होंने अपने विद्यालय और क्षेत्र को राज्य स्तर पर पहचान दिलाई है।
ध्रुव की इस सफलता में उनके कोच और विद्यालय के क्रीड़ा अधिकारी सौरभ त्रिपाठी का महत्वपूर्ण योगदान बताया गया है। उनके मार्गदर्शन में ध्रुव नियमित अभ्यास करते रहे और अपनी दौड़ की तकनीक अनुशासन तथा प्रदर्शन को बेहतर बनाने पर ध्यान दिया। सीमित सुविधाओं के बीच प्रशिक्षण हासिल करते हुए ध्रुव ने प्रतियोगिता में अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने का प्रयास किया। खिलाड़ी की मेहनत के साथ सही मार्गदर्शन भी खेल में आगे बढ़ने के लिए महत्वपूर्ण होता है और ध्रुव की उपलब्धि इसका उदाहरण है।
ध्रुव शुक्ला की सफलता ग्रामीण क्षेत्रों के उन युवाओं के लिए प्रेरणा है जो खेलों में करियर बनाने का सपना देखते हैं। कई बार सुविधाओं की कमी खिलाड़ियों के सामने चुनौती बनती है लेकिन निरंतर अभ्यास और मेहनत से आगे बढ़ने के रास्ते तैयार किए जा सकते हैं। ध्रुव की उपलब्धि से यह संदेश मिलता है कि प्रतिभा को अवसर और प्रोत्साहन मिले तो छोटे गांवों से भी खिलाड़ी बड़ी प्रतियोगिताओं में अपनी पहचान बना सकते हैं।
ध्रुव के तीन पदक जीतने पर विद्यालय के प्राचार्य शिक्षकगण जनप्रतिनिधियों और क्षेत्रवासियों ने प्रसन्नता जताई है। सभी ने ध्रुव और उनके कोच सौरभ त्रिपाठी को बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। अब ध्रुव के सामने अपनी इस सफलता को आगे बढ़ाने और आगामी प्रतियोगिताओं में बेहतर प्रदर्शन करने की चुनौती होगी। उनकी उपलब्धि ने मऊगंज जिले में खेल प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने की उम्मीद भी जगाई है। -

सतना में गरबा प्रैक्टिस से लौट रही युवती का रास्ता रोककर छेड़छाड़, शादी का दबाव बनाने का आरोप, हिस्ट्रीशीटर गिरफ्तार
सतना । मध्य प्रदेश के सतना जिले में गरबा प्रैक्टिस करके घर लौट रही एक युवती के साथ छेड़छाड़ और जबरदस्ती करने का मामला सामने आया है। आरोप है कि एक युवक ने युवती का रास्ता रोककर उस पर शादी करने का दबाव बनाया। युवती ने जब इसका विरोध किया तो आरोपी ने उसका मुंह दबाने की कोशिश की और मोबाइल छीनकर जमीन पर पटक दिया। घटना के बाद आरोपी धमकी देते हुए मौके से फरार हो गया। पीड़िता की शिकायत पर सिटी कोतवाली पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया जहां से उसे जेल भेज दिया गया। पुलिस के अनुसार आरोपी के खिलाफ पहले से भी कई आपराधिक मामले दर्ज हैं।
पुलिस से मिली जानकारी के मुताबिक घटना 2 अक्टूबर की रात करीब 8:30 बजे की है। युवती धवारी स्थित रंगभूमि पैलेस में गरबा प्रैक्टिस करने गई थी। अभ्यास खत्म होने के बाद वह पैदल अपने घर लौट रही थी। इसी दौरान व्यंकट क्रमांक-1 स्कूल के पास ध्रुव पटारिया स्कूटी से वहां पहुंचा और युवती का रास्ता रोक लिया। आरोप है कि युवक ने युवती का हाथ पकड़कर उसके साथ जबरदस्ती करने की कोशिश की और शादी करने के लिए दबाव बनाने लगा। युवती ने जब इसका विरोध किया तो आरोपी ने उसका मुंह दबाने का प्रयास किया। इस दौरान उसने युवती का मोबाइल भी छीन लिया और जमीन पर पटक दिया जिससे मोबाइल टूट गया।
घटना के दौरान आसपास के लोगों के पहुंचने पर आरोपी वहां से भाग निकला। जाने से पहले उसने युवती को धमकी भी दी। इसके बाद पीड़िता ने पुलिस के पास पहुंचकर पूरे मामले की शिकायत दर्ज कराई। शिकायत के आधार पर सिटी कोतवाली पुलिस ने प्रकरण दर्ज कर आरोपी की तलाश शुरू की। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए आरोपी की पहचान और उसके ठिकाने की जानकारी जुटाई। इसके बाद पुलिस टीम ने कार्रवाई करते हुए उसे गिरफ्तार कर लिया।
सिटी कोतवाली थाना प्रभारी हेमंत शर्मा के मुताबिक गिरफ्तार आरोपी की पहचान ध्रुव पटारिया उम्र 22 वर्ष पिता राकेश पटारिया निवासी कंपनी बाग थाना सिटी कोतवाली सतना के रूप में हुई है। गिरफ्तारी के बाद आरोपी को न्यायालय में पेश किया गया जहां से उसे जेल भेज दिया गया। पुलिस का कहना है कि मामले में शिकायत के आधार पर आगे की कानूनी प्रक्रिया पूरी की जा रही है।
पुलिस के अनुसार आरोपी आदतन अपराधी है और उसके खिलाफ शहर के अलग-अलग थानों में पहले से कई गंभीर आपराधिक प्रकरण दर्ज हैं। हालांकि इन मामलों का विस्तृत ब्योरा सार्वजनिक जानकारी में नहीं दिया गया है। इस कार्रवाई में महिला प्रधान आरक्षक नीरा बागरी प्रधान आरक्षक मनोज सिंह बघेल आरक्षक धीरेन्द्र पटेल बलराम चौधरी और शिव कुमार तिवारी की भूमिका रही।
घटना ने महिलाओं की सुरक्षा और सार्वजनिक स्थानों पर उनकी आवाजाही से जुड़े सवालों को फिर चर्चा में ला दिया है। गरबा जैसे सांस्कृतिक आयोजनों से लौटते समय भी सुरक्षा का भरोसा बनाए रखना जरूरी है। ऐसे मामलों में पीड़ित की शिकायत पर त्वरित कार्रवाई और निष्पक्ष जांच महत्वपूर्ण होती है। फिलहाल आरोपी की गिरफ्तारी के बाद पुलिस मामले की कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ा रही है। -

IPL में युवराज सिंह की नई पारी, दिल्ली कैपिटल्स के बैटिंग कोच बनकर लौटेंगे मैदान पर, सौरव गांगुली के साथ करेंगे काम
नई दिल्ली: भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व दिग्गज ऑलराउंडर युवराज सिंह एक बार फिर इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) में नई भूमिका में नजर आ सकते हैं। अपनी विस्फोटक बल्लेबाजी और लंबे-लंबे छक्कों के लिए मशहूर युवराज सिंह के दिल्ली कैपिटल्स से जुड़ने की चर्चा है। सामने आ रही रिपोर्ट के मुताबिक, वह आगामी आईपीएल सीजन में टीम के बैटिंग कोच की जिम्मेदारी संभाल सकते हैं। यदि यह नियुक्ति होती है, तो युवराज पहली बार इस फ्रेंचाइजी के साथ कोचिंग की भूमिका में दिखाई देंगे। हालांकि, उनकी नियुक्ति को लेकर आधिकारिक पुष्टि होना अभी बाकी है।युवराज सिंह भारतीय क्रिकेट के उन खिलाड़ियों में शामिल रहे हैं, जिन्होंने अपनी बल्लेबाजी और ऑलराउंड प्रदर्शन से खास पहचान बनाई। सीमित ओवरों के क्रिकेट में उनका योगदान उल्लेखनीय रहा है। बड़े मुकाबलों में तेजी से रन बनाने और दबाव की परिस्थितियों में खेलने की क्षमता ने उन्हें प्रशंसकों के बीच लोकप्रिय बनाया। मैदान पर लंबे छक्के लगाने के लिए मशहूर युवराज को सिक्सर किंग भी कहा जाता है। अब उनके संभावित कोचिंग करियर को लेकर चर्चा ने आईपीएल में उनकी वापसी की उम्मीदें बढ़ा दी हैं।दिल्ली कैपिटल्स के साथ युवराज सिंह के जुड़ने की खबर इसलिए भी अहम मानी जा रही है, क्योंकि टीम अपने बल्लेबाजी विभाग को मजबूत करने की दिशा में काम कर सकती है। बैटिंग कोच की भूमिका में युवराज खिलाड़ियों को बल्लेबाजी तकनीक, शॉट चयन, दबाव में प्रदर्शन और मैच की परिस्थितियों के अनुसार रणनीति बनाने में मदद कर सकते हैं। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट और आईपीएल में खेलने का उनका अनुभव युवा खिलाड़ियों के लिए उपयोगी साबित हो सकता है। हालांकि, टीम के बल्लेबाजी विभाग में उनकी संभावित जिम्मेदारियों का आधिकारिक विवरण सामने आना बाकी है।इस संभावित नियुक्ति में सौरव गांगुली की भूमिका भी चर्चा में है। भारतीय टीम के पूर्व कप्तान सौरव गांगुली दिल्ली कैपिटल्स के साथ जुड़े रहे हैं। रिपोर्टों के अनुसार, युवराज सिंह उनके साथ मिलकर काम कर सकते हैं। गांगुली और युवराज दोनों भारतीय क्रिकेट के अनुभवी नाम हैं और उन्होंने अलग-अलग दौर में भारतीय टीम की सफलता में योगदान दिया है। ऐसे में यदि दोनों दिल्ली कैपिटल्स के साथ एक ही टीम प्रबंधन व्यवस्था में काम करते हैं, तो उनके अनुभव का लाभ फ्रेंचाइजी को मिल सकता है।दिल्ली कैपिटल्स लंबे समय से आईपीएल खिताब जीतने की कोशिश कर रही है। टीम के सामने हर सीजन बेहतर संयोजन तैयार करने, बल्लेबाजी में निरंतरता बनाए रखने और अहम मौकों पर अच्छा प्रदर्शन करने की चुनौती रहती है। युवराज जैसे अनुभवी पूर्व खिलाड़ी का कोचिंग स्टाफ से जुड़ना इन पहलुओं पर काम करने का अवसर दे सकता है। खास तौर पर युवा बल्लेबाजों को बड़े मुकाबलों के लिए तैयार करने में उनका अनुभव अहम हो सकता है।फिलहाल, युवराज सिंह की दिल्ली कैपिटल्स में संभावित नियुक्ति को लेकर अंतिम स्थिति स्पष्ट नहीं है। उनकी भूमिका, अनुबंध और टीम के कोचिंग स्टाफ में जिम्मेदारियों की आधिकारिक जानकारी सामने आने के बाद ही तस्वीर साफ होगी। यदि यह खबर सही साबित होती है, तो आईपीएल में खिलाड़ी के रूप में अपनी पहचान बनाने वाले युवराज एक नए अध्याय की शुरुआत कर सकते हैं। प्रशंसकों की नजरें अब फ्रेंचाइजी की आधिकारिक घोषणा पर रहेंगी। -

IPL 2027 में रोहित शर्मा फिर बन सकते हैं मुंबई इंडियंस के कप्तान, हार्दिक पंड्या के भविष्य पर भी उठे सवाल
नई दिल्ली: इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) 2027 से पहले मुंबई इंडियंस की कप्तानी को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। पांच बार टीम को चैंपियन बनाने वाले रोहित शर्मा एक बार फिर फ्रेंचाइजी की कमान संभाल सकते हैं। सामने आ रही रिपोर्टों में दावा किया जा रहा है कि टीम प्रबंधन आगामी सीजन के लिए अपने सबसे सफल कप्तान को दोबारा नेतृत्व सौंपने पर विचार कर रहा है। हालांकि, इस संबंध में अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। ऐसे में रोहित की वापसी और हार्दिक पंड्या की भूमिका को लेकर अंतिम फैसला होना बाकी है।रोहित शर्मा की कप्तानी में मुंबई इंडियंस ने 2013, 2015, 2017, 2019 और 2020 में आईपीएल का खिताब जीता था। उनकी अगुवाई में टीम ने लीग की सबसे सफल फ्रेंचाइजी में अपनी जगह बनाई। इसके बाद आईपीएल 2024 से पहले रोहित की जगह हार्दिक पंड्या को कप्तान बनाया गया था। हार्दिक गुजरात टाइटंस से मुंबई में लौटे थे। कप्तानी में इस बदलाव को लेकर काफी चर्चा हुई थी और टीम के समर्थकों के बीच भी इसे लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिली थीं।
हार्दिक की कप्तानी में मुंबई इंडियंस का प्रदर्शन उतार-चढ़ाव भरा रहा। आईपीएल 2024 में टीम अंक तालिका में सबसे नीचे रही थी। इसके बाद 2025 में उसने वापसी करते हुए प्लेऑफ तक का सफर तय किया, लेकिन खिताब जीतने में सफल नहीं हुई।वर्ष 2026 में भी टीम का प्रदर्शन उम्मीदों के मुताबिक नहीं रहा और वह नौवें स्थान पर रही। लगातार खिताब से दूर रहने के कारण टीम की रणनीति और नेतृत्व को लेकर सवाल उठने लगे हैं। ऐसे में रोहित को फिर से कप्तानी सौंपने की संभावना चर्चा का विषय बनी हुई है।अगर रोहित शर्मा की कप्तानी में वापसी होती है, तो हार्दिक पंड्या के भविष्य पर भी इसका असर पड़ सकता है। रिपोर्टों में हार्दिक को दूसरी फ्रेंचाइजी में ट्रेड किए जाने की संभावना जताई गई है। इस सिलसिले में राजस्थान रॉयल्स और कोलकाता नाइट राइडर्स जैसी टीमों के नाम भी चर्चा में आए हैं। हालांकि, हार्दिक को लेकर किसी संभावित सौदे पर अंतिम सहमति बनने या उनके मुंबई इंडियंस छोड़ने की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। किसी भी ट्रेड के लिए संबंधित फ्रेंचाइजी के बीच शर्तों पर सहमति जरूरी होगी।
मुंबई इंडियंस के पास कप्तानी के अन्य विकल्प भी मौजूद हैं। सूर्यकुमार यादव और तिलक वर्मा को संभावित उम्मीदवारों के रूप में देखा जा रहा है। सूर्यकुमार को टीम की कप्तानी करने का अनुभव है और वह भारतीय टी20 टीम की भी अगुवाई कर चुके हैं। वहीं, तिलक वर्मा युवा खिलाड़ी हैं और भारतीय क्रिकेट में उनकी भूमिका लगातार बढ़ रही है। ऐसे में फ्रेंचाइजी को अनुभवी कप्तान और भविष्य के नेतृत्व विकल्पों के बीच फैसला करना होगा।
रोहित शर्मा की उम्र भी टीम की दीर्घकालिक योजना के लिहाज से अहम हो सकती है। वह आईपीएल 2027 के दौरान 40 वर्ष के हो जाएंगे। यदि उन्हें दोबारा कप्तानी मिलती है, तो मुंबई को भविष्य के कप्तान की तैयारी पर भी ध्यान देना पड़ सकता है। फिलहाल, रोहित की वापसी की खबरें चर्चाओं और रिपोर्टों पर आधारित हैं। मुंबई इंडियंस की ओर से आधिकारिक निर्णय सामने आने के बाद ही स्पष्ट होगा कि अगले सीजन में टीम की कमान किसके हाथों में होगी।
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बांग्लादेश दौरे के लिए वेस्टइंडीज ने चुनी 15 सदस्यीय टीम, रोस्टन चेस संभालेंगे कप्तानी, अल्जारी जोसेफ बाहर
नई दिल्ली । बांग्लादेश के खिलाफ आगामी दो टेस्ट मैचों की सीरीज के लिए वेस्टइंडीज क्रिकेट बोर्ड ने 15 सदस्यीय टीम की घोषणा कर दी है। रोस्टन चेस की कप्तानी वाली इस टीम में युवा बल्लेबाज केविन विकम को पहली बार टेस्ट टीम में जगह मिली है। 23 वर्षीय विकम ने घरेलू क्रिकेट में अपने शानदार प्रदर्शन से चयनकर्ताओं का ध्यान खींचा है। साल 2026 की वेस्टइंडीज चैंपियनशिप में लगातार तीन शतकीय पारियां खेलकर उन्होंने अपनी बल्लेबाजी क्षमता साबित की थी। अब उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खुद को साबित करने का अवसर मिलेगा। दोनों टीमों के बीच पहला टेस्ट 28 अक्टूबर से मीरपुर में खेला जाएगा जबकि दूसरा मुकाबला 5 नवंबर से सिलहट में शुरू होगा।
केविन विकम घरेलू क्रिकेट में मध्यक्रम के भरोसेमंद बल्लेबाज के रूप में उभर रहे हैं। उन्होंने अब तक 25 प्रथम श्रेणी मुकाबलों में 40 से अधिक की औसत से रन बनाए हैं और उनके नाम छह शतक दर्ज हैं। चैंपियनशिप में लगातार तीन शतक लगाने का उनका प्रदर्शन चयन का प्रमुख आधार बना। वेस्टइंडीज को उम्मीद होगी कि विकम टेस्ट क्रिकेट में भी अपनी बल्लेबाजी से टीम को मजबूती देंगे। हालांकि अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में पहली बार मौका मिलने के कारण उनके सामने खुद को साबित करने की चुनौती भी होगी। टीम में अनुभव और युवा प्रतिभा के संतुलन के लिहाज से उनका चयन अहम माना जा रहा है।
टीम में कुछ महत्वपूर्ण बदलाव भी किए गए हैं। सीमित ओवरों की टीम के कप्तान शाई होप को इस टेस्ट सीरीज से आराम दिया गया है। वहीं तेज गेंदबाज अल्जारी जोसेफ को नियमित चिकित्सा जांच और विशेषज्ञों की सलाह के बाद टीम में शामिल नहीं किया गया है। क्रिकेट वेस्टइंडीज ने उनकी सहमति से कार्यभार प्रबंधन का फैसला लिया है। जोसेफ छोटे प्रारूपों में टीम के विकल्प बने रहेंगे। उनकी जगह ऑलराउंडर कीमो पॉल को टेस्ट टीम में शामिल किया गया है। इससे टीम को गेंदबाजी के साथ बल्लेबाजी में भी अतिरिक्त विकल्प मिलेगा।
सलामी बल्लेबाज जॉन कैंपबेल ने हैमस्ट्रिंग की चोट से उबरने के बाद टीम में वापसी की है। इसके अलावा श्रीलंका के खिलाफ जीत और पाकिस्तान के खिलाफ ड्रॉ खेलने वाली टीम के अधिकांश खिलाड़ियों को बरकरार रखा गया है। घोषित टीम में तीन तेज गेंदबाजी विकल्प दो तेज गेंदबाजी ऑलराउंडर और दो विशेषज्ञ स्पिनर शामिल हैं। बांग्लादेश की घरेलू परिस्थितियों में स्पिन गेंदबाजों की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है। ऐसे में वेस्टइंडीज की रणनीति में तेज गेंदबाजी और स्पिन के बीच संतुलन बनाए रखना अहम होगा।
वेस्टइंडीज के मुख्य कोच डैरेन सैमी ने सीरीज को टीम के लिए महत्वपूर्ण बताया है। उनके मुताबिक विश्व टेस्ट चैंपियनशिप के मौजूदा चक्र की शुरुआत में टीम ने रैंकिंग के शीर्ष आधे हिस्से में जगह बनाने का लक्ष्य तय किया था। बांग्लादेश के खिलाफ सीरीज जीतने से टीम इस लक्ष्य के करीब पहुंच सकती है। सैमी ने माना कि बांग्लादेश को उसके घरेलू मैदान पर चुनौती देना आसान नहीं होगा लेकिन टीम इस मुकाबले के लिए तैयार है।
विश्व टेस्ट चैंपियनशिप 2025-27 में वेस्टइंडीज की यह आखिरी सीरीज होगी। टीम 18 अक्टूबर को बांग्लादेश पहुंचेगी और 22 से 24 अक्टूबर तक ढाका में तीन दिवसीय अभ्यास मैच खेलेगी। इसके बाद टेस्ट सीरीज में उसका सामना मेजबान टीम से होगा। वेस्टइंडीज के लिए यह दौरा अंक तालिका में अपनी स्थिति बेहतर करने का अहम अवसर है। वहीं केविन विकम के लिए यह पहला टेस्ट कॉल-अप करियर की नई शुरुआत साबित हो सकता है।
वेस्टइंडीज टीम: रोस्टन चेस कप्तान जोमेल वारिकन उपकप्तान जोशुआ बिशप जॉन कैंपबेल तेजनारायण चंद्रपॉल जोशुआ डा सिल्वा जस्टिन ग्रीव्स कावेम हॉज आमिर जंगू शमार जोसेफ ब्रैंडन किंग कीमो पॉल केमर रोच जेडन सील्स और केविन विकम। -

45 साल के हुए गौतम गंभीर, वर्ल्ड कप फाइनल की पारियों से लेकर नेपियर के 137 रन तक, जानिए उनके करियर के यादगार पल
नई दिल्ली । भारतीय क्रिकेट टीम के मौजूदा मुख्य कोच गौतम गंभीर बुधवार 14 अक्टूबर को अपना 45वां जन्मदिन मना रहे हैं। बतौर खिलाड़ी गंभीर ने भारतीय क्रिकेट को कई यादगार पल दिए। टी20 विश्व कप 2007 के फाइनल में पाकिस्तान के खिलाफ 75 रन और वनडे विश्व कप 2011 के फाइनल में श्रीलंका के खिलाफ 97 रन की उनकी पारियां आज भी क्रिकेट प्रशंसकों के जेहन में ताजा हैं। हालांकि गंभीर के करियर की एक और पारी ऐसी है जो उनकी तकनीक धैर्य और संघर्ष क्षमता की मिसाल मानी जाती है। साल 2009 में न्यूजीलैंड के नेपियर में खेली गई 137 रन की उनकी पारी ने भारतीय टीम को निश्चित दिखाई दे रही हार से बचाने में अहम भूमिका निभाई थी।
नेपियर टेस्ट में न्यूजीलैंड ने पहले बल्लेबाजी करते हुए नौ विकेट पर 619 रन बनाकर पारी घोषित कर दी थी। इसके जवाब में भारतीय टीम पहली पारी में महज 305 रन पर सिमट गई और उसे फॉलोऑन खेलने के लिए मजबूर होना पड़ा। भारतीय टीम के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती मैच बचाने की थी। दूसरी पारी में विकेट जल्दी गिरते तो न्यूजीलैंड की जीत लगभग तय हो सकती थी। ऐसे मुश्किल हालात में गौतम गंभीर वीरेंद्र सहवाग के साथ सलामी बल्लेबाज के रूप में मैदान पर उतरे। सहवाग 22 रन बनाकर आउट हो गए लेकिन गंभीर ने एक छोर संभालकर बल्लेबाजी जारी रखी।
गंभीर ने इसके बाद राहुल द्रविड़ के साथ दूसरे विकेट के लिए 133 रन की महत्वपूर्ण साझेदारी की। दोनों बल्लेबाजों ने 376 गेंदों का सामना करते हुए न्यूजीलैंड के गेंदबाजों को लंबे समय तक विकेट के लिए तरसाया। द्रविड़ ने 62 रन बनाए। उनके आउट होने के बाद गंभीर ने सचिन तेंदुलकर के साथ तीसरे विकेट के लिए 97 रन जोड़े। तेंदुलकर ने 64 रन का योगदान दिया। इसके बाद वीवीएस लक्ष्मण के साथ गंभीर ने चौथे विकेट के लिए 96 रन की साझेदारी की। इस दौरान भारतीय बल्लेबाजों का मुख्य लक्ष्य तेजी से रन बनाना नहीं बल्कि क्रीज पर टिके रहकर मैच को हार से बचाना था।
गंभीर की एकाग्रता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उन्होंने 436 गेंदों का सामना करते हुए 137 रन बनाए। वह करीब 643 मिनट तक क्रीज पर डटे रहे। उनकी इस मैराथन पारी ने न्यूजीलैंड के गेंदबाजों को लगातार मेहनत करने पर मजबूर किया और भारतीय टीम को मुकाबले में बनाए रखा। गंभीर के आउट होने के बाद लक्ष्मण ने नाबाद 124 रन बनाए जबकि युवराज सिंह 54 रन बनाकर नाबाद रहे। दोनों ने बचा हुआ समय निकालते हुए न्यूजीलैंड को जीत से दूर रखा। मैच समाप्त होने तक भारत ने दूसरी पारी में चार विकेट पर 476 रन बना लिए थे और मुकाबला ड्रॉ हो गया।
इस ऐतिहासिक मुकाबले में द्रविड़ सचिन लक्ष्मण और युवराज ने भी अहम योगदान दिया लेकिन गंभीर की पारी को भारतीय टेस्ट क्रिकेट के धैर्यपूर्ण प्रदर्शनों में विशेष स्थान मिलता है। यह पारी बताती है कि क्रिकेट में हर बार बड़ी जीत के लिए तेज रन बनाना जरूरी नहीं होता। कभी-कभी क्रीज पर टिके रहना और परिस्थितियों के अनुसार खेलना भी टीम के लिए सबसे बड़ी उपलब्धि बन जाता है।
14 अक्टूबर 1981 को दिल्ली में जन्मे गंभीर ने 2003 से 2016 के बीच भारत के लिए 58 टेस्ट 147 वनडे और 37 टी20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबले खेले। उन्होंने टेस्ट में 4154 वनडे में 5238 और टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में 932 रन बनाए। 2011 के वनडे विश्व कप और 2007 के टी20 विश्व कप में भारत की खिताबी जीत में उनकी भूमिका बेहद अहम रही। साल 2018 में संन्यास लेने के बाद गंभीर ने कोचिंग और क्रिकेट प्रशासन में अपनी नई पारी शुरू की। नौ जुलाई 2024 को भारतीय टीम के मुख्य कोच बने गंभीर के नेतृत्व में भारत ने चैंपियंस ट्रॉफी 2025 और टी20 विश्व कप 2026 का खिताब जीता। खिलाड़ी के रूप में संघर्ष और निर्णायक मौकों पर प्रदर्शन करने वाले गंभीर अब कोच के तौर पर भारतीय क्रिकेट को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी निभा रहे हैं।