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  • IPL 2026: इस बार नहीं होगी IPL 2026 की ओपनिंग सेरेमनी, जानिए रद्द होने के पीछे क्‍या है वजह?

    IPL 2026: इस बार नहीं होगी IPL 2026 की ओपनिंग सेरेमनी, जानिए रद्द होने के पीछे क्‍या है वजह?


    नई दिल्ली। दुनिया की सबसे बड़ी क्रिकेट लीग IPL का 19वां सीजन शनिवार, 28 मार्च से शुरू होने जा रहा है। सीजन का पहला मुकाबला रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु RCB और सनराइजर्स हैदराबाद SRH के बीच शाम 7:30 बजे एम चिन्नास्वामी स्टेडियम में खेला जाएगा। IPL का हर सीजन भव्य उद्घाटन समारोह से शुरू होता रहा है, लेकिन इस बार ओपनिंग सेरेमनी आयोजित नहीं की जाएगी।

    2019 में यह समारोह पुलवामा आतंकी हमले के कारण रद्द हुआ था, जिसमें 40 जवान शहीद हुए थे। उसके बाद कोरोना महामारी के दौरान भी समारोह स्थगित रहा। हालांकि पिछले साल कोलकाता में भव्य उद्घाटन हुआ था, जिसमें शाहरुख खान, श्रेया घोषाल, दिशा पटानी और कारन औजला ने कार्यक्रम को यादगार बनाया था।

    IPL 2026 में ओपनिंग सेरेमनी क्यों नहीं होगी

    बीसीसीआई सचिव देवजीत सैकिया ने मीडिया को बताया कि इस साल उद्घाटन समारोह नहीं होगा। उन्होंने कहा कि हालांकि बीसीसीआई और IPL गवर्निंग काउंसिल भव्य क्लोजिंग सेरेमनी की योजना बना रहे हैं।

    दरअसल, एम चिन्नास्वामी स्टेडियम में पिछले साल एक दुखद हादसा हुआ था। RCB ने अपने पहले IPL खिताब की खुशी मनाने के लिए अपने होम ग्राउंड पर अचानक जश्न आयोजित किया, जिसमें बड़ी संख्या में फैंस स्टेडियम के बाहर जमा हो गए।

    चूंकि टिकट मुफ्त थे और आयोजन की तैयारी सीमित थी, स्टेडियम के बाहर भगदड़ मच गई और 11 फैंस की मौत हो गई। इस घटना के स्मरण और मृतकों को श्रद्धांजलि देने के लिए IPL 2026 की ओपनिंग सेरेमनी रद्द की गई है। बीसीसीआई ने 28 मार्च से 24 मई तक 12 स्टेडियम में 70 मैचों के साथ पूरे सीजन का शेड्यूल जारी कर दिया है।

  • शेयर बाजार की कमजोर शुरुआत, ग्लोबल संकेतों के चलते गिरावट में ओपनिंग

    शेयर बाजार की कमजोर शुरुआत, ग्लोबल संकेतों के चलते गिरावट में ओपनिंग


    नई दिल्ली। कमजोर वैश्विक संकेतों के बीच शुक्रवार को भारतीय शेयर बाजार की शुरुआत भारी गिरावट के साथ हुई। शुरुआती कारोबार में ही निवेशकों की सतर्कता साफ नजर आई, जिससे प्रमुख सूचकांक लाल निशान में फिसल गए। सुबह करीब 9:18 बजे बीएसई सेंसेक्स 808 अंकों यानी 1.07 प्रतिशत की गिरावट के साथ 74,435 के स्तर पर कारोबार करता दिखा, वहीं एनएसई निफ्टी भी 274 अंक यानी 1.18 प्रतिशत टूटकर 23,033 पर पहुंच गया। बाजार खुलते ही चौतरफा बिकवाली का दबाव देखने को मिला, जिससे लगभग सभी सेक्टर प्रभावित हुए। खासकर पीएसयू बैंक और ऑटो सेक्टर में सबसे ज्यादा कमजोरी दर्ज की गई, जो बाजार की गिरावट के प्रमुख कारण बने।

    सेक्टरों में मिला-जुला रुख, आईटी ने दिखाई मजबूती

    शुरुआती सत्र में जहां एक ओर निफ्टी पीएसयू बैंक और निफ्टी ऑटो इंडेक्स टॉप लूजर्स के रूप में उभरे, वहीं कुछ सेक्टरों ने मजबूती भी दिखाई। निफ्टी आईटी एकमात्र ऐसा प्रमुख सेक्टर रहा जो हरे निशान में कारोबार करता दिखा। इसके अलावा निफ्टी फाइनेंशियल सर्विस, रियल्टी, इंडिया डिफेंस, प्राइवेट बैंक, कंजप्शन, मेटल और इंफ्रा में सीमित खरीदारी देखने को मिली। हालांकि यह तेजी बाजार की कुल गिरावट को संभालने के लिए पर्याप्त नहीं रही। लार्जकैप शेयरों के साथ-साथ मिडकैप और स्मॉलकैप कंपनियों में भी बिकवाली का दबाव बना रहा। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 561 अंक यानी 1.02 प्रतिशत गिरकर 54,769 पर पहुंच गया, जबकि निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 130 अंक यानी 0.82 प्रतिशत टूटकर 15,766 पर आ गया।

    दिग्गज शेयरों का प्रदर्शन: आईटी चमका, बैंकिंग और ऑटो दबाव में

    सेंसेक्स के प्रमुख शेयरों में आईटी कंपनियों ने बाजार को कुछ सहारा देने की कोशिश की। एचसीएल टेक, टीसीएस, इन्फोसिस और टेक महिंद्रा जैसे दिग्गज शेयरों में तेजी दर्ज की गई। इसके अलावा सन फार्मा और ट्रेंट भी बढ़त के साथ कारोबार करते नजर आए। दूसरी ओर बैंकिंग, ऑटो और इंफ्रा से जुड़े शेयरों में गिरावट हावी रही। बजाज फिनसर्व, एचडीएफसी बैंक, इंडिगो, एलएंडटी, महिंद्रा एंड महिंद्रा, कोटक महिंद्रा बैंक, एसबीआई, एक्सिस बैंक, हिंदुस्तान यूनिलीवर, अल्ट्राटेक सीमेंट, बीईएल, मारुति सुजुकी, टाइटन, आईसीआईसीआई बैंक और पावर ग्रिड जैसे बड़े शेयर नुकसान में रहे, जिससे बाजार पर दबाव और बढ़ गया।

    वैश्विक संकेतों का असर, अमेरिका-ईरान तनाव बना वजह

    एशियाई बाजारों का रुख मिला-जुला रहा। टोक्यो, सोल और जकार्ता में जहां तेजी देखी गई, वहीं शंघाई और हांगकांग के बाजार गिरावट के साथ खुले। अमेरिकी बाजार गुरुवार को पहले ही गिरावट के साथ बंद हुए थे, जिसका असर भारतीय बाजार पर भी देखने को मिला। विशेषज्ञों के अनुसार, अमेरिकी टेक्नोलॉजी इंडेक्स नैस्डैक में आई कमजोरी और अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव ने निवेशकों की चिंता बढ़ाई है। शांति वार्ता की समय सीमा नजदीक आने से बाजार में अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है। हालांकि बाद में इस समय सीमा को आगे बढ़ा दिया गया, जिससे कुछ राहत की उम्मीद जरूर बनी, लेकिन शुरुआती कारोबार में इसका सकारात्मक असर नहीं दिखा।

    निवेशकों के लिए सतर्कता जरूरी, उतार-चढ़ाव के बीच सीमित मौके

    विशेषज्ञों का मानना है कि खबरों के आधार पर बाजार में अल्पकालिक उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। ऐसे माहौल में निवेशकों को जल्दबाजी में फैसले लेने से बचना चाहिए और सोच-समझकर निवेश करना चाहिए। मौजूदा परिस्थितियों में बाजार में सीमित अवसर ही दिखाई दे रहे हैं, इसलिए जोखिम प्रबंधन बेहद जरूरी है।

  • छिंदवाड़ा सड़क दुर्घटना में 10 की मौत, मंत्री राकेश सिंह ने मृतकों के परिवारों को आर्थिक सहायता का आश्वासन दिया

    छिंदवाड़ा सड़क दुर्घटना में 10 की मौत, मंत्री राकेश सिंह ने मृतकों के परिवारों को आर्थिक सहायता का आश्वासन दिया


    छिंदवाड़ा । मध्यप्रदेश के छिंदवाड़ा जिले में बीते गुरुवार रात हुई बस-पिकअप टक्कर के बाद प्रदेश के प्रभारी मंत्री राकेश सिंह देर रात जिला अस्पताल पहुंचे और घायलों का हालचाल लिया। मंत्री ने चिकित्सकों से घायलों के उपचार की विस्तृत जानकारी ली और सुनिश्चित किया कि सभी को बेहतर और समय पर चिकित्सा सुविधा मिले।

    इस हादसे में कुल 10 लोगों की मौत हुई थी जिनमें 6 पुरुष 3 महिलाएं और 1 बच्चा शामिल हैं। सभी घायलों को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है और उनका इलाज जारी है। दो गंभीर घायलों को बेहतर इलाज के लिए नागपुर रेफर किया गया है।

    मंत्री राकेश सिंह ने मृतकों के परिवारों के प्रति गहरा शोक व्यक्त किया और उन्हें आर्थिक सहायता का आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि मृतकों के परिवारों को प्रत्येक को चार-चार लाख रुपए और गंभीर रूप से घायल व्यक्तियों को एक-एक लाख रुपए की सहायता राशि प्रदान की जाएगी। मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि राज्य सरकार हर तरह से पीड़ित परिवारों के साथ खड़ी है।

    इस दौरान जबलपुर से डॉक्टरों की विशेष टीम भी अस्पताल पहुँची और उन्होंने सभी घायलों का परीक्षण किया। मंत्री ने अस्पताल प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों को आवश्यक दिशा निर्देश दिए ताकि उपचार में किसी प्रकार की कमी न रहे। घटना स्थल छिंदवाड़ा से नागपुर रोड पर था जहां बस और पिकअप में जोरदार टक्कर हुई। यह हादसा न केवल स्थानीय लोगों के लिए बल्कि पूरे जिले के लिए सदमे की स्थिति पैदा कर गया।

    प्रभारी मंत्री राकेश सिंह की रातभर की पहल ने न केवल घायलों को बेहतर इलाज सुनिश्चित किया बल्कि प्रशासनिक तंत्र को भी सक्रिय किया। इसके अलावा यह कदम पीड़ित परिवारों के लिए सरकार की तत्परता और संवेदनशीलता का संदेश भी है। यह हादसा सड़क सुरक्षा की गंभीरता और समय पर प्रशासनिक हस्तक्षेप की आवश्यकता को उजागर करता है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं में मृतकों और घायलों को तत्काल मदद मिल सके।

  • केंद्र का बड़ा फैसला: पेट्रोल-डीजल पर एक्साइज ड्यूटी 10 रुपये प्रति लीटर घटाई

    केंद्र का बड़ा फैसला: पेट्रोल-डीजल पर एक्साइज ड्यूटी 10 रुपये प्रति लीटर घटाई


    नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में तेजी के बीच आम जनता को राहत देने के लिए बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने पेट्रोल और डीजल पर 10 रुपये प्रति लीटर एक्साइज ड्यूटी घटाने का ऐलान किया है। इस फैसले के बाद पेट्रोल पर एक्साइज ड्यूटी घटकर 3 रुपये प्रति लीटर रह गई है, जबकि डीजल पर इसे पूरी तरह खत्म कर शून्य कर दिया गया है।

    यह निर्णय ऐसे समय में लिया गया है, जब अमेरिका और इजरायल-ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में भारी उछाल देखा जा रहा है। सरकार का उद्देश्य इस वैश्विक अस्थिरता का असर सीधे आम उपभोक्ताओं पर पड़ने से रोकना है।

    निर्यात पर टैक्स, घरेलू बाजार को प्राथमिकता

    डीजल और ATF पर लगाया गया अतिरिक्त शुल्क सरकार ने घरेलू बाजार में ईंधन की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए रणनीतिक कदम भी उठाए हैं। डीजल के निर्यात पर 21.5 रुपये प्रति लीटर और एविएशन टरबाइन फ्यूल (ATF) पर 29.5 रुपये प्रति लीटर का टैक्स लगाया गया है। इसके साथ ही, 2022 की एक पुरानी अधिसूचना को रद्द करते हुए आयातित ATF पर एक्साइज ड्यूटी में भी राहत दी गई है। इससे एविएशन सेक्टर को भी कुछ हद तक राहत मिलने की उम्मीद है।

    OMC पर बढ़ा दबाव, भारी नुकसान का अनुमान

    कंपनियों को प्रति लीटर 48.8 रुपये तक का नुकसान रिपोर्ट्स के मुताबिक, ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) को वर्तमान में ईंधन की बिक्री पर लगभग 48.8 रुपये प्रति लीटर तक का नुकसान हो रहा है। इसका मुख्य कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी है। उम्मीद जताई जा रही है कि एक्साइज ड्यूटी में कटौती के बाद कंपनियां इस नुकसान को आंशिक रूप से समायोजित करेंगी और उपभोक्ताओं को राहत देने में मदद करेंगी।

    ब्रेंट क्रूड 101 डॉलर के पार, 40% की बढ़ोतरी

    मध्य पूर्व तनाव का सीधा असर, वैश्विक बाजार में उथल-पुथल पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल आया है। बीते एक महीने में ब्रेंट क्रूड करीब 40% बढ़कर 101 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया है। इसका असर पूरी दुनिया में ईंधन की कीमतों पर पड़ा है, लेकिन भारत में सरकार के हस्तक्षेप के चलते कीमतों को स्थिर बनाए रखने की कोशिश की जा रही है।

    देश में ईंधन की पर्याप्त उपलब्धता, घबराने की जरूरत नहीं

    74 दिनों का भंडार, सरकार ने अफवाहों से बचने की दी सलाह पेट्रोलियम मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि देश में पेट्रोलियम उत्पादों और एलपीजी की आपूर्ति पूरी तरह सुरक्षित और नियंत्रण में है। भारत के पास कुल 74 दिनों का भंडार है, जिसमें से करीब 60 दिनों का वास्तविक स्टॉक उपलब्ध है। सरकार ने नागरिकों से अपील की है कि वे किसी भी तरह के दुष्प्रचार या अफवाहों पर ध्यान न दें, क्योंकि सभी रिटेल पेट्रोल पंपों पर पर्याप्त ईंधन उपलब्ध है।

  • फिल्मी स्टाइल में हुई बारात अलीराजपुर में दूल्हा बुलडोजर पर पहुँचा दुल्हन के पास

    फिल्मी स्टाइल में हुई बारात अलीराजपुर में दूल्हा बुलडोजर पर पहुँचा दुल्हन के पास


    अलीराजपुर । मध्यप्रदेश के अलीराजपुर जिले के ग्राम उमराली से एक बारात का वीडियो सामने आया है जिसने सोशल मीडिया पर धूम मचा दी है। इस बारात की सबसे खास बात यह थी कि दूल्हा घोड़ी या लग्जरी कार की बजाय बुलडोजर (JCB) पर सवार होकर अपनी दुल्हन को लेने निकला। डीजे की धुन पर नाचते-गाते बाराती और दूल्हे की यह एंट्री किसी फिल्मी सीन से कम नहीं लग रही थी।

    जैसे ही बारात उमराली गांव की सड़कों से गुजरी, लोगों की भारी भीड़ इकट्ठा हो गई। हर कोई अपने मोबाइल में इस अनोखी और मजेदार एंट्री को कैद करने में जुट गया। बारात में शामिल लोग पूरी ऊर्जा और उत्साह के साथ नाचते-गाते नजर आए।

    सोशल मीडिया पर यह वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है और लोग इसे खूब पसंद कर रहे हैं। वीडियो पर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं आ रही हैं, कुछ लोग इसे मजेदार बता रहे हैं तो कुछ लोग इसे सबसे अलग और अनोखा अंदाज़ बता रहे हैं।

    यह अनोखी बारात न केवल ग्रामीण परंपराओं में नयापन लेकर आई है बल्कि यह दिखाती है कि किस तरह शादी के उत्सव में रचनात्मकता और मनोरंजन का अद्भुत मिश्रण किया जा सकता है। दूल्हे का बुलडोजर पर सवार होकर दुल्हन के घर पहुंचना गांव में एक चर्चा का विषय बन गया है और सोशल मीडिया पर यह मजेदार ट्रेंड बन चुका है।इस बारात ने साबित कर दिया कि शादी सिर्फ परंपरा का पालन नहीं बल्कि अपनी स्टाइल और अनोखे अंदाज़ से यादगार बनाने का भी मौका होती है।
     

  • ईंधन कीमतों पर नियंत्रण: पीएम मोदी की नीति से उपभोक्ताओं को राहत-हरदीप पुरी

    ईंधन कीमतों पर नियंत्रण: पीएम मोदी की नीति से उपभोक्ताओं को राहत-हरदीप पुरी


    नई दिल्ली। वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल के बावजूद भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों को स्थिर बनाए रखना केंद्र सरकार का बड़ा फैसला माना जा रहा है। केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने शुक्रवार को कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अंतरराष्ट्रीय अस्थिरता के बीच देश के नागरिकों को राहत देने के लिए ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी नहीं की।

    उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर जानकारी देते हुए बताया कि पिछले एक महीने में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें करीब 70 डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर 122 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई हैं। इसके चलते दुनियाभर में पेट्रोल-डीजल के दामों में भारी बढ़ोतरी देखने को मिली है।

    दुनिया में महंगाई, भारत में राहत

    एशिया से लेकर यूरोप तक कीमतों में उछाल, भारत में स्थिरता बरकरार पुरी के मुताबिक, दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों में ईंधन की कीमतें 30% से 50% तक बढ़ी हैं, जबकि उत्तरी अमेरिका में करीब 30%, यूरोप में 20% और अफ्रीकी देशों में 50% तक बढ़ोतरी दर्ज की गई है।से हालात में भारत सरकार के सामने दो विकल्प थे—या तो वैश्विक ट्रेंड के अनुसार कीमतें बढ़ाई जाएं या फिर खुद वित्तीय बोझ उठाकर आम जनता को राहत दी जाए। सरकार ने दूसरा रास्ता चुना और नागरिकों को महंगाई के सीधे असर से बचाने का फैसला किया।

    एक्साइज ड्यूटी में कटौती से दी राहत

    पेट्रोल पर 3 रुपये, डीजल पर शून्य हुआ टैक्स सरकार ने पेट्रोल और डीजल की कीमतों को स्थिर रखने के लिए सेंट्रल एक्साइज ड्यूटी में 10-10 रुपये प्रति लीटर की कटौती की है। इस फैसले के बाद पेट्रोल पर एक्साइज ड्यूटी घटकर 3 रुपये प्रति लीटर रह गई है, जबकि डीजल पर इसे पूरी तरह समाप्त कर शून्य कर दिया गया है। पुरी ने बताया कि अंतरराष्ट्रीय कीमतों में तेजी के कारण ऑयल मार्केटिंग कंपनियों को भारी नुकसान हो रहा है—पेट्रोल पर करीब 24 रुपये प्रति लीटर और डीजल पर 30 रुपये प्रति लीटर का घाटा उठाना पड़ रहा है। इसके बावजूद सरकार ने कर राजस्व में कटौती कर आम लोगों को राहत देने का फैसला लिया है।

    निर्यात शुल्क और रणनीतिक कदम

    घरेलू आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए उठाए गए अतिरिक्त कदम सरकार ने घरेलू बाजार में ईंधन की उपलब्धता बनाए रखने के लिए निर्यात पर भी शुल्क लगाया है। अब विदेशी देशों को पेट्रोल-डीजल निर्यात करने वाली रिफाइनरियों को अतिरिक्त कर देना होगा, जिससे देश के भीतर पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके।यह फैसला ऐसे समय में लिया गया है, जब पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजारों में अस्थिरता बनी हुई है।

  • पेट्रोल-डीजल पर एक्साइज ड्यूटी घटाने का असर, उपभोक्ताओं को महंगाई से राहत

    पेट्रोल-डीजल पर एक्साइज ड्यूटी घटाने का असर, उपभोक्ताओं को महंगाई से राहत


    नई दिल्ली।देश में बढ़ती महंगाई और वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उछाल के बीच केंद्र सरकार ने बड़ा फैसला लेते हुए पेट्रोल और डीजल पर एक्साइज ड्यूटी में कटौती की है। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शुक्रवार को कहा कि इस फैसले का मुख्य उद्देश्य उपभोक्ताओं को कीमतों में संभावित वृद्धि से बचाना है।

    उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर जानकारी देते हुए बताया कि पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई है। ऐसे में सरकार ने घरेलू उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए पेट्रोल और डीजल पर सेंट्रल एक्साइज ड्यूटी में 10 रुपये प्रति लीटर की कमी की है।

    पेट्रोल 13 से घटकर 3 रुपये, डीजल पर एक्साइज हुआ शून्य

    सरकार ने सीधे राहत दी, कंपनियों से समायोजन की उम्मीद इस फैसले के बाद पेट्रोल पर एक्साइज ड्यूटी घटकर 3 रुपये प्रति लीटर रह गई है, जो पहले 13 रुपये थी। वहीं, डीजल पर एक्साइज ड्यूटी को पूरी तरह समाप्त करते हुए शून्य कर दिया गया है, जो पहले 10 रुपये प्रति लीटर थी। वित्त मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार हमेशा यह सुनिश्चित करती है कि आम नागरिकों को आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में उतार-चढ़ाव का कम से कम असर पड़े।

    निर्यात शुल्क बढ़ाकर घरेलू आपूर्ति पर फोकस

    डीजल और ATF पर लगाया गया नया शुल्क, देश में उपलब्धता बढ़ाने की कोशिश सरकार ने सिर्फ एक्साइज ड्यूटी में कटौती ही नहीं की, बल्कि घरेलू बाजार में ईंधन की पर्याप्त उपलब्धता बनाए रखने के लिए रणनीतिक कदम भी उठाए हैं। डीजल के निर्यात पर 21.5 रुपये प्रति लीटर और एविएशन टरबाइन फ्यूल (ATF) पर 29.5 रुपये प्रति लीटर का शुल्क लगाया गया है। इस कदम का मकसद यह है कि कंपनियां ज्यादा निर्यात करने के बजाय घरेलू बाजार की जरूरतों को प्राथमिकता दें, जिससे आम जनता को ईंधन की कमी का सामना न करना पड़े।

    कच्चे तेल की कीमतों में 40% उछाल, OMC पर बढ़ा दबाव

    ब्रेंट क्रूड 101 डॉलर प्रति बैरल, कंपनियों को हो रहा नुकसान पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल आया है। बीते एक महीने में ब्रेंट क्रूड करीब 40% तक बढ़कर 101 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गया है।

    इसका सीधा असर देश की ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) पर पड़ा है, जिन्हें ईंधन की खुदरा बिक्री पर नुकसान उठाना पड़ रहा है। ऐसे में उम्मीद जताई जा रही है कि ये कंपनियां इस टैक्स कटौती को अपने स्तर पर समायोजित कर उपभोक्ताओं को राहत देने में मदद करेंगी।

    सरकार के फैसले को मिला समर्थन

    पीयूष गोयल बोले- 140 करोड़ भारतीयों को मिलेगा फायदा केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने भी इस फैसले को सराहनीय बताया है। उन्होंने कहा कि यह कदम वैश्विक अस्थिरता के बीच 140 करोड़ भारतीयों को आर्थिक सुरक्षा प्रदान करेगा और देश की विकास गति को बनाए रखने में मदद करेगा।

  • भारत में लॉकडाउन की अफवाहों को लेकर हरदीप पुरी ने की स्थिति स्पष्ट, जानिए क्‍या कहा ?

    भारत में लॉकडाउन की अफवाहों को लेकर हरदीप पुरी ने की स्थिति स्पष्ट, जानिए क्‍या कहा ?


    नई दिल्ली। मिडिल ईस्ट में जारी संकट के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में तेज़ी देखी जा रही है। केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप पुरी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जानकारी साझा करते हुए कहा कि पिछले एक महीने में कच्चे तेल की कीमतें 70 डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर करीब 122 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई हैं। इसके परिणामस्वरूप दुनिया भर में पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ गई हैं। दक्षिण-पूर्व एशिया में कीमतों में 30%-50%, उत्तरी अमेरिका में 30%, यूरोप में 20% और अफ्रीका में 50% तक की वृद्धि हुई है।

    हरदीप पुरी ने बताया कि मोदी सरकार के सामने दो विकल्प थे: या तो अन्य देशों की तरह भारतीय नागरिकों से अधिक शुल्क लें या फिर वित्तीय बोझ उठाकर जनता को अंतरराष्ट्रीय अस्थिरता से सुरक्षित रखें। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने रूस-यूक्रेन संघर्ष के बाद पिछले चार सालों से निभाई जा रही प्रतिबद्धता के तहत देशवासियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए वित्तीय बोझ उठाने का निर्णय लिया है।

    सरकार ने राजस्व में कटौती की

    केंद्रीय मंत्री ने बताया कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ती पेट्रोल और डीजल की कीमतों के चलते तेल कंपनियों को हो रहे भारी नुकसान (पेट्रोल पर लगभग 24 रुपये/लीटर और डीजल पर 30 रुपये/लीटर) को कम करने के लिए सरकार ने अपने राजस्व में बड़ा कटौती किया है। इसके साथ ही अंतरराष्ट्रीय कीमतों में वृद्धि के कारण निर्यात पर टैक्स भी लगाया गया है, और किसी भी रिफाइनरी को विदेशी निर्यात के लिए एक्सपोर्ट टैक्स देना होगा।

    लॉकडाउन अफवाहों का खंडन

    हरदीप पुरी ने कहा कि वैश्विक हालात अभी भी अनिश्चित हैं, और सरकार ऊर्जा, सप्लाई चेन और आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति पर लगातार नजर रख रही है। प्रधानमंत्री के नेतृत्व में यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि ईंधन और अन्य आवश्यक वस्तुएँ बिना किसी बाधा के उपलब्ध रहें।

    केंद्रीय मंत्री ने साफ किया कि भारत ने पहले भी वैश्विक अनिश्चितताओं के दौरान स्थिरता दिखाई है और आगे भी सक्रिय और समन्वित कदम उठाता रहेगा। लॉकडाउन को लेकर फैली अफवाहें पूरी तरह गलत हैं। उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति में अफवाह फैलाना और डर का माहौल बनाना गैर-जिम्मेदाराना है, और जनता को शांत, संयमित और एकजुट रहना चाहिए।

  • FY27 में ऑटो इंडस्ट्री की रफ्तार धीमी पड़ने के संकेत, ग्रोथ में आ सकती है नरमी

    FY27 में ऑटो इंडस्ट्री की रफ्तार धीमी पड़ने के संकेत, ग्रोथ में आ सकती है नरमी


    नई दिल्ली। भारत के ऑटोमोबाइल सेक्टर ने वित्त वर्ष 2026 (FY26) में शानदार प्रदर्शन किया है, लेकिन आने वाले वित्त वर्ष 2027 (FY27) में इस रफ्तार में कुछ कमी देखने को मिल सकती है। रेटिंग एजेंसी ICRA की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, जहां FY26 में जीएसटी कटौती, बेहतर आर्थिक गतिविधियों और मजबूत मांग ने इंडस्ट्री को गति दी, वहीं FY27 में हाई बेस और बढ़ती लागत के कारण ग्रोथ थोड़ी धीमी पड़ सकती है।

    रिपोर्ट बताती है कि जीएसटी दरों में कमी से खासतौर पर दोपहिया और वाणिज्यिक वाहन (CV) सेगमेंट को बड़ा फायदा हुआ। इससे ग्राहकों की खरीद क्षमता (affordability) बढ़ी और कंपनियों को भी मांग में तेजी देखने को मिली। खासकर कमर्शियल व्हीकल्स के बेड़े बनाना पहले के मुकाबले ज्यादा किफायती हो गया, जिससे ट्रांसपोर्ट और लॉजिस्टिक्स सेक्टर में निवेश बढ़ा।

    कमर्शियल व्हीकल्स में जबरदस्त उछाल, LCV सेगमेंट को मिला फायदा

    फरवरी 2026 में 23.8% की वृद्धि, इन्फ्रास्ट्रक्चर और लॉजिस्टिक्स ने बढ़ाई मांग

    रिपोर्ट के मुताबिक, फरवरी 2026 में वाणिज्यिक वाहनों की थोक बिक्री में सालाना आधार पर 23.8% की वृद्धि दर्ज की गई, जबकि पूरे वित्त वर्ष के पहले 11 महीनों में यह वृद्धि 12.5% रही। खुदरा बिक्री में भी 28.9% की तेज बढ़ोतरी देखने को मिली, जिसमें मध्यम और भारी वाणिज्यिक वाहनों (M&HCV) की अहम भूमिका रही।

    हल्के वाणिज्यिक वाहन (LCV) सेगमेंट को भी काफी फायदा मिला है। अंतिम मील डिलीवरी (last-mile delivery) की मांग में सुधार और जीएसटी के चलते लागत कम होने से इस सेगमेंट में तेजी आई है। FY26 में LCV सेगमेंट में 7-9% की वृद्धि का अनुमान है, लेकिन FY27 में यह घटकर 4-6% रह सकती है।

    दोपहिया सेगमेंट में आई मजबूती, ग्रामीण मांग बनी सहारा

    बिक्री कई साल के उच्च स्तर पर, लेकिन FY27 में धीमी हो सकती है ग्रोथ

    दोपहिया वाहन सेगमेंट में भी व्यापक सुधार देखा गया है। ग्रामीण क्षेत्रों में मांग बढ़ने, आसान फाइनेंसिंग और जीएसटी कटौती से कीमतों में कमी के कारण FY26 में बिक्री कई वर्षों के उच्च स्तर पर पहुंच सकती है।

    रिपोर्ट के अनुसार, FY26 में घरेलू थोक बिक्री में लगभग 9% की वृद्धि का अनुमान है, लेकिन FY27 में यह घटकर 3-5% रह सकती है। हालांकि, रिप्लेसमेंट डिमांड (पुराने वाहनों को बदलने की जरूरत) और ग्रामीण आय में सुधार भविष्य में मांग को सपोर्ट देते रहेंगे।

    आगे की चुनौतियां: महंगा लोन और पुराने वाहनों की बढ़ती मांग

    फाइनेंसिंग लागत और सेकंड-हैंड मार्केट बन सकते हैं बाधा

    हालांकि इंडस्ट्री की बुनियाद मजबूत बनी हुई है, लेकिन कुछ चुनौतियां भी सामने आ रही हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि उच्च फाइनेंसिंग लागत (महंगे लोन) और खासकर LCV सेगमेंट में पुराने वाहनों की बढ़ती मांग नई बिक्री पर असर डाल सकती है। इसके अलावा, हाई बेस इफेक्ट (पिछले साल की ज्यादा ग्रोथ) के कारण भी FY27 में वृद्धि दर कम दिखाई दे सकती है।

  • बड़ी कार्रवाईः डेढ़ करोड़ का अनियमित व्यापारः करणी ज्वेलर्स में रातभर चली जीएसटी की छापेमारी

    बड़ी कार्रवाईः डेढ़ करोड़ का अनियमित व्यापारः करणी ज्वेलर्स में रातभर चली जीएसटी की छापेमारी


    बालाघाट । बालाघाट से बड़ी खबर सामने आई है जहां जिला मुख्यालय के मां अन्नपूर्णा मंदिर के निकट संचालित करणी ज्वेलर्स में जीएसटी टीम ने छापेमारी कर डेढ़ करोड़ रुपये की टैक्स चोरी का खुलासा किया है। यह कार्रवाई रातभर चली और इसके दौरान सोने और चांदी के स्टॉक में अभिलेखों के मुकाबले भारी अंतर पाया गया।

    जानकारी के मुताबिक इस छापेमारी में जीएसटी की 8 सदस्यीय टीम ने भाग लिया। इस टीम का मार्गदर्शन लोकेश कुमार लिल्हारे आयुक्त केंद्रीय वस्तु एवं सेवा कर जबलपुर ने किया। टीम ने ज्वेलर्स में जेवरात की खरीदी और बिक्री से जुड़े दस्तावेजों की जांच की और साथ ही स्टॉक का भौतिक सत्यापन भी किया।

    निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने परिसर में उपलब्ध सोने और चांदी के स्टॉक की गणना की और इसे करदाता द्वारा अभिलेखों में दर्शाए गए स्टॉक से तुलना की। इस तुलना में स्पष्ट रूप से देखा गया कि अभिलेखों की तुलना में स्टॉक में महत्वपूर्ण कमी है। प्रारंभिक आकलन के अनुसार इस कमी का मूल्य लगभग 1.5 करोड़ रुपये है। यह संकेत करता है कि करदाता ने लेखांकन और कर देयता के निर्धारण में गंभीर अनियमितताएं की हैं।

    सूत्रों के अनुसार यह कार्रवाई विश्वसनीय सूचनाओं के आधार पर की गई थी। छापेमारी के दौरान टीम ने रिटर्न फाइलों की भी जाँच की ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि कर गणना में कोई गड़बड़ी न हुई हो। अधिकारियों ने बताया कि मामले की विस्तृत जांच जारी है और आवश्यकतानुसार कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इस दौरान जो भी अनियमितताएं सामने आएंगी उनके खिलाफ कठोर कदम उठाए जाएंगे।

    यह मामला न सिर्फ कर चोरी का है बल्कि यह ज्वेलरी व्यवसाय में होने वाली संभावित वित्तीय अनियमितताओं पर भी रोशनी डालता है। अब यह देखना बाकी है कि आगे जांच में और क्या खुलासा होता है और इस कार्रवाई का प्रभाव अन्य व्यवसायों पर कैसे पड़ता है।इस तरह की कार्रवाई यह संदेश देती है कि जीएसटी विभाग हर स्तर पर कर अनुपालन पर नजर रख रहा है और किसी भी अनियमित गतिविधि को बख्शा नहीं जाएगा।