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  • Republic Day of india: 26 जनवरी को देखना चाहते हैं परेड तो इन बातों का रखें खास खयाल

    Republic Day of india: 26 जनवरी को देखना चाहते हैं परेड तो इन बातों का रखें खास खयाल

    नई दिल्ली। गणतंत्र दिवस के लिए दिल्ली में चाक चौबंद सुरक्षा तैयारियों को फाइनल टच दिया जा रहा है। लगातार मिल रहे खुफिया अलर्ट से दिल्ली पुलिस सतर्क है। 26 जनवरी और बीटिंग रिट्रीट के दौरान दिल्ली से जुड़े सभी राज्यों के बॉर्डर पर पैनी नजर रहेगी। सूत्रों से पता चला कि आईबी ने लाल किला पर हुए फिदायीन अटैक जैसे खतरे को लेकर आगाह किया है। गणतंत्र दिवस परेड के दौरान सुरक्षा एजेंसियों की जूते और जैकेट पर पैनी नजर रहेगी। सुरक्षा तैयारियों की इस कड़ी में 26 और 29 जनवरी को दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर हवाई क्षेत्र में अस्थायी प्रतिबंध लागू रहेंगे।
    पहचान पत्र साथ रखना जरूरी
    इन प्रतिबंधों के बीच 26 जनवरी को कर्तव्य पथ पर होने वाले परेड में सुरक्षा जांच को आसान बनाने के लिए कोशिश की जा रही है कि लोग कम सामान लेकर जाएं। आप अपने बैग में सिर्फ आईडी कार्ड, मोबाइल फोन, जरूरी डॉक्यूमेंट और पानी की छोटी बोतल जैसी जरूरी चीजें ही रखें। पुलिस का कहना है कि परेड देखने आने वालों को पहचान पत्र साथ रखना जरूरी है। गणतंत्र दिवस परेड 2026 की मुख्य थीम ‘वंदे मातरम’ रखी गई है।
    भूलकर भी साथ न ले जाएं ये चीजें
    सुरक्षा कारणों से कई चीजों पर पूरी तरह रोक रहेगी। अगर आप इनमें से कोई भी सामान साथ ले जाते हैं, तो पुलिस रोक सकती है। ऐसे में हथियार, चाकू, ब्लेड, कैंची या कोई भी तेजधार वाली चीज, भारी बैग या बड़ा बैकपैक, नेल, कटर, शराब, सिगरेट या किसी भी तरह का नशीला पदार्थ, ज्वलनशील सामान जैसे माचिस, लाइटर, इसके अलावा बिना परमिशन के पावर बैंक, सेल्फी स्टिक और लेजर लाइट, ड्रोन या कोई प्रोफेशनल कैमरा इन चीजों को भूलकर भी साथ न ले जाएं।
  • 16 साल की उम्र में सलमान को काम देने का दावा? हिमेश रेशमिया ने खुद बताई पूरी सच्चाई

    16 साल की उम्र में सलमान को काम देने का दावा? हिमेश रेशमिया ने खुद बताई पूरी सच्चाई


    नई दिल्ली ।बॉलीवुड में कुछ रिश्ते ऐसे होते हैं जो वक्त के साथ किंवदंती बन जाते हैं और सलमान खान और हिमेश रेशमिया का रिश्ता भी उन्हीं में से एक है। लंबे समय से यह माना जाता रहा है कि सलमान खान ने ही हिमेश रेशमिया को फिल्म इंडस्ट्री में ब्रेक दिया था। खुद हिमेश भी कई बार इस बात को स्वीकार कर चुके हैं। लेकिन इसके साथ-साथ एक दिलचस्प अफवाह यह भी उड़ती रही कि हिमेश रेशमिया ने महज 16 साल की उम्र में सलमान खान को अपनी एक फिल्म में बतौर लीड एक्टर साइन कर लिया था। आखिर इस दावे में कितनी सच्चाई हैइसका जवाब खुद हिमेश ने एक लोकप्रिय चैट शो में दिया।

    कॉमेडी किंग कपिल शर्मा के शो पर जब हिमेश रेशमिया से यह सीधा सवाल किया गया कि क्या उन्होंने 16 साल की उम्र में सलमान खान को अपनी फिल्म में साइन किया थातो हिमेश ने मुस्कुराते हुए उस दौर की कहानी सुनाई। उन्होंने बताया कि तकनीकी रूप से साइनिंग उनके पिता ने की थी। हिमेश ने कहा कि उस फिल्म का नाम युवा थाजो कभी बन नहीं पाई। उस वक्त वह बेहद कम उम्र के थेलेकिन म्यूजिक के लिए उनका जुनून साफ नजर आता था। उन्होंने बताया कि उस समय तक वह 200-300 गाने कंपोज कर चुके थे।

    हिमेश के मुताबिकसलमान खान ने वे गाने सुने थे और उन्हें पसंद भी किया था। हालांकि फिल्म आगे नहीं बढ़ पाईलेकिन सलमान के मन में हिमेश की मेहनत और टैलेंट की छाप रह गई। इसके बाद हिमेश टीवी इंडस्ट्री में चले गए और सीरियल प्रोडक्शन से जुड़ गए। म्यूजिक उनका पैशन थालेकिन उन्होंने तय किया था कि वह तभी फिल्मों में म्यूजिक देंगे जब उनका गाना किसी फिल्म का हिस्सा बनेगा।यहीं से कहानी एक अहम मोड़ लेती है। हिमेश ने बताया कि सलमान खान को वह शुरुआती मुलाकातें और गाने आज भी याद थे। इसी भरोसे के चलते सलमान ने उन्हें फिल्म प्यार किया तो डरना क्या का टाइटल सॉन्ग ऑफर किया। यह जिम्मेदारी आसान नहीं थीक्योंकि इसी नाम से मुगल-ए-आजम का ऐतिहासिक हिट गाना पहले से मौजूद था। हिमेश के लिए यह करियर का पहला बड़ा मौका था और असफलता का मतलब सब कुछ खत्म हो सकता था।

    लेकिन किस्मत और मेहनत दोनों ने साथ दिया। जब यह गाना सलमान खान और सलीम खान को सुनाया गयातो सलीम साहब ने खड़े होकर तालियां बजाईं। यही पल हिमेश रेशमिया के करियर का टर्निंग पॉइंट बन गया। पहला गाना सुपरहिट हुआ और इसके बाद हिमेश ने एक के बाद एक ब्लॉकबस्टर गाने दिए। एक समय ऐसा भी आया जब बॉलीवुड में शायद ही कोई फिल्म होती थी जिसमें हिमेश का म्यूजिक न हो।

    हालांकियह चमक ज्यादा समय तक कायम नहीं रह सकी। जब हिमेश ने यह शर्त रखी कि वह सिर्फ उन्हीं फिल्मों में गाने गाएंगे जिनमें वह खुद अभिनय करेंगेतब उनके करियर का ग्राफ नीचे आने लगा। मेकर्स ने दूसरे विकल्प तलाशने शुरू कर दिए और धीरे-धीरे उनके गाने कम होते चले गए।इसके बावजूदयह कहना गलत नहीं होगा कि सलमान खान और हिमेश रेशमिया की यह कहानी बॉलीवुड में संघर्षमौके और कृतज्ञता की एक मिसाल बन चुकी है।

  • दिल्ली में राशन कार्ड पर बड़ी कार्रवाई: 8 लाख कार्ड रद्द, आय सीमा बढ़कर हुई 1.20 लाख; अब नए पात्र परिवारों को मिलेगा लाभ

    दिल्ली में राशन कार्ड पर बड़ी कार्रवाई: 8 लाख कार्ड रद्द, आय सीमा बढ़कर हुई 1.20 लाख; अब नए पात्र परिवारों को मिलेगा लाभ


    नई दिल्ली । दिल्ली की सियासत और जनहित से जुड़ी एक बड़ी खबर सामने आ रही है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में दिल्ली सरकार ने राशन कार्ड प्रणाली को पूरी तरह पारदर्शी और न्यायसंगत बनाने के लिए कई ऐतिहासिक फैसले लिए हैं। सरकार ने एक तरफ जहाँ राशन कार्ड के लिए वार्षिक आय की सीमा बढ़ा दी है, वहीं दूसरी ओर अपात्र लोगों पर गाज गिराते हुए 8 लाख से अधिक कार्ड रद्द कर दिए हैं। इस कदम से वर्षों से राशन के इंतजार में बैठे लाखों परिवारों के लिए उम्मीद की नई किरण जगी है।

    आय सीमा में बढ़ोतरी, अब 1.20 लाख वाले भी पात्र मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने घोषणा की है कि दिल्ली में राशन कार्ड के लिए वार्षिक पारिवारिक आय की सीमा को 1 लाख रुपये से बढ़ाकर अब 1.20 लाख रुपये कर दिया गया है। इस निर्णय का उद्देश्य राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम 2013 के दायरे को बढ़ाना है ताकि बढ़ती महंगाई के बीच मध्यम-निम्न आय वर्ग के अधिक से अधिक जरूरतमंद परिवारों को मुफ्त या सस्ता अनाज मिल सके। सत्यापन में खुली पोल: 8.27 लाख लाभार्थी सूची से बाहर सरकार द्वारा खाद्य सुरक्षा डेटा की गहन जांच और फिजिकल वेरिफिकेशन कराया गया, जिसमें चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। जांच के बाद कुल 8,27,756 स्थान रिक्त हुए हैं।

    6.46 लाख लोगों की आय मानकों से अधिक पाई गई।

    23,394 लाभार्थियों के नाम दोहराव में दर्ज थे। 6,185 मामलों में मृत व्यक्तियों के नाम पर राशन उठाया जा रहा था। 95,682 लोग लंबे समय से राशन नहीं ले रहे थे, जिनमें से 56 हजार से अधिक ने खुद को सिस्टम से बाहर करने का अनुरोध किया। पहले आओ-पहले पाओ सिस्टम खत्म, अब DM करेंगे फैसला सरकार ने राशन कार्ड जारी करने की पुरानी व्यवस्था को पूरी तरह बदल दिया है। अब प्राथमिकता जिला स्तर पर गठित कमेटियों द्वारा तय की जाएगी। जिला मजिस्ट्रेट या अपर जिला मजिस्ट्रेट की अध्यक्षता वाली यह समिति स्थानीय विधायकों और अधिकारियों के साथ मिलकर आवेदनों की जांच करेगी। साथ ही, भविष्य की रिक्तियों को भरने के लिए 20 प्रतिशत की एक वेटिंग लिस्ट भी तैयार रखी जाएगी।

    कौन होगा अपात्र? कड़े किए गए नियम मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया है कि अब राशन कार्ड बनवाने के लिए राजस्व विभाग का आय प्रमाण पत्र अनिवार्य होगा। निम्नलिखित श्रेणियों को अपात्र माना जाएगा दिल्ली की ए से ई श्रेणी की पॉश कॉलोनियों में संपत्ति रखने वाले। आयकर दाता । चारपहिया वाहन मालिक व्यावसायिक वाहन को छोड़कर । सरकारी कर्मचारी के परिवार। किलोवाट से अधिक बिजली कनेक्शन वाले घर। विपक्ष का हमला: कांग्रेस ने बताया जटिल प्रक्रिया सरकार के इस फैसले पर राजनीतिक घमासान भी शुरू हो गया है। दिल्ली कांग्रेस अध्यक्ष देवेंद्र यादव ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार राशन कार्ड बनवाने की प्रक्रिया को जानबूझकर जटिल बना रही है। उन्होंने मांग की कि यह सुविधा हर विधानसभा क्षेत्र में सुलभ होनी चाहिए ताकि गरीबों को दफ्तरों के चक्कर न काटने पड़ें। वर्तमान में दिल्ली में करीब 11.65 लाख लोग राशन कार्ड मिलने की प्रतीक्षा कर रहे हैं, जिनके लिए रिक्त हुए ये 8 लाख स्थान बड़ी राहत साबित हो सकते हैं।

  • धर्म प्रचार छोड़ने पर साध्वी हर्षा पर हमला, संत समाज से बहिष्कार, सोशल मीडिया पर गालियां और धमकियां!

    धर्म प्रचार छोड़ने पर साध्वी हर्षा पर हमला, संत समाज से बहिष्कार, सोशल मीडिया पर गालियां और धमकियां!



    नई दिल्ली। सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो में साध्वी हर्षा रिछारिया ने भारी मन से घोषणा की कि वह धर्म प्रचार का काम छोड़कर वापस अपने पुराने पेशे एंकरिंग में लौट रही हैं। हर्षा का कहना है कि धर्म प्रचार के दौरान उन्हें संत समाज से न सिर्फ स्वीकृति नहीं मिली, बल्कि धमकियां, गंदी-गंदी बातें और धर्म परिवर्तन के ऑफर भी मिल रहे हैं। उन्होंने कहा कि कुछ लोग उन्हें “धर्म छोड़कर लौट रही” मानकर बदनाम करने की कोशिश कर रहे हैं और दूसरे धर्म के लोगों को भी उनके खिलाफ भड़काया जा रहा है।
    हर्षा ने स्पष्ट किया कि वह सनातनी हैं और हमेशा रहेंगी, लेकिन इस मानसिक उत्पीड़न को वह और बर्दाश्त नहीं कर सकतीं।

    हर्षा रिछारिया का नाम देशभर में तब चर्चा में आया जब 4 जनवरी 2025 को प्रयागराज महाकुंभ में वह निरंजनी अखाड़े की भव्य पेशवाई में संतों के साथ रथ पर सवार दिखाई दीं। उनकी तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गए और लोग उन्हें ‘महाकुंभ की सबसे सुंदर साध्वी’ कहने लगे। लेकिन इसी प्रसिद्धि के साथ विवाद भी जुड़ गया। कुछ धार्मिक गुरुओं ने इस पर आपत्ति जताई और कहा कि यह “धर्म को प्रदर्शन का हिस्सा बनाना” है और इससे समाज में गलत संदेश फैलता है।

    हर्षा ने बताया कि इस लोकप्रियता के बाद उन्हें संत समाज में स्वीकृति नहीं मिली। जब भी वह किसी संत से मिलने जातीं, तो उन्हें घंटों इंतजार कराया जाता। उनके पुराने एंकरिंग पेशे को लेकर उन्हें ‘पाप’ का भाव दिया जाता और उनसे सफाई मांगी जाती।

    हर्षा ने कहा कि उन्हें अपने पुराने पेशे पर गर्व है और वही पेशा उन्हें पहचान देता था, लेकिन धर्म के रास्ते पर आने के बाद उन्हें संदेह, तिरस्कार और भेदभाव का सामना करना पड़ा।

    हर्षा का आरोप है कि कुछ धार्मिक ठेकेदार और संत उनके खिलाफ सक्रिय रूप से काम कर रहे हैं। दिसंबर 2025 में माघ मेले में शिविर लगाने के लिए जमीन न मिलने की घटना उन्हें सबसे ज्यादा आहत कर गई। उन्होंने बताया कि शुरुआत में अधिकारियों ने उन्हें जमीन देने का आश्वासन दिया, लेकिन जैसे ही कुछ प्रभावशाली संतों को इसकी जानकारी मिली, उन्होंने अधिकारियों पर दबाव बनाया और जमीन आवंटन की प्रक्रिया रोक दी गई। हर्षा ने कहा कि उन्होंने कभी श्रद्धालुओं से एक पैसा नहीं लिया और सारी व्यवस्था अपने खर्च पर चलाती थीं।

    हर्षा का मानना है कि जब कोई लड़की धर्म के मार्ग पर आगे बढ़ती है, तो कुछ लोग उसे नीचे गिराने की कोशिश करते हैं। उन्होंने कहा कि उनके खिलाफ उत्पीड़न इसलिए बढ़ा क्योंकि उन्हें “धर्म प्रचार छोड़ने” की बात कहते हुए लोगों को बहस का मौका मिल गया। हर्षा ने यह भी कहा कि उन्हें कुछ लोगों द्वारा धर्म परिवर्तन के ऑफर दिए जा रहे हैं और धमकी भरे संदेश भी मिल रहे हैं।

    अंत में हर्षा ने युवाओं और महिलाओं को सलाह दी कि धर्म से जुड़ने के लिए अपने परिवार और घर के मंदिर तक ही सीमित रहें और किसी के पीछे अंधे होकर न चलें। उन्होंने स्पष्ट किया कि उन्होंने सिर्फ धर्म का प्रचार छोड़ा है, सनातन धर्म नहीं। साथ ही कहा कि अगर भविष्य में परिस्थितियां बदलती हैं, तो वह फिर से इस मार्ग पर लौट सकती हैं।

  • धार पुलिस का अलर्ट मोड: बसंत पंचमी और जुमा के बीच शांति बनाए रखने के लिए भारी बल

    धार पुलिस का अलर्ट मोड: बसंत पंचमी और जुमा के बीच शांति बनाए रखने के लिए भारी बल


    नई दिल्ली।  धार जिले में 23 जनवरी, शुक्रवार को बसंत पंचमी और जुमे की नमाज एक ही दिन होने जा रही है, जिसके चलते पुलिस और प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड पर है। जिले में सुरक्षा और कानून-व्यवस्था बनाए रखना इस बार प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।

    भोज उत्सव समिति ने बताया कि बसंत पंचमी के दिन भोजशाला में सूर्योदय से सूर्यास्त तक अखंड हवन-पूजन का आयोजन किया जाएगा। समिति ने स्पष्ट किया है कि यह पूजा बिना किसी रुकावट के संपन्न कराई जाएगी। वहीं, शुक्रवार होने के कारण दोपहर 1 बजे से भोजशाला परिसर में मुस्लिम समुदाय द्वारा जुमे की नमाज अदा की जाएगी। दोनों धर्मों के कार्यक्रमों का एक ही दिन होना प्रशासन के लिए अतिरिक्त सतर्कता का कारण है।

    8 हजार पुलिसकर्मी रहेंगे तैनात

    स्थिति को देखते हुए भोजशाला क्षेत्र, शहर के प्रमुख चौराहों और संवेदनशील इलाकों में भारी पुलिस बल तैनात किया गया है। पूरे जिले में लगभग 8 हजार पुलिसकर्मी तैनात किए गए हैं, जिसमें जिला पुलिस के साथ-साथ रिजर्व और रिप्लेसमेंट फोर्स भी शामिल हैं। पुलिस प्रशासन का मुख्य उद्देश्य है कि दोनों समुदायों के धार्मिक आयोजन शांति और सुरक्षा के साथ संपन्न हों।

    फ्लैग मार्च से बढ़ाई सतर्कता

    बसंत पंचमी के मद्देनजर पुलिस प्रशासन ने रविवार को फ्लैग मार्च भी निकाला। यह मार्च किला ग्राउंड से शुरू होकर शहर के प्रमुख मार्गों से गुजरा। मार्च में स्थानीय पुलिस के साथ रैपिड एक्शन फोर्स (RAF), वज्र वाहन और वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। इस दौरान पुलिस ने आम नागरिकों को सुरक्षा का भरोसा दिया और असामाजिक तत्वों को साफ संदेश दिया कि किसी भी प्रकार की अव्यवस्था बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

    शांति बनाए रखना चुनौती

    भोजशाला में होने वाले धार्मिक आयोजनों के दौरान प्रशासन की नजर हर जगह रहेगी। पुलिस ने बताया कि सभी संवेदनशील क्षेत्रों में विशेष निगरानी रखी जाएगी और आवश्यकतानुसार अतिरिक्त फोर्स भी तैनात किया जाएगा। इसके अलावा, शहर के प्रमुख मार्गों पर भी पुलिस लगातार गश्त करेगी, ताकि दोनों समुदाय अपने कार्यक्रमों को शांतिपूर्ण तरीके से अदा कर सकें।

    आम नागरिकों के लिए संदेश

    पुलिस प्रशासन ने आम नागरिकों से अपील की है कि वे सहयोग करें और किसी भी असामाजिक गतिविधि या अफवाह को फैलाने से बचें। अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि किसी भी प्रकार की अव्यवस्था को तुरंत रोकने के लिए कड़ा कदम उठाया जाएगा। प्रशासन ने यह भी कहा कि बसंत पंचमी और जुमा की नमाज के दौरान पूरे जिले में सख्त निगरानी रहेगी, ताकि हर धार्मिक आयोजन सुरक्षित और शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हो सके।

    प्रशासन का मुख्य संदेश

    इस बार प्रशासन का मुख्य संदेश है कि धार जिले में किसी भी तरह की धार्मिक तनाव या अव्यवस्था नहीं बर्दाश्त की जाएगी। बसंत पंचमी और जुमा दोनों ही कार्यक्रमों में आम नागरिकों की सुरक्षा प्राथमिकता होगी। साथ ही, पुलिस ने यह भी स्पष्ट किया कि सभी संवेदनशील स्थानों पर तैनाती बढ़ाई गई है, और किसी भी असामाजिक गतिविधि पर तुरंत कार्रवाई की जाएगी।

    धार जिले में 23 जनवरी को होने वाले इन दोनों कार्यक्रमों पर प्रशासन की यह तैयारी सुरक्षा और शांति बनाए रखने की जिम्मेदारी को दर्शाती है। जिले में कुल मिलाकर 8 हजार से अधिक पुलिसकर्मी और रिजर्व फोर्स के साथ-साथ वरिष्ठ अधिकारी तैनात रहेंगे, ताकि हर धार्मिक आयोजन शांतिपूर्ण और व्यवस्थित तरीके से संपन्न हो सके।

  • सांसद मनोज तिवारी के घर लाखों की चोरी: पूर्व कर्मचारी ने डुप्लीकेट चाबियों से लगाया सेंध,

    सांसद मनोज तिवारी के घर लाखों की चोरी: पूर्व कर्मचारी ने डुप्लीकेट चाबियों से लगाया सेंध,


    नई दिल्ली । भोजपुरी सुपरस्टार और उत्तर-पूर्वी दिल्ली से बीजेपी सांसद मनोज तिवारी के मुंबई स्थित आवास पर लाखों रुपये की चोरी का मामला सामने आया है। अंधेरी पश्चिम के पॉश इलाके शास्त्रीनगर स्थित ‘सुंदरबन अपार्टमेंट’ में हुई इस वारदात को किसी बाहरी अपराधी ने नहीं, बल्कि सांसद के ही एक पूर्व भरोसेमंद कर्मचारी ने अंजाम दिया। हालांकि, तकनीक और पुलिस की मुस्तैदी के चलते आरोपी अब सलाखों के पीछे है। साढ़े पांच लाख की चपत और शातिर साजिश अंबोली पुलिस के अनुसार, इस चोरी के पीछे सुरेंद्रकुमार दीनानाथ शर्मा नाम का शख्स शामिल है, जिसे करीब दो साल पहले नौकरी से निकाल दिया गया था।
    आरोपी ने बेहद शातिर तरीके से घर, बेडरूम और अलमारी की ‘बनावटी चाबियां’ तैयार कर ली थीं। इसकी मदद से वह घर में दाखिल होता और किसी को भनक लगे बिना नकदी पर हाथ साफ कर देता था। सांसद के मैनेजर प्रमोद पांडेय की शिकायत के अनुसार, घर से कुल 5.40 लाख रुपये की चोरी हुई है। दो किस्तों में हुई चोरी, जून से दिसंबर तक का खेल चोरी का यह सिलसिला काफी समय से चल रहा था। जून 2025 में अलमारी से पहली बार 4.40 लाख रुपये गायब हुए थे। उस वक्त घर में कोई सीसीटीवी कैमरा नहीं था, जिसके कारण चोर का पता नहीं चल सका। घर में बार-बार हो रही नकदी की कमी को देखते हुए मैनेजर ने दिसंबर 2025 में घर के अंदर सीसीटीवी कैमरे लगवाए।

    मोबाइल अलर्ट ने पकड़वाया चोर चोर की किस्मत ने 15 जनवरी 2026 की रात को धोखा दे दिया। रात करीब 9 बजे जब आरोपी सुरेंद्रकुमार घर में घुसकर अलमारी से एक लाख रुपये निकाल रहा था, तभी मैनेजर प्रमोद पांडेय के मोबाइल पर सीसीटीवी का ‘मोशन अलर्ट’ मैसेज आया। सीसीटीवी फुटेज में पूर्व कर्मचारी को चोरी करते हुए साफ देखा गया। पुलिस की त्वरित कार्रवाई और गिरफ्तारी फुटेज मिलते ही अंबोली पुलिस हरकत में आई और आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में आरोपी ने अपना जुर्म कबूल कर लिया है। पुलिस ने चोरी में इस्तेमाल की गई बनावटी चाबियां और सीसीटीवी फुटेज को साक्ष्य के तौर पर जब्त कर लिया है। फिलहाल आरोपी पुलिस हिरासत में है और उससे पूछताछ की जा रही है कि क्या इस वारदात में कोई और भी उसके साथ शामिल था।

  • प्रेम संबंध छिपाने के लिए मां ने 5 साल के बेटे को दो मंजिल से फेंका, रिकॉर्डिंग-सीसीटीवी से हुआ खुलासा; मां को उम्रकैद, प्रेमी बरी

    प्रेम संबंध छिपाने के लिए मां ने 5 साल के बेटे को दो मंजिल से फेंका, रिकॉर्डिंग-सीसीटीवी से हुआ खुलासा; मां को उम्रकैद, प्रेमी बरी



    ग्वालियर । ग्वालियर के थाटीपुर थाना क्षेत्र में 28 अप्रैल 2023 को हुई एक दर्दनाक घटना में 5 साल के बच्चे जतिन की मौत का मामला अब न्यायालय तक पहुंचा। आरोप है कि बच्चे की मां ज्योति राठौर ने अपने प्रेमी उदय इंदौलिया के साथ छत पर होने के दौरान अपने बेटे को यह देख लिया कि मां अपने प्रेमी की गोद में है। यह बात उजागर होने के डर से उसने अपने बेटे को दो मंजिल की छत से नीचे फेंक दिया, जिससे बच्चे को गंभीर चोटें आईं और उसकी मौत हो गई।
    घटना के तुरंत बाद परिवार और पुलिस ने इसे एक सामान्य दुर्घटना माना, लेकिन 15 दिन बाद मामले का असली सच सामने आया। बच्चे की मां को पछतावा हुआ और उसने अपने पति ध्यान सिंह को सच बता दिया। इसके बाद पति ने बातचीत की ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग कर ली और घर में लगे CCTV फुटेज भी प्राप्त किए। इस सबूत के आधार पर उसने थाटीपुर थाना में शिकायत दर्ज कराई और पुलिस ने मामले की जांच शुरू की।

    पुलिस ने जांच के बाद मां ज्योति और उसके प्रेमी उदय को आरोपी बनाया और दोनों के खिलाफ चालान न्यायालय में पेश किया। सुनवाई के दौरान लोक अभियोजक ने पुलिस की ओर से पैरवी की।

    अपर सत्र न्यायालय ने परिस्थितिजन्य साक्ष्यों और रिकॉर्डिंग-सीसीटीवी फुटेज के आधार पर यह माना कि यह हत्या का मामला है, न कि दुर्घटना। अदालत ने ज्योति राठौर को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई।

    वहीं, प्रेमी उदय इंदौलिया को पर्याप्त सबूत न होने के कारण अदालत ने बरी कर दिया। घटना की जांच में यह भी सामने आया कि बच्चा सड़क पर तड़पता रहा, लेकिन मां उसे देखने नहीं आई। बच्चे को बाद में अस्पताल ले जाया गया, जहां 29 अप्रैल को उसकी मौत हो गई।

    इस मामले में पुलिस ने अब तक जांच और सबूतों के आधार पर मां की हत्यारानी हरकत को साबित कर दिया, जबकि प्रेमी की भूमिका साबित नहीं हो सकी।

    अब न्यायालय के आदेश के बाद मां को उम्रकैद की सजा का सामना करना होगा और यह केस परिवार और समाज के लिए एक गंभीर चेतावनी बन गया है कि प्रेम संबंध छिपाने के लिए किसी भी हद तक जाना कितना खतरनाक हो सकता है।

  • सावधान! आपके बच्चों के बैग में तो नहीं 'नकली' किताबें? दिल्ली पुलिस ने पकड़ा 2 करोड़ का फर्जी NCERT सिंडिकेट

    सावधान! आपके बच्चों के बैग में तो नहीं 'नकली' किताबें? दिल्ली पुलिस ने पकड़ा 2 करोड़ का फर्जी NCERT सिंडिकेट


    नई दिल्ली । दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने शिक्षा के नाम पर ठगी करने वाले एक बहुत बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने देशभर में फर्जी NCERT किताबें छापने और उनकी सप्लाई करने वाले एक संगठित गिरोह को दबोचा है। इस कार्रवाई के दौरान भारी मात्रा में नकली किताबें और प्रिंटिंग उपकरण बरामद किए गए हैं, जिनकी कुल कीमत लगभग 2 करोड़ रुपये आंकी गई है। पुलिस की इस दबिश से उन माफियाओं में हड़कंप मच गया है जो छात्रों और अभिभावकों की जेब पर डाका डाल रहे थे।

    45 हजार के करीब किताबें और प्रिंटिंग प्रेस जब्त क्राइम ब्रांच ने इस ऑपरेशन के दौरान कुल 44,862 नकली किताबें बरामद की हैं। केवल किताबें ही नहीं, पुलिस ने गाजियाबाद के लोनी इलाके में चल रही एक पूरी अवैध फैक्ट्री को भी सील कर दिया है। यहाँ से दो अत्याधुनिक ऑफसेट प्रिंटिंग प्रेस मशीनें, कागज की रील, प्रिंटिंग इंक और एल्युमिनियम की प्लेटें जब्त की गई हैं। पुलिस के अनुसार, यह गिरोह हूबहू असली जैसी दिखने वाली NCERT किताबें छाप रहा था, जिससे आम आदमी के लिए असली और नकली का फर्क करना नामुमकिन था।

    दरियागंज से गाजियाबाद तक फैला था जाल इस कार्रवाई की शुरुआत 10 नवंबर 2025 को हुई थी, जब पुलिस को दरियागंज के एक गोदाम में नकली किताबों के स्टॉक की जानकारी मिली। वहां की गई छापेमारी में 12,755 किताबें बरामद हुईं। मामले की गहराई से जांच करते हुए पुलिस ने 16 जनवरी 2026 को गाजियाबाद के लोनी स्थित जावली गाँव में एक गुप्त प्रिंटिंग यूनिट पर धावा बोला। यहाँ से 32,107 अतिरिक्त किताबें और प्रिंटिंग का पूरा तामझाम बरामद हुआ। जांच में खुलासा हुआ कि यह फैक्ट्री दिल्ली-एनसीआर समेत पूरे देश में सप्लाई का मुख्य केंद्र थी।

    गिरोह के तीन सदस्य गिरफ्तार, एक पुराना खिलाड़ी पुलिस ने इस मामले में अब तक तीन लोगों को गिरफ्तार किया है विनोद जैन 65 वर्ष यह इस गिरोह का सबसे शातिर सदस्य है और पहले भी इसी तरह के जालसाजी के मामलों में शामिल रह चुका है। सुमित 35 वर्ष यह जावली स्थित अवैध फैक्ट्री का संचालन देख रहा था। कनिष्क 32 वर्ष यह भी गिरोह के साथ मिलकर सप्लाई चेन को मैनेज कर रहा था। जांच अभी जारी है दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच अब इस गिरोह की पूरी सप्लाई चेन और उन थोक विक्रेताओं की पहचान करने में जुटी है, जो इन नकली किताबों को दुकानों तक पहुँचाते थे। अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि शिक्षा क्षेत्र में इस तरह की धोखाधड़ी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। अभिभावकों को भी सलाह दी गई है कि वे अधिकृत विक्रेताओं से ही किताबें खरीदें और किताबों पर लगे होलोग्राम और प्रिंट की गुणवत्ता की सावधानीपूर्वक जांच करें।

  • इवेंट मैनेजमेंट की आड़ में हाई-प्रोफाइल ड्रग पार्टियां: 15000 में एंट्री, युवतियों को पैडलर बनाकर 5 राज्यों में एमडी ड्रग सप्लाई

    इवेंट मैनेजमेंट की आड़ में हाई-प्रोफाइल ड्रग पार्टियां: 15000 में एंट्री, युवतियों को पैडलर बनाकर 5 राज्यों में एमडी ड्रग सप्लाई


    नई दिल्ली। इंदौर पुलिस ने एक बड़े अंतरराज्यीय ड्रग तस्करी गिरोह का पर्दाफाश किया है, जिसमें भोपाल का अबान शकील मुख्य आरोपी बताया जा रहा है। पुलिस ने अबान को इंदौर में ड्रग डिलीवरी के इंतजार के दौरान गिरफ्तार किया। जांच में सामने आया कि अबान गोवा, इंदौर, मुंबई, दिल्ली और भोपाल जैसे कई बड़े शहरों में एमडी ड्रग की सप्लाई में सक्रिय था। इस गिरोह में दो युवतियां भी पैडलर के रूप में शामिल थीं, जिन्हें अबान और उसके साथी वैभव उर्फ बाबा शर्मा मोटे कमीशन और ड्रग की फ्री खुराक का लालच देकर तस्करी के काम में जोड़ते थे।
    पुलिस ने अबान की निशानदेही पर दो युवतियों और बाबा शर्मा को भी गिरफ्तार किया है।

    इंदौर पुलिस की जांच में यह भी स्पष्ट हुआ है कि अबान और बाबा शर्मा अंतरराज्यीय एमडी तस्कर गिरोह के सदस्य हैं और यह गिरोह चार से पांच राज्यों में ड्रग तस्करी कर रहा था। जांच के दौरान यह तथ्य भी उजागर हुआ कि इवेंट मैनेजमेंट की आड़ में आरोपी बाबा शर्मा, अलीशा मसीह और नेहा पार्टीज का आयोजन करते थे। इन पार्टियों में एंट्री फीस 10 से 15 हजार रुपए तक ली जाती थी और रईसजादों को ड्रग खपाने का काम किया जाता था।

    पुलिस ने बताया कि अबान अपनी पार्टीज के जरिए युवाओं को आकर्षित करता था और बाद में उन्हें एमडी की खुराक देकर पार्टी कल्चर के नाम पर नशे का आदी बनाता था। इसके बाद वही युवतियां और अन्य सदस्य ड्रग सप्लाई के लिए आगे काम करते थे। गिरोह के सदस्य मुख्य रूप से गोवा, दिल्ली, इंदौर, भोपाल, मुंबई सहित अन्य शहरों में पार्टीज आयोजित करते रहे हैं।

    अब तक इस मामले में कुल चार गिरफ्तारियां हुई हैं।

    इंदौर पुलिस ने अबान के साथ कनाड़िया, मुंबई और देवास से गिरोह के तीन और सदस्यों को गिरफ्तार किया है। आरोपी वैभव उर्फ बाबा ने पूछताछ में स्वीकार किया कि वह अबान और युवतियों के साथ मिलकर एमडी ड्रग्स की तस्करी करता था।

    पुलिस के मुताबिक, गिरोह गोवा सहित कई राज्यों के पब, बार और क्लबों में एमडी ड्रग की सप्लाई करता था और इसकी कीमत लगभग 10 हजार रुपए प्रति ग्राम थी। पुलिस अभी आरोपी से एमडी ड्रग्स के सोर्स के बारे में पूछताछ कर रही है और उसके बाद गिरोह के अन्य सदस्यों की गिरफ्तारी भी संभव है।

    इस बीच, अबान शकील का नाम ड्रग तस्करी में फंसने के बाद भोपाल डिवीजन क्रिकेट एसोसिएशन (बीडीसीए) ने उसे अपनी प्रारंभिक सदस्यता से बर्खास्त कर दिया है। बीडीसीए ने एक बयान जारी कर इसकी पुष्टि की है। अबान बीडीसीए का आजीवन सदस्य भी था। पुलिस ने बताया कि अबान कोहेफिजा इलाके में स्थित सैफिया कॉलेज मैदान के पास बने करोड़ों रुपए कीमत के बंगले में रहता था और उसके घर के पोर्च पर लग्जरी कारें खड़ी रहती थीं।
    इस मामले में इंदौर के कनाड़िया थाने में अपराध क्रमांक 37/2025 के तहत धारा 8/22 एनडीपीएस एक्ट के तहत केस दर्ज किया गया है। अब तक आरोपियों से कुल 15.95 ग्राम एमडी ड्रग्स, बिना नंबर की इको स्पोर्ट्स कार, थार और एक एसयूवी जब्त की गई है। पुलिस का कहना है कि अबान थार जीप से भोपाल-इंदौर के पब और लाउंज में ड्रग सप्लाई करता था और उसके लिए लड़कियां भी पैडलर का काम करती थीं।

    इंदौर क्राइम ब्रांच और कनाड़िया पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में अबान की गिरफ्तारी के बाद अब पुलिस ने मामले के अन्य पहलुओं की भी जांच तेज कर दी है, जिससे जल्द ही गिरोह के अन्य सदस्यों के खिलाफ भी कार्रवाई की संभावना है।

  • BMC चुनाव 2026: मुंबई में 'बिहारी बाबू' का जलवा, उद्धव-राज ठाकरे का मराठी कार्ड फेल, बीजेपी गठबंधन की ऐतिहासिक वापसी

    BMC चुनाव 2026: मुंबई में 'बिहारी बाबू' का जलवा, उद्धव-राज ठाकरे का मराठी कार्ड फेल, बीजेपी गठबंधन की ऐतिहासिक वापसी

    मुंबई । देश की सबसे अमीर नगर पालिका, बृहन्मुंबई नगर निगम BMC के 2026 के चुनाव परिणामों ने महाराष्ट्र की राजनीति में बड़ा उलटफेर कर दिया है। करीब तीन दशक बाद बीएमसी की सत्ता से शिवसेना का एकछत्र राज खत्म हो गया है और भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाले ‘महायुति’ गठबंधन ने पूर्ण बहुमत के साथ जीत दर्ज की है। लेकिन इस चुनाव की सबसे बड़ी सुर्खी ‘मराठी मानुष’ बनाम ‘उत्तर भारतीय’ के एजेंडे का ध्वस्त होना रही। मुंबई के मतदाताओं ने क्षेत्रवाद को दरकिनार कर बिहार मूल के छह उम्मीदवारों को भारी मतों से जिताकर निगम भेजा है।

    मिथिलांचल के वीरों ने फहराया परचम इस चुनाव में विशेष रूप से बिहार के मधुबनी जिले और मिथिलांचल क्षेत्र का दबदबा देखने को मिला। मधुबनी के झंझारपुर तालुका से ताल्लुक रखने वाले छह नेताओं ने मुंबई की राजनीति में अपनी धाक जमाई है शिवकुमार झा BJP .कांदिवली ईस्ट वार्ड 23 से लगातार तीसरी बार जीत दर्ज कर हैट्रिक बनाई। उन्होंने अपने प्रतिद्वंद्वी को करीब 5,400 वोटों के बड़े अंतर से हराया। विनोद मिश्रा BJP मलाड वार्ड 43 से एक बड़ी जीत हासिल की। राजेश झा शिवसेना – शिंदे गोरेगांव वार्ड 163 से विजयी रहे। संतोष कुमार मंडल व उमेश राय BJP कांदिवली के वार्ड 160 और 161 से जीत दर्ज की। धीरेंद्र मिश्रा: कुर्ला-चांदीवली वार्ड 174 से कड़े मुकाबले में जीत हासिल की।

    ठकरे परिवार का ‘मराठी मानुष’ एजेंडा हुआ विफल लंबे समय से मुंबई की राजनीति उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे के इर्द-गिर्द ‘मराठी मानुष’ के मुद्दे पर सिमटी रही है। हालांकि, 2026 के इन परिणामों ने स्पष्ट कर दिया कि खुद मराठी मतदाताओं ने भी इस संकीर्ण एजेंडे के बजाय विकास और समावेशी राजनीति को चुना है। कांदिवली, मलाड, गोरेगांव और कुर्ला जैसे क्षेत्रों में उत्तर भारतीय वोटरों ने निर्णायक भूमिका निभाई, जिससे उद्धव ठाकरे की शिवसेना को तगड़ा झटका लगा है।

    सत्ता का नया समीकरण 227 सीटों वाली बीएमसी में बहुमत के लिए 114 सीटों की आवश्यकता थी, जिसे बीजेपी-शिंदे गठबंधन ने आसानी से पार कर लिया। बीजेपी 89 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। 19 सालों से बीएमसी पर काबिज शिवसेना को इस बार विपक्ष में बैठना होगा। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि प्रवासियों के प्रति नफरत की राजनीति अब मुंबई में काम नहीं कर रही है, और उत्तर भारतीय उम्मीदवार अब केवल ‘वोट बैंक’ नहीं बल्कि ‘निर्णायक नेतृत्व’ के रूप में उभर रहे हैं।